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March 11, 2026
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धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।

दुर्ग / शौर्यपथ / नीलामी में अधिक ऑफर मूल्य होने के बाद भी दुर्ग नगर पालिका निगम द्वारा परिवादियों को दुकान का आवंटन नहीं किया…

कोरबा / शौर्यपथ / कोरबा जिले में अन्य प्रांतों से आये सभी प्रवासी श्रमिकों को कोरोना जांच की रिपोर्ट आ जाने पर ही क्वारेंटाइन सेंटरों से रिलीज किया जायेगा। जांच रिपोर्ट पाजिटिव आने पर संक्रमित श्रमिक को ईलाज के लिए विशेष कोविड अस्पताल भेजा जायेगा। 14 दिन की क्वारेंटाइन अवधि पूरी कर चुके श्रमिकों की जांच रिपोर्ट निगेटिव मिलने पर ही उन्हें घर जाने दिया जायेगा। ऐसे सभी श्रमिकों को घर में भी अगले 14 दिनों तक होम क्वारेंटाइन में रहने का शपथ पत्र भरना होगा। कलेक्टर श्रीमती किरण कौशल ने इस संबंध में जरूरी निर्देश भी जारी किये हैं। श्रीमती कौशल ने कोविड प्रोटोकाल के अनुसार 14 दिन की क्वारेंटाइन अवधि पूरी करने के बाद क्वारेंटाइन सेंटर में रखे गये लोगों को रिलीज करने के लिए प्राधिकृत अधिकारियों की भी नियुक्ति की है। नगर निगम कोरबा क्षेत्र में स्थित क्वारेंटाइन सेंटरों से लोगों को रिलीज करने के लिए नगर निगम आयुक्त श्री एस. जयवर्धन प्राधिकृत अधिकारी होंगे। ग्रामीण क्षेत्रों में क्वारेंटाइन सेंटरों से 14 दिन की अवधि पूरी करने वाले जांच रिपोर्ट प्राप्त लोगों को रिलीज करने के लिए संबंधित अनुभाग के एसडीएम प्राधिकृत अधिकारी बनाये गये हैं। पाली तहसील के क्वारेंटाइन सेंटरों से लोगों को घर जाने के लिए छोडऩे का निर्णय तहसीलदार पाली करेंगे।
कलेक्टर श्रीमती किरण कौशल ने आज यहां बताया कि अन्य राज्यों से कोरबा लौटे लोगों को कोविड प्रोटोकाल के आधार पर 14 दिन क्वारेंटाइन में रखा गया है। इस अवधि में ऐसे सभी लोगों और श्रमिकों का आरटीपीसीआर पद्धति से कोरोना टेस्ट कराया जाता है। 14 दिवस क्वारेंटाइन अवधि पश्चात भी यदि किसी श्रमिक का आरटीपीसीआर का रिपोर्ट जांच उपरांत प्राप्त नहीं हुआ है तो रिपोर्ट प्राप्त होने तक ऐसे श्रमिकों को किसी भी स्थिति में घर नहीं जाने दिया जायेगा। क्वारेंटाइन सेंटर में रह रहे लोगों को निगेटिव रिपोर्ट प्राप्त होने पर ही अगले 14 दिवस के लिए होम क्वारेंटाइन का शपथ पत्र भरवाकर ही छोड़ा जायेगा। क्वारेंटाइन सेंटर में रह रहे जिन लोगों का क्वारेंटाइन अवधि के भीतर आरटीपीसीआर टेस्ट नहीं हो पाया है उनकी 14 दिन बाद रैपिड टेस्ट किट से जांच की जायेगी और रिपोर्ट निगेटिव प्राप्त होने पर ही अगले 14 दिवस के लिए होम क्वारेंटाइन का शपथ पत्र भरवाकर छोड़ा जायेगा। 14 दिन के बाद क्वारेंटाइन अवधि पूरा करने के बाद छोड़े गये सभी श्रमिकों की निगरानी संबंधित क्षेत्र के सचिव, रोजगार सहायक, मितानीन-एक्टिव सर्विलेंस टीम के माध्यम से की जायेगी।

    रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से आज उनके निवास कार्यालय में अनिल कुमार चंद्रा के नेतृत्व में आये जैजैपुर विधानसभा के किसानों के एक प्रतिनिधिमंडल ने सौजन्य मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने राजीव गांधी किसान न्याय योजना शुरू करने पर मुख्यमंत्री का आभार जताया और कोरोना महामारी का संक्रमण रोकने और जरूरतमंदों की सहायता के लिए 95 हजार रूपए की राशि का चेक सौंपा। यह राशि मुख्यमंत्री सहायता कोष में जमा की जाएगी। मुख्यमंत्री ने किसानों द्वारा दिए गए इस योगदान की सराहना की। इस अवसर पर बलराम चंद्रा,  ज्ञान चंद्रा,  राजेश लहरे तथा  जगत कुर्रे उपस्थित थे

दुर्ग / शौर्यपथ / अमृत मिशन के तहत शहर में बिछाये जा रहे पाइप लाइन पर विपक्षी पार्टी के द्वारा की जा रही राजनीती पर पलटवार करते हुए सत्ता पक्ष के एमआईसी मेंबर ने सयुक्त रूप से ब्यान जारी करते हुए कहा कि कोरोना काल के समय से विधायक अरुण वोरा के मार्गदर्शन और महापौर धीरज बाकलीवाल के दिशा निर्देश पर अमृत मिशन योजना के तहत् पेयजल व्यवस्था का निरंतर कार्य चल रहा है। जहॉ पानी की गंभीर समस्या बनी हुई थी वहॉ के समस्या का भी निदान किया जा रहा है । इस विषम परिस्थितियों में भी निरंतर कार्य के बाद भी योजना और कार्य की आलोचना बिलकुल नहीं होना चाहिए।
कोरोना महामारी के कारण सभी तरफ कार्य बंद हो गये थे और कार्य के लिए श्रमिक ही नहीं मिल रहा था एैसे समय में भी नगर निगम दुर्ग द्वारा अमृत मिशन के कार्य को प्रभावित हुये बिना पूरी निगरानी के साथ व्यवस्थित तरीके से किया जा रहा है। निगम महापौर परिषद के सदस्यों ने संयुक्त रुप से कहा कि दुर्ग नगर निगम के नेता प्रतिपक्ष एवं भाजपा पार्षद द्वारा अमृत मिशन के अंतर्गत चल रहे पाइप लाईन बिछाने व अन्य कार्यो के संबंध में भेदभाव पूर्व कार्य किय जाने का भ्रामक आरोप लगाया जाना पूरी तरह से निराधार व राजनीति से प्रेरित है।
इस संबंध में एमआईसी मेम्बर ने संयुक्त रुप से कहा कि नेता प्रतिपक्ष एवं भाजपा पार्षदों का बयाना हताशा का परिचायक है उनके भ्रामक बयान की हम सभी निंदा करते हैं। उन्होनें आगे कहा कि शहर के अनेक वार्डो में अमृत मिशन के पाइप लाईन में पानी चालू हो गया है वहॉ नल कनेक्शन देने का काम और रोड निर्माण का कार्य लगातार किया जा रहा है। इसमें किसी भी प्रकार से कोई भेदभव नहीं बरती जा रही है। पूर्व जलकार्य प्रभारी श्री देवनारायण चंद्रारक स्वयं अपने वार्ड को पूर्ण कराने ध्यान पूर्वक कार्य अमृत मिशन से कराने आये थे शेष वार्डो का कोई सूची नहीं था। वर्तमान में इस परिषद में एैसा बिलकुल भी नहीं किया जा रहा है।
जबकि शहर विधायक वोरा और महापौर धीरज बाकलीवाल द्वारा बहुजन हिताये, बहुजन सुखाय के साथ पूरे शहर में पूरी योजना के अनुसार व्यवस्थित ढंग से ही कार्य करवाया जा रहा हैं। हमारी परिषद में कांग्रेस, भाजपा वाली कोई बात नहीं है। दुर्ग विधायक तो पूरे 60 वार्डो के ही विधायक हैं उन्हें पूरा शहर देखना और समस्याओं का निराकरण करना होता है। वही महापौर और सभी एमआआईसी प्रभारी लगातार दौरा कर पूरे कार्यो की निगरानी भी कर रहे हैं। उन्होनें जानकारी देते हुये कहा वार्ड क्रं0 1,2,3,4,56 और वार्ड क्रं0 39,17,18 इन सभी क्षेत्रों मेें अमृत मिशन का कार्य पूर्ण हो गया है व पानी की समस्या नहीं है लगभग यह सभी वार्ड भाजपा पार्षदों का ही है।
उन्होनें आगे कहा नगर निगम दुर्ग में योजना के कार्य को जल्द से जल्द पूर्ण कराये जाने का प्रयास जारी है। अनेक वार्डो में अमृत मिशन का कार्य लगभग 75 से 80 प्रतिशत पूर्ण कर लिया गया है। कुछ स्थानों पर पानी टंकियों का निर्माण पूर्णत: की ओर है कुछ जगहों पर कार्य में तीव्रता लाई गयी है। इस योजना के कार्यो में किसी भी प्रकार का व्यवधान होता है तो विधायक द्वारा स्वयं तत्काल शासन स्तर पर चर्चा कर त्वरित निदान करवाते हैं। इस कारण विगत दिनों कार्य में विलंब हो रहा था तो शासन स्तर से निर्देश लिये गये। मार्केट एरिया के तरफ भी निरंतर कार्य जारी है जिसे शीघ्र पूर्ण कर लिया जावेगा। उन्होनें अंत में कहा अमृत मिशन का कार्य केन्द्र सरकार, राज्य सरकार और नगरीय निकाय के संयुक्त सहयोग से राशि उपलब्ध कराकर किया जा रहा है इस योजना की राशि केवल अकेले केन्द्र सरकार की राशि नहीं है।

रायपुर /शौर्यपथ / मजदूरो को राज्य में आने की अनुमति में गलत समय के फैसले पर प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता मो. असलम ने बड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि कोरोना वायरस से व्याप्त महामारी की स्थिति देश में अब कम्युनिटी ट्रांसमिशन के खतरे की ओर बढ़ रही है, जो बेहद खतरनाक एवं डरावनी है। हालांकि छत्तीसगढ़ में स्थिति राज्य सरकार की सतर्कता के कारण बेहद व्यवस्थित, नियंत्रित और संतुलित है। जिस तरह से महामारी के कारण देश में सामुदायिक संक्रमण की स्थिति निर्मित हो रही है उससे यही लगता है कि करोना पर काबू पाना फिलहाल मोदी सरकार के लिये संभव नहीं है। केंद्र सरकार नागरिकों पर बोझ डालकर और महामारी को नजरअंदाज करते हुए जिम्मेदारियों से मुक्त होना चाहती है। प्रारंभ में कोरोना वायरस को लेकर केंद्र सरकार ने सारी बागडोर और जवाबदेही खुद ही संभाली हुई थी। अब बीमारी के विस्तार से हड़बड़ाहट में आलम यह है कि राज्यों को जिम्मेदारी हस्तांतरित कर कोरोनावायरस के फैलाव का ठीकरा फोडऩे की तैयारी की जा रही है।
मोहम्मद असलम ने कहा है कि छत्तीसगढ़ सरकार ने केंद्र को प्रस्ताव भेजकर 30 हजार करोड़ मांगे थे, जिसमें 10,000 करोड़ तत्काल प्रदान करने की मांग की गई थी, वहीं राज्यों की सीमा नहीं खोलने का आग्रह किया गया था और विमान सेवाएं निलंबित रखने का सुझाव दिया गया था। किंतु केन्द्र सरकार द्वारा राज्य की एक भी बात नहीं सुनी गई। अब केंद्र सरकार द्वारा जवाबदारी से बचने का मौका ढूंढा जा रहा है, जो चिंताजनक है। शुरूआत में लाकडाउन क्रूर था और अब लापरवाह बन चुका है। अचानक सख्ती में कमी, नीतियों के समन्वय में कमी और अब जल्दबाजी में लाकडाउन खोलकर दी जा रही, खुली छूट से मिल रही विफलता की कीमत निर्दोष गरीबों, मजदूरों, मजलूमों, सहित बेबस नागरिकों को चुकानी पड़ रही है।
जब संक्रमण की रफ्तार कम थी तब मजदूरों को घर जाने की अनुमति एवं सुविधा नहीं दिया जाना सबसे बड़ी चूक साबित हुई है। अब प्रवासी मजदूर केंद्र सरकार पर अविश्वास करते हुए जमी हुई घर गृहस्थी को छोड़कर, सब कुछ उजाड़ कर लुटाकर, जीवन दांव पर लगाकर अपने राज्यों की ओर जा रहे हैं। जीवन भर की कमाई से बेदखल हो गए हैं, तब भी केंद्र सरकार की आंख बंद है और उनको सीधे सहायता पहुंचाने के लिए राशि प्रदान नहीं करना चाहती है और सब कुछ विपक्ष पर आरोप लगाकर पीछा छुड़ाने से बाज़ नहीं आ रही है।
सुझावों को तहरीर नहीं दिए जाने के बारे में प्रवक्ता असलम ने कहा है की केंद्र सरकार द्वारा विपक्ष के सकारात्मक सुझावों और सहयोग को तरजीह नहीं दिए जाना और महामारी की गंभीरता को लेकर संक्रमण विशेषज्ञों से मशविरा नहीं लिया जाना सरकार की अदूरदर्शिता है। वहीं मेडिकल क्षेत्र से जुड़े कई प्रतिष्ठित संस्थाओं द्वारा भी महामारी पर नियंत्रण के लिए अपनाए गए तरीकों की आलोचना की गई है, जो सरकार की विफलता को स्पष्ट दर्शाती है।
विश्व में भारत ऐसा देश है जहां कोरोना वायरस से संक्रमण नियंत्रित भी नहीं हुआ है और निरंतर बढ़ोतरी की ओर है फिर भी मोदी सरकार को अनलॉक करने की जल्दबाजी है। अभी भारत की स्थिति विश्व में छठवें स्थान पर हैं। यही हालत रही तो कोरोना संक्रमण अगर और बढ़ता है तो बेहद खौफनाक होगा। जिसकी आशंका विशेषज्ञों ने भी जताई है।

0 नाराज अभ्यर्थियों ने कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन
0 भर्ती प्रक्रिया जल्द शुरू करने की मांग

   राजनांदगांव / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ पुलिस भर्ती वर्ष दो हजार सत्रह अ_ारह की भर्ती प्रक्रिया अब तक अटकी हुई है। भाजपा सरकार में छत्तीसगढ़ आरक्षक भर्ती तकरीबन 22 पदों पर निकाली गई थी जिस पर 1.5 अभ्यार्थियों ने भाग लिया था, फिजिकल परीक्षा होने के बाद भी सरकार ने अब तक के इस भर्ती को अटका रखा है, जबकि हाईकोर्ट में 90 दिनों के भीतर भर्ती प्रक्रिया को शुरू करने के निर्देश दिए थे।
छत्तीसगढ़ में पुलिस आरक्षक भर्ती सन 2017 और 18 के बीच तकरीबन 22 पदों पर वैकेंसी निकाली गई थी, लेकिन आज तक इन पदों पर भर्ती नहीं हो सकी है, इससे बेरोजगार युवक आप सलाह सा महसूस कर रहे हैं। जिले में तकरीबन 30,000 ऐसे अभ्यर्थी हैं जो इस भर्ती प्रक्रिया में भाग ले रहे हैं, लेकिन अब तक राज्य शासन ने इस आरक्षक भर्ती प्रक्रिया को शुरू करने की तैयारी नहीं की है, जबकि हाईकोर्ट ने इसके लिए स्पष्ट तौर पर 90 दिनों के भीतर भर्ती करने के निर्देश दिए थे। इस मामले को लेकर के बेरोजगार युवक-युवतियों ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा है।
बेरोजगार युवक-युवतियों का कहना है कि छत्तीसगढ़ सरकार जल्द से जल्द आरक्षक भर्ती प्रक्रिया शुरू करें। लंबे समय से इंतजार करके बेरोजगार थक चुके हैं और उनकी माली हालत भी खराब हो चुकी है। कोरोना काल में भी कई लोग पूरी तरीके से बेरोजगार हो गए हैं। प्राइवेट नौकरियों के चलते उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है, ऐसी स्थिति में अब आरक्षक भर्ती में भी वह पात्र होने के बाद नौकरी का इंतजार कर रहे हैं। बेरोजगार युवक-युवतियों का कहना है कि राज्य शासन जल्द से जल्द भर्ती प्रक्रिया शुरू करें। ज्ञापन सौंपने के दौरान आशा ज्योति साहू, गैंद, नूतन सेन, आराधना, टीकम, दयाराम, युवराज, ममता, उत्तरा, आरती रजक सहित अन्य मौजूद रहे।

छत्तीसगढ़ सरकार के गृह मंत्रालय को इस मामले की पूरी जानकारी भेजी जा रही है, जल्दी सरकार इस पर बेहतर फैसला लेगी। बेरोजगार युवक-युवतियां निश्चित रहे। छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार बेरोजगारों के साथ है और उन्हें रोजगार देने में पूरे देश में अव्वल है।

महेन्द्र साहू, पूर्व सभापति-जनपद पंचायत डोंगरगांव

राजनांदगांव / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ सरकार पूरे प्रदेश में एक जुलाई से स्कूलों को संचालित करने की अनुमति दे सकती है जिसको लेकर राज्य स्तर…
दुर्ग / शौर्यपथ / रजिस्ट्री ऑफिस का प्रस्तावित नया भवन पूरी तरह से हाईटेक होगा। इसके लिए भूमि चिन्हांकन की कार्रवाई की जा रही है।…
भिलाई स्टील प्लांट के आस-पास स्टील फैब्रिकेशन क्लस्टर विकास के रोडमैप के लिए की चर्चा भिलाई / शौर्यपथ / इस्पात मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्पात…

दुर्ग / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ शासन की नरूवा, गरूवा, घुरूवा, बाड़ी योजना से महिलाओं का ऐसा संबल मिला है कि लाकडाउन के कठिन वक्त में भी इनकी आजीविका चलती रही और फली-फूली भी। दुर्ग में अनेक बाडिय़ों में लाकडाउन में महिला स्वसहायता समूहों ने बड़े पैमाने पर सब्जी उगाई और इसे बाजार तक ले गई। ऐसी ही कहानी है धमधा विकासखंड के ग्राम चेटुवा की। यहां महिलाओं ने बाड़ी में जिमीकंद, बरबट्टी, भिंडी, करेला, मेथी और अनेक प्रकार की भाजी लगाई। यह साधना कठिन वक्त में काम आई, इस दौरान गांव में बाहर से सब्जी मंगाने की जरूरत नहीं पड़ी। जागृति स्वसहायता समूह की महिलाओं की बाड़ी में इतनी सब्जी आई कि पूरे गांव के इस्तेमाल में आ गई। इसकी मात्रा पर नजर डालिये, जिमीकंद का उत्पादन 700 किलोग्राम हुआ, भिंडी का उत्पादन 600 किलोग्राम हुआ और 150 किलोग्राम भाजी का उत्पादन हुआ।
समूह की सदस्य राजेश्वरी ने बताया कि हम लोगों ने हर तरह की सब्जी उगाई, कई प्रकार की वैरायटी की सब्जी गांव वालों को खाने को मिली। गांव की बाड़ी की सब्जी स्वादिष्ट भी बहुत लगी। राजेश्वरी ने बताया कि शहर से आने वाली सब्जी में केमिकल बहुत मिलाते हैं स्वाद नहीं आता। जब हमारी सब्जी लोगों ने खाई, फिर तो इसकी मांग खूब बढ़ गई। अब आगे के लिए बहुत सार संभावनाएं खुल गई हैं। उन्होंने बताया कि लाकडाउन के दौरान सत्रह हजार पांच सौ रुपए की कमाई हम लोगों को हुई।
राजेश्वरी ने बताया कि हम लोगों के पास घर के काम के बाद काफी समय बच जाता था। अब हमारे समय का गुणवत्तापूर्वक उपयोग हो रहा है। हम लोगों को सब्जी भी खरीदनी नहीं पड़ रही। लोग सब्जी हमारी बाड़ी से खरीद रहे हैं और हमारी आय हो रही है। हम लोग निकट भविष्य में इसका विस्तार भी करेंगे। सभी महिलाएं बहुत खुश हैं। उल्लेखनीय है कि सब्जी के इस उत्पादन के पीछे कंपोस्ट खाद की भी भूमिका रही है। गौठानों में बने आर्गेनिक खाद बाड़ी में काम आ रहे हैं। इससे खाद का खर्च बच रहा है। इस प्रकार न्यूनतम लागत में अधिकतम उत्पादन सिद्ध हो रहा है। बड़ी बात यह है कि इससे महिला सशक्तिकरण को भी बढ़ावा मिला है। शासन ने बाड़ी के लिए सिंचाई सुविधा उपलब्ध करा दी। हार्टिकल्चर विभाग ने उन्हें सभी तरह की तकनीकी सहायता दी। यह माडल ग्रामीण विकास के लिए बड़ी संभावनाएं पैदा करता है और आत्मनिर्भरता के लिए मिसाल है जिससे लाकडाउन जैसे कठिन समय में भी आजीविका का रास्ता बंद नहीं होता।

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