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May 02, 2026
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रायपुर

रायपुर (6379)

शांति और विकास राह पर बढ़ रहा है बस्तर, शासन की योजनाओं से बदली गांवों की तस्वीर
पहली बार राजधानी पहुंचे बीजापुर के सुदूर गांवों के युवा, मुख्यमंत्री से आत्मीय मुलाकात कर रखी अपनी बात
रायपुर/शौर्यपथ /इच्छाशक्ति, संवेदना और समावेशी नीति से हमने बस्तर में बदलाव की नई शुरुआत की है। बस्तर के युवाओं का आत्मबल ही हमारी प्रेरणा है और हम सब मिलकर नया बस्तर गढ़ेंगे। आप सभी ने पहली बार राजधानी रायपुर को देखा है, आप सभी का यहां स्वागत है और आपकी यह यात्रा सुखद और चिरस्मरणीय हो। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय आज अपने निवास में प्रदेश के सुदूर और नक्सल प्रभावित बीजापुर जिले के नियद नेल्ला नार ग्राम पंचायतों के 96 युवक-युवतियों के दल से आत्मीय संवाद कर रहे थे।
        मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार 'नियद नेल्ला नार' जैसी योजनाओं के माध्यम से नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शांति और विकास की नई राह खोल रही है। उन्होंने कहा कि आप छत्तीसगढ़ के भविष्य हैं और आप सभी की भागीदारी से ही हम बस्तर क्षेत्र और प्रदेश को आगे लेकर जायेंगे। श्री साय ने कहा कि 'नियद नेल्ला नार’ योजना से जुड़कर जहां गांवों की तस्वीर बदल रही है, वहीं युवाओं को भी आत्मनिर्भरता और सम्मानजनक जीवन मिल रहा है। मुख्यमंत्री ने युवाओं से कहा कि हमारी सरकार आपके क्षेत्र में शांति व्यवस्था स्थापित करने में जुटी हुई है और केंद्रीय मंत्री श्री अमित शाह ने ठान लिया है कि मार्च 2026 तक नक्सलवाद को जड़ से समाप्त करना है। उन्होंने कहा कि माओवादी आपके क्षेत्र में विकास नहीं चाहते, लेकिन विकास के रास्ते आने वाली सभी बाधाओं को हम दूर करेंगे। बस्तर का मनोबल हमें नक्सलवाद जैसी कुरीतियों को जड़ से समाप्त करने की ऊर्जा दे रहा है।
       मुख्यमंत्री ने कहा कि प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर आपके क्षेत्र में घने जंगल, मनमोहक झरने और ऊँचे पहाड़ हैं। वहां भूमि उपजाऊ है और अच्छी खेती होती है। हमारी सरकार खेती को समृद्ध बनाने के लिए पानी की सुविधा आप तक पहुंचाने का काम कर रही है। श्री साय ने कहा कि आप सभी खेती को बढ़ावा दें और जो विद्यार्थी हैं, वे मन लगाकर अच्छी शिक्षा प्राप्त करें। प्रदेश के विकास में आपका सहयोग हमारे लिए बहुत जरूरी है। उन्होंने ‘बस्तर ओलंपिक’ और ‘बस्तर पंडुम’ जैसे आयोजनों का उल्लेख करते हुए कहा यह बस्तर की आत्मा की अभिव्यक्ति हैं। इन आयोजनों में हजारों युवाओं, महिलाओं और बच्चों की भागीदारी ने दुनिया को यह संदेश दिया है कि बस्तर अब नए युग की ओर अग्रसर है। बस्तर की कला, संस्कृति और धरोहर को संजोने का कार्य हम सब मिलकर आगे भी करते रहेंगे। आज बस्तर वासियों ने यह दिखा दिया है कि वे हिंसा नहीं, शांति और विकास चाहते हैं। उन्होंने कहा कि बस्तर की धरती वीरता, धैर्य और स्वाभिमान की प्रतीक रही है और अब हम सब मिलकर इसे विकास और समृद्धि के रास्ते पर आगे लेकर जायेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि शासन की विभिन्न योजनाओं, कौशल प्रशिक्षण, खेल और शिक्षा के माध्यम से सरकार हर युवा को एक नया अवसर देने के लिए प्रतिबद्ध है।
 साय ने युवाओं से आह्वान किया कि वे मुख्यधारा से जुड़कर समाज में बदलाव के वाहक बनें और मजबूत, सुरक्षित व समृद्ध बस्तर के निर्माण में सहभागी बनें।
मुख्यमंत्री से युवाओं ने  साझा किए अपने विचार, कहा – “बस्तर को बदलने का बनेंगे माध्यम
बीजापुर जिले के सुदूर गांवों से राजधानी पहुंचे युवाओं ने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय से खुलकर संवाद किया। युवाओं ने न सिर्फ अपने अनुभव साझा किए, बल्कि अपने सपनों और संकल्पों की भी बात की। उन्होंने कहा कि हम शिक्षा, खेल, हुनर और सेवा के रास्ते पर चलकर अपने जीवन को बेहतर बनाना चाहते हैं। बस्तर को बदलना है, और हम इस बदलाव के सहभागी बनना चाहते हैं। युवाओं ने बताया कि 'नियद नेल्ला नार' योजना ने उन्हें नई पहचान और दिशा दी है।
       इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री  विजय शर्मा, वन मंत्री केदार कश्यप, मुख्य सचिव  अमिताभ जैन, पुलिस महानिदेशक अरुण देव गौतम के साथ ही वरिष्ठ अधिकारीगण मौजूद रहे।

जल जीवन मिशन ने बदली तस्वीर, पेयजल के लिए हैंडपंप और नदी पर निर्भरता खत्म की
रायपुर/शौर्यपथ /जल जीवन मिशन दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों में भी पेयजल व्यवस्था की तस्वीर बदल रही है। छत्तीसगढ़ सरकार की नियद नेल्ला नार योजना और भारत सरकार के जल जीवन मिशन से घने जंगलों के बीच बसा बीजापुर जिले के उसूर विकासखण्ड का गुंजेपर्ती अब जल समृद्ध गांव बन गया है। ग्राम पंचायत गलगम के करीब 80 घरों वाले इस आश्रित गांव में जल जीवन मिशन ने पेयजल के लिए हैंडपंपों और नदी पर निर्भरता खत्म कर दी है। वहां के सभी घरों में पाइपलाइनों के जरिए नल से स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल पहुंच रहा है। जल जीवन मिशन न केवल ग्रामीणों की प्यास बुझा रहा है, बल्कि कई परिवार अतिरिक्त जल का सदुपपयोग कर अपने घरों में सब्जी-भाजी भी उगा रहे हैं। अतिरिक्त जल और उपयोग किए हुए जल के प्रबंधन से गांव साफ-सुथरा हुआ है और गांववालों का स्वास्थ्य भी सुधरा है। इससे जल के उपयोग के प्रति ग्रामीणों में जागरूकता भी बढ़ी है।
जल जीवन मिशन के तहत गुंजेपर्ती में पेयजल की आपूर्ति के लिए 21 लाख रुपए से अधिक की लागत से 3262 मीटर पाइपलाइन बिछाई गई है। वहां सौर ऊर्जा से संचालित तीन जल आपूर्ति सिस्टम भी स्थापित किए गए हैं। पहले यहां के लोग पानी की सभी जरूरतों के लिए हैण्डपंपों और नदी पर ही निर्भर थे। पानी की व्यवस्था के लिए महिलाओं को रोज घर से दूर हैंडपंप या नदी तक जाना पड़ता था। इसमें प्रतिदिन उनका बहुत सा समय यूं ही निकल जाता था। पर अब जल जीवन मिशन से उनके घर-आंगन तक नल से पानी पहुंच रहा है। हाल ही में गुंजेपर्ती में आयोजित ग्रामसभा में शत प्रतिशत हर घर जल प्रमाणीकरण किया गया है। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग द्वारा ग्राम पंचायत को जल आपूर्ति प्रणाली के संचालन, प्रबंधन और निगरानी की जिम्मेदारी भी हस्तांतरित की गई है।

जिला मुख्यालयों में राज्यपाल, मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्री, सांसदगण एवं विधायकगण होंगे मुख्य अतिथि
जशपुर में मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के मुख्य आतिथ्य में होगा योगाभ्यास
रायपुर/शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ शासन द्वारा 21 जून अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के आयोजन को लेकर तैयारियां पूरी कर ली गई है। जिला मुख्यालयों से लेकर ग्राम पंचायत स्तर तक 21 जून को इस बार ’’योग संगम-हरित योग’’ थीम पर सामूहिक योगाभ्यास का कार्यक्रम आयोजित होगा। जिला मुख्यालयों में आयोजित सामूहिक योगाभ्यास के कार्यक्रम में राज्यपाल, मुख्यमंत्री, केंद्रीय राज्य मंत्री, उपमुख्यमंत्री द्वय, मंत्रीगण, सांसद एवं विधायकगण मुख्य अतिथि होंगे। छत्तीसगढ़ सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार जिला मुख्यालयों में आयोजित होने वाले सामूहिक योगाभ्यास में मुख्य अतिथि नामांकित किया गया है।
राज्यपाल  रमेन डेका के मुख्य आतिथ्य में 21 जून को राजधानी रायपुर में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के मौके पर सामूहिक योगाभ्यास का कार्यक्रम आयोजित होगा। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के मुख्य आतिथ्य में जशपुर जिले के रणजीता स्टेडियम में सुबह 7 बजे सामूहिक योगाभ्यास का आयोजन होगा। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता कैबिनेट मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े करेंगी। उपमुख्यमंत्री श्री अरूण साव जिला मुख्यालय मुंगेली तथा उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा कबीरधाम में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर आयोजित कार्यक्रम के मुख्य अतिथि होंग।
इसी तरह राजनांदगांव में विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, बलरामपुर-रामानुजगंज में मंत्री श्री रामविचार नेताम, बेमेतरा में मंत्री श्री दयालदास बघेल, नारायणपुर में मंत्री श्री केदार कश्यप, कोरबा में मंत्री श्री लखनलाल देवांगन, मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर में मंत्री श्री श्यामबिहारी जायसवाल, रायगढ़ में मंत्री श्री ओ.पी.चौधरी, गरियाबंद में मंत्री  टंकराम वर्मा, बलौदाबाजार-भाटापारा में सांसद   बृजमोहन अग्रवाल, दुर्ग में सांसद विजय बघेल, खैरागढ़-छुईखदान-गण्डई में सांसद  संतोष पाण्डेय, सरगुजा में सांसद श्री चिन्तामणी महाराज, महासमुंद में सांसद श्रीमती रूपकुमारी चौधरी, सारंगढ़-बिलाईगढ़ में सांसद   राधेश्याम राठिया, जांजगीर-चांपा में सांसद   कमलेश जांगड़े, सुकमा में सांसद श्री महेश कश्यप, कांकेर में सांसद  भोजराज नाग, सक्ती में सांसद   देवेन्द्र प्रताप सिंह, बिलासपुर में विधायक श्री अमर अग्रवाल, बीजापुर में विधायक श्री आशाराम नेताम, धमतरी में विधायक  अजय चंद्राकर, बस्तर में विधायक  किरण सिंह देव, कोरिया में विधायक   भैयालाल राजवाड़े, सूरजपुर में विधायक श्रीमती रेणुका सिंह, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी में विधायक  गुरू खुशवंत साहेब, दंतेवाड़ा में विधायक   चैतराम अटामी, बालोद में विधायक श्री ललित चन्द्राकर, गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही में विधायक   प्रणव कुमार मरपच्ची और कोण्डागांव में विधायक श्री नीलकंठ टेकाम मुख्य अतिथि के तौर पर उपस्थित रहेंगे।

रायपुर/शौर्यपथ /मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से आज रात्रि उनके निवास परिसर में जगदलपुर विधायक  किरण देव के नेतृत्व में गोंचा महापर्व आयोजन समिति के प्रतिनिधि मंडल ने सौजन्य भेंट की। प्रतिनिधि मंडल ने मुख्यमंत्री को संभागीय मुख्यालय जगदलपुर में आयोजित गोंचा महापर्व में सम्मिलित होने का न्यौता दिया। उन्होंने बताया कि छह सौ वर्षों से अधिक समय से निरंतर मनाया जा रहा यह पर्व बस्तर में सामाजिक समरसता और प्रेम का प्रतीक है।
बस्तर दशहरा के बाद सबसे ज्यादा लंबे समय तक चलने वाले इस पर्व की शुरुआत चंदन यात्रा के साथ 11 जून से हो चुकी है। प्रतिनिधियों ने जानकारी दी कि पर्व के अंतर्गत 26 जून को नेत्रोत्सव पूजा तथा 27 जून को श्री गोंचा रथयात्रा का आयोजन होगा। 5 जुलाई को बाहुड़ा गोंचा रथयात्रा के साथ महापर्व का समापन होगा। इस अवसर पर प्रतिनिधि मंडल ने मुख्यमंत्री श्री साय को बस्तर की परंपरा अनुसार ‘तुपकी’ भेंट कर सम्मानित किया।
उल्लेखनीय है कि गोंचा महापर्व में तुपकी चलाने की सदियों पुरानी परंपरा है। बस्तर के आदिवासी पोली बांस की नली से तुपकी तैयार करते हैं, जिसमें एक विशेष पौधे का फल डालकर बलपूर्वक दबाया जाता है, जिससे पटाखे जैसी आवाज उत्पन्न होती है। मुख्यमंत्री श्री साय ने आमंत्रण के लिए आभार व्यक्त करते हुए गोंचा महापर्व की हार्दिक शुभकामनाएं दीं।
प्रतिनिधि मंडल में 360 घर आरण्यक ब्राह्मण समाज के अध्यक्ष श्री वेदप्रकाश पाण्डे, गोंचा समिति अध्यक्ष श्री चिंतामणि पाण्डे सहित श्री हेमंत पाण्डे, रजनीश पाणिग्राही, नरेंद्र पाणिग्राही, सुदर्शन पाणिग्राही, पुरुषोत्तम जोशी, मुक्तेश्वर पांडे, बनमाली पाणिग्राही, दिनेश पाणिग्राही, दिलेश्वर पाण्डे, प्रशांत पाणिग्राही, देवशंकर पंडा, विजय पांडे, आत्माराम जोशी, देवकृष्ण पाणिग्राही, जयप्रकाश पाढ़ी, वैभव पाण्डे, चुम्मन पांडे, सोमप्रकाश जोशी, वेणुधर पाणिग्राही, प्रदीप पाढ़ी, सोमेश जोशी सहित अन्य गणमान्यजन उपस्थित थे।

मत्स्य बीज उत्पादन और निर्यात के मामले में कांकेर राज्य का अग्रणी जिला
हैचरी क्रांति ने राज्य को बनाया आत्मनिर्भर, देशभर में मांग
रायपुर/शौर्यपथ /छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले ने मत्स्य पालन के क्षेत्र में एक नई मिसाल कायम की है। कांकेर न केवल मत्स्य बीज उत्पादन में, बल्कि देश के कई राज्यों में मत्स्य बीज की आपूर्ति के मामले में राज्य के अग्रणी जिले के रूप में अपनी पहचान कायम की है। मत्स्य बीज उत्पादन और निर्यात सेे जिले की अर्थव्यवस्था को नया आयाम मिला है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा है कि कांकेर जिले की यह उपलब्धि छत्तीसगढ़ के आत्मनिर्भर और समृद्ध ग्रामीण अर्थव्यवस्था की दिशा में एक मजबूत कदम है। पखांजूर क्षेत्र के मत्स्य कृषकों ने नीली- क्रांति को वास्तव में धरातल पर उतारा है। यह सफलता हमारी योजनाओं की प्रभावी क्रियान्वयन, स्थानीय सहभागिता और मेहनतकश मछुआरों की लगन का परिणाम है। राज्य सरकार मत्स्य पालन को और अधिक प्रोत्साहन देने हेतु हरसंभव सहयोग देती रहेगी।
 गौरतलब है कि कुछ वर्ष पूर्व तक कांकेर जिले को मत्स्य बीज के लिए पश्चिम बंगाल और आंध्रप्रदेश पर निर्भर रहना पड़ता था, लेकिन आज कोयलीबेडा विकासखंड के पखांजूर क्षेत्र में बडी संख्या में मत्स्यबीज के पिकअप वाहन, मत्स्य कृषक और क्रियाशील हैचरियां जगह-जगह दिखाई देती हैं। यह बदलाव नीली क्रांति योजना और प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना की मदद से संभव हुआ, जिसके तहत मत्स्य बीज हैचरियों और तालाबों का निर्माण कराया गया। इन योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से पखांजूर में मत्स्य बीज का सरप्लस उत्पादन होने लगा है।
अब स्थिति यह है कि कांकेर में उत्पादित उच्च गुणवत्ता और किफायती मूल्य पर उपलब्ध मत्स्य बीज का न केवल छत्तीसगढ़ के अन्य जिलों को, बल्कि अन्य राज्यों जैसे आंध्रप्रदेश, महाराष्ट्र, उड़ीसा, उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश, झारखंड, गुजरात और बिहार में भी निर्यात किया जा रहा है। पखांजूर का बीज इसलिए भी खास है क्योंकि यह उच्च गुणवत्ता युक्त, अन्य राज्यों से सस्ता, और अप्रैल-मई जैसे प्रारंभिक महीनों में ही उपलब्ध हो जाता है, जिससे किसानों को समय रहते मत्स्य पालन में मदद मिलती है।
मत्स्य पालन विभाग के सहायक संचालक के अनुसार, कांकेर जिले में कुल 34 मत्स्य बीज उत्पादन हैचरी संचालित हैं। वर्ष 2025-26 में 337 करोड़ स्पॉन और 128 करोड़ 35 लाख स्टैंडर्ड फ्राय उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। अभी तक जिले में 192 करोड़ स्पॉन और 7 करोड़ 42 लाख स्टैंडर्ड फ्राय का उत्पादन हो चुका है। यहां की हैचरियों में मेजर कार्प के साथ-साथ पंगेसियस मछली का भी बीज तैयार किया जा रहा है। मत्स्य कृषक श्री विश्वजीत अधिकारी और मृणाल बराई बताते हैं कि क्षेत्र से प्रतिदिन 10-15 पिकअप वाहन मत्स्य बीज लेकर अन्य जिलों एवं प्रदेशों में जाते हैं।
पखांजूर क्षेत्र की मत्स्य बीज उत्पादन की इस सफलता ने करीब 550 स्थानीय लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार प्रदान किया है। मत्स्य बीज उत्पादन, परिवहन, विक्रय और संबंधित गतिविधियों से जुड़े ग्रामीण अब स्थायी आय प्राप्त कर रहे हैं। कांकेर जिला आज छत्तीसगढ़ की मत्स्य संपन्नता का प्रतीक बन गया है। यहां की हैचरी क्रांति ने राज्य को बाहरी निर्भरता से मुक्त किया और गुणवत्तायुक्त मत्स्य बीज के लिए देशभर की पहली पसंद बन गया है।

  रायपुर /शौर्यपथ /भारत सरकार के "एक राष्ट्र, एक राशनकार्ड  " योजना के अंतर्गत छत्तीसगढ़ राज्य में आधार प्रमाणीकरण आधारित खाद्यान्न वितरण सुनिश्चित किया जा रहा है। इस प्रक्रिया को सुचारू रूप से लागू करने हेतु सार्वजनिक वितरण प्रणाली    से जुड़े सभी राशनकार्डधारकों के परिवार के सदस्यों का ई-केवायसी  अनिवार्य रूप से पूर्ण किया जाना आवश्यक है।
वर्तमान में छत्तीसगढ़ में 81.56 लाख राशनकार्ड प्रचलन में हैं, जिनमें 2.73 करोड़ सदस्य पंजीकृत हैं। इनमें से 2.35 करोड़ सदस्यों का ई-केवायसी पूर्ण हो चुका है, जबकि लगभग 38 लाख सदस्यों का ई-केवायसी शेष है। भारत सरकार द्वारा 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को ई-केवायसी से छूट प्रदान की गई है।
खाद्य सचिव श्रीमती रीना कंगाले ने जानकारी दी कि राज्य की सभी उचित मूल्य दुकानों में ई-पॉस मशीनों के माध्यम से ई-केवायसी की सुविधा उपलब्ध है। इसके साथ ही भारत सरकार द्वारा विकसित "मेरा ई-केवायसी" मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से भी हितग्राही अपने स्मार्टफोन से घर बैठे स्वयं ई-केवायसी कर सकते हैं। मेरा ई-केवायसी एप्प के माध्यम से ई-केवायसी करने हेतु एंड्रायड मोबाईल में गूगल प्ले स्टोर से एप्प डाउनलोड कर हितग्राही राज्य का चयन कर अपना आधार नंबर डालकर, आधार ओटीपी के माध्यम से फेस ई-केवायसी कर सकते है। उन्होंने सभी राशनकार्ड धारकों से अपील की है कि 30 जून 2025 की अंतिम तिथि से पूर्व अपना और परिवार के सभी सदस्यों का ई-केवायसी अनिवार्य रूप से पूर्ण करवा लें, जिससे खाद्यान्न वितरण में किसी प्रकार की असुविधा न हो।

आवास की दीवारों पर जनजाति कलाकृतियां वाद्य यंत्र, नृत्य एवं अन्य आर्ट से सजाया सपनों का घर
रायपुर/शौर्यपथ /प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत जब श्रीमती सहोद्रा बाई धनुवार को अपने घर की चाबी मिली, तो यह महज चाबी नहीं थी यह उनके आत्मसम्मान और सुरक्षित भविष्य की शुरुआत थी। जांजगीर-चांपा जिले के जनपद पंचायत बम्हनीडीह अंतर्गत ग्राम पंचायत पुछेली खपरीडीह में धरती आबा जनजातीय उत्कर्ष अभियान के दौरान जब श्रीमती सहोद्रा बाई धनुवार को मंच से प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के अंतर्गत निर्मित पक्के घर की चाबी सौंपी गई, तो उनके चेहरे की मुस्कान देखते ही बनती थी। उन्होंने मुस्कराते हुए सहजता से कहा, “चाबी तो दे दी आपने, लेकिन ताला नहीं दिया। ”उनकी यह मासूम बात सुनकर पूरा वातावरण मुस्कान और भावनाओं से भर गया। यह क्षण न केवल उनके लिए, बल्कि पूरे गाँव के लिए गर्व और खुशी का था।
      श्रीमती सहोद्रा बाई (ग्राम पंचायत खपरीडीह) के जीवन में भी प्रधानमंत्री आवास योजना ने खुशियाँ भर दी हैं। पाँच वर्ष पहले उनके पति का निधन हो गया था। उनकी तीन बेटियां और चार बच्चे हैं जिनकी शादी हो चुकी है। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पक्के मकान के साथ-साथ उज्ज्वला योजना, महतारी वंदन, पेंशन योजना और मनरेगा से 90 दिन की मजदूरी जैसे योजनाओं का लाभ पाकर उनका वृद्धावस्था जीवन सशक्त और आत्मनिर्भर बन गया है।
जनजातीय कलाकृति से सजा ‘सपनों का घर’
       प्रधानमंत्री आवास योजना से बने उनके नए घर में उन्होंने छत्तीसगढ़ की जनजातीय कला, वाद्य यंत्र, पारंपरिक नृत्य और अन्य पारंपरिक लोक संस्कृति से जुड़ी चित्रकारी को घर की दीवारों पर उकेरकर एक जीवंत संस्कृति का प्रतीक बना दिया है। उनका यह प्रयास न केवल कलात्मक है, बल्कि अब वह अन्य ग्रामीणों के लिए भी प्रेरणा बन चुकी हैं। उनके घर की सजावट पूरे जनपद पंचायत में चर्चा का विषय है और जनजातीय पहचान की झलक को दिखा रहा है। श्रीमती सहोद्रा बाई ने अपने घर के सामने एक पेड़ मां के नाम आम के पौधा लगाया है। वहीं उन्होंने जल सरंक्षण को बढ़ावा देने के लिए अपने घर में सोखता गड्ढा का भी निर्माण किया है। आवास योजना का लाभ मिलने पर उन्होंने प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री का आभार भी व्यक्त किया।

पर्यटन बोर्ड प्रचार प्रसार और सुविधा विकसित करने में देगा सहयोग
श्रध्दा और ज्ञान का अनोखा संगम है शारदाधाम
  रायपुर/शौर्यपथ /छत्तीसगढ़ और झारखण्ड की अंर्तराज्यी सीमा पर स्थित प्रसिद्ध धार्मिक व प्राकृतिक पर्यटन स्थल शारदाधाम को मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निर्देश पर छत्तीसगढ़ टुरीज्म बोर्ड ने राज्य के चिन्हाकित पर्यटन स्थलों की सूची में शामिल कर लिया है। पर्यटन बोर्ड ने इसके लिए परिपत्र जारी कर दिया है। बोर्ड के इस निर्णय से इस पर्यटन स्थल को एक नई पहचान मिल सकेगी।  बोर्ड इसके प्रचार-प्रसार के साथ ही पर्यटको के लिए मूलभूत सुविधाओं के विकास के लिए बजट उपलब्ध करा सकेगा।
श्रद्धा और ज्ञान का संगम है शारदाधाम
    शारदाधाम में विद्यादायनी माँ सरस्वती की श्रद्वा और ज्ञान अर्जन का अनोखा संगम देखने को मिलता है। यहां छत्तीसगढ़ और झारखंड राज्य के जरूरतमंद बच्चों के रहने और पढ़ने के लिए कोचिंग की विशेष व्यवस्था की गई है। शारदाधाम समिति के अध्यक्ष राजकुमार सिंह ने बताया कि इस विशेष कोचिंग संस्था में बच्चों के रहने, खाने के साथ उनकी कोचिंग की निःशुल्क व्यवस्था की गई है। बच्चों के रहने और कोचिंग का जो भी खर्चा होता है, उसका व्यय समिति श्रद्वालुओं के सहयोग से पूरा करती है।
प्रकृतिक सौंदर्य से भरपूर है शारदाधाम प्रसिद्व धार्मिक पर्यटन स्थल
    शारदाधाम, जिला मुख्यालय जशपुर से तकरीबन 30 किलोमीटर दूर, दुलदुला ब्लाक में स्थित है। माता सरस्वती का यह प्रसिद्व मंदिर चारो ओर घने जंगल से घिरा हुआ है। नजदीक ही गिरमा नदी की कलकल करती मधुर ध्वनि यहां दर्शन के लिए आने वाले श्रद्वालुओं का मन मोह लेते हैं। संचालन समिति के अध्यक्ष ने बताया कि विद्यादायनी मां सरस्वती का यह भव्य मंदिर पूरी तरह से श्रमदान से तैयार किया गया है। दोनों राज्यों के श्रद्वालुओं ने पसीना बहा कर मां के इस मंदिर का निर्माण किया है। मंदिर के भवन का डिजाइन झारखंड के प्रसिद्व लचलागढ़ हनुमान मंदिर के तर्ज पर तैयार किया गया है।
पर्यटन हब के रूप में विकसीत हो रहा है जशपुर
    उल्लेखनीय है कि वनाँचल क्षेत्र जशपुर में पर्यटन उद्योग विकसित करने की दिशा में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय तेजी से काम कर रहे हैँ। कुनकुरी ब्लाक में स्थित मयाली नेचर कैंप के विकास के लिए दस करोड़ रूपये भारत दर्शन योजना के अंतर्गत स्वीकृत किए गए हैँ। यहीं स्थित मधेश्वर महादेव को हाल ही में गोल्डन बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकार्ड ने विश्व का सबसे बड़े प्राकृतिक शिवलिंग के रूप में मान्यता दी है। इसके साथ ही सीएम विष्णुदेव साय ने जिले को पर्यटन नक्शे से जोड़ने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए फरसाबहार ब्लाक में स्थित कोतेबीराधाम में लक्ष्मण झूला के तर्ज पर पुल निर्माण की घोषणा की है। इसके साथ ही जिले में देशदेखा,रानीदाह जैसे पर्यटन स्थलों को विकसित करने की दिशा में तेजी से काम किया जा रहा है। मुख्यमंत्री साय का लक्ष्य जिले में ग्रीन उद्योग विकसित कर जिलेवासियों को रोजगार उपलब्ध कराना है।

रायपुर /शौर्यपथ /राज्यपाल  रमेन डेका ने प्रधानमंत्री टी.बी. मुक्त भारत अभियान के तहत छत्तीसगढ़ को वर्ष 2025-26 तक टी.बी. से मुक्त राज्य बनाने के लिए सघन प्रयास के निर्देश दिए हैं।
आज यहां राजभवन में उन्होंने स्वास्थ्य विभाग की आयुक्त सह-संचालक डॉ. प्रियंका शुक्ला को उक्ताशय  के निर्देश देते हुए कहा कि टी बी के गंभीर मरीजों की समुचित चिकित्सा की व्यवस्था करें। जो टी.बी. मरीज बीच में ही दवा का सेवन बंद कर देते है उन मरीजों पर विशेष ध्यान दिया जाए और उन्हें दवा का पूर्ण कोर्स करने हेतु जागरूक किया जाए। टी.बी. मरीजों को योगाभ्यास के लिए प्रोत्साहित करें जिससे रोग के प्रति उनकी प्रतिरोधक क्षमता बढ़ेगी। श्री डेका ने टी.बी. मरीजों को पर्याप्त पोषण आहार मिले इसके लिए अधिक से अधिक निःक्षय मित्र बनाने के निर्देश भी दिए।
बैठक में राज्यपाल के सचिव डॉ. सी. आर. प्रसन्ना एवं स्वास्थ्य विभाग के अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

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