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June 20, 2026
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रायपुर

रायपुर (6047)

  रायपुर/शौर्यपथ /मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने ऐतिहासिक वीर गाथा पर आधारित हिंदी फिल्म ‘छावा’ को राज्य में  टैक्स फ्री घोषित करने की घोषणा की है। उन्होंने आज राजिम कुंभ के आयोजन उपरांत मीडिया से चर्चा के दौरान यह घोषणा की।  मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छावा फिल्म को टैक्स फ्री करने का निर्णय छत्तीसगढ़ की जनता को देश के गौरवशाली इतिहास से जोड़ने और युवा पीढ़ी में राष्ट्रप्रेम एवं शौर्य की भावना जागृत करने के उद्देश्य से लिया गया है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि ‘छावा’ केवल एक फिल्म नहीं, बल्कि ऐतिहासिक परंपराओं, वीरता और स्वाभिमान की गाथा है, जिसे हर नागरिक को देखना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह फिल्म युवा वर्ग को प्रेरित करेगी और छत्रपति संभाजी महाराज के शौर्य, बलिदान और नेतृत्व को व्यापक रूप से प्रस्तुत करेगी।
मुख्यमंत्री साय के इस फैसले से राज्य के सिनेमाघरों में फिल्म देखने के इच्छुक दर्शकों को मूल्य में राहत मिलेगी, जिससे अधिक से अधिक लोग इसे देख सकेंगे और भारतीय इतिहास की समृद्ध विरासत से प्रेरणा ले सकेंगे।
 उल्लेखनीय है कि फिल्म छत्रपति शिवाजी महाराज के पुत्र छत्रपति संभाजी महाराज के जीवन पर आधारित है, जिन्होंने मुगलों और अन्य आक्रांताओं के खिलाफ संघर्ष करते हुए अपने अदम्य साहस, रणनीतिक कौशल और बलिदान की अमर गाथा लिखी। फिल्म उनके अदम्य साहस और बलिदान को जीवंत करती है और राष्ट्रभक्ति की भावना को सुदृढ़ करती है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार ऐसी फिल्मों को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है, जो समाज को प्रेरणा देती हैं और सांस्कृतिक चेतना को जाग्रत करती हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और राष्ट्रभक्ति से जुड़ी फिल्मों को प्रोत्साहित करती रहेगी, ताकि हमारी आने वाली पीढ़ी अपने गौरवशाली अतीत से जुड़ी रहे। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने छत्तीसगढ़ की जनता, विशेष रूप से युवाओं से अपील की कि वे इस फिल्म को देखें और भारतीय इतिहास के उन स्वर्णिम पन्नों को समझें, जो आज भी हमारे जीवन को दिशा देने का कार्य कर रहे हैं।

रायपुर/शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ स्टेट पॉवर कंपनी डंगनिया औषधालय द्वारा निःशुल्क दंत शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में आये ट्रांसमिशन, डिस्ट्रीब्यूशन एवं जनरेशन कंपनी के अधिकारियों तथा कर्मचारियों नेे दंत परीक्षण एवं परामर्श का लाभ लिया। दंत विशेषज्ञ डॉ अबीर मिश्र (एम.डी.एस कंजर्वेटिव एंड माइक्रो एंडोडोन्टिक्स) ने मरीजों के दांतों के परीक्षण के साथ लोगों को दांत की देखभाल के घरेलू उपचार भी बताये। उन्होंने कहा कि ज्यादातर लोग दांत मे दर्द, सूजन और केविटी होने पर ही जॉच करवाने आते हैं। इस स्थिति  में  उपचार के अलावा कोई विकल्प नही रहता जबकि दांतों के नियमित देखभाल और वार्षिक परीक्षण से दांतों को लंबे समय तक सुरक्षित तक रखा जा सकता है। उन्होंने उपचार की दर्दरहित और नई तकनीक के बारे में लोगों को जागरूक किया।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ.एच.एल.पंचारी ने बताया कि छत्तीसगढ़ स्टेट पॉवर कंपनीज में कैशलेस योजना के तहत दांत संबंधी इलाज के प्रावधान है। कर्मियों को कैशलेस या प्रतिपूर्ति द्वारा कम खर्च में बेहतर सुविधायें दी जा रही है। पॉवर कंपनी मे निरंतर मेडिकल सुविधाओं का विस्तार हो रहा है जिसका लाभ पात्र अधिकारी, कर्मचारी, पेंशनर्स एवं सदस्य ले सकते हैं। इस अवसर पर वरिष्ठ चिकित्साधिकारी डॉ. इंदु साहू एवं डॉ. निलेश सिंह भी उपस्थित थे जिन्होंने पुष्पगुच्छ भेंट करते हुए डॉ.अबीर मिश्र का स्वागत किया।

दिव्यांगों के लिए छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल की पहल
रायपुर /शौर्यपथ / टूरिस्ट स्पॉट पर दिव्यांगजन आसानी से घूम सके, इसके लिए छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल ने विशेष पहल   शुरू की है। है। "यात्रा आपकी सुविधा हमारी" नाम से  शुरू इस पहल के तहत  छत्तीसगढ़ के सभी टूरिस्ट स्पॉट पर अब स्पेशल रैंप रूट बनाया जा रहा है। इस रैंप रूट के जरिए दिव्यांग आसानी आसानी से संबंधित टूरिस्ट स्पॉट पर जा सकेंगे और आसानी से घूम सकेंगे। यही नहीं सभी टूरिस्ट स्पॉट में पर्यटन मंडल के रिसॉर्ट में व्हीलचेयर की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी। ताकि वे आसानी से आप पास के क्षेत्र में घूम सकें। छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के  अधिकारियों  के  अनुसार मैनपाट  में स्पेशल स्पेशल रैंप रैंप रू रूट बनाया गया है। इस पर आसानी से दिव्यांग चल सकते हैं। इसी तरह दूसरे पर्यटन स्थलों में भी रैंप रूट बनाया जा रहा है।
दिव्यांगों के लिए ये खास पहल की गई है, ताकि  पर्यटन पर्यटन स्थलों को देखने वालों में उनकी संख्या में भी बढ़ोत्तरी हो सके।
 ऑनलाइन के साथ हेल्पलाइन से भी बुकिंग की सुविधा
 दिव्यांगजन अपनी फैमिली या दोस्तों के साथ छत्तीसगढ़ के खूबसूरत स्थलों को देख सके। इसके लिए दोनों तरह की सुविधा दी जा रही है। दिव्यांग चाहें तो ऑनलाइन बुकिंग भी करा सकते हैं या फिर पर्यटन मंडल के हेल्प लाइन नंबर पर फोन करने पर बुकिंग की सुविधा दी जा रही है।
 दिव्यांगों को 30 प्रतिशत तक डिस्काउंट
पर्यटन मंडल ने दिव्यांगों के लिए स्पेशल डिस्काउंट भी शुरू किया है। बुकिंग के दौरान दिव्यांगता प्रमाणपत्र दिखाने पर 30 परसेंट की डिस्काउंट  दिया जाएगा। ये डिस्काउंट केवल पर्यटन मंडल द्वारा संचालित रिसॉर्ट में ही दिया जाएगा। इनमें बिलासपुर, मैनपाट, बस्तर, कोरबा, सिरपुर जैसे खास जगह शामिल हैं। बुकिंग के दौरान मिलने वाली सुविधा सिर्फ दिव्यांग को एक ही कमरे के लिए दी जाएगी।
सुविधा केवल इन रिसॉर्ट में
* कुरदल हिल ईको-रिसॉर्ट बिलासपुर।
* छेरछेरा रिसॉर्ट कबीर चबूतरा। बैगा टूरिस्ट रिसॉर्ट कबीरधाम। सोन बाहरा टूरिस्ट रिसॉर्ट आमाडोब। हरेली ईको रिसॉर्ट बारनवापारा। • दानदामी लग्जरी रिसॉर्ट कॉटेज चित्रकोट। • होटल जोहार छत्तीसगढ़ रायपुर। सैला टूरिस्ट रिसॉर्ट मैनपाट। जोहार होटल, सिरपुर। • दानकुल एथनिक रिसॉर्ट कोंडागांव। सतरंगा बोट क्लब एंड रिसॉर्ट कोरबा। सतरेंगा एथनिक रिसॉर्ट जशपुर

मुख्य सचिव अमिताभ जैन ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए बस्तर के कमिश्नर-आईजी और कलेक्टर-एसपी को तैयारी करने दिए निर्देश
रायपुर /शौर्यपथ / मुख्यमंत्री  विष्णु  देव  साय की  पहल  पर  बस्तर की समृद्ध जनजातीय कला एवं संस्कृति के धरोहर को पुनर्जीवित  करने  बस्तर पंडुम का भव्य  आयोजन  किया  जाएगा।  यह  आयोजन  मार्च  में होगा। इस संबंध में मुख्य सचिव अमिताभ जैन ने मंगलवार शाम को वीडियो कांफ्रेसिंग के जरिए बस्तर के कमिश्नर-आईजी सहित सातों जिले के कलेक्टर एवं एसपी को आवश्यक तैयारी एवं व्यवस्था सुनिश्चित किए जाने के निर्देश दिए। इस दौरान प्रमुख सचिव अनुसूचित जाति एवं आदिम जाति विकास विभाग सोनमणि बोरा, सचिव संस्कृति विभाग अनबलगन पी सहित राज्य शासन के वरिष्ठ उच्चाधिकारी मौजूद रहे।
           वीडियो कांफ्रेंसिंग में सचिव संस्कृति अनबलगन पी ने बताया कि बस्तर के जनजातीय समुदाय के लोगों विशेषकर युवाओं के मध्य समरसता और एकता स्थापित करने की इस अनूठी पहल से बस्तर की जनता में विश्वास,शान्ति और विकास को बढ़ावा मिलेगा। बस्तर पंडुम का आयोजन ब्लॉक, जिला और संभाग स्तर पर किया जाएगा। जिसमें जनजातीय नृत्य, गीत, नाट्य सहित जनजातीय वाद्य यंत्रों का प्रदर्शन, जनजातीय वेशभूषा एवं आभूषण का प्रदर्शन, जनजातीय कला एवं गोदना का प्रदर्शन तथा जनजातीय व्यंजन एवं पेय पदार्थों का प्रदर्शन विधाओं को शामिल किया गया है। साथ ही केवल संभाग स्तर आयोजन में जनजातीय रीति-रिवाज एवं तीज-त्यौहार पर आधारित प्रदर्शनी को समाहित किया गया है। ब्लॉक स्तर के बस्तर पंडुम में सभी कलाकारों एवं प्रतिभागियों को ओपन एंट्री दी जाएगी। इसके बाद चयनित दल एवं प्रतिभागी जिला स्तर और जिला स्तर से चयनित दल एवं प्रतिभागी संभाग स्तर के बस्तर पंडुम में अपनी सहभागिता निभाएंगे। बस्तर पंडुम के प्रत्येक स्तर को बस्तर में उत्सव की तरह मनाया जायेगा जिसमें समाज प्रमुखों, वरिष्ठ नागरिकों, जनप्रतिनिधियों को अतिथि के रूप में आमंत्रित किया जायेगा। जिला एवं संभाग स्तर पर बड़े स्तर के कलाकारों को आमंत्रित कर कार्यक्रम प्रस्तुति का अवसर प्रदान किया जाएगा। साथ ही मेहमान कलाकारों के रूप में राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर के दलों को आमंत्रित किया जाएगा। बस्तर पंडुम के प्रत्येक स्तर पर विजेता दलों एवं प्रतिभागियों को नगद पुरस्कार एवं प्रमाण पत्र सहित फोटो फ्रेम भेंटकर सम्मानित किया जायेगा। इस आयोजन के प्रत्येक स्तर पर निःशुल्क भोजन एवं आवागमन हेतु वाहन की व्यवस्था सहित ठहरने की सुविधा उपलब्ध कराया जाएगा। वीडियो कांफ्रेंसिंग के दौरान कलेक्टोरेट के एनआईसी कक्ष में कमिश्नर बस्तर श्री डोमन सिंह, आईजी श्री सुंदरराज पी., कलेक्टर हरिस एस एवं एसपी श्री शलभ सिन्हा और अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
बस्तर: अद्वितीय जनजातीय कला एवं संस्कृति के लिए विश्व प्रसिद्ध
        दंडकारण्य के घने जंगल में बसा बस्तर अपने अद्वितीय जनजातीय कला एवं संस्कृति के लिए विश्व प्रसिद्ध है, यहां की जनजातीय समाज घने जंगल, पहाड़ी एवं दुर्गम स्थानों में निवासरत है, जिनकी एक विशेष बोली-भाषा, खान-पान, रहन-सहन सहित कला-संस्कृति तथा तीज-त्यौहार हैं। बस्तर की नैसर्गिक सुंदरता भी अप्रतिम है जो देश-दुनिया के पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करती है।

निर्माण कार्यों के अद्यतन स्थिति की समीक्षा
वित्तीय एवं भौतिक लक्ष्य को शिघ्रताशिघ्र लक्ष्य प्राप्त करने के निर्देश
     मोहला /शौर्यपथ /कलेक्टर श्रीमती तुलिका प्रजापति ने समय-सीमा की बैठक में विभागीय योजनाओं के क्रियान्वयन एवं प्रगति की समीक्षा की। कलेक्टर ने सभी विभागीय अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि वित्तीय वर्ष समाप्ति की ओर है, इसे ध्यान में रखते हुए सभी अधिकारीगण अपने-अपने विभागों में संचालित विभागीय योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन करें। उन्होंने कहा कि निर्धारित लक्ष्य अनुसार प्रगति लाएं। कलेक्टर ने सख्त निर्देश देते हुए कहा कि विभागीय अधिकारियों के द्वारा योजनाओं के क्रियान्वयन में अपेक्षित प्रगति नहीं लाने पर सख्त कार्यवाही किया जायेगा। कलेक्टर ने बैठक में सभी जिला स्तरीय अधिकारियों को अपने मैदानी अमला और ब्लॉक स्तर के कार्यों का सतत मूल्यांकन करने और अधीनस्थ अमला के कार्यों की प्रगति की समीक्षा करने के निर्देश दिए हैं। इसका गंभीरता पूर्वक पालन नहीं किये जाने पर संबंधित अधिकारियों पर जवाबदेही तय किया जाएगा।
         कलेक्टर श्रीमती प्रजापति ने विभागों में संचालित योजनाओं की राज्य स्तर पर रैंकिंग की समीक्षा की। राज्य स्तर पर जिन विभागीय योजनाओं में प्रगति में कमी पायी गयी, उन अधिकारियों को रैंकिंग सुधारने के कड़ी निर्देश दिए गए हैं। कलेक्टर ने सभी अधिकारियों को वित्तीय भौतिक लक्ष्य को अनिवार्य रूप से प्राप्त करने की दिशा में नये वित्तीय वर्ष प्रारंभ होने के पूर्व निर्धारित लक्ष्य प्राप्त कर लेने कहा गया है। कलेक्टर ने बैठक में विभिन्न विभागों द्वारा कराये जा रहे निर्माण कार्यों के अद्यतन स्थिति की जानकारी ली। स्वीकृत निर्माण कार्यों को शिघ्रताशिघ्र पूर्ण कर लेने के निर्देश दिए गए हैं। कलेक्टर ने अधिकारियों से कहा कि निर्माण कार्यों में गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखें। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्यों के गुणवत्ता में कमी पाये जाने की दशा में नियमानुसार कार्यवाही की जाएगी।
        वित्तीय वर्ष समाप्ति को ध्यान में रखते हुए कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि 28 फरवरी के बाद किसी प्रकार की खरीदी पर प्रतिबंध लगाया गया है। इसे ध्यान में रखते हुए विभागों में स्वीकृत बजट आबंटन के आधार पर विभागीय खरीदी का कार्य 28 फरवरी के पूर्व कर लेने के निर्देश दिए गये हैं। विभागों में स्वीकृत बजट आवंटन के आधार पर सभी कार्यों को पूर्ण करने कहा गया है। कलेक्टर ने बैठक में ई-ऑफिस क्रियान्वयन की दिशा में सभी अधिकारियों को अपने विभागों में संचालित अधिकारी कर्मचारियों का रजिस्ट्रेशन कराकर ऑफिस क्रियान्वयन की दिशा में आवश्यक कार्यवाही कर लेने के निर्देश दिए गए हैं। विभागों के लिए स्वीकृत पदों की पूर्ति की दिशा में अपने उच्च कार्यालय से संपर्क कर आवश्यक कार्यवाही करने कहा गया है। बैठक में अपर कलेक्टर विजेन्द्र सिंह पाटले, जिला पंचायत सीईओ सुश्री भारती चन्द्राकर, डिप्टी कलेक्टर सुश्री हीरा गवर्ना, एसडीएम मोहला श्री हेमेन्द्र भुआर्य, एसडीएम मानपुर अमित नाथ योगी सहित जिला स्तरीय अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।

सारणीकरण के उपरांत विजयी प्रत्याशियों की गई घोषणा
   बालोद/शौर्यपथ /जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी एवं रिटर्निंग आॅफिसर डाॅ. संजय कन्नौजे ने आज त्रिस्तरीय पंचायत आम निर्वाचन के द्वितीय चरण के अंतर्गत जिला पंचायत सदस्य पद हेतु नवनिर्वाचित सदस्यों को निर्वाचन का प्रमाण पत्र प्रदान कर उन्हें शुभकामनाएं दी। इस दौरान सीईओ जिला पंचायत एवं रिटर्निंग आॅफिसर डाॅ. संजय कन्नौजे ने जिला पंचायत सभाकक्ष में सारणीकरण के उपरांत विजयी प्रत्याशियों की विधिवत घोषणा करने के पश्चात् जिले के गुरूर एवं गुण्डरदेही विकासखण्ड के 07 जिला पंचायत क्षेत्र के नवनिर्वाचित सदस्यों को निर्वाचन का प्रमाण पत्र प्रदान किया। उल्लेखनीय है कि त्रिस्तरीय पंचायत आम निर्वाचन के तृतीय चरण के अंतर्गत जिले के गुरूर एवं गुण्डरदेही विकासखण्ड में मतदान एवं मतगणना 23 फरवरी को संपन्न हुआ था। जिसका सारणीकरण आज जिला पंचायत सभाकक्ष में रिटर्निंग आॅफिसर डाॅ. संजय कन्नौजे एवं अन्य अधिकारियों, अभ्यर्थियों एवं अभिकर्ताओं की उपस्थिति में संपन्न हुआ। इस दौरान रिटर्निंग आॅफिसर डाॅ. संजय कन्नौजे द्वारा जिला पंचायत के निर्वाचन क्षेत्र क्रमांक 01 के नवनिर्वाचित सदस्य श्रीमती कांति सोनेश्वरी एवं जिला पंचायत क्षेत्र क्रमांक 02 के नवनिर्वाचित सदस्य श्रीमती मीना उमाशंकर साहू, जिला पंचायत के निर्वाचन क्षेत्र क्रमांक 03 के नवनिर्वाचित सदस्य श्रीमती तारणी पुष्पेन्द्र चन्द्राकर, जिला पंचायत के निर्वाचन क्षेत्र क्रमांक 04 के नवनिर्वाचित सदस्य श्रीमती लक्ष्मी अशोक साहू, जिला पंचायत के निर्वाचन क्षेत्र क्रमांक 05 के नवनिर्वाचित सदस्य श्री गुलशन चंद्राकर, जिला पंचायत के निर्वाचन क्षेत्र क्रमांक 13 के नवनिर्वाचित सदस्य श्रीमती चंद्रिका यशवंत गंजीर, जिला पंचायत के निर्वाचन क्षेत्र क्रमांक 14 के नवनिर्वाचित सदस्य   तेजराम साहू को निर्वाचन का प्रमाण पत्र प्रदान किया गया। इस मौके पर पंचायत विभाग के उप संचालक आकाश सोनी सहित अन्य अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।

राजधानी में 48 करोड़ में बनेंगे तीन वर्किंग वूमन्स हॉस्टल
केंद्र सरकार की  विशेष  सहायता से  बनेगा  हाॅस्टल
रायपुर/शौर्यपथ /केन्ंद्र शासन की विशेष सहायता से छत्तीसगढ़ में कामकाजी महिलाओं के लिए 6 हाॅस्टल बनाए जाएंगे। इसके लिए केन्द्र  के महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा 202 करोड़ रुपए की राशि जारी की गई है। इनमें राजधानी में तीन के साथ ही नवा रायपुर में सेक्टर-16 में एक और बिलासपुर तथा सिरगिट्टी में सीएसआईडीसी को दो हॉस्टल के लिए राशि दी गई है।
राजधानी  रायपुर में  कामकाजी महिलाओंके लिए लगभग 48 करोड़ रुपए की लागत से  तीन वर्किंग वूमन्स हॉस्टल  बनाए  जाएंगे।  इस हॉस्टल की योजना वर्ष 2024 में केंद्र शासन को प्रस्ताव भेजा गया था। केंद्र  सरकार द्वारा 24 फरवरी को इस प्रस्ताव की मंजूरी दे  दी  गई  है।
नगर निगम आयुक्त श्री अविनाश मिश्रा ने बताया कि 250-250 बेड के इस हॉस्टल के बनने से राजधानी में कामकाजी महिलाओं को सुरक्षित आवासीय सुविधा सस्ती दर पर मिलेगी। तीनों हॉस्टल तीन माले की होगी। इनमें से प्रत्येक हॉस्टल में 250-250 बेड का इंतजाम किया जाएगा।   हॉस्टल के कमरे डबल बेडरूम वाले होंगे और उसमें अटैच वासरूम रहेगा। कोशिश रहेगी कि सभी हॉस्टल में मेस की सुविधा रहे, जिससे कामकाजी महिलाओं को नाश्ता व खाने के लिए बाहर न जाना पड़े। ये हॉस्टल रिहायशी इलाकों में ही  बनाए  जाएंगे,जिससे महिलाओं को आने-जाने में किसी भी प्रकार की दिक्कत न हो। आयुक्त ने कहा है कि प्रक्रियाओं को तेज करते हुए इन हॉस्टल को एक साल के अंदर तैयार करने की कोशिश की जाएगी। तीनों हॉस्टल की निर्माण एजेंसी निगम रहेगा और इसका संचालन व संधारण पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मोड पर किया जाएगा।
लगभग 10 हजार महिलाएं कर रही काम
रोजगार कार्यालय से  अनुसार राजधानी में लगभग 10 हजार महिलाएं बाहर से आकर सरकारी विभागों में कार्यरत हैं। उन्होंने बताया कि निजी संस्थानों में यह संख्या बढ़ सकती है।

  रायपुर /शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ विधानसभा की कार्य मंत्रणा समिति की बैठक आज विधानसभा के समिति कक्ष में आयोजित की गई। इस बैठक की अध्यक्षता विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने की।
बैठक में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत, उपमुख्यमंत्री श्री अरुण साव, संसदीय कार्य मंत्री श्री केदार कश्यप, वित्त मंत्री श्री ओ. पी. चौधरी सहित समिति के अन्य सदस्य उपस्थित थे।

रायपुर /शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ के ठंडे क्षेत्रों में स्ट्राबेरी की खेती लोकप्रिय होे रही है। अपने लजीज स्वाद और मेडिसिनल वेल्यू के कारण यह बड़े स्वाद के खाया जाता है। राज्य के जशपुर, अंबिकापुर, बलरामपुर क्षेत्र में कई किसान इसकी खेती कर रहे हैं। स्ट्राबेरी की अभी स्थानीय स्तर पर ही खपत हो रही है। इसकी खेती से मिलने वाले लाभ के कारण लगातार किसान आकर्षित हो रहे हैं। एक एकड़ खेत में इसकी खेती 3 से 4 लाख की आमदनी ली जा सकती है।
जशपुर जिले में 25 किसानों ने 6 एकड़ में स्ट्राबेरी की खेती की की शुरूआत की थी, अब 33 किसान 42 एकड़ में स्ट्रॉबेरी की खेती कर रहे हैं। जशपुर में विंटर डान प्रजाति की स्ट्राबेरी के पौधे लगाए गए हैं। इन किसानों को उद्यानिकी विभाग की योजना राष्ट्रीय बागवानी मिशन के तहत तकनीकी मार्गदर्शन और अन्य सहायता मिल रही है। किसानों का कहना है कि छत्तीसगढ़ में होने वाली स्ट्राबेरी की गुणवत्ता अच्छी है और साथ ही स्थानीय स्तर पर उत्पादन होने के कारण व्यापारियों को ताजे फल मिल रहे हैं। जिसके कारण उन्हें अच्छा प्रतिसाद मिल रहा है। नाबार्ड के एफएसपीएफ योजना के तहत रीड्स संस्था द्वारा बगीचा विकासखंड के ग्राम सन्ना, अकरीकाना, लोरो, कोपा, लरंगा और मैना गांव का चयन स्ट्रॉबेरी की खेती करवाई थी। साल 2023 में उत्पादन भी बेहतर हुआ था और उच्च क्वालिटी के स्ट्रॉबेरी निकले थे। इसे देखते हुए साल 2024 में उद्यान विभाग द्वारा किसानों को किसानों को स्ट्रॉबेरी के उत्पादन से जोड़ा गया और किसानों को विभाग द्वारा सहयोग भी दिया गया है। किसान रीड्स संस्था की देखरेख में  लगभग 60 किसान स्ट्रॉबेरी की खेती कर रहे हैं।
धान के मुकाबले 8 से 9 गुना फायदा
स्ट्राबेरी की खेती धान के मुकाबले कई गुना फायदे का सौदा है। जहां धान की खेती के लिए मिट्टी का उपजाऊपन के साथ साथ ज्यादा पानी और तापमान की जरूरत होती है वहीं स्ट्राबेरी के लिए सामान्य भूमि और सामान्य सिंचाई में भी यह लगाया जा सकता है। धान की खेती में जहां देख-रेख की ज्यादा जरूरत पड़ती है वहीं स्ट्राबेरी के लिए देख-रेख की कम जरूरत पड़ी है, सिर्फ इसके लिए ठंडे मौसम की जरूरत होती है। जहां धान से एक एकड़ में करीब 50 हजार की आमदनी ली जा सकती है वहीं स्ट्राबेरी की खेती में 3 से 4 लाख की आमदनी हो सकती है। इस प्रकार धान से 8-9 गुना आमदनी मिलती है। स्ट्राबेरी की खेती छत्तीसगढ़ के ठंडे क्षेत्रों में ली जा सकती है। इसके लिए राज्य के अंबिकापुर, कोरिया, बलरामपुर, सूरजपुर जशपुर का क्षेत्र उपयुक्त है।
जमीन का उपजाऊ होना आवश्यक नहीं
जशपुर के किसान श्री धनेश्वर राम ने बताया कि पहले उनके पास कुछ जमीन थी जो अधिक उपजाऊ नहीं थी वह बंजर जैसी थी। मुश्किल से कुछ मात्रा में धान की फसल हो पाती थी। जब उन्हें विशेषज्ञों द्वारा मार्गदर्शन मिलने पर फलंों की खेती प्रारंभ की। नाबार्ड संस्था से सहयोग भी मिला।

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