January 09, 2026
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शौर्यपथ

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उप मुख्यमंत्री अरुण साव के अनुमोदन के बाद नगरीय प्रशासन विभाग ने जारी किए आदेश

     रायपुर / शौर्यपथ / बीजापुर नगर पालिका क्षेत्र में शहरी विकास कार्यों को गति देने के उद्देश्य से नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने 12 विभिन्न कार्यों के लिए कुल 2 करोड़ 11 लाख 71 हजार रुपये की स्वीकृति प्रदान की है। यह मंजूरी उप मुख्यमंत्री एवं नगरीय प्रशासन मंत्री श्री अरुण साव के अनुमोदन के पश्चात संचालनालय द्वारा जारी की गई है। उप मुख्यमंत्री श्री साव ने सभी स्वीकृत कार्यों को गुणवत्तापूर्ण ढंग से तथा निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण करने के निर्देश दिए हैं।
नगरीय प्रशासन विभाग द्वारा वार्ड क्रमांक-12 के बाजार क्षेत्र में पाँच शेडों के निर्माण के लिए 47 लाख 60 हजार रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इसी तरह शांति नगर, वार्ड क्रमांक-7 में आर.सी.सी. पुलिया निर्माण हेतु 9 लाख 18 हजार रुपये की मंजूरी दी गई है। बैदरगुड़ा, वार्ड क्रमांक-15 तथा वार्ड क्रमांक-3 में आर.सी.सी. नाली निर्माण के लिए क्रमशः 9 लाख 18 हजार रुपये और 9 लाख 98 हजार रुपये स्वीकृत किए गए हैं।
कोकड़ापारा, वार्ड क्रमांक-3 में सामुदायिक शेड निर्माण के लिए 9 लाख 97 हजार रुपये तथा वार्ड क्रमांक-6 में स्थित सामुदायिक भवन में बाउंड्रीवॉल निर्माण के लिए 29 लाख 56 हजार रुपये की स्वीकृति प्रदान की गई है। इसके अलावा जयनगर शिविर, वार्ड क्रमांक-15 में सी.सी. रोड निर्माण के लिए 9 लाख 74 हजार रुपये और डिपोपारा, वार्ड क्रमांक-6 में सी.सी. रोड के लिए 9 लाख 95 हजार रुपये मंजूर किए गए हैं।
वार्ड क्रमांक-13 में जयस्तंभ चौक के समीप सांस्कृतिक शेड निर्माण के लिए 8 लाख 56 हजार रुपये स्वीकृत किए गए हैं। वहीं नगर पालिका कार्यालय परिसर में पार्किंग शेड एवं वाहन शेड निर्माण के लिए 19 लाख 45 हजार रुपये की मंजूरी दी गई है। इसके साथ ही वार्ड क्रमांक-6 के सामुदायिक भवन में शेड निर्माण एवं सीमेंट-कांक्रीट कार्य हेतु 29 लाख 61 हजार रुपये, तथा नगर पालिका परिसर में सीमेंट-कांक्रीट कार्य और शांति नगर, वार्ड क्रमांक-7 में सी.सी. सड़क निर्माण के लिए 18 लाख 93 हजार रुपये स्वीकृत किए गए हैं।
इन सभी विकास कार्यों के पूर्ण होने से बीजापुर नगर पालिका क्षेत्र में आधारभूत संरचनाओं का सुदृढ़ीकरण होगा तथा नागरिकों को बेहतर सार्वजनिक सुविधाएँ उपलब्ध होंगी, जिससे शहर के समग्र विकास को नई गति मिलेगी।

धान खरीदी केंद्रों में फैली अव्यवस्थाओं से किसान परेशान
ताम्रध्वज साहू ने धान खरीदी केंद्रों का किया निरिक्षण

   दुर्ग । शौर्यपथ / धान खरीदी केंद्रों में किसानों को हो रही समस्याओं का जायजा लेने मंगलवार को प्रदेश पूर्व गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू ने ग्राम तिरगा एवं ग्राम निकुम सहित आलबरस धान खरीदी केंद्रों का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने किसानों से बात कर समस्या को देख कर भाजपा सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि सुशासन की ढोल व राग अलाप रागने वाली किसानों की हितैषी बताने वाले मंत्री, विधायक कहा है, अन्नदाता की दर्द को सुनने वाली भाजपा नेता कहा है, शीत लहर व ठंड में खलिहानों में किसान रात रात भर अपनी धान फसल की बीते महीने भर से रखवाली कर रहे, वही सुबह होते ही ऑनलाइन व ऑफलाइन धान बेचने रोज चक्कर काट रहे, लेकिन पूरे लचर सरकारी सिस्टम व कम लिमिट धान खरीदी से समय पर ना धान बिक रहा है, ना तो धान का उठाव हो रहा है, तिरगा में मजबूरी में गौठान धान खरीदी हो रही है,
किसानों ने बताया कि उन्हें समय पर टोकन नहीं मिल पा रहा है, जिसके कारण धान बेचने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इस पर पूर्व मंत्री ताम्रध्वज साहू ने कहा कि प्रशासन किसानों की समस्याओं के समाधान को लेकर गंभीर नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि पूरे प्रदेश में किसानों को धान विक्रय के दौरान अनेक परेशानियों से जूझना पड़ रहा है।

साहू ने कहा कि किसानों को उनकी उपज का न तो समय पर खरीदी लाभ मिल पा रहा है और न ही उचित मूल्य। उन्होंने तौल में भी गड़बड़ी की शिकायतों को गंभीर बताया। निरीक्षण के दौरान आमटी निवासी किसान पुरूषोतम चौधरी, दशरथ देशमुख खाडा ने बताया कि उसके धान है लेकिन तीसरा टोकन नहीं दिया गया है। जबकि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में किसानों का दाना-दाना धान खरीदा जाता था। वहीं उन्होंने खरीदी सीमा (लिमिट) बढ़ाने की मांग रखी। धान खरीदी की लिमिट कम होने के कारण ही किसान अपनी पूरी उपज नहीं बेच पा रहे हैं, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
धान की मीलिंग करने में राइस मिलराें ने जताई है असमर्थता
उन्होंने कहा कि धान मिलिंग के लिए हमारी कांग्रेस सरकार ने प्रति क्विंटल 120 रुपए देने का निर्णय लिया था, जिसका परिणाम यह हुआ था कि प्रदेशभर में 700 नई राइस मिलें खुली थीं. अब सरकार ने मिलर के लिए 120 रुपए को घटाकर 60 रुपए कर दिया है. इस कारण राइस मिलर हड़ताल पर थे. धान सोसायटी में जाम है. मिलरों को 120 की जगह 60 रुपए देने के फ़ैसले के बाद विभिन्न ज़िलों में राइस मिलर एसोसिएशन धान की मीलिंग करने में असमर्थता व्यक्त करने लगे हैं.

धान खरीदी केंद्रों में जारी नहीं हो रहा टोकन, किसान परेशान
पूर्व गृहमंत्री श्री साहू ने कहा कि धान खरीदी केंद्रों में टोकन नहीं जारी किया जा रहा है. अभी वर्तमान में समिति में 31 जनवरी तक टोकन कट गया है जबकि हर समिति 200 से 4000से अधिक किसानों ने अब तक टोकन नहीं मिला है निकुम में 400 किसानो टोकन महीनों बाद भी टोकन नहीं मिल है. धान की कीमत का भुगतान 3217 रुपए प्रति क्विन्टल में करें, क्योंकि 3100 रुपए भाजपा ने अपने चुनावी वायदे में कहा था. केन्द्र सरकार ने धान का समर्थन मूल्य 117 रुपए बढ़ा दिया है. इस कारण इस वर्ष धान की खरीदी 3100 रुपए से बढ़ाकर 3217 रुपए किया जाए. कांग्रेस के समय भी कांग्रेस ने धान का समर्थन मूल्य 2500 देने का वादा किया था, लेकिन समर्थन मूल्य बढ़ने पर कांग्रेस ने 2640 रुपए में धान खरीदा था. भाजपा द्वारा किसानों को एकमुश्त भुगतान का वादा किया गया था पर वर्तमान में केवल 2300 के दर से भुगतान किया जा रहा है,
इस अवसर पर पूर्व गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू, उपाध्यक्ष जनपद पंचायत दुर्ग राकेश हिरवानी,पूर्व जनपद अध्यक्ष दुर्ग देवेंद्र देशमुख, पूर्व अध्यक्ष सेवा सहकारी समिति निकुम धरम दास साहू, वरिष्ठ कांग्रेसी तारा शर्मा, पूर्व जनपद सदस्य रूपेश देशमुख, जनपद सदस्य दामिनी साहू, पूर्व जनपद सदस्य टिकेश्वरी देशमुख, सरपंच तिरगा घसिया राम साहू, सरपंच खाड़ा नंद कुमार साहू,बाबू लाल देशमुख, दुस्यंत देवांगन,रमेश साहू , पूर्व सरपंच आशा देशमुख, देवीलाल देशमुख, प्यारे लाल देशमुख,सहित किसान गण उपस्थित थे।

दुर्ग। शौर्यपथ विशेष

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय जहां प्रदेश में सुशासन का ढोल पीट रहे हैं, वहीं दुर्ग नगर पालिक निगम में आयुक्त सुमित अग्रवाल की कार्यप्रणाली जमीनी हकीकत को पूरी तरह झुठलाती नजर आ रही है। शहर में अवैध कब्जाधारियों और गैर अनुमति प्राप्त बाजारों पर जिस तरह निगम प्रशासन ने मौन समर्थन की मुद्रा अपना ली है, वह न केवल प्रशासनिक निष्क्रियता का प्रमाण है बल्कि आने वाले समय में एक बड़े शहरी विवाद की पटकथा भी लिख रही है।
दुर्ग जिले के नागरिक सुपेला संडे बाजार की कहानी से भलीभांति परिचित हैं—जब बाजार छोटा था तब प्रशासन ने आंख मूंद ली, और जब वह विकराल हो गया तो हटाने में जिला प्रशासन और भिलाई नगर निगम को पसीने आ गए। व्यापारियों में विवाद हुआ, कानून व्यवस्था प्रभावित हुई, लेकिन आज भी वह बाजार वैधानिक अनुमति के बिना संचालित होता दिखाई देता है।
अब वही गलती दुर्ग में दोहराई जा रही है
दुर्ग नगर निगम मुख्य कार्यालय के पीछे चर्च रोड क्षेत्र में शनिवार को बिना किसी अनुमति के अवैध बाजार का संचालन प्रारंभ हो चुका है। महज दो महीनों में यह बाजार चर्च चौक से सुराना कॉलेज मार्ग तक फैल चुका है। शुरुआत छोटे स्तर पर हुई, लेकिन अब इसमें भिलाई के व्यापारियों का दखल लगातार बढ़ रहा है, जिससे स्थानीय व्यापार और यातायात दोनों पर असर पडऩे लगा है।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि निगम प्रशासन को इस अवैध बाजार की पूरी जानकारी होने के बावजूद अतिक्रमण विभाग द्वारा व्यापारियों से गंदगी के नाम पर ?50 शुल्क वसूली शुरू कर दी गई है। सवाल यह उठता है कि जब बाजार अवैध है, तो निगम किस अधिकार से शुल्क वसूल रहा है? क्या यह अवैध गतिविधियों को वैधानिक जामा पहनाने की कोशिश नहीं है?
छोटे कर्मचारियों पर सख्ती, बड़े अतिक्रमण पर मौन
शहर में यह चर्चा आम है कि निगम आयुक्त सुमित अग्रवाल छोटी-छोटी बातों पर कर्मचारियों को नोटिस थमाने में अपनी प्रशासनिक व संवैधानिक शक्तियों का भरपूर उपयोग करते हैं, लेकिन अवैध बाजार और बढ़ते अतिक्रमण के मामलों में उनकी भूमिका पूरी तरह निष्क्रिय दिखाई देती है।
पिछले छह महीनों से कपड़ा लाइन का अतिक्रमण हटाने में निगम प्रशासन पूरी तरह विफल रहा है, जबकि 'मोर शहर मोर जिम्मेदारीÓ योजना के तहत सौंदर्यीकरण कार्य कर रही संस्था को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। शहर के लगभग हर क्षेत्र में अतिक्रमण का बोलबाला है, लेकिन प्रेस विज्ञप्तियों में "सख्त कार्रवाई" के दावे किए जा रहे हैं।
आखिर किसे गुमराह कर रहे हैं आयुक्त?
सवाल यह है कि निगम आयुक्त सुमित अग्रवाल इन दावों से किसे गुमराह कर रहे हैं—शहर की जनता को, जिला प्रशासन को या प्रदेश सरकार को? एक प्रशासनिक अधिकारी का कार्यकाल भले ही अधिकतम तीन वर्ष का हो, लेकिन इस दौरान जो अतिक्रमण जड़ जमा लेगा, उसे हटाने में आने वाले समय में प्रशासन को गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा।
राजनीतिक मौन भी सवालों के घेरे में
और भी आश्चर्यजनक यह है कि जब शहर में भाजपा की शहरी सरकार है, स्थानीय विधायक प्रदेश सरकार में मंत्री हैं, तब भी अतिक्रमण के बढ़ते स्तर पर जनप्रतिनिधियों की चुप्पी शहर में चर्चा का विषय बनी हुई है। आने वाले विधानसभा चुनावों में यही अतिक्रमण सत्ताधारी दल के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।
सुशासन की कसौटी पर दुर्ग नगर निगम
यदि मुख्यमंत्री का सुशासन केवल फाइलों और मंचों तक सीमित नहीं है, तो दुर्ग नगर निगम में आयुक्त सुमित अग्रवाल की भूमिका की निष्पक्ष समीक्षा अनिवार्य है। अन्यथा यह कहा जाना गलत नहीं होगा कि दुर्ग में सुशासन नहीं, बल्कि 'मौन समर्थन का शासनÓ चल रहा है, जहां अवैध कब्जाधारी फल-फूल रहे हैं और प्रशासन आंख मूंदे बैठा है।

जेम पोर्टल की पारदर्शिता पर सवाल, तय ठेके की आशंका — कांग्रेस ने मांगी निष्पक्ष जांच

रायपुर/शौर्यपथ।
छत्तीसगढ़ में सरकारी टेंडर प्रक्रिया की पारदर्शिता एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। बालोद जिले में प्रस्तावित नेशनल लेवल रोवर-रेंजर जंबूरी 2026 के आयोजन को लेकर कांग्रेस ने गंभीर आरोप लगाए हैं। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महामंत्री सुबोध हरितवाल ने कहा है कि स्कूल शिक्षा विभाग से जुड़े इस आयोजन में टेंडर खुलने से पहले ही निजी कंपनी द्वारा काम शुरू कर दिया जाना, यह संकेत देता है कि ठेका पहले से ही तय कर लिया गया था।
कांग्रेस के अनुसार जंबूरी आयोजन का टेंडर 03 जनवरी को दोपहर 12 बजे जेम पोर्टल पर खुलना था, लेकिन उससे पहले ही शासकीय पॉलिटेक्निक कॉलेज, बालोद में एक निजी कंपनी द्वारा सामग्री, ट्रक और श्रमिकों के साथ काम शुरू कर दिया गया। मौके पर भारत किराया भंडार की मौजूदगी ने पूरे घटनाक्रम को और संदिग्ध बना दिया।

जब टेंडर खुला ही नहीं, तो काम किसके आदेश पर?

कांग्रेस ने सवाल उठाया है कि जब टेंडर प्रक्रिया पूरी नहीं हुई थी, तब किसी कंपनी को काम शुरू करने की अनुमति किसके निर्देश पर दी गई। जेम पोर्टल जैसी ऑनलाइन प्रणाली के बावजूद यदि किसी कंपनी को पहले से भरोसा था कि काम उसी को मिलेगा, तो यह प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सीधा प्रश्नचिह्न है।
सुबोध हरितवाल ने कहा कि जो अन्य निविदाकर्ता नियमों का पालन करते हुए टेंडर खुलने का इंतजार कर रहे थे, उनके साथ संभावित रूप से अन्याय हुआ है। उन्होंने पूछा कि यदि टेंडर की जानकारी पहले ही लीक हो गई थी, तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा।

अधिकारी का फोन स्विच ऑफ, संदेह और गहराया
मामले में संदेह तब और बढ़ गया जब टेंडर दस्तावेज में दर्ज संबंधित अधिकारी के मोबाइल नंबर पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन तय समय पर फोन स्विच ऑफ मिला। कांग्रेस का कहना है कि यह स्थिति जवाबदेही से बचने की कोशिश को दर्शाती है।

स्कूल शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव की भूमिका पर सवाल
कांग्रेस ने इस पूरे प्रकरण में स्कूल शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए हैं। जंबूरी का आयोजन 9 से 13 जनवरी तक प्रस्तावित है और इसकी सीधी जिम्मेदारी स्कूल शिक्षा विभाग की है। ऐसे में सवाल यह है कि क्या मंत्री स्तर पर जानकारी होने के बावजूद इस पर ध्यान नहीं दिया गया, या फिर अधिकारियों और कंपनी के बीच बनी व्यवस्था को मौन सहमति दी गई।
कांग्रेस ने कटाक्ष करते हुए कहा कि बच्चों और युवाओं से जुड़े कार्यक्रमों में पारदर्शिता और अनुशासन शासन की प्राथमिक जिम्मेदारी होती है, और यदि ऐसे आयोजनों में ही नियमों की अनदेखी हो, तो यह गंभीर चिंता का विषय है।

केवल एक आयोजन नहीं, पूरी टेंडर प्रणाली पर सवाल
कांग्रेस का कहना है कि बालोद का यह मामला केवल एक जंबूरी आयोजन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रदेश में जेम पोर्टल के माध्यम से होने वाली टेंडर प्रक्रिया की वास्तविक स्थिति को उजागर करता है। पार्टी ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यह स्पष्ट किया जाए कि टेंडर खुलने से पहले काम शुरू होने की अनुमति किसने दी। इस संबंध में आयोजित पत्रकार वार्ता में प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर, सुरेंद्र वर्मा तथा अमित तिवारी उपस्थित रहे।

नई दिल्ली / शौर्यपथ /किसानों को केंद्र में रखकर भारत सरकार की नीतियों को लागू करने, समय पर उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा मिट्टी के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के उद्देश्य से भारत सरकार के उर्वरक विभाग ने नई दिल्ली में चिंतन शिविर का आयोजन किया. कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री श्री जेपी नड्डा ने कहा कि माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने किसानों को हमेशा ही केंद्र में रखा है. इसीलिए हमारी नीतियों और फैसलों से किसानों का जीवन आसान बनना ही हमारी प्राथमिकता है.
उन्होंने कहा कि तमाम विकट परिस्थितियों के बाद भी उर्वरक विभाग ने किसानों की उर्वरक जरूरतों को पूरा करने का कार्य समय पर किया है. उर्वरक विभाग के उठाए गए किसान हितैषी कदमों का ही परिणाम है कि हमने आयात के साथ-साथ उत्पादन में भी इस वर्ष रिकॉर्ड बनाया है.

उन्होंने कहा कि उर्वरकों के संतुलित उपयोग और खेती के इतर उनके दुरुपयोग की समस्याओं से निपटने के लिए भारत सरकार के अलग-अलग विभाग मिलकर काम करेंगे.
शिविर में राज्यमंत्री श्रीमती अनुप्रिया पटेल ने कहा कि माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी चाहते हैं कि भारत दुनिया के लिए खाद्य भंडार का केंद्र बने। आगे उन्होंने कहा कि इस चिंतन से सरकार को कुछ ऐसे विचार मिलेंगे जो भारत को 2047 तक विकसित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे.
उर्वरक सचिव रजत कुमार मिश्र ने कहा कि सरकार, पीएसयू और प्राइवेट सेक्टर ने किसानों को मंथन के केंद्र में रखा है. ऐसे में हमें उम्मीद है कि बेहतर परिणाम मिलेंगे. हमने इस शिविर को एक ऐसा माध्यम बनाया है जिससे प्रत्येक विचार को मंच मिल सके.
राष्ट्रीय कृषि विज्ञान परिसर, नई दिल्ली में आयोजित एक दिवसीय चिंतन शिविर के दौरान 15 अलग-अलग समूहों ने आपस में विचार विमर्श कर भारत सरकार को कुछ कारगर सुझाव दिए हैं. केंद्रीय उर्वरक और रसायन मंत्री, राज्य मंत्री और सचिव उर्वरक ने सभी समूहों के साथ अलग-अलग बैठकर चर्चा की और उनके सुझावों को सुना. इन समूहों ने नए दौर में उर्वरक, उर्वरक उत्पादन में आत्मनिर्भरता, किसानों से संवाद, उर्वरक इकोसिस्टम को डिजिटल तरीकों से बेहतर बनाने, पोषण आधारित सब्सिडी सहित 15 विषयों पर विमर्श किया.
चिंतन शिविर में उर्वरक विभाग के सभी 9 पीएसयू के वरिष्ठ अधिकारी, सहकारी कंपनियों, निजी कंपनियों के प्रतिनिधि शामिल रहे.

जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक दुर्ग में अधिकारियों एवं 73 शाखा प्रबंधकों की महत्वपूर्ण बैठक

दुर्ग / शौर्यपथ /
जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक मर्यादित, दुर्ग के अध्यक्ष माननीय श्री प्रीतपाल बेलचंदन द्वारा बैंक मुख्यालय में अधिकारियों एवं शाखा प्रबंधकों की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में धान खरीदी, परिवहन व्यवस्था, लिंकिंग वसूली, कालातीत ऋण वसूली तथा किसानों को नगद भुगतान जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से समीक्षा की गई।
बैठक में मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री हृदेश शर्मा, वर्ग-1 अधिकारी श्री एस.के. निवसरकर, अतिरिक्त मुख्य पर्यवेक्षक सुश्री कुसुम ठाकुर, अधीक्षक श्री के.के. नायक, नोडल अधिकारी बेमेतरा श्री राजेन्द्र वारे तथा नोडल अधिकारी बालोद श्री सी.आर. रावटे उपस्थित रहे।

374 उपार्जन केंद्रों में 12 लाख मीट्रिक टन से अधिक धान की खरीदी
समीक्षा के दौरान बताया गया कि 03 जनवरी 2026 की स्थिति में बैंक के कार्यक्षेत्र अंतर्गत जिला दुर्ग, बालोद एवं बेमेतरा के कुल 374 उपार्जन केन्द्रों में 12,03,306.64 मीट्रिक टन धान की खरीदी की जा चुकी है। इसमें से 3,57,165.64 मीट्रिक टन धान का परिवहन हो चुका है, जबकि उपार्जन केन्द्रों में अभी 10,81,487 मीट्रिक टन धान शेष है।
अधिकारियों ने अवगत कराया कि 281 उपार्जन केन्द्रों में बफर लिमिट से अधिक धान संग्रहित है, वहीं 25 उपार्जन केन्द्रों में 40,000 क्विंटल से अधिक धान का भंडारण है, जिससे शीघ्र परिवहन की आवश्यकता बनी हुई है।

शाखा प्रबंधकों ने रखी जमीनी समस्याएं
इसके पश्चात बैंक मुख्यालय में शाखा प्रबंधकों की बैठक आयोजित की गई, जिसमें धान खरीदी के दौरान जमीनी स्तर पर आ रही समस्याओं पर चर्चा की गई। शाखा प्रबंधकों ने बताया कि उपार्जन केन्द्रों की दैनिक खरीदी सीमा के कारण पंजीकृत किसानों द्वारा अपने उपार्जित धान का 31 जनवरी 2025 तक विक्रय कर पाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। इस समस्या के समाधान हेतु धान खरीदी की दैनिक लिमिट बढ़ाने के लिए संबंधित शीर्ष कार्यालयों को अवगत कराने की जानकारी बैठक में दी गई। बैठक में बैंक कार्यक्षेत्र की कुल 73 शाखाओं के शाखा प्रबंधक उपस्थित रहे।
बैठक के अंत में अध्यक्ष श्री प्रीतपाल बेलचंदन ने धान खरीदी एवं परिवहन कार्य को प्राथमिकता के साथ तेज करने, किसानों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करने तथा बैंकिंग कार्यों में पारदर्शिता और अनुशासन बनाए रखने के निर्देश दिए।

कलेक्टर तुलिका प्रजापति ने किया योजनागत कार्यों का निरीक्षण, मत्स्य उत्पादन व रोजगार में उल्लेखनीय वृद्धि

मोहला / शौर्यपथ /
प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना के अंतर्गत जिले में संचालित विभिन्न कार्यों का कलेक्टर श्रीमती तुलिका प्रजापति ने स्थल भ्रमण कर निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने तालाब निर्माण, बायोफ्लॉक पॉण्ड एवं मछली बीज उत्पादन हेचरी की प्रगति की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
कलेक्टर ने विकासखंड मानपुर के ग्राम वासड़ी (घोटिया) में हितग्राही रोहित सलामे द्वारा निजी भूमि पर स्थापित बायोफ्लॉक पॉण्ड का अवलोकन किया। प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना के अंतर्गत उन्हें 16.80 लाख रुपये की अनुदान स्वीकृति प्रदान की गई है। वर्तमान में 0.20 हेक्टेयर क्षेत्र में मछली पालन से प्रतिवर्ष लगभग 3 लाख रुपये की आमदनी प्राप्त हो रही है, जिससे हितग्राही की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ हुई है।
इसके पश्चात कलेक्टर ने मछली पालन विभाग द्वारा 4.00 हेक्टेयर शासकीय भूमि पर निर्मित की जा रही जिले की प्रथम मछली बीज उत्पादन हेचरी का निरीक्षण किया। इस हेचरी से प्रतिवर्ष लगभग 1 करोड़ स्टैंडर्ड फ्राई का उत्पादन किया जाएगा। हेचरी निर्माण हेतु शासन द्वारा 25 लाख रुपये की स्वीकृति प्रदान की गई है। वर्तमान में 13 तालाबों का निर्माण पूर्ण हो चुका है तथा शेष निर्माण कार्य प्रगतिरत है। कलेक्टर ने निर्माण कार्य को निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण करने के निर्देश दिए। हेचरी के पूर्ण होने से जिले के मछली पालकों को शासकीय दर पर गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध होगा और जिला मत्स्य बीज उत्पादन में आत्मनिर्भर बनेगा।
निरीक्षण के क्रम में ग्राम खड़गांव, विकासखंड मानपुर में कचरू राम सलामे के निजी भूमि पर 2.00 हेक्टेयर क्षेत्र में किए जा रहे नवीन तालाब निर्माण कार्य का भी अवलोकन किया गया। इस परियोजना के लिए 14 लाख रुपये की स्वीकृति प्रदान की गई है, जिसमें तालाब निर्माण पूर्ण होने के पश्चात 60 प्रतिशत अनुदान दिया जाएगा। तालाब से प्रतिवर्ष लगभग 10 लाख रुपये की आय के साथ 5 से 6 लोगों को रोजगार मिलने की संभावना है।
इसी क्रम में ग्राम गिधाली, विकासखंड मोहला में श्रीमती संतोषी बाई मण्डावी एवं श्री हमेन्द्र मण्डावी द्वारा किए जा रहे तालाब एवं बायोफ्लॉक पॉण्ड निर्माण कार्यों का निरीक्षण किया गया। श्रीमती संतोषी बाई को 1.00 हेक्टेयर में नवीन तालाब एवं 0.10 हेक्टेयर में बायोफ्लॉक पॉण्ड निर्माण की स्वीकृति दी गई है, वहीं श्री हमेन्द्र मण्डावी को 0.10 हेक्टेयर क्षेत्र में बायोफ्लॉक पॉण्ड निर्माण की स्वीकृति प्रदान की गई है। इन इकाइयों से प्रतिवर्ष लगभग 10 टन मछली उत्पादन के साथ 4 से 5 लोगों को रोजगार उपलब्ध होगा।
कलेक्टर श्रीमती प्रजापति ने कहा कि प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना के माध्यम से केज कल्चर, बायोफ्लॉक एवं आधुनिक तालाब निर्माण जैसी तकनीकों को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे किसानों एवं मछुआरों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हो रही है। इससे जिले की मत्स्य उत्पादन क्षमता में निरंतर इजाफा हो रहा है और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर सृजित हो रहे हैं।
निरीक्षण के दौरान मछली पालन विभाग के सहायक संचालक एस.के. साहू, सहायक मत्स्य अधिकारी डी.के. उर्वशा, मत्स्य निरीक्षक गौरांक वर्मा सहित विभागीय अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

दुर्ग / शौर्यपथ।
पैदल लड़खड़ाते कदमों और बैसाखियों के सहारे कार्यक्रम स्थल तक पहुँचे दिव्यांगजन, जब ट्रायसिकल, व्हीलचेयर और बैसाखी लेकर मुस्कुराते हुए अपने घर लौटे, तो यह दृश्य मानवता और सेवा भावना का जीवंत उदाहरण बन गया। अवसर था जन समर्पण सेवा संस्था, दुर्ग के सेवा कार्यों के 9 वर्ष पूर्ण होने का।

जन समर्पण सेवा संस्था द्वारा शहर के जरूरतमंद दिव्यांगजनों को ट्रायसिकल, व्हीलचेयर और बैसाखी का वितरण किया गया। भूखे को भोजन कराना और निःशक्तों को सहारा देना सबसे बड़ा मानव धर्म है—इसी मूल भावना के साथ संस्था बीते 9 वर्षों से लगातार सेवा कार्यों में जुटी हुई है। “कोई भूखा न सोए” संकल्प के तहत 1 जनवरी 2017 से आज तक बिना एक दिन रुके, दुर्ग रेलवे स्टेशन सहित शहर के विभिन्न स्थानों पर प्रतिदिन 200 से अधिक गरीब, असहाय और दिव्यांगजनों को निःशुल्क भोजन एवं आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है।

संस्था के सदस्य सुजल शर्मा एवं अख्तर खान ने बताया कि शहर में ऐसे कई दिव्यांगजन हैं, जो अब तक पैदल या बैसाखी के सहारे जीवन यापन करने को मजबूर थे। उनकी आवश्यकता को समझते हुए संस्था के 9 वर्ष पूर्ण होने तथा संस्था की विशेष सहयोगी समाजसेविका सुश्री पायल जैन के जन्मदिवस के अवसर पर 2 जनवरी को सहायक उपकरणों का वितरण किया गया।

इस अवसर पर सुनीता राम (सुपेला, भिलाई) एवं दीपमाला देवराज (अटल आवास, उरला, दुर्ग) को ट्रायसिकल, अनंत कुमार पवार (हाउसिंग बोर्ड, भिलाई) को व्हीलचेयर तथा राजेश कुमार साहू (दुर्ग रेलवे स्टेशन) को बैसाखी प्रदान की गई। इन साधनों के माध्यम से अब वे सुरक्षित रूप से आवागमन कर सकेंगे और आत्मनिर्भर होकर अपने जीवन यापन की दिशा में आगे बढ़ पाएंगे।

संस्था द्वारा अब तक 9 वर्षों में 113 बैसाखी, 59 व्हीलचेयर एवं 56 ट्रायसिकल का वितरण दिव्यांगजनों को किया जा चुका है, जो अपने आप में एक उल्लेखनीय और प्रेरणादायी उपलब्धि है।

कार्यक्रम में यह संदेश भी दिया गया कि दिव्यांगता कोई अभिशाप नहीं, बल्कि आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच के साथ यह प्रेरणा बन सकती है। शारीरिक अभाव को यदि शक्ति में बदला जाए, तो वही व्यक्ति समाज के लिए उदाहरण बन जाता है।

जन समर्पण सेवा संस्था विगत 9 वर्षों से गरीबों, भूखों, दिव्यांगों, विक्षिप्तों, गौमाता तथा पशु-पक्षियों की सेवा में सतत रूप से सक्रिय है। संस्था द्वारा न केवल ट्रायसिकल और व्हीलचेयर, बल्कि कमोड चेयर, मेडिकल पलंग और अन्य आवश्यक सहायता भी समय-समय पर उपलब्ध कराई जाती रही है।

संस्था के सेवा कार्य दुर्ग तक सीमित न रहकर अब पूरे प्रदेश के लिए प्रेरणा बन चुके हैं। दीपावली पर बुजुर्गों और बच्चों को नए वस्त्र व मिष्ठान वितरण, पशु-पक्षियों के लिए हजारों सकोरे एवं कोटना वितरण तथा प्रतिदिन रात्रि में निःशुल्क भोजन सेवा जैसी गतिविधियाँ संस्था की पहचान बन चुकी हैं।

9 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर संस्था द्वारा विशेष सेवा अभियान के अंतर्गत विगत तीन दिनों से ठंड से बचाव हेतु फुटपाथ पर रहने वाले जरूरतमंदों को कंबल, भोजन एवं मिष्ठान का वितरण भी किया जा रहा है।

इस अवसर पर संस्था अध्यक्ष योगेन्द्र शर्मा बंटी सहित संदीप वोरा, विवेक मिश्रा, मनोज शर्मा, विकास पुरोहित, आशीष मेश्राम, अर्जित शुक्ला, प्रतिभा पुरोहित, रूपल गुप्ता, सुजल शर्मा, अख्तर खान, संजय सेन, मोहित पुरोहित, ऋषि गुप्ता, राजेन्द्र ताम्रकार, मृदुल गुप्ता, अंकेश पेशवानी, वाशु शर्मा, गौरव बजाज, प्रवीण पींचा, अनश खान, अंश पांडेय, सुधीर कुमार, तरेंद्र, विकास सापेकर, आसिफ खान, संदीप साहू, हरीश सेन, दद्दू ढीमर, शुभम सेन सहित संस्था के अनेक सदस्य उपस्थित रहे।

  रायपुर/ शौर्यपथ / तमनार घटना पर महिला कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद फूलोदेवी नेताम ने कहा कि महिला टीआई और महिला आरक्षक के साथ जो घटना घटित हुआ उस घटना का कड़े शब्दों में निंदा करती हूं। रायगढ़ जिले के तमनार क्षेत्र में गारे पेलमा सेक्टर-1 में जिंदल स्टील को ओपन कास्ट कोल माइंस आवंटित की गई है। इसके लिए 8 दिसंबर को जनसुनवाई आयोजित की गई थी, लेकिन क्षेत्र के ग्रामीण, आदिवासी और स्थानीय निवासी शुरू से ही इस खदान का विरोध कर रहे हैं। प्रभावित 14 गांवों के लोग अपनी पुश्तैनी जमीन देने को तैयार नहीं हैं। उनका कहना है कि कोयला उत्खनन से खेती-बाड़ी, जंगल और पर्यावरण पूरी तरह तबाह हो जाएंगे। तभी से वहां के ग्रामीण और आदिवासी सरकार से वार्तालाप करके समाधान चाहती थी लेकिन सरकार में बैठे जिम्मेदार एक भी व्यक्ति या प्रशासन की ओर से एक भी अधिकारी आंदोलनकारियों से भेंट मुलाकात कर समाधान के लिए प्रयत्न नहीं किये, जिसके कारण भारतीय जनता पार्टी की सरकार में प्रदेश में लगातार अराजकता का माहौल निर्मित हो रहा है। कानून व्यवस्था आईसीयू में है। आंदोलनकारी पर जो लाठी चलाई गई वह भी दुखद है, महिला पुलिस कर्मियों के ऊपर जो हृदय विदारक घटना घटित हुआ वह भी दुखद है। प्रदेश में ऐसा माहौल कभी देखने को नहीं मिला था।
महिला कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद फूलोदेवी नेताम ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी के डबल इंजन की सरकार में जनता लगातार आक्रोशित क्यों हो रहे है, और आक्रामक रूप से कानून को अपने हाथ में लेने को क्यों मजबूर हो रहे हैं? आज प्रदेश की स्थिति चिंताजनक हो गई है। माहौल तनावपूर्ण होता जा रहा है। भारतीय जनता पार्टी के सरकार ने कसम खा रखी है कि यह जल, जंगल, जमीन सिर्फ पूंजीपतियों के लिए है, यदि इस पर कोई भी मुखरता से अपनी बात रखते हैं या आंदोलन करते है तो आंदोलनकारी से सरकार बिना संवाद के लाठी, डंडा बरसाया जा रहा है। डराया जा रहा है, धमकाया जा रहा है, यहां तक की बड़ी गाड़ियों से आंदोलनकारी को कुचल करके करने कभी षड्यंत्र कर रहे हैं जिनके परिणाम है आंदोलनकारियों में से एक व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है, उसके भी जिम्मेदार भारतीय जनता पार्टी की सरकार है। भारतीय जनता पार्टी की सरकार में महिला टीआई महिला आरक्षक सुरक्षित नहीं है तो सामान्य महिला सुरक्षा की कल्पना नहीं की जा सकती।

  भिलाई/रायपुर / छत्तीसगढ़ राज्य की जूनियर बालक एवं बालिका फेंसिंग टीम 33वीं जूनियर राष्ट्रीय फेंसिंग चैंपियनशिप में भाग लेने हेतु कटक (उड़ीसा) के लिए रवाना हो गई है। यह राष्ट्रीय प्रतियोगिता उड़ीसा फेंसिंग एसोसिएशन द्वारा फेंसिंग एसोसिएशन ऑफ इंडिया के तत्वावधान में जवाहरलाल नेहरू इंडोर स्टेडियम, कटक में 5 जनवरी से 10 जनवरी 2026 तक आयोजित की जा रही है। इस चैंपियनशिप में छत्तीसगढ़ राज्य की 28 सदस्यीय जूनियर बालक एवं बालिका टीम भाग ले रही है।
उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ जूनियर फेंसिंग टीम के चयन हेतु 14 दिसंबर 2025 को इस्पात क्लब, सेक्टर-1, भिलाई में चयन स्पर्धा आयोजित की गई थी, जिसमें खिलाड़ियों के प्रदर्शन के आधार पर संभावित खिलाड़ियों का चयन किया गया। इसके पश्चात चयनित खिलाड़ियों के लिए 20 दिसंबर 2025 से 3 जनवरी 2026 तक बहुउद्देशीय हॉल, इस्पात क्लब, भिलाई में विशेष प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया गया। प्रशिक्षण शिविर का समापन 3 जनवरी 2026 को छत्तीसगढ़ प्रदेश फेंसिंग एसोसिएशन के महासचिव श्री समीर खान द्वारा किया गया, जिसके बाद अंतिम टीम की घोषणा की गई।
जूनियर बालक वर्ग में फॉइल इवेंट में हिमेश साहू, आयुष नेताम, अंशुल फब्यानी और हर्ष रजक, ईपी इवेंट में ऋषभ गुप्ता, जनार्दन साहू, दीपांशु साहू और भूपेंद्र कुमार यादव तथा सैबर इवेंट में नवीन साहू, विनीत साहू, अनुज चौहान और करनजीत सिंह आनंद का चयन किया गया है। टीम के प्रशिक्षक श्री प्रवीण कुमार गाँवरे और प्रबंधक श्री मोहनीश वर्मा हैं।
जूनियर बालिका वर्ग में फॉइल इवेंट में कु. लावण्या साहू, कु. अंशिका यादव, कु. पी. दिव्या रेड्डी और कु. धारणा ठाकुर, ईपी इवेंट में कु. रश्मान कौर धीमान, कु. रुपाली साहू, कु. रीबा बैनी और कु. तुलसी मानिकपुरी तथा सैबर इवेंट में कु. चांदनी साहू, कु. मर्लिन मेरी शिबू, कु. नीतू यादव और कु. तेजस्वनी मोहिले का चयन किया गया है। बालिका टीम के प्रशिक्षक श्री व्ही. जॉनसन सोलोमन एवं प्रबंधक कु. मोना पटेल हैं।
राष्ट्रीय प्रतियोगिता में भाग लेने हेतु खेल एवं युवा कल्याण विभाग, छत्तीसगढ़ शासन द्वारा खिलाड़ियों को आने-जाने का रेलवे किराया, दैनिक यात्रा भत्ता एवं ट्रैकसूट प्रदान किया गया है। वहीं छत्तीसगढ़ प्रदेश फेंसिंग एसोसिएशन द्वारा खिलाड़ियों एवं अधिकारियों को टी-शर्ट उपलब्ध कराई गई है। टीम 3 जनवरी 2026 को बस द्वारा कटक के लिए रवाना हुई है और 11 जनवरी 2026 को वापस लौटेगी।
इस अवसर पर छत्तीसगढ़ प्रदेश फेंसिंग एसोसिएशन के अध्यक्ष श्री एस. प्रकाश (आईएएस) ने दूरभाष के माध्यम से खिलाड़ियों को शुभकामनाएँ देते हुए उत्कृष्ट प्रदर्शन कर पदक प्राप्त करने की कामना की। साथ ही एसोसिएशन के चेयरमेन श्री सुनील रामदास अग्रवाल, कार्यकारी अध्यक्ष श्री अजीत सिंह पटेल, वरिष्ठ उपाध्यक्ष श्री दिनेश गुप्ता सहित अन्य पदाधिकारियों एवं विभिन्न खेल संघों के प्रतिनिधियों ने खिलाड़ियों, प्रशिक्षकों और प्रबंधकों को आशीर्वाद एवं शुभकामनाएँ प्रदान कीं।

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