August 06, 2026
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    शौर्यपथ

    शौर्यपथ

      रायपुर । शौर्यपथ / वर्षा ऋतु में मलेरिया एवं अन्य वेक्टर जनित रोगों की रोकथाम को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने प्रदेश के संवेदनशील वनांचल क्षेत्रों में विशेष अभियान शुरू कर दिया है। राज्य स्तरीय अधिकारियों ने बिलासपुर जिले के कोटा विकासखंड तथा मुंगेली जिले के लोरमी विकासखंड के दूरस्थ वन क्षेत्रों का मैदानी निरीक्षण कर मलेरिया नियंत्रण गतिविधियों की समीक्षा की। इस दौरान अधिकारियों ने शत-प्रतिशत सर्विलांस, समय पर जांच और तत्काल उपचार सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

    निरीक्षण दल ने अचानकमार, कोटा तथा आसपास की वन बस्तियों का दौरा कर मलेरिया नियंत्रण की जमीनी स्थिति का आकलन किया। अधिकारियों ने कहा कि जंगलों में रहने वाले परिवारों तक नियमित स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता है, ताकि कोई भी व्यक्ति मलेरिया जांच और उपचार से वंचित न रहे।

    मैदानी निरीक्षण के दौरान जिला स्वास्थ्य अधिकारियों को सभी वन बस्तियों और वैकल्पिक आवासीय स्थलों में सक्रिय मलेरिया सर्विलांस चलाने, प्रत्येक परिवार की लाइन लिस्टिंग तैयार करने, रैपिड डायग्नोस्टिक टेस्ट (आरडीटी) किट एवं मलेरिया रोधी दवाओं की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखने तथा संदिग्ध मरीजों की तत्काल जांच और उपचार सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। साथ ही संभावित संक्रमण वाले क्षेत्रों में नियमित फील्ड मॉनिटरिंग और विशेष निगरानी रखने पर भी जोर दिया गया।

    निरीक्षण एवं पर्यवेक्षण के दौरान संभागीय संयुक्त संचालक डॉ. गायत्री बांधी, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी मुंगेली डॉ. शीला शाह, उप संचालक वेक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम डॉ. वी.आर. भगत तथा संबंधित जिलों के जिला मलेरिया अधिकारियों ने क्षेत्र में संचालित सर्विलांस, जांच एवं उपचार व्यवस्थाओं का विस्तृत जायजा लिया। अधिकारियों ने जिला एवं विकासखंड स्तर पर गठित रैपिड रिस्पांस टीम (आरआरटी) को 24 घंटे अलर्ट मोड पर रखने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि मलेरिया क्लस्टर या संभावित प्रकोप की सूचना मिलने पर 24 घंटे के भीतर टीम मौके पर पहुंचकर नियंत्रण एवं रोकथाम की कार्रवाई शुरू करे।

    स्वास्थ्य विभाग के अनुसार वर्षा ऋतु में मलेरिया के हर संभावित मामले पर गंभीरता से नजर रखी जा रही है। राज्य स्तर पर लगातार मैदानी निगरानी, नियमित समीक्षा और त्वरित हस्तक्षेप के माध्यम से संक्रमण के प्रसार को नियंत्रित करने का प्रयास किया जा रहा है। विभाग ने विशेष रूप से बुखार से पीड़ित बच्चों और गर्भवती महिलाओं की समय पर जांच एवं उपचार सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं, ताकि संवेदनशील वर्गों को संक्रमण से सुरक्षित रखा जा सके।

    रायपुर / शौर्यपथ /
    छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले की ग्रामीण महिलाओं ने यह साबित कर दिया है कि यदि सही प्रशिक्षण, शासकीय सहयोग और बाजार की सुविधा मिले, तो महिलाएं आत्मनिर्भर बनकर नई पहचान हासिल कर सकती हैं। जशपुर जिले के वन धन विकास केंद्र सहकारी समिति, पनचक्की की अध्यक्ष श्रीमती कांता बाई इस बदलाव की प्रेरक मिसाल हैं।

    वन धन योजना से मिला नया अवसर

    प्रधानमंत्री वन धन विकास योजना के तहत संचालित इस केंद्र ने उरांव जनजाति की महिलाओं को रोजगार और सम्मान दोनों दिए हैं। पहले ये महिलाएं केवल वनोपज संग्रह पर निर्भर थीं, लेकिन अब वे वनोपज से मूल्य संवर्धित उत्पाद तैयार कर अच्छी आय अर्जित कर रही हैं।

    प्रशिक्षण और तकनीक ने बढ़ाया आत्मविश्वास

    छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज सहकारी संघ और ट्राइफेड (TRIFED) के सहयोग से महिलाओं को आधुनिक तकनीक, उत्पाद निर्माण, पैकेजिंग और विपणन का प्रशिक्षण दिया गया। इसके साथ ही आवश्यक मशीनें और अन्य सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गईं।

    च्यवनप्राश सहित कई उत्पाद तैयार

    प्रशिक्षण के बाद महिलाओं ने औषधीय वनोपज से च्यवनप्राश सहित कई हर्बल उत्पाद तैयार करना शुरू किया। इन उत्पादों को ‘छत्तीसगढ़ हर्बल्स’ ब्रांड के तहत बाजार में उतारा गया, जिससे उन्हें अच्छी पहचान और मांग मिली।

    1.91 करोड़ रुपये का कारोबार

    मार्च 2026 तक वन धन विकास केंद्र, पनचक्की ने लगभग 1.91 करोड़ रुपये का कारोबार किया है। इससे समिति की महिलाओं की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और वे अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

    मिली नई पहचान

    आर्थिक रूप से सशक्त होने के साथ-साथ महिलाओं का आत्मविश्वास भी बढ़ा है। आज वे अपने गांव और समाज में सम्मान के साथ पहचानी जाती हैं। श्रीमती कांता बाई के नेतृत्व में यह केंद्र अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन गया है।

    वन धन विकास योजना ग्रामीण और जनजातीय महिलाओं को रोजगार, आय और आत्मनिर्भरता से जोड़ने वाली एक प्रभावी पहल साबित हो रही है। यह योजना महिलाओं को स्थानीय संसाधनों के आधार पर स्वरोजगार उपलब्ध कराकर उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही है।

    बीजापुर के मेधावी विद्यार्थियों का प्रतिष्ठित विद्यालयों में चयन, बेहतर शिक्षा से साकार हो रहे सपने

    रायपुर / शौर्यपथ / आर्थिक रूप से कमजोर श्रमिक परिवारों के बच्चों के लिए अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना वरदान साबित हो रही है। इस योजना के माध्यम से मेधावी विद्यार्थियों को प्रतिष्ठित निजी विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिल रहा है, जिससे उनके उज्ज्वल भविष्य का मार्ग प्रशस्त हो रहा है।

    जिला बीजापुर के विभिन्न विकासखंडों के कई प्रतिभाशाली विद्यार्थियों का इस योजना के तहत चयन हुआ है। विकासखंड उसूर के ग्राम बसागुड़ा की छात्रा सान्वी संगम का चयन दिल्ली पब्लिक स्कूल, राजनांदगांव में हुआ है। वहीं विकासखंड भोपालपटनम के ग्राम गुल्लागुड़ा की छात्रा परिधि कावटी, विकासखंड बीजापुर के ग्राम सागमेटा के छात्र देवांश जनगम तथा ग्राम गुल्लागुड़ा की छात्रा निहारिका नीकुरी का चयन हम एकेडमी, जगदलपुर में हुआ है। विकासखंड भैरमगढ़ के ग्राम छोटे गोगला के छात्र आदित्य कोरसा का चयन भी दिल्ली पब्लिक स्कूल, राजनांदगांव में हुआ है।

    चयनित विद्यार्थियों के अभिभावकों ने बताया कि वे श्रमिक परिवार से हैं और सीमित आय के कारण बच्चों को अच्छे निजी विद्यालयों में पढ़ाना उनके लिए संभव नहीं था। श्रम विभाग में पंजीयन कराने के बाद उन्हें अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना की जानकारी मिली। उन्होंने आवेदन किया और बच्चों की प्रतिभा के आधार पर उनका चयन हो गया।

    अब इन बच्चों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण, आधुनिक सुविधाएँ, अनुभवी शिक्षकों का मार्गदर्शन और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल रही है। इससे बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ा है और वे अपने सपनों को साकार करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

    कलेक्टर श्री विश्वदीप ने चयनित विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों से मुलाकात कर बच्चों को मन लगाकर पढ़ाई करने, अपने माता-पिता, समाज और देश का नाम रोशन करने तथा उज्ज्वल भविष्य बनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने अभिभावकों को शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी भी दी और बच्चों के चयन पर शुभकामनाएँ दीं।

    अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना केवल शिक्षा उपलब्ध कराने की योजना नहीं है, बल्कि यह श्रमिक परिवारों के बच्चों को समान अवसर देकर उनके सपनों को नई पहचान देने का सशक्त माध्यम बन रही है। यह योजना सामाजिक समावेशन, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और आत्मनिर्भर समाज के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

     रायपुर / शौर्यपथ / महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत बीजापुर जिले के ग्राम निम्मलगुड़ा में जल संरक्षण और ग्रामीण रोजगार को बढ़ावा देने का एक सफल उदाहरण सामने आया है। गांव में 500 जल अवशोषण ट्रेंच का निर्माण किया गया, जिससे वर्षा जल संरक्षण, भू-जल पुनर्भरण और स्थानीय रोजगार सृजन में उल्लेखनीय सफलता मिली है।

    इस कार्य के लिए 4 लाख 95 हजार 73 रुपये स्वीकृत किए गए थे, जिसमें से 4 लाख 70 हजार 61 रुपये खर्च कर निर्माण कार्य पूरा किया गया। इस दौरान 1,801 मानव-दिवस का रोजगार सृजित हुआ, जिससे गांव के कई परिवारों को स्थानीय स्तर पर काम मिला और उनकी आय में बढ़ोतरी हुई।

    जल अवशोषण ट्रेंच बनने से वर्षा का पानी जमीन में अधिक मात्रा में समाने लगा है। इससे भू-जल स्तर में सुधार, मिट्टी के कटाव में कमी और खेतों में लंबे समय तक नमी बनाए रखने में मदद मिली है। किसानों को सिंचाई में सुविधा मिल रही है और खेती की उत्पादकता बढ़ने की संभावना भी बढ़ी है।

    मनरेगा के तहत किया गया यह कार्य केवल रोजगार उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि जल संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास की दिशा में भी महत्वपूर्ण साबित हुआ है।

    ग्राम निम्मलगुड़ा का यह प्रयास मनरेगा के प्रभावी क्रियान्वयन और जनभागीदारी का प्रेरणादायक उदाहरण है, जो ग्रामीण विकास और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण की दिशा में एक सफल मॉडल बनकर उभरा है।

      रायपुर / शौर्यपथ / महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा संचालित सखी वन स्टॉप सेंटर संकट में फंसी महिलाओं के लिए भरोसेमंद सहारा बनकर सामने आ रहा है। दंतेवाड़ा जिले में इसका एक संवेदनशील उदाहरण देखने को मिला, जहां बिहार की एक महिला को सुरक्षित आश्रय देकर उसके परिवार से मिलाया गया।

    बिहार के मुजफ्फरपुर जिले की रहने वाली श्रीमती सविता देवी अपने मायके से ससुराल जाने के लिए मोतीपुर स्टेशन से ट्रेन में सवार हुई थीं। यात्रा के दौरान वह सो गईं और कई स्टेशनों को पार करते हुए छत्तीसगढ़ के किरंदुल (जिला दंतेवाड़ा) पहुंच गईं। वहां से वह पैदल निकल पड़ीं और भटकते-भटकते भांसी तक पहुंच गईं।

    स्थानीय लोगों ने उनकी स्थिति देखकर भांसी थाना को सूचना दी। पुलिस ने उन्हें सुरक्षित रूप से सखी वन स्टॉप सेंटर, दंतेवाड़ा में अस्थायी आश्रय दिलाया।

    सखी वन स्टॉप सेंटर की टीम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए बिहार के मुजफ्फरपुर स्थित सखी वन स्टॉप सेंटर और थाना काटी से संपर्क किया। महिला का नाम, पता और फोटो भेजकर पहचान की प्रक्रिया शुरू की गई। जांच के बाद यह पुष्टि हुई कि महिला मुजफ्फरपुर जिले की ही निवासी हैं।

    इसके बाद महिला के परिवार से संपर्क किया गया और उन्हें पूरी जानकारी दी गई। सूचना मिलते ही उनके पति दंतेवाड़ा पहुंचे और सभी आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद महिला को सुरक्षित उनके सुपुर्द कर दिया गया।

    महिला के पति ने बताया कि उनकी पत्नी की मानसिक स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं है और वह पिछले करीब डेढ़ महीने से लापता थीं। परिवार ने उन्हें कई स्थानों पर खोजा, लेकिन उनका कोई पता नहीं चल पाया था। दंतेवाड़ा में पत्नी को सुरक्षित देखकर उन्हें बड़ी राहत मिली।

    उन्होंने सखी वन स्टॉप सेंटर, दंतेवाड़ा और महिला एवं बाल विकास विभाग का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि समय पर मिली मदद ने उनके परिवार को फिर से एक कर दिया।

    यह घटना दर्शाती है कि सखी वन स्टॉप सेंटर केवल आश्रय देने तक सीमित नहीं है, बल्कि संकट में फंसी महिलाओं को सुरक्षा, परामर्श, समन्वय और परिवार से पुनर्मिलन जैसी महत्वपूर्ण सेवाएं भी उपलब्ध कराता है। यह योजना महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान की दिशा में सरकार की संवेदनशील पहल का प्रभावी उदाहरण है।

    शिकायत के त्वरित निराकरण से नियमित राशन मिलने लगा, हितग्राही ने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय का जताया आभार

    रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश सरकार आम नागरिकों की समस्याओं के त्वरित एवं प्रभावी समाधान के लिए निरंतर कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 इसी दिशा में एक भरोसेमंद और प्रभावी माध्यम बनकर उभरी है, जहां प्राप्त शिकायतों का समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण निराकरण सुनिश्चित किया जा रहा है।
    इसी क्रम में जांजगीर-चांपा जिले के पामगढ़ विकासखंड अंतर्गत ग्राम भवतरा निवासी श्री देवेंद्र दिनकर की राशन कार्ड संबंधी शिकायत का त्वरित निराकरण किया गया। राशन कार्ड में त्रुटि होने के कारण उन्हें सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत मिलने वाले राशन का लाभ नहीं मिल पा रहा था, जिससे उनके परिवार को खाद्यान्न प्राप्त करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था।
    समस्या के समाधान के लिए देवेंद्र दिनकर ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत प्राप्त होते ही संबंधित विभाग ने मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई शुरू की। परीक्षण के दौरान राशन कार्ड में दर्ज त्रुटि का नियमानुसार सुधार किया गया, जिसके बाद उनका राशन कार्ड पुनः सक्रिय हो गया और उन्हें नियमित रूप से राशन मिलने लगा।
    देवेंद्र दिनकर ने बताया कि राशन कार्ड में सुधार होने के बाद अब उन्हें और उनके परिवार को बिना किसी परेशानी के नियमित रूप से राशन मिलने के साथ-साथ अन्य पात्रतानुसार शासकीय योजनाओं का लाभ भी प्राप्त हो सकेगा।
    समस्या के त्वरित समाधान पर देवेंद्र दिनकर ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय तथा जिला प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 आम नागरिकों की समस्याओं के त्वरित, पारदर्शी और प्रभावी समाधान का एक विश्वसनीय माध्यम बन गई है।

       रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (सीजीपीएससी) ने गृह (पुलिस) विभाग अंतर्गत सूबेदार, उप निरीक्षक संवर्ग एवं प्लाटून कमांडर परीक्षा-2024 के संशोधित अंतिम मॉडल उत्तर जारी कर दिए हैं। संशोधित मॉडल उत्तर आयोग की आधिकारिक वेबसाइट www.psc.cg.gov.in पर अपलोड कर दिए गए हैं।
    उल्लेखनीय है कि उक्त भर्ती परीक्षा के तहत कुल 341 पदों पर भर्ती की जानी है। इसके लिए 12 जुलाई को राज्य के 33 जिलों के 183 परीक्षा केंद्रों में लिखित परीक्षा आयोजित की गई थी। परीक्षा के मॉडल उत्तर 13 जुलाई को जारी कर अभ्यर्थियों से ऑनलाइन दावा-आपत्ति आमंत्रित की गई थी, जिसकी अंतिम तिथि 21 जुलाई 2026 निर्धारित थी।
    आयोग ने निर्धारित अवधि में प्राप्त सभी दावा-आपत्तियों का विषय विशेषज्ञ समिति से परीक्षण कराया। विशेषज्ञों की अनुशंसा एवं सक्षम परीक्षण के आधार पर संशोधित अंतिम मॉडल उत्तर तैयार किए गए हैं। आयोग ने स्पष्ट किया है कि इन्हीं अंतिम मॉडल उत्तरों के आधार पर अभ्यर्थियों की ओएमआर उत्तरपुस्तिकाओं का मूल्यांकन किया जाएगा।

    राष्ट्रमंडल खेलों की रजत पदक विजेता ज्ञानेश्वरी यादव का मुख्यमंत्री निवास में भव्य स्वागत

    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने की 30 लाख रुपये प्रोत्साहन राशि और आउट ऑफ टर्न डीएसपी पद पर पदोन्नति की घोषणा

         रायपुर / शौर्यपथ / ग्लासगो में आयोजित राष्ट्रमंडल खेल 2026 में महिलाओं की 53 किलोग्राम भारोत्तोलन स्पर्धा में रजत पदक जीतकर देश और छत्तीसगढ़ का गौरव बढ़ाने वाली राजनांदगांव की बेटी ज्ञानेश्वरी यादव का आज मुख्यमंत्री निवास में आत्मीय स्वागत एवं अभिनंदन किया गया। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने ज्ञानेश्वरी को उनकी ऐतिहासिक उपलब्धि पर बधाई देते हुए उन्हें 30 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि तथा आउट ऑफ टर्न डीएसपी पद पर पदोन्नति देने की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सम्मान प्रदेश की प्रतिभा, परिश्रम और संकल्प का सम्मान है।

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि ज्ञानेश्वरी यादव ने अपने पहले ही राष्ट्रमंडल खेलों में रजत पदक जीतकर यह सिद्ध कर दिया है कि दृढ़ इच्छाशक्ति, कठोर परिश्रम और अनुशासन के बल पर कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं होता। उन्होंने कहा कि महिलाओं की 53 किलोग्राम भारोत्तोलन स्पर्धा में कुल 199 किलोग्राम वजन उठाकर ज्ञानेश्वरी ने न केवल देश के लिए पदक जीता, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ को गौरवान्वित किया है। यह उपलब्धि प्रदेश के खेल इतिहास में स्वर्णिम अध्याय के रूप में दर्ज होगी।

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि ज्ञानेश्वरी ने सीमित संसाधनों और अनेक चुनौतियों के बावजूद उन्होंने अपने सपनों को कभी कमजोर नहीं पड़ने दिया। कठिन परिस्थितियों में भी निरंतर अभ्यास, अनुशासन और समर्पण के बल पर उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंच पर सफलता हासिल की है। उनकी सफलता प्रदेश के युवाओं, विशेषकर बेटियों के लिए प्रेरणास्रोत है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत ईमानदार हो तो कोई भी मंजिल दूर नहीं रहती।

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रदेश सरकार को अपनी इस बेटी पर गर्व है। इसी भावना के साथ राज्य सरकार ने उन्हें आउट ऑफ टर्न डीएसपी पद पर पदोन्नति देने का निर्णय लिया है, ताकि उनकी उपलब्धि का सम्मान हो और प्रदेश के अन्य खिलाड़ी भी उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए प्रेरित हों।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्लासगो रवाना होने से पहले उन्हें ज्ञानेश्वरी से मिलने का अवसर मिला था। उस समय उन्होंने उनके उज्ज्वल प्रदर्शन के लिए शुभकामनाएं दी थीं। उल्लेखनीय है कि राष्ट्रमंडल खेलों में रजत पदक जीतने के बाद उन्होंने वीडियो कॉल के माध्यम से भी उन्हें बधाई दी थी। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज मुख्यमंत्री निवास में उनका स्वागत करते हुए कहा कि यह पूरे प्रदेश के लिए गर्व और उत्सव का क्षण है।

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिए आधुनिक खेल अधोसंरचना, विश्वस्तरीय प्रशिक्षण, बेहतर कोचिंग, आवश्यक संसाधन और हरसंभव प्रोत्साहन उपलब्ध कराने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। सरकार का उद्देश्य ऐसा वातावरण तैयार करना है, जहां प्रदेश का प्रत्येक प्रतिभाशाली खिलाड़ी अपनी क्षमता के अनुरूप आगे बढ़ सके और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सके।

    उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार का प्रयास है कि छत्तीसगढ़ के अधिक से अधिक खिलाड़ी ओलंपिक, राष्ट्रमंडल खेल, एशियाई खेल और अन्य अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में तिरंगा लहराएं तथा देश और प्रदेश का नाम विश्वभर में रोशन करें। ज्ञानेश्वरी यादव जैसी खिलाड़ियों की उपलब्धियां इस दिशा में नई पीढ़ी का आत्मविश्वास बढ़ाने का कार्य करेंगी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि ज्ञानेश्वरी भविष्य में भी अपने उत्कृष्ट प्रदर्शन से भारत और छत्तीसगढ़ का नाम विश्व मंच पर नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएंगी।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रतिभाओं को पहचानना, उन्हें अवसर देना और उनकी उपलब्धियों का सम्मान करना सरकार की खेल नीति का महत्वपूर्ण आधार है। यही प्रयास आने वाले समय में छत्तीसगढ़ को खेलों के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में स्थापित करेगा।

    आयुष्मान आरोग्य मंदिर चनाडोंगरी को मिला राष्ट्रीय गुणवत्ता प्रमाणन
    राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक में 88.57 प्रतिशत अंक के साथ हासिल की बड़ी उपलब्धि गुणवत्तापूर्ण एवं जनकेंद्रित स्वास्थ्य सेवाओं का बना उत्कृष्ट मॉडल

    रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार प्रदेश के प्रत्येक नागरिक तक गुणवत्तापूर्ण, सुलभ और भरोसेमंद स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के लिए निरंतर प्रभावी प्रयास कर रही है। राज्य शासन की इसी जनकल्याणकारी सोच और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सतत सुधार के परिणामस्वरूप गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के विकासखंड गौरेला स्थित आयुष्मान आरोग्य मंदिर चनाडोंगरी ने राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक (एनक्यूएएस) के अंतर्गत 88.57 प्रतिशत अंक प्राप्त कर राष्ट्रीय गुणवत्ता प्रमाणन हासिल किया है। यह उपलब्धि ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण, बेहतर प्रबंधन तथा जनकेंद्रित स्वास्थ्य व्यवस्था की दिशा में प्रदेश के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
    राष्ट्रीय स्तर की मूल्यांकन टीम द्वारा स्वास्थ्य संस्थान का विस्तृत निरीक्षण किया गया। इस दौरान स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता, मरीजों की संतुष्टि, स्वच्छता, रिकॉर्ड संधारण, दवाओं की उपलब्धता, मानव संसाधन प्रबंधन, अधोसंरचना, जैव-चिकित्सीय अपशिष्ट प्रबंधन तथा सामुदायिक सहभागिता सहित विभिन्न मानकों पर संस्थान का मूल्यांकन किया गया। सभी मानकों पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए आयुष्मान आरोग्य मंदिर चनाडोंगरी ने 88.57 प्रतिशत अंक अर्जित कर राष्ट्रीय गुणवत्ता प्रमाणन प्राप्त किया।
    आयुष्मान आरोग्य मंदिर चनाडोंगरी में ग्रामीणों को नियमित रूप से व्यापक प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। यहां प्रतिदिन बाह्य रोगी सेवाएं, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाएं, नियमित टीकाकरण, परिवार नियोजन सेवाएं, गैर-संचारी रोगों की जांच एवं परामर्श, मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं, टेलीमेडिसिन सुविधा, स्वास्थ्य जागरूकता एवं परामर्श, निःशुल्क औषधि वितरण तथा आवश्यक जांच सेवाएं प्रभावी ढंग से संचालित की जा रही हैं। इन सुविधाओं के कारण आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के लिए दूरस्थ अस्पतालों पर निर्भर नहीं रहना पड़ता और उन्हें स्थानीय स्तर पर गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध हो रहा है। गौरेला पेन्ड्रा मरवाही जिले में अब तक चनाडोंगरी सहित 14 स्वास्थ्य संस्थाएं राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक (एनक्यूएएस) से प्रमाणित हो चुकी हैं। शेष स्वास्थ्य संस्थानों को भी राष्ट्रीय गुणवत्ता प्रमाणन दिलाने के लिए आवश्यक सुधार एवं तैयारियां निरंतर जारी हैं।
    मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण, आधुनिक स्वास्थ्य अधोसंरचना के विकास, प्राथमिक स्वास्थ्य संस्थानों को सशक्त बनाने तथा ग्रामीण क्षेत्रों तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के लिए निरंतर कार्य किया जा रहा है। राष्ट्रीय गुणवत्ता प्रमाणन प्राप्त करने वाली स्वास्थ्य संस्थाओं की बढ़ती संख्या इस बात का प्रमाण है कि छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप विकसित करने की दिशा में प्रभावी प्रगति हो रही है।
    आयुष्मान आरोग्य मंदिर चनाडोंगरी को प्राप्त यह राष्ट्रीय गुणवत्ता प्रमाणन न केवल गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले, बल्कि पूरे प्रदेश के लिए गौरव का विषय है। यह उपलब्धि स्वास्थ्य सेवाओं में उत्कृष्टता, पारदर्शिता, जवाबदेही और जनविश्वास को और अधिक सुदृढ़ करने के साथ-साथ मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में विकसित हो रही सशक्त एवं जनोन्मुखी स्वास्थ्य व्यवस्था का भी सशक्त उदाहरण है।

    युवाओं से नशामुक्त, संस्कारवान और राष्ट्र निर्माण के लिए समर्पित जीवन अपनाने का किया आह्वान

    रायपुर / शौर्यपथ / ब्रह्माकुमारीज़, अंबिकापुर द्वारा आयोजित ’नशा मुक्त युवा, विकसित भारत संकल्प अभियान’ कार्यक्रम में पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मस्व मंत्री राजेश अग्रवाल ने सहभागिता करते हुए युवाओं से नशामुक्त, अनुशासित और संस्कारयुक्त जीवन अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि विकसित भारत के निर्माण का सबसे मजबूत आधार स्वस्थ, जागरूक, चरित्रवान और आत्मविश्वासी युवा है। जब युवा सकारात्मक सोच, नैतिक मूल्यों और राष्ट्रसेवा की भावना के साथ आगे बढ़ेंगे, तभी विकसित भारत का संकल्प साकार होगा।
    कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में प्रारंभ किया गया ‘नशा मुक्त युवा, विकसित भारत संकल्प अभियान’ केवल नशे के विरुद्ध जनजागरण का अभियान नहीं, बल्कि देश के भविष्य को सशक्त बनाने का राष्ट्रीय आंदोलन है। यह अभियान युवाओं को स्वस्थ जीवनशैली, आत्मअनुशासन, सकारात्मक विचार और सामाजिक उत्तरदायित्व के प्रति प्रेरित कर राष्ट्र निर्माण में उनकी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने का माध्यम बन रहा है।
    उन्होंने कहा कि आज आवश्यकता केवल आर्थिक विकास की नहीं, बल्कि ऐसे समाज के निर्माण की है, जहां युवा शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक रूप से सशक्त हों। नशा व्यक्ति की प्रतिभा, परिवार की खुशहाली और समाज की प्रगति तीनों को प्रभावित करता है। इसलिए प्रत्येक युवा का यह दायित्व है कि वह स्वयं नशे से दूर रहे और अपने परिवार, मित्रों तथा समाज को भी नशामुक्त जीवन के लिए प्रेरित करे।
    श्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि भारत की युवा शक्ति विश्व की सबसे बड़ी ताकत है। यदि यह शक्ति सही दिशा में आगे बढ़ेगी तो भारत को विकसित राष्ट्र बनने से कोई नहीं रोक सकता। उन्होंने युवाओं से शिक्षा, कौशल, अनुशासन, सेवा और संस्कार को अपने जीवन का आधार बनाने का आग्रह करते हुए कहा कि राष्ट्र निर्माण केवल सरकारों का कार्य नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक और विशेष रूप से युवाओं की सहभागिता से ही संभव है।
    उन्होंने ब्रह्माकुमारीज़ संस्था की सराहना करते हुए कहा कि संस्था लंबे समय से आध्यात्मिक जागरूकता, नैतिक मूल्यों, सकारात्मक जीवनशैली तथा नशामुक्त समाज के निर्माण के लिए उल्लेखनीय कार्य कर रही है। ऐसे अभियान समाज में नई चेतना का संचार करते हैं और युवाओं को जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण प्रदान करते हैं।
    श्री अग्रवाल ने आगे कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार युवाओं के सर्वांगीण विकास, कौशल संवर्धन, रोजगार, शिक्षा, खेल, संस्कृति तथा स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। राज्य सरकार का उद्देश्य ऐसा वातावरण तैयार करना है, जहां युवा अपनी ऊर्जा और प्रतिभा का उपयोग समाज और राष्ट्र के विकास में कर सकें।
    कार्यक्रम में उपस्थित युवाओं एवं नागरिकों ने ’नशा मुक्त युवा, विकसित भारत’ का संकल्प लेते हुए समाज में जनजागरण फैलाने और अधिक से अधिक लोगों को इस अभियान से जोड़ने का संकल्प दोहराया। कार्यक्रम का वातावरण उत्साह, प्रेरणा और राष्ट्रभक्ति की भावना से ओतप्रोत रहा।
    इस अवसर पर ब्रह्माकुमारीज़ परिवार के सदस्य, पदाधिकारी, विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि, बड़ी संख्या में युवा, गणमान्य नागरिक एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में सभी ने नशामुक्त, स्वस्थ, संस्कारित और विकसित भारत के निर्माण में सक्रिय सहभागिता का संकल्प लिया।

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