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रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ राज्य में मत्स्य पालन की अपार संभावनाओं को साकार करने की दिशा में मछली पालन विभाग द्वारा विगत दो वर्षों में उल्लेखनीय उपलब्धियाँ अर्जित की गई हैं। कम लागत, कम समय और अधिक आय देने वाला यह व्यवसाय ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका का सशक्त माध्यम बनकर उभरा है, जिससे न केवल रोजगार सृजन हो रहा है बल्कि कुपोषण दूर करने में भी सहायता मिल रही है।
पिछले दो वर्षों में मत्स्य पालन हेतु उपलब्ध जलक्षेत्र में वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2023 में 2.027 लाख हेक्टेयर जलक्षेत्र की तुलना में यह बढ़कर 2.039 लाख हेक्टेयर हो गया है। उपलब्ध जलक्षेत्र में से वर्ष 2025 तक 97.25 प्रतिशत क्षेत्र को मत्स्य पालन के अंतर्गत लाया जा चुका है, जो जल संसाधनों के बेहतर उपयोग को दर्शाता है।
राज्य में मछली बीज उत्पादन बढ़ाने के लिए विशेष प्रयास किए गए हैं। इन दो वर्षों में 20 नई मत्स्य बीज हैचरी का निर्माण किया गया है। परिणामस्वरूप राज्य में वर्तमान में 583 करोड़ स्टैंडर्ड फ्राई का उत्पादन हो रहा है, जो वर्ष 2023 की तुलना में 69.4 प्रतिशत अधिक है। मछली बीज उत्पादन में छत्तीसगढ़ देश में छठे स्थान पर पहुँच गया है।
पारंपरिक मत्स्य पालन के साथ-साथ केज कल्चर, बायोफ्लॉक, आरएएस, एनीकट में संचयन तथा तीव्र बढ़वार वाली प्रजातियों के पालन को बढ़ावा दिया गया है। इन प्रयासों के चलते राज्य का कुल मत्स्य उत्पादन दो वर्षों में 34.10 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 8.73 लाख टन तक पहुँच गया है। मत्स्य उत्पादन में भी छत्तीसगढ़ देश के शीर्ष छह राज्यों में शामिल हो गया है।
मत्स्य कृषकों को आधुनिक तकनीक से जोड़ने के लिए निरंतर प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। 10 और 3 दिवसीय प्रशिक्षण तथा अन्य राज्यों में अध्ययन भ्रमण के माध्यम से प्रतिवर्ष लगभग 17,900 हितग्राही लाभान्वित हो रहे हैं। वहीं मत्स्य सहकारी समितियों की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ करने हेतु प्रति समिति तीन लाख रुपये तक का अनुदान दिया जा रहा है, जिससे प्रतिवर्ष 226 समितियाँ लाभान्वित हो रही हैं।
मछुआरों की सामाजिक सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए दुर्घटना बीमा योजना का विस्तार किया गया है। वर्ष 2025 में राज्य में 2,20,525 मछुआरों का निःशुल्क दुर्घटना बीमा किया गया है, जो पिछले वर्षों की तुलना में 30 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। इसके साथ ही बंद ऋतु के दौरान मछुआरों को बचत सह राहत योजना के तहत आर्थिक सहायता प्रदान की गई है।
उत्पादन बढ़ाने के उद्देश्य से जलाशयों एवं बंद पड़ी गहरी खदानों में केज कल्चर को प्रोत्साहित किया गया है। इन दो वर्षों में राज्य में 2,577 केज स्थापित किए गए हैं। स्वयं की भूमि में तालाब निर्माण योजना के तहत 946.05 हेक्टेयर नवीन जलक्षेत्र विकसित किया गया है, वहीं 142.84 हेक्टेयर क्षेत्र में संवर्धन पोखरों का निर्माण किया गया है।
स्थानीय स्तर पर गुणवत्तायुक्त और सस्ता मत्स्य आहार उपलब्ध कराने के लिए पाँच फीड मील की स्थापना की गई है। मत्स्य विपणन को सुदृढ़ बनाने हेतु प्रशीतित वाहन, आइस बॉक्स युक्त मोटरसाइकिल, थ्री व्हीलर तथा सजीव मछली वेंडिंग के लिए फोर व्हीलर वाहनों का वितरण किया गया है, जिससे उपभोक्ताओं तक ताजी मछली की पहुँच सुनिश्चित हो रही है।
नवीन तकनीक को अपनाते हुए बायोफ्लॉक पोंड लाइनर, बायोफ्लॉक टैंक तथा रिसरकुलेटरी एक्वाकल्चर सिस्टम की स्थापना की गई है। इन दो वर्षों में 497 बायोफ्लॉक पोंड लाइनर, 234 बायोफ्लॉक टैंक और 5 आरएएस यूनिट स्थापित की गई हैं, जिससे कम पानी और कम भूमि में अधिक उत्पादन संभव हो रहा है।
राज्य की उपलब्धियों को राष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली है। वर्ष 2024 में कांकेर जिले को “बेस्ट इनलैंड डिस्ट्रिक्ट” का राष्ट्रीय पुरस्कार प्रदान किया गया। वहीं वर्ष 2025 में रायपुर के श्री सुखदेव दास और महासमुंद के श्री अब्दुल जमील को बेस्ट फिश फार्मर प्रमाणपत्र से सम्मानित किया गया। इसके अतिरिक्त श्री सुखदेव दास को वर्ष 2025-26 के लिए “श्रीमती बिलासा देवी केंवट मत्स्य विकास पुरस्कार” से भी सम्मानित किया गया है।
रायपुर / शौर्यपथ / संचालनालय, उद्यानिकी एवं प्रक्षेत्र वानिकी द्वारा विगत दो वर्षों में प्रदेश में उद्यानिकी विकास के लिए व्यापक प्रयास किए गए हैं। प्रदेश की विविध जलवायु और तीन एग्रो-क्लाइमेटिक जोन के कारण यहाँ आम, काजू, लीची, नाशपाती सहित विभिन्न उद्यानिकी फसलों की खेती सफलतापूर्वक की जा रही है। विशेष रूप से केला और पपीता जैसी एक वर्षीय फसलों का रकबा तेजी से बढ़ा है, जिससे किसानों को बेहतर आमदनी प्राप्त हो रही है।
उद्यानिकी विभाग द्वारा फसल क्षेत्र विस्तार के अंतर्गत फल, सब्जी, मसाला, पुष्प, सुगंधित फसलों के साथ-साथ ऑयल पाम एवं बांस रोपण को बढ़ावा दिया गया है। साथ ही ड्रिप और स्प्रिंकलर जैसी सूक्ष्म सिंचाई प्रणालियों की स्थापना, मशरूम उत्पादन एवं स्पॉन मेकिंग यूनिट, गुणवत्तायुक्त पौध एवं बीज उत्पादन, पॉलीहाउस व शेडनेट हाउस जैसी संरक्षित खेती अधोसंरचना, यंत्रीकरण, पोस्ट हार्वेस्ट प्रबंधन तथा कृषकों के प्रशिक्षण और शैक्षणिक भ्रमण जैसी गतिविधियाँ निरंतर संचालित की जा रही हैं।
प्रदेश में उद्यानिकी विकास को गति देने के लिए बजट प्रावधानों में उल्लेखनीय वृद्धि की गई है। वर्ष 2023–24 में उद्यानिकी योजनाओं पर 215.17 करोड़ रुपये व्यय किए गए थे, जबकि वर्ष 2025–26 में 431.03 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है। वर्ष 2026–27 के लिए 483.80 करोड़ रुपये का प्रस्ताव रखा गया है, जिससे चार वर्षों में उद्यानिकी बजट में लगभग 125 प्रतिशत की वृद्धि प्रस्तावित है।
आगामी तीन वर्षों की कार्ययोजना के तहत फसल विविधिकरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 1.41 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में उद्यानिकी फसलों का क्षेत्र विस्तार किया जाएगा। राज्य के प्रमुख धार्मिक तीर्थ क्षेत्रों—डोंगरगढ़, रतनपुर, दंतेवाड़ा, जांजगीर, अम्बिकापुर एवं भैयाथान—को फ्लोरीकल्चर हब के रूप में विकसित करने की योजना है, जहाँ 111 क्लस्टर विकसित कर 27,700 हेक्टेयर क्षेत्र में फूलों की खेती प्रस्तावित है, जिससे लगभग 70 हजार किसान लाभान्वित होंगे।
प्रदेश में खाद्य तेलों की आत्मनिर्भरता और किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से आगामी तीन वर्षों में 21 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में ऑयल पाम का विस्तार किया जाएगा। इसके साथ ही सीड नर्सरी, सीड गार्डन तथा राज्य स्तर पर ऑयल पाम प्रसंस्करण इकाई की स्थापना का प्रस्ताव है। सिंचाई क्षेत्र विस्तार हेतु 37 हजार हेक्टेयर में ड्रिप और 4,500 हेक्टेयर में स्प्रिंकलर प्रणाली को प्रोत्साहित किया जाएगा।
विभागीय रोपणियों के माध्यम से 22,500 हेक्टेयर क्षेत्र के लिए गुणवत्तायुक्त बीज उत्पादन किया जाएगा। नर्सरी विहीन क्षेत्रों में 54 नई नर्सरियों की स्थापना और 55 नर्सरियों का उन्नयन किया जाएगा। वर्ष पर्यंत खेती को बढ़ावा देने के लिए पॉलीहाउस, शेडनेट हाउस और मल्चिंग हेतु किसानों को अनुदान दिया जाएगा। इसके साथ ही मशरूम उत्पादन इकाइयों, कोल्ड स्टोरेज, फार्मगेट पैक हाउस, प्रसंस्करण इकाइयों तथा ग्रामीण व खुदरा बाजारों की स्थापना भी की जाएगी।
उद्यानिकी विभाग द्वारा नवाचार के रूप में ग्राफ्टेड बैंगन और टमाटर पौधों का प्रयोग किया जा रहा है, जिससे मृदा जनित रोगों पर नियंत्रण संभव हो सके। वर्ष 2025–26 में 2356 ग्राफ्टेड पौधों के माध्यम से प्रदर्शन कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं। इसके अलावा संरक्षित खेती के अंतर्गत शेडनेट हाउस के माध्यम से किसानों द्वारा सब्जी बीज उत्पादन को बढ़ावा दिया गया है, जिसमें प्रदेश के 2176 किसान 86 लाख वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्र में बीज उत्पादन कर रहे हैं।
नेशनल मिशन ऑन एडिबल ऑयल–ऑयल पाम योजना के अंतर्गत वर्ष 2025–26 में 2240 हेक्टेयर क्षेत्र में ऑयल पाम रोपण किया गया है, जिसमें से 1042 हेक्टेयर क्षेत्र में अंतरवर्तीय फसल ली जा रही है। राज्य सरकार द्वारा केंद्र की योजना के अतिरिक्त प्रति हेक्टेयर 69,620 रुपये की अतिरिक्त सहायता भी दी जा रही है, जिससे किसानों को फेंसिंग, ड्रिप सिंचाई और अंतरवर्ती फसलों के लिए प्रोत्साहन मिल रहा है।
उद्यानिकी फसलों के क्षेत्र विस्तार में भी सतत वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2023 की तुलना में वर्ष 2025 तक फलों, सब्जियों, मसाला और पुष्प फसलों के रकबे में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। विभागीय प्रयासों से उद्यानिकी क्षेत्र प्रदेश में किसानों की आय वृद्धि, फसल विविधिकरण और कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
रायपुर/ शौर्यपथ / मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि विश्वास, विकास और सुरक्षा ही बस्तर की नई दिशा है, जहाँ अब हिंसा नहीं, शांति ही एकमात्र विकल्प बन चुकी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर रेंज के बीजापुर और सुकमा जिलों में सुरक्षा बलों द्वारा चलाए गए नक्सल विरोधी अभियान में निर्णायक सफलता प्राप्त हुई है, जिसमें 14 माओवादियों को न्यूट्रलाइज़ किया गया है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सुरक्षा बलों की सटीक रणनीति, सतत दबाव और मजबूत जमीनी पकड़ के कारण माओवादी नेटवर्क तेजी से कमजोर हो रहा है। उन्होंने कहा कि बस्तर अब विकास, निवेश, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के नए अवसरों के साथ आगे बढ़ रहा है। यह परिवर्तन प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन, केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह के नेतृत्व, सुरक्षा बलों की अदम्य वीरता एवं प्रतिबद्धता, संवेदनशील पुनर्वास नीति तथा बस्तर की जनता के अटूट विश्वास का परिणाम है।
मुख्यमंत्री ने सुरक्षा बलों के शौर्य को नमन करते हुए अभियान में शामिल सभी जवानों को बधाई दी।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि जो लोग अब भी हिंसा का रास्ता चुन रहे हैं, वे आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा से जुड़ें, सरकार की पुनर्वास नीति का लाभ उठाएँ और सम्मानपूर्वक जीवनयापन करें अन्यथा राज्य शासन और सुरक्षा बल कानून एवं संविधान के अनुरूप अपने दायित्वों के निर्वहन के लिए पूरी तरह सक्षम और प्रतिबद्ध हैं।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद की अंधेरी रात अब अपने अंतिम चरण में है और बस्तर में शांति, विश्वास और विकास का स्थायी सूर्योदय सुनिश्चित है।
घर-घर अन्न दान लेकर मंत्री टंक राम वर्मा ने निभाई छेरछेरा की परम्परा
रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक-सांस्कृतिक परम्पराओं में विशेष स्थान रखने वाले छेरछेरा तिहार के अवसर पर राज्य के राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा ने धरसींवा विकासखंड के ग्राम तरपोंगी में पारंपरिक रूप से घर-घर जाकर अन्न दान ग्रहण किया। इस अवसर पर गांव में उत्साह, अपनत्व और लोक उल्लास का वातावरण देखने को मिला।
मंत्री वर्मा ने छेरछेरा की परम्परा का निर्वहन करते हुए ग्रामीणों से आत्मीय भेंट की और अन्न दान स्वीकार किया। उन्होंने कहा कि छेरछेरा तिहार छत्तीसगढ़ की आत्मा से जुड़ा पर्व है, जो समाज में समानता, सहयोग और दान की भावना को सशक्त करता है। यह लोक पर्व हमें अपनी जड़ों से जोड़ता है और सामाजिक समरसता का संदेश देता है।
मंत्री वर्मा ने कहा कि छेरछेरा केवल अन्न संग्रह का तिहार नहीं, बल्कि यह लोक संस्कृति, भाईचारे और मानवीय संवेदनाओं का उत्सव है। छत्तीसगढ़ की लोक परम्पराएं हमारी पहचान हैं और इन्हें संजोकर रखना हम सभी का दायित्व है। ऐसे पर्व समाज को जोड़ते हैं और नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराते हैं।
इस अवसर पर ग्रामीणों ने पारंपरिक उल्लास के साथ मंत्री का स्वागत किया। गांव में छेरछेरा तिहार की रौनक देखते ही बन रही थी। बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों ने पूरे उत्साह के साथ इस लोक पर्व में सहभागिता निभाई। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे।
उल्लेखनीय है कि छेरछेरा छत्तीसगढ़ का लोकप्रिय पारंपरिक लोक-पर्व है, जिसे धान कटाई के बाद पौष मास (दिसंबर–जनवरी) में मनाया जाता है। यह पर्व राज्य की कृषि संस्कृति से गहराई से जुड़ा है। फसल कटने के उपरांत किसान ईश्वर और समाज के प्रति कृतज्ञता प्रकट करता है।
छेरछेरा मूल रूप से दान, सहयोग और आपसी भाईचारे का पर्व है। इस दिन गांव के बच्चे, युवा और बुजुर्ग टोली बनाकर घर-घर जाते हैं और लोकगीत गाते हुए अन्न या दान मांगते हैं। दरवाजे पर पहुंचकर
“छेरछेरा छेरछेरा, माई कोठी के धान ला हेरा…”
का गायन किया जाता है, जिसका भाव यह होता है कि माता के भंडार में भरपूर धान है, उसमें से थोड़ा दान प्रदान करें।इकट्ठा की गई सामग्री का उपयोग सामूहिक भोज, जरूरतमंदों की सहायता एवं सामाजिक कार्यों में किया जाता है। यह पर्व अमीर-गरीब, जाति-धर्म के भेद को मिटाकर सामाजिक संवेदनशीलता को बढ़ाता है और नई पीढ़ी को साझा संस्कृति एवं लोक परम्पराओं से जोड़ता है।छेरछेरा तिहार के माध्यम से एक बार फिर छत्तीसगढ़ की लोक परम्पराओं की जीवंत झलक देखने को मिली, जिसने सांस्कृतिक विरासत को सहेजने का सशक्त संदेश दिया।
खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स–2026 की मेजबानी पर सीएम साय की केंद्रीय मंत्री मांडविया से भेंट
रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने नई दिल्ली में केंद्रीय श्रम एवं रोजगार तथा युवा कार्यक्रम और खेल मंत्री मनसुख मांडविया से सौजन्य भेंट कर “प्रथम खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स–2026” के आयोजन पर चर्चा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस प्रतिष्ठित आयोजन की मेजबानी छत्तीसगढ़ के लिए गर्व और सम्मान का विषय है, जिससे राज्य की जनजातीय खेल परंपराओं को राष्ट्रीय पहचान मिलेगी।
खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स के तहत एथलेटिक्स, तीरंदाजी, कुश्ती, वेटलिफ्टिंग, हॉकी, फुटबॉल और तैराकी की प्रतियोगिताएँ होंगी, जबकि दो खेल डेमो स्वरूप आयोजित किए जाएंगे। सरगुजा में कुश्ती, तीरंदाजी व वेटलिफ्टिंग, रायपुर में हॉकी, फुटबॉल व तैराकी तथा बिलासपुर में एथलेटिक्स प्रतियोगिताएँ प्रस्तावित हैं। उद्घाटन समारोह 14 फरवरी 2026 को रायपुर में होगा।
केंद्रीय मंत्री मांडविया ने आयोजन के लिए पूर्ण सहयोग का आश्वासन देते हुए कहा कि ऐसे आयोजन जनजातीय युवाओं में खेलों के प्रति नया उत्साह और अवसर पैदा करेंगे। मुख्यमंत्री श्री साय ने ईएसआईसी अस्पतालों के सुदृढ़ीकरण, खेल अधोसंरचना विकास और लेबर कोड जैसे ऐतिहासिक सुधारों के लिए केंद्र सरकार का आभार व्यक्त किया।
रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को राज्य के कथित शराब घोटाले से जुड़े मामलों में 2 जनवरी 2026 को छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय से बड़ी राहत मिली है।
इस घटनाक्रम से जुड़ी मुख्य जानकारियां निम्नलिखित हैं:
जमानत और रिहाई का विवरण
न्यायालय का आदेश: बिलासपुर उच्च न्यायालय के जस्टिस अरविंद वर्मा की सिंगल बेंच ने चैतन्य बघेल को जमानत प्रदान की।
किन मामलों में मिली राहत: उन्हें प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा दर्ज मनी लॉन्ड्रिंग मामले और राज्य भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो/आर्थिक अपराध शाखा (ACB/EOW) द्वारा दर्ज भ्रष्टाचार मामले, दोनों में जमानत दी गई है।
जेल से रिहाई: लगभग 170 दिनों (6 महीने) तक रायपुर सेंट्रल जेल में रहने के बाद, चैतन्य बघेल 3 जनवरी 2026 को जेल से बाहर आए।
संयोग: दिलचस्प बात यह है कि चैतन्य को 18 जुलाई 2025 को उनके स्वयं के जन्मदिन पर गिरफ्तार किया गया था, और उनकी रिहाई उनके बेटे के जन्मदिन के अवसर पर हुई है।
भाजपा (BJP) की प्रतिक्रिया
भाजपा ने इस जमानत को लेकर स्पष्ट किया है कि यह केवल एक कानूनी प्रक्रिया है और दोषमुक्ति नहीं है:
सच्चिदानंद उपासने (भाजपा प्रवक्ता): उन्होंने कहा कि "जमानत का मतलब यह नहीं है कि वह निर्दोष हैं।" उन्होंने जोर देकर कहा कि जांच जारी रहेगी और मामला अदालत में चलता रहेगा।
भाजपा का रुख: पार्टी का मानना है कि शराब घोटाले में उनकी संलिप्तता के साक्ष्य हैं और कानून अपना काम कर रहा है। जमानत महज एक कानूनी राहत है, कोई क्लीन चिट नहीं।
भूपेश बघेल और कांग्रेस का पक्ष
भूपेश बघेल ने इसे "सत्य की जीत" बताया और आरोप लगाया कि उनके परिवार को केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा राजनीतिक प्रतिशोध के तहत परेशान किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि यह सरकारी षड्यंत्रों के खिलाफ एक जीत है और न्याय मिलने में देरी भले ही हुई, लेकिन अंततः न्याय मिला।
रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज नई दिल्ली में राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु से सौजन्य मुलाकात की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु को छत्तीसगढ़ में आयोजित होने वाले राज्यस्तरीय जनजातीय सांस्कृतिक महोत्सव ‘बस्तर पंडुम 2026’ में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होने का आमंत्रण दिया।
मुख्यमंत्री साय ने राष्ट्रपति को बस्तर अंचल की समृद्ध जनजातीय कला, संस्कृति, परंपराओं एवं लोक जीवन से अवगत कराते हुए कहा कि बस्तर पंडुम राज्य की जनजातीय विरासत के संरक्षण, संवर्धन और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रचार का एक महत्वपूर्ण प्रयास है। यह आयोजन तीन चरणों में आयोजित किया जाएगा, जिसका अंतिम चरण फरवरी 2026 में बस्तर में संपन्न होगा।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने राष्ट्रपति को छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा जनजातीय क्षेत्रों के समग्र विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका, बुनियादी ढांचे के विस्तार एवं जनकल्याणकारी योजनाओं की प्रगति से भी अवगत कराया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार जनजातीय समाज को विकास की मुख्यधारा से जोड़ते हुए उनकी सांस्कृतिक पहचान को संरक्षित रखने के लिए निरंतर कार्य कर रही है।
राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने जनजातीय संस्कृति से जुड़े इस आयोजन की सराहना करते हुए बस्तर पंडुम 2026 के सफल आयोजन के लिए शुभकामनाएं दीं।
उल्लेखनीय है कि बस्तर पंडुम 2026 के माध्यम से लोकनृत्य, लोकगीत, पारंपरिक वाद्ययंत्र, हस्तशिल्प, जनजातीय व्यंजन, वेशभूषा सहित विभिन्न सांस्कृतिक विधाओं का प्रदर्शन किया जाएगा।
नई दिल्ली। शौर्यपथ।
साल 2025 में दुनिया भर में सेक्स स्कैंडल्स की बाढ़ ने समाज के हर वर्ग को झकझोर दिया। राजनीतिक हस्तियों से लेकर धार्मिक गुरुओं तक, ये कांड न केवल सुर्खियां बने बल्कि कानूनी सजाओं, इस्तीफों और सामाजिक बहस को जन्म दिए। भारत में प्रजवाल रेवन्ना का मामला सबसे बड़ा राजनीतिक घोटाला साबित हुआ।
प्रमुख कांडों की समयरेखा
प्रजवाल रेवन्ना कांड (कर्नाटक): अप्रैल 2024 में 3,000 से अधिक वीडियो वायरल होने के बाद 2025 में जांच तेज। नवंबर 2025 में पूर्व सांसद को बलात्कार के लिए उम्रकैद सजा। घरेलू कामगारों से पुलिसकर्मियों तक शिकार।
थाईलैंड भिक्षु उगाही: जुलाई 2025 में 'मिस गोल्फ' गिरफ्तार, 80,000 न्यूड फाइलें जब्त। 102 करोड़ रुपये की ब्लैकमेल से 9 वरिष्ठ भिक्षु संन्यास त्याग चुके।
भारत VIP हनीट्रैप: 2025 में 4,000 अश्लील फाइलें लीक, VIPs के चैट-वीडियो से 'क्विड प्रो क्वो' स्कैंडल।
विन्स मैकमाहन (USA): जनवरी 2025 में WWE संस्थापक पर ट्रैफिकिंग केस समाप्त, SEC फाइन।
UK एंटरटेनमेंट: पूरे साल मनोरंजन जगत के कई मामले। सामाजिक-कानूनी प्रभाव
इन कांडों ने राजनीतिक इस्तीफे, धार्मिक सुधार और #MeToo जैसी बहसें छेड़ीं। भारत में चुनावी नतीजों पर असर पड़ा, जबकि थाईलैंड में बौद्ध प्रतिष्ठा डगमगाई। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल युग में गोपनीयता और न्याय व्यवस्था पर सवाल उठे हैं।
रायगढ़ | शौर्यपथ |
नववर्ष 2026 की शुरुआत होते ही भ्रष्टाचार के खिलाफ एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने रायगढ़ जिले में बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। ACB की बिलासपुर इकाई ने धर्मजयगढ़ एसडीएम कार्यालय में पदस्थ बाबू अनिल कुमार चेलक को एक ग्रामीण से एक लाख रुपये रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया है।
कार्रवाई के दौरान घबराए आरोपी ने रिश्वत की रकम को अपने शासकीय आवास के पीछे फेंक दिया था, जिसे ACB टीम ने मौके से बरामद कर लिया।
एसीबी बिलासपुर के डीएसपी अजितेश सिंह ने बताया कि 24 दिसंबर 2025 को ग्राम अमलीटिकरा, जिला रायगढ़ निवासी राजू कुमार यादव ने ACB कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया कि उसने ग्राम अमलीटिकरा में भूमि क्रय की थी, जिसकी रजिस्ट्री और नामांतरण विधिवत उसके नाम पर हो चुका था।
इसके बावजूद एसडीएम कार्यालय धर्मजयगढ़ में पदस्थ बाबू अनिल कुमार चेलक ने शिकायतकर्ता को कार्यालय बुलाकर यह कहकर डराया कि जमीन की रजिस्ट्री गलत तरीके से हुई है और उसके तथा विक्रेता के खिलाफ शिकायत प्राप्त हुई है।
शिकायतकर्ता के अनुसार 22 दिसंबर को उसे मिलने बुलाया गया और 23 दिसंबर को मुलाकात के दौरान बाबू ने कथित शिकायत को नस्तीबद्ध करने के एवज में 2 लाख रुपये की मांग की। शिकायतकर्ता रिश्वत देना नहीं चाहता था, बल्कि आरोपी को रंगे हाथों पकड़वाना चाहता था।
शिकायत के सत्यापन में आरोप सही पाया गया। सत्यापन के दौरान आरोपी द्वारा पहली किश्त के रूप में 1 लाख रुपये लेने पर सहमति दी गई, जिसके बाद ट्रैप की योजना बनाई गई।
2 जनवरी 2026 को शिकायतकर्ता द्वारा 1 लाख रुपये की राशि आरोपी के धर्मजयगढ़ स्थित शासकीय आवास में दी गई। जैसे ही आरोपी ने रुपये अपने हाथ में लिए, उसे संदेह हुआ और उसने तत्काल आवास का दरवाजा बंद कर लिया।
ACB टीम के लगातार प्रयास और दरवाजा जोर से खोलने के बाद आरोपी मिला। पहले उसने रिश्वती रकम के संबंध में अनभिज्ञता जताई, लेकिन सख्ती से पूछताछ करने पर स्वीकार किया कि उसने रिश्वत की राशि बैग में भरकर आवास के पीछे दीवार की ओर फेंक दी थी। ACB स्टाफ ने उसे फेंकते हुए भी देखा था।
ACB टीम ने मौके से 1 लाख रुपये की रिश्वती रकम बरामद कर आरोपी बाबू अनिल कुमार चेलक को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 7 के तहत मामला दर्ज किया गया है।
गौरतलब है कि ठीक एक वर्ष पहले 2 जनवरी 2025 को भी ACB बिलासपुर इकाई ने जिला जांजगीर में हथकरघा विभाग के निरीक्षक हरेकृष्ण चौहान को 50 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार कर वर्ष की पहली ट्रैप कार्रवाई की थी।
राजनांदगांव | शौर्यपथ |
राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह के दूसरे दिन राजनांदगांव पुलिस द्वारा हेलमेट के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से भव्य बाइक रैली का आयोजन किया गया। रैली का नेतृत्व स्वयं पुलिस अधीक्षक सुश्री अंकिता शर्मा ने किया। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य दुपहिया वाहन चालकों को हेलमेट पहनने और यातायात नियमों का पालन करने के लिए प्रेरित करना रहा।
हेलमेट जन-जागरूकता बाइक रैली में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (नक्सल ऑपरेशन) मुकेश ठाकुर, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक पुष्पेंद्र नायक, प्रशिक्षु आईपीएस एवं नगर पुलिस अधीक्षक वैशाली जैन, रक्षित निरीक्षक लोकेश कुमार कसेर, यातायात प्रभारी निरीक्षक नवरतन कश्यप सहित यातायात स्टाफ, शहर के थाना व चौकी का पुलिस बल बड़ी संख्या में शामिल हुआ।
रैली पुलिस अधीक्षक कार्यालय से प्रारंभ होकर नया बस स्टैंड चौक, गुरुद्वारा चौक, मानव मंदिर चौक, भारत माता चौक, गंज चौक, बसंतपुर थाना तिराहा, दुर्गा चौक, महावीर चौक, फव्वारा चौक, अंबेडकर चौक, प्यारेलाल चौक सहित प्रमुख मार्गों से होते हुए पुनः पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचकर संपन्न हुई। रैली के दौरान शहरवासियों को सुरक्षित ड्राइविंग का संदेश दिया गया।
इस अवसर पर राजनांदगांव पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की कि—
दुपहिया वाहन चलाते समय अनिवार्य रूप से हेलमेट पहनें
तीन सवारी न चलें
वाहन चलाते समय मोबाइल फोन का उपयोग न करें
तेज एवं लापरवाही से वाहन न चलाएं
चारपहिया वाहन में सीट बेल्ट अवश्य लगाएं
नशे की हालत में वाहन चलाने से बचें
निर्धारित गति सीमा का पालन करें
पुलिस ने स्पष्ट किया कि यातायात रथ, जागरूकता रैलियों एवं अन्य कार्यक्रमों के माध्यम से सड़क सुरक्षा को लेकर यह अभियान लगातार जारी रहेगा, ताकि सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाई जा सके और नागरिकों की जान सुरक्षित रहे।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
