August 27, 2026
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    रायपुर / शौर्यपथ / महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को रोजगार प्रदान करने में छत्तीसगढ़ पूरे देश में अव्वल रहा है। कबीरधाम जिला वित्तीय वर्ष 2020-21 में अब-तक सर्वाधिक परिवारों को 100 दिनों का रोजगार देने में राज्य में प्रथम स्थान पर है, वहीं बिलासपुर और राजनांदगांव जिले क्रमशः दूसरे व तीसरे स्थान पर है। पूरे राज्य में जून माह तक 55 हजार 981 परिवारों को 100 दिन का रोजगार उपलब्ध कराया गया है, जिसमें से कबीरधाम जिला में सर्वाधिक 6 हजार 139 परिवारों को 100 दिन का रोजगार उपलब्ध कराए गए है, जो कि पूरे प्रदेश का 11 प्रतिशत है।
    मनरेगा अंतर्गत जिले में बड़ी संख्या पर रोजगार मूलक कार्य कराए जा रहे है। लॉकडाउन के समय कार्य के दौरान सभी सुरक्षा मानकों का पूरा पालन किया गया। कबीरधाम जिले में इस वित्तीय वर्ष में 1 लाख 47 हजार 862 परिवारों को रोजगार देते हुए अब तक 63.49 लाख से अधिक मानव दिवस रोजगार का सृजन किया जा चुका है।
    जिले के अधिकारियों ने बताया कि इस वर्ष लगभग 77 लाख मानव दिवस का लक्ष्य रखा गया था, उसके विरूद्ध इस वित्तीय वर्ष के तीन माह में ही 63 लाख से अधिक के मानव दिवस रोजगार का सृजन कर लिया गया है। जो कि लक्ष्य का 82 प्रतिशत है। इस तरह आने वाले समय में मनरेगा के तहत लक्ष्य से और अधिक ग्रामीणों को रोजगार प्राप्त हो जाएगा।

    रायपुर / शौर्यपथ / राज्य शासन की मंशा के अनुरूप वनवासियों एवं किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत करने के लिए बेहतर प्रयास किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में कांकेर जिले के सिंगारभाट स्थित कृषि विज्ञान केन्द्र में कोदो, कुटकी व रागी के प्रोसेसिंग के लिए संयत्र स्थापित किया जायेगा। इस संयंत्र के लग जाने से कोदो, कुटकी और रागी की खेती करने वाले किसानों को उनकी उपज का वाजिब मूल्य मिलेगा।

    विधायक शिशुपाल शोरी, मुख्यमंत्री के संसदीय सलाहकार राजेश तिवारी, कलेक्टर के.एल. चौहान तथा वन मण्डाधिकारी अरविंद पी.एम. की उपस्थिति में आज इस संबंध में जिला कार्यालय में विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक आयोजित की गई। कोदो, कुटकी और रागी के प्रोसेसिंग व विपणन के लिए किसानों, महिला स्व-सहायता समूह एवं युवा समूहों को दायित्व सौंपा जायेगा। कृषक उत्पादक संगठन बनाकर उसके माध्यम से कोदो, कुटकी और रागी फसलों का उत्पादन एवं संग्रहण किया जायेगा। महिला और युवा समूह के माध्यम से इसका प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन का कार्य कर कृषकों को आर्थिक रूप से सुदृढ़ किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि प्रभारी मंत्री गुरू रूद्रकुमार के मार्गदर्शन में कांकेर विकासखण्ड के अंतर्गत ग्राम पंचायत मर्दापोटी सर्कल के ग्राम इच्छापुर में हर्रा लघु वनोपज के प्रसंस्करण के लिए भी एक पृथक प्रोसेसिंग यूनिट लगाने की तैयारी पूर्व से की जा रही है। इस प्रकार कांकेर में लघु धान्य और लघु वनोपज आधारित दो प्रोसेसिंग यूनिट लग रहे हैं।

    रायपुर / शौर्यपथ / मुख्य सचिव आर.पी. मण्डल की अध्यक्षता में आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में परियोजना निर्माण एवं क्रियान्वयन समिति की राज्य स्तरीय बैठक सम्पन्न हुई। बैठक में बिलासपुर स्मार्ट सिटी परियोजना के विविध कम्पोनेंट्स पर विस्तार से विचार विमर्श और रायपुर स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत किए गए कार्यों की समीक्षा की गई। बैठक में बस्तर में प्रस्तावित बोधघाट बहुउद्देशीय परियोजना के संबंध में चर्चा हुई। बैठक में अपर मुख्य सचिव वित्त अमिताभ जैन एवं मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव सुब्रत साहू भी शामिल हुए।
    मुख्य सचिव ने बिलासपुर स्मार्ट सिटी परियोजना पूरी गुणवत्ता और तकनीकी से करने के निर्देश नगरीय प्रशासन विभाग को दिए। बिलासपुर नगर निगम के आयुक्त ने स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के कम्पोनेंट्स के संबंध में प्रजेंटेशन प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि बिलासपुर स्मार्ट सिटी के लिए 163 करोड़ 48 लाख रूपए की योजना तैयार की गई है। मुख्य सचिव ने रायपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड के कार्यो की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को स्ट्रीटलाईट के लिए टाईमर निर्धारित करने के निर्देश दिए है। नगरीय विकास विभाग की सचिव श्रीमती अलरमेल मंगई डी. ने बताया कि रायपुर स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत 190 करोड़ रूपए व्यय किए जा चुके है। रायपुर नगर निगम के आयुक्त ने बताया कि रायपुर में पेयजल आपूर्ति के तहत वाटरमीटर लगाए जाने की योजना है। उन्होंने बताया रायपुर में मोतीबाग और गंज मंडी क्षेत्र में उच्च क्षमता की पानी टंकियां बनायी गयी है। जल संसाधन विभाग के सचिव श्री अविनाश चंपावत ने बताया कि बस्तर क्षेत्र में बोधघाट बहुउद्देशीय परियोजना के तहत सर्वे का कार्य प्रारंभ कर दिया गया है। बैठक में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के प्रमुख सचिव गौरव द्विवेदी, उद्योग विभाग के प्रमुख सचिव मनोज पिंगुआ, लोक निर्माण विभाग के सचिव सिद्धार्थ कोमल परदेशी, आवास एवं पर्यावरण विभाग की सचिव श्रीमती संगीता पी. सहित अन्य विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।

    रायपुर / शौर्यपथ / मुख्य सचिव आर.पी. मंडल की अध्यक्षता में आज मंत्रालय महानदी भवन नवा रायपुर में छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल की 47वीं बैठक सम्पन्न हुई। प्रदूषण नियंत्रण एवं पर्यावरण संरक्षण हेतु अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। सेक्टर-13 नवा रायपुर अटल नगर में मंडल द्वारा अत्याधुनिक केन्द्रीय पर्यावरणीय प्रयोगशाला लोक निर्माण विभाग के माध्यम से तैयार की जाएगी। विभिन्न पर्यावरणीय पैरामीटर्स को मापने के लिए छत्तीसगढ़ राज्य की यह अत्याधुनिक प्रयोगशाला होगी, जिसमें जन-जागरूकता के लिए विभिन्न पर्यावरणीय विषयों पर मॉडल्स की प्रदर्शनी भी रहेगी।
    बैठक में छत्तीसगढ़ राज्य के उद्योग जैसे स्पंज आयरन संयंत्र, स्टील प्लांट, सीमेंट प्लांट आदि में बड़ी मात्रा में लगने वाले कच्चे माल आयरन ओर, जिप्सम, कोयला, स्पंज आयरन, सीमेंट आदि का परिवहन सड़क मार्ग से मेकेनिकली कव्हर्ड वाहनों से ही किए जाने का निर्णय लिया गया आदि एवं वाहनों मेकेनिकली कव्हर्ड वाहनों की अनुपलब्धता की स्थिति में उद्योगों को एक वर्ष का समय इस शर्त के साथ प्रदान किया गया कि उद्योगों द्वारा कच्चे माल/उत्पादों का परिवहन तारपोलिन अथवा उपयुक्त मटेरियल से उचित एवं पर्याप्त रूप से ढंककर किया जाए। बैठक में गंभीर प्रदूषित औद्योगिक क्षेत्र रायपुर के सिलतरा एवं उरला तथा अन्य प्रदूषित क्षेत्र कोरबा एवं भिलाई में प्रदूषण के मुख्य स्त्रोतों का अनुपात एवं उसे वहन करने की क्षमता का अध्ययन ख्यातिलब्ध संस्थाओं जैसे आई.आई.टी., एनआईटी अथवा नीरी नागपुर से कराए जाने का निर्णय लिया गया। बैठक में नेशनल क्लीन एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग सिस्टम के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। इसी प्रकार प्रदेश की 5 प्रदूषित नदियों में अपस्ट्रीम एवं डाउनस्ट्रीम में 10 कंटीन्यूअस वाटर क्वालिटी मॉनिटरिंग सिस्टम के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई।
    बैठक में निर्णय लिया गया कि पर्यावरण संरक्षण हेतु मंडल रायपुर, भिलाई-दुर्ग एवं बिलासपुर के ऐतिहासिक महत्व के कुछ तालाबों में पर्यावरणीय सुधार एवं उनके जीर्णोद्धार का कार्य भी करेगा। इसके लिए कार्य प्रस्ताव तैयार करने का निर्णय लिया गया। बैठक में प्रबंध संचालक वन विकास निगम श्री राजेश गोवर्धन, प्रबंध संचालक छत्तीसगढ़ अधोसंरचना विकास निगम अनिल राय, आयुक्त नगर पालिक निगम बिलासपुर प्रभाकर पाण्डेय एवं सदस्य सचिव छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल आर.पी. तिवारी उपस्थित थे।

    राज्यपाल से खादी और ग्रामोद्योग आयोग के उपमुख्य कार्यकारी अधिकारी त्रिभुवन ने भेंट की

    रायपुर / शौर्यपथ / राज्यपाल सुश्री अनुसुईया उइके से यहां राजभवन में खादी और ग्रामोद्योग आयोग, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय, भारत सरकार के छत्तीसगढ़ के राज्य कार्यालय के उपमुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री एस.एस. त्रिभुवन ने सौजन्य मुलाकात की। राज्यपाल ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आत्मनिर्भर अभियान की शुरूआत की है। उन्होंने इसके लिए आवश्यक है कि युवा स्वरोजगार से जुड़े, इससे वे स्वयं अपने पैरों पर खड़े होंगे और दूसरों को भी रोजगार देंगे। ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में महिलाएं भी स्वयंसहायता समहू बनाकर स्वयं का उद्यम शुरू कर सकते हैं। इससे महिलाएं जागरूक और सशक्त होंगी। इस कोरोना काल में बड़ी संख्या में श्रमिक प्रदेश में आए हैं। उन्हें खादी एवं ग्रामोद्योग विभाग द्वारा संचालित योजना सहित अन्य योजनाओं से जोड़ा जाना चाहिए, ताकि वे अपना जीवनयापन कर सके। श्रमिकों एवं किसी भी व्यक्ति को स्वरोजगार का ऋण देने से पहले उन्हें संबंधित रोजगार का प्रशिक्षण देना चाहिए, जिससे तकनीकी रूप से दक्ष होने पर वह व्यक्ति योजना के तहत दिये जाने वाले सहयोग का सदुपयोग कर सकेगा।
    सुश्री उइके ने कहा कि प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय, भारत सरकार की एक अति महत्वपूर्ण योजना है, प्रदेश के बेरोजगार युवक-युवती इसका लाभ उठाएं। श्री त्रिभुवन ने बताया कि इस कार्यक्रम के तहत इस योजना के तहत स्वयं के उद्यम शुरू करने के लिए रू. 25 लाख तक का ऋण बैंक के माध्यम से उपलब्ध कराया जाता है, जिसमें 35 प्रतिशत तक सब्सिडी हितग्राही को प्राप्त होता है। एस.टी.एस.सी. एवं महिला वर्ग को ग्रामीण क्षेत्रों में 35 प्रतिशत और शहरी क्षेत्रों में 25 प्रतिशत तक छूट दी जाती है तथा 5 प्रतिशत तक स्वयं का अंशदान होता है। इसमें सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि 1 लाख रू. पर एक व्यक्ति को रोजगार देना अनिवार्य होता है। इच्छुक युवक-युवतियां खादी ग्रामोद्योग के कार्यालय के संपर्क कर सकते हैं और इस योजना का लाभ उठा सकते हैं। उन्होंने बताया कि हमारे कार्यालय का दूरभाष क्रमांक 07712886428 है और वेबसाईट www.pmegpeportal.gov.in है।
    इस अवसर पर राज्यपाल ने खादी और ग्रामोद्योग आयोग के निर्देशिका का विमोचन किया। आयोग की तरफ से राज्यपाल को कोसे की बनी शाल और साड़ी भेंट की गई।

    जीएसटी संग्रहण पिछले वर्ष के मुकाबले 22 प्रतिशत बढ़ा
    वाहन रजिस्ट्रेशन में मई माह की तुलना में साढ़े तीन गुना वृद्धि
    संकट के इस काल में छत्तीसगढ़ ने दिखाई राह: मुख्यमंत्री बघेल

    रायपुर / शौर्यपथ / कोरोना वायरस (कोविड-19) के चलते पूरे देश में जहां आर्थिक मंदी का माहौल है, वहीं अनलॉक के बाद छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था पूरी रफ्तार से चल पड़ी है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा किए गए सकारात्मक प्रयासों से राज्य में जीएसटी, आटोमोबाईल, कृषि सहित अन्य क्षेत्रों में तेेजी देखी जा सकती है। राज्य में जीएसटी संग्रहण पिछले वर्ष की तुलना में जहां 22 प्रतिशत अधिक बढ़ा है, वहीं वाहनों के रजिस्ट्रेशन में मई माह की तुलना में जून माह में साढ़े तीन गुना वृद्धि दर्ज की गई है। इसके साथ ही मनरेगा के तहत लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने और वनवासियों को राहत पहंुचाने के लिए वनोपजों के संग्रहण में छत्तीसगढ़ देश में पहले स्थान पर है।
    लॉकडाउन के दौरान भी छत्तीसगढ़ में जीएसटी में इजाफा हुआ है। पिछले साल जून महीने के मुकाबले इस साल जून में 22 फीसदी ज्यादा जीएसटी का संग्रह हुआ है। वर्ष 2019 में जहां 2,093 करोड़ रूपए जीएसटी संग्रह हुआ था, वहीं 2020 में 2,549 जीएसटी प्राप्त हुआ है। लॉकडाउन के दौरान छत्तीसगढ़ में ऑटोमोबाइल इंड्रस्ट्री में भी बेहतर कारोबार देखने को मिला है। जून 2020 में जयपुर (राजस्थान) के बाद रायपुर (छत्तीसगढ)़ में सर्वाधिक कार और बाइक की बिक्री हुई है। रायपुर में मई माह में जहां 7 हजार 603 बाइक बिकी थी, वहीं जून माह में यह संख्या बढ़कर 27 हजार हो गई। इसी तरह मई माह में एक हजार 107 कार बिकी थी, वहीं जून में यह संख्या बढ़कर 2 हजार 889 हो गई। आरटीओ कार्यालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार लॉकडाउन अवधि में छत्तीसगढ़ में अप्रैल माह में 891 वाहन, मई माह में 9681 वाहन और जून माह में 32 हजार 982 वाहनों का रजिस्ट्रेशन परिवहन कार्यालयों में हुआ है। राजीव गांधी किसान न्याय योजना की प्रथम किस्त प्राप्त होने के बाद राज्य में किसानों ने 3 हजार नये टेªक्टर भी खरीदे हैं।
    छत्तीसगढ़ राज्य महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना में जॉब कॉर्डधारी परिवारों को 100 दिनों का रोजगार देने में देश में शीर्ष स्थान पर है। इसी प्रकार लक्ष्य के विरूद्ध रोजगार सृजन में देश में दूसरे स्थान पर है। पहली तिमाही में ही राज्य में 8.85 करोड़ मानव दिवस का रोजगार सृजन किया गया है। अब तक 55,981 परिवारों ने 100 दिनों का रोजगार प्राप्त कर लिया है। देश में 100 दिनों का रोजगार हासिल करने वाले कुल परिवारों में अकेले छत्तीसगढ़ की हिस्सेदारी 41 प्रतिशत है। छत्तीसगढ़ ने रोजगार सृजन के मामले में सालभर के लक्ष्य का 66 प्रतिशत पूरा कर लिया है। इसमें लक्ष्य का 70 प्रतिशत से अधिक काम का लक्ष्य हासिल करने में नक्सल प्रभावित जिले आगे हैं।
    मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने राज्य में समर्थन मूल्य पर खरीदी के लिए वनोपजों की संख्या 7 से बढ़ाकर 31 कर दी है। इससे प्रदेश के वनवासी परिवारों को काफी राहत मिली है। लॉकडाउन अवधि में छत्तीसगढ़ प्रदेश लघु वनोपजों के संग्रहण में देश में पहले नम्बर पर है। छत्तीसगढ़ ने वनोपज संग्रहण के सालाना लक्ष्य को 6 माह में पूरा कर लिया है। राज्य में अब तक 104 करोड़ के डेढ़ लाख क्विंटल लघु वनोपजों का संग्रहण किया गया है।
    वैश्विक महामारी कोविड-19 की वजह से उत्पन्न कठिन परिस्थितियों के बावजूद छत्तीसगढ़ में बेरोजगारी दर में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गयी है। सीएमआईई के सर्वेक्षण में प्रदेश में बेरोजगारी की दर अप्रैल माह में 3.4 प्रतिशत रही, जो 12 महीने के सबसे निचले स्तर पर थी। यह उसी अवधि में राष्ट्रीय बेरोजगारी की दर (23.5 प्रतिशत) से काफी कम रही। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने अपनी रिपोर्ट में लॉकडाउन के दौरान छत्तीसगढ़ में कृषि और उससे सम्बंधित कार्यों में बनी तेजी को सराहा। उसने अपनी रिपोर्ट में बताया कि देश व्यापी लॉकडाउन में भी छत्तीसगढ़ ने तेजी से आर्थिक वृद्धि दर्ज की है।
    मुख्यमंत्री ने कहा है कि संकट के इस समय में भी छत्तीसगढ़ प्रदेश ने देश को राह दिखाई है। इस दौरान राज्य ने जो उपलब्धियां हासिल कीं वह शासन के संकल्प का परिणाम तो है ही, छत्तीसगढ़ के लोगांे के अनुशासन का भी परिणाम है। उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी को नियंत्रित करने और उपचार की सुविधाएं मुहैया कराने के मामले में भी हमारी स्थिति बेहतर है। इसी संकल्प और अनुशासन के साथ हम न सिर्फ इस संकट से पार पाएंगे, बल्कि नवा छत्तीसगढ़ गढ़ने के अपने लक्ष्य को समय पर हासिल भी कर लेंगे।

    शोर्यापथ/जांजगीर चांपा/हसौद-जहां एक ओर देश में कोरोना के लगातार मामले सामने आने से लोग परेशान हैं वहीं दूसरी ओर प्रशासन कि लचार सिस्टम ने लोगों को खून के आंसू रुला रहे हैं दरअसल पुरा मामला जांजगीर-चांपा जिले के तहसील कार्यालय हसौद का हैं जहां हालात सुधरने का नाम नहीं ले रहे,बुधवार को11:30बजे तक हसौद तहसील कार्यालय का ताला नहीं खुला, तहसील में काम के लिए आए ग्रामीण इधर-उधर भटकते नजर आये वहीं इसकी जानकारी जब नायब तहसीलदार से लेनी चाहिए तो नायब तहसीलदार किसी का भी फोन उठाना उचित नहीं समझ रहे हैं कई बार फोन करने के बाद भी कुंभकर्णी नींद में थे तहसील खुलने का समय10.30बजे है, लेकिन11:30बजे तक कार्यालय का ताला नहीं खुला। अपने काम के लिए तहसील आए ग्रामीणों के इंतजार की जब हद पार हो गई तो उन्होंने कार्यालय के कर्मचारियों सूचना के साथ ही शिकायत करने कि बात कहीं तब कही जाकर तहसील के कर्मचारियों ने आकर ताला खोला11:30बजे तक तो तहसील में लटका रहा ताला ग्रामीण ने बताया कि हसौद तहसील कार्यालय पर दूर-दूर से लोग आकर बैठे थे लेकिन11:30बजे तक तहसील में कोई कर्मचारी नही आया और न ताला खुला। हमने वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत कराया तब12बजे के लगभग तहसील कार्यालय खुला दिनभर में नहीं हुआ ग्रामीणों का काम ग्रामीणों ने कहा कि कल फिर आना पड़ेगा तहसील कार्यालय ग्रामीणों ने यह भी बताया कि सुबह से अपनी जमीन की नकल निकलवाने के लिए तहसील कार्यालय पर बैठा था। लेकिन दफ्तर न खुलने से हमें फिर चक्कर लगाना पड़ेगा। किराया खर्च होगा और समय बर्बाद तहसील ऑफिस था बंद, पूरा दिन खराब हो गया कई ग्राम पंचायत के आए ग्रामीणों ने बताया कि आज सुबह से तहसील कार्यालय पर नामांतरण के काम से आया था, लेकिन11:30बजे तक तहसील कार्यालय का ताला ही नहीं खुला जिससे हमारा पूरा दिन खराब हो गया।

    शौर्यपथ जांजगीर चांपा जिले में रेत माफियाओ ने बीती रात एसडीएम और नायब तहसीलदार को जान से मारने की कोशिश की और अवैध रेत से भरे हाइवा को एसडीएम के कार को ठोकर मार कर फरार हो गया, हालांकि इस घटना में एसडीएम और अधिकारियों को चोट नही आई लेकिन उनका कार छतिग्रस्त हो गया। पहले भी एसडीएम की टीम ने अवैध रेत से भरे ट्रेक्टर और हाईवा के खिलाफ कारवाई की जिले में इन दिन रेत माफियाओं का हौसला इस कदर बुलंद है कि वे देर रात नदी से अवैध रेत परिवहन करने से बाज नही आ रहे है और कारवाई के लिए गए अधिकारियों को जान से मारने में भी नही चुक रहे है। जांजगीर एसडीएम मेनका प्रधान ने बताया कि बीती रात मुखबीर की सूचना मिलने पर अमोदा और दहिदा क्षेत्र में हसदेव नदी से रेत का अवैध उत्खनन कर ट्रेक्टर और हाईवा से परिवहन किया जा रहा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसडीएम ने नायब तहसीलदार ,पटवारी और पुलिस कर्मियों के साथ कारवाई के  लिए शासकीय और अपने निजी वाहन से मौके के लिए रवाना हुए। और 9 ट्रेक्टर के साथ 4 हाईवा और एक जेसीबी मशीन को नाबालिक बच्चों को चलाते और अवैध रुप से रेत परिवहन करते हुए पकडा। इसी बीच एक अन्य हाईवा तेज गति से आई और जिस गाडी में एसडीएम और नायब तहसीलदार बैठे थे उसे ठोकर मार कर भाग निकला। घटना के बाद टीम ने हाइवा को पकडने का प्रयास किया लेकिन हाइवा चालक वाहन लेकर फरार हो गया। इस घटना से एसडीएम और अन्य अधिकारी बाल बाल बचे ।

    // माडमसिल्ली में वाटर स्पोर्टस और माना-तूता में बढ़ाएं पर्यटक सुविधाएं
    // होटल प्रबंधन संस्थान में इसी सत्र से शुरू होगा पाठ्यक्रम
    // पर्यटन मण्डल के संचालक मण्डल की बैठक में लिए गए महत्वपूर्ण निर्णय

    रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ में लोकल टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश के प्रमुख बांधों और वाटर बॉडी में वाटर स्पोर्ट, कैफेटेरिया सहित विभिन्न सुविधाएं विकसित की जाएगी। स्थानीय युवाओं को पर्यटन से जोडऩे के लिए भी इस सत्र से नवा रायपुर स्थित होटल मेनेजमेंट संस्थान में पाठ्यक्रम शुरू करने का निर्णय लिया गया। पर्यटन मंत्री ताम्रध्वज साहू छत्तीसगढ़ पर्यटन मण्डल के संचालक मंडल की बैठक को सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने बैठक में कहा कि कोरोना संकट काल में राज्य के पर्यटन स्थलों में स्थानीय पर्यटकों को आकर्षित करने की रणनित बनायी जाए। पर्यटन स्थलों में बेहतर सुविधाएं विकसित की जाए। उन्होंने कहा कि पहले चरण में धमतरी जिले के माडम सिल्ली बांध में वाटर टूरिज्म के लिए शीघ्र कार्ययोजना तैयार की जाए।
    बैठक में मंत्री साहू ने रायपुर स्थित जोहार छत्तीसगढ़ होटल में साज सज्जा कर इसे नया रूपरूप देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इस होटल के परिसर में कामर्शियल दृष्टिकोण से पर्यटन भवन का निर्माण किया जाए ताकि इसका बहुउद्देशीय उपयोग हो सके। उन्होंने अधिकारियों को इस सबंध में जल्द प्रस्तार तैयार करने भी कहा। मंत्री साहू ने राजधानी के निकट स्थित माना-तूता में पर्यटक सुविधाओं के विकास के लिए योजना बनाने के निर्देश दिए।
    छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के संचालक मंडल की बैठक में पर्यटन विकास से संबंधित कार्यों को त्वरित गति से संपन्न करने के लिए प्रदेश के सभी पर्यटन क्षेत्रों को दो या तीन जोन में विभाजित करने के संबंध में भी विचार-विमर्श किया गया। इस दौरान पर्यटन से संबंधित विभिन्न होटल, मोटल, रिसॉर्ट के संचालन, पर्यटन की पोस्ट कोविड तैयारियों, पर्यटन के प्रचार प्रसार, वॉटर टूरिज्म, एडवेंचर टूरिज्म, राम वन पाथ गमन के विकास कार्य सहित विभिन्न बिन्दुओं पर चर्चा की गई। बैठक में पर्यटन विभाग के सचिव अन्बलगन पी., प्रबंध संचालक इफ्फत आरा, महाप्रबंधक सुनील अवस्थी सहित वाणिज्य, वित्त, परिवहन, वन, संस्कृति, रेलवे, एयरपोर्ट अथॉरिटी, इंडियन एयरलाइंस कॉरपोरेशन लिमिटेड के प्रतिनिधि उपस्थित थे।

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