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March 10, 2026
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शौर्यपथ

शौर्यपथ

  दुर्ग / शौर्यपथ / वनमंडलाधिकारी दुर्ग वनमंडल द्वारा 23 एवं 24 फरवरी 2026 को अवैध काष्ठ परिवहन के विरुद्ध विशेष अभियान चलाते हुए बड़ी कार्यवाही की गई। इस दौरान अवैध लकड़ी परिवहन में संलिप्त चार वाहनों को जब्त किया गया।
प्राप्त गोपनीय सूचना के आधार पर वनमंडलाधिकारी दुर्ग के निर्देशन एवं उप वनमंडलाधिकारी के नेतृत्व में उडऩदस्ता दल दुर्ग वृत्त तथा परिक्षेत्र सहायक भिलाई-03 की संयुक्त टीम ने 23 एवं 24 फरवरी को प्रात: 3 बजे से 6 बजे तक विशेष रात्रि गश्त अभियान चलाया गया। अभियान के दौरान अवैध रूप से काष्ठ परिवहन करते हुए कुल चार वाहन पकड़े गए। वाहन क्रमांक सीजी-10सी 3389 में कहुआ मिश्रित जलाऊ लकड़ी, टाटा 1109, क्रमांक सीजी-08 एल 3736 में कहुआ मिश्रित जलाऊ लकड़ी, टाटा 1109, क्रमांक सीजी-04 जेसी 9290 में कहुआ मिश्रित गोला, टाटा 1109 क्रमांक सीजी-04 एमएफ 6945 में कहुआ मिश्रित जलाऊ लकड़ी, सभी वाहन अवैध काष्ठ से लदे पाए गए, जिन्हें विधिवत जब्त कर पुलगांव एवं पाटन डिपो में जमा कराया गया। उक्त प्रकरणों में संबंधित आरोपियों के विरुद्ध वन अपराध प्रकरण क्रमांक 79/11 दिनांक 23.02.2026 तथा 91/3, 91/4, 91/5 दिनांक 24.02.2026 के तहत मामला दर्ज कर विधि अनुसार वैधानिक कार्रवाई प्रारंभ कर दी गई है।
वनमंडलाधिकारी दुर्ग ने बताया कि वन संपदा की सुरक्षा विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता है। अवैध काष्ठ परिवहन एवं तस्करी के विरुद्ध सतत निगरानी, सघन गश्त एवं कठोर दंडात्मक कार्रवाई निरंतर जारी रहेगी। विभाग इस दिशा में पूर्णत: सजग एवं प्रतिबद्ध है।

  रायपुर/ शौर्यपथ / बजट पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि ज्ञान गति की असफलता के बाद संकल्प का नया जुमला वित्त मंत्री ने फेंका है। यह बजट भी जनता को निराश करने वाला बजट है। वित्त मंत्री हाई स्कूल के बच्चे के समान कल्पनाओं में डूबते नजऱ आये। इनका बजट राज्य की जमीनी हकीकत से कोसों दूर नजर आया। उन्होंने अपने बजट भाषण में बस्तर एवं सरगुजा के विकास के सब्जबाग जो दिखाये, लेकिन इन वादों को पूरा करने बजट प्रावधान निराश करने वाले रहे।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि पिछले बजट में 20 हजार शिक्षकों की भर्ती की घोषणा वित्त मंत्री ने किया था, इस बजट में वे यह नहीं बताये कि उनमें से कितने की भर्ती हुई? भाजपा ने विधानसभा चुनाव में मोदी की गारंटी के पांच साल में 1 लाख युवाओं को नौकरी देने का वादा किया था, लेकिन इस बजट में नई नौकरियों के लिए वित्त मंत्री ने कुछ नहीं किया। न नये स्कूल खोलने की बात है, न नये महाविद्यालय खोलने की बात है और न ही कौशल उन्नयन के लिए कुछ है। यही नहीं न नये सिंचाई के बांध बनाने के लिए कुछ है और न ही महिला स्व-सहायता समूहों के रोजगार के लिए कुछ है, न उद्योगों के विकास के लिए कुछ है। रमन सरकार के 15 साल से लेकर साय सरकार के तीन बजट में भाजपा अभी तक केवल मेट्रो ट्रेन का सर्वे ही करवा रही है।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि युवाओं को बेरोजगारी भत्ता, छात्राओं को मुफ्त यातायात के वादों पर भी वित्त मंत्री ने कुछ नहीं किया है। उद्योगों के लिए लैंड बैक तैयार करने की घोषणा कर वित्त मंत्री ने किसानों की जमीने जबरिया छीनने की मंशा को स्पष्ट किया है। घरेलू बिजली उपभोक्ताओं के लिए मात्र 80 करोड़ का प्रावधान बताता है कि साय सरकार 200 यूनिट मुफ्त बिजली योजना भी बंद करने जा रही है। डीएड अभ्यर्थियों की भर्ती, आंगनबाड़ी बहनों और रसोईया संघ के लिए भी बजट में कुछ नहीं है। अनियमित कर्मचारियों की नियमित करने के लिए बजट में कुछ नहीं है। 56 हजार शिक्षकों के खाली पदों को भर्ती करने के लिए बजट में कुछ नहीं है। भर्ती परीक्षा की एजेंसी को मजबूत करने की बात किया गया लेकिन 1 वर्षों में कितनी नौकरियां देंगे इसमें कुछ नहीं है।

  भिलाई / शौर्यपथ / आज शांति नगर के वरिष्ठ नागरिकों ने वरिष्ठ कांग्रेसी नेता श्री बृजमोहन सिंह एवं पार्षद अभिषेक मिश्रा के नेतृत्व में नगर निगम भिलाई के महापौर एवं आयुक्त महोदय से मुलाकात कर शांति नगर दशहरा मैदान के संबंध में नागरिकों की भावनाओं से अवगत कराया।
प्रतिनिधिमंडल ने स्पष्ट रूप से मांग रखी कि नगर निगम द्वारा जारी किया गया टेंडर तत्काल निरस्त किया जाए। इस ग्राउंड से हजारों खेल प्रेमियों की खेल भावना जुड़ी हुई है, इसलिए इसे किसी भी प्रकार की टेंडर प्रक्रिया के अंतर्गत न लाया जाए।
नागरिकों की ओर से यह मांग रखी गई कि मैदान को टेंडर के माध्यम से नहीं, बल्कि रुचि की अभिव्यक्ति (श्व&श्चह्म्द्गह्यह्यद्बशठ्ठ शद्घ ढ्ढठ्ठह्लद्गह्म्द्गह्यह्ल) के माध्यम से केवल रख-रखाव हेतु शांति नगर की किसी स्थानीय समिति/संस्था को सौंपा जाए, ताकि मैदान की नियमित देखरेख, घास में समय पर पानी, लाइटों की निगरानी, गड्ढों की मरम्मत एवं असामाजिक गतिविधियों पर रोक सुनिश्चित की जा सके। वर्तमान में कई बाहरी लोग टूर्नामेंट आयोजित कर एंट्री फीस लेते हैं, परंतु मैदान के रख-रखाव में सहयोग नहीं करते, जिससे मैदान को नुकसान पहुंचता है।
प्रतिनिधिमंडल ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि टेंडर प्रक्रिया समाप्त नहीं की जाती है, तो शांति नगर के सैकड़ों खेल प्रेमी एवं नागरिक नगर निगम के विरुद्ध आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे और यह विरोध तब तक जारी रहेगा, जब तक टेंडर प्रक्रिया पूरी तरह समाप्त नहीं कर दी जाती।
महापौर महोदय ने चर्चा के दौरान स्पष्ट किया कि मैदान को रुचि की अभिव्यक्ति के अनुसार ही दिया जाएगा तथा वर्तमान टेंडर प्रक्रिया में आवश्यक बदलाव किए जाएंगे। उन्होंने आश्वस्त किया कि नियम एवं शर्तें नागरिकों के सुझावों के अनुरूप निर्धारित की जाएंगी। महापौर महोदय ने यह भी कहा कि नगर निगम का उद्देश्य भी मैदान को सुरक्षित एवं संरक्षित रखना है, इसी भावना से प्रक्रिया प्रारंभ की गई थी, जिसे अब नागरिकों की मांग के अनुसार संशोधित किया जाएगा।
यह पूरी पहल शांति नगर के नागरिकों की मांग एवं भावनाओं को ध्यान में रखते हुए की गई है।
इस अवसर पर प्रमुख रूप से बृजमोहन सिंह,अभिषेक मिश्रा ,राजेश शर्माबलदेव सिंह धारीवाल,अमर सिंह ,राधे कांत मिश्रा ,नवतेज सोहेल,केदार बंसल,गिरीश खापर्डे,महेंद्र यादव ,संजय उपाध्याय ,सत्यनारायण,अजय त्रिपाठी,भारत सिंह,चंद्रभूषण झा,मुरलीपोद्दार ,आशीष त्रिपाठीउपस्थित थे

// सड़क बाधित करने वालों पर होगी जब्ती व जुर्माना, महापौर अलका बाघमार
// अग्रसेन चौक से पुराना बस स्टैंड तक 3 घंटे चला निरीक्षण अभियान,
// व्यापार सड़क पर नहीं, निर्धारित स्थान पर करें, महापौर का सख्त निर्देश
// इंदिरा मार्केट में अव्यवस्था बर्दाश्त नहीं, अधिकारियों को नियमित निगरानी के आदेश,

    दुर्ग/ शौर्यपथ / नगर पालिक निगम सीमा क्षेत्र अंतर्गत शहर के हृदय स्थल इंदिरा मार्केट में आज महापौर अलका बाघमार ने सघन निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान वे अग्रसेन चौक स्टेशन रोड से लेकर पुराना बस स्टैंड तक भ्रमण करते हुए बाजार व्यवस्था का जायजा लिया।
इस अवसर पर लोक कर्म प्रभारी देव नारायण चंद्रकार, स्वास्थ्य विभाग प्रभारी नीलेश अग्रवाल, पार्षद गोविंद्र देवांगन,सावित्री दमाहे, सहायक अभियंता राजेन्द्र ढबाले, अतिक्रमण अधिकारी परमेश्वर, बाजार अधिकारी अभ्युदय मिश्रा सहित अतिक्रमण टीम के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे। लगभग 3 घंटे तक चले इस निरीक्षण में बाजार क्षेत्र की व्यवस्थाओं की बारीकी से समीक्षा की गई।
निरीक्षण के दौरान महापौर अलका बाघमार ने बाजार क्षेत्र में सड़क तक सामान फैलाकर व्यवसाय करने वाले व्यापारियों एवं ठेले-खोमचे संचालकों पर नाराजगी जताई।
उन्होंने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि आज समझाइश दी जा रही है, किन्तु पुन: दुकान के बाहर सड़क तक सामान पाए जाने पर जब्ती एवं जुर्माना की सख्त कार्रवाई की जाएगी। महापौर की उपस्थिति में सड़क तक सामान बाहर रखने वाले कुछ व्यापारियों से मौके पर ही जुर्माना वसूला गया।
कुआँ चौक के पास स्थित पांडेय जूस कॉर्नर द्वारा सड़क क्षेत्र तक नारियल रखकर व्यवसाय करने पर भी जुर्माना की कार्रवाई की गई। महापौर ने ठेले संचालकों को सख्त निर्देश देते हुए कहा कि सड़क छोड़कर अंदर की ओर व्यवस्थित ढंग से व्यवसाय करें।
उन्होंने कहा कि इंदिरा मार्केट में प्रतिदिन हजारों नागरिकों का आवागमन होता है, ऐसे में सड़क बाधित होने से आम जनता को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
महापौर अलका बाघमार ने अतिक्रमण अधिकारी परमेश्वर एवं बाजार अधिकारी अभ्युदय मिश्रा को निर्देशित किया कि बाजार क्षेत्र में नियमित रूप से विशेषकर शाम के समय निरीक्षण कर सतत निगरानी रखी जाए, ताकि बाजार क्षेत्र सुव्यवस्थित, स्वच्छ एवं यातायात के लिए सुगम बना रहे।

  रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि राज्य सरकार द्वारा प्रस्तुत वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट प्रदेश के सर्वांगीण विकास, अंत्योदय और आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़ के निर्माण के संकल्प को साकार करने वाला बजट है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार का पहला बजट "ज्ञान" और दूसरा बजट "गति" की थीम पर आधारित था, जबकि इस वर्ष का बजट "संकल्प" की भावना को केंद्र में रखकर तैयार किया गया है, जो विकसित भारत-विकसित छत्तीसगढ़ की दिशा में निर्णायक कदम सिद्ध होगा।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि इस बजट में समावेशी विकास, अधोसंरचना सुदृढ़ीकरण, निवेश संवर्धन, कुशल मानव संसाधन निर्माण, लाइवलीहुड, अंत्योदय तथा "पॉलिसी से परिणाम" तक की स्पष्ट रणनीति को प्राथमिकता दी गई है। यह बजट यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के विकसित भारत 2047 के विजन के अनुरूप प्रदेश की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार मिशन मोड में कार्य करने के लिए पांच मुख्यमंत्री मिशन प्रारंभ कर रही है, जिनमें मुख्यमंत्री अधोसंरचना मिशन, मुख्यमंत्री एआई मिशन, मुख्यमंत्री पर्यटन विकास मिशन, मुख्यमंत्री स्टार्टअप मिशन तथा मुख्यमंत्री खेल उत्कर्ष मिशन शामिल हैं। इन मिशनों के माध्यम से प्रदेश के विकास को नई दिशा, नई धार और नई गति मिलेगी।
उन्होंने कहा कि शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए स्कूल शिक्षा के लिए कुल बजट का 13.5 प्रतिशत प्रावधान किया गया है, जो सर्वाधिक है। बस्तर के अबूझमाड़ और जगरगुंडा में दो एजुकेशन सिटी स्थापित की जाएंगी, जिससे दूरस्थ क्षेत्रों के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध होगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि शासकीय अधिकारी-कर्मचारियों के लिए कैशलेस उपचार सुविधा हेतु भी बजट में प्रावधान किया गया है। औद्योगिक विकास को गति देने के लिए 23 नवीन औद्योगिक पार्कों की स्थापना हेतु 250 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं। वहीं शहरी क्षेत्रों के विकास के लिए मुख्यमंत्री आदर्श शहर समृद्धि योजना में 200 करोड़ रुपए तथा भूमि विकास बैंक के लिए भी 200 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है।
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ को धान का कटोरा कहा जाता है और कृषि क्षेत्र राज्य की अर्थव्यवस्था की आधारशिला है। इसी को ध्यान में रखते हुए कृषि क्षेत्र के लिए 13 हजार 500 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। किसानों को 3100 रुपए प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी के अंतर की राशि का भुगतान एकमुश्त करने की व्यवस्था जारी रहेगी और इसके लिए भी बजट में प्रावधान किया गया है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बस्तर और सरगुजा क्षेत्र का विकास सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इन क्षेत्रों में खाद्य, कृषि और उससे जुड़े उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए 100 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। साथ ही बकरी पालन, सूअर पालन और मधुमक्खी पालन जैसे गतिविधियों को बढ़ावा देकर स्थानीय लोगों की आय बढ़ाने के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं।
उन्होंने बताया कि इंद्रावती नदी पर देवरगांव और मटनार बैराज निर्माण के लिए 2000 करोड़ रुपए से अधिक का प्रावधान किया गया है, जिससे बस्तर क्षेत्र में सिंचाई क्षमता का विस्तार होगा और किसानों को बड़ा लाभ मिलेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि माओवादी उन्मूलन में बस्तर फाइटर्स की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। उनके योगदान को ध्यान में रखते हुए बस्तर फाइटर्स में 1500 नई भर्तियों का प्रावधान किया गया है। पर्यटन और स्थानीय रोजगार को बढ़ावा देने के लिए होमस्टे योजना हेतु 10 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है।
उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य और कनेक्टिविटी क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं, जिनमें कुनकुरी, मनेन्द्रगढ़, कबीरधाम, जांजगीर-चांपा एवं दंतेवाड़ा में मेडिकल कॉलेज संचालन, जगदलपुर-अंबिकापुर हवाई सेवाओं का विस्तार, अंदरूनी क्षेत्रों में मुख्यमंत्री बस सेवा तथा बस्तर एवं सरगुजा ओलंपिक्स के आयोजन शामिल हैं।
मुख्यमंत्री ने बताया कि युवाओं के लिए भर्ती प्रक्रियाओं को तेज करने हेतु व्यापम की दक्षता बढ़ाने के प्रावधान किए गए हैं। साथ ही युवाओं के शैक्षणिक भ्रमण के लिए छत्तीसगढ़ युवा दर्शन योजना प्रारंभ की जाएगी तथा लखपति दीदियों के भ्रमण कार्यक्रम के लिए भी बजट में प्रावधान किया गया है।
मुख्यमंत्री साय ने इस बजट को प्रदेशवासियों की आकांक्षाओं का प्रतिबिंब बताते हुए वित्त मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी एवं उनकी पूरी टीम को बधाई दी और कहा कि यह बजट प्रदेश को समृद्धि की नई ऊंचाइयों तक ले जाने में मील का पत्थर साबित होगा।

नई दिल्ली / 
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा केरल का आधिकारिक नाम बदलकर 'केरलमÓ किए जाने के ऐतिहासिक निर्णय पर केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने राज्य के लोगों को हार्दिक बधाई दी है। यह फैसला केरल के लोगों की लंबे समय से चली आ रही सांस्कृतिक और भाषाई मांग को पूरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण और सम्मानजनक कदम माना जा रहा है।
राज्य की विरासत को उसकी असली पहचान
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ङ्ग पर साझा किए गए अपने संदेश में श्री अमित शाह ने कहा कि 'केरलमÓ नाम राज्य की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और भाषाई विरासत को उसकी पूरी सच्चाई के साथ प्रतिबिंबित करता है। उन्होंने कहा कि यह नाम न केवल राज्य की प्राचीन पहचान को सहेजता है, बल्कि उसके गौरव और आत्मसम्मान को भी बनाए रखेगा।
लंबे समय की मांग को मिला संवैधानिक सम्मान
श्री शाह ने कहा कि केंद्र सरकार का यह निर्णय केरलवासियों की उस भावना का सम्मान है, जो वर्षों से अपनी मातृभाषा और परंपरा के अनुरूप राज्य के नाम को मान्यता दिलाने की मांग कर रहे थे।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कदम भारत की विविधता में एकता के सिद्धांत को और अधिक सशक्त करता है।
मोदी सरकार की सांस्कृतिक संवेदनशीलता का प्रतीक
राजनीतिक और सांस्कृतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह निर्णय मोदी सरकार की उस नीति को दर्शाता है, जिसमें स्थानीय पहचान, भाषा और परंपरा को राष्ट्रीय सम्मान देने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इससे पहले भी केंद्र सरकार ने ऐतिहासिक और सांस्कृतिक नामों को पुनस्र्थापित करने की दिशा में कई अहम फैसले किए हैं।
केरलम: नाम नहीं, आत्मा की पहचान
'केरलमÓ शब्द मलयालम भाषा और राज्य की सभ्यता से गहराई से जुड़ा हुआ है। यह नाम राज्य के इतिहास, समुद्री व्यापार, आयुर्वेद, साहित्य और सामाजिक चेतना की पहचान को और अधिक प्रामाणिक रूप में प्रस्तुत करता है।

नई दिल्ली/
भारत और इजरायल के बीच मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को लेकर वार्ता का पहला दौर 23 फरवरी 2026 को नई दिल्ली में प्रारंभ हुआ, जो 26 फरवरी 2026 तक चलेगा। यह पहल दोनों देशों के बीच व्यापार और आर्थिक सहयोग को नई ऊंचाई देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

नवंबर 2025 में दोनों पक्षों ने वार्ता के लिए संदर्भ की शर्तों (टीओआर) पर हस्ताक्षर कर एक संरचित ढांचा तैयार किया था। वित्त वर्ष 2024-25 में भारत और इजरायल के बीच कुल द्विपक्षीय व्यापार 3.62 बिलियन अमेरिकी डॉलर रहा। दोनों देश कई क्षेत्रों में एक-दूसरे के पूरक हैं, ऐसे में प्रस्तावित एफटीए से व्यापार में स्थिरता और पूर्वानुमेयता आएगी, विशेषकर एमएसएमई क्षेत्र को इसका लाभ मिलेगा।

इन प्रमुख विषयों पर होगी चर्चा

वार्ता के इस दौर में तकनीकी विशेषज्ञ वस्तुओं और सेवाओं के व्यापार, रूल्स ऑफ ओरिजिन, स्वच्छता एवं पादप स्वच्छता उपाय (SPS), व्यापार में तकनीकी बाधाएं (TBT), सीमा शुल्क प्रक्रिया एवं व्यापार सुगमीकरण, तथा बौद्धिक संपदा अधिकार जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा करेंगे।

प्रधानमंत्री की यात्रा के साथ अहम शुरुआत

उद्घाटन सत्र में वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा कि यह वार्ता 25-26 फरवरी 2026 को नरेंद्र मोदी की इजरायल यात्रा के अवसर पर प्रारंभ होना दोनों देशों के लिए विशेष महत्व रखता है। उन्होंने नवाचार, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सुरक्षा, हाई-टेक विनिर्माण, कृषि और सेवाओं के क्षेत्रों में अपार संभावनाओं पर जोर दिया।

भारत के मुख्य वार्ताकार और वाणिज्य विभाग के अपर सचिव अजय भादू ने संतुलित और भविष्योन्मुखी समझौते की आवश्यकता पर बल दिया। वहीं इजरायल की मुख्य वार्ताकार यिफ़त अलोन पेरेल ने कहा कि यह एफटीए आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करने, सहयोग बढ़ाने और नए बाजारों के द्वार खोलने में सहायक होगा।

रणनीतिक साझेदारी को मजबूती

यह पहल भारत-इजरायल संबंधों के रणनीतिक महत्व को रेखांकित करती है। दोनों देश एक संतुलित, पारस्परिक रूप से लाभकारी और दीर्घकालिक आर्थिक साझेदारी को साकार करने की दिशा में प्रतिबद्ध हैं। प्रस्तावित एफटीए को द्विपक्षीय व्यापार बढ़ाने और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता मजबूत करने के लिए एक अहम कदम माना जा रहा है।

रायपुर/शौर्यपथ।
ग्रामीण गरीब परिवारों को सुरक्षित और पक्का आवास उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संचालित प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) आज अनेक जरूरतमंदों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला रही है। छत्तीसगढ़ के दूरस्थ ग्रामीण अंचलों में यह योजना सम्मानजनक और सुरक्षित जीवन का आधार बन रही है।

इसी योजना से सूरजपुर जिला के प्रतापपुर जनपद पंचायत अंतर्गत जजावल ग्राम पंचायत निवासी अकालू पिता भुवाली के जीवन में नई सुबह आई है। कभी भटके रास्ते पर चल पड़े और बाद में आत्मसमर्पण कर समाज की मुख्यधारा में लौटे अकालू को शासन की विशेष परियोजना के तहत प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) से पक्का मकान मिला है।

कच्चे घर से पक्के आशियाने तक

पहले अकालू और उनका परिवार जर्जर एवं असुरक्षित कच्चे मकान में रहने को मजबूर था। हर मौसम में डर और असुरक्षा का वातावरण बना रहता था। योजना के अंतर्गत मिली आर्थिक सहायता से अब उनका पक्का घर बन चुका है, जिससे उनके परिवार को सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर मिला है।

अकालू का कहना है कि शासन की इस पहल ने उन्हें समाज में नई पहचान और आत्मविश्वास दिया है। आत्मसमर्पण के बाद पुनर्वास की दिशा में मिला यह सहयोग उनके लिए किसी नई शुरुआत से कम नहीं है।

मुख्यधारा में लौटने की प्रेरणा

यह कहानी केवल एक व्यक्ति के जीवन परिवर्तन की मिसाल नहीं, बल्कि यह संदेश भी देती है कि सही मार्ग चुनने वालों के साथ शासन हर कदम पर खड़ा है। प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) जरूरतमंद परिवारों को केवल मकान ही नहीं, बल्कि सम्मान, सुरक्षा और भविष्य की नई उम्मीद भी प्रदान कर रही है।

अकालू का पक्का घर आज इस बात का प्रतीक है कि विकास और पुनर्वास की योजनाएँ समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की क्षमता रखती हैं।

रायपुर/शौर्यपथ।
छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिला अंतर्गत रामानुजनगर के विद्यालयों में “विद्यालय की बगिया से थाली तक” पहल बच्चों के पोषण और व्यवहारिक शिक्षा का सशक्त माध्यम बनकर उभर रही है। किचन गार्डन की यह अनूठी पहल न केवल छात्रों को ताज़ी और जैविक सब्जियाँ उपलब्ध करा रही है, बल्कि उन्हें खेती, श्रम और पर्यावरण संरक्षण का व्यावहारिक ज्ञान भी दे रही है।

विकासखंड के अंतर्गत माध्यमिक शाला पतरापाली का किचन गार्डन पोषण सुदृढ़ीकरण का प्रेरक उदाहरण बन चुका है। जिला शिक्षा अधिकारी के निर्देशन एवं विकास खंड शिक्षा अधिकारी के मार्गदर्शन में संचालित इस योजना के तहत विद्यालय परिसर में शिक्षकों की देखरेख में सब्जियों की खेती की जा रही है।

इसी क्रम में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक बगीचे से लगभग 4 किलोग्राम ताज़ी सेमी (फली) की तुड़ाई की, जिसे सीधे मध्यान्ह भोजन में शामिल किया गया। इससे बच्चों को अतिरिक्त पोषण मिल रहा है और भोजन की गुणवत्ता में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ है।

सीख के साथ पोषण

बच्चे स्वयं पौधों की देखभाल, सिंचाई, निराई-गुड़ाई और तुड़ाई जैसी गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी निभा रहे हैं। इस प्रक्रिया से वे श्रम का महत्व समझ रहे हैं और कृषि एवं पर्यावरण के प्रति व्यावहारिक ज्ञान अर्जित कर रहे हैं।

विद्यालय के शिक्षक योगेश साहू ने बताया कि योजना का उद्देश्य विद्यार्थियों को पोषणयुक्त भोजन उपलब्ध कराने के साथ-साथ जैविक खेती के प्रति जागरूक बनाना है। ताज़ी सब्जियों के उपयोग से मध्यान्ह भोजन की पौष्टिकता बढ़ी है, जिसका सकारात्मक प्रभाव बच्चों के स्वास्थ्य में स्पष्ट रूप से देखा जा रहा है।

आत्मनिर्भरता और जिम्मेदारी का पाठ

विद्यालय परिवार का मानना है कि इस तरह की गतिविधियाँ बच्चों में प्रकृति प्रेम, जिम्मेदारी और आत्मनिर्भरता की भावना विकसित करती हैं।

इस अवसर पर शिक्षक कृष्णकुमार यादव, अनिता सिंह, योगेश साहू, रघुनाथ जायसवाल सहित अभिभावक एवं स्थानीय समुदाय के सदस्य उपस्थित रहे। अभिभावकों ने विद्यालय प्रबंधन की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसी योजनाएँ बच्चों के स्वास्थ्य और भविष्य दोनों के लिए अत्यंत लाभकारी हैं।

विद्यालय प्रशासन ने संकल्प लिया है कि किचन गार्डन में आगे भी विभिन्न मौसमी सब्जियों की खेती जारी रखी जाएगी, ताकि बच्चों को निरंतर पौष्टिक आहार और व्यवहारिक शिक्षा मिलती रहे।

  भिलाई / शौर्यपथ / माहे रमजान जारी है और इन दिनों रोजेदारों की दिनचर्या भी बदल गई है। रोजा रखते हुए खास इबादत में लोग डूबे हैं। रोजाना सहरी के वक्त सुबह उठने से लेकर शाम को इफ्तार और रात में विशेष नमाज तरावीह में लोग अपनी भागीदारी दे रहे हैं। रमजान के इस खास महीने की अजमत को देखते हुए लोग इबादत के साथ-साथ दूसरी तैयारियों में भी व्यस्त हैं। मस्जिदों में नमाजियों की तादाद बढ़ गई है, वहीं अफ्तार के वक्त लोग एक साथ रोजा खोलने जुट रहे हैं।
मस्जिद आयशा हाउसिंग बोर्ड भिलाई के इमाम व खतीब मौलाना सैय्यद फैसल अमीन कहते हैं कहा कि इसी महीने में अल्लाह ने अपने आखिरी नबी हजऱत मुहम्मद सल्लल्लाहो अलैहिस्सलाम पर पवित्र कुरान नाजिल की और इसे तेइस साल में पूरा किया गया। इस महीने के रोजों को फज़ऱ् किया गया है। मुफ्ती मोहम्मद सोहेल काजी दारूल कजा भिलाई कहते हैं रोजा पाबंदी से रखना चाहिए क्योंकि यह हर बालिग मर्द और औरतें पर फज़ऱ् है। अगर कोई बीमार है या सफऱ में है तो उसको कुछ छूट है लेकिन बाद में उसकी भरपाई जरूर करे। जब बीमार सेहतमंद हो जाए और मुसाफिर अपने मुकाम पर पहुंच जाए। शेखुल हदीस मौलाना जकरिया रहमतुल्लाह अलैहि ने अपने रिसाले फजाईले रमजान मुबारक मे लिखा है कि खुदा की तरफ़ से अपने बंदों पर रमजान बहुत बड़ा इनाम है। इस महीने में खुद रोजा रखे ,अहकामे खुदावन्दी पूरा पूरा अदा करें। पांच वक्त की नमाज़ पढऩे के साथ तिलावत कुरान करें जो सारे इंसानियत के लिए हिदायत (सीधा रास्ता) बताने वाली है। मदरसा ताज उल उलूम रूआबांधा भिलाई के प्रिंसिपल मुहम्मद शाहिद अली मिस्बाही कहते हैं रमजान सिफऱ् रोज़ा रखने का नाम नहीं, बल्कि आत्मा की शुद्धि, सब्र की परीक्षा और इंसानियत की सेवा का महीना है। यह महीना हमें अपने रब से जुडऩे, अपने दिल को साफ़ करने और समाज के कमजोर तबकों के प्रति जिम्मेदारी निभाने का संदेश देता है। रमज़ान का असली पैग़ाम सब्र है। दिन भर की भूख-प्यास इंसान को यह एहसास दिलाती है कि समाज में कितने लोग ऐसे हैं जो रोज़ाना इसी हालात से गुजरते हैं। जब इंसान खुद भूखा रहता है तो उसे गरीब और जरूरतमंद लोगों का दर्द समझ में आता है। यही एहसास उसे दूसरों की मदद के लिए प्रेरित करता है। इस महीने में जकात, सदका और फितरा देने की खास हिदायत है, ताकि समाज में आर्थिक संतुलन बना रहे और कोई भी व्यक्ति भूखा न सोए। रमज़ान रहमत और बरकत का महीना है। इस महीने में की गई इबादतों का सवाब कई गुना बढ़ा दिया जाता है।

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