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वैशालीनगर विधायक रिकेश सेन का दो टूक—किसी भी कीमत पर नहीं खुलने देंगे बार
भिलाई। शौर्यपथ
जुनवानी मार्ग पर रानी अवंती बाई सरोवर के समीप प्रस्तावित बार (टीडीएस शाखा) को लेकर क्षेत्र में जबरदस्त बवाल मच गया है। स्थानीय नागरिकों की आपत्ति अब सीधे शासन के उच्च स्तर तक पहुंच चुकी है। जनदर्शन में शिकायत लेकर पहुंचे रहवासियों को वैशालीनगर विधायक रिकेश सेन ने स्पष्ट शब्दों में भरोसा दिलाया कि जनभावनाओं के खिलाफ किसी भी हालत में बार नहीं खुलने दिया जाएगा।
बताया गया है कि जिस काम्प्लेक्स में बार खोलने की चर्चा है, उसी के ग्राउंड फ्लोर पर बैंक संचालित है और आसपास स्कूल, कॉलेज, मंदिर एवं घनी आबादी मौजूद है। जुनवानी मार्ग पर प्रतिदिन हजारों लोगों की आवाजाही रहती है, ऐसे संवेदनशील क्षेत्र में बार खोले जाने की सूचना से नागरिकों में आक्रोश है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि बार खुलने से देर रात तक असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लगेगा, जिससे क्षेत्र की शांति, सुरक्षा और सामाजिक माहौल पर गंभीर असर पड़ेगा। अपराध बढ़ने की भी आशंका जताई गई है।
शिकायत को गंभीरता से लेते हुए विधायक रिकेश सेन ने तत्काल आबकारी विभाग के सचिव से चर्चा की और उन्हें पत्र लिखकर जुनवानी मार्ग स्थित रानी अवंती बाई सरोवर के पास बार (टीडीएस ब्रांच) का लाइसेंस न देने की स्पष्ट मांग की। विधायक सेन ने कहा कि यह इलाका धार्मिक, शैक्षणिक और आवासीय दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील है और यहां इस प्रकार की गतिविधि जनहित के खिलाफ है।
उन्होंने दो टूक कहा—“जनता की सुरक्षा, शांति और सामाजिक मर्यादा से कोई समझौता नहीं होगा। जुनवानी में बार खोलने की इजाजत किसी भी सूरत में नहीं दी जाएगी।” अब पूरे मामले पर आबकारी विभाग की अंतिम कार्रवाई का इंतजार है, लेकिन विधायक के कड़े रुख के बाद क्षेत्रवासियों को राहत की उम्मीद बंधी है।
आचार्य विद्यासागर जी महाराज की कृति के नाम पर ट्रेन का हुआ नामकरण, जैन समाज में हर्ष
रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री विजय शर्मा द्वारा आज ‘मूकमाटी एक्सप्रेस’ को रायपुर रेलवे स्टेशन से हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। जैन समाज के महान संत आचार्य विद्यासागर जी महाराज की कालजयी कृति मूकमाटी के नाम पर केंद्र सरकार द्वारा रायपुर - जबलपुर इंटरसिटी एक्सप्रेस का नामकरण ‘मूकमाटी एक्सप्रेस’ के रूप में किया गया है।
इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि आचार्य विद्यासागर जी महाराज ने अपने तप, त्याग और विचारों से समाज को नई दिशा दी। गुरुदेव के देह त्याग का सौभाग्य छत्तीसगढ़ की पावन भूमि मां बमलेश्वरी की धरती डोंगरगढ़ को प्राप्त हुआ, जो पूरे प्रदेश के लिए गौरव का विषय है। उन्होंने कहा कि मूकमाटी एक्सप्रेस का शुभारंभ छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक चेतना को राष्ट्रीय पटल पर सशक्त रूप से स्थापित करता है।
उपमुख्यमंत्री शर्मा ने इस अवसर पर यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह तथा रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव भी निरंतर गुरुदेव विद्यासागर जी के विचारों से प्रेरणा लेते रहे हैं। छत्तीसगढ़ से इस ट्रेन का शुभारंभ होना प्रदेशवासियों के लिए आत्मगौरव का क्षण है।
ट्रेन के परिचालन से पूर्व अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठाचार्य ज्योतिषाचार्य पंडित अजीत शास्त्री द्वारा मंत्रोच्चार के साथ पूजा-अर्चना की गई। कार्यक्रम में राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के एडवाइजरी पैनल सदस्य प्रकाश मोदी, रायपुर वाणिज्य रेल प्रबंधक अवधेश त्रिपाठी, एसईसीआर के वरिष्ठ अधिकारी राकेश सिंह, सकल दिगंबर जैन समाज के अध्यक्ष विनोद जैन, नरेंद्र गुरुकृपा, डीआरयूसीसी सदस्य लोकेश चंद्रकांत जैन सहित बड़ी संख्या में जैन समाज के प्रबुद्धजन एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
दुर्ग | विशेष रिपोर्ट
दुर्ग नगर पालिका निगम एक बार फिर गंभीर आरोपों और प्रशासनिक भेदभाव के सवालों से घिरता नजर आ रहा है। इस बार कटघरे में हैं नगर निगम आयुक्त सुमित अग्रवाल, जिन पर आरोप है कि वे संवैधानिक पद पर बैठकर चयनात्मक कार्रवाई की नीति अपना रहे हैं—कुछ कर्मचारियों पर लगातार सख्ती, तो कुछ पर रहस्यमयी मेहरबानी।
मामला जुड़ा है लॉलीपॉप विज्ञापन बोर्डों (मध्य मार्ग डिवाइडर में लगाए गए विज्ञापन) के भौतिक सत्यापन में अनियमितताओं से। जिस समय थान सिंह यादव बाजार अधिकारी का प्रभार संभाल रहे थे, उसी दौरान शहरभर में लगे लॉलीपॉप बोर्डों की संख्या और आकार में गंभीर विसंगतियाँ सामने आईं। शिकायत के बाद जांच भी हुई और यह सिद्ध हुआ कि भौतिक सत्यापन में लापरवाही बढ़ती गई।
ठेकेदार से वसूली, अधिकारी पर चुप्पी क्यों?
निगम प्रशासन ने राजस्व हानि की भरपाई के लिए संबंधित ठेकेदार को नोटिस जारी कर दिया—यानी निगम को हुए नुकसान की वसूली की प्रक्रिया चल पड़ी। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि
जिस अधिकारी की निगरानी में यह अनियमितता पनपी, उस पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई क्यों नहीं?
शिकायतकर्ता को आज तक जांच रिपोर्ट और आगे की कार्रवाई की आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई। यह चुप्पी अपने आप में कई संदेश देती है।
दो मापदंड, दो कानून?
इसी निगम में हाल के महीनों में सहायक ग्रेड-3 के एक कर्मचारी पर दो–तीन महीनों के भीतर दर्जन भर से अधिक नोटिस जारी किए गए। मामला जब हाईकोर्ट पहुँचा, तो आयुक्त की कार्यशैली से जुड़ी कई असहज करने वाली बातें सामने आईं—यहाँ तक कि आरोप लगे कि कर्मचारी से घर के लिए गृहस्थी और निजी उपयोग का सामान मंगवाया गया और भेदभावपूर्ण कार्रवाई की गई।
यही नहीं, थान सिंह यादव का नाम इससे पहले भी पार्किंग घोटाले में सामने आ चुका है। पूर्व निगम आयुक्त बर्मन के कार्यकाल में उन पर ₹80,000 की राजस्व क्षति का मामला बना और रिकवरी नोटिस भी जारी हुआ। इसके बावजूद वर्तमान आयुक्त द्वारा उन पर कार्रवाई न होना, निगम प्रशासन की नियत पर सवाल खड़े करता है।
संवैधानिक शक्ति या निजी पसंद?
प्रश्न सीधा है—
क्या आयुक्त सुमित अग्रवाल संवैधानिक पद की शक्तियों का उपयोग निष्पक्ष प्रशासन के लिए कर रहे हैं, या फिर निजी पसंद–नापसंद के आधार पर?
एक तरफ मामूली मामलों में कर्मचारियों पर ताबड़तोड़ नोटिस, दूसरी तरफ राजस्व में अनियमितता से जुड़े अधिकारी पर कार्रवाई से परहेज—यह विरोधाभास न सिर्फ निगम प्रशासन, बल्कि प्रदेश सरकार के ‘सुशासन’ के दावे को भी आईना दिखाता है।
शहर की बदहाली और ‘लॉलीपॉप’ सवाल
दुर्ग नगर निगम क्षेत्र की बदहाली किसी से छिपी नहीं है। सड़कें, डिवाइडर, अव्यवस्थित विज्ञापन—सब कुछ सवाल पूछ रहा है। शहरभर में लगे लॉलीपॉप बोर्डों का स्वतंत्र और पारदर्शी भौतिक सत्यापन अब समय की मांग है।
अब फैसला आयुक्त के हाथ
अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि
क्या नगर निगम आयुक्त सुमित अग्रवाल
लॉलीपॉप बोर्डों में हुई अनियमितताओं के लिए तत्कालीन बाजार अधिकारी थान सिंह यादव पर कार्रवाई करेंगे?
या
फिर यह संदेश जाएगा कि निगम में कानून सबके लिए समान नहीं?
दुर्ग की जनता जवाब चाहती है—और जवाब अब कार्रवाई से ही मिलेगा, बयानबाजी से नहीं।
वादा 2022 का, अब 2027 में रफ्तार—भारत-जापान बुलेट ट्रेन 12 साल बाद पटरी पर दौड़ने की तैयारी
नई दिल्ली/अहमदाबाद।
भारत की पहली बुलेट ट्रेन—मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर (MAHSR)—एक बार फिर समयरेखा के कारण चर्चा में है। जिस परियोजना को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज़ादी की 75वीं वर्षगांठ यानी 15 अगस्त 2022 तक शुरू करने का लक्ष्य रखा था, वह अब संशोधित कार्यक्रम के अनुसार 15 अगस्त 2027 को आंशिक रूप से शुरू होने की ओर बढ़ रही है। यानी, वादे और वास्तविक शुरुआत के बीच करीब पाँच साल का अंतर।
समझौता और शिलान्यास
भारत और जापान के बीच इस महत्वाकांक्षी परियोजना का आधिकारिक समझौता 12 दिसंबर 2015 को नई दिल्ली में हुआ था। इस ऐतिहासिक डील पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान के तत्कालीन प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने हस्ताक्षर किए।
इसके बाद 14 सितंबर 2017 को अहमदाबाद में दोनों प्रधानमंत्रियों ने परियोजना की आधारशिला रखी।
परियोजना का स्वरूप
लंबाई: 508 किलोमीटर (मुंबई–अहमदाबाद)
तकनीक: जापान की विश्वप्रसिद्ध शिंकानसेन (Shinkansen)
लागत (अनुमानित): ₹98,000 करोड़
वित्तपोषण: जापान की JICA द्वारा 81% राशि (करीब ₹79,000 करोड़) 0.1% की बेहद कम ब्याज दर पर ऋण
नोडल एजेंसी: नेशनल हाई-स्पीड रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड (NHSRCL)
समयसीमा में देरी क्यों?
परियोजना की रफ्तार पर सबसे बड़ा असर भूमि अधिग्रहण में देरी, विशेषकर महाराष्ट्र खंड, और कोविड-19 महामारी का पड़ा। इन्हीं कारणों से पहले दिसंबर 2023 की आधिकारिक डेडलाइन भी आगे बढ़ानी पड़ी।
वर्तमान स्थिति (जनवरी 2026)
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के अनुसार, देशवासी 15 अगस्त 2027 को भारत की पहली बुलेट ट्रेन का टिकट खरीद सकेंगे।
अब तक की प्रगति इस प्रकार है:
भौतिक प्रगति: 55.63%
वित्तीय प्रगति: करीब 70% (लगभग ₹85,801 करोड़ खर्च)
वायडक्ट (एलिवेटेड पुल): 332 किमी से अधिक तैयार
पिलर निर्माण: 415 किमी से अधिक पूरा
ट्रैक बेड: 292 ट्रैक किमी (146 रूट किमी) तैयार
स्टेशन: गुजरात के सभी 8 स्टेशन एडवांस स्टेज में
महाराष्ट्र सुरंग: 21 किमी लंबी भूमिगत सुरंग पर काम जारी; 5 किमी खुदाई पूरी, पालघर में पहले पहाड़ी सुरंग का ‘ब्रेकथ्रू’
चरणबद्ध संचालन का प्लान
अगस्त 2027: सूरत–बिलिमोरा (या वापी) के बीच लगभग 100 किमी खंड शुरू
दिसंबर 2029: पूरा 508 किमी कॉरिडोर चालू करने का लक्ष्य
मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन भारत-जापान रणनीतिक साझेदारी का प्रतीक है, लेकिन समयसीमा के मोर्चे पर यह परियोजना लगातार सवालों में रही है। 2017 में किया गया 2022 का वादा अब 2027 में पूरा होने जा रहा है। सरकार का दावा है कि इस बार तय तारीख बदलेगी नहीं—अब देखना यह है कि क्या बुलेट ट्रेन वाकई 15 अगस्त 2027 को भारत की पटरी पर अपनी रफ्तार दिखा पाती है या नहीं।
लेखक - श्री पीयूष गोयल (केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री- भारत सरकार )
स्टार्टअप इंडिया पहल पूरे देश में एक समग्र और नई सोच वाले इकोसिस्टम के रूप में विकसित हुई है। यह युवाओं की उद्यमशील ऊर्जा को रोजगार सृजन और आर्थिक विकास को तेज करने की दिशा में लगाकर, माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत 2047 के मिशन को साकार करने का मार्ग तैयार कर रही है।
भारत में आज दुनिया के सबसे बड़े स्टार्टअप इकोसिस्टम में से एक मौजूद है। आज उद्यमिता एक राष्ट्रव्यापी आंदोलन बन चुकी है, जो भारत के आर्थिक परिदृश्य को नया आकार दे रही है और विकास व रोजगार सृजन का नया इंजन बन रही है।
यह परिवर्तन रातोंरात नहीं हुआ। जब प्रधानमंत्री ने 2015 में स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले की प्राचीर से स्टार्टअप इंडिया की घोषणा की, तब उन्होंने एक स्पष्ट और महत्वाकांक्षी दृष्टि रखी कि उद्यमिता देश के हर जिले और हर ब्लॉक तक पहुंचे।
16 जनवरी 2016 को उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) की ओर से शुरू किए जाने के बाद से स्टार्टअप इंडिया ने लंबा सफर तय किया है। स्टार्टअप देश की अर्थव्यवस्था के कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में नई ऊर्जा भर रहे हैं। आईटी सेवाएं, स्वास्थ्य और जीवन विज्ञान, शिक्षा, कृषि और निर्माण जैसे क्षेत्रों में सबसे अधिक स्टार्टअप सक्रिय हैं। इसके अलावा, जलवायु तकनीक और अवसंरचना सहित 50 से अधिक अन्य उद्योगों में भी नए उद्यम सामने आए हैं। यह व्यापकता विभिन्न क्षेत्रों में नवाचार और मजबूती को दर्शाती है, खासकर उन क्षेत्रों में जो राष्ट्रीय विकास की प्राथमिकताओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
नवाचार और एआई: पिछले एक दशक में एक बड़ा बदलाव नवाचार और गहन तकनीक पर बढ़ते ध्यान के रूप में देखा गया है। वैश्विक नवाचार सूचकांक में भारत की रैंक 2015 में 81वें स्थान से बढ़कर पिछले वर्ष 38वें स्थान पर पहुँच गई है, और गहन तकनीक से जुड़े स्टार्टअप्स को सरकार का समर्थन इसे आगे और बेहतर करेगा। प्रधानमंत्री की डिजिटल इंडिया पहल के आधार पर एआई स्टार्टअप्स की संख्या तेजी से बढ़ रही है।
गहन तकनीक वाला राष्ट्र बनाने के प्रधानमंत्री के दृष्टिकोण के तहत अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन की स्थापना की गई है, तथा इंडिया एआई मिशन और रिसर्च डेवलपमेंट एंड इनोवेशन योजना की शुरुआत की गई है। भारत के स्टार्टअप एयरोनॉटिक्स, एयरोस्पेस और रक्षा, रोबोटिक्स, हरित तकनीक, इंटरनेट ऑफ थिंग्स और सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों में भी नवाचार कर रहे हैं। बौद्धिक संपदा के निर्माण में तेज़ वृद्धि इस प्रवृत्ति को और मजबूत करती है। भारतीय स्टार्टअप्स ने 16,400 से अधिक नए पेटेंट आवेदन दाखिल किए हैं, जो मौलिक नवाचार, दीर्घकालिक मूल्य सृजन और वैश्विक प्रतिस्पर्धा पर बढ़ते फोकस को दर्शाता है।
अखिल भारतीय विकास: उद्यमिता को देशभर में मिल रहा समर्थन भी उतना ही महत्वपूर्ण है। वर्ष 2016 में केवल चार राज्यों में स्टार्टअप नीतियां थीं, जबकि आज भारत के 30 से अधिक राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में विशेष स्टार्टअप ढांचे मौजूद हैं। अब हर राज्य और केंद्रशासित प्रदेश में डीपीआईआईटी से मान्यता प्राप्त स्टार्टअप हैं, जो संस्थागत समर्थन की मजबूती और जमीनी स्तर की भागीदारी को दर्शाता है।
अब तक 2 लाख से अधिक स्टार्टअप्स को मान्यता दी जा चुकी है, जो नीति-आधारित पारिस्थितिकी तंत्र के एक दशक के सतत विकास को दर्शाता है। केवल 2025 में ही 49,400 से अधिक स्टार्टअप्स को मान्यता मिली, जो स्टार्टअप इंडिया की शुरुआत के बाद सबसे अधिक वार्षिक वृद्धि है।
समावेशन इस पूरी यात्रा की एक मजबूत आधारशिला रहा है। महिला नेतृत्व वाले उद्यम एक बड़ी ताकत बनकर उभरे हैं, जहां 45 प्रतिशत से अधिक मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स में कम से कम एक महिला निदेशक है। इसके अलावा, लगभग आधे स्टार्टअप गैर-मेट्रो शहरों में स्थित हैं, जो नवाचार और रोजगार के नए केंद्र के रूप में टियर-2 और टियर-3 शहरों की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है।
लोकल से ग्लोबल: जैसे-जैसे भारतीय स्टार्टअप्स का विस्तार हो रहा है, पूरी दुनिया उनके लिए बाज़ार बनती जा रही है। वैश्विक महत्वाकांक्षाओं को समर्थन देने के लिए स्टार्टअप इंडिया ने मजबूत अंतरराष्ट्रीय साझेदारियां बनाई हैं। अब 21 अंतरराष्ट्रीय ब्रिज और 2 रणनीतिक गठबंधन मौजूद हैं, जो यूके, जापान, दक्षिण कोरिया, स्वीडन और इज़राइल सहित प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में बाज़ार तक पहुंच, सहयोग और विस्तार को आसान बनाते हैं। इन पहलों से अब तक 850 से अधिक स्टार्टअप्स लाभान्वित हो चुके हैं।
स्वीडन, स्विट्ज़रलैंड, न्यूज़ीलैंड और इज़राइल की मेरी हालिया यात्राओं में स्टार्टअप्स भारत के व्यापारिक प्रतिनिधिमंडलों का अहम हिस्सा रहे। इन प्रयासों ने वैश्विक मंच पर भारतीय नवाचार को प्रदर्शित करने का अवसर दिया, साथ ही हमारे उद्यमियों को विकसित अर्थव्यवस्थाओं की नवाचार और व्यापारिक कार्यप्रणालियों से परिचित कराया।
सुधार और बाज़ार तक पहुंच: इस विकास को संभव बनाने में कारोबार करने में आसानी सुधारना एक मुख्य आधार रहा है। पात्र स्टार्टअप अपने पहले दस वर्षों में से किसी भी तीन लगातार वर्षों के लिए कर अवकाश का लाभ ले सकते हैं। अब तक 4,100 से अधिक स्टार्टअप्स को इसके लिए पात्रता प्रमाणपत्र मिल चुके हैं।
60 से अधिक नियामकीय सुधारों के माध्यम से अनुपालन का बोझ कम किया गया है, पूंजी जुटाने को आसान बनाया गया है और घरेलू संस्थागत निवेश को मजबूत किया गया है। एंजेल टैक्स को समाप्त करने और वैकल्पिक निवेश कोषों (एटीएफ) के लिए दीर्घकालिक पूंजी के रास्ते खोलने से स्टार्टअप फंडिंग का पारिस्थितिकी तंत्र और सशक्त हुआ है। बाज़ार तक पहुंच को प्राथमिकता दी गई है। सरकारी ई-मार्केटप्लेस (जैम) के माध्यम से 35,700 से अधिक स्टार्टअप्स को जोड़ा गया है, जिन्हें 51,200 करोड़ से अधिक मूल्य के पांच लाख से ज्यादा ऑर्डर मिले हैं। इन प्रयासों के साथ मजबूत वित्तीय सहयोग भी दिया गया है। स्टार्टअप्स के लिए फंड ऑफ फंड्स योजना के तहत वैकल्पिक निवेश कोषों के जरिए 25,500 करोड़ से अधिक का निवेश किया गया है, जिससे 1,300 से अधिक उद्यमों को लाभ मिला है। इसके अलावा, स्टार्टअप्स के लिए क्रेडिट गारंटी योजना के अंतर्गत 800 करोड़ से अधिक के बिना जमानत ऋण की गारंटी दी गई है।
945 करोड़ के परिव्यय वाली स्टार्टअप इंडिया सीड फंड योजना के तहत स्टार्टअप्स को कॉन्सेप्ट की जाँच, प्रोटोटाइप विकास, उत्पाद परीक्षण, बाज़ार में प्रवेश और व्यवसायीकरण के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।
सांस्कृतिक बदलाव: भारतीय स्टार्टअप्स ने देश में एक बड़ा सांस्कृतिक परिवर्तन लाया है। पहले बच्चों को मुख्य रूप से सरकारी नौकरी, इंजीनियरिंग या चिकित्सा जैसे कुछ ही क्षेत्रों में जाने के लिए प्रोत्साहित किया जाता था। आज कई युवा नौकरी तलाशने वाले नहीं, बल्कि नौकरी देने वाले बनने का सपना देख रहे हैं, और उनके परिवार भी उद्यमशील आकांक्षाओं का सम्मान करते हैं और उन्हें बढ़ावा देते हैं।
अंततः भारत की स्टार्टअप यात्रा: हमारे युवा उद्यमियों पर विश्वास, नीति-आधारित विकास और दुनिया के लिए नवाचार करने की भारत की क्षमता की कहानी है। 2047 तक एक विकसित देश बनने के अपने लक्ष्य की ओर बढ़ते हुए, स्टार्टअप्स समृद्ध, समावेशी और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी भारत के निर्माण में केंद्रीय भूमिका निभाते रहेंगे।
(लेखक केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री हैं)
बिलासपुर / शौर्यपथ।
देश की ऊर्जा सुरक्षा, संस्थागत सुधार और दीर्घकालिक रणनीतिक दिशा को मजबूती देने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल करते हुए कोल इंडिया लिमिटेड की प्रमुख सहायक कंपनी साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) ने बिलासपुर स्थित अपने मुख्यालय में पहली बार ‘चिंतन शिविर’ का आयोजन किया। यह शिविर आत्मनिर्भर भारत के राष्ट्रीय दृष्टिकोण के अनुरूप एसईसीएल के भविष्य को आकार देने के लिए एक संरचित, सहभागी और नेतृत्व-केंद्रित मंथन मंच के रूप में सामने आया।
यह चिंतन शिविर हाल ही में नई दिल्ली में कोयला मंत्रालय द्वारा आयोजित चिंतन शिविर की पृष्ठभूमि में परिकल्पित किया गया था, जिसका उद्देश्य राष्ट्रीय ऊर्जा प्राथमिकताओं के अनुरूप एसईसीएल की रणनीतिक दिशा को और अधिक सुदृढ़ करना रहा। इस प्रक्रिया की शुरुआत एसईसीएल के परिचालन क्षेत्रों में आंतरिक चिंतन शिविरों से हुई, जिन्हें समेकित करते हुए मुख्यालय स्तर पर व्यापक मंथन किया गया, ताकि संगठन के हर स्तर की सहभागिता और समग्र समीक्षा सुनिश्चित की जा सके।
एसईसीएल के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक श्री हरिश दुहन के नेतृत्व में आयोजित इस शिविर में कार्यात्मक निदेशक, मुख्य सतर्कता अधिकारी सहित मुख्यालय एवं सभी परिचालन क्षेत्रों के लगभग 200 अधिकारी शामिल हुए। इनमें क्षेत्रीय महाप्रबंधक, विभागाध्यक्ष तथा कार्यकारी ग्रेड–5 (ई-5) स्तर तक के बड़ी संख्या में युवा अधिकारी सम्मिलित रहे, जो संगठन की भावी नेतृत्व क्षमता पर विशेष फोकस को दर्शाता है।
अपने संबोधन में अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक श्री दुहन ने कहा कि एसईसीएल को एक बार फिर देश की अग्रणी कोयला कंपनी के रूप में स्थापित करने के लिए संगठित और परिणामोन्मुख प्रयास आवश्यक हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सुधार केवल नीतिगत घोषणाओं तक सीमित न रहें, बल्कि दैनिक कार्य संस्कृति और निर्णय प्रक्रिया का अभिन्न हिस्सा बनें। दीर्घकालिक दृष्टि को रेखांकित करते हुए उन्होंने विविधीकरण, औद्योगिक सहभागिता और नेट-जीरो रोडमैप में अग्रणी भूमिका निभाने की आवश्यकता बताई तथा विज़न 2030 और विज़न 2047 को संगठन के मार्गदर्शक ढांचे के रूप में अपनाने का आह्वान किया। युवा अधिकारियों को संगठन की भविष्य की रीढ़ बताते हुए उन्होंने एसईसीएल को भविष्य के लिए तैयार संस्था में रूपांतरित करने में उनकी अग्रणी भूमिका पर विश्वास व्यक्त किया।
चिंतन शिविर का मुख्य उद्देश्य संगठनात्मक प्रदर्शन की समीक्षा, कमियों की पहचान तथा कोयला उत्पादन, डिस्पैच व्यवस्था, खान सुरक्षा, लागत दक्षता, सतत विकास और डिजिटलीकरण को सुदृढ़ करने के लिए स्पष्ट एवं समयबद्ध कार्य योजनाओं पर मंथन करना रहा। इसके साथ ही विविधीकरण, उद्योग से जुड़ाव और नेट-जीरो लक्ष्य जैसे दीर्घकालिक विषयों पर भी गहन चर्चा की गई।
कार्यक्रम के दौरान विभिन्न विभागों द्वारा 15 विस्तृत प्रस्तुतियाँ दी गईं, जिनमें भूमिगत उत्पादन योजना, गुणवत्ता नियंत्रण, फर्स्ट माइल कनेक्टिविटी संचालन, भूमि अधिग्रहण एवं पुनर्वास, पर्यावरण एवं वन स्वीकृतियां, सौर एवं नवीन ऊर्जा, डिजिटलीकरण एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का उपयोग, मानव संसाधन विकास, वित्त और संविदा प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल रहे।
प्रत्येक प्रस्तुति के पश्चात संवादात्मक प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित किए गए, जिनमें अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक, कार्यात्मक निदेशक और मुख्य सतर्कता अधिकारी की सक्रिय भागीदारी रही। इस खुले और सहभागी मंच ने नवाचारी विचारों, रचनात्मक सुझावों और जमीनी फीडबैक को प्रोत्साहित किया, जिससे शीर्ष-स्तरीय मार्गदर्शन और क्षेत्रीय अनुभवों के बीच प्रभावी संतुलन स्थापित हुआ।
एसईसीएल का यह पहला ‘चिंतन शिविर’ नीति निर्माण और निर्णय प्रक्रिया को मजबूती देने की दिशा में एक ठोस आधार प्रदान करेगा। साथ ही यह संगठन की परिचालन उत्कृष्टता, सतत विकास और राष्ट्रीय ऊर्जा सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता को और अधिक सशक्त करने में मील का पत्थर साबित होगा।
रायपुर / शौर्यपथ।
छत्तीसगढ़ शासन के मुख्य सचिव श्री विकास शील ने राज्य के 5 जिलों में ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थानों (Rural Self Employment Training Institutes–RSETIs) की स्थापना की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि इससे ग्रामीण युवाओं को कौशल-आधारित, रोजगारोन्मुख प्रशिक्षण प्राप्त होगा और वे स्वरोजगार के माध्यम से विकास की मुख्यधारा से प्रभावी रूप से जुड़ सकेंगे। इसके साथ ही उन्होंने बैंकों से प्राथमिकता क्षेत्र ऋण एवं शासकीय प्रायोजित योजनाओं के अंतर्गत ऋण प्रवाह बढ़ाने का आह्वान किया, ताकि पात्र हितग्राहियों को समय पर एवं पर्याप्त वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जा सके।
मुख्य सचिव नवा रायपुर स्थित महानदी भवन में आयोजित राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति (State-Level Bankers’ Committee–SLBC) की त्रैमासिक बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। बैठक में राज्य में बैंकों के कार्य निष्पादन की विस्तृत समीक्षा की गई तथा वित्तीय समावेशन को मजबूत करने, ऋण वितरण प्रणाली में सुधार और ग्रामीण क्षेत्रों तक बैंकिंग सेवाओं की पहुँच बढ़ाने को लेकर विभिन्न बिंदुओं पर गहन चर्चा की गई।
बैठक में श्री मनोज कुमार (महाप्रबंधक, भारतीय स्टेट बैंक), श्रीमती निहारिका बारीक सिंह (प्रमुख सचिव), श्रीमती रीनी अजीथ (क्षेत्रीय निदेशक, भारतीय रिजर्व बैंक), श्री शीतांशु शेखर (महाप्रबंधक, नाबार्ड), श्री अंकित आनंद (सचिव), श्री रजत कुमार (सचिव), श्री प्रभात मल्लिक (सचिव), श्रीमती शीतल शाश्वत वर्मा (निदेशक, संस्थागत वित्त), श्री चंदन कुमार (विशेष सचिव), श्री राकेश कुमार सिन्हा (उपमहाप्रबंधक, एसबीआई) सहित छत्तीसगढ़ शासन के अन्य वरिष्ठ सचिव, विभागाध्यक्ष, विभिन्न बैंकों के शीर्ष अधिकारी तथा राज्य के 33 जिलों के अग्रणी बैंक प्रबंधक उपस्थित रहे।
मुख्य सचिव ने कहा कि बैंक देश के आर्थिक विकास की रीढ़ हैं और भारत विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में तेज़ी से अग्रसर है। ऐसे में बैंकों की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है कि वे समग्र वित्तीय समावेशन के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए विशेष रूप से सुदूर एवं ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग सेवाओं का विस्तार करें। उन्होंने स्पष्ट किया कि बैंकिंग पहुंच, ऋण वितरण और वित्तीय अवसंरचना को सुदृढ़ करने के लिए राज्य शासन की ओर से हरसंभव सहयोग प्रदान किया जाएगा।
मुख्य सचिव ने राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति, भारतीय स्टेट बैंक एवं अन्य बैंकों द्वारा विभिन्न क्षेत्रों में किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि शासकीय प्रायोजित ऋण योजनाओं का परिणामोन्मुख और प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाना चाहिए, ताकि योजनाओं का वास्तविक लाभ ज़मीनी स्तर तक पहुँचे।
बैठक का समापन निदेशक (संस्थागत वित्त) श्रीमती शीतल शाश्वत वर्मा द्वारा प्रस्तुत धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। उन्होंने मुख्य सचिव सहित सभी उपस्थित अधिकारियों, बैंकों के प्रतिनिधियों तथा बैठक के सफल आयोजन के लिए राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति एवं इसके संयोजक भारतीय स्टेट बैंक के प्रति आभार व्यक्त किया।
रायपुर / राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह के अंतर्गत भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) द्वारा छत्तीसगढ़ के विभिन्न राष्ट्रीय राजमार्गों पर सड़क सुरक्षा को लेकर व्यापक जन-जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसी क्रम में रायपुर-बिलासपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर सड़क सुरक्षा जागरूकता अभियान चलाया गया, जिसके तहत वाहन चालकों को हेलमेट वितरित किए गए एवं यातायात नियमों के पालन के लिए प्रेरित किया गया।
इस अवसर पर एनएचएआई के क्षेत्रीय अधिकारी प्रदीप कुमार लाल ने कहा कि सड़क सुरक्षा केवल नियमों का पालन भर नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक नागरिक की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि हेलमेट पहनना, सीट बेल्ट का उपयोग करना तथा निर्धारित गति सीमा का पालन जैसे छोटे-छोटे उपाय बहुमूल्य जीवन को सुरक्षित रखने में अहम भूमिका निभाते हैं।
परियोजना कार्यान्वयन इकाई, बिलासपुर के परियोजना निदेशक मुकेश कुमार ने कहा कि राष्ट्रीय राजमार्गों पर यात्रा को सुरक्षित एवं सुगम बनाने के लिए आधुनिक तकनीकी उपायों के साथ-साथ जन-जागरूकता अभियानों का निरंतर संचालन किया जा रहा है, ताकि सड़क दुर्घटनाओं की दर को न्यूनतम स्तर पर लाया जा सके।
अभियान के दौरान सड़क दुर्घटना की स्थिति में त्वरित एवं प्रभावी बचाव कार्यों के लिए लाइव एक्सीडेंट डेमोस्ट्रेशन (मॉक ड्रिल) का आयोजन किया गया। इस दौरान एम्बुलेंस की पहुँच, क्रेन द्वारा मार्ग से बाधा हटाने तथा घायलों को प्राथमिक उपचार देने की प्रक्रिया की जानकारी दी गई। साथ ही, सुरक्षित यात्रा के लिए हेलमेट, सीट बेल्ट के महत्व को बताया गया।
सड़क सुरक्षा अभियान के साथ-साथ एनएचआईटी के सहयोग से रक्तदान शिविर का भी आयोजन किया गया, जिसमें 50 से अधिक लोगों ने रक्त दान किया। इस शिविर में अधिकारियों-कर्मचारियों और सड़क उपयोगकर्ताओं ने स्वेच्छा से रक्तदान किया।
एनएचएआई द्वारा प्रदेश के सभी टोल प्लाजा, राष्ट्रीय राजमार्गों एवं प्रमुख जंक्शनों पर लगातार सड़क सुरक्षा जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। इसके अंतर्गत वाहन चालकों एवं यात्रियों से यातायात नियमों का पालन करने, हेलमेट पहनने, सीट बेल्ट लगाने तथा निर्धारित गति सीमा का पालन करने की अपील की जा रही है।
शरद पंसारी - संपादक शौर्यपथ दैनिक समाचार
भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर हाल के दिनों में एक अजीब-सी बहस सार्वजनिक विमर्श में छा गई है — “भारत में एक डॉलर में छह समोसे मिल जाते हैं, जबकि अमेरिका में एक डॉलर में केवल एक पेन।” यह तुलना सुनने में भले ही चुटीली लगे, लेकिन यह आर्थिक यथार्थ को समझने के बजाय उसे सरलीकरण और भावनात्मक तर्कों में उलझाने का प्रयास अधिक प्रतीत होती है। असल सवाल समोसे या पेन का नहीं, बल्कि आय, गरीबी, क्रय शक्ति और जीवन स्तर का है।
भारत सरकार के सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) द्वारा 7 जनवरी 2026 को जारी प्रथम अग्रिम अनुमान इस वास्तविकता को स्पष्ट रूप से सामने रखते हैं। वित्त वर्ष 2025-26 में स्थिर मूल्यों पर भारत की प्रति व्यक्ति वास्तविक जीडीपी ₹1,42,119 रहने का अनुमान है, जो बीते वर्ष की तुलना में 6.5 प्रतिशत की वृद्धि अवश्य दर्शाता है। यह वृद्धि स्वागतयोग्य है, किंतु यह भी उतना ही सत्य है कि वित्त वर्ष 2024-25 में प्रति व्यक्ति शुद्ध राष्ट्रीय आय (NNI) ₹1,14,710 रही — एक ऐसा आंकड़ा जो भारत की विशाल आबादी के जीवन स्तर की सीमाओं को उजागर करता है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तुलना और भी अधिक स्पष्ट हो जाती है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के अनुसार 2026 में भारत की नॉमिनल प्रति व्यक्ति आय लगभग $3,051 रहने का अनुमान है। क्रय शक्ति समानता (PPP) के आधार पर यह आंकड़ा $12,964 तक पहुँचता है, किंतु इसके बावजूद नॉमिनल प्रति व्यक्ति आय के मामले में भारत का वैश्विक स्थान 144वां है। यह रैंकिंग इस तथ्य की ओर संकेत करती है कि भारत की आर्थिक वृद्धि अभी भी औसत नागरिक की आय में पर्याप्त रूप से परिलक्षित नहीं हो पा रही है।
देश के भीतर आय की असमानता और भी गहरी है। गोवा, सिक्किम और महाराष्ट्र जैसे राज्य प्रति व्यक्ति आय में आगे हैं, जहाँ महाराष्ट्र की अनुमानित प्रति व्यक्ति आय ₹2.89 लाख तक पहुँचने वाली है। इसके विपरीत बिहार और उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य आज भी राष्ट्रीय औसत से काफी पीछे हैं। यह क्षेत्रीय असंतुलन भारत की आर्थिक संरचना की एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।
अब यदि तुलना अमेरिका से की जाए, तो अंतर लगभग खाई का रूप ले लेता है। IMF के अनुसार 2026 में अमेरिका की प्रति व्यक्ति नॉमिनल आय लगभग $92,880 (करीब ₹77.5 लाख) रहने का अनुमान है। अमेरिका दुनिया के शीर्ष 10 देशों में शामिल है, जहाँ औसत मासिक आय $5,000 और औसत घरेलू आय $78,538 के आसपास है। वहीं 2026 में अमेरिकी अर्थव्यवस्था की कुल जीडीपी $30.50 ट्रिलियन को पार करने की संभावना है। यह आंकड़े स्पष्ट करते हैं कि भारत और अमेरिका की तुलना केवल वस्तुओं की कीमत से नहीं, बल्कि आय और अवसरों की संरचना से होनी चाहिए।
सबसे चिंताजनक पहलू गरीबी का अंतर है। भारत में आज भी अनुमानतः लगभग 80 करोड़ लोग गरीबी रेखा के आसपास या नीचे जीवन यापन कर रहे हैं। अत्यधिक गरीबी — जहाँ प्रतिदिन की आय कुछ ही रुपयों तक सीमित है — में जीवन बिताने वाली आबादी करीब 12 प्रतिशत बताई जाती है। इसके विपरीत अमेरिका में गरीबी रेखा के नीचे रहने वालों की संख्या 10–12 प्रतिशत के आसपास है, लेकिन वहाँ गरीबी की परिभाषा ही $15,000 वार्षिक आय जैसे स्तर से जुड़ी है। यह तुलना बताती है कि प्रतिशत के आंकड़े समान दिख सकते हैं, पर जीवन की वास्तविक परिस्थितियाँ पूरी तरह अलग हैं।
अर्थशास्त्रियों की राय में भारत की समस्या केवल विकास दर नहीं, बल्कि आय असमानता, रोजगार की गुणवत्ता और वास्तविक क्रय शक्ति है। जब तक आर्थिक वृद्धि का लाभ समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक नहीं पहुँचेगा, तब तक समोसे और पेन जैसी तुलना केवल हकीकत से ध्यान भटकाने वाला शोर बनी रहेगी।
आज जरूरत इस बात की है कि भारत अपनी आर्थिक बहस को प्रतीकों और जुमलों से निकालकर आम आदमी की आय, रोजगार और जीवन स्तर पर केंद्रित करे। सवाल यह नहीं कि एक डॉलर में क्या मिलता है, सवाल यह है कि एक भारतीय की मेहनत की कीमत क्या है — और क्या वह उसे सम्मानजनक जीवन दे पा रही है या नहीं। यही बहस भारत को आगे ले जाएगी, बाकी सब केवल दिखावटी तर्क हैं।
दुर्ग।
छत्तीसगढ़ में सरकारी गोदामों से करोड़ों रुपये मूल्य के धान के कथित रूप से “मुसवा (चूहा)” द्वारा नष्ट किए जाने की घटनाओं ने प्रदेश की राजनीति में भूचाल ला दिया है। इस पूरे प्रकरण को लेकर कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए इसे किसानों की मेहनत और अन्नदाता के सम्मान के साथ खुला मज़ाक करार दिया है। कांग्रेस का आरोप है कि सरकार अपनी विफलताओं और भ्रष्टाचार से ध्यान भटकाने के लिए जिम्मेदारी चूहों पर डाल रही है, जबकि असल दोषी सत्ता में बैठे लोग और संरक्षण प्राप्त अधिकारी हैं।
जिला कांग्रेस कमेटी, दुर्ग (ग्रामीण) के जिलाध्यक्ष श्री राकेश ठाकुर ने कहा कि धान किसानों के पसीने, खून और वर्षों की मेहनत का परिणाम है। उसे “चूहा खा गया” कहना न केवल हास्यास्पद है, बल्कि यह भाजपा सरकार, उसके मंत्रियों और जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही, भ्रष्टाचार और मिलीभगत को उजागर करता है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि प्रदेश की जनता मानती है कि धान मुसवा ने नहीं, बल्कि भाजपा सरकार और उसके मंत्रियों ने हजम किया है।
इसी के विरोध में 20 जनवरी 2026, मंगलवार को कांग्रेस पार्टी द्वारा दुर्ग कलेक्टर कार्यालय के समक्ष एक लोकतांत्रिक, शांतिपूर्ण एवं प्रतीकात्मक प्रदर्शन आयोजित किया जाएगा। प्रदर्शन के दौरान भाजपा सरकार के खिलाफ अनोखे और तीखे प्रतीकों के माध्यम से जनाक्रोश व्यक्त किया जाएगा। छत्तीसगढ़ सरकार के मंत्रियों की प्रतीकात्मक “बारात” ढोल-नगाड़ों के साथ निकाली जाएगी, वहीं कार्यकर्ता मुसवा (चूहों) के मुखौटे पहनकर धान खिलाते हुए प्रतीकात्मक दृश्य प्रस्तुत करेंगे। इसका उद्देश्य जनता को यह संदेश देना है कि धान चूहों ने नहीं, बल्कि सत्ता में बैठे लोगों ने निगल लिया है।
कांग्रेस की मांग है कि इस पूरे धान घोटाले की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, दोषी अधिकारियों और मंत्रियों पर कड़ी कार्रवाई हो तथा किसानों के साथ हुए अन्याय का जवाब सरकार दे। प्रदर्शन के पश्चात दुर्ग कलेक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम प्रतीकात्मक रूप से “चूहा” सौंपकर ज्ञापन प्रस्तुत किया जाएगा।
इस संबंध में जिला कांग्रेस कमेटी द्वारा कलेक्टर दुर्ग को पूर्व में ज्ञापन सौंपकर कार्यक्रम की सूचना दी जा चुकी है। ज्ञापन सौंपते समय धीरज बाकलीवाल, नीता लोधी, देवेंद्र देशमुख, रिवेंद्र यादव, नंद कुमार सेन, आनंद ताम्रकार, गुरदीप भाटिया, मनीष बघेल, देवश्री साहू, धर्मेंद्र साहू, जीतू पटेल, हीरेन्द्र साहू, मोहित वालदे, सुनीत घोष, सौरभ ताम्रकार, भीमसेन, प्रीतम देशमुख सहित बड़ी संख्या में कांग्रेसजन उपस्थित रहे।
कांग्रेस संगठन के भीतर भी नई सक्रियता साफ दिखाई दे रही है। धीरज बाकलीवाल को अध्यक्ष बनाए जाने और युवाओं व नए चेहरों को ब्लॉक अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपे जाने से संगठन में नई ऊर्जा का संचार हुआ है। परिवारवाद से दूरी बनाते हुए कांग्रेस अब ज़मीनी मुद्दों पर आक्रामक रूप से सामने आ रही है। दुर्ग में कांग्रेस की बढ़ती सक्रियता को देखकर जनता भी अब उससे जनहित से जुड़े मुद्दों पर मुखर आवाज़ की उम्मीद कर रही है।
यह प्रदर्शन केवल एक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि किसानों के सम्मान, जवाबदेही और पारदर्शिता की लड़ाई का प्रतीक बनने जा रहा है।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
