January 22, 2026
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धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।

गोवा में लोकोत्सव में शामिल हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, जनजातीय नायकों को किया नमन

रायपुर / शौर्यपथ /
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय गोवा के आदर्श ग्राम अमोन, पोंगुइनिम में आयोजित आदि लोकोत्सव पर्व–2025 में शामिल हुए। उन्होंने लोकोत्सव को लोकसंस्कृति, जनजातीय गौरव और राष्ट्रबोध का सशक्त संगम बताते हुए आयोजन की सराहना की। इस अवसर पर गोवा के कला एवं संस्कृति मंत्री डॉ. रमेश तावड़कर भी उपस्थित रहे।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि भारत गांवों का देश है और गांवों की लोकसंस्कृति ही देश की आत्मा है। लोकगीत, लोकनृत्य, पारंपरिक वाद्ययंत्र और परंपराएं हमारी सांस्कृतिक चेतना को जीवित रखती हैं। उन्होंने कहा कि गोवा सरकार द्वारा पिछले 25 वर्षों से आदि लोकोत्सव का आयोजन इस सांस्कृतिक धरोहर को सहेजने का सराहनीय प्रयास है।
मुख्यमंत्री ने भगवान बिरसा मुंडा को नमन करते हुए कहा कि जनजातीय इतिहास गौरवशाली रहा है। अल्पायु में अंग्रेजों को चुनौती देने वाले बिरसा मुंडा सहित अनेक जनजातीय सेनानियों को आज प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देशव्यापी सम्मान और पहचान मिल रही है। उन्होंने रानी दुर्गावती के बलिदान का स्मरण करते हुए जबलपुर में निर्मित संग्रहालय का उल्लेख किया।
मुख्यमंत्री साय ने छत्तीसगढ़ के जनजातीय सेनानियों—शहीद वीर नारायण सिंह, वीर गुण्डाधुर, गेंद सिंह—के योगदान को रेखांकित किया और बताया कि राज्य में लगभग 32 प्रतिशत जनजातीय आबादी निवास करती है। उन्होंने कहा कि इन नायकों की स्मृति को संरक्षित करने के लिए नया रायपुर में शहीद वीर नारायण सिंह डिजिटल संग्रहालय का निर्माण किया गया है, जिसका उद्घाटन प्रधानमंत्री श्री मोदी ने किया। उन्होंने सभी को छत्तीसगढ़ आकर संग्रहालय देखने का आमंत्रण दिया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह जनजातीय समाज का गौरव है कि आज देश के सर्वोच्च पद पर भी जनजातीय समाज की बेटी विराजमान हैं। उन्होंने धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान और प्रधानमंत्री जनमन योजना का उल्लेख करते हुए जनजातीय विकास के प्रति केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई।
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की पहचान अब नक्सल प्रभावित राज्य से बदलकर शांति, विकास और निवेश के नए केंद्र के रूप में बन रही है। नक्सलवाद की कमर टूट चुकी है और नई औद्योगिक नीति के तहत अब तक 8 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जो राज्य के उज्ज्वल भविष्य का संकेत हैं।

रायपुर / शौर्यपथ /
राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) रायपुर में शुक्रवार को 21वाँ स्थापना दिवस एवं सांस्कृतिक संगीत कार्यक्रम ‘श्रुति 2025’ का भव्य आयोजन किया गया। इस अवसर पर संस्थान की शैक्षणिक उपलब्धियों, नवाचार, शोध, सांस्कृतिक और खेल गतिविधियों का उत्सवपूर्ण प्रदर्शन देखने को मिला।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि निदेशक डॉ. एन. वी. रमना राव रहे। उनके साथ डीन (स्टूडेंट वेलफेयर) डॉ. मनोज चोपकर, हेड, करियर डेवलपमेंट सेल डॉ. समीर बाज़पाई, सभी विभागाध्यक्ष, संकाय सदस्य, कर्मचारी, पूर्व छात्र, विद्यार्थी एवं उनके परिवारजन बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

समारोह का शुभारंभ अतिथियों के स्वागत एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। स्वागत उद्बोधन में डॉ. मनोज चोपकर ने एनआईटी रायपुर की विकास यात्रा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि संस्थान ने एक सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज से आगे बढ़कर आज स्नातक, स्नातकोत्तर और पीएचडी कार्यक्रमों में उत्कृष्टता हासिल करने वाला अग्रणी तकनीकी संस्थान बनने का गौरव प्राप्त किया है। उन्होंने शिक्षण, शोध, नवाचार और इनोवेशन सेल जैसी पहलों के माध्यम से छात्रों के रचनात्मक विचारों को प्रोत्साहित करने की बात कही।

डॉ. समीर बाज़पाई ने कहा कि एनआईटी रायपुर विभिन्न क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा और उपलब्धियों के लिए राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना चुका है। उन्होंने विद्यार्थियों को क्लबों और समितियों द्वारा आयोजित सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया।

मुख्य अतिथि डॉ. एन. वी. रमना राव ने अपने संबोधन में संस्थान की गौरवशाली परंपरा, तकनीकी उन्नति और वास्तविक जीवन की समस्याओं के समाधान में संकाय सदस्यों एवं छात्रों के योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि एनआईटी रायपुर तकनीकी कौशल के साथ-साथ शोध, सांस्कृतिक गतिविधियों और खेलकूद को समान महत्व देता है। उन्होंने नए विचार अपनाने, कड़ी मेहनत करने और बड़े सपने देखने का संदेश देते हुए संकाय, विद्यार्थियों और पूर्व छात्रों के योगदान के लिए आभार व्यक्त किया।

इसके पश्चात पुरस्कार वितरण समारोह आयोजित किया गया।

डिस्टिंग्यूश्ड एल्युमिनस अवार्ड केमिकल इंजीनियरिंग (1990 बैच) के पूर्व छात्र प्रो. अनुराग प्रभाकर मैरल को प्रदान किया गया।

लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड सिविल इंजीनियरिंग (1975 बैच) के पूर्व छात्र श्री संतोष कुमार अग्रवाल तथा केमिकल इंजीनियरिंग (1975 बैच) के पूर्व छात्र श्री सुधीर वर्मा को प्रदान किया गया।

श्री एस. के. अग्रवाल ने सम्मान के लिए आभार व्यक्त करते हुए विद्यार्थियों को संस्थान की विरासत को आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित किया। इसके साथ ही छात्रों एवं संकाय सदस्यों को शैक्षणिक और खेलकूद में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए सम्मानित किया गया। अंत में धन्यवाद ज्ञापन डॉ. सुवेंदु रूप, फैकल्टी इन-चार्ज, कल्चरल कमेटी द्वारा प्रस्तुत किया गया।

कार्यक्रम के सांस्कृतिक सत्र में नृत्यम – द डांस क्लब द्वारा मनमोहक नृत्य प्रस्तुति दी गई, वहीं ‘श्रुति 2025’ के अंतर्गत रागा – द म्यूजिक क्लब ने विविध संगीत शैलियों में शानदार गायन प्रस्तुत कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। भक्ति गीतों से लेकर रेट्रो, रॉक, 90 के दशक के लोकप्रिय गीतों और आधुनिक माशअप तक की प्रस्तुतियों ने भारत की “एकता में विविधता” की सांस्कृतिक भावना को सशक्त रूप से दर्शाया। परेशान, मेरे ढोलना, जाने जान, कायदे से जैसे गीतों पर सभागार तालियों से गूंज उठा।

एनआईटी रायपुर का 21वाँ स्थापना दिवस न केवल शैक्षणिक उपलब्धियों का उत्सव बना, बल्कि संस्कृति, नवाचार और सामूहिक गौरव का यादगार प्रतीक भी सिद्ध हुआ।

“अपने कम्फर्ट ज़ोन से बाहर निकलें और दुनिया को अपनी आवाज़ सुनने दें” —जेन-ज़ी के लिए श्री ओ. पी. चौधरी का संदेश

रायपुर / शौर्यपथ /
हिदायतुल्लाह राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय , रायपुर ने स्वामी विवेकानंद के जीवन और दर्शन को समर्पित '5वें स्वामी विवेकानंद स्मृति वार्षिक व्याख्यान' का भव्य आयोजन किया। इस अवसर पर मुख्य वक्ता के रूप में प्रदेश के माननीय वित्त मंत्री श्री ओ. पी. चौधरी उपस्थित रहे, जिन्होंने "जेन-ज़ी (Gen Z) के लिए स्वामी विवेकानंद की शिक्षाएँ" विषय पर प्रेरक उद्बोधन दिया। विश्वविद्यालय द्वारा यह आयोजन स्वामी विवेकानंद के रायपुर से गहरे ऐतिहासिक संबंधों और राष्ट्रीय युवा दिवस की स्मृति में प्रतिवर्ष किया जाता है।

कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए एचएनएलयू के कुलपति प्रो. (डॉ.) वी. सी. विवेकानंदन ने श्री ओ. पी. चौधरी के सार्वजनिक जीवन और सेवा भाव की सराहना की। उन्होंने कहा कि आज के दौर में जहाँ सफलता का पैमाना सोशल मीडिया 'फॉलोअर्स' बन गए हैं, वहीं श्री चौधरी जैसे व्यक्तित्व हमें याद दिलाते हैं कि नेतृत्व की असली पहचान सेवा और समर्पण है। कुलपति ने जोर दिया कि स्वामीजी के देहावसान के 123 वर्ष बाद भी उनके विचार आज की युवा पीढ़ी (Gen Z) के लिए एक प्रकाश स्तंभ की तरह हैं।

अपने मुख्य व्याख्यान में वित्त मंत्री श्री ओ. पी. चौधरी ने स्वामी विवेकानंद के 1893 के शिकागो संबोधन का उदाहरण देते हुए विद्यार्थियों को संचार और नेतृत्व के गुर सिखाए। उन्होंने कहा कि किसी भी विचार को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने से पहले लोगों के साथ भावनात्मक रूप से जुड़ना अनिवार्य है। उन्होंने स्वामीजी को भारतीय संस्कृति का 'वैश्विक राजदूत' बताते हुए विद्यार्थियों से 'सादा जीवन और उच्च विचार' के मार्ग पर चलने का आह्वान किया।मंत्री महोदय ने विद्यार्थियों से अपने 'कम्फर्ट ज़ोन' से बाहर निकलने और साहस के साथ अपने जुनून का पीछा करने का आग्रह किया। उन्होंने अनुशासन और ईमानदारी को जीवन का आधार बताते हुए कहा कि स्वास्थ्य ही वास्तविक संपदा है। उन्होंने अपने स्वयं के संघर्षों को साझा करते हुए बताया कि कैसे एक सरकारी स्कूल से पढ़कर देश के सबसे युवा आईएएस अधिकारियों में शामिल होने और फिर जनसेवा के लिए राजनीति में आने का निर्णय उनके साहसिक कदम थे। उन्होंने संदेश दिया कि चुनौतीपूर्ण रास्ते ही व्यक्ति को वास्तविक और सार्थक सफलता तक ले जाते हैं।

इस गरिमामयी अवसर पर एचएनएलयू प्रेस द्वारा प्रकाशित 'एचएनएलयू गज़ट न्यूज़लेटर' (खंड 3, अंक 2) का विमोचन भी किया गया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलसचिव (प्रभारी) डॉ. दीपक श्रीवास्तव ने स्वागत भाषण दिया, जबकि डीन (छात्र कल्याण) डॉ. अविनाश सामल ने धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम का कुशल समन्वय फैकल्टी सलाहकार श्री अभिनव शुक्ला और डॉ. अनीता सिंह द्वारा किया गया। इस व्याख्यान में एचएनएलयू के साथ-साथ कलिंगा विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं ने भी बड़ी संख्या में भाग लिया।

 

हिंसा का त्याग कर लोकतंत्र व विकास की मुख्यधारा में लौटे 18 महिलाएं और 45 पुरुष
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का संदेश— “बंदूक नहीं, संवाद और विकास ही स्थायी समाधान”

रायपुर ।
बस्तर अंचल में शांति, विश्वास और विकास की दिशा में एक ऐतिहासिक अध्याय जुड़ गया है। दंतेवाड़ा जिले में राज्य सरकार की “पूना मारगेम – पुनर्वास से पुनर्जीवन” पहल के अंतर्गत 36 इनामी सहित कुल 63 माओवादियों— जिनमें 18 महिलाएं और 45 पुरुष शामिल हैं — ने हिंसा का रास्ता छोड़ते हुए लोकतांत्रिक व्यवस्था और विकास की मुख्यधारा से जुड़ने का संकल्प लिया। यह कदम केवल आत्मसमर्पण नहीं, बल्कि बस्तर के भविष्य को नई दिशा देने वाला निर्णायक परिवर्तन है।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि यह सफलता प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार की मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति और केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह की स्पष्ट, बहुआयामी सुरक्षा एवं विकास रणनीति का प्रत्यक्ष परिणाम है। उन्होंने दो टूक कहा— “हिंसा किसी समस्या का समाधान नहीं है, स्थायी शांति का रास्ता संवाद और विकास से होकर ही जाता है।”

मुख्यमंत्री ने बताया कि छत्तीसगढ़ सरकार की संवेदनशील पुनर्वास नीति, सटीक सुरक्षा रणनीति और सुशासन आधारित प्रशासनिक दृष्टिकोण के कारण नक्सलवाद अब अंतिम दौर में पहुंच चुका है। माओवादी नेटवर्क का लगातार विघटन हो रहा है और बस्तर के सुदूर अंचलों तक अब तेज़ी से सड़क, बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और डिजिटल कनेक्टिविटी जैसी बुनियादी सुविधाएं पहुंच रही हैं।

उन्होंने स्पष्ट किया कि आत्मसमर्पण करने वाले सभी युवाओं को सरकार द्वारा सम्मानजनक पुनर्वास, कौशल प्रशिक्षण, रोजगार एवं आजीविका के अवसर तथा सामाजिक पुनर्स्थापन की समुचित व्यवस्था उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि वे आत्मनिर्भर नागरिक बनकर समाज में स्थायी रूप से स्थापित हो सकें।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि बस्तर अब भय की पहचान से बाहर निकलकर संभावनाओं और प्रगति की भूमि बन रहा है, जहां शांति, सुशासन और विकास मिलकर एक सुरक्षित और स्वर्णिम भविष्य की नींव रख रहे हैं।

  कोलकाता / शौर्यपथ / 8-9 जनवरी 2026 को पश्चिम बंगाल में I-PAC (प्रशांत किशोर द्वारा स्थापित राजनीतिक परामर्श फर्म) के ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की छापेमारी के बाद राज्य में भारी राजनीतिक उथल-पुथल मच गई है।
इस घटना के बाद की मुख्य घटनाएँ और राजनीतिक हालात निम्नलिखित हैं:

ममता बनर्जी का हस्तक्षेप: मुख्यमंत्री ममता बनर्जी छापेमारी के दौरान स्वयं साल्ट लेक स्थित I-PAC कार्यालय और इसके प्रमुख प्रतीक जैन के आवास पर पहुँच गईं। उन्होंने आरोप लगाया कि ED उनकी पार्टी के चुनावी दस्तावेजों, उम्मीदवार सूचियों और डेटा को "चुराने" की कोशिश कर रही है।
फाइलों की बरामदगी: मुख्यमंत्री को छापेमारी वाली जगह से हाथ में कुछ हरे रंग की फाइलें और हार्ड डिस्क लेकर निकलते देखा गया, जिसे उन्होंने अपनी पार्टी की संपत्ति बताया।
सड़कों पर विरोध प्रदर्शन: ममता बनर्जी ने इस कार्रवाई को "राजनीतिक प्रतिशोध" बताया और 9 जनवरी 2026 को कोलकाता में एक विशाल विरोध मार्च का नेतृत्व किया। इसके साथ ही TMC सांसदों ने दिल्ली में गृह मंत्री अमित शाह के कार्यालय के बाहर धरना दिया।
कानूनी कार्रवाई और FIR: पश्चिम बंगाल पुलिस ने मुख्यमंत्री की शिकायतों के आधार पर ED के खिलाफ दो FIR दर्ज की हैं। वहीं, ED ने कलकत्ता उच्च न्यायालय का रुख किया है और मुख्यमंत्री पर जाँच में बाधा डालने और साक्ष्य मिटाने का आरोप लगाते हुए CBI जाँच की मांग की है।
अदालती रुख: कलकत्ता उच्च न्यायालय ने ED की तत्काल सुनवाई की याचिका को खारिज कर दिया और मामले की अगली सुनवाई 14 जनवरी 2026 के लिए तय की है।
BJP की प्रतिक्रिया: भाजपा ने ममता बनर्जी के आचरण को "असंवैधानिक" बताया और आरोप लगाया कि वे भ्रष्टाचार को छिपाने के लिए कानून की प्रक्रिया में बाधा डाल रही हैं। भाजपा नेताओं ने राज्य में 'जंगलराज' होने का दावा करते हुए मुख्यमंत्री के इस्तीफे या राष्ट्रपति शासन की मांग की है।

यह पूरा विवाद 2026 के विधानसभा चुनावों से ठीक पहले एक बड़े राजनीतिक युद्ध में बदल गया है, जहाँ TMC इसे "बंगाल की अस्मिता पर हमला" बता रही है और BJP इसे "भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई" कह रही है।

मर्यादा पुरुषोत्तम के नाम पर अवैध व्यापार, गरीबों पर बुलडोजर और रसूखदारों पर मौन—क्या यही है सुशासन? दुर्ग / शौर्यपथ विशेष / राम के नाम पर तैरते पत्थर की कथा…

आवास और बिजली एक साथ, देश में पहली बार योजनाओं का अभिसरण

रायपुर ।
छत्तीसगढ़ सरकार और छत्तीसगढ़ स्टेट पॉवर डिस्ट्रिब्यूशन कंपनी ने अत्यंत पिछड़ी जनजाति के परिवारों के लिए रूफटॉप सोलर प्लांट लगाने की पहल की है। कोरबा जिले के पोड़ी उपरोड़ा विकासखंड के ग्राम गुडरूमुड़ा में आठ पहाड़ी कोरवा परिवार अब घर बैठे निःशुल्क बिजली का लाभ उठा रहे हैं।

यह पहल प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना, प्रधानमंत्री जनमन योजना और प्रधानमंत्री आवास योजना के अभिसरण से संभव हुई है। इससे न केवल ग्रामीण परिवारों को स्थायी बिजली सुविधा मिली, बल्कि घरेलू बिजली के खर्च से पूरी तरह मुक्ति भी मिली है।

कैसे हुआ यह नवाचार संभव

एक किलोवाट के सोलर प्लांट पर लगभग 60 हजार रुपये का खर्च आता है। इसमें केन्द्र और राज्य सरकार की सब्सिडी लगभग 45 हजार रूपए और शेष 15 हजार रुपये डीएमएफ से वहन किए गए। इस समन्वित प्रयास में केन्द्र सरकार, राज्य सरकार, छत्तीसगढ़ स्टेट पॉवर कंपनी और जिला प्रशासन का योगदान शामिल है।

हितग्राहियों की खुशी

मंगलू राम और उनके परिवार ने कहा,

"हमारा जीवन संवर जाएगा। अब हमें निरंतर बिजली मिलेगी और बिल का झंझट नहीं रहेगा। विद्युत कंपनी के लोग हर कदम में मदद कर रहे हैं।"

अधिकारियों की सोच और योजना

छत्तीसगढ़ स्टेट पॉवर डिस्ट्रिब्यूशन कंपनी के अध्यक्ष डॉ. रोहित यादव ने कहा,

"मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की दूरदर्शिता में योजनाओं के अभिसरण का मार्ग प्रशस्त हुआ। यह पहल पहाड़ी कोरवा परिवारों के लिए स्थायी लाभ लेकर आई है।"

मैनेजिंग डायरेक्टर भीम सिंह ने कहा,

"प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना और डीएमएफ के समन्वय से हमने देश में एक नई मिसाल कायम की है। यह पायलट प्रोजेक्ट भविष्य में कई अन्य परिवारों के लिए मार्गदर्शक बनेगा।"

राह में एक उदाहरण

गुडरूमुड़ा का यह प्रोजेक्ट अब न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे देश के लिए सोलर ऊर्जा और ग्रामीण सशक्तिकरण का मॉडल बन गया है। भविष्य में इसे कई अन्य पिछड़ी और जरूरतमंद जनजाति परिवारों तक विस्तार देने की योजना है।


अगर आप चाहें तो मैं इसे और “ब्रेकिंग न्यूज़ / सोशल मीडिया फ्रेंडली” संस्करण भी बना दूँ, जिसमें छोटे पैराग्राफ, इमोजी और बुलेट के साथ मोबाइल पढ़ने वालों के लिए आकर्षक बन जाएगा।

रायपुर ।
प्रदेश कांग्रेस ने मनरेगा बचाओ संग्राम के तहत प्रदेशभर में सशक्त आंदोलन चलाने का ऐलान किया है। दो महत्वपूर्ण बैठकों के बाद प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज, प्रभारी सचिन पायलट, नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत और अन्य वरिष्ठ नेताओं की उपस्थिति में आंदोलन की रूपरेखा तय की गई।

बैठकों में धान खरीदी में किसानों की समस्याओं, वंचित मतदाताओं के नाम जोड़ने और मनरेगा संशोधन के खिलाफ अभियान पर विस्तार से चर्चा हुई। कांग्रेस ने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा में किए गए संशोधन से ग्रामीण रोजगार और आजीविका पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा, और इसे वापस लेने तक अभियान जारी रहेगा।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि मोदी सरकार ने मनरेगा बजट में कटौती कर रोजगार के दिनों को घटा दिया है। छत्तीसगढ़ में औसत केवल 28 दिन बचा है। कांग्रेस मांग कर रही है कि मनरेगा मजदूरी 400 रुपये प्रतिदिन की जाए और संशोधन वापस लिया जाए।

नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने आंदोलन को आम आदमी और मजदूरों के हित की लड़ाई बताया और कहा कि केंद्र सरकार को मजबूर करना है कि वह मनरेगा के अधिकारों को बहाल करे। पूर्व उपमुख्यमंत्री टी.एस. सिंहदेव ने कहा कि संशोधनों के संभावित नुकसान जनता के बीच स्पष्ट किए जाएंगे।

मनरेगा बचाओ संग्राम के कार्यक्रम

  • 10 जनवरी: जिला स्तरीय प्रेस कॉन्फ्रेंस, संशोधन के दुष्प्रभावों को मीडिया के माध्यम से जनता तक पहुंचाया जाएगा।

  • 11 जनवरी: एक दिवसीय उपवास और प्रतीकात्मक विरोध, प्रमुख सार्वजनिक स्थलों पर।

  • 12–29 जनवरी: पंचायत स्तर पर चौपालें, नुक्कड़ सभाएं और जनसंपर्क।

  • 30 जनवरी: वार्ड और ब्लॉक स्तर पर शांतिपूर्ण धरने।

  • 31 जनवरी–6 फरवरी: जिला स्तरीय मनरेगा धरना और ज्ञापन सौंपना।

  • 7–15 फरवरी: राज्य स्तरीय विधानसभा घेराव।

  • 16–25 फरवरी: क्षेत्रीय एआईसीसी रैलियां।

बैठक में पार्टी के वरिष्ठ नेता, सांसद, पूर्व मंत्री, जिला अध्यक्ष और युवा नेतृत्व सहित सभी प्रमुख पदाधिकारी उपस्थित थे। कांग्रेस ने जनता को मनरेगा के संवैधानिक अधिकारों और रोजगार सुरक्षा के प्रति जागरूक करने का संकल्प लिया।

मुंगेली ।
मुंगेली जिले के लोरमी विकासखंड में शासकीय प्राथमिक शाला लाखासार के सहायक शिक्षक लक्ष्मण कोलाम द्वारा शराब के नशे में स्कूल आने की पुष्टि होते ही प्रशासन ने तत्काल और सख्त कार्रवाई की। शिक्षक को निलंबित कर दिया गया और उनके मुख्यालय को लोरमी तय किया गया, साथ ही उन्हें केवल जीवन निर्वाह भत्ता ही मिलेगा।

कलेक्टर कुन्दन कुमार के निर्देश पर जिला शिक्षा अधिकारी ने तुरंत जांच टीम भेजकर मामले की तहकीकात की। जांच में शिक्षक पर लगे आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए गए, जिससे यह स्पष्ट संदेश गया कि शैक्षणिक संस्थानों में अनुशासनहीनता और गरिमा के खिलाफ कोई रियायत नहीं होगी।

शिक्षा विभाग ने कहा कि यह कदम केवल सजा देने के लिए नहीं, बल्कि सभी शिक्षकों और अधिकारियों को अनुशासन, जिम्मेदारी और नैतिकता का पाठ पढ़ाने के लिए उठाया गया है।

अधिक जानकारी के लिए मुंगेली जिला प्रशासन की आधिकारिक वेबसाइट पर अपडेट देखें।

प्रवेश पत्र जारी, विद्यार्थी ऑनलाइन डाउनलोड कर सकेंगे

मुंगेली ।
जवाहर नवोदय विद्यालय में शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए कक्षा 09वीं और 11वीं में प्रवेश हेतु पार्श्व चयन परीक्षा 07 फरवरी को आयोजित की जाएगी। इस संबंध में प्रवेश पत्र जारी कर दिए गए हैं।

विद्यालय के प्राचार्य ने बताया कि कक्षा 09वीं में 226 और कक्षा 11वीं में 210 विद्यार्थियों ने आवेदन किया है।

विद्यार्थी अपने प्रवेश पत्र निम्न वेबसाइटों से डाउनलोड कर सकते हैं:

डाउनलोड करने के लिए रजिस्ट्रेशन नंबर और जन्म तिथि दर्ज करनी होगी।

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