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धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।
जगदलपुर, शौर्यपथ। जगदलपुर के प्रसिद्ध लामनी पार्क में बुधवार को मकर संक्रांति के पावन अवसर पर उत्साह, उल्लास और रंगों का एक अद्भुत नजारा देखने को मिला। वन विभाग द्वारा 'चित्र-विचित्र' संस्था के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में प्रकृति प्रेम और संस्कृति का सुंदर संगम नजर आया। शहरवासियों और स्कूली बच्चों ने इस पहल का स्वागत जबरदस्त उत्साह के साथ किया। आयोजन की सफलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कड़ाके की ठंड और त्यौहार की व्यस्तता के बावजूद 630 प्रतिभागियों ने चित्रकला और 256 प्रतिभागियों ने पतंग उड़ाओ प्रतियोगिता में हिस्सा लिया। आयोजन का मुख्य उद्देश्य बच्चों और उनके अभिभावकों के बीच प्रकृति, वन और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना था, जो पूरी तरह सफल होता दिखा। दोपहर 12 बजे से शुरू हुई चित्रकला प्रतियोगिता में नन्हे कलाकारों ने 'प्रकृति, वन एवं पर्यावरण' विषय पर अपनी कल्पनाओं को कैनवास पर उतारा। बच्चों ने अपनी पेंटिंग के जरिए पर्यावरण को बचाने के जो संदेश दिए, उसने वहां मौजूद सभी दर्शकों और निर्णायकों का मन मोह लिया। शाम 3 बजे के बाद कार्यक्रम का रोमांच अपने चरम पर पहुंच गया जब पतंग उड़ाओ प्रतियोगिता की शुरुआत हुई। लामनी पार्क का आसमान रंग-बिरंगी पतंगों से छा गया। बच्चों के साथ-साथ उनके अभिभावकों ने भी इसमें बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया, जिससे पारिवारिक सहभागिता और सामाजिक जुड़ाव का एक सुखद दृश्य उपस्थित हो गया।
बस्तर वनमंडलाधिकारी उत्तम कुमार गुप्ता ने कार्यक्रम की जानकारी देते हुए बताया कि प्रतियोगिताओं को इस तरह से डिजाइन किया गया था कि हर आयु वर्ग के बच्चे इसमें शामिल हो सकें। उन्होंने बताया कि 11 से 18 वर्ष (वरिष्ठ वर्ग) के विजेताओं को क्रमशः 10 हजार रुपए, 07 हजार रुपए और 04 हजार रुपए के आकर्षक पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे। वहीं 6 से 10 वर्ष के कनिष्ठ वर्ग के विजेताओं को 05 हजार रुपए, 03 हजार रुपए और 02 हजार रुपए की पुरस्कार राशि दी जाएगी। उन्होंने बताया कि इन प्रतियोगिताओं में प्रतिभागियों की सहभागिता उम्मीद से बढ़कर हुई तथा इस प्रतियोगिता के विजेताओं को शीघ्र ही पुरस्कृत किया जाएगा।
पतंगबाजी के शौकीनों का उत्साह बढ़ाने के लिए इसमें भी विजेताओं को 2,100 रुपए और 1,100 रुपए के पुरस्कार दिए जाएंगे। कार्यक्रम की सबसे खास बात 6 वर्ष से कम उम्र के बच्चों की भागीदारी रही, जिन्हें प्रतियोगिता में शामिल होने के लिए सांत्वना पुरस्कार और प्रमाण पत्र देकर प्रोत्साहित किया जाएगा। वन विभाग की इस पहल ने मकर संक्रांति के पर्व को शहरवासियों, पर्यटकों और बच्चों के लिए स्मरणीय बना दिया।
जगदलपुर, शौर्यपथ। जगदलपुर के प्रसिद्ध लामनी पार्क में बुधवार को मकर संक्रांति के पावन अवसर पर उत्साह, उल्लास और रंगों का एक अद्भुत नजारा देखने को मिला। वन विभाग द्वारा 'चित्र-विचित्र' संस्था के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में प्रकृति प्रेम और संस्कृति का सुंदर संगम नजर आया। शहरवासियों और स्कूली बच्चों ने इस पहल का स्वागत जबरदस्त उत्साह के साथ किया। आयोजन की सफलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कड़ाके की ठंड और त्यौहार की व्यस्तता के बावजूद 630 प्रतिभागियों ने चित्रकला और 256 प्रतिभागियों ने पतंग उड़ाओ प्रतियोगिता में हिस्सा लिया। आयोजन का मुख्य उद्देश्य बच्चों और उनके अभिभावकों के बीच प्रकृति, वन और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना था, जो पूरी तरह सफल होता दिखा। दोपहर 12 बजे से शुरू हुई चित्रकला प्रतियोगिता में नन्हे कलाकारों ने 'प्रकृति, वन एवं पर्यावरण' विषय पर अपनी कल्पनाओं को कैनवास पर उतारा। बच्चों ने अपनी पेंटिंग के जरिए पर्यावरण को बचाने के जो संदेश दिए, उसने वहां मौजूद सभी दर्शकों और निर्णायकों का मन मोह लिया। शाम 3 बजे के बाद कार्यक्रम का रोमांच अपने चरम पर पहुंच गया जब पतंग उड़ाओ प्रतियोगिता की शुरुआत हुई। लामनी पार्क का आसमान रंग-बिरंगी पतंगों से छा गया। बच्चों के साथ-साथ उनके अभिभावकों ने भी इसमें बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया, जिससे पारिवारिक सहभागिता और सामाजिक जुड़ाव का एक सुखद दृश्य उपस्थित हो गया।
बस्तर वनमंडलाधिकारी उत्तम कुमार गुप्ता ने कार्यक्रम की जानकारी देते हुए बताया कि प्रतियोगिताओं को इस तरह से डिजाइन किया गया था कि हर आयु वर्ग के बच्चे इसमें शामिल हो सकें। उन्होंने बताया कि 11 से 18 वर्ष (वरिष्ठ वर्ग) के विजेताओं को क्रमशः 10 हजार रुपए, 07 हजार रुपए और 04 हजार रुपए के आकर्षक पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे। वहीं 6 से 10 वर्ष के कनिष्ठ वर्ग के विजेताओं को 05 हजार रुपए, 03 हजार रुपए और 02 हजार रुपए की पुरस्कार राशि दी जाएगी। उन्होंने बताया कि इन प्रतियोगिताओं में प्रतिभागियों की सहभागिता उम्मीद से बढ़कर हुई तथा इस प्रतियोगिता के विजेताओं को शीघ्र ही पुरस्कृत किया जाएगा।
पतंगबाजी के शौकीनों का उत्साह बढ़ाने के लिए इसमें भी विजेताओं को 2,100 रुपए और 1,100 रुपए के पुरस्कार दिए जाएंगे। कार्यक्रम की सबसे खास बात 6 वर्ष से कम उम्र के बच्चों की भागीदारी रही, जिन्हें प्रतियोगिता में शामिल होने के लिए सांत्वना पुरस्कार और प्रमाण पत्र देकर प्रोत्साहित किया जाएगा। वन विभाग की इस पहल ने मकर संक्रांति के पर्व को शहरवासियों, पर्यटकों और बच्चों के लिए स्मरणीय बना दिया।
0 व्यस्त मार्ग पर स्ट्रीट लाइट नदारद, प्रशासन की अनदेखी से राहगीर और वाहन चालक परेशान
राजनांदगांव /शौर्यपथ /फरहद चौक पर व्याप्त अंधेरा अब आमजन के लिए गंभीर चिंता का विषय बनता जा रहा है। यह चौक मोहरा, अंबागढ़ चौकी, पेंड्री एवं ट्रांसपोर्ट नगर को जोड़ने वाला एक प्रमुख मार्ग है, जहां से दिन-रात छोटे-बड़े वाहनों का निरंतर आवागमन होता रहता है। इसके बावजूद चौक एवं आसपास के क्षेत्र में पर्याप्त स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था नहीं होने से यहां घुप्प अंधेरा पसरा रहता है।
स्थानीय नागरिकों एवं वाहन चालकों का कहना है कि अंधेरे के कारण रात के समय राहगीरों को चलने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। तेज रफ्तार वाहनों, दोपहिया चालकों एवं पैदल यात्रियों के लिए यह स्थिति बेहद जोखिम भरी बन चुकी है। कई बार दुर्घटना होते-होते बची है, लेकिन अब किसी बड़े हादसे की आशंका लगातार बनी हुई है।
क्षेत्रवासियों का आरोप है कि इस समस्या को लेकर संबंधित विभाग एवं प्रशासन को कई बार अवगत कराया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। यदि जल्द ही फरहद चौक पर पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था नहीं की गई, तो यह अंधेरा किसी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकता है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि शीघ्र स्ट्रीट लाइट लगाई जाएं और खराब लाइटों की मरम्मत कराई जाए, ताकि आमजन सुरक्षित रूप से आवागमन कर सकें।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि नक्सलवाद उन्मूलन अब निर्णायक चरण में है और मार्च 2026 तक इसे पूरी तरह समाप्त करने का लक्ष्य है।
सुरक्षा शिविरों का विस्तार: दिसंबर 2023 से अब तक 65 नए सुरक्षा शिविर स्थापित किए गए हैं, जिससे दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों में सरकारी उपस्थिति मजबूत हुई।
नक्सली नेटवर्क पर प्रभावी कार्रवाई: प्रमुख माओवादी विचारकों और कमांडरों को निष्क्रिय कर उनके नेटवर्क को पूरी तरह कमजोर किया गया।
सटीक आंकड़े:
आत्मसमर्पण: 2,386+ नक्सली
गिरफ्तार: 1,901+ नक्सली
निष्क्रिय/मारे गए: 505+ नक्सली
इन कदमों से नक्सलियों की कमांड और नियंत्रण प्रणाली टूट चुकी है और स्थानीय लोग अब खुले तौर पर सरकारी पहलों का समर्थन कर रहे हैं।
सरकार ने नक्सलियों के “कोर एरिया” (अबूझमाड़ और घोर जंगली इलाके) में सक्रिय रूप से अभियान चलाकर उनके गढ़ों को निशाना बनाया।
फॉरवर्ड लिंक कैंप: पिछले दो वर्षों में 50+ नए कैंप स्थापित, जिन्हें विकास केंद्र के रूप में विकसित किया गया।
इंटेलिजेंस आधारित ऑपरेशन: अब मुठभेड़ें केवल गश्त पर नहीं होतीं, बल्कि सटीक खुफिया जानकारी के आधार पर विशेष ऑपरेशन किए जाते हैं।
आधुनिक हथियार और तकनीक: ड्रोन, एन्टी-माइन वाहन, और अत्याधुनिक संचार उपकरणों से जवानों की सुरक्षा सुनिश्चित की गई, हताहत दर में भारी कमी आई।
इन रणनीतियों के परिणामस्वरूप नक्सलियों के बीच भय और अविश्वास का माहौल उत्पन्न हुआ और कई कमांडर आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौट आए।
मुख्यमंत्री की प्रमुख पहल ‘नियद नेल्लानार’ (आपका अच्छा गाँव) योजना ने सुरक्षा शिविरों के आसपास के गांवों में शत-प्रतिशत विकास की दिशा में काम किया।
सुविधाओं का विस्तार: राशन दुकान, स्कूल, आंगनबाड़ी, खेल का मैदान, मुफ्त बिजली, पक्के आवास, स्वास्थ्य क्लिनिक और 25+ बुनियादी सुविधाओं का वितरण।
शिक्षा और स्वास्थ्य: बंद 300+ स्कूलों को पुनः खोला गया, और ‘छू लो आसमान’ जैसी कोचिंग संस्थाओं के माध्यम से IIT/NEET जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी उपलब्ध।
स्थानीय सहभागिता: ग्रामीण अब स्वयं सुरक्षा शिविरों की मांग करने लगे हैं, जिससे यह स्पष्ट हो रहा है कि विकास और सुरक्षा का मॉडल सफल हुआ है।
बस्तर को केवल सुरक्षा के मोर्चे तक सीमित नहीं रखा गया; सरकार ने इसे स्थानीय उद्यमिता, वनोपज और पर्यटन से जोड़ा।
वनोपज आधारित समर्थन: इमली, महुआ, कोसा वनोपजों का MSP बढ़ाया गया और बिचौलियों को खत्म किया गया।
स्थानीय रोजगार: ‘बस्तर कैफे’ ब्रांड और फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स में महिलाओं और युवाओं को रोजगार मिला।
पर्यटन और इको-टूरिज्म: ‘बस्तर पांडुम’, ‘बस्तर ओलंपिक’ और सुरक्षित पर्यटन स्थलों से स्थानीय आजीविका को बढ़ावा।
कौशल विकास: आत्मसमर्पित नक्सलियों और युवाओं को ट्रैक्टर रिपेयरिंग, मोबाइल रिपेयरिंग, सोलर पंप तकनीशियन और अन्य व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रदान।
भरोसे का संकेत: 2025 में ‘लोन वर्राटू’ अभियान के तहत 2,000+ नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया, जिनमें कई अब ‘बस्तर फाइटर्स’ के रूप में पुलिस और प्रशासन की मदद कर रहे हैं।
राजनीतिक भागीदारी: ग्राम सभाओं और स्थानीय चुनावों में मतदान प्रतिशत में वृद्धि, जो लोकतंत्र में विश्वास की बढ़ती दर को दर्शाती है।
सड़कों और पुलों का निर्माण: इंद्रावती नदी पर नए पुल और ग्रामीण सड़कों का निर्माण, जिससे मानसून के दौरान भी बस्तर का संपर्क टूटने का खतरा नहीं।
स्वास्थ्य सेवाएं: ‘हाट बाजार क्लिनिक’ योजना के तहत जंगलों और दुर्गम इलाकों में डॉक्टर और दवाइयां उपलब्ध।
शिक्षा और कौशल: बच्चों के लिए गुणवत्ता शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का मार्गदर्शन।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में बस्तर में दो वर्षों में सुरक्षा, विकास और विश्वास का त्रिकोणीय मॉडल सफल हुआ है। नक्सलियों के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई और विकास की मुख्यधारा के प्रति स्थानीय लोगों के विश्वास ने बस्तर को 'लाल आतंक' से मुक्त कर 'हरी-भरी संस्कृति और तेजी से बढ़ते विकास' की पहचान दिलाई है।
मार्च 2026 तक बस्तर को पूर्ण नक्सल मुक्त बनाने का लक्ष्य अब within reach है, और यह स्पष्ट है कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और उनकी सरकार ने बस्तर को न केवल सुरक्षित, बल्कि आत्मनिर्भर और विकसित बनाने का मार्ग प्रशस्त किया है।
नामांकन प्रक्रिया के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह प्रस्तावक के रूप में मौजूद रहेंगे। नितिन नबीन वर्तमान में भाजपा के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष हैं और बिहार की बांकेपुर सीट से पांच बार विधायक रह चुके हैं। 46 वर्ष की आयु में वे भाजपा के इतिहास के सबसे युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष बनेंगे।
भाजपा के संविधान के अनुसार, राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए नामांकन हेतु किसी भी व्यक्ति के पास कम से कम 15 वर्षों की सदस्यता और 12 वर्षों का सक्रिय कार्यकाल होना आवश्यक है। इसके अलावा, नामांकन के लिए कम से कम 5 राज्यों की प्रदेश परिषदों के 20 सदस्यों का संयुक्त प्रस्तावक होना अनिवार्य है।
वर्तमान में नितिन नबीन सबसे प्रमुख दावेदार माने जा रहे हैं। पूर्व में वरिष्ठ नेताओं धर्मेंद्र प्रधान, शिवराज सिंह चौहान और भूपेंद्र यादव के नाम चर्चा में रहे थे, लेकिन कार्यकारी अध्यक्ष बनने के बाद अन्य दावेदारों द्वारा नामांकन की संभावना कम है।
इस चुनाव में छत्तीसगढ़ की भूमिका विशेष रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव में प्रदेश इकाइयों की सक्रिय भागीदारी होती है। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंह देव 19 जनवरी को दिल्ली में होने वाली नामांकन प्रक्रिया में उपस्थित रहेंगे। नितिन नबीन लंबे समय तक छत्तीसगढ़ के प्रदेश प्रभारी रहे हैं और उनके कार्यकाल में भाजपा ने राज्य में सत्ता वापसी की थी। उनके अध्यक्ष बनने से राज्य भाजपा में उत्साह देखा जा रहा है।
चुनाव के बाद छत्तीसगढ़ को नया प्रदेश प्रभारी मिलने की संभावना है, क्योंकि नितिन नबीन अब राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी जिम्मेदारी संभालेंगे।
छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले के नरहरपुर ब्लॉक अंतर्गत बागाबारी गांव से मानव तस्करी का एक गंभीर और दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है। इस घटना में गांव के ही एक व्यक्ति ने विश्वासघात करते हुए दो महिलाओं और एक 11 वर्षीय बच्ची को धोखे से राजस्थान ले जाकर बेच दिया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार आरोपी ने पीड़ित महिलाओं और बच्ची को काम दिलाने के बहाने अपने साथ राजस्थान ले गया। भरोसे और जान-पहचान का फायदा उठाकर आरोपी ने उन्हें मानव तस्करी के जाल में फंसा दिया और वहां बेच दिया।
जब लंबे समय तक पीड़ितों से संपर्क नहीं हो सका, तब परिजनों और ग्रामीणों को अनहोनी की आशंका हुई। इसके बाद नरहरपुर थाना में शिकायत दर्ज कराई गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए कांकेर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए एक विशेष टीम राजस्थान रवाना की।
छत्तीसगढ़ पुलिस ने राजस्थान पुलिस के सहयोग से दोनों महिलाओं और नाबालिग बच्ची को सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया। सभी को सकुशल कांकेर लाया गया है, जहां उनका चिकित्सकीय परीक्षण और काउंसलिंग कराई जा रही है।
इस मामले में शामिल मुख्य आरोपी (पीड़ोसी) को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी से गहन पूछताछ की जा रही है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि —
क्या इस तस्करी के पीछे कोई संगठित गिरोह सक्रिय है
क्या पहले भी ग्रामीण इलाकों से महिलाओं और बच्चों की तस्करी की गई है
राजस्थान में किन लोगों को पीड़ितों को सौंपा गया था
पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मानव तस्करी, धोखाधड़ी और नाबालिग के अपहरण से संबंधित गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया है। अन्य आरोपियों की तलाश जारी है।
यह घटना ग्रामीण क्षेत्रों में परिचितों पर आंख मूंदकर भरोसा न करने और रोजगार के नाम पर बाहर ले जाने वालों की सघन जांच की आवश्यकता को रेखांकित करती है। पुलिस ने ग्रामीणों से अपील की है कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत प्रशासन को दें।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए 13 जनवरी 2026 का दिन राजनयिक गतिविधियों, राष्ट्रनिर्माण से जुड़े संवाद और सांस्कृतिक उत्सवों के संदेशों से भरपूर रहा। इस दिन उन्होंने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति से लेकर युवाओं के सशक्तिकरण और भारतीय परंपराओं के उत्सव तक कई अहम कार्यक्रमों में सहभागिता की।
प्रधानमंत्री मोदी ने नई दिल्ली में फ्रांस के राष्ट्रपति के राजनयिक सलाहकार मिस्टर इमैनुएल बोने से मुलाकात की। इस दौरान भारत–फ्रांस रणनीतिक साझेदारी, वैश्विक मुद्दों और द्विपक्षीय सहयोग को और मजबूत करने पर विचार-विमर्श हुआ। यह बैठक दोनों देशों के बीच गहरे होते कूटनीतिक संबंधों का संकेत मानी जा रही है।
प्रधानमंत्री ने लोहड़ी के पावन अवसर पर देशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए समृद्धि, खुशहाली और एकता का संदेश दिया। उन्होंने इस पर्व को कृषि, प्रकृति और सामूहिक उत्सव का प्रतीक बताया।
पीएम मोदी ने नई दिल्ली में आयोजित ‘विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग 2026’ में दिए गए अपने संबोधन की झलकियां साझा कीं। उन्होंने युवाओं को विकसित भारत के संकल्प में भागीदार बनने का आह्वान करते हुए नेतृत्व, नवाचार और राष्ट्रसेवा पर जोर दिया।
प्रधानमंत्री ने नागरिकों को उच्च उद्देश्यों के लिए प्रेरित करते हुए एक संस्कृत सुभाषित साझा किया, जिसमें आत्मविश्वास, परिश्रम और जागरूकता के साथ आगे बढ़ने का संदेश निहित था।
इसी दिन जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ की भारत यात्रा का समापन हुआ। इससे पहले 12 जनवरी को प्रधानमंत्री मोदी और चांसलर मर्ज़ ने अहमदाबाद के साबरमती रिवरफ्रंट पर आयोजित पतंग उत्सव में भाग लिया था। दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय वार्ता भी हुई, जिसमें व्यापार, तकनीक और रणनीतिक सहयोग को लेकर सहमति बनी।
13 जनवरी का दिन प्रधानमंत्री मोदी की सक्रिय कार्यशैली को दर्शाता है, जहां एक ओर वैश्विक मंच पर भारत की भूमिका को सशक्त किया गया, वहीं दूसरी ओर युवाओं, संस्कृति और परंपराओं को भी समान महत्व दिया गया।
मौसम विभाग ने दिल्ली में शीतलहर और अत्यंत कम दृश्यता के चलते रेड अलर्ट जारी किया है। कई इलाकों में दृश्यता शून्य के करीब पहुंच गई है। लोगों को केवल आवश्यक होने पर ही बाहर निकलने की सलाह दी गई है।
पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के बड़े हिस्से घने कोहरे की चादर में ढके हुए हैं। कोहरे के कारण रेल, सड़क और हवाई यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ है। कई ट्रेनें देरी से चल रही हैं, जबकि अनेक उड़ानें रद्द या विलंबित की गई हैं।
पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से उत्तर भारत के मैदानी क्षेत्रों में हल्की से मध्यम बारिश की संभावना है। वहीं हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्यों में भारी बर्फबारी का अनुमान जताया गया है।
शीतलहर के चलते कई शहरों में न्यूनतम तापमान गिरकर 3 से 4 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है, जिससे जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है।
मौसम विभाग ने लोगों से वाहन चलाते समय फॉग लाइट के इस्तेमाल, धीमी गति बनाए रखने और ठंड से बचाव के लिए गर्म कपड़े पहनने की अपील की है। यात्रियों को उड़ान और ट्रेन की स्थिति जानने के लिए मौसम विभाग व संबंधित विभागों की आधिकारिक सूचनाएं देखने की सलाह दी गई है।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
