February 08, 2026
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धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।

 

  रायपुर / राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह के अंतर्गत भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) द्वारा छत्तीसगढ़ के विभिन्न राष्ट्रीय राजमार्गों पर सड़क सुरक्षा को लेकर व्यापक जन-जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसी क्रम में रायपुर-बिलासपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर सड़क सुरक्षा जागरूकता अभियान चलाया गया, जिसके तहत वाहन चालकों को हेलमेट वितरित किए गए एवं यातायात नियमों के पालन के लिए प्रेरित किया गया।
इस अवसर पर एनएचएआई के क्षेत्रीय अधिकारी प्रदीप कुमार लाल ने कहा कि सड़क सुरक्षा केवल नियमों का पालन भर नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक नागरिक की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि हेलमेट पहनना, सीट बेल्ट का उपयोग करना तथा निर्धारित गति सीमा का पालन जैसे छोटे-छोटे उपाय बहुमूल्य जीवन को सुरक्षित रखने में अहम भूमिका निभाते हैं।

परियोजना कार्यान्वयन इकाई, बिलासपुर के परियोजना निदेशक मुकेश कुमार ने कहा कि राष्ट्रीय राजमार्गों पर यात्रा को सुरक्षित एवं सुगम बनाने के लिए आधुनिक तकनीकी उपायों के साथ-साथ जन-जागरूकता अभियानों का निरंतर संचालन किया जा रहा है, ताकि सड़क दुर्घटनाओं की दर को न्यूनतम स्तर पर लाया जा सके।

अभियान के दौरान सड़क दुर्घटना की स्थिति में त्वरित एवं प्रभावी बचाव कार्यों के लिए लाइव एक्सीडेंट डेमोस्ट्रेशन (मॉक ड्रिल) का आयोजन किया गया। इस दौरान एम्बुलेंस की पहुँच, क्रेन द्वारा मार्ग से बाधा हटाने तथा घायलों को प्राथमिक उपचार देने की प्रक्रिया की जानकारी दी गई। साथ ही, सुरक्षित यात्रा के लिए हेलमेट, सीट बेल्ट के महत्व को बताया गया।

सड़क सुरक्षा अभियान के साथ-साथ एनएचआईटी के सहयोग से रक्तदान शिविर का भी आयोजन किया गया, जिसमें 50 से अधिक लोगों ने रक्त दान किया। इस शिविर में अधिकारियों-कर्मचारियों और सड़क उपयोगकर्ताओं ने स्वेच्छा से रक्तदान किया।

एनएचएआई द्वारा प्रदेश के सभी टोल प्लाजा, राष्ट्रीय राजमार्गों एवं प्रमुख जंक्शनों पर लगातार सड़क सुरक्षा जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। इसके अंतर्गत वाहन चालकों एवं यात्रियों से यातायात नियमों का पालन करने, हेलमेट पहनने, सीट बेल्ट लगाने तथा निर्धारित गति सीमा का पालन करने की अपील की जा रही है।

शरद पंसारी - संपादक शौर्यपथ दैनिक समाचार
भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर हाल के दिनों में एक अजीब-सी बहस सार्वजनिक विमर्श में छा गई है — “भारत में एक डॉलर में छह समोसे मिल जाते हैं, जबकि अमेरिका में एक डॉलर में केवल एक पेन।” यह तुलना सुनने में भले ही चुटीली लगे, लेकिन यह आर्थिक यथार्थ को समझने के बजाय उसे सरलीकरण और भावनात्मक तर्कों में उलझाने का प्रयास अधिक प्रतीत होती है। असल सवाल समोसे या पेन का नहीं, बल्कि आय, गरीबी, क्रय शक्ति और जीवन स्तर का है।

भारत सरकार के सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) द्वारा 7 जनवरी 2026 को जारी प्रथम अग्रिम अनुमान इस वास्तविकता को स्पष्ट रूप से सामने रखते हैं। वित्त वर्ष 2025-26 में स्थिर मूल्यों पर भारत की प्रति व्यक्ति वास्तविक जीडीपी ₹1,42,119 रहने का अनुमान है, जो बीते वर्ष की तुलना में 6.5 प्रतिशत की वृद्धि अवश्य दर्शाता है। यह वृद्धि स्वागतयोग्य है, किंतु यह भी उतना ही सत्य है कि वित्त वर्ष 2024-25 में प्रति व्यक्ति शुद्ध राष्ट्रीय आय (NNI) ₹1,14,710 रही — एक ऐसा आंकड़ा जो भारत की विशाल आबादी के जीवन स्तर की सीमाओं को उजागर करता है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तुलना और भी अधिक स्पष्ट हो जाती है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के अनुसार 2026 में भारत की नॉमिनल प्रति व्यक्ति आय लगभग $3,051 रहने का अनुमान है। क्रय शक्ति समानता (PPP) के आधार पर यह आंकड़ा $12,964 तक पहुँचता है, किंतु इसके बावजूद नॉमिनल प्रति व्यक्ति आय के मामले में भारत का वैश्विक स्थान 144वां है। यह रैंकिंग इस तथ्य की ओर संकेत करती है कि भारत की आर्थिक वृद्धि अभी भी औसत नागरिक की आय में पर्याप्त रूप से परिलक्षित नहीं हो पा रही है।

देश के भीतर आय की असमानता और भी गहरी है। गोवा, सिक्किम और महाराष्ट्र जैसे राज्य प्रति व्यक्ति आय में आगे हैं, जहाँ महाराष्ट्र की अनुमानित प्रति व्यक्ति आय ₹2.89 लाख तक पहुँचने वाली है। इसके विपरीत बिहार और उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य आज भी राष्ट्रीय औसत से काफी पीछे हैं। यह क्षेत्रीय असंतुलन भारत की आर्थिक संरचना की एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।

अब यदि तुलना अमेरिका से की जाए, तो अंतर लगभग खाई का रूप ले लेता है। IMF के अनुसार 2026 में अमेरिका की प्रति व्यक्ति नॉमिनल आय लगभग $92,880 (करीब ₹77.5 लाख) रहने का अनुमान है। अमेरिका दुनिया के शीर्ष 10 देशों में शामिल है, जहाँ औसत मासिक आय $5,000 और औसत घरेलू आय $78,538 के आसपास है। वहीं 2026 में अमेरिकी अर्थव्यवस्था की कुल जीडीपी $30.50 ट्रिलियन को पार करने की संभावना है। यह आंकड़े स्पष्ट करते हैं कि भारत और अमेरिका की तुलना केवल वस्तुओं की कीमत से नहीं, बल्कि आय और अवसरों की संरचना से होनी चाहिए।

सबसे चिंताजनक पहलू गरीबी का अंतर है। भारत में आज भी अनुमानतः लगभग 80 करोड़ लोग गरीबी रेखा के आसपास या नीचे जीवन यापन कर रहे हैं। अत्यधिक गरीबी — जहाँ प्रतिदिन की आय कुछ ही रुपयों तक सीमित है — में जीवन बिताने वाली आबादी करीब 12 प्रतिशत बताई जाती है। इसके विपरीत अमेरिका में गरीबी रेखा के नीचे रहने वालों की संख्या 10–12 प्रतिशत के आसपास है, लेकिन वहाँ गरीबी की परिभाषा ही $15,000 वार्षिक आय जैसे स्तर से जुड़ी है। यह तुलना बताती है कि प्रतिशत के आंकड़े समान दिख सकते हैं, पर जीवन की वास्तविक परिस्थितियाँ पूरी तरह अलग हैं।

अर्थशास्त्रियों की राय में भारत की समस्या केवल विकास दर नहीं, बल्कि आय असमानता, रोजगार की गुणवत्ता और वास्तविक क्रय शक्ति है। जब तक आर्थिक वृद्धि का लाभ समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक नहीं पहुँचेगा, तब तक समोसे और पेन जैसी तुलना केवल हकीकत से ध्यान भटकाने वाला शोर बनी रहेगी।

आज जरूरत इस बात की है कि भारत अपनी आर्थिक बहस को प्रतीकों और जुमलों से निकालकर आम आदमी की आय, रोजगार और जीवन स्तर पर केंद्रित करे। सवाल यह नहीं कि एक डॉलर में क्या मिलता है, सवाल यह है कि एक भारतीय की मेहनत की कीमत क्या है — और क्या वह उसे सम्मानजनक जीवन दे पा रही है या नहीं। यही बहस भारत को आगे ले जाएगी, बाकी सब केवल दिखावटी तर्क हैं।

दुर्ग।
छत्तीसगढ़ में सरकारी गोदामों से करोड़ों रुपये मूल्य के धान के कथित रूप से “मुसवा (चूहा)” द्वारा नष्ट किए जाने की घटनाओं ने प्रदेश की राजनीति में भूचाल ला दिया है। इस पूरे प्रकरण को लेकर कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए इसे किसानों की मेहनत और अन्नदाता के सम्मान के साथ खुला मज़ाक करार दिया है। कांग्रेस का आरोप है कि सरकार अपनी विफलताओं और भ्रष्टाचार से ध्यान भटकाने के लिए जिम्मेदारी चूहों पर डाल रही है, जबकि असल दोषी सत्ता में बैठे लोग और संरक्षण प्राप्त अधिकारी हैं।

जिला कांग्रेस कमेटी, दुर्ग (ग्रामीण) के जिलाध्यक्ष श्री राकेश ठाकुर ने कहा कि धान किसानों के पसीने, खून और वर्षों की मेहनत का परिणाम है। उसे “चूहा खा गया” कहना न केवल हास्यास्पद है, बल्कि यह भाजपा सरकार, उसके मंत्रियों और जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही, भ्रष्टाचार और मिलीभगत को उजागर करता है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि प्रदेश की जनता मानती है कि धान मुसवा ने नहीं, बल्कि भाजपा सरकार और उसके मंत्रियों ने हजम किया है।

इसी के विरोध में 20 जनवरी 2026, मंगलवार को कांग्रेस पार्टी द्वारा दुर्ग कलेक्टर कार्यालय के समक्ष एक लोकतांत्रिक, शांतिपूर्ण एवं प्रतीकात्मक प्रदर्शन आयोजित किया जाएगा। प्रदर्शन के दौरान भाजपा सरकार के खिलाफ अनोखे और तीखे प्रतीकों के माध्यम से जनाक्रोश व्यक्त किया जाएगा। छत्तीसगढ़ सरकार के मंत्रियों की प्रतीकात्मक “बारात” ढोल-नगाड़ों के साथ निकाली जाएगी, वहीं कार्यकर्ता मुसवा (चूहों) के मुखौटे पहनकर धान खिलाते हुए प्रतीकात्मक दृश्य प्रस्तुत करेंगे। इसका उद्देश्य जनता को यह संदेश देना है कि धान चूहों ने नहीं, बल्कि सत्ता में बैठे लोगों ने निगल लिया है।

कांग्रेस की मांग है कि इस पूरे धान घोटाले की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, दोषी अधिकारियों और मंत्रियों पर कड़ी कार्रवाई हो तथा किसानों के साथ हुए अन्याय का जवाब सरकार दे। प्रदर्शन के पश्चात दुर्ग कलेक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम प्रतीकात्मक रूप से “चूहा” सौंपकर ज्ञापन प्रस्तुत किया जाएगा।

इस संबंध में जिला कांग्रेस कमेटी द्वारा कलेक्टर दुर्ग को पूर्व में ज्ञापन सौंपकर कार्यक्रम की सूचना दी जा चुकी है। ज्ञापन सौंपते समय धीरज बाकलीवाल, नीता लोधी, देवेंद्र देशमुख, रिवेंद्र यादव, नंद कुमार सेन, आनंद ताम्रकार, गुरदीप भाटिया, मनीष बघेल, देवश्री साहू, धर्मेंद्र साहू, जीतू पटेल, हीरेन्द्र साहू, मोहित वालदे, सुनीत घोष, सौरभ ताम्रकार, भीमसेन, प्रीतम देशमुख सहित बड़ी संख्या में कांग्रेसजन उपस्थित रहे।

कांग्रेस संगठन के भीतर भी नई सक्रियता साफ दिखाई दे रही है। धीरज बाकलीवाल को अध्यक्ष बनाए जाने और युवाओं व नए चेहरों को ब्लॉक अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपे जाने से संगठन में नई ऊर्जा का संचार हुआ है। परिवारवाद से दूरी बनाते हुए कांग्रेस अब ज़मीनी मुद्दों पर आक्रामक रूप से सामने आ रही है। दुर्ग में कांग्रेस की बढ़ती सक्रियता को देखकर जनता भी अब उससे जनहित से जुड़े मुद्दों पर मुखर आवाज़ की उम्मीद कर रही है।

यह प्रदर्शन केवल एक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि किसानों के सम्मान, जवाबदेही और पारदर्शिता की लड़ाई का प्रतीक बनने जा रहा है।

नई दिल्ली | 

पाकिस्तान की ओर से लगातार हो रही ड्रोन घुसपैठ की कोशिशों को भारतीय सेना और सीमा सुरक्षा बल (BSF) ने निर्णायक कार्रवाई करते हुए पूरी तरह विफल कर दिया है। जनवरी 2026 के हालिया घटनाक्रमों से यह स्पष्ट हो गया है कि भारत की सीमाओं पर निगरानी और जवाबी क्षमता पहले से कहीं अधिक सशक्त हो चुकी है।

जम्मू-कश्मीर में ड्रोन गतिविधि, सेना सतर्क

11 से 15 जनवरी 2026 के बीच जम्मू-कश्मीर के राजौरी (नौशेरा, मंजकोट), पुंछ और सांबा (रामगढ़ सेक्टर) में कई संदिग्ध पाकिस्तानी ड्रोन देखे गए। भारतीय जवानों ने तुरंत मोर्चा संभालते हुए मशीनगनों से फायरिंग की और एंटी-ड्रोन (Anti-UAS) सिस्टम सक्रिय किया, जिसके बाद सभी ड्रोन पाकिस्तान अधिकृत क्षेत्र (PoK) की ओर वापस भागने पर मजबूर हो गए।

हथियारों की खेप बरामद

सुरक्षा बलों ने सांबा जिले में ड्रोन के जरिए गिराई गई हथियारों की खेप बरामद की। इसमें:

  • दो पिस्तौल

  • तीन मैगजीन

  • 16 राउंड गोलियां

  • एक हैंड ग्रेनेड
    शामिल हैं। इसे आतंकियों तक हथियार पहुँचाने की साजिश माना जा रहा है।

सेना प्रमुख का सख्त संदेश

थल सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने 13 जनवरी 2026 को बताया कि 9 जनवरी से अब तक 10 से 12 ड्रोन घुसपैठ की कोशिशें नाकाम की जा चुकी हैं। भारत ने इस गंभीर मुद्दे को पाकिस्तान के DGMO स्तर पर उठाते हुए इसे स्पष्ट रूप से ‘अस्वीकार्य’ करार दिया है।

पंजाब बॉर्डर पर BSF की निर्णायक कार्रवाई

दिसंबर 2025 में BSF ने अमृतसर और फिरोजपुर सेक्टर में तीन पाकिस्तानी ड्रोन मार गिराए थे, जिनके जरिए लगभग 2 किलोग्राम हेरोइन की तस्करी की जा रही थी। यह ड्रोन नेटवर्क के जरिए आतंक और नशे के गठजोड़ को उजागर करता है।

ऑपरेशन सिंदूर के बाद बौखलाया पाकिस्तान

सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि ये गतिविधियाँ मई 2025 में हुए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद पाकिस्तान की हताश प्रतिक्रिया हैं। उस ऑपरेशन में भारत ने सीमा पार स्थित आतंकी ठिकानों और रडार केंद्रों को ध्वस्त कर दिया था।

ड्रोन घुसपैठ के पीछे की मंशा

सेना और सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, पाकिस्तान ड्रोन का इस्तेमाल मुख्य रूप से:

  • आतंकियों तक हथियार और ड्रग्स पहुँचाने,

  • भारतीय सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी और कमजोरियाँ तलाशने,

  • तथा 26 जनवरी (गणतंत्र दिवस) से पहले अशांति फैलाने
    के लिए कर रहा है।

हाई अलर्ट पर सीमाएँ

वर्तमान में जम्मू-कश्मीर से लेकर पंजाब तक सभी सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा बल हाई अलर्ट पर हैं। आधुनिक एंटी-ड्रोन तकनीक, इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग और रियल-टाइम सर्विलांस के जरिए हर गतिविधि पर कड़ी नजर रखी जा रही है।

ड्रोन युद्ध के इस नए दौर में भारत ने स्पष्ट संदेश दे दिया है—सीमा पर हर साजिश का जवाब तुरंत, सटीक और निर्णायक होगा।

वॉशिंगटन | अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने 17 जनवरी 2025 को एक ऐतिहासिक और सर्वसम्मत (9-0) निर्णय में TikTok पर प्रतिबंध लगाने वाले संघीय कानून को संवैधानिक ठहराते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा…
दुर्ग। प्रदेश में मुख्यमंत्री द्वारा सुशासन के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं, लेकिन दुर्ग नगर पालिका निगम की ज़मीनी हकीकत इन दावों को चुनौती देती नजर आ रही है।…

मुंबई / शौर्यपथ विशेष रिपोर्ट

महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाले ‘महायुति’ गठबंधन ने अपनी निर्णायक ताकत साबित कर दी है। 15 जनवरी 2026 को संपन्न हुए 29 नगर निगम (महानगर पालिका) चुनावों के नतीजे 16 और 17 जनवरी को सामने आए और परिणामों ने साफ कर दिया कि शहरी महाराष्ट्र पर अब निर्णायक रूप से भगवा छाया हुआ है।

इन चुनावों में महायुति (BJP + एकनाथ शिंदे की शिवसेना + अजित पवार की NCP) ने राज्य के 29 में से 25 नगर निगमों में जीत का दावा करते हुए विपक्षी महाविकास आघाड़ी (MVA) को करारी शिकस्त दी है।

मुंबई: 30 साल बाद ठाकरे युग का अंत

देश के सबसे बड़े नगर निगम बृहन्मुंबई महानगर पालिका (BMC) में यह चुनाव ऐतिहासिक साबित हुआ।

227 सीटों वाले BMC में

भाजपा–शिंदे शिवसेना गठबंधन: 118 सीटें

भाजपा: 89

शिवसेना (शिंदे): 29

शिवसेना (उद्धव ठाकरे – UBT): 65 सीटें

कांग्रेस: 24 सीटें

इस परिणाम के साथ ही ठाकरे परिवार का करीब तीन दशक पुराना वर्चस्व समाप्त हो गया, जिसे राजनीतिक गलियारों में शहरी महाराष्ट्र की सबसे बड़ी सत्ता परिवर्तन की घटना माना जा रहा है।

पुणे–ठाणे–नागपुर: भाजपा और शिंदे का दबदबा

पुणे महानगर पालिका (PMC):

165 में से 123 सीटें जीतकर भाजपा ने स्पष्ट बहुमत हासिल किया।

ठाणे महानगर पालिका (TMC):

मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के गढ़ में महायुति ने 103 सीटें जीतीं, जिनमें से 75 सीटें अकेले शिवसेना (शिंदे) ने हासिल कीं।

नागपुर महानगर पालिका (NMC):

भाजपा ने 151 में से 97 सीटें जीतकर अपनी सत्ता बरकरार रखी।

अन्य प्रमुख नगर निगमों में भी महायुति की बढ़त

नवी मुंबई, कल्याण-डोंबिवली, नासिक, पनवेल जैसे महत्वपूर्ण शहरी निकायों में भी महायुति ने विपक्ष को पीछे छोड़ते हुए मजबूत बढ़त दर्ज की।

पार्टी-वार कुल सीटें (29 नगर निगम)

भारतीय जनता पार्टी (BJP): ~1,370–1,400 सीटें

शिवसेना (एकनाथ शिंदे): 397 सीटें

कांग्रेस: 324 सीटें

NCP (अजित पवार): 160 सीटें

शिवसेना (UBT): 153 सीटें

AIMIM (असदुद्दीन ओवैसी): 126 सीटें (विशेषकर छत्रपति संभाजीनगर में प्रभावी प्रदर्शन)

राजनीतिक संदेश साफ

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, ये नतीजे केवल नगर निगम चुनाव नहीं हैं, बल्कि

BJP की शहरी राजनीति पर मजबूत पकड़,

मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की वैधता,

और अजित पवार के साथ बने नए सत्ता समीकरण पर जनता की मुहर माने जा रहे हैं।

वहीं दूसरी ओर, उद्धव ठाकरे (SS-UBT) और शरद पवार गुट (NCP-SP) के लिए ये नतीजे गंभीर आत्ममंथन का संकेत हैं।

महाराष्ट्र के नगर निगम चुनाव 2026 ने यह स्पष्ट कर दिया है कि

“शहरी महाराष्ट्र में सत्ता का केंद्र अब पूरी तरह महायुति के हाथों में है।”

ये परिणाम न केवल राज्य की नगर सरकारों की दिशा तय करेंगे, बल्कि 2029 के विधानसभा और लोकसभा चुनावों की राजनीतिक पटकथा भी यहीं से लिखी जाती दिख रही है।

शौर्यपथ / धन लाभ, करियर उन्नति और व्यापार में सफलता के प्रबल योग शनिवार का दिन न्यायप्रिय शनिदेव को समर्पित होता है। आज शनि की…

भिलाई।
वाहेगुरु जी का खालसा, वाहेगुरु जी दी फतेह।
मानव सेवा और सामाजिक उत्तरदायित्व का अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत करते हुए यूथ सिख सेवा समिति, भिलाई ने कुरूद में दिवंगत प्रेम सिंह के अंतिम संस्कार में सहयोग कर मानवता की मिसाल कायम की।

प्राप्त जानकारी के अनुसार खुर्सीपार निवासी प्रेम सिंह अपनी बहन के निवास पर कुरूद गए हुए थे, जहाँ अचानक उनका निधन हो गया। दिवंगत के परिजनों में केवल उनकी बहन एवं एक छोटी पुत्री होने के कारण अंतिम संस्कार की समस्त प्रक्रिया के लिए परिवार को सहयोग की अत्यंत आवश्यकता थी। इस संवेदनशील स्थिति की सूचना हेल्पलाइन नंबर के माध्यम से यूथ सिख सेवा समिति भिलाई को प्राप्त हुई।

सूचना मिलते ही समिति के अध्यक्ष श्री इंद्रजीत सिंह ने मामले की गंभीरता को समझते हुए तत्काल संज्ञान लिया और निर्देश दिए कि शोकाकुल परिवार को हर संभव सहायता प्रदान की जाए। उनके मार्गदर्शन में समिति के सदस्य बिना विलंब किए कुरूद पहुँचे और परिवार के साथ खड़े रहकर अंतिम संस्कार की संपूर्ण प्रक्रिया में सक्रिय सहयोग किया।

यूथ सिख सेवा समिति के सदस्यों ने सेवा, समर्पण और करुणा के भाव से सामाजिक दायित्व का निर्वहन करते हुए यह संदेश दिया कि संकट की घड़ी में मानवता ही सबसे बड़ा धर्म है। इस सेवा कार्य में समिति के कोषाध्यक्ष श्री मलकित सिंह, डॉ. हरजींदर सिंह सहित अन्य सदस्य भी उपस्थित रहे।

स्थानीय नागरिकों एवं क्षेत्रवासियों ने यूथ सिख सेवा समिति भिलाई के इस मानवीय प्रयास की मुक्त कंठ से सराहना करते हुए इसे समाज के लिए प्रेरणादायी और अनुकरणीय बताया।

26 जनवरी को रायपुर में राज्यपाल तथा जगदलपुर में मुख्यमंत्री के आतिथ्य में विशेष कार्यक्रम

रायपुर /
छत्तीसगढ़ शासन के संस्कृति विभाग द्वारा राष्ट्रगीत वंदे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में राज्यभर में चार चरणों में विशेष कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। इसी क्रम में द्वितीय चरण के कार्यक्रम 19 से 26 जनवरी 2026 तक राज्य के समस्त जिलों में व्यापक जनभागीदारी के साथ आयोजित किए जाएंगे।

गणतंत्र दिवस 26 जनवरी को रायपुर में राज्यपाल तथा जगदलपुर में मुख्यमंत्री के आतिथ्य में विशेष राज्य स्तरीय कार्यक्रम आयोजित होंगे। इसके अतिरिक्त राज्य के सभी जिला मुख्यालयों, जनपद एवं ब्लॉक मुख्यालयों, ग्राम पंचायतों, स्कूलों और महाविद्यालयों में ध्वजारोहण एवं राष्ट्रगान के पश्चात सामूहिक वंदे मातरम् गायन का आयोजन किया जाएगा। इन कार्यक्रमों में मंत्रीगण, सांसद, विधायक, अन्य जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी, प्रबुद्धजन एवं नागरिकों की सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित की जाएगी।

द्वितीय चरण के अंतर्गत 19 से 26 जनवरी के दौरान राज्य के विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों में एनसीसी, एनएसएस, स्काउट एवं गाइड की सहभागिता से वंदे मातरम् से संबंधित संगीतमय प्रस्तुतियाँ, विशेष सभाएँ, निबंध प्रतियोगिता, वाद-विवाद, प्रश्नोत्तरी, पोस्टर निर्माण, रंगोली, चित्रकला तथा प्रदर्शनी जैसे विविध कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इसके साथ ही राज्य पुलिस बैंड द्वारा सार्वजनिक स्थलों पर वंदे मातरम् एवं देशभक्ति गीतों पर आधारित विशेष प्रस्तुतियाँ दी जाएंगी।

सार्वजनिक एवं निजी सहभागिता को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से प्रदेश में वंदे मातरम् ऑडियो-वीडियो बूथ स्थापित किए जाएंगे, जहाँ नागरिक अपनी आवाज़ में वंदे मातरम् का गायन रिकॉर्ड कर अभियान के पोर्टल पर अपलोड कर सकेंगे। पोर्टल पर पूर्व रिकॉर्डेड धुन के साथ गायन की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है।

उल्लेखनीय है कि प्रथम चरण का आयोजन 7 से 14 नवंबर 2025 के मध्य सफलतापूर्वक संपन्न किया जा चुका है। वहीं तृतीय चरण 7 से 15 अगस्त 2026 को हर घर तिरंगा अभियान के साथ संचालित किया जाएगा तथा चतुर्थ चरण का आयोजन 1 से 7 नवंबर 2026 के दौरान किया जाएगा।

भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के अनुरूप यह संपूर्ण आयोजन ग्राम पंचायत, जनपद, जिला एवं राज्य स्तर पर व्यापक जनभागीदारी के साथ संपन्न कराया जाएगा, जिसका मुख्य उद्देश्य नागरिकों में राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के प्रति भावनात्मक जुड़ाव तथा राष्ट्रभक्ति की भावना को और अधिक सुदृढ़ करना है।

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