Google Analytics —— Meta Pixel
May 21, 2026
Hindi Hindi
Uncategorised

Uncategorised (35921)

अन्य ख़बर

अन्य ख़बर (5926)

धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।

  शौर्यपथ राजनीतिक लेख। भारतीय राजनीति के इतिहास में दिल्ली की सत्ता का मोह बड़े-बड़े दिग्गजों के लिए 'मृगतृष्णा' साबित हुआ है। हालिया राजनीतिक घटनाक्रम इस बात का गवाह है कि जब-जब क्षेत्रीय क्षत्रपों ने देश की सबसे पुरानी पार्टी, कांग्रेस को दरकिनार कर खुद को 'विकल्प' के रूप में पेश करने की कोशिश की, तब-तब वक्त ने उन्हें कड़ा सबक सिखाया।

अरविंद केजरीवाल, नीतीश कुमार और ममता बनर्जी—ये तीन ऐसे नाम थे, जिनके पास अपनी-अपनी सल्तनत थी, लेकिन दिल्ली की लालसा ने उनके सियासी भूगोल को ही बदल कर रख दिया।

1. अरविंद केजरीवाल: 'सुपर सीएम' से 'जेल' और फिर कुर्सी गँवाने तक का सफर

आम आदमी पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल ने अपनी राजनीति की शुरुआत ही कांग्रेस के विरोध से की थी। पंजाब में जीत के बाद उनका सपना प्रधानमंत्री बनने का था। उन्होंने खुद को कांग्रेस का एकमात्र विकल्प घोषित किया, लेकिन दिल्ली की सत्ता और संगठन पर पकड़ ढीली होती गई। अंततः, भ्रष्टाचार के आरोपों और कानूनी पेचीदगियों के बीच उन्हें अपनी मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़नी पड़ी। कांग्रेस को 'अप्रासंगिक' बताने के चक्कर में वे खुद अपनी ही जमीन पर संघर्ष करते नजर आए।

2. नीतीश कुमार: 'पलटूराम' की छवि और पीएम बनने की अधूरी हसरत

बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में एक लंबी पारी खेलने वाले नीतीश कुमार ने जब 'इंडिया' (I.N.D.I.A.) गठबंधन की नींव रखी, तो उनके मन में दिल्ली के सिंहासन की छवि स्पष्ट थी। वे खुद को विपक्ष का चेहरा बनाना चाहते थे। लेकिन जब उन्हें लगा कि कांग्रेस उन्हें वह तवज्जो नहीं दे रही, तो उन्होंने फिर पाला बदला। आज स्थिति यह है कि वे सत्ता में तो हैं, लेकिन उस 'मुख्यमंत्री' की हैसियत और स्वायत्तता को खो चुके हैं, जिसके लिए वे जाने जाते थे। दिल्ली की दौड़ ने उन्हें उनके ही गढ़ में कमजोर कर दिया।

3. ममता बनर्जी: 'दीदी' का दिल्ली मिशन और थर्ड फ्रंट की नाकामी

बंगाल फतह करने के बाद ममता बनर्जी का अगला लक्ष्य 'थर्ड फ्रंट' के जरिए दिल्ली की कुर्सी थी। उन्होंने 'एकला चलो' की नीति अपनाई और कांग्रेस को बंगाल सहित पूरे देश में चुनौती दी। उनका दावा था कि कांग्रेस अब लड़ नहीं सकती। लेकिन ममता की इस जिद ने न केवल विपक्षी एकता में दरार डाली, बल्कि बंगाल के भीतर भी उनके वर्चस्व को हिलाकर रख दिया।

सियासत का कड़वा सच: कांग्रेस को नजरअंदाज करना भारी पड़ा

इन तीनों नेताओं के राजनीतिक हश्र से कुछ बड़े सबक सामने आते हैं:

अहंकार बनाम दूरदृष्टि: राजनीति में लोकप्रियता होना एक बात है, लेकिन देश की सबसे बड़ी पुरानी पार्टी के संगठनात्मक ढांचे और ऐतिहासिक उपस्थिति को नजरअंदाज करना एक रणनीतिक चूक है।

वोटों का बिखराव: कांग्रेस का विरोध करके इन नेताओं ने विपक्षी वोटों को ही बांटा, जिसका सीधा फायदा बीजेपी को मिला।

आईना दिखा गया वक्त: आज ये तीनों चेहरे अपनी पुरानी चमक खोते दिख रहे हैं। जो कांग्रेस को कमजोर मान रहे थे, आज वे खुद अपने राज्यों में अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं।

निष्कर्ष

सत्ता का सपना देखना गलत नहीं है, लेकिन राजनीति में 'दूरदृष्टि' का होना अनिवार्य है। जो देश की सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी को मिट्टी में मिलाने की कोशिश करते हैं, वक्त अक्सर उन्हें ही आईना दिखा देता है। 2026 के मुहाने पर खड़ी राजनीति चीख-चीख कर कह रही है— "कांग्रेस को नजरअंदाज करना आसान नहीं है।"

#सियासत #कांग्रेस #राजनीति_की_सच्चाई #विपक्ष_का_भविष्य

क्या आपको लगता है कि क्षेत्रीय दलों के लिए कांग्रेस के साथ मिलकर चलना ही एकमात्र विकल्प बचा है?

कोंडागांव- बस स्टैंड के स्थानंतरण के बाद कोंडागांव बस स्टैंड में टूरिज्म को मिलने लगा पैकिंग की सुविधाएं होटलों में होने लगी भीड़ ।

कोंडागांव कलेक्टर नूपुर राशि पन्ना का आदेश कामगार दिखाई देने लगा है नया बस स्टैंड चालू कराने व पुराना बस स्टैंड में बस प्रतिबंधित करने से अब पुराने बस स्टैंड में सुबह से ही रौनक देखने को मिल रही वाली अगर पूर्व की बात की जाए तो आए दिन बस हैकरों के द्वारा कार पार्किंग को लेकर गालीगलौज किया जाता था ।

आप को बतादे की नक्सलवाद खात्मे के बाद लोग बस्तर की संस्कृति व मन मोहन दृश्य से रूबरू होना चाहते है और कोंडागांव ही सबसे पहले का दरवाजा माना गया है ।

*क्या क्या है बस्तर में देखने के लिए*

केशकाल, छत्तीसगढ़ (कोंडागांव जिला) अपनी प्राकृतिक सुंदरता, ऐतिहासिक घाटियों और जलप्रपातों के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ के मुख्य आकर्षण टाटामारी इको पर्यटन केंद्र (बादलों का नज़ारा), प्रसिद्ध केशकाल घाटी (12 सर्पाकार मोड़), लिमदरहा जलप्रपात, और तेलीन सती माता मंदिर हैं। यह स्थान मानसून में और भी सुंदर हो जाता है।

जिसके बाद यहाँ से चित्रकूट जलप्रपात जो कोंडागांव से बहुत ही कम किलोमीटर में पहुँचा जा सकता है और वही से दंतेवाड़ा मंदिर माता दन्तेश्वरी के दर्शन के लिए पहुँचा जा सकता है औऱ इसलिए कोंडागांव को बस्तर के दरवाजा कहा जा सकता है ।

भिलाई: नगर पालिक निगम भिलाई के चुनाव की आहट जैसे-जैसे करीब आ रही है, वैसे-वैसे सत्ताधारी दल पर हमलावर होने के बजाय भाजपा के भीतर की 'अंदरूनी खींचतान' सड़कों पर नुमाया होने लगी है। सोमवार, 4 मई को निगम के सामने हुए जंगी प्रदर्शन में जो कुछ भी हुआ, उसने भिलाई भाजपा के भीतर पनप रही गुटबाजी और 'वर्चस्व की जंग' को सार्वजनिक कर दिया है।

कमिश्नर का नाम लेते ही 'खामोश' हुआ माइक

प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य महापौर नीरज पाल और कांग्रेस सरकार के भ्रष्टाचार को घेरना था, लेकिन सारा फोकस तब बदल गया जब भाजपा पार्षद संतोष मौर्या ने निगम कमिश्नर राजीव कुमार पांडेय पर निशाना साधा। हैरानी की बात यह रही कि किसी विरोधी दल ने नहीं, बल्कि अपनी ही पार्टी के एक विशेष नेता के निर्देश पर मौर्या का माइक बंद कर दिया गया।

यह घटना केवल एक माइक बंद होने की नहीं, बल्कि उस 'अदृश्य अंकुश' की ओर इशारा करती है, जो भाजपा के कुछ नेताओं का अधिकारियों के प्रति नरम रुख और अपने ही पार्षदों के प्रति कठोर नियंत्रण को दर्शाता है।

मीडिया को देख डैमेज कंट्रोल की कोशिश

जब जिलाध्यक्ष को इस बात का अहसास हुआ कि मीडिया के कैमरे इस पूरे घटनाक्रम को रिकॉर्ड कर रहे हैं और पार्टी की किरकिरी हो रही है, तब आनन-फानन में संतोष मौर्या को वापस बुलाया गया। हालांकि, तब तक तीर कमान से निकल चुका था। मंच पर ही पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के बीच का विरोधाभास और गुटबाजी का आलम साफ नजर आ रहा था।

पीयूष मिश्रा का कड़ा रुख और अंदरूनी अंतर्विरोध

एक तरफ संतोष मौर्या का माइक बंद किया गया, तो दूसरी तरफ भाजपा पार्षद पीयूष मिश्रा ने भी कमिश्नर पर सीधा हमला बोला। एक ही मंच पर एक ही अधिकारी के खिलाफ दो पार्षदों के लिए अलग-अलग पैमाना होना यह बताता है कि भिलाई भाजपा में 'पावर सेंटर' बंटे हुए हैं।

संगठन में 'वर्चस्व' की पुरानी बीमारी

यह पहली बार नहीं है जब भिलाई में भाजपा के भीतर गुटबाजी दिखी हो। हाल ही में:

BJYM नियुक्तियां: BJYM के ब्लॉक अध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर जिलाध्यक्ष और मंडल अध्यक्ष के बीच का टकराव अभी ठंडा भी नहीं हुआ था।

निकाय चुनाव का खतरा: आने वाले कुछ महीनों में भिलाई निगम के चुनाव होने वाले हैं। यदि गुटबाजी इसी तरह हावी रही, तो टिकट वितरण के समय 'गहमागहमी' और 'भितरघात' की संभावनाएं प्रबल हो जाएंगी।

निष्कर्ष: कांग्रेस से पहले अपनों से लड़ना होगा!

भिलाई में भाजपा के लिए यह आत्ममंथन का समय है। एक तरफ पार्टी भ्रष्टाचार के खिलाफ 'जंगी प्रदर्शन' का दावा कर रही है, तो दूसरी तरफ मंच पर ही अपनों की आवाज दबाई जा रही है। अगर नेतृत्व ने समय रहते इन 'गुटों' को एक सूत्र में नहीं पिरोया, तो निकाय चुनाव में कांग्रेस के भ्रष्टाचार से ज्यादा भाजपा की यह अंदरूनी 'जंग' उस पर भारी पड़ सकती है।

राजनीतिक गलियारों का बड़ा सवाल: > "क्या भिलाई भाजपा के कुछ नेता पर्दे के पीछे से अधिकारियों को बचा रहे हैं, या फिर यह केवल अपनी ही पार्टी के भीतर एक-दूसरे को नीचा दिखाने का खेल है?"

चेन्नई: तमिलनाडु की राजनीति के इतिहास में साल 2026 एक ऐसे मोड़ के रूप में दर्ज किया गया है, जिसने दशकों पुराने द्रविड़ियन किलों की दीवारों को हिलाकर रख दिया। अभिनेता से राजनेता बने विजय और उनकी पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) की इस अभूतपूर्व सफलता के पीछे पर्दे के पीछे खड़े जिस शख्स की सबसे ज्यादा चर्चा है, वह हैं— प्रशांत किशोर (PK)।

प्रशांत किशोर, जिन्होंने खुद को कभी औपचारिक रणनीतिकार नहीं बल्कि एक "शुभचिंतक" कहा, उन्होंने विजय की लोकप्रियता को एक ऐसी चुनावी मशीनरी में तब्दील कर दिया, जिसने DMK और AIADMK के पारंपरिक प्रभुत्व को ध्वस्त कर दिया।

1. अकेले लड़ने का साहसिक जुआ (The Solo Warrior Ethos)

पीके की सबसे महत्वपूर्ण सलाह थी— "गठबंधन के जाल से बाहर निकलना।" जहाँ नए दल अक्सर किसी बड़े खेमे का सहारा ढूंढते हैं, वहीं किशोर ने विजय को सभी 234 सीटों पर अकेले लड़ने का आत्मविश्वास दिया। उनका तर्क स्पष्ट था: यदि आप विकल्प बनना चाहते हैं, तो आपको पुराने विकल्पों से अलग दिखना होगा। इस रणनीति ने TVK को एक स्वतंत्र और स्वच्छ छवि प्रदान की।

2. फैन क्लब से कैडर तक का सफर

विजय के पास लाखों प्रशंसकों की फौज थी, लेकिन चुनाव रैलियों की भीड़ को वोटों में बदलना एक चुनौती थी। प्रशांत किशोर ने 'विजय मक्कल इयक्कम' (VMI) के उत्साही प्रशंसकों को अनुशासित बूथ-स्तरीय कैडर में बदल दिया। उन्होंने 'बूथ मैपिंग' और 'वोटर सेगमेंटेशन' जैसे आधुनिक औजारों का इस्तेमाल कर स्टारडम को एक जमीन पर काम करने वाली 'पॉलिटिकल मशीन' बना दिया।

3. 'द्रविड़ियन थकान' को भांपना और 'नया विकल्प' पेश करना

तमिलनाडु की जनता दशकों से दो दलों के बीच बारी-बारी से सत्ता का खेल देख रही थी। पीके ने इस "राजनीतिक थकान" को सही समय पर पहचाना। उन्होंने विजय को महज एक अभिनेता नहीं, बल्कि "तमिलनाडु की नई उम्मीद" के रूप में ब्रांड किया। रोजगार, शिक्षा और नशामुक्त तमिलनाडु जैसे ठोस मुद्दों पर आधारित रोडमैप ने युवाओं और तटस्थ मतदाताओं को टीवीके की ओर आकर्षित किया।

4. भविष्यवाणी जो हकीकत बनी

फरवरी 2025 में प्रशांत किशोर ने एक साहसी दावा किया था कि यदि विजय अकेले लड़ते हैं, तो वह तमिलनाडु जीत सकते हैं। उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा था कि— "विजय को जिताने के बाद मैं तमिलनाडु में महेंद्र सिंह धोनी से भी ज्यादा लोकप्रिय बिहारी बन जाऊंगा।" आज, मई 2026 के चुनावी नतीजों ने इस भविष्यवाणी पर मुहर लगा दी है। भले ही पीके बिहार में अपनी पार्टी 'जन सुराज' में व्यस्त रहे, लेकिन उनके द्वारा खींची गई शुरुआती लकीर ही जीत का मार्ग बनी।

निष्कर्ष: एक नए युग का सूत्रपात

प्रशांत किशोर के रणनीतिक मार्गदर्शन और विजय के करिश्माई नेतृत्व के मेल ने यह साबित कर दिया कि सही माइक्रो-मोबिलाइजेशन और स्पष्ट नैरेटिव के साथ किसी भी राजनीतिक दुर्ग को जीता जा सकता है। 2026 की यह जीत केवल एक सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि तमिलनाडु की राजनीति में एक नए 'कल्ट' के उदय की कहानी है।

मुख्य बिंदु (Quick Highlights):

रणनीति: सभी 234 सीटों पर बिना गठबंधन के चुनाव लड़ना।

बदलाव: फैन क्लब को बूथ-स्तर की चुनावी मशीनरी में तब्दील करना।

एजेंडा: शिक्षा, स्वास्थ्य और भ्रष्टाचार मुक्त शासन पर ध्यान।

परिणाम: तमिलनाडु की राजनीति में दशकों बाद एक तीसरे ध्रुव का पूर्ण उदय।

चेन्नई /
तमिलनाडु की सियासत में आज एक ऐसा सूर्योदय हुआ है जिसने पिछले पांच दशकों से चले आ रहे 'द्रविड़ियन' समीकरणों को जड़ से हिला दिया है। सिल्वर स्क्रीन पर अपनी एक मुस्कान से करोड़ों दिलों को धड़कने वाले जोसेफ विजय चंद्रशेखर, जिन्हें दुनिया 'थलपति' के नाम से जानती है, अब रील लाइफ के 'कमांडर' से रियल लाइफ के 'किंग' बन चुके हैं। उनकी नवनिर्मित पार्टी तमिलगा वेट्री कज़गम (TVK) ने 2026 के विधानसभा चुनावों में वह कर दिखाया है जिसे कल तक राजनीतिक पंडित 'असंभव' मान रहे थे।
चुनावी आँकड़े: 'विजयरथ' की अविश्वसनीय रफ्तार
234 सीटों वाली तमिलनाडु विधानसभा में बहुमत का जादुई आंकड़ा 118 है। ताजा परिणामों ने राज्य को चौंका दिया है:
TVK की सुनामी: विजय की पार्टी 108 (107-109) सीटों के साथ सबसे बड़े दल के रूप में उभरी है।
दिग्गजों का पतन: सबसे बड़ा उलटफेर कोलथुर सीट पर हुआ, जहाँ TVK के नवागंतुक वी.एस. बाबू ने मौजूदा मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन को हराकर द्रविड़ राजनीति के सबसे बड़े स्तंभ को हिला दिया।
पेरम्बूर से विजय की हुंकार: स्वयं विजय ने पेरम्बूर सीट से DMK के कद्दावर नेता आर.डी. शेखर को भारी मतों के अंतर से शिकस्त देकर अपनी राजनीतिक स्वीकार्यता पर मुहर लगा दी है।
एक सितारे का 'राजनेता' में रूपांतरण
विजय का उदय कोई संयोग नहीं, बल्कि 15 वर्षों की सोची-समझी रणनीति का परिणाम है:
जमीनी नींव (2009-2021): विजय ने अपने प्रशंसक क्लबों (VMI) को केवल फिल्म प्रचार तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उन्हें जनकल्याण के औजार में बदला। 2021 के स्थानीय चुनावों में मिली जीत ने ही संकेत दे दिया था कि 'थलपति' की सेना तैयार है।
सिनेमा का त्याग: फरवरी 2024 में TVK की घोषणा के साथ विजय ने अपने करियर के चरम पर फिल्मों से संन्यास लेने का साहसी फैसला किया, जिसने जनता को संदेश दिया कि वे राजनीति में 'पार्ट-टाइम' नहीं बल्कि पूर्णतः समर्पित सेवक के रूप में आए हैं।
वैचारिक त्रिकोण: विजय ने अपनी राजनीति को अम्बेडकर, पेरियार और कामराज के सिद्धांतों पर टिकाया है। सामाजिक न्याय, धर्मनिरपेक्षता और भ्रष्टाचार मुक्त शासन के वादे ने युवाओं और महिलाओं को सबसे ज्यादा आकर्षित किया।
भविष्य की राह: क्या 'किंगमेकर' बनेंगे 'किंग'?
यद्यपि TVK बहुमत के आंकड़े (118) से मात्र 10 सीटें दूर है, लेकिन सबसे बड़ा दल होने के नाते सत्ता की चाबी विजय के हाथ में ही है।
विश्लेषकों का मानना है: "विजय अब राज्य के निर्विवाद केंद्र बिंदु हैं। कांग्रेस और अन्य छोटे दलों के साथ गठबंधन की संभावनाओं के बीच, यह लगभग तय है कि तमिलनाडु के अगले मुख्यमंत्री के रूप में जोसेफ विजय चंद्रशेखर शपथ लेंगे।"


निष्कर्ष:
एम.जी. रामचंद्रन (MGR) और जयललिता के बाद, विजय तीसरे ऐसे अभिनेता बने हैं जिन्होंने तमिलनाडु की जनता के सर पर अपनी लोकप्रियता का जादू इस कदर चलाया है। यह जीत केवल एक पार्टी की जीत नहीं, बल्कि तमिलनाडु की राजनीति में एक नए 'तीसरे ध्रुव' का उदय है।
तमिलनाडु अब एक नए नेतृत्व की ओर देख रहा है। क्या थलपति अपनी फिल्मों की तरह राज्य की समस्याओं का 'क्लाइमेक्स' बदल पाएंगे? पूरी दुनिया की नजरें अब चेन्नई के 'विजय निवास' पर टिकी हैं।

  रायपुर / शौर्यपथ / सुशासन तिहार के अंतर्गत ग्राम सरोधी में आयोजित चौपाल में शासन की संवेदनशीलता और त्वरित कार्यवाही का एक भावनात्मक उदाहरण सामने आया। सरोधी की रहने वाली सरलाबाई मरावी ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के समक्ष अपनी समस्या रखी और कुछ ही पलों में उसका समाधान भी मिल गया।
सरलाबाई मरावी, पति लल्लूराम मरावी, एक साधारण कृषक परिवार से हैं। उनके पास लगभग 5 एकड़ कृषि भूमि है और परिवार में उनका एक बेटा है। खेती ही उनके जीवनयापन का मुख्य साधन है।
चौपाल के दौरान सरलाबाई ने बताया कि उन्होंने एक माह पहले किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) के तहत 1.50 लाख रुपए के ऋण के लिए आवेदन किया था, लेकिन अब तक स्वीकृति नहीं मिली थी। मुख्यमंत्री ने जैसे ही यह बात सुनी, उन्होंने मौके पर ही अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए और तुरंत निराकरण सुनिश्चित कराया।
अपनी समस्या का त्वरित समाधान होते देख सरलाबाई भावुक हो उठीं। उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद नहीं थी कि उनकी बात इतनी जल्दी सुनी जाएगी और समाधान भी मिल जाएगा। उनकी आंखों में संतोष और चेहरे पर राहत साफ झलक रही थी।
सरलाबाई ने यह भी बताया कि उन्हें महतारी वंदन योजना के तहत नियमित आर्थिक सहायता मिल रही है, जिससे घरेलू खर्चों में सहारा मिलता है।
उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि आज उन्हें महसूस हुआ कि सरकार वास्तव में गांव-गांव तक पहुंचकर लोगों की समस्याएं सुन रही है और उनका समाधान कर रही है।
ग्राम सरोधी की यह घटना इस बात का सजीव प्रमाण है कि सुशासन तिहार केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि आम लोगों के जीवन में भरोसा और राहत लेकर आने वाली पहल बन चुका है।

बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के 10वीं-12वीं के मेधावी विद्यार्थियों का किया सम्मान

रायपुर /मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले मेधावी छात्र-छात्राओं को सम्मानित किया। इस अवसर पर आयोजित सम्मान समारोह में मुख्यमंत्री श्री साय ने विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए हौसला बुलंद रखना सबसे आवश्यक है।

बलरामपुर स्थित सर्किट हाउस में आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री श्री साय ने विद्यार्थियों से आत्मीय संवाद किया और उनके भविष्य के लक्ष्यों के बारे में जानकारी ली। अधिकांश विद्यार्थियों ने डॉक्टर और इंजीनियर बनने की इच्छा व्यक्त की, वहीं कुछ ने भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) और न्यायिक सेवा में जाने का संकल्प व्यक्त किया।

मुख्यमंत्री श्री साय ने विद्यार्थियों के सपनों की सराहना करते हुए कहा कि सपना देखना और उसे लक्ष्य में बदलकर निरंतर प्रयास करना ही सफलता की कुंजी है।
उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि यदि समर्पण, अनुशासन और आत्मविश्वास के साथ मेहनत की जाए, तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं है। उन्होंने आश्वस्त किया कि राज्य सरकार विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य के निर्माण के लिए हर संभव सहयोग प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने इस उपलब्धि के लिए विद्यार्थियों के अभिभावकों एवं शिक्षकों को भी बधाई देते हुए कहा कि बच्चों की सफलता के पीछे उनके मार्गदर्शन, सहयोग और त्याग की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

उत्कृष्ट विद्यार्थियों को मुख्यमंत्री से मिलने का मिला अवसर

इस अवसर पर जिले के कक्षा 12वीं के मेधावी विद्यार्थियों में वाड्रफनगर विकासखंड के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय करमडीहा की कुमारी प्रतिभा गुप्ता, रामचंद्रपुर के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय जामवंतपुर की कुमारी स्नेहा कुशवाहा, शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय सनवाल के सोनू, वाड्रफनगर के श्री कृष्णा, आदर्श हायर सेकंडरी विद्यालय बलंगी की कुमारी प्रिया लता कश्यप तथा शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बर्तीकला के अजय गुप्ता, कक्षा 10वीं के मेधावी विद्यार्थियों में शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय जामवंतपुर के आर्यन गुप्ता, नेशनल पब्लिक इंग्लिश मीडियम हायर सेकेंडरी स्कूल रजखेता की कुमारी आराधना पटेल, शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय रघुनाथनगर की कुमारी रोशनी कांशी, स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालय सेमरा कुसमी की आलिया परवीन तथा स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालय रामानुजगंज की आरजू परवीन को मुख्यमंत्री से मिलने और मार्गदर्शन प्राप्त करने का अवसर मिला।

रायपुर/कवर्धा।
सुशासन तिहार के तहत मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कबीरधाम जिले के पंडरिया विकासखंड अंतर्गत लोखान पंचायत के आश्रित बैगा बाहुल्य ग्राम कमराखोल में आम के पेड़ के नीचे चौपाल लगाकर ग्रामीणों से सीधा संवाद किया। इस दौरान उन्होंने पीएम जनमन योजना सहित विभिन्न कार्यों का निरीक्षण कर योजनाओं की जमीनी प्रगति जानी।
चौपाल में बड़ी संख्या में उपस्थित स्व-सहायता समूह की महिलाओं—‘लखपति दीदियों’—की आर्थिक प्रगति देखकर मुख्यमंत्री ने प्रसन्नता जताई और उन्हें आगे और मेहनत कर “करोड़पति बनने” की दिशा में बढ़ने के लिए प्रेरित किया। गांव में 58 लखपति दीदियां विभिन्न आजीविका गतिविधियों से जुड़कर आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश कर रही हैं। महिलाओं ने महुआ, चार और सब्जियां भेंट कर अपनी आत्मीयता व्यक्त की।
संवाद के दौरान मुख्यमंत्री ने महतारी वंदन, पीएम आवास और बिहान योजना जैसे कार्यक्रमों के लाभार्थियों से चर्चा कर फीडबैक लिया। उन्होंने पाया कि दूरस्थ अंचलों तक योजनाओं का लाभ पहुंच रहा है।
चौपाल में एक भावनात्मक क्षण तब आया जब एक महिला ने अपने नवजात शिशु का नामकरण करने का आग्रह किया। मुख्यमंत्री ने बच्चे का नाम “रविशंकर बघेल” रखा और आशीर्वाद स्वरूप राशि प्रदान की, जिस पर चौपाल तालियों से गूंज उठा।
इस दौरान मेधावी विद्यार्थियों को भी प्रोत्साहित किया गया। 94.5% अंक प्राप्त करने वाले छात्र राजेंद्र मसराम और कक्षा 9वीं की छात्रा हेम कुमारी को मुख्यमंत्री ने शुभकामनाएं देते हुए आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
ग्रामीणों की मांग पर मुख्यमंत्री ने कमराखोल में सामुदायिक भवन, रामखिलावन के घर से देवसरा तक लगभग 6 किमी मिट्टी-मुरुम सड़क, मुक्तिधाम शेड, महतारी सदन तथा मिशन तालाब गहरीकरण (ट्यूबवेल सहित) की घोषणाएं कीं।
चौपाल में मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार, विशेष सचिव रजत बंसल, कलेक्टर गोपाल वर्मा, पुलिस अधीक्षक धर्मेंद्र सिंह सहित अन्य अधिकारी और ग्रामीण उपस्थित रहे।

कवर्धा । शौर्यपथ
सुशासन तिहार के तहत कबीरधाम जिले के ग्राम लोखान में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने निर्माणाधीन पंचायत भवन का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान वे सीधे श्रमिकों के बीच पहुंचे और कार्यों की समीक्षा के साथ योजनाओं के क्रियान्वयन की जमीनी स्थिति का फीडबैक लिया।
निरीक्षण के दौरान महिला श्रमिकों ने मुख्यमंत्री को दोपहर के भोजन के लिए आमंत्रित किया, जिसे उन्होंने स्वीकार करते हुए उनके साथ जमीन पर बैठकर भोजन किया। श्रमिकों द्वारा लाए गए पारंपरिक व्यंजन—बोरे बासी, रोटी, चना भाजी, चरोटा भाजी, मुनगा बड़ी और आम की चटनी—का उन्होंने स्वाद लिया।
भोजन के दौरान मुख्यमंत्री ने महतारी वंदन योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना सहित अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थियों से जानकारी ली। श्रमिक महिलाओं ने अपने अनुभव साझा किए, जिससे योजनाओं के क्रियान्वयन की वास्तविक स्थिति सामने आई।
गांव की समस्याओं पर चर्चा के दौरान महिलाओं ने पेयजल संकट की ओर ध्यान दिलाया। इस पर मुख्यमंत्री ने मौके पर ही कलेक्टर से जानकारी लेकर निर्देश दिए कि 26 गांवों के लिए प्रस्तावित पेयजल योजना को शीघ्र स्वीकृति देकर क्रियान्वित किया जाए, ताकि ग्रामीणों को समय पर राहत मिल सके।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि शासन की प्राथमिकता है कि योजनाओं का लाभ प्रभावी रूप से आमजन तक पहुंचे और स्थानीय समस्याओं का समाधान समयबद्ध तरीके से किया जाए।

 कोलकाता/रायपुर / शौर्यपथ /
भाजपा प्रदेश मंत्री जितेन्द्र वर्मा ने पश्चिम बंगाल, असम और पुडुचेरी में पार्टी की जीत को “विकास, स्थिरता और पारदर्शिता के पक्ष में स्पष्ट जनादेश” बताया। उन्होंने कहा कि यह सफलता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की रणनीति और राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के मार्गदर्शन का परिणाम है।
वर्मा ने बताया कि उन्होंने जनवरी से मई 2026 तक दुर्गापुर पश्चिम विधानसभा क्षेत्र में प्रवास कर बूथ मैनेजमेंट से लेकर जनसंपर्क तक सक्रिय भूमिका निभाई। प्रदेश महामंत्री (संगठन) पवन साय के सानिध्य में कार्य करते हुए उन्होंने कई क्षेत्रों में संगठन को मजबूत किया।
उन्होंने पश्चिम बंगाल में जीत को “भय और हिंसा के माहौल के विरुद्ध लोकतांत्रिक साहस की जीत” बताया, जहां मतदाताओं ने निडर होकर अपने अधिकार का प्रयोग किया। असम और पुडुचेरी के परिणामों को उन्होंने डबल इंजन सरकार के विकास मॉडल की स्वीकार्यता बताया।
वर्मा ने कहा कि यह विजय समर्पित कार्यकर्ताओं के परिश्रम को समर्पित है और “सबका साथ, सबका विकास” के संकल्प पर जनता के विश्वास की पुनर्पुष्टि है।

हमारा शौर्य

हमारे बारे मे

whatsapp-image-2020-06-03-at-11.08.16-pm.jpeg
 
CHIEF EDITOR -  SHARAD PANSARI
CONTECT NO.  -  8962936808
EMAIL ID         -  shouryapath12@gmail.com
Address           -  SHOURYA NIWAS, SARSWATI GYAN MANDIR SCHOOL, SUBHASH NAGAR, KASARIDIH - DURG ( CHHATTISGARH )
LEGAL ADVISOR - DEEPAK KHOBRAGADE (ADVOCATE)