January 22, 2026
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धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।

दुर्ग / रायपुर। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले का कुख्यात गुटखा कारोबारी गुरमुख जुमनानी, जिसे प्रदेश में ‘गुटखा किंग’ के नाम से जाना जाता है, एक बार फिर कानून के शिकंजे…

संभल / लखनऊ।

   संभल में नवंबर 2024 की जामा मस्जिद सर्वे हिंसा से जुड़े बहुचर्चित मामले में न्यायपालिका ने बड़ा और दूरगामी असर डालने वाला आदेश दिया है। चंदौसी स्थित मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) विभांशु सुधीर की अदालत ने 13 जनवरी 2026 को तत्कालीन क्षेत्राधिकारी अनुज चौधरी (वर्तमान में एएसपी), इंस्पेक्टर अनुज तोमर तथा 15–20 अन्य अज्ञात पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश जारी किया है।

24 वर्षीय युवक को गोली लगने का आरोप

यह आदेश यामीन, निवासी खग्गू सराय अंजुमन, की याचिका पर दिया गया है। याचिकाकर्ता का आरोप है कि 24 नवंबर 2024 को संभल की जामा मस्जिद के सर्वे के दौरान भड़की हिंसा के समय उनका 24 वर्षीय बेटा आलम, जो बिस्कुट और रस बेचने घर से निकला था, को पुलिस द्वारा कथित रूप से गोली मारी गई। गोली लगने से आलम गंभीर रूप से घायल हो गया था।

याचिका में दावा किया गया है कि युवक हिंसा में शामिल नहीं था, इसके बावजूद पुलिस ने उस पर फायरिंग की।

अखिलेश यादव का भाजपा पर हमला

कोर्ट के आदेश के बाद इस मामले ने राजनीतिक रंग भी पकड़ लिया है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि यह आदेश पुलिस अधिकारियों के लिए चेतावनी है। उन्होंने टिप्पणी करते हुए कहा—

“अब कोई बचाने नहीं आएगा। भाजपा का फॉर्मूला है—पहले इस्तेमाल करो, फिर बर्बाद करो।”

पुलिस ने आदेश मानने से किया इनकार

वहीं, संभल पुलिस प्रशासन ने इस न्यायिक आदेश को मानने से फिलहाल इनकार कर दिया है। संभल के पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार बिश्नोई ने अदालत के आदेश को “अवैध” बताते हुए कहा कि इस पूरे मामले की न्यायिक जांच पहले ही पूरी हो चुकी है, जिसमें पुलिस को क्लीन चिट दी जा चुकी है।

एसपी ने स्पष्ट किया कि पुलिस इस आदेश को ऊपरी अदालत में चुनौती देगी

हिंसा की पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि 24 नवंबर 2024 को संभल में जामा मस्जिद के सर्वे के दौरान हिंसा भड़क गई थी। इस दौरान पत्थरबाजी और गोलीबारी की घटनाएं सामने आई थीं, जिसमें 5 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि कई पुलिसकर्मी और नागरिक घायल हुए थे। यह मामला प्रदेश भर में कानून-व्यवस्था और पुलिस कार्रवाई को लेकर लंबे समय तक चर्चा में रहा।

कानूनी और प्रशासनिक टकराव

इस प्रकरण में अब न्यायपालिका के आदेश और पुलिस प्रशासन के रुख के बीच स्पष्ट टकराव नजर आ रहा है। आने वाले दिनों में यह मामला न केवल कानूनी बल्कि राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर भी बड़ा मुद्दा बनने की संभावना जता रहा है।

नई दिल्ली।
भारत–चीन संबंधों में तनाव के दौर के बीच राजनीतिक संवाद की दिशा में एक अहम घटनाक्रम सामने आया है। 12 जनवरी 2026 को चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (CPC) के एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने नई दिल्ली स्थित भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) मुख्यालय का दौरा किया और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक की।

चीनी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व सन हैयान ने किया

चीनी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व CPC के अंतरराष्ट्रीय विभाग (IDCPC) की उप-मंत्री सन हैयान (Sun Haiyan) ने किया। बैठक में भारत में चीन के राजदूत जू फीहोंग (Xu Feihong) भी उपस्थित रहे। इस मुलाकात को कूटनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, खासकर 2020 के गलवान संघर्ष के बाद दोनों देशों के बीच संबंधों में आई तल्खी के संदर्भ में।

भाजपा की ओर से अरुण सिंह और विजय चौथाईवाले शामिल

भाजपा की ओर से राष्ट्रीय महासचिव अरुण सिंह और विदेश मामलों के विभाग के प्रभारी विजय चौथाईवाले ने प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की। बैठक के दौरान दोनों राजनीतिक दलों के बीच संवाद और संपर्क बढ़ाने (Inter-party Communication) के उपायों पर चर्चा की गई।

भाजपा नेताओं ने इसे औपचारिक, संस्थागत और पारदर्शी संवाद बताते हुए कहा कि राजनीतिक दलों के बीच बातचीत अंतरराष्ट्रीय संबंधों को बेहतर समझने में सहायक होती है।

RSS और अन्य दलों से भी मुलाकात

अपने भारत दौरे के दौरान चीनी प्रतिनिधिमंडल ने 13 जनवरी 2026 को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले से भी मुलाकात की। इसके अलावा प्रतिनिधिमंडल ने कांग्रेस के विदेश विभाग के प्रमुख सलमान खुर्शीद तथा वामपंथी दलों के नेताओं से भी अलग-अलग बैठकें कीं।

कांग्रेस ने भाजपा पर लगाया ‘दोगलेपन’ का आरोप

इस मुलाकात को लेकर मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। कांग्रेस नेताओं ने भाजपा पर “दोगलापन” का आरोप लगाते हुए कहा कि एक ओर चीन को लेकर सख्त बयान दिए जाते हैं, वहीं दूसरी ओर पार्टी स्तर पर बैठकें की जा रही हैं। कांग्रेस ने बैठक के एजेंडे और चर्चा के बिंदुओं को सार्वजनिक करने की मांग की है।

भाजपा का जवाब

भाजपा ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यह बैठक किसी गुप्त एजेंडे के तहत नहीं बल्कि राजनीतिक दलों के बीच सामान्य कूटनीतिक संवाद का हिस्सा थी। पार्टी का कहना है कि संवाद से पीछे हटना समाधान नहीं है और ऐसे संपर्क वैश्विक राजनीति में सामान्य प्रक्रिया हैं।

राजनीतिक और कूटनीतिक मायने

विशेषज्ञों के अनुसार, यह बैठक ऐसे समय हुई है जब भारत–चीन संबंध अभी भी पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं। ऐसे में यह संवाद भविष्य की कूटनीतिक दिशा, राजनीतिक संदेश और आंतरिक राजनीति—तीनों स्तरों पर महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

नई दिल्ली/कोलकाता।
प्रवर्तन निदेशालय (ED) और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बीच चल रहा कानूनी टकराव अब देश की शीर्ष अदालत तक पहुंच चुका है। 14 और 15 जनवरी 2026 को कलकत्ता उच्च न्यायालय और सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई ने इस विवाद को संवैधानिक, प्रशासनिक और राजनीतिक संकट के रूप में स्थापित कर दिया है।


कलकत्ता हाई कोर्ट: TMC की याचिका खारिज, ED ने लगाए गंभीर आरोप

14 जनवरी 2026 को कलकत्ता उच्च न्यायालय में तृणमूल कांग्रेस (TMC) की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई हुई। याचिका में मांग की गई थी कि I-PAC कार्यालय पर छापेमारी के दौरान जब्त किए गए पार्टी के संवेदनशील चुनावी डेटा को सुरक्षित रखा जाए।

हालांकि, ED के वकील ने अदालत को स्पष्ट किया कि छापेमारी के दौरान कोई भी डेटा या दस्तावेज जब्त नहीं किया गया। इस बयान के बाद न्यायमूर्ति सुभ्रा घोष ने TMC की याचिका को निपटा दिया।

इसी सुनवाई के दौरान ED ने अभूतपूर्व और गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि कोयला तस्करी मामले की जांच के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी स्वयं I-PAC कार्यालय पहुंचीं और जांच से जुड़े अहम सबूत—एक लैपटॉप और एक ‘हरा फोल्डर’—अपने साथ ले गईं।

ED ने इसे जांच में प्रत्यक्ष हस्तक्षेप बताते हुए मुख्यमंत्री और राज्य के शीर्ष पुलिस अधिकारियों के खिलाफ CBI जांच की मांग की। लेकिन, चूंकि इसी विषय पर ED पहले ही सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा चुकी थी, इसलिए हाई कोर्ट ने अपनी कार्यवाही स्थगित कर दी।


सुप्रीम कोर्ट: FIR पर रोक, CCTV फुटेज सुरक्षित रखने का आदेश

15 जनवरी 2026 को मामला सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के लिए आया। न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ ने इस मामले को “अत्यंत गंभीर” करार दिया।

शीर्ष अदालत ने—

  • मुख्यमंत्री ममता बनर्जी,

  • पश्चिम बंगाल सरकार,

  • पुलिस महानिदेशक (DGP) और

  • कोलकाता पुलिस कमिश्नर

को नोटिस जारी करते हुए दो सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।

साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल पुलिस द्वारा ED अधिकारियों के खिलाफ दर्ज सभी FIR पर तत्काल अंतरिम रोक लगा दी और स्पष्ट किया कि अगली सुनवाई तक ED अधिकारियों के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं होगी।

कोर्ट ने राज्य सरकार को यह भी आदेश दिया कि 8 जनवरी 2026 को I-PAC कार्यालय और उसके आसपास की सभी CCTV फुटेज व इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड सुरक्षित रखे जाएं, ताकि सबूतों से किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ न हो।


अदालत की कड़ी टिप्पणियाँ

सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि—

“केंद्रीय जांच एजेंसियों के काम में राज्य एजेंसियों का हस्तक्षेप अराजकता (lawlessness) की स्थिति पैदा कर सकता है।”

ED की ओर से अदालत में कहा गया कि यह मामला केवल ‘दखल’ का नहीं, बल्कि मुख्यमंत्री द्वारा की गई ‘चोरी’ और ‘डकैती’ का है, क्योंकि वह सशस्त्र पुलिस बल के साथ जांच में बाधा डालने पहुंचीं।

वहीं, मुख्यमंत्री की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने दलील दी कि ममता बनर्जी वहां पार्टी के गोपनीय और संवेदनशील डेटा की सुरक्षा के लिए गई थीं और ED की कार्रवाई दुर्भावनापूर्ण व राजनीतिक रूप से प्रेरित है।


अब क्या तय करेगा सुप्रीम कोर्ट?

सुप्रीम कोर्ट अब इस मूल प्रश्न पर विचार करेगा कि—

  • क्या किसी मुख्यमंत्री का छापेमारी स्थल पर पहुंचना,

  • और वहां से कथित रूप से दस्तावेज ले जाना,
    कानूनी रूप से “जांच में बाधा” और आपराधिक कृत्य की श्रेणी में आता है या नहीं।

मामले की अगली सुनवाई 3 फरवरी 2026 को निर्धारित की गई है।


राजनीतिक और संवैधानिक मायने

यह मामला केवल कानून तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह केंद्र बनाम राज्य, संवैधानिक मर्यादा, और जांच एजेंसियों की स्वतंत्रता जैसे मुद्दों पर भी बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है। आने वाली सुनवाई देश की राजनीति और संघीय ढांचे के लिए दूरगामी प्रभाव डाल सकती है।

27% ओबीसी आरक्षण सहित 28 सूत्रीय मांगों पर ओबीसी महासभा जिला इकाई दुर्ग का ज्ञापन

दुर्ग/पाटन।
अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के सामाजिक, शैक्षणिक एवं आर्थिक हितों के संरक्षण एवं संवर्धन के उद्देश्य से ओबीसी महासभा जिला इकाई दुर्ग द्वारा एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए माननीय मुख्यमंत्री छत्तीसगढ़ शासन के नाम ज्ञापन सौंपा गया।

यह ज्ञापन प्रदेश अध्यक्ष ओबीसी महासभा श्री राधेश्याम साहू के निर्देशानुसार, माननीय तहसीलदार महोदय पाटन के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। ज्ञापन में छत्तीसगढ़ राज्य में लंबित 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण को तत्काल प्रभाव से लागू करने सहित कुल 28 बिंदुओं पर आधारित मांगें रखी गईं।


जनकल्याणकारी योजनाओं में समानुपातिक हिस्सेदारी की मांग

ज्ञापन में यह प्रमुख रूप से उल्लेख किया गया कि अन्य पिछड़ा वर्ग को केंद्र एवं राज्य शासन की सभी जनकल्याणकारी योजनाओं में उनकी जनसंख्या के अनुपात में समुचित हिस्सेदारी प्रदान की जाए, जिससे सामाजिक न्याय की अवधारणा को साकार किया जा सके।


इनके नाम रहा संबोधित ज्ञापन

ज्ञापन की प्रतिलिपि—

  • माननीय प्रधानमंत्री भारत सरकार,

  • माननीय गृह मंत्री भारत सरकार,

  • माननीय मुख्यमंत्री छत्तीसगढ़ शासन, तथा

  • महामहिम राज्यपाल छत्तीसगढ़

के नाम भी प्रेषित की गई है।


कार्यक्रम में प्रमुख रूप से उपस्थित

इस अवसर पर ओबीसी महासभा जिला दुर्ग के जिलाध्यक्ष श्री भानु प्रताप यादव के नेतृत्व में बड़ी संख्या में पदाधिकारी एवं समाजजन उपस्थित रहे, जिनमें—

अधिवक्ता रेखराम साहू, ओमप्रकाश यादव, हीरालाल, राहुल यादव, दीपक कुमार यादव, पीताम्बर साहू, योगेश कुमार, चोवाराम, विजय मेश्राम, रमन साहू, शिवकुमार सोनवानी, नंदू वर्मा, सुरेश सिंगोर, वागेस वासा, शंकर, इंदा, हिमांशी नायक सहित अन्य कार्यकर्ता एवं समाज के प्रतिनिधि मौजूद रहे।


ओबीसी समाज के अधिकारों को लेकर सतत संघर्ष

जिलाध्यक्ष भानु प्रताप यादव ने कहा कि ओबीसी समाज के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा एवं उन्हें उनका वास्तविक हक दिलाने के लिए महासभा का संघर्ष निरंतर और संगठित रूप से जारी रहेगा। उन्होंने आशा व्यक्त की कि शासन स्तर पर शीघ्र ही सकारात्मक निर्णय लिया जाएगा।

बालोद / शौर्यपथ /
जिले के महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारी-कर्मचारियों की तत्परता एवं मुश्तैदी से गुण्डरदेही विकासखण्ड के ग्राम कचांदुर में प्रस्तावित बाल विवाह को समय रहते रोक लिया गया।

इस संबंध में महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी श्री समीर पाण्डेय ने जानकारी देते हुए बताया कि सोमवार 12 जनवरी को ग्राम कचांदुर में बाल विवाह की सूचना प्राप्त होते ही विभागीय टीम द्वारा त्वरित कार्रवाई करते हुए वर विशाल पिता राजकुमार के निवास स्थल पर पहुँचकर आवश्यक हस्तक्षेप किया गया। मौके पर उपस्थित राजकुमार एवं उनके परिजनों को बाल विवाह निषेध अधिनियम के प्रावधानों से अवगत कराते हुए समझाइश दी गई।

समझाइश के उपरांत नाबालिक युवक राजकुमार (उम्र 19 वर्ष) एवं उनके माता-पिता द्वारा अपनी त्रुटि स्वीकार की गई तथा युवक की 21 वर्ष की आयु पूर्ण होने के पश्चात ही विवाह करने की सहमति व्यक्त की गई।

जिला कार्यक्रम अधिकारी श्री पाण्डेय ने बताया कि इस कार्रवाई के माध्यम से जिले में बाल विवाह की रोकथाम सुनिश्चित की गई है। इस अवसर पर ग्राम पंचायत के सरपंच, उप सरपंच, सचिव, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सहित विभागीय अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे, जिनकी मौजूदगी में नियमानुसार पंचनामा भी तैयार किया गया

महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा जिले में बाल विवाह रोकने हेतु सतत निगरानी एवं त्वरित कार्रवाई का कार्य निरंतर जारी है।

बालोद / शौर्यपथ /
बालोद जिले के विकासखण्ड मुख्यालय डौण्डी स्थित धान खरीदी केन्द्र में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी का कार्य सुव्यवस्थित एवं सुचारू रूप से जारी है। अब तक 1266 किसानों द्वारा कुल 53 हजार 144 क्विंटल 80 किलोग्राम धान की बिक्री की जा चुकी है, जिसके एवज में किसानों को 13 करोड़ 58 लाख 33 हजार रुपये से अधिक की राशि प्राप्त हुई है।

धान खरीदी की अंतिम तिथि 31 जनवरी निर्धारित है। निर्धारित अवधि के भीतर धान बिक्री से शेष रह गए किसानों का शत-प्रतिशत धान खरीदी सुनिश्चित करने हेतु सभी आवश्यक व्यवस्थाएं पूर्ण कर ली गई हैं

इस संबंध में नोडल अधिकारी एवं जनपद पंचायत डौण्डी के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री डीडी मण्डले ने जानकारी देते हुए बताया कि धान खरीदी केन्द्र डौण्डी के अंतर्गत शामिल गांवों के 907 किसानों द्वारा 315.48 हेक्टेयर क्षेत्रफल का रकबा समर्पित किया गया है। उन्होंने बताया कि शेष कृषकों के धान की खरीदी सुनिश्चित करने के साथ-साथ अवैध धान की आवक रोकने हेतु भी पुख्ता प्रबंध किए गए हैं

धान खरीदी व्यवस्था की पारदर्शिता और सुचारू संचालन बनाए रखने के लिए राजस्व, खाद्य एवं अन्य संबंधित विभागों के अधिकारियों, साथ ही गठित निगरानी दल द्वारा धान खरीदी कार्य की निरंतर मॉनिटरिंग की जा रही है।

जगदलपुर, शौर्यपथ। जगदलपुर के प्रसिद्ध लामनी पार्क में बुधवार को मकर संक्रांति के पावन अवसर पर उत्साह, उल्लास और रंगों का एक अद्भुत नजारा देखने को मिला। वन विभाग द्वारा 'चित्र-विचित्र' संस्था के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में प्रकृति प्रेम और संस्कृति का सुंदर संगम नजर आया। शहरवासियों और स्कूली बच्चों ने इस पहल का स्वागत जबरदस्त उत्साह के साथ किया। आयोजन की सफलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कड़ाके की ठंड और त्यौहार की व्यस्तता के बावजूद 630 प्रतिभागियों ने चित्रकला और 256 प्रतिभागियों ने पतंग उड़ाओ प्रतियोगिता में हिस्सा लिया। आयोजन का मुख्य उद्देश्य बच्चों और उनके अभिभावकों के बीच प्रकृति, वन और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना था, जो पूरी तरह सफल होता दिखा। दोपहर 12 बजे से शुरू हुई चित्रकला प्रतियोगिता में नन्हे कलाकारों ने 'प्रकृति, वन एवं पर्यावरण' विषय पर अपनी कल्पनाओं को कैनवास पर उतारा। बच्चों ने अपनी पेंटिंग के जरिए पर्यावरण को बचाने के जो संदेश दिए, उसने वहां मौजूद सभी दर्शकों और निर्णायकों का मन मोह लिया। शाम 3 बजे के बाद कार्यक्रम का रोमांच अपने चरम पर पहुंच गया जब पतंग उड़ाओ प्रतियोगिता की शुरुआत हुई। लामनी पार्क का आसमान रंग-बिरंगी पतंगों से छा गया। बच्चों के साथ-साथ उनके अभिभावकों ने भी इसमें बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया, जिससे पारिवारिक सहभागिता और सामाजिक जुड़ाव का एक सुखद दृश्य उपस्थित हो गया।

          बस्तर वनमंडलाधिकारी उत्तम कुमार गुप्ता ने कार्यक्रम की जानकारी देते हुए बताया कि प्रतियोगिताओं को इस तरह से डिजाइन किया गया था कि हर आयु वर्ग के बच्चे इसमें शामिल हो सकें। उन्होंने बताया कि 11 से 18 वर्ष (वरिष्ठ वर्ग) के विजेताओं को क्रमशः 10 हजार रुपए, 07 हजार रुपए और 04 हजार रुपए के आकर्षक पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे। वहीं 6 से 10 वर्ष के कनिष्ठ वर्ग के विजेताओं को 05 हजार रुपए, 03 हजार रुपए और 02 हजार रुपए की पुरस्कार राशि दी जाएगी। उन्होंने बताया कि इन प्रतियोगिताओं में प्रतिभागियों की सहभागिता उम्मीद से बढ़कर हुई तथा इस प्रतियोगिता के विजेताओं को शीघ्र ही पुरस्कृत किया जाएगा।

         पतंगबाजी के शौकीनों का उत्साह बढ़ाने के लिए इसमें भी विजेताओं को 2,100 रुपए और 1,100 रुपए के पुरस्कार दिए जाएंगे। कार्यक्रम की सबसे खास बात 6 वर्ष से कम उम्र के बच्चों की भागीदारी रही, जिन्हें प्रतियोगिता में शामिल होने के लिए सांत्वना पुरस्कार और प्रमाण पत्र देकर प्रोत्साहित किया जाएगा। वन विभाग की इस पहल ने मकर संक्रांति के पर्व को शहरवासियों, पर्यटकों और बच्चों के लिए स्मरणीय बना दिया।

जगदलपुर, शौर्यपथ। जगदलपुर के प्रसिद्ध लामनी पार्क में बुधवार को मकर संक्रांति के पावन अवसर पर उत्साह, उल्लास और रंगों का एक अद्भुत नजारा देखने को मिला। वन विभाग द्वारा 'चित्र-विचित्र' संस्था के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में प्रकृति प्रेम और संस्कृति का सुंदर संगम नजर आया। शहरवासियों और स्कूली बच्चों ने इस पहल का स्वागत जबरदस्त उत्साह के साथ किया। आयोजन की सफलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कड़ाके की ठंड और त्यौहार की व्यस्तता के बावजूद 630 प्रतिभागियों ने चित्रकला और 256 प्रतिभागियों ने पतंग उड़ाओ प्रतियोगिता में हिस्सा लिया। आयोजन का मुख्य उद्देश्य बच्चों और उनके अभिभावकों के बीच प्रकृति, वन और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना था, जो पूरी तरह सफल होता दिखा। दोपहर 12 बजे से शुरू हुई चित्रकला प्रतियोगिता में नन्हे कलाकारों ने 'प्रकृति, वन एवं पर्यावरण' विषय पर अपनी कल्पनाओं को कैनवास पर उतारा। बच्चों ने अपनी पेंटिंग के जरिए पर्यावरण को बचाने के जो संदेश दिए, उसने वहां मौजूद सभी दर्शकों और निर्णायकों का मन मोह लिया। शाम 3 बजे के बाद कार्यक्रम का रोमांच अपने चरम पर पहुंच गया जब पतंग उड़ाओ प्रतियोगिता की शुरुआत हुई। लामनी पार्क का आसमान रंग-बिरंगी पतंगों से छा गया। बच्चों के साथ-साथ उनके अभिभावकों ने भी इसमें बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया, जिससे पारिवारिक सहभागिता और सामाजिक जुड़ाव का एक सुखद दृश्य उपस्थित हो गया।

          बस्तर वनमंडलाधिकारी उत्तम कुमार गुप्ता ने कार्यक्रम की जानकारी देते हुए बताया कि प्रतियोगिताओं को इस तरह से डिजाइन किया गया था कि हर आयु वर्ग के बच्चे इसमें शामिल हो सकें। उन्होंने बताया कि 11 से 18 वर्ष (वरिष्ठ वर्ग) के विजेताओं को क्रमशः 10 हजार रुपए, 07 हजार रुपए और 04 हजार रुपए के आकर्षक पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे। वहीं 6 से 10 वर्ष के कनिष्ठ वर्ग के विजेताओं को 05 हजार रुपए, 03 हजार रुपए और 02 हजार रुपए की पुरस्कार राशि दी जाएगी। उन्होंने बताया कि इन प्रतियोगिताओं में प्रतिभागियों की सहभागिता उम्मीद से बढ़कर हुई तथा इस प्रतियोगिता के विजेताओं को शीघ्र ही पुरस्कृत किया जाएगा।

         पतंगबाजी के शौकीनों का उत्साह बढ़ाने के लिए इसमें भी विजेताओं को 2,100 रुपए और 1,100 रुपए के पुरस्कार दिए जाएंगे। कार्यक्रम की सबसे खास बात 6 वर्ष से कम उम्र के बच्चों की भागीदारी रही, जिन्हें प्रतियोगिता में शामिल होने के लिए सांत्वना पुरस्कार और प्रमाण पत्र देकर प्रोत्साहित किया जाएगा। वन विभाग की इस पहल ने मकर संक्रांति के पर्व को शहरवासियों, पर्यटकों और बच्चों के लिए स्मरणीय बना दिया।

0 व्यस्त मार्ग पर स्ट्रीट लाइट नदारद, प्रशासन की अनदेखी से राहगीर और वाहन चालक परेशान

राजनांदगांव /शौर्यपथ /फरहद चौक पर व्याप्त अंधेरा अब आमजन के लिए गंभीर चिंता का विषय बनता जा रहा है। यह चौक मोहरा, अंबागढ़ चौकी, पेंड्री एवं ट्रांसपोर्ट नगर को जोड़ने वाला एक प्रमुख मार्ग है, जहां से दिन-रात छोटे-बड़े वाहनों का निरंतर आवागमन होता रहता है। इसके बावजूद चौक एवं आसपास के क्षेत्र में पर्याप्त स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था नहीं होने से यहां घुप्प अंधेरा पसरा रहता है।

स्थानीय नागरिकों एवं वाहन चालकों का कहना है कि अंधेरे के कारण रात के समय राहगीरों को चलने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। तेज रफ्तार वाहनों, दोपहिया चालकों एवं पैदल यात्रियों के लिए यह स्थिति बेहद जोखिम भरी बन चुकी है। कई बार दुर्घटना होते-होते बची है, लेकिन अब किसी बड़े हादसे की आशंका लगातार बनी हुई है।

क्षेत्रवासियों का आरोप है कि इस समस्या को लेकर संबंधित विभाग एवं प्रशासन को कई बार अवगत कराया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। यदि जल्द ही फरहद चौक पर पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था नहीं की गई, तो यह अंधेरा किसी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकता है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि शीघ्र स्ट्रीट लाइट लगाई जाएं और खराब लाइटों की मरम्मत कराई जाए, ताकि आमजन सुरक्षित रूप से आवागमन कर सकें।

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