
CONTECT NO. - 8962936808
EMAIL ID - shouryapath12@gmail.com
Address - SHOURYA NIWAS, SARSWATI GYAN MANDIR SCHOOL, SUBHASH NAGAR, KASARIDIH - DURG ( CHHATTISGARH )
LEGAL ADVISOR - DEEPAK KHOBRAGADE (ADVOCATE)
Google Analytics —— Meta Pixel
धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।
नई दिल्ली / एजेंसी /
भारतीय नौसेना पनडुब्बी रोधी युद्ध (एएसडब्ल्यू) क्षमताओं को बढ़ाने के लिए आठ युद्धपोतों वाली एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वाटर क्राफ्ट (एएसडब्ल्यू-एसडब्ल्यूसी) परियोजना के तीसरे पोत अंजदीप को शामिल करने जा रही है। इस युद्धपोत को 27 फरवरी, 2026 को चेन्नई बंदरगाह पर पूर्वी नौसेना कमान में औपचारिक रूप से शामिल किया जाएगा।
इस समारोह की अध्यक्षता नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी करेंगे।
इस शुभारंभ समारोह से रक्षा क्षेत्र में 'आत्मनिर्भर भारत' की दिशा में राष्ट्र की तीव्र प्रगति का पता चलता है, क्योंकि एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वाटर क्राफ्ट परियोजना स्वदेशी युद्धपोत डिजाइन और निर्माण की सफलता का उत्कृष्ट उदाहरण है। गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (जीआरएसई), कोलकाता द्वारा निर्मित, अंजदीप एक अत्याधुनिक पोत है जिसे विशेष रूप से तटीय युद्ध वातावरण की चुनौतियों का सामना करने के लिए डिजाइन किया गया है - यानी तटीय और उथले जल क्षेत्र जो राष्ट्र की सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
यह पोत 'डॉल्फिन हंटर' के रूप में कार्य करने के लिए डिज़ाइन किया गया है, जिसका मुख्य उद्देश्य तटीय क्षेत्रों में दुश्मन की पनडुब्बियों का पता लगाना, उनका पीछा करना और उन्हें निष्क्रिय करना है। यह पोत स्वदेशी, अत्याधुनिक पनडुब्बी रोधी हथियारों और सेंसर पैकेज से सुसज्जित है, जिसमें हल माउंटेड सोनार अभय भी शामिल है, और हल्के टॉरपीडो और पनडुब्बी रोधी रॉकेटों से लैस है। अपनी प्राथमिक पनडुब्बी रोधी भूमिका के अलावा, यह फुर्तीला और अत्यधिक पैंतरेबाज़ी करने में सक्षम युद्धपोत तटीय निगरानी, कम तीव्रता वाले समुद्री अभियान (एलआईएमओ) और खोज एवं बचाव अभियान चलाने में भी सक्षम है। 77 मीटर लंबे इस पोत में एक उच्च गति वाला वाटर-जेट प्रोपल्सन प्रणाली है, जो इसे त्वरित प्रतिक्रिया और निरंतर संचालन के लिए 25 समुद्री मील की अधिकतम गति प्राप्त करने में सक्षम बनाती है।
कारवार तट से दूर स्थित ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण द्वीप के नाम पर नामित अंजदीप नामक पोत को नौसेना में शामिल करने से तमिलनाडु और पुडुचेरी क्षेत्र सहित देश के विशाल समुद्री हितों और तटीय क्षेत्रों की रक्षा करने की नौसेना की क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जो भारतीय नौसेना को एक दुर्जेय 'निर्माता नौसेना' में बदलने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम है।
नई दिल्ली / एजेंसी / प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज देश भर में 30 लाख घरों को रूफटॉप सोलर से सशक्त बनाने की सफलता की प्रशंसा की। उन्होंने इसे भारत की स्वच्छ ऊर्जा यात्रा में एक सराहनीय उपलब्धि बताया।
प्रधानमंत्री ने रूफटॉप सोलर अपनाने वाले सभी लाभार्थियों को बधाई दी और रेखांकित किया कि यह पहल नागरिकों के बीच बचत, स्थिरता और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा दे रही है।
श्री मोदी ने इस बात पर बल दिया कि यह योजना ऊर्जा आत्मनिर्भर, पर्यावरण अनुकूल और भविष्य के लिए तैयार भारत के निर्माण की दिशा में सरकार के प्रयासों का एक अभिन्न अंग है।
केंद्रीय मंत्री श्री प्रल्हाद जोशी के एक पोस्ट का उत्तर देते हुए, प्रधानमंत्री ने पोस्ट किया;
“भारत की स्वच्छ ऊर्जा यात्रा में एक सराहनीय उपलब्धि!
उन सभी को बहुत-बहुत बधाई जिन्होंने इस योजना का लाभ उठाया है और रूफटॉप सोलर को अपनाया है, जिससे बचत, सतत जीवनशैली और आत्मनिर्भरता को बल मिला है। यह योजना ऊर्जा आत्मनिर्भर, पर्यावरण अनुकूल और भविष्य के लिए तैयार भारत के निर्माण के हमारे प्रयासों का एक अभिन्न हिस्सा है।
मुख्यमंत्री शांति सरोवर में आयोजित स्नेह मिलन एवं ब्रह्मा भोजन कार्यक्रम में हुए शामिल
कैबिनेट मंत्रीगण, नेता प्रतिपक्ष और विधानसभा के सदस्य भी रहे मौजूद
रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज नया रायपुर स्थित शांति सरोवर में छत्तीसगढ़ विधानसभा के सम्मानित सदस्यों के लिए प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित स्नेह मिलन एवं ब्रह्मा भोजन कार्यक्रम में शामिल हुए।
मुख्यमंत्री साय ने ब्रह्माकुमारी बहनों के स्नेह, आत्मीयता और सेवा भाव की सराहना करते हुए कहा कि बहनों के प्रेम और आदर से हम सब अभिभूत हैं। उन्होंने कहा कि हर वर्ष बड़े स्नेह के साथ विधानसभा के सदस्यों के लिए ब्रह्मा भोजन का आयोजन एक सुंदर और प्रेरणादायी परंपरा है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रजापिता ब्रह्माकुमारी संस्था द्वारा समाज में नैतिक मूल्यों, आध्यात्मिक जागरूकता और आत्मिक शांति के प्रसार की दिशा में निरंतर कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि शांति सरोवर और शांति शिखर जैसे आध्यात्मिक केंद्रों में सदैव सकारात्मक ऊर्जा और आत्मिक शांति की अनुभूति होती है। संस्था का 137 से अधिक देशों में विस्तार होना अत्यंत सुखद और प्रेरक है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय अनेक जनकल्याणकारी गतिविधियों के माध्यम से समाज के विभिन्न वर्गों में जनजागृति लाने का कार्य कर रहा है। महिलाओं को आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त बनाने में संस्था की भूमिका उल्लेखनीय है। जनजातीय क्षेत्रों में भी संस्था द्वारा सामाजिक और आर्थिक उत्थान के लिए किए जा रहे प्रयासों से स्थानीय लोगों को व्यापक लाभ मिला है।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ब्रह्माकुमारी बहनों के अतिथि बने और पवित्र ब्रह्मा भोजन ग्रहण किया। कार्यक्रम में नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत सहित कैबिनेट मंत्रीगण और सभी विधायकगणों ने भी ब्रह्मा भोजन का आनंद लिया।
कार्यक्रम में प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की बहनों ने मुख्यमंत्री एवं विधानसभा के सभी सदस्यों को माउंट आबू आने का आग्रह किया, जिसे मुख्यमंत्री श्री साय ने सहर्ष स्वीकार करते हुए वहां आने की सहमति दी। इस मौके पर नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
कार्यक्रम में वन मंत्री केदार कश्यप, कृषि मंत्री रामविचार नेताम, विधायक धरमलाल कौशिक सहित अनेक जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। ब्रह्माकुमारी परिवार की ओर से मृत्युंजय भाई, आत्म प्रकाश भाई, हेमलता दीदी, लता दीदी, आशा दीदी, सरिता दीदी एवं सविता दीदी सहित अन्य सदस्य कार्यक्रम में सहभागी रहे।
मुख्यमंत्री राष्ट्र संत शिरोमणि गाडगे बाबा 150वीं जयंती पर आयोजित निर्मल दिवस कार्यक्रम में हुए शामिल
रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज राजधानी रायपुर के पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में राष्ट्र संत शिरोमणि गाडगे बाबा की 150वीं जयंती पर आयोजित निर्मल दिवस कार्यक्रम में शामिल हुए। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि आज हम सभी ऐसे महान संत का स्मरण कर रहे हैं, जिन्होंने अपने जीवन और कर्मों से समाज को स्वच्छता, सेवा और सामाजिक जागरूकता का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि संत गाडगे बाबा ने “स्वच्छता ही सच्ची पूजा” का जो संदेश दिया, वह आज भी उतना ही प्रासंगिक और प्रेरणादायक है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि संत गाडगे बाबा की स्वच्छता की प्रेरणा से उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा प्रारंभ किए गए स्वच्छ भारत अभियान का स्मरण हो गया। उन्होंने कहा कि 15 अगस्त 2014 को लाल किले से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वच्छ भारत अभियान की शुरुआत की और आज स्वच्छता जनआंदोलन बन चुकी है। उन्होंने कहा कि यह संत गाडगे बाबा के विचारों का ही प्रभाव है कि देश में स्वच्छता के प्रति व्यापक जागरूकता आई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वच्छ भारत अभियान ने विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में हमारी माताओं-बहनों को सम्मान दिलाने का कार्य किया है। देशभर में शौचालयों के निर्माण से उनकी गरिमा और सुरक्षा सुनिश्चित हुई है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में गरीबों के उत्थान के लिए अनेक ऐतिहासिक योजनाएँ शुरू की गईं, जिनमें प्रधानमंत्री आवास योजना और प्रधानमंत्री जनधन योजना जैसी पहलें शामिल हैं। आज सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे हितग्राहियों के बैंक खातों तक पहुँच रहा है, जिससे पारदर्शिता और विश्वास दोनों बढ़े हैं।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि देश आर्थिक रूप से निरंतर मजबूत हो रहा है और हम सभी विकसित भारत के लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण के साथ-साथ विकसित छत्तीसगढ़ का निर्माण भी हमारा संकल्प है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का प्रयास है कि समाज के हर वर्ग का सम्मान बढ़े और सभी समुदाय विकास की मुख्यधारा से जुड़ें।
मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा ही विकास का मूलमंत्र है। शिक्षा केवल डिग्री प्राप्त कर नौकरी हासिल करने का माध्यम नहीं, बल्कि सफल और संस्कारित जीवन जीने की आधारशिला है। उन्होंने समाज से अपील करते हुए कहा कि सभी बच्चों को शिक्षा से जोड़ना हम सबकी जिम्मेदारी है। साथ ही उन्होंने युवाओं को नशे से दूर रखने और समाज में नशामुक्त वातावरण बनाने के लिए सामूहिक प्रयास करने का आह्वान किया।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने संत गाडगे बाबा के जीवन पर आधारित छायाचित्र प्रदर्शनी का अवलोकन किया तथा उनकी आरती एवं स्मारिका का विमोचन किया। उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभावान बच्चों और समाज के उत्कृष्ट व्यक्तियों को सम्मानित भी किया।
कार्यक्रम को विधायक सुनील सोनी, विधायक मोतीलाल साहू तथा पद्मश्री पंडित रामलाल बरेठ ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर संत गाडगे बाबा के वंशज भी मंच पर उपस्थित थे। कार्यक्रम में तुलसी कौशिक, घनश्याम चौधरी, श्रीमती रजनी रजक, विनय निर्मलकर सहित छत्तीसगढ़ रजक समाज के पदाधिकारी एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।
समृद्ध किसान, मजबूत उद्योग और बढ़ता सेवा क्षेत्र: विकसित छत्तीसगढ़ की ओर बढ़ते कदम
रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि छत्तीसगढ़ आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 प्रदेश की मजबूत, संतुलित और विकासोन्मुख अर्थव्यवस्था का स्पष्ट प्रमाण है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की जनकल्याणकारी नीतियों, किसानों के हित में लिए गए निर्णयों, औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने तथा सेवा क्षेत्र के विस्तार के कारण छत्तीसगढ़ आज विकास की नई ऊंचाइयों की ओर अग्रसर है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि वर्ष 2025-26 में प्रदेश का सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) प्रचलित भावों पर बढ़कर लगभग 6 लाख 31 हजार 291 करोड़ रुपये अनुमानित है, जिसकी वृद्धि दर 11.57 प्रतिशत है, जो राष्ट्रीय औसत से अधिक है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि दर्शाती है कि छत्तीसगढ़ में विकास के सभी प्रमुख क्षेत्र समान रूप से प्रगति कर रहे हैं।
कृषि क्षेत्र में मजबूत वृद्धि:किसानों की मेहनत और सरकार की नीतियों का परिणाम
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार कृषि एवं संबद्ध क्षेत्र में 12.53 प्रतिशत वृद्धि अनुमानित है, जो किसानों की मेहनत, तकनीकी नवाचार, सिंचाई सुविधाओं के विस्तार तथा सरकार की किसान-हितैषी योजनाओं का परिणाम है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ कृषि प्रधान राज्य है और समृद्ध किसान ही विकसित छत्तीसगढ़ की मजबूत नींव हैं। राज्य सरकार किसानों की आय बढ़ाने और कृषि को अधिक लाभकारी बनाने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है।
औद्योगिक क्षेत्र में तेजी: निवेश और रोजगार के नए अवसर
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ आज देश की औद्योगिक शक्ति के रूप में तेजी से उभर रहा है। आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार उद्योग क्षेत्र में 10.26 प्रतिशत वृद्धि अनुमानित है और राज्य की अर्थव्यवस्था में उद्योग का योगदान लगभग 49 प्रतिशत है, जो राष्ट्रीय औसत से अधिक है। उन्होंने कहा कि राज्य में निवेश, अधोसंरचना विकास और रोजगार के अवसर लगातार बढ़ रहे हैं, जिससे प्रदेश की आर्थिक संरचना और अधिक मजबूत हो रही है।
सेवा क्षेत्र बना नई अर्थव्यवस्था का आधार
मुख्यमंत्री ने कहा कि सेवा क्षेत्र में 13.15 प्रतिशत वृद्धि अनुमानित है। शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन, आईटी एवं डिजिटल सेवाओं में विस्तार के कारण युवाओं के लिए नए अवसर सृजित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि सेवा क्षेत्र के विकास से राज्य की अर्थव्यवस्था को नई गति मिल रही है।
प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि — प्रदेशवासियों की समृद्धि का संकेत
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार वर्ष 2025-26 में प्रति व्यक्ति आय बढ़कर लगभग 1.79 लाख रुपये अनुमानित है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 10.07 प्रतिशत वृद्धि दर्शाती है। उन्होंने कहा कि यह प्रदेशवासियों की बढ़ती आय, आर्थिक गतिविधियों के विस्तार और सरकार की विकासोन्मुख नीतियों का सकारात्मक परिणाम है।
हर परिवार की समृद्धि हमारा लक्ष्य
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार का स्पष्ट लक्ष्य है कि प्रदेश के प्रत्येक परिवार की आय बढ़े, जीवन स्तर बेहतर हो और समृद्धि हर घर तक पहुंचे। उन्होंने कहा कि विकास तभी सार्थक है जब उसका लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे और हर परिवार आर्थिक रूप से सशक्त एवं खुशहाल बने।
मुख्यमंत्री साय ने विश्वास व्यक्त किया कि छत्तीसगढ़ आने वाले वर्षों में देश की अग्रणी अर्थव्यवस्थाओं में अपना स्थान और मजबूत करेगा तथा विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देगा।
रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से आज विधानसभा स्थित उनके कार्यालय कक्ष में राज्य प्रशासनिक सेवा तथा एलाइड सर्विस से भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) में नियुक्त अधिकारियों ने सौजन्य मुलाकात की।
मुख्यमंत्री साय ने सभी अधिकारियों को नई जिम्मेदारी मिलने पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने कहा कि भारतीय प्रशासनिक सेवा में नियुक्ति न केवल गौरव का विषय है, बल्कि यह जनसेवा के व्यापक अवसरों और जिम्मेदारियों का भी प्रतीक है।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से अपेक्षा की कि वे अपने दायित्वों का निष्ठा, पारदर्शिता और संवेदनशीलता के साथ निर्वहन करें। उन्होंने कहा कि शासन की लोककल्याणकारी योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। अधिकारियों की सक्रिय भूमिका से प्रदेश के विकास को नई गति मिलेगी।
इस अवसर पर भारतीय प्रशासनिक सेवा में नियुक्त तीर्थराज अग्रवाल, सुश्री लीना कोसम, बीरेंद्र बहादुर पंचभाई, सुमित अग्रवाल, संदीप कुमार अग्रवाल, आशीष कुमार टिकरिहा, ऋषभ पाराशर एवं तरुण किरण उपस्थित थे।
रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ विधानसभा की कार्य मंत्रणा समिति की बैठक आज विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह की अध्यक्षता में विधानसभा स्थित समिति कक्ष में आयोजित की गई।
बैठक में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत, उपमुख्यमंत्री अरुण साव, संसदीय कार्य मंत्री केदार कश्यप, वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी तथा कृषि मंत्री रामविचार नेताम उपस्थित रहे। इसके साथ ही विधायक धरमलाल कौशिक, विधायक धर्मजीत सिंह, विधायक अजय चंद्राकर सहित समिति के अन्य सदस्य भी बैठक में शामिल हुए।
बैठक में विधानसभा के आगामी कार्यों, कार्यसूची एवं सदन संचालन से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा की गई।
नई दिल्ली / भारत निर्वाचन आयोग (ECI) द्वारा मंगलवार, 24 फरवरी 2026 को नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में भारत निर्वाचन आयोग और राज्य निर्वाचन आयुक्तों (SEC) का राष्ट्रीय गोलमेज सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है। उल्लेखनीय है कि यह सम्मेलन 27 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद हो रहा है, इससे पूर्व ऐसा सम्मेलन वर्ष 1999 में आयोजित हुआ था।
सम्मेलन की अध्यक्षता मुख्य निर्वाचन आयुक्त श्री ज्ञानेश कुमार करेंगे। इस अवसर पर निर्वाचन आयुक्त डॉ. सुखबीर सिंह संधु और डॉ. विवेक जोशी भी उपस्थित रहेंगे। देश के सभी 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के राज्य निर्वाचन आयुक्त अपने कानूनी एवं तकनीकी विशेषज्ञों के साथ भाग लेंगे, वहीं सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) भी सम्मेलन में शामिल होंगे।
समन्वय और सहकारी संघवाद पर जोर
इस राष्ट्रीय गोलमेज सम्मेलन का प्रमुख उद्देश्य निर्वाचन प्रक्रियाओं और व्यवस्थाओं के संदर्भ में ईसीआई और राज्य निर्वाचन आयुक्तों के बीच तालमेल को मजबूत करना है। सम्मेलन से निर्वाचन प्रबंधन में सहकारी संघवाद की भावना को और सुदृढ़ करने की उम्मीद है।
तकनीक, ईवीएम और मतदाता सूची पर मंथन
दिनभर चलने वाले इस सम्मेलन में निर्वाचन प्रक्रियाओं को सशक्त बनाने,प्रौद्योगिकी के उपयोग,ईवीएम की मजबूती, पारदर्शिता और सुरक्षा,तथा मतदाता सूचियों को साझा करने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श होगा।आयोग के वरिष्ठ अधिकारी हाल ही में शुरू किए गए ईसीआईएनईटी (ECINET) डिजिटल प्लेटफॉर्म पर प्रस्तुतियां देंगे और बताएंगे कि यह प्लेटफॉर्म निर्वाचन सेवाओं को किस प्रकार सरल और प्रभावी बना रहा है।
मतदाता पात्रता पर तुलनात्मक प्रस्तुति
सम्मेलन में जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 के तहत विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता पात्रता से जुड़े कानूनी प्रावधानों पर एक तुलनात्मक प्रस्तुति भी दी जाएगी, जिससे मतदाता सूची निर्माण से जुड़े कानूनों पर सूचनात्मक चर्चा संभव हो सके।
संवैधानिक पृष्ठभूमि
राज्य निर्वाचन आयोगों का गठन 73वें और 74वें संविधान संशोधनों के तहत संबंधित राज्य कानूनों द्वारा किया जाता है। अनुच्छेद 243के और 243जेडए के अंतर्गत पंचायतों और नगरीय निकायों के चुनाव तथा मतदाता सूची तैयार करने की जिम्मेदारी राज्य निर्वाचन आयुक्तों को सौंपी गई है।
कुल मिलाकर, यह सम्मेलन देश की निर्वाचन प्रणाली को और अधिक पारदर्शी, तकनीक-सक्षम और समन्वित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण और दूरगामी कदम माना जा रहा है।
रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने भारत के माननीय मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत के छत्तीसगढ़ आगमन पर पुष्प गुच्छ भेंटकर उनका आत्मीय स्वागत एवं अभिनंदन किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने माननीय मुख्य न्यायाधीश को छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा के प्रतीक स्वरूप राजकीय गमछा, विश्वविख्यात बस्तर दशहरा पर आधारित कॉफी टेबल बुक तथा बेल मेटल से निर्मित भगवान श्रीराम एवं माता शबरी की आकर्षक प्रतिकृति भेंट की।
मुख्यमंत्री साय ने इस अवसर पर भारत के सर्वोच्च न्यायालय के माननीय न्यायाधीश न्यायमूर्ति पी. नरसिम्हा एवं न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा तथा छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के माननीय मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा का स्वागत एवं अभिनंदन किया।
उल्लेखनीय है कि भारत के माननीय मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत हिदायतुल्ला राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (Hidayatullah National Law University) के दीक्षांत समारोह में सम्मिलित होने हेतु छत्तीसगढ़ प्रवास पर आए हैं।
नई दिल्ली/
शाकुंभरी पीठाधीश्वर आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज (आशुतोष महाराज) द्वारा ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ लगाए गए गंभीर आरोपों ने धार्मिक जगत के साथ-साथ राजनीतिक और कानूनी हलकों में भी तीखी बहस छेड़ दी है। मामला सीधे नाबालिगों के कथित यौन शोषण जैसे अत्यंत संवेदनशील आरोपों से जुड़ा है, जिस पर न्यायिक प्रक्रिया सक्रिय हो चुकी है।
क्या हैं आरोप और कोर्ट का रुख
आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज ने प्रयागराज की स्पेशल POCSO कोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया कि शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के शिविरों तथा वाराणसी स्थित विद्यामठ में नाबालिगों के साथ यौन उत्पीड़न की घटनाएं होती रही हैं। याचिका के साथ प्रस्तुत कथित साक्ष्यों और दो नाबालिगों के बयानों के आधार पर अदालत ने 21 फरवरी 2026 को शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्य मुकुंदानंद गिरी के विरुद्ध FIR दर्ज करने का आदेश दिया।
कानूनी स्पष्टता: यह आदेश जांच शुरू करने से संबंधित है; दोष-निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।
अन्य आरोप: पद, संपत्ति और फंडिंग
यौन शोषण के आरोपों के साथ-साथ आशुतोष महाराज ने शंकराचार्य पर ‘फर्जी शंकराचार्य’, अवैध संपत्ति और विदेशी फंडिंग से जुड़े आरोप भी लगाए हैं। इन दावों पर भी अलग-अलग स्तर पर जांच की मांग की गई है।
पलटवार: आरोपकर्ता की साख पर सवाल
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और उनके समर्थकों ने आरोपों को निराधार बताते हुए आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े किए हैं। उनके अनुसार आशुतोष महाराज उत्तर प्रदेश के शामली (कांधला थाना) में हिस्ट्रीशीटर के रूप में दर्ज बताए जाते हैं। समर्थकों का दावा है कि उन पर करीब 21 आपराधिक मामले दर्ज रहे हैं, जिनमें जबरन उगाही, धोखाधड़ी और गंभीर धाराएं शामिल बताई जाती हैं।
गैंगरेप के पुराने आरोप का उल्लेख भी किया जा रहा है, जिस पर आशुतोष महाराज ने पहले ही सफाई देते हुए इसे राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया था और मेडिकल जांच का हवाला दिया था।
महत्वपूर्ण: ये सभी दावे/आरोप हैं; अंतिम सत्य का निर्धारण केवल अदालतें ही करेंगी।
पहले भी विवादों में रहे हैं आशुतोष महाराज
सतनामी समाज विवाद (नवंबर 2025): बिलासपुर में कथित अपमानजनक टिप्पणी के मामले में उनकी गिरफ्तारी हुई थी, जिसने सामाजिक तनाव को जन्म दिया।
राजनीतिक संबंध: वे श्री कृष्ण जन्मभूमि मुक्ति निर्माण ट्रस्ट के अध्यक्ष हैं। उन पर राम मंदिर विरोधी दलों से नजदीकी जैसे आरोप भी लगते रहे हैं, जिनसे उनका सार्वजनिक प्रोफाइल विवादास्पद बना रहा है।
धार्मिक पृष्ठभूमि: आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज, जगद्गुरु रामभद्राचार्य के शिष्य बताए जाते हैं—इस कारण यह विवाद केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि धार्मिक प्रतिष्ठानों की साख से भी जुड़ गया है।
व्यापक असर: आस्था बनाम जवाबदेही
यह प्रकरण भारत में धार्मिक संस्थाओं की पारदर्शिता, नैतिक जवाबदेही और कानून के समान अनुप्रयोग पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। एक ओर नाबालिगों की सुरक्षा सर्वोपरि है, वहीं दूसरी ओर न्यायिक निष्पक्षता और निर्दोषता की धारणा भी उतनी ही आवश्यक है।
अब निगाहें पुलिस जांच, साक्ष्यों की पड़ताल और अदालती सुनवाई पर टिकी हैं। सच चाहे जो हो, यह मामला तय करेगा कि आस्था के बड़े मंचों पर बैठे लोगों के लिए कानून की कसौटी कितनी कठोर और समान रूप से लागू होती है।
यह विवाद आरोपों और प्रत्यारोपों से आगे बढ़कर सत्य की न्यायिक खोज का विषय है। अंतिम फैसला अदालत का होगा—और वही तय करेगा कि यह प्रकरण आस्था पर कलंक है या आरोपों का राजनीतिक-व्यक्तिगत तानाबाना। तब तक, जिम्मेदार पत्रकारिता का धर्म है कि तथ्यों को दावे के रूप में, संतुलन और संवेदनशीलता के साथ प्रस्तुत किया जाए।
नई दिल्ली/
शाकुंभरी पीठाधीश्वर आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज (आशुतोष महाराज) द्वारा ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ लगाए गए गंभीर आरोपों ने धार्मिक जगत के साथ-साथ राजनीतिक और कानूनी हलकों में भी तीखी बहस छेड़ दी है। मामला सीधे नाबालिगों के कथित यौन शोषण जैसे अत्यंत संवेदनशील आरोपों से जुड़ा है, जिस पर न्यायिक प्रक्रिया सक्रिय हो चुकी है।
क्या हैं आरोप और कोर्ट का रुख
आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज ने प्रयागराज की स्पेशल POCSO कोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया कि शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के शिविरों तथा वाराणसी स्थित विद्यामठ में नाबालिगों के साथ यौन उत्पीड़न की घटनाएं होती रही हैं। याचिका के साथ प्रस्तुत कथित साक्ष्यों और दो नाबालिगों के बयानों के आधार पर अदालत ने 21 फरवरी 2026 को शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्य मुकुंदानंद गिरी के विरुद्ध FIR दर्ज करने का आदेश दिया।
कानूनी स्पष्टता: यह आदेश जांच शुरू करने से संबंधित है; दोष-निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।
अन्य आरोप: पद, संपत्ति और फंडिंग
यौन शोषण के आरोपों के साथ-साथ आशुतोष महाराज ने शंकराचार्य पर ‘फर्जी शंकराचार्य’, अवैध संपत्ति और विदेशी फंडिंग से जुड़े आरोप भी लगाए हैं। इन दावों पर भी अलग-अलग स्तर पर जांच की मांग की गई है।
पलटवार: आरोपकर्ता की साख पर सवाल
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और उनके समर्थकों ने आरोपों को निराधार बताते हुए आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े किए हैं। उनके अनुसार आशुतोष महाराज उत्तर प्रदेश के शामली (कांधला थाना) में हिस्ट्रीशीटर के रूप में दर्ज बताए जाते हैं। समर्थकों का दावा है कि उन पर करीब 21 आपराधिक मामले दर्ज रहे हैं, जिनमें जबरन उगाही, धोखाधड़ी और गंभीर धाराएं शामिल बताई जाती हैं।
गैंगरेप के पुराने आरोप का उल्लेख भी किया जा रहा है, जिस पर आशुतोष महाराज ने पहले ही सफाई देते हुए इसे राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया था और मेडिकल जांच का हवाला दिया था।
महत्वपूर्ण: ये सभी दावे/आरोप हैं; अंतिम सत्य का निर्धारण केवल अदालतें ही करेंगी।
पहले भी विवादों में रहे हैं आशुतोष महाराज
सतनामी समाज विवाद (नवंबर 2025): बिलासपुर में कथित अपमानजनक टिप्पणी के मामले में उनकी गिरफ्तारी हुई थी, जिसने सामाजिक तनाव को जन्म दिया।
राजनीतिक संबंध: वे श्री कृष्ण जन्मभूमि मुक्ति निर्माण ट्रस्ट के अध्यक्ष हैं। उन पर राम मंदिर विरोधी दलों से नजदीकी जैसे आरोप भी लगते रहे हैं, जिनसे उनका सार्वजनिक प्रोफाइल विवादास्पद बना रहा है।
धार्मिक पृष्ठभूमि: आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज, जगद्गुरु रामभद्राचार्य के शिष्य बताए जाते हैं—इस कारण यह विवाद केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि धार्मिक प्रतिष्ठानों की साख से भी जुड़ गया है।
व्यापक असर: आस्था बनाम जवाबदेही
यह प्रकरण भारत में धार्मिक संस्थाओं की पारदर्शिता, नैतिक जवाबदेही और कानून के समान अनुप्रयोग पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। एक ओर नाबालिगों की सुरक्षा सर्वोपरि है, वहीं दूसरी ओर न्यायिक निष्पक्षता और निर्दोषता की धारणा भी उतनी ही आवश्यक है।
अब निगाहें पुलिस जांच, साक्ष्यों की पड़ताल और अदालती सुनवाई पर टिकी हैं। सच चाहे जो हो, यह मामला तय करेगा कि आस्था के बड़े मंचों पर बैठे लोगों के लिए कानून की कसौटी कितनी कठोर और समान रूप से लागू होती है।
यह विवाद आरोपों और प्रत्यारोपों से आगे बढ़कर सत्य की न्यायिक खोज का विषय है। अंतिम फैसला अदालत का होगा—और वही तय करेगा कि यह प्रकरण आस्था पर कलंक है या आरोपों का राजनीतिक-व्यक्तिगत तानाबाना। तब तक, जिम्मेदार पत्रकारिता का धर्म है कि तथ्यों को दावे के रूप में, संतुलन और संवेदनशीलता के साथ प्रस्तुत किया जाए।
रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज बलौदा बाजार जिले के ग्राम चांपा में आयोजित छत्तीसगढ़ मनवा कुर्मी क्षत्रिय समाज के दो दिवसीय 80वें महाअधिवेशन में शामिल हुए। कार्यक्रम की शुरुआत में उन्होंने स्वतंत्रता सेनानी एवं समाज सुधारक डॉ. खूबचंद बघेल की पुण्य तिथि पर दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि अर्पित की तथा समाज की विभूतियों को पुष्पांजलि अर्पित कर नमन किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री का गजमाला पहनाकर आत्मीय स्वागत किया गया।
मुख्यमंत्री साय ने मनवा कुर्मी समाज को परिश्रमी, संगठित और उन्नत कृषक परंपरा वाला समाज बताते हुए कहा कि समाज का योगदान राज्य की प्रगति में महत्वपूर्ण रहा है। उन्होंने 80वें महाअधिवेशन की बधाई देते हुए कहा कि ऐसे आयोजन समाज में मेल-मिलाप, समन्वय और सकारात्मक निर्णयों को बढ़ावा देते हैं, जिसका लाभ पूरे प्रदेश और देश को मिलता है। उन्होंने कहा कि राजस्व एवं उच्च शिक्षा मंत्री श्री टंकराम वर्मा के गृह ग्राम चांपा में आयोजित कार्यक्रम में शामिल होना उनके लिए सौभाग्य की बात है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि शिक्षा सशक्त समाज निर्माण का सबसे मजबूत आधार है। उन्होंने समाज द्वारा बेटा-बेटी दोनों को शिक्षा से जोड़ने के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि शिक्षित समाज ही आत्मनिर्भर और प्रगतिशील समाज बनता है। उन्होंने महिला स्वरोजगार को बढ़ावा देने, युवाओं में नशामुक्ति के प्रति जागरूकता और सामाजिक सुधार के प्रयासों को भी सराहनीय बताया।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की गारंटी को पूरा करने में पूरी प्रतिबद्धता से कार्य किया है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में 18 लाख प्रधानमंत्री आवास पूर्ण किए गए हैं। इस वर्ष समर्थन मूल्य पर 25 लाख 24 हजार किसानों से 141 लाख मीट्रिक टन से अधिक धान खरीदा गया है तथा होली से पूर्व किसानों को लगभग 10 हजार करोड़ रुपये की अंतर राशि प्रदान की जाएगी। महतारी वंदन योजना के तहत 70 लाख महिलाओं को अब तक 15 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि दी जा चुकी है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बस्तर क्षेत्र में अब विकास की नई तस्वीर दिखाई दे रही है।उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृहमंत्री के संकल्प के अनुरूप मार्च 2026 तक नक्सलवाद को पूरी तरह समाप्त करने की दिशा में सरकार दृढ़ता से काम कर रही है। नियद नेल्लार योजना के माध्यम से लगभग 400 गांवों में विकास कार्यों को गति दी गई है।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने ग्राम नरदहा में सामुदायिक भवन निर्माण हेतु 50 लाख रुपये तथा बलौदा बाजार में सामुदायिक भवन के लिए 25 लाख रुपये की राशि प्रदान करने की घोषणा की। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य में पिछले दो वर्षों में उल्लेखनीय विकास हुआ है और किसानों, महिलाओं तथा युवाओं के लिए अनेक जनकल्याणकारी योजनाएं प्रभावी रूप से लागू की गई हैं।
अधिवेशन में समाज के केंद्रीय अध्यक्ष खोड़स राम वर्मा ने समाज द्वारा लिए गए सामाजिक सुधार के महत्वपूर्ण निर्णयों की जानकारी दी। कार्यक्रम में राजिम विधायक रोहित साहू सहित बड़ी संख्या में समाज के पदाधिकारी, महिलाएं, युवा और स्वजातीय बंधु उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय गिरौदपुरी में संत समागम एवं गुरुदर्शन मेले में हुए शामिल
गुरूदर्शन व पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों की खुशहाली व समृद्धि का लिया आशीर्वाद
रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री विष्णु देव साय रविवार को बाबा गुरु घासीदास जी की जन्मभूमि एवं तपोभूमि गिरौदपुरी धाम में आयोजित संत समागम एवं गुरुदर्शन मेला में शामिल हुए। उन्होंने पूज्य गुरुगद्दी का दर्शन एवं पूजा - अर्चना कर प्रदेशवासियों की खुशहाली और समृद्धि के लिये कामना की।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि बाबा गुरू घासीदास के मनखे- मनखे एक समान का सन्देश, मानव को मानव से जोड़ने वाला और सद्भाव व समरसता बढ़ाने वाला है। बाबा गुरु घासीदास जी के बताए मार्ग पर हमारी सरकार काम कर रही है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार के द्वारा गिरौदपुरी का सतत् विकास किया जा रहा है। विशाल जैतखाम निर्माण से लेकर अनेक सुविधाओं का विस्तार यहां किया गया है। उन्होंने जिला प्रशासन द्वारा किये गए जनसुविधा विस्तार कार्य की सराहना की और कहा कि वेबसाईट और मोबाइल एप्प से भी मेले में उपलब्ध सुविधा की जानकारी श्रद्धालु ले सकते हैं। उन्होंने इस दौरान वहां चस्पा किये गए क्यूआर कोड को अपने मोबाइल से स्कैन कर जानकारी ली।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस अवसर पर मुख्य मंदिर का प्रसाद श्रद्धालुओं को वितरित किया। मुख्यमंत्री के हाथों स्थानीय श्रद्धालु एवं स्व सहायता समूह की महिलाएं प्रसाद ग्रहण कर उत्साहित हुए। गौरतलब है कि गिरौदपुरी में तीन दिवसीय संत समागम एवं गुरू दर्शन मेला 22 फ़रवरी से प्रारंभ होकर 24 फरवरी 2026 तक चलेगा। प्रदेश सहित देश एवं विदेश से भी सतनाम पंथ के अनुयायी यहां मेले में आए हुए हैं।
इस अवसर पर धर्मगुरू गुरु बालदास साहेब, सांसद श्रीमती कमलेश जांगड़े, राजिम विधायक रोहित साहु, जिला पंचायत अध्यक्ष रायपुर नवीन अग्रवाल, पुलिस महानिरीक्षक अमरेश मिश्रा, कलेक्टर दीपक सोनी, पुलिस अधीक्षक सुश्री भावना गुप्ता,डीएफओ गणवीर धम्मशील, पूर्व सांसद गुहा राम अजगले, पूर्व विधायक डॉ सनम जांगड़े सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि वरिष्ठ अधिकारी सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।
नई दिल्ली।
फरवरी 2026 में दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 ने भारत को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के वैश्विक विमर्श के केंद्र में ला खड़ा किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस ऐतिहासिक समिट में एआई को लेकर भारत का स्पष्ट, नैतिक और मानव-केंद्रित विज़न दुनिया के सामने रखा। 22 फरवरी को अपने ‘मन की बात’ कार्यक्रम में भी उन्होंने समिट की उपलब्धियों और इसके वैश्विक प्रभाव का उल्लेख किया।
‘MANAV’ विज़न: एआई गवर्नेंस का भारतीय मॉडल
प्रधानमंत्री मोदी ने एआई गवर्नेंस के लिए MANAV फ्रेमवर्क प्रस्तुत किया, जो तकनीक को मानवता से जोड़ने का भारतीय दृष्टिकोण है—
M – Moral (नैतिक मूल्य)
A – Accountable (जवाबदेही)
N – National Sovereignty (राष्ट्रीय संप्रभुता)
A – Accessible (सभी के लिए सुलभ)
V – Valid (वैध और सुरक्षित)
पीएम ने स्पष्ट किया कि एआई केवल एल्गोरिद्म और डेटा तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि मानव गरिमा, सुरक्षा और सामाजिक न्याय की वाहक बने।
एआई का लोकतंत्रीकरण: ‘ग्लोबल कॉमन गुड’ की अवधारणा
प्रधानमंत्री ने एआई को ‘Global Common Good’ के रूप में विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि तकनीक का लाभ कुछ चुनिंदा विकसित देशों तक सीमित न रहे, बल्कि ग्लोबल साउथ सहित पूरी दुनिया तक पहुंचे। भारत का अनुभव बताता है कि कम लागत, बड़े पैमाने और जनहित के साथ तकनीक कैसे परिवर्तन ला सकती है।
दैनिक जीवन में एआई: भारत के व्यावहारिक उदाहरण
पीएम मोदी ने भारत में एआई के वास्तविक उपयोगों को रेखांकित किया—अमूल के एआई असिस्टेंट द्वारा पशुओं के इलाज और डेयरी संचालन में 24x7 सहायता। किसानों को चौबीसों घंटे मार्गदर्शन देने वाले एआई समाधान। प्राचीन ग्रंथों, पांडुलिपियों और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में एआई की भूमिका, जिससे इतिहास और ज्ञान अगली पीढ़ी तक सुरक्षित पहुंच सके।
समावेशी तकनीक की मिसाल
समिट के दौरान प्रधानमंत्री के भाषण का एआई-पावर्ड रियल-टाइम साइन लैंग्वेज अनुवाद किया गया। यह कदम दिव्यांगजनों के प्रति भारत की तकनीक-आधारित समावेशी सोच का सशक्त उदाहरण बना और वैश्विक मंच पर सराहा गया।
नैतिक और सुरक्षित एआई के लिए तीन वैश्विक सुझाव
प्रधानमंत्री मोदी ने एआई के सुरक्षित और जिम्मेदार उपयोग के लिए तीन अहम सुझाव दिए—
विश्वसनीय वैश्विक डेटा फ्रेमवर्क
पारदर्शी ‘ग्लास बॉक्स’ सुरक्षा नियम
एआई में मानवीय मूल्यों का अनिवार्य समावेश
नई दिल्ली डिक्लेरेशन: वैश्विक सहमति की ऐतिहासिक पहल
समिट के अंतिम दिन 21 फरवरी 2026 को 88 देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने ‘नई दिल्ली डिक्लेरेशन’ को अपनाया। इसके प्रमुख बिंदु रहे—एआई का लोकतंत्रीकरण और समान वैश्विक पहुंच।मानव-केंद्रित एआई, जो मानवीय गरिमा और अधिकारों की रक्षा करे।एआई इम्पैक्ट एक्सपो: नवाचार का भव्य प्रदर्शन .
समिट के साथ आयोजित एआई इम्पैक्ट एक्सपो (70,000 वर्ग मीटर) में भारत की तकनीकी क्षमता का प्रभावशाली प्रदर्शन हुआ .अमूल का एआई समाधान, जिसने वैश्विक नेताओं का ध्यान खींचा।सांस्कृतिक विरासत के डिजिटलीकरण की पहल।जिओ द्वारा विकसित किफायती स्मार्ट ग्लासेस जैसे हार्डवेयर, जो भारतीय जरूरतों के अनुरूप हैं।
भारत का तकनीकी आत्मविश्वास
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत के पास दुनिया की सबसे बड़ी युवा आबादी और मजबूत तकनीकी इकोसिस्टम है। इंडिया एआई मिशन के तहत एआई इंफ्रास्ट्रक्चर, डेटा लैब और स्किल डेवलपमेंट के लिए 10,300 करोड़ रुपये का प्रावधान।
मंत्र: “डिज़ाइन इन इंडिया, डेवलप फॉर द वर्ल्ड”, जिससे भारत एआई के क्षेत्र में केवल उपभोक्ता नहीं, बल्कि वैश्विक नियम-निर्धारक (Rule-maker) बने।
राजनीतिक संदेश
मेरठ में एक जनसभा के दौरान प्रधानमंत्री ने समिट के दौरान हुए विरोध प्रदर्शनों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि कुछ राजनीतिक दल भारत की वैश्विक सफलता को स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं और देश की छवि धूमिल करने का प्रयास कर रहे हैं।
इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 केवल एक तकनीकी सम्मेलन नहीं, बल्कि भारत के बढ़ते वैश्विक नेतृत्व और नैतिक दृष्टि का प्रतीक बनकर उभरा। MANAV विज़न और नई दिल्ली डिक्लेरेशन के माध्यम से भारत ने यह स्पष्ट कर दिया कि भविष्य की एआई मानवता के साथ, मानवता के लिए और मानवता के नेतृत्व में विकसित होगी—यही भारत का संदेश है, और यही देश का बढ़ता हुआ डिजिटल गौरव।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
