January 22, 2026
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धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।

   रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय राजधानी रायपुर में रोटरी क्लब ऑफ कॉस्मोपॉलिटन रायपुर द्वारा आयोजित कॉस्मो ट्रेड एंड बिल्ड फेयर एक्सपो 2026 के शुभारंभ कार्यक्रम में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में उद्यमियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। राज्य सरकार हर वर्ग के उत्थान के लिए निरंतर कार्य कर रही है। व्यापार और उपभोक्ताओं को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से जीएसटी दरों में कटौती की गई है, जिससे कई वस्तुओं की कीमतों में कमी आई है और जीएसटी की प्रक्रिया भी पहले से अधिक सरल हुई है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की नई उद्योग नीति को देश-विदेश में सराहना मिल रही है। अब तक लगभग 8 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जिन पर जमीनी स्तर पर कार्य प्रारंभ हो चुका है। राज्य में रोजगार सृजन पर विशेष फोकस किया जा रहा है। नई उद्योग नीति में एक हजार से अधिक रोजगार उपलब्ध कराने वाले उद्यमियों के लिए विशेष प्रोत्साहन का प्रावधान किया गया है।
उन्होंने कहा कि रोटरी क्लब और उद्यमी दोनों ही विकसित छत्तीसगढ़ की दिशा में महत्वपूर्ण भागीदार हैं। रोटरी क्लब द्वारा किए जा रहे सामाजिक और परोपकारी कार्य प्रशंसनीय हैं। यह एक्सपो मध्य भारत का सबसे बड़ा आयोजन है, जिसमें 300 से अधिक स्टॉल लगाए गए हैं और इससे राज्य को व्यापक लाभ मिलेगा।
कार्यक्रम में रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ तेजी से विकास के पथ पर अग्रसर है और राज्य को लगभग 8 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मिले हैं। उन्होंने रोटरी क्लब के सेवा कार्यों, विशेषकर पोलियो उन्मूलन में योगदान की सराहना की।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने मोबाइल आई क्लीनिक एम्बुलेंस का लोकार्पण किया, विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाली 25 महिला उद्यमियों को सम्मानित किया तथा महिला उद्यमियों पर केंद्रित पुस्तक का विमोचन भी किया। कार्यक्रम में रोटरी क्लब के सदस्य, गणमान्य नागरिक और बड़ी संख्या में आमजन उपस्थित रहे।

कोलकाता।
कोलकाता में 8 जनवरी 2026 को राजनीतिक कंसल्टेंसी फर्म I-PAC के ठिकानों पर हुई प्रवर्तन निदेशालय (ED) की छापेमारी ने अब गंभीर कानूनी और राजनीतिक संकट का रूप ले लिया है। यह मामला कलकत्ता हाई कोर्ट से होते हुए सीधे सुप्रीम कोर्ट पहुँच चुका है, जहाँ केंद्र की जांच एजेंसी और पश्चिम बंगाल सरकार आमने-सामने खड़ी नजर आ रही हैं।

क्या है पूरा मामला

ED ने वर्ष 2020 के कोयला तस्करी प्रकरण से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग की जांच के तहत कोलकाता स्थित I-PAC कार्यालय और इसके निदेशक प्रतीक जैन के आवास पर छापेमारी की थी। ED का दावा है कि छापेमारी के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी मौके पर पहुँचीं और जांच में हस्तक्षेप करते हुए कुछ डिजिटल उपकरण व दस्तावेज अपने साथ ले गईं।

वहीं, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि ED आगामी 2026 विधानसभा चुनाव से पहले तृणमूल कांग्रेस (TMC) का गोपनीय राजनीतिक डेटा हासिल करने की कोशिश कर रही थी। उन्होंने इस कार्रवाई को राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित बताया।

हाई कोर्ट में हंगामा, सुनवाई टली

ED ने मुख्यमंत्री के खिलाफ FIR दर्ज कराने और मामले की CBI जांच की मांग को लेकर कलकत्ता हाई कोर्ट का रुख किया।
9 जनवरी 2026 को सुनवाई के दौरान वकीलों के बीच तीखी नोक-झोंक और हंगामे के चलते कार्यवाही बाधित हो गई। इसके बाद जस्टिस सुभ्रा घोष ने मामले की अगली सुनवाई 14 जनवरी 2026 तक के लिए स्थगित कर दी।

सुप्रीम कोर्ट में सीधी दस्तक

हाई कोर्ट में सुनवाई टलने के बाद ED ने संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर दी। एजेंसी का तर्क है कि जब राज्य की शीर्ष राजनीतिक कार्यपालिका पर ही हस्तक्षेप के आरोप हों, तब निष्पक्ष जांच केवल CBI से ही संभव है।

इधर, संभावित याचिका को भांपते हुए पश्चिम बंगाल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में पहले ही कैविएट दाखिल कर दी थी। इसका सीधा अर्थ है कि राज्य सरकार का पक्ष सुने बिना शीर्ष अदालत कोई भी एकतरफा आदेश पारित नहीं कर सकती।

ताज़ा घटनाक्रम: पुलिस बनाम ED

मामले ने नया मोड़ तब लिया जब कोलकाता पुलिस ने ED अधिकारियों के खिलाफ भी मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी। पुलिस ने प्रतीक जैन के आवास से CCTV फुटेज जब्त किए हैं, जिन्हें छापेमारी के दौरान की घटनाओं से जोड़कर देखा जा रहा है।
यह स्थिति अभूतपूर्व मानी जा रही है, जहाँ एक केंद्रीय जांच एजेंसी और राज्य पुलिस आमने-सामने आ गई हैं।

राजनीतिक तापमान चरम पर

तृणमूल कांग्रेस ने इस पूरे घटनाक्रम को चुनावी साजिश करार देते हुए इसे अपने राजनीतिक अभियान का हिस्सा बना लिया है। पार्टी का आरोप है कि केंद्र सरकार जांच एजेंसियों का इस्तेमाल कर राज्य की राजनीति को प्रभावित करना चाहती है। वहीं, विपक्ष इसे कानून के राज का मामला बताकर मुख्यमंत्री से जवाबदेही की मांग कर रहा है।

आगे क्या?

अब सबकी निगाहें सुप्रीम कोर्ट पर टिकी हैं। यह मामला केवल एक छापेमारी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह केंद्र-राज्य संबंध, जांच एजेंसियों की स्वतंत्रता, और संवैधानिक सीमाओं की बड़ी परीक्षा बन चुका है।
शीर्ष अदालत का फैसला न सिर्फ इस प्रकरण की दिशा तय करेगा, बल्कि भविष्य में ऐसे टकरावों के लिए भी एक महत्वपूर्ण न्यायिक मिसाल साबित हो सकता है।

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रायपुर ।
चौथी कक्षा की परीक्षा में कुत्ते के नाम से जुड़े प्रश्न के विकल्प में मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्री राम का नाम शामिल किए जाने को लेकर प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने इस पूरे मामले को करोड़ों हिंदुओं की आस्था पर सीधा प्रहार और सनातन विरोधी षड्यंत्र करार देते हुए भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है।

उन्होंने कहा कि पहले महासमुंद और फिर गरियाबंद जिले में सामने आए इस मामले ने धर्म के नाम पर राजनीति करने वाली भाजपा का राम-द्रोही चेहरा उजागर कर दिया है। इतना संवेदनशील मामला होने के बावजूद न तो अब तक एफआईआर दर्ज की गई और न ही किसी जिम्मेदार अधिकारी पर ठोस कार्रवाई हुई है, जिससे साफ है कि सरकार दोषियों को संरक्षण दे रही है।

सुरेंद्र वर्मा ने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि जिला शिक्षा अधिकारी यह कहकर पल्ला झाड़ रहे हैं कि प्रश्नपत्र प्रिंटर ने अपनी मर्जी से छाप दिया, जबकि प्रश्नपत्र निर्माण की एक निर्धारित प्रक्रिया होती है—शिक्षकों की समिति द्वारा प्रश्न तैयार किए जाते हैं, अनुमोदन के बाद ही छपाई होती है। इससे स्पष्ट है कि कमीशनखोरी के लालच में अनुभवहीन प्रिंटर को जिम्मेदारी सौंपी गई और पूरा शिक्षा विभाग वसूली गिरोह की तरह काम कर रहा है।

https://shouryapathnews.in/khas-khabar/35332-2026-01-09-08-31-26

राम रसोई’ की आड़ में सड़क पर कब्जा, सत्ता-संगठन-प्रशासन तीनों मौन !

उन्होंने मांग की कि इस अक्षम और धर्मद्रोही शिक्षा मंत्री को तत्काल बर्खास्त किया जाए तथा मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय पूरे प्रदेश की जनता से सार्वजनिक रूप से माफी मांगें।

वरिष्ठ प्रवक्ता ने कहा कि छत्तीसगढ़ माता कौशल्या की जन्मभूमि और माता शबरी की तपोभूमि है, जहां प्रभु श्री राम को भांचा स्वरूप में पूजा जाता है। ऐसी पवित्र भूमि में बच्चों की परीक्षा में कुत्ते के नाम के प्रश्न के विकल्प में प्रभु श्री राम का नाम देना अत्यंत आपत्तिजनक और दुर्भाग्यपूर्ण है। इससे भी ज्यादा गंभीर बात यह है कि सरकार का रवैया पूरी तरह गैर-जिम्मेदाराना बना हुआ है।

उन्होंने आरोप लगाया कि जब-जब प्रदेश में भाजपा की सरकार आई है, तब-तब धर्म विरोधी कृत्य हुए हैं—रमन सरकार के कार्यकाल में मंदिरों को तोड़ा गया, एक कथावाचक द्वारा प्रभु श्री राम पर आपत्तिजनक टिप्पणी की गई और सरकार ने उसे संरक्षण दिया। वहीं, कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में राम वन गमन पथ का विकास, धार्मिक आयोजन, गौ सेवा और गोठानों की व्यवस्था की गई, जिसे भाजपा सरकार ने सत्ता में आते ही बंद कर दिया।

सुरेंद्र वर्मा ने कहा कि भाजपा गाय, गोबर और धर्म के नाम पर केवल राजनीतिक पाखंड करती है, रामकाज से उसका कोई वास्तविक सरोकार नहीं है। यह पूरा मामला भाजपा की कथनी और करनी के बीच के गहरे अंतर को उजागर करता है।

बालोद।
ग्राम दुधली में आयोजित राष्ट्रीय रोवर रेंजर जंबूरी के अवसर पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, बालोद द्वारा विधिक जागरूकता स्टॉल लगाया गया है। यह स्टॉल 9 जनवरी से 13 जनवरी 2026 तक संचालित रहेगा, जिसके माध्यम से आम नागरिकों एवं जंबूरी में शामिल प्रतिभागियों को निःशुल्क विधिक सेवाओं एवं कानूनी अधिकारों की जानकारी दी जा रही है।

राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) द्वारा संचालित योजनाओं के प्रचार-प्रसार एवं छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के एक्शन प्लान के तहत यह पहल की गई है। प्रधान जिला न्यायाधीश एवं अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण बालोद श्री श्यामलाल नवरत्न के निर्देशन तथा भारती कुलदीप के मार्गदर्शन में यह स्टॉल लगाया गया है।

स्टॉल के माध्यम से नालसा की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं जैसे—जागृति योजना 2025, डॉन योजना 2025, आशा योजना 2025, संवाद योजना 2025, आपदा पीड़ितों, तस्करी एवं वाणिज्यिक यौन शोषण पीड़ितों, असंगठित श्रमिकों, बच्चों, मानसिक रूप से बीमार एवं दिव्यांग व्यक्तियों, आदिवासियों, नशा पीड़ितों, वरिष्ठ नागरिकों एवं एसिड अटैक पीड़ितों के लिए विधिक सेवाओं की जानकारी दी जा रही है।

इसके साथ ही पीड़ित प्रतिकर योजना 2011 एवं 2018, महिला हेल्पलाइन, घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम 2005, साइबर अपराध से बचाव तथा निःशुल्क विधिक सहायता से संबंधित जानकारी बैनर और पाम्पलेट के माध्यम से प्रदान की जा रही है। स्टॉल पर पैरालीगल वॉलंटियर्स द्वारा उपस्थित लोगों को सरल भाषा में कानूनी मार्गदर्शन दिया जा रहा है, जिससे विधिक जागरूकता को बढ़ावा मिल सके।

बालोद ।
जिला मुख्यालय बालोद के समीप ग्राम दुधली में आयोजित राष्ट्रीय रोवर रेंजर जंबूरी का तीसरा दिन प्रतिभागियों और आगंतुकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहेगा। रविवार, 11 जनवरी को दोपहर 12 बजे आयोजित विशेष सत्र में रोवर-रेंजरों को विधानसभा की वास्तविक कार्यवाही का प्रत्यक्ष अनुभव कराया जाएगा।

इस अवसर पर छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे और स्वयं अध्यक्षीय आसंदी पर विराजमान होकर विधानसभा की कार्यप्रणाली से प्रतिभागियों को रूबरू कराएंगे। जंबूरी में शामिल रोवर-रेंजर इस सत्र में प्रतिनिधि सदस्य की भूमिका में भाग लेंगे, जिससे उन्हें संसदीय प्रक्रिया को नजदीक से समझने का अवसर मिलेगा।

जंबूरी के तीसरे दिन का सांध्यकालीन कार्यक्रम शाम 7 बजे आयोजित होगा, जिसमें वन मंत्री श्री केदार कश्यप मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता भारत स्काउट गाइड के राष्ट्रीय आयुक्त डॉ. के.के. खण्डेलवाल करेंगे। विशिष्ट अतिथियों में पूर्व सांसद श्री मोहन मंडावी, जिला मुख्य आयुक्त श्री राकेश यादव, जिला पंचायत सदस्य श्रीमती प्रभा नायक, वरिष्ठ जनप्रतिनिधि श्री सौरभ लुनिया, श्रीमती भुनेश्वरी ठाकुर एवं श्रीमती कुसुम शर्मा शामिल रहेंगे।

तीसरे दिन भी रोवर-रेंजर विभिन्न शैक्षणिक, सामाजिक एवं साहसिक गतिविधियों में सक्रिय सहभागिता निभाएंगे। रात्रिकालीन बेला में देश के विभिन्न राज्यों से आए प्रतिभागियों द्वारा रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों की आकर्षक प्रस्तुतियाँ दी जाएंगी, जो जंबूरी के उत्सवपूर्ण माहौल को और जीवंत बनाएंगी।

दुर्ग। शौर्यपथ विशेष एक ओर दुर्ग नगर पालिक निगम द्वारा अवैध अतिक्रमण के खिलाफ सख्ती के दावे किए जा रहे हैं, तो दूसरी ओर ज़मीनी हकीकत इन दावों की पोल…

माननीय नरेंद्र मोदी (प्रधानमन्त्री जी के कलम से )
पीआईबी रायपुर से संकलित
शौर्यपथ विशेष
सोमनाथ... ये शब्द सुनते ही हमारे मन और हृदय में गर्व और आस्था की भावना भर जाती है। भारत के पश्चिमी तट पर गुजरात में, प्रभास पाटन नाम की जगह पर स्थित सोमनाथ, भारत की आत्मा का शाश्वत प्रस्तुतिकरण है। द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्रम में भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों का उल्लेख है। ज्योतिर्लिंगों का वर्णन इस पंक्ति से शुरू होता है...“सौराष्ट्रे सोमनाथं च...यानि ज्योतिर्लिंगों में सबसे पहले सोमनाथ का उल्लेख आता है। ये इस पवित्र धाम की सभ्यतागत और आध्यात्मिक महत्ता का प्रतीक है। शास्त्रों में ये भी कहा गया है:
“सोमलिङ्गं नरो दृष्ट्वा सर्वपापैः प्रमुच्यते।
लभते फलं मनोवाञ्छितं मृतः स्वर्गं समाश्रयेत्॥”
अर्थात्, सोमनाथ शिवलिंग के दर्शन से व्यक्ति अपने सभी पापों से मुक्त हो जाता है। मन में जो भी पुण्य कामनाएं होती हैं, वो पूरी होती हैं और मृत्यु के बाद आत्मा स्वर्ग को प्राप्त होती है।
दुर्भाग्यवश, यही सोमनाथ, जो करोड़ों लोगों की श्रद्धा और प्रार्थनाओं का केंद्र था, विदेशी आक्रमणकारियों का निशाना बना, जिनका उद्देश्य विध्वंस था।

वर्ष 2026 सोमनाथ मंदिर के लिए बहुत महत्व रखता है क्योंकि इस महान तीर्थ पर हुए पहले आक्रमण के 1000 वर्ष पूरे हो रहे हैं। जनवरी 1026 में गजनी के महमूद ने इस मंदिर पर बड़ा आक्रमण किया था, इस मंदिर को ध्वस्त कर दिया था। यह आक्रमण आस्था और सभ्यता के एक महान प्रतीक को नष्ट करने के उद्देश्य से किया गया एक हिंसक और बर्बर प्रयास था।
सोमनाथ हमला मानव इतिहास की सबसे बड़ी त्रासदियों में शामिल है। फिर भी, एक हजार वर्ष बाद आज भी यह मंदिर पूरे गौरव के साथ खड़ा है। साल 1026 के बाद समय-समय पर इस मंदिर को उसके पूरे वैभव के साथ पुन:निर्मित करने के प्रयास जारी रहे। मंदिर का वर्तमान स्वरूप 1951 में आकार ले सका। संयोग से 2026 का यही वर्ष सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण के 75 वर्ष पूरे होने का भी वर्ष है। 11 मई 1951 को इस मंदिर का पुनर्निर्माण सम्पन्न हुआ था। तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद की उपस्थिति में हुआ वो समारोह ऐतिहासिक था, जब मंदिर के द्वार दर्शनों के लिए खोले गए थे।
1026 में एक हजार वर्ष पहले सोमनाथ पर हुए पहले आक्रमण, वहां के लोगों के साथ की गई क्रूरता और विध्वंस का वर्णन अनेक ऐतिहासिक स्रोतों में विस्तार से मिलता है। जब इन्हें पढ़ा जाता है तो हृदय कांप उठता है। हर पंक्ति में क्रूरता के निशान मिलते हैं, ये ऐसा दुःख है जिसकी पीड़ा इतने समय बाद भी महसूस होती है।
हम कल्पना कर सकते हैं कि इसका उस दौर में भारत पर और लोगों के मनोबल पर कितना गहरा प्रभाव पड़ा होगा। सोमनाथ मंदिर का आध्यात्मिक महत्व बहुत ज्यादा था। ये बड़ी संख्या में लोगों को अपनी ओर खींचता था। ये एक ऐसे समाज की प्रेरणा था जिसकी आर्थिक क्षमता भी बहुत सशक्त थी। हमारे समुद्री व्यापारी और नाविक इसके वैभव की कथाएं दूर-दूर तक ले जाते थे।
सोमनाथ पर हमले और फिर गुलामी के लंबे कालखंड के बावजूद आज मैं पूरे विश्वास के साथ और गर्व से ये कहना चाहता हूं कि सोमनाथ की गाथा विध्वंस की कहानी नहीं है। ये पिछले 1000 साल से चली आ रही भारत माता की करोड़ों संतानों के स्वाभिमान की गाथा है, ये हम भारत के लोगों की अटूट आस्था की गाथा है।
1026 में शुरू हुई मध्यकालीन बर्बरता ने आगे चलकर दूसरों को भी बार-बार सोमनाथ पर आक्रमण करने के लिए प्रेरित किया। यह हमारे लोगों और हमारी संस्कृति को गुलाम बनाने का प्रयास था। लेकिन हर बार जब मंदिर पर आक्रमण हुआ, तब हमारे पास ऐसे महान पुरुष और महिलाएं भी थीं जिन्होंने उसकी रक्षा के लिए खड़े होकर सर्वोच्च बलिदान दिया। और हर बार, पीढ़ी दर पीढ़ी, हमारी महान सभ्यता के लोगों ने खुद को संभाला, मंदिर को फिर से खड़ा किया और उसे पुनः जीवंत किया।
महमूद गजनवी लूटकर चला गया, लेकिन सोमनाथ के प्रति हमारी भावना को हमसे छीन नहीं सका। सोमनाथ से जुड़ी हमारी आस्था, हमारा विश्वास और प्रबल हुआ। उसकी आत्मा लाखों श्रद्धालुओं की भीतर सांस लेती रही। साल 1026 के हजार साल बाद आज 2026 में भी सोमनाथ मंदिर दुनिया को संदेश दे रहा है, कि मिटाने की मानसिकता रखने वाले खत्म हो जाते हैं, जबकि सोमनाथ मंदिर आज हमारे विश्वास का मजबूत आधार बनकर खड़ा है। वो आज भी हमारी प्रेरणा का स्रोत है, वो आज भी हमारी शक्ति का पुंज है।

ये हमारा सौभाग्य है कि हमने उस धरती पर जीवन पाया है, जिसने देवी अहिल्याबाई होलकर जैसी महान विभूति को जन्म दिया। उन्होंने ये सुनिश्चित करने का पुण्य प्रयास किया कि श्रद्धालु सोमनाथ में पूजा कर सकें।
1890 के दशक में स्वामी विवेकानंद भी सोमनाथ आए थे, वो अनुभव उन्हें भीतर तक आंदोलित कर गया। 1897 में चेन्नई में दिए गए एक व्याख्यान के दौरान उन्होंने अपनी भावना व्यक्त की।
उन्होंने कहा, “दक्षिण भारत के प्राचीन मंदिर और गुजरात के सोमनाथ जैसे मंदिर आपको ज्ञान के अनगिनत पाठ सिखाएंगे। ये आपको किसी भी संख्या में पढ़ी गई पुस्तकों से अधिक हमारी सभ्यता की गहरी समझ देंगे।
इन मंदिरों पर सैकड़ों आक्रमणों के निशान हैं, और सैकड़ों बार इनका पुनर्जागरण हुआ है। ये बार बार नष्ट किए गए, और हर बार अपने ही खंडहरों से फिर खड़े हुए। पहले की तरह सशक्त। पहले की तरह जीवंत। यही राष्ट्रीय मन है, यही राष्ट्रीय जीवन धारा है। इसका अनुसरण आपको गौरव से भर देता है। इसको छोड़ देने का मतलब है, मृत्यु। इससे अलग हो जाने पर विनाश ही होगा।”
ये सर्वविदित है कि आजादी के बाद सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण का पवित्र दायित्व सरदार वल्लभभाई पटेल के सक्षम हाथों में आया। उन्होंने आगे बढ़कर इस दायित्व के लिए कदम बढ़ाया। 1947 में दीवाली के समय उनकी सोमनाथ यात्रा हुई। उस यात्रा के अनुभव ने उन्हें भीतर तक झकझोर दिया, उसी समय उन्होंने घोषणा की कि यहीं सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण होगा। अंततः 11 मई 1951 को सोमनाथ में भव्य मंदिर के द्वार श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए।
उस अवसर पर तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद उपस्थित थे। महान सरदार साहब इस ऐतिहासिक दिन को देखने के लिए जीवित नहीं थे, लेकिन उनका सपना राष्ट्र के सामने साकार होकर भव्य रूप में उपस्थित था।
तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू इस घटना से अधिक उत्साहित नहीं थे। वो नहीं चाहते थे कि माननीय राष्ट्रपति और मंत्री इस समारोह का हिस्सा बनें। उन्होंने कहा कि इस घटना से भारत की छवि खराब होगी। लेकिन राजेंद्र बाबू अडिग रहे, और फिर जो हुआ, उसने एक नया इतिहास रच दिया।
सोमनाथ मंदिर का कोई भी उल्लेख के.एम. मुंशी जी के योगदानों को याद किए बिना अधूरा है। उन्होंने उस समय सरदार पटेल का प्रभावी रूप से समर्थन किया था। सोमनाथ पर उनका कार्य, विशेष रूप से उनकी पुस्तक ‘सोमनाथ, द श्राइन इटरनल’, अवश्य पढ़ी जानी चाहिए।
जैसा कि मुंशी जी की पुस्तक के शीर्षक से स्पष्ट होता है, हम एक ऐसी सभ्यता हैं जो आत्मा और विचारों की अमरता में अटूट विश्वास रखती है। हम विश्वास करते हैं- नैनं छिन्दन्ति शस्त्राणि नैनं दहति पावकः। सोमनाथ का भौतिक ढांचा नष्ट हो गया, लेकिन उसकी चेतना अमर रही।
इन्हीं विचारों ने हमें हर कालखंड में, हर परिस्थिति में फिर से उठ खड़े होने, मजबूत बनने और आगे बढ़ने का सामर्थ्य दिया है। इन्हीं मूल्यों और हमारे लोगों के संकल्प की वजह से आज भारत पर दुनिया की नजर है। दुनिया भारत को आशा और विश्वास की दृष्टि से देख रही है। वो हमारे इनोवेटिव युवाओं में निवेश करना चाहती है। हमारी कला, हमारी संस्कृति, हमारा संगीत और हमारे अनेक पर्व आज वैश्विक पहचान बना रहे हैं। योग और आयुर्वेद जैसे विषय पूरी दुनिया में प्रभाव डाल रहे हैं। ये स्वस्थ जीवन को बढ़ावा दे रहे हैं। आज कई वैश्विक चुनौतियों के समाधान के लिए दुनिया भारत की ओर देख रही है।
अनादि काल से सोमनाथ जीवन के हर क्षेत्र के लोगों को जोड़ता आया है। सदियों पहले जैन परंपरा के आदरणीय मुनि कलिकाल सर्वज्ञ हेमचंद्राचार्य यहां आए थे और कहा जाता है कि प्रार्थना के बाद उन्होंने कहा,
“भवबीजाङ्कुरजनना रागाद्याः क्षयमुपगता यस्य।
अर्थात्, उस परम तत्व को नमन जिसमें सांसारिक बंधनों के बीज नष्ट हो चुके हैं। जिसमें राग और सभी विकार शांत हो गए हैं।
आज भी दादा सोमनाथ के दर्शन से ऐसी ही अनुभूति होती है। मन में एक ठहराव आ जाता है, आत्मा को अंदर तक कुछ स्पर्श करता है, जो अलौकिक है, अव्यक्त है।
1026 के पहले आक्रमण के एक हजार वर्ष बाद 2026 में भी सोमनाथ का समुद्र उसी तीव्रता से गर्जना करता है और तट को स्पर्श करती लहरें उसकी पूरी गाथा सुनाती हैं। उन लहरों की तरह सोमनाथ बार-बार उठता रहा है।
अतीत के आक्रमणकारी आज समय की धूल बन चुके हैं। उनका नाम अब विनाश के प्रतीक के तौर पर लिया जाता है। इतिहास के पन्नों में वे केवल फुटनोट हैं, जबकि सोमनाथ आज भी अपनी आशा बिखेरता हुआ प्रकाशमान खड़ा है। सोमनाथ हमें ये बताता है कि घृणा और कट्टरता में विनाश की विकृत ताकत हो सकती है, लेकिन आस्था में सृजन की शक्ति होती है। करोड़ों श्रद्धालुओं के लिए सोमनाथ आज भी आशा का अनंत नाद है। ये विश्वास का वो स्वर है, जो टूटने के बाद भी उठने की प्रेरणा देता है।
अगर हजार साल पहले खंडित हुआ सोमनाथ मंदिर अपने पूरे वैभव के साथ फिर से खड़ा हो सकता है, तो हम हजार साल पहले का समृद्ध भारत भी बना सकते हैं। आइए, इसी प्रेरणा के साथ हम आगे बढ़ते हैं। एक नए संकल्प के साथ, एक विकसित भारत के निर्माण के लिए। एक ऐसा भारत, जिसका सभ्यतागत ज्ञान हमें विश्व कल्याण के लिए प्रयास करते रहने की प्रेरणा देता है।
जय सोमनाथ !

(नरेंद्र मोदी भारत के प्रधानमंत्री हैं और श्री सोमनाथ ट्रस्ट के अध्यक्ष भी हैं।)

शनिवार, 10 जनवरी 2026 आज चंद्रमा का गोचर कन्या राशि में हो रहा है, जिससे कई राशियों के लिए आत्मविश्वास, सफलता और शुभ समाचार के…

कोलकाता | विशेष रिपोर्ट

भाजपा के दबाव और केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को ऐसे मोड़ पर ला खड़ा किया है, जहाँ हर बीतता दिन उनकी राजनीतिक मुश्किलें और बढ़ाता दिख रहा है। कोयला घोटाले की आँच अब सीधे सत्ता के गलियारों तक पहुँचती नज़र आ रही है—और इसी कड़ी में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की ताज़ा कार्रवाई ने सियासी भूचाल ला दिया है।

I-PAC पर ED की रेड, सत्ता में खलबली

गुरुवार (8 जनवरी 2026) की सुबह दिल्ली से आई ED की टीम ने TMC की चुनावी रणनीतिकार संस्था I-PAC के कोलकाता स्थित साल्टलेक और लाउडन स्ट्रीट कार्यालयों पर छापेमारी शुरू की। जाँच की भनक लगते ही मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद मौके पर पहुँचीं—वह भी उस वक्त, जब कानूनी प्रक्रिया जारी थी।

छापे के बीच फाइल-लैपटॉप लेकर बाहर निकलीं ममता

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, ममता बनर्जी I-PAC कार्यालय से गोपनीय दस्तावेजों से भरी हरी फाइल और लैपटॉप लेकर बाहर निकलती दिखीं। उनके साथ चीफ सेक्रेटरी और डीजीपी की मौजूदगी ने पूरे घटनाक्रम को और संदिग्ध बना दिया। सूत्रों का दावा है कि ED इसी फाइल की तलाश में थी—अब एजेंसी उस दस्तावेज़ के लिए हाईकोर्ट का रुख कर चुकी है।

‘घटिया गृहमंत्री’—मीडिया के सामने फूटा गुस्सा

कार्रवाई के दौरान मुख्यमंत्री का आक्रोश खुलकर सामने आया। सबूत हाथ से निकलने की आशंका के बीच ममता बनर्जी ने मीडिया के सामने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करते हुए उन्हें ‘घटिया गृहमंत्री’ तक कह डाला।

ममता का आरोप है कि ED उनके उम्मीदवारों की सूची और चुनावी रणनीतियाँ “चुराने” आई है। उन्होंने छापेमारी को राजनीतिक साजिश बताते हुए केंद्र सरकार पर डेटा कब्जाने का आरोप लगाया।

राजनीतिक विश्लेषण

राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, चुनाव से ठीक पहले I-PAC जैसे रणनीतिक केंद्र पर हुई कार्रवाई TMC की तैयारियों के लिए बड़ा झटका है। यही वजह है कि ममता बनर्जी अब सीधे तौर पर केंद्रीय एजेंसियों और भाजपा नेतृत्व पर हमलावर हैं। सवाल यह है—क्या यह आक्रामकता उनकी मजबूरी का संकेत है, या आने वाले दिनों में सियासत और तीखी होने वाली है?

अब बड़ा सवाल

क्या ED की तलाश में रही फाइल क्या सचमुच सत्ता के सबसे करीब किसी बड़े राज़ की चाबी है? और क्या ममता बनर्जी की यह प्रतिक्रिया उनकी राजनीति को और संकट में धकेल देगी?

आने वाले दिन पश्चिम बंगाल की राजनीति में निर्णायक साबित हो सकते हैं।

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