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June 12, 2026
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धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।

शौर्यपथ राशिफल। आज बुधवार का दिन ग्रहों की विशेष चाल के कारण सभी 12 राशियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण और मिला-जुला रहने वाला है। आज…
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  रायपुर / शौर्यपथ / कभी घर-परिवार की जिम्मेदारियों तक सीमित रहने वाली ग्रामीण महिलाएं आज आत्मनिर्भरता की ऐसी मिसाल बन रही हैं, जो पूरे प्रदेश के लिए प्रेरणा बन गई है। सूरजपुर जिले के पहाड़गांव स्थित पिलखा डैम की शांत जलराशि पर दौड़ती नावें अब केवल पर्यटकों को सैर नहीं करातीं, बल्कि महिलाओं के संघर्ष, साहस और सफलता की कहानी भी सुनाती हैं।
यह कहानी है मुस्कान महिला स्व-सहायता समूह की, जिसने सीमित संसाधनों के बावजूद अपने हौसलों को पतवार बनाकर आत्मनिर्भरता की नई राह तैयार की। समूह की अध्यक्ष श्रीमती सुनीता सिंह और सचिव श्रीमती यशोदा दास के नेतृत्व में 10 महिलाओं ने पर्यटन क्षेत्र में कदम रखा और बोटिंग गतिविधि शुरू कर अपनी पहचान बना ली।
शुरुआत आसान नहीं थी। संसाधनों की कमी, तकनीकी जानकारी का अभाव और संचालन से जुड़ी अनेक चुनौतियां सामने थीं। लेकिन इन महिलाओं ने हार मानने के बजाय चुनौतियों को अवसर में बदलने का संकल्प लिया। उन्होंने बोटिंग संचालन, सुरक्षा प्रबंधन और पर्यटकों की सुविधाओं की जिम्मेदारी स्वयं संभाली और धीरे-धीरे अपने प्रयासों को सफलता में बदल दिया।
आज पिलखा डैम आने वाले पर्यटक उत्साह के साथ बोटिंग का आनंद लेते हैं। इस पहल से समूह ने अब तक 74 हजार रुपये की आय अर्जित की है। इससे न केवल महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है, बल्कि उनके आत्मविश्वास और सामाजिक सम्मान में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
समूह की सदस्य बताती हैं कि पहले उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि वे पर्यटन गतिविधियों का संचालन करेंगी और स्वयं रोजगार सृजित करेंगी। आज वे अपने परिवार की आय बढ़ाने के साथ-साथ अन्य महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित कर रही हैं।
मुस्कान महिला स्व-सहायता समूह की यह सफलता दर्शाती है कि अवसर और विश्वास मिलने पर ग्रामीण महिलाएं किसी भी क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छू सकती हैं। पिलखा डैम की लहरों पर चल रही यह नाव अब केवल पर्यटन का साधन नहीं, बल्कि महिला सशक्तिकरण, उद्यमिता और आत्मनिर्भर भारत की सशक्त पहचान बन चुकी है।

  रायपुर / शौर्यपथ / सुशासन एवं अभिसरण विभाग, छत्तीसगढ़ शासन द्वारा आज मंत्रालय (महानदी भवन) नवा रायपुर में सीएम हेल्पलाइन (1076) के विभागीय नोडल एवं सहायक नोडल अधिकारियों के लिए एक दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस प्रशिक्षण में शासन के सभी विभागों के अधिकारी शामिल हुए।

समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण निराकरण पर जोर

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए सुशासन एवं अभिसरण विभाग के सचिव श्री राहुल भगत ने कहा कि सीएम हेल्पलाइन आम नागरिकों तक सुशासन पहुँचाने का सबसे सशक्त और सुलभ माध्यम है। उन्होंने सभी नोडल अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि आम जनता की शिकायतों का निर्धारित समय-सीमा के भीतर गुणवत्तापूर्ण निराकरण सुनिश्चित किया जाए।

प्रशिक्षण के मुख्य बिंदु

अधिकारियों को आधुनिक शिकायत प्रबंधन प्रणाली (Grievance Redressal System) के व्यावहारिक उपयोग की जानकारी दी गई। शिकायतों का समय पर निराकरण न होने की स्थिति में उन्हें प्रक्रिया, एल-1 से एल-4 स्तर तक स्वचालित रूप से ट्रांसफर करने की तकनीकी प्रक्रिया समझाई गई। नागरिकों से उनकी संतुष्टि का फीडबैक लेने की पारदर्शी प्रक्रिया के बारे में बताया गया।

इन माध्यमों से दर्ज होगी शिकायत

सुशासन एवं अभिसरण विभाग के संयुक्त सचिव श्री मयंक अग्रवाल ने बताया कि इस सिस्टम से शिकायत निवारण दर और नागरिक संतुष्टि दोनों में तेजी से सुधार आएगा। आगामी लॉन्चिंग के बाद नागरिक टोल-फ्री नंबर 1076 पर कॉल करके, वेब पोर्टल, समर्पित मोबाइल ऐप और व्हाट्सएप के माध्यम से अपनी शिकायतें सीधे दर्ज करा सकेंगे।

“Month of Solar” अभियान में बेहतर प्रदर्शन के लिए मिलेगा पीएम सूर्यघर एक्सीलेंस अवार्ड
मध्यम उपभोक्ता आधार वाले राज्यों की श्रेणी में सर्वाधिक वेंडर रजिस्ट्रेशन में देश में दूसरा स्थान

रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि प्रधानमंत्री सूर्यघर : मुफ्त बिजली योजना के अंतर्गत आयोजित “Month of Solar” अभियान में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया जाना राज्य के लिए अत्यंत गौरव और प्रसन्नता का विषय है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि राज्य में स्वच्छ ऊर्जा, ऊर्जा आत्मनिर्भरता और जनहितकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन की दिशा में किए जा रहे सतत प्रयासों का प्रमाण है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि मध्यम उपभोक्ता आधार वाले राज्यों की श्रेणी में सर्वाधिक वेंडर रजिस्ट्रेशन के मामले में छत्तीसगढ़ ने देश में द्वितीय स्थान प्राप्त किया है, जिसके लिए राज्य का चयन पीएम सूर्यघर एक्सीलेंस अवार्ड हेतु किया गया है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि ऊर्जा क्षेत्र में राज्य की सक्रियता, योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और जनसहभागिता का सकारात्मक परिणाम है।
मुख्यमंत्री साय ने इस महत्वपूर्ण उपलब्धि के लिए ऊर्जा विभाग, क्रेडा, विद्युत वितरण कंपनियों, सभी अधिकारियों, कर्मचारियों तथा सहयोगी संस्थाओं को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि टीमवर्क, प्रतिबद्धता और बेहतर समन्वय के कारण छत्तीसगढ़ राष्ट्रीय स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित कर रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के कुशल नेतृत्व और मार्गदर्शन में राज्य सरकार ऊर्जा आत्मनिर्भर, पर्यावरण अनुकूल और हरित छत्तीसगढ़ के निर्माण के संकल्प को पूरी प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ा रही है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने वाले ऐसे प्रयास प्रदेश के नागरिकों को आर्थिक राहत देने के साथ-साथ स्वच्छ एवं सतत विकास की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

मुख्यमंत्री ने हितग्राहियों को वितरित किए विभिन्न योजनाओं के लाभ: ग्रामीणों से किया आत्मीय संवाद
सुशासन का संदेश लेकर गांव-गांव पहुंच रही सरकार, योजनाओं की जमीनी हकीकत जानने स्वयं पहुंचे मुख्यमंत्री

रायपुर / शौर्यपथ / प्रदेशव्यापी सुशासन तिहार के अंतर्गत मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज बीजापुर जिले के सुदूर वनांचल क्षेत्र स्थित ग्राम कोण्डापल्ली पहुंचे। मुख्यमंत्री ने यहां आयोजित जनचौपाल में ग्रामीणों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं, योजनाओं के क्रियान्वयन की जमीनी स्थिति जानी तथा शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थियों से मुलाकात कर उनके जीवन में आए सकारात्मक बदलावों की जानकारी ली।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सुशासन तिहार केवल एक प्रशासनिक अभियान नहीं, बल्कि सरकार और जनता के बीच विश्वास को और मजबूत करने का माध्यम है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि शासन की योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे और किसी भी जरूरतमंद को अपने अधिकारों एवं सुविधाओं के लिए भटकना न पड़े। इसी भावना के साथ सरकार स्वयं गांव-गांव पहुंचकर लोगों की समस्याएं सुन रही है और उनके समाधान का प्रयास कर रही है।
जनचौपाल के दौरान मुख्यमंत्री ने विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए स्टॉलों का अवलोकन किया तथा हितग्राहियों को वनाधिकार मान्यता पत्र, जाति एवं निवास प्रमाण पत्र, प्रधानमंत्री आवास योजना, श्रम कार्ड, किसान हितग्राही योजनाओं सहित विभिन्न योजनाओं के तहत लाभ वितरित किए। उन्होंने लाभार्थियों से चर्चा कर योजनाओं के प्रभाव और उनके अनुभवों की जानकारी भी प्राप्त की।
मुख्यमंत्री साय ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि ग्रामीण क्षेत्रों से प्राप्त आवेदनों एवं शिकायतों का प्राथमिकता के आधार पर समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि किसी भी योजना की वास्तविक सफलता तब मानी जाएगी जब उसका लाभ पात्र व्यक्ति तक सही समय पर पहुंचे और आमजन को शासन की संवेदनशीलता का अनुभव हो।
मुख्यमंत्री ने ग्रामीणों को आश्वस्त किया कि उनकी समस्याओं के समाधान के लिए सरकार पूरी प्रतिबद्धता और संवेदनशीलता के साथ कार्य कर रही है तथा क्षेत्र के विकास में कोई कमी नहीं आने दी जाएगी।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बस्तर सहित प्रदेश के दूरस्थ और वनांचल क्षेत्रों में विकास की नई धारा पहुंचाना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। सुशासन तिहार के माध्यम से शासन लोगों के द्वार तक पहुंच रहा है, जिससे न केवल समस्याओं का त्वरित निराकरण हो रहा है, बल्कि शासन के प्रति आमजन का विश्वास भी लगातार मजबूत हो रहा है।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के विशेष सचिव रजत बंसल सहित अन्य गणमान्यजन उपस्थित थे।

बीजापुर-पूवर्ती मार्ग पर बना आधुनिक बेली ब्रिज: कनेक्टिविटी और विकास को मिली नई गति

 जहां कभी दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियां विकास की राह में चुनौती बनती थीं, वहां आज आधुनिक अधोसंरचना नए अवसरों के द्वार खोल रही है।

     रायपुर / शौर्यपथ / प्रदेशव्यापी सुशासन तिहार के अंतर्गत मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज बीजापुर जिले के सुदूर वनांचल क्षेत्र स्थित ग्राम कोण्डापल्ली पहुंचकर बीजापुर-पूवर्ती मार्ग पर निर्मित बेली ब्रिज का निरीक्षण किया। उन्होंने पुल की निर्माण तकनीक, उपयोगिता और क्षेत्र के विकास में उसकी भूमिका की जानकारी लेते हुए इसे बदलते बस्तर की नई तस्वीर का प्रतीक बताया।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सड़क, पुल और अन्य आधारभूत सुविधाएं केवल निर्माण कार्य नहीं हैं, बल्कि वे दूरस्थ क्षेत्रों को शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और विकास की मुख्यधारा से जोड़ने वाले मजबूत माध्यम हैं। राज्य सरकार का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि विकास की पहुंच समाज के अंतिम व्यक्ति तक हो।

कम समय, कम लागत और अधिक मजबूती की तकनीक
भारतीय सीमा सड़क संगठन (BRO) द्वारा निर्मित यह बेली ब्रिज बीजापुर-पूवर्ती सड़क परियोजना का महत्वपूर्ण हिस्सा है। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को बताया कि बेली ब्रिज पारंपरिक पुलों की तुलना में अधिक किफायती, मजबूत और टिकाऊ होते हैं। इनका निर्माण सामान्य पुलों की अपेक्षा लगभग पांच गुना कम लागत में किया जा सकता है तथा इन्हें मात्र एक माह के भीतर तैयार किया जा सकता है। दुर्गम और संवेदनशील क्षेत्रों में त्वरित कनेक्टिविटी स्थापित करने के लिए यह तकनीक अत्यंत प्रभावी सिद्ध हो रही है।

बीजापुर में 21 बेली ब्रिज बने विकास के वाहक
उल्लेखनीय है कि बीजापुर जिले में अब तक 21 बेली ब्रिजों का निर्माण किया जा चुका है। इन पुलों के निर्माण से दूरस्थ गांवों तक आवागमन सुगम हुआ है तथा लोगों को आवागमन, स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा और आवश्यक सुविधाओं तक पहुंच में बड़ी राहत मिली है। इन संरचनाओं ने क्षेत्र में विकास और जनसेवाओं के विस्तार को नई गति प्रदान की है।
मुख्यमंत्री ने श्रमिकों की मेहनत और समर्पण की सराहना करते हुए कहा कि राज्य के श्रमिक और युवा ही विकास यात्रा के वास्तविक निर्माणकर्ता हैं। उन्होंने श्रमिकों का उत्साहवर्धन करते हुए उनके अनुभव भी साझा किए।

बदलते बस्तर की नई पहचान
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि बस्तर में अधोसंरचना विकास के माध्यम से नई संभावनाओं का निर्माण हो रहा है। कोण्डापल्ली का यह बेली ब्रिज केवल एक पुल नहीं, बल्कि विकास, विश्वास और सुशासन का सशक्त प्रतीक है। यह उस नए बस्तर की पहचान है, जहां विकास अब दूरस्थ गांवों और दुर्गम अंचलों तक मजबूती से पहुंच रहा है तथा लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रहा है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की पुनर्वास नीति का असर, आत्मसमर्पित दंपत्ति की किराना दुकान बनी विकसित छत्तीसगढ़ की नई पहचान

रायपुर/बीजापुर / शौर्यपथ /
कभी शासन व्यवस्था के खिलाफ हथियार उठाने वाले हाथ आज मेहनत और आत्मनिर्भरता की मिसाल बन चुके हैं। जिन आंखों में कभी व्यवस्था के प्रति अविश्वास और संघर्ष की छाया थी, उन्हीं आंखों में अब सम्मानजनक जीवन, रोजगार और बेहतर भविष्य के सपने दिखाई दे रहे हैं। बीजापुर जिले के सुदूर वनांचल स्थित कोण्डापल्ली गांव में सोमवार को देखने को मिला यह दृश्य केवल एक भावनात्मक क्षण नहीं था, बल्कि बदलते बस्तर और विकसित छत्तीसगढ़ की उस सोच का जीवंत प्रमाण था जिसे मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की सरकार धरातल पर साकार करने का दावा करती रही है।
प्रदेशव्यापी सुशासन तिहार के तहत मुख्यमंत्री विष्णु देव साय जब कोण्डापल्ली में आयोजित चौपाल के लिए जा रहे थे, तभी उनका काफिला अचानक एक छोटी-सी किराना दुकान के सामने रुक गया। बाहर से सामान्य दिखने वाली इस दुकान के भीतर संघर्ष, परिवर्तन और पुनर्वास की एक ऐसी कहानी मौजूद थी, जिसने मुख्यमंत्री को भी प्रभावित कर दिया।
यह दुकान आत्मसमर्पित दंपत्ति मासा तामो और जयमोती की थी, जिन्होंने कभी नक्सल संगठन का हिस्सा रहते हुए वर्षों तक जंगलों में जीवन बिताया था। आज वही दंपत्ति मुख्यधारा में लौटकर स्वरोजगार के माध्यम से सम्मानजनक जीवन जी रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने खरीदी पानी की बोतल, बढ़ाया आत्मविश्वास
मुख्यमंत्री दुकान के भीतर पहुंचे और दोनों से आत्मीयता के साथ बातचीत की। उन्होंने उनके संघर्ष, आत्मसमर्पण और वर्तमान जीवन के बारे में जानकारी ली। इस दौरान मुख्यमंत्री ने दुकान से पानी की बोतल खरीदी और कहा कि आत्मनिर्भरता ही नए जीवन की सबसे बड़ी पहचान है।
यह दृश्य प्रतीकात्मक रूप से बेहद महत्वपूर्ण था। यह केवल एक ग्राहक और दुकानदार का संवाद नहीं था, बल्कि शासन और समाज के बीच विश्वास की उस नई डोर का प्रतीक था जो वर्षों के संघर्ष के बाद बस्तर में मजबूत होती दिखाई दे रही है।

बंदूक से रोजगार तक का कठिन सफर
मासा तामो का जीवन बचपन से ही कठिनाइयों से भरा रहा। कम उम्र में पिता का निधन हो गया और आर्थिक अभावों के कारण शिक्षा प्राप्त नहीं कर सके। वर्ष 2007 में परिस्थितियों के दबाव में वह नक्सली संगठन से जुड़ गए।
दूसरी ओर जयमोती का जीवन भी संघर्षों से अछूता नहीं रहा। बचपन में माता-पिता को खोने के बाद जीवन की विषम परिस्थितियों ने उन्हें भी उसी राह पर पहुंचा दिया। संगठन में दोनों की मुलाकात हुई और वर्ष 2021 में उन्होंने विवाह किया।
समय के साथ दोनों ने महसूस किया कि हिंसा का रास्ता न तो उनके जीवन को बेहतर बना सकता है और न ही आने वाली पीढ़ियों का भविष्य सुरक्षित कर सकता है। इसी सोच के साथ उन्होंने अक्टूबर 2025 में आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटने का ऐतिहासिक निर्णय लिया।

पुनर्वास केंद्र ने बदली जिंदगी की दिशा
आत्मसमर्पण के बाद बीजापुर पुनर्वास केंद्र ने दोनों के जीवन को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यहां उन्हें पहली बार अक्षर ज्ञान प्राप्त हुआ, कौशल विकास प्रशिक्षण मिला और विभिन्न शासकीय योजनाओं से जोड़ा गया।
शासन द्वारा उनके लिए राशन कार्ड, आधार कार्ड, आयुष्मान कार्ड, मनरेगा जॉब कार्ड, जाति प्रमाण पत्र, बैंक खाता सहित आवश्यक दस्तावेज तैयार कराए गए। महिला एवं बाल विकास विभाग की सक्षम योजना के तहत जयमोती को एक लाख रुपये का ऋण स्वीकृत हुआ।
इसी सहायता के बल पर कोण्डापल्ली में एक छोटी-सी किराना दुकान की शुरुआत हुई, जो आज उनके परिवार की आजीविका का प्रमुख आधार बन चुकी है।

अब हथियार नहीं, मेहनत और सम्मान है पहचान
मुख्यमंत्री से बातचीत के दौरान मासा और जयमोती ने बताया कि अब वे सामान्य नागरिकों की तरह सम्मानपूर्वक जीवन जी रहे हैं। दुकान से होने वाली आय से परिवार का खर्च चल रहा है और भविष्य को लेकर नई उम्मीदें जगी हैं। उन्होंने कहा कि कभी कल्पना भी नहीं की थी कि जीवन में ऐसा परिवर्तन आएगा, लेकिन सरकार की पुनर्वास नीति, प्रशासनिक सहयोग और समाज के विश्वास ने उन्हें नई पहचान और नया जीवन दिया है।

मुख्यमंत्री बोले— यह सिर्फ दो लोगों की कहानी नहीं, बदलते बस्तर की कहानी है
"मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि मासा तामो और जयमोती की कहानी केवल दो व्यक्तियों के जीवन परिवर्तन की कहानी नहीं है, बल्कि पूरे बस्तर के बदलते स्वरूप का प्रतिबिंब है।"
उन्होंने कहा कि जब किसी व्यक्ति को अवसर, विश्वास, सुरक्षा और सम्मान मिलता है तो वह हिंसा का रास्ता छोड़कर विकास की मुख्यधारा में शामिल हो सकता है। यही राज्य सरकार की पुनर्वास नीति का उद्देश्य भी है।

संपादकीय दृष्टि: विकसित छत्तीसगढ़ की सबसे बड़ी तस्वीर
कोण्डापल्ली की यह छोटी-सी दुकान शायद आर्थिक दृष्टि से बहुत बड़ी न हो, लेकिन सामाजिक और मानवीय दृष्टि से यह विकसित छत्तीसगढ़ की सबसे बड़ी तस्वीरों में से एक है। यह वह परिवर्तन है जिसमें बंदूक की जगह रोजगार ने ली है, भय की जगह विश्वास ने और संघर्ष की जगह सम्मानजनक जीवन ने।
बस्तर में सड़क, बिजली, पानी और भवन निर्माण विकास के महत्वपूर्ण संकेतक हैं, लेकिन किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था की सबसे बड़ी सफलता तब मानी जाती है जब हिंसा छोड़कर लोग स्वेच्छा से विकास और लोकतंत्र की मुख्यधारा में लौटें।
कोण्डापल्ली में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का एक छोटी-सी दुकान पर रुकना और वहां से पानी खरीदना केवल एक प्रशासनिक कार्यक्रम का हिस्सा नहीं था, बल्कि यह संदेश था कि नया बस्तर अब बंदूक नहीं, व्यापार; संघर्ष नहीं, विश्वास; और अलगाव नहीं, विकास की भाषा बोल रहा है।

गाजियाबाद के खोड़ा में 17 वर्षीय छात्र की निर्मम हत्या से पूरे देश में आक्रोश, प्रशासन ने दिखाई सख्ती; एनकाउंटर, गिरफ्तारियां और अवैध संपत्तियों पर कार्रवाई जारी

नई दिल्ली / एजेंसी /
उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले के खोड़ा थाना क्षेत्र स्थित नवनीत विहार में 17 वर्षीय छात्र सूर्या चौहान की नृशंस हत्या के बाद पुलिस और प्रशासन ने अभूतपूर्व तेजी दिखाते हुए आरोपियों के खिलाफ ताबड़तोड़ कार्रवाई शुरू कर दी है। महज कुछ दिनों के भीतर मुख्य आरोपी का एनकाउंटर, साजिशकर्ता पिता की गिरफ्तारी और अवैध संपत्तियों पर बुलडोजर कार्रवाई की तैयारी ने पूरे मामले को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना दिया है।
क्या था पूरा मामला?
28 मई 2026 को 11वीं कक्षा के छात्र सूर्या चौहान पर कुछ आरोपियों ने चाकुओं से हमला कर दिया था। गंभीर रूप से घायल सूर्या को अस्पताल ले जाया गया, जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। घटना के बाद क्षेत्र में भारी आक्रोश फैल गया और लोगों ने आरोपियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की।
मुख्य आरोपी असद एनकाउंटर में ढेर
पुलिस जांच में सामने आया कि हत्या का मुख्य आरोपी असद था। 31 मई की तड़के गाजियाबाद पुलिस ने चेकिंग के दौरान उसे रोकने का प्रयास किया। पुलिस के अनुसार आरोपी ने फायरिंग शुरू कर दी, जिसके जवाब में हुई मुठभेड़ में वह घायल हुआ और बाद में अस्पताल में उसकी मौत हो गई। इस कार्रवाई में एक पुलिसकर्मी भी घायल हुआ।
हत्या का मास्टरमाइंड निकला आरोपी का पिता
जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि इस जघन्य हत्याकांड के पीछे आरोपी असद का पिता नवाब मुख्य साजिशकर्ता था। पुलिस के अनुसार उसी ने बेटे को हत्या के लिए उकसाया और पूरी योजना बनाई। पुलिस ने नवाब समेत फरहान और आतिफ को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि अन्य फरार आरोपियों की तलाश जारी है।
अवैध संपत्ति पर चलेगा बुलडोजर
गाजियाबाद विकास प्राधिकरण और जिला प्रशासन ने आरोपी असद तथा उसके परिवार की संपत्तियों की जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में अवैध निर्माण पाए जाने पर नोटिस जारी कर दिया गया है। प्रशासन ने परिवार को जवाब देने और स्वयं अतिक्रमण हटाने के लिए 15 दिन का समय दिया है। निर्धारित अवधि पूरी होने के बाद बुलडोजर कार्रवाई की जाएगी।
'ऑपरेशन क्लीन स्वीप' के तहत बड़ी कार्रवाई
हत्याकांड के बाद खोड़ा क्षेत्र में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन ने विशेष अभियान शुरू किया है। ड्रोन कैमरों, आधुनिक तकनीक और पुलिस टीमों की सहायता से हिस्ट्रीशीटरों एवं संदिग्ध अपराधियों के ठिकानों पर लगातार छापेमारी की जा रही है। अपराध से अर्जित संपत्तियों को भी चिन्हित किया जा रहा है।
अफवाहों से सावधान रहने की अपील
सोशल मीडिया पर सूर्या हत्याकांड के दिन गाजियाबाद में एक अन्य हत्या की अफवाह भी फैलाई गई। जांच में स्पष्ट हुआ कि वायरल वीडियो जनवरी 2025 की एक पुरानी घटना का था, जिसे वर्तमान मामले से जोड़कर भ्रामक तरीके से प्रसारित किया गया। पुलिस ने नागरिकों से अफवाहों पर ध्यान न देने और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करने की अपील की है।
पीड़ित परिवार को सहायता
राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन ने पीड़ित परिवार को हर संभव सहायता का भरोसा दिलाया है। सूर्या चौहान के बड़े भाई को नौकरी देने तथा क्षेत्र के किसी प्रमुख मार्ग अथवा चौराहे का नाम सूर्या चौहान के नाम पर रखने की घोषणा भी की गई है।
शौर्यपथ विशेष
सूर्या चौहान हत्याकांड केवल एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि कानून-व्यवस्था की परीक्षा बन गया है। जिस तेजी से पुलिस और प्रशासन ने कार्रवाई की है, उसने स्पष्ट संदेश दिया है कि निर्दोष की हत्या करने वालों के लिए कानून के शिकंजे से बच पाना आसान नहीं होगा। अब पूरे प्रदेश की नजर इस बात पर है कि फरार आरोपियों की गिरफ्तारी और न्यायिक प्रक्रिया कितनी तेजी से पूरी होती है।

शौर्यपथ विशेष विश्लेषण

लोकतंत्र में मीडिया को चौथा स्तंभ कहा जाता है। उसकी भूमिका सरकार का प्रचारक बनने की नहीं, बल्कि जनता और सत्ता के बीच जवाबदेही का सेतु बनने की होती है। लेकिन जब किसी पत्रकार, एंकर या मीडिया संस्थान पर निष्पक्षता खोने के आरोप लगने लगते हैं, तब उसका असर केवल उसकी व्यक्तिगत साख तक सीमित नहीं रहता, बल्कि सरकार, लोकतंत्र और पूरे मीडिया जगत पर पड़ता है।

पिछले कुछ वर्षों में देश में एक नई बहस उभरी है। बहस यह कि क्या कुछ टीवी एंकरों की शैली और प्रस्तुति ने पत्रकारिता की विश्वसनीयता को नुकसान पहुँचाया है? सोशल मीडिया पर बार-बार यह आरोप लगाया जाता रहा है कि कुछ प्रमुख चेहरे सत्ता से कठिन सवाल पूछने के बजाय विपक्ष को घेरने में अधिक सक्रिय दिखाई देते हैं।

हालिया शिक्षा संबंधी विवाद ने इस बहस को और तेज कर दिया। लाखों छात्रों और डिजिटल शिक्षा मंचों से जुड़े लोगों ने इसे केवल एक टिप्पणी का मामला नहीं माना, बल्कि इसे उस मानसिकता का प्रतीक बताया जिसमें जमीनी मुद्दों से अधिक महत्व टीवी बहसों को दिया जाता है।

सरकार को भी हो सकता है नुकसान

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि किसी भी सरकार के लिए सबसे उपयोगी मीडिया वह होता है जो उसकी उपलब्धियों को दिखाने के साथ-साथ कमियों की ओर भी ईमानदारी से ध्यान दिलाए। जब जनता को यह महसूस होने लगता है कि मीडिया का एक वर्ग केवल बचाव की भूमिका निभा रहा है, तब उसका असंतोष केवल मीडिया तक सीमित नहीं रहता बल्कि सरकार तक भी पहुँचता है।

यही कारण है कि कई बार सरकार के समर्थक माने जाने वाले कुछ मीडिया चेहरों की कार्यशैली अंततः सरकार की छवि के लिए भी चुनौती बन सकती है। जनता सवाल पूछने वाले पत्रकार को सम्मान देती है, लेकिन पक्षकार बनते दिखने वाले पत्रकार पर संदेह करने लगती है।

डिजिटल युग में बदल गया समीकरण

आज सूचना का स्रोत केवल टीवी चैनल नहीं हैं। यूट्यूब, सोशल मीडिया और स्वतंत्र डिजिटल प्लेटफॉर्म लाखों लोगों तक सीधे पहुँच रहे हैं। ऐसे माहौल में यदि मुख्यधारा मीडिया की विश्वसनीयता पर प्रश्न उठते हैं तो उसका लाभ वैकल्पिक मंचों को मिलता है।

यही वजह है कि अब पत्रकारिता की सबसे बड़ी पूंजी टीआरपी नहीं बल्कि भरोसा बन चुकी है।

लोकतंत्र के लिए चेतावनी

पत्रकारिता का उद्देश्य सत्ता का विरोध करना नहीं, बल्कि सत्ता से जवाबदेही सुनिश्चित करना है। उसी प्रकार पत्रकारिता का उद्देश्य सत्ता का बचाव करना भी नहीं है। जब मीडिया किसी एक छवि में बंध जाता है तो उसकी विश्वसनीयता प्रभावित होती है और लोकतांत्रिक विमर्श कमजोर होता है।

निष्कर्ष

देश में प्रेस की स्वतंत्रता, मीडिया की विश्वसनीयता और लोकतांत्रिक संवाद को मजबूत करने के लिए आवश्यक है कि पत्रकारिता तथ्यों, संतुलन और जवाबदेही के सिद्धांतों पर कायम रहे। किसी भी सरकार की सबसे बड़ी ताकत आलोचना से बचना नहीं, बल्कि आलोचना सुनकर स्वयं को बेहतर बनाना होती है। और किसी भी पत्रकार की सबसे बड़ी पहचान सत्ता के निकट होना नहीं, बल्कि जनता के विश्वास के योग्य बने रहना है।

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