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नई दिल्ली / शौर्यपथ / उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में 17 साल की मासूम की रेप के बाद हत्या किए जाने को लेकर कांग्रेस ने राज्य की योगी सरकार पर निशाना साधा है.कांग्रेस का कहना है कि राज्य में महिला सुरक्षा की स्थिति बहुत खराब हो चुकी है. कांग्रेस नेता प्रिंयका गांधी वाड्रा ने लखीमपुर खीरी की घटना का जिक्र करते हुए यूपी की राज्यपाल आनंदी बेन पटेल को लिखा है कि यूपी में ऐसा अब रोज हो रहा है..
बता दें कि पुलिस ने 17 साल की लड़की का भी रेप होने की पुष्टि की है जिसका कटा हुआ शव गांव में मंगलवार सुबह मिला था. पहले पुलिस ने कहा था कि लड़की की धारदार हथियार से हत्या की गई है और उसकी गर्दन पर चोट के निशान हैं. उसका शव उसके गांव से करीब 200 मीटर दूर एक सूखे तालाब के पास पड़ा मिला था. लखीमपुर खीरी में दस दिन के अंदर रेप और हत्या का यह दूसरा मामला है.
कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने आज यूपी की राज्यपाल को कहा, 'लखीमपुर में एक ऑनलाइन फॉर्म भरने के लिए जा रही थी. यूपी में अब रोज ऐसा हो रहा है और आशा है आप इसकी गंभीरता को समझेंगी और संज्ञान में लेंगी.'
लड़की के परिजनों के मुताबिक वह सोमवार को घर से निकली थी. वह पास के शहर में स्कॉकरशिप का फार्म भरने के लिए गई थी. जब वह घर नहीं आई तो फिर पुलिस को सूचना दी गई. लड़की के घर पर उसके चाचा ने मीडिया से कहा कि ''मैं वास्तव में कुछ नहीं जानता, किस पर संदेह है, कुछ नहीं कह सकता. वह सोमवार को सुबह करीब साढ़े आठ बजे गई थी. हमें किसी पर शक नहीं है.''
लखीमपुर खीरी में दस दिन के अंदर कम उम्र की लड़की से रेप और हत्या की यह दूसरी वारदात है. इससे पहले 15 अगस्त को एक 13 साल की लड़की की रेप के बाद हत्या कर दी गई थी. उसका शव गन्ने के खेत में मिला था. इस मामले में उसके गांव के दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है. लड़की के पिता ने आरोप लगाया था कि उसका गला काटा गया था. उसकी आंखें छिल गई थीं और उसकी जीभ कटी हुई थी. पुलिस ने इन आरोपों से इनकार किया था.
शौर्यपथ / अधिकतर लोग हैं जिन्हें कि भूख नहीं लगती है, ऐसे में उन्हें कई तरह की सेहत समस्याओं का सामना करना पड़ता है, जैसे कमजोरी लगना, वेट लॉस जैसी समस्याएं सामने आती हैं। यदि आप भी उन लोगों में शुमार हैं तो हम आपको कुछ ऐसे टिप्स बता रहे हैं जिनके उपयोग से आप इन समस्याओं से निजात पा सकते हैं। आइए जानते हैं-
कहते हैं कि जो लोग वजन कम करना चाहते हैं, उन्हें छोटी प्लेट में खाना खाना चाहिए, वहीं जो लोग वजन बढ़ाना चाहते हैं तो उन्हें बड़ी प्लेट में खाना खाना चाहिए। कम-कम लेकिन ज्यादा बार खाने से आपके शरीर में और खाना खाने की इच्छा पैदा होगी। छोटे-छोटे बैच में खाना खाने का एक लाभ यह भी होगा कि आपको एकदम पेट भरा हुआ नहीं लगेगा
स्वास्थ्य के लिए हेल्दी स्नैक्स लेते रहने से फायदा ये होगा कि लंच का समय या डिनर का समय आने तक आपको अच्छी भूख लगने लगेगी। घर के अलग-अलग हिस्से जैसे जहां आप काम करते है, किचन या आप जहां ज्यादा समय बिताते है।
हेल्दी स्नैक्स वहां रखें ऐसे में आपका मन होगा कुछ न कुछ खाने का लेकिन इस बात का भी ख्याल रखें कि ये स्नैक्स आप लंच या डिनर से ठीक पहले न खाएं।
मसालेदार खाने कि खूशबू अच्छी आती है और स्वादिष्ट भोजन कि खूशबू
का सीधा संबंध आपकी भूख से होता है। अच्छे खाने की सुगंध आपको भूख का एहसास कराती है। इसके अलावा खाने को हरा धनिया या दूसरी चीजों से सजाने से वह अच्छा दिखता है। इससे भी उसे खाने की इच्छा पैदा होती है।
लाइफस्टाइल / शौर्यपथ / पीरियड्स देरी से आने की समस्या कई महिलाओं व युवतियों को होती है। आज हम आपको बता रहे हैं कुछ ऐसे सामान्य कारण जो इस समस्या की वजह हो सकते है। अगर महिलाएं इन 5 कारणों की जानकारी रखें, तो अपने पीरियड्स को नियमित कर सकती है -
1 कम या अधिक उम्र में माहवारी की शरुआत होना कई बार माहवारी में अनियमिता पैदा करता है, जो कि सामान्य बात है। समय के साथ ये
नियमन हो हाती है, अत: चिंता की बात नहीं है।
2 वजन का अत्यधिक बढ़ना या मोटापा भी माहवारी में अनियमितता का एक प्रमुख कारण है। कई बार यह समस्या थायरॉइड के कारण होती है, अत: डॉक्टर की सलाह लेना आवश्यक है।
3 हमारी दिनचर्या और खानपान में बदलाव के कारण भी कई बार माहवारी देरी से आने की समस्या होती है। ऐसे में अपनी जीवनशैली और डाइट को व्यवस्थित कर आप इसे नियमित कर सकते हैं।
4 माहवारी देरी से होने का एक गंभीर कारण पॉलिसिस्टिक ओवरी सिड्रोम हो सकता है, अत: ऊपर दिए गए कारणों के अलावा अगर ऐसा होता है तो इसकी जांच जरूर करवाएं।
5 तनाव एवं जरूरत से ज्यादा एक्सरसाइज भी माहवारी को प्रभावित करने वाला एक बड़ा कारण है। ओवरी यानि अंडाशय पर सिस्ट अर्थात आवरण बन जाने के कारण भी अक्सर ऐसा होता है।
सेहत / शौर्यपथ / आयुर्वेद में नीम को औषधि बताया गया है। सौंदर्य से लेकर सेहत तक सभी में नीम बेहद गुणकारी माना जाता है, वहीं चेहरे पर मुंहासे हो या पेट संबंधी कोई भी समस्या नीम की पत्तियों से कई फायदे होते हैं। वहीं संक्रमण से निजात दिलाने के लिए नीम की पत्तियां बहुत महत्वपूर्ण मानी जाती हैं। तो आइए जानते हैं नीम के बेहतरीन सेहत और सौंदर्य लाभ के बारे में।
यदि चेहरे पर मुंहासे की समस्या है तो नीम आपके बहुत काम आ सकता है। इसके लिए आप नियमित रूप से नीम के जूस के सेवन से इस परेशानी से राहत पा सकते हैं। आपको बस करना यह है कि नीम की पत्तियों को अच्छी तरह से धो व पीसकर इसका जूस तैयार कर लें और इसका नियमित सेवन करें। ऐसा करने से आपका खून साफ होगा तथा त्वचा में निखार आएगा, मुंहासे की समस्या खत्म हो जाएगी।
दांतों को मजबूत करने के लिए नीम की दातून खूब फायदेमंद होती है। इससे दांतदर्द से आराम भी मिलता है, साथ ही दांतों में चमक भी आती है।
रूखे व बेजान बालों से छुटकारा पाने के लिए आप नीम के पत्तों को उबालकर इसमें तेल मिलाएं। फिर इसे अपने बालों पर लगाएं। इससे बालों में चमक तो आएगी ही, साथ ही बाल झड़ने की समस्या भी खत्म हो जाएगी।
मुंहासों के दाग-धब्बों से परेशान हैं तो नीम का फेसमास्क इसके लिए बहुत फायदेमंद है। फेसपैक के लिए आप नीम की पत्तियों को अच्छी तरह से पीसकर इसका पेस्ट बना लें और इसे नियमित रूप से अपने चेहरे पर लगाएं। इसका इस्तेमाल करने से चेहरे पर चमक आएगी, साथ ही मुंहासे के दाग भी हल्के होने लगेंगे।
सिरदर्द, दांत दर्द, हाथ-पैर दर्द और सीने में दर्द की समस्या होने पर नीम के तेल की मालिश से काफी लाभ मिलता है। इसके फल का उपयोग कफ और कृमिनाशक के रूप में किया जाता है।
नीम की पत्तियों को पीसकर जलने या घाव पर लगाने से दर्द और घाव जल्दी भर जाता है।
सेहत / शौर्यपथ / हम आपको बता रहे हैं ऐसी चीजों के बारे में जिनका सेवन यदि आप रात के समय करते हैं तो सेहत के लिए हानिकारक हो सकता है। जहां तक संभव हो इन 8 चीजों को रात के समय खाने से बचें -
1 स्नैक्स - रात के वक्त कुछ चीजें खाने से आप तौबा ही करें तो बेहतर होगा। इनमें स्नैक्स या चिप्स जैसी चीजें भी शामिल है। हालांकि इनका सेवन दिन के वक्त भी नुकसानदेह ही होता है। दरअसल इनमें अत्यधिक मात्रा में मोनोसोडियम ग्लूटामेट होता है, जो आपको नींद संबंधी समस्याएं देने के साथ ही, अन्य स्वास्थ्य परेशानियां भी दे सकता है।
2 एल्कोहल - रात को सोने से ठीक पहले किसी भी प्रकार का नशा या अल्कोहल का सेवन आपके लिए बेहद हानिकारक हो सकता है। यह आपकी नींद को भी प्रभावित कर सकता है। खास तौर से वाइन नींद की गुणवत्ता को खराब करती है नींद के समय को कम कर देती है। इसमें कैलोरी भी बहुत अधिक मात्रा में होती है।
3 पिज्जा - अक्सर रात के वक्त पार्टी या बाहर जाकर खाने में लोग पिज्जा पसंद करते हैं। लेकिन इसे पचाने में आपके पाचन तंत्र को काफी मेहनत करनी पड़ती है। इसके अलावा पिज्जा में चिकनाई बहुत अधिक होती है और इसमें जो सॉस व अन्य मसाले प्रयोग किए जाते हैं, वे आपके लिए हार्टबर्न का खतरा बढ़ा देते हैं। इसलिए कोशिश करें कि रात के वक्त इसका प्रयोग बिल्कुल न करें।
4 बर्गर - सोने से पहले बर्गर खाना भी सेहत के लिए हानिकारक होता है। बर्गर में चीज व सॉस का प्रयोग कर हम इसे भले ही इसका स्वाद बढ़ा लेते हैं, लेकिन यही चीजें पेट में प्राकृतिक एसिड के उत्पादन को बढ़ाती हैं, जिससे हार्टबर्न की समस्या हो सकती है। इसलिए कोशिश करें की चीज और सॉस से युक्त बर्गर का सेवन न ही करें।
5 पास्ता - पास्ता कैलोरी से भरपूर होता है,और इसमें सबसे अधिक कैलोरी होती है। इसमें अधिक मात्रा में कार्बोहाइड्रेट होता है जो वसा में बदल जाता है। इसके अलावा इसे चीज और अन्य फैटी चीजों के साथ बनाया जाता है जिससे इसका ग्लासिमिक सूचकांक बहुत अधिक होता है। रात के समय इसका प्रयोग हृदय और पाचन तंत्र के लिए हानिकारक होता है।
6 ऐसी सब्जियां - कुछ सब्जियों में अघुलनशील फाइबर की मात्रा अधिक होती है, जो लंबे समय तक आपका पेट भरा रखती है, और पाचन तंत्र धीमी गति से कार्य करने लगता है। ऐसे में आपको गैस या पाचन संबंधी अन्य समस्याएं हो सकती है। ऐसी सब्जियों को रात के वक्त खाने से बचना चाहिए। प्याज, ब्रोकोली, पत्तागोभी आदि सब्जियां इनमें शामिल है।
7 रेड मीट - रेड मीट प्रोटीन और आयरन का स्रोत है। लेकिन इसका अधिक सेवन करने से आपको बेचैनी हो सकती है और यह आपकी नींद को भी प्रभावित कर सकता है। तो अगर आप शांति से गहरी नींद लेना चाहते हैं, तो रात में रेड मीड को नजरअंदाज करें।
8 डॉर्क चॉकलेट - डार्क चॉकलेट में बहुत अधिक मात्रा में कैफीन व अन्य उत्तेजक पदार्थ होते हैं, जो हृदय को आराम देने के बजाए कार्यशील रखते हैं तथा मस्तिष्क को केंद्रित रखते हैं। इससे आपकी नींद बुरी तरह से प्रभावित हो सकती है।
मनोरंजन / शौर्यपथ / एक ओर जहां अपनी बहुप्रतीक्षित कॉमेडी फिल्म में विक्की कौशल और मानुषी छिल्लर के एक साथ काम करने को लेकर यशराज फिल्म्स ने चुप्पी साध रखी है, वहीं दूसरी तरफ इन दोनों एक्टरों ने मौके के मुताबिक एक ऐसा कदम उठाया है, जिसके चलते दोनों के साथ काम करने की अफवाहों को जोर मिलने लगा है।
विक्की कौशल और मानुषी छिल्लर ने एक-दूसरे को सोशल मीडिया पर फॉलो करना शुरू कर दिया है। इनकी इस गतिविधि से यह खबर जंगल में आग की तरह फैल गई कि दोनों वायआरएफ की आगामी कॉमेडी फिल्म में साथ काम करने जा रहे हैं।
फिल्म कारोबार से जुड़े एक सूत्र का कहना है, विक्की और मानुषी पक्के तौर पर वायआरएफ की कॉमेडी फिल्म में साथ काम करने जा रहे हैं, वरना वे इस तरह अचानक एक-दूसरे को फॉलो करना क्यों शुरू करते? उनकी फिल्म बहुप्रतीक्षित जश्न 'वायआरएफ प्रोजेक्ट 50' का हिस्सा है और आदित्य चोपड़ा 27 सितंबर को साल 2021 के लिए वायआरएफ की पूरी सूची के साथ इस फिल्म की घोषणा करना चाहते हैं।
विक्की को यशराज फिल्म्स में आते-जाते भी देखा गया है क्योंकि उन्होंने फिल्म के लिए अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं। आदि इस प्रोजेक्ट को लेकर बेहद उत्साहित हैं और उन्होंने इस कॉमेडी के साथ विक्की पर बड़ा दांव लगाया है।
खेल / शौर्यपथ / किंग्स इलेवन पंजाब के कप्तान लोकेश राहुल का कहना है कि उन्हें ओपनिंग बल्लेबाजी करना पसंद है और वह इस स्थान पर बल्लेबाजी कर अच्छा महसूस करते हैं। इसकी वजह यह है कि मैंने टी-20 में कुल 1461 रन में से 1022 रन ओपनिंग करते हुए बनाए हैं।
राहुल ने आईपीएल के पिछले सत्र में उन्होंने 14 मुकाबलों में 593 रन बनाए थे। आईपीएल का 13वां सत्र 19 सितंबर से 10 नवंबर तक संयुक्त अरब अमीरात में किया जाएगा। राहुल का मानना है कि ओपनिंग करने से उन्हें पूरे 20 ओवर खेलने का मौका मिलता है, जिसका बेहतर प्रभाव पड़ता है।
राहुल ने आईपीएल की वेबसाइट पर वीडियो रिलीज कर कहा, सलामी बल्लेबाज के तौर पर बल्लेबाजी मैं शुरुआत से करता आया हूं और इस स्थान पर बल्लेबाजी करने से मुझे बेहतर महसूस होता है। इससे मुझे पूरे 20 ओवर खेलने का मौका मिलता है, जिसका मेरी बल्लेबाजी पर अच्छा प्रभाव पड़ता है।
उन्होंने कहा, मैंने किंग्स इलेवन पंजाब के लिए दो अच्छे सत्र बिताए हैं और मैं उम्मीद करुंगा कि आगे भी अपनी टीम की जीत में अहम योगदान दूं।
धर्म संसार / शौर्यपथ / क्या है श्री गणेश और संगीत का रिश्ता
हिन्दू धर्म का नृत्य, कला, योग और संगीत से गहरा नाता रहा है। हिन्दू धर्म मानता है कि ध्वनि और शुद्ध प्रकाश से ही ब्रह्मांड की रचना हुई है। भारत में संगीत की परंपरा अनादिकाल से ही रही है।
हिन्दुओं के लगभग सभी देवी और देवताओं के पास अपना एक अलग वाद्य यंत्र है। विष्णु के पास शंख है तो शिव के पास डमरू, नारद मुनि और सरस्वती के पास वीणा है, तो भगवान श्रीकृष्ण के पास बांसुरी। देवर्षि नारद के हाथों में एकतारा हमेशा रहता है। खजुराहो के मंदिर हो या कोणार्क के मंदिर, प्राचीन मंदिरों की दीवारों में गंधर्वों की मूर्तियां आवेष्टित हैं। उन मूर्तियों में लगभग सभी तरह के वाद्य यंत्र को दर्शाया गया है। गंधर्वों और किन्नरों को संगीत का अच्छा जानकार माना जाता है।
सामवेद उन वैदिक ऋचाओं का संग्रह मात्र है, जो गेय हैं। संगीत का सर्वप्रथम ग्रंथ चार वेदों में से एक सामवेद ही है। इसी के आधार पर भरत मुनि ने नाट्यशास्त्र लिखा और बाद में संगीत रत्नाकर, अभिनव राग मंजरी लिखा गया। दुनियाभर के संगीत के ग्रंथ सामवेद से प्रेरित हैं।
गणेशजी का वाद्ययंत्र ढोल : गणेशजी को मूर्ति और उनके चित्रों में वीणा, सितार और ढोल बाजाते हुए दर्शाया जाता है। कहीं कहीं पर उन्हें बांसुरी बजाते हुए भी चित्रित किया गया है। वैसे गणेशजी भी संगीत प्रेमी हैं। अक्सर तो उन्हें ढोल व मृदंग बजाते हुए ही चित्रित किया गया है। ढोल सागर ग्रंथ के अनुसार ब्रह्मा, विष्णु और महेश ने ढोल का निर्माण किया था। कहते हैं कि विष्णुजी ने तांबा धातु को गलाया और ब्रह्माजी ने उस ढोल में ब्रह्म कनौटी लगाई और ढोल के दोनों ओर सूर्य और चंद्रमा के रूप में खालें लगाई गईं।
जब ढोल बन गया तो भगवान शंकर ने खुश होकर नृत्य किया तब उनके पसीने से एक कन्या 'औजी' पैदा हुई जिन्हें इस ढोल को बजाने की जिम्मेदारी दी गई। कहते हैं कि औजी ने ही इस ढोल को उलट-पलट कर चार शब्द- वेद, बेताल, बाहु और बाईल का निर्माण किया था।
श्री गणेश के ये 7 दुर्लभ धन मंत्र आपको कहीं नहीं मिलेंगे
श्रीगणेश के कई मंत्र हैं जो गणेशोत्सव के 10 दिनों में भक्तों द्वारा जपे जाते हैं... वेबदुनिया के पाठकों के लिए हम पुराणों से लाए हैं 7 दुर्लभ धन मंत्र... ये गणेश धन मंत्र निश्चित रुप से असरकारी हैं...
* श्रीपतये नमः,
* रत्नसिंहासनाय नमः
* मणिकुंडलमंडिताय नमः
* महालक्ष्मी प्रियतमाय नमः
* सिद्ध लक्ष्मी मनोरहप्रियाय नमः
* लक्षाधीश प्रियाय नमः
* कोटिधीश्वराय नमः
भगवान श्री गणेश इस समय घर-घर में विराजित हैं,आइए जानते हैं कि लम्बोदर विनायक को कौन से मंत्र से प्रसन्न करें....
1. ॐ सुमुखाय नम:,
2. ॐ एकदंताय नम:,
3. ॐ कपिलाय नम:,
4. ॐ गजकर्णाय नम:,
5. ॐ लंबोदराय नम:,
6. ॐ विकटाय नम:,
7. ॐ विघ्ननाशाय नम:,
8. ॐ विनायकाय नम:,
9. ॐ धूम्रकेतवे नम:,
10. ॐ गणाध्यक्षाय नम:,
11. ॐ भालचंद्राय नम:,
12. ॐ गजाननाय नम:।
श्रीगणेश को प्रिय है यह गणेश कुबेर मंत्र
मंत्र - 'ॐ नमो गणपतये कुबेर येकद्रिको फट् स्वाहा'।
गणेशोत्सव में प्रतिदिन इस मंत्र की एक माला (108 बार मंत्र जाप) करने से मनुष्य के धन संबंधी सारे संकट दूर होते हैं।
श्री गणेश के 108 नामों के हिन्दी अर्थ
भारतीय धर्म और संस्कृति में भगवान गणेशजी सर्वप्रथम पूजनीय और प्रार्थनीय हैं। उनकी पूजा के बगैर कोई भी मंगल कार्य शुरू नहीं होता। उनकी पूजा के दौरान इन 108 नामों का जपने से सभी तरह के मांगलिक कार्य के विघ्न हट जाते हैं।
गणेश नामावली-108
1. बाल गणपति : सबसे प्रिय बालक।
2. भालचन्द्र : जिसके मस्तक पर चंद्रमा हो।
3. बुद्धिनाथ : बुद्धि के भगवान।
4. धूम्रवर्ण : धुएं को उड़ाने वाला।
5. एकाक्षर : एकल अक्षर।
6. एकदन्त : एक दांत वाले।
7. गजकर्ण : हाथी की तरह कान वाला।
8. गजानन : हाथी के मुख वाले भगवान।
9. गजवक्र : हाथी की सूंड वाला।10. गजवक्त्र : जिसका हाथी की तरह मुंह है।
11. गणाध्यक्ष : सभी गणों का मालिक।
12. गणपति : सभी गणों के मालिक।
13. गौरीसुत : माता गौरी का बेटा।
14. लम्बकर्ण : बड़े कान वाले देव।
15. लम्बोदर : बड़े पेट वाले।
16. महाबल : अत्यधिक बलशाली वाले प्रभु।
17. महागणपति : देवातिदेव।18. महेश्वर : सारे ब्रह्मांड के भगवान।
19. मंगलमूर्ति : सभी शुभ कार्य के देव।
20. मूषक वाहन : जिसका सारथी मूषक है।
21. निदीश्वरम : धन और निधि के दाता।
22. प्रथमेश्वर : सबके बीच प्रथम आने वाला।
23. शूपकर्ण : बड़े कान वाले देव।
24. शुभम : सभी शुभ कार्यों के प्रभु।
25. सिद्धिदाता : इच्छाओं और अवसरों के स्वामी।
26. सिद्धिविनायक : सफलता के स्वामी।
27. सुरेश्वरम : देवों के देव।
28. वक्रतुण्ड : घुमावदार सूंड।
29. अखूरथ : जिसका सारथी मूषक है।
30. अलम्पता : अनन्त देव।
31. अमित : अतुलनीय प्रभु।
32. अनन्तचिदरुपम : अनंत और व्यक्ति चेतना।
33. अवनीश : पूरे विश्व के प्रभु।
34. अविघ्न : बाधाओं को हरने वाले।
35. भीम : विशाल।
36. भूपति : धरती के मालिक।
37. भुवनपति : देवों के देव।
38. बुद्धिप्रिय : ज्ञान के दाता।
39. बुद्धिविधाता : बुद्धि के मालिक।
40. चतुर्भुज : चार भुजाओं वाले।
41. देवादेव : सभी भगवान में सर्वोपरि।
42. देवांतकनाशकारी : बुराइयों और असुरों के विनाशक।
43. देवव्रत : सबकी तपस्या स्वीकार करने वाले।
44. देवेन्द्राशिक : सभी देवताओं की रक्षा करने वाले।
45. धार्मिक : दान देने वाला।
46. दूर्जा : अपराजित देव।
47. द्वैमातुर : दो माताओं वाले।
48. एकदंष्ट्र : एक दांत वाले।
49. ईशानपुत्र : भगवान शिव के बेटे।
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50. गदाधर : जिसका हथियार गदा है।
51. गणाध्यक्षिण : सभी पिंडों के नेता।
52. यशस्कर : प्रसिद्धि और भाग्य के स्वामी।
53. गुणिन : जो सभी गुणों के ज्ञानी।
54. हरिद्र : स्वर्ण के रंग वाला।
55. हेरम्ब : मां का प्रिय पुत्र।
56. कपिल : पीले भूरे रंग वाला।
57. कवीश : कवियों के स्वामी।
58. कीर्ति : यश के स्वामी।
59. कृपाकर : कृपा करने वाले।
60. कृष्णपिंगाश : पीली भूरी आंख वाले।
61. क्षेमंकरी : माफी प्रदान करने वाला।
62. क्षिप्रा : आराधना के योग्य।
63. मनोमय : दिल जीतने वाले।
64. मृत्युंजय : मौत को हरने वाले।
65. मूढ़ाकरम : जिनमें खुशी का वास होता है।
66. मुक्तिदायी : शाश्वत आनंद के दाता।
67. नादप्रतिष्ठित : जिसे संगीत से प्यार हो।
68. नमस्थेतु : सभी बुराइयों और पापों पर विजय प्राप्त करने वाले।
69. नन्दन : भगवान शिव का बेटा।
70. सिद्धांथ : सफलता और उपलब्धियों के गुरु।
71. पीताम्बर : पीले वस्त्र धारण करने वाला।
72. प्रमोद : आनंद।
73. पुरुष : अद्भुत व्यक्तित्व।
74. रक्त : लाल रंग के शरीर वाला।
75. रुद्रप्रिय : भगवान शिव के चहेते।
76. सर्वदेवात्मन : सभी स्वर्गीय प्रसाद के स्वीकार्ता।
77. सर्वसिद्धांत : कौशल और बुद्धि के दाता।
78. सर्वात्मन : ब्रह्मांड की रक्षा करने वाला।
79. ओमकार : ओम के आकार वाला।
80. शशिवर्णम : जिसका रंग चंद्रमा को भाता हो।
81. शुभगुणकानन : जो सभी गुण के गुरु हैं।
82. श्वेता : जो सफेद रंग के रूप में शुद्ध है।
83. सिद्धिप्रिय : इच्छापूर्ति वाले।
84. स्कन्दपूर्वज : भगवान कार्तिकेय के भाई।85. सुमुख : शुभ मुख वाले।
86. स्वरूप : सौंदर्य के प्रेमी।
87. तरुण : जिसकी कोई आयु न हो।
88. उद्दण्ड : शरारती।
89. उमापुत्र : पार्वती के बेटे।
90. वरगणपति : अवसरों के स्वामी।
91. वरप्रद : इच्छाओं और अवसरों के अनुदाता।
92. वरदविनायक : सफलता के स्वामी।
93. वीर गणपति : वीर प्रभु।
94. विद्यावारिधि : बुद्धि के देव।
95. विघ्नहर : बाधाओं को दूर करने वाले।
96. विघ्नहर्ता : बुद्धि की देव।
97. विघ्नविनाशन : बाधाओं का अंत करने वाले।
98. विघ्नराज : सभी बाधाओं के मालिक।
99. विघ्नराजेन्द्र : सभी बाधाओं के भगवान।
100. विघ्नविनाशाय : सभी बाधाओं का नाश करने वाला।
101. विघ्नेश्वर : सभी बाधाओं के हरने वाले भगवान।
102. विकट : अत्यंत विशाल।
103. विनायक : सबका भगवान।
104. विश्वमुख : ब्रह्मांड के गुरु।
105. विश्वराजा : संसार के स्वामी।
105. यज्ञकाय : सभी पवित्र और बलि को स्वीकार करने वाला।
107. यशस्विन : सबसे प्यारे और लोकप्रिय देव।
108. योगाधिप : ध्यान के प्रभु।
भगवान गणेश जी का संपूर्ण परिचय
भगवान गणेशजी को भारतीय धर्म और संस्कृति में प्रथम पूज्य देवता माना जाता है। उनकी पूजा के बगैर कोई भी मंगल कार्य शुरू नहीं होता। सभी मांगलिक कार्य में पहले गणेश जी की स्थापना और स्तुति की जाती है। आओ जानते हैं भगवान गणेशजी के संबंध में संपूर्ण परिचय।
गणेश जन्म : माता पार्वती द्वारा पुण्यक व्रत के फलस्वरूप गणेशजी का जन्म हुआ था। बाद के पुराणों में उनके जन्म के संबंध में कहा गया है माता ने अपनी सखी जया और विजया के कहने पर एक गण की उत्पति अपने मैल से की थी। जन्म समय माथुर ब्राह्मणों के इतिहास अनुसार अनुमानत: 9938 विक्रम संवत पूर्व भाद्रपद माह की शुक्ल चतुर्थी को मध्याह्न के समय हुआ था। पौराणिक मत के अनुसार सतुयग में हुआ था।
गणेश जन्म स्थान : उत्तरकाशी जिले के डोडीताल को गणेशजी का जन्म स्थान माना जाता है। यहां पर माता अन्नपूर्णा का प्राचीन मंदिर हैं जहां गणेशजी अपनी माता के साथ विराजमान हैं। डोडीताल, जोकि मूल रूप से बुग्याल के बीच में काफी लंबी-चौड़ी झील है, वहीं गणेश का जन्म हुआ था। यह भी कहा जाता है कि केलसू, जो मूल रूप से एक पट्टी है (पहाड़ों में गांवों के समूह को पट्टी के रूप में जाना जाता है) का मूल नाम कैलाशू है। इसे स्थानीय लोग शिव का कैलाश बताते हैं। केलसू क्षेत्र असी गंगा नदी घाटी के सात गांवों को मिलाकर बना है। गणेश भगवान को स्थानीय बोली में डोडी राजा कहा जाता हैं जो केदारखंड में गणेश के लिए प्रचलित नाम डुंडीसर का अपभ्रंश है। मान्यता अनुसार डोडीताल क्षेत्र मध्य कैलाश में आता था और डोडीताल गणेश की माता और शिव की पत्नी पार्वती का स्नान स्थल था। स्वामी चिद्मयानंद के गुरु रहे स्वामी तपोवन ने मुद्गल ऋषि की लिखी मुद्गल पुराण के हवाले से अपनी किताब हिमगिरी विहार में भी डोडीताल को गणेश का जन्मस्थल होने की बात लिखी है। वैसे कैलाश पर्वत तो यहां से सैंकड़ों मील दूर है परंतु स्थानीय लोग मानते हैं कि एक समय यहां माता पार्वती विहार पर थी तभी गणेशजी का जन्म हुआ था।
गणेश के नाम : कहते हैं कि गणेशजी का मूल नाम विनायक है। इसके बाद गणेश और गणों के ईश गणपति हुए। देव समुदाय ने उन्हें गांगेय कहकर सम्मान दिया और ब्रह्मा जी ने उन्हें गणों का आधिपत्य प्रदान करके गणेश नाम दिया। दुनिया के प्रथम धर्मग्रंथ ऋग्वेद में भी भगवान गणेशजी का जिक्र है। ऋग्वेद में 'गणपति' शब्द आया है। यजुर्वेद में भी ये उल्लेख है। बाद के नाम किसी न किसी कथा से जुड़े हैं। गणेशजी नाम : सुमुख, एकदन्त, कपिल, गजकर्णक, लम्बोदर, विकट, विघ्ननाशक, विनायक, धूम्रकेतु, गणाध्यक्ष, भालचन्द्र, विघ्नराज, द्वैमातुर, गणाधिप, हेरम्ब, गजानन, अरुणवर्ण, गजमुख, लम्बोदर, अरण-वस्त्र, त्रिपुण्ड्र-तिलक, मूषकवाहन। उन्हें एकदंत इसलिए कहा जाता है क्योंकि परशुरामजी ने उनका एक दांत तोड़ दिया था। उन्हें गजानन इसलिए कहा जाता है क्योंकि वे गज (हाथी) के मुख के थे।
गणेश जी का मस्तक : उन्हें गजानन इसलिए कहा गया कि उनके सिर को भगवान शंकर ने काट दिया था। बाद में उनके धड़ पर हाथी का सिर लगा कर उन्हें पुन: जीवित किया गया। यह भी कहा जाता है कि शनिदेव जब बाल गणेश को देखने गए तो उनकी दृष्टि से उनका मस्तक भस्म हो गया था बाद में विष्णुजी ने एक हाथी का सिर उनके धड़ पर लगाकर उन्हें पुनर्जिवित कर दिया था।
अग्रपूजक कैसे बने : एक बार देवताओं में धरती की परिक्रमा की प्रतियोगिता हुई जिसमें जो सबसे पहले परिक्रमा करके आ जाता उसे सर्वश्रेष्ठ माना जाता। प्रतियोगिता प्रारंभ हुई परंतु गणेश जी का वाहन तो मूषक था तब उन्होंने अपनी बुद्धि का प्रयोग किया और उन्होंने अपने माता पिता शिव एवं पार्वती की ही परिक्रमा कर ली। ऐसा करके उन्होंने संपूर्ण ब्रह्माण्ड की ही परिक्रमा कर ली। तब सभी देवों की सर्वसम्मति और ब्रह्माजी की अनुशंसा से उन्हें अग्रपूजक माना गया। इसके पीछे और भी कथाएं हैं। पंच देवोपासना में भगवान गणपति मुख्य हैं।
गणेश जी का परिवार : उनकी माता का नाम पार्वती और पिता का नाम शिव। भाई कार्तिकेय और बहन अशोक सुंदरी है। उनकी पत्नी प्रजापति विश्वकर्मा की पुत्री ऋद्धि और सिद्धि हैं। सिद्धि से 'क्षेम' और ऋद्धि से 'लाभ' नाम के दो पुत्र हुए। लोक-परंपरा में इन्हें ही शुभ-लाभ कहा जाता है। शुभ और लाभ के पुत्र आमोद और प्रमोद हैं।
गणेशजी की पसंद : उनका प्रिय भोग मोदक लड्डू, प्रिय पुष्प लाल रंग के फूल, प्रिय वस्तु दुर्वा (दूब), प्रिय वृक्ष शमी-पत्र, केल, केला आदि हैं। केसरिया चंदन, अक्षत, दूर्वा अर्पित कर कपूर जलाकर उनकी पूजा और आरती की जाती है। उनको मोदक का लड्डू अर्पित किया जाता है। उन्हें रक्तवर्ण के पुष्प विशेष प्रिय हैं।
गणेशजी का स्वरूप : जल तत्व के अधिपति, बुधवार और चतुर्थी के स्वामी और केतु एवं बुध के ग्रहाधिपति गणेश जी के प्रभु अस्त्र पाश और अंकुश है। वे मूषक वाहन पर सवार रहते हैं। वे एकदन्त और चतुर्बाहु हैं। अपने चारों हाथों में वे क्रमश: पाश, अंकुश, मोदक पात्र तथा वरमुद्रा धारण करते हैं। वे रक्तवर्ण, लम्बोदर, शूर्पकर्ण तथा पीतवस्त्रधारी हैं। वे रक्त चंदन धारण करते हैं।
भगवान गणेशजी का सतयुग में वाहन सिंह है और उनकी भुजाएं 10 हैं तथा नाम विनायक। श्री गणेशजी का त्रेतायुग में वाहन मयूर है इसीलिए उनको मयूरेश्वर कहा गया है। उनकी भुजाएं 6 हैं और रंग श्वेत। द्वापरयुग में उनका वाहन मूषक है और उनकी भुजाएं 4 हैं। इस युग में वे गजानन नाम से प्रसिद्ध हैं और उनका वर्ण लाल है।कलियुग में उनका वाहन घोड़ा है और वर्ण धूम्रवर्ण है। इनकी 2 भुजाएं हैं और इस युग में उनका नाम धूम्रकेतु है।
गणेशजी के जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण प्रसंग : मस्तक प्रसंग, पृथ्वी प्रदक्षिणा प्रसंग, मूषक (गजमुख) वाहन प्राप्ति प्रसंग, गणेश विवाह प्रसंग, संतोषी माता उत्पत्ति प्रसंग, विष्णु विवाह में उन्हें नहीं बुलाने का प्रसंग, असुर (देवतान्तक, सिंधु दैत्य, सिंदुरासुर, मत्सरासुर, मदासुर, मोहासुर, कामासुर, लोभासुर, क्रोधासुर, ममासुर, अहंतासुर) वध प्रसंग, महाभारत लेखन प्रसंग आदि। उन्होंने अपने भाई कार्तिकेय के साथ कई युद्धों में लड़ाई की थी।
गणेश ग्रंथ : गणेश का गाणपतेय संप्रदाय है। उनके ग्रंथों में गणेश पुराण, गणेश चालीसा, गणेश स्तुति, श्रीगणेश सहस्रनामावली, गणेशजी की आरती, संकटनाशन गणेश स्तोत्र, गणपति अथर्वशीर्ष, गणेशकवच, संतान गणपति स्तोत्र, ऋणहर्ता गणपति स्तोत्र, मयूरेश स्तोत्र आदि।
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नई दिल्ली / शौर्यपथ / व्यापार, कूटनीति और सैन्य आक्रामकता किसी भी मोर्चे पर भारत चीन से नही झुकेगा। चीन को हर मोर्चे पर उसी की भाषा मे जवाब देने की तैयारी की गई है। कूटनीतिक स्तर पर ताइवान और हांगकांग में फंसा चीन भारत से 'वन चाइना पॉलिसी' पर ठोस आश्वासन चाहता है। ताइवान के मुद्दे पर अमेरिकी रुख को भारत का परोक्ष समर्थन चीन को नागवार लगा है। लेकिन भारत ने स्पष्ट संकेत दिया है कि अगर चीन को भारत की संवेदनशीलता का भी ध्यान रखना चाहिए।
सत्ताधारी दल के दो सांसदों के ताईवान राष्ट्रपति के शपथ समारोह में शामिल होने पर भी चीन ने आपत्ति जताई थी। मीनाक्षी लेखी और राहुल कासवान ताइवान के राष्ट्रपति त्साई इंग-वेन के शपथ ग्रहण समारोह में वर्चुअल माध्यम से शामिल हुए थे।
चीन हुआ बेचैन:
दिल्ली में चीनी दूतावास के काउंसलर लियू बिंग ने समारोह में भारत की भागीदारी के खिलाफ विरोध दर्ज कराया। इसके लिए उन्होंने सांसद लेखी और कासवान के सामने लिखित शिकायत भी दी, जिसमें उन्होंने दोनों सांसदों की तरफ से दिए गए बधाई संदेश को गलत बताया है। इस कार्यक्रम में अमेरिकी विदेश मंत्री सहित दुनिया के कई देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए थे।
ताइवान को समर्थन से झुंझलाहट:
सूत्रों ने कहा चीन को व्यापारिक मोर्चे पर झटका लग रहा है। चीन से विदेशी कंपनियां हटना चाहती हैं। कोविड संकट में सार्थक भूमिका की वजह से ताइवान को काफी समर्थन मिला है, जबकि चीन को दुनिया संदेह की नजर से देख रही है। भारत की भूमिका संकट के वक्त बढ़ी है। अमेरिका और भारत की रणनीतिक साझेदारी भी स्पष्ट नजर आई है। इन सबसे चीनी शासन में झुंझलाहट है।
ध्यान भटकाने की कोशिश:
सूत्रों का कहना है कि कई मोर्चो पर उलझा चीन अपने खिलाफ बने माहौल से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहा है। गालवां घाटी में चीन के कदम को भारत चीन की बौखलाहट से जोड़कर देख रहा है। सूत्रों का कहना है कि इस इलाके में कभी भी चीन ने इस तरह का आक्रामक रुख नहीं दिखाया। इसलिए माना जा रहा है कि चीन जानबूझकर दबाव बनाने के लिए इस तरह का कदम उठा रहा है। जिससे वह व्यापार के मोर्चे पर भारत पर दबाव बना सके। साथ ही अमेरिका सहित अन्य देशों की रणनीतिक मोर्चेबंदी से भारत को दूर किया जा सके।
बातचीत जारी, तनाव बरकरार:
सूत्रों ने कहा, पर्दे के पीछे स्थिति सामान्य करने की कोशिश हो रही है। लेकिन भारत ने स्पष्ट संकेत दिया है कि वह अपना कदम पीछे नही खींचेगा। सूत्रों ने बताया कि दोनों पक्षों के बीच करीब 20 दिन तक चले गतिरोध के मद्देनजर भारतीय सेना ने उत्तर सिक्किम, उत्तराखंड, अरुणाचल प्रदेश और लद्दाख में संवेदनशील सीमावर्ती इलाकों में अपनी मौजूदगी उल्लेखनीय ढंग से बढ़ाई है और यह संदेश दिया है कि भारत चीन के किसी भी आक्रामक सैन्य रुख के आगे रुकने वाला नहीं है।
सेक्स वर्कर्स को लेकर कोई ठोस रेगुलेशन न होने के बावजूद भारत में दुनिया के कई बड़े रेड लाइट एरिया हैं. आइए नजर डालते हैं इनमें से कुछ खास पर...
1. सोनागाछी, कोलकाता
इसे एशिया का सबसे बड़ा रेड लाइट एरिया भी कहा जाता है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, यहां करीब 11 हजार सेक्स वर्कर्स काम करती हैं. इनमें कम उम्र से लेकर 40 साल से अधिक उम्र की महिलाएं भी शामिल हैं. यहां सैकड़ों बहुमंजिला इमारते हैं जहां सेक्स वर्कर्स रहती हैं और ग्राहकों का इंतजार करती हैं. सोनागाछी रेड लाइट एरिया के ऊपर बनाई गई डॉक्युमेंट्री Born into Brothels को ऑस्कर अवॉर्ड भी मिल चुका है.

2. कमाठीपुरा, मुंबई
यह देश का दूसरे सबसे बड़ा रेड लाइट एरिया है. 25 साल पहले यहां करीब 50,000 सेक्स वर्कर्स हुआ करती थीं. लेकिन बाद के सालों में इनकी संख्या में कमी आई. जगह की कमी और रहने की दिक्कत की वजह से कई सेक्स वर्कर्स महाराष्ट्र के दूसरे जगहों पर चली गईं. 2005 में डांस बार पर बैन लगने के बाद काफी लड़कियां कोई और रोजगार नहीं मिलने पर सेक्स वर्कर के रूप में यहीं काम करने लगी थीं.

3. बुधवार पेठ, पुणे
यहां करीब 5 हजार सेक्स वर्कर काम कर रही हैं. बुधवार पेठ में करीब 400 कोठे हैं और 7 हजार सेक्स वर्कर्स काम कर रही हैं. यहां दिन में जहां बाजार पसरा होता है, दुकानों की रौनक होती है, उसी जगह पर शाम में सेक्स वर्कर अपने ग्राहकों की तलाश करती हैं.

4. मीरगंज, इलाहाबाद
इलीगल ट्रैफिकिंग के लिए इस रेडलाइट एरिया को अधिक बदनाम माना जाता है. कई बार पुलिस ने यहां कार्रवाई करके महिलाओं को छुड़ाया है. यहां 4 गलियां हैं जहां सेक्स वर्कर रहती हैं. शुरुआत में मीगरगंज में मुजरा का भी आयोजन होता था.
5. जीबी रोड
नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के पास स्थित जीबी रोड रेड लाइट एरिया में करीब 1000 सेक्स वर्कर्स काम करती हैं. दो से तीन मंजिली इमारतों में यहां महिलाएं रहती हैं. इन घरों के निचले फ्लोर में दुकानें हैं. रोड का नाम गार्स्टिन बैस्टन होने की वजह से इसे जीबी रोड कहा जाता है. हालांकि, बाद में सड़क का नाम बदलकर स्वामी श्रद्धानंद मार्ग कर दिया गया, लेकिन लोग इसे जीबी रोड के नाम से ही याद रखे हैं.

6. चतुर्भुज स्थान, मुजफ्फरपुर, बिहार
यहां एक मशहूर मंदिर के पास रेड लाइट एरिया है. यहां सेक्स वर्कर्स प्राचीन काल से ही रह रही हैं. यहां भी काफी संख्या में सेक्स वर्कर्स काम करती हैं.
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
