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June 02, 2026
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शौर्यपथ

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रायपुर / शौर्यपथ / प्रदेश में यूरिया की कमी की खबरों को कांग्रेस ने बेबुनियाद बताया है। प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि यूरिया की कमी की बाते एक भी किसान संगठन या किसान संघो ने नही कहा सिर्फ भाजपा नेता बयान दे रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी के नेता प्रदेश में यूरिया और खाद की कमी का झूठा वातावरण तैयार करने बयानबाजी कर रहे पिछले पंद्रह सालो से राज्य में पनप चुके उर्वरक माफिया को फायदा पहुचाया जा सके। भाजपा के पन्द्रह साल के राज में छत्तीसगढ़ में भाजपा नेताओं का एक बड़ा वर्ग खाद बीज उर्वरको की अफरातफरी में लगा हुआ था। राज्य में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद इस उर्वरक माफिया की दुकानदारी बन्द हो गयी है इसी लिए भाजपा के कुछ वरिष्ठ नेता यूरिया की कमी का बयान देकर बनावटी संकट का माहौल बना रहे ताकि किसान हड़बड़ी में सोसायटियो से यूरिया न लेकर भाजपाई माफिया से महंगे दाम में यूरिया खरीद लें।
प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता ने कहा कि छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार किसानों की हितैषी है इसलिये मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने समय रहते प्रदेश की सभी जिलों की सोसायटियों में मांग के अनुरूप यूरिया और खाद की उपलब्धता करवा दी है। देश के अनेक राज्यों में किसान यूरिया की कमी से जूझ रहे मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, उत्तरप्रदेश, तेलंगाना, आंध्रप्रदेश, हरियाणा में यूरिया की कमी को ले कर रोज बवाल हो रहा है।
कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि राज्यो को यूरिया देना केंद्र का काम है पूरे देश मे यूरिया की सप्लाई सही नही हो रही तो उसके पीछे मोदी सरकार जबाबदेह है। प्रधानमंत्री मोदी ने आकाशवाणी से प्रसारित मन की बात कार्यक्रम में कहा था कि उनकी सरकार आजादी की 75 वी वर्षगांठ 2022 तक देश मे यूरिया की कमी आधा करने की दिशा में काम कर रही है। बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था के केंद्र सरकार राज्यो में किसानी तक यूरिया की सप्लाई का कोटा अघोषित रूप से कम करना शुरू कर दिया है ताकि मोदी द्वारा घोषित यूरिया की खपत कम करने का लक्ष्य 2022 तक पूरा हो सके। कांग्रेस ने छत्तीसगढ़ के किसानों से कहा कि वे फिक्र मत करे राज्य में किसान पुत्र भूपेश बघेल सत्ता में है उनके रहते छत्तीसगढ़ के किसानों का अहित नही हो सकता है।
कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि राज्य के सरगुजा संभाग में जहाँ पर यूरिया संकट का जादा झूठा हल्ला मचाया गया था वहाँ की सोसायटियो में मांग के अनुरूप 18,825 एमटी यूरिया और 18,204 एमटी खाद का स्टॉक एक महीने पहले से पहुच गया है। कोविड के कारण सोशल डिस्टेंसिग का पालन होने सुनिश्चित करने लगवाई गयी, कुछ दुकानों की कतारों को संकट बता कर भाजपाइयों ने भ्रम फैलाने की कुचेस्टा किया है।

- अब ज्यादा सतर्कता के साथ कोविड नियमों का पालन करने स्वास्थ्य विशेषज्ञों की अपील
- कोरोना का प्रभाव गंभीर बीमारी से ग्रसित लोगों पर ज्यादा

रायपुर / शौर्यपथ / प्रदेश में कोरोनावायरस के मामलों को देखते हुए चिकित्सा विशेषज्ञों ने लोगों से और भी ज्यादा सतर्क रहने और नियमों का सख्ती से पालन करने की अपील की है। पहले से बीमार या फिर गंभीर बीमारी से पीड़ित मरीजों को कोविड-19 का खतरा कई गुना ज्यादा हो सकता है, इसलिए स्वास्थ्य विशेषज्ञ लोगों से जागरूक होने और ऐसे व्यक्तियों का विशेष ध्यान रखने पर जोर दे रहे हैं।
   अम्बेडकर अस्पताल के चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि व्यक्ति पहले से किसी गंभीर बीमारी से ग्रसित हैं तो उनपर वायरस का खतरा ज्यादा हो सकता है। चेस्ट एक्सपर्ट डॉ. आर.के. पंडा और हार्ट विशेषज्ञ डॉ. स्मित श्रीवास्तव का कहना है अगर मरीज पहले से ही बीमार है, उन्हें टीबी, मधुमेह (डायबिटीज) हाइपरटेंशन, दिल की बीमारी या फिर लीवर व किडनी की समस्या है तो, सामान्य लोगों की तुलना में इनमें कोविड का खतरा अधिक संभव है। इसलिए ऐसे मरीजों पर विशेष ध्यान देने की जरूरत होती है।
ना करें देर, कराएं जांच- अम्बेडकर अस्पताल के डॉ. आर.के. पंडा का कहना है कोविड-19 संक्रमण से सजग रहकर बचा जा सकता है। यदि किसी व्यक्ति को लगे की वह संदिग्ध व्यक्ति के संपर्क में आए हैं तो उन्हें जांच कराने में देर नहीं करनी चाहिए । उन्हें नजदीकी कोविड जांच केन्द्र में जाकर जांच करानी चाहिए। जब तक रिपोर्ट नहीं आ जाती है तब तक खुद को एकांत में रखें, डॉक्टर से संपर्क कर विटामिन सी, मल्टीविटामिन, जिंक दवा तथा स्टीम लेना चाहिए। इन उपायों से काफी हद तक संक्रमण के खतरे को कम किया जा सकता है।
ऐसे रखें ध्यान - स्वास्थ्य विशेषज्ञों का सुझाव है कि थोड़ी सावधानी रखकर कोविड-19 के संक्रमण से बीमार व्यक्तियों को बचाया जा सकता है। ऐसे व्यक्ति जहां तक संभव हो घर से बाहर नहीं निकलें, घर से बाहर निकलने पर मास्क का उपयोग करें, नियमित रूप से भाप लें, जरूरी होने पर ही घर से निकलें, गर्म पानी पीएं, विटामिन सी, जिंक एवं मल्टीविटामिन युक्त फल, सब्जियां खाएं या दवा लें और गर्म पानी से गरारा भी करें। पहले से चल रही बीमारियों की दवा को बंद ना करें, उन्हें नियमित रूप से लेते रहें।
वचनों का पालन कर कोरोना संक्रमण की करें रोकथाम- सतर्कता कोरोना से बचाव का बेहतर उपाय है। इसके लिए विशेष सावधानी एवं सतर्कता जरुरी है जैसे- मास्क लगाने व 2 गज की शारीरिक दूरी बनाए रखें, बल, सार्वजनिक स्थल हो, किसी ऑफिस के कमरे में अन्य व्यक्तियों के साथ हों या फिर सर्दी, जुकाम हो तो बाहर निकलने से पहले मास्क जरूर लगाएं, छींकते या खांसने समय रूमाल या टिश्यू पेपर का इस्तेमाल करें, बहुत अधिक इस्तेमाल होने वाली सतहों दरवाजे के हैंडल, या ऐसी जगहों का नियमित सफाई जरूरी है, सार्वजनिक या खुले स्थानों पर नहीं थूकें, ऐसा करना दंडनीय अपराध है, बहुत जरूरी हो तभी यात्रा करें, कोवि़ड- 19 संक्रमित या उसके परिवार वालों से भेदभाव नहीं करें सहानुभूति से पेश आएं, अपने स्वास्थ्य की मॉनिटरिंग करने के लिए आरोग्य सेतु ऐप का इस्तेमाल करें, कोविड-19 को लेकर होने वाली चिंताएं या मानसिक दबाव के लिए 08046110007 फ्री हेल्पलाइन नंबर पर बात कर मनोचिकित्सक से सलाह आवश्यक लें।

बालोद / शौर्यपथ / दुर्ग संभाग के कमिश्नर टी.सी.महावर आज कलेक्टर जनमेजय महोबे के साथ गुरूर विकासखण्ड के ग्रामों का भ्रमण कर गौठानों में विभिन्न गतिविधियों का निरीक्षण कर अधिकारियों को आवश्यक दिशा निर्देश दिए। उन्होंने ग्राम चिटौद के गौठान का निरीक्षण किया। उन्होंने मवेशियों को हरा चारा खिलाया। कमिश्नर ने वहाॅ गोधन न्याय योजना के तहत् खरीदे गए गोबर की जानकारी ली। उन्होंने स्वसहायता समूहों से चर्चा कर उनके द्वारा तैयार किए जा रहे वर्मी कम्पोस्ट का अवलोकन किया। स्वसहायता समूहों की सदस्यों ने बताया कि उनके द्वारा अब तक छह क्विंटल वर्मी कम्पोस्ट का विक्रय कर लिया गया है। कमिश्नर ने तैयार वर्मी कम्पोस्ट का अवलोकन कर गुणवत्तापूर्ण वर्मी कम्पोस्ट निर्माण के लिए स्वसहायता समूहों की सराहना की। उन्होंने वहाॅ स्वसहायता समूह से वर्मी कम्पोस्ट खरीदा।
कमिश्नर महावर ने ग्राम चिटौद के गौठान परिसर के चारागाह में लगाए गए नेपीयर घास का अवलोकन किया। चारागाह परिसर में ही स्वसहायता समूहों द्वारा लगाए गए फलदार और सब्जीदार पौधों का अवलोकन किया। उन्होंने वहाॅ गौठान समिति के सदस्यों से भी चर्चा किया। कमिश्नर ने गुरूर विकासखण्ड के ग्राम भोथली के गौठान का निरीक्षण किया। उन्होंने वहाॅ गोबर विक्रेताओं से चर्चा की। गोबर विक्रेताओं ने बताया कि उन्हें गोधन न्याय योजना के तहत बेचे गए गोबर का दो बार भुगतान प्राप्त हो चुका है। कमिश्नर महावर ने गौठान में पानी रूकने नहीं देने तथा पानी निकासी की व्यवस्था के निर्देश दिए। उन्होंने वहाॅ चारागाह का भी अवलोकन किया। इस अवसर पर जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी लोकेश कुमार चन्द्राकर, एस.डी.एम. श्रीमती सिल्ली थाॅमस, जनपद सीईओ राजेन्द्र कुमार पडौति सहित संबंधित अधिकारी मौजूद थे।

भिलाई नगर / शौर्यपथ / रविवार को पूर्णत: लाॅकडाउन होने के कारण इसका उल्लंघन करने वालों के खिलाफ निगम प्रशासन की टीम ने छापामार कार्रवाई की। लाकडाउन में दुकान का आधा शटर खोलकर व्यावसाय करने वाले छोटे-बड़े 11 व्यापारियों से कुल 3800 रूपए जुर्माना वसूल किया गया। वैशाली नगर जोन आयुक्त पूजा पिल्ले के निर्देश पर सहायक राजस्व अधिकारी संजय वर्मा की टीम ने कुरूद, रामनगर, ओम शांति ओम चौक और वैशाली नगर गौरवपथ के मार्केट और गली मोहल्ले के दुकानों का निरीक्षण किया। इस दौरान दुकान का आधा शटर खुला पाए जाने पर व्यापारियों के खिलाफ 200 से 300 रूपए तक अर्थदंड की कार्रवाई की गई और कुल 10 लोगों से 3100 रुपए जुर्माना वसूल किया। जोन-5 की टीम ने मास्क का उपयोग नहीं करने पर मेडिकल संचालक पर 700 रूपए जुर्माना लगाया !

भिलाई नगर / शौर्यपथ / नगर पालिक निगम की टीम ने वार्ड 12 कांट्रेक्टर काॅलोनी में अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई की। निर्माणाधीन कमरे को तोड़ कर बिजली के खंभे को कब्जा मुक्त कराया गया। कब्जाधारी व्यक्ति को अपने पट्टे के अतिरिक्त जमीन के अलावा निगम और शासकीय संपत्ति पर किसी भी प्रकार से कब्जा नहीं करने की हिदायत दी गई। कब्जा की शिकायत मिलने पर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई। जोन -1 के सहायक राजस्व अधिकारी दुबे ने बताया कि कांट्रेक्टर काॅलोनी चौक के पास एक व्यक्ति पट्टे की जमीन के अलावा अतिरिक्त जमीन पर कमरा बना रहा था। जिसकी शिकायत वार्ड के लोगों ने जोन आयुक्त सुनील अग्रहरि से की थी।
जोन आयुक्त के निर्देशानुसार जोन -1 के राजस्व विभाग की टीम ने बेदखली और तोड़फोड़ की कार्रवाई की। कब्जाधारी व्यक्ति ने अपने पट्टे की जमीन के अलावा खाली जमीन पर भी कब्जा करने की नीयत से नींव की खुदाई करवाकर छड़ से काॅलम खड़े कर लिया था। बिजली के पोल को भी अपने कब्जे में ले लिया था। इस वजह से चौक पर अंधा मोड़ बन गया था। वहां से गुजरने वाले राहगीरों को परेशानी का सामना करना पड़ता था। जिसे तोड़कर बिजली के पोल को कब्जा मुक्त कराया गया। तोड़फोड़ टीम में जोन-1 राजस्व विभाग के राजेश गुप्ता, कन्हैया, मंगल, राजेन्द्र शामिल थे।

रायपुर / शौर्यपथ / कोविड-19 को ध्यान में रखते हुए इस बार 35वें राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़ा सोशल डिसटेंसिंग का पालन करते हुए मनाया जाएगा । 25 अगस्त से 8 सितंबर तक जिला व ब्लॉक स्तर के स्वास्थ्य केंद्रों में नेत्रदान के प्रति जागरुक किया जाएगा। इस वर्ष राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़ा-2020 का थीम – “हॉस्पिटल कॉनियल रिट्रेवल प्रोग्राम” पर आधारित है। जिला अस्पताल में 25 अगस्त को सीएमएचओ डॉ. मीरा बघेल, सिविल सर्जन डॉ रवि तिवारी सहित ब्लॉक स्तर के नेत्र रोग अधिकारी इस बार शाम 3 से 4 बजे के बीच वेबीनार के माध्यम से इस पखवाड़े का शुभारंभ करेंगे। देखने का अधिकार मानव के मूल अधिकारों में से एक है। अत: यह आवश्यक है कि कोई भी व्यक्ति अनावश्यक दृष्टिहीन न होने पाए और यदि है तो दृष्टिहीन न रहने पाए। इसी उद्देश्य को लेकर दृष्टिविहीनता कार्यक्रम के तहत बच्चों तथा प्रजनन आयु समूह में आंखें की कार्निया, पुतली से नेत्रहीनता की रोकथाम के लिए राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़ा प्रति वर्ष मनाया जाता है।
जिला अंधत्व नियंत्रण समिति के नोडल अधिकारी डॉ. निधी ग्वारे ने बताया कार्नियल अन्धेपन की समस्याओं को दूर करने के लिए हॉस्पिटल कॉनियल रिट्रेबल प्रोग्राम के अंतर्गत ऐसे मरीज जिनका अस्पताल में मृत्यु होने पर परिजनों को नेत्र दान के लिए प्रेरित किया जाता है। ऐसे मृत शरीर जिनकी उम्र 5 वर्ष से अधिक और 60 वर्ष से कम की अवस्था में मृत्यु होने पर 4-6 घंटे के भीतर कॉनियल निकालने की प्रक्रिया पूरी होनी चाहिए। वहीं 24 घंटे के भीतर जरुरतमंद को ट्रांसप्लांट कर दिया जाता है। केवल ऐसे मृत शरीर से ही नेत्रदान लिया जा सकता हैं जिन्हें गंभीर बीमारी कैंसर, हेपेटाइटीस व एचआईवी एड्स जैसी रोग से ग्रसित नहीं होनी चाहिए।
राष्ट्रीय अंधत्वव नियंत्रण के राज्य कार्यक्रम अधिकारी डॉ. सुभाष मिश्रा ने बताया, कार्नियल अन्धेपन के बचाव व अच्छी दृष्टि के लिए आंखों की देखभाल बहुत जरूरी है। यह पाया गया है कि छोटे बच्चे अक्सर कार्नियल नेत्रहीनता के शिकार होते है। कार्नियल नेत्रहीनता का उपचार केवल किसी व्यक्ति की मृत्यु होने के बाद उसकी आंख के कॉर्निया को खराब कार्निया वाले मरीज की आंख में लगा देने से हो सकता है और उसकी आंख की रोशनी वापस लाई जा सकती है। उसका अंधापन दूर किया जा सकता है। इसे नेत्र प्रत्यारोपण भी कहते है।
उन्होंने बताया नेत्रदान सिर्फ मरणोपरांत ही किया जाता है। किसी परिवार के सदस्य की मृत्यु होने पर परिवार शोकाकुल होता है ऐसी मुश्किल घड़ी में नेत्रदान करना जटिल होता है। ऐसे में समाज के लोग, समाज सेवी, अन्य प्रतिनिधि अहम भूमिका निभा सकते है। डॉ. मिश्रा ने बताया ने प्रदेश में राज्यभर के अस्पतालों में गत वर्ष 2019-20 में 362 नेत्रदान हुए थे। वहीं वर्ष 2018-19 में 360 और वर्ष 2017-18 में 378 नेत्रदान प्राप्त हुए थे। वर्तमान में हम देश में सरकारी और गैर-सरकारी क्षेत्रों में काम करने वाले नेत्र बैंक के प्रयासों से सालाना 60000 से 65000 आँखों का संग्रह नेत्रदान के जरिए प्राप्त हो रहे हैं।
डॉ मिश्रा ने बताया देश में राष्ट्रीय सर्वेक्षण अंधत्व वर्ष 2015-19 की रिपोर्ट के अनुसार देश में अंधेपन के कुल मामलों में कॉर्नियल ब्लाइंडनेस की समस्या लगभग 7.9% बढ़ी है। रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि हर साल लगभग 20,000 नए अंधेपन के मामलों में वृद्वि होती है। देश में प्रति वर्ष लगभग 2 लाख कार्निया की जरूरत होती है। जबकि जागरूकता की वजह से नेत्रदान में अभी भी प्रगति हो रही है लेकिन यह अपर्याप्त है । बड़े शहरों और कस्बों में कॉर्नियल ब्लाइंडनेस के इलाज की सुविधाएँ उपलब्ध हैं। यह सुविधा मेडिकल कॉलेज में आई बैंक द्वारा दी जाती है। कॉर्निया के अंधेपन के रोकथाम के लिए नेत्र प्रत्यारोपण के साथ-साथ कॉर्निया से होने वाले नुकसान को बचाया जाना जरूरी है।
इसके लिए छह वर्ष से कम आयु के बच्चों को विटामिन ए पिलाना अतिआवश्यक है। सभी बच्चों का पूर्ण टीकाकरण कराया जाना आवश्यक है। आंखों को चोट लगने से बचाया जाए और बच्चों को नुकीली वस्तु से न खेलने दें। आंख में संक्रमण होने पर इसका जल्द उपचार कराने के साथ नेत्र चिकित्सक की सलाह लें। यदि ऑखों में कुछ पड़ जाए तो आंख को मलें नही केवल साफ पानी से धोएं, फायदा न होनें पर नेत्र चिकित्सक से जांच करवाएं।

राजनांदगांव / शौर्यपथ / खरीफ विपणन वर्ष 2020-21 में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी किए जाने के पूर्व विगत वर्षों की भांति किसान पंजीयन किया जाना है। खरीफ विपणन वर्ष 2020-21 में नवीन किसान पंजीयन एवं गत खरीफ विपणन वर्ष 2019-20 में पंजीकृत कृषकों का डेटा अद्यतन किए जाने का कार्य 17 अगस्त से 31 अक्टूबर 2020 तक किया जाएगा। राज्य शासन के निर्णय अनुसार विगत खरीफ विपणन वर्ष 2019-20 में धान खरीदी हेतु पंजीकृत किसानों को खरीफ विपणन वर्ष 2020-21 में धान खरीदी के लिए पंजीकृत माना गया है। इसके लिए विगत खरीफ वर्ष 2019-20 में पंजीकृत किसानों की दर्ज भूमि एवं धान के रकबे तथा खसरे को राजस्व विभाग द्वारा अद्यतन किया जाएगा। 

राजनांदगांव / शौर्यपथ / पढ़ई तुंहर दुआर योजना के अंतर्गत हमारे नायक में जगह बना कर जिले के मानपुर ब्लॉक की छात्रा कुमारी ख्याति खंडेलवाल ने जिले का मान बढ़ाया है। गोटाटोला जोन के मीडिया प्रभारी शेख अफजल ने बताया कि कोरोना महामारी के कारण स्कूल बंद है। ऐसे समय मे बच्चों को पढ़ाई से जोड़े रखने के लिए स्कूल शिक्षा विभाग पढ़ई तुंहर दुआर योजना ले कर आई। इस योजना के माध्यम से बच्चे वर्चुअल क्लास से सुरक्षित अपने घरों में रहते हुए पढ़ाई से जुड़े हुए है। इस योजना के प्रचार-प्रसार के लिए स्कूल शिक्षा विभाग ने अपने अधिकारिक वेब पेज पर हमारे नायक नाम से श्रृंखला प्रारंभ की है।
हमारे नायक में पूरे राज्य से उन शिक्षक और छात्रों को जगह मिलती है। जिन्होंने पढ़ई तुंहर दुआर योजना में उल्लेखनीय कार्य किया हो। मानपुर ब्लॉक के शासकीय उच्चतम माध्यमिक शाला मानपुर की छात्रा कुमारी ख्याति खंडेलवाल पूरे जिले में सबसे ज्यादा ऑनलाइन क्लास अटेंड करने वाली विद्यार्थी के रूप में हमारे नायक में जगह बनाने में कामयाब रही। ख्याति की इस कामयाबी में उनके पिता  नितेश खंडेलवाल एवं मां श्रीमती दीपाली खंडेलवाल और भाई संस्कार खंडेलवाल के साथ-साथ उनके शिक्षक अनिता देवांगन और रेणुका का भी महत्वपूर्ण योगदान है।
ख्याति ने बताया कि पढ़ई तुंहर दुआर के ऑनलाइन क्लास से उन्हें बहुत लाभ हुआ और उसे पूरे राज्य के शिक्षकों से सीखने का मौका मिला है। ख्याति ने अपने साथ-साथ अपने सहपाठियों को भी वर्चुअल क्लास के लाभ बता कर उन्हें ऑनलाइन क्लास से जोडऩे का काम किया। मानपुर वनांचल के शासकीय उच्चतर माध्यमिक शाला मानपुर की कक्षा दसवीं की छात्रा कुमारी ख्याति खंडेलवाल का हमारे नायक के रूप में चयन होने पर मोहला-मानपुर के विधायक इंद्र शाह मंडावी, जिला शिक्षा अधिकारी श्री हेतराम सोम, जिला मिशन समन्वयक भूपेश साहू, एपीसी सतीश ब्यौहरे, मानपुर बीईओ नरेंद्र कुमार निरापुरे, बीआरआरसी जाहिदा खान, एबीईओ अरूण कुमार मरकाम और मानपुर ब्लॉक के सभी टीचर्स ने खुशी व्यक्त करते हुए छात्रा ख्याति खंडेलवाल के उज्ज्वल भविष्य की कामना किये है। मानपुर वनांचल की छात्रा का चयन स्टेट लेवल पर हमारे नायक के रूप में होने पर निश्चित रूप से राजनांदगांव जिले का मान पुरे राज्य में बढ़ा है।

नई दिल्ली / शौर्यपथ / कांग्रेस नेता शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा है कि गांधी/नेहरू फैमिली पार्टी के लिए वोट दिलाने वाली रही है और देश के निर्माण में इसका अहम योगदान रहा है, ऐसे में उन्‍हें लगता है कि पार्टी के नेतृत्‍व को लेकर चर्चाओं के बीच सोनिया गांधी को इस समय कार्यकारी अध्‍यक्ष बने रहना चाहिए. 'शॉटगन' के नाम से लोकप्रिय बॉलीवुड एक्‍टर शत्रुघ्न ने यह बात विशेष बातचीत में कही. बातचीत के दौरान उन्‍होंने विभिन्‍न मुद्दों पर खुलकर राय रखी. कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक को लेकर उन्‍होंने यह भी उम्‍मीद जताई कि कांग्रेस के नेतृत्‍व के जुड़े मसला जल्‍द ही सुलझा लिया जाएगा और इसका सर्वसम्‍मत समाधान निकल आएगा.
बीजेपी से कांग्रेस की ओर रुख करने वाले शत्रुघ्न ने कहा, 'मैं इस पार्टी में नवप्रवेशी हूं. मुझे कांग्रेस में आए हुए दो वर्ष भी नहीं हुए हैं. इस लिहाज से मैं टर्निंग नहीं लर्निंग फेस से भी गुजर रहा हूं.' उन्‍होंने कहा कि देश के पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने जो अपील की, उससे मैं पूरी तरह सहमत हूं कि सोनियाजी को कार्यकारी अध्‍यक्ष के रूप में बने रहना चाहिए.शत्रुघ्न यह कहने से भी नहीं चूके कि राहुल गांधी नेशनल आईकॉन हैं, उन्‍हें ट्राई किया जा चुका है और पार्टी के लिए जो कुछ करके दिखाया, उससे इनकार नहीं किया जा सकता लेकिन अभी यह सोचता हूं कि देश के सबसे विद्वान पीएम में से एक मनमोहन सिंहजी ने जो कहा है और सुझाया है कि सोनिया जी को कार्यकारी अध्‍यक्ष बने रहना चाहिए.

यह पूछने पर कि क्‍या कांग्रेस में इस समय बहुत ज्‍यादा खामोशी नहीं है कि किसे पार्टी संभालना चाहिए, इस पर 'शत्रु' ने कहा कि मुझे उम्‍मीद है कि जल्‍द ही इस मसले का समाधान हो जाएगा. कांग्रेस पार्टी को अब अध्‍यक्ष के रूप में 'नॉन गांधी' के बारे में नहीं सोचना चाहिए, इस सवाल पर सिन्‍हा ने कहा, 'क्‍यों नहीं हो सकता. न मैं अध्‍यक्ष पद की दौड़ में हूं, न बनना है और न ही किसी ने मुझे बनाना है लेकिन पार्टी में ऐसी क्षमता रखने वाले कई काबिल लोग है. पत्र लिखा गया तो मैं कहना चाहता हूं कि यह मीडिया के लिए नहीं बल्कि पार्टी के हित में लिखी गई.' उन्‍होंने कहा कि कांग्रेस, इस फैमिली (गांधी/नेहरू) के साथ जुड़े हुए और निर्भर रहे हैं. वे पार्टी को वोट दिलाने वाले और राष्‍ट्र का निर्माण करने वाले हैं. नेहरू जी के नेतृत्‍व में देश का बहुत विकास हुआ, इसके बाद इंदिरा गांधी और राजीव गांधी के प्रधानमंत्री काल में भी काफी काम हुआ.

कांग्रेस पार्टी में इस समय युवा और बुजुर्ग नेताओं को लेकर चल रही बहस को लेकर उन्‍होंने कहा कि यह सही है कि बुजुर्गों को युवाओं के लिए जगह छोड़ना चाहिए और यह जितना जल्‍दी हो बेहतर है. देश को मजबूत कदमों से आगे बढ़ाएं लेकिन इसके साथ भी यह भी कहना चाहूंगा कि यंग जनरेशन के पास जोश और ऊर्जा है लेकिन उनहें अनुभव की भी जरूरत हो. ऐसे में मेरा मानना है कि युवा और बुजुर्गों में समन्‍वय होना चाहिए.

 

नई दिल्ली / शौर्यपथ / समायोजित सकल राजस्व यानी एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू मामले में सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा है. सुप्रीम कोर्ट तीन पहलुओं पर फैसला सुनाएगा. पहला- केंद्र की याचिका जिसमें AGR के भुगतान के लिए 20 साल देने की मांग की गई है, भारती और वोडा-आइडिया ने 15 साल में भुगतान की इजाजत मांगी है. दूसरा क्या स्पेक्ट्रम (या स्पेक्ट्रम का उपयोग करने का अधिकार) IBC के तहत हस्तांतरित, सौंपा या बेचा जा सकता है. और तीसरा कोर्ट ये भी फैसला सुनाएगा कि आरकॉम का स्पैक्ट्रम इस्तेमाल करने पर जियो और वीडियोकॉन और एयरसेल का स्पैक्ट्रम इस्तेमाल करने पर एयरटेल उनकी देयता के आधार पर अतिरिक्त देयता के तहत आएंगे?
टेलीकॉम कंपनियों को समायोजित सकल राजस्व (एजीआर) जमा करने को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने 21 जुलाई को केंद्र की याचिका पर फैसला सुरक्षित रखा था. सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह टेलीकॉम कंपनियों को बकाया राशि की फिर से गणना करने की अनुमति नहीं देगा. कोर्ट ने दूरसंचार विभाग (DoT) को आरकॉम, सिस्तेमा श्याम टेलीसर्विसेज, वीडियोकॉन से संबंधित दिवालापन प्रक्रिया पर 7 दिनों के भीतर ब्योरा देने को कहा था. दूरसंचार विभाग ने मांग की है कि सुप्रीम कोर्ट 20 साल में बकाया राशि वसूलने की अनुमति दे.
दूरसंचार कंपनियों द्वारा बकाया के बारे में विभाग ने शीर्ष अदालत को सूचित किया गया है. एयरटेल ने 18004 करोड़ का भुगतान किया है, बकाया राशि लगभग 25976 करोड़ है. वहीं वोडाफोन-आइडिया ने 7854 करोड़ का भुगतान किया, शेष राशि लगभग 50399 करोड़ है. टाटा टेलीकॉम ने 4197 करोड़ का भुगतान किया. उस पर शेष 12601 करोड़ है.
सुप्रीम कोर्ट ने पूछा, हमें लंबित बकाया पर बेईमानी से व्यवहार करने वाले टेलीकॉम को राहत क्यों देनी चाहिए? वोडाफोन की तरफ से कोर्ट में पेश हुए मुकुल रोहतगी ने कहा, "पिछले 10 वर्षों में भारत के व्यवसायों में पूरे निवेश में घाटा हुआ है. वार्षिक राजस्व, आईटी रिटर्न का विवरण दाखिल किया गया है. एक लाख करोड़ इक्विटी का सफाया हो चुका है."
इस पर कोर्ट ने कहा, "क्या आपने आकस्मिक देयताओं के लिए वार्षिक खातों की व्यवस्था की है? रोहतगी ने जवाब दिया, "हम में सफल रहे इसलिए हमारे पास कोई प्रावधान नहीं था." सुप्रीम कोर्ट ने कहा, दूरसंचार विभाग की मांग के बावजूद आपने बकाया के लिए प्रावधान क्यों नहीं किया? वोडाफोन-आइडिया के वकील ने कहा, "दंड और ब्याज राशि 50 हजार करोड़ को पार कर गई जबकि दूरसंचार विभाग की गणना के अनुसार 14 हजार करोड़ रुपये बकाया था. हमने जो कुछ भी कमाया वह खर्चों में बह गया." इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा, "प्रश्न यह नहीं है कि यदि आप कुछ छिपा रहे हैं, सवाल तो यह है कि आप बकाया का भुगतान कैसे करेंगे?"
बता दें कि पिछली सुनवाई में कोर्ट ने बकाया ना चुकाने वाली टेलीकॉम कंपनियों से 10 साल का बहीखाता मांगा था. साथ ही कंपनियों से यह भी कहा कि 10 साल में दिए गए टैक्स का ब्यौरा भी कोर्ट में दाखिल करें.

देश की सबसे बड़ी अदालत ने केंद्र से कहा कि वो कंपनियों की भुगतान योजना पर विचार करे और कोर्ट को इस संबंध में जानकारी दे. सुनवाई के दौरान जस्टिस एमआर शाह ने कहा कि कोरोना महामारी के दौरान दूरसंचार एकमात्र ऐसा क्षेत्र है जो पैसा कमा रहा है, इसलिए उसे कुछ धनराशि जमा करनी होगी. क्योंकि सरकार को महामारी के इस दौर में पैसे की जरूरत है. सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट में हलफनामा दायर करते हुए बताया कि पीएसयू के खिलाफ एजीआर बकाया को वापस ले लिया गया है. यह भी कहा गया कि 4 लाख करोड़ रुपये का 96% बिल वापस ले लिया गया है.
क्या होता है एजीआर
एजीआर यानी एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू दूरसंचार विभाग की ओर से टेलीकॉम कंपनियों से लिया जाने वाला यूसेज और लाइसेंसिंग फीस है. आंकड़ों के मुताबिक इन कंपनियों पर एजीआर के तहत 1.47 लाख करोड़ रुपये बकाया हैं. भारती एयरटेल पर करीब 35 हजार करोड़ और वोडाफोन-आइडिया पर 53 हजार करोड़ बाकी है. इसके अलावा कुछ अन्य कंपनियों पर बकाया है.

सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल अक्टूबर में टेलीकॉम कंपनियों के मामले में केंद्र की एजीआर की परिभाषा को स्वीकार करते हुए इन टेलीकॉम कंपनियों को कुल 1.47 लाख करोड़ रुपये का सांविधिक बकाये का भुगतान करने का आदेश दिया था. सरकार ने इन दूरसंचार कंपनियों के लिए एजीआर बकाया के भुगतान को 20 साल में सालाना किस्तों में चुकाने का प्रस्ताव रखा था.

 

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