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June 02, 2026
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शौर्यपथ

शौर्यपथ

दुर्ग / शौर्यपथ / महिला डीएसपी अनामिका जैन श्रीवास्तव द्वारा की गई  सार्वजनिक रूप से बेईज्जत और मारपीट  की घटना जवान औलाद के सामने होना एक माँ को बर्दास्त नहीं हुआ और माँ ने अपने अपमान को मौत के रूप में गले लगा लिया . प्राप्त जानकारी के अनुसार  पूरा   मामला भिलाई 3 थाना क्षेत्र के वार्ड 23 आदर्श नगर चरोदा का है। मृतिका के पति द्वारा छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल 3री बटालियन अमलेश्वर मे पदस्थ, सेक्टर 1 सड़क 11 निवासी महिला डीएसपी अनामिका जैन श्रीवास्तव एवं उनकी सहेली पर आरोप लगाया है कि डीएसपी और उसकी सहेली द्वारा प्रताडि़त किये जाने और जवान बेटी के सामने मारपीट को बर्दास्त ना कर पाने के  कारण उसकी पत्नी ने आत्महत्या की है। इसलिए तत्काल महिला डीएसपी को निलंबित किया जाए एवं महिला डीएसपी सहित उनकी सहेली और डीएसपी के पति कमल श्रीवास्तव को गिरफ्तार किया जाए। जबकि मोहल्ले वासियों के द्वारा डीएसपी के खिलाफ  अपराध कायम करने की मांँग की है। माँंग पूरी ना होने की स्थिति में चक्का जाम करने की चेतावनी दी गई है। मामले में पुलिस मर्ग कायम कर विवेचना कर रही है। भिलाई 3 पुलिस ने बताया कि, वार्ड 23 आदर्श नगर चरोदा निवासी के सुखविंदर 40 वर्ष अपने मकान में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। मृतका का पति रायपुर स्थित एकनिजी कंपनी में कायर्रत है।

   मामला अवैध सम्बन्ध के शक के आधार पर हुई घटना , जाँच जारी 

     महिला के पति के वी अरुण कुमार ने आरोप लगाया कि शुक्रवार की रात को डीएसपी अनामिका जैन अपनी महिला मित्र के साथ घर पर आई हुई थी।  DSP अनामिका जैन श्रीवास्तव ने उसके पति कमल श्रीवास्तव के साथ  के सुखविंदर का अवैध संबंध होने का आरोप लगाया गया। साथ ही डीएसपी और उसकी महिला मित्र दोनों ही के द्वारा मेरी पत्नी सुखविंदर के साथ दुव्र्यवहार करते हुए शोर मचाना शुरू कर दिया। जिसके कारण पूरे मोहल्ले के लोग एकत्रित हो गए साथ ही मेरे बड़े भाई और भाभी भी पहुंच गए। सुखविंदर को महिला डीएसपी के द्वारा उसके जेठ जेठानी एवं मोहल्ले वासियों के समक्ष सार्वजनिक रूप से लगातार अपने पति के साथ अवैध संबंध का आरोप लगाते हुए बेइज्जत किया गया। मेरे द्वारा हस्तक्षेप करते हुए पुराने मामले को समाप्त करने की समझाइश दी गई । परंतु महिला डीएसपी किसी की भी बात सुनने को तैयार नहीं थी। आवेश में आकर उसके द्वारा मेरी पत्नी को थप्पड़ मारा गया। इसके बाद भी  विवाद को शांत करने के लिए  मेरे द्वारा महिला डीएसपी से बात को समाप्त करने का आग्रह किया गया।

     DSP की बेटी के सामने बेईज्जती करने की जिद 

   मृतिका के पति ने आरोप लगाते हुए कहा कि DSP जैन  मेरी 17 वर्षीय पुत्री को सामने बुलाने के लिए दबाव बनाती रही और धमकाया कि जब तक  सुखविंदर की बेटी मेरे सामने नहीं आएगी तब तक मैं यहां से नहीं जाऊंँगी। बेटी के ट्यूशन में होने का हवाला देने के बाद भी महिला डीएसपी घर के सामने डटी रही और उसका गाली गलौज करना और मेरी पत्नी को अपमानित करने का कार्य जारी था। मेरे द्वारा इस पूरे मामले में बेटी को दूर ही रखने की गुजारिश की जाती रही लेकिन वह महिला डीएसपी अपनी बात पर अड़ी रही जिस पर मुझे मजबूर होकर अपनी बेटी को ट्यूशन से बुलाना पड़ा ट्यूशन से घर पर आई बेटी के समक्ष उसकी मां पर कमल श्रीवास्तव के साथ अवैध संबंध का आरोप लगाते हुए थप्पड़ मारा और और बेइज्जती की इसके बाद महिला डीएसपी अपने साथी के साथ चली गई।  मेरी पत्नी सुखविंदर अपनी पुत्री जेठ जेठानी और मोहल्ले वासियों के समक्ष महिला डीएसपी द्वारा किए गए दुव्र्यवहार के कारण दबाव में आ चुकी थी। किसी तरह महिला डीएसपी किए जाने के बाद परिवार सहित हम घर में चले गए जिसके कारण मैं ड्यूटी में भी नहीं जा सका सुबह 5:30 बजे के लगभग कंपनी से फोन आने पर मेरी नींद खुली और किचन में देखा की पत्नी द्वारा फांँसी लगाकर आत्महत्या कर ली गई है। जिसकी सूचना भिलाई 3 पुलिस को दी सूचना पर भिलाई 3 पुलिस द्वारा तत्काल मौके में पहुंँचकर मर्ग कायम कर विवेचना में लिया है।

   

 पुलिस ने विवेचना की शुरू 

थाना प्रभारी संजीव मिश्रा ने बताया कि महिला द्वारा छोड़े गए सुसाइडल नोट में अपनी मर्जी से आत्महत्या करने का उल्लेख किया गया है। जबकि पति द्वारा महिला डीएसपी अनामिका जैन श्रीवास्तव द्वारा कल किए गए दुव्र्यवहार की शिकायत की गई है। मामले में मर्ग कायम कर जांच की जा रही है। दूसरी ओर छाया पार्षद व्यंकटराव ने आरोप लगाया है कि, महिला सुखविंदर के आत्महत्या मामले में डीएसपी अनामिका जैन श्रीवास्तव के कारण ही घातक कदम उठाया है। जिस तरह से महिला डीएसपी डराने धमकाने मृतका के घर पहँुची थी। इसी वजह से महिला ने आत्महत्या किया है। इस डीएसपी के खिलाफ निलंबित कार्रवाई होना चाहिए। वहीं प्रदेश काँंग्रेस कमेटी अनुसूचित जाति विभाग के प्रदेश समन्वयक सुप्रीय टेम्बुलकर ने भी आरोप लगाया कि महिला डीएसपी की प्रताडऩा के कारण ही महिला सुखविंदर आत्महत्या करने के लिए मजबूर हुई थी जिस प्रकार से महिला डीएसपी के द्वारा पूरे मोहल्ले के समक्ष महिला को आरोपित किया गया था उसके कारण वह पूरी तरह दबाव में आ गई थी इसके बाद ही महिला के द्वारा उक्त कदम उठाया गया महिला डीएसपी के खिलाफ  अपराध पंजीबद्ध कर कार्यवाही की जानी चाहिए।

दुर्ग / शौर्यपथ / मकान की बुकिंग कराने के बाद निर्माण कार्य में विलंब होने से मकान की लागत में अत्यधिक वृद्धि हुई, जिसके कारण ग्राहक ने मकान की बुकिंग कैंसिल करवाई, जिसके बाद नियमानुसार जमा राशि पर ब्याज दिया जाना था परंतु छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड ने कम ब्याज का भुगतान किया और बकाया ब्याज की मांग करने पर कोई कार्यवाही नहीं की। इसे सेवा में निम्नता ठहराते हुए जिला उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष लवकेश प्रताप सिंह बघेल, सदस्य राजेन्द्र पाध्ये व लता चंद्राकर ने छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल पर 1 लाख 54 हजार रुपये हर्जाना लगाया।

ग्राहक की शिकायत
बालोद शासकीय आदर्श उच्चतर माध्यमिक शाला में उप प्राचार्य राजेश्वर राव कृदत्त ने बालोद के ग्राम सिवनी स्थित अटल विहार योजना अंतर्गत विकसित की जाने वाली छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड की आवासीय कॉलोनी में एमआईजी 1 श्रेणी के मकान हेतु दिनांक 28 फरवरी 2013 को 3 लाख 38 हजार रुपये भुगतान कर बुकिंग कराई थी परंतु हाउसिंग बोर्ड ने परिवादी की बुकिंग को एमआईजी 2 श्रेणी में बदल दिया, फिर भी परिवादी ने इसकी सहमति दे दी और बैंक से ऋण लेकर 13 अगस्त 2015 को 11 लाख 71 हजार रुपये भुगतान किया इसके बाद हाउसिंग बोर्ड द्वारा 2017 तक भवन का निर्माण कार्य पूरा नहीं किया गया और जनवरी 2018 में हाउसिंग बोर्ड ने 11 लाख 74 हजार रुपये का मांग पत्र परिवादी को देते हुए रकम भुगतान करने को कहा। मकान की कीमत में 40 प्रतिशत से अधिक बढ़ोतरी होने के कारण परिवादी ने हाउसिंग बोर्ड के भवन आवंटन संबंधी नियम व शर्तों के तहत अपनी जमा रकम 1509500 को 7.50 प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर से वापस मांगा, तब हाउसिंग बोर्ड ने परिवादी को दिनांक 27अक्टूबर 2018 को 1813656 रुपये चेक द्वारा वापस किया। चेक लेने के बाद हिसाब किताब करने पर परिवादी को ज्ञात हुआ कि हाउसिंग बोर्ड ने परिवादी को ब्याज के रूप में कम राशि प्रदान की है, जिस पर परिवादी ने लिखित आवेदन द्वारा बकाया ब्याज की मांग की तो अनावेदकगण ने परिवादी को उसके बकाया ब्याज की राशि वापस नहीं की ना ही कोई जवाब दिया।

छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल का जवाब
छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड ने प्रकरण में उपस्थित होकर कहा कि भवन का अंतिम मूल्य निर्धारण करने के लिए हाउसिंग बोर्ड पूर्ण रूप से स्वच्छंद है। परिवादी ने स्वेच्छा से पूर्ण रकम ब्याज सहित वापस पाने हेतु निवेदन किया जिस पर कार्रवाई करते हुए उसे पूर्ण संतुष्टि में रकम वापस की जा चुकी है।

फोरम का फैसला
प्रकरण में प्रस्तुत दस्तावेजों एवं प्रमाणों के आधार पर जिला उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष लवकेश प्रताप सिंह बघेल, सदस्य राजेन्द्र पाध्ये व लता चंद्राकर ने उपभोक्ता के प्रति छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड द्वारा सेवा में निम्नता का कृत्य किया जाना प्रमाणित पाया। फोरम ने विचारण के दौरान यह पाया कि हाउसिंग बोर्ड ने जमा बुकिंग रकम लौटते समय परिवादी द्वारा दी गई संतुष्टि अथवा सहमति संबंधी कोई दस्तावेज अथवा प्रमाण प्रकरण में प्रस्तुत नहीं किया और ना ही ब्याज की गणना संबंधी ऐसा कोई प्रपत्र या दस्तावेज प्रस्तुत किया है जिसमें परिवादी ने संतुष्टि स्वरूप अपने हस्ताक्षर किए हो। हाउसिंग बोर्ड ने ब्याज गणना संबंधी कार्यवाही में परिवादी की सहमति अथवा संतुष्टि उसके हस्ताक्षर द्वारा प्राप्त करना आवश्यक नहीं समझा और एकपक्षीय रूप से ब्याज की गणना करते हुए राशि का भुगतान किया। फोरम ने यह प्रमाणित पाया कि हाउसिंग बोर्ड ने परिवादी को मकान बुकिंग की जमा राशि पर 127929 रुपये कम ब्याज दिया है।

हर्जाना राशि
जिला उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष लवकेश प्रताप सिंह बघेल, सदस्य राजेन्द्र पाध्ये व लता चंद्राकर ने संयुक्त रूप से फैसला सुनाते हुए छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल के दुर्ग प्रक्षेत्र के संपदा अधिकारी, धमतरी प्रक्षेत्र के संपदा अधिकारी एवं रायपुर के मुख्य संपदा अधिकारी पर 1 लाख 54 हजार रुपये हर्जाना लगाया, जिसके तहत कम भुगतान किए गए ब्याज की राशि रुपए 127939, मानसिक पीड़ा की क्षतिपूर्ति स्वरूप 25000 रुपये तथा वाद व्यय के रुप में 1000 रुपये देना होगा।

रायपुर / शौर्यपथ /    कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी डॉ एस भारतीदासन ने कॉन्ट्रैक्ट ट्रेसिंग दल के अनुपस्थित अधिकारी- कर्मचारी को कारण बताओ नोटिस जारी कर 3 दिवस के भीतर जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए है।

जिन अधिकारी-कर्मचारी को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है उनमें  एच आर यादव,अनुविभागीय अधिकारी जल संसाधन विभाग रायपुर, विक्रांत देव वर्मा,सहायक अभियंता,कार्यपालन अभियंता,लोक निर्माण विभाग यांत्रिकी संभाग सिरपुर भवन परिसर रायपुर, राकेश तिर्की,डॉ दिखर नाथ खुटे और डॉ बंसो नरुटी, सहायक प्राध्यापक, पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय रायपुर, नरेन्द्रधर बड़गइया, व्याख्याता,उच्चतर माध्यमिक शाला अटारी, शिव कुमार वर्मा,नेत्र सहायक अधिकारी,सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बिरगांव,  विनय पटेल,उप अभियंता,कार्यपालन अभियंता,छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल,संभाग क्रमांक-03, मदन मनहर,उप अभियंता, लोक निर्माण विभाग संभाग क्रमांक-02 रायपुर,सुश्री मोनिका सार्वा, सहायक अभियंता,कार्यपालन अभियंता,जल संसाधन विभाग और  संदीप कुमार साहू,कार्यपालन अभियंता,छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल संभाग क्रमांक-01 का नाम शामिल है।

    ज्ञात हो जिले में नोबेल कोरोना वायरस की रोकथाम ,नियंत्रण एवं किसी भी आपातकालीन परिस्थिति से बचाव के लिए कॉन्ट्रैक्ट ट्रेसिंग दल का गठन किया गया है।इन संक्रमित लोगो की जानकारी प्राप्त होने के पश्चात यथाशीघ्र तथा किसी भी दशा में 06 घंटे के भीतर कॉन्ट्रैक्ट ट्रेसिंग कर हाई रिस्क व्यक्तियों की जांच हेतु दल को प्रभारी अधिकारी को सूचित किया जाना है।

भिलाई । शौर्यपथ । नगर निगम सभागार में चल रहे सामान्य सभा में तेलहा नाला के विकास का र्य पर चर्चा हुई। तब महापौर देवेंद्र यादव ने कहा कि आप बहुतमत के आधार पर अगर आप प्रस्ताव खारिज कर रहे है। तो कर दो। सभी प्रस्ताव को खरिज कर दो लेकिन भावनाओं की राजनीति मत करो। अगर आप शहर का विकास ही नहीं चाहते। ये मन बनाकर यहाँ आये है कि बहुत ज्यादा है और शहर सरकार के हर प्रस्ताव को मानना नहीं तो कीजिए आप का अधिकार। गौरतलब है कि यह बाते महापौर ने तब कही जब सभा मे तेलहा नाला के विकाश कार्य के सम्बंध में चर्चा कर रहे थे। तब हाउंसिंग बोर्ड पार्षद ने विकास कार्य को सिरे से नकारने लगा। बहुत मत के आधार पर विपक्ष ने एक सिरे से प्रस्ताव को खारिज कर दिया। पार्षद जेपी महापौर देवेंद्र पर आरोप लगाते हुए कहा कि तेलहा नाला का भूमिपूजन में उन्हें नही बुलाया गया। पूर्व पार्षद स्व. राकेस अरोरा को भी याद नही किये। तब मेयर देवेंद्र ने कहा कि आरोपी लगाना आसान। तेलहा नाला का भूमिपूजन ही नही हुआ है। सिर्फ निरीक्षण करने गए थे। और रही बात अरोरा जी की तो वे हमारे आदरणीय है। भावनाओं से खेल कर राजनीति ना करें। इस दौरान सभा पति श्याम सुंदर ने भी विपक्ष के पार्षदों को समझाने की कोशिश किए।इस दौरान कुछ देर के लिए सभापति और विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई।

सांसद हनुमान बेनीवाल ने वसुंधरा राजे पर विधायकों को फोन कर गहलोत का साथ देने का आरोप लगाया
याचिका के खिलाफ विधानसभा अध्यक्ष और राजस्थान सरकार द्वारा कैवियट दायर की गई

    जयपुर / शौर्यपथ / राजस्थान में राजनितिक संकट के साथ हर पल घटनाक्रम परिवर्तित हो रहा है . कल तक कांग्रेस आलाकमान सचिन पायलट की वापसी की उम्मीद कर रही थी किन्तु सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार अब आलाकमान की तरफ से पायलट के वापसी के सारे रस्ते बंद हो गए . बी आलाकमान बागी विधायको के वापसी के लिए कवायद शुरू कर दी .

बागी विधायको को १ बजे तक का समय
राजस्थान हाईकोर्ट की डिवीजनल बेंच शुक्रवार को सचिन पायलट समेत 19 विधायकों की याचिका पर सुनवाई करेगी। इसमें विधायकों द्वारा विधानसभा स्पीकर के नोटिस को चुनौती दी गई है। दोपहर करीब 1 बजे इस मामले पर सुनवाई होगी। वहीं, विधायकों को विधानसभा में अपना जवाब पेश करने के लिए भी शुक्रवार 1 बजे तक का ही समय है। जवाब नहीं देने पर स्पीकर द्वारा विधायकों को अयोग्य घोषित किया जा सकता है।

भाजपा में भी दिख रहे दो गुट

राजस्थान में कांग्रेस के घमासान के बीच भाजपा में भी दो गुट दिखाई दे रहे हैं। इस चर्चा को हवा तब मिली, जब भाजपा के सहयोगी दल राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (रालोपा) के सांसद हनुमान बेनीवाल ने वसुंधरा राजे पर हमला बोला। उन्होंने ट्वीट किया, ‘‘वसुंधरा राजे ने राजस्थान कांग्रेस में उनके करीबी विधायकों से फोन करके गहलोत का साथ देने की बात कही है। सीकर और नागौर जिले के एक-एक जाट विधायकों को वसुंधरा ने खुद बात करके पायलट से दूरी बनाने को कहा है। इसके पुख्ता प्रमाण हमारे पास हैं।’’ वसुंधरा राजे को बुधवार को पार्टी मीटिंग के लिए जयपुर आना था, लेकिन वो नहीं पहुंची। इससे भाजपा में भी गुटबाजी होती दिख रही है।

वायरल ऑडियो भी चर्चा का विषय बने

गुरुवार देर रात विधायकों की खरीद-फरोख्त से जुड़ी बातचीत के तीन ऑडियो वायरल हुए। इन ऑडियो में एक व्यक्ति खुद को संजय जैन और दूसरा खुद को गजेंद्र सिंह बता रहा है। दो ऑडियो में बातचीत राजस्थानी में है। जबकि, तीसरे में हिंदी और अंग्रेजी में बातचीत हो रही है। हालांकि, भास्कर इन ऑडियो की पुष्टि नहीं करता। साथ ही, यह भी स्पष्ट नहीं है कि यह ऑडियो कब के हैं।

गुरुवार को ऐसे चला पूरा घटनाक्रम

गुरुवार सुबह करीब 12 बजे सचिन पायलट समेत 19 विधायकों ने विधानसभा के नोटिस के खिलाफ राजस्थान हाईकोर्ट में याचिका दायर की।
दिन में 3 बजे पहली सुनवाई शुरू हुई। सुनवाई को अमेंडमेंट की कॉपी नहीं होने पर 15 मिनट में ही टाल दिया गया था।
इसके बाद करीब 4.15 बजे पायलट गुट के वकीलों द्वारा फिर संशोधित याचिका लगाई गई।
शाम 5 बजे संशोधित याचिका पर सुनवाई हुई। इसके बाद मामला डिविजनल बैंच को ट्रांसफर कर दिया गया।
डिविजनल बैंच में पहले शाम 7.30 बजे सुनवाई का वक्त किया गया। इसे 8 बचे तक बढ़ा दिया गया। अब शुक्रवार को दिन में 1 बजे सुनवाई का वक्त निर्धारित किया गया है।

हरीश साल्वे कर रहे पायलट गुट की पैरवी

हरीश साल्वे पायलट गुट की तरफ से पैरवी कर रहे हैं। सचिन पायलट के वकील मुकुल रोहतगी भी ऑनलाइन जुड़ेंगे। वहीं, राजस्थान स्पीकर की तरफ से अभिषेक मनु सिंधवी शामिल हैं।

इन विधायकों को नोटिस दिया गया

सचिन पायलट, रमेश मीणा, इंद्राज गुर्जर, गजराज खटाना, राकेश पारीक, मुरारी मीणा, पीआर मीणा, सुरेश मोदी, भंवर लाल शर्मा, वेदप्रकाश सोलंकी, मुकेश भाकर, रामनिवास गावड़िया, हरीश मीणा, बृजेन्द्र ओला, हेमाराम चौधरी, विश्वेन्द्र सिंह, अमर सिंह, दीपेंद्र सिंह और गजेंद्र शक्तावत।

राजस्थान सरकार द्वार कैवियट भी दायर की गई

वहीं, याचिका के खिलाफ विधानसभा अध्यक्ष और राजस्थान सरकार द्वारा कैवियट दायर की गई है। याचिका की सुनवाई के दौरान कैवियट पर भी पक्ष सुना जाएगा।

पिटीशन मेरी मुझे ही पार्टी नहीं बनाया- मुख्य सचेतक जोशी

मुख्य सचेतक महेश जोशी ने कहा कि पिटीशन मेरी, और मुझे ही पार्टी नहीं बनाया गया। इससे साफ होता है कि उनके पास ठोस आधार नहीं है। उन्होंने जो याचिका लगाई उसमें कह रहे हैं कि कुछ संशोधन करना है। पहली बात हरीश साल्वे जैसे बड़े वकील के यहां से याचिका आई है। वो भी पूरी नहीं, जिससे साबित होता है कि बिना तैयारी के आनन-फानन में ये कोशिश की है। अदालत ने कहा है कि आप नए तरीके से याचिका दायर कीजिए। सभी चीजें नए सिरे से तय करेंगे। आज सुनवाई होगी या नहीं होगी, ये सब चीजें तय करेंगे।

डर पैदा होने पर ऐसे कदम उठा रहे बागी- खाचरियावास

राजस्थान सरकार में परिवहन मंत्री प्रताप सिंह खासचरियावास बोले- राजस्थान ने कांग्रेस को वोट देकर जिताया है। अब कांग्रेस के निशान पर जीते लोग भाजपा में जाकर शपथ लेना चाहते हैं। बागी विधायकों को जयपुर में रहकर अपनी बात कहनी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि विधानसभा नियम और कायदों से चलती है। डर पैदा होने के बाद अब बागी ऐसे कदम उठा रहे हैं। उन्हे पार्टी का व्हिप मानना पड़ेगा। विपक्ष सरकार गिराने में जुटा हुआ है।

दुर्ग / शौर्यपथ / यूजीसी की नई गाइड लाइन ने नियमित छात्र-छात्राओं की नींद उड़ा दी है। वहीं स्वाध्यायी परीक्षार्थियों के उलझन का भी कोई निवारण नहीं हो पा रहा है। महाविद्यालयीन छात्र-छात्राओं के लिए कोरोना महामारी एक तरह से जी का जंजाल बन गई है। छात्र-छात्राएं परीक्षा को लेकर कश्मकश भरे दौर का सामना करने मजबूर हो गये है। कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच जान बचाने की कवायद के साथ छात्र-छात्राओं को अपनी परीक्षा को लेकर बनी असमंजस्य भरी स्थिति ने बेचैन कर डाला है। ऐसी परिस्थितियों का सामना न केवल महाविद्यालयीन नियमित बल्कि स्वाध्यायी परीक्षार्थियों को भी करना पड़ रहा है। खासकर यूजीसी की नई गाइड लाइन जारी होने के बाद राज्य सरकार के आदेश पर जनरलप्रमोशन पा चुके प्रथम व द्वितीय वर्ष के नियमित छात्र-छात्राओं की बेचैनी बढ़ सी गई है।
कोरोना संक्रमण को देखते हुए महाविद्यालयीन परीक्षाएं आयोजित नहीं की जा सकी है। छात्र संगठनों की मांग पर राज्य सरकार ने प्रथम व द्वितीय वर्ष के छात्र-छात्राओं को बिना परीक्षा के लिए प्रमोशन दे दिया है। इस बीच यूजीसी ने आगामी सितंबर माह में महाविद्यालयीन परीक्षा आयोजित करने का निर्देश विश्व विद्यालयों को देकर जनरल प्रमोशन पा चुके प्रथम व द्वितीय वर्ष के छात्र-छात्राओं को उलझन में डाल दिया है।
राज्य शासन ने अंतिम वर्ष के छात्र-छात्राओं को जनरल प्रमोशन दिए जाने की मांग पर फिलहाल कोई निर्णय नहीं लिया है। ऐसे में यूजीसी की नई गाइड लाइन के आधार पर सितंबर माह में अंतिम वर्ष के लिए परीक्षाएं आयोजित की जा सकती है। फिलहाल कोरोना संक्रमण को देखते हुए सभी महाविद्यालयों में ताला लटक रहा है और छात्र-छात्राओं की पढ़ाई ऑनलाइन हो रही है। लेकिन कोरोना संक्रमण के मामले जिस गति से बढ़ते चले जा रहे हैं उससे सितंबर में परीक्षा आयोजित किए जाने को लेकर भी संशय की स्थिति बनी हुई है। परीक्षाएं होगी भी या नहीं, इस पर कुहांसा बने रहने से छात्र-छात्राओं में बनी असमंजस्य की स्थिति का नकारात्मक असर उनके तैयारी पर होने की संभावना से इंकार नहीं किया जा रहा है।
यहां पर यह बताना भी लाजिमी होगा कि महाविद्यालय की स्वाध्यायी परीक्षार्थियों को लेकर अब तक कोई गाइड लाइन जारी नहीं किया गया है। राज्य शासन के आदेश पर प्रथम व द्वितीय वर्ष के नियमित छात्र-छात्राओं को तो जनरल प्रमोशन दे दिया गया है। लेकिन इस स्तर की परीक्षा स्वाध्यायी परीक्षार्थी के रूप में देने की तैयारी में जुटे छात्र-छात्राओं के लिए कोई गाइड लाइन जारी नहीं किए जाने से उनकी दिन का चैन और रातों की नींद उड़ी हुई है।
परीक्षा कराये जाने के यूजीसी के आदेश को जलाया एनएसयूआई ने
एनएसयूआई प्रदेश अध्यक्ष आकाश शर्मा के आह्वान पर दुर्ग जि़ला अध्यक्ष आदित्य सिंह के निर्देश अनुसार यूजीसी द्वारा छात्रों की परीक्षा करवाये जाने के निर्देश पर पूर्व एसवीटीयू अध्यक्ष एवं प्रदेश सचिव एनएसयूआई आशीष यादव के नेतृत्व में स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय दुर्ग में यूजीसी के निर्देश की प्रति जलाकर विरोध प्रदर्शन किया गया। एनएसयूआई के आशीष यादव ने बताया कि देश भर में कोरोना संक्रमण थन नहीं रहा है और केंद्र सरकार के इशारे पर यूजीसी ने परीक्षा आयोजित करने के निर्देश दे दिए है जो कि के तानाशाही फरमान है। इस समय में परीक्षा आयोजित करना किसी भी तरह से संभव नहीं है और अगर ऐसा होता है तो छात्रों को कोरोना का भय बना रहेगा जिससे उनके रिज़ल्ट और स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ सकता है। इस वजह से एनएसयूआई प्रदेश भर में आज यूजीसी के तुग़लकी फरमान का विरोध कर प्रतियाँ जलाकर विरोध कर रही है और परीक्षाएं नहीं आयोजित कराने की मांग करती है। पूर्व में एनएसयूआई की मांग पर राज्य सरकार द्वारा इस महामारी संकट को देखते हुए प्रथम एवं द्वितीय वर्ष के छात्रों को जनरल प्रमोशन दे दिया गया है। अंतिम वर्ष के छात्रों को भी प्रमोशन देने की मांग यूजीसी और केंद्र सरकार से लगतार की जा रही है।
दसवी और बारहवी के छात्र भी उलझन में
ऐसा नहीं कि कोरोना के चलते सिर्फ महाविद्यालयीन छात्र-छात्राएं परेशान हैं, बल्कि दसवीं और बारहवीं की परीक्षा उत्तीर्ण करने वालों में भी बेचैनी का आलम है। इनकी उलझन आगे की पढ़ाई को लेकर है। दरअसल अभी तक पीईटी, पीएमटी और पीपीटी जैसी प्रवेश परीक्षाओं का आयोजन नहीं किया जा सका है। इन परीक्षाओं में प्राप्त रंैक के आधार पर प्रदेश के इंजीनियरिंग, मेडिकल व पॉलिटेक्निक कालेज में प्रवेश की पात्रता हासिल होती है। अखिल भातीय स्तर पर भी उच्च शिक्षा के विभिन्न संस्थानों में प्रवेश की पात्रता के लिए परीक्षाएं आयोजित होती है। लेकिन इस बार कोरोना के चलते कुछ परीक्षाओं के आयोजन में खलल पड़ा है। दसवीं-बारहवीं की छत्तीसगढ़ व केन्द्रीय बोर्ड के परिणाम घोषित हो चुके हैं। इसमें सफल छात्र-छात्राएं आगे की पढ़ाई को लेकर उलझन भरे दौर का सामना कर रहे हैं। यही स्थिति उनके पालकों की भी बनी हुई है।

     दुर्ग / शौर्यपथ / कुछ साल पहले तक कहा जा रहा था कि माइनिंग की टफ जॉब लड़कियों के बस की बात नहीं। इस मिथ्या को दरकिनार करते हुए छात्राओं के हक में बड़ा फैसला ले लिया गया है। माइनिंग इंजीनियरिंग में अब छात्राएं भी प्रवेश ले सकेंगी। प्रदेश के 2 सरकारी व 4 निजी इंजीनियरिंग कॉलेजों में माइनिंग की पढ़ाई अब छात्राएं भी कर सकेंगी, ऐसे ही पॉलीटेक्निक कॉलेजों में भी उन्हें प्रवेश मिलेगा। छत्तीसगढ़ माइनिंग की दृष्टि से अलग पहचान रखता है। खदानों के भीतर पहुंचकर इंजीनियरिंग करने से पहले तक लड़कियों को रोककर रखा गया था। उनको माइनिंग में नौकरी तो मिलती थी, लेकिन टेबल जॉब ही दिए जाते थे। अब लड़कियां खदानों से निकलने वाले प्राकृतिक संपदाओं में भी अपनी रूचि दिखाएंगी।
अध्यादेश में सिर्फ लडक़ों के प्रवेश का था नियम
   पहले तक कोई भी छात्रा माइनिंग के लिए एप्लाई नहीं सकती थी। माइनिंग इंजीनियरिंग के लिए बनाए गए अध्यादेश में ही इनको जगह नहीं दी गई थी, लेकिन बाद में तकनीकी शिक्षा निदेशालय ने इसमें संशोधन कराया है। लड़कियों के लिए यह क्षेत्र सुरक्षित नहीं माना गया था। पिछले कुछ साल में देश व प्रदेश में कई खानें नई शुरू हुई हैं, जिनमें नौकरियों के लिए सिर्फ लडक़ों का एकाधिकार था, लेकिन इस साल से अब लड़कियां भी इसमें हाथ आजमाएंगी।
ये हैं माइनिंग के टॉप रिक्रूटर्स
   अडानी माइनिंग , एरसेलर मित्तल , भारतीय उपक्रम कंपनिया, कोल इंडिया लिमिटेड, दामोदर वैली कॉर्पोरेशन, एस्सेल माइनिंग एंड इंडस्ट्रीज, हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड, एमएमटीसी लिमिटेड, यूरेनियम कॉपोर्रेशन ऑफ इंडिया, डीआडीओ,


इंजीनियरिंग और पॉलीटेक्निक में माइनिंग के लिए छात्राएं भी पात्र होंगी। नियम में संसोधन हुए हैं। राज्य शासन ने इसकी मंजूरी दी है।
एके गर्ग, ज्वाइंट डायरेक्टर, डीटीई


माइनिंग में शानदार कॅरियर की संभावना है। प्रदेश प्राकृतिक संपदाओं से धनी है। ऐसे में माइनिंग इंजीनियरिंग में बड़े मौके मिलना तय है। युवाओं के लिए यह अच्छा विकल्प है।
सोनल रूंगटा, डायरेक्टर, संतोष रूंगटा ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूट

भिलाई / शौर्यपथ  / देश के टॉप इंजीनियरिंग कॉलेजों में बड़े शहरों की मोनोपली अब खत्म होती जा रही है। छोटे शहर के कॉलेज तेजी से अपना मुकाम बना रहे हैं। बखत साबित कर रहे हैं। इसी कड़ी में इंडिया टुडे ग्रुप ने एमडीआरए के साथ मिलकर 14 विषयों के 1302 कॉलेजों का सर्वे किया है। जिसमें कॉलेजों की खूबियां, फीस स्ट्रक्चर, इंफ्रास्ट्रक्चर, रिचर्स, बिजनेस इन्क्यूबेशन, प्लेसमेंट जैसे पहलूओं को बारीकी से परखने के बाद सभी की रैंकिंग तय की गई। खुशी की बात यह है कि प्रदेश के संतोष रूंगटा ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस को रैंकिंग में टॉप-100 कॉलेजों के बीच 21वां स्थान दिया गया है। यही नहीं वेस्टर्न रीजन में ग्रुप ने तीसरा और देश के सबसे तेज उभरते इंजीनियरिंग कॉलेजों की सूची में 6वां पायदान मिला है। रूंगटा ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के डायरेक्टर सोनल रूंगटा ने बताया कि एमडीआरए देश की एक प्रसिद्ध सर्वे एजेंसी है, जो सरकारी और गैर सरकारी विभागों के लिए सर्वे का कार्य करती है। बुधवार को सभी कॉलेजों की रैंकिंग जारी हुई तो छत्तीसगढ़ का मान एक बार फिर बढ़ गया। इस काबिलियत को तरजीह देते हुए इंडिया टुडे ग्रुप ने अपनी प्रसिद्ध मैग्जीन में संतोष रूंगटा ग्रुप को पहले पेज पर प्रमुखता से प्रकाशित किया है। बता दें कि बीते दो साल से इस रैंकिंग में संतोष रूंगटा ग्रुप बेहतरीन प्रदर्शन करता आ रहा है। इस कामयाबी पर संस्थान के चेयरमैन संतोष रूंगटा और डायरेक्टर टेक्निकल सौरभ रूंगटा से खुशी जाहिर की है। 
एनआईआरएफ में पाया मुकाम 
हाल ही में मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने भी देशभर के सभी तकनीकी व गैर तकनीकी कॉलेजों की रैंकिंग जारी की है, जिसमें संतोष रूंगटा कॉलेज ऑफ फार्मास्युटिकल साइंसेस एंड रिसर्च ने कीर्तिमान रचा। देश के टॉप-100 फार्मा कॉलेजों में अपनी जगह बनाई। छत्तीसगढ़ का यह इकलौता फार्मा कॉलेज रहा, जिसने देश में नाम कमाया। 
इस तरह हुआ एमडीआरए सर्वे
एमडीआरए ने यह सर्वे नवंबर 2019 से जून 2020 के बीच किया। कोविड महामारी के बीच जब तालीम हासिल करने के तरीके बदल रहे हैं, उस दौर में स्टूडेंट्स को सही संस्थान के चुनाव में मदद करने के लिए लिहाज से यह सर्वे किया गया। बीते साल के सर्वे में देश के 1206 कॉलेज शामिल हुए थे, जो इस साल बढकऱ 1302 हो गए। एमडीआरए ने सिर्फ इंजीनियरिंग कॉलेजों का ही सर्वे नहीं किया, बल्कि आट्र्स, साइंस, कॉमर्स, मेडिकल, डेंटल, बीबीए, बीसीए, सामाजिक कार्य और फैशन डिजाइनिंग को भी इस दायरे में रखा। 

भिलाई / शौर्यपथ / पुलिस द्वारा लगातार ऑनलाइन फ्रॉड को लेकर लोगों को जागरुक किया जा रहा है इसके बाद भी ठगी की घटनाएं लगातार हो रही हैं। शातिर ठग रोज नए नए तरीके खोज कर लोगों को ठगने का कार्य कर रहे हैं। ऐसा ही एक मामला सुपेला थाने में दर्ज हुआ। इस बार प्रार्थी को बैंक कर्मी के नाम से फोन आया और क्रेडिट कार्ड से डेबिट कार्ड में बैलेंस ट्रांसफर करने का झांसा देकर खाते से रकम उड़ा दी। जब के्रडिट कार्ड से रुपए उड़े और डेबिट कार्ड एकाउंट में जमा नहीं हुए तो उसके होश उड़े। खुद का ठगी का शिकार हुआ मानकर व्यक्ति ने सुपेला थाने में शिकायत दर्ज कराई। सुपेला पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ धारा 420 के तहत अपराध दर्ज कर लिया है।
प्राप्त जानकारी के मुताबिक राधिका नगर निवासी ओम प्रकाश के मोबाइल नंबर पर 7024018856 से फोन आया। सामने से महिला की आवाज थी जिसमें कहा गया कि स्टेट बैंक ऑफ इंडिया से बोल रही हूं। आपका क्रेडिट कार्ड नंबर 4726428024018929 जो पैसा बैलेंस बचा है उसे डेबिट कार्ड मे नंबर 5103720462106798 में ट्रांसफर कर देंगे। बैंक कर्मी के झांसे में आकर ओम प्रकाश ने अपनी कार्ड की डिटेल दे दी। पहली बार में 1500 रुपए, दूसरी बार 4999 रूपये एकाउंट से कट गए। तीसरा बार 4999 रुपए कट गए। इस प्रकार 17997 रुपए कट गए। उक्त रुपए जब एकाउंट में ट्रांसफर नहीं हुए तो ठगी का शक हुआ। मामले में सुपेला थाने में शिकायत दर्ज कराई गई जिस पर जांच के बाद अपराध कायम किया गया।

दुर्ग / शौर्यपथ / जिले के ग्राम औरी, पटवारी हल्का नम्बर 04, राज्य निगम मंण्डल भिलाई-03, तहसील पाटन, जिला दुर्ग में नया कोरोना पाॅजिटिव केस पाये जाने पर संबंधित क्षेत्रों को कन्टेनमेंट जोन घोषित किया गया है। उक्त क्षेत्र को कन्टेनमेंट जोन घोषित करने के परिणामस्वरूप कन्टेनमेंट जोन में चिन्हांकित क्षेत्र में सभी प्रकार के दुकानें व वाणिज्यिक प्रतिष्ठान बंद रहेगी। इसके अलावा सभी प्रकार की वाहनों के आवागमन पर प्रतिबंध रहेगा। मेडिकल इमरजेंसी को छोड़कर अन्य किसी भी कारण से घर से बाहर निकलना प्रतिबंधित होगा। उक्त क्षेत्र की निगरानी पुलिस विभाग के द्वारा पेट्रोलिंग कर की जावेगी। जिला चिकित्सालय व स्वास्थ्य विभाग के माध्यम से संबंधित क्षेत्र में स्वास्थ्य की निगरानी के साथ ही निर्देशानुसार सेम्पल की जांच की जायेगी।

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