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नजरिया / शौर्यपथ / वैसे तो कोरोना से सभी क्षेत्रों का बुरा हाल है, लेकिन बैंकिंग क्षेत्र का हाल आगामी महीनों में सबसे बुरा होने वाला है। इसकी पुष्टि बैंकों द्वारा भारतीय रिजर्व बैंक से तीन लाख करोड़ रुपये के कर्ज खातों को पुनर्गठित (रिस्ट्रक्चरिंग) करने की मांग से होती है। मोटे तौर पर ये कर्ज होटल, विमानन और रियल एस्टेट क्षेत्र से जुडे़ हैं। इन क्षेत्रों को कोरोना की वजह से सबसे ज्यादा नुकसान उठाना पड़ा है। इनके ऋण खातों को पुनर्गठित करने की जरूरत इसलिए भी है, क्योंकि इसके बाद कंपनियों को अनेक तरह से राहत दी जाती है। कुछ समय के लिए पुनर्गठित खाते गैर-निष्पादित आस्ति (एनपीए) होने से बच जाते हैं और कंपनियों को अपनी आर्थिक स्थिति सुधारने का मौका मिल जाता है। दरअसल, कंपनी के दिवालिया होने पर बैंक जितनी वसूली कर सकते हैं, उससे कहीं अधिक पैसे उन्हें ऋण खातों के पुनर्गठन से मिलने की उम्मीद होती है।
अप्रैल 2020 के अंत तक होटल क्षेत्र पर बैंकों के 45,862 करोड़ रुपये, विमानन क्षेत्र पर 30,000 करोड़ रुपये और रियल एस्टेट क्षेत्र पर 2.3 लाख करोड़ रुपये बकाया थे। इन क्षेत्रों को उबरने में छह महीने से भी ज्यादा समय लग सकता है। रेटिंग एजेंसी इक्रा के मुताबिक, खस्ता हाल विमानन क्षेत्र को अपना अस्तित्व बचाने के लिए आगामी तीन साल में लगभग 35,000 करोड़ रुपये की जरूरत पड़ेगी। आज कई होटल कर्ज में हैं। व्यावसायिक रियल एस्टेट और किराए के कारोबार में भी 25 प्रतिशत से ज्यादा गिरावट के कयास लगाए जा रहे हैं। ऐसे में, इन क्षेत्रों से जुड़े ऋण खातों का पुनर्गठन और जरूरी हो जाता है।
ध्यान रहे, भारतीय रिजर्व बैंक ने बैंकों को खुदरा ऋणों की किस्त और ब्याज को सिर्फ टालने का निर्देश दिया है, माफ करने का नहीं। अगर कर्जदार मोराटोरियम का फायदा लेना चाहते हैं, तो उन्हें बाद में किस्त व ब्याज, दोनों चुकाने होंगे। अनुमान है कि मोराटोरियम अवधि समाप्त होने के बाद बड़ी संख्या में कार, गृह व व्यक्तिगत ऋण एनपीए में तब्दील हो सकते हैं। ऐसे में, एनपीए से उपजी समस्याओं के निवारण के लिए सरकार को बैंकों के पुनर्पूंजीकरण की जरूरत पड़ेगी। भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर का भी कहना है कि बैंकों का पुनर्पूंजीकरण समय की मांग है। बैंकों का हालिया विलय भी इस बीमारी के इलाज में असमर्थ है।
भारतीय स्टेट बैंक, केनरा बैंक, पंजाब नेशनल बैंक व बैंक ऑफ बड़ौदा पूंजी जुटाने की कोशिश कर रहे हैं। स्टेट बैंक को 20,000 करोड़ रुपये तक पूंजी जुटाने की मंजूरी मिली है और पंजाब नेशनल बैंक 7,000 करोड़ रुपये तक की पूंजी जुटाने के लिए शेयरधारकों से मंजूरी लेने वाला है। इनके अलावा, दूसरे बैंक पूंजी के लिए सरकार पर निर्भर हैं। वैसे अभी तक पुनर्पूंजीकरण के बहुत अच्छे नतीजे नहीं निकले हैं। सरकार ने संचयी तौर पर वित्त वर्ष 2015 से वित्त वर्ष 2020 के दौरान बैंकों में लगभग 43 अरब डॉलर की पूंजी डाली है, लेकिन बैंकों के पूंजी आधार में सुधार नहीं हो पाया, क्योंकि बैंकों का नुकसान निवेशित पूंजी से दो-तीन गुना ज्यादा था। बैंकों में डाली गई पूंजी का करीब 60 प्रतिशत हिस्सा पिछले दो साल में डाला गया है।
बैंकिंग क्षेत्र अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, लेकिन यह क्षेत्र एनपीए की समस्या से जूझ रहा है। दिसंबर 2019 में भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी वित्तीय स्थायित्व रिपोर्ट में कहा गया था कि सितंबर 2020 तक भारतीय अनुसूचित व्यावसायिक बैंकों का एनपीए कुल कर्ज के 9.9 प्रतिशत के स्तर पर पहुंच सकता है। सितंबर 2020 में 53 देशी-विदेशी बैंकों की पूंजी कम हो जाएगी। बैंकों का मुनाफा कम होगा, जिससे उन्हें ऋण देने में परेशानी होगी। सभी क्षेत्रों को खोलने के बाद उद्योगों को वित्तीय सहायता की जरूरत पड़ेगी। सरकार ने 20 लाख करोड़ रुपये के पैकेज की घोषणा की है, जिसकी एक बड़ी राशि जरूरतमंदों को ऋण के रूप में दी जानी है। ऐसे में, अगर बैंकों को पूंजी की समस्या का सामना करना पड़ा, तो अर्थव्यवस्था में मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। अत: मौजूदा स्थिति में भारतीय रिजर्व बैंक को कॉरपोरेट और खुदरा ऋणों को डूबने से बचाने के हरसंभव उपाय करने होंगे। साथ ही, सबसे जरूरी यह है कि जो लोग और कंपनियां सक्षम हैं, वे अपनी जिम्मेदारी समझते हुए ऋण चुकाएं।
(ये लेखक के अपने विचार हैं)सतीश सिंह , मुख्य प्रबंधक, आर्थिक अनुसंधान, एसबीआई
सम्पादकीय / शौर्यपथ / कोरोना के खिलाफ लड़ाई में सरकारों द्वारा सख्ती में बढ़ोतरी न केवल जरूरी, बल्कि स्वागतयोग्य भी है। झारखंड में कोरोना नियमों की अनदेखी करने वालों और मास्क न पहनने वालों पर एक लाख रुपये का जुर्माना लग सकता है और दो साल की जेल हो सकती है। झारखंड की कैबिनेट ने बुधवार को संक्रामक रोग अध्यादेश 2020 पारित किया है। कोरोना के खिलाफ लड़ाई में ऐसी कड़ाई करने वाला वह देश का पहला राज्य बन गया है। कागज पर ही सही, यह नियम प्रथम दृष्टया काफी कड़ा दिखता है, लेकिन जिस तरह से झारखंड में संक्रमण बढ़ रहा है, उसे रोकने के लिए ऐसे कदमों का व्यापक सांकेतिक महत्व है। अलबत्ता, इसे लागू करना सहज नहीं होगा। इसकी सही अनुपालना सुनिश्चित करने के लिए सबसे पहले सरकारी महकमे और पुलिस-प्रशासन के तमाम लोगों को समाज के सामने आदर्श पेश करना होगा। उससे भी ज्यादा जरूरी है कि हमारे नेता स्वयं बचाव और मास्क पहनने की दिशा में आदर्श बनकर उभरें। लोगों को लगे कि उनके सभी बडे़ नेता और बडे़ अधिकारी स्वयं मास्क पहनने लगे हैं, तो लोग भी प्रेरित होंगे। अभी आए दिन हम देखते हैं कि किस तरह से मास्क पहनने की अनिवार्यता का मखौल बनाया जाता है। कोई दिखावे के लिए टांग लेता है, तो कोई अपनी नाक नहीं ढकता, तो कोई मास्क अपने गले में लटका लेता है। मास्क से जिस तरह खिलवाड़ हो रहा है, उसमें सरकारें अगर कड़ाई के लिए मजबूर होती जाएं, तो कोई आश्चर्य नहीं। गरीबों की दृष्टि से देखें, तो जुर्माना राशि जरूर ज्यादा है और यह भी संभव है कि इस अध्यादेश या कानून का दुरुपयोग भी होगा। अत: ऐसे कानून बनाते हुए हमारी सरकारों को पूरी तरह तैयार रहना चाहिए। केवल काननू बना देना पर्याप्त नहीं है, उसकी पालना ही सब कुछ है।
झारखंड में कोरोना मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। खबरें आ रही हैं कि सरकारी अस्पतालों में जगह कम पड़ने लगी है। ऐसे में, सरकार लोगों पर ही नहीं, बल्कि निजी अस्पतालों व बैंक्वेट हॉल आदि पर भी दबाव बनाए हुए है। इन्हें आइसोलेशन वार्ड के रूप में इस्तेमाल करने की योजना है। आने वाले दिनों में झारखंड और संक्रमण बहुल अन्य राज्यों में ऐसे कडे़ कदम सामान्य बात हो जाएंगे। लॉकडाउन खुलने के बाद ज्यादातर राज्यों में संक्रमण बढ़ा है, विशेष रूप से गरीब या अभावग्रस्त राज्यों में स्थिति चिंताजनक होती जा रही है।
आम दिनों में ही जो चिकित्सा सेवा दबाव महसूस करती है, कोरोना के समय में उसका क्या हाल होगा, इसका अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है। कड़ाई केवल आम लोगों पर न हो, जो सेवा में लगा हुआ तंत्र है, उसे भी पूरी मुस्तैदी से काम करने के लिए बाध्य किया जाना चाहिए। यह सुनिश्चित करना होगा कि आम लोगों को इलाज के लिए भटकना न पड़े। सुशासन की कड़ाई के साथ ही स्वशासन की भी जरूरत बढ़ गई है। लोग यदि अनुशासित हो जाएं, तो फिर कोरोना महामारी के खिलाफ लड़ाई आसान हो जाएगी। विश्वास बनाए रखना होगा। कोरोना से जंग हम जरूर जीतेंगे। ध्यान रहे, लगभग आठ लाख लोग ठीक हो चुके हैं और अभी देश में सक्रिय मरीजों की संख्या चार लाख भी नहीं है। एक दिन आएगा, जब चंद मरीज रह जाएंगे, लेकिन तब तक हमें सावधानी बरतनी पड़ेगी और सुरक्षित रहना होगा।
मेलबॉक्स / शौर्यपथ / गाजियाबाद में एक पत्रकार जब पुलिस के पास अपनी भांजी के साथ छेड़छाड़ करने वालों के खिलाफ रिपोर्ट लिखवाने जाता है, तब उसकी रिपोर्ट तो लिखी नहीं जाती, बल्कि इसकी सूचना छेड़छाड़ करने वालों तक पहुंचा दी जाती है। नतीजतन, अपराधी उस पत्रकार पर सरेआम जानलेवा हमला कर उसे गंभीर रूप से घायल कर देते हैं और इलाज के दौरान उसकी मौत हो जाती है। जब इस पर बवाल मचा, तो प्रशासन अब हरकत में आया है। सवाल यह है कि अपराध होने के बाद ही सक्रियता क्यों दिखती है पुलिस? ऐसे सभी मामलों में लापरवाही बरतने वाले पुलिसकर्मियों/ सरकारी कर्मचारियों की तनख्वाह से मुआवजे की राशि काटी जानी चाहिए और इन कर्मियों की नौकरी छीनकर पीड़ित के परिजन को दी जानी चाहिए। कानून का राज फिर से स्थापित करने के लिए इस तरह की मिसालें आवश्यक हैं।
आदित्य अवस्थी, डीएलएफ कैपिटल ग्रीन्स, नई दिल्ली
छात्रों के हित में
किसी भी देश के स्वर्णिम भविष्य का रास्ता स्कूलों से ही निकलता है। यह इस बात पर निर्भर करता है कि स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता किस स्तर की है? इस समय कोरोना संक्रमण-काल में हर जगह शिक्षा की स्थिति डांवांडोल है। स्कूल कब खुलेंगे, यह कोई नहीं कह सकता? अभिभावक घबराहट में हैं, और वे स्कूल खुलने पर भी फिलहाल बच्चों को भेजने के लिए तैयार नहीं हैं। ऑनलाइन शिक्षा की अपनी सीमाएं हैं, लेकिन स्कूल बंद रहने की स्थिति में अन्य कोई विकल्प भी नहीं है। ऐसे में, सीबीएसई ने 30 फीसदी पाठ्यक्रम कम करने का जो फैसला किया है, वह बच्चों और अध्यापकों के हित में है। मगर हमें यह भी ध्यान रखना होगा कि पाठ्यक्रम से ऐसे अंश न हटा दिए जाएं, जिससे शिक्षा की अवधारणा और उसकी गुणवत्ता किसी तरह प्रभावित हो।
सत्य प्रकाश, लखीमपुर खीरी
अच्छा फैसला
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद ने इस वर्ष ऑस्ट्रेलिया में होने वाली ट्वंटी-20 विश्व कप प्रतियोगिता को स्थगित करने का निर्णय सही दिशा में लिया है। कोरोना वायरस के प्रकोप के कारण पिछले कुछ महीनों से विश्व स्तरीय क्रिकेट मैचों का आयोजन दिवास्वप्न जैसा हो गया है। जाहिर है, किसी भी देश का कोई भी खिलाड़ी ट्वंटी-20 विश्व कप खेलने के लिए फिलहाल न तो शारीरिक रूप से तैयार है, और न ही मानसिक रूप से। हालांकि, आईसीसी के इस फैसले से क्रिकेटप्रेमियों को जरूर निराशा हुई होगी, पर ट्वंटी-20 विश्व कप के स्थगित होने से आईपीएल के आयोजन की संभावनाएं बढ़ गई हैं, जो सुखद है।
तुषार आनंद, वेस्ट बेली रोड, पटना
बाढ़ से बेहाल
बाढ़ की वजह से बिहार लगभग हर साल विकास की दौड़ में पिछड़ जाता है। यहां बाढ़ से प्रभावित क्षेत्रों में सैकड़ों लोग मारे जाते हैं। प्रभावित परिवारों के लिए ढंग से रहने-खाने की व्यवस्था नहीं होती, तो वे सड़कों पर रहने को मजबूर होते हैं। अगर इस बार भी सरकार ने बाढ़ पीड़ितों की सुध नहीं ली, तो इसी तरह की दर्दनाक तस्वीर फिर से दिखेगी। इस बार बाढ़ तो चुनाव का एजेंडा भी बन गया है। मगर दिक्कत यह है कि विपक्षी पार्टियां भी बाढ़ नियंत्रण के वादे पर चुनाव लड़ना चाहती हैं। इस तरह की राजनीति बंद होनी चाहिए। राज्य सरकार अगर जागरूक नहीं होती है, तो जनता को ही सरकार पर दबाव बनाना होगा। आखिर कब तक वे अपनी किस्मत को कोसते रहेंगे? यह बाढ़ ही है, जिसके कारण बिहार आज इतना पिछड़ा राज्य माना जाता है। इसकी वजह से होने वाले आर्थिक नुकसान की भरपाई करने में ही अभिभावक बेहाल हो जाते हैं। वे अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा नहीं दिला पाते। इससे बेरोजगारी दर भी बढ़ रही है। राज्य सरकार को इस पर चिंतन करना होगा।
आफताब आलम, अरवल, बिहार
ओपिनियन / शौर्यपथ / तीन महीने के देशव्यापी लॉकडाउन और अनलॉक-1 के दौरान केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा भ्रम पैदा करने वाले और विस्मयकारी आदेशों की जो बौछार की गई, वह सरकार और आम लोगों के बीच कोविड-19 से संबंधित संवाद का शुरुआती तरीका था। इन आदेशों में लोगों के दैनिक जीवन के हर पहलू को लेकर निर्देश जारी किए गए। मगर जैसे ही लॉकडाउन हटा और संक्रमण के मामले तेज होने लगे, उससे यह स्पष्ट हो गया कि ये ‘आदेश’ महामारी की रोकथाम के अपने लक्ष्य को नाममात्र हासिल कर पाए। ऐसे आदेशों ने एक ऐसी नीतिगत दृष्टि को बल दिया, जिससे कोविड-19 की रोकथाम में नियमों के अनुपालन में कड़ाई करने का विशेषाधिकार मिलता है।
बेशक, कोविड-19 को नियंत्रित करने के लिए राष्ट्र आपको ‘आदेश’ देगा, आपको अनुशासित करेगा (कई जगह लॉकडाउन डंडे के जोर पर लागू किया गया) और आपकी निगरानी करेगा (तकनीक का इस्तेमाल करते हुए)। मगर, विश्व स्तर पर सार्वजनिक भागीदारी एक महत्वपूर्ण घटक है, जो लोगों की सेहत को संवारने में मदद करती है। इसकी पुष्टि कोई भी सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ कर सकता है। पर इसके लिए जरूरी है कि नागरिकों और राष्ट्र के बीच विश्वास का रिश्ता कायम हो। भारत में कोविड-19 के खिलाफ जो रणनीति अपनाई जा रही है, उसमें इसी विश्वास की कमी है। ऐतिहासिक रूप से नौकरशाही का जो ढर्रा है, वह राष्ट्र और नागरिकों के रिश्ते में अविश्वास पैदा करता रहा है। कोविड-19 के खिलाफ जंग में यह अविश्वास तीन अलग-अलग रूपों में देखा गया है।
पहला है प्रशासनिक संवाद, जिसके माध्यम से अंतहीन आदेश कानूनन लागू किए गए। नृवंशविज्ञानियों की मानें, तो अविश्वास की यह संस्कृति उपनिवेशवादी शासन-व्यवस्था की देन है। देश में स्थानीय नौकरशाही पर अपने शोध में मैंने भी नौकरशाही के रोजमर्रा के कामकाज पर ‘सरकारी आदेश’ का गहरा नियंत्रण देखा है। आदेशों का अनुपालन प्राथमिक तरीका है, जिसके माध्यम से वरिष्ठ अपने अधीनस्थों की निगरानी करते हैं। आदेशों का पालन न करने पर अन्य आदेशों और दंड का भी प्रावधान किया गया है। कोविड-19 का सामना करते हुए नौकरशाही आदेश देने के अपने उसी परिचित तरीके पर निर्भर दिखी। यह जनता से संवाद का उनका आम तरीका बन गया है, फिर चाहे इससे लोगों में भ्रम और खौफ ही क्यों न पैदा हो।
दूसरा है, राहत प्रतिक्रिया। ऐतिहासिक रूप से, अविश्वास की वजह से नौकरशाहों और नागरिकों के बीच रोजाना अनगिनत आदेश जारी होते हैं। आज राशन कार्ड, मतदाता पहचान पत्र जैसे दस्तावेज यह निर्धारित करने की कुंजी बन गए हैं कि कोई नागरिक राहत-उपायों के लाभ का पात्र है या नहीं। और यह दायित्व नागरिकों पर ही होता है कि वे इन दस्तावेजों को पेश करें और अपनी पात्रता साबित करें। अनेक नागरिकों के पास ऐसे दस्तावेजों का न होना ऐसा महत्वपूर्ण कारक है, जिसके आधार पर लॉकडाउन की चरम स्थिति में भी प्रवासी श्रमिकों को खाद्यान्न उपलब्ध कराने में नौकरशाही खुद को असमर्थ बताती रही। ज्यादातर नागरिकों की मानें, तो राष्ट्र उनकी जरूरतों को पूरा करने में नाकाम रहा, इसने अविश्वास की खाई को और गहरा किया।
तीसरा, स्वास्थ्य प्रतिक्रिया। इस मोर्चे पर विश्वास की कमी एक और बड़ी चुनौती बन गई है। चूंकि महामारी के प्रसार को थामने और इलाज को लेकर तमाम तरह की उलझनें होती हैं, इसलिए सार्वजनिक स्वास्थ्य के मोर्चे पर जन-भागीदारी की जरूरत बढ़ जाती है। यह भागीदारी इसलिए भी अहम है, ताकि लक्षण का पता लगाकर जल्द ही जरूरतमंदों को इलाज की सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें। लंबे समय तक मानव व्यवहार में बदलाव (मास्क का इस्तेमाल और शारीरिक दूरी का पालन) को सुनिश्चित करने के लिए सहभागिता बहुत जरूरी है। स्वास्थ्य अर्थशास्त्री जिष्णु दास एक साक्षात्कार में कहते हैं कि कोविड-19 के खिलाफ सरकार व लोगों को एक साथ मिलकर काम करने की जरूरत है। कई संक्रामक रोगों के समय देश ऐसा करने में विफल रहा है। आज कोविड-19 हमारे सामने दोहरी चुनौती पेश कर रहा है।
पहली, इसमें कलंक व भय का दूर-दूर तक विस्तार हुआ है। मीडिया रोजाना बता रहा है कि समाज किस तरह कोविड-19 के मरीजों के साथ भेदभाव करता है। उनको लांछित किया जाता है। भारत की राजनीति ने इसे और बढ़ाने का काम किया है। तब्लीगी जमात की घटना में एक समुदाय विशेष को दोषी ठहराने से ऐसा माहौल बना, जिसमें रोगियों की देखभाल पर जोर देने की बजाय उन्हें कलंकित करने का चलन शुरू हो गया।
दूसरी, भारत का सार्वजनिक स्वास्थ्य तंत्र लंबे समय से यह विश्वास दिलाने में नाकाम रहा है कि नागरिकों को सस्ती व गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधा मुहैया कराने की क्षमता उसके पास है। विडंबना यह है कि अधिकतर भारतीयों का भरोसा अनौपचारिक निजी चिकित्सा क्षेत्र पर है। फिर भी, जब बात कोविड-19 की आती है, तो जांच से इलाज तक सरकार ही पूरी तरह जिम्मेदार दिखती है। यह जरूरी भी है। चूंकि संक्रामक रोगों में तमाम तरह के ऐसे बाहरी कारक होते हैं, जिनका बोझ गरीबों पर ही पड़ता है, इसीलिए इसमें सरकारी हस्तक्षेप अनिवार्य हो जाता है। मगर सरकार पर विश्वास की कमी के कारण बीमार लोग छिपने-बचने के प्रयास भी करते हैं, क्योंकि वे सरकारी अस्पतालों में इलाज नहीं कराना चाहते। यही वजह है कि दिल्ली जैसे शहर में महज इस फैसले ने तस्वीर बदल दी कि बिना लक्षण या कम लक्षण वाले मरीज घर में ही क्वारंटीन हो सकते हैं।
जाहिर है, सरकार इन तमाम चुनौतियों से बच नहीं सकती। जरूरी है कि सार्वजनिक स्वास्थ्य तंत्र पर लोगों के विश्वास को बढ़ाने की तरफ ध्यान दिया जाए। आदेशों के बार-बार प्रयोग, डाटा की कमी, केंद्र व राज्य स्तर पर निर्णय लेने में पारदर्शिता का अभाव आदि परस्पर विश्वास की राह की बड़ी बाधाएं हैं। इन्हें दूर करने की जरूरत है। समुदायों में विश्वसनीय रूप से पहुंच बनाने के लिए भी तंत्र को संजीदा प्रयास करने होंगे। धारावी में सरकार की यह कोशिश कारगर रही। मगर इन सफलताओं को भरोसे की कमी की व्यापकता के संदर्भ में भी देखने की जरूरत है। यदि इसे सरकार और सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ समझ लें, तो हम ऐसी टिकाऊ और समाजोन्मुखी दृष्टि को अपना सकेंगे, जिससे भारत कोविड-19 के खिलाफ कामयाब मुकाबला कर सकेगा।
(ये लेखिका के अपने विचार हैं)यामिनी अय्यर, अध्यक्ष और मुख्य कार्यकारी, सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च
रायपुर /शौर्यपथ / गोधन न्याय योजना के तहत गोबर खरीदी पर विपक्ष पार्टी भाजपा के वार पर पलटवार करते हुए प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष मोहन मरकाम ने कहा है कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने किसानों के हित में, मजदूरों के हित मे, पशुपालकों के हित मे गोबर खरीद रहे हैं तो रमन सिंह जी को तकलीफ होना स्वभाविक है, ईष्र्या होना स्वाभाविक है। रमन सिंह जी के कार्यकाल में तो एक नहीं अनेकों जगह करोड़ों रुपए का घोटाला गौशाला के नाम पर भाजपा नेताओं ने किया और गाय के मांस के लिए, गाय की चमड़ी के लिए गाय की हत्या का जघन्य कृत्य रमन सिंह जी के 15 साल के कार्यकाल में हुआ।
रमन सिंह जी यह बताएं कि उनको राज्य के खजाने की याद क्यों नहीं आई? मुंबई से करीना कपूर को सेल्फी खिंचवाने के लिए राज्य के खजाने का करोड़ों रूपए खर्च किए गए तब उन्हें राज्य की याद क्यों नहीं आई? डेढ़ सौ करोड़ रुपए वाले बजट वाले जनसंपर्क विभाग में रमन सिंह जी के प्रभारी मंत्री रहते हुए साढ़े 400 रू. खर्च किए गए, कांग्रेस के खिलाफ मुख्यमंत्री भूपेश बघेल जी उस समय प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष थे उनके खिलाफ साजिश रचने के लिए जनसंपर्क का पैसा बर्बाद किया गया तब रमन सिंह जी को राज्य के खजाने की याद क्यों नहीं आई?
प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष मोहन मरकाम ने कहा है कि दरअसल रमन सिंह जी 2018 के चुनाव की हार के बाद भाजपा में अप्रासंगिक हो गए हैं भाजपा का कोई भी सच्चा कार्यकर्ता और नेता उनको पसंद नहीं कर रहा है पार्टी में अपनी जगह बनाए रखने के लिए रमन सिंह इस तरह की बयान बाजी कर रहे हैं और खबरों में बने रहना चाहते हैं
भिलाई नगर / शौर्यपथ / भिलाई निगम आयुक्त रघुवंशी, उपायुक्त, जोन कमिश्नर, कार्यपालन अभियंता सहित अन्य अधिकारियों ने शहर का भ्रमण कर लाॅकडाउन की स्थिति का जायजा लिया। रहवासी और मार्केट क्षेत्र का निरीक्षण किया। लोगों से लाॅकडाउन के निर्देशों का कड़ाई से पालन करने का आग्रह किया गया। 1 दिन पूर्व से ही निगम भिलाई द्वारा लॉकडाउन को लेकर व्यापक रूप से तैयारी कर ली गई थी बुधवार की रात्रि को निगम की टीम द्वारा अलग-अलग बाजार एवं व्यवसायिक क्षेत्रों का भ्रमण किया गया! आज प्रातः से ही लॉकडाउन को लेकर निरीक्षण किया गया इस दौरान लाॅकडाउन का उल्लंघन करने वाले दो प्रतिष्ठान संचालकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई भी की गई! नियमों के उल्लंघन के मामले में वार्ड-13 स्थित सोनपापड़ी स्वीट्स के गोदाम को सील कर दिया गया। वहीं बैंकुठधाम के गुप्ता लड्डू हाउस के संचालक के खिलाफ 25 हजार रूपए जुर्माना की कार्रवाई की। इस तरह से पांच जोन की टीम ने लाॅक डाउन का उल्लंघन के मामले में 146 लोगों के खिलाफ कार्रवाई की। उनसे तकरीबन 1 लाख 18 हजार 620 रूपए जुर्माना लगाया।
जोन-2 में 78 लोगों के खिलाफ कार्रवाई
जोन-2 की आयुक्त पूजा पिल्ले की टीम ने 22 और 23 जुलाई को 78 लोगों के खिलाफ कार्रवाई की। गुरूवार की सुबह टीम निरीक्षण करते हुए वार्ड-13 रहवासी क्षेत्र पहुंची। जहां सोनपापड़ी स्वीट्स संचालक सुनील अग्रवाल के गोदाम में 25 -30 मजदूर काम करते हुए मिले। टीम ने उल्लंघन के मामले में पंचनामा तैयार कर गोदाम को सील कर दिया। इसी प्रकार छोटू होटल संचालक के खिलाफ 3 हजार, वार्ड-10 शांति नगर स्थित पालीवाॅल होटल संचालक के खिलाफ 2 हजार जुर्माना लगाया गया, होटल में भीड़ के साथ ही सोशल डिस्टेसिंग का पालन नहीं हो रहा था। इस वजह से होटल संचालकों के खिलाफ जुर्माने की कार्रवाई की गई।

मजदूर बना रहे थे मिठाई, जोन क्रमांक 3 ने की कार्यवाही
जोन-3 की आयुक्त प्रीति सिंह की टीम वार्ड-21 बैकुंठधाम सुंदर नगर गुप्ता लड्डू हाउस में दबिश दी। जहां 15-20 मजदूर काम कर रहे थे। लाॅक डाउन का उल्लंघन के मामले में संचालक के खिलाफ 25 हजार रूपए का अर्थदंड की कार्रवाई की। 22 जुलाई की शाम को वार्ड-20 स्थित राइस मिल और कपड़े के दुकान संचालक के खिलाफ कार्रवाई की थी। इस तरह से पिछले दो दिन में जोन-3 की टीम ने 30 लोगों से कुल 67 हजार जुर्माना वसूल किया।

जोन-1 की टीम ने 17 लोगों पर लगाया जुर्माना
जोन क्रमांक-1 के आयुक्त सुनील अग्रहरि के नेतृत्व में सहायक राजस्व अधिकारी शरद दुबे और पुलिस की टीम ने 17 लोगों के खिलाफ जुर्माना की कार्रवाई की। उनसे 32 हजार रूपए अर्थदंड वसूल किया गया। टीम ने नेहरू नगर, आकाग गंगा, होजियारी मार्केट सुपेला और लक्ष्मी मार्केट सुपेला के दुकानों का निरीक्षण किया।
टाउनशिप और खुर्सीपार क्षेत्र में भी की गई कार्रवाई जोन-5 के आयुक्त महेन्द्र पाठक की टीम ने 21 लोगों से 3950 रूपए जुर्माना वसूल किया। वहीं जोन-4 के आयुक्त अमिताभ शर्मा की टीम ने मार्निंग वाक पर निकले दो लोगों पर 150-150 रूपए जुर्माना लगाया।
सुबह से जायजा लेते रहे अधिकारी
निगम आयुक्त ऋतुराज रघुवंशी, उपायुक्त अशोक द्विवेदी, तरूण पाल लहरे ने सुबह 6 बजे से शहर का भ्रमण किया। इस बीच सेक्टर-6, 7, 8, 10 मार्केट, नेहरू नगर, वैशाली नगर, शांति नगर, गौरवपथ, घासीदास नगर, छावनी, नंदनी रोड, पावर हाउस, नेताजी सुभाष मार्केट, सर्कुलर मार्केट, जवाहर मार्केट, लिंक रोड और सुपेला मार्केट में रूककर लाॅक डाउन की स्थिति का जायजा लेते रहे! इस दौरान जोन आयुक्त, सहायक राजस्व अधिकारी, जोन के स्वास्थ्य अधिकारियों से चर्चा भी किए।
बेमेतरा/ शौर्यपथ / बुधवार की रात नवागढ़ नगर पंचायत के सीएमओ के शासकीय आवास के सामने स्थानीय लोगो ने खूब हंगामा किया। दरअसल नवागढ़ सीएमओ यमन देवांगन पर स्थानीयजनों ने आरोप लगाया है कि वह अक्सर शराब के नशे पर अपने आवास पर आते हैं और बाहरी महिलाओं का भी आना जाना लगा रहता है। बुधवार की रात लोगो न उनके आवास पर एक स्थानीय महिला को जाते हुए देखा है। जिसके बाद से स्थानीयजन उस महिला को बाहर निकालने की मांग करते रहे।
जानकारी के मुताबिक नवागढ़ सीएमओ यमन देवांगन ने शराब के नशे की हालत में स्थानीय लोगों के साथ मारपीट की है. घटना के बाद बीती रात ही भारी संख्या में नगरवासी उनके सरकारी निवास के बाहर जमा हो गए और जमकर हंगामा किया. सीएमओ के खिलाफ जमकर प्रदर्शन करते हुए कार्रवाई करने की मांग की। भीड़ को देखते हुए पुलिस प्रशासन भी घटना स्थल पर पहुंच गई, लेकिन भीड़ को समझाने में पुलिस के पसीने छूट गए. कार्यवाही न होता देख भीड़ आक्रोशित होने लगी और सीएमओ निवास में पथराव भी किया गया, जिसमें अंदर रखी कार एवं कुछ सामान को नुकसान पहुँचा है।
एसडीओपी एवं टीआई ने संभाला मोर्चा
कई घंटों तक चले इस हंगामे के बाद आखिरकार एसडीओपी राजीव शर्मा, नवागढ़ थाना प्रभारी अम्बर सिंह एवं नांदघाट थाना प्रभारी विपिन रंगारी मौके पर पहुँचे जँहा उन्होंने पब्लिक को सीएमओ यमन देवांगन के खिलाफ एफआईआर दर्ज बात कही, जिसके बाद पुलिस ने कड़ी मशक्कत कर्तव्य हुए जैसे तैसे सीएमओ देवांगन एवं महिला को वहाँ से निकाल कर थाना ले गए। जहाँ पुलिस ने सीएमओ के खिलाफ धारा 294,506 एवं 323 के तहत रिपोर्ट दर्ज की है। वहीं जिला प्रशासन ने एसडीएम से मामले की रिपोर्ट मांगी है।
शराबखोरी पुरानी आदत, मारपीट ने पकड़ी तूल
शिकायतकर्ता मोहन रजक ने बताया कि बुधवार की रात 9 बजे मैं कुमार सिन्हा के किराना दुकान के सामने बैठा था, उसी समय यमन देवांगन आया और मुझे यहां पर क्यों बैठा है, यहां से भाग जाओ कहकर अश्लील गाली-गलौच करते हुए जान से मारने की धमकी दिया। वह अक्सर यहाँ शराब खोरी और लड़कियां लाते रहता है। बता दें कि सीएमओ यमन देवांगन वर्तमान में धारा 452 के मामले में हाईकोर्ट से जमानत पर हैं।
लिखित शिकायत आई है,जांच कर कार्यवाही होगी
बेमेतरा एसडीओपी राजीव शर्मा ने बताया कि नवागढ़ सीएमओ यमन देवांगन के खिलाफ शंकर नगर के लोगों ने लिखित में शिकायत किया है कि शराब के नशे में मोहन नाम के व्यक्ति के साथ मारपीट की है. शिकायत में उल्लेख है कि सीएमओ सरकारी बंगले में शराब खोरी और अय्याशी करता है। शिकायत के आधार पर जांच में दोषी पाए जाने पर वैधानिक कार्यवाही होगी।

" सत्ता के संरक्षण में ऐसे अधिकारी मर्यादा की सीमा को लांग रहे है, ऐसे रंगे हाथ पकड़े गए सीएमओ को बचाने कांग्रेसी नेता जनता तक से भिड़ गए थे,इन्हें तत्काल बर्खास्त कर कानूनी कार्यवाही की जानी चाहिए ताकि मनचले अधिकारियों को सबक मिले."
दयावंत धर बांधे
प्रदेश मंत्री, भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा।
" मामले की रिपोर्ट बना कर नगरीय प्रशासन विभाग को भेज दिया गया है। विभागीय जांच के आधार पर कार्यवाही होगी।"
शिव अनन्त तायल
कलेक्टर, बेमेतरा।
दुर्ग / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री निवास के सामने बेरोजगार युवक हरदेव सिन्हा द्वारा आत्मदाह करने व उपचार के दौरान उनकी मौत होने के मामले को लेकर आज प्रदेश भाजयुमो के निर्देशानुसार जिला भारतीय जनता युवा मोर्चा अध्यक्ष दिनेश देवांगन के नेतृत्व में लॉकडाउन के बीच कलेक्ट्रेट पहुंचकर मृत युवक हरदेव सिन्हा को 50 लाख रुपए मुआवजा एवं परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी की मांग को लेकर सीएम के नाम ज्ञापन सौंपकर बेरोजगारो को नौकरी व भत्ता देने का वादा पूरा करने कांग्रेस सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी किया।इस अवसर पर भाजयुमो जिला महामंत्री नितेश साहू, जिला उपाध्यक्ष राहुल पंडित जिला मंत्री राहुल दीवान जिला प्रचार मंत्री राजा महोबिया उपस्थित थे
जिले में कोरोना संक्रमण रोकने 8 दिन के लॉकडॉउन के बीच आज इस मुद्दे पर प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों में भाजयुमो द्वारा सरकार के नाम ज्ञापन सौंपकर विरोध दर्ज कराए जाने के कार्यक्रम के तहत जिला युवा मोर्चा द्वारा कलेक्टर सर्वेश्वर भूरे की अनुमति से जिला भाजयुमो के पांच पदाधिकारियों का दल जिला अध्यक्ष दिनेश देवांगन के नेतृत्व में कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर एसडीएम रविराज ठाकुर को ज्ञापन सौंपा इस अवसर पर जनता युवा मोर्चा के जिला अध्यक्ष दिनेश देवांगन ने कहा कि बेरोजगारी से नवयुवक हताश परेशान हो रहे हैं और सरकार शराब में मस्त है। छत्तीसगढ़ के युवाओं को बेरोजगारी भत्ता, शासकीय नौकरियां, समूह ऋण माफी जैसे सब्जबाग दिखा कर सत्ता में आये कांग्रेस के नेता अब उन्ही युवाओं महिलाओं और बेरोजगार नोजवानों पर आंखें तरेर रही है। रोजगार की गुहार लेकर मुख्यमंत्री निवास पहुंचे युवा नौजवान से मुख्यमंत्री नही मिले, जिससे व्यथित होकर हरदेव सिन्हा ने आत्मदाह जैसा हृदयविदारक कदम उठा लिया। जिनकी आज मृत्यु हो गयी।
उन्होंने कहा कि निश्चित ही कांग्रेस सरकार द्वारा बेरोजगारों को शासकीय नौकरी या भत्ता देने का वादा पूरा नही करना जिम्मेदार है। उन्होंने कहा कि अगर मुख्यमंत्री, उनके सलाहकार और अमला थोड़ी भी संवेदनशीलता दिखाते तो आज एक बेटी विधवा नही होती, एक पिता अपना जवान बेटा नही खोता, एक छोटे से बच्चे के सर से उसके पिता का साया नही उठता। हरदेव किस कदर परेशान रहा होगा तब वह मुख्यमंत्री से मिलकर अपनी तकलीफ बताना चाह रहा था। परंतु उसे कहां पता था कि उस बंगले में निर्दयी लोग रहते हैं। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में एक वकील की हत्या पर कांग्रेस के सभी राष्ट्रीय नेता चिल्ला उठते हैं, यहां तक की मुख्यमंत्री योगी जी पर घृणित निजी आक्षेप करने, कांग्रेस प्रवक्ता द्वारा योगी जी की संतान नहीं होने जैसा अशोभनीय और अभद्र आक्षेप तक करने लगते हैं, लेकिन कांग्रेस शासित राज्य में ऐसी घटनाओं पर कांग्रेस नेतृत्व की चुप्पी पर क्या कहा जाय? भाजयुमो जिला अध्यक्ष दिनेश देवांगन ने आगे कहा कि भाजपा, कांग्रेस की तरह अभद्र आक्षेप नहीं कर सकती लेकिन यह तो पूछ ही सकती है कि इतने दर्दनाक घटना अपर राहुल गांधी की चुप्पी का आखिर रहस्य क्या है?
भाजयुमो जिला अध्यक्ष दिनेश देवांगन ने कहा कि प्रदेश में कुरीति, कुनीति, कुशासन, कुप्रबंधन चरम पर है। इससे प्रदेश के युवा छला हुआ महसूस कर रहे हैं जिसकी परिणति प्रदेश के एक युवा की मृत्यु के रूप में सामने आयी। सरकार की तो निर्लज्जता देखिए, आत्मदाह करने वाले नवयुवक को प्रदेश सरकार में बैठे कांग्रेस के नेता मानसिक रोगी साबित करने की जुगत में लग गए थे। सरकार में आकर लूटखसौट करने के लिए कांग्रेस के ये नेता किस हद तक गिर सकते हैं, हरदेव सिन्हा के आत्मदाह से निधन ने यह फिर साबित किया है। सरकार में आने के लिए इन लोगों ने क्या कुछ झूठे वादे नही किये। इनके नेता राहुल गांधी में यदि जरा भी इंसानियत मानवता सद्भावना बाकी हो तो वे तत्काल भूपेश बघेल से इस मृत्यु की पूरी रिपोर्ट तलब करें।
भाजयुमो नेता दिनेश देवांगन ने कहा कि हरदेव जी के परिवार के साथ भारतीय जनता पार्टी की गहरी संवेदना है। भारतीय जनता युवा मोर्चा सरकार से यह मांग करती है कि हरदेव सिन्हा के परिवार को 50 लाख बतौर मुवावजा और पत्नी को शासकीय नौकरी तत्काल दिया जाय। सरकार अपने किये वादों को शीघ्र पूर्ण करे। साथ ही ऐसी घटना की पुनरावृत्ति न हो इसलिए युवाओं को रोजगार,भत्ता आदि देने के वादे शीघ्र पूरा करे अन्यथा भाजयुमो आने वाले दिनों में उग्र आंदोलन करेंगी।
रक्षा बंधन जैसे पवित्र रिश्ता में भी राजनीति करने से नहीं चुकते भाजपा के नेता एवं नेत्रियां - फूलोदेवी नेताम
रमन सिंह को सरोज पांडे ने 15 सालों में राखी भेज कर शराब बंदी की मांग क्यों नहीं की ? क्या रमन पर सरोज को विश्वास नही था।
रायपुर / शौर्यपथ / राज्य सभा सांसद सरोज पांडे को अचानक से रिश्तेदारी याद कैसे आई राज्य सभा सांसद एवं महिला कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष श्रीमती फूलों देवी नेताम ने कहा कि रक्षा बंधन जैसे पवित्र रिश्ता में भी राजनीति करने से नहीं चुकते है भाजपा के नेता एवं नेत्रियां। राजनीति में बने रहने के लिये भाई बहन के रिश्तों पर भी ओछी राजनीति कर रहे है।
फूलों देवी नेताम ने कहा कि 15 साल तक भारतीय जनता पार्टी के शासन रहा क्या इन 15 सालों में सरोज पांडे ने रमन सिंह को राखी भेजकर शराब बंदी की मांग क्यों नही की ? क्या सरोज पांडे को रमन सिंह पर विश्वास नहीं था। लम्बे समय तक छत्तीसगढ़ में भारतीय जनता पार्टी का शासन था तब सरोज पांडे को याद नहीं आई शराब बंदी की। राखी जैसे पवित्र त्यौहार को राजनीति करण करने में भी नही चुके मानना पडेगा।
फूलोदेवी नेताम ने कहा सरोज पांडे को छत्तीसगढ़ वासियों का चिंतन यदि होता तो प्रधानमंत्री को पत्र लिख कर छत्तीसगढ़ राज्य को भी गरीब कल्याण योजना में शामिल करने के लिये कहती केन्द्र के भारतीय जनता पार्टी के सरकार छत्तीसगढ़ राज्य को गरीब कल्याण योजना में शामिल ना कर छत्तीसगढ़ के गरीब मजदूरों के साथ अन्याय किए सरोज पांडे को जिस समय छत्तीसगढ़ वासियों के प्रति अपना कर्तव्य निर्वाह करने का समय आता है उस समय पांडे गुमशुदा हो जाती हैं।
फूलोदेवी नेताम ने कहा केंद्र सरकार के गलत नीति के कारण महंगाई ने लोगों का कमर तोड़ दिया है । डीजल, पेट्रोल के मूल्य में बेताहाशा वृद्धि होने से आम जनता परेशान है दैनिक जीवन के आवश्यक वस्तुओं के दामों में वृद्धि होती जा रही है। महिलाएँ बहुत परेशान है बढ़ती हुई महंगाई से घर का बजट असंतुलित हो गया है ।संकट के समय में केंद्र सरकार से राहत एवं सहायता की अपेक्षा रखते है जनता लेकिन केंद्र सरकार जनता को राहत देने के बजाय महंगाई का अौर अतिरिक्त बोझ थोप रही हैं सरोज पांडे जी क्या आपने कभी बढ़ती हुई महंगाई को कम करने के लिये नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखा। महिलाओं के बारे में आपको इतना अधिक चिंता है तो आप बताये कोरोना काल के विषम परिस्थितियों में महिलाओं के लिये आपने क्या किया ।
फूलोदेवी नेताम ने कहा कि सरोज पांडे ने छत्तीसगढ़ के मुख्य मंत्री भूपेश बघेल को राखी भेजकर साबित कर दिया कि मा. भूपेश बघेल के ऊपर बहुत ही ज्यादा विश्वास है नेताम ने कहा कि सिर्फ सरोज को नहीं छत्तीसगढ़ के प्रत्येक महिलाओं को बघेल जी के ऊपर विश्वास एवं भरोसा है । इतने कम समय में कांग्रेस सरकार ने ऐतिहासिक निर्णय लिए और इन ऐतिहासिक निर्णय के कारण आज छत्तीसगढ़ मे सब तरफ खुशहाली हैं । हर वर्ग के लोग खुश है। कोई भी नही सोचे थे कि गोबर के भी पैसे मिलेगें। ग्रामीण महिलाओं में भी अलौकिक आत्मविश्वास आ गया है ।
शौर्यपथ स्वास्थ्य / कोलेस्ट्रोल अगर ज्यादा हो तो शरीर को नुक्सान पहुंचा सकता है इससे हार्ट अटैक जैसी जानलेवा बिमारी का भी सामना हो सकता है . आज के युग में स्वस्थ शरीर ही आपकी रक्षा कर सकता है आपको जीने की राह दिखा सकता है अगर आप स्वस्थ रहे तो सब अच्छा लगेगा अगर आप अस्वस्थ रहे तो सब बुरा . इस लिए जरुरी है कि अपनी दिनचर्या में ऐसे पदार्थ का सेवन करे जो आपके कोलेस्ट्रोल को नियंत्रित और शारीर की मानक के अनुसार संतुलित रखे और आप स्वस्थ रहे .
हमारे खान-पान का सीधा असर हमारे शरीर पर पड़ता है। दिल की बीमारियों का सीधा संबंध कोलेस्ट्रॉल से है। कोलेस्ट्रॉल शरीर के लिए जरूरी है लेकिन कलेस्ट्रॉल बढ़ जाने से हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। शरीर में गुड कोलेस्ट्रॉल और बैड कोलेस्ट्रॉल दोनों ही पाए जाते हैं। अपने खानपान में थोड़ा सा बदलाव करके आप शरीर में बैड कलेस्ट्रॉल की मात्रा को घटाकर गुड कलेस्ट्रॉल की मात्रा को बढ़ा सकते हैं। हम आज आपको बता रहे हैं कुछ ऐसी चीजों के बारे में जिनका सेवन करने से आपका बैड कलेस्ट्रॉल कम हो सकता है:
1. ऑलिव ऑयल
कलेस्ट्रॉल सबसे ज्यादा तेल की वजह से बढ़ता है। ऑलिव ऑयल के इस्तेमाल से सामान्य तेल की अपेक्षा 8 प्रतिशत तक कलेस्ट्रॉल कम किया जा सकता है।
2. ओट्स
ओट्स में फाइबर पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है और इसमें बीटा ग्लूकॉन भी होता है जो आंतों की सफाई करता है और कब्ज से राहत दिलाता है। नियमित तौर पर नाश्ते में ओट्स खाने से शरीर में कलेस्ट्रॉल को लगभग 6 प्रतिशत तक कम किया जा सकता है।
3. मछली
मछली में ओमेगा 3 फैटी ऐसिड पाया जाता है। स्वस्थ रहने के लिए सप्ताह में दो बार स्टीम्ड या ग्रिल्ड मछली खा सकते हैं।
4. अलसी
अलसी के बीज कलेस्ट्रॉल को कम करने में काफी मददगार होते हैं। बेहतर होगा कि आप साबुत बीज की जगह पर पिसे हुए बीज का सेवन करें।
5. ग्रीन टी
ग्रीन टी कलेस्ट्रॉल को कम करने में काफी सहायक होती है।
6. धनिया के बीज
धनिया की बीजों के पाउडर को एक कप पानी में उबालकर दिन में दो बार पीने से भी कलेस्ट्रॉल कम होता है।
7. प्याज
हाई कलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने में लाल प्याज काफी फायदेमंद होता है। एक चम्मच प्याज के रस में एक चम्मच शहद मिलाकर सेवन करें।
8. आंवला
एक चम्मच सूखे आंवला के पाउडर को एक गिलास गर्म पानी में मिलाकर सुबह-सुबह पीने से कलेस्ट्रॉल कम होता है।
9. सेब का सिरका
सेब का सिरका हमारे शरीर के टोटल कलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड के लेवल को कम करता है।
10. संतरे का जूस
हाई कलेस्ट्रॉल को प्राकृतिक रूप से कम करने के लिए नियमित तौर पर तीन कप संतरे के जूस पिएं।
11. नारियल का तेल
कलेस्ट्रॉल कम करने के लिए रोज खाने के साथ आर्गेनिक नारियल के तेल का एक से दो चम्मच इस्तेमाल करें। रिफाइंड या प्रोसेस्ड नारियल के तेल का इस्तेमाल न करें।
12. मूंगफली
रोज 50 ग्राम मूंगफली के दाने खाने से कलेस्ट्रॉल को कम किया जा सकता है।
13. अखरोट
सुबह उठकर 2-3 अखरोट नियमित तौर पर खाने से कलेस्ट्रॉल पर नियंत्रण पाया जा सकता है।
14. बादाम
4-5 बादाम रोज खाने से भी कलेस्ट्रॉल कम होता है। बेहतर होगा कि शाम को बादाम भिगो दें और सुबह उनका सेवन करें।
15. पिस्ता
रोज पिस्ता खाने से भी कलेस्ट्रॉल कम होता है।
16. रेड वाइन
सप्ताह में में 2 बार थोड़ी सी रेड ग्रेप वाइन पीकर भी आप कलेस्ट्रॉल को कम कर सकते हैं।
17. अंकुरित दालें
राजमा, चने, मूंग, सोयाबीन और उड़द इत्यादि को अंकुरित कर सलाद के तौर पर इस्तेमाल करें तो भी कलेस्ट्रॉल कम होगा।
18. डार्क चॉकलेट
डार्क चॉकलेट में पाए जाने वाले एंटी-ऑक्सीडेंट्स से रक्त नलिकाएं मजबूत बनती हैं। इसका सेवन करने से भी कलेस्ट्रॉल कम हो सकता है।
19. हरी पत्तेदार सब्जियां
हरी पत्तेदार सब्जियों में विटामिन ए,बी और सी के अलावा आयरन और कैल्शियम भी पाया जाता है। इनका सेवन करने से कलेस्ट्रॉल कम होता है।
20. लहसुन
लहसुन का नियमित सेवन करके भी बैड कलेस्ट्रॉल को कम किया जा सकता है।
21. चोकर वाली रोटी
बिना चोकर अलग किए गए आटे से बनाई गईं रोटी से भी आप अपना कलेस्ट्रॉल कम कर सकते हैं।
22. सोयाबीन
सोयाबीन से बनी चीजें जैसे सोया मिल्क, सोया दही, सोया टोफू, सोया चंक्स आदि चीजों को अपने खाने में शामिल करें। इससे आपका कलेस्ट्रॉल कम होगा।
23. सूर्यमुखी
सूर्यमुखी (सूरजमुखी) के तेल और बीज में अनसैचुरेटेड पॉली फैटी एसिड पाया जाता है जो कि कलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने में काफी लाभकारी है।
24. डेयरी उत्पाद
दूध, दही, छांछ आदि को अपनी डायट में शामिल करें। फैट-फ्री डेयरी प्रॉडक्ट्स का इस्तेमाल करें।
25. लाल मांस
लाल मांस में पॉलीसैचुरेटेड फैटी ऐसिड पाया जाता है, जो कि हानिकारक कलेस्ट्रोल के निर्माण को रोकता है।
यह सभी उत्पाद प्राकृतिक है किन्तु मानव शरीर में ऐसे कई खाद्य पदार्थ है जिससे कई इंसानों को एलर्जी होती है अतः इन सब का सेवन करने के पहले एक बार चिकित्सक से सलाह अवश्य ले और अपनी सेहत को चुस्त तंदरुस्त रखे ..
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
