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June 02, 2026
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शौर्यपथ

शौर्यपथ

रायपुर / शौर्यपथ / प्रदेश के पीएचई मंत्री गुरु रूद्र कुमार का 23 जुलाई को जन्मदिन था . और 23 जुलाई से ही दुर्ग जिले में व 22 जुलाई से रायपुर में लॉक डाउन प्रारंभ हुआ . प्रशासन की माने तो यह लॉक डाउन कोरोना संक्रमण के विस्तार को रोकने के लिए लगाया जा रहा है ताकि 7 दिनों के लॉक डाउन में कोरोना संक्रमण की चेन ब्रेक हो . लॉक डाउन ज़रूरी भी इसलिए हो गया कि प्रदेश में लगातार कोरोना संक्रमण के मामले बढ़ रहे है और सरकार के प्रयासों पर विपक्ष लगातार ऊँगली उठा रही है .
इस लॉक डाउन में प्रदेश में ऐसे कई मामले आये जहा यादगार पल को भी जनता ने अकेले परिवार के बीच मनाया और शासन के आदेशो का पालन कर घर में लॉक रहे दो वक्त की रुखी सुखी खा ली किन्तु घर में ही रहे ताकि संक्रमण के रोकथाम में शासन के आदेशो का पालन हो सके .
किन्तु यही विचार सत्ता में बैठे मंत्री नहीं कर पाए , जनप्रतिनिधि नहीं कर पाए . बड़ी बड़ी बाते कहकर जनता को शासन के आदेशो का पालन करने और सरकार के कार्यो का समर्थन करने की बात कहने वाले मंत्री अपने ही उपर ये नियम क्यों लागू नहीं कर पाते क्या शासन के नियम से उपर है मंत्री .

   दुर्ग जिले से मंत्री गुरु रूद्र कुमार 23 जुलाई को अपना जन्मदिन मना रहे थे और उनको बधाई देने वालो की लम्बी फौज दुर्ग से रायपुर तक थी . एक ओर जहां आम जनता 12 बजे के बाद नहीं निकल सकता शासन के आदेश के अनुसार वही मंत्री जी को बधाई देने वालो के लिए कोई समय सीमा नहीं थी कोई भी कभी भी कितनी भी संख्या में किसी भी जिले से पहुँच सकता था ऐसा रुतबा है प्रदेश के मंत्री महोदय का और उनके समर्थको का जिनके लिए लॉक डाउन के नियमो का कोई अर्थ नहीं . लॉक डाउन के नियम सब्जी वालो पर लागू होते है जो समय से थोड़ा ज्यादा बैठ जाए , लॉक डाउन के नियम दूध बेचने वालो पर लागू होते है जो समय सीमा के बाद भी बचे हुए दूध को बेचने की कोशिश करते है , लॉक डाउन के नियम उन पर लागू होते है जो सालो से मोर्निंग वाक कर रहे है स्वस्थ हवा ले रहे है किन्तु नियमो के चलते या तो जुर्माना भर रहे है या फिर घर में बैठे है क्या यही है लॉक डाउन का नियम क्या ऐसे ही सुशासन की बात करेंगे प्रदेश सरकार के मंत्री जी , जनप्रतिनिधि गण . क्या जनता के द्वारा चुने सेवक जनता से अलग हो गए कानून इनके लिए अलग हो गया .
क्या इसी लिए सत्ता की चाह थी कि सत्ता में आते ही शासन के नियम जिनको धरातल में लाने की जिम्मेदारी मंत्री जी की , जनप्रतिनिधियों की भी होती है वही शासन के नियमो की धज्जी उडाये ? और प्रशासन के अधिकारी मौन होकर अपना सारा गुस्सा आम जनता पर उतारे ? क्या ऐसे होता है लॉक डाउन ?

भिलाई / शौर्यपथ / भिलाई इस्पात संयंत्र की नब्ज के रूप में काम करने वाला विभाग है, इन्टीग्रेटेड कंट्रोल सिस्टमजिसे हम इंकास विभाग के नाम से जानते हैं। इस विभाग का प्रमुख कार्य है फाइबर ऑप्टिक डेटा नेटवर्क का रखरखाव, पीएलसी आधारित सिस्टम का मेंटेनेंस, हॉट शॉप्स व मिल्स में प्रोसेस ऑटोमेशन को चलाने हेतु पीएलसी स्पेयर्स की खरीदी, विभिन्न ब्रेकडाउन्स का निराकरण आदि।
इंकास की शुरुआत वर्ष 1986 में हुई। यह विभाग हमारे संयंत्र में प्लांट स्वचालन और कम्प्यूटरीकरण तथा डेटा संचार के क्षेत्र में प्रमुख भूमिका निभा रहा है। 1986 से पहले, संयंत्र में अधिकांश उपकरण कंप्यूटर संगत नहीं थे। परन्तु संयंत्र के ऑटोमेशन के लिए कंप्यूटर संगत प्रक्रिया को लागू करना इसकी पहली आवश्यकता थी। इसलिए विभाग के लिए पहला काम कंप्यूटर संगत प्रक्रिया संकेतों को प्राप्त करने के लिए उचित उपायों की पहचान कर इसे प्राप्त करना था। इस जरूरत को विभाग ने इंस्ट्रूमेंटेशन विभाग और प्रोडक्शन शॉप्स के सक्रिय सहयोग के साथ पूरा किया। यह स्वचालन की दिशा में पहला कदम था।
महाप्रबंधक प्रभारी इंकास के शंकरसुब्रमण्यन ने स्टील प्लांट के क्रमिक ऑटोमेशन की प्रक्रिया को समझाते हुए बताया कि हमारे संयंत्र में 5 अलग-अलग स्तर के ऑटोमेशन सिस्टम लगे हुए हैं। लेवल-0 में सेंसरों और माप उपकरणों का उपयोग किया गया है, लेवल-1 क्षेत्र विशेष में स्थानीय स्तर पर प्रक्रिया नियंत्रण प्रणाली का उपयोग किया जा रहा है, लेवल-2 में शॉप लेवल ऑटोमेशन शामिल है, लेवल-03 के तहत केंद्रीय निगरानी प्रणाली और प्रबंधन सूचना प्रणाली लगाई गई है, लेवल-04 में ईआरपी/एमईएस के माध्यम से व्यापारिक लेनदेन के लिए ऑटोमेशन किया गया है। उन्होंने आगे कहा कि इंकास का गठन विभिन्न उत्पादन और सेवा इकाइयों में स्वचालन प्रणाली की पहचान, अवधारणा और कार्यान्वयन के लिए किया गया था और यह उनकी सुचारू कार्यप्रणाली को सुनिश्चित करता है।
इंकास विभाग का कार्यक्षेत्र प्लांट, माइंस तथा अस्पताल से लेकर टाउनशिप क्षेत्र में फैला हुआ है। प्लांट के भीतर के क्षेत्र को 5 जोन में विभाजित किया गया है-आयरन जोन, स्टील जोन, मिल्स जोन, एनर्जी मैनेजमेंट जोन और नेटवर्किंग ग्रुप। विभाग का सम्पर्क अपने फाइब्रो ऑप्टिक नेटवर्क के माध्यम से संयंत्र के प्रत्येक क्षेत्र के कोने-कोने में है। इसके अलावा, इंकास विभाग संयंत्र की नई परियोजनाओं के तहत लगे विभिन्न विभागों जैसे यूआरएम, ब्लास्ट फर्नेस-8, कोक ओवन बैटरी-11 एवं एसएमएस-3 में अत्याधुनिक ऑटोमेशन की अवधारणा, सिस्टम को बनाए रखने, डेटा साझा करने के लिए नेटवर्क कनेक्शन, उत्पादों के डिस्पैच तथा ब्रेकडाउन्स के समाधान हेतु अपनी भूमिका का बखूबी निर्वहन कर रहा है।
इंकास विभाग के महाप्रबंधक एम पी सिंह ने बताया कि प्लांट और टाउनशिप क्षेत्र में व्यवसाय और प्रक्रिया अनुप्रयोगों को चलाने के लिए, 2 कोर स्विच, 15 एरिया स्विच/राउटर्स, 4 एग्रेगेशन स्विच और 500 से अधिक एज स्विच लगाए गए हैं। साथ ही संचार व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने हेतु एक प्रतिबद्ध सर्वर सिस्टम को मेंटेन किया जाता है जिसके माध्यम से संचार की आवश्यकता को बनाए रखने के लिए ईमेल, इंटरनेट प्रॉक्सी और एंटीवायरस जैसी इन्फ्रास्ट्रक्चर सेवाएँ प्रदान की जाती हैं। लगभग 500 किमी फाइबर ऑप्टिक नेटवर्क के माध्यम से संयंत्र के लगभग 6000 उपयोगकर्ताओं तथा टाउनशिप के 750 उपयोगकर्ताओं को जोड़ा गया है। वे आगे कहते हैं कि ईआरपी के माध्यम से डेटा साझा करना, सेल नेट के माध्यम से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सुविधा, प्लांट के अंदर उपकरणों से डेटा कैप्चर करने और डेटा की उपलब्धता सुनिश्चित करने के बाद केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को सांविधिक प्रदूषण उत्सर्जन संबंधित पर्यावरण डेटा उपलब्ध कराया जाता है। विभाग द्वारा संयंत्र के उत्पादन गतिविधियों को सक्षम और सुचारू बनाए रखने पर विशेष ध्यान केंद्रित किया जाता है। वर्ष 2013 से इंकास में कार्यरत् ओसीटी श्री कुंचे साई किरण का कहना है कि उन्हें खुशी है कि उन्हें आयरन जोन में प्रोसेस ऑटोमेशन कार्य को संपादित करने का मौका मिला है। जिसके तहत सॉफ्टवेयर्स व पीएलसी प्रोग्रामिंग को अपडेट करने से लेकर वर्चुअल सर्वर की उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ-साथ एचएमआई क्लाइंट के माध्यम से नेटवर्किंग को सक्षम बनाने में अपना योगदान दे रहे हैं। उन्हें गर्व है कि एसपी-3, कोक ओवन बैटरी-11, ब्लास्ट फर्नेस-8 और ओएचपी-बी में मॉडेक्स परियोजनाओं की कमीशनिंग में सहयोग प्रदान किया है।

रायपुर / शौर्यपथ / भाजपा द्वारा सोशल मीडिया में चलाए जा रहे बने रिहिस डॉक्टर रमन कार्यक्रम पर कांग्रेस ने तंज कसा प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि रमन सिंह के 15 साल के शासनकाल मे भाजपा 15 सीट में सिमट गई।भाजपा के जितने मिसकाल वाले 56 लाख सदस्य है उतना वोट भी भाजपा को नही मिला।2018 के विधानसभा चुनाव में हुई भाजपा की करारी हार और रमन सिंह को जनता के द्वारा नकारे जाने के बाद भी यदि भाजपा के लिए डॉक्टर रमन सिंह बढ़िया है?तो 2019 में आरएसएस भाजपा ने डॉ रमन सिंह को प्रधानमंत्री क्यों नहीं बनाया? डॉ रमन सिंह वर्तमान प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी से ज्यादा पढ़े लिखे हैं।15 साल तक मुख्यमंत्री भी रहे हैं।चीन की यात्रा भी किये है?अडानी को कोल माईनस भी दिये है?रिलायंस का टावर लगवाने में मदद किये है? भाजपा के बड़े नेताओं की कंस्ट्रक्शन कंपनी को बड़े बड़े कंस्ट्रक्शन वर्क,साफ सफाई का ठेका,एनजीओ का काम दिलाकर फायदा पहुँचाये है।इस दौरान कमीशन खोरी और भ्रष्टाचार की काली कमाई से आरएसएस और भाजपा के बड़े नेताओं को भी लाभ पहुंचाते रहे हैं।भाजपा समर्थित अदानी अंबानी को मदद करते रहे हैं?पंचायतों की विकास मद की राशि से भीड़ बुलाकर भाजपा के बड़े नेताओं पर फूल बरसाते रहे है।भाजपा नेताओं के रिश्तेदारों,बेटी बेटा दमाद सब को छत्तीसगढ़ में बड़े बड़े ओहदे दिये।
प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि 15 साल के रमन सरकार के कुशासन भ्रष्टाचार कमीशनखोरी अराजकता से छत्तीसगढ़ की जनता पीड़ित रही है। उस दौरान प्रतिदिन 2 किसान आत्महत्या करते थे।आउट सोर्सिंग से भर्ती कर युवाओं को छला गया। छत्तीसगढ के जल जंगल जमीन वन संपदा,खनिज संपदा का दोहन किया गया। आदिवासियों की जमीन छीनी गई। भाजपा रमन के 15 साल के शासनकाल के दौरान छत्तीसगढ़ का जन जन हताश परेशान था। उस दौरान मात्र आरएसएस और भारतीय जनता पार्टी जुड़े हुए लोग ही खुश थे।रमन सरकार के दौरान कमीशन खोरी भाजपा का मूल काम था।विकास कार्यों के नाम से भ्रष्टाचार करना कमीशन खोरी करना गरीबों के मकान दुकान को तोड़ना आदिवासियों की जमीन को अनैतिक तरीके से हथियाना सहित रेत माफिया शराब माफिया अमानक बीज खाद दवाइयां के कार्यों को संरक्षण देने काम भाजपा के नेताओ के संरक्षण में होते रहे।
प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल सरकार के 18 महीने के कार्यकाल से छत्तीसगढ़ के किसान मजदूर महिलाएं छात्र युवा व्यापारी आदिवासी वर्ग पिछड़ा वर्ग सहित सर्वहारा वर्ग खुशहाल हो रहा है।मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान, मुख्यमंत्री हाट बाजार क्लीनिक मुख्यमंत्री शहरी स्लम क्लीनिक नरवा गरवा घुरवा बारी,राजीव गांधी किसान न्याय योजना, गोधन न्याय योजना, किसानों के कर्ज माफी बिजली बिल हाफ सिंचाई कर माफ़ धान की कीमत 2500,तेंदूपत्ता का मानक दर 2500 से बढ़ाकर 4000 रुपया प्रति बोरा,आदिवासियों की जमीन लौट आना शिक्षाकर्मियों का संविलियन जेलों में बंद निर्दोष आदिवासियों को जेल से बाहर निकालना छोटे भूखंडों की रजिस्ट्री सहित अनेक जनकल्याणकारी निर्णयों योजनाओं को मिल रहे व्यापक जनसमर्थन के सामने भाजपा मुद्दा विहीन हो चुकी है मुद्दों के दिवालियापन के दौर से गुजर रही है।

लाइफस्टाइल / शौर्यपथ / क्या आपने कभी ऐसे लोगों को देखा है, जो हमेशा कुछ न कुछ खाते रहते हैं? हर समय कुछ न कुछ खाते रहना सेहत के लिए अच्छा नहीं होता।यह आदत धीरे-धीरे ईटिंग डिसऑर्डर तक जाती है। ईटिंग डिसॉर्डर खानपान की आदतों से संबंधित एक गंभीर स्थिति है, जो नकारात्मक रूप से आपके स्वास्थ्य, भावनाओं और कार्य करने की क्षमता को प्रभावित करती है। इस समस्या से ग्रस्त लोगों में खानपान की आदतें सामान्य नहीं रहतीं। कुछ लोग अपने शरीर की आवश्यकता से अधिक खाते हैं, तो कई लोग उससे बहुत कम खाते हैं।

ईटिंग डिसॉर्डर के प्रकार
एनारेक्सिया नवरेसा, बुलिमिया नवरेसा और बिंज ईटिंग डिसॉर्डर सबसे सामान्य प्रकार के डिसॉर्डर हैं। इसके अलावा कुछ और ईटिंग डिसॉर्डर हैं, जिनमें पिका, रूमिनेशन डिसॉर्डर और अवाइडेंट/रिस्ट्रक्टिव फूड इनटेक डिसॉर्डर प्रमुख हैं।

एनारेक्सिया नवरेसा
एनारेक्सिया नवरेसा को आम भाषा में एनारेक्सिया कहा जाता है। यह एक घातक ईटिंग डिसॉर्डर है। इसमें शरीर का वजन कम हो जाता है, क्योंकि जो लोग एनारेक्सिया से पीड़ित होते हैं, वे अपने भार और शरीर के आकार को नियंत्रित करने का अत्यधिक प्रयास करते हैं। एनारेक्सिया से पीड़ित लोग कैलरी का सेवन अत्यधिक कम कर देते हैं या वजन कम करने के लिए दूसरे उपायों को अपनाते हैं। इसमें अत्यधिक व्यायाम करना, पेट साफ रखने के लिए लैक्जेटिव का सेवन या खाने के बाद उल्टी कर देना जैसी चीजें शामिल होती हैं। वजन कम करने के ये प्रयास तब भी जारी रहते हैं, जब वजन अत्यधिक कम हो जाता है। कभी-कभी इससे पीड़ित लोग खुद को इतना भूखा मारते हैं कि यह स्थिति उनके लिए घातक हो जाती है।

बुलिमिया नवरेसा
बुलिमिया घातक ईटिंग डिसॉर्डर है। इससे पीड़ित व्यक्ति का खानपान पर नियंत्रण नहीं रहता। ऐसे लोग थोड़े समय में ही अधिक मात्रा में खा लेते हैं और अस्वस्थ तरीके से उस अतिरिक्त कैलोरी को कम करने का प्रयास करते हैं, क्योंकि अधिक खाने के बाद ऐसे लोग शर्म और अत्यधिक भय से भर जाते हैं। वजन बढ़ने के डर से वे उल्टी करने का प्रयास करते हैं, अत्यधिक व्यायाम करते हैं या लैक्जेटिव का उपयोग करते हैं, ताकि अतिरिक्त कैलरी मल द्वारा निकल जाए।

बिंज ईटिंग डिसॉर्डर
बिंज ईटिंग डिसॉर्डर से पीड़ित लोग नियमित रूप से अत्यधिक भोजन खाते हैं। ऐसे लोगों को इस बात का पूरा एहसास रहता है कि उनका अपने खानपान पर नियंत्रण नहीं रहा। बिंज के बाद भी लोग अपने व्यवहार के कारण आत्मग्लानि, गुस्से या शर्म से भर जाते हैं, लेकिन बुलिमिया की तरह वे इस अतिरिक्त कैलरी इनटेक को व्यायाम या दूसरे तरीकों से बाहर निकालने का प्रयास नहीं करते।

अन्य ईटिंग डिसॉर्डर
पिका : पिका एक ऐसा ईटिंग डिसॉर्डर है, जिसमें व्यक्ति को नॉनफूड आइटम खाने का मन करता है, जैसे साबुन, कपड़ा, टैलकम पाउडर, धूल, चॉक आदि। यह समस्या महीने में कम से कम एक बार तो होती ही है। पिका न स्वास्थ्य के लिए अच्छा है और न ही सामाजिक रूप से। लगातार इन चीजों के सेवन से स्वास्थ्य संबंधी कई जटिलताएं हो सकती हैं, जैसे पॉयजनिंग, पाचन मार्ग संबंधी समस्या या संक्रमण। पिका अकसर दूसरी स्वास्थ्य समस्याओं के साथ होता है, जैसे ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसॉर्डर।

 

खाना खजाना / शौर्यपथ / बटाटा गोलगप्पे चाट वीकेंड के लिए सबसे खास रेसिपी है। यह रेसिपी बच्चों को भी बहुत पसंद आएगी। आइए, जानते हैं रेसिपी-

सामग्री :
गोलगप्पे- आवश्यकतानुसार
उबले आलू- 2
चाट मसाला पाउडर- 1 चम्मच
नीबू का रस- 1 चम्मच
बारीक कटा प्याज- 2

दही के लिए सामग्री :
दही- 1/2 कप
काला नमक- स्वादानुसार
चीनी- 1 चम्मच

गार्निशिंग के लिए:
लाल मिर्च पाउडर- आवश्यकतानुसार
चाट मसाला पाउडर-आवश्यकतानुसार
हरी चटनी- 1/2 कप
मीठी चटनी- 1/2 कप
सेव- 1 कप

विधि :
एक बाउल में आलू का छिलका छीलकर मैश करें। उसमें चाट मसाला और नीबू का रस डालकर अच्छी तरह से मिलाएं। एक दूसरे बाउल में दही, काला नमक और चीनी डालकर अच्छी तरह से फेंट लें। सर्विंग प्लेट में पानी पूरी रखें और एक-एक करके सारी पानी पूरी के बीच में छेद करें। उसमें थोड़ा-थोड़ा आलू वाला मिश्रण डालें। ऊपर से थोड़ा-थोड़ा प्याज, दही, दोनों चटनियां, सेव, चाट मसाला, लाल मिर्च पाउडर और धनिया पत्ती डालें। तुरंत सर्व करें।

 

टिप्स / शौर्यपथ / कुकिंग टिप्स की बात करें, तो ये छोटे-छोटे टिप्स खाने को और भी टेस्टी बना देते हैं। आज हम आपको ऐसे ही टिप्स बताएंगे जिससे कि चिकन की रेसिपी और भी टेस्टी बनेगी-
-चिकन को पकाते वक्त शुरुआत में उसे हमेशा तेज आंच पर पकाएं ताकि उसका जूस सील हो जाए, उसके बाद उसे धीमी आंच पर पकाएं।
-चिकन के टुकड़ों में मसाले अच्छी तरह से लग जाएं, इसके लिए एक प्लास्टिक की पॉलिथिन में पहले मसाले और मैरीनेट की सभी सामग्री डालें और उसे अच्छी तरह से हिलाएं। इसके बाद चिकन को पकाएं। इसका फायदा यह होगा कि चिकन में मसाले अच्छी तरह से रच-बस जाएगा।
-फ्राइड चिकन बनाते वक्त चिकन को तलने से पहले आटे या मैदा में रोल करने की जगह, मिल्क पाउडर में रोल करें। तलने के बाद चिकन का रंग अच्छा आएगा।
-अगर आप चाहती हैं कि आपके बनाए कबाब मुलायम बनें और उन्हें चबाने में खाने वाले को परेशानी न हो, तो उन्हें अपेक्षाकृत ज्यादा देर तक मैरीनेट करें और साथ ही जरूरत से ज्यादा पकाएं नहीं।
-चिकन को हमेशा ऊंचे तापमान पर पकाएं ताकि उसके सभी बैक्टीरिया पूरी तरह से मर जाएं।
-चिकन की साफ-सफाई के दौरान खास सतर्कता बरतें। चिकन को हमेशा गर्म पानी से धोएं। साथ ही जिस बरतन में आपने कच्चे चिकन को रखा है, उसे भी गर्म पानी से धोना न भूलें। कच्चे चिकन को छूने के बाद अपने हाथों को साबुन से धोना न भूलें। इसके अलावा अगर आप कच्चे चिकन को फ्रिज में स्टोर कर रही हैं, तो इस बात का ध्यान रखें कि उसका जूस खाने के दूसरे सामान में न लगे।

 

सेहत / शौर्यपथ / आहार विशेषज्ञ दिन में कम से कम दो लीटर पानी पीने की सलाह देते हैं लेकिन रोजाना दो लीटर पानी पीना सभी लोगों के लिए मुमकिन नहीं है।इस वजह यह है कि किसी को प्यास ज्यादा लगती है तो किसी को कम।ऐसे में जाहिर सी बात है कि कम प्यास लगने वाले लोग पानी भी कम पीते होंगे।ऐसे में आपको अपनी डाइट में कुछ ऐसी चीजें जोड़नी चाहिए जिससे कि शरीर में पानी की कमी की पूर्ति हो सके।आइए, जानते हैं कुछ ऐसे ही आहार-

दही
डिहाइड्रेशन की समस्या से दूर रखने में दही सबसे अच्छा विकल्प साबित हो सकता है। इसमें पानी की मात्रा 85 प्रतिशत होती है और शरीर के लिए जरूरी प्रोबायोटिक भी पर्याप्त मात्रा में मौजूद होते हैं।यह गर्मी की एलर्जी से बचाव के लिए भी शरीर का खूब साथ देता है। यह प्रोटीन, विटामिन बी और कैल्शियम का अच्छा स्त्रोत है।

 

ब्रोकली
ब्रोकली में 89 प्रतिशत तक पानी होता है और यह न्यूट्रिशन से भरपूर होती है। इसकी प्रकृति एंटी इनफ्लेमेटरी होती है, जिस कारण यह गर्मी में होने वाली एलर्जी से बचाव करती है। इसे आप सलाद में कच्चा ही खा सकते हैं और टोस्ट के साथ हल्का तल कर भी इसका भरपूर लाभ उठा सकते हैं। काफी संख्या में लोग इसकी सब्जी भी बनाते हैं।

 

सेब
एक कहावत है कि डॉंक्टर को खुद से दूर रखने के लिए रोजाना एक सेब खाएं। अनेक तरह से फायदेमंद सेब में 86 प्रतिशत पानी होता है। फाइबर, विटामिन सी आदि का तो यह अच्छा स्त्रोत है ही।

 

सलाद
सलाद के पत्ते में जल तत्व 95 प्रतिशत होता है। सैंडविच में इसका अच्छा इस्तेमाल होता है। प्रोटीन और ओमेगा 3 से भरपूर सलाद पत्ते में फैट भी नहीं होता और कैलोरी भी बहुत कम होती है।

 

चावल
पके हुए चावल भी गर्मी में आपके लिए काफी फायदेमंद हैं। इनमें 70 प्रतिशत जल तत्व होता है। इनमें पर्याप्त मात्रा में आयरन, कार्बोहाइड्रेट आदि भी होते हैं। आपको दिन मेें एक कटोरी चावल जरूर खानेे चाहिए।

 

धर्म संसार / शौर्यपथ / दैत्यराज दंभ संतानहीन थे। उन्होंने संतान प्राप्ति के लिए कठिन तप कर भगवान विष्णु को प्रसन्न किया। श्रीहरि ने दंभ से वरदान मांगने को कहा। दंभ ने मांगा— प्रभु! मुझे अपने समान तेजस्वी और बलवान पुत्र का वरदान दीजिए, जो तीनों लोकों में अजेय और महापराक्रमी हो। नारायण के आशीर्वाद से दंभ के यहां एक बलशाली पुत्र ने जन्म लिया, जिसका नाम रखा गया शंखचूड़। आरंभ में शंखचूड़ बहुत धर्मवान था। उसने पुष्कर में जाकर घोर तप किया। ब्रह्माजी उसके तप से प्रसन्न हुए। ब्रह्मा ने वर मांगने को कहा। शंखचूड ने ब्रह्मदेव से वर मांगा कि वह देवताओं के लिए अजेय हो जाए। ब्रह्माजी ने शंखचूड़ को इच्छित वरदान के साथ-साथ नारायण कवच भी प्रदान किया।

शंखचूड़ का विवाह धर्मध्वज की परम तेजस्वी और साध्वी कन्या तुलसी से हुआ। शंखचूड का जन्म श्रीहरि के आशीर्वाद से हुआ था। ब्रह्मा से उसने वरदान लिया था। यह सोचकर शंखचूड़ में अभिमान आ गया। ब्रह्मा और विष्णु के वरदान के मद में चूर दैत्यराज शंखचूड़ ने तीनों लोकों पर अधिकार कर लिया। उसके अत्याचारों से त्रस्त होकर देवता भगवान विष्णु की शरण में गए। श्रीहरि ने कहा- मैंने स्वयं दंभ को अपने समान परम बलशाली पुत्र का वरदान दिया है। इसलिए शंखचूड़ के अत्याचारों से महादेव ही मुक्ति दिला सकते हैं। देवताओं ने महादेव को जाकर अपना कष्ट सुनाया। महादेव देवताओं के दुख दूर करने को तैयार हो गए। महादेव व शंखचूड़ के बीच घोर युद्ध आरंभ हुआ। शंखचूड़ के पास नारायण कवच था। इसके साथ-साथ उसकी पत्नी वृंदा ने, जिनका नाम तुलसी भी है, पतिव्रत धर्म के प्रभाव से शंखचूड़ को एक अभेद्य कवच से युक्त कर दिया था। इस कारण महादेव उसका वध नहीं कर पा रहे थे।

देवताओं ने श्रीहरि से शंखचूड़ के वध की राह निकालने की प्रार्थना की। शंखचूड़ बड़ा दानी भी था। वह प्रतिदिन दान किया करता था। श्रीविष्णु ब्राह्मण रूप बनाकर शंखचूड़ के पास गए और नारायण कवच दान में ले लिया। उसके बाद श्रीहरि ने शंखचूड़ का रूप धारण किया और तुलसी के पास गए। अनेक वर्ष के बाद पति को लौटा देख तुलसी प्रसन्न हुईं और पत्नी समान आचरण किया। तुलसी का पतिव्रत खंडित हो गया। इसके खंडित होते ही कवच भंग हो गया। महादेव ने त्रिशूल से शंखचूड़ का वध कर दिया। कहते हैं कि त्रिशूल के प्रहार से नारायण के समान बलशाली शंखचूड़ की हड्डियां चूूर हुईं, तो उससे शंख बना।
चतुर्भुज नारायण अपने एक हाथ में शंख धारण करते हैं। इसलिए श्रीहरि एवं अन्य देवताओं को शंख से जल चढ़ाने का विधान है, परंतु महादेव ने उसका वध किया था, इसलिए उनका शंख से जलाभिषेक करना निषिद्ध है। गजानन भी शिवपुत्र हैं, इसलिए उन्हें भी शंख से जल नहीं चढ़ाया जाता।

 

धर्म संसार / शौर्यपथ / हर साल श्रावण मास की शुक्ल पक्ष की पंचमी के दिन नागपंचमी का त्योहार मनाया जाता है। इस बार 25 जुलाई 2020 को देशभर में नागपंचमी मनाई जाएगी। उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र के बाद हस्त नक्षत्र रहेगा। इस दौरान मंगल वश्‍चिक लग्न में होंगे खास संयोग यह है कि इसी दिन कल्कि भगवान की जयंती भी है और इसी दिन विनायक चतुर्थी व्रत का पारण होगा।
पंडित नीरज शास्त्री के अनुसार नाग पंचमी के दिन नाग देवता के स्वरूपों की पूजा की जाती है। ऐसी मान्यता है कि नाग देवता की पूजा करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और मनचाहा वरदान देते हैं। इसके अलावा जिन जातकों पर काल सर्प का दोष है उनके लिए भी यह दिन बहुत अहम माना गया है।
मान्यता है कि इस दिन सर्पों की पूजा करने से नाग देवता प्रसन्न होते हैं और काल सर्प दोष से ग्रसित जातकों को इस दोष से मुक्ति से मिलती है। जिन जातकों की कुंडली में कालसर्प दोष है, उन्हें तो विशेष तौर पर नागपंचमी को विशेष पूजा-अर्चना करनी चाहिए।

नाग पंचमी के देव
नागपंचमी पूजा और व्रत के आठ नाग देव माने गए हैं- अनन्त, वासुकि, पद्म, महापद्म, तक्षक, कुलीर, कर्कट और शंख नामक अष्टनागों की पूजा की जाती है। नागपंचमी पर वासुकि नाग, तक्षक नाग और शेषनाग की पूजा का विधान है। इस बार नागपंचमी श्रावण मास की 25 जुलाई शनिवार को मनाई जाएगी।
नागपंचमी का महत्व
हिन्दू धर्म में मान्यता है कि सर्प ही धन की रक्षा करते हैं। इसलिए धन-संपदा व समृद्धि की प्राप्ति के लिए नाग पंचमी मनाई जाती है। इस दिन श्रीया, नाग और ब्रह्म अर्थात शिवलिंग स्वरुप की आराधना से मनोवांछित फलों की प्राप्ति होती है और साधक को धनलक्ष्मी का आशिर्वाद मिलता है।
क्यों मनाया जाता है नागपंचमी का पर्व
नागपंचमी मनाने के पीछे मान्यता है कि समुद्र मंथन के बाद जो विष निकला उसे पीने को कोई तैयार नहीं था। अंतत: भगवान शिव ने उसे पी लिया। भगवान शिव जब विष पी रहे थे, तभी उनके मुख से विष की कुछ बूंदें नीचे गिरीं और सर्प के मुख में समा गई। इसके बाद ही सर्प जाति विषैली हो गई. सर्पदंश से बचाने के लिए ही इस दिन नाग देवता की पूजा की जाती है।

 

मनोरंजन / शौर्यपथ / 'द कपिल शर्मा शो' छोटे पर्दे का काफी लोकप्रिय टीवी शो है। कॉमेडियन कपिल शर्मा द्वारा होस्ट किए जाने वाले इस शो के लिए लोग काफी बेसब्री से इंतजार करते हैं। शो में खुद कपिल शर्मा के अलावा, जज और दर्शक भी मौजूद होते हैं। अब कोरोना काल में यह शो बिना दर्शकों के रिकॉर्ड किया जा रहा है। हालांकि, इसके बावजूद भी कपिल शर्मा ने एक तरीका बताया है, जिससे दर्शक उनके शो का हिस्सा बन सकते हैं।

कपिल शर्मा ने सोशल मीडिया अकाउंट पर एक शॉर्ट वीडियो डालकर बताया है कि दर्शक वीडियो कॉल के जरिए 'द कपिल शर्मा शो' का हिस्सा बन सकते हैं। उन्होंने इंस्टाग्राम पर वीडियो पोस्ट करते हुए लिखा, 'हेल्लो फ्रेंड्स, हम जल्द ही 'द कपिल शर्मा शो' के नए एपिसोड्स के साथ आ रहे हैं। आप सब भी अपने घर से वीडियो कॉल के जरिए इसका हिस्सा बन सकते हैं।'

कपिल शर्मा ने आगे लिखा कि कपिल शर्मा की टीम मुझे आपके घर तक ले जाएगी। मालूम हो कि कोरोना वायरस के चलते कपिल दर्शकों के सामने परफॉर्म नहीं करेंगे। स्टूडियो में उन्हें चीयर करने के लिए दर्शक नहीं होंगे।

कॉमेडियन ने एक इंटरव्यू में बताया था कि ऑडियंस ही नहीं होगी अब तो। मैं उन्हें बहुत ज्यादा मिस करूंगा। ऑडियंस के सामने परफॉर्म करने की बात ही अलग होती है। उन्होंने जानकारी दी थी कि हम लोग कपिल शर्मा शो की शूटिंग शुरू करने जा रहे हैं। शो के मेकर्स सभी को सुरक्षित रखने के हर तरीके के उपाय कर रहे हैं।

गौरतलब है कि कोरोना वायरस के चलते लागू किए गए लॉकडाउन की वजह से सभी शूटिंग बंद थीं। छूट मिलने के बाद एक बार फिर से तमाम टीवी शो की शूटिंग शुरू हुई है। हालांकि, इस दौरान शो के मेकर्स क्रू और सेट पर आने वाले सभी लोगों का पहले की तुलना में अत्यधिक ख्याल रख रहे हैं। शूटिंग वाली जगह और सेट्स को लगातार सेनिटाइज किया जा रहा है।

 

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