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मुंबई / शौर्यपथ / शिवसेना ने भारत सरकार द्वारा 59 चीनी ऐप पर प्रतिबंध लगाए जाने को गुरुवार को ‘डिजिटल स्ट्राइक (हमला)' करार दिया. साथ ही, यह सवाल भी किया कि यदि ये ऐप देश की सुरक्षा के लिए खतरा थे, तो इतने वर्षों तक देश में संचालित होने की इन्हें अनुमति कैसे मिली. शिवसेना के मुखपत्र ‘सामना' में लिखे गए एक संपादकीय में यह सवाल भी किया गया है, ‘‘ केंद्र सरकार को कब पता चला कि ये ऐप राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा हैं.'' मराठी भाषा में प्रकाशित होने वाले शिवसेना के मुखपत्र में कहा गया है, ‘‘चीनी ऐप को प्रतिबंधित कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत के इंटरनेट उपयोगकर्ताओं के हितों की रक्षा की और उनके साहस की प्रशंसा करनी होगी.''केंद्र ने सोमवार को टिकटॉक, यूसी ब्राउजर, शेयर इट और वी चैट जैसे 59 चीनी ऐप पर यह कहते हुए प्रतिबंध लगा दिया कि ये ऐप देश की अखंडता, संप्रभुता और सुरक्षा के लिए नुकसानदेह हैं.
शिवसेना ने कहा, ‘' अगर ये ऐप देश की सुरक्षा के लिए खतरा थे, तो फिर कैसे बगैर किसी बाधा के पिछले कई वर्षों से ये संचालित होते रहे. अगर विपक्ष यह कहता है कि सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा को नजरअंदाज किया है, तो केंद्र सरकार का इसपर क्या जवाब होगा ?'' सामना में कहा गया राष्ट्रीय डेटा को देश से बाहर जाने की अनुमति देने के सबंध में सभी पूर्ववर्ती सरकारों से सवाल पूछा जाना चाहिए. सामना में कहा गया कि चीन ने भारत सरकार के इस फैसले (चीनी ऐप पर प्रतिबंध) पर नाखुशी जाहिर की है. इसमें कहा गया है, ‘‘चीन के सैनिक अब भी ‘गलवान घाटी (लद्दाख) से जाने को तैयार नहीं हैं.''
शिवसेना ने कहा कि 20 सैनिकों के बलिदान के बाद जाकर सरकार को यह एहसास हुआ कि भारत के डेटा को गैरकानूनी तरीके से देश के बाहर ले जाया जा रहा है. शिवसेना ने कहा, ‘' सरकार ने ‘डिजिटल स्ट्राइक' से बदला लिया.'' शिवसेना ने कहा कि इससे पहले ऐसी कई शिकायतें आई थीं कि चीनी ऐप पर मौजूद उपयोगकर्ताओं के डेटा को गैरकानूनी तरीके से देश से बाहर भेजा जा रहा है और टिकटॉक जैसे ऐप ‘ अश्लीलता' को बढ़ावा दे रहा है.
शिवसेना ने दावा किया, ‘' कई टिक-टॉक स्टार कथित तौर पर भाजपा में शामिल भी हुए थे. अब उनका क्या होगा?'' शिवसेना ने कहा, ‘' चीनी अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ने की जरूरत है और ये ऐप पर प्रतिबंध लगा कर नहीं होगा. असल मुद्दा दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश का है.'' सामना में कहा गया है, ‘‘ चीन का सबसे ज्यादा निवेश गुजरात में है. चीनी कंपनी हुवावेई ने भारत में 5 जी नेटवर्क शुरू करने का अनुबंध प्राप्त किया है. भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था की चाभी रखने वाली इस कंपनी चीनी कम्युनिस्ट पार्टी जैसी है.''
नई दिल्ली / शौर्यपथ / मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता कमलनाथ ने राज्य में गुरुवार को हुए शिवराज सरकार के कैबिनेट विस्तार पर प्रतिक्रिया दी है. कमलनाथ ने नए मंत्रियों के शपथ लेने पर कहा कि शिवराज सरकार में 14 मंत्री तो ऐसे हैं जो विधायक ही नहीं हैं. कमलनाथ ने ट्वीट किया, ' लोकतंत्र के इतिहास में मध्यप्रदेश का मंत्रिमंडल ऐसा मंत्रिमंडल है , जिसमें कुल 33 मंत्रियों में से 14 वर्तमान में विधायक ही नहीं हैं. यह संवैधानिक व्यवस्थाओं के साथ बड़ा खिलवाड़ है. प्रदेश की जनता के साथ मज़ाक हैं.'
बता दें कि मध्य प्रदेश में शिवराज सिंह चौहान सरकार के मंत्रिमंडल का गुरुवार को विस्तार किया गया. कार्यकारी राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने मंत्रियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई. कुल 28 में से 20 को कैबिनेट तो आठ को राज्य मंत्री बनाया गया है. मंत्रिमंडल में ज्योतिरादित्य सिंधिया ग्रुप को खास तरजीह मिली है, इस खेमे से 10 लोगों को मंत्री बनाया गया है. शपथ लेने वाले प्रमुख मंत्रियों में कमलनाथ की कांग्रेस सरकार के दौरान नेता प्रतिपक्ष रहे गोपाल भार्गव, विजय शाह, जगदीश देवड़ा, यशोधरा राजे सिंधिया, भूपेंद्र सिंह और विश्वास सारंग शामिल हैं. सिंधिया खेमे से मंत्री पद की शपथ लेने वालेां में इमरती देवी, प्रमुराम चौधरी, महेंद्र सिंह सिसोदिया शामिल हैं.
सेहत / शौर्यपथ / आप अपनी त्वचा को खूबसूरत बनाए रखने के लिए क्या कुछ नहीं करते, कभी पार्लर तो कभी महंगी ब्यूटी क्रीम, हर नुस्खा आजमाकर देखते हैं जो आपका त्वचा की चमक और रौनक को बनाए रखने का आपसे वादा करता है। लेकिन क्या आप जानते हैं आपकी मेहनत को आपका दोस्त बनकर जाने-अनजाने कौन खराब कर रहा है। आखिर कौन है वो जो चोरी-छिपे आपके चेहरे की रंगत को चुरा ले जा रहा है। जी हां और वो है आपका फेवरेट स्मार्टफोन। आइए जानते हैं कैसे आपका स्मार्टफोन आपकी त्वचा को नुकसान पहुंचा रहा है और करने से स्मार्टफोन के साइड इफेक्ट्स से बचा जा सकता है।
स्मार्टफोन के साइड इफेक्ट्स-
-रात भर जागकर फोन पर बात करने से गर्दन में होने वाली स्टिफनेस मोबाइल फोन के कारण ही होती है।इतना ही नहीं स्मार्टफोन एडिक्शन भी आपके स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकती है।
-जब आप किसी से लंबी बातचीत करते हैं तो आपके गाल पर जो हीट महसूस होती है, वह हीट आपकी स्किन को भी काफी नुकसान पहुंचाती है।
-एक अध्ययन के अनुसार, मोबाइल की नीली रोशनी आपकी स्किन को उतना ही नुकसान पहुंचाती है, जितना सूरज की यूवी किरणें।
-नीली रोशनी से निकलने वाले रेडिएशन एक्सपोजर के कारण आपकी स्किन पर हाइपर पिगमेंटेशन और काले धब्बे भी हो सकते हैं। जिससे स्किन जगह-जगह से पैची नजर आने लगती है।
-डर्मोटोलॉजिस्ट का यह भी मानना है कि फोन पर लगातार मैसेज पढ़ने से आपके माथे पर प्रीमेच्योर लाइन्स और आंख की कोरों पर क्रो फीट यानी झुर्रियां होने लगती हैं।
-मोबाइल फोन के कारण आपके चेहरे पर मुंहासे हो सकते हैं क्योंकि ये कई तरह के रोगाणुओं का ठिकाना होता है।
स्मार्टफोन के साइड इफेक्ट्स से कैसे बचें-
-त्वचा पर स्मार्टफोन के साइड इफेक्ट्स से बचने के लिए कम से कम उपयोग करें।
-कोशिश करें कि ज्यादातर समय फोन पर बात करने के लिए हैंड-फ्री डिवाइस का उपयोग करें। ऐसा करने से त्वचा फोन के सीधे संपर्क में नहीं आती है।
-अपने फोन को रोजाना साफ करें। इससे त्वचा को उन हानिकारक रोगाणुओं से बचाया जा सकता है,जो मोबाइल स्क्रीन पर पनपने लगते हैं।
अपनाएं ये घरेलू नुस्खें-
-आंखों के चारों ओर बादाम के तेल से हल्के हाथ से 15 मिनट मालिश करें। इसके बाद कॉटन बॉल को हल्का सा गीला करके उससे आंखों के नीचे पोंछें।
-खीरे के रस के साथ आलू के रस को बराबर मात्रा में मिलाकर अपनी आंखों के नीचे रोजाना 20 मिनट के लिए लगाएं। ऐसा करने से आंखों के नीचे होने वाले काले घेरे कम होते हैं।
-काले धब्बे और डल स्किन को ठीक करने के लिए बादाम को दही और एक चुटकी हल्दी के साथ पीसकर उसका पेस्ट तैयार कर लें। इस पेस्ट को अपने चेहरे और अपनी आंखों के काले धब्बों पर लगाएं। सूखने के बाद इसे साधारण पानी से धो लें।
खाना खजाना / शौर्यप्थ / बात जब तीखे-मसालेदार खाने की हो रही हो तो जेहन में सबसे पहला नाम पंजाबी डिश का ही आता है। जी हां चटपटा खाना खाने के शौकीन लोग अक्सर पंजाबी भोजन काफी पसंद करते हैं, फिर चाहे वो छोले भटूरे हो दाल मखनी। दाल मखनी पंजाब की पसन्दीदा दाल है। मसालेदार ग्रेवी में मक्खनी राजमा जब जुबान पर घुलती है तो आत्मा तृप्त हो जाती है।
पंजाब में दाल मखनी मां दी दाल के नाम से लोकप्रिय है। खाने में स्वादिष्ट होने के साथ इसमें प्रोटीन और फाइबर मौजूद प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। अगर आप भी अपनी पसंदीदा दाल मखनी खाने के लिए रेस्तरां जाते रहे हैं तो अब आपको ऐसा करने की जरूरत नहीं है क्योंकि रेस्तरां स्टाइल दाल मखनी को आप बड़ी आसानी से घर पर भी ट्राई कर सकते हैं। जानें कैसे।
सामग्री-
-राजमा 2 चम्मच (रात भर भिगोकर रखें)
-नमक चुटकी भर
-लाल मिर्च पाउडर 1 चम्मच
-अदरक 2 इंच
-मक्खन 4 चम्मच
-सूरजमुखी का तेल 1 चम्मच
-प्याज 1 बड़ा (बारीक कटा हुआ)
-हरी मिर्च 2
-टमाटर प्यूरी आधा कप
-गर्म मसाला पाउडर 1 चम्मच
-फ्रेश क्रीम आधा कप
-उड़द दाल आधा कप (रात भर भिगोकर रखें)
-अदरक पेस्ट आधा चम्मच
-लहसुन पेस्ट आधा चम्मच
दाल मखनी बनाने की विधि-
साबुत उड़द दाल और राजमा को रातभर 3 से 4 कप पानी में भिगोकर रखें।सुबह में दाल से पानी निकालकर इसे 4 कप पानी, नमक और आधा अदरक लहसुन का पेस्ट डालकर करीब 15 मिनट के लिए प्रेशर कुक कर लें।जब स्टीम निकल जाए तो कुकर का ढक्कन खोलकर राजमा को धीमी आंच पर पकाएं जब तक वह नर्म न हो जाए।अब दाल और राजमा के मिक्सचर में क्रीम डालें और थोड़ा सा क्रीम सजाने के लिए रख लें।
अब एक पैन में मक्खन गर्म करें और उसमें बचा हुआ अदरक लहसुन का पेस्ट और प्याज डालें औऱ सुनहरा होने तक फ्राई करें।इसमें हरी मिर्च, टमाटर प्यूरी डालकर लगातर चलाते हुए पकाएं।लाल मिर्च पाउडर डालकर अच्छी तरह से मिलाएं जब तक तेल ऊपर न आ जाए।
अगर दाल बहुत ज्यादा गाढ़ी लग रही हो तो इसमें थोड़ा पानी डाल दें।अब गर्म मसाला पाउडर और नमक डालें और धीमी आंच पर दाल को पकने दें।दाल मखनी तैयार है। ऊपर से थोड़ा सा क्रीम और मक्खन डालकर सजाएं और गर्मा गर्म सर्व करें।
खाना खजाना / शौर्यपथ / दाल बाटी राजस्थान का एक तीखा और चटपटा पारंपरिक व्यंजन है। जिसे राजस्थान में खास मौके पर घरों में बनाया जाता है। तीखी दाल के साथ खस्ता बाटी स्वाद में बेहद लाजवाब लगती है। दाल बाटी को गेंहू के आटे और घी के साथ तैयार किया जाता है। राजस्थानी बाटी को बनाना बेहद आसान है। अगर आप भी शाम के नाश्ते में कुछ चटपटा तीखा बनाने की सोच रही हैं तो ये रेसिपी आपके लिए बिल्कुल परफेक्ट है। आइए जानते हैं इस रेसिपी को बनाने का क्या है आसान और पारंपरिक तरीका।
सामग्री-
गेंहू का आटा 2 कप
घी आधा कप
अजवाइन 1 चम्मच
बेकिंग पाउडर 4 चुटकी
नमक 2 चुटकी
विधि-
इस राजस्थानी पारंपरिक डिश को बनाने के लिए सबसे पहले एक बर्तन में गेंहू का आटा लें। अब इस आटे में बेकिंग पाउडर,चुटकी भर नमक ,6 चम्मच घी और ब्रेड क्रम्स डालकर सभी चीजें अच्छे से मिला लें। अब आटे में अजवाइन और आधा कप पानी डालकर थोड़ा कड़ा आटा गूंद लें।अब आटे की छोटी-छोटी लोईयां बनाकर उसे बेकिंग ट्रे पर रखें।
200 डिग्री सेल्सियस पर प्री-हीटेड अवन में बाटी वाली ट्रे को रख दें और करीब 12 से 15 मिनट के लिए बेक करें। बाटी का रंग सुनहरा भूरा हो जाना चाहिए।इसके बाद बाटी को फिर से 15 से 30 मिनट के लिए कम टेंपरेचर पर बेक करें ताकि वह पूरी तरह से पककर क्रिस्पी भी हो जाए।जब बाटी पूरी तरह से पक जाए तो उसे अवन से निकालकर घी में 30 से 40 मिनट के लिए डाल दें। अब बाटी को घी से निकालकर दाल और चूरमा के साथ सर्व करें।
धर्म संसार / शौर्यपथ / भगवान जगन्नाथ और उनके दिव्य भाई-बहन के रथों के लौटने का उत्सव (बहुड़ा यात्रा) कड़ी सुरक्षा एवं कर्फ्यू के बीच श्रद्धालुओं के बिना बुधवार को शुरू हुआ। उल्लेखनीय है कि कोविड-19 महामारी के मद्देनजर यह समुद्र तटीय तीर्थ नगरी बंद है।
भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई भगवान बलभद्र और उनकी बहन देवी सुभद्रा के रथों के 12 वीं सदी के मंदिर लौटने की यात्रा शुरू होने के चलते प्रशासन ने लोगों से घरों पर ही रहने और टीवी पर इस धार्मिक रस्म को देखने की अपील की है। विश्व प्रसिद्ध रथ यात्रा 23 जून को शुरू हुई थी। इस बार यह श्रद्धालुओं की उपस्थिति के बिना ही आयोजित की जा रही है, क्योंकि उच्चतम न्यायालय ने 22 जून को सिर्फ पुरी में इसकी अनुमति तो दे दी थी लेकिन साथ में यह शर्त भी लगा दी कि इसमें सीमित संख्या में सेवादार शामिल होंगे और कोई भीड़ नहीं लगनी चाहिए। तीनों देवी-देवता अपनी वार्षिक नौ दिनों की यात्रा श्री गुंडीचा मंदिर में संपन्न करेंगे, जो उनका जन्म स्थान है। वे अब बहुड़ा यात्रा के दौरान लकड़ी से बने रथों पर अभी श्री मंदिर या श्री जगन्नाथ मंदिर लौट रहे हैं।
शौर्यपथ / काशी के दशाश्वमेध घाट पर होने वाली दैनिक गंगा आरती की भव्यता और यहां होने वाली भीड़ दुनिया में चर्चित है। अनलॉक टू में गंगा आरती पूरी दुनिया में लाइव दिखने जा रही है। आयोजक संस्था-https://www.gangasevanidhi.org/ की वेबसाइट से इसे ऑनलाइन किया जाएगा। प्रसारण का ऑनलाइन ट्रायल मंगलवार को हुआ।
संस्था के अध्यक्ष सुशांत मिश्र ने कहा कि गत 18 मार्च से सात की जगह सिर्फ एक ब्राह्मण से गंगा पूजन और आरती की परंपरा का निर्वाह हो रहा है। आने वाले दिनों में दैनिक गंगा आरती में आस्था रखने वालों को घाट पर मौजूद होने की अनुभूति कराने के लिए आरती का प्रसारण छह अलग-अलग कोणों से एक साथ होगा। लाइव के लिए संस्था की वेवसाइट में कुछ बदलाव हो रहे हैं। संस्था की साइट के लिंक से लोग फेसबुक, इंस्टाग्राम पर भी लाइव आरती देख सकेंगे।
गंगोत्री सेवा समिति भी तैयारी में
माता शीतला मंदिर के सानिध्य में दशाश्वमेध घाट पर गंगोत्री सेवा समिति की ओर से होने वाली दैनिक गंगा आरती को भी लाइव करने की तैयारी है। संस्था के संस्थापक अध्यक्ष पं. किशोरी रमण दुबे (बाबू महाराज) ने बताया कि आरती के डिजिटल संस्करण की तैयारी की जा रही है।
काशी में दैनिक गंगा आरती
काशी में दैनिक गंगा आरती का क्रम बहुत पुराना है। गंगा महासभा की ओर से काशी में 1970 तक दैनिक गंगा आरती कराई जाती रही। बीच में यह क्रम बाधित हो गया। 13 नवंबर-1997 को बाबू महाराज और मुन्नन मिश्रा ने मिलकर पुन: भव्य तरीके से गंगा आरती की शुरुआत गंगोत्री सेवा समिति के बैनर तले की। कुछ समय बाद मुन्नन महाराज ने घाट के दूसरे हिस्से में गंगा सेवा निधि की ओर से आरती शुरू कराई।
खेल / शौर्यपथ / भारतीय तेज गेंदबाज श्रीसंत ने अपने करियर में कई दिग्गज क्रिकेटरों को देखा है। वह उन कुछ चुनिंदा क्रिकेटरों में से एक हैं, जिन्होंने अपने देश के लिए टी-20 और वनडे विश्वकप दोनों जीते हैं। वह 2007 के टी-20 वर्ल्ड कप और 2011 के वनडे वर्ल्ड कप में भारतीय टीम का हिस्सा थे। टी-20 वर्ल्ड कप के दौरान भारत और पाकिस्तान के बीच हुए मैच में वह सेंटर में थे। इस मैच में श्रीसंत ने चार ओवर में 44 रन देकर सोहैल तनवीर का विकेट झटका था। श्रीसंत ने हाल ही में बताया कि 2007 के टी-20 वर्ल्ड कप के फाइनल मैच में उनका सबसे ज्यादा दबाव वाला लम्हा कौन-सा था।
2007 टी-20 वर्ल्ड कप के भारत और पाकिस्तान के फाइनल मैच में उनकी गेंदबाजी से ज्यादा चर्चा उनकी फील्डिंग की हुई थी। खासतौर पर मिसबाह उल हक के उस कैच की, जिसकी वजह से भारतीय क्रिकेट टीम इंतिहास रच पाई। पाकिस्तान को चार गेंदों पर छह रन की जरूरत थी। मिसबाह ने शॉट खेला और श्रीसंत ने फाइन लेग पर शानदार कैच लपक कर टीम इंडिया की इतिहास रचने में मदद की।
हालांकि कई लोग आज भी उस कैच को नहीं भूले हैं, लेकिन 37 वर्षीय श्रीसंत के मुताबिक मिसबाह के कैच से ज्यादा वह शाहिद अफरीदी के कैच के दौरान दबाव में थे। उस वाकये को याद करते हुए श्रीसंत ने क्रिकट्रेकर के साथ बातचीत में कहा कि इरफान पठान को पता था कि शाहिद अफरीदी गेंद को हवा में मारेंगे और पहले ही उन्होंने मुझसे कैच लेने के लिए तैयार रहने को कह दिया था।
श्रीसंत ने बताया, ''मेरे लिए शाहिद अफरीदी का कैच ज्यादा मुश्किल था। इरफान पठान ने मुझसे कहा था कि अफरीदी जरूर सिक्स के लिए हिट करेंगे, बॉल लॉन्ग ऑफ के लिए आएगी और पहली ही गेंद में वह आउट हो जाएंगे। तू पकड़ लेना। उन्होंने पहले ही देख लिया था कि क्या होने वाला है।वह कई बार अफरीदी का विकेट ले चुके थे। किस्मत से गेंद हवा में ऊपर चली गई, और मैंने उसे पकड़ लिया।''
श्रीसंत की तरह और भी कई हैं, जो आज भी मिसबाह के कैच को याद करते हैं। मिसबाह के कैच के बारे में श्रीसंत ने कहा कि जब गेंद मेरी तरफ आ रही थी, मैं सचमुच उस वक्त कैच के बारे में नहीं सोच रहा था, बल्कि मैं उन्हें दो रन लेने से रोकने की तरफ सोच रहा था।
उन्होंने कहा, ''मिसबाह के विकेट के समय, मैं दाएं या बाएं डाइव कर गेंद को रोकने के बारे में सोच रहा था, ताकि मिसबाह दो रन न ले सकें। मैं गेंद को कैच करने के बारे में नहीं सोच रहा था। यहां तक कि धोनी भाई ने भी एक इंटरव्यू में कहा था कि मिसबाह का कैच भारतीय क्रिकेट के इतिहास में सबसे दबाव वाला कैच था। लेकिन मेरे लिए उस मैच में अफरीदी का कैच मेरे करियर का सबसे दबाव वाला कैच था।''
मनोरंजन / शौर्यपथ / अपने विवादित बयानों को लेकर अकसर सुर्खियों में रहने वाली स्वरा भास्कर इन दिनों अपनी नई वेब सीरीज 'रसभरी' को लेकर खूब चर्चा में बनी हुई हैं, जो 25 जून से अमेजॉन प्राइम पर स्ट्रीम हुई है। इस सीरीज को लेकर वह काफी ट्रोल भी हो रही हैं तो वहीं कुछ लोगों को यह बहुत पसंद आ रही है। इस वेब सीरीज में स्वरा एक हॉट इंग्लिश टीचर की भूमिका में नजर आ रही हैं जहां उन्होंने कई सारे बोल्ड सीन भी दिए हैं, जिसे सोशल मीडिया यूजर्स पोर्न वेब कहकर ट्विटर पर स्वरा ट्रोल कर रही हैं और यही कारण है कि स्वरा ट्विटर ट्रेंड कर रही हैं। काफी विरोध के बाद अब स्वरा के फैंस #Rasbhari और #RasbhariOnPrime हैशटैग लिखकर इसका इस वेब सीरीज का सपोर्ट कर रहे हैं। अपने सीरीज का सपोर्ट होता देखकर अब स्वरा का रिएक्शन सामने आया है।
स्वरा भास्कर ने एक यूजर के सवाल का जवाब देते हुए लिखा है कि रसभरी में कोई भी सेक्स या न्यूड सीन नहीं है। इसके साथ ही उन्होंने कई सारी इमोजी भी शेयर किया है। इस पोस्ट में यूजर ने एक ट्रैफिक शेयर किया है। अपनी इस पोस्ट से पहले एक न्यूज वेबसाइट से बातचीत करते हुए स्वरा ने अपनी वेब सीरीज के साथ-साथ ट्रोलर्स को जवाब देते हुए कहा था कि इस देश में करोड़ों लोग रहते हैं, सबकी अलग-अलग सोच है। मैं जो कुछ भी बोलती हूं, वो मैं पैसे लेकर नहीं बोलती। वो मेरी मान्यता है, मेरे सिद्धांत है। मैं विश्वास करती हूं उन चीजों पर इसलिए मैं खड़ी हूं उस विश्वास के साथ। अगर आप किसी चीज पर विश्वास करते हैं तो आप बेशक उस चीज के लिए लड़ेंगे।'
स्वरा ने आगे मजाक में ये भी कहा था कि 'मेरे ट्रोल्स मुझे जितनी शिद्दत से प्रेम करते हैं इतना तो मुझे कभी किसी बॉयफ्रेंड ने भी नहीं किया होगा।' हालांकि स्वरा ने फिर बाद में कहा कि 'हां, मझे बुरा लगता है जब कोई मुझे गाली देता है क्योंकि हम इतनी मेहनत से काम करते हैं।' 'रसभरी' के कंटेंट पर हो रहे विवादों को लेकर स्वरा कहती हैं कि 'रसभरी को लोग पसंद कर रहे हैं और अच्छी बातें भी कर रहे हैं। लोकिन कुछ ऐसे भी लोग हैं जो बुरी चीजें कह रहे हैं। लेकिन जब मैं उनकी बातें सुनती हूं तो उससे यह साफ हो जाता है कि उन्होंने शो देखा नहीं है, वो बस मुझे गाली देना चाहते हैं।
गौरतलब है कि वेब सीरीज रसभरो को लेकर केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड के अध्यक्ष और लेखक प्रसून जोशी ने 'रसभरी' के एक सीन पर अपनी नाराजगी जाहिर किया था। उन्होंने ट्वीट किया,' दुःख हुआ ...वेब सिरीज़ #rasbhari में असंवेदनशीलता से एक छोटी बच्ची को पुरुषों के सामने उत्तेजक नाच करते हुए एक वस्तु की तरह दिखाना निंदनीय है। आज रचनाकारों और दर्शक सोचें बात मनोरंजन की नहीं,यहाँ बच्चियों प्रति दृष्टिकोण का प्रश्न है,यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है या शोषण की मनमानी।
नजरिया / शौर्यपथ / बिजली गिरने या वज्रपात की परिस्थिति सामान्यत: दक्षिण-पश्चिमी मानसून के पहले दौर और उत्तराद्र्ध में बहुतायत में बनती है, किंतु पूरे मानसून के दौरान वज्रपात की आशंका बन सकती है। पश्चिमी विक्षोभ की विशेष परिस्थितियों में यह घटना ठंड के मौसम (नवंबर से मार्च) में भी कुछ जगहों में हो सकती है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पश्चिमी और मध्य भारत में वज्रपात का प्रकोप अधिक है। पूरे देश में 12 ऐसे राज्यों की पहचान की गई है, जहां वज्रपात की घटनाएं सबसे अधिक होती हैं। इनमें मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, झारखंड, छत्तीसगढ़ और ओडिशा प्रमुख हैं।
अभी मानसून की शुरुआत ही हुई कि बिहार और उत्तर प्रदेश में वज्रपात का कहर टूट पड़ा। दोनों प्रदेशों में ऐसी घटनाओं की निगरानी के लिए ‘भारत मौसम विज्ञान विभाग’ ने उन्नत किस्म के यंत्र इन प्रदेशों की राजधानियों में लगा रखे हैं और करीब ढाई से तीन घंटे पूर्व यह ऐसी घटनाओं की जानकारी संबंधित राज्य सरकारों को उपलब्ध कराता है। इस सबके बावजूद इस प्रकार की घटनाओं का होना दुखद है और दर्शाता है कि वज्रपात से होने वाली क्षति से बचने के प्रबंधन में कहीं न कहीं कमी हो रही है। वास्तव में, इस क्षेत्र में ज्यादा काम हुआ ही नहीं है। वज्रपात से खतरा सामान्यत: खुले में, पानी से भरे खेतों में काम करने वाले किसानों, मजदूरों, लंबे पेड़ों के नीचे शरण लिए लोगों को ज्यादा होता है। अत: अगर आपको वज्रपात करने वाले बादलों की सही समय पर जानकारी मिल जाए और आस-पास के किसी पक्के घर में चले जाएं, तो आप सुरक्षित रह सकते हैं।
वज्रपात कर सकने वाले बदलों का आधार काफी गहरे काले रंग का होता है। बादलों की ऊपरी सतह समतल होती है। ऐसे बादलों के अंदर से रुक-रुककर बिजली के चमकने से एक लंबी लकीर जैसी बनती रहती है तथा गर्जना की आवाज आती रहती है। बिजली की चमक और आवाज के बीच के अंतराल को मापकर बादल की दूरी ज्ञात की जा सकती है। जैसे, अगर अंतराल 18 सेकंड है, तो बादल की दूरी (18/3=6) छह किलोमीटर है, अगर अंतराल 30 सेकंड है, तो बादल की दूरी (30/3=10) दस किलोमीटर होगी। अत: प्रत्येक तीन सेकंड के अंतराल की दूरी करीब एक किलोमीटर होगी। वज्रपात के समय पैदा चमक की लंबाई औसतन छह मील के करीब होती है। ऐसे बादल करीब 10 किलोमीटर की दूरी तक प्रभाव डाल सकते हैं। अगर इस प्रकार का बादल पास है और आप घर से बाहर खुली जगह पर हैं, तो आस-पास के घर में जाकर खुद को सुरक्षित कर सकते हैं, क्योंकि वज्रपात से बचने हेतु सबसे सुरक्षित स्थान घर ही होता है।
मौसम विभाग ने लखनऊ और पटना में जो रडार लगा रखे हैं, वे करीब 200-300 किलोमीटर की दूरी से ही वज्रपात वाले बादलों को चिन्हित कर सूचना दे सकतन इलाकों में ज्यादा वज्रपात होते हैं, उनमें विशेष चेतावनी और विशेष टावर निर्माण जैसे उपाय किए जा सकते हैं। तात्कालिक जरूरत को देखते हुए लोगों को अलर्ट करने हेतु सभी ग्राम पंचायतों में लोकल हूटर का प्रबंध किया जा सकता है। लोगों की जान बचाने के लिए अगर पूरे जिले में एक-दो घंटे काम बंद रहता है, तो कोई हर्ज नहीं है।
मानसून सीजन के शुरू होते ही भारी वर्षा की वजह से वज्रपात की समस्या के अलावा बाढ़ की समस्या भी बढ़ जाती है। अभी मानसून के शुरू होते ही पूर्वोत्तर राज्यों, खासकर असम और पूर्वी बिहार जलभराव या बाढ़ की समस्या से जूझने लगे हैं, जिससे करीब 10 लाख लोगों के प्रभावित होने तथा करीब 15 लोगों के मारे जाने की खबर है। यह समस्या आने वाले दिनों दिनों में निश्चित तौर पर बढ़ेगी।
अत्यधिक वर्षा की समस्या वायु प्रदूषण, पेड़ों को काटे जाने, भूमि के उपयोग में परिवर्तन की वजह से हो रहे जलवायु परिवर्तन से जुड़ी हुई है। ऐसी घटनाएं पिछले दशकों में काफी बढ़ी हैं। मौसम विभाग एक से पांच दिन पहले ही भविष्यवाणी करने की क्षमता रखता है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग का तंत्र पूरे देश में फैला है। यह लोगों की भी जिम्मेदारी है कि आपदा के समय चेतावनियों पर विशेष ध्यान दें। सतर्क रहने के साथ ही बचाव के तमाम जरूरी इंतजामों पर भी ध्यान देना चाहिए।
(ये लेखक के अपने विचार हैं)अतींद्र कुमार शुक्ला, मौसम विज्ञानी
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