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June 01, 2026
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शौर्यपथ

शौर्यपथ

रायपुर / शौर्यपथ / खाद्य मंत्री अमरजीत भगत ने प्रदेश की सभी शासकीय उचित मुल्य की दुकानों में सी.सी.टी.व्ही कैमरा शीघ्र लगाने के निर्देश दिए हैं। श्री भगत ने आज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित सभी जिलों के खाद्य अधिकारियों की बैठक में खाद्यान्न भण्डारण और वितरण की समीक्षा की। उन्होंने राज्य के सभी पहुंचविहीन क्षेत्रों की राशन दुकानों में खाद्यान्न भण्डारण और वितरण की जानकारी ली और तीन दिन के भीतर चार माह के लिए पर्याप्त मात्रा में खाद्यान्न भण्डारण करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने सभी राशन कार्डधारी परिवारों के सदस्यों की आधार सिडिंग शीघ्र करने को कहा है, ताकि अगस्त माह में वन नेशन वन राशन कार्ड योजना छत्तीसगढ़ मंे भी शुरू की जा सके। उन्होंने कहा कि राज्य के सभी राशन दुकानों की दीवारों को तिरंगा कलर से पोताई करने के निर्देश दिए गए थे। जिन दुकानों में पोताई का कार्य नहीं हो पाया है, उन दुकानों में एक सप्ताह के भीतर पोताई कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि तिरंगा कलर में पोताई होने से प्रदेश की राशन दुकानों में एकरूपता आएगी और अंजान व्यक्ति भी देखकर पहचान जाएगा राशन दुकान को।
मंत्री ने राशन दुकानों का युक्तियुक्तकरण करने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि 8 लाख से अधिक एपीएल परिवारों के राशन कार्ड बनाए गए हैं। राशन कार्डाें की संख्या बढ़ने से राशन दुकानों की संख्या भी बढ़ाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक ग्राम पंचायतों में एक-एक राशन दुकान एवं शहरी क्षेत्रों के वार्डाें में आवश्यकता के अनुरूप एक या दो राशन दुकान खोले जाए, जहां नए राशन दुकान खोलने की जरूरत हो उसका प्रस्ताव शीघ्र देने को कहा है। मंत्री भगत ने कहा कि नए राशन दुकान में तिरंगा कलर से पोताई और सीसीटीव्ही कैमरा लगाने के बाद ही दुकान का संचालन शुरू किया जाए। श्री भगत ने प्रदेश के जिन उचित मूल्य की दुकानों की शिकायतें आयी है, उसका तत्काल निराकरण करने के निर्देश दिए हैं। श्री भगत ने खाद्य विभाग द्वारा कोरोना काल में लोगों को खाद्यान्न उपलब्ध कराने के कार्य को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि विषम परिस्थितियों में भी नागरिकों एवं प्रवासी श्रमिकों को समय पर राशन उपलब्ध कराया गया वह बड़ी उपलब्धि है।
खाद्य विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह ने बताया कि राज्य के शहरी क्षेत्रों के 50 प्रतिशत से अधिक उचित मूल्य की दुकानों में सीसीटीव्ही कैमरा लगाए जा चुके हैं। सभी दुकानों में एक सप्ताह के भीतर सीसीटीव्ही कैमरा लगवाने के निर्देश जिला खाद्य अधिकारियों को दिए गए हैं। राशन दुकानों में सीसीटीव्ही कैमरा लगने के बाद सॉफ्टवेयर के माध्यम से उपभोक्ता मोबाईल पर अपने राशन दुकानों को देख सकेेंगे और राशन दुकान खुली या बंद होने की जानकारी घर बैठे ले सकेंगे। इसके माध्यम से सभी उचित मूल्य की दुकानों में होने वाली गतिविधियोें की जानकारी भी मिलेगी और इसकी मॉनिटरिंग भी आसानी से हो सकेगी। बैठक में विशेष सचिव मनोज सोनी, एमडी मार्कफेड सहित अन्य अधिकारी मौजूद थे।

मृत्यु दर भी सबसे कम : प्रदेश में रिकवरी दर 78.4 प्रतिशत, राष्ट्रीय स्तर पर चौथा सबसे अच्छा रिकवरी दर
इलाज के बाद 2362 मरीज डिस्चार्ज, मृत्यु दर केवल 0.5 प्रतिशत

रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ में कोविड-19 के बेहतर प्रबंधन के परिणाम अब दिखने लगे हैं। प्रदेश में कोविड-19 मरीजों की रिकवरी दर सभी पड़ोसी राज्यों से बेहतर है। यहां 78.4 प्रतिशत मरीज ठीक हो गए हैं। वहीं महाराष्ट्र में यह दर 54.2 प्रतिशत, मध्यप्रदेश में 76.7 प्रतिशत, उत्तरप्रदेश में 69.1 प्रतिशत, आंध्रप्रदेश में 45.4 प्रतिशत, तेलंगाना में 48.8 प्रतिशत, ओड़िशा में 72.9 प्रतिशत और झारखंड में 76.9 प्रतिशत है। प्रदेश में अब तक कोविड-19 पॉजिटिव पाए गए 3023 में से 2362 मरीज स्वस्थ हो गए हैं।
राष्ट्रीय स्तर पर छत्तीसगढ़ सबसे अच्छे रिकवरी दर वालों राज्यों में चौथे स्थान पर है। कोविड-19 के 50 से अधिक मरीज वाले राज्यों में केवल उत्तराखंड, राजस्थान और त्रिपुरा की रिकवरी दर ही छत्तीसगढ़ से अधिक है। मृत्यु दर के मामले में भी छत्तीसगढ़ पड़ोसी राज्यों से बेहतर है। यहां मृत्यु दर का प्रतिशत केवल 0.5 है। वहीं पड़ोसी राज्य महाराष्ट्र में यह दर 4.4 प्रतिशत, मध्यप्रदेश में 4.2 प्रतिशत, आंध्रप्रदेश में 1.2 प्रतिशत, तेलंगाना में 1.5 प्रतिशत, ओड़िशा में 0.5 प्रतिशत और झारखंड में 0.6 प्रतिशत है।
कोविड-19 के संभावित प्रसार को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल के निर्देश पर प्रदेश में फरवरी माह के शुरूआत में ही इस पर नियंत्रण और रोकथाम की तैयारी शुरू कर दी गई थी। कोरोना वायरस जांच की सुविधा प्रारंभ में केवल एम्स रायपुर में थी। जगदलपुर, रायपुर और रायगढ़ के शासकीय मेडिकल कॉलेजों में उच्च स्तरीय लैब तैयार कर कोविड-19 की आरटीपीसीआर जांच सुविधा का विस्तार किया गया है। रायपुर के लालपुर स्थित आईआरएल लैब और निजी क्षेत्र के एसआरएल लैब में भी कोरोना वायरस की जांच की जा रही है। जांच का दायरा बढ़ाने पूल-टेस्टिंग भी की जा रही है। अभी तक प्रदेश में एक लाख 66 हजार 656 लोगों के सैंपल की जांच की जा चुकी है। पॉजिटिव पाए गए 3023 लोगों में से 2362 के ठीक हो जाने के बाद अभी सक्रिय मरीजों की संख्या 647 है।
स्वास्थ्य मंत्री टी.एस. सिंहदेव ने बताया कि प्रदेश के आठ क्षेत्रीय और 22 जिला स्तरीय अस्पतालों में कोविड-19 के मरीजों के इलाज की व्यवस्था की गई है। इन अस्पतालों में 3384 लोगों का उपचार किया जा सकता है। इनमें 445 आईसीयू और 296 एचडीयू (High Dependency Unit) बिस्तरों की भी व्यवस्था है। इन अस्पतालों के साथ ही 146 कोविड केयर सेंटर भी बनाए गए हैं जहां 8161 लोगों को रखा जा सकता है। सभी कोविड अस्पतालों में एन-95 मास्क, पीपीई किट, ट्रिपल लेयर मास्क, वीटीएम और जरूरी दवाईयों के पर्याप्त संख्या में इंतजाम सुनिश्चित किए गए हैं। स्वास्थ्य मंत्री श्री सिंहदेव स्टेट कोविड कंट्रोल एंड कमाड सेंटर के माध्यम से जांच और इलाज की व्यवस्थाओं की लगातार समीक्षा कर रहे हैं। विभाग द्वारा प्रदेश भर में संचालित 166 क्वारेंटाइन सेंटर्स में भी 15,835 बिस्तर हैं।
प्रदेश में बड़ी संख्या में प्रवासी श्रमिकों की वापसी को देखते हुए ग्राम पंचायतों और नगरीय निकायों में करीब 21 हजार क्वारेंटाइन सेंटर बनाए गए हैं जिनकी क्षमता लगभग सात लाख है। विभिन्न राज्यों से प्रदेश लौटे साढ़े चार लाख श्रमिक 14 दिनों की क्वारेंटीन अवधि पूर्ण कर अपने घर पहुंच चुके हैं। स्वयं के और दूसरों लोगों के स्वास्थ्य की सुरक्षा कि दृष्टि से उन्हें दस दिनों तक होम-क्वारेंटाइन में रहने के निर्देश दिए गए हैं।

दुर्ग / शौर्यपथ / प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव व बेमतरा प्रभारी जितेन्द्र साहू ने पेट्रोल डीजल की बढ़ती कीमतों के विरोध में हल्लाबोल किया। जितेन्द्र साहू ने सैकड़ों कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ साइकिल रैली निकाल कर केन्द्र की मोदी सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। इस दौरान उन्होंने बैलगाड़ी की सवारी कर महंगाई के खिलाफ लोगों को सचेत किया।
विरोध प्रदर्शन के दौरान प्रदेश कांग्रेस महासचिव जितेन्द्र साहू ने कहा कि केन्द्र सरकार लगातार पेट्रोल व डीजल के दामों में बढ़ोत्तरी कर आम जनता को खून के आंसू रुला रही है। इन दिनों वैसे ही लोग कोरोना के कारण परेशान है लोगों का कामधंधा बंद है। लोग गंभीर आर्थिक संकट के दौर से गुजर रहे हैं ऐसे में पेट्रोल व डीजल के दाम बढ़ाने से लोगों की मुस्किलें बढ़ गई हैं। ईंधन के मंहगे होने का प्रभाव हमारी रोजमर्रा की जरूरतों की वस्तुओं पर पड़ता है। ट्रांसपोर्टिंग महंगी होने के कारण खाद्य पदार्थों जैसे अनाजए फल सब्जियों के दाम बढ़ जाते हैं जो सीधे आम लोगों को चोट करता है।
जितेन्द्र साहू ने कहा केन्द्र की मोदी सरकार गरीबों का दर्द नहीं समझ पा रही है। पिछले तीन सप्ताह से लगातार पेट्रोल डीजल के दाम बढ़ रहे हैं और स्थानीय भाजपा नेता चुप्पी साधे हुए हैं। जो लोग पहले पेट्रोल व डीजल की दरों में नाममात्र की बढ़ोत्तरी पर विरोध करने उतर जाते थे वे वर्तमान में 11 से 12 रुपए तक की बढ़ोत्तरी के बाद भी चुप बैठे हैं। केन्द्र सरकार पेट्रोल डीजल के जरिए अपना खजाना भर रही है वहीं आम आदमी और गरीब जनता महंगाई की मार से पिस रही है। इस अवसर पर बेमेतरा विधायक आशीष छाबड़ा, नवागढ़ विधायक गुरु दयाल बंजारे, जिला अध्यक्ष बंशी पटेल, शहर अध्यक्ष सुमन गोस्वामी, नगर पालिका अध्यक्ष शकुन्तला साहू, एनएसयूआई अध्यक्ष अजय सेन, हितेन्द्र साहू, लोकेश वर्मा, अवनीश राघव, टीआर जर्नादन, जावेद खान, ललित विश्वकर्मा सहित सैकड़ों कांग्रेसजन उपस्थित थे।

रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ में अनलॉक शुरु होने के बाद लगातार तेज हो रही आर्थिक गतिविधियों का असर दस्तावेजों की रजिस्ट्रियों में भी दिखने लगा है। पिछले साल के जून माह की तुलना में इस साल जून माह में 17 प्रतिशत अधिक राजस्व की प्राप्ति हुई, वहीं दस्तावेजों के पंजीयन में भी 19 प्रतिशत का इजाफा हुआ है।
यह आंकड़े बताते हैं कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा कोरोना संक्रमण काल के दौरान किए गए उपायों से छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था गतिशील बनी रही। संकट काल में भी राज्य ने कृषि क्षेत्र में तेज आर्थिक वृद्धि दर्ज की, जिसकी सराहना रिजर्व बैंक आफ इंडिया ने भी की थी। रोजगार के क्षेत्र में मनरेगा के जरिये गांवों में वृहद पैमाने पर रोजगार मूलक कार्यों का संचालन एवं नियमित भुगतान की वजह से आम लोगों के बीच धन-राशि का प्रवाह निरंतर बना रहा। इसी दौरान राजीव गांधी किसान न्याय योजना के जरिये राज्य के किसानों को सीधे मदद पहुंचाई गई। प्रदेश सरकार ने कोरोना संकट के दौरान उद्योगों को भी संचालन में रियायतें दीं। खेती-किसानी पर आधारित व्यावसायिक गतिविधियां भी निरंतर जारी रहीं। जिसकी वजह से राज्य की अर्थव्यवस्था मजबूत बनी रही।
वर्ष 2019 के जून माह में 107.53 करोड़ रुपए का राजस्व दस्तावेजों के पंजीयन से प्राप्त हुआ था, जबकि इस वर्ष, यानी 2020 के जून माह में 125.74 करोड़ रुपए की राजस्व प्राप्ति शासन को हुई है। पिछले साल जून महीने में 23,391 दस्तावेजों का पंजीयन हुआ था, जबकि इस साल इस जून माह में 27,759 दस्तावेज पंजीबद्ध किए गए। कोरोना महामहारी की वजह से उत्पन्न विषम परिस्थितियों के कारण लॉकडाउन के दौरान अन्य गतिविधियों के साथ-साथ दस्तावेजों के पंजीयन का कार्य भी प्रभावित हुआ था, इसके मद्देनजर पक्षकारों की सुविधा के लिए शासन द्वारा पंजीयन कार्यालयों में विशेष इंतजाम किए गए थे। जून महीने में प्रत्येक तीन घंटे में तीन अप्वाइंमेंट की व्यवस्था दस्तावेजों के पंजीयन के लिए लागू की गई, ताकि दस्तावेजों का पंजीयन तेजी से किया जा सके।

दुर्ग / शौर्यपथ / गुरुवार को मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की मौजूदगी में हुई वरिष्ठ मंत्रियों की बैठक में निगम मंडलों के रिक्त पदों पर नियुक्ति को अंजाम देने नाम तय कर लिया गया है। प्रदेश कांग्रेस प्रभारी महासचिव पीएल पुनिया तय किए गए नामों की सूची को अंतिम रूप देने दिल्ली में पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गांधी से चर्चा करेंगे। छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा निगम व मंडल में किए जाने वाली नियुुक्तियों को लेकर नाम तय कर लिए जाने की खबर सेे भिलाई-दुर्ग की राजनीति में हलचल सी मचा दी है। अपनी भावी स्थिति को लेकर पद के दावेदारों की बेचैनी बढ़ गई है। दावेदारों के साथ ही उनके समर्थकों के द्वारा इस संबंध में रायपुर व दिल्ली तक फोन लगाकर पूछताछ किया जा रहा है।
दरअसल निगम मंडल में पद हासिल करने के लिए अनेक नेताओं ने दावेदारी पेश किया है। अब जब नाम तय हो जाने की पुष्टि वरिष्ठ मंत्री रविन्द्र चौबे ने कर दी है तो जितने भी दावेदार है उनकी दिल की धड़कन तेज हो गई है। अपनी भावी राजनीतिक स्थिति को जानने न केवल दावेदार बल्कि उनके समर्थकों में जबरदस्त उत्सुकता देखने को मिल रहा है। कुछ दावेदारों के बारे में कांग्रेस की राजनीति में अंदर तक दखल रखने का दावा करने वाले स्थानीय नेता रायपुर व दिल्ली तक फोन लगाकर सुराग लेने में लगे हुए हैं।
उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार बने डेढ़ साल का समय बीत चुका है। लगातार 15 वर्ष तक प्रदेश की सत्ता से दूर रहे कांग्रेस के अनेक नेता सरकार बनने के बाद से ही निगम मंडलों में की जाने वाली नियुक्ति का बेसब्री के साथ इंतजार कर रहे हैं। प्रदेश में कुल 129निगम, मंडल, आयोग, प्राधिकरण और विभागीय समितियां है। जिनमें से प्रशासनिक दृष्टिकोण से 8-9 निगम मंडल में मंत्रियों को अध्यक्ष बनाया जा चुका है। इस तरह लगभग 120 पदों पर नियुक्ति की जानी है।
यहां पर यह बताना भी लाजिमी होगा कि कुल छह विधानसभा क्षेत्र वाले दुर्ग जिले में अभी वैशाली नगर को छोड़ शेष 5 में कांग्रेस के विधायक है। इनमें से जिले के पाटन विधानसभा का प्रतिनिधित्व करने वाले भूपेश बघेल जहां मुख्यमंत्री पद का निर्वहन कर रहे हैं। वहीं दुर्ग ग्रामीण के विधायक ताम्रध्वज साहू और अहिवारा से विधायक गुरु रुद्रकुमार प्रदेश मंत्री मंडल में शामिल है।
इस तरह जिले में कांग्रेस के दो विधायक दुर्ग शहर से अरुण वोरा और भिलाई नगर से देवेन्द्र यादव ही ऐसे है जिनकी स्वाभाविक दावेदारी निगम मंडल के महत्वपूर्ण पदों के लिए बनती है। इसके अलावा भिलाई-दुर्ग के कई दिग्गज कांग्रेस नेताओं के द्वारा भी सत्ता और संगठन के माध्यम से निगम मंडल में प्रतिष्ठा के अनुरुप पद प्राप्त करने की दावेदारी लंबे समय से चर्चा में बनी हुई है।

आजकल लोग बीमार होने पर डॉक्टर के पास जाने के बजाए गूगल की शरण में जा रहे हैं। यहां वे अपने लक्षणों के आधार पर बीमारी के बारे में सर्च कर रहे हैं और उसका निदान जानने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन एक शोध में खुलासा किया गया है कि तीन में से दो लोगों को गूगल पर गलत जानकारी मिलती है।

यह ट्रेंड उनकी सेहत के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। यह शोध ऑस्ट्रेलिया के पर्थ में स्थित एडिथ कोवान विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने किया। इसके लिए उन्होंने 36 से अधिक अंतरराष्ट्रीय वेब-आधारित लक्षण की जांच करने वाली वेबसाइट्स का विश्लेषण किया। उन्होंने पाया कि लक्षण के आधार पर रोग की पहचान वाले मामले केवल 36 फीसदी ही सही पाए गए। यही नहीं सिर्फ 52 फीसदी मामलों में ही बीमारी की सही जानकारी को सर्च रिजल्ट में शीर्ष तीन में दर्शाया गया।

गूगल द्वारा चिकित्सकों के पास जाने की चेतावनी भी आधे से ज्यादा मामलों में गलत पाई गई। केवल 49 फीसदी मामलों में ही डॉक्टर के पास जाने की सलाह दी गई।

49 % लोगों को ही डॉक्टर के पास जाने की सलाह दी गई
36 % लक्षण के आधार पर रोग की पहचान वाले मामले सही मिले

कई बीमारी पता नहीं होती-
शोध बताता है कि ऐसी वेबसाइटों के पास स्थानीय बीमारियों का डाटा नहीं होता। ऑस्ट्रेलिया में वे रॉस रिवर फीवर और हेंड्रा वायरस को नहीं पहचान पाते। डाटा के आधार पर शोधकर्ताओं ने कहा कि इमरजेंसी के दौरान चिकित्सकों से मिलने की सलाह सिर्फ 60 फीसदी मामलों में ही सही पाई गई।

यह एक सिंड्रोम है-
अधिकांश लोग साइबरक्रॉ्ड्रिरयाक सिंड्रोम के शिकार होते हैं। इसके तहत सिरदर्द या बीमारी का पहला लक्षण दिखते ही गूगल पर सर्च करना शुरू कर देते हैं। लेकिन, हकीकत यह है कि इन वेबसाइट या एप को बहुत सावधानी से देखना चाहिए, क्योंकि आपकी मेडिकल हिस्ट्री इन्हें नहीं पता होती।

कोरोना के बाद इजाफा-
कोरोना संकट के बाद छोटी-मोटी बीमारियों जैसे पेट दर्द या हल्के जुकाम से पीड़ित लोग भी डॉक्टरों के पास जाने से बच रहे हैं। वे गूगल पर ही लक्षणों की पहचान करवाने वाले लोगों से बीमारी का पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं। इनकी संख्या में अचानक इजाफा हुआ है।

डॉक्टर का कोई विकल्प नहीं-
शोधकर्ता मिशेला हिल ने कहा, ये प्लेटफॉर्म डॉक्टर का विकल्प नहीं हो सकते। ये सिर्फ सुरक्षा की झूठी भावना प्रदान कर सकते हैं।

इन्हें सबसे ज्यादा खोजा गया-
-लगातार खांसी और बुखार
-डायबिटीज के लक्षण
-उच्च रक्तचाप के लक्षण
-पेट दर्द

 

धर्म संसार /शौर्यपर्थ / आषाढ़ माह में शुक्ल पक्ष त्रयोदशी के दिन माता पार्वती को समर्पित जया-पार्वती व्रत किया जाता है। विशेष रूप से महिलाओं द्वारा किए जाने वाले इस व्रत के प्रभाव से अखंड सौभाग्यवती होने का वरदान प्राप्त होता है। अविवाहित लड़कियों द्वारा इस व्रत के रहने से शीघ्र ही विवाह होता है और भरा पूरा परिवार मिलता है। सुखमय जीवन के लिए विवाहित स्त्रियों को यह व्रत अवश्य रखना चाहिए। इस पावन व्रत का पुण्य वट सावित्री व्रत के समान माना जाता है। इस व्रत को विजया पार्वती व्रत भी कहा जाता है।

मान्यताओं के अनुसार इस व्रत का रहस्य भगवान विष्णु ने मां लक्ष्मी को बताया था। इस व्रत में भगवान शिव और माता पार्वती की विधि विधान से पूजा अर्चना करें। मां पार्वती का ध्यान कर सुख-सौभाग्य और गृह शांति के लिए सच्चे मन से प्रार्थना करें। घर के मंदिर में भगवान शिव-माता पार्वती की मूर्ति स्थापित करें। इस व्रत में नमक का सेवन पूरी तरह से वर्जित माना जाता है। व्रत में गेहूं का आटा, सब्जियां भी नहीं खानी चाहिए। व्रत के दौरान फलाहार कर सकते हैं। इस व्रत के प्रभाव से संतान की प्राप्ति होती है। श्रद्धापूर्वक जया पार्वती व्रत का विधि-विधान से पालन करने से माता पार्वती प्रसन्न होती हैं और हर मनोकामना पूर्ण करती हैं। व्रत समाप्ति के एक रात पहले रात्रि जागरण करना चाहिए। इसे जयापार्वती जागरण कहते हैं।

 

लाइफस्टाइल / शौर्यपथ / कहते हैं आप जीवन के किसी भी कठिन दौर से क्यों न गुजर रहे हो लेकिन आपको संभालने के लिए उम्मीद की एक किरण ही काफी है। जैसे, आपका मूड कितना भी खराब क्यों न हो लेकिन कुछ विचार या छोटी-छोटी बातें ऐसी होती हैं, जिन्हें देखकर हमारी उदासी हट जाती है और हम सकारात्मकता से भर जाते हैं। एक नजर डालते हैं ऐसे ही ऊर्जावान विचारों पर जो जीवन की किसी भी तरह की निराशा हावी होने पर आपको सकारात्मकता से भर देगी-

 आपकी कल्पना ही आपकी सीमा है
कहते हैं आपको जब तक कोई नहीं रोक सकता जब तक कि आप अपनी सीमा निर्धारित न कर लें। ऐसे में आपको अपनी कल्पनाओं में हमेशा कुछ बड़ा सोचना है, जिससे कि आपमें कुछ अच्छा करने और आगे बढ़ने की ललक बने रहे।

छोटी-छोटी चीजें आपके अच्छे दिन लाती हैं
आज जो काम आपको छोटा लग रहा है, वो एक दिन आपको दुनिया भर में पहचान दिलाएगा।ऐसे में छोटे-छोटे प्रयासों को बिल्कुल बंद न करें। हमेशा जीवन की छोटी-छोटी चीजों को पूरा करते हुए बड़े अर्थ साधें।

 संघर्ष में अपनी ताकत तलाशें
आप जीवन में संघर्षों को परेशानियां नहीं बल्कि अपनी ताकत तलाशने के मौकों के रूप में देंखे। आप पाएंगे कि हर संघर्ष को पार करने के बाद आपका व्यक्तित्व काफी अच्छा हो जाएगा।

 बीते हुए कल को आज पर हावी न होने दें
आपको बीते हुए कल को आज पर हावी नहीं होने देना है। हरिवंशराय बच्चन की कविता ‘जो बीत गई वो बात गई’ पर अमल करते हुए नए सिरे से हर दिन जीवन की नई शुरुआत करें।

 


चिकन या मटन बिरयानी तो आपने कई बार खाई होगी, अब अपनी बिरयानी डिश में कुछ नई रेसिपीज को जोडऩा चाहते हैं, तो आप फिश बिरयानी भी ट्राई कर सकते हैं। आइए, जानते हैं इसकी रेसिपी-
सामग्री :
मछली 750 ग्राम,
बासमती चावल 500 ग्राम (30 मिनट तक भीगे हुए),
दही– 01 कप (फेंटा हुआ),
प्याज 04 (बारीक कटा हुआ),
हरी मिर्च 06 (बारीक कटे हुए),
हरी धनिया 01 गड्डी (कटी हुई),
नींबू का रस 01 छोटा चम्मच,
अदरक-लहसुन पेस्ट 02 छोटे चम्मच,
तेल आवश्यकतानुसार।
विधि :
फिश बिरयानी बनाने के लिए सबसे पहले मछली को अच्छी तरह से साफ करके धो लें। उसके बाद आधा दही एक बाउल में निकालें और उसमें नींबू का रस और अदरक लहसुन का पेस्ट मिला लें। तैयार मिश्रण को मछलियों के ऊपर डाल कर उसे अच्छी तरह से लपेट लें और ढक कर रख दें।
अब भीगे हुए चावल को धो कर एक बर्तन में निकाल लें। उसमें जरूरत भर का पानी और थोड़ा सा नमक मिलाएं और उसे 75 त्न तक पका लें।
एक कड़ाही में थोड़ा सा तेल डाल कर उसे गर्म करें। तेल गर्म होने पर उसमें प्याज डालें और सुनहरा होने तक भून लें। इसके बाद कड़ाही में टमाटर और बचा हुआ दही डालें और पांच मिनट तक पका लें।
जब टमाटर नरम हो जाए, उसमें मछली के पीस और हरी मिर्च डाल दें और आंच को धीमी करके चलाते हुए पकाएं। जब मछली अच्छी तरह से सिक जाए, कड़ाही को गैस से उतार कर अलग रख दें।
अब एक पैन लेकर उसे गैस पर धीमी आंच पर रखें। पैन में सबसे पहले एक तिहाई पका हुआ चावल डालें। उसके ऊपर से आधी मछली और आधी धनिया की पत्ती डालें और बराबर फैला दें। फिर उसके ऊपर से एक तिहाई चावल की लेयर बना कर डाल दें।
अब चावल के ऊपर बची हुई मछली डाल कर ऊपर से बचे हुए चावल की लेयर लगा दें। अब पैन को ढक कर लगभग 15 मिनट तक पकाएं उसके बाद बिरयानी को अच्छी तरह से चला कर मिक्स कर लें और गैस को बंद कर दें।
आपकी आपकी बिरयानी तैयार है। बस इसे हरी धनिया से गार्निश करें और अचार अथवा चटनी के साथ गर्मा-गरम परोसें।

सेहत /शौर्यपथ / कब्ज एक छोटा-सा शब्द है लेकिन जिन लोगों को अक्सर कब्ज की समस्या रहती है, वो बेहतर तरीके से जानते हैं कि यह किस तरह आपकी लाइफ डिस्टर्ब करती है। पेट साफ न होने से शारीरिक परेशानियों के साथ कई स्किन प्रॉब्लम्स भी हो जाती हैं। ऐसे में आपको अपना ख्याल रखने के लिए अपनी कुछ आदतों में सुधार करना चाहिए। कुछ ऐसी आदते होती हैं जिसकी वजह से आपको कब्ज की परेशानी होती रहती है। कब्ज की बात करें, तो आम कब्ज से लेकर गंभीर तरह की कब्ज की बीमारी इसमें शामिल है. जैसे कभी-कभार होने वाला कब्ज, क्रॉनिक कॉन्स्टिपेशन (कब्ज बहुत ज्यादा बढ़ जाने पर), यात्रा या उम्र से संबंधित कब्ज। कब्ज में हमारी आंतें मल को छोड़ नहीं पातीं। कब्ज होने के आम कारण हैं-
खानपान
खानपान में किसी भी तरह का बदलाव कब्ज का कारण बन सकता है, जैसे अचानक बहुत ज्यादा तैलीय खाना खाने या वजन घटाने के लिए खाने पर नियंत्रण करने की वजह से भी कब्ज हो जाता है। इसके अतिरिक्त यदि आप बहुत ज्यादा वसायुक्त चीजें पसंद करते हैं या शराब और कॉफी पीते हैं तो भी कब्ज के शिकार हो सकते हैं।
कम पानी पीना
कुछ लोग बहुत कम पानी पीते हैं। ऐसे लोग मानते हैं कि दिन में दो गिलास पानी पी लें तो भी उनका काम चल जाएगा, लेकिन इससे हमारे पाचन तंत्र और शरीर की जरूरतें पूरी नहीं होतीं।
व्यायाम
क्या आप रोजाना कसरत करते हैं? रोजाना न सही, सप्ताह में चार दिन तो करते होंगे। नहीं? पाचन तंत्र के बिगडऩे या कब्ज होने की यह सबसे बड़ी वजह है। शारीरिक व्यायाम के अभाव में हमारा मेटाबॉलिज्म खराब हो जाता है। मेटाबॉलिज्म के कमजोर पड़ते ही हमारी पाचन क्रिया गड़बड़ हो जाती है।
दवाएं
कुछ दवाओं के सेवन से भी कब्जियत हो जाती है। ज्यादातर मामले पेन किलर्स की वजह से देखने को मिले हैं। कुछ विटामिन और आयरन की खुराक से भी यह समस्या हो जाती है। ऐसे में डॉक्टर से राय लेकर आप इन दवाओं के साथ स्टूल सॉफ्टनर दवाएं ले सकते हैं।
यह है उपचार
नीबू पानी
नीबू हमारे शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करता है। अगर कभी कब्ज हो जाए तो एक गिलास गर्म पानी में एक नीबू का रस और शहद मिलाएं और पी लें।
दूध और दही
कब्ज की समस्या को दूर करने के लिए पेट में अच्छे बैक्टीरिया का भी होना जरूरी है। सादे दही से आपको प्रोबायोटिक मिलेगा, इसलिए आप दिन में एक से दो कप दही जरूर खायें। इसके अलावा यदि बहुत परेशान हैं तो एक गिलास दूध में एक से दो चम्मच घी मिला कर रात को सोते समय पिएं, लाभ होगा।
आयुर्वेद
सोने से पहले दो या तीन त्रिफला टैबलेट गर्म पानी के साथ लें। त्रिफला हरड़, बहेड़ा और आंवले से बना होता है। ये तीनों पेट के लिए लाभकारी हैं। त्रिफला रात में अपना काम शुरू कर देता है।
खाने में फाइबर
एक दिन में एक महिला को औसतन 25 ग्राम फाइबर की जरूरत होती है, वहीं एक पुरुष को 30 से 35 ग्राम फाइबर की आवश्यकता होती है। अपने पाचन तंत्र को दोबारा ट्रैक पर लाने के लिए आपको यह सुनिश्चित करना होगा कि आप हर दिन अपनी जरूरत के अनुसार फाइबर की खुराक ले रहे हैं।

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