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धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।
युवक कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष के निधन से राजनीतिक एवं सामाजिक क्षेत्र में शोक की लहर, 27 अगस्त को रामनगर मुक्तिधाम में होगा अंतिम संस्कार
भिलाईनगर / शौर्यपथ /
भिलाई नगर निगम के पांच बार के पार्षद एवं युवक कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण मिश्रा का बुधवार को निधन हो गया। वे 56 वर्ष के थे। उनके निधन की खबर सामने आते ही भिलाई के राजनीतिक, सामाजिक और जनसरोकारों से जुड़े क्षेत्रों में शोक की लहर दौड़ गई।
वशिष्ठ नारायण मिश्रा ने लंबे समय तक सार्वजनिक जीवन में सक्रिय रहते हुए भिलाई की राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाई थी। पांच बार पार्षद के रूप में उन्होंने क्षेत्र की समस्याओं और जनहित के मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। सरल व्यवहार, सहज व्यक्तित्व और आम लोगों से निरंतर जुड़े रहने के कारण वे अपने समर्थकों और क्षेत्रवासियों के बीच विशेष रूप से लोकप्रिय रहे।
लंबे सार्वजनिक जीवन की छोड़ी अमिट छाप
मिश्रा का राजनीतिक सफर केवल चुनावी राजनीति तक सीमित नहीं रहा। युवक कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष के रूप में भी उन्होंने संगठन में सक्रिय भूमिका निभाई। जनसरोकारों से जुड़े रहने और लोगों के सुख-दुख में सहभागी बनने के कारण सार्वजनिक जीवन में उनकी एक अलग पहचान बनी।
उनके निधन को भिलाई के राजनीतिक एवं सामाजिक जीवन के लिए अपूरणीय क्षति माना जा रहा है। उनके निधन की खबर मिलते ही राजनीतिक दलों के नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं, विभिन्न संगठनों के पदाधिकारियों, समर्थकों और शुभचिंतकों ने गहरा दुख व्यक्त किया तथा उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
अंतिम संस्कार 27 अगस्त को
परिजनों के अनुसार वशिष्ठ नारायण मिश्रा का अंतिम संस्कार 27 अगस्त को रामनगर मुक्तिधाम में किया जाएगा। उनके निधन से परिवार, समर्थकों और शुभचिंतकों में गहरा शोक व्याप्त है। सार्वजनिक जीवन में उनके लंबे योगदान, सहज व्यक्तित्व और जनसरोकारों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को भिलाईवासी लंबे समय तक याद रखेंगे।
सैकड़ों शिवभक्तों ने उठाया कांवड़, शिवनाथ नदी से जल लेकर पहुंचे सत्तीचौरा; 3 से 6 वर्ष के नन्हे कांवडिय़ों ने भी बढ़ाया उत्साह
दुर्ग / शौर्यपथ / सावन के पावन महीने में बुधवार को दुर्ग शहर पूरी तरह भगवान शिव की भक्ति में सराबोर नजर आया। शिवनाथ नदी के तट से लेकर सत्तीचौरा स्थित सत्तीश्वर महादेव मंदिर तक हर ओर हर-हर महादेव के जयघोष गूंजते रहे। गंजपारा क्षेत्र से निकली भव्य कांवड़ यात्रा में सैकड़ों शिवभक्त शामिल हुए। श्रद्धालुओं ने शिवनाथ नदी से पवित्र जल लेकर पैदल यात्रा करते हुए सत्तीश्वर महादेव मंदिर पहुंचकर भगवान शिव का जलाभिषेक किया।
कांवड़ यात्रा की शुरुआत सुबह करीब 7 बजे शिवनाथ नदी के घाट से हुई और लगभग 10 बजे श्रद्धालु सत्तीचौरा स्थित सत्तीश्वर महादेव मंदिर पहुंचे। यात्रा प्रारंभ होने से पहले शिवनाथ नदी तट पर पंडित सुनील पांडेय ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना एवं आरती कराई। इसके बाद श्रद्धालुओं ने नदी से कांवड़ में जल भरा और भगवान भोलेनाथ के जयघोष के साथ पैदल यात्रा शुरू की।
फूलों की वर्षा के बीच गूंजता रहा 'हर-हर महादेवÓ
कांवड़ यात्रा के मार्ग में विभिन्न स्थानों पर शिवभक्तों का स्वागत किया गया और श्रद्धालुओं पर फूलों की वर्षा की गई। कांवडिय़े पूरे उत्साह और भक्ति के साथ "हर-हर महादेव", "घर-घर महादेव" और "श्री शिवाय नमस्तुभ्यं" का जयघोष करते हुए आगे बढ़ते रहे। यात्रा के दौरान पूरा वातावरण शिवमय हो गया।
सत्तीचौरा पहुंचने के बाद कांवडिय़ों ने सत्तीश्वर महादेव मंदिर में भगवान शिव का पवित्र जल से अभिषेक किया। इसके बाद आरती एवं पूजा-अर्चना का आयोजन हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सहभागिता की।
नन्हे कांवडिय़ों ने खींचा सबका ध्यान
गंजपारा की इस कांवड़ यात्रा का सबसे खास और भावुक करने वाला दृश्य तब देखने को मिला, जब 3 से 6 वर्ष की उम्र के 20 से अधिक नन्हे बच्चे भी कांवड़ उठाकर शिवनाथ नदी से सत्तीचौरा तक पैदल पहुंचे। नन्हे कांवडि़ए पूरे रास्ते उत्साह और भक्ति में झूमते हुए नजर आए। उन्होंने सत्तीश्वर महादेव मंदिर पहुंचकर भगवान शिव का जलाभिषेक किया। बच्चों की भक्ति और उत्साह ने यात्रा में शामिल श्रद्धालुओं का विशेष रूप से ध्यान आकर्षित किया।
शिवनाथ नदी के संरक्षण और आस्था का संदेश
आयोजकों ने बताया कि कांवड़ यात्रा की तैयारियां दो दिन पहले से ही शुरू कर दी गई थीं। यात्रा का उद्देश्य धार्मिक आस्था के साथ-साथ दुर्ग शहर की जीवनदायिनी शिवनाथ नदी के संरक्षण एवं उत्थान का संदेश देना भी है। सावन के पवित्र महीने में शिवनाथ नदी से जल लेकर भगवान शिव का अभिषेक करने की विशेष धार्मिक मान्यता है।
सावन के इस पावन अवसर पर शहर के अलग-अलग क्षेत्रों से निकली कांवड़ यात्राओं ने दुर्ग को भक्ति के रंग में रंग दिया। श्रद्धालुओं ने भगवान शिव के प्रति अपनी आस्था व्यक्त करते हुए अपने गांव, शहर और घरों में स्थित शिवलिंग पर जल अर्पित करने का संकल्प भी लिया।
बड़ी संख्या में शिवभक्त हुए शामिल
कांवड़ यात्रा में राजेश शर्मा, सुरेश गुप्ता, गुड्डू कश्यप, डब्बू चंद्रवंशी, योगेन्द्र शर्मा, बंटी, मनोज गुप्ता, लाला, ललित शर्मा, मनीष सेन, प्रकाश सिन्हा, दिनेश शर्मा, सूर्यमणि मिश्रा, लक्की अग्रवाल, प्रकाश ठाकुर, राकेश महोबिया, सुजल शर्मा, सोनल सेन, ऋषि गुप्ता, मोहित पुरोहित, कृतज्ञ शर्मा, वाशु शर्मा, अनमोल पांडे, सार्थक शर्मा, वंशु पुरोहित, सिद्धू सेन, मोक्ष शर्मा, सुभाष शर्मा, हृदय शर्मा, विक्की शर्मा सहित सैकड़ों शिवभक्त मौजूद रहे।
सावन की भक्ति, कांवड़ की आस्था और शिवनाथ के पवित्र जल ने बुधवार को दुर्ग शहर को पूरी तरह शिवमय कर दिया।
दैनिक शौर्यपथ / महासमुंद जिला ब्यूरो संतराम कुर्रे
महासमुंद। छत्तीसगढ़ शासन की महत्वाकांक्षी सरस्वती साइकिल वितरण योजना के तहत खल्लारी विधानसभा क्षेत्र के ग्राम सुखरीडबरी, नर्रा एवं परसुली में आयोजित कार्यक्रमों में जिला पंचायत महासमुंद के उपाध्यक्ष भीखम सिंह ठाकुर मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। तीनों विद्यालयों में आयोजित कार्यक्रमों के दौरान कुल 162 छात्राओं को नि:शुल्क साइकिल वितरित की गई। साइकिल मिलने से छात्राओं के चेहरे पर खुशी नजर आई और विद्यालय तक आवागमन की सुविधा आसान हुई।
ग्राम सुखरीडबरी स्थित शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में 51 छात्राओं, ग्राम नर्रा स्थित शासकीय कुलदीप निगम उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में 64 छात्राओं तथा ग्राम परसुली स्थित शासकीय श्री बूढ़ादेव उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में 47 छात्राओं को साइकिल प्रदान की गई।
बेटियों की शिक्षा और आत्मनिर्भरता को मिलेगा बढ़ावा
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भीखम सिंह ठाकुर ने कहा कि सरस्वती साइकिल योजना बेटियों की शिक्षा को प्रोत्साहित करने वाली महत्वपूर्ण जनकल्याणकारी पहल है। ग्रामीण क्षेत्रों में विद्यालय आने-जाने के दौरान छात्राओं को होने वाली कठिनाइयों को यह योजना काफी हद तक दूर कर रही है। साइकिल मिलने से आवागमन सुगम होने के साथ छात्राओं में आत्मविश्वास भी बढ़ता है और वे बिना किसी बाधा के अपनी पढ़ाई जारी रख सकती हैं।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में शिक्षा की महत्वपूर्ण भूमिका है। बेटियों को शिक्षा के बेहतर अवसर उपलब्ध कराना उनके भविष्य को संवारने के साथ-साथ समाज और राष्ट्र के विकास को भी मजबूत आधार प्रदान करता है। छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा बेटियों की शिक्षा, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता के लिए संचालित योजनाएं सराहनीय हैं।
तीनों कार्यक्रमों में जनप्रतिनिधियों और नागरिकों की रही सहभागिता
सुखरीडबरी में आयोजित कार्यक्रम की अध्यक्षता सरपंच जानकी ठाकुर ने की। कार्यक्रम में अलका चंद्राकर, निदेशक एमएसटीसी लिमिटेड, डिम्पल डाली ध्रुव, भाजपा मंडल अध्यक्ष बागबाहरा शहर, लोकेश पुनुरिया, भाजपा मंडल अध्यक्ष खल्लारी, कृष्णा चक्रधारी, अध्यक्ष शाला प्रबंधन एवं विकास समिति, संजय मालवे, सांसद प्रतिनिधि सहित क्षेत्र के जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन उमेश्वर ठाकुर ने किया तथा आभार कामेश्वरी साहू ने व्यक्त किया।
नर्रा में कार्यक्रम की अध्यक्षता एसएमसी अध्यक्ष रूपेंद्र साहू ने की। विशिष्ट अतिथि के रूप में सरपंच नामेश्वरी दिवाकर, पूर्व जनपद सदस्य उमेश जैन, टेकराम पटेल, भाजपा मंडल महामंत्री लेखमणि पटेल, उपसरपंच लोकनाथ पटेल सहित क्षेत्र के जनप्रतिनिधि, प्राचार्य, शिक्षक-शिक्षिकाएं, पालकगण एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
परसुली में कार्यक्रम की अध्यक्षता शाला प्रबंधन समिति अध्यक्ष डिगेश्वरी साहू ने की। जनपद सदस्य लता कुम्हार, सरपंच जलसिंह चक्रधारी, सरपंच परकोम प्रभा पटेल, सरपंच पंडरीपानी लीला दीवान, सरपंच खट्टी खिलेश्वरी सिन्हा, भाजपा मंडल महामंत्री कोमाखान लेखमनी पटेल, महिला मोर्चा मंडल उपाध्यक्ष किरण यदु सहित जनप्रतिनिधि, विद्यालय के शिक्षक-शिक्षिकाएं, छात्र-छात्राएं एवं गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।
मेहनत और लगन से आगे बढऩे का संदेश
भीखम सिंह ठाकुर ने छात्राओं को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि "बेटियों की शिक्षा में किया गया निवेश ही मजबूत समाज और विकसित राष्ट्र की सबसे बड़ी नींव है।" उन्होंने छात्राओं से पूरी लगन और मेहनत के साथ शिक्षा प्राप्त कर अपने परिवार, क्षेत्र और प्रदेश का नाम रोशन करने का आह्वान किया।
धमतरी / शौर्यपथ / सिंध समाज धमतरी द्वारा प्रतिवर्ष आयोजित किए जाने वाले अपने इष्ट देव साईं झूलेलाल जी का 40 दिवसीय चालीहा महोत्सव का आयोजन इस वर्ष भी पूरे उत्साह, उमंग और धार्मिक श्रद्धा के साथ किया जा रहा है। 9 अगस्त से प्रारंभ हुए इस महोत्सव के अंतर्गत प्रत्येक मंगलवार को कोष्टापारा स्थित झूलेलाल मंदिर के बाजू स्थित झूलेलाल हाल में समाज द्वारा विभिन्न धार्मिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। इसी कड़ी में चालीहा महोत्सव के तीसरे मंगलवार को झूलेलाल महिला मंडल द्वारा "मोबाइल,वरदान या अभिशाप" विषय पर आकर्षक एवं संदेशप्रद सांस्कृतिक प्रस्तुति दी गई।
महिला मंडल की महिलाओं एवं बाल कलाकारों ने अपनी शानदार अभिनय क्षमता के माध्यम से मोबाइल फोन के आधुनिक जीवन में बढ़ते महत्व, उसके सदुपयोग से होने वाले सकारात्मक प्रभाव तथा इसके दुरुपयोग से उत्पन्न होने वाली सामाजिक एवं पारिवारिक समस्याओं को प्रभावी ढंग से मंच पर प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में यह दर्शाया गया कि मोबाइल तकनीक आज शिक्षा, व्यापार, संचार, स्वास्थ्य, रोजगार एवं अन्य अनेक क्षेत्रों में वरदान साबित हो रही है। वहीं दूसरी ओर इसके अत्यधिक एवं गलत उपयोग से परिवार, बच्चों, सामाजिक संबंधों तथा व्यक्तिगत जीवन पर पडऩे वाले दुष्प्रभावों को भी नाट्य प्रस्तुति के माध्यम से बखूबी उजागर किया गया।
महिला मंडल परिवार की महिलाओं और बच्चों ने विभिन्न पात्रों के माध्यम से आधुनिक जीवन की परिस्थितियों को जीवंत कर दिया। हास्य, भावनात्मक संवाद और सामाजिक संदेश से भरपूर इस प्रस्तुति ने उपस्थित दर्शकों को जहां खूब गुदगुदाया, वहीं उन्हें मोबाइल के संतुलित एवं सार्थक उपयोग के प्रति गंभीरता से सोचने के लिए भी प्रेरित किया। प्रस्तुति के दौरान सभागार लगातार तालियों की गडग़ड़ाहट से गूंजता रहा। समाज के सभी वर्गों से पहुंचे लोगों ने कार्यक्रम की जमकर सराहना की।
झूलेलाल मंदिर में लगभग शाम 7.00 बजे विशेष महाआरती के बाद प्रारंभ हुआ यह कार्यक्रम रात करीब 10:30 बजे तक चला। बड़ी संख्या में समाजजन एवं सर्वसमाज के नागरिक कार्यक्रम में उपस्थित रहे और महिला मंडल की इस अनूठी प्रस्तुति का आनंद लिया। पूज्य सिंधी पंचायत सहित समाज की विभिन्न इकाइयों के पदाधिकारियों एवं सदस्यों ने महिला मंडल की इस पहल की प्रशंसा करते हुए महिला कलाकारों एवं बाल कलाकारों को आशीर्वाद प्रदान किया।
झूलेश्वर महादेव का माता विंध्यवासिनी स्वरूप में विशेष श्रृंगार
कार्यक्रम से पूर्व झूलेलाल मंदिर स्थित झूलेश्वर महादेव शिवलिंग का विशेष श्रृंगार किया गया। इस अवसर पर भगवान शिव बाबा को माता विंध्यवासिनी का स्वरूप प्रदान किया गया, जो श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। सिंध समाज की दिव्या राजपूत, चंचल भोजवानी, लक्ष्मी रंझानी द्वारा माता के स्वरूप में विशेष श्रृंगार किया गया। मंदिर परिसर में सजे इस दिव्य स्वरूप को देखने बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे।
सर्वसमाज के लिए लंगर प्रसादी
महिला मंडल द्वारा आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम के पश्चात सर्वसमाज के लिए लंगर प्रसादी का आयोजन किया गया। समाज एवं अन्य वर्गों के लोगों ने पंक्तिबद्ध होकर प्रसादी ग्रहण की। आयोजन में सामाजिक समरसता और सेवा की भावना स्पष्ट रूप से दिखाई दी।
मंगलवार को आयोजित संपूर्ण कार्यक्रम की जिम्मेदारी झूलेलाल मंडल परिवार के देवानंद भोजवानी को सौंपी गई थी। उनके नेतृत्व में कार्यक्रम का सफल एवं व्यवस्थित आयोजन किया गया। झूलेलाल मंडल परिवार, झूलेलाल महिला मंडल परिवार, पूज्य सिंधी पंचायत सहित समाज की विभिन्न इकाइयों के सदस्यों ने बड़ी संख्या में सहभागिता निभाई। सभी इकाइयों के सदस्यों ने आयोजन में बढ़-चढ़कर अपनी सेवाएं प्रदान कीं।
40 दिवसीय अनुष्ठान में प्रतिदिन हो रही विशेष पूजा-अर्चना
उल्लेखनीय है कि 40 दिनों तक चलने वाले इस धार्मिक आयोजन के दौरान सिंध समाज के लोग प्रतिदिन सुबह एवं शाम विशेष पूजा-अर्चना, पल्लव एवं अरदास के साथ चालीहा पाठ का पाठ कर भगवान झूलेलाल जी की आराधना कर रहे हैं। समाजजन उपवास एवं अन्य धार्मिक अनुष्ठानों के माध्यम से जल एवं ज्योत के देवता भगवान श्री झूलेलाल जी से देश-प्रदेश सहित धमतरी जिले की सुख-समृद्धि, शांति एवं खुशहाली की कामना कर रहे हैं।
चालीहा महोत्सव के माध्यम से धार्मिक आस्था के साथ-साथ सामाजिक एकता, सेवा, सांस्कृतिक संरक्षण और जनजागरूकता का संदेश भी दिया जा रहा है। महिला मंडल द्वारा प्रस्तुत "मोबाइल—वरदान या अभिशाप" कार्यक्रम ने इसी उद्देश्य को सार्थक करते हुए आधुनिक तकनीक के प्रति जागरूक एवं संतुलित दृष्टिकोण अपनाने का प्रभावी संदेश दिया।
धमतरी / शौर्यपथ / श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर रामधुनी मंडली पुरानी बस्ती दुगली के युवाओं द्वारा आयोजित श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। इसी कड़ी में मंडली के युवाओं ने जनपद पंचायत नगरी के अध्यक्ष महेश गोटा से मुलाकात कर उन्हें जन्माष्टमी महोत्सव में शामिल होने के लिए स्नेहपूर्वक आमंत्रित किया।
इस दौरान युवाओं ने महोत्सव की तैयारियों एवं आयोजन की रूपरेखा से उन्हें अवगत कराया। जनपद पंचायत अध्यक्ष महेश गोटा ने आमंत्रण स्वीकार करते हुए आयोजन के लिए शुभकामनाएं दीं तथा धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजनों को समाज में एकता और सद्भावना का माध्यम बताया।
आमंत्रण कार्यक्रम के दौरान भाजपा के वरिष्ठ नेता हनी कश्यप, रवि भट्ट, रविकुमार यादव, उत्तमचंद सोरी, कुंदन सिंह नेताम, शिवा नेताम, कृष कुमार नेताम, अभिषेक नेताम एवं वरुण देव नेताम सहित रामधुनी मंडली पुरानी बस्ती दुगली के युवा उपस्थित रहे।
महोत्सव को लेकर युवाओं में खासा उत्साह है तथा आयोजन को भव्य एवं श्रद्धापूर्ण बनाने की तैयारियां की जा रही हैं।
दैनिक शौर्यपथ महासमुंद ब्यूरो संतराम कुर्रे
पिथौरा /पिथौरा से इस वक्त की बड़ी खबर, छग जर्नलिस्ट वेलफेयर यूनियन की पिथौरा इकाई की एक आवश्यक बैठक आज स्थानीय फॉरेस्ट रेस्ट हाउस पिथौरा में संपन्न हुई है। यह महत्वपूर्ण बैठक प्रदेश अध्यक्ष अमित गौतम के दिशा निर्देशन और जिला अध्यक्ष बलराज नायडू के मार्गदर्शन में आयोजित की गई। बैठक में पत्रकारों की सुरक्षा, संगठन की मजबूती और आने वाले दिनों में यूनियन की गतिविधियों को लेकर विस्तार पूर्वक चर्चा की गई।
बैठक का मुख्य आकर्षण रहा सत्यवाहक न्यूज़ के संपादक सतीश ध्रुव का यूनियन परिवार में शामिल होना। सतीश ध्रुव ने आज विधिवत रूप से छग जर्नलिस्ट वेलफेयर यूनियन पिथौरा इकाई की सदस्यता ग्रहण की, जिसके बाद यूनियन परिवार ने फूल माला पहनाकर उनका जोरदार स्वागत किया।
इस बैठक में जिला अध्यक्ष बलराज नायडू, ब्लॉक अध्यक्ष विकास अग्रवाल, जिला उपाध्यक्ष आनंद अग्रवाल, जिला सचिव गौरव चंद्राकर, जिला संगठन सचिव संतराम कुर्रे, जिला सह सचिव लोकनाथ खूंटे, जिला सलाहकार गोपाल शर्मा, जिला सलाहकार रमेश श्रीवास्तव, कोषाध्यक्ष राजकुमार अग्रवाल और सदस्य आत्मा पटेल सहित यूनियन के सभी सदस्य बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
बिलासपुर / शौर्यपथ / बिलासपुर कलेक्टर संजय अग्रवाल एवं ष्ठढ्ढत्र/स्स्क्क रजनेश सिंह के मार्गदर्शन में आर्यन फि़ल्म टीम द्वारा बुके नहीं, बुक भेंट करें अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान का उद्देश्य औपचारिक बुके की जगह किताबें, कॉपी-पेन एवं अध्ययन सामग्री भेंट कर शिक्षा और ज्ञान को प्रोत्साहित करना है।
इसी क्रम में बिलासपुर ष्ठढ्ढत्र/स्स्क्क रजनेश सिंह द्वारा रक्षाबंधन के अवसर पर बहनों के लिए उपहार स्वरूप कॉपी, पेन एवं अध्ययन सामग्री आर्यन फि़ल्म टीम को प्रदान की गई। यह सामग्री आर्यन फि़ल्म की टीम द्वारा स्कूलों में पहुंचकर बहनों के बीच वितरित की जाएगी। इस अवसर पर आर्यन फि़ल्म की ओर से डायरेक्टर रामा नन्द तिवारी, दिनेश चंदानी (होटल बंशीवाला), रूह्म्ह्य. क्कह्म्ड्डठ्ठह्लद्बद्मड्ड क्चद्धड्डह्म्स्र2ड्डद्भ (स्ढ्ढ), उमा शंकर पाण्डेय , सनी मनीष भटेजा, जीतेन्द्र सिदार एवं रवि सहित टीम के सदस्य उपस्थित रहे।
फरार आरोपियों की सूचना देने पर मिलेगा ईनाम
बिलासपुर / शौर्यपथ / पुलिस उप महानिरीक्षक एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक द्वारा थाना तोरवा, जिला बिलासपुर में दर्ज अपराध के फरार आरोपियों की सूचना देने वालों के लिए 5 हजार रूपये के ईनाम की घोषणा की गई है। थाना तोरवा में दर्ज अपराध के आरोपी अर्जुन यादव, पिता बहोरिक यादव, उम्र 25 वर्ष, निवासी पंचायत भवन के पास महमंद, थाना तोरवा एवं आरोपी गोविंदा पासी, पिता जय सिंह पासी, उम्र 25 वर्ष, निवासी काली मंदिर के पास लालखदान तोरवा, थाना तोरवा जिला बिलासपुर (छ.ग.) के संबंध में सूचना देने वाले व्यक्ति को 5 हजार रूपये का पुरस्कार प्रदान किया जाएगा। सूचना देने वाले का नाम गोपनीय रखा जाएगा एवं पुरस्कार वितरण के संबंध में पुलिस उप महानिरीक्षक एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक जिला बिलासपुर का निर्णय अंतिम होगा।
इस संबंध में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, बिलासपुर 07752-223330, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, शहर बिलासपुर 9479193002, पुलिस नियंत्रण कक्ष, बिलासपुर 07752-228504, मो.नं. 9479193099, थाना प्रभारी, तोरवा मो.नं. 9479193021 पर संपर्क किया जा सकता है।
रायपुर/ / शौर्यपथ /
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि छत्तीसगढ़ में अवैध रेत की काली कमाई पर्यावरण और कानून व्यवस्था के लिए एक गंभीर संकट बन चुकी है। सामान्य तौर पर 15 जून से 15 अक्टूबर तक रेत उत्खनन में पूर्ण प्रतिबंध रहता है, लेकिन छत्तीसगढ़ में रेत माफिया मानसून (बारिश) के दौरान भी नदी से खनन कर रहे हैं, नदियों में पनडुब्बी मशीने लगाकर रेत निकाला जा रहा है, रोक लगने से पहले भी भारी मात्रा में अवैध रेत निकालकर खेतों, गांवों और नदी के कैचमेंट एरिया के पास, सड़कों के किनारे और गोठानों की सरकारी जमीनों में बड़े-बड़े पहाड़ जैसे अवैध भंडारण (स्टॉक) खड़े कर दिए गए हैं ताकि बाद में उन्हें ऊंचे दामों पर बेचा जा सके। हालिया मामले रायपुर जिले के समोदा, कुरुद और करमंदी इलाकों में महानदी को बुरी तरह काटकर रेत के ऊंचे पहाड़ बना दिए गए हैं। बिलासपुर में अरपा और शिवनाथ नदी के पास, जशपुर की शंख नदी और बलौदाबाजार में भी बड़े पैमाने पर अवैध भंडारण पकड़ा गया है। दुर्ग में शिवनाथ, बिलासपुर में अरपा, मनियारी, गरियाबंद में पैरी और बस्तर में शबरी, शंखनी, डंकनी, नारंगी और इंद्रावती में भी यही हाल है।
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि रेत के अवैध करोबारियों को भाजपा सरकार का संरक्षण है, इन्हीं की मिलीभगत से छत्तीसगढ़ से अवैध रेत सीमावर्ती राज्यों में बड़े पैमाने पर खपाएं जा रहे हैं। झारखंड की अंतर्राज्यीय सीमा, यूपी, उड़ीसा, आंध्र, तेलंगाना और महाराष्ट्र तक रेत तस्कर सक्रिय हैं। ये तस्कर गिरोह संगठित रुप से नदी का सीना छलनी कर रेत का खनन कर रहे है। अवैध उत्खनन से लेकर उसके भंडारण और परिवहन तक को रोकने में यह सरकार नाकाम है। रेत माफियाओं का साम्राज्य फैलता जा रहा है, इनका खौफ इतना ज्यादा है कि इसके विरोध का साहस पंचायत प्रतिनिधित तक नहीं जुटा पा रहे हैं, राजनीतिक संरक्षण, मुनाफे में हिस्सेदारी और प्रशासनिक उदासीनता के चलते ही रेत तस्कर बेलगाम हैं।
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि रेत का अवैध कारोबार अब गैंगवार, चाकूबाजी, गोलीबारी के खूनी खेल तक पहुंच गया है। रेत की काली कमाई में एकाधिकार के लिए ही विगत दिनों कोरिया जिले के एक भाजपा नेता के दूसरे भाजपा नेता और उनके साथियों को फॉर्चूनर गाड़ी में बंद करके जिंदा जला दिया। उससे पहले जांजगीर चांपा के जैजेपुर में घर घर में घुसकर दो भाइयों को गोली मार दी गई। रेत तस्करों के हौसले इतने बुलंद हैं कि खनिज विभाग के अधिकारीयों, पुलिस और प्रशासन को भी खुले तौर पर चुनौती दे रहे हैं। बलरामपुर में रेत माफियाओं ने पुलिस कांस्टेबल को ट्रैक्टर से कुचल कर मार दिया। गरीयाबंद और बलौदाबाजार में खनिज इंस्पेक्टर और माइनिंग अधिकारियों को पीटा गया, बस्तर से हो रहे रेत के अंतर्राज्यीय तस्करी पर खबर चलाने वाले चार पत्रकारों के गाड़ी में गांजा रखवाकर झूठे केस में फंसा दिया गया। कहीं किसी की हत्या हो रही है तो कहीं इनके गुर्गे खुलेआम धमका रहे हैं, बिना सत्ता के प्रश्रय के यह संभव नहीं है।
भिलाई। कभी समाजसेवा, कभी कारोबारी गतिविधियां, कभी खेल और सामाजिक आयोजनों में सहभागिता—इंद्रजीत सिंह उर्फ ‘छोटू’ की सार्वजनिक पहचान लंबे समय से अलग-अलग रूपों में शहर के सामने आती रही है। उनके समर्थकों और शुभचिंतकों की ओर से उन्हें समाजसेवी और कारोबारी के रूप में प्रस्तुत किया जाता रहा है। लेकिन अब इसी चमकदार सार्वजनिक छवि के सामने एक ऐसा सवाल खड़ा हो गया है, जिसे नजरअंदाज करना शायद आसान नहीं होगा—आखिर ‘समाजसेवी’ की पहचान के साथ ‘लोहा चोरी’ जैसे गंभीर आरोपों की चर्चा क्यों जुड़ रही है?
सवाल इसलिए भी बड़ा हो गया है क्योंकि हाल ही में वरिष्ठ पत्रकार विजया पाठक की सोशल मीडिया पोस्ट में इंद्रजीत सिंह ‘छोटू’ को लेकर बेहद गंभीर आरोपात्मक भाषा का इस्तेमाल किया गया है। उनके पोस्ट में “लोहा चोर ट्रांसपोर्ट कारोबारी” जैसे शब्द लिखे गए हैं और साथ ही GST कार्रवाई का उल्लेख किया गया है। यह पोस्ट अब भिलाई में चर्चा का विषय बनी हुई है।
हालांकि यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि किसी पत्रकार की पोस्ट या मीडिया रिपोर्ट में लगाए गए आरोप अपने आप में न्यायिक रूप से अपराध सिद्ध होने के बराबर नहीं हैं। अंतिम सत्य जांच एजेंसियों की जांच, आधिकारिक दस्तावेज और न्यायिक प्रक्रिया से ही सामने आएगा।
GST की दस्तक ने बढ़ाई बेचैनी
24 अगस्त 2026 से इंद्रजीत सिंह ‘छोटू’ से जुड़े हैवी ट्रांसपोर्ट कंपनी के ठिकानों पर स्टेट GST की टीम द्वारा जांच की खबर सामने आई। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार हथखोज स्थित कंपनी परिसर के साथ बलौदाबाजार स्थित यार्ड में भी कारोबारी दस्तावेजों, लेन-देन और GST से संबंधित रिकॉर्ड की पड़ताल की गई। कंपनी के कारोबार में बड़ी संख्या में ट्रकों के संचालन की जानकारी भी सामने आई है।
लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि GST विभाग की ओर से जांच की अंतिम वजह, कथित अनियमितता और जांच का निष्कर्ष अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है। इसलिए अभी किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।
फिर सवाल उठता है—जब तक जांच का निष्कर्ष सामने नहीं आया है, तब तक इतनी बड़ी चर्चा क्यों?
जवाब शायद उसी सार्वजनिक छवि में छिपा है, जिसे वर्षों से पोस्टर, बैनर, सामाजिक आयोजनों और सार्वजनिक कार्यक्रमों के जरिए मजबूत किया गया।
पोस्टर की चमक से आरोपों की धूल तक?
भिलाई में यह कोई छिपी बात नहीं कि बड़े कारोबारी और प्रभावशाली सामाजिक चेहरों के कार्यक्रमों की तस्वीरें और बधाई संदेश अक्सर शहर के पोस्टर-बैनरों में दिखाई देते हैं। सवाल यह नहीं कि किसी कारोबारी को सामाजिक कार्य करने का अधिकार है या नहीं—बिल्कुल है।
सवाल यह है कि क्या सामाजिक सेवा की चमक किसी व्यक्ति से जुड़े गंभीर आरोपों पर सवाल पूछने की पत्रकारिता को रोक सकती है?
यदि किसी व्यक्ति पर आरोप सामने आए हैं तो उसकी सामाजिक प्रतिष्ठा का सम्मान करते हुए भी सवाल पूछे जाने चाहिए।
और अगर आरोप निराधार हैं तो जवाब भी उतनी ही मजबूती से सामने आना चाहिए।
क्योंकि पोस्टर से बनी छवि को पोस्टर ही बचा पाएगा, यह जरूरी नहीं; कई बार एक जांच की फाइल पूरी तस्वीर बदल देती है।
भिलाई में सवाल बहुत हैं, जवाब अभी बाकी
वरिष्ठ पत्रकार विजया पाठक की पोस्ट ने जो सवाल उठाए हैं, वे अब स्थानीय चर्चाओं का हिस्सा बन चुके हैं। दूसरी ओर इंद्रजीत सिंह ‘छोटू’ की सामाजिक गतिविधियों और विभिन्न संस्थाओं से जुड़ाव की चर्चा भी होती रही है। उपलब्ध रिपोर्टों में उन्हें ट्रांसपोर्ट व्यवसाय के साथ सामाजिक और खेल संगठनों से जुड़ा बताया गया है।
यानी तस्वीर के दोनों पहलू मौजूद हैं।
एक तरफ समाजसेवा और कारोबारी पहचान, दूसरी तरफ लोहा चोरी जैसे गंभीर आरोपों की चर्चा और GST जांच।
अब असली परीक्षा पोस्टर-बैनर की नहीं, दस्तावेजों की है।
‘10 हजार करोड़’ की चर्चा भी जांच के दायरे में क्यों नहीं?
भिलाई स्टील प्लांट से कथित बड़े पैमाने पर लोहा चोरी को लेकर अलग-अलग मीडिया रिपोर्टों में हजारों करोड़ रुपये के आंकड़े और दावे सामने आते रहे हैं। कुछ रिपोर्टों में लगभग 10 हजार करोड़ रुपये से अधिक की कथित चोरी का दावा भी किया गया है। लेकिन ऐसे आंकड़ों को आधिकारिक जांच या न्यायिक निष्कर्ष के बिना स्थापित तथ्य मानना उचित नहीं होगा।
इसलिए सवाल होना चाहिए—दावा कितना बड़ा है और उसके पीछे दस्तावेज कितने मजबूत हैं?
अब भिलाई को ‘चर्चा’ नहीं, खुलासा चाहिए
इंद्रजीत सिंह ‘छोटू’ वास्तव में केवल एक समाजसेवी और कारोबारी हैं या उनके कारोबार से जुड़े आरोपों में भी कोई सच्चाई है—इसका फैसला सोशल मीडिया, चौक-चौराहे या पोस्टर-बैनर नहीं करेंगे।
फैसला जांच की रिपोर्ट करेगी।
यदि आरोप गलत हैं तो उन्हें सामने आकर तथ्य और दस्तावेजों के साथ खारिज करने का पूरा अधिकार है।
और यदि जांच में कोई गंभीर अनियमितता सामने आती है तो फिर समाजसेवा की चमकदार तस्वीर के पीछे छिपे सवालों का जवाब भी देना होगा।
फिलहाल भिलाई की जनता के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है—
“नाम समाजसेवी का, पहचान कारोबारी की और अब ‘लोहा चोर’ जैसे आरोपों की सुर्खियां... आखिर असली चेहरा कौन सा है?”
इस सवाल का जवाब पोस्टर नहीं देगा।
जवाब जांच देगी, दस्तावेज देंगे और अंततः कानून देगा।
तब तक सवाल पूछना भी पत्रकारिता का अधिकार है और आरोपों का जवाब देना संबंधित व्यक्ति का अधिकार।
क्योंकि समाजसेवा की असली कसौटी पोस्टर पर छपी तस्वीर नहीं, बल्कि जांच की कसौटी पर खरे उतरने वाले दस्तावेज होते हैं।
आस्था अपनी जगह, शिक्षा अपनी जगह... लेकिन जब आस्था के नाम पर मेहनत, पढ़ाई और परीक्षा की तैयारी को गौण बताया जाने लगे, तब सवाल उठना लाजिमी है।
शौर्यपथ लेख।
देश में लाखों छात्र प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए दिन-रात मेहनत कर रहे हैं। परीक्षा में गड़बड़ी और पेपर लीक जैसी घटनाओं से उनका भविष्य प्रभावित हो रहा है। ऐसे दौर में विद्यार्थियों को हौसला देने, मेहनत करने और शिक्षा के महत्व को समझाने की जरूरत है। लेकिन यदि किसी लोकप्रिय कथावाचक के मंच से यह संदेश जाए कि परीक्षा में सफलता के लिए पढ़ाई से ज्यादा कोई धार्मिक विधि कारगर हो सकती है, तो यह केवल आस्था का विषय नहीं रह जाता—यह सामाजिक जिम्मेदारी का सवाल बन जाता है।
पंडित प्रदीप मिश्रा के एक कथित वक्तव्य में परीक्षा में सफलता के लिए शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाने की विधि बताए जाने और इसे करने से पढ़ाई की जरूरत न होने जैसी बात कही गई। यदि वक्तव्य का आशय वास्तव में यही है, तो सवाल बेहद सीधा है—क्या वर्षों तक किताबों के बीच मेहनत करने वाले विद्यार्थियों की जगह अब परीक्षा की तैयारी के लिए पूजा-पाठ को पर्याप्त मान लिया जाए?
अगर बेलपत्र चढ़ाने से बिना पढ़े परीक्षा पास होना संभव है, तो फिर स्कूल-कॉलेज, कोचिंग संस्थान, शिक्षक, किताबें और शिक्षा पर सरकार द्वारा खर्च किए जा रहे करोड़ों रुपये किस काम के?
क्यों न परीक्षा से पहले विद्यार्थियों को किताबों की जगह बेलपत्र थमा दिया जाए?
क्यों न मेहनत, अनुशासन और अध्ययन की जगह धार्मिक विधि को परीक्षा की तैयारी का ‘शॉर्टकट’ घोषित कर दिया जाए?
लेकिन हकीकत यह है कि परीक्षा की उत्तर पुस्तिका में विद्यार्थी की आस्था नहीं, उसका ज्ञान और उसकी तैयारी उसके उत्तर लिखती है।
आस्था व्यक्ति को मानसिक शक्ति दे सकती है, विश्वास दे सकती है, सकारात्मक सोच दे सकती है—इसमें किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए। लेकिन आस्था को शिक्षा का विकल्प बनाकर प्रस्तुत करना एक अलग बात है। यही वह सीमा है, जिस पर जिम्मेदार सार्वजनिक व्यक्तियों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।
पंडित प्रदीप मिश्रा कोई सामान्य व्यक्ति नहीं हैं। उनके प्रवचन सुनने वाले लाखों अनुयायी हैं। ऐसे में मंच से निकला प्रत्येक शब्द केवल व्यक्तिगत विचार नहीं रह जाता, उसका प्रभाव समाज के बड़े वर्ग तक पहुंचता है। खासकर विद्यार्थी यदि यह संदेश ग्रहण कर लें कि पढ़ाई किए बिना भी किसी धार्मिक उपाय से परीक्षा में सफलता हासिल की जा सकती है, तो इसका नुकसान सीधे उनके भविष्य को हो सकता है।
आज का छात्र पहले ही परीक्षा प्रणाली, प्रतियोगिता, बेरोजगारी और पेपर लीक जैसी चुनौतियों से जूझ रहा है। ऐसे समय में उसे यह बताने की जरूरत है कि “मेहनत करो, ज्ञान हासिल करो, असफलता से मत डरो और दोबारा प्रयास करो।”
न कि यह कि “पढ़ाई छोड़ो और किसी विधि के भरोसे परीक्षा देने चले जाओ।”
कटाक्ष यह भी है कि यदि वास्तव में कोई ऐसी धार्मिक विधि है जो बिना अध्ययन के परीक्षा में सफलता दिला सकती है, तो फिर शिक्षा मंत्रालय को पाठ्यक्रम बदल देना चाहिए। किताबों की जगह बेलपत्र, नोट्स की जगह पूजा की विधि और परीक्षा की तैयारी की जगह कथा का आयोजन कर देना चाहिए!
लेकिन क्या ऐसा संभव है?
नहीं।
क्योंकि वास्तविक जीवन में सफलता के पीछे मेहनत, ज्ञान, अभ्यास, अनुशासन और निरंतर प्रयास होता है।
धार्मिक आस्था किसी व्यक्ति की निजी शक्ति हो सकती है, लेकिन उसे विद्यार्थियों के भविष्य का विकल्प नहीं बनाया जा सकता।
पंडित प्रदीप मिश्रा जैसे लोकप्रिय कथावाचक से अपेक्षा इसलिए अधिक है क्योंकि उनके शब्दों का प्रभाव सामान्य व्यक्ति से कहीं अधिक है। लाखों लोग उन्हें सुनते हैं, उनकी बातों को महत्व देते हैं और उनके बताए रास्ते पर चलने का प्रयास करते हैं। इसलिए सार्वजनिक मंच से विद्यार्थियों और परीक्षा जैसे संवेदनशील विषयों पर कही गई बातों में जिम्मेदारी और सावधानी अपेक्षित है।
क्योंकि किसी विद्यार्थी की एक गलत धारणा उसके वर्षों की मेहनत पर भारी पड़ सकती है।
और यदि कोई छात्र पढ़ाई छोड़कर केवल किसी धार्मिक उपाय के भरोसे परीक्षा देने बैठ जाए और असफल हो जाए, तो उस असफलता की जिम्मेदारी कौन लेगा?
क्या तब उसके हाथ में किताब होगी या केवल बेलपत्र?
यही असली सवाल है।
आस्था का सम्मान होना चाहिए, लेकिन शिक्षा का स्थान शिक्षा ही ले सकती है। परीक्षा में सफलता का सबसे विश्वसनीय मंत्र आज भी वही है—पढ़ो, समझो, अभ्यास करो और मेहनत करो।
कथावाचक का काम समाज में विश्वास जगाना है; लेकिन ऐसा विश्वास नहीं, जो विद्यार्थी को मेहनत से दूर कर दे।
क्योंकि भगवान पर भरोसा रखने में कोई बुराई नहीं, मगर परीक्षा की कॉपी में उत्तर लिखने के लिए कलम भी चलानी पड़ती है और उसके पीछे पढ़ाई भी करनी पड़ती है।
रायपुर/शौर्यपथ। रक्षाबंधन के अवसर पर नवा रायपुर अटल नगर के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, राखी में भारतीय सेना के जवानों के सम्मान में भावपूर्ण कार्यक्रम आयोजित किया गया। COSA Army के सहयोग से आयोजित कार्यक्रम में 72 सैन्यकर्मियों ने सहभागिता की।
विद्यालय की छात्राओं ने जवानों की कलाई पर राखी बांधकर सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त की। वहीं विद्यार्थियों ने नवा रायपुर के पोस्टकार्ड पर सैनिकों के नाम भावपूर्ण संदेश लिखकर उनके साहस, त्याग और देशसेवा को नमन किया।
इस दौरान सैन्यकर्मियों ने विद्यार्थियों से संवाद कर सेना के जीवन, अनुशासन और देशसेवा के अनुभव साझा किए तथा उन्हें जिम्मेदार नागरिक बनने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम में स्टेशन मुख्यालय, रायपुर के प्रशासनिक कमांडेंट कर्नल अभिषेक उनियाल, कर्नल अरिंदम मजूमदार, सूबेदार राज किशोर, विद्यालय के प्राचार्य, शिक्षकगण एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।
राखी के इस आयोजन ने सैनिकों और विद्यार्थियों के बीच स्नेह, सम्मान और राष्ट्रभक्ति का भाव और मजबूत किया।
रायपुर / शौर्यपथ / इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय (IGKV)) की बी.एस.सी. (कृषि) द्वितीय वर्ष की कीटशास्त्र (एजीसीएच 221) परीक्षा का प्रश्न पत्र लीक करने के मामले में रायपुर पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। एण्टी क्राईम एण्ड साईबर यूनिट और थाना तेलीबांधा की संयुक्त टीम ने त्वरित कार्यवाही करते हुए घटना के 36 घंटे के भीतर मुख्य आरोपी प्रोफेसर सहित कुल 6 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।
सुई और नुकीले औजार से छेदा लिफाफा, वीडियो बनाकर 11 हजार में बेचा
पुलिस खुलासे के अनुसार, इस पूरे कांड का मास्टरमाइंड भारती एग्रीकल्चर कॉलेज, दुर्ग में पदस्थ प्रोफेसर योगेश सोनकेसरिया (38 वर्ष) है। आरोपी प्रोफेसर पिछले एक साल से रायपुर कृषि महाविद्यालय से उत्तर पुस्तिकाएं जमा करने और आगामी परीक्षाओं के प्रश्न पत्र ले जाने का काम कर रहा था। 17 अगस्त को आरोपी ने आगामी परीक्षाओं के प्रश्न पत्र प्राप्त किए। इसके बाद वह 20 अगस्त को होने वाली कीटशास्त्र परीक्षा के प्रश्न पत्र का लिफाफा चुपके से अपने घर ले गया। वहां उसने सुई और नुकीले औजार से लिफाफे में छोटा छेद किया और मोबाइल कैमरे से प्रश्न पत्र की वीडियो रिकॉर्डिंग कर ली। आरोपी ने यह लीक कंटेंट अपने ही कॉलेज के छात्र अजय नायक को 11,000 रुपये में बेचा, जिसके बाद यह प्रश्न पत्र अन्य छात्रों और सोशल मीडिया ग्रुप्स में वायरल हो गया।
100 से अधिक पुलिस टीमों ने खंगाले डिजिटल साक्ष्य
20 अगस्त की सुबह परीक्षा शुरू होने से ठीक पहले कवर्धा कृषि महाविद्यालय के ई-मेल और वरिष्ठ अधिकारियों को प्रश्न पत्र वायरल होने की सूचना मिली। वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं परीक्षा प्रभारी डॉ. एन. आर. रंगारे की शिकायत पर थाना तेलीबांधा में अपराध क्रमांक 360/26 दर्ज किया गया। पुलिस आयुक्त डॉ. संजीव शुक्ला के निर्देशन, अतिरिक्त पुलिस आयुक्त श्री अमित तुकाराम कांबले के मार्गदर्शन तथा पुलिस उपायुक्त (क्राइम एवं साइबर) श्री स्मृतिक राजनाला एवं पुलिस उपायुक्त (उत्तर जोन) श्री तारकेश्वर पटेल की सतत मॉनिटरिंग में एण्टी क्राईम एण्ड साईबर यूनिट तथा थाना तेलीबांधा पुलिस की संयुक्त कार्यवाही के लिए 100 से अधिक पुलिस टीमों का गठन किया गया। रायपुर, दुर्ग, कबीरधाम और बिलासपुर में ताबड़तोड़ छापेमारी की गई। साइबर विंग ने व्हाट्सएप और सोशल मीडिया टाइमलाइन का सूक्ष्म विश्लेषण करते हुए दुर्ग निवासी अनुज मिंज को हिरासत में लिया, जिससे पूछताछ के बाद पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ।
जब्त सामग्री एवं कानूनी कार्यवाही
पुलिस ने आरोपियों के पास से नगद राशि 11 हजार रूपए, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण 06 मोबाइल फोन, वीडियो रिकॉर्डिंग डिवाइस, केबल तार, मोबाइल कनेक्टर,अन्य सामग्रियों में सुई, सुजा और फेविकोल जब्त किया है। आरोपियों के खिलाफ छत्तीसगढ़ सार्वजनिक परीक्षा अधिनियम, 2008 की धारा 4, 5, 10 तथा बीएनएस (BNS) की धारा 316 के तहत मामला पंजीकृत किया गया है। प्रकरण में 02 अन्य आरोपी फिलहाल फरार हैं, जिनकी तलाश जारी है।
गिरफ्तार आरोपियों की सूची
आरोपियों में योगेश सोनकेसरिया (मुख्य आरोपी - प्रोफेसर) निवासी सिवनी (म.प्र.), हाल पता - चंदखुरी, दुर्ग, अजय नायक (छात्र) निवासी बलौदा बाजार, हाल पता - मीनाक्षी नगर, बोरसी, दुर्ग, त्रिदेव पटेल (छात्र) निवासी महासमुंद, हाल पता - आनंद विहार, दुर्ग, नितिन पाण्डेय (छात्र) निवासी बस्तर, हाल पता - मीनाक्षी नगर, बोरसी, दुर्ग, अनुज मिंज (छात्र) निवासी जशपुर, हाल पता - पोटिया चौक, दुर्ग और आदित्य साहू (छात्र) निवासी बालोद, हाल पता - मीनाक्षी नगर, बोरसी, दुर्ग शामिल हैं।
रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने भारतीय लोक प्रशासन संस्थान, नई दिल्ली की छत्तीसगढ़ क्षेत्रीय शाखा द्वारा प्रकाशित पुस्तक ‘जशपुर : एक परिचय’ का विमोचन किया। उन्होंने प्रकाशन को जशपुर की विशिष्ट पहचान, प्रशासनिक अनुभवों और विकास की संभावनाओं को देश-दुनिया के सामने लाने वाला महत्वपूर्ण दस्तावेज बताया।
पुस्तक में आजादी के बाद जशपुर की प्रशासनिक व्यवस्था में आए बदलाव, सुशासन, सामाजिक-आर्थिक विकास, जनजातीय संस्कृति, प्राकृतिक संपदा और भविष्य की विकास संभावनाओं का समग्र अध्ययन प्रस्तुत किया गया है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि जशपुर की पहाड़ियां, वन, नदियां, जलप्रपात और समृद्ध जनजातीय परंपराएं इसे छत्तीसगढ़ के विशिष्ट अंचलों में स्थान देती हैं। स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखकर विकास और प्रकृति के बीच संतुलन बनाना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि कृषि, वनोपज, पर्यटन, स्थानीय उत्पादों तथा महिला और युवा उद्यमिता के माध्यम से जशपुर की अर्थव्यवस्था को और मजबूत किया जा सकता है। यह अध्ययन प्रशासन को जिले की वास्तविक परिस्थितियों को समझने और भविष्य की विकास प्राथमिकताएं तय करने में उपयोगी आधार प्रदान करेगा।
उल्लेखनीय है कि भारतीय लोक प्रशासन संस्थान के राष्ट्रीय अभियान के तहत प्रत्येक क्षेत्रीय शाखा को संबंधित राज्य के कम से कम एक जिले का व्यापक अध्ययन करने का दायित्व दिया गया है। इसी क्रम में छत्तीसगढ़ की 33 जिलों में से जशपुर का चयन किया गया। वर्ष 1998 में पृथक जिला बनने से पहले जशपुर रायगढ़ जिले की तहसील था। अध्ययन में रायगढ़ जिला गजेटियर, जनगणना 2011, केंद्र एवं राज्य सरकार के प्रकाशनों, विभागीय रिपोर्टों और जिला प्रशासन से प्राप्त आंकड़ों का उपयोग किया गया है।
यह पुस्तक पारंपरिक जिला गजेटियर के बजाय जशपुर के प्रशासन, समाज, संस्कृति, अर्थव्यवस्था और विकास यात्रा का संक्षिप्त समग्र दस्तावेज है। मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि यह पुस्तक प्रशासकों, नीति-निर्माताओं, शोधार्थियों और विद्यार्थियों के लिए महत्वपूर्ण संदर्भ ग्रंथ बनेगी तथा भविष्य में जशपुर पर होने वाले विस्तृत शोध और विकासपरक अध्ययनों का आधार तैयार करेगी।
विमोचन अवसर पर भारतीय लोक प्रशासन संस्थान की छत्तीसगढ़ क्षेत्रीय शाखा रायपुर के चेयरमैन एवं पूर्व मुख्य सचिव सुयोग्य कुमार मिश्रा, वाइस चेयरमैन एवं पूर्व अपर मुख्य सचिव डॉ. इंदिरा मिश्रा तथा वाइस चेयरमैन, पूर्व मुख्य सचिव एवं वर्तमान छत्तीसगढ़ राज्य निर्वाचन आयुक्त श्री अजय सिंह उपस्थित रहे।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
