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March 05, 2026
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धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।

दुर्ग । छत्तीसगढ़ विधानसभा में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए पेश किए गए बजट पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तेज हो गई हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू ने बजट को 'बेहद अस्पष्ट' करार देते हुए सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह बजट किसानों, मजदूरों, युवाओं और शहर के मध्यम वर्ग की उम्मीदों पर खरा नहीं उतरता।

साहू ने कहा, इस बजट में खेतिहर किसानों, मजदूरों और शहरी मध्यम वर्ग के लिए कोई ठोस प्रावधान नहीं है। रोजगार सृजन, शिक्षा, सिंचाई और युवाओं से जुड़े महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर चुप्पी साध ली गई है। उन्होंने आगे जोर देकर कहा कि कई घोषणाएं केवल कागजों तक सीमित हैं और जमीनी स्तर पर इनका कोई असर नजर नहीं दिखाई देता।

पूर्व गृहमंत्री ने सरकार के पुराने वादों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पूर्व में किए वादों जैसे रोजगार सृजन, सरकारी भर्तियां और युवाओं के लिए योजनाओं पर अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गयी है। लोगों की बेरोजगारी बढ़ रही है, लेकिन बजट में इसका कोई समाधान नहीं दिखता।

रायपुर। शौर्यपथ। 

छत्तीसगढ़ विधानसभा में आज प्रस्तुत किया गया राज्य का वित्तीय बजट “डबल इंजन सरकार” की हकीकत दिखाता है, जो राज्य को आगे नहीं ले जा रही, बल्कि पीछे की ओर खींच रही है।

इस बजट में कुल बढ़ोतरी मात्र ₹7,000 करोड़ की है - जिसमें रोज़गार सृजन के लिए कोई ठोस रोडमैप नहीं, इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास के लिए कोई स्पष्ट योजना नहीं, और राजस्व सृजन का कोई प्रभावी माध्यम नहीं है।

राज्य के संविदा कर्मचारियों को पिछले 3-3 महीनों से वेतन नहीं मिला है। पिछले वित्तीय वर्ष में जिन कार्यों को स्वीकृति मिली थी, वे या तो अब तक शुरू ही नहीं हो पाए हैं या फिर अधूरे पड़े हैं। अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल का कार्य,और राजधानी के मेकाहारा अस्पताल में प्रस्तावित इंटीग्रेटेड हॉस्पिटल व कैंसर यूनिट आज भी लंबित हैं।

राजस्व सृजन का हाल यह है कि राज्य सरकार महात्मा गांधी के शहीद दिवस और होली जैसे पावन पर्वों के दिन भी शराब की दुकानें खोलकर व्यापार चला रही है, क्योंकि इस सरकार के पास वही एक राजस्व का साधन रह गया है।

जब UPA सरकार की मनरेगा योजना प्रभावी थी, तब पिछली बार इसके लिए लगभग ₹4,000 करोड़ का आवंटन था, जिसमें से राज्य सरकार ने सिर्फ़ ₹400 करोड़ ही खर्च किए - बाक़ी बड़ा हिस्सा केंद्र सरकार से आया।

अब “VB GRAM G” जैसी योजना के नाम पर राज्य सरकार से ₹1,600 करोड़ खर्च करने की उम्मीद की जा रही है। बजट देखकर साफ़ पता चलता है कि राज्य सरकार इतना खर्च करने में सक्षम नहीं है।

इसका सीधा असर ग्रामीण छत्तीसगढ़ में रोज़गार के अवसरों में कमी और इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास की रफ़्तार पर पड़ेगा।

विकास की गाड़ी रिवर्स में डाल दी गई है और प्रदेश को आर्थिक व मौलिक पतन की ओर धकेला जा रहा है।

केंद्र और राज्य की सरकारें मिलकर छत्तीसगढ़ की जनता को सिर्फ़ झूठे वादों में उलझाने का काम कर रही हैं।

कार्यकारिणी घोषित होते ही कार्यकर्ताओं में निराशा, गुटबाजी के संकेत तेज

दुर्ग।

दुर्ग शहर कांग्रेस की नई कार्यकारिणी की घोषणा के साथ ही संगठन के भीतर उम्मीदों की जगह निराशा की चर्चा तेज हो गई है। चार दशक तक दुर्ग कांग्रेस की कमान वोरा परिवार के प्रभाव में रही। लंबे अंतराल के बाद छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की पसंद के अनुरूप पूर्व महापौर धीरज बाकलीवाल को शहर अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। तब यह माना जा रहा था कि संगठन में नई ऊर्जा और सक्रियता का संचार होगा।

लेकिन अध्यक्ष पद संभालने के लगभग चार माह बाद भी कार्यकर्ताओं के बीच यह धारणा बनती जा रही है कि संगठन में अपेक्षित बदलाव नजर नहीं आ रहा।

वोरा बंगले से बाकलीवाल बंगले तक?

शहर में यह चर्चा आम है कि दुर्ग कांग्रेस की राजनीति केवल “चेहरों के बदलाव” तक सीमित रह गई है। पहले जो प्रभाव एक परिवार विशेष का माना जाता था, अब वही केंद्रीकरण दूसरे खेमे में सिमटता दिखाई दे रहा है। कार्यकारिणी की घोषणा के बाद यह धारणा और मजबूत हुई है कि निर्णय प्रक्रिया कुछ सीमित लोगों तक केंद्रित हो गई है।

कई कार्यकर्ता खुलकर तो नहीं, परंतु निजी बातचीत में यह कहने लगे हैं कि संगठन “रिमोट कंट्रोल” से संचालित होता प्रतीत हो रहा है।

गुटबाजी की आहट और सामाजिक संतुलन पर सवाल

नई कार्यकारिणी में कुछ अनुभवहीन चेहरों को प्रमुख जिम्मेदारी दिए जाने पर भी चर्चा गर्म है। वहीं सतनामी समाज, ताम्रकार समाज , बरई समाज और उड़िया समाज जैसे प्रभावी वर्गों की कथित अनदेखी को लेकर भी असंतोष सामने आ रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दुर्ग जैसे सामाजिक रूप से विविध शहर में संतुलन साधना संगठनात्मक मजबूती की पहली शर्त होती है। यदि सामाजिक प्रतिनिधित्व को लेकर सवाल उठते हैं, तो उसका असर चुनावी समीकरणों पर भी पड़ सकता है।

प्रवक्ताओं की निष्क्रियता भी चर्चा में

कांग्रेस संगठन में प्रवक्ताओं की भूमिका सरकार और निगम की नीतियों के खिलाफ मुखर विपक्ष तैयार करने की होती है। लेकिन वर्तमान संरचना में कुछ निष्क्रिय चेहरों को पुनः स्थान दिए जाने से यह संदेश जा रहा है कि संगठन आक्रामक विपक्ष की भूमिका निभाने के मूड में नहीं है।

सोशल मीडिया और जनसंपर्क के दौर में यह कमी संगठन की राजनीतिक धार को कमजोर कर सकती है।

निगम में विपक्ष की भूमिका पर भी प्रश्नचिन्ह

पूर्व महापौर धीरज बाकलीवाल की पसंद से बने नेता प्रतिपक्ष की सक्रियता को लेकर भी कार्यकर्ताओं में असंतोष है। नगर निगम की बदहाल व्यवस्थाओं, नागरिक समस्याओं और विकास कार्यों में कथित अनियमितताओं के मुद्दों पर अपेक्षित आक्रामकता दिखाई नहीं दी।

राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि जब विपक्ष जनता की आवाज नहीं बन पाता, तो संगठन की विश्वसनीयता स्वतः कमजोर होती है।

क्या पूर्व मुख्यमंत्री के फैसले पर उठेंगे सवाल?

शहर अध्यक्ष की नियुक्ति पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की पसंद के अनुरूप मानी जाती रही है। ऐसे में अब संगठन के भीतर उठती आलोचनाओं को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि खुलकर कोई सामने नहीं आ रहा, परंतु यह संकेत मिल रहे हैं कि यदि स्थिति नहीं बदली तो असंतोष सार्वजनिक रूप ले सकता है।

आने वाले चुनाव की परीक्षा

नई कार्यकारिणी घोषित हो चुकी है। अब असली परीक्षा आने वाले चुनावों में होगी। क्या यह टीम अनुभवहीनता के आरोपों से ऊपर उठकर संगठन को नई दिशा दे पाएगी?

या फिर पद ग्रहण की औपचारिक खुशियों तक ही सीमित रह जाएगी?

दुर्ग कांग्रेस के भीतर उठते ये सवाल केवल संगठनात्मक फेरबदल तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह आने वाले चुनावी परिणामों की भूमिका भी लिख सकते हैं।

राजनीतिक संदेश स्पष्ट है —

यदि संगठन जमीनी कार्यकर्ताओं को साथ लेकर, सामाजिक संतुलन साधते हुए और आक्रामक विपक्ष की भूमिका में नहीं आता, तो “चेहरे बदलने” से ज्यादा कुछ नहीं बदलेगा।

- बैंक खाता वित्त विभाग के इनपैनल सूची में शामिल बैंक का ही हो
- कोटवाली भूमि प्रकरण पर तत्परतापूर्वक कार्यवाही करें
- भूमि आबंटन प्रकरण हेतु एनओसी देना सुनिश्चित करें विभाग
- खादानों का सीमांकन कर सूचना बोर्ड लगायी जाए
- कलेक्टर ने समय-सीमा प्रकरणों की समीक्षा की

दुर्ग / शौर्यपथ / कलेक्टर अभिजीत सिंह ने आज कलेक्टोरेट सभाकक्ष में अधिकारियों की बैठक में विभागवार सममय-सीमा प्रकरणों की गहन समीक्षा की। साथ ही अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिये। उन्?होंने पंचायतों में राजस्व प्रकरण पंजीयन, ई-ऑफिस क्रियान्वयन, ऑफिसों के बैंक खाते, कोतवाली भूमि संबंधी प्रकरण, भूमि आबंटन हेतु एनओसी, खादानों का सीमांकन और भवनों में बनाये गये वॉटर हार्वेस्टिंग का जियो टैंगिंग की जानकारी ली। कलेक्टर ने कहा कि राजस्व प्रकरणों के निराकरण में प्रगति लाने शासन की मंशा के अनुरूप पंचायतों को प्रकरण हस्तांतरित की गई है। उन्होंने सभी जनपद सीईओ को ग्राम पंचायतों में अविवादित, नामांतरण, बंटवारा प्रकरणों के पंजीयन में प्रगति लाने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि सभी पंचायतों में एक सप्ताह के भीतर पंजीयन दर्ज होना चाहिए। जिन पंचायतों में पंजीयन नहीं होने पर संबंधित पंचायत सचिव को कारण बताओ नोटिस जारी किया जाए। कलेक्टर ने कार्यालयों में ई-ऑफिस के माध्यम से फाईल प्रस्तुति पर असंतोष व्यक्त करते हुए अधिकारियों को ई-ऑफिस क्रियान्वयन को गंभीरता से लेने के निर्देश दिये। उन्?होंने विभागों द्वारा संचालित बैंक खाते की जानकारी लेते हुए कहा कि शासन के वित्त विभाग के इनपैनल सूची में शामिल बैंकों में शासकीय कार्यालयों का खाते होना चाहिए।
ऐसे विभाग जिनके खाते वित्त विभाग के इनपैनल सूची में शामिल बैंक में नहीं है, वे तत्काल अपनी खाता बंद कर वित्त विभाग के इनपैनल सूची में शामिल बैंक में खाते खुलवायें। साथ ही बैंक खाते की अपडेट जानकारी जिला कोषालय को उपलब्ध करायें। उन्होंने सभी एसडीएम से संबंधित क्षेत्र में कोटवाली भूमि संबंधी प्रकरण की जानकारी ली और प्रकरणों पर तत्परतापूर्वक कार्यवाही करने के निर्देश दिये। इसी प्रकार विविध निर्माण हेतु भूमि आबंटन के संबंध में संबंधित एसडीएम द्वारा जिन विभागों से एनओसी आमंत्रित किया गया है, ऐसे विभाग शीघ्र एनओसी उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें। कलेक्टर ने स्कूली और आंगनबाड़ी बच्चों के आधार अपडेशन की जानकारी ली। साथ ही जन्म प्रमाण नहीं बनने के कारण आंगनबाड़ी के बच्चे जिनका आधार अपडेशन नहीं हो रहे है, ऐसे बच्चों की परियोजनावार सूची ईडीएम को उपलब्ध कराने महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी को निर्देशित किया।
कलेक्टर ने जिले में अनुसूचित जाति विकास प्राधिकरण के अंतर्गत स्वीकृत निर्माण कार्यों की जानकारी ली और निर्माण कार्य पूर्ण होने पर यूसी/सीसी आदिम जाति कल्याण विभाग को उपलब्ध कराने के निर्देश दिये। इसी प्रकार आदि कर्मयोगी/ धरती आबा योजना अंतर्गत जिले के चिन्हित चार गांव क्रमश: नवागांव (स), सिरनाभांठा, सेमरिया (बी) (धमधा विकासखण्ड) एवं ग्राम अकतई (पाटन विकासखण्ड) में समस्त विभाग शासन की योजनाओं के क्रियान्वयन पर विशेष फोकस करें। कलेक्टर ने खादानों की सीमांकन की जानकारी लेते हुए सभी एसडीएम को संबंधित क्षेत्र के खादानों का सीमांकन कर विवरण सहित सूचनाफलक लगाने के निर्देश दिये। साथ ही अवैध खोदाई की घनमीटर में माप कर पैनाल्टी राशि अधिरोपित किया जाए। कलेक्टर ने भू-जल स्तर को बढ़ावा देने के लिए नये भवनों में वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने पर जोर देते हुए सभी नगरीय निकायों में बनाये गये वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम का जियो टेंगिंग कराने और 31 मार्च के पहले सीईओ जिला पंचायत को रिपोर्टिंग करने निगम अधिकारियों को निर्देशित किया। इसी प्रकार सभी निर्माण कार्य एजेंसी विभागों को भी नवनिर्मित भवनों में बनाये गये वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम का जियो टेंगिंग कराने के निर्देश दिये गये।
बैठक में आगामी जनगणना 2027 के लिए जिले में प्रारंभिक तैयारियों पर भी चर्चा की गई। कलेक्टर सिंह ने पीजी पोर्टल, मुख्यमंत्री अन्य पत्र, कलेक्टर जनदर्शन, पीजीएन (वेब एवं पोस्ट) पोर्टल, ई-समाधान और मुख्यमंत्री जनदर्शन के लंबित प्रकरणों का भी शीघ्र निराकृत करने अधिकारियों को निर्देशित किया। बैठक में वनमंडलाधिकारी दीपेश कपिल, अपर कलेक्टर विरेन्द्र सिंह एवं श्रीमती योगिता देवांगन, जिला पंचायत के सीईओ बी.के. दुबे, नगर निगम भिलाई के आयुक्त राजीव पाण्डेय, नगर निगम दुर्ग के आयुक्त सुमीत अग्रवाल, नगर निगम रिसाली की आयुक्त श्रीमती मोनिका वर्मा, संयुक्त कलेक्टर हरवंश सिंह मिरी एवं श्रीमती शिल्ली थामस, सभी एसडीएम, जनपद सीईओ एवं समस्त विभाग के जिला प्रमुख अधिकारी उपस्थित थे।

  दुर्ग / शौर्यपथ / वनमंडलाधिकारी दुर्ग वनमंडल द्वारा 23 एवं 24 फरवरी 2026 को अवैध काष्ठ परिवहन के विरुद्ध विशेष अभियान चलाते हुए बड़ी कार्यवाही की गई। इस दौरान अवैध लकड़ी परिवहन में संलिप्त चार वाहनों को जब्त किया गया।
प्राप्त गोपनीय सूचना के आधार पर वनमंडलाधिकारी दुर्ग के निर्देशन एवं उप वनमंडलाधिकारी के नेतृत्व में उडऩदस्ता दल दुर्ग वृत्त तथा परिक्षेत्र सहायक भिलाई-03 की संयुक्त टीम ने 23 एवं 24 फरवरी को प्रात: 3 बजे से 6 बजे तक विशेष रात्रि गश्त अभियान चलाया गया। अभियान के दौरान अवैध रूप से काष्ठ परिवहन करते हुए कुल चार वाहन पकड़े गए। वाहन क्रमांक सीजी-10सी 3389 में कहुआ मिश्रित जलाऊ लकड़ी, टाटा 1109, क्रमांक सीजी-08 एल 3736 में कहुआ मिश्रित जलाऊ लकड़ी, टाटा 1109, क्रमांक सीजी-04 जेसी 9290 में कहुआ मिश्रित गोला, टाटा 1109 क्रमांक सीजी-04 एमएफ 6945 में कहुआ मिश्रित जलाऊ लकड़ी, सभी वाहन अवैध काष्ठ से लदे पाए गए, जिन्हें विधिवत जब्त कर पुलगांव एवं पाटन डिपो में जमा कराया गया। उक्त प्रकरणों में संबंधित आरोपियों के विरुद्ध वन अपराध प्रकरण क्रमांक 79/11 दिनांक 23.02.2026 तथा 91/3, 91/4, 91/5 दिनांक 24.02.2026 के तहत मामला दर्ज कर विधि अनुसार वैधानिक कार्रवाई प्रारंभ कर दी गई है।
वनमंडलाधिकारी दुर्ग ने बताया कि वन संपदा की सुरक्षा विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता है। अवैध काष्ठ परिवहन एवं तस्करी के विरुद्ध सतत निगरानी, सघन गश्त एवं कठोर दंडात्मक कार्रवाई निरंतर जारी रहेगी। विभाग इस दिशा में पूर्णत: सजग एवं प्रतिबद्ध है।

  रायपुर/ शौर्यपथ / बजट पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि ज्ञान गति की असफलता के बाद संकल्प का नया जुमला वित्त मंत्री ने फेंका है। यह बजट भी जनता को निराश करने वाला बजट है। वित्त मंत्री हाई स्कूल के बच्चे के समान कल्पनाओं में डूबते नजऱ आये। इनका बजट राज्य की जमीनी हकीकत से कोसों दूर नजर आया। उन्होंने अपने बजट भाषण में बस्तर एवं सरगुजा के विकास के सब्जबाग जो दिखाये, लेकिन इन वादों को पूरा करने बजट प्रावधान निराश करने वाले रहे।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि पिछले बजट में 20 हजार शिक्षकों की भर्ती की घोषणा वित्त मंत्री ने किया था, इस बजट में वे यह नहीं बताये कि उनमें से कितने की भर्ती हुई? भाजपा ने विधानसभा चुनाव में मोदी की गारंटी के पांच साल में 1 लाख युवाओं को नौकरी देने का वादा किया था, लेकिन इस बजट में नई नौकरियों के लिए वित्त मंत्री ने कुछ नहीं किया। न नये स्कूल खोलने की बात है, न नये महाविद्यालय खोलने की बात है और न ही कौशल उन्नयन के लिए कुछ है। यही नहीं न नये सिंचाई के बांध बनाने के लिए कुछ है और न ही महिला स्व-सहायता समूहों के रोजगार के लिए कुछ है, न उद्योगों के विकास के लिए कुछ है। रमन सरकार के 15 साल से लेकर साय सरकार के तीन बजट में भाजपा अभी तक केवल मेट्रो ट्रेन का सर्वे ही करवा रही है।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि युवाओं को बेरोजगारी भत्ता, छात्राओं को मुफ्त यातायात के वादों पर भी वित्त मंत्री ने कुछ नहीं किया है। उद्योगों के लिए लैंड बैक तैयार करने की घोषणा कर वित्त मंत्री ने किसानों की जमीने जबरिया छीनने की मंशा को स्पष्ट किया है। घरेलू बिजली उपभोक्ताओं के लिए मात्र 80 करोड़ का प्रावधान बताता है कि साय सरकार 200 यूनिट मुफ्त बिजली योजना भी बंद करने जा रही है। डीएड अभ्यर्थियों की भर्ती, आंगनबाड़ी बहनों और रसोईया संघ के लिए भी बजट में कुछ नहीं है। अनियमित कर्मचारियों की नियमित करने के लिए बजट में कुछ नहीं है। 56 हजार शिक्षकों के खाली पदों को भर्ती करने के लिए बजट में कुछ नहीं है। भर्ती परीक्षा की एजेंसी को मजबूत करने की बात किया गया लेकिन 1 वर्षों में कितनी नौकरियां देंगे इसमें कुछ नहीं है।

  भिलाई / शौर्यपथ / आज शांति नगर के वरिष्ठ नागरिकों ने वरिष्ठ कांग्रेसी नेता श्री बृजमोहन सिंह एवं पार्षद अभिषेक मिश्रा के नेतृत्व में नगर निगम भिलाई के महापौर एवं आयुक्त महोदय से मुलाकात कर शांति नगर दशहरा मैदान के संबंध में नागरिकों की भावनाओं से अवगत कराया।
प्रतिनिधिमंडल ने स्पष्ट रूप से मांग रखी कि नगर निगम द्वारा जारी किया गया टेंडर तत्काल निरस्त किया जाए। इस ग्राउंड से हजारों खेल प्रेमियों की खेल भावना जुड़ी हुई है, इसलिए इसे किसी भी प्रकार की टेंडर प्रक्रिया के अंतर्गत न लाया जाए।
नागरिकों की ओर से यह मांग रखी गई कि मैदान को टेंडर के माध्यम से नहीं, बल्कि रुचि की अभिव्यक्ति (श्व&श्चह्म्द्गह्यह्यद्बशठ्ठ शद्घ ढ्ढठ्ठह्लद्गह्म्द्गह्यह्ल) के माध्यम से केवल रख-रखाव हेतु शांति नगर की किसी स्थानीय समिति/संस्था को सौंपा जाए, ताकि मैदान की नियमित देखरेख, घास में समय पर पानी, लाइटों की निगरानी, गड्ढों की मरम्मत एवं असामाजिक गतिविधियों पर रोक सुनिश्चित की जा सके। वर्तमान में कई बाहरी लोग टूर्नामेंट आयोजित कर एंट्री फीस लेते हैं, परंतु मैदान के रख-रखाव में सहयोग नहीं करते, जिससे मैदान को नुकसान पहुंचता है।
प्रतिनिधिमंडल ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि टेंडर प्रक्रिया समाप्त नहीं की जाती है, तो शांति नगर के सैकड़ों खेल प्रेमी एवं नागरिक नगर निगम के विरुद्ध आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे और यह विरोध तब तक जारी रहेगा, जब तक टेंडर प्रक्रिया पूरी तरह समाप्त नहीं कर दी जाती।
महापौर महोदय ने चर्चा के दौरान स्पष्ट किया कि मैदान को रुचि की अभिव्यक्ति के अनुसार ही दिया जाएगा तथा वर्तमान टेंडर प्रक्रिया में आवश्यक बदलाव किए जाएंगे। उन्होंने आश्वस्त किया कि नियम एवं शर्तें नागरिकों के सुझावों के अनुरूप निर्धारित की जाएंगी। महापौर महोदय ने यह भी कहा कि नगर निगम का उद्देश्य भी मैदान को सुरक्षित एवं संरक्षित रखना है, इसी भावना से प्रक्रिया प्रारंभ की गई थी, जिसे अब नागरिकों की मांग के अनुसार संशोधित किया जाएगा।
यह पूरी पहल शांति नगर के नागरिकों की मांग एवं भावनाओं को ध्यान में रखते हुए की गई है।
इस अवसर पर प्रमुख रूप से बृजमोहन सिंह,अभिषेक मिश्रा ,राजेश शर्माबलदेव सिंह धारीवाल,अमर सिंह ,राधे कांत मिश्रा ,नवतेज सोहेल,केदार बंसल,गिरीश खापर्डे,महेंद्र यादव ,संजय उपाध्याय ,सत्यनारायण,अजय त्रिपाठी,भारत सिंह,चंद्रभूषण झा,मुरलीपोद्दार ,आशीष त्रिपाठीउपस्थित थे

// सड़क बाधित करने वालों पर होगी जब्ती व जुर्माना, महापौर अलका बाघमार// अग्रसेन चौक से पुराना बस स्टैंड तक 3 घंटे चला निरीक्षण अभियान,// व्यापार सड़क पर नहीं, निर्धारित…

  रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि राज्य सरकार द्वारा प्रस्तुत वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट प्रदेश के सर्वांगीण विकास, अंत्योदय और आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़ के निर्माण के संकल्प को साकार करने वाला बजट है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार का पहला बजट "ज्ञान" और दूसरा बजट "गति" की थीम पर आधारित था, जबकि इस वर्ष का बजट "संकल्प" की भावना को केंद्र में रखकर तैयार किया गया है, जो विकसित भारत-विकसित छत्तीसगढ़ की दिशा में निर्णायक कदम सिद्ध होगा।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि इस बजट में समावेशी विकास, अधोसंरचना सुदृढ़ीकरण, निवेश संवर्धन, कुशल मानव संसाधन निर्माण, लाइवलीहुड, अंत्योदय तथा "पॉलिसी से परिणाम" तक की स्पष्ट रणनीति को प्राथमिकता दी गई है। यह बजट यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के विकसित भारत 2047 के विजन के अनुरूप प्रदेश की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार मिशन मोड में कार्य करने के लिए पांच मुख्यमंत्री मिशन प्रारंभ कर रही है, जिनमें मुख्यमंत्री अधोसंरचना मिशन, मुख्यमंत्री एआई मिशन, मुख्यमंत्री पर्यटन विकास मिशन, मुख्यमंत्री स्टार्टअप मिशन तथा मुख्यमंत्री खेल उत्कर्ष मिशन शामिल हैं। इन मिशनों के माध्यम से प्रदेश के विकास को नई दिशा, नई धार और नई गति मिलेगी।
उन्होंने कहा कि शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए स्कूल शिक्षा के लिए कुल बजट का 13.5 प्रतिशत प्रावधान किया गया है, जो सर्वाधिक है। बस्तर के अबूझमाड़ और जगरगुंडा में दो एजुकेशन सिटी स्थापित की जाएंगी, जिससे दूरस्थ क्षेत्रों के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध होगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि शासकीय अधिकारी-कर्मचारियों के लिए कैशलेस उपचार सुविधा हेतु भी बजट में प्रावधान किया गया है। औद्योगिक विकास को गति देने के लिए 23 नवीन औद्योगिक पार्कों की स्थापना हेतु 250 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं। वहीं शहरी क्षेत्रों के विकास के लिए मुख्यमंत्री आदर्श शहर समृद्धि योजना में 200 करोड़ रुपए तथा भूमि विकास बैंक के लिए भी 200 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है।
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ को धान का कटोरा कहा जाता है और कृषि क्षेत्र राज्य की अर्थव्यवस्था की आधारशिला है। इसी को ध्यान में रखते हुए कृषि क्षेत्र के लिए 13 हजार 500 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। किसानों को 3100 रुपए प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी के अंतर की राशि का भुगतान एकमुश्त करने की व्यवस्था जारी रहेगी और इसके लिए भी बजट में प्रावधान किया गया है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बस्तर और सरगुजा क्षेत्र का विकास सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इन क्षेत्रों में खाद्य, कृषि और उससे जुड़े उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए 100 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। साथ ही बकरी पालन, सूअर पालन और मधुमक्खी पालन जैसे गतिविधियों को बढ़ावा देकर स्थानीय लोगों की आय बढ़ाने के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं।
उन्होंने बताया कि इंद्रावती नदी पर देवरगांव और मटनार बैराज निर्माण के लिए 2000 करोड़ रुपए से अधिक का प्रावधान किया गया है, जिससे बस्तर क्षेत्र में सिंचाई क्षमता का विस्तार होगा और किसानों को बड़ा लाभ मिलेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि माओवादी उन्मूलन में बस्तर फाइटर्स की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। उनके योगदान को ध्यान में रखते हुए बस्तर फाइटर्स में 1500 नई भर्तियों का प्रावधान किया गया है। पर्यटन और स्थानीय रोजगार को बढ़ावा देने के लिए होमस्टे योजना हेतु 10 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है।
उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य और कनेक्टिविटी क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं, जिनमें कुनकुरी, मनेन्द्रगढ़, कबीरधाम, जांजगीर-चांपा एवं दंतेवाड़ा में मेडिकल कॉलेज संचालन, जगदलपुर-अंबिकापुर हवाई सेवाओं का विस्तार, अंदरूनी क्षेत्रों में मुख्यमंत्री बस सेवा तथा बस्तर एवं सरगुजा ओलंपिक्स के आयोजन शामिल हैं।
मुख्यमंत्री ने बताया कि युवाओं के लिए भर्ती प्रक्रियाओं को तेज करने हेतु व्यापम की दक्षता बढ़ाने के प्रावधान किए गए हैं। साथ ही युवाओं के शैक्षणिक भ्रमण के लिए छत्तीसगढ़ युवा दर्शन योजना प्रारंभ की जाएगी तथा लखपति दीदियों के भ्रमण कार्यक्रम के लिए भी बजट में प्रावधान किया गया है।
मुख्यमंत्री साय ने इस बजट को प्रदेशवासियों की आकांक्षाओं का प्रतिबिंब बताते हुए वित्त मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी एवं उनकी पूरी टीम को बधाई दी और कहा कि यह बजट प्रदेश को समृद्धि की नई ऊंचाइयों तक ले जाने में मील का पत्थर साबित होगा।

नई दिल्ली / 
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा केरल का आधिकारिक नाम बदलकर 'केरलमÓ किए जाने के ऐतिहासिक निर्णय पर केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने राज्य के लोगों को हार्दिक बधाई दी है। यह फैसला केरल के लोगों की लंबे समय से चली आ रही सांस्कृतिक और भाषाई मांग को पूरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण और सम्मानजनक कदम माना जा रहा है।
राज्य की विरासत को उसकी असली पहचान
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ङ्ग पर साझा किए गए अपने संदेश में श्री अमित शाह ने कहा कि 'केरलमÓ नाम राज्य की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और भाषाई विरासत को उसकी पूरी सच्चाई के साथ प्रतिबिंबित करता है। उन्होंने कहा कि यह नाम न केवल राज्य की प्राचीन पहचान को सहेजता है, बल्कि उसके गौरव और आत्मसम्मान को भी बनाए रखेगा।
लंबे समय की मांग को मिला संवैधानिक सम्मान
श्री शाह ने कहा कि केंद्र सरकार का यह निर्णय केरलवासियों की उस भावना का सम्मान है, जो वर्षों से अपनी मातृभाषा और परंपरा के अनुरूप राज्य के नाम को मान्यता दिलाने की मांग कर रहे थे।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कदम भारत की विविधता में एकता के सिद्धांत को और अधिक सशक्त करता है।
मोदी सरकार की सांस्कृतिक संवेदनशीलता का प्रतीक
राजनीतिक और सांस्कृतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह निर्णय मोदी सरकार की उस नीति को दर्शाता है, जिसमें स्थानीय पहचान, भाषा और परंपरा को राष्ट्रीय सम्मान देने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इससे पहले भी केंद्र सरकार ने ऐतिहासिक और सांस्कृतिक नामों को पुनस्र्थापित करने की दिशा में कई अहम फैसले किए हैं।
केरलम: नाम नहीं, आत्मा की पहचान
'केरलमÓ शब्द मलयालम भाषा और राज्य की सभ्यता से गहराई से जुड़ा हुआ है। यह नाम राज्य के इतिहास, समुद्री व्यापार, आयुर्वेद, साहित्य और सामाजिक चेतना की पहचान को और अधिक प्रामाणिक रूप में प्रस्तुत करता है।

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