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June 01, 2026
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शौर्यपथ / कपूर का इस्तेमाल खास तौर से हवन पूजन और कई ब्यूटी उत्पादों में खुशबू के साथ ही ठंडाई के लिए किया जाता है। इस सब के अलावा कपूर और इसके तेल के कुछ चमत्कारिक लाभ भी हैं, जो कमाल के हैं। जानने के लिए जरूर पढ़ें, कपूर के यह
* सांस लेने में तकलीफ होने पर कपूर का इस्तेमाल किया जाता है इससे सांस लेने में आ रही समस्या से राहत मिलती है।

* त्वचा की समस्याओं में कपूर का इस्तेमाल असरकारी होता है। चेहरे पर होने वाले पिंपल्स या फिर त्वचा संबंधी कोई अन्य समस्या होने पर जरा-सा कपूर, नारियल तेल में मिलाकर चेहरे पर मसाज करना असरदार है।
* शरीर के किसी भाग पर होने वाली खरोंच, घाव या फिर जल जाने पर कपूर लगाना जलन को कम करता है। कपूर को पानी में घोलकर लगाने से घाव की जलन कम होगी और ठंडक मिलेगी।

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अवसाद या तनाव होने पर सिर पर कपूर के तेल की मालिश करना लाभदायक होगा। इससे आपको मानसिक तौर पर राहत मिलेगी और तनाव धीरे-धीरे कम होने लगेगा। सिरदर्द में भी यह तरीका कारगर है।

* बालों के झड़ने पर कपूर के तेल को नारियल तेल में मिलाकर लगाने से बालों का झड़ना धी-धीरे कम हो जाता है। सिर में रूसी होने पर भी कपूर का तेल लगाने से फायदा होता है।

* फटी एड़ि‍यों के उपचार के लिए कपूर बेहतरीन दवा है। गरम पानी में कपूर मिलाकर, इस पानी में पैर डालकर बैठने से फटी एड़ि‍यों में आराम मिलेगा।
कुछ ही दिनों में एड़ि‍यों का फटना कम हो जाएगा।

* जोड़ों में दर्द या शारीरिक समस्या होने पर कपूर के तेल की मालिश करने से आराम मिलता है। यह गठि‍या के रोगियों के लिए भी फायदेमंद होता है। मांसपेशि‍यों के दर्द से राहत देने में यह बेहतरीन है।
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सर्दी जुकाम और फेफड़े संबंधी रोगों में कपूर सूंघने से फायदा होता है। विक्स, बाम जैसे कई उत्पादों को बनाने में कपूर का प्रयोग किया जाता है।

सेहत /शौर्यपथ / गर्मी के दिनों में खास तौर से सत्तू खाना सेहत के लिए फायदेमंद है। यूपी व बिहार में सत्तू काफी प्रसिद्ध है जहां इसके स्वादिष्ट व्यंजन भी बनाए जाते हैं। सत्तू को इतना पसंद किए जाने का कारण सिर्फ इसका स्वाद ही नहीं बल्कि सेहत से जुड़े यह अनमोल फायदे भी हैं। जानिए सत्तू के यह बेमिसाल फायदे -
1 गर्मी के दिनों में सत्तू का सेवन करना आपको गर्मी के दुष्प्रभाव एवं लू की चपेट से बचाता है। सत्तू का प्रयोग करने से लू लगने का खतरा कम होता है क्योंकि यह शरीर में ठंडक पैदा करता है।
2 अगर आपको बार-बार भूख लगती है या फिर आप लंबे समय तक भूखे नहीं रह सकते, तो सत्तू आपके लिए लाभदायक है। इसे खाने या फिर इसका शर्बत पीने के बाद लंबे समय तक आपको भूख का एहसास नहीं होगा।
3 सत्तू प्रोटीन का बढ़िया स्त्रोत है और य‍ह पेट की गड़बड़ियों को भी ठीक करता है। इसे खाने से लिवर मजबूत होता है और एसिडिटी की समस्या दूर होती है और आसानी से पचने के कारण कब्जियत भी नहीं होती।
4 जौ और चने से बनाया गया सत्तू डाइबिटीज में फायदेमंद है। अगर आप डाइबिटीज के मरीज हैं तो रोजाना इस सत्तू का प्रयोग आपके लिए फायदेमंद है। इसे पानी में घोलकर शर्बत के रूप में या फिर नमकीन बनाकर भी लिया जा सकता है।
5 शरीर में ऊर्जा की कमी होने पर सत्तू तुरंत ऊर्जा देने का कार्य करता है। यह कमजोरी को दूर कर आपको ऊर्जावान बनाए रखने में कारगर है। इसमें कई तरी के पोषक तत्व भी मौजूद होते हैं जो पोषण देते हैं।
6.यह शरीर के जलन को शांत करता है। इसे पानी में घोलकर पीने से शरीर में पानी की कमी दूर होती है। साथ ही बहुत ज्यादा प्यास नहीं लगती।
7,सत्तू का सेवन गले के रोग, उल्टी, आंखों के रोग कई अन्य रोगों में फायदेमंद होता है।
8.इसमें मौजूद प्रोटीन मांशपेसियों को मजबूती प्रदान करता है।
9. मोटापे से परेशान लोगों के लिए सत्तू एक रामबाण उपाय है। जौ से बना सत्तू प्रतिदिन खाने से पाचन तंत्र भी सुचारु रूप से कार्य करता है और मोटापा कम होकर आप छरहरी काया पा सकते हैं।
10. ब्लडप्रेशर के मरीजों के लिए सत्तू का सेवन काफी लाभदायक होता है। इसके लिए सत्तू में नींबू, नमक, जीरा और पानी मिलाकर सेवन करना चाहिए।

शौर्यपथ /आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।।
जाके बल से गिरिवर कांपे। रोग दोष जाके निकट न झांके।।
अंजनि पुत्र महाबलदायी। संतान के प्रभु सदा सहाई।
दे बीरा रघुनाथ पठाए। लंका जारी सिया सुध लाए।
लंका सो कोट समुद्र सी खाई। जात पवनसुत बार न लाई।
लंका जारी असुर संहारे। सियारामजी के काज संवारे।
लक्ष्मण मूर्छित पड़े सकारे। आणि संजीवन प्राण उबारे।
पैठी पताल तोरि जमकारे। अहिरावण की भुजा उखाड़े।
बाएं भुजा असुर दल मारे। दाहिने भुजा संतजन तारे।
सुर-नर-मुनि जन आरती उतारे। जै जै जै हनुमान उचारे।
कंचन थार कपूर लौ छाई। आरती करत अंजना माई।
लंकविध्वंस कीन्ह रघुराई। तुलसीदास प्रभु कीरति गाई।
जो हनुमानजी की आरती गावै। बसी बैकुंठ परमपद पावै।
आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।

धर्म संसार /शौर्यपथ / हनुमानजी को जब लंका जाना था तब जामवंतजी ने उन्हें उनकी शक्तियों से परिचित कराया और वे फिर वायु मार्ग से लंका के लिए निकले। लंका के मार्ग और लंका में उन्होंने कई पराक्रम भरे कार्य किए। आओ जानते हैं उन्हीं में से 9 प्रमुख कार्य।
1. समुद्र लांघना और सुरसा से सामना - हनुमानजी ही जानते थे कि समुद्र को पार करते वक्त बाधाएं आएगी। सबसे पहले समुद्र पार करते समय रास्ते में उनका सामना सुरसा नाम की नागमाता से हुआ जिसने राक्षसी का रूप धारण कर रखा था। सुरसा ने हनुमानजी को रोका और उन्हें खा जाने को कहा। समझाने पर जब वह नहीं मानी, तब हनुमान ने कहा कि अच्छा ठीक है मुझे खा लो। जैसे ही सुरसा उन्हें निगलने के लिए मुंह फैलाने लगी हनुमानजी भी अपने शरीर को बढ़ाने लगे। जैसे-जैसे सुरसा अपना मुंह बढ़ाती जाती, वैसे-वैसे हनुमानजी भी शरीर बढ़ाते जाते। बाद में हनुमान ने अचानक ही अपना शरीर बहुत छोटा कर लिया और सुरसा के मुंह में प्रवेश करके तुरंत ही बाहर निकल आए। हनुमानजी की बुद्धिमानी से सुरसा ने प्रसन्न होकर उनको आशीर्वाद दिया तथा उनकी सफलता की कामना की।
2. राक्षसी माया का वध - समुद्र में एक राक्षसी रहती थी। वह माया करके आकाश में उड़ते हुए पक्षियों को पकड़ लेती थी। आकाश में जो जीव-जंतु उड़ा करते थे, वह जल में उनकी परछाईं देखकर अपनी माया से उनको निगल जाती थी। हनुमानजी ने उसका छल जानकर उसका वध कर दिया।
3. विभीषण से मुलाकात - जब हनुमानजी सीता माता को ढूंढते-ढूंढते विभीषण के महल में चले जाते हैं। विभीषण के महल पर वे राम का चिह्न अंकित देखकर प्रसन्न हो जाते हैं। वहां उनकी मुलाकात विभीषण से होती है। विभीषण उनसे उनका परिचय पूछते हैं और वे खुद को रघुनाथ का भक्त बताते हैं। हनुमानजी जान जाते हैं कि यह काम का व्यक्ति है। वे विभीषण को श्रीराम से मिलाने का वचन दे देते हैं।
4. सीता माता का शोक निवारण - लंका में घुसते ही उनका सामना लंकिनी और अन्य राक्षसों से हुआ जिनका वध करके वे आगे बढ़े। खोज करते हुए वे अशोक वाटिका पहुंच गए। हनुमानजी ने अशोक वाटिका में सीता माता से मुलाकात की और उन्हें राम की अंगूठी देकर उनके शोक का निवारण किया।
5. अशोक वाटिका को उजाड़ना - सीता माता से आज्ञा पाकर हनुमानजी बाग में घुस गए और फल खाने लगे। उन्होंने अशोक वाटिका के बहुत से फल खाए और वृक्षों को तोड़ने लगे। वहां बहुत से राक्षस रखवाले थे। उनमें से कुछ को मार डाला और कुछ ने अपनी जान बचाकर रावण के समक्ष उपस्थित होकर उत्पाती वानर की खबर दी।
6. अक्षय कुमार का वध - फिर रावण ने अपने पुत्र अक्षय कुमार को भेजा। वह असंख्य श्रेष्ठ योद्धाओं को साथ लेकर हनुमानजी को मारने चला। उसे आते देखकर हनुमानजी ने एक वृक्ष हाथ में लेकर ललकारा और उन्होंने अक्षय कुमार सहित सभी को मारकर बड़े जोर से गर्जना की।
7. मेघनाद से युद्ध - पुत्र अक्षय का वध हो गया, यह सुनकर रावण क्रोधित हो उठा और उसने अपने बलवान पुत्र मेघनाद को भेजा। उससे कहा कि उस दुष्ट को मारना नहीं, उसे बांध लाना। उस बंदर को देखा जाए कि कहां का है। हनुमानजी ने देखा कि अबकी बार भयानक योद्धा आया है। मेघनाद तुरंत ही समझ गया कि यह कोई मामूली वानर नहीं है। युद्ध में हनुमानजी मूर्छित हो गए हैं, मेघनाद उनको नागपाश से बांधकर ले गया। रावण क्रोधित होकर कहता है- तूने किस अपराध से राक्षसों को मारा? क्या तुझे मेरी शक्ति और महिमा के बारे में पता नहीं है? तब हनुमानजी राम की महिमा का वर्णन करते हैं और उसे अपनी गलती मानकर राम की शरण में जाने की शिक्षा देते हैं।
8. लंकादहन - राम की महिमा सुनकर रावण क्रोधित होकर कहता है कि जिस पूंछ के बल पर यह बैठा है, उसकी इस पूंछ में आग लगा दी जाए। जब बिना पूंछ का यह बंदर अपने प्रभु के पास जाएगा तो प्रभु भी यहां आने की हिम्मत नहीं करेगा। उन्होंने अपना विशालकाय रूप धारण किया और जोर से हंसते हुए रावण के महल को जलाने लगे। देखते ही देखते लंका जलने लगी और लंकावासी भयभीत हो गए।एक विभीषण का घर नहीं जलाया। सारी लंका जलाने के बाद वे समुद्र में कूद पड़े और लौट आए।
9. राम को सीता की खबर देना - पूंछ बुझाकर फिर छोटा-सा रूप धारण कर हनुमानजी माता सीता के सामने हाथ जोड़कर जा खड़े हुए और उन्होंने उनकी चूड़ामणि निशानी ली और समुद्र लांघकर वे इस पार आए। हनुमानजी ने राम के समक्ष उपस्थित होकर कहा- नाथ! चलते समय उन्होंने मुझे चूड़ामणि उतारकर दी। श्रीरघुनाथजी ने उसे लेकर हनुमानजी को हृदय से लगा लिया

आस्था /शौर्यपथ / भगवान हनुमान को महादेव का 11वां अवतार भी माना जाता है। हनुमान जी की पूजा करने और व्रत रखने से हनुमान जी का आशीष प्राप्त होता है और जीवन में किसी प्रकार का संकट नहीं आता है, इसलिए हनुमान जी को संकटमोचक भी कहा गया है।
संपूर्ण भारत में हनुमान जयंती बहुत ही भक्तिभाव के साथ मनाई जाती है।
27 अप्रैल को मनाई जाएगी हनुमान जयंती
साल 2021 में वर्ष हनुमान जयंती 27 अप्रैल 2021 को मनाई जाएगी। हनुमान जयंती हर वर्ष चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को मनाई जाती है और देश में कुछ स्थानों पर हनुमान जयंती कार्तिक मास में भी मनाई जाती है।
ज्योतिष विज्ञान के मुताबिक जिन लोगों की कुंडली में शनि अशुभ स्थिति में हैं या फिर शनि की साढ़ेसाती चल रही है, उन लोगों को हनुमान जी की पूजा विधि पूर्वक करना चाहिए। हनुमान जी को मंगलकारी कहा गया है, इसलिए इनकी पूजा जीवन में मंगल लेकर आती हैं।
इस बार हनुमान जयंती का त्योहार 27 अप्रैल मंगलवार को मनाया जा रहा है। मंगलवार का दिन हनुमान जी का ही दिन होता है और ऊपर से हनुमान जयंती का त्योहार यानी भक्तों के पास बजरंगबली को खुश करने का दोहरा मौका है। इसके अलावा इस दिन रात में 8 बजे तक सिद्धि योग रहने वाला है और बेहद शुभ स्वाति नक्षत्र भी। किसी भी तरह की सिद्धि प्राप्त करने और ईश्वर का नाम जपने के लिए सिद्धि योग बेहद उत्तम माना जाता है।
जानिए पूजा के शुभ मुहूर्त
26 अप्रैल 2021: दोपहर 12।44 मिनट पर पूर्णिमा तिथि आरंभ
27 अप्रैल 2021: रात्रि 9।01 मिनट पर पूर्णिमा तिथि का समापन
हनुमान जयंती पूजा शुभ मुहूर्त-
ब्रह्म मुहूर्त- प्रात: 04:06 से 04:50 तक।
अभिजीत मुहूर्त- 11:40 से 12:33 तक।
अमृत काल- 12:26 से 01:50 तक।
विजय मुहूर्त- 02:17 से 03:09 तक।
गोधूलि मुहूर्त- 06:26 से 06:49 तक।
त्रिपुष्कर योग- 05:14
से 05:33 तक।
निशिता मुहूर्त- रात्रि 11:44 से 12:28 तक।
हनुमान जी का जन्म सूर्योदय के समय हुआ था, इसलिए हनुमान जयंती के दिन ब्रह्म मुहूर्त में पूजा करना अच्छा माना गया है
- हनुमान जी की प्रिय चीजों का भोग लगाना चाहिए
- हनुमान जयंती पर हनुमान चालीसा, सुंदरकांड और हनुमान आरती का पाठ करना शुभ माना जाता है।

सेहत /शौर्यपथ / हेल्दी डाइट, वर्कआउट और समय पर सोना कुछ ऐसी चीजें हैं जो आपकी इम्युनिटी को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। दिनचर्या के अलावा कुछ ऐसी चीजें भी हैं, जो आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाकर आपको बीमारियों से बचाती है. आज हम आपको ऐसा कारगर उपाय बता रहे हैं, जिससे आप फ्लू को 4-5 दिनों में आसानी से ठीक कर सकते हैं, वहीं इससे आपकी इम्युनिटी भी मजबूत होगी।
गुणों से भरी अजवाइन
अजवाइन में बहुत से पोषक तत्व मौजूद होते हैं जो शरीर को हेल्दी और फिट रखने में मदद करता है। अजवाइन में एंटी-इंफ्लेमेट्री, एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-फंगल गुण होता है, जो सर्दी-जुकाम के लिए फायदेमंद है।
सामग्री-
1/2 चम्मच अजवाइन के बीज
5 तुलसी के पत्ते
1/2 चम्मच काली मिर्च पाउडर
1 बड़ा चम्मच शहद
ऐसे बनाएं-
एक गहरा पैन लें और उसमें 1 गिलास पानी, अजवाइन, काली मिर्च और तुलसी के पत्ते डालें। पानी को 5 मिनट तक उबलने दें। गैस को बंद करें। इसमें शहद मिलाने से पहले मिश्रण को थोड़ी देर के लिए ठंडा होने दें। काढ़ा को अच्छी तरह से मिलाएं और इसे पी लें।
इसके फायदे-
अजवाइन गुणों से भरी हुई है। इसमें जब काली मिर्च, तुलसी, शहद डालकर काढ़ा बनाया जाता है, तो इसके गुण और भी बढ़ जाते हैं। फ्लू से छुटकारा दिलाने के साथ अजवाइन का काढ़ा इन परेशानियों से भी मुक्ति दिलाता है।
-पेट की बीमारियों से छुटकारा।
-सर्दी-जुकाम और खांसी में राहत।
-मसूड़ों की सूजन।
-पीरियड्स के दर्द से छुटकारा।
-मुंहासों से छुटकारा।


इन बातों का रखें ध्यान-
एक दिन में बहुत ज्यादा अजवाइन सेहत के लिए हानिकारक हो सकती है, इसलिए इस काढ़े को दिन में सिर्फ एक ही बार पिएं. वहीं, स्तनपान कराने वाली मां और गर्भवती को इस काढ़े का सेवन नहीं करना चाहिए।

सेहत /शौर्यपथ / कोरोना वायरस महामारी ने सभी का रूटीन बदल दिया है। आज हर व्यक्ति बीमारी से बचाव के लिए पहले से ज्यादा सावधानी बरत रहा है। सुरक्षा की बात करें, तो खान-पान के साथ खाना बनाते समय भी कुछ बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। आइए, जानते हैं खाना बनाते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए-
.-ऐसे में सिर्फ घर में रहना ही काफी नहीं है बल्कि घर की साफ-साफाई भी जरूरी है जिससे आप कोरोना के खतरे से बचे रहें।
-किचन में खाना बनाने से पहले इसकी सतह को साफ कर लें।
-खाना बनाने से पहले इस्तेमाल करने वाले हर बर्तन को एक बार धो लें।
-खाना बनाते समय बीच-बीच में हाथ धोते रहें।
-कच्ची सब्जियों का सेवन करने से बचें।
-चॉपिंग बोर्ड भी अच्छे से साफ करें।
-नॉन वेज बना रहे हैं, तो इसे अच्छी तरह से धोकर उबालकर फिर पकाएं।
-फ्रिज का रखा हुआ खाना न खाएं।
-पूरी तरह से पका हुआ खाना ही खाएं।
-सब्जियों को अच्छी तरह से गर्म पानी में धोकर तब इस्तेमाल करें।
-बर्तनों को अच्छी तरह से धोएं।
-किचन का कूड़ा डस्टबिन में ही डालें।
-खाना बनाने के बाद किचन की सतह को अच्छी तरह से साफ कर दें।

शिक्षा/ शौर्यपथ /आचार्य चाणक्य महान राजनीतिज्ञ, कूटनीतिज्ञ व महान शिक्षाविद थे। आचार्य चाणक्य ने कई शास्त्र लिखें जिसमें से नीति शास्त्र लोगों के बीच बहुत लोकप्रिय है। नीति शास्त्र में आचार्य चाणक्य ने जीवन से जुड़े कई पहलुओं का वर्णन किया है। चाणक्य ने नीति शास्त्र में कई बातों का जिक्र किया है जो व्यक्ति को जीवन में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती हैं। कहा जाता है कि आचार्य चाणक्य की इन नीतियों को अपनाना मुश्किल होता है, लेकिन जिसने भी अपनाया उसे सफल होने से कोई नहीं रोक सका। चाणक्य ने एक नीति में बताया है कि आखिर कौन-सी तीन चीजें व्यक्ति को कभी हारने नहीं देती हैं। आप भी जानिए-
1. हारे हुए व्यक्ति की सलाह- चाणक्य कहते हैं कि असफलता पाने वाले व्यक्ति की बात को ध्यान से सुनना व समझना चाहिए। नीति शास्त्र के अनुसार, एक हारे हुए व्यक्ति को अपने क्षेत्र में अच्छा अनुभव होता है। उसने क्या गलतियां की थीं और क्या सबक लेकर आगे बढ़ा जा सकता है। हारने वाला व्यक्ति अपनी हर बात को बारीकी से बता सकता है।
2. सफल व्यक्ति का अनुभव- चाणक्य कहते हैं कि सफलता प्राप्त करने वाले हर व्यक्ति की बातों को ध्यान से सुनना चाहिए। यह आपको जीवन में आगे बढ़ने का हौसला देती हैं। अगर जीवन में आगे बढ़ना है और सफल होना है तो सफलता पाने वाले हर व्यक्ति के अनुभव को सुनना व समझना चाहिए। चाणक्य कहते हैं कि सफल व्यक्ति का अनुभव जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।
3. स्वयं का दिमाग- चाणक्य कहते हैं कि जीवन में आगे बढ़ने व सफलता पाने के लिए सही फैसले लेना बेहद जरूरी होता है। व्यक्ति सही फैसले तभी ले सकता है जब वह खुद के दिमाग का इस्तेमाल करेगा। चाणक्य का मानना है कि व्यक्ति अपनी बुद्धि के बल पर हर क्षेत्र में सफलता हासिल कर सकता है। किन बातों का सफलता पाने के लिए पालन करना है और किन चीजों से दूर रहना है, यह व्यक्ति खुद के दिमाग से ही फैसला ले सकता है।

आस्था /शौर्यपथ / हनुमान जयंती 27 अप्रैल 2021 दिन मंगलवार को है। इस दिन हनुमान जी की विधि-विधान से पूजा की जाती है। इस दिन भक्त हनुमान जी को प्रसन्न करने के लिए व्रत भी रखते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, हनुमान जी की विधि-विधान से पूजा करने से सभी कष्टों से मुक्ति मिलती है और मनोकामनाएं पूरी होती हैं। इस दिन लोग मंदिरों में जाकर हवन-पूजन करते हैं। लेकिन इस साल कोरोनावायरस से बचाव के लिए घर पर रहकर ही हनुमान जी की अराधना करना बेहतर है। जानिए हनुमान जन्मोत्सव के दिन हनुमान जी को क्या लगाएं भोग, कैसे करें पूजा और प्रसन्न करने के उपाय-
हनुमान जी को भोग में क्या अर्पित करें?
हनुमान जी को हनुमान जन्मोत्सव के दिन बूंदी का भोग लगाया जाता है। बूंदी लाल रंग वाली हो इसका ध्यान रखें। मान्यता है कि बजरंगबली को बूंदी के लड्डू या बूंदी चढ़ाने से सभी ग्रह बाधाओं का नाश होता है। इसके अलावा हनुमान जी को बेसन का लड्डू भी अर्पित किया जा सकता है।
हनुमान जी को कौन-सा फूल चढ़ाना चाहिए?
ऐसी मान्यता है कि बजरंग बली यानी हनुमान जी को लाल और पीला रंग अतिप्रिय है। ऐसे में उन्हें लाल या पीले रंग के फूल ही अर्पित करने चाहिए। हनुमान जी की पूजा में गुड़हल, गेंदा, गुलाब या कमल के फूलों का इस्तेमाल किए जा सकते हैं।
हनुमान जी को तुलसी की माला क्यों अर्पित की जाती है?
हनुमान जी को तुलसी की माला अर्पित की जाती है। कहते हैं कि ऐसा करने से संकट से मुक्ति मिलती है और सुख-समृद्धि के द्वार खुल जाते हैं। कहा जाता है कि मंगलवार के दिन हनुमान जी को तुलसी की माला चढ़ाने से धन लाभ के योग बनते हैं।
हनुमान जी को प्रसन्न करने के उपाय-
हनुमान जी के साथ भगवान राम व माता की भी पूजा करनी चाहिए।
हनुमान जयंती पर श्रीराम की प्रतिमा के सामने बैठकर हनुमान चालीसा का पाठ व हनुमान जी की प्रतिमा के सामने राम रक्षा स्त्रोत का पाठ करना चाहिए।
ब्रह्मचर्य व्रत का पालन करें।
हनुमान जी को पूजा के दौरान सिंदूर अर्पित करना चाहिए।

सेहत / शौर्यपथ / केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कोरोना वायरस के मरीजों की घर पर देखभाल के लिए 'प्रोनिंग की सलाह देते हुए कहा है कि यह उन मरीजों के लिए अत्यंत लाभकारी है, जिन्हें सांस लेने में तकलीफ हो रही है। खासकर वह मरीज जो घर पर पृथक-वास में रह रहे हैं।
प्रोनिंग किसी मरीज को पीठ से घुमाकर सटीक एवं सुरक्षित तरीके से पेट के बल लाने की प्रक्रिया है, ताकि वह चेहरा नीचे की तरफ कर लेटने की मुद्रा में रहे।
मंत्रालय के एक दस्तावेज में कहा गया, 'प्रोनिंग चिकित्सीय रूप से स्वीकार्य मुद्रा है जिससे सांस लेने में आराम और ऑक्सीजन के स्तर में सुधार होता है। यह सांस की तकलीफ वाले कोविड-19 मरीजों के लिए बहुत फायदेमंद है, खासकर घर में पृथक-वास के दौरान।Ó बेट के बल लेटने का महत्व बताते हुए, मंत्रालय ने कहा कि इस आसन से हवा लेने-छोडऩे में सुधार होता है, फेफड़ों की वायु थैलियां खुलती हैं और सांस लेना आसान होता है।Ó
दस्तावेज में कहा गया, 'प्रोनिंग की जरूरत तभी पड़ती है जब मरीज को सांस लेने में तकलीफ हो और एसपीओ2 (ऑक्सीजन सैचुरेशन) 94 से नीचे चला जाए। एसपीओ2 पर लगातार नजर रखने के साथ ही तापमान, रक्तचार और ब्लड शुगर की निगरानी भी घर में पृथक-वास के दौरान अहम होती है।
खून में ऑक्सीजन का संचार ठीक ढंग से नहीं होने से लक्षण बिगड़ सकते हैं। समय से पेट के बल लिटाना और वेंटिलेशन ठीक रखने से कई जानें बच सकती हैं।Ó हालांकि, मंत्रालय ने खाने के एक घंटे बाद पेट के बल लेटने को लेकर आगाह किया है और कहा कि जितनी बार बर्दाश्त किया जा सके उतनी बार ही किया जाना चाहिए।

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