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June 01, 2026
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खाना खजाना /शौर्यपथ गर्मियों में खाने से ज्यादा ड्रिंक्स पर ध्यान देना चाहिए। आज हम आपको बता रहे हैं, ऐसी समर ड्रिंक जिससे न सिर्फ आपको गर्मी से राहत मिलेगी बल्कि डाइजेशन के लिए भी यह ड्रिंक बहुत फायदेमंद है।
सामग्री :
1 ककड़ी (टुकड़ों में कटी हुई), 1 चम्मच अदरक (कद्दूकस किया हुआ), 1/2 लीटर पानी पुदीने के पत्ते, 1 टीस्पून नींबू का रसकाला, नमक स्वादानुसार।
विधि :
एक बाउल में पानी, ककड़ी, अदरक और पुदीना पीसकर मिलाएं।
इसके बाद इसमें काला नमक डालकर मिक्स कर लें।
पानी में नींबू का रस निचोड़ दें।
तैयार है ककड़ी और पुदीने का जूस।

शौर्यपथ /आपने साउथ इंडिया में लोगों को केले के पत्ते पर खाना खाते हुए देखा होगा। वहीं, कई रेस्टोरेंट्स भी केले के पत्ते पर साउथ इंडियन फूड्स परोसते हैं। केले के पत्ते पर खाना खाने की एक पुरानी परम्परा रही है। वहीं, सेहत के लिहाज से देखें, तो केले के पत्ते पर खाना खाने के कई फायदे हैं। आइए, जानते हैं कुछ फायदे-
डाइजेशन सिस्टम के लिए
केले का पत्ता प्लांट-बेस्ड कंपाउंड, पॉलीफेनॉल्स से पूर्ण होता है। पॉलीफेनॉल्स नेचुरल एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं जोकि शरीर में मौजूद फ्री-रेडिकल्स और दूसरी बीमारियों से सुरक्षा प्रदान करने का काम करते हैं। एक ओर जहां केले की पत्िरी यों को सीधे तौर पर पचाना संभव नहीं है। वहीं, केले के पत्ते में रखे खाद्य पदार्थ इससे पॉलीफेनॉल्स को अवशोषित कर लेते हैं। इससे शरीर को इन ऑक्सीडेंट्स का फायदा भी मिल जाता है।
खाने का स्वाद बढ़ता है
केले की पत्तियों पर मोम के जैसी एक ऊपरी परत होती है। हालांकि, ये परत बहुत पतली होती है लेकिन इसका स्वाद बहुत अलग होता है। जब गर्म खाना केले के पत्ते पर परोसा जाता है, तो ये मोम पिघलकर खाने में मिल जाती है। जिससे खाने का स्वाद और बढ़ जाता है।
इको फ्रेंडली भी है
केले के पत्ते खाना खाना पर्यावरण सुरक्षा के लिहाज से एक सार्थक पहल है। आमतौर पर लोग भोज या फिर किसी समारोह में प्लास्टिसक या स्टीरोफोम के प्लेट्स का इस्तेमाल करते हैं। इस्तेमाल के बाद इन्हें यूं ही फेंक दिया जाता है। जबकि केले के पत्तों को डिकंपोज करना बहुत ही आसान है।
पूरी तरह स्वच्छ
केले की पत्तियों को बहुत अधिक साफ करने की जरूरत नहीं होती है। ये खुद ही बहुत हाइजीएनिक होती हैं। इन्हें सिर्फ थोड़े से पानी से साफ करके इस्तेमाल में लाया जा सकता है। प्लास्टि क की प्लेट में खाना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है।
केमिकल फ्री आहार
केले के पत्ते में खाने का सबसे बड़ा फायदा ये है कि इससे हमारे शरीर में किसी भी प्रकार का कोई रासायनिक पदार्थ प्रवेश नहीं कर पाता है। जबकि प्लास्टिक की प्लेट में खाने से पिघली हुई प्लास्टिाक का कुछ अंश हमारे शरीर में भी चला जाता है। जो कैंसर जैसी भयानक बीमारी का कारण भी बन सकता है। ऐसे में केले के पत्ते पर खाना खाना स्वास्थ्य के लिहाज से बहुत फायदेमंद है।

आस्था /शौर्यपथ / अक्सर अच्छे दिन आने से पहले कुछ शुभ घटनाएं हमारे जीवन में घटित होती हैं। अगर आपको भी सुबह-सुबह या फिर जीवन में अचानक कुछ ऐसे बदलाव दिखें तो समझ लीजिए कि सौभाग्य का दरवाजा बस खुलने ही वाला है।
1. सफेद गाय गौ माता अगर भवन के द्वार पर आकर जोर-जोर से रंभाएं तो निश्चय ही घर के सुख में वृद्धि होती है। गाय का खेत या गार्डन में आकर चरना लक्ष्मी प्राप्ति का सूचक होता है।
2. मधुर ध्वनियों का सुनाई पड़ना सुबह अगर आपको मन्दिर से घंटियों, शंख,या भजन-कीर्तन की ध्वनि सुनाई दे, तो एक अच्छा शकुन होता है।
3. नव वर-वधू का दिखाई देना मार्ग में अगर सोलह श्रृंगार किए कोई नई नवेली दुल्हन नज़र आ जाए, तो इसे भी एक अच्छा चिन्ह मानिए।
4. श्रीफल जब भी कभी आपको सुबह उठते ही श्रीफल यानी नारियल के दर्शन हों, तो समझ लीजिए कोई अच्छी खबर मिलने वाली है।
5. पक्षी का आपके ऊपर बीट करना किसी पक्षी का आपके ऊपर बीट करना किस्मत वाले को ही नसीब होता है, ऐसा मान कर चलिए।
6. ट्रैवल के दौरान सांप, कुत्ते या बंदर का दिखना जब कभी ट्रैवल करते समय आपको दाईं तरफ़ सांप, कुत्ते या बंदर दिखे, तो समझें कि
वे आपके पास धन के आने का संकेत दे रहे हैं।
7. बारिश के दौरान सूरज का दिखाई देना बारिश के बीच आसमान में चमकते हुए सूरज का दिखाई देना शीघ्र ही मालामाल होने की निशानी है।
8. हरियाली खिड़की से सुंदर प्रकृति के नजारों को देखना एक शुभ बात होती है। साथ में, अगर नजदीक में जलाशय भी हो तो क्या कहने। सोने पर सुहागा...
9. कोयल या सोन चिरैय्या का चहचहाना घर की छत या मुंडेर पर अगर कोई कोयल या सोन चिरैय्या चहचहाए, तो पक्का आर्थिक वृद्धि होती है।
10.दही या दूध सुबह सबेरे उठते ही सर्वप्रथम दही या दूध का दिखाई दे जाना भी अच्छी तकदीर का इशारा होता है।
11. सुनहरा सांप रात में सोते समय अगर सपने में सफेद या सुनहरा सांप नज़र आए, तो यह भी किस्मत खुलने का इशारा होता है।
12. चमगादड़ अगर चमगादड़ आपके घर में अपना बसेरा बना लें, तो इसे एक शुभ संकेत में शुमार किया जाता है।
13. कछुआ कछुए अच्छे भाग्य का प्रतीक होता है। इसका दिखाई दे जाना, कोई न कोई अच्छी खबर ज़रूर से लाता है।
14. टूटते तारे टूटते तारे से मांगी हुई इच्छा 30 दिन में सच हो जाया करती है। तो, क्यों न कुछ अच्छा मांगें...
15. घर के द्वार पर हांथ का अपनी सूंड ऊंची करना जिस घर के द्वार पर हाथी अपनी सूंड ऊंची करे वहां उन्नति, वृद्धि तथा मंगल होने की सूचना मिलती है।
16. गलती से उलटे कपड़े पहन लेना कभी-कभी हम ज़ल्दबाजी में कपड़े उल्टे पहन लिया करते हैं। अगर दोबारा आपके साथ हो तो ऐसा समझें कि सुख-समृद्धि जल्द ही आपका दरवाजा खटखटाने वाली है।
17. रास्ते में शुभ चीजों का मिलना अगर रास्ते में आपको कहीं कोई सिक्का, घोड़े की नाल या चार पत्तियों वाली घास मिल जाएं तो उसे अवश्य ही संभालकर रख लें। यह आपके भाग्य को चमका सकते हैं।
18. कुत्ते का घर पर आकर रहना कोई कुत्ता अगर आपके घर पर रहने के लिए आ जाए, तो यह रुपये-पैसे आने का संकेत होता है।
19. मेंढ़क या टिड्डों का शोर बारिश के बाद अगर मेंढ़क या टिड्डों का शोर सुनाई दें, तो इसे एक अच्छा संकेत मानें।
20. गन्ना सवरे-सवेरे रास्ते में गन्ने का दिखाई देना भी कहीं से पैसे मिलने का एक शुभ लक्षण होता है।
21. मोर घर की सीमा में मोर का दिखाई पड़ना और उसका पंख फैलाना शुभ अवसर आने की घोषणा करता है।
22. मोती समुद्र के किनारे मोती मिलना भी बिरले को ही नसीब होता है।
23. झींगुर झींगुर का शोर सुनाई देना या इसका दिखाई दे जाना बुरे दिनों के समाप्त खत्म होने की पूर्व सूचना होती है।
24. हाथ में खुजली होना हाथ में खुजली होना शीघ्र आने वाले धन की ओर निर्दिष्ट करता है।
यह 24 शुभ संकेतों में से अगर कोई एक भी आपकी सुबह या जीवन में प्रवेश कर रहे हैं तो मान कर चलिए कि किस्मत बस खुलने ही वाली है।

 

आस्था /शौर्यपथ / भगवान शनिदेव के कई चमत्कारिक पीठ या कहें कि मंदिर है। महाराष्ट्र के एक गांव शिंगणापुर में उनका खास मंदिर है जहां उनका जन्म हुआ था। उत्तरप्रदेश के कोशी से छह किलोमीटर दूर कौकिला वन में स्थित है सिद्ध शनिदेव का मन्दिर। इसके अलावा मध्यप्रदेश के ग्वालियर के पास स्थित है शनिश्चरा मन्दिर। इस मंदिर के बारे में जानते हैं संक्षिप्त जानकारी।
1. शनिश्चरा मन्दिर के बारे में किंवदंती है कि त्रेतायुग में यहां हनुमानजी के द्वारा लंका से फेंका हुआ अलौकिक शनिदेव का पिण्ड है। इसे शनिदेव का सिद्धपीठ माना जाता है।
2. यहां शनिशचरी अमावस्या के दिन मेला लगता है। मंदिर में हर शनिश्चरी अमावस्या पर लाखों श्रद्धालु भिण्ड, मुरैना, ग्वालियर, दतिया, झांसी, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर सहित मध्यप्रदेश के कोने-कोने से आते हैं। पड़ोस के राजस्थान, उत्तरप्रदेश, पंजाब हरियाणा, दिल्ली, महाराष्ट्र से भी शनि की शांति के लिए हजारों लोग शनि मेले में दर्शन को आते हैं और दान पुण्य, पूजा-पाठ व हवन यज्ञ व भंडारा करके पुण्य कमाते हैं।
3. भक्तजन यहां तेल चढ़ाते हैं, और अपने पहने हुए कपड़े, चप्पल, जूते आदि सभी यहीं छोड़कर घर चले जाते हैं। इसके पीछे ऐसी मान्यता है कि ऐसा करने से पाप और दरिद्रता से छुटकारा मिल जाता है।
4. ऐंती का शनिश्चरा मंदिर त्रेतायुगीन होने के कारण पूरे भारत वर्ष में प्रसिद्ध है। मुरैना जिले में स्थित इस मंदिर की ग्वालियर से मात्र 18 किलोमीटर दूरी है। ऐंती पर्वत पर स्थित यह मंदिर बहुत ही प्राचीन है।
5. मान्यता है कि इस शनि सिद्धपीठ पर जाकर शनि के दण्ड से बचा जा सकता है।

खाना खाजना /शौर्यपथ / ऐसे बनाएं कोविड19 से बचने के लिए नींबू पानी
कोरोना इंफेक्शन से बचने और इम्युनिटी बढ़ाने के लिए आपको नींबू पानी कुछ अलग तरीके से बनाना होगा. इसके लिए आपको गुनगुने पानी में नींबू निचोड़कर इसमें एक चम्मच चीनी, दो चुटकी काला नमक, 2 चुटकी पिसी हुई काली मिर्च डालकर दिन में दो बार पीना चाहिए। आप चाहें, तो इसमें पुदीना और तुलसी के पत्ते भी डाल सकते हैं।
नींबू पानी पीने के और फायदे
बेली फैट और वजन कम करने के लिए रोज सुबह एक गिलास गुनगुने पानी में आधा नींबू निचोड़ कर खाली पेट पीना चाहिए। अगर चाहें, तो इसमें एक चम्मच शहद भी मिला सकते हैं। इससे आप दिन भर एनर्जेटिक फील करेंगे। लगातार 6 महीने तक इसे पीने से आपको फर्क नजर आने लगेगा।
हाई शुगर वालों के लिए नींबू पानी एक बेहतर विकल्प माना जाता है। खासतौर से उनके लिए जो डायबिटीज के मरीज हैं या वजन कम करना चाहते हैं। यह शुगर को गंभीर स्तर तक पहुंचाए बिना शरीर को हाइड्रेट करता है और इससे एनर्जी भी मिलती है।
कब्ज की समस्या से ग्रस्त लोग भी नींबू पानी का सेवन कर सकते हैं। हर सुबह गुनगुने पानी में नींबू का रस मिलाकर पीने से कब्ज की समस्या दूर हो जाएगी।
नींबू पानी का एक फायदा ये भी है कि इसमें ब्लड प्रेशर और डायबिटीज को कम करने के गुणों के साथ ही तनाव और डिप्रेशन कम करने के गुण भी पाए जाते हैं। नींबू पानी पीने से आपका मूड तुरंत रिलैक्स हो सकता है।
नींबू के रस में अदरक का रस थोड़ी सी शक्कर मिलाकर पीने से पेट दर्द से राहत मिलती है। सब्जियों और दालों पर नींबू निचोड़ कर खाने से सब्जियों के स्वाद और पोषक तत्व में वृद्धि होती है। इससे डिशेज को जल्दी पचाने में भी मदद मिलती है।

सेहत /शौर्यपथ /कोरोना वायरस हर पल अपना रंग बदल रहा है ऐसे में उससे मुकाबला करने के लिए हमें भी बेहद सतर्क रहना होगा। मरीजों में लक्षण दिखने के बाद से हर दिन अहम होता है। अगर ठीक से मॉनिटरिंग और डॉक्टरों की सलाह पर ट्रीटमेंट शुरू कर दिया जाए तो कोरोना से जंग घर पर ही जीती जा सकती है। डॉक्टर्स की मानें तो 80 फीसदी से ज्यादा मरीज घर पर ही ठीक हो रहे हैं।
कोरोना में ये दिन हैं अहम
कोरोना संक्रमण के बाद मरीजों में कई तरह के लक्षण देखने को मिलते हैं जिनमें बुखार सबसे कॉमन है। सीनियर फिजिशियन कार्डियोलॉजिस्ट डॉक्टर केके अग्रवाल के मुताबिक, कोविड के मरीजों में लक्षण दिखने का औसत समय 5 दिन होता है। जबसे लक्षण दिखें 5 दिन गिन लें। सांस से जुड़ी परेशानियां दिखने का मीन टाइम 7 दिन है। वेंटिलेटर पर पहुंचने का मीन टाइम 9 दिन सामने आया है। इनकी मॉनिटरिंग काफी जरूरी है।
बुखार उतरने के बाद 3 दिन अहम
डॉक्टर केके अग्रवाल ने बताया कि मुंबई में ऐसे कई मामले सामने आए हैं जब बुखार उतरने के बाद साइलेंट हायपॉक्सिया (बिना कोई लक्षण दिखे ऑक्सीजन डाउन हो जाना)। ऐसा ही पीलिया और डेंगू में होता है कि बुखार उतरने के बाद मरीज सीरियस हो जाता है। डॉक्टर ने बताया कि ऐसा ही कोविड में भी देखा गया है। अगर किसी का बुखार खत्म हो रहा है और अचानक से ऑक्सीजन कम हो रही है तो इसे साइलेंट हायपोक्सिया कहते हैं और तुरंत ऑक्सीजन की जरूरत है। बुखार खत्म होने के बाद लापरवाही ना करें। फीवर खत्म होने के 3 दिन बाद तक 3 बार ऑक्सीजन चेक करना बेहद जरूरी है।
Disclaimer- इस आलेख में दी गई जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है, हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी हमारी नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

सेहत /शौर्यपथ /खाना बनाना भी एक कला है। हालांकि जो मिले, वही खा लें, इसी में भलाई है। खाने के प्रति लालसा नहीं रखनी चाहिए, लेकिन खाने की क्वालिटी से कभी समझौता नहीं करना चाहिए। आयुर्वेद और हिन्दू धर्म अनुसार भोजन से ही रोग उत्पन्न होते हैं और भोजन की आदत बदलने से ही रोग समाप्त भी हो जाते हैं। हिन्दू धर्म में किस नक्षत्र या वार को कौन सा भोजन करना चाहिए और कौन सा नहीं इसका उल्लेख मिलता है।

देश और दुनिया के सभी तरह के भोजन की जानकारी रखेंगे तो आपको अच्छा लगेगा। कभी-कभी घर में परंपरागत भोजन से हटकर भी ऐसा भोजन बनाएं, जो आपके मन को खुशी दे। तरह-तरह के भोजन और उनको बनाने संबंधी जानकारी भी किताबी रूप में उपलब्ध हैं। इसके अलावा जीवनोपयोगी वस्तुओं की भी आपको जानकारी होनी चाहिए। जैसे बिजली की अनुपस्थिति में लालटेन, चिमनी, टॉर्च, हाथ पंखा होना चाहिए। गैस के न होने पर सिगड़ी, इंडक्सन या हीटर होना चाहिए। इसके अलावा मल्टीपल पेचकस, फोल्डिंग सीढ़ी, केतली, सुराही, नीम और अरंडी का तेल, चकमक पत्थर, फोल्डिंग डंडा, घट्टी, सिलबट्टा और खलबत्ता, रेत घड़ी एवं चुंबकीय दिशा सूचक कंपास या यंत्र, सूखे खाद्य पदार्थ, पानी फिल्टर मशीन आदि ऐसी हजारों वस्तुएं हैं, जो हमारे जीवन में काम आती हैं या अचानक आ सकती हैं।
1. प्रतिपदा को कुष्माण्ड (कुम्हड़ा पेठा) न खाएं, क्योंकि यह धन का नाश करने वाला है।
2. द्वितीया को छोटा बैंगन व कटहल खाना निषेध है।
3. तृतीया को परमल खाना निषेध है, क्योंकि यह शत्रुओं की वृद्धि करता है।
4. चतुर्थी के दिन मूली खाना निषेध है, इससे धन का नाश होता है।
5. पंचमी को बेल खाने से कलंक लगता है अत: पंचमी को बेल खाना निषेध है।
6. षष्ठी के दिन नीम की पत्ती खाना एवं दातुन करना निषेध है, क्योंकि इसके सेवन से एवं दातुन करने से नीच योनि प्राप्त होती है।
7. सप्तमी के दिन ताड़ का फल खाना निषेध है। इसको इस दिन खाने से रोग होता है।
8. अष्टमी के दिन नारियल खाना निषेध है, क्योंकि इसके खाने से बुद्धि का नाश होता है।
9. नवमी के दिन लौकी खाना निषेध है, क्योंकि इस दिन लौकी का सेवन गौ-मांस के समान है।
10. दशमी को कलंबी खाना निषेध है।
11. एकादशी को सेम फली खाना निषेध है।
12. द्वादशी को (पोई) पु‍तिका खाना निषेध है।
13. तेरस (त्रयोदशी) को बैंगन खाना निषेध है।
14. अमावस्या, पूर्णिमा, संक्रांति, चतुर्दशी और अष्टमी, रविवार श्राद्ध एवं व्रत के दिन स्त्री सहवास तथा तिल का तेल, लाल रंग का साग तथा कांसे के पात्र में भोजन करना निषेध है।
15. रविवार के दिन अदरक भी नहीं खाना चाहिए।
16. कार्तिक मास में बैंगन और माघ मास में मूली का त्याग करना चाहिए।
17. अंजुली से या खड़े होकर जल नहीं पीना चाहिए।
18. जो भोजन लड़ाई-झगड़ा करके बनाया गया हो, जिस भोजन को किसी ने लांघा हो तो वह भोजन नहीं करना चाहिए, क्योंकि वह राक्षस भोजन होता है।
19. जिन्हें लक्ष्मी प्राप्त करने की लालसा हो उन्हें रात में दही और सत्तू नहीं खाना चाहिए, यह नरक की प्राप्ति कराता है।
20. खाने के पहले तीखा इसलिए खाते हैं क्योंकि इससे आपका पाचन तंत्र सक्रिय हो जाए। भोजन की शुरुआत में तीखा तथा अंत में मीठा खाने की सलाह दी जाती है।
21.अपराधी व्यक्ति, वैश्या, नशे का व्यापारी, शत्रु, ब्याजखोर और हिजड़े के यहां भोजन नहीं करना चाहिए।
22. रजस्वला स्त्री, क्रोधी व्यक्ति, हर समय किसी की निंदा करने वाला व्यक्ति और अस्वस्थ व्यक्ति के हाथ का बना खाना नहीं खाना चाहिए।
23. किसी को झूठा, ठोकर लगा, बासी, किसी के निमित्त निकाला हुआ, फेंका हुआ, तामसिक भोजन को कभी ग्रहण नहीं करना चाहिए।
24. भोजन की थाली को हमेशा पाट, चटाई, चौक या टेबल पर सम्मान के साथ रखें। खाने की थाली को कभी भी एक हाथ से न पकड़ें। ऐसा करने से खाना प्रेत योनि में चला जाता है।
25. भोजन करने के बाद थाली में ही हाथ न थोएं। थाली में कभी जूठन न छोड़े। भोजन करने के बाद थाली को कभी, किचन स्टेन, पलंग या टेबल के नीचे न रखें। उपर भी न रखें। रात्रि में भोजन के जूठे बर्तन घर में न रखें।
26. भोजन करने से पूर्व देवताओं का आह्‍वान जरूर करें। भोजन करते वक्त वर्तालाप या क्रोध न करें। भोजन करते वक्त अजीब सी आवाजें न निकालें।
27. रात में चावल, दही और सत्तू का सेवन करने से लक्ष्मी का निरादर होता है। अत: समृद्धि चाहने वालों को तथा जिन व्यक्तियों को आर्थिक कष्ट रहते हों, उन्हें इनका सेवन रात के भोजन में नहीं करना चाहिए।
28. भोजन सदैव पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके करना चाहिए। संभव हो तो रसोईघर में ही बैठकर भोजन करें इससे राहु शांत होता है।
29. जूते पहने हुए कभी भोजन नहीं करना चाहिए। सुबह कुल्ला किए बिना पानी या चाय न पीएं।
30.अच्छे मन से बनाया और अच्छे मन से खाया हुआ भोजन ही शरीर को लाभ पहुंचाता है।

टिप्स ट्रिक्स /शौर्यपथ / भोजन, पानी और हवा अगर गुणवत्तापूर्ण नहीं हैं तो रोग उत्पन्न होते हैं। हिन्दू शास्त्रों और आयुर्वेद में इस संबंध में कई तरह की बातों का खुलासा किया गया है। सबसे जरूरी है पानी। पानी को प्राकृतिक तरीके से छानकर पीएं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि कौन से मौसम में किस घड़े में पानी डालकर पीना चाहिए? यदि नहीं तो आज आप जानिए बहुत ही महत्वपूर्ण जानकारी।

गर्मी का मौसम : प्राचीन भारत के लोग गर्मी के मौसम में मिट्टी के घड़े, मटके या सुराही का पानी ही पीते थे। अब यह प्रचलन सिर्फ गांव तक ही सीमित रह गया है। शहर में तो लोग फ्रिज का पानी पीते हैं, जो कि सबसे घातक है। दरअसल, गर्मी में मिट्टी के घड़े का पानी ही पीना चाहिए, क्योंकि घड़े में पानी की गुणवत्ता और बढ़ जाती है और वह ठंडा भी रहता है। कुछ लोग इस मौसम में चांदी के घड़े में पानी पीने की सलाह भी देते हैं। चांदी में भी पानी शीतल और स्वच्छ रहता है।
बरसात का मौसम : बरसात के मौसम में बैक्टीरिया बढ़ जाते हैं इसीलिए इस मौसम में हमारे प्राचीन ऋषि-मुनि तांबे के बर्तन या घड़े में पानी पीने की सलाह देते हैं। तांबा अनावश्यक बैक्टीरिया को मारकर पानी को शुद्ध कर देता है।

सर्दी का मौसम : सर्दी के मौसम में सोने के घड़े या बर्तन में पानी पीना चाहिए। इससे शरीर में शीत नहीं जमती है और न ही कफ बढ़ता है। यह सर्दी-जुकाम और बुखार जैसे मौसमी रोगों से बचाता है। यदि सोने का कोई बर्तन नहीं है, तो पीतल या स्टील के बर्तन में सोने का एक टुकड़ा, अंगूठी, चेन आदि डालकर रखें और फिर उसका पानी पीएं।

सबसे अच्छा पानी : आयुर्वेद के अनुसार सबसे अच्छा पानी बारिश का होता है। उसके बाद ग्लेशियर से निकलने वाली नदियों का, फिर तालाब का पानी, फिर बोरिंग का और पांचवां पानी कुएं या कुंडी का। यदि पानी खराब लगे तो उबालकर पीएं लेकिन ऑरो का पानी नहीं पीएं, क्योंकि ये पानी की क्वालिटी को बिगाड़ देते हैं।

आस्था /शौर्यपथ /गरूड़ पुराण के अनुसार अगर आपके पास मरते समय 4 खास सामग्री हैं तो यमराज भी आपको प्रणाम करते हैं और दंड नहीं देते हैं। यूं तो हममें से कोई नहीं जानता है कि मरने के बाद क्या होता है लेकिन शास्त्रों के अनुसार इस जीवन में आपने जो अच्छे-बुरे कर्म किए हैं उनका फल भोगना पड़ता है। लेकिन शास्त्रों में यह भी लिखा है कि अगर मरते समय आपके पास कुछ खास चीजें हैं तो यमराज आपको माफ कर देते हैं... आइए जानते हैं वह क्या है...
तुलसी
तुलसी का पौधा सिर के पास हो तो मनुष्य की आत्मा शरीर त्याग के बाद यमदंड से बच जाती है। अगर तुलसी की पत्तियां मरते हुए व्यक्ति के माथे पर रखी जाएं तो भी लाभ होता है।
गंगाजल
मृत्यु के समय गंगाजल को मुख में रखते हुए प्राण त्यागने का विधान बताया गया है। गंगाजल शरीर को पवित्र करता है और जब कोई व्यक्ति शुद्धता के साथ शरीर का त्याग करता है तो उसे भी यमलोग में दंड का पात्र नहीं बनना पड़ता। यही कारण है कि जीवन के आखिरी पलों में गंगाजल के साथ तुलसी दल दिया जाता है।
श्री भागवत
मृत्यु के आखिरी पलों में श्री भागवत या अपने धर्मग्रंथ का पाठ करने से व्यक्ति को सभी सांसारिक मोह-माया से मुक्ति मिलती है। इस प्रकार आत्मा द्वारा शरीर त्यागने के उपरांत व्यक्ति को मुक्ति मिलती है और यमदंड का सामना किए बिना स्वर्ग की प्राप्ति होती है या पुनर्जन्म प्राप्त होता है। अगर सिरहाने यह पवित्र ग्रंथ रखा हो तब भी आत्मा को मुक्ति मिलती है।
अच्छी सोच
शास्त्रों के अनुसार मृत्यु के समीप पहुंच चुके व्यक्ति तथा इसके आसपास रहने वाले सगे-संबंधियों को भी उसकी आत्मा के संबंध में अच्छे विचार रखने चाहिए। व्यक्ति को मरते हुए किसी भी प्रकार का क्रोध या संताप नहीं रखना चाहिए। मरते समय होंठों पर सिर्फ दुआ और आशीर्वाद होने चाहिए।
यह हैं वह चार बातें जो मृत्यु के समय पास होनी चाहिए।

लाइफस्टाइल /शौर्यपथ / कोरोना मरीजों को लेकर एक नया अध्ययन किया गया है। इसके नतीजों के बाद यह दावा किया गया है कि यह वायरस कोरोना रोगियों के दिल पर भारी पड़ सकता है। अस्पताल में भर्ती होने वाले उन मरीजों में हार्ट फेल का खतरा बढ़ सकता है, जिनमें पहले से हृदय संबंधी कोई समस्या नहीं होती है।
अमेरिका के माउंट सिनाई अस्पताल के शोधकर्ताओं के अनुसार, इस तरह के मामले काफी कम पाए गए हैं, लेकिन डॉक्टरों को इस तरह की संभावित जटिलताओं के प्रति अवगत रहना चाहिए। अध्ययन की प्रमुख शोधकर्ता और इकान स्कूल ऑफ मेडिसिन में हार्ट फेल्योर रिसर्च की निदेशक अनुराधा लाला ने कहा कि उन कुछ चुनिंदा लोगों में हार्ट फेल होने का खतरा पाया गया, जिनमें पहले से इस जोखिम का कोई कारक नहीं था। हमें इस संबंध में और समझने की जरूरत है कि कोरोना वायरस हृदय प्रणाली को कैसे सीधे प्रभावित कर सकता है।
6,439 मरीजों पर किया अध्ययन
अमेरिकन कॉलेज ऑफ कार्डियोलॉजी पत्रिका में प्रकाशित अध्ययन के मुताबिक, शोधकर्ताओं ने पिछले साल 27 फरवरी से लेकर 26 जून के दौरान माउंट सिनाई हेल्थ सिस्टम के अस्पतालों में भर्ती रहे 6,439 कोरोना मरीजों पर चिकित्सीय इतिहास पर अध्ययन किया। उन्होंने इनमें से 37 रोगियों में हार्ट फेल के नए केस पाए। इन रोगियों में से आठ में पहले से हृदय संबंधी कोई समस्या नहीं थी। 14 पीड़ित हृदय रोग का पहले सामना कर चुके थे। जबकि 15 हृदय रोग से पीड़ित नहीं थे, लेकिन इनमें खतरे का एक कारक पाया गया था।

 

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