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खाना खजाना / शौर्यपथ / घर पर खुशी का हो माहौल या फिर मेहमानों को करना हो खाने पर इनवाइट, हलवा फूड मेन्यू का एक जरूरी हिस्सा होता है। आपने आज तक कई तरह के हलवे का स्वाद चखा होगा लेकिन आम का हलवा स्वाद में बेहद लाजवाब होता है। आइए जानते हैं कैसे बनाया जाता है यह टेस्टी हलवा।
आम का हलवा बनाने के लिए सामग्री-
-सूजी-1 कप
- घी-1/2 कप
- आम का गूदा-1 कप
- दूध-1 कप
- ड्राई फ्रूट्स-1 कप
- इलायची पाउडर-1/2 चम्मच
- मैंगो एसेंस-1/2 चम्मच
आम का हलवा बनाने का तरीका-
आम का हलवा बनाने के लिए सबसे पहले एक पैन में घी डालकर गर्म कर लें। घी गर्म होने के बाद उसमें सूजी डालकर उसे सुनहरा होने तक भून लीजिए। अब आप इसमें आम का गुदा और दूध को डालकर कुछ देर चलते हुए पका लीजिए। लगभग 8 मिनट बाद इसमें बाकी अन्य सामग्री को भी डालकर भी पकाकर गैस बंद कर दें। अब हलवे को एक प्लेट में निकालकर ऊपर से ड्राई फ्रूट्स डालकर सर्व करें।
सेहत /शौर्यपथ / आजतक आपने फल खाने के कई फायदे सुने होंगे पर क्या आप जानते हैं फलों का सेवन अगर सही तरह से न किया जाए तो वह फायदा पहुंचाने की जगह आपकी सेहत को नुकसान भी पहुंचा सकते हैं। जी हां विटामिन और खनिजों का अच्छा स्त्रोत माने जाने वाले फल अगर सही तरह से खाए जाएं तो आपको लाभ देते हैं। वहीं गलत तरह से इनका सेवन करने पर यह शरीर में एसिड की मात्रा बढ़ाकर पेट में ऐंठन और मरोड़ का कारण भी बन जाते हैं। आइए जानते हैं कैसे।
फल खाने के तुरंत बाद क्यों नहीं पीना चाहिए पानी-
फलों में फ्रुक्टोज यानि नेचुरल शुगर मौजूद होती है। ऐसे में अगर फ्रुकटोज के साथ पानी का सेवन किया जाए तो यह आपको पेट संबंधी परेशानियां दे सकता है। फल खाने से कम से कम एक घंटे पहले और एक घंटे बाद में ही पानी का सेवन करें। फलों का सेवन करने के बाद पानी का सेवन करने से व्यक्ति के पाचन तंत्र की गति धीमी हो जाती है, जो बाद में एसिड बर्न और एसिड रिफ्लक्स का कारण बनती है।
फल खाने के बाद पानी का सेवन दे सकता है आपको ये समस्याएं-
-फल खाने के बाद पानी पीने से पाचन तंत्र की गति सुचारू रूप से काम नहीं कर पाती। जिसकी वजह से पेट में गया खाना अच्छी तरह नहीं पचता और व्यक्ति को पेट में गौस और एसिडिटी की समस्या होने लगती है।
-पानी की उच्च मात्रा वाले फलों का सेवन करने के तुरंत बाद भूलकर भी पानी न पीएं। यह आपको पेट संबंधी अन्य समस्याएं भी दे सकता है। इतना ही नहीं ऐसा करने से शरीर का पीएच स्तर भी बाधित होता है।
-फल खाने के तुरंत बाद पानी पी लेने से आपके खाने को पचाने वाले गैस्ट्रिक रस और पाचन के लिए जरूरी एंजाइम्स पतले हो जाते हैं। जिसकी वजह से पाचन तंत्र खाने को ठीक से पचाने में असमर्थ हो जाता है और व्यक्ति को अपच, एसिड रिफ्लक्स और हार्ट बर्न जैसी समस्याएं होने लगती हैं।
-मीठे फल खाने के बाद तुरंत पानीपीने से व्यक्ति को खांसी या जुकाम होने की संभावनाएं बन जाती हैं। उदाहरण के लिए, केला खाने के तुरंत बाद पानी पी लेने से आपको जुका म या खांसी की समस्या हो जाती है।
-फल खाने के तुरंत बाद पानी पीने से अनडायजेस्टिव खाना वसा में बदलने लगता है। जिसकी वजह से शरीर में इंसुलिन की मात्रा भी बढ़कर रक्त शर्करा का स्तर भी बढ़ जाता है। यह पूरी प्रक्रिया आपको मोटापे और डायबिटीज का भी शिकार बना सकती है।
टिप्स ट्रिक्स /शौर्यपथ /चाय बनने के बाद अक्सर हम चाय की पत्तियां फेंक देते हैं। हमें यह नहीं पता होता कि चाय बनाने के बाद बची हुई चायपत्ती का क्या किया जाए, इसलिए अक्सर लोग चाय की पत्तियों को कूड़े में डाल देते हैं। क्या आप जानते हैं दोबारा इन चाय की पत्तियों का इस्तेमाल किया जा सकता है, जो न केवल आपकी सेहत के लिए फायदेमंद है बल्कि आपके घर के अन्य कामों में भी आसानी से इस्तेमाल में लाई जा सकती है।
ऐसे करें इस्तेमाल
-बालों में चमक और दमक के लिए यूज होने वाली चायपत्ती बेहद ही फायदेमंद होती है। यह एक तरह से प्राकृतिक कंडिशनर का काम करती है। चाय की बची हुई पत्तियों को एक बार धो लें और इन्हें दोबारा पानी में उबाल लें। और फिर इस पानी से अपने बालों को साफ करें। नियमित ऐसा करने से बालों में प्राकृतिक चमक आएगी।
-गमले में पौधों को समय-समय पर खाद की जरूरत होती है। ऐसे में आप बची हुई चायपत्ती को साफ कर लें और गमले में डाल दें। इससे आपके पौधे स्वस्थ रहेगें।
-चायपत्ती का एक और फायदा यह है कि आप इससे लकड़ी से बनी हुई चीजों को चमकदार बनाने के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं। बची हुई चायपत्तियों को दोबारा से पानी में उबाल लें और इसे किसी शीशी या फिर स्प्रे की बोतल में डाल दें। अब इससे लकड़ी से बने सामानों की सफाई करें। इससे शानदार चमक आती है।
-चायपत्ती चोट व घावों को जल्दी ठीक करने और उन्हें भरने का काम करती है। चाय की पत्ती एंटीआक्सीडेंट होती है। यदि आपके घाव या चोट लगी हो, तो उस पर चायपत्ती लगाते ही वे जल्दी ठीक हो जाते हैं। सबसे पहले आप चायपत्तियों को उबाल लें और इसे चोट के ऊपर लगा दें। या फिर आप चायपत्ती के पानी से चोट और घावों को धो सकते हैं। यह संक्रमण से भी आपको बचाती है।
-आप चायपत्ती का इस्तेमाल काबुली चना बनाने के लिए भी कर सकते हैं। इसके लिए आप चायपत्तियों को सुखा लें और काबुली चना बनाते समय उबलते हुए पानी में चायपत्ती की पोटली को उसमें डाल दें। ऐसा करने से काबुली चनों का रंग अधिक आकर्षक दिखता है।
-बनी हुई चाय की पत्ती दुबारा पानी में डाल कर उबालें। उस पानी से घी और तेल के डब्बे साफ करें। इससे डिब्बे की दुर्गंध जाती रहेगी।
-जिस स्थान पर अधिक मक्खियां बैठ रही हों, वहां चाय की पत्ती को एक गीले कपड़े में बांधकर रगड़ दें।
-चाय की पत्ती में थोड़ा सा विम पाउडर मिलाकर क्राकरी साफ करें। उसमें चमक आ जाएगी।
वास्तु टिप्स / शौर्यपथ / दुनिया में परिवार से बढ़कर कोई सुख नहीं है परन्तु आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में गृह क्लेश एक गंभीर मुद्दा बना हुआ है, जिसके कारण परिवार के सुख से ज्यादातर लोग वंचित हो रहे है। इसका एक मुख्य कारण यह भी है कि अगर घर में नकारात्मकता बहुत अधिक बढ़ जाए तो गृह क्लेश आम बात हो जाती है। कुछ घर ऐसे होते हैं जहां लड़ाई झगड़ा रोज की बात होती हैं।
ऐसे घरों में ना तो सुख-शान्ति का वास होता है और ना ही लक्ष्मी जी वहां पधारती हैं। ग्रहों के दोष, राहु-केतु का चक्कर, शनि की कुदृष्टि जैसे बहुत से कारण हो सकते हैं। इस समस्या को बढ़ाने में कई बार कुछ वास्तु दोष भी अहम किरदार निभाते हैं। इस संकट को काटने के लिए ऐसे ही कुछ उपाय हैं जो इन परेशानियों से मुक्ति दिलाएंगे।
-घर के दक्षिण-पूर्वी दिशा में वास्तु पिरामिड की स्थापना से गृहक्लेश नहीं होता। दरअसल दक्षिण-पूर्वी दिशा को अग्नि कोण माना जाता है। इस दिशा में वास्तु पिरामिड की स्थापना करने से कलह में कमी आती है और परिजन निरोगी और अच्छे विचारों के होते हैं।
-घर में लक्ष्मी जी के साथ श्री हरि विष्णु जी मूर्ति रखने से गृहक्लेश की समस्या को काफी हद तक दूर करती है। इनकी जोड़ी दांपत्य जीवन में समर्पण भाव को दर्शाती है। हफ्ते में किसी भी एक दिन विष्णु मंदिर जाएं और भगवान को बेसन के लड्डू अर्पित करें। प्रसाद के ये लड्डू पूरी श्रद्धा के साथ गरीबों में बांट दें।
-कलह से निपटने में केसर का उपाय अत्यंत लाभदायक है। इसके लिए आपको चुटकी भर केसर को पानी में मिलाना होगा। सुबह उठकर स्नान आदि के बाद पूजा पाठ करें और केसर का तिलक लगाएं। केसर वाला दूध पीने से भी आपको शांति की प्राप्ति होगी।
-पति-पत्नी में अगर आए दिन झगड़े, वाद-विवाद या मन मुटाव रहता है तो ऐसे दंपति को अपने शयनकक्ष में राधा-कृष्ण की बड़ी से फोटो दीवार पर लगानी चाहिए। ऐसा करने से अभूतपूर्व बदलाव देखने को मिलेगा और दंपति के बीच प्रेम की स्थापना होगी।
-जिस प्रकार आप दीवाली की रात दीपक जलाकर लक्ष्मी माता से आशीर्वाद मांगते हैं और उनकी कृपा खुद पर बनाए रखने के लिए प्रार्थना करते हैं उसी प्रकार गाय के घी का दिया प्रतिदिन तुलसी के पौधे पर जलाएं। दीप प्रज्वलित कर तुलसी माता से गृह शांति की प्रार्थना करें। ऐसा लगातार करने से परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।
-अगर दाम्पत्य जीवन में कड़वाहट आ रही है, पति-पत्नी के बीच छोटी-छोटी बातों को लेकर मतभेद उत्पन्न हो रहे हैं तो सोमवार के दिन दो-मुखी रुद्राक्ष धारण करने से गृह क्लेश समाप्त हो जाते हैं। दो मुखी रुद्राक्ष में साक्षात शिव और पार्वती बसते हैं। इसे धारण करने के बाद आपके बिगड़े काम संवर जाते है। पति-पत्नी के बीच प्यार बढ़ता है।
-घर पर बनने वाली सुबह की पहली रोटी गाय के लिए निकालें। घर के आसपास गाय हो तो उसे अपने हाथों से रोटी खिलाकर आएं और कलह से मुक्ति की प्रार्थना करें। गौ माता की सेवा करने से आपके मन को शांति मिलेगी।
-गुरुवार के दिन परिवार के सभी सदस्यों के साथ मिलकर सामर्थ्यानुसार केले गरीबों को बांटें।
-नमक का पोछा गृह कलेश से मुक्ति पाने के लिए काफी लाभदायक होता है। घर में पोछा लगाने के लिए पानी में नमक मिला लें। समुद्री नमक उपलब्ध हो तो वो पानी में डालकर घर में पोछा लगाएं। इस तरह से पोछा लगाने से घर की नकारात्मकता दूर होती है। यह उपाय घर के वास्तु दोषों को भी दूर करता है।
-आपके घर में जूते-चप्पल बिखरे पड़े रहते हैं तो आपके घर में नेगेटिव एनर्जी बनी रहेगी। ऐसे घर में कलेश होना आम बात है। जूतों का एक निश्चित स्थान बनाएं और सुनिश्चित करें कि सब वहीं जूते वगैरह रखें। ध्यान रहे घर के दरवाजों पर उल्टी चप्पल ना पड़ी रह जाएं।
खाना खजाना / शौर्यपथ / इंडियन किचन में कुछ कॉमन डिशेज हैं, जो लगभग सभी को पसंद आती हैं। जैसे, जीरा आलू की दीवानों को अलग-अलग स्टाइल में जीरा आलू खाना पसंद होता है। आज हम आपको एक डिफरेंट स्टाइल में जीरा आलू की रेसिपी बता रहे हैं-
सामग्री :
3 उबले आलू
आधा इंच छिला व कद्दूकस किया अदरक का टुकड़ा
एक बारीक कटी हरी मिर्च
2 छोटे चम्मच जीरा
आधी छोटी चम्मच पिसी हींग
1/4 चम्मच हल्दी पाउडर
आधा चम्मच लालमिर्च पाउडर
एक चम्मच धनिया पाउडर
एक चम्मच अमचूर पाउडर या एक चम्मच नींबू रस
बारीक कटी हरी धनिया
स्वादानुसार नमक
तेल
विधि :
उबले हुए आलू छीलकर काट लें। गैस पर एक फ्राई पैन में तेल गर्म करें और फिर उसमें जीरा डालकर भूनें। उसके बाद पिसी हींग, हरी मिर्च और अदरक को तेल में हल्का भून लें। अब इस तैयार मसाले में कटे आलू डालकर 1 मिनट तक चलाएं। इसके बाद सब्जी में हल्दी, लालमिर्च, धनिया पाउडर, अमचूर पाउडर या नींबू रस और नमक मिलाकर अच्छी तरह मिक्स करें। मध्यम आंच पर 5 मिनट तक मसालेदार आलू फ्राई होने दें। बीच-बीच में आलू चलाएं। जैसे ही ये ब्राउन होने लगें तो गैस बंद कर दें और गर्मागर्म पूरी, परांठे या रोटी के साथ परोसें।
सेहत / शौर्यपथ / रोजाना की हुई कई छोटी-छोटी चीजें हमें सेहतमंद रखती हैं। स्वस्थ रहना एक प्रक्रिया है, यानी एक दिन में हम स्वस्थ नहीं हो सकते। जैसे, आप रोजाना दूध पीते हैं, तो इससे न सिर्फ आपको कैल्शियम मिलता है बल्कि आपकी हड्डियां भी मजबूत होती हैं। आज हम आपको दूध की गुडनेस बढ़ाने के लिए एक और उपाय बता रहे हैं, जिसके आपको बहुत फायदे मिलेंगे। आप अगर रात में सोने से पहले दूध में एक चम्मच घी डालकर पिएंगे, तो इससे आपको कई हेल्थ बेनिफिट्स मिलेंगे।
ग्लोइंग स्किन बनाता है
घी और दूध दोनों ही प्राकृतिक मॉइस्चराइजर होते हैं। साथ ही घी त्वचा को अंदर से बाहर तक सुधारते हैं। हर शाम दूध और घी पीने से त्वचा सुस्त और जवां दिखने में मदद कर सकती है।
मेटाबॉलिज्म को बढ़ावा देता है
अपने दूध के गिलास में घी को मिलाकर सेवन करने से आपका मेटाबॉलिज्म तेज हो सकता है और पाचन तंत्र को मजबूती मिल सकती है। यह दूध में घी मिलाकर सेवन करने का सबसे महत्वपूर्ण लाभों में से एक है।
जोड़ों के दर्द को ठीक करता है
घी में के2 हड्डियों को दूध की हाई कैल्शियम सामग्री को अवशोषित करने में मदद करता है, इस प्रकार आपके शरीर की स्वाभाविक रूप से मजबूत हड्डियों को बनाने की क्षमता को मजबूत करता है।
डाइजेशन सिस्टम ठीक रहता है
दूध में घी शरीर के अंदर पाचन एंजाइमों के स्राव को उत्तेजित करके पाचन शक्ति को बढ़ाने में मदद करता है। ये एंजाइम सरल खाद्य पदार्थों में जटिल फूड्स को तोड़ते हैं, जो बेहतर पाचन में मदद करता है।
अच्छी नींद के लिए
घी तनाव कम करके मूड को रिफ्रेश करता है। जब इसे एक कप गर्म दूध में मिलाया जाता है, तो यह नसों को शांत करने और आपको नींद की स्थिति में भेजने के लिए फायदेमंद माना जाता है।
ब्यूटी टिप्स /शौर्यपथ / चेहरे की रंगत बनाए रखने के लिए हम कितने ही उपाय आजमाते रहते हैं।वहीं, ब्यूटी पार्लर में फेशियल, क्लीनिंग के नाम पर कितने ही पैसे हर महीने बर्बाद हो जाते हैं।पार्लर या फिर महंगे प्रॉडक्ट्स का असर तब तक ही रहता है, जब तक हम इन चीजों का इस्तेमाल करते रहते हैं।ऐसे में आज हम आपको चेहरे पर ग्लो के लिए ऐसी घरेलू चीजें बताने जा रहे हैं, जिसका उल्लेख आयुर्वेद में भी मिलता है।स्किन की खूबसूरती बनाए रखने के लिए इन चीजों का इस्तेमाल प्राचीन समय से हो रहा है। आइए, जानते हैं-
शहद
शहद आपकी त्वचा के लिए बहुत फायदेमंद होता है शहद में जैतून का तेल मिलाकर लगाने से त्वचा में निखार आता है और रुखापन भी खत्म हो जाता है।
एलोवेरा
एलोवेरा या एलोवेरा जैल का इस्तेमाल भी आपके चेहरे के लिए फायदेमंद होता है। चेहरे के काले दाग धब्बे मिटाने के लिए एलोवोरा जेल को फेस पर थोड़ी देर लगाएं और फिर हल्के गुनगुने पानी से फेस को साफ कर लें। इससे आपकी स्कीन चमक जाएगी।
नींबू
नींबू में पाए जाने वाले एंटीऑक्सिडेंट और एस्कॉर्विक एसिच आपके चेहरे को चमकदार बनाने का काम करेगा। नींबू के रस को अपने चेहरे पर थोड़ी देर के लिए लगाएं और सूखने पर पानी से धो लें। नीबू आपके चेहरे में ब्लीचिंग एजेंट की तरह काम करेगा।
टमाटर
टमाटर के अंदर ऐंटी ऑक्सीडेंट्स होते हैं, जो त्वचा को पोषण प्रदान करते हैं।टमाटर को बीच से काटकर उसे दोनों हाथ में लेकर चेहरे पर गोलाई में घुमाते हुए कुछ देर तक हल्के हाथों से मलें।फिर 10 मिनट के लिए छोड़ दें।साफ पानी से धोकर चेहरा सुखाएं और मॉइस्चराइजर लगाएं। आपकी स्कीन चमकदार नजर आएगी।
मलाई
एक टीस्पून दूध की मलाई में एक चुटकी हल्दी पाउडर और 1/4 चम्मच गुलाबजल मिलाकर चेहरे पर हलके हाथों से गोलाई में मलें।फिर ऐसे ही छोड़ दें।बीस मिनट बाद चेहरा हल्के गुनगुने पानी या ताजे पानी से धो लें।इसे रोजाना दो महीने तक करने से रंगत साफ होगी और दाग भी दूर हो जाएंगे।
आस्था /शौर्यपथ / शनि 23 मई 2021, दिन शुक्रवार को वक्री होने जा रहे हैं। शनि की उल्टी चाल का सबसे ज्यादा प्रभाव धनु, मकर और कुंभ राशि के जातकों पर पड़ेगा। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, तीनों ही राशि पर शनि की साढ़े साती भी चल रही है। कहा जाता है कि शनि की वक्री चाल में होने से परेशानियों में बढ़ोतरी हो जाती है। ज्योतिषाचार्य शनि की साढ़ेसाती और शनि ढैय्या से पीड़ित जातकों को शनि की वक्री चाल के दौरान सावधान रहने के लिए कहते हैं।
इन राशियों की मुश्किलें बढ़ाएंगे शनिदेव-
धनु, मकर व कुंभ राशि वालों की शनिदेव वक्री चाल के दौरान परेशानियां बढ़ा सकते हैं। शनि की साढ़े साती के तीन चरण होते हैं। धनु राशि वालों पर इसका अंतिम चरण चल रहा है। अंतिम चरण में शनि जाते-जाते कुछ न कुछ लाभ देकर जाते हैं। मकर राशि वालों पर शनि की साढ़ेसाती का दूसरा तो कुंभ राशि वालों पर पहला चरण चल रहा है। कहा जाता है कि शनि की साढ़े साती जिन जातकों की कुंडली में चल रही हो उन्हें इस दौरान कोई नया काम नहीं शुरू करना चाहिए। इसके अलावा धन निवेश से बचना चाहिए।
शनि की ढैय्या का प्रभाव-
शनि ढैय्या मिथुन व तुला राशि वालों पर चल रही है। राहत की बात यह है कि साल 2022 में शनि के राशि परिवर्तन करते ही मिथुन व तुला राशि वालों को शनि ढैय्या से मुक्ति मिल जाएगी। फिलहाल इन दो राशि वालों को भी शनि की व्रकी चाल के दौरान उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ सकता है। सफलता पाने के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ सकती है और मानसिक तनाव का सामना करना पड़ सकता है।
शनि दोष कम करने के उपाय-
शनि प्रकोप से बचने के लिए जातक को हर दिन हनुमान चालीसा का पाठ करना चाहिए। शनि मंत्रों का जाप करने से लाभ होता है। मिट्टी के बर्तन में सरसों के तेल में अपनी परछाई देकर दान करना चाहिए। पीपल के पेड़ पर दीपक जलाना चाहिए।
शनि देव के मंत्र-
शनि के मंत्र हैं- ‘ॐ शं शनैश्चरायै नमः’, ‘ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः’, ‘ॐ शं नो देवीरभिष्टय आपो भवन्तु पीतये। शं योरभि स्रवंतु नः’।
पंचांग पुराण /शौर्यपथ / साल 2021 का पहला चंद्र ग्रहण 26 मई 2021 को लगेगा। चंद्र ग्रहण की घटना ज्योतिषी महत्व होने के साथ-साथ वैज्ञानिक महत्व भी है। साल के पहले चंद्रग्रहण के दिन चंद्रमा वृश्चिक राशि में रहेगा। चंद्र ग्रहण दोपहर 2 बजकर 17 मिनट से शुरू होकर शाम 07 बजकर 19 मिनट पर समाप्त होगा। आमतौर पर चंद्र ग्रहण से 9 घंटे पहले शुरू हो जाता है। लेकिन साल का पहला चंद्र ग्रहण उपछाया ग्रहण है। जिसके कारण इसमें सूतक काल मान्य नहीं होगा।
कहां-कहां दिखेगा 2021 का पहला चंद्रग्रहण-
साल 2021 का पहला चंद्रग्रहण भारत में उपछाया चंद्र ग्रहण के रूप में देखा जा सकेगा। जबकि पूर्वी, एशिया, ऑस्ट्रेलिया, प्रशांत महासागर और अमेरिका में पूर्ण ग्रहण होगा।
चंद्र ग्रहण कैसे लगता है?
चंद्र ग्रहण एक साधारण घटना है। सूर्य के चारों तरफ पृथ्वी और पृथ्वी के चारों तरफ चन्द्रमा चक्कर लगाते-लगाते सूर्य, पृथ्वी और चन्द्रमा जब एक सीध में आ जाते हैं और पृथ्वी की छाया चन्द्रमा पर पड़ने लगती है। खगोल शास्त्रियों के अनुसार इस घटना को चंद्र ग्रहण कहा जाता है।
चंद्र ग्रहण कितने प्रकार के होते हैं?
चंद्र ग्रहण कुल तीन प्रकार के होते हैं।
1. उपच्छाया चंद्रग्रहण
2. पूर्ण चंद्रग्रहण
3. आंशिक चंद्रग्रहण
एक साल में अधिकतम कितने चंद्र ग्रहण लग सकते हैं?
एक कैलेंडर वर्ष के दौरान यानी एक वर्ष में चन्द्र ग्रहण की अधिकतम संख्या 3 हो सकती है।
ग्रहण काल में क्या नहीं करना चाहिए-
1. मान्यता है कि ग्रहण के दौरान तेल लगाना, जल पीना, बाल बनाना, कपड़े धोना और ताला खोलने जैसे कार्य नहीं करने चाहिए।
2. कहा जाता है कि ग्रहण काल में भोजन करने वाले मनुष्य जितने अन्न के दाने खाता है, उसे उतने सालों तक नरक में वास करना पड़ता है।
3. मान्यता है कि ग्रहण काल में सोने से व्यक्ति रोगी होता है।
4. चंद्र ग्रहण में तीन प्रहर का भोजन करना वर्जित माना जाता है।
5. ग्रहण के दिन पत्ते, तिनके, लकड़ी और फूल आदि नहीं तोड़ने चाहिए।
6. ग्रहण काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए।
चंद्र ग्रहण के दौरान क्या करें-
1. ग्रहण शुरू होने से पहले खुद को शुद्ध कर लें। ग्रहण शुरू होने से पहले स्नान आदि कर लेना शुभ माना जाता है।
2. ग्रहण काल में अपने इष्ट देव या देवी की पूजा अर्चना करना शुभ होता है।
3. चंद्र ग्रहण में दान करना बेहद शुभ माना जाता है। ग्रहण समाप्त होने के बाद घर में गंगा जल का छिड़काव करना चाहिए।
4. ग्रहण खत्म होने के बाद एक बार फिर स्नान करना चाहिए। कहते हैं कि ऐसा शुभ फलों की प्राप्ति होती है।
5. ग्रहण काल के दौरान खाने-पीने की चीजों में तुलसी की पत्ती डालनी चाहिए।
लाइफस्टाइल /शौर्यपथ / इस दिन ज्यादातर घरों में हलवा पूड़ी बनाकर नवरात्रि का समापन किया जाता है। मुझे अकसर लगता है कि इतना फैट भरा खाना खाने की आखिर जरूरत क्या है। इस पर मम्मी अकसर डांट देती हैं कि कभी-कभी शरीर को फैट की भी जरूरत होती है। और पूड़ी तुम्हारे पसंदीदा भरवां परांठों से ज्यादा हेल्दी होती है।
यही तर्क देकर मेरी मम्मी अक्सर सुबह नाश्ते में स्टफ परांठे की बजाए पूड़ी बना देती हैं। अब मैंने सोचा क्यों न मम्मी के दावे पर थोड़ी सी रिसर्च कर ली जाए।
आइए पता करते हैं पूड़ी और परांठे में से क्या है बेहतर
पहले जानते हैं परांठे की कैलोरीज?
परांठे खाना सबको पसंद होता है और अगर उसमें कुछ भरावन हो तो यह और भी ज्यादा स्वादिष्ट लगते हैं। जिस तरह अलग-अलग परांठों के विभिन्न स्वाद होते हैं, उसी तरह उनकी कैलोरी भी इनमें डालने वाली सामग्री पर निर्भर करती है जैसे-
आलू परांठे में 201.1 कैलोरी
पनीर परांठे में 238.5 कैलोरी
गोभी परांठे में 186.4 कैलोरी
मूली परांठे में 120 कैलोरी
मेथी परांठे में 90.7 कैलोरी
यदि आप परांठे खाने की शौकीन हैं, तो आपके लिए वज़न घटाना थोड़ा मुश्किल हो सकता है। यदि आप नाश्ते में परांठे का सेवन करती हैं, तो सादा परांठे का सेवन करें या मॉडरेशन में खाएं। परांठे बटर में न सेक कर घी में बनाएं। इसके साथ फैट फ्री दही लें। तभी यह आपके लिए एक अच्छा और हेल्दी विकल्प बन सकता है।
अब पता लगाते हैं पूड़ी की कैलोरीज के बारे में
पूड़ी एक भारतीय व्यंजन है, जिसे आमतौर पर नाश्ते के रूप में खाया जाता है। लोग इसे अक्सर उपवास में या सफर के दौरान खाते हैं। पूड़ी को भारत में विशेष अवसरों और त्योहारों पर भी बनाया जाता है। यह आटे से बनती है और डीप फ्राई की जाती है। इसलिए इसमें, फैट और कार्बोहाइड्रेट की मात्रा ज्यादा होती है।
एक परांठे में 101 से 120 कैलोरी तक होती हैं। जिसमें से 30 कैलोरी कार्बोहाइड्रेट की होती है, प्रोटीन में 5 कैलोरी होती है और शेष कैलोरी वसा की होती है। एक पूड़ी 2,000 कैलोरी के एक मानक वयस्क आहार की कुल दैनिक कैलोरी आवश्यकता का लगभग 5 प्रतिशत प्रदान करता है।
तो पूड़ी और परांठे में क्या है बेहतर
पूड़ी की तुलना में परांठा ज्यादा तेल सोखता है। चूंकि आमतौर पर परांठे को धीमी आंच पर पकाया जाता है। जबकि पूड़ियां कम तेल सोखती हैं, क्योंकि इन्हें तेज़ आंच पर पकाया जाता है और पूड़ी तेल की सतह पर तैरती है।
हालांकि, पूड़ी डीप फ्राई की जाती है, फिर भी यह एक परांठे के मुकाबले कम तेल सोखती है। इसकी वजह इसमें आटे की एक ही परत का होना है। वहीँ पराठा अपनी परतों के भीतर भी तेल सोख लेता है।
मगर यह बात केवल घर पर बनी पूड़ी के बारे में ही कही जा सकती है। बाहर होटलों और ढाबों में मिलने वाली पूड़ी घर पर बनी पूड़ी की तरह हेल्दी नहीं होती। उसे तलने में पुराना तेल इस्तेमाल किया जाता है। घर पर पूड़ी बनाते समय भी यह ध्यान रखें कि तेल को ओवरहीट न करें। एक बार इस्तेमाल होने के बाद तेल का दोबारा इस्तेमाल न करें।
दोनों व्यंजनों में फैट और कार्बोहाइड्रेट की मात्रा ज्यादा होती है। इसलिए, मॉडरेशन में इसका सेवन करना बेहतर है।
शौर्यपथ / कोरोना वायरस की दूसरी लहर खतरनाक रूप ले रही है। हर दिन पूरे देश से केस सामने आ रहे हैं। ऐसे में आज हर व्यक्ति के मन में कोविड19 को लेकर एक डर बैठा हुआ लेकिन मुश्किल दौर में इस डर पर काबू पाते हुए आपको बस कुछ बातों का ध्यान रखना है जिससे कि आपकी इम्युनिटी मजबूत रहे और संक्रमण का खतरा कम हो सके। हमारी कई छोटी-छोटी आदतें कोरोना इंफेक्शन का कारण बन सकती हैं। ऐसी कुछ कॉमन आदतें, हम आपको बता रहे हैं-
बाहर से आकर हाथ न धोना
आप अगर घर के मार्केट भी गए हैं, तो वापस आने के बाद हाथ जरूर धोएं। हाथ न धोकर लोग कोरोना के खतरे को बढ़ा देते हैं। मार्केट में किसी को सामान को छूने या फिर लोगों के सम्पर्क में आने से खतरा बढ़ जाता है।
पैकेट को मुंह से खोलना
आमतौर पर कुछ लोगों की आदत होती है कि हाथ से पैकेट न खोलकर, वे मुंह से पैकेट खोलते हैं। कोरोना इंफेक्शन का कारण यह भी बन सकता है क्योंकि आप नहीं जानते कि सामानों का पैकेट किस-किस व्यक्ति के हाथ से होकर गुजरा है।
बार-बार आंखों को छूना
आंखों पर हाथ लगाना वैसे भी सेहत के लिए ठीक नहीं होता। वहीं, काम के बीच में बार-बार आंखों को छूते रहने से भी इंफेक्शन का खतरा रहता है। इस आदत को छोड़ देने में ही भलाई है।
दिन पर बिस्तर पर रहना या एक्टिविटी न करना
बिस्तर पर बैठकर लगातार काम करते रहना या फिर कोई फिजिकल एक्टिविटी न करना। आपकी इम्युनिटी को कमजोर करती जाती है इससे न सिर्फ आपकी सेहत पर बुरा असर पड़ता है। कोरोना का खतरा भी बढ़ता है।
स्ट्रीट फूड या बाहर से चीजों को लाते ही खाना
आप सब्जी खरीदें या फिर फल। आपको लाते के साथ या बाहर चीजों को नहीं खाना चाहिए। आपको घर आकर चीजों को धोने के साथ हाथ भी जरूर धोना चाहिए, जिससे कि खतरा न बढ़े।
सेहत /शौर्यपथ / सांस लेना जीवन का आधार है इसके बावजूद हम फेफड़ों की हिफाजत के लिए सजग नहीं। हम लंग्स की वजह से सांस लेते हैं और ये सही तरीके से काम करते रहें इसके लिए कोई एफर्ट नहीं करते। कोरोना वायरस लंग्स डैमेज कर रहा है। ऐसे में डॉक्टर्स ब्रीदिंग एक्सरसाइज और प्राणायाम की सलाह दे रहे हैं। अगर अभी तक आपने इस पर ध्यान नहीं दिया है तो अब ब्रीदिंग एक्सरसाइज करके फेफड़ों को मजबूत बनाने की कोशिश कर सकते हैं। ब्रीदिंग एक्सरसाइज से सिर्फ फेफड़े मजबूत ही नहीं होते बल्कि स्ट्रेस भी कम होता है। कई तरीके वजन और फैट कम करने में भी कारगर होते हैं। यहां जानते हैं घर पर ब्रीदिंग एक्सरसाइज करने के आसान तरीके...
उम्र के साथ घटती हैं फेफड़ों की क्षमता
जैसे-जैसे हमारी उम्र बढ़ती जाती है, फेफड़ों की काम करने की क्षमता घटने लगती है। एक्सपर्ट्स बताते हैं कि 20 साल की उम्र से हमारे लंग्स की कैपेसिटी धीरे-धीरे कम होने लगती है। अगर आपको सांस से जुड़ी समस्याएं हैं जैसे क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिसीज तो फेफड़ों की कार्य क्षमता और तेजी से घटती है। कोरोना वायरस लंग्स डैमेज कर रहा है और ऑक्सीजन कम होने पर कई लोगों की मौत की खबरें सामने आ रही हैं। ऐसे में घबराएं नहीं और सजग रहें। आप घर पर ही कुछ ब्रीदिंग एक्सर्साइज करना शुरू कर सकते हैं।
पहला तरीका
किसी सपोर्ट के साथ सीधे बैठ जाएं या पीठ के बल लेट जाएं। एक हाथ छाती पर रखें और दूसरा पेट पर। नाक से सांस लें। सांस लेते वक्त ध्यान रखें कि आपका पेट बाहर की ओर आए और छाती वैसी ही रहे। सांस धीरे-धीरे 2 सेकेंड तक बाहर छोड़ें। इस दौराना आपका पेट अंदर की ओर जाना चाहिए। रिपीट करें।
दूसरा तरीका
ऊपर बताई गई पोजिशन में ही बैठें। नाक से धीरे-धीरे सांस लें। मुंह से धीरे-धीरे सांस बाहर निकालें। ध्यान रहे इस दौरान होंठ से पाउट बनाएं या सीटी बजाने की मुद्रा में हों। आपको सांस लेने में जितना वक्त लगा था, सांस छोड़ने में लगभग दोगुना वक्त लगाएं। रिपीट करें। दिन में 3 बार ऐसा कर सकते हैं।
अनुलोम विलोम
क्रॉस लेग पोजीशन में बैठ जाएं। बाएं नॉस्ट्रिल (नथुने) से सांस लें। इस दौरान दांए नॉस्ट्रिल को अंगूठे से बंद रखें। इस क्रिया को अनुलोम कहते हैं। अब दाएं नॉस्ट्रिल से सांस छोड़ें और बाएं को बंद रखें। इसको विलोम कहते हैं। अब फिर से दाएं नॉस्ट्रिल से सांस लें और प्रक्रिया जारी रखें। ध्यान रखें अंदर सांस लेने और छोड़ने का अनुपात 1:2 होगा।
ब्रीदिंग एक्सरसाइज के ये भी हैं फायदे
-ब्रीदिंग एक्सरसाइज करने से स्ट्रेस कम होता है
-आप रिलैक्स होते हैं
-एकाग्रता बढ़ती है
-एनर्जी लेवल बढ़ता है
-नींद अच्छी आती है
कम होता है बॉडी फैट
PubMed Central में छपी जापान की एक स्टडी के मुताबिक, जिन लोगों ने 'Senobi' ब्रीदिंग टेक्नीक को 1 महीने तक फॉलो किया उनका बॉडी फैट कम हुआ। इस प्रक्रिया में हाथ उठाकर गहरी सांस लेना होता है और ऐसा करते वक्त पीछे की ओर झुकना होता है।
सेहत /शौर्यपथ / धूप में जाने से अगर आपकी त्वचा झुलस गई है या ग्लो चला गया है, तो इसके लिए आपको कोई महंगी क्रीम लेने की जरूरत नहीं है। आप नेचुरल चीजों का इस्तेमाल करके भी स्किन टैनिंग से मुक्ति पा सकते हैं। वहीं, सबसे पहले यह जान लेना जरूरी है कि टैनिंग क्यों होती है? आइए, जानते हैं कैसे पाएं टेनिंग से मुक्ति-
स्किन कैसे होती है टैन
टैनिंग, फोटोडैमेज के खिलाफ बॉडी की नेचुरल सुरक्षा है, जो कि यूवी (UV) रेडिएशन से क्रिएट होता है। वहीं मेलेनिन एक प्राकृतिक पिगमेंट है, जो हमारी बॉडी द्वारा बनाया जाता है और हमें हमारी स्किन का रंग प्रदान करता है। मेलानिन शरीर को प्राकृतिक एसपीएफ (जो आप सनस्क्रीन पर भी देखते हैं) देता है, यही वजह है कि इसे बॉडी सुरक्षा कवच के तौर पर बनाती है। वहीं, सनस्क्रीन से त्वचा को एसपीएफ मिलता है और यह यूवी (UV) किरणों के खिलाफ शरीर को अधिक मेलेनिन उत्पन्न करने के लिए आपके मेलानोसाइट्स को एक्टिव करने में मदद करता है।
कारगर उपाय-
टमाटर
टमाटर को मैश कर लें और इस पेस्ट को चेहरे पर अच्छे से लगाएं। इसें 15 मिनट तक ऐसे ही लगे रहने दें और फिर पानी से धो लें। इस तरीके को हफ्ते में दो बार दोहराएं। ये स्किन से टैनिंग को दूर कर उसे ब्राइटर और ग्लोइंग बनाएंगा।
बेसन
थोड़े से बेसन में चुटकी भर हल्दी मिला लें। एक बर्तन लें और उसमें तीन छोटे चम्मच बेसन, एक चम्मच ओलिव ऑयल और नींबू का रस मिलाएं। इसमें चुटकी भर हल्दी भी मिला लें। इन सब को अच्छे से मिलाएं और चेहरे पर लगाएं। इसे 15 मिनट तक लगा रहने दें और फिर कम गर्म पानी से धो लें। ऐसा हफ्ते में दो बार करें।
शहद
एक छोटे चम्मच शहद में दो चम्मच दही मिलाएं। इन्हें अच्छे से मिलाकर चेहरे पर लगाएं और 15 मिनट के लिए ऐसे ही छोड़ दें। अब कम गर्म पानी से चेहरा धो लें। बेहतर रिजल्ट के लिए ऐसा रोजाना करें।
एलोवेरा जेल
सोने से पहले एलोवेरा को स्किन पर जरूर लगाएं। इसकी पतली लेयर को चेहरे पर लाएं और अगली सुबह धोएं। बेहतर रिजल्ट के लिए ऐसा रोजाना करें।
खीरा
खीरे को अच्छे से ब्लैंड कर लें और इसके जूस को दूध में मिला लें। इसके पेस्ट को चेहरे और हाथों पर लगाएं। इसे 15 से 20 मिनट तक लगा रहने दें और धो लें। ऐसा दिन में दो बार करें और जल्द ही बेहतर रिजल्ट पाएं।
आज रामनवमी पर ऐसे करें हवन, नोट कर लें पूजन सामग्री, विधि और हवन का शुभ समय
नवरात्रि का नौवां दिन मां सिद्धिदात्री की इस आसान विधि से करें पूजा, जानें माता रानी का भोग, शुभ रंग और पूजा मंत्र
आस्था /शौर्यपथ / चैत्र नवरात्रि 2021 का आज आखिरी दिन है। नवरात्रि की नवमी तिथि को मां सिद्धिदात्री की पूजा-अर्चना की जाती है। मान्यता है कि मां सिद्धिदात्री भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करती हैं और उन्हें यश, बल और धन भी प्रदान करती हैं। शास्त्रों में मां सिद्धिदात्री को सिद्धि और मोक्ष की देवी माना जाता है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, मां सिद्धिदात्री के पास अणिमा, महिमा, प्राप्ति, प्रकाम्य, गरिमा, लघिमा, ईशित्व और वशित्व यह 8 सिद्धियां हैं।
मां सिद्धिदात्री की पूजा विधि-
नवरात्रि की नवमी तिथि को माता सिद्धिदात्री को प्रसाद, नवरस युक्त भोजन, नौ प्रकार के पुष्प और नौ प्रकार के ही फल अर्पित करने चाहिए। सर्वप्रथम कलश की पूजा व उसमें स्थपित सभी देवी-देवताओं का ध्यान करना चाहिए। इसके बाद माता के मंत्रो का जाप कर उनकी पूजा करनी चाहिए। इस दिन भक्तों को अपना सारा ध्यान निर्वाण चक्र की ओर लगाना चाहिए। यह चक्र हमारे कपाल के मध्य में स्थित होता है। ऐसा करने से भक्तों को माता सिद्धिदात्री की कृपा से उनके निर्वाण चक्र में उपस्थित शक्ति स्वतः ही प्राप्त हो जाती है।
मां सिद्धिदात्री का ऐसा है स्वरूप-
मां सिद्धिदात्री महालक्ष्मी के समान कमल पर विराजमान हैं। मां के चार हाथ हैं। मां ने हाथों में शंख, गदा, कमल का फूल और च्रक धारण किया है। मां सिद्धिदात्री को माता सरस्वती का रूप भी मानते हैं।
नवरात्रि के नौवें दिन का शुभ रंग-
नवरात्रि की नवमी तिथि को बैंगनी या जामुनी रंग पहनना शुभ होता है। यह रंग अध्यात्म का प्रतीक होता है।
नवमी तिथि के दिन कन्या पूजन अति उत्तम-
ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक, नवमी तिथि के दिन कन्या पूजन करना अति उत्तम माना जाता है। कहते हैं कि नवरात्रि के आखिरी दिन कन्या पूजन करने से मां सिद्धिदात्री प्रसन्न होती हैं।
मां सिद्धिदात्री का भोग-
मान्यता है कि मां सिद्धिदात्री को मौसमी फल, चना, पूड़ी, खीर, नारियल और हलवा अतिप्रिय है। कहते हैं कि मां को इन चीजों का भोग लगाने से वह प्रसन्न होती हैं।
मां सिद्धिदात्री का पूजा मंत्र-
सिद्धगन्धर्वयक्षाद्यैरसुरैरमरैरपि,
सेव्यमाना सदा भूयात सिद्धिदा सिद्धिदायिनी।
आज रामनवमी पर ऐसे करें हवन, नोट कर लें पूजन सामग्री, विधि और हवन का शुभ समय
इस साल राम नवमी 21 अप्रैल को मनाई जा रही है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, रामनवमी के दिन ही भगवान राम ने राजा दशरथ के घर जन्म लिया था। रामनवमी के दिन भगवान श्रीराम की पूजा करने के साथ हवन भी किया जाता है। कहते हैं कि रामनवमी के दिन हवन करने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है। जानिए रामनवमी पर हवन-पूजन का शुभ मुहूर्त, हवन सामग्री और विधि-
राम नवमी पर हवन का शुभ मुहूर्त-
हिंदू पंचांग के अनुसार, 21 अप्रैल को रामनवमी देर रात 12 बजकर 43 मिनट से शुरू होगी। जो कि 22 अप्रैल की सुबह 12 बजकर 35 मिनट तक रहेगी।
पूजा मुहूर्त- 21 अप्रैल के दिन सुबह 11 बजकर 2 मिनट से दोपहर एक बजकर 38 मिनट तक रहेगा।
पूजा की कुल अवधि- 2 घंटे 36 मिनट।
हवन सामग्री-
रामनवमी पर हवन सामग्री में नीम, पंचमेवा, जटा वाला नारियल, गोला, जौ, आम की लकड़ी, गूलर की छाल, चंदन की लकड़ी, अश्वगंधा, मुलेठी की जड़, कपूर, तिल, चावल, लौंग, गाय की घी, इलायची, शक्कर, नवग्रह की लकड़ी, आम के पत्ते, पीपल का तना, छाल, बेल, आदि को शामिल करना चाहिए।
हवन विधि-
राम नवमी के दिन व्रती को सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान आदि से निवृत्त होकर साफ- स्वच्छ वस्त्र पहनने चाहिए। इसके बाद हवन के लिए साफ-सुथरे स्थान पर हवन कुंड का निर्माण कर करना चाहिए। अब गंगाजल का छिड़काव कर सभी देवताओं का आवाहन करें। अब हवन कुंड में आम की लकड़ी और कपूर से अग्नि प्रज्जवलित करें। इसके बाद हवन कुंड में सभी देवी- देवताओं के नाम की आहुति डालें। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार हवनकुंड में कम से कम 108 बार आहुति डालनी चाहिए। हवन समाप्त होने के बाद भगवान राम और माता सीता की आरती उतारनी चाहिए।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
