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सेहत /शौर्यपथ /खूबसूरत निखरी त्वचा पाने के लिए महिलाएं क्या कुछ नहीं करती हैं। महंगे पार्लर से लेकर क्रीम तक ट्राई करने में कोई कसर नहीं छोड़ती हैं। ऐसे में अगर आपको 5 ऐसे उपायों के बारे में पता चले जिन्हें रोजाना करने से आपको पार्लर जैसा निखार और रिंकल फ्री स्किन घर बैठे ही मिल जाए तो ? जी हां और ये उपाय हैं ये 5 योगासन जो चेहरे की मसल्स को टोन करके आपके चेहरे को प्राकृतिक चमक देने में आपकी मदद करेंगे। आइए जानते हैं इनके बारे में।
हस्त उत्तानासन-
हस्त उत्तानासन करने के लिए सबसे पहले अपनी चटाई पर सीधे खड़े होकर सांस छोड़ें। अब एक श्वास के साथ धीरे-धीरे अपने हाथों को उठाएं और पीछे की ओर झुकना शुरू करें। कुछ देर इसी मुद्रा में रहें।अब सांस छोड़ते हुए इस आसन से बाहर आएं। ध्यान रखें हाई ब्लड प्रेशर के रोगियों को इस आसन को करने से बचना चाहिए।
पदानुष्ठान आसन-
पदानुष्ठान आसन करने के लिए सबसे पहले सीधे खड़े होकर श्वास लें। अब अपने दोनों हाथों को ऊपर उठाकर धीरे-धीरे सांस छोड़ते हुए नीचे की ओर झुकें और अपने पैरों के अंगूठे को पकड़ने की कोशिश करें। कुछ देर इसी मुद्रा में रुकें और श्वास लेते हुए धीरे-धीरे ऊपर आएं। अगर शरीर ज्यादा न झुक पा रहा हो तो उस सीमा तक जाएं, जिसमें आप सहज महसूस करते रहे हो। अब धीरे-धीरे खुद को फर्श को छूने की मुद्रा में लाते हुए अपनी पैर की अंगुली पकड़ें।
शलभासन-
शलभासन करने के लिए सबसे पहले पेट के बल लेटकर अपने पैरों और हाथों को फैलाएं। अब श्वास लेते हुए अपने हाथों और पैरों को उठाएं। इस बात को सुनिश्चित करें कि आप अपने घुटनों और कोहनी को मोड़ नहीं। कुछ समय के लिए इसी मुद्रा में रहें। ऐसा करते समय आप अपने चेहरे पर खून का प्रेशर अनुभव करेंगे। इस योगासन की मदद से दिमाग और चेहरे की तरफ खून का संचार अच्छा होता है।
अधोमुखश्वानासन-
अधोमुखश्वानासन करने के लिए सबसे पहले नीचे की ओर स्वान की तरह झुके। इसे करने के लिए वज्रासन की तरह चटाई पर बैठें। अपने हाथों को इस तरह सामने रखें कि आपकी पीठ फर्श के समानांतर हो।अब अपने पेल्विक एरिया को ऐसे छोड़ें और उठाएं कि आप एक पहाड़ी का आकार बना सकें। कुछ देर इसी मुद्रा में रहे जब तक आप अपने चेहरे पर खून का प्रेशर महसूस नहीं करते हैं। इस मुद्रा से बाहर आने के लिए अपने घुटनों को मोड़कर वज्रासन में आकर सांस लें और सांस छोड़ें।
धनुरासन-
धनुरासन करने के लिए सबसे पहले अपने पेट के बल लेटकर अपने पैरों को ऐसे मोड़ें कि आप अपनी एड़ियों को पकड़ सकें। अब पेट पर आने वाले दबाव के साथ अपने शरीर के ऊपरी और निचले हिस्से को अंदर की ओर उठाएं। ऐसा करते समय अपनी सांस को रोकते हुए कुछ देर इसी मुद्रा में रहें। सांस छोड़ें और इस मुद्रा को जारी रखें।
शौर्यपथ / जब बात सेहत का ख्याल रखने की आती है, तो हर व्यक्ति सतर्क हो जाता है। वैसे भी कोरोना काल में हर व्यक्ति अपने सेहत के प्रति जागरूक एंव सावधान हो गया है। लेकिन सेहतमंद जिंदगी के लिए जरूरी है। सही डाइट का होना। किसी भी बीमारी से बचाव के लिए हेल्दी डाइट का ख्याल रखना बेहद जरूरी है। शरीर में पोषक तत्वों की कमी न हो इसके लिए जरूरी है, बैलेंस्ड डाइट का सेवन करें। इसके साथ ही सुबह की शुरूआत एक ऐसी ड्रिंक के साथ करें जो आपके स्वास्थ्य के लिए बहुत जरूरी हैं। वो क्या है आइए जानते हैं
नींबू और अदरक
नींबू में विटामिन सी पाया जाता है। इससे इम्युन सिस्टम मजबूत होता है, जिससे बीमारियां दूर रहती है। वहीं अदरक में एंटी इन्फ्लेमेट्री गुण पाए जाते है। जिससे पाचन शक्ति दुरूस्त रहती है। इसलिए सुबह की शुरूआत नींबू और अदरक के पानी से जरूर करें।
चुकंदर और तुलसी
चुकंदर स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद होता है। इसे विटामिन और मिनरल्स का स्टोर हाउस माना जाता है। वही तुलसी औषधीय गुणों से भरपूर है। इसके सेवन से आप सेहतमंद रह सकते है। दिल को स्वस्थ्य बनाएं रखने के लिए चुकंदर का सेवन बहुत फायदेमंद होता है।
आंवला, हल्दी और काली मिर्च
आंवला स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद होता है। इसमें मौजूद विटामिन सी रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करता है और बिमारियों से लड़के की शक्ति देता है। वहीं हल्दी एंटी ऑक्सीडेंट गुण पाएं जाते हैं। वहीं काली मिर्च में पिपरिन नामक तत्व होता है जो फेफड़ों को साफ करने में मदद करता है।
टिप्स ट्रिक्स /शौर्यपथ /घनी पलके आपकी आंखों की खूबसूरती में चार चांद लगा देती है। हर महिला की ख्वाहिश होती है की उनकी आंखें खूबसूरत और बड़ी नजर आए। जिसके लिए हम मेकअप का इस्तेमाल कर अपनी आंखों की पलकों को घना करते है,
लेकिन क्या आप जनाते हैं कि पलकों को लंबा और घना बनाने के लिए आपको मस्कारा या किसी ब्यूटी प्रोडक्ट की जरूरत नहीं है आप अपनी डाइट में कुछ चीजों को शामिल कर अपनी पलको को घना बना सकते है। आइए जानते हैं।
यदि आप अंडे का सेवन करते है, तो इससे आपकी आंखों की पलके लंबी होने लगती है। पलकें शरीर के कैरेटिन से बनती हैं, जिसे एक तरह का प्रोटीन माना जाता है, अधिक अमिनो एसिड वाला खाना खाने से आप शरीर में कैरेटीन की मात्रा बढ़ा सकते हैं।
ड्राई फ्रूट्स के सेवन से कई स्वास्थ्य लाभ होते है ये बात हम सभी जानते हैं।
ड्राई फ्रूट्स खाने से आपकी पलकें जल्दी ही लंबी होने लगती हैं। इसलिए इनका सेवन जरूर करें।
पलकों को लंबा बनाने की ख्वाहिश है, तो मशरूम खाना शुरू कर दीजिए। क्योंकि इसके सेवन से आपकी पलके लंबी और घनी होती है।
मशरूम में विटामिन B3 भरपूर मात्रा में होता है जिसे खाने से आपके शरीर का कैरेटीन बढ़ने लगता है। इसलिए मशरूम को अपनी डाइट में जरूर शामिल करें।
जिन फलों और सब्जियों में विटामिन सी और विटामिन ए पाया जाता है, उनके नियमित
सेवन से आप घनी पलकें पा सकते है। पलकों को लंबा, घना और मजबूत बनाने के लिए आपको इन फलों का सेवन जरूर करना चाहिए, जिनमें विटामिन ए और सी होता है।
इसके अलावा आप रात में सोने से पहले ऑलिव ऑयल का इस्तेमाल कर सकती है। इसके लिए आप सोने से पहले चेहरे को वॉश करके अपनी आंखों की पलकों पर ऑलिव ऑयल लगा सकते।
आस्था /शौर्यपथ / भगवान शिव कैलाश पर्वत पर रहते थे। वहीं रहकर वे कई जगह आकाश मार्ग से भ्रमण करते थे। इस दौरान विशेष परिस्थितियों में जहां भी उन्होंने धरती पर कदम रखे, वहां उनके पैरों के निशान बन गए। भारत में ऐसे कई निशान हैं। भगवान शिव के पैरों के निशान के दर्शन करना अपने आप में अद्भुत अनुभव होता है। आओ, जानते हैं कि कहां-कहां भगवान शिव ने धरती पर अपने कदम रखे। उनमें से कुछ प्रमुख 6 पद चिन्हों के बारे में प्रस्तुत है संक्षिप्त में जानकारी।
1. श्रीलंका में शिव के पद : श्रीलंका में एक पर्वत है जिसे श्रीपद चोटी भी कहा जाता है। अंग्रेजों के शासनकाल के दौरान इसका नाम उन्होंने आदम पीक रख दिया था। जैसे गोरीशंकर का नाम बदलकर एवरेस्ट रख दिया। हालांकि इस आदम पीक का पुराना नाम रतन द्वीप पहाड़ है। इस पहाड़ पर एक मंदिर बना है। हिन्दू मान्यता के अनुसार यहां देवों के देव महादेव शंकर के पैरों के निशान हैं इसीलिए इस स्थान को सिवानोलीपदम (शिव का प्रकाश) भी कहा जाता है।
यह पदचिन्ह 5 फिट 7 इंच लंबे और 2 फिट 6 इंच चौडे हैं। यहां 2,224 मीटर की ऊंचाई पर स्थित इस 'श्रीपद' के दर्शन के लिए लाखों भक्त और सैलानी आते हैं। यहां से एशिया का सबसे अच्छा सूर्योदय भी देखा जा सकता है। ईसाइयों ने इसके महत्व को समझते हुए यह प्रचारित कर दिया कि ये संत थॉमस के पैरों के चिह्न हैं। बौद्ध संप्रदाय के लोगों के अनुसार ये पद चिह्न गौतम बुद्ध के हैं। मुस्लिम संप्रदाय के लोगों के अनुसार पद चिह्न हजरत आदम के हैं। कुछ लोग तो रामसेतु को भी आदम पुल कहने लगे हैं।
सवाल यह उठता है कि इस क्षेत्र में इतने बड़े पद के चिह्न बुद्ध या संत थॉमस के कैसे हो सकते हैं? क्या उनके पैर एड़ी से लेकर अंगूठे या पंजों तक एक सामान्य आदमी के पैरों से पांच गुना बड़े थे?
इस पहाड़ के बारे में कहा जाता है कि यह पहाड़ ही वह पहाड़ है, जो द्रोणागिरि का एक टुकड़ा था और जिसे उठाकर हनुमानजी ले गए थे। श्रीलंका के दक्षिणी तट गाले में एक बहुत रोमांचित करने वाले इस पहाड़ को श्रीलंकाई लोग रहुमाशाला कांडा कहते हैं। हालांकि कुछ लोग कहते हैं कि वह द्रोणागिरि का पहाड़ था। द्रोणागिरि हिमालय में स्थित था। कहते हैं कि हनुमानजी हिमालय से ही यह पहाड़ उठाकर लाए थे, बाद में उन्होंने इसे (रहुमाशाला कांडा) को यहीं छोड़ दिया। मान्यताओं के अनुसार यह द्रोणागिरि पहाड़ का एक टुकड़ा है।
2. थिरुवेंगडू में है रुद्र पद : तमिलनाडु के थिरुवेंगडू क्षेत्र में श्रीस्वेदारण्येश्वर का मंदिर है, जहां भगवान शिव के पद चिह्न हैं जिसे 'रुद्र पदम' कहा जाता है। यह क्षेत्र नागपट्टिनम जिले में कुम्भकोणम से 59 किलोमीटर, मइलादुतुरै से 23 किलोमीटर और श्रीकाली पूम्पुहार रोड से 10 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व में स्थित है।
3. जागेश्वर में हैं शिव के पद चिह्न : उत्तराखंड के अल्मोड़ा से 36 किलोमीटर दूर जागेश्वर मंदिर की पहाड़ी पर लगभग साढ़े 4 किलोमीटर दूर जंगल में एक ऐसा स्थान है, जहां शिव के पद चिह्न को साक्षात देखा जा सकता है। मान्यता है कि जब पांडव स्वर्ग जा रहे थे तब उनकी इच्छा शिवजी के दर्शन और उनके सान्निध्य में रहने की हुई, लेकिन शिवजी कैलाश पर्वत जाकर ध्यान करना चाहते थे। पांडव इसके लिए राजी नहीं हुए। तब शिवजी ने भीम से विश्राम करने के लिए कहा और वे चकमा देकर कैलाश चले गए। जहां से उन्होंने कैलाश के लिए प्रस्थान किया था वहां उनके एक पैर का चिह्न बना हुआ है।
कहते हैं कि उन्होंने अपना दूसरा पैर कैलाश मानसरोवर क्षेत्र में रखा था। हालांकि उस पैर के बारे में कोई जानकारी नहीं है कि वह कहां रखा था। यह निशान करीब 1 फुट लंबा है जिसमें अंगूठे और अंगुलियों के निशान भी स्पष्ट रूप से देखे जा सकते हैं। यह निशान पत्थर पर काफी गहरा बना हुआ है। जानकार लोग कहते हैं कि एड़ी का यहां दबाव होने के कारण यह पता चलता है कि दूसरा पैर उठा हुआ होगा। जब कोई पैर जोर से रखा जाता है तो पीछे की ओर गहरा निशान हो जाता है।
5,000 वर्ष पूर्व मोक्ष प्राप्ति के लिए पांडवों को शिवजी ने दर्शन दिए थे। भगवान शिव भीम के साथ काफी दिनों तक रहे और वे चाहते थे कि भीम और अन्य पांडव अब चले जाएं लेकिन पांडव जब इसके लिए राजी नहीं हुए तो भगवान शिव उन्हें चकमा देकर कैलाश चले गए थे। पद चिह्न के पास यहां भीम का एक मंदिर बना हुआ है। मंदिर में मूर्ति नहीं है। पहले यहां भीम की मूर्ति होती थी, लेकिन अब वह गायब हो गई या उसे कोई चुरा ले गया? यह कोई नहीं जानता। 8वीं सदी में एक राजा ने यह मंदिर बनवाया था। अग
4. शिव पद चिन्ह थिरूवन्नामलाई : शिव के यह निशान तमिलनाडु राज्य के थिरूवन्नामलाई में एक स्थान पर हैं।
5. रुद्रपद तेजपुर, असम : शिव के पैरों के यह निशान असम के तेजपुर में ब्रह्मपुत्र नदी के पास स्थित रुद्रपद मंदिर में स्थित है। यहां उनके दाएं पैर का निशान है।
6. शिवपद, रांची : झारखंड के रांची में पहाड़ी पर स्थित नाग मंदिर में स्थित है। तीर्थ यात्रियों और पर्यटकों के लिए यह मंदिर आकर्षण का केंद्र हैं जहां श्रावण माह में एक नाग मंदिर में ही डेरा डाल देता हैं। इसे देखने के लिए भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ती है।
दरअसल, रांची रेलवे स्टेशन से 7 किलो मीटर की दुरी पर ‘रांची हिल’ पर शिवजी का अति प्राचीन मंदिर स्थित है जिसे की पहाड़ी मंदिर के नाम से जाना जाता है। यह मंदिर शहीद क्रांतिकारियों से भी जुड़ा हुआ है। पहाड़ी बाबा मंदिर का पुराना नाम टिरीबुरू था जो आगे चलकर ब्रिटिश हुकूमत के समय फांसी टुंगरी में परिवर्तित हो गया क्योकि अंग्रेजों के राज में देश भक्तों और क्रांतिकारियों को यहां फांसी पर लटकाया जाता था।
पहाड़ी बाबा मंदिर परिसर में मुख्य रूप से सात मंदिर है। भगवान शिव का मंदिर, महाकाल मंदिर, काली मंदिर, विश्वनाथ मंदिर, हनुमान मंदिर और नाग मंदिर। पहाड़ी पर जितने भी मंदिर बने हैं उनमे नागराज का मंदिर सबसे प्राचीन है। माना जाता है की छोटा नागपुर के नागवंशियों का इतिहास यही से शुरू हुआ है। ऐसी मान्यता हैं कि यहां पर शिव ने अपने पैर रखे थे।
आस्था /शौर्यपथ /देशभर में जो ज्योर्तिलिंग है वे सभी स्वंभू है परंतु पत्थर के शिवलिंग के अलावा शिवलिंग कई प्रकार और पदार्थ या धातु से बनाए जाते हैं। शिवपुराण अनुसार भगवान विष्णु ने पूरे जगत के सुख और कामनाओं की पूर्ति के लिए भगवान विश्वकर्मा को अलग-अलग तरह के शिवलिंग बनाकर देवताओं को देने की आज्ञा दी थी। विश्वकर्मा जी ने अलग-अलग पदार्थों, धातु व रत्नों से शिवलिंग बनाए थे। सभी शिवलिंग को पूजने या उचित स्थान पर रखने का महत्व और उद्देश्य अलग अलग है। पारद शिवलिंग देश में कई स्थानों पर विराजित हैं। इसे पारदेश्वर महादेव कहते हैं। आओ जानते हैं पारद शिवलिंग के बारे में संक्षिप्त जानकारी।
1. पारद को मरक्यूरी (Mercury) कहते हैं। यह पारा होता है। पारे के बारे में तो प्राय: आप सभी जानते होंगे कि पारा ही एकमात्र ऐसी धातु है, जो सामान्य स्थिति में भी द्रव रूप में रहता है। मानव शरीर के ताप को नापने के यंत्र तापमापी अर्थात थर्मामीटर में जो चमकता हुआ पदार्थ दिखाई देता है, वही पारा धातु होता है। पारद शिवलिंग इसी पारे से निर्मित होते हैं। पारे को विशेष प्रक्रियाओं द्वारा शोधित किया जाता है जिससे वह ठोस बन जाता है फिर तत्काल उसका शिवलिंग बना लिया जाता है। यह प्रक्रिया बड़ी ही जटिल रहती है।
देवता, असुर और मानव के लिए अलग-अलग हैं शिवलिंग, जानिए अद्भुत जानकारी
2. पारद शिवलिंग के महत्व का वर्णन ब्रह्मपुराण, ब्रह्मवेवर्त पुराण, शिव पुराण, उपनिषद आदि अनेक ग्रंथों में किया गया है। रुद्र संहिता में यह विवरण प्राप्त होता है कि रावण रसायन शास्त्र का ज्ञाता और तंत्र-मंत्र का विद्वान था। उसने भी रसराज पारे के शिवलिंग का निर्माण एवं पूजा-उपासना कर शिवजी को प्रसन्न किया था।
3. पारद शिवलिंग अक्सर घर, ऑफिस, दूकान आदि जगहों रखा जाता है।
4. इस शिवलिंग की पूजा अर्चना करने से जीवन में सुखशांति और सौभाग्य प्राप्त होता हैं।
5. पारद शिवलिंग से धन-धान्य, आरोग्य, पद-प्रतिष्ठा, सुख आदि भी प्राप्त होते हैं।
6. नवग्रहों से जो अनिष्ट प्रभाव का भय होता है, उससे मुक्ति भी पारद शिवलिंग से प्राप्त होती है।
7. पारद शिवलिंग की भक्तिभाव से पूजा-अर्चना करने से संतानहीन दंपति को भी संतानरत्न की प्राप्ति हो जाती है।
8. 12 ज्योतिर्लिंग के पूजन से जितना पुण्यकाल प्राप्त होता है उतना पुण्य पारद शिवलिंग के दर्शन मात्र से मिल जाता है।
9. पारद शिवलिंग बहुत ही पुण्य फलदायी और सौभाग्यदायक होते हैं।
10. पारद शिवलिंग से अकाल मृत्यु का भय समाप्त हो जाता है।
- ग्राम टेड़ेसरा की बालिकाओं ने लोकवाणी सुनी
- राजनांदगांव की श्रीमती रेणुका सोनी एवं श्रीमती रितु सिन्हा ने मुख्यमंत्री से अपनी बातें साझा की
राजनांदगांव / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की मासिक रेडियोवार्ता लोकवाणी को आज विकासखंड राजनांदगांव के ग्राम टेड़ेसरा की बालिकाओं, बुजुर्ग एवं महिलाओं ने सुना। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि ग्रामीण महिलाओं की उन्नति और उनकी सूझबूझ का विस्तार बहुत उम्मीद जगाने वाला है। छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान के अंतर्गत प्रदेश में 20 लाख 2 हजार गरीब परिवारों की 1 लाख 85 हजार महिलाएं स्व सहायता समूह से जुड़ गई है और एक से बढ़कर एक कार्य किए जा रहे है। अपनी मौलिकता, स्थानीय स्तर पर उपलब्ध कौशल, और संसाधनों का उपयोग जिस खूबसूरती से कर रहे हैं, उसकी जितनी तारीफ की जाए, वह कम है। वास्तव में आप लोगों ने मातृशक्ति शब्द को सार्थक करके दिखाया है। साढ़े 3 हजार बहने बैंक सखी के रूप में चलता-फिरता बैंक बन गई है। उन्होंने बताया कि महिला स्वसहायता समूह की प्रतिभा, लगन और मेहनत को देखते हुए, नये बजट में रूरल इंडस्ट्रियल पार्क और सी-मार्ट स्टोर्स जैसी नई अवधारणाा को शामिल किया है। छत्तीसगढ़ में छोटी-छोटी पूंजी और थोड़ी-थोड़ी उद्यमिता को मिलाकर एक नई आर्थिक क्रांति का जन्म होगा। यह आर्थिक क्रांति विकास का एक टिकाऊ मॉडल होगा।
विकासखंड राजनांदगांव के मोर मयारू संगी लोक संस्कृति ग्राम टेड़ेसरा के संचालक नरेन्द्र साहू ने कहा कि मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत सामान्य जोड़े के लिए सहायता राशि 15 हजार रूपए से बढ़ाकर 25 हजार रूपए और दिव्यांगजनों के लिए 50 हजार रूपए से बढ़ाकर 1 लाख रूपए की है। मुझे यह जानकारी आज मिली और बहुत खुशी हुई। श्रीमती गोमती बाई साहू ने कहा कि बालिकाओं के लिए रोजगार के बहुत अच्छे अवसर है। यह सुनकर बहुत अच्छा लगा। स्कूल में अध्ययनरत बालिका पूनम कुर्रे ने बताया कि वे डॉक्टर बनाना चाहती हैं और लोकवाणी सुनकर उन्हें अच्छा पढऩे एवं मेहनत करने की प्रेरणा मिली है। वहीं खिलेश देशमुख एवं तिलेश साहू ने बताया कि वे नर्स बनना चाहती हैं। लोकवाणी सुनकर बुजुर्ग माता श्रीमती प्रेमवती साहू, सारिका कंवर, योगिता साहू, मधु साहू साहित अन्य बच्चों ने हार्दिक खुशी जाहिर की।
राजनांदगांव जिले के शीतला मंदिर वार्ड 25 की श्रीमती रेणुका सोनी ने भी अपनी बातें मुख्यमंत्री से साझा की-
श्रीमती रेणुका सोनी ने बताया कि जब वे गर्भवती थी, तब उन्हें खून की कमी थी और उन्हें अपने होने वाले बच्चे की चिंता थी। कोरोना वायरस की वजह से शहर में लॉकडाऊन था और खाने-पीने के सामान के लिए दिक्कत आ रही थी। ऐसे मुश्किल समय में मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान के माध्यम से आंगनबाड़ी की दीदी हमारे घर तक आकर सुखा राशन देने लगी। जिससे मुझे बहुत राहत मिली और मेरी चिंता दूर हुई। आंगनबाड़ी वाली दीदी समय-समय मेरे घर आकर मेरे स्वास्थ्य की भी जानकारी लेती थी। आपकी इस योजना से मैं लाभान्वित हुई। जिसका परिणाम यह है कि मेरे घर एक स्वस्थ बच्चे का जन्म हुआ है और मैं स्वस्थ हूं। इसके लिए आपका हृदय से धन्यवाद और आभार कि ऐसे कठिन समय में आपने हम माताओं का ध्यान रखा।
डोंगरगांव विकासखंड के ग्राम रामपुर की श्रीमती रितु सिन्हा ने मुख्यमंत्री से अपने मन की बात साझा की-
श्रीमती रितु सिन्हा ने बताया कि मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान से मुझे बहुत फायदा मिला है। उन्होंने बताया कि जब वे गर्भवती थी। तब उन्हें खून की कमी थी। मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान के तहत आंगनबाड़ी कार्यकर्ता दीदी कोरोना काल में सुखा राशन देती थी। जिससे खून की कमी दूर हुई और एक स्वस्थ्य बच्चे का जन्म हुआ है। उन्होंने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान से मेरे घर-आंगन में खुशहाली बिखर गई। इसके लिए उन्होंने मुख्यमंत्री को गाड़ा-गाड़ा बधाई दी।
टिप्स ट्रिक्स /शौर्यपथ /कभी-कभी ऐसा होता है कि हमें बहुत तेज भूख लग जाती है और हम उस वक्त हमें जो भी उपलब्ध होता है, वो खाने लग जाते हैं लेकिन ऐसा करना आपके लिए घातक हो सकता है। आयुर्वेद के मुताबिक तेज भूख लगने पर कुछ ऐसी चीजें है, जिन्हें नहीं खाना चाहिए।आइए, जानते हैं कौन-सी हैं वो चीजें-
अमरुद
अमरुद एक ऐसा फल है, जिसे अलग-अलग स्थितियों में खाने पर अलग-अलग परिणाम देखने को मिलते हैं यानी अगर आप सर्दियों में सुबह के वक्त खाली पेट अमरुद खाएंगे, तो आपको पेट दर्द की शिकायत हो सकती है। वहीं, गर्मी में खाली पेट अमरूद खाएंगे, तो यह फायदा देता है। ऐसे में आपको खाली पेट अमरूद नहीं खाना चाहिए।
सेब
सर्दियों में खाली पेट सेब खाने से बीपी बढ़ सकता है, अगर सुबह सबसे पहले यानी बिना कुछ खाए आप सेब खा लेते हैं, तो इस दिक्कत का सामना आपको करना पड़ सकता है लेकिन गर्मी में आप खाली पेट सेब खा सकते हैं।
टमाटर
टमाटर की तासीर गर्म होती है। इसे आप सर्दी के मौसम में तो खाली पेट खा सकते हैं लेकिन गर्मी के मौसम में ऐसा करने पर पेट में या सीने में जलन की समस्या हो सकती है। आपको सुबह के समय टमाटर खाने से परहेज करना चाहिए।
चाय-कॉफी
चाय या कॉफी को खाली पेट पीने से बचना चाहिए।आप चाय या कॉफी को बिस्किट, ब्रेड के साथ ले सकते हैं लेकिन खाली पेट या तेज भूख लगने पर सिर्फ चाय-कॉफी न लें, इससे आपके पेट में गैस बन सकती है।
दही
बहुत से लोग ऐसे होते हैं, जिन्हें दही फायदे की जगह पर हानि पहुंचा देती है।ऐसे में दही को सुबह के समय खाली पेट खाने से बचना चाहिए, वर्ना आपकी सेहत बिगड़ सकती है।
योग /शौर्यपथ / बहुत से लोग ऐसे होते हैं, जिन्हें मोटापे की समस्या ज्यादा परेशान नहीं होते लेकिन उनकी हिप्स, थाइस, टमी के आसपास चर्बी जम जाती है, जिसकी वजह से वो फिट नहीं नजर आते।ऐसे में जिम जाने की बजाय ज्यादातर लोग घरेलू उपाय या वर्कआउट करके इस समस्या से छुटकारा पाना चाहते हैं। आप भी अगर इस समस्या से जूझ रहे हैं, तो हम आपको बता रहे हैं कुछ ऐसे आसन जिन्हें अपनाकर आप अपनी हिप्स की चर्बी कम कर सकते हैं-
तितली आसन (बटर फ्लाई)
-तितली आसन करने के लिए आप सुखासन में बैठ जाएं, अपनी सांस को नॉर्मल करें। अब धीरे-धीरे दोनों पैरों के तलुओं को एक-साथ मिलाएं और दोनों हाथों की उंगलियों को आपस में फंसाते हुए दोनों पैर के पंजे मुट्टी में होल्ड कर लें।
-अब दोनों पैरों को तितली के पंखों की तरह ऊपर-नीचे मूव करें। आप यह आसन हर दिन 5 से 10 मिनट तक कर सकते हैं। इससे पेल्विक मसल्स को टोन करने में मदद मिलती है। हिप और थाई का फैट कम होता है। पेट पर चढ़ी चर्बी हट जाती है और बैक पेन में आराम मिलता है।
-यह आसन महिलाओं को पीरियड्स के दौरान होनेवाली समस्याओं से निजात दिलाता है। जैसे क्रैंप्स, अनियमितता, लोअर बॉडी पार्ट में तेज दर्द और बेचैनी। लेकिन इस बात का खास ध्यान रखें कि महिलाओं को यह आसन पीरियड्स के दौरान नहीं करना चाहिए। इस समय में आप केवल वॉक करें।
-तितली आसन पैरों की और खासतौर पर जांघों की मसल्स को मजबूत बनाता है। इससे घुटनों पर एक्स्ट्रा दबाव नहीं पड़ता और वेट कंट्रोल में रहने से आप अच्छा और एनर्जेटिक फील करते हैं।
मलासन (स्क्वॉट पोजिशन)
-स्क्वॉट पोजिशन को मलासन के रूप में जाना जाता है। इस आसन को करने के लिए आप एक स्थान पर सीधे खड़े हो जाएं। अपने पैरों के बीच एक से डेढ़ फीट का गैप बनाएं और घुटनों से पैर मोड़कर कुर्सी पर बैठने की पोजिशन मेंटेन करके रखें।
-फोटो में आप देख सकते हैं कि आपको ना तो कुर्सी पर बैठना है और ना घुटनों के बल बैठना है। आप स्क्वॉट पोजिशन में खुद को जितनी देर हो सके होल्ड करें। यह प्रक्रिया आपको 15 से 20 बार दोहरानी है। आप इसके 2 से 3 सेट एक बार में कर सकते हैं। हर सेट के बीच 10 से 15 सेकंड का ब्रेक लें।
कोई भी आसन करते हुए ध्यान रखना चाहिए कि पेट भर खाने के तुंरत बाद भोजन नहीं करना चाहिए बल्कि आसन और भोजन के बीच 2-3 घंटे का फासला जरूर होना चाहिए।
खाना खजाना / शौर्यपथ / आप अगर ग्लोइंग स्किन के साथ सेहतमंद रखना चाहते हैं, तो टमाटर को अपनी डाइट में जरूर शामिल करें। टमाटर विटामिन-सी से भरपूर होता है। आज हम आपको एक यूनिक डिश बताने जा रहे हैं, जिसे खाकर आपको बहुत मजा आएगा। इस डिश का नाम है फ्राइड टोमैटो सलाद-
सामग्री :
6 टमाटर
1 टीस्पून काली मिर्च पाउडर
1 टीस्पून चाट मसाला
1 टेबलस्पून नींबू का रस
1 टेबलस्पून हरा धनिया
1 टेबलस्पून ऑलिव ऑयल
नमक स्वादानुसार
विधि :
सबसे पहले सभी टमाटर को बीच से काटकर पीस कर लें।
मीडियम आंच पर पैन में तेल डालकर गरम करने के लिए रख दें।
इसमें टमाटर डालकर फ्राई करें।
फिर काली मिर्च पाउडर, चाट मसाला और नमक मिला लें।
तैयार है फ्राइड टोमैटो सलाद
नींबू का रस और हरा धनिया डालकर सर्व करें।
खाना खजाना /शौर्यपथ / गर्मियों के शुरू होते ही लंच हो या डिनर भोजन के साथ रायते खाने का मन हर किसी का करता है। आपने भी भोजन के साथ परोसने के लिए आज तक कई तरह के रायते बनाए होंगे, पर क्या आपने कभी अपनी किचन में मेथी का रायता ट्राई किया है। जी हां मेथी का रायता सेहत में फायदेमंद होने के साथ-साथ स्वाद में भी बेहद लाजवाब होता है। तो देर किस बात की आइए जानते हैं कैसे बनाया जाता है यह टेस्टी रायता।
मेथी रायता बनाने के लिए सामग्री-
-1/2 कप मेथी के पत्ते
-1 कप दही
-1 टी स्पून लहसुन कटा हुआ
-1 हरी मिर्च कटी हुई
-1/2 टी स्पून जीरा
-स्वादानुसार काला नमक
-तड़के के लिए तेल
-गार्निश करने के लिए चाट मसाला
मेथी रायता बनाने की विधि-
मेथी रायता बनाने के लिए सबसे पहले कढ़ाई में तेल गर्म करके उसमें जीरा और लहसुन डालकर भून लें।जब लहसुन की कच्ची महक हट जाए तो कढ़ाई में मेथी के पत्ते डालकर तेज आंच पर एक मिनट के लिए और पकाएं। इसके बाद इसमें हरी मिर्च डालकर आंच बंद कर दें। इसे थोड़ी देर के लिए ठंडा होने दें। अब दही में थोड़ा सा नमक डालकर उसे अच्छी तरह फेंट लें। जब दही थोड़ा पतला हो जाए तो इसमें मेथी लहसुन मिश्रण डालकर अच्छी तरह मिला लें। अब रायते में थोड़ा सा चाट मसाला डालकर गार्निश करें।
आस्था /शौर्यपथ / जो कोई वास्तुशास्त्री यह कहता है कि मंदिर के पास नहीं रहना चाहिए उसे यह भी समझना होगा कि तीर्थ स्थलों में असंख्य मंदिर होते हैं और वहां के घर या मकान सभी किसी न किसी मंदिर के पास ही होते हैं। उन सभी लोगों का जीवन बुरा नहीं है बल्कि सामान्य जीवन की तरह ही चल रहा है। इससे यह सिद्ध होता है कि मंदिर के पास रहना बुरा नहीं है।
मंदिर के पास आध्यात्मिक वातावरण रहने के कारण मन और चित्त में निर्मलता बनी रहती है। दरअसल, मंदिर के पास आपका घर होने से आपके भीतर आध्यात्मिक बल बढ़ेगा और यह आपको हर संकट से बचाएगा। घर मंदिर के पास हो तो डरने की जरूरत नहीं, बल्कि मंदिर के पास ही घर बनाना चाहिए। बस, घर बनाते वक्त किसी वास्तुशास्त्री से मिलकर यह जान लें कि घर मंदिर के किस दिशा में बनाएं, कितनी दूरी पर बनाएं या यदि कोई छाया वेध हो रहा है तो उसका क्या समाधान है? यह जान लें।
1. मंदिर के पास रहने का आपको सिर्फ एक ही नुकसान हो सकता और वह यह कि आपको दिनभर मंदिर की गतिविधियों का सामना करना होगा। यदि आप शांतिप्रिय हैं तो मंदिर की घंटियों को अपने लिए शांति का साधन बना सकते हैं या अशांति की, यह आपके दिमाग पर निर्भर करता है। अक्सर लोग यह तर्क देते हैं कि धार्मिक स्थानों के आसपास रहने वाले वहां बजने वाली घंटी, शंख, ध्वनि विस्तारक यंत्र, शोरगुल, भीड़ इत्यादि के कारण परेशान रहते हैं।
2. कहते हैं कि प्रात:काल मंदिर की 'छाया' भवन पर पड़ना 'शुभ नहीं' होता है। ऐसा भवन देवताओं की कृपा से वंचित रह जाता है। दरअसल, इसके पीछे वैज्ञानिक कारण को जानना जरूरी है। मंदिर ही नहीं, कोई भी यदि बड़ा भवन है और उसकी छाया प्रात:काल आपके भवन पर पड़ रही है तो आप सूर्य की सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त करने से वंचित रह जाएंगे।
3. मंदिर ही नहीं, घर पर किसी वृक्ष, भवन, ध्वजा, पहाड़ी, स्तूप, खंभे आदि की छाया 2 पहर से ज्यादा लगभग 6 घंटे मकान पर पड़ती है तो वास्तुशास्त्र में उसे छाया वेध कहते हैं। अत: अगर मंदिर की ध्वजा की ऊंचाई से दो गुनी जगह छोड़कर घर बना हो तो दोष नहीं लगता। यहां यह जानना जरूरी है कि सिर्फ मंदिर के कारण दोष उत्पन्न नहीं होता, बल्कि आपके घर के पास बने ऊंचे भवनों की दिशा के कारण भी दोष होता है।
4. अत: मंदिर के पास घर का होना अशुभ नहीं है बल्कि यह तय होना चाहिए कि मंदिर की किस दिशा में आपका घर है और कितनी दूरी पर है? यह भी कहा जाता है कि शिवजी के मंदिर से लगभग 750 मीटर की दूरी में निवास हो तो कष्ट होता है। विष्णु मंदिर के 30 फीट के घेरे में मकान हो तो अमंगल होता है। देवी मंदिर के 180 मीटर में घर हो तो रोगों से पीड़ा होती है और हनुमानजी के मंदिर से 120 मीटर में निवास होने पर तो दोष होता है। इसका भी वास्तुशास्त्री समाधान बताते हैं कि फिर कितनी पास या दूर रहना चाहिए? यह निर्भर करता है मंदिर की ऊंचाई और चौड़ाई पर।
5. समरांगन वास्तुशास्त्र के सिद्धांत के अनुसार भवन की किसी भी दिशा में 300 कदम की दूरी पर स्थित शिव मंदिर के प्रभाव अशुभ होते हैं। भवन के बाईं ओर स्थित दुर्गा, गायत्री, लक्ष्मी या किसी अन्य देवी का मंदिर अशुभ होता है। भवन के पृष्ठ भाग में भगवान विष्णु या उनके किसी अवतार का मंदिर होना भी गंभीर वास्तुदोष होता है। रुद्रावतार भगवान हनुमानजी का मंदिर भी शिव मंदिर की तरह वास्तु दोषकारक होता है। भगवान भैरव, नाग देवता, सती माता, शीतलामाता आदि के मंदिर यदि भूमि और गृहस्वामी के कद से कुछ छोटे हों, तो उनका वास्तुदोष नहीं होता।
6. घर की जिस दिशा में शिव मंदिर हो, उस दिशा की ओर भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करने से वास्तुदोष दूर हो जाता है। लेकिन यदि शिव मंदिर घर के ठीक सामने हो, तो घर की मुख्य दहलीज में तांबे का सर्प गाड़ देना चाहिए।
7. घर की जिस दिशा में शिव मंदिर हो, उस दिशा की ओर भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करने से वास्तुदोष दूर हो जाता है।
8. यदि शिव मंदिर घर के ठीक सामने हो, तो घर की मुख्य दहलीज में तांबे का सर्प गाड़ देना चाहिए।
9. यदि भगवान भैरवनाथ का मंदिर यदि ठीक सामने हो तो कौवों को अपने मुख्य द्वार पर रोज रोटी खिलानी चाहिए।
10. यदि किसी देवी मंदिर के कारण उत्पन्न वास्तुदोष है तो उस देवी के अस्त्र के प्रतीक की स्थापना प्रमुख द्वार पर करनी चाहिए अथवा उसका चित्र लगाया जा सकता है। यदि देवी प्रतिमा अस्त्रहीन हो, तो देवी के वाहन का प्रतीक द्वार पर लगाएं।
11. भगवती लक्ष्मी का मंदिर हो, तो द्वार पर कमल का चित्र बनाएं या भगवान विष्णु का चित्र लगाकर उन्हें नित्य कमल गट्टे की माला पहनाएं।
12. यदि मंदिर भगवान विष्णु का हो, तो भवन के ईशान कोण में चांदी या तांबे के आधार पर दक्षिणावर्ती शंख की स्थापना कर उसमें नियमित जल भरना व उसका पूजन करना चाहिए। यदि प्रतिमा चतुर्भुज की हो, तो मुख्य द्वार पर गृहस्वामी के अंगूठे के बराबर पीतल की गदा भी लगानी चाहिए।
13. यदि भगवान विष्णु के अवतार राम का मंदिर हो, तो घर के मुख्य द्वार पर तीरविहीन धनुष का दिव्य चित्र बनाना चाहिए।
14. भगवान कृष्ण का मंदिर हो, तो ऐसी स्थिति में एक गोलाकार चुंबक को सुदर्शन चक्र के रूप में प्रतिष्ठित करके स्थापित करना चाहिए।
15. यदि किसी अन्य अवतार का मंदिर हो, तो मुख्य द्वार पर पंचमुखी हनुमान का चित्र लगाना चाहिए। पंचमुखी हनुमान का एक अच्छा-सा चित्र सभी तरह के वास्तु का शमन कर देता है।
शौर्यपथ / चमेली को संस्कृत में सौमनस्यायनी, जनेष्टा, जाति, सुमना, चेतिका, हृद्यगन्धा, राजपुत्रिका कहते हैं और अंग्रेजी में जैस्मिन कहते हैं। चमेली तो आमतौर पर सभी जगह पाई जाती है। इसका पौधा 10 से 15 फुट की ऊंचाई तक पहुंच जाता है। इसके सफेद रंग फूल मार्च से जून माह के बीच खिलते हैं। इसे घर के आसपास कहीं भी लगाया जा सकता है। हिमालय का दक्षिणावर्ती प्रदेश चमेली का मूल स्थान है।
चमेली मुख्यत: दो प्रकार की होती है। जैस्मिन ग्रैंडिफ्लोरम लिन्न और जैस्मिन हुमाइल लिन्न फ्लावर (स्वर्णयूथिका)। इसके और उप प्रकार होते हैं। जैस्मिन ग्रैंडिफ्लोरम के फूल सफेद होते हैं। जैस्मिन हुमाइल लिन्न के फूल पीले सुंगन्धित होते हैं। यहां चमेली के फायदे की जनकारी। चमेली की बेल होती है और पौधा भी। इसकी कली लंबी डंडी की होती है और फूल सफेद रंग के होते हैं।
1. चमेली का उपयोग इत्र, सेंट, परफ्यूम, साबुद, क्रीम, तेल, शैम्पू आदि बनाने में करते हैं।
2. इसके फूल आंगन में सुबह सुबह बिछ जाते हैं तो घर और परिवार भी खुशियों से भर जाता है।
3. यह फूल भी चमत्कारिक और अद्भुत है। इसके घर आंगन में होने से आपके विचार और भाव में धीरे-धीरे बदलाव होने लगेगा। आपकी सोच सकारात्मक होने लगेगी।
4. चमेली फूल के कई औषधिय गुण होते हैं। इसका तेल भी बनता है। यह चेहरे की चमक बढ़ाने के लिए बहुत ही उपयोगी होता है।
5. चमेली के फूलों की खुशबू से दिमाग की गर्मी दूर होती है। सिर दर्द में चमेली के पत्ते के इस्तेमाल से लाभ मिलता है।
6. कान में अगर दर्द हो और कान से मवाद निकलती हो तो चमेली के पत्तों का उपयोग किया जाता है।
7. मुंह के रोग, मुंह की दुर्गंध और छाले में भी चमेली के पत्तों के रस का उपयोग किया जाता है। चमेली के और भी कई सारे औषधि गुण भी है।
8. हनुमानजी को चमेली का तेल चढ़ाने से वे प्रसन्न होते हैं। हनुमानजी को हर मंगलवार या शनिवार सिंदूर और चमेली का तेल अर्पित करना चाहिए। नियमित रूप से हनुमानजी को धूप-अगरबत्ती लगाना चाहिए। हार-फूल अर्पित करना चाहिए। हनुमानजी को चमेली के तेल का दीपक नहीं लगाया जाता बल्कि तेल उनके शरीर पर लगाया जाता है। ऐसा करने पर सभी तरह की मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती हैं।
9. चमेली का रस पीने से वात और कफ में काफी आराम मिलता है। यह शरीर को चुस्त-दुरुस्त और मन को प्रसन्न रखती है।
10. चर्म
रोग में भी चमेली लाभदायक होती है।
धर्म संसार /शौर्यपथ /14 मार्च 2021, रविवार से खरमास लग रहा है। खरमास में खास तौर पर भगवान सूर्य देव और भगवान विष्णु की पूजा-उपासना करने का महत्व है। इसके साथ ही धार्मिक तीर्थस्थलों पर स्नान एवं दान आदि करने का भी विशेष महत्व पुराणों में बताया गया है। इस मास में आने वाली सभी तिथियों पर अलग-अलग चीजों का दान करने से जीवन की सभी परेशानियों तथा समस्त कष्टों से मुक्ति मिल जाती है। आइए जानें खरमास में हर दिन की तिथि के अनुसार किन चीजों का दान करना चाहिए। अवश्य पढ़ें-
खरमास की तिथियां एवं दान करने की चीजें -
प्रतिपदा (एकम, पड़वा, प्रथम तिथि) के दिन घी से भरा चांदी का पात्र दान करें, इससे आपको मानसिक शांति मिलेगी।
द्वितीया के दिन कांसे के पात्र में सोना रखकर दान करें, आपके घर में कभी धन-धान्य की कमी नहीं होगी।
तृतीया तिथि के दिन चने का दान करने से जीवन में सुख की प्राप्ति होती है।
चतुर्थी तिथि के दिन खारक का दान करने से लाभ प्राप्त होता है।
पंचमी तिथि के दिन को गुड़ का दान करने से चारों तरफ से मान-सम्मान में वृद्धि होती है।
षष्ठी तिथि के दिन औषधि का दान देने से रोग, विकार दूर होते हैं।
सप्तमी तिथि के दिन लाल चंदन के दान से बल मिलता है और बुद्धि बढ़ती है।
अष्टमी तिथि के दिन रक्त चंदन का दान करने से पराक्रम बढ़ता है।
नवमी तिथि के दिन केसर का दान करें, आपका भाग्योदय होगा।
दशमी तिथि के दिन कस्तूरी का दान करें, इससे मनोकामनाओं की पूर्ति होगी।
एकादशी तिथि के दिन गोरोचन के दान से बुद्धि बढ़ती है।
द्वादशी तिथि के दिन शंख का दान करने से धन में वृद्धि होती है तथा धन लाभ मिलता है।
त्रयोदशी तिथि के दिन किसी मंदिर में घंटी का दान करने से पारिवारिक सुख मिलता है।
चतुर्दशी तिथि के दिन सफेद मोती दान करने से मनोविकार दूर होते हैं।
पूर्णिमा तिथि के दिन रत्न का दान करना चाहिए इससे जातक को अपार धन की प्राप्ति होती है।
अमावस्या तिथि के दिन आटा दान अवश्य करना चाहिए, इससे सभी प्रकार की परेशानियों से मुक्ति मिलेगी।
जो मनुष्य के खरमास के दिनों में तथा इसके अलावा भी उपरोक्त तिथियों पर अपने सामर्थ्य के अनुसार दान-पुण्य करता है, उसके जीवन के सभी कष्ट नष्ट होते हैं तथा वह सुखमयी जीवन व्यतीत करता है।
टिप्स ट्रिक्स /शौर्यपथ / धूप में जाने से अगर आपकी त्वचा झुलस गई है या ग्लो चला गया है, तो इसके लिए आपको कोई महंगी क्रीम लेने की जरुरत नहीं है। आप नेचुरल चीजों का इस्तेमाल करके भी स्किन टेनिंग से मुक्ति पा सकते हैं। आइए, जानते हैं कैसे पाएं टेनिंग से मुक्ति-
टमाटर
टमाटर को मैश कर लें और इस पेस्ट को चेहरे पर अच्छे से लगाएं। इसें 15 मिनट तक ऐसे ही लगे रहने दें और फिर पानी से धो लें। इस तरीके को हफ्ते में दो बार दोहराएं। ये स्किन से टैनिंग को दूर कर उसे ब्राइटर और ग्लोइंग बनाएंगा।
बेसन
थोड़े से बेसन में चुटकी भर हल्दी मिला लें। एक बर्तन लें और उसमें तीन छोटे चम्मच बेसन, एक चम्मच ओलिव ऑयल और नींबू का रस मिलाएं। इसमें चुटकी भर हल्दी भी मिला लें। इन सब को अच्छे से मिलाएं और चेहरे पर लगाएं। इसे 15 मिनट तक लगा रहने दें और फिर कम गर्म पानी से धो लें। ऐसा हफ्ते में दो बार करें।
शहद
एक छोटे चम्मच शहद में दो चम्मच दही मिलाएं। इन्हें अच्छे से मिलाकर चेहरे पर लगाएं और 15 मिनट के लिए ऐसे ही छोड़ दें। अब कम गर्म पानी से चेहरा धो लें। बेहतर रिजल्ट के लिए ऐसा रोजाना करें।
एलोवेरा जेल
सोने से पहले एलोवेरा को स्किन पर जरूर लगाएं। इसकी पतली लेयर को चेहरे पर लाएं और अगली सुबह धोएं। बेहतर रिजल्ट के लिए ऐसा रोजाना करें।
खीरा
खीरे को अच्छे से ब्लैंड कर लें और इसके जूस को दूध में मिला लें। इसके पेस्ट को चेहरे और हाथों पर लगाएं। इसे 15 से 20 मिनट तक लगा रहने दें और धो लें। ऐसा दिन में दो बार करें और जल्द ही बेहतर रिजल्ट पाएं।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
