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सेहत / शौर्यपथ / गर्मियों के मौसम में खुद को तंदुरुस्त रखने के लिए तैरना एक बेहतरीन व्यायाम है। वैसे तो पूरे साल स्विमिंग की जा सकती है लेकिन गर्मियों में इसे करने का खास ही मजा है। गर्मियों में तैरना एक ऐसा व्यायाम है जिसमें आप मोज मस्ती के साथ अपनी बॉडी को फिट रख सकते हैं। आइए, आपको बताते हैं तैरने के 10 बेहतरीन सेहत फायदे -
1 वजन कम होना -
तैरने की वजह से शरीर की कैलोरीज कम होती हैं जिसका सीधा असर वजन पर भी पड़ता है और वजन घटाने में मदद मिलती है।
2 हड्डियों की मजबूती -
उम्र बढ़ने के साथ ही हड्डियां भी कमजोर होने लगती है। ऐसे में तैरने जैसी एक्सरसाइज को दिनचर्या में शामिल करके हड्डियों को मजबूत बनाया जा सकता है।
3 हृदय की सुरक्षा -
जिन लोगों को हृदय संबंधी कोई समस्या हो तो तैरना दिल के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। लेकिन इसे शुरू करने से पहले एक बार अपने डॉक्टर से परामर्श जरूर कर लें।
4 बच्चों को सेलेब्रल पाल्सी से रखे दूर -
सेलेब्रल पाल्सी एक ऐसा रोग जिसमें बच्चों को चलने-फिरने में काफी दिक्कत आती है। ऐसे में तैरना बच्चों के लिए भी अच्छा व्यायाम है।
5 नकारात्मक भाव होते हैं दूर -
अन्य व्यायाम कि तुलना में बच्चे और बड़े ज्यादा मौज-मस्ती के संग अपनी सेहत बना सकते हैं। इससे उनके मन की नकारात्मकता भी दूर होती हैं।
6 फ्लेक्सिबिल शरीर -
तैरने के शरीर का लचिलापन कायम रहता है व बेहतर होता है।
7 अंगों का बेहतर कोओर्डिनेशन -
तैरने के दोरान हाथ, पैर और सिर के बीच एक अच्छे कोओर्डिनेशन की जरूरत होती है। इसलिए तैरने से शरीर अपने अंगों को नियंत्रत और कुओर्डिनेट बेहतर तरीके से करने लगता है।
8 अस्थमा का इलाज
कई रिसर्च में पाया गया है कि अस्थमा के मरीजों के लिए भी तैरना एक अच्छा विकल्प है, हांलाकि एक इसे अपने डॉक्टर की सलाह के बाद ही करें।
9 बेहतरीन नींद
तैरने से शरीत में थकावट होती है जिसके बाद बेहतरीन नींद आने में मदद मिलती है।
टिप्स /शौर्यपथ / तपती गर्मी के मौसम में त्वचा की देखभाल करना उतना आसान नहीं होता। इस मौसम में त्वचा बहुत जल्दी झुलसती व मुरझाती है। हम आपको ऐसे 10 घरेलू नुस्खे बता रहे हैं जो गर्मियों में आपकी त्वचा की देखभाल करेंगे -
1 जायफल को पानी या दूध में घिसकर झाइयों पर लगाएं।
2 हल्दी चूर्ण, बेसन तथा मुलतानी मिट्टी समान मात्रा में मिलाकर जल में घोलकर पेस्ट बना लें तथा इस पेस्ट का झाइयों पर लेप करें। आधे घंटे बाद कुनकुने पानी से धो डालें।
3 ऐलोवेरा यानी ग्वारपाठा गाय के दूध में मिलाकर झाइयों पर लेप करें। लेप लगाने के बाद आधा घंटे लगा रहने दें। इसके बाद कुनकुने पानी से साफ कर दें। इसी तरह चंदनादि लेप का प्रयोग भी किया जा सकता है।
4 त्वचा को खूबसूरत और तरोताजा बनाए रखने का सबसे खास माध्यम हमारा खानपान भी है। इसलिए खट्टे, नमकीन, तीखे, गर्म, भारी, देर से हजम होने वाले तथा पित्त को कुपित करने वाले, मिर्च-मसालेदार पदार्थों का सेवन बंद कर दें।
5 पानी भरपूर पिएं और अन्य तरल पदार्थों का सेवन करते रहें। इससे आपका खून साफ रहेगा और शरीर से हानिकारक तत्व बाहर निकल जाएंगे, जिससे त्वचा की अंदर से सफाई होगी।
6 खीरा ककड़ी को पीसकर चेहरे पर लगाएं और कुछ समय तक रहने के बाद इसकी मसाज करें। कुछ ही दिनों में झाइयां गायब हो जाएंगी और त्वचा खिली-खिली नजर आएगी।
7 सुबह खाली पेट एक ताजी मूली और उसके कोमल पत्ते चबाएं। थोड़ी सी मूली पीसकर चेहरे पर मलें। यह दोनों प्रयोग साथ-साथ एक माह तक करें व फर्क देखें।
8 अदरक को पीसकर झाइयों पर लेप करें व एक-दो घंटे रहने दें। स्नान करते समय इसे हल्के हाथ से निकालते जाएं, पश्चात नारियल का तेल लगा लें। कुछ दिन ऐसा करने से झाइयां दूर हो जाती हैं।
9 प्याज के बीज पीसकर शहद के साथ मिलाकर चेहरे पर लगाकर धीरे-धीरे मलें। 2-3 दिन यह क्रिया दोहराते रहें, इससे झाइयां दूर हो जाएंगी और त्वचा की कांति लौट आएगी।
10 15 ग्राम हल्दी चूर्ण को बरगद या आक (आंकड़ा) या पीपल के दूध में मिलाकर गूंथ लें। रात को सोते समय चेहरे पर इसका लेप करें तथा सुबह चेहरा धो लें। कुछ दिनों तक ऐसा करने से झाइयां दूर हो जाती हैं।
वास्तु टिप्स / शौर्यपथ / घर में दरवाजे और खिड़खियों में पर्दे लगाते हैं। कई बार हम वास्तु के अनुसार नहीं बल्कि सुंदर पर्दे देखकर ही पर्दे लगा लेते हैं फिर भले ही वह ब्लैक एंड वाइट में डिजाइन वाले पर्दे ही क्यों ना हो। पर्दों का भी वास्तु शास्त्र में बहुत महत्व बताया गया है। दरवाजे और खिड़की किस दिशा में है उस दिशा को ध्यान रखकर भी कलर का चयन किया जाता है। आओ जानते हैं कि वास्तु अनुसार कैसे पर्दे होना चाहिए।
1. गाढ़े रंग में मोटे कपड़े के पर्दे तब लगाना चाहिए जबकि दक्षिण दिशा में खिड़की या दरवाजा हो। यहां लाल, गहरा हरे रंग का उपयोग कर सकते हैं।
2. नैऋत्य कोण में हल्का गुलाबी या नींबू जैसा पीले रंग के पर्दे लगा सकते हैं। यदि दक्षिण का प्रभाव ज्यादा है तो लाल और गहरे हरे रंग का प्रयोग कर सकते है।
3. ईशान दिशा के खिड़की दरवाजे में मोटे पर्दे नहीं होना चाहिए यहां हल्के या पतले कपड़े के पर्दे होना चाहिए। रंगों में हल्का पीला, नारंगी, सफेद, क्रीम, गुलाबी जैसे साफ्ट रंग होना चाहिए। हरा, नीला और बैंगनी रंगे के पर्दे भी लगा सकते हैं।
4. उत्तर दिशा में स्काई ब्लू या सफेद रंग के पतले पर्दे लगा सकते हैं।
5. वास्तु शास्त्र के अनुसार घर की पूर्व दिशा में या बच्चों के अध्ययन कक्ष में हरे रंग या मिंट ग्रीन के पर्दे लगाना अच्छा माना जाता है।
6. पश्चिम दिशा में सफेद और नीले रंग के पर्दे लगा सकते हैं।
7. आग्नेय कोण में खिड़की या दरवाजा है तो पीले या नारंगी रंग के पर्दे लगा सकते हैं। कुछ परिस्थिति में लाल रंग, मेहरून, कैमल ब्राउन व सिंदूरी रंग का परदा भी लगा सकते हैं।
8. वायव्य कोण में हल्का नीला, स्लेटी व बैंगनी रंग का परदा लगा सकते हैं।
9. सुंदरता के लिए आप डबल परदे भी लगा सकते हैं। यानी नेट के झीने सफेद रंग के परदे और उसके साथ जॉर्जेट के परदे। इससे जहां लुक में भी बदलाव आएगा, वहीं कमरा हवादार भी बना रहेगा।
10. पर्दों के लिए बाजार में खूबसूरत क्लिप्स भी मिलते हैं। दीवारों से मिलते-जुलते कलर में या फिर पर्दे से एक शेड हल्का या एक शेड डार्क के क्लिप्स सजाएं। पर्दों पर अलग से कांच की पतली रंगबिरंगी नलियां पिरो कर लगाने से घर खूबसूरत लगेगा।
11. राजस्थानी या गुजराती हैंडवर्क से सजे हाथी, घोड़े, चिड़िया, कांच, गुड़िया, कोड़िया, कठपुतली आदि से भी पर्दे पर साजसज्जा की जा सकती है। आर्टिफिशियल फूलों की सुंदर और सजीव बेलें भी पर्दे के साथ लटकाई जा सकती है।
12. बेडरूम में गुलाबी, क्रीम, सफेद, नारंगी या पीले रंग के परर्दे ही उपयोग करना चाहिए।
आस्था / शौर्यपथ / इस वर्ष रंगभरी एकादशी 25 मार्च 2021, गुरुवार को है। फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी रंगभरी एकादशी के नाम से भी जानी जाती है, हालांकि इसे आमलकी एकादशी भी कहते हैं। रंगभरी एकादशी का दिन भगवान शिव की नगरी काशी के लिए विशेष होता है। इस दिन भगवान शिव माता गौरा और अपने गणों के साथ रंग-गुलाल से होली खेलते हैं। इस हर्षोल्लास के पीछे एक विशेष बात भी है। आज का दिन भगवान शिव और माता गौरी के वैवाहिक जीवन में बड़ा महत्व रखता है।
पूजन विधि- रंगभरी एकादशी के दिन स्नान आदि से निवृत्त होने के बाद पूजा स्थान पर भगवान शिव और माता गौरी की मूर्ति स्थापित करें। इसके बाद माता गौरी और भगवान शिव की अक्षत, धूप, पुष्प, गंध आदि से पूजा-अर्चना करें। इसके बाद माता गौरी और भगवान शिव को रंग तथा गुलाल अर्पित करें। फिर घी के दीपक या कपूर से दोनों की आरती करें। पूजा के समय माता गौरी को श्रृंगार का सामान अर्पित करें, तो यह खुशहाल जीवन के लिए शुभ होगा।
रंगभरी एकादशी का महत्व- रंगभरी एकादशी के दिन काशी में बाबा विश्वनाथ का विशेष श्रृंगार होता है और उनको दूल्हे के रूप में सजाते हैं। इसके बाद बाबा विश्वनाथ जी के साथ माता गौरा का गौना कराया जाता है। रंगभरी एकादशी के दिन ही भगवान शिव माता गौरा को विवाह के बाद पहली बार काशी लाए थे।
इस उपलक्ष्य में भोलेनाथ के गणों ने रंग-गुलाल उड़ाते हुए खुशियां मनाई थी। तब से हर वर्ष रंगभरी एकादशी को काशी में बाबा विश्वनाथ रंग-गुलाल से होली खेलते हैं और माता गौरा का गौना कराया जाता है।
खाना खजाना /शौर्यपथ /होली की मस्ती रंग और भांग के बिना अधूरी मानी जाती है। कुछ ही दिनों में होली का त्योहार आने वाला है।। ऐसे में आज आपको बताते हैं कैसे होली की मस्ती को दोगुना करने के लिए आप बड़ी आसानी से घर पर ही बना सकते हैं भांग के पकौड़े।
भांग की पकौड़ी बनाने के लिए सामग्री-
भांग की पकौड़ी के मिश्रण के लिए-
-1 कप चने का आटा
-2 कप नमक
-1/2 टी स्पून हल्दी
-1/2 टी स्पून लाल मिर्च पाउडर
-1 टी स्पून आमचुर
-1 टी स्पून भांग की पत्ती का पेस्ट
भांग के पकौड़ों के लिए-
-125 ग्राम गोल कटी प्याज
-125 ग्राम गोल कटे आलू
-तलने के लिए तेल
भांग की पकौड़ी बनाने का तरीका-
भांग की पकौड़ी बनाने के लिए सबसे पहले पकौड़ी के मिश्रण के लिए रखी सभी चीजों को मिलाकर उसका पेस्ट तैयार करने के लिए इसमें थोड़ा पानी मिलाएं। अब इसमें प्याज और आलू के कटे हुए पीस मिक्स करें। साथ ही इसमें भांग का पेस्ट भी मिलाएं। कढ़ाही में तेल गर्म करके धीरे-धीरे इसमें 1-1 स्कूप वेजिटेबल बैटर को डालें। हल्का भूरे रंग का होने तक इसे फ्राई करें और हरी चटनी के साथ गर्मा-गर्म सर्व करें।
सेहत /शौर्यपथ / बदलते मौसम में नाक, गले की परेशानियां भी शुरू हो जाती है। ऐसे में ज्यादातर लोग डॉक्टर के पास जाना पसंद नहीं करते और घर में रखी कोई पेन किलर खा लेते हैं लेकिन बार-बार दवाई लेने से आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता पर असर पड़ता है इसलिए आपको इन छोटी-छोटी परेशानियों का घरेलू उपाय करना चाहिए। आइए, जानते हैं घरेलू उपाय-
गर्मा-गर्म लिक्विड का करें सेवन
बंद नाक और गले में हो रही दिक्कत से बचने के लिए आप गर्म लिक्विड का सेवन करते रहें। पानी भी हल्का गुनगुना लें। अदरक की चाय, ब्लैक टी, ग्रीन टी और काढ़ा जैसी चीजों का सेवन आपको पलूशन और बदलते मौसम के प्रभाव से बचाएगा।
काली मिर्च के साथ शहद का सेवन
सर्दी और पॉल्यूशन के कारण बंद होनेवाली नाक और गले की समस्या से काली मिर्च और शहद का मिश्रण भी बचा सकता है। एक बड़ा चम्मच शहद में 2 से 3 चुटकी पिसी हुई काली मिर्च मिलाएं और रात को सोने से पहले इसका सेवन करें। ध्यान रखें कि इसे धीरे-धीरे चाटने पर ज्यादा लाभ होगा बजाय इसके कि आप एक बार में खा लें। अगर दिक्कत अधिक है तो दिन में दो बार तक इसका सेवन कर सकते हैं।
भाप लें
विक्स के जरिए बंद नाक खोलना सबसे आना तरीका है। गले पर लगाने से भी यह काफी हद तक राहत देता है। आप बंद नाक और गले की दिक्कत के लिए गर्म पानी में विक्स डालकर उसकी भाप भी ले सकते हैं।
लहसुन को डाइट में शामिल करें
सर्दी से बचने के लिए लहसुन का इस्तेमाल खाने में जरूर करें। हो सके तो दिन में एक बार लहसुन की एक कली को कच्चा चबाकर खाएं। अगर ऐसा ना कर पाएं तो दाल-सब्जी में लहसुन का उपयोग जरूर करें। लहसुन की चटनी भी शरीर को गर्म रखने और नाक-गले से जुड़ी दिक्कतों से बचाती है।
दूध में अदरक पकाकर पिएं
जुकाम होने पर दूध पीने के लिए मना किया जाता है क्योंकि ऐसी स्थिति में दूध कफ बढ़ाने का काम कर सकता है। लेकिन अदरक डालकर पकाया गया दूध हल्दी मिक्स करके पीने से जुकाम और गले की समस्या में तुरंत राहत देता है। आप सुबह और शाम के वक्त इसका सेवन कर सकते हैं।
शौर्यपथ / सोशल मीडिया प्लेटफार्म अब बच्चों की सुरक्षा के मद्देनजर अपने एप में नया फीचर जोड़ने जा रहा है। इसे विशेष तौर पर छोटे बच्चों को ध्यान में रखकर तैयार किया है। इसके तहत कम उम्र के बच्चे अपना इंस्टाग्राम अकाउंट नहीं बना पाएंगे। इसके साथ ही अनजान वयस्क उपयोगकर्ताओं के बच्चों से संपर्क पर भी लगाम लग सकेगी।
इन कम उम्र के इंस्टाग्राम उपयोगकर्ताओं का पता लगाने के लिए इंस्टाग्राम कृत्रिम बुद्धिमता Üआर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इस्तेमाल करेगी। इसकी मदद से कम उम्र के उपयोगकर्ताओं के साइनअप करते ही कंपनी को पता चल जाएगा।
कंपनी की ओर से जारी बयान में कहा गया कि सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर अपना अकाउंट बनाते समय अपनी उम्र को लेकर अक्सर झूठ बोलते हैं, खासकर कम उम्र के बच्चे ऐसा ज्यादा करते हैं। इस पर लगाम लगाने के लिए हम एक कदम आगे बढ़ा रहे हैं और एक नया फीचर रोलआउट करने जा रहे हैं।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग तकनीक के इस्तेमाल से तैयार की जा रही इस नई तकनीक की मदद से इसे रोका जाएगा। इसके अलावा कंपनी के नये फीचर से अनजान वयस्कों को 18 साल से कम उम्र के उपयोगकर्ताओं को मैसेज भेजने से भी रोका जा सकेगा। नया फीचर वयस्कों को सजेस्ट यूजर्स में कम उम्र के बच्चों के अकाउंट दिखाने पर प्रतिबंध लगाने का काम करेगा।
सेहत /शौर्यपथ जी हां, ज्यादा चाय पीना हानिकारक है। यदि आप चाय बार बार पीते हैं तो सावधान हो जाइए क्योंकि इसमें पाए जाने वाले कैफीन के कारण मूत्र की मात्रा में तीन गुना अधिक वृद्धि होती है।
चाय पीने से कैफीन से मूत्र वृद्धि होने से दूषित मल जिसका शरीर से मूत्र के रास्ते निकल जाना आवश्यक होता है वह शरीर अन्दर ही संचित होने लगता है जिसके फलस्वरुप गठिया दर्द, गुर्दे संबंधी रोग तथा हृदय संबंधी रोग होने लगते हैं।
अधिक चाय का सेवन करने से एसिड के कारण पेट फूलना, पेट दर्द, कब्ज, एसिडिटी, बदहजमी, नींद न आना, दांत पीले होना जैसे रोग रोग पैदा होने लगते हैं।
चाय के अत्यधिक प्रयोग से उसमें पाया जाने वाला कैफीन टैनिन नामक विष चाय के प्रभाव को अत्यधिक उत्तेजनाप्रद बनाते हैं। इसका मस्तिष्क पर बुरा प्रभाव पडता है। जैसे-जैसे चाय का नशा बढ़ता जा रहा है वैसे-वैसे हृदय रोग,मानसिक रोगों में भी बढ़ोतरी होती जा रही है।
कैफीन के प्रभाव से दिल की धड़कन बढ़ जाती है इससे हृदय रोग बढ़ रहे हैं।
सेहत / शौर्यपथ / टी.बी. यानी क्षयरोग भी एक गंभीर किस्म का रोग है, जिससे बचने के लिए आपको इसके कारण, लक्षण और उपायों को जरूर जान लेना चाहिए...
कारण :टी.बी. रोग के यूं तो कई कारण हैं, प्रमुख कारण निर्धनता, गरीबी के कारण अपर्याप्त व पौष्टिकता से कम भोजन, कम जगह में बहुत लोगों का रहना, स्वच्छता का अभाव तथा गाय का कच्चा दूध पीना आदि हैं।
* जिस व्यक्ति को टी.बी. है, उसके संपर्क में रहने से, उसकी वस्तुओं का सेवन करने, प्रयोग करने से।
* टी.बी. के मरीज द्वारा यहां-वहां थूक देने से इसके विषाणु उड़कर स्वस्थ व्यक्ति पर आक्रमण कर देते हैं।
* मदिरापान तथा धूम्रपान करने से भी इस रोग की चपेट में आया जा सकता है। साथ ही स्लेट फेक्टरी में काम करने वाले मजदूरों को भी इसका खतरा रहता है।
लक्षण :* भूख न लगना, कम लगना तथा वजन अचानक कम हो जाना।
* बेचैनी एवं सुस्ती छाई रहना, सीने में दर्द का एहसास होना, थकावट रहना व रात में पसीना आना।
* हलका बुखार रहना, हरारत रहना।
* खांसी आती रहना, खांसी में बलगम आना तथा बलगम में खून आना। कभी-कभी जोर से अचानक खांसी में खून आ जाना।
* गर्दन की लिम्फ ग्रंथियों में सूजन आ जाना तथा वहीं फोड़ा होना।
* गहरी सांस लेने में सीने में दर्द होना, कमर की हड्डी पर सूजन, घुटने में दर्द, घुटने मोड़ने में परेशानी आदि।
* महिलाओं को टेम्प्रेचर के साथ गर्दन जकड़ना, आंखें ऊपर को चढ़ना या बेहोशी आना ट्यूबरकुलस मेनिन्जाइटिस के लक्षण हैं।
* पेट की टी.बी. में पेट दर्द, अतिसार या दस्त, पेट फूलना आदि होते हैं।
* टी.बी. न्यूमोनिया के लक्षण में तेज बुखार, खांसी व छाती में दर्द होता है।
उपचार :-
* बच्चों को टी.बी. से बचने के लिए बी.सी.जी. का टीका जन्म के तुरंत बाद लगाया जाता है। अब ये माना जाने लगा है कि बीसीजी के टीके की इसमें कोई भूमिका नहीं है।
* आजकल टी.बी. के उपचार के लिए अलग-अलग एंटीबायोटिक्स/एंटीबेक्टेरियल्स दवाओं का एक साथ प्रयोग किया जाता है। यह उपचार लगातार बिना नागा 6 से 9 महीने तक चलता है।
* टीबी की रोकथाम के लिए मरीज के परिवारजनों को भी दवा दी जाती है, ताकि मरीज का इंफेक्शन बाकी सदस्यों को न लगे जैसे पत्नी, बच्चे व बुजुर्ग आदि। इसके लिए उन्हें आइसोनेक्स की गोली तीन माह तक दी जाती है।
* टी.बी. के उपचार की शुरुआत सीने का एक्स-रे लेकर तथा थूक या बलगम की लेबोरेटरी जांच कर की जाती है।
* इस रोग की दवा लेने में अनियमितता बरतने पर, इसके बैक्टीरिया में दवाई के प्रति प्रतिरोध क्षमता उत्पन्न हो जाती है। इससे बैक्टीरियाओं पर फिर दवा का असर नहीं होता। यह स्थिति रोगी के लिए खतरनाक होती है। एंटीबायोटिक्स ज्यादा प्रकार की देने का कारण भी यही है कि जीवाणुओं में प्रतिरोध क्षमता पैदा न हो जाए।
* उपचार के दौरान रोगी को पौष्टिक आहार मिले, वह शराब-सिगरेट आदि से दूर रहे।
अत: रोग कोई भी हो, अगर उससे बचने के लिए बीमारी के असली कारण, सटीक लक्षण और रामबाण उपायों को जानना बेहद जरूरी है। तभी आप इसी बीमारी से मुक्ति पा सकते हैं।
आस्था /शौर्यपथ / नवरात्रि में खासकर माता कात्यायिनी की पूजा होती है। छठ पर्व के दौरान भी माता कात्यायिनी की पूजा का विधान है। कात्यायिनी को माता दुर्गा का एक रूप माना जाता है। आओ जानते हैं माता कात्यायिनी के बारे में 7 खास बातें।
1. मां दुर्गा की छठी विभूति हैं मां कात्यायनी। शास्त्रों के मुताबिक जो भक्त दुर्गा मां की छठी विभूति कात्यायनी की आराधना करते हैं मां की कृपा उन पर सदैव बनी रहती है।
शास्त्रों में माता षष्ठी देवी को भगवान ब्रह्मा की मानस पुत्री माना गया है। इन्हें ही मां कात्यायनी भी कहा गया है, जिनकी पूजा नवरात्रि में षष्ठी तिथि के दिन होती है। षष्ठी देवी मां को ही पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड में स्थानीय भाषा में छठ मैया कहते हैं। छठी माता की पूजा का उल्लेख ब्रह्मवैवर्त पुराण में भी मिलता है।
2. उत्तरप्रदेश के मथुरा के निकट वृंदावन के भूतेश्वर स्थान पर माता के गुच्छ और चूड़ामणि गिरे थे। इसकी शक्ति है उमा और भैरव को भूतेश कहते हैं। यहीं पर आद्या कात्यायिनी मंदिर, शक्तिपीठ भी है जहां के बारे में कहा जाता है कि यहां पर माता के केश गिरे थे। वृन्दावन स्थित श्री कात्यायनी पीठ ज्ञात 51 पीठों में से एक अत्यन्त प्राचीन सिद्धपीठ है।
3. विजयादशमी का पर्व माता कात्यायिनी दुर्गा द्वारा महिषासुर का वध करने के कारण मनाया जाता है जो कि श्रीराम के काल के पूर्व से ही प्रचलन में रहा है। इस दिन अस्त्र-शस्त्र और वाहन की पूजा की जाती है।
4. ऋषि कात्यायन की पुत्री ही कात्यायनी थीं। यह नवदुर्गा में से एक देवी कात्यायनी है। कात्यायन ऋषि को विश्वामित्रवंशीय कहा गया है। स्कंदपुराण के नागर खंड में कात्यायन को याज्ञवल्क्य का पुत्र बतलाया गया है। उन्होंने 'श्रौतसूत्र', 'गृह्यसूत्र' आदि की रचना की थी।
5. कहते हैं कि सिद्ध संत श्रीश्यामाचरण लाहिड़ीजी महाराज के शिष्य योगी 1008 श्रीयुत स्वामी केशवानन्द ब्रह्मचारी महाराज ने अपनी कठोर साधना द्वारा भगवती के प्रत्यक्ष आदेशानुसार इस लुप्त स्थान पर स्थिति इस श्रीकात्यायनी शक्तिपीठ जो राधाबाग, वृन्दावन नामक पावनतम पवित्र स्थान पर स्थित है का पुर्ननिर्माण कराया था।
6. मां कात्यायनी के मंत्र:
"कात्यायनी महामाये, महायोगिन्यधीश्वरी।
नन्दगोपसुतं देवी, पति मे कुरु ते नमः।।"
मंत्र - 'ॐ ह्रीं नम:।।'
चन्द्रहासोज्जवलकराशाईलवरवाहना।
कात्यायनी शुभं दद्याद्देवी दानवघातिनी।।
मंत्र - ॐ देवी कात्यायन्यै नमः॥
7. कात्यायिनी देवी की कथा : रम्भासुर का पुत्र था महिषासुर, जो अत्यंत शक्तिशाली था। उसने कठिन तप किया था। ब्रह्माजी ने प्रकट होकर कहा- 'वत्स! एक मृत्यु को छोड़कर, सबकुछ मांगों। महिषासुर ने बहुत सोचा और फिर कहा- 'ठीक है प्रभो। देवता, असुर और मानव किसी से मेरी मृत्यु न हो। किसी स्त्री के हाथ से मेरी मृत्यु निश्चित करने की कृपा करें।' ब्रह्माजी 'एवमस्तु' कहकर अपने लोक चले गए। वर प्राप्त करने के बाद उसने तीनों लोकों पर अपना अधिकार जमा कर त्रिलोकाधिपति बन गया।
तब भगवान विष्णु ने सभी देवताओं के साथ मिलकर सबकी आदि कारण भगवती महाशक्ति की आराधना की। सभी देवताओं के शरीर से एक दिव्य तेज निकलकर एक परम सुन्दरी स्त्री के रूप में प्रकट हुआ। हिमवान ने भगवती की सवारी के लिए सिंह दिया तथा सभी देवताओं ने अपने-अपने अस्त्र-शस्त्र महामाया की सेवा में प्रस्तुत किए। भगवती ने देवताओं पर प्रसन्न होकर उन्हें शीघ्र ही महिषासुर के भय से मुक्त करने का आश्वासन दिया।
भगवती दुर्गा हिमालय पर पहुंचीं और अट्टहासपूर्वक घोर गर्जना की। महिषासुर के असुरों के साथ उनका भयंकर युद्ध छिड़ गया। एक-एक करके महिषासुर के सभी सेनानी मारे गए। फिर विवश होकर महिषासुर को भी देवी के साथ युद्ध करना पड़ा। महिषासुर ने नाना प्रकार के मायिक रूप बनाकर देवी को छल से मारने का प्रयास किया लेकिन अंत में भगवती ने अपने चक्र से महिषासुर का मस्तक काट दिया। कहते हैं कि देवी कात्यायनी को ही सभी देवों ने एक एक हथियार दिया था और उन्हीं दिव्य हथियारों से युक्त होकर देवी ने महिषासुर के साथ युद्ध किया था।
खाना खजाना / शौर्यपथ / होली का त्योहार आते ही हर घर में गुझिया बनाने की तैयारियां शुरू होने लगती हैं। लेकिन इस होली अगर आप मेहमानों का मुंह मीठा करवाने के लिए कुछ अलग और टेस्टी बनाना चाहती हैं तो अपनी किचन में ट्राई कर सकती हैं चॉकलेट गुझिया। जी हां यह गुझिया मावा गुझिया से अलग और स्वाद में भी बेहद टेस्टी होती हैं। इसका स्वाद बच्चों से लेकर बड़ों तक हर किसी को बेहद पसंद आएगा। तो देर किस बात की आइए जान लेते हैं कैसे बनाई जाती है यह टेस्टी रेसिपी चॉकलेट गुझिया।
चॉकलेट गुझिया बनाने के लिए सामग्री-
-एक कप मैदा
-दो कप मावा
-डेढ़ कप चीनी
-आधा टेबल स्पून इलायची पाउडर
-100 ग्राम चॉकलेट चिप्स
-घी
-पानी
-फ्रेश क्रीम
-फाइन चॉकलेट
चॉकलेट गुझिया बनाने का तरीका-
चॉकलेट गुझिया बनाने के लिए सबसे पहले मैदे में घी और पानी मिलाकर इसे गूंथ लें और इसे थोड़ी देर के लिए रख दें। इस बात का खास ख्याल रखें कि मैदा ज्यादा नर्म ना गूंथा हों। अब स्टफिंग की तैयारी करेंगे। धीमी आंच पर एक पैन गर्म करें। पैन गर्म होने पर इसमें मावा डालें और ब्राउन होने तक भूनें। मावा के ब्राउन हो जाने पर इसमें चीनी और इलायची पाउडर डालें और थोड़ी देर तक फ्राई करें। अब इस मिक्सचर को ठंडा होने दें। अब इसमें चॉकलेट चिप्स अच्छे से मिला लें।
अब मैदे से पूरियां बेलें। पूरियों में तैयार किया हुआ मिक्सचर भरें और गुझिये का आकार देते हुए फोल्ड करें। आपको अगर इसे फोल्ड करने में दिक्कत हो रही है तो इसे सांचे की मदद से आकार दे सकते हैं।
अब गुझिया को फ्राई करने के लिए गैस में तेज आंच पर एक कढ़ाई में घी गर्म करें। घी के गर्म होने पर इसमें गुजिया डालें और हल्का ब्राउन होने तक फ्राई करें। आपकी चॉकलेट गुजिया बनकर तैयार है। अब इसे आप चॉकलेट और क्रीम से सजाकर सर्व करें।
सेहत / शौर्यपथ / जब बात सेहत का ख्याल रखने की आती है, तो हर व्यक्ति सतर्क हो जाता है। वैसे भी कोरोना काल में हर व्यक्ति अपने सेहत के प्रति जागरूक एंव सावधान हो गया है। लेकिन सेहतमंद जिंदगी के लिए जरूरी है। सही डाइट का होना। किसी भी बीमारी से बचाव के लिए हेल्दी डाइट का ख्याल रखना बेहद जरूरी है। शरीर में पोषक तत्वों की कमी न हो इसके लिए जरूरी है, बैलेंस्ड डाइट का सेवन करें। इसके साथ ही सुबह की शुरूआत एक ऐसी ड्रिंक के साथ करें जो आपके स्वास्थ्य के लिए बहुत जरूरी हैं। वो क्या है आइए जानते हैं
नींबू और अदरक
नींबू में विटामिन सी पाया जाता है। इससे इम्युन सिस्टम मजबूत होता है, जिससे बीमारियां दूर रहती है। वहीं अदरक में एंटी इन्फ्लेमेट्री गुण पाए जाते है। जिससे पाचन शक्ति दुरूस्त रहती है। इसलिए सुबह की शुरूआत नींबू और अदरक के पानी से जरूर करें।
चुकंदर और तुलसी
चुकंदर स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद होता है। इसे विटामिन और मिनरल्स का स्टोर हाउस माना जाता है। वही तुलसी औषधीय गुणों से भरपूर है। इसके सेवन से आप सेहतमंद रह सकते है। दिल को स्वस्थ्य बनाएं रखने के लिए चुकंदर का सेवन बहुत फायदेमंद होता है।
आंवला, हल्दी और काली मिर्च
आंवला स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद होता है। इसमें मौजूद विटामिन सी रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करता है और बिमारियों से लड़के की शक्ति देता है। वहीं हल्दी एंटी ऑक्सीडेंट गुण पाएं जाते हैं। वहीं काली मिर्च में पिपरिन नामक तत्व होता है जो फेफड़ों को साफ करने में मदद करता है।
सेहत / शौर्यपथ / आपने आस-पास, परिवार या रिश्तेदार में किसी न किसी को सांस फूलने की समस्या का सामना करते जरूर देखा होगा। सांस फूलना यानी उसे लेने में दिक्कत होना, ये समस्या नीचे बताए गए कारणों में से किसी वजह से हो सकती है। आइए, जानें -
1 जिन महिलाओं को पीरियड्स में अधिक रक्तस्राव (ब्लीडिंग) होती हैं व जो लोग खून की कमी से पीड़ित हो, यानी कि जिन्हें अनीमिया की शिकायक हो, तो ये सांस फूलने एक बहुत बड़ा कारण हो सकता है।
2 अक्सर मोटे लोगों को यह शिकायत करते सुना गया है कि जरा सी सीढ़ी चढ़ने पर उनकी सांस फूलने लगती है। इसलिए मोटापे को कंट्रोल करके भी इस सांस फूलने की परेशानी से बचा जा सकता है।
3 श्वास नली व उस की शाखाओं में सूजन भी सांस फूलने की परेशानी का एक कारण है।
4 फेफड़ों संबंधी किसी तरह की समस्या होने पर भी सांस फूलने की परेशानी हो सकती है। कई बार फेफड़ों की बाहरी ऑक्सीजन सोखने की क्षमता कम हो जाती है और जरा सा चलने पर सांस फूलने लगती है।
5 दिल संबंधित समस्या होना भी सांस फूलने के कारणों में से एक है।
सांस फूलने की परेशानी से बचने के लिए इन बातों को अपनाएं -
1 कोशिश करें कि नियमित व्यायाम को अपनी दिनचर्या में शामिल करें, जिनती कम उम्र में व्यायाम को अपना लेंगे, उतना ही अच्छा होगा।
2 कुछ देर धूप जरूर लें, और धूल-धक्कड़ से दूर रहें।
3 मोटापा किसी भी हालत में न पनपने दें।
4 रोज तकरीबन 350 ग्राम सलाद व 350 ग्राम फलों का सेवन करें। प्रोटीन भरपूर मात्रा में लें। पत्तेदार सब्जियों का नियमित सेवन करें. किसी तरह के धूम्रपान व तंबाकू के सेवन से बचें और शराब न पीएं।
आस्था / शौर्यपथ / मध्य प्रदेश के खजुराहो में स्थित है मतंगेश्वर का मंदिर। कहते हैं कि यह मंदिर 9वीं सदी में निर्मित हुआ था परंतु यहां का शिवलिंग बहुत ही प्राचीन है। इस शिवलिंग को महाभारत काल का बताया जाता है। इस मंदिर का नाम मतंगेश्वर महान मतंग ऋषि के नाम पर पड़ा है। आओ जानते हैं इस मंदिर के 5 रहस्य।
1. कहते हैं कि इस शिवलिंग का हर वर्ष आकार बढ़ जाता है। इस शिवलिंग की ऊंचाई लगभग ढाई मीटर और इसका व्यास एक मीटर बताया जाता है। मतंगेश्वर शिवलिंग का आकार धरती के ऊपर और नीचे हर साल बढ़ जाता है।
2. हर साल की कार्तिक पूर्णिमा के दिन पर्यटन विभाग के कर्मचारी आकर इस शिवलिंग की माप करते हैं। जिससे पता चलता है कि इस शिवलिंग का आकार हर साल बढ़ रहा है।
3. यह भी कहा जाता है कि यहीं पर शिव और पार्वती का विवाह संपन्न हुआ था। इसीलिए यह मंदिर आदिदेव और आदिशक्ति के पवित्र प्रेम का प्रतीक भी माना जाता है।
4. इस मंदिर का निर्माण एक चमत्कारिक मणि रत्न के ऊपर कराया गया है। मान्यता अनुसार यह मणि स्वयं भगवान शिव ने सम्राट युधिष्ठिर को प्रदान की थी। जो कि हर मनोकामना पूरी करती थी। बाद में संन्यास धारण करते समय युधिष्ठिर ने इसे मतंग ऋषि को दान में दे दिया था। मतंग ऋषि के पास से यह मणि राजा हर्षवर्मन के पास आई। जिन्होंने इस मणि को धरती के नीचे दबाकर उसके उपर इस मंदिर का निर्माण कराया। आज भी मणि विशाल शिवलिंग के नीचे है।
5. शिवलिंग के बारे में मान्यता है कि यह शिवलिंग नीचे पाताल लोक की ओर और उपर स्वर्गलोक की ओर बढ़ रहा है। जब यह पाताललोक पहुंचेगा तब कलयुग का अंत हो जाएगा।
उल्लेखनीय है कि इसी तरह का एक शिवलिंग मध्य प्रदेश के जिला देवास में बिलावली में स्थित है, जो प्रतिवर्ष एक तिल तक बढ़ता जा रहा है।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
