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आस्था / शौर्यपथ /देशभर में हनुमानजी के कई चमत्कारिक मंदिर है और लगभग सभी मंदिर जागृत हैं। प्रत्येक मंदिर से कुछ ना कुछ इतिहास जुड़ा हुआ है। हनुमानजी परम ब्रह्मचारी और ईश्वरतुल्य हैं। हनुमानजी के चमत्कारिक सिद्धपीठों की संख्या सैकड़ों में है। उन सभी स्थानों पर हनुमान के मंदिर बने हैं, जहां वे गए थे या जहां वे बहुत काल तक रहे थे या जहां उनका जन्म हुआ। कुछ मंदिर उनके जीवन की खास घटनाओं से जुड़े हैं और कुछ का संबंध चमत्कार से है। उन्हीं में से एक है छत्तीसगढ़ के रतनपुर में स्थित गिरजाबंध हनुमान मंदिर।
गिरजाबंध हनुमान मंदिर, रतनपुर (छत्तीसगढ़) :
1. छत्तीसगढ़ के बिलासपुर से 25 किलोमीटर दूर रतनपुर में मां महामाया देवी और गिरजाबंध हनुमानजी का मंदिर है।
2. रतनपुर को महामाया नगरी भी कहते हैं। यहां स्थित मंदिर की खास बात यह है कि यहां हनुमान नारी स्वरूप में स्थित हैं। इसके मंदिर की पीछे कई तरह की किंवदंतियां प्रचलित हैं।
3. वैसे हनुमान जी के स्त्री स्वरूप की पूजा करने के पीछे की कहानी को दस हजार साल पुराना बताया जाता है। किंवदंति अनुसार 10 हजार वर्ष पूर्व रतनपुर के राजा पृथ्वी देवजू ने ये मंदिर बनवाया। कथा के अनुसार राजा कोढ़ के रोगी थे और इस वजह से परेशान रहते थे। एक बार सपने में हनुमान जी ने राजा को नारी रूप में दर्शन देकर सारी तकलीफ दूर करने को कहा और कहा कि मंदिर निर्माण करवाकर और उसमें उनकी प्रतिमा स्थापित करो।
4. राजा ने मंदिर तो बनवा दिया परंतु मूर्ति कहां से लाएं इस संबंध में विचार करने लगे। तब हनुमानजी के एक बार फिर सपना देकर कहा कि महामाया के कुंड में मूर्ति है। हालांकि अगले दिन वहां मूर्ति नहीं मिली। फिर राजा ने पुन: सपना देखा और सपने में मूर्ति भी नजर आए और पता चला कि घाट के पास वह मूर्ति है। अंतत: राजा को हूबहू वही मूर्ति घाट के पास मिली जिन्हें उन्होंने सपने में देखा था।
5. इस दक्षिण मुखी हनुमान जी की मूर्ति में पाताल लोक का चित्रण हैं। यह मूर्ति अष्ट श्रृंगार से युक्त है जिसके बाएं कंधे पर भगवान राम और दाएं कंधे पर लक्ष्मण जी विराजमान हैं। वहीं बाएं पैर के नीचे अहिरावण और दाएं पैर के नीचे कसाई दबा है। एक हाथ में माला और दूसरे हाथ में लड्डू से भरी थाली है। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से लगभग 84 किलोमीटर दूर रमई पाट में भी एक ऐसी ही मूर्ति स्थापित है। राजा को मिली मूर्ति और रमई पाट की इस मूर्ति में अनेक विशेष समानताएं हैं। जय श्रीराम।
6. यहां हनुमानजी की देवी रूप में पूजा होती है और वह भक्त को सुंदरता का वरदान देते हैं और सभी तरह की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। यहां आज भी कुंष्ठ रोग से पीड़ित रोग आकर कुंड में डुबकी लगाते हैं।
पंचाग / शौर्यपथ / फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को आमलकी एकादशी का व्रत रखा जाता है। इस साल आमलकी एकादशी 25 मार्च 2021, दिन गुरुवार को है। मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा करने से भक्त की मनोकामनाएं पूरी होती हैं। इसके साथ ही व्रती को मोक्ष प्राप्ति होने की भी मान्यता है। आमलकी एकादशी के दिन शुभ मुहूर्त में भगवान विष्णु की पूजा का विशेष महत्व होता है। एकादशी के दिन भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा करने से उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है। जानिए आमलकी एकादशी के दिन विधि-विधान के साथ कैसे करें भगवान विष्णु की पूजा-
आमलकी एकादशी पूजा विधि-
1. आमलकी एकादशी व्रत के पहले दिन यानी दशमी तिथि को व्रती को एकादशी व्रत के साथ भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए सोना चाहिए।
2. इसके बाद आमलकी एकादशी के दिन सुबह स्नान करके भगवान विष्णु की प्रतिमा के समक्ष हाथ में तिल, कुश, मुद्रा और जल लेकर व्रत का संकल्प करना चाहिए।
3. संकल्प के दौरान व्रती को कहना चाहिए कि मैं भगवान विष्णु की प्रसन्नता एवं मोक्ष की कामना से आमलकी एकादशी का व्रत रखता हूं। मेरा यह व्रत सफलतापूर्वक पूरा हो इसके लिए श्रीहरि मुझे अपनी शरण में रखें।
4. इसके बाद नीच बताए गए मंत्र से संकल्प लेने के पश्चात षोड्षोपचार सहित भगवान की पूजा करें।
मम कायिकवाचिकमानसिक सांसर्गिकपातकोपपातकदुरित क्षयपूर्वक
श्रुतिस्मृतिपुराणोक्त फल प्राप्तयै श्री परमेश्वरप्रीति
कामनायै आमलकी एकादशी व्रतमहं करिष्ये
5. अब भगवान विष्णु की पूजा के बाद पूजन सामग्री लेकर आंवले के वृक्ष की पूजा करनी चाहिए।
6. सबसे पहले आंवले के वृक्ष के चारों की भूमि को साफ करें। अब पेड़ की जड़ में एक वेदी बनाकर उस पर कलश स्थापित करें।
7. इस कलश में देवताओं, तीर्थों एवं सागर को आमंत्रित करें। कलश में सुगंधी और पंच रत्न रखें। इसके ऊपर पंच पल्लव रखें फिर दीप जलाकर रखें।
8. कलश पर श्रीखंड चंदन का लेप करें और वस्त्र पहनाएं। अंत में कलश के ऊपर श्री विष्णु के छठे अवतार परशुराम की स्वर्ण मूर्ति स्थापित करें और विधिवत रूप से परशुरामजी की पूजा करें।
9. आमलकी एकादशी के दिन रात्रि में भगवत कथा व भजन-कीर्तन करते हुए प्रभु का स्मरण करें।
10. द्वादशी के दिन सुबह ब्राह्मण को भोजन करवा कर दक्षिणा दें और परशुराम की मूर्ति सहित कलश ब्राह्मण को भेंट करना चाहिए।
11. इसके बाद व्रत का पारण कर अन्न जल ग्रहण करें।
भिलाई / शौर्यपथ /मर्चेन्ट मिल में अजय बेदी मुख्य महाप्रबंधक म.मिल व वा.रा.मिल व आर जी दलाल महाप्रबंधक मर्चेन्ट मिल की उपस्थिति में कर्मचारियों को शिरोमणी पुरस्कार योजना के अन्र्तगत सृजनशील व कर्मठ कार्मिको को पाली व कर्म शिरोमणी पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया।
संतोष कुमार साहू सहायक प्रबंधक को माह अक्टूबर 2020 से दिसंबर 2020 के लिए पाली शिरोमणी एवं अनुराग मिश्रा को माह जनवरी 2021 के लिए कर्म शिरोमणी पुरस्कार से नवाज़ा गया।
मुख्य अतिथि के आसंदी से अजय बेदी जी ने सर्वप्रथम सम्मानित अधिकारी एवं कर्मी को बधाई देते हुए कहा कि शिरोमणी पुरस्कार ऐसा प्रोत्साहन व अनुकरणीय प्रभावकारी होता है, जिसके कारण अन्य कार्मिक साथी भी प्रेरित होकर अपनी क्षमता व कार्यकुशलता में वृद्धि करते हैं जिससे प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से उत्पादन एवं उत्पादकता में प्रभाव देखा जा सकता हैं।
कारखाना प्रबंधक आर जी दलाल ने अपने उद्बोधन में कहा कि शिरोमणी पुरस्कार के लिए पुरस्कृत होने वाले कर्मचारी को उसके द्वारा किया जाने वाला नवाचार, उपलब्ध संसाधनो का बेहतर उपयोग, सुरक्षा मानको का पालन करने तथा करवाने वाले आयामो को ध्यान में रखकर चयनित कर विशेष पहचान देकर सम्मानित किया जाता हैं ।
इस कार्यक्रम में विभाग के महाप्रबंधक प्रचालन एस के हरिरमानी, महाप्रबंधक विद्युत श्री एस के पाठक, सहायक महाप्रबंधक यॉंत्रिकी श्री बिरेन्द्र कुमार विशेष रूप से उपस्थित थे ।
सहा.प्रबंधक कार्मिक मिल्स् जोन-1 डॉं जे.एस.बघेल ने कार्यक्रम का संचालन एवं धन्यवाद ज्ञापन प्रेषित किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में अति. श्रम कल्याण अधिकारी राजेश कुमार पांडे एवं आशीष राव काले का सराहनीय योगदान रहा ।
भिलाई। शौर्यपथ । भिलाई इस्पात संयंत्र के कोक ओवन व कोल केमिकल विभाग में स्वच्छता और सुरक्षा जागरूकता सप्ताह का उद्घाटन ईडी वक्र्स राजीव सहगल द्वारा किया गया। इस अवसर पर जी ए राव, मुख्य महाप्रबंधक सीओ-सीसीडी,जी पी सिंह, कार्यकारी मुख्य महाप्रबंधक सुरक्षा व अग्निशमन सेवाएं, एल जे बेंजामिन, महाप्रबंधक प्रभारी ऑपरेशन, बी नाग, महाप्रबंधक प्रभारी सीसीडी, राजीव श्रीवास्तव, महाप्रबंधक प्रभारी सीआरजी, बीजू पासवान, महाप्रबंधक मेंटनेंस विशेष रूप से उपस्थित थे।
इसके अतिरिक्त ए के मित्तल, डीएसओ, बीसी मंडल, डीएसओ, अरुण श्रीवास्तव, एजीएम कार्मिक-सीओ सीसीडी, सुश्री अंजलि पटेल, उपप्रबंधक कार्मिक-सीओ सीसीडी, एस के बघेल, अध्यक्ष, इंटक, संजय साहू (इंटक), वरिष्ठ अधिकारी व कर्मचारी सहित विभाग के ठेका श्रमिक भी मौजूद रहे।
कार्यक्रम कोक ओवन और कोल केमिकल विभाग द्वारा आयोजित सुरक्षा प्रदर्शनी का उद्घाटन ईडी राजीव सहगल ने किया। गैस सुरक्षा, व्यवहार सुरक्षा, बचाव मार्ग और कोविड-19 महामारी जैसे विषयों पर कर्मचारियों, ठेका श्रमिकों और उनके परिवार के सदस्यों द्वारा पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता की प्रविष्टियों का प्रदर्शन किया गया।
चेन कन्वेयर और कोक लोडिंग पर सीओ सीसीडी की क्यूसी टीम शौर्य द्वारा दो मॉडल भी प्रदर्शित किए गए थे। शौर्य टीम का नेतृत्व व मार्गदर्शन चेतन फुटाने, उप प्रबंधक (सीओ सीसीडी), पी शशिकांत, उपमहाप्रबंधक और राकेश जोशी, महाप्रबंधक ने किया।
इस अवसर पर हीटिंग और रेगुलेशन के संशोधित एसओपीस् पर एक प्रशिक्षण पुस्तिका जारी की गयी। कबाड़ का प्रयोग करते हुए कोक ओवन टीम ने गांधी जी के चरखे और चश्मे का निर्माण कर प्रदर्शित किया जो स्वच्छ भारत अभियान का लोगो है।
ÓकवचÓ शीर्षक से एक सुरक्षा पर आधारित एक नुक्कड़ नाटक का प्रदर्शन किया गया जिसके कलाकार थे- श्री राजेश कुमार, थानेश्वर प्रसाद ठाकुर, लाल बहादुर चंद्रा, जगजीवन सिन्हा, ओमवीर करण, हेमराज और संतोष गोस्वामी। इस अवसर पर बड़ी संख्या में कार्मिक व अधिकारी उपस्थित थे।
दुर्ग / शौर्यपथ / जैसी शिक्षा व वैसी परीक्षा को लेकर एनएसयूआई विगत कई दिनों से प्रदेश में हर विश्वविद्यालय,महाविद्यालय में विभिन्न कार्यक्रमो के तहत छात्रों से चर्चा करके ऑनलाईन परीक्षा कराने की मांग को लेकर के छत्तीसगढ़ सरकार से मांग की थी इसी तरह दुर्ग में सुराना कॉलेज, गर्ल्स कॉलेज, साइंस कॉलेज, महिला कॉलेज, कल्याण कॉलेज जैसे सभी महाविद्यालय के छात्रों के साथ मिलकर दुर्ग कलेक्टर के माध्यम से प्रदेश सरकार से ऑनलाइन परीक्षा कराने की मांग को भिलाई नगर विधायक देवेंद्र यादव जी एनएसयूआई छत्तीसगढ़ के प्रदेश अध्यक्ष आकाश शर्मा जी दुर्ग जिला कार्यकारिणी अध्यक्ष सोनू साहू जी एवं दुर्ग शहर अध्यक्ष हितेश सिन्हा ने ऑनलाइन परीक्षा के संदर्भ में एक मांग पत्र छात्रों की ओर से प्रेषित किया था .
जिसे आज छत्तीसगढ़ सरकार ने ऑनलाइन परीक्षा कराने की अनुमति पूरे प्रदेश में दे दिए दूसरी तरफ जहां छत्तीसगढ़ में कोरोना का संक्रमण लगातार बढ़ रहा है छात्रों की सुरक्षा को देखते हुए माननीय मुख्यमंत्री जी ने दो दिवस पूर्व में ही कहा था कि छात्र हित में फैसला लिया जाएगा आज छत्तीसगढ़ शासन ने ऑनलाइन परीक्षा के संदर्भ में कुलपतियों से चर्चा करने के पश्चात इसे लागू करने को कहा है। मैं दुर्ग एनएसयूआई एवं सभी महाविद्यालयों के छात्राओं के तरफ से माननीय मुख्यमंत्री भूपेश बघेल जी उच्च शिक्षा मंत्री उमेश पटेल जी एवं समस्त दुर्ग एनएसयूआई के सदस्यो उन सभी छात्र छात्राओं के तरफ से आभार व्यक्त करता हूं। छात्रों के जीत में उनसे चर्चा करके समय समय पर उनके साथ खड़े रहने में दुर्ग जिला कार्यकारिणी अध्यक्ष सोनू साहू,शहर अध्यक्ष हितेश सिन्हा,जिला संयोजक गोल्डी कोसरे,हरीश देवांगन,विकाश,सोनू,वसीम, आदि कार्यकर्ता हमेशा उनके साथ खड़े रहे।
सेहत /शौर्यपथ /आहार विशेषज्ञ दिन में कम से कम दो लीटर पानी पीने की सलाह देते हैं लेकिन रोजाना दो लीटर पानी पीना सभी लोगों के लिए मुमकिन नहीं है। इस वजह यह है कि किसी को प्यास ज्यादा लगती है तो किसी को कम।ऐसे में जाहिर सी बात है कि कम प्यास लगने वाले लोग पानी भी कम पीते होंगे।ऐसे में आपको अपनी डाइट में कुछ ऐसी चीजें जोड़नी चाहिए जिससे कि शरीर में पानी की कमी की पूर्ति हो सके।आइए, जानते हैं कुछ ऐसे ही आहार-
दही
डिहाइड्रेशन की समस्या से दूर रखने में दही सबसे अच्छा विकल्प साबित हो सकता है। इसमें पानी की मात्रा 85 प्रतिशत होती है और शरीर के लिए जरूरी प्रोबायोटिक भी पर्याप्त मात्रा में मौजूद होते हैं।यह गर्मी की एलर्जी से बचाव के लिए भी शरीर का खूब साथ देता है। यह प्रोटीन, विटामिन बी और कैल्शियम का अच्छा स्त्रोत है।
ब्रोकली
ब्रोकली में 89 प्रतिशत तक पानी होता है और यह न्यूट्रिशन से भरपूर होती है। इसकी प्रकृति एंटी इनफ्लेमेटरी होती है, जिस कारण यह गर्मी में होने वाली एलर्जी से बचाव करती है। इसे आप सलाद में कच्चा ही खा सकते हैं और टोस्ट के साथ हल्का तल कर भी इसका भरपूर लाभ उठा सकते हैं। काफी संख्या में लोग इसकी सब्जी भी बनाते हैं।
सेब
एक कहावत है कि डॉंक्टर को खुद से दूर रखने के लिए रोजाना एक सेब खाएं। अनेक तरह से फायदेमंद सेब में 86 प्रतिशत पानी होता है। फाइबर, विटामिन सी आदि का तो यह अच्छा स्त्रोत है ही।
सलाद
सलाद के पत्ते में जल तत्व 95 प्रतिशत होता है। सैंडविच में इसका अच्छा इस्तेमाल होता है। प्रोटीन और ओमेगा 3 से भरपूर सलाद पत्ते में फैट भी नहीं होता और कैलोरी भी बहुत कम होती है।
चावल
पके हुए चावल भी गर्मी में आपके लिए काफी फायदेमंद हैं। इनमें 70 प्रतिशत जल तत्व होता है। इनमें पर्याप्त मात्रा में आयरन, कार्बोहाइड्रेट आदि भी होते हैं। आपको दिन मेें एक कटोरी चावल जरूर खानेे चाहिए।
खाना खजाना /शौर्यपथ / गर्मियों में आइसक्रीम सभी को पसंद होती है लेकिन अगर आप आइसक्रीम की जगह कोई और देसी ऑप्शन तलाश रहे हैं, तो हम आपको बता रहे हैं लौकी की खीर, जिसे आप फ्रिज में ठंडा करके भी खा सकते हैं। हैदराबाद में लौकी की खीर काफी मशहूर है।
सामग्री :
250 ग्राम लौकी
1 लीटर दूध
1/2 कप चीनी
1/4 कप साबूदाना
1/4 टीस्पून इलायची पाउडर
2 टीस्पून चिरौंजी
एक चुटकी ग्रीन फूड कलर
2 टेबलस्पून काजू का पेस्ट
2 टेबलस्पून बादाम कटे हुए
2 टेबलस्पून घी
विधि :
सबसे पहले एक बर्तन में पानी डालकर साबूदाना 1 घंटे के लिए भिगोकर रख दें।
मीडियम आंच पर पैन में दूध गरम करने के लिए रख दें।
जब दूध में उबाल आ जाए तब गैस को धीमा कर दूध को गाढ़ा होने तक पकाएं।
इस बीच लौकी को छीलकर चारों ओर से कद्दूकस कर लें और इसका अंदर का मुलायम भाग अलग कर दें।
दूसरी तरफ मीडियम आंच पर पैन में 2 चम्मच घी गरम करने के लिए रखें।
इसमें लौकी डालकर चलाते हुए 5 मिनट तक भून लें।
लौकी के नरम होने पर गैस बंद कर दें।
दूध के गाढ़ा होने पर इसमें साबूदाना डालकर 10 मिनट पकाएं।
बीच-बीच में चलाते रहें।
तय समय के बाद दूध में भुनी हुई लौकी और काजू का पेस्ट डालकर मिक्स करें और 10-12 मिनट तक पकाएं।
ध्यान रहे बीच-बीच में खीर को चलाते रहें ताकि यह बर्तन के तले पर न लग जाए।
10 मिनट बाद खीर में इलायची पाउडर, कटे हुए बादाम, चिरौंजी, ग्रीन फूड कलर और चीनी मिलाकर इसके घुलने तक पकाएं।
जब चीनी अचछी तरह से घुल जाए तब गैस बंद कर खीर को 2-3 मिनट के लिए ढककर रख दें।
तैयार है लौकी की खीर
सेहत /शौर्यपथ / दूध को कैल्शियम से भरपूर माना जाता है लेकिन कई लोग ऐसे हैं जिन्हें दूध पसंद नहीं होता। इस वजह से वे दूध से दूरी बनाए रखते हैं लेकिन आपको बता दें कि दूध न पीने की आदत का खामियाजा आपको उम्र बढ़ने के साथ उठाना पड़ सकता है। कैल्शियम की पूर्ति के लिए ऐसी कई चीजें हैं, जिनका सेवन विकल्प के तौर पर किया जा सकता है। आइए, जानते हैं उन खाद्य पदार्थों के बारे में-
हड्डियों और जोड़ों में दर्द
कैल्शियम से भरपूर खाना हड्डियों और जोड़ों को हेल्दी बनाए रखने में अहम रोल निभाता है। यही नहीं, इसके साथ ही यह दातों को मजबूत बनाता है और रक्त कोशिकाओं को स्ट्रॉन्ग बनाता है। ब्लड को नियंत्रित करने और डायबिटीज़ से बचाने में भी कैल्शियम महत्वपूर्ण रोल निभाता है। ऐसा कुछ फिक्स नहीं है कि एक व्यक्ति को एक दिन में कितना कैल्शियम लेना चाहिए। यह अलग-अलग देश में अलग-अलग होता है, यहां तक कि व्यक्ति-व्यक्ति पर निर्भर करता है। यह शरीर के विकास और मसल बनाने में भी सहायक होता है।
ओटमील
ओटमील में कैल्शियम की मात्रा ज्यादा नहीं होती लेकिन दूसरी चीजों को इसके साथ मिलाकर खाने से कैल्शियम की मात्रा को बढ़ाया जा सकता है।वहीं, दूध न पीने पर यह ऑप्शन बेहतरीन रहेगा।
बादाम का दूध
आपको अगर दूध में टेस्ट नहीं आता या इसकी महक अच्छी नहीं लगती, तो आप बादाम का दूध भी पी सकते हैं।इसमें कैल्शियम के अलावा विटामिन-ई, प्रोटीन और फाइबर मिलता है।
बीन्स
बीन्स में कैल्शियम ही नहीं प्रोटीन की मात्रा भी बहुत ज्यादा होती है।बीन्स को खाने का सबसे बेस्ट ऑप्शन यह है कि आप इसे स्टीम करके सलाद के रूप में खा सकते हैं।
संतरा
संतरे को विटामिन-सी का सबसे बेस्ट ऑप्शन माना जाता है।संतरे में विटामिन सी ही नहीं बल्कि कैल्शियम की मात्रा भी अन्य फलों की तुलना में बहुत ज्यादा होती है।
सफेद तिल
सफेद तिल के लड्डू स्वाद में ही नहीं बल्कि हेल्थ के लिए भी बहुत अच्छे होते हैं।आपको जानकर हैरानी होगी कि अगर आप रोजाना दो लड्डू खा लेते हैं, तो आपके शरीर में कैल्शियम की पूर्ति हो जाती है।
सोया मिल्क
सोया मिल्क में गाय या भैंस के दूध से कहीं ज्यादा कैल्शियम होता है।ऐसे में अगर आपको भैंस या गाय के दूध से एलर्जी है, तो आप सोया मिल्क को पीने के साथ इससे दही, लस्सी बनाकर भी इसका इस्तेमाल कर सकते हैं।
हरे पत्तेदार सब्जियां
हरे पत्तेदार सब्जियों को सेहत के लिहाज से सबसे बेस्ट माना जाता है।आपको अगर हरे पत्तेदार सब्जियां अच्छी नहीं भी लगती, तो कोशिश करें कि मसालों या पनीर का इस्तेमाल करके इन्हें ज्यादा से ज्यादा मात्रा में खाएं।
टिप्स ट्रिक्स /शौर्यपथ अधिकतर लोग बालों को सुलझाने के लिए प्लास्टिक और मेटल की कंघी का इस्तेमाल करते है। लेकिन क्या आप जानते हैं लकड़ी की कंघी के इस्तेमाल से बालों को बहुत फायदा मिलता है। जी हां स्कैल्प और बालों के लिए लकड़ी की कंघी बहुत उपयोगी होती है।
आइए जानते हैं लड़की की कंघी के इस्तेमाल से बालों को कितना फायदा मिलता हैं।
1 बेहतर ब्लड सर्क्युलेशन -
लकड़ी की कंघी का इस्तेमाल आप स्कैल्प पर चुभने के डर के बिना कर सकते है। जब इनसे बालों को संवारते है तब स्कैल्प पर दबाव बनता है जिससे स्कैल्प में मौजूद ऐक्युपंक्चर पॉइंट्स उत्तेजित होते है और स्कैल्प में ब्लड सर्क्युलेशन बेहतर होता है।
2 बालों की मजबूत जड़े -
स्कैल्प में ब्लड सर्क्युलेशन बेहतर होने से बालों की जड़े भी मजबूत बनती है और बालों को भी मजबूती मिलती है।
3 बालों को मिलता है पोषण -
लकड़ी की कंघी के इस्तेमाल से स्कैल्प में मौजूद नैचरल ऑइल आपके बालों में समान रूप से वितरित हो जाता है। ऐसा होने से बालों के टूटने, झड़ने व तैलीय और चिकना स्कैल्प होने की समस्या खत्म होती है।
4 बाल टूटने की समस्या कम -
लकड़ी की कंघी का इस्तेमाल करने से बालों के टूटने और झड़ने की समस्या कम होती है क्योंकि चौड़े दांत होने की वजह से ये बालों में स्मूथली चलती है और उलझे बालों को आसानी से सुलझाती है।
5 स्कैल्प ऐलर्जी होगी दूर -
जिन लोगों का स्कैल्प सेसेंटिव होता है, उनके लिए भी लकड़ी की कंघी बेहतर है क्योंकि ये नैचरल वुड से बनी होती हैं, कई बार इनमें प्रोटेक्टिव कोटिंग भी होती है जिससे स्कैल्प में ऐलर्जी या खुजली जैसे समस्या नहीं होती।
टिप्स ट्रिक्स /शौर्यपथ /अधिकतर लोग घर की साफ-सफाई पर ध्यान देते हैं। घर को संवारकर रखना पसंद करते हैं जिससे कि घर बिलकुल परफेक्ट और साफ नजर आए। लेकिन घर के किचन की चिपचिपी टाइल्स इसे अधूरा कर देती है। यदि आपके भी किचन की टाइल्स चिपचिपी और गंदी है तो यह आपके घर की शोभा को बिगाड़ सकती है। तो ऐसे में क्या करना चाहिए? यदि आप भी चाहती हैं किचन की टाइल्स को आसान तरीके से साफ़ करना तो इस लेख में हम आपको बता रहे हैं कुछ आसान और बेहतरीन टिप्स
सांद्रता वाला ब्लीच का घोल तैयार करें। इसे इस्तेमाल करने से पहले ग्लव्स पहन लें। इस घोल से टाइल्स को अच्छी तरह रगड़कर धोएं।
सिरके के घोल से करें टाइल्स को साफ
इसके लिए आप पानी में सिरका, नमक और बैकिंग सोडा मिलाकर घोल तैयार करें। इस घोल से अपने किचन की टाइल्स को साफ करें। इस घोल से आपकी टाइल्स चमक उठेगी।
पानी में डिटर्जेंट मिलाकर दाग साफ़ करने से आपको अच्छे परिणाम मिल सकते हैं और टाइल्स चमक सकती हैं। इस घोल से आप ब्रश की मदद से अपने किचन की टाइल्स को साफ करें।
सेहत / शौर्यपथ / कई लोगों को हद से ज्यादा पसीना आता है। अगर पसीने को साफ नहीं किया गया और ये लंबे समय तक शरीर पर रहा तो इससे दुर्गंध तो आती ही है, साथ ही ये कीटाणुओं को जन्म देता है। ऐसी स्थिती से बचने के लिए आपको कुछ बातों पर ध्यान देना होगा। आइए, हम आपको बताते हैं -
1. शरीर के जिन हिस्सों से आपको ज्यादा दुर्गंध आने की समस्या हो, ऐसे में घर से बाहर निकलने से पहले कुछ मिनटों तक उन जगहों पर बर्फ लगाकर रखें। इससे ज्यादा पसीना नहीं आएगा।
2. यदि आपके पैरों के तलवों में ज्यादा पसीना आता है, तो एक टब में पानी भरें और उसमें दो चम्मच फिटकरी पाउडर डाल दें। अब इस टब में दो से पांच मिनट अपने पैरों को डुबोकर बैठें।
3. जो कपड़े आप पूरा दिन पहनकर बाहर गए हों वे कपड़े धोने के बाद ही अलमारी में रखें।
4. ज्यादा समय पहने और बिना धुले कपड़े अलमारी में रखने से उनमें दुर्गंध पैदा करने वाले बैक्टीरिया सक्रिय हो जाते हैं और यह दुर्गंध दूसरे साफ कपड़ों में भी पहुंच जाती है और आप समझ ही नहीं पाते हैं कि साफ-धुले कपड़ों से अजीब सी गंध क्यों आ रही है?
5. इस मौसम में सिंथेटिक कपड़े न पहनें, बल्कि सूती कपड़े ही पहनें। ऐसे कपड़े पहनें जो शरीर से चिपके हुए न हों, क्योंकि तंग कपड़ों में ज्यादा पसीना आता है और इससे हवा पास नहीं हो पाती, जिससे दुर्गंध आती है।
6. शरीर की साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें, जरुरत पड़े तो दिन में दो बार भी नहा लें।
7. नहाने के लिए नीम या एंटी-बैक्टीरियल साबुन का इस्तेमाल करें।
8. तली-भुनी व मसालायुक्त चीजें इस मौसम में खाने से बचें।
9. बॉथ टब में नहाने से एक घंटा पहले संतरे का छिलका डालकर छोड़ दें।
इस पानी से नहाने से शरीर में ताजगी महसूस होगी।
10. शरीर को रगड़कर ताजे पानी से नहाने से शरीर से गंदगी का सफाया हो जाता है। और शरीर से दुर्गेंध नहीं आती है।
धर्म संसार /शौर्यपथ / द्वादश ज्योतिर्लिंगों में प्रमुख काशी विश्वनाथ मंदिर अनादिकाल से काशी में है। यह स्थान शिव और पार्वती का आदि स्थान है इसीलिए आदिलिंग के रूप में अविमुक्तेश्वर को ही प्रथम लिंग माना गया है। इसका उल्लेख महाभारत और उपनिषद में भी किया गया है। ईसा पूर्व 11वीं सदी में राजा हरीशचन्द्र ने जिस विश्वनाथ मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया था उसका सम्राट विक्रमादित्य ने जीर्णोद्धार करवाया था। उसे ही 1194 में मुहम्मद गौरी ने लूटने के बाद तुड़वा दिया था। बाद में 1777-80 में इंदौर की महारानी अहिल्याबाई द्वारा इस मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया गया था।
1. हिंदू देवताओं में भैरव का बहुत ही महत्व है। इन्हें काशी का कोतवाल कहा जाता है। कहा जाता है कि बाबा विश्वनाथ काशी के राजा हैं और काल भैरव उनके कोतवाल, जो लोगों को आशीर्वाद भी देते हैं और सजा भी। काशी विश्वनाथ में दर्शन से पहले भैरव के दर्शन करना होते हैं तभी दर्शन का महत्व माना जाता है। यहां काल भैरव को काशी के कोतवाल की संज्ञा से विभूषित किया गया है।
2. भैरव का कार्य है शिव की नगरी काशी की सुरक्षा करना और समाज के अपराधियों को पकड़कर दंड के लिए प्रस्तुत करना। जैसे एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी, जिसके पास जासूसी कुत्ता होता है। उक्त अधिकारी का जो कार्य होता है वही भगवान भैरव का कार्य है।
3. काल भैरव के दर्शन मात्र से शनि की साढ़े साती, अढ़ैया और शनि दंड से बचा जा सकता है। ऐसा कहा जाता है कि खुद यमराज भी बिना इजाजत के यहां किसी के प्राण नहीं हर सकते और दंड देने के अधिकार भी शिव एवं काल भैरव को ही है। यमराज को भी यहां के इंसानों को दंड देने का अधिकार नहीं है।
4. पौराणिक कथा के अनुसार एक बार ब्रह्मा जी और विष्णु जी में श्रेष्ठता को लेकर विवाद हुआ। ब्रह्मा ने झूठ बोला तो शिवजी को क्रोध आ गया। भगवान शिव के क्रोध से ही काल भैरव जी प्रकट हुए और उन्होंने ब्रह्मा जी का सिर काट दिया था। काल भैरव पर ब्रह्म हत्या का दोष लगने के बाद वह तीनों लोकों में घूमे। परंतु उनको मुक्ति नहीं मिली। इसके बाद भगवान शिव ने आदेश दिया कि तुम काशी जाओ, वहीं मुक्ति मिलेगी। इसके बाद वह काल भैरव के रूप में काशी में स्वयं भू प्रकट हुए और वहीं गंगा स्नान किया और फिर शिव की नगरी के कोलवाल बन वहीं रहने लगे।
5. काशी में जब भी कोई अधिकारी पदस्थ होता है तो सबसे पहले उसे काल भैरव के यहां हाजरी लगानी होती है तभी वह अपना कामकाज प्रारंभ करता है। इतना ही नहीं यहां के लोगों के बीच यह मान्यता है कि यहां मंदिर के पास एक कोतवाली भी है, और काल भैरव स्वयं उस कोतवाली का निरीक्षण करते हैं।
धर्म संसार / शौर्यपथ / मुख्यत: काल भैरव और बटुक भैरव की पूजा का प्रचलन है। श्रीलिंगपुराण 52 भैरवों का जिक्र मिलता है। मुख्य रूप से आठ भैरव माने गए हैं- 1.असितांग भैरव, 2. रुद्र या रूरू भैरव, 3. चण्ड भैरव, 4. क्रोध भैरव, 5. उन्मत्त भैरव, 6. कपाली भैरव, 7. भीषण भैरव और 8. संहार भैरव। आदि शंकराचार्य ने भी 'प्रपञ्च-सार तंत्र' में अष्ट-भैरवों के नाम लिखे हैं। तंत्र शास्त्र में भी इनका उल्लेख मिलता है। इसके अलावा सप्तविंशति रहस्य में 7 भैरवों के नाम हैं। इसी ग्रंथ में दस वीर-भैरवों का उल्लेख भी मिलता है। इसी में तीन बटुक-भैरवों का उल्लेख है। रुद्रायमल तंत्र में 64 भैरवों के नामों का उल्लेख है। आओ जानते हैं भगवान उन्मत्त भैरव की संक्षिप्त जानकारी।
उन्मत्त भैरव :1. उन्मत्त भैरवनाथ का शरीर पीले रंग का है तथा वे घोड़े पर सवारी करते हैं। उनकी पत्नी वराही हैं और इन भैरव की दिशा पश्चिम है। इसका खास मंदिर तमिलनाडु के विजहिनाथर में है। यह भैरव शांत स्वभाव के हैं।
2. इनका मंत्र है ॐ भं भं श्री उन्मताये नम:। बिना माला के सवा घंटे मंत्र जाप करें।
3. इनकी पूजा, प्रार्थना या अर्चना करने से व्यक्ति के अंदर के सभी तरह के नकारात्मक विचार या भाव तिरोहित हो जाते हैं और वह सुखी एवं शांतिपूर्वक जीवन यापन करता है।
4. इनकी पूजा करने से नौकरी, प्रमोशन, धन आदि की प्राप्ति होती है और साथ ही घर परिवार में प्रसन्नता का वातावरण निर्मित होता है।
5. लहसुन, प्याज आदि त्यागकर शुद्ध सात्विक रूप से इनकी आराधना करने से ये जल्दी प्रसन्न होते हैं।
6. वाराणसी से में सभी भैरव के मंदिर बने हुए हैं। उन्मत्त भैरव का मंदिर पंचक्रोशी मार्ग के देवरा गांव में स्थित है।
आस्था /शौर्यपथ / कुछ लोगों पर अचानक कोई संकट आ जाता है तो कुछ लोग सालों से संकटों का सामना कर रहे हैं। मान जाता है कि संकटों का कारण पितृदोष, कालसर्प दोष, शनि की साढ़े साती और ग्रह-नक्षत्रों के बुरे प्रभाव होते हैं। कुछ लोग मानते हैं कि सभी कुछ अच्छा है लेकिन यदि आपका घर दक्षिण मुखी है तो आप जिंदगी भर परेशान रहेंगे।
यह भी माना जाता है कि उपरोक्त कारणों के कारण व्यक्ति के घर में गृह कलह, आर्थिक संकट, वैवाहिक संकट और दुख बना रहता है। इसी कारण व्यक्ति को कोर्ट कचहरी या दवाखाने के चक्कर काटते रहना पड़ते हैं या अन्य किसी प्रकार का संकट खड़ा होता है। हालांकि कुछ विद्वान यह भी कहते हैं कि सब कर्मों का लेखा जोखा है अर्थात कर्म सुधार लो तो सब कुछ सुधरने लगता है। अब हम आपके कर्म तो सुधार नहीं सकते, लेकिन यहां लाल किताब के अनुसार कुछ सावधानी और उपाय जरूर बता सकते हैं।
सावधानियां, हिदायत या उपाय :
1. किसी भी प्रकार का व्यसन और नशा न करें। करते हों तो त्याग दें।
2. ब्याज, जुए या सट्टे का कार्य करते हो तो त्याग दें।
3. मंगल, शनि, गुरु, तेरस, चौदस, अमावस्या तथा पूर्णिमा के दिन पवित्र बने रहें।
4. दादी, सास, मां, बहन, बेटी, पत्नी, मौसी, साली और बुआ से संबंध अच्छे रखें।
5. दादा, पिता, ससुर, भाई, काका, मामा, भांजे, साले, बहनोई, भतीजे और भाई से संबंध अच्छे रखें।
6. मांस और तामसिक भोजन को त्याग दें और नकारात्मक विचारों से दूर रहें।
7. दान देने या लेने से पहले अपनी कुंडली किसी लाल किताब के विशेषज्ञ को दिखाएं।
8. घर को वास्तु अनुसार बनाएं और उसके आसपास साफ-सफाई का ध्यान रखें। किस ग्रह के पेड़-पौधे लगे हैं उसकी जांच करे।
9. लाल किताब के सभी उपाय दिन में ही करें। उपाय करने से पहले अपनी कुंडली का अच्छे से विश्लेषण कर लें।
10. सभी तरह के तांत्रिक अनुष्ठान और रात्रि के घोर कर्मों से दूर रहें। प्रतिदिन मंदिर जाते रहें।
12. बाथरूम और शौचालय अलग अलग हों और उन्हें साफ सुथरा रखें। सीढ़ियों को भी साफ सुथरा रखें।
13. झूठ ना बोलें और किसी का अहित ना करें। कथनी और करनी में समान रहें।
14. सेहतमंद बने रहने के लिए उत्तम भोजन करें और ग्रह अनुसार ही भोजन का चयन करें।
15. अंधे, दिव्यांग, विधवा, सफाइकर्मी, गरीब, अबला, कन्या आदि की मदद करते रहें।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
