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June 01, 2026
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धर्म संसार / शौर्यपथ / अयोध्या भगवान श्रीराम की जन्मभूमि है। यहां महल, मंदिर और तमाम तरह के आश्रम बने हुए थे। लेकिन गुलामी के काल में आक्रांतानों ने यह सभी तोड़ दिए थे। पुरातात्विक खुदाई और अवशेषों से अब यह सिद्ध हो चुका है कि रामलला जहां विराजमान है वहीं श्रीराम का जन्म हुआ था। आओ जानते हैं जन्मभूमि की 10 खास बातें।
1. कहते हैं कि भगवान श्रीराम के जल समाधि लेने के पश्चात अयोध्या कुछ काल के लिए उजाड़-सी हो गई थी, लेकिन उनकी जन्मभूमि पर बना महल वैसे का वैसा ही था। भगवान श्रीराम के पुत्र कुश ने एक बार पुन: राजधानी अयोध्या का पुनर्निर्माण कराया।
2. इस निर्माण के बाद सूर्यवंश की अगली 44 पीढ़ियों तक इसका अस्तित्व आखिरी राजा, महाराजा बृहद्बल तक अपने चरम पर रहा। कौशलराज बृहद्बल की मृत्यु महाभारत युद्ध में अभिमन्यु के हाथों हुई थी। महाभारत के युद्ध के बाद अयोध्या उजड़-सी हो गई, मगर श्रीराम जन्मभूमि का अस्तित्व फिर भी बना रहा।
3. इसके बाद यह उल्लेख मिलता है कि ईसा के लगभग 100 वर्ष पूर्व उज्जैन के चक्रवर्ती सम्राट विक्रमादित्य एक दिन आखेट करते-करते अयोध्या पहुंच गए। विक्रमादित्य को इस भूमि में कुछ चमत्कार दिखाई देने लगे। तब उन्होंने खोज आरंभ की और पास के योगी व संतों की कृपा से उन्हें ज्ञात हुआ कि यह श्रीराम की अवध भूमि है। उन संतों के निर्देश से सम्राट ने यहां एक भव्य मंदिर के साथ ही कूप, सरोवर, महल आदि बनवाए। कहते हैं कि उन्होंने श्रीराम जन्मभूमि पर काले रंग के कसौटी पत्थर वाले 84 स्तंभों पर विशाल मंदिर का निर्माण करवाया था। इस मंदिर की भव्यता देखते ही बनती थी।
4. विक्रमादित्य के बाद के राजाओं ने समय-समय पर इस मंदिर की देख-रेख की। उन्हीं में से एक शुंग वंश के प्रथम शासक पुष्यमित्र शुंग ने भी मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया था। पुष्यमित्र का एक शिलालेख अयोध्या से प्राप्त हुआ था जिसमें उसे सेनापति कहा गया है तथा उसके द्वारा दो अश्वमेध यज्ञों के किए जाने का वर्णन है।
5. अनेक अभिलेखों से ज्ञात होता है कि गुप्तवंशीय चन्द्रगुप्त द्वितीय के समय और तत्पश्चात काफी समय तक अयोध्या गुप्त साम्राज्य की राजधानी थी। गुप्तकालीन महाकवि कालिदास ने अयोध्या का रघुवंश में कई बार उल्लेख किया है।
6. इसके बाद कहते हैं कि चीनी भिक्षु फा-हियान ने यहां देखा कि कई बौद्ध मठों का रिकॉर्ड रखा गया है। यहां पर 7वीं शताब्दी में चीनी यात्री हेनत्सांग आया था। उसके अनुसार यहां 20 बौद्ध मंदिर थे तथा 3,000 भिक्षु रहते थे और यहां हिन्दुओं का एक प्रमुख और भव्य मंदिर भी था, जहां रोज हजारों की संख्या में लोग दर्शन करने आते थे जिसे राम मंदिर कहा जाता था।
7. इसके बाद ईसा की 11वीं शताब्दी में कन्नौज नरेश जयचंद आया तो उसने मंदिर पर सम्राट विक्रमादित्य के प्रशस्ति शिलालेख को उखाड़कर अपना नाम लिखवा दिया। पानीपत के युद्ध के बाद जयचंद का भी अंत हो गया। इसके बाद भारतवर्ष पर आक्रांताओं का आक्रमण और बढ़ गया। आक्रमणकारियों ने काशी, मथुरा के साथ ही अयोध्या में भी लूटपाट की और पुजारियों की हत्या कर मूर्तियां तोड़ने का क्रम जारी रखा। लेकिन 14वीं सदी तक वे अयोध्या में राम मंदिर को तोड़ने में सफल नहीं हो पाए।
8. विभिन्न आक्रमणों के बाद भी सभी झंझावातों को झेलते हुए श्रीराम की जन्मभूमि पर बना भव्य मंदिर 14वीं शताब्दी तक बचा रहा। कहते हैं कि सिकंदर लोदी के शासनकाल के दौरान यहां मंदिर मौजूद था।
9. 14वीं शताब्दी में हिन्दुस्तान पर मुगलों का अधिकार हो गया और उसके बाद ही राम जन्मभूमि एवं अयोध्या को नष्ट करने के लिए कई अभियान चलाए गए। इस अभियान में हजारों रक्षकों को अपने प्राणों का बलिदान देना पड़ा। मंदिर की रक्षा के लिए जहां हिन्दू अखाड़े के साधुओं को शहीद होना पड़ा वहीं गुरुगोविंद सिंह की निहंग सेना ने भी मुगलों की सेना से राम जन्मभूमि की रक्षार्थ युद्ध किया था। इस युद्ध में गुरु गोविंद सिंह जी की निहंग सेना को चिमटाधारी साधुओं का साथ मिला था। कहते हैं कि मुगलों की शाही सेना के हमले की खबर जैसे ही चिमटाधारी साधु बाबा वैष्णवदास को लगी तो उन्होंने गुरु गोविंद सिंह जी से मदद मांगी और गुरु गोविंदसिंह जी ने ​तुरंत ही अपनी सेना भेज दी थी।
10. अंतत: 1527-28 में अयोध्या में स्थित भव्य मंदिर को तोड़ दिया गया और उसकी जगह बाबरी ढांचा खड़ा किया गया। कहते हैं कि मुगल साम्राज्य के संस्थापक बाबर के एक सेनापति ने बिहार अभियान के समय अयोध्या में श्रीराम के जन्मस्थान पर स्थित प्राचीन और भव्य मंदिर को तोड़कर एक मस्जिद बनवाई थी, जो 1992 तक विद्यमान रही।

सेहत /शौर्यपथ /आम तौर पर सर्दी होने या शा‍रीरिक पीड़ा होने पर घरेलू इलाज के रूप में हल्दी वाले दूध का इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं, कि हल्दी वाले दूध के एक नहीं अनेक फायदे हैं? नहीं जानते तो हम बता रहे हैं-
हल्दी अपने एंटीसेप्टिक और एंटीबायोटिक गुणों के लिए जानी जाती है, और दूध, कैल्शि‍यम का स्त्रोत होने के साथ ही शरीर और दिमाग के लिए अमृत के समान हैं। लेकिन जब दोनों के गुणों को मिला दिया जाए, तो यह मेल आपके लिए और भी बेहतर साबित होता है, जानते हैं कैसे -
1 जब चोट लग जाए - यदि किसी कारण से शरीर के बाहरी या अंदरूनी हिस्से में चोट लग जाए, तो हल्दी वाला दूध उसे जल्द से जल्द ठीक करने में बेहद लाभदायक है। क्योंकि यह अपने एंटी बैक्टीरियल और एंटीसेप्टिक गुणों के कारण बैक्टीरिया को पनपने नहीं देता।
2 शारीरिक दर्द - शरीर के दर्द में हल्दी वाला दूध आराम देता है।
हाथ पैर व शरीर के अन्य भागों में दर्द की शिकायत होने पर रात को सोने से पहले हल्दी वाले दूध का सेवन करें।
3 त्वचा हो साफ और खूबसूरत -
दूध पीने से त्वचा में प्राकृतिक चमक पैदा होती है, और दूध के साथ हल्दी का सेवन, एंटीसेप्टिक व एंटी बैक्टीरियल होने के कारण त्वचा की समस्याओं जैसे - इंफेक्शन, खुजली, मुंहासे आदि के बैक्टीरिया को धीरे-धीरे खत्म कर देता है। इससे आपकी त्वचा साफ और स्वस्थ और चमकदार दिखाई देती है।
4 सर्दी होने पर - सर्दी, जुकाम या कफ होने पर हल्दी वाले दूध का सेवन अत्यधिक लाभकारी साबित होता है। इससे सर्दी, जुकाम तो ठीक होता ही है, साथ ही गर्म दूध के सेवन से फेफड़ों में जमा हुआ कफ भी निकल जाता है। सर्दी के मौसम में इसका सेवन आपको स्वस्थ बनाए रखने में मदद करता है।
5 हड्डियां बने मजबूत - दूध में कैल्श‍ियम होने के कारण यह हड्डियों को मजबूत बनाता है और हल्दी के गुणों के कारण रोगप्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि होती है। इससे हड्डी संबंधि‍त अन्य समस्याओं से छुटकारा मिलता है और ऑस्टियोपोरोसिस में कमी आती है।
6 जब नींद न आए - यदि आपको किसी भी कारण से नींद नहीं आ रही है, तो आपके लिए सबसे अच्छा घरेलू नुस्खा है, हल्दी वाला दूध। बस रात को भोजन के बाद सोने के आधे घंटे पहले हल्दी वाला दूध पीएं, और देखि‍ए कमाल।
7 पाचन तंत्र हो गड़बड़ - हल्दी वाले दूध का सेवन, आपकी आंतो को स्वस्थ रखकर पाचन संबंधी समस्याओं को दूर करता है। पेट के अल्सर, डायरिया, अपच, कोलाइटिस एवं बवासीर जैसी समस्याओं में भी हल्दी वाला दूध फायदेमंद है।
8 जोड़ों के लिए असरकारी - हल्दी वाले दूध का प्रतिदिन सेवन, गठिया- बाय, जकड़न को दूर करता है, साथ ही जोड़ों मांसपेशियों को लचीला बनाता है।
9 ब्लड शुगर कम करे - खून में शर्करा की मात्रा अधिक हो जाने पर हल्दी वाले दूध का सेवन ब्लड शुगर को कम करने में मदद करता है।लेकिन अत्यधि‍क सेवन शुगर को अत्यधि‍क कम कर सकता है, इस बात का ध्यान रखें।
10 सांस की तकलीफ - हल्दी वाले दूध में मौजूद एंटी माइक्रो बैक्टीरियल गुण, दमा, ब्रोंकाइटिस, साइनस, फेफड़ों में जकड़न व कफ से राहत देने में सहायता करते हैं। गर्म दूध के सेवन से शरीर में गर्मी का संचार होता है जिससे सांस की तकलीफ में आराम मिलता है।
11 वायरल संक्रमण - में आए बदलाव एवं अन्य कारणों से होने वाले वायरल संक्रमण में हल्दी वाला दूध सबसे बेहतर उपाय है, जो आपको संक्रमण से बचाता है।

सेहत /शौर्यपथ / कपूर अपने एंटीबायोटिक और एंटीफंगल गुणों के चलते पूजा-हवन सामग्री के अलावा सेहत और ब्यूटी के लिए भी बेहद फायदेमंद है। यदि आपने अपने ब्यूटी प्रसाधन में इसे भी जोड़ लिया तो आपकी कई समस्याएं हल हो जाएंगी। जितना लाभकारी है कपूर, उतना ही बेशकीमती है कपूर का तेल।
तो आइए जानते हैं कपूर के तेल के जादुई फायदे। लेकिन उससे पहले हम आपको बताते हैं कि कैसे आप कपूर का तेल घर पर ही बना सकते हैं।
वैसे तो कपूर का तेल बाजार में भी उपलब्ध होता है, लेकिन इसे घर पर भी बड़ी ही आसानी से तैयार किया जा सकता है। इसे घर पर बनाने के लिए नारियल के तेल में कपूर के कुछ टुकड़े डालें और किसी एयरटाइट डिब्बे में भरकर रख दें। कुछ समय में नारियल का यह तेल कपूर के सत्वों को ग्रहण कर लेगा और ये हो गया तैयार कपूर का तेल।
अब जानते हैं इसके 5 जादुई फायदे -
1. कपूर के तेल को त्वचा पर लगाने से फोड़े-फुंसी और मुंहासे ठीक होने लगते हैं। इससे न केवल मुंहासों में कमी आती है, बल्कि यह त्वचा पर मुंहासों के पुराने दाग-धब्बों को भी जड़ से समाप्त कर देता है।
2. एक टब में गुनगुना गर्म पानी लें और उसमें थोड़ा सा कपूर का तेल डालें। अब इसमें कुछ देर अपने पैरों को डुबोकर बैठ जाएं। इससे आपकी एड़ियां साफ हो जाएंगी और फटी एड़ियां भी जल्दी ही ठीक हो जाएंगी। यदि आपके पैरों में कोई इंफेक्शन या फंगस लगा हो, तो भी ऐसा करने से फंगस हट जाएंगे और साथ ही दर्द से भी राहत मिलेगी।
3. कपूर का तेल बालों में लगाने से बाल जल्दी बढ़ने लगते हैं, मजबूत होते हैं और झड़ना भी रुक जाते हैं। इसके लिए कपूर का तेल दही में मिलाकर बालों की जड़ों में लगाएं और आधे से 1 घंटे बाद बाल धो लें।
4. स्किन में यदि कोई जले या कटे का निशान हो तब भी कपूर का तेल उस हिस्से पर लगाने से निशान हल्के होते चले जाएंगे।
5. त्वचा की किसी भी प्रकार की समस्या हो, कपूर का तेल उसे समाप्त कर आपको साफ, स्वस्थ, चिकनी और बेदाग त्वचा देता है।
6. अंदरुनी दर्द में भी कपूर का यह तेल बेहद असरदार औषधि है। शरीर के किसी भी भाग में दर्द होने पर कपूर का यह तेल हल्का गुनगुना कर उस स्थान पर मसाज करने पर दर्द से राहत मिलती है।
7. तनाव कम करने के लिए कपूर का तेल फायदेमंद होता है। इसे माथे पर लगाना या फिर बालों में इसकी मसाज करने से तनाव कम होता है।
8. बालों का झड़ना हो या फिर डैन्ड्रफ की समस्या हो, कपूर के तेल से मसाज कीजिए। इन दोनों समस्याओं का हल हो जाएगा, वहीं बालों के दोबारा उगने में भी मदद मिलेगी।

सेहत /शौर्यपथ /कोरोनावायरस से निजात पाने के लिए हरसंभव प्रयास जारी है। अभी इस वायरस से राहत पाने के लिए कोई कारगर इलाज सामने नहीं आया है। लेकिन विशेषज्ञ, डॉक्टर्स इस वायरस से निपटने के लिए इम्यून सिस्टम को मजबूत करने की सलाह दे रहे हैं। यदि आपका इम्यून सिस्टम मजबूत है तो आप पर वायरस हावी नहीं हो सकता है यानी आपके शरीर में ही इस वायरस को मात देने की शक्ति मौजूद है। लेकिन जरूरी ये है कि हमें इस बारे में संपूर्ण जानकारी हो कि इम्यून सिस्टम को मजबूत करने के लिए आपको अपनी दिनचर्या में किन चीजों को शामिल करना चाहिए और ऐसी कौन-कौन-सी चीजें हैं जिनके सेवन से आपका इम्यून सिस्टम कमजोर होता है?
आइए सबसे पहले पहले जानते हैं कि कौन-कौन-सी वे चीजें है जिनके सेवन से आप अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत कर सकते हैं?

नियमित योगाभ्यास

शरीर को अंदर से मजबूत बनाए रखने के लिए नियमित योगाभ्यास करना जरूरी है। शारीरिक व्यायाम आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए बहुत जरूरी है।

शारीरिक गतिविधियां

फिजिकल एक्टिविटी पर ज्यादा ध्यान दें। शारीरिक गतिविधियों से आप एक्टिव रहेंगे और आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ेगी। इसके लिए आप खेल को शामिल कर सकते हैं जिससे शरीर का व्यायाम भी होता रहे और मानसिक रूप से आप फ्रेश भी महसूस करें।
बाहर का खाना न खाएं

बाहर के खाने से मतलब है कि आपको घर में बने हुए शुद्ध भोजन का ही सेवन करना चाहिए। यदि आप चाहते हैं कि आप वायरस से दूरी बनाए रखें तो आपको खुद पर ध्यान देने की जरूरत है। इसके लिए इस बदलाव को जरूर शामिल करें और घर का बना शुद्ध भोजन करें।

विटामिन सी का सेवन

इम्यून सिस्टम को मजबूत करने के लिए विटामिन-सी का सेवन करें। इसके लिए आप आंवले का सेवन कर सकते हैं।
फल और हरी सब्जियां

अपनी डाइट में फलों को शामिल करें। हरी सब्जियों का सेवन करें। यह आपके इम्यून सिस्टम को मजबूत करेगी और किसी भी वायरस से लड़ने की शक्ति देगी।

तुलसी का सेवन

रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के लिए तुलसी का सेवन करें। रोज खाली पेट तुलसी का सेवन आप कर सकते हैं।

आइए अब जानते हैं ऐसी कौन-सी चीजें हैं जिनके सेवन से आपकी इम्युनिटी घट सकती है।
यदि आप ऐसी चीजों का सेवन करते हैं, जो मैदे से बनी हैं तो तुरंत इनका सेवन करना बंद कर दें। ये आपके स्वास्थ्य के लिए बहुत नुकसानदायक साबित हो सकती हैं। मैदे से बनी चीजें जैसे ब्रेड, नॉन, भटूरे, पिज्जा आदि।

चीनी का सेवन न करें, बल्कि चीनी की जगह आप गुड़ का सेवन कर सकते हैं।

यदि कोल्ड ड्रिंक्स पीने के शौकीन हैं, तो अपने शौक को बदलने का समय आ गया है। कोरोना काल में जब दिनचर्या में इतना बदलाव आ चुका है और लोग सेहतमंद जिंदगी ओर बढ़ना चाहते हैं तो इसके लिए आपको उन सभी आदतों का त्याग करना होगा, जो आपके स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा सकती हैं।
पैकिंग वाली चीजों को खाने से बचें।

जंकफूड के सेवन से बचें, यह आपके इम्यून सिस्टम को घटाने का काम करता है।

कोरोनावायरस से निपटने के लिए यदि हम अपनी डाइट व अपनी लाइफस्टाइल में कुछ महत्वपूर्ण बदलाव करें तो इस वायरस को खुद पर हावी होने से रोका जा सकता है। अब वक्त है बदलाव का। कोरोना काल में बदलाव और समझदारी के साथ बढ़ाया गया कदम आपको सेहतमंद जिंदगी की तरफ ले जाएगा इसलिए इस वायरस से डरें नहीं, बल्कि खुद को अंदर से मजबूत करें और इस वायरस को मात दें।

टिप्स ट्रिक्स /शौर्यपथ /गर्मी तेजी से बढ़ती जा रही है। धूप में बाहर निकलना स्किन के लिए काफी खतरनाक होता है। स्किन ड्राई और बेजान होने लगती है। इतना ही नहीं काली भी पड़ने लगती है। लेकिन इन सभी स्किन समस्या का एक उपाय है ग्लीसरिन।
जी हां, ग्लीसरिन का उपयोग आप ठंड में अपनी फटी हुई त्वचा की देखभाल के लिए करते थे लेकिन यह गर्मी में भी कारगर है। तो आइए जानते हैं गर्मी में ग्लीसरिन कैसे आपकी त्वचा को मुलायम और सन प्रोटेक्ट करता है-
1. ग्लीसरिन के उपयोग से आपके चेहरे की झुर्रिया खत्म हो जाती है। साथ ही चेहरे पर दिख रही लाइन्स भी खत्म हो जाती है। इसका उपयोग आप नहाने के बाद कर सकते हैं।
2. ग्लीसरिन भले ही चिपचिपा होता है लेकिन यह सूरज की हानिकारक किरणों से आपकी स्किन को प्रोटेक्ट करता है। इसमें आप चाहे तो पानी की जगह गुलाबजल भी मिक्स कर सकते हैं। इससे आपकी चेहरे की चमक बरकरार रहेगी।
3. सॉफ्ट और क्रिस्टल क्लियर स्किन के लिए आप ग्लीसरिन को रोज रात को फेस वॉश करके लगाकर सोएं। सुबह उठकर ठंडे पानी से चेहरा धो लें। आपकी स्किन एकदम सॉफ्ट और क्रिस्टल क्लियर हो जाएगी।
4. अगर ग्लीसरिन लगाने से आपको गर्मी लगती है तो आप इसे सिर्फ रात में ही लगाएं। दिन में मॉइश्चराइजर लगाएं। रोज रात को आप कॉटन की मदद से अपनी आंखों के नीचे लगाकर सो सक हैं। इससे डार्क सर्कल में भी राहत मिलेगी।
5. इसमें मौजूद एंटी-ऐजिंग प्रॉपर्टीज आपके चेहरे को साफ करती है। साथ ही ऑयली स्किन महिलाएं इसे सिर्फ एक क्लींजर के तौर पर ही लगाएं। क्योंकि ऑयली स्किन होने से पिंपल्स जल्दी हो जाती है।

आस्था /शौर्यपथ / गणेशजी ने तीनों युग में जन्म लिया है और वे आगे कलयुग में भी जन्म लेंगे। धर्मशात्रों के अनुसार गणपति ने 64 अवतार लिए, लेकिन 12 अवतार प्रख्यात माने जाते हैं जिसकी पूजा की जाती है। अष्ट विनायक की भी प्रसिद्धि है। आओ जानते हैं मान्यता पर आधारित उनके भाई और बहनों के नाम।
गणेशजी के भाई-बहन :
1. गणेशजी के यूं तो कार्तिकेय ही एकमात्र भाई हैं जिन्हें सुब्रमण्यम, मुरुगन और स्कंद भी कहा जाता है। जब देवताओं में प्रथम होने की होड़ हुई तो कार्तिकेय धरती का चक्कर लगाकर जीत गए थे, लेकिन गणेशजी ने अपने माता-पिता की परिक्रमा करके ही यह सिद्ध कर दिया था कि वे ही प्रथम हैं। कहते हैं कि शिवपुत्र गणेश के भाई कार्तिकेय ने विवाह नहीं किया था।
2. कार्तिकेय के अलावा गणेशजी के अन्य भाइयों के नाम हैं- सुकेश, जलंधर, अयप्पा, भूमा, अंधक और खुजा।
3. उनकी एक बहन भी है। गणेशजी की बहन का नाम अशोक सुंदरी है।
4. अशोक सुंदरी के अलावा ज्योति (मां ज्वालामुखी) और मनसादेवी भी उनकी बहनें हैं।
भगवान श्री गणेश की 2 पत्नियां कौन हैं, जानिए कैसे हुआ विवाह
भाद्रपद की शुक्ल चतुर्थी के दिन भगवान गणेशजी का जन्म हुआ था। इसलिए इस दिन गणपति की स्थापना करके गणेशोत्सव मनाया जाता है। प्रत्येक माह के कृष्‍ण पक्ष की चतुर्थी संकष्टी और शुक्ल पक्ष की चतुर्थी विनायक चतुर्थी कहलाती है। अमावस्या के बाद वाली चतुर्थी तिथि को विनायक चतुर्थी और पूर्णिमा के बाद वाली चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है। इस दिन गणेशजी की विशेष पूजा होती है। आओ जानते हैं प्रथम पूज्य देव गणेशजी की पत्नियों के बारे में संक्षिप्त में।
गणेशजी की पत्नियां :
1. गणेशजी की ऋद्धि और सिद्धि नामक दो पत्नियां हैं, जो प्रजापति विश्वकर्मा की पुत्रियां हैं।
2. सिद्धि से 'क्षेम' और ऋद्धि से 'लाभ' नाम के 2 पुत्र हुए। लोक-परंपरा में इन्हें ही 'शुभ-लाभ' कहा जाता है। संतोषी माता को गणेशजी की पुत्री कहा गया है।
3. गणेशजी के पोते आमोद और प्रमोद हैं जबकि तुष्टि और पुष्टि को गणेशजी की बहुएं कहा गया है।
4. गणेश विवाह चर्चा भी सभी पुराणों में रोचक तरीके से मिलती है। कहते हैं कि तुलसी के विवाह प्रस्ताव को ठुकराने से तुलसी के श्राप के कारण गणेशजी को रिद्धि और सिद्धि से विवाह करना पड़ा था। गणेशजी ने भी तुलसी को श्राप दे दिया था कि जा तेरा विवाह किसी असुर से होगा। तब तुलसी वृंदा के रूप में जन्मी और उनका विवाह जलंधर से हुआ।
5. यह भी कहा जाता है कि ब्रह्माजी ने रिद्धि एवं सिद्धि को शिक्षा हेतु गणेशजी के पास भेजा था। गणेशजी के समक्ष जब भी कोई विवाह का प्रस्ताव आता तो रिद्धि एवं सिद्धि दोनों की गणेशजी और उनके मूषक का ध्यान भटका देती थीं क्योंकि वे दोनों ही उनके साथ विवाह करना चहती थी।
6. एक दिन गणेशजी सोच में पड़ गए कि सभी के विवाह हो गए मेरे विवाह में ही विघ्‍न क्यों? फिर जब उन्हें रिद्धि एवं सिद्धि की हरकत का पता चला तो वे उन्हें श्राप देने लगे तभी वहां पर ब्रह्मा आ पहुंचे और उन्होंने गणेशजी को ऐसा करने से रोका और रिद्धि एवं सिद्धि से विवाह करने की सलाह दी। तब गणेशजी मान गए। फिर गणेशजी का विवाह धूमधाम से हुआ।

सेहत /शौर्यपथ / क्या कहता है माउथवॉश पर हुआ अध्ययन-
'क्वीन मैरी विश्वविद्यालय' में एक विशेष ब्रांड के एंटीसेप्टिक माउथवॉश पर अध्ययन किया गया था। रिसर्च में पाया गया कि माउथवॉश का दैनिक प्रयोग हार्ट अटैक का खतरा सात प्रतिशत, स्ट्रोक का खतरा 10 प्रतिशत और ब्लड प्रेशर का खतरा 3.5 यूनिट तक बढ़ा देता है। प्रमुख शोधकर्ता अमृता अहलूवालिया की मानें तो, माउथवॉश में मौजूद केमिकल बैड बैक्टीरिया के साथ-साथ गुड बैक्टीरिया को भी मार देते हैं, जिससे यह खतरा और बढ़ जाता है।

माउथवॉश इस्तेमाल करने के नुकसान-
बढ़ सकता है डायबिटीज का खतरा-
एक रिपोर्ट में यह दावा किया गया है कि रोजाना दिन में कम से कम 2 बार माउथवॉश का इस्तेमाल करने वाले लोगों में दूसरे लोगों के मुकाबले डायबिटीज का खतरा 55 फीसदी तक बढ़ जाता है।

मुंह को बनाता है शुष्क-
अत्यधिक मात्रा में एल्कोहल वाले माउथवॉश का इस्तेमाल करने से आपका मुंह शुष्क हो जाता है। जिससे कैविटी के साथ सांस से बदबू आने की समस्या हो सकती है।

मुंह में छालों की समस्‍या-
माउथवॉश में उच्च मात्रा में एल्कोहल होने के साथ एंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं जो मुंह के अंदर टिशू में दर्द कर सकते हैं। इसलिए एल्कोहल बेस्ड माउशवॉश का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। इससे मुंह में छाले भी हो सकते हैं।

स्वाद का अहसास करने वाला तंत्र कमजोर-
रसायनों के प्रयोग से मुंह के अंदर स्वाद का अहसास करने वाला तंत्र कमजोर हो सकता है, दांतों पर भूरे रंग के धब्बे पड़ सकते हैं। एलर्जी हो सकती है और शरीर को लाभ पहुंचाने वाले बैक्टीरिया भी इसके प्रयोग से खत्म हो सकते हैं।
सलाह-
यदि किसी कारणवश आप ब्रश करने के बाद माउथवॉश का इस्तेमाल करना ही चाहते हैं तो पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें। उनके द्वारा बताए गए माउथवॉश को ही प्रयोग में लाएं। डॉक्टर की सलाह के बिना इस्तेमाल किया गया माउथवॉश आपके मुंह और दांतों दोनों को नुकसान पहुंचा सकता है।

लाइफस्टाइल /शौर्यपथ / आपका अचानक किसी जरूरी मीटिंग या पार्टी में जाने का प्लान बने और जैसे ही आप वहां पहनने के लिए अलमारी से कपड़े निकालें कि लाइट चली जाए या प्रेस खराब हो जाए, ऐसा अक्सर कई लोगों के साथ हुआ होगा। ऐसी स्थिति में मन में पहला ख्याल यही आता है, काश! कोई ऐसा तरीका होता जिससे बिना प्रेस किए कपड़ों की सिलवटें अपने आप दूर हो जाती। अगर आपने भी कभी ऐसी ही कोई विश की है तो आपकी विश को पूरा करते हुए आपको बताते हैं वो असरदार तरीके, जिनकी मदद से आप कपड़ों की सिलवटों को बिना प्रेस किए भी आसानी से हटा सकते हैं।
बिना प्रेस यूज करें कपड़ों से हटाएं सिलवटें-
टॉवल-
टॉवल की मदद से कपड़ों की सिलवटें दूर कर सकती हैं। इसके लिए सिलवट वाले कपड़े को बिछा दें और फिर गीले टॉवल से कपड़े की सिलवट वाली जगह को दबाएं। ऐसा करने से कपड़े की सिलवटें दूर हो जाएंगी।
भारी सामान -
जिस कपड़े पर सिलवट हैं उसे मैट्रेस या किसी भारी सामान के नीचे कुछ घंटों के लिए दबाकर रख दें। इससे आपके कपड़ों की सिलवटें निकल जाएंगी।
स्‍प्रे बोतल-
पानी में सिरका मिलाकर उसे एक स्‍प्रे बोतल में डालकर सिलवट वाली जगह डालें। ऐसे में कपड़े के सूखने के बाद सिलवटें नजर नहीं आएंगी।
भारी बर्तन -
छोटे भारी बर्तनों की मदद से भी आप अपने कपड़ों की सिलवटों को दूर कर सकते हैं। इसके लिए एक भारी तले के बर्तन को तेज आंच पर गर्म करके प्रेस की तरह कपड़ों की सिलवटों को दूर करें। बर्तन की तली साफ रखें वरना कपड़े दाग लगने से गंदे हो सकते हैं।
ब्‍लो ड्रायर-
ब्‍लो ड्रायर की मदद से भी सिलवटों को दूर किया जा सकता है। कपड़ों की सिलवटें दूर करने के लिए सबसे पहले आपको जिस कपड़े की सिलवट दूर करनी है, उसे बिछा लें और इस पर हल्‍के हाथ से पानी की कुछ बूंदें डालकर ब्‍लो ड्रायर की मदद से सिलवटें दूर करें।
आइस क्‍यूब-
वॉशिंग मशीन के ड्रायर में 2- 4 आइस क्‍यूब के साथ अपने सिलवट वाले कपड़े भी डालकर ड्रायर चला दें। इसके बाद कपड़ों को ड्रायर से निकालकर कपड़ों को हल्‍के से झटक कर टांग दें। आपके कपड़ों की सिलवटें दूर हो जाएंगी।
Disclaimer- इस आलेख में दी गई जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी लाइव हिन्दुस्तान डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

सेहत /शौर्यपथ /एक नए अध्ययन में पाया गया है कि चुकंदर का जूस पीने से मुंह के बैक्टीरिया का मिश्रण स्वस्थ रक्त वाहिकाओं और मस्तिष्क के कार्य से जुड़ा होता है। अध्ययन के निष्कर्ष ‘रेडॉक्स बायोलॉजी’ जर्नल में प्रकाशित हुए थे।
चुकंदर और लेट्यूस, पालक और अजवाइन सहित अन्य खाद्य पदार्थ, अकार्बनिक नाइट्रेट से भरपूर होते हैं, और कई मौखिक बैक्टीरिया नाइट्रेट को नाइट्रिक ऑक्साइड में बदलने में भूमिका निभाते हैं, जो रक्त वाहिकाओं और न्यूरोट्रांसमिशन (मस्तिष्क में रासायनिक संदेश) को विनियमित करने में मदद करता है। पुराने लोगों में नाइट्रिक ऑक्साइड का उत्पादन कम होता है, और यह गरीब संवहनी (रक्त वाहिका) और संज्ञानात्मक (मस्तिष्क) स्वास्थ्य से जुड़ा होता है।
एक्सेटर विश्वविद्यालय द्वारा नए अध्ययन में, 26 स्वस्थ वृद्ध लोगों ने दो दस-दिवसीय पूरक अवधियों में भाग लिया। एक नाइट्रेट युक्त चुकंदर के रस के साथ और दूसरा नाइट्रेट-मुक्त प्लेसबो जूस के साथ, जिसे उन्होंने दिन में दो बार पिया।
परिणामों में अच्छे संवहनी और संज्ञानात्मक स्वास्थ्य के साथ जुड़े बैक्टीरिया के उच्च स्तर और रोग और सूजन से जुड़े बैक्टीरिया के निम्न स्तर दिखाई दिए। चुकंदर का जूस पीने से सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर औसतन पांच अंक (एमएमएचजी) कम हो जाता है। वानातालो ने आगे कहा कि मौखिक माइक्रोबायोम दीर्घावधि उम्र बढ़ने के साथ जुड़े नकारात्मक संवहनी और संज्ञानात्मक परिवर्तनों को धीमा कर सकता है।
नाइट्रेट युक्त आहार का पहला परीक्षण
एक्सेटर विश्वविद्यालय के प्रमुख लेखक प्रोफेसर एनी वानाथालो ने कहा कि हम वास्तव में इन निष्कर्षों के बारे में उत्साहित हैं, जो स्वस्थ उम्र बढ़ने के लिए महत्वपूर्ण निहितार्थ हैं। पिछले अध्ययनों में युवा और वृद्ध लोगों के मौखिक बैक्टीरिया और स्वस्थ लोगों की तुलना बीमारियों के साथ तुलना में की गई है, लेकिन हमारा इस तरह से नाइट्रेट युक्त आहार का परीक्षण करने वाला पहला है।

खाना खजाना /शौर्यपथ /गर्मियों के मौसम में आइसक्रीम या कुल्फी खाना हर क‍िसी को बेहद पसंद होता है। लेकिन रोज-रोज बाजार से कुल्फी खरीदकर खाना आपकी जेब पर भारी पड़ सकता है। ऐसे में आपके स्वाद और जेब का ख्याल रखते हुए आपको बताते हैं घर पर ही कैसे बनाई जाती है बाजार जैसी मटका कुल्फी।

मटका कुल्‍फी बनाने के लिए सामग्री-
- 2 कप दूध
- 1 कप क्रीम
- 1 कप कंडेंसड मिल्क
- 1/2 टीस्पून इलायची पाउडर
- 1/4 कप मिक्स ड्राई फ्रूट्स
- 1 टेबलस्पून केसर दूध
- 2 मटके

मटका कुल्‍फी बनाने की विधि-
मटका कुल्‍फी बनाने के लिए सबसे पहले मीडियम आंच पर पैन में दूध गर्म कर लें। अब दूध में क्रीम और कंडेंसड मिल्क डालकर लगातार चलाते हुए पकाएं। जब दूध गाढ़ा होने लगे तो इसमें केसर वाला दूध और इलायची पाउडर डालकर मिलाएं। अब दूध के आधा रह जाने पर इसमें ड्राई फ्रूट्स डालकर गैस बंद कर दें। इसके बाद जब दूध पूरी तरह से ठंडा हो जाए तब मिश्रण को मटकों में डालकर सिल्वर फॉयल से कवर कर दें। अब 7-8 घंटों के लिए इसे फ्रीजर में रख दें। आपकी मटका कुल्फी बनकर तैयार है, इसे फ्रिज से निकालकर सर्व करें।

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