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June 01, 2026
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खाना खजाना /शौर्यपथ /गर्मियां आते ही हर घर में आम पन्ना की डिमांड बढ़ जाती है। आम पन्ना पीने से न सिर्फ प्यास बुझती है बल्कि व्यक्ति की बॉडी भी रिफ्रेश महसूस करती है। खास बात यह है कि आम पन्ना गर्मियों में रिफ्रेश करने के साथ व्यक्ति को गैस्ट्रोइन्टेस्टनल जैसी समस्याओं में भी फायदा पहुंचाता है। तो आइए जान लेते हैं कैसे बनाई जाती है यह ड्रिंक।

आम पन्ना बनाने के लिए सामग्री-
-2 कच्चे आम
-3 टी स्पून ब्राउन शुगर
-1 टी स्पून जीरा पाउडर
-2 टी स्पून काला नमक
-1 टी स्पून नमक
-2 कप पानी
-1 टी स्पून पुदीने के पत्ते
-क्रश्ड की हुई आइस

आम पन्ना बनाने की वि​धि-आम पन्ना बनाने के लिए सबसे पहले एक पैन में पानी लेकर उसमें 10 मिनट तक धीमी आंच पर आम नरम होने तक पका लें। जब आम ठंडे हो जाएं तो उन्हें एक चम्मच की मदद से उसका छीलका उतार लें। पानी की सही मात्रा के साथ आम के गूदे को मिक्सी में डालकर उसका गाढ़ा पेस्ट तैयार कर लें। इस पेस्ट को पैन में निकालकर उसमें ब्राउन शुगर मिलाएं। इसे आंच पर पकाएं जब तक चीनी पूरी तरह घुल न जाए।इसे लगातार चलाते रहें वरना यह जल भी सकता है।जब शुगर पूरी तरह घुल जाए, पैन को आंच से उतार लें और इसमें जीरा पाउडर, काला नमक, नमक मिलाएं।
ड्रिंक सर्व करने से पहले-
ड्रिंक सर्व करने के लिए सबसे पहले एक लंबे ग्लिास में 1 या दो चम्मच आम का मिक्सचर लें और ठंडा पानी डालें, अब इसे अच्छी तरह से मिक्स करें। पुदीने के पत्ते से गार्निश करके इसे सर्व करें।

सेहत /शौर्यपथ / आपने आजतक भोजन का स्वाद बढ़ाने से लेकर चेहरे की खूबसूरती निखारने तक में टमाटर की भूमिका के बारे में तो पढ़ा और सुना ही होगा। भारतीय रसोई की तो टमाटर के बिना कल्पना भी नहीं की जा सकती है। यहां लोग सब्जी-सलाद ही नहीं कई रोगों के इलाज के लिए भी टमाटर का सेवन करना पसंद करते हैं। हेल्थ पर हुए कई शोध के मुताबिक टमाटर कैंसर से बचाव करने के साथ, रक्तचाप को नियंत्रण रखने और आंखों की रोशनी में सुधार करने का भी काम कर सकता है। बावजूद इसके क्या आप जानते हैं अत्यधिक मात्रा में टमाटर खाने से आपके शरीर में ये खतरनाक प्रभाव देखने को मिल सकते हैं।
अत्यधिक मात्रा में टमाटर खाने के साइड इफेक्ट्स-

एसिडिटी-
टमाटर अम्लीय होते हैं। अधिक मात्रा में इनका सेवन करने से यह गैस्ट्रिक एसिड का कारण बन सकता है। यदि आपको पाचन की समस्या है तो इसका सेवन सीमित मात्रा में करें।
एलर्जी-
कई लोगों को टमाटर से एलर्जी होती है। ऐसे लोग मुंह, जीभ और चेहरे की सूजन के साथ छींकने और गले में संक्रमण का अनुभव भी कर सकते हैं। जिन लोगों को टमाटर से एलर्जी हो उन्हें इसका सेवन करने से बचना चाहिए।
जोड़ों का दर्द-
जरूरत से ज्यादा टमाटर खाने पर व्यक्ति को जोड़ों में सूजन और दर्द की शिकायत हो सकती है।
किडनी से जुड़ी दिक्कतें-
अमेरिका के स्वास्थ्य और मानव सेवा विभाग के अनुसार, जो लोग पहले से ही किडनी रोग से पीड़ित हैं उन्हें अपने आहार में पोटैशियम के सेवन सीमित करना चाहिए। टमाटर में पोटैशियम भरपूर मात्रा में पाया जाता है। इसके अलावा टमाटर का सेवन करने पर उसके बीज किडनी में पहुंचकर पथरी यानि स्टोन का निर्माण करते हैं।
शरीर की दुर्गन्ध का कारण-
टमाटर में मौजूद टरपीन्स नामक तत्व आपकी शारीरिक दुर्गन्ध का कारण बन सकता है। पाचन के दौरान इसका विघटन, शरीर की दुर्गन्ध पैदा करता है।
Disclaimer- इस आलेख में दी गई जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी लाइव हिन्दुस्तान डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

लाइफस्टाइल /शौर्यपथ / अस्पतालों में हृदय कैंसर से पीड़ित रोगियों को कीमोथेरेपी में अब ढाई घंटे के बजाए महज पांच मिनट का समय लगेगा और इसके लिए एक सूई (दवा) को एक नये एवं अधिक प्रभावी उपचार के रूप में पेश किया जा रहा है। एनएचएस इंगलैंड ने रविवार को यह जानकारी दी।
कीमोथेरेपी से गुजरने वाले हृदय कैंसर के रोगियों का पीएचईएसजीओ नामक एक नया संयुक्त उपचार किया जाएगा जिसके तहत उन्हें सूई लगायी जाएगी। इस सूई को तैयार करने और लगाने में महज पांच मिनट लगेंगे। फिलहाल दो इनफ्यूजनों (कीमोथेरेपी में दवा शरीर में पहुंचाने के तरीके) में ढाई घंटे तक लग सकते हैं।
दवा निर्माता कंपनी के साथ एनएचएस के करार के बाद अब हर साल 3600 नये मरीजों एवं उन अन्य मरीजों को फायदा पहुंचने की उम्मीद है। एनएचएस के राष्ट्रीय क्लीनिकल निदेशक (कैंसर) पीटर जॉनसन ने कहा, '' यह नयी सूई हृदय कैंसर रोगियों के लिए उपचार अवधि बहुत घटा सकती है और यह उन बदलावों में नवीनतम है जिसका तात्पर्य है कि एनएचएच मरीजों को कोविड-19 से दूर रखते हुए अहम कैंसर उपचार प्रदान करने में कामयाब हुआ है।
उन्होंने कहा, '' मैं खुश हूं कि यह हृदय कैंसर का उपचार कराने को इच्छुक लोगों के लिए उपलब्ध है , यह उस समयावधि को घटा देता है जो मरीजों को अस्पताल में गुजारना पड़ता है । यह एनएचएस को अधिक से अधिक कैंसर मरीजों का उपचार करने का एक नया तरीका प्रदान कर रहा है जैसा कि हमने महामारी के दौरान किया।

खाना खजाना /शौर्यपथ / नॉनवेज खाने वाले लोगों के पास कटलेट्स के कई ऑप्शन होते हैं लेकिन मशरूम कटलेट्स रेसिपी, एक ऐसी रेसिपी है जो वेज होने के बावजूद स्वाद में नॉनवेज कटलेट्स को भी पीछे छोड़ देती है। तो अगली बार जब कभी आप नाश्ते में कटलेट बनाने का प्लान करें तो जरूर ट्राई करें ये टेस्टी रेसिपी।
मशरूम कटलेट्स बनाने के लिए सामग्री-
-400 ग्राम मशरूम
-1 कप प्याज, कटा हुआ
-2 टेबल स्पून तेल
-1 टी स्पून जीरा
-2 टी स्पून अदरक, बारीक कटा हुआ
-1 कप आलू (उबालकर मैश किए हुए)
-2 टी स्पून धनिया पाउडर
-2 टी स्पून आमचूर
-1 1/2 टी स्पून नमक
-2 टी स्पून हरी मिर्च
-2 अंडे
-1/2 कप मैदा
-(कटलेट्स की कोटिंग के लिए) ड्राई ब्रेड क्रम्बस
-तेल
मशरूम कटलेट्स बनाने की वि​धि-
मशरूम कटलेट्स बनाने के लिए सबसे पहले एक पैन में 2 बड़े चम्मच तेल गर्म करके इसमें जीरा और अदरक डालकर इसे हल्का फ्राई करने के बाद इसमें मशरूम डालें। इसे तेज आंच पर पकाएं ताकि इसका सारा मॉइश्चर निकल जाए। इसके बाद जब यह ठंडा हो जाएं तो इसमें आलू मिलाकर इससे ओवल शेप के कटलेट्स तैयार कर लें। अब इन पर मैदा छिड़के और अंडे में डीप करके क्रम्बस में कोट करें। एक बार फिर से कटलेट्स को अंडे में डीप करके क्रम्बस लगाएं। अब कटलेट्स को डीप फ्राई करें और गोल्डन कलर आने पर बाहर निकालकर सर्व करें।

आस्था /शौर्यपथ / चैत्र नवरात्रि शुरू होने में अब कुछ ही दिन बाकी है। हिंदू पंचांग के अनुसार, चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा की तिथि से नवरात्रि का पर्व आरंभ होगा। इस साल चैत्र नवरात्रि 13 अप्रैल से शुरु हो रहे हैं और नवमी तिथि 21 अप्रैल को पड़ेगी। नवरात्रि व्रत का पारण दशमी तिथि 22 अप्रैल को किया जाएगा। चैत्र नवरात्रि के नौ दिन मां के नौ स्वरूपों की अलग-अलग होती है। मान्यता है कि चैत्र नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा की विधि-विधान से पूजा करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं। कहते हैं कि मां दुर्गा की पूजा करने से जीवन में आने वाली परेशानियां दूर होती है और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।

घटस्थापना के दिन बन रहे ये शुभ योग-

इस साल चैत्र नवरात्रि के प्रथम दिन ग्रहों के शुभ संयोग से विशेष योग का निर्माण हो रहा है। प्रतिपदा की तिथि में विष्कुंभ और प्रीति योग का निर्माण हो रहा है। इस दिन विष्कुंभ योग दोपहर 03 बजकर 16 मिनट तक रहेगा। प्रीति योग का आरंभ होगा। करण बव सुबह 10 बजकर 17 मिनट तक, उसके बाद बालव रात 11 बजकर 31 मिनट तक रहेगा।
चैत्र नवरात्रि की पारण तिथि से लेकर मां दुर्गा की सवारी और जानें घटस्थापना की विधि
घटस्थापना के ये बन रहे शुभ मुहूर्त-
दिन- मंगलवार
तिथि- 13 अप्रैल 2021
शुभ मुहूर्त- सुबह 05 बजकर 28 मिनट से सुबह 10 बजकर 14 मिनट तक।
अवधि- 04 घंटे 15 मिनट
घटस्थापना का दूसरा शुभ मुहूर्त- सुबह 11 बजकर 56 मिनट से दोपहर 12 बजकर 47 मिनट तक।
13 अप्रैल को आश्विन नक्षत्र और चंद्रमा मेष राशि में, बढ़ेगी नवरात्रि की शुभता
जानें किस दिन कौन-सी देवी की होगी पूजा-
पहला दिन: 13 अप्रैल 2021, मां शैलपुत्री पूजा
दूसरा दिन: 14 अप्रैल 2021, मां ब्रह्मचारिणी पूजा
तीसरा दिन: 15 अप्रैल 2021, मां चंद्रघंटा पूजा
चौथा दिन: 16 अप्रैल 2021, मां कूष्मांडा पूजा
पांचवां दिन: 17 अप्रैल 2021, मां स्कंदमाता पूजा
छठा दिन: 18 अप्रैल 2021, मां कात्यायनी पूजा
सातवां दिन: 19 अप्रैल 2021, मां कालरात्रि पूजा
आठवां दिन: 20 अप्रैल 2021, मां महागौरी पूजा
नौवां दिन: 21 अप्रैल 2021, मां सिद्धिदात्री पूजा
दसवां दिन: 22 अप्रैल 2021, व्रत पारण

शौर्यपथ / अखरोट का नाम सबसे पसंदीदा ड्राई फ्रूट्स में लिया जाता है। सेहत से जुड़े फायदों के साथ स्किन केयर के लिए भी अखरोट बेहद फायदेमंद है। आप अगर चेहरे पर नेचुरल ग्लो पाने के लिए महंगे प्रॉडक्ट्स का इस्तेमाल करते हैं, तो आप इन्हें छोड़कर अखरोट को स्किन केयर रूटीन में शामिल कर सकते हैं। आइए, जानते हैं अखरोट के फायदे-
फेसपैक बनाकर करें इस्तेमाल
एक चम्मच अखरोट का पाउडर, एक चम्मच ओलिव ऑयल, दो चम्मच गुलाब जल व आधा चम्मच शहद मिलाकर पेस्ट बना लें।
इस पैक को अपने चेहरे पर 15 मिनट के लिए लगाकर छोड़ दें।
फिर सूखने पर पानी से मुंह धो लें।
बेहतर परिणाम के लिए आप यह फेसपैक सप्ताह में दो से तीन बार लगा सकते हैं।

डार्क सर्कल के लिए
अखरोट का तेल आपकी आंखों के नीचे आई सूजन को दूर करता है और डार्क सर्कल कम करने में मदद करता है।
आप थोड़ा-सा अखरोट का तेल लें। तेल को गुनगुना करके इसे आंखों के नीचे काले घेरे वाले भाग पर लगाकर सो जाएं। फिर सुबह सामान्य तरीके से चेहरा धो लें। आप इस प्रक्रिया को रोज रात को तब तक दोहराएं, जब तक असर दिखना न शुरू हो जाए।

आंखों ने नीचे की सिलवटों को दूर करें
आप नींबू का रस, शहद, ओटमील और अखरोट का पाउडर एक साथ मिलाकर पेस्ट बना लें।
इस पेस्ट को आंखों के नीचे लगाएं और 15-20 मिनट के लिए छोड़ दें।
फिर पानी से धो लें।
इस प्रक्रिया को आप सप्ताह में तीन से चार बार दोहरा सकते हैं।

टिप्स ट्रिक्स / शौर्यपथ /गर्मियों में कुछ चीजें ऐसी हैं जिनका सेवन किसी औषधि से कम नहीं है। खासतौर पर गर्मी से निजात दिलाने के साथ शरीर में ऊर्जा बनाए रखने में भी मदद करती है। आज हम आपको गर्मी का सबसे उत्तम आहार सत्तू के गुणों के बारे में बता रहे हैं।
सत्तू के फायदे
-यह पेट फूलना, कब्ज और एसिडिटी और अपच जैसी समस्याओं के लिए भी फायदेमंद माना जाता है।
-यह प्रोटीन और कैल्शियम से भरा होता है। यह कार्बोहाइड्रेट से बना है, जबकि इसमें बाकी प्रोटीन होता है।
-सत्तू आयरन से भी भरपूर होता है, जो ब्लड सर्कुलेशन में मदद करता है और सूजन को कम कर सकता है।
-सत्तू की उच्च फाइबर सामग्री शरीर में अच्छे कोलेस्ट्रॉल के साथ संतुलन बनाकर उच्च कोलेस्ट्रॉल मुद्दे को नियंत्रित करने में मदद कर सकती है।
-सत्तू में अघुलनशील फाइबर भरपूर मात्रा में होता है। साथ ही कई जरूरी पोषक तत्व भी शामिल होते हैं।
-अघुलनशील फाइबर का उच्च स्तर पेट को साफ करने में मदद करता है और पाचन में सुधार करते हुए आंत की दीवारों से चिकना भोजन निकालता है।
-सत्तू एक लो-ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाली ड्रिंक है जो डायबिटीज रोगियों के लिए काफी फायदेमंद मानी जाती है।

 घर पर ऐसे बनाएं सत्तू
अगर आपको मार्केट में सत्तू नहीं मिल रहा या आप किसी भी वजह से घर में सत्तू बनाना चाहते हैं, तो आप इस विधि से सत्तू बना सकते हैं। आपको चने को एक कड़ाही में भूनना है या भुना हुआ चना खरीदना है, जो आसानी से उपलब्ध है। अगर आप इसे घर पर भून रहे हैं, तो इसे ठंडा होने दें। फिर एक ग्राइंडर में पाउडर, और सत्तू तैयार है। भुने हुए चनों के गोले या भूसी को आप निकाल भी सकते हैं और नहीं भी। आपको विभिन्न प्रकार के अनाज - गेहूं, चना, जौ और शर्बत या ज्वार के साथ सत्तू मिलता है।

टिप्स ट्रिक्स / शौर्यपथ / कुछ चीजें ऐसी हैं, जो सेहत के साथ सुंदरता को निखारने में भी फायदेमंद होती हैं लेकिन इनके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं।जैसे, पुदीना सिर्फ सेहत के लिए ही नहीं बल्कि आपकी खूबसूरती को निखारने का काम भी करता है। पुदीने में फाइबर पाया जाता है।विटामिन ए के अलावा इसमें आयरन, मैंगनीज की भी काफी मात्रा पाई जाती हैं। पुदीने को मुख्य रूप से एंटीऑक्सीडेंट और विटामिन ए का स्रोत माना जाता है। साथ ही इन्हें स्किन के लिए भी फायदेमंद माना जाता है।
रंगत निखारता है पुदीना
पुदीने में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट स्किन के लिए बहुत फायदेमंद है।इसका फेस मास्क सप्ताह में दो बार लगाने से धीरे-धीरे आपकी रंगत निखरने लगती है।वहीं, अगर आपको छाईयों की समस्या है, तो आप पुदीने के रस को दही में या गेहूं के आटे में मिलाकर लगा सकते हैं।
पिम्पल को रखता है दूर
आपको अगर पिम्पल की समस्या है, तो आपको रेगुलर पुदीने का इस्तेमाल करना चाहिए।आप पुदीने के रस को नारियल तेल में डालकर पिम्पल पर लगा सकते हैं।ऐसा करने से कुछ ही दिनों में न सिर्फ पिम्पल दूर होने लग जाएंगे बल्कि उनके निशान और दाग-धब्बे भी हल्के होने लग जाएंगे।
स्किन एलर्जी से राहत
आपको अगर स्किन एलर्जी हो गई है या धूप में जाने की वजह से टैनिंग की समस्या हो गई है, तो आप पुदीने के पेस्ट को कुछ देर के लिए उस जगह पर लगाकर 5-10 मिनट के लिए छोड़कर उसे धो दें। ऐसा करने से एक इस्तेमाल के बाद ही आपको फर्क दिखने लग जाएगा।
एंटी एजिंग
आप अगर अपनी बढ़ती उम्र को थाम लेना चाहते हैं, तो पुदीने का इस्तेमाल करना शुरू कर दें।पुदीना उम्र से पहले बुढ़ापे के स्किन इफेक्ट को दूर करने में मदद करता है।
डार्क सर्कल
ऐसी बहुत कम चीजें हैं, जिनका असर डार्क सर्कल्स यानी काले घेरो पर होता है, पुदीना इन कम चीजों में ही शामिल है।किसी भी वजह से डार्क सर्कल होने पर आप रात को सोते समय पुदीने का रस लगा लीजिए।10-15 दिनों में आपके डार्क सर्कल 70-80 प्रतिशत तक कम हो जाएंगे।

व्रत त्यौहार /शौर्यपथ / चैत्र माह की शुरुआत हो चुकी है। इस महीने के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को उगादि कहते हैं। हिंदू पंचांग के अनुसार, चैत्र मास से नववर्ष की शुरुआत होती है। महाराष्ट्र में हिंदू नववर्ष को गुड़ी पड़वा के रूप में सेलिब्रेट करते हैं। इस दिन को फसल दिवस के तौर पर मनाते हैं। हर साल गुड़ी पड़वा चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को मनाया जाता है। इस साल यह त्योहार 13 अप्रैल को मनाया जाएगा। इस दिन भगवान विष्णु व ब्रह्मा जी की विधि-विधान से पूजा की जाती है। घरों में कई तरह के पकवान बनाए जाते हैं।

गुड़ी पड़वा का महत्व-

पौराणिक कथाओं के अनुसार, प्रतिपदा तिथि के दिन भगवान ब्रह्मा ने सृष्टि का निर्माण किया था। इसलिए इस दिन भगवान ब्रह्मा की पूजा का विशेष महत्व है। कहा जाता है कि गुड़ी पड़वा के दिन सभी बुराइयों का अंत होता है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
गुड़ी पड़वा शुभ मुहूर्त-
गुड़ी पड़वा तिथि- 13 अप्रैल 2021
प्रतिपदा तिथि प्रारंभ- 12 अप्रैल 2021 दिन सोमवार की सुबह 08 बजे से।
प्रतिपदा तिथि समाप्त- 13 अप्रैल 2021 दिन मंगलवार की सुबह 10 बजकर 16 मिनट तक।
गुड़ी पड़वा पूजा विधि-

1. गुड़ी पड़वा के दिन सबसे पहले सूर्योदय से पूर्व स्नान आदि किया जाता है।
2. इसके बाद मुख्यद्वार को आम के पत्तों से सजाया जाता है।
3. इसके बाद घर के एक हिस्से में गुड़ी लगाई जाती है। इसे आम के पत्तों, पुष्प और कपड़े आदि से सजाया जाता है।
4. इसके बाद भगवान ब्रह्मा की पूजा की जाती है और गुड़ी फहराते हैं।
5. गुड़ी फहराने के बाद भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा की जाती है।
कैसे मनाते हैं गुड़ी पड़वा-
महाराष्ट्र में गुड़ी पड़वा के दिन लोग नए कपड़े पहनते हैं। इस त्योहार के दिन पूरन पोली और श्रीखंड मनाया जाता है। इसके अलावा मीठे चावल बनाएं जाते हैं। जिसे सक्कर भात कहते हैं। सूर्योदय के साथ भगवान ब्रह्मा और विष्णु जी की पूजा की जाती है।

आस्था /शौर्यपथ / हर माह शुक्ल व कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को प्रदोष व्रत रखा जाता है। हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत को बेहद शुभ फलदायी माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा करने से उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है। इसके साथ ही भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। इस महीने पहला प्रदोष व्रत 09 अप्रैल, दिन शुक्रवार को पड़ रहा है। शुक्रवार के दिन पड़ने वाले प्रदोष को शुक्र प्रदोष कहते हैं।
शिव पुराण के अनुसार, भोलेनाथ को सरलता से प्रसन्न किया जा सकता है। भगवान शिव प्रदोष व्रत के दौरान कुछ नियमों का पालन करने से भी प्रसन्न होते हैं और भक्त पर हमेशा अपनी कृपा बरसाते हैं। जानिए प्रदोष व्रत नियम, व्रत कथा और पूजन सामग्री-
प्रदोष व्रत नियम- प्रदोष व्रत यूं तो निर्जला रखा जाता है इसलिए इस व्रत में फलाहार का विशेष महत्व होता है। प्रदोष व्रत को पूरे दिन रखा जाता है। सुबह नित्य कर्म के बाद स्नान करें। व्रत संकल्प लें। फिर दूध का सेवन करें और पूरे दिन उपवास धारण करें।
प्रदोष में क्या नहीं करना चाहिए- प्रदोष काल में भगवान शिव की पूजा करने के बाद ही भोजन ग्रहण करना चाहिए। प्रदोष व्रत में अन्न, नमक, मिर्च आदि का सेवन नहीं करना चाहिए। व्रत के समय एक बार ही फलाहार ग्रहण करना चाहिए।
पूजा की थाली में क्या-क्या होनी चाहिए सामग्री- प्रदोष व्रत में पूजा की थाली में अबीर, गुलाल, चंदन, अक्षत, फूल, धतूरा, बिल्वपत्र, जनेऊ, कलावा, दीपक, कपूर, अगरबत्ती और फल होना चाहिए।
शुक्र प्रदोष व्रत की कथा
कहा जाता है कि क नगर में तीन मित्र रहते थे। राजकुमार, ब्राह्मण कुमार और तीसरा धनिक पुत्र। राजकुमार और ब्राह्मण कुमार विवाहित थे। धनिक पुत्र का भी विवाह हो गया था, लेकि गौना शेष था। एक दिन तीनों मित्र स्त्रियों की चर्चा कर रहे थे। ब्राह्मण कुमार ने स्त्रियों की प्रशंसा करते हुए कहा नारीहीन घर भूतों का डेरा होता है। धनिक पुत्र ने यह सुना तो तुरन्त ही अपनी पत्‍नी को लाने का निश्‍चय कर लिया। तब धनिक पुत्र के माता-पिता ने समझाया कि अभी शुक्र देवता डूबे हुए हैं। ऐसे में बहू-बेटियों को उनके घर से विदा करवा लाना शुभ नहीं माना जाता लेकिन धनिक पुत्र ने एक नहीं सुनी और ससुराल पहुंच गया। ससुराल में भी उसे मनाने की कोशिश की गई लेकिन वो जिद पर अड़ा रहा और कन्या के माता पिता को उनकी विदाई करनी पड़ी। विदाई के बाद पति-पत्‍नी शहर से निकले ही थे कि बैलगाड़ी का पहिया निकल गया और बैल की टांग टूट गई।
दोनों को चोट लगी लेकिन फिर भी वो चलते रहे। कुछ दूर जाने पर उनका पाला डाकूओं से पड़ा। जो उनका धन लूटकर ले गए। दोनों घर पहूंचे। वहां धनिक पुत्र को सांप ने डस लिया। उसके पिता ने वैद्य को बुलाया तो वैद्य ने बताया कि वो तीन दिन में मर जाएगा। जब ब्राह्मण कुमार को यह खबर मिली तो वो धनिक पुत्र के घर पहुंचा और उसके माता पिता को शुक्र प्रदोष व्रत करने की सलाह दी। और कहा कि इसे पत्‍नी सहित वापस ससुराल भेज दें। धनिक ने ब्राह्मण कुमार की बात मानी और ससुराल पहुंच गया जहां उसकी हालत ठीक होती गई। यानि शुक्र प्रदोष के माहात्म्य से सभी घोर कष्ट दूर हो गए।

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