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ब्यूटी टिप्स /शौर्यपथ / मुहांसे, दाग-धब्बे और झुर्रियां हमारे चेहरे की खूबसूरती को कम करने का काम करते हैं. अक्सर धूल-मिट्टी और प्रदूषण के चलते स्किन में ये समस्याएं देखी जाती हैं. असल में चेहरे में मुंहासे और दाग-धब्बे होने के और भी कई अन्य कारण हो सकते हैं. कई बार पेट साफ न होने चलते भी चेहरे पर दाने निकलने लगते हैं. इतना ही नहीं कुछ स्वास्थ्य समस्याओं के चलते भी स्किन को ऐसी समस्याओं से गुजरना पड़ता है. हममें से ज्यादातर लोग मुहांसे, दाग-धब्बों और झुर्रियों को दूर करने के लिए मार्केट से महंगे-महंगे प्रोडक्ट खरीद कर लाते हैं. लेकिन बार-बार ये चीजें लाना हमारे बजट के बाहर भी हो सकता है. आप बिना किसी महंगे प्रोडक्ट के इस्तेमाल के अपने चेहरे को चमकदार बनाना चाहते हैं तो आप घरेलू उपाय को अपना सकते हैं. जी हां हम बात कर रहे हैं एलोवेरा की. एलोवेरा को स्किन के लिए काफी अच्छा माना जाता है. तो चलिए जानते हैं स्किन को ग्लोइंग बनाने के लिए कैसे करें एलोवेरा का इस्तेमाल.
एलोवेरा एक ऐसा पौधा है जिसे आसानी से घर पर लगाया जा सकता है. एलोवेरा जेल के इस्तेमाल से स्किन और बालों को हेल्दी रखने में मदद मिल सकती है. आपको बता दें कि एलोवेरा में एंटीऑक्सीडेंट्स, एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण मौजूद होते हैं, जो मुहांसों, दाग-धब्बों और झुर्रियों को दूर करने में मदद कर सकते हैं.
कैसे करें एलोवेरा का इस्तेमाल-
स्किन को ग्लोइंग बनाने के लिए आप एलोवेरा में गुलाब जल मिलाकर लगा सकते हैं. आपको बता दें कि गुलाब जल को स्किन के लिए काफी अच्छा माना जाता है. सबसे पहले एक छोटे बाउल में 1 चम्मच एलोवेरा जेल और एक चम्मच गुलाब जल लें. इन दोनों को अच्छी तरह मिक्स कर लें. फिर चेहरे को साफ कर लें पानी सूखा लें. और इस पेस्ट को अच्छे से लगा कर मसाज करें. कुछ देर चेहरे पर लगा रहने दें. फिर साफ पानी से चेहरा धो लें. ऐसा करने से स्किन को ग्लोइंग बनाया जा सकता है.
व्रत त्यौहार /शौर्यपथ /इस साल 23 मई को बैशाख पूर्णिमा है. इसे बुद्ध पूर्णिमा भी कहते हैं. भगवान बुद्ध को भगवान विष्णु को नौवां अवतार माना गया है. बुद्ध पूर्णिमा को भगवान विष्णु की पूजा का विशेष महत्व है. इस दिन विधि-विधान से भगवान विष्णु की पूजा से मनोवांछित फल प्राप्त किया जा सकता है, लेकिन इस दिन विष्णु प्रिया तुलसी से जुड़ी गलतियां धन की देवी लक्ष्मी को नाराज कर सकती हैं. आइए जानते हैं उन गलतियों के बारे में.
तुलसी का स्पर्श
बुद्ध पूर्णिमा के दिन शाम के समय तुलसी की पूजा के दौरान पौधे को स्पर्श करने से बचना चाहिए. इस समय तुलसी के पौधे को स्पर्श करने से माता लक्ष्मी के नाराज होने का भय रहता है.
खुले बाल न रहें
मान्यता है कि माता तुलसी की पूजा के दौरान महिलाओं को अपने बाल हमेशा बांध कर रखने चाहिए. पूजा के दौरान बाल खुले रहने से देवी लक्ष्मी के नाराज होने का डर रहता है.
पत्तियां तोड़ने में सावधानी
बुद्ध पूर्णिमा को भगवान विष्णु की पूजा के लिए तुलसी की पत्तियों को सावधानी से तोड़ना चाहिए. बेहतर होगा कि एक दिन पहले ही पत्तियां तोड़ कर रख लें. अगर पत्तियां तोड़नी जरूरी हो तो नाखून का उपयोग कर पत्तियां तोड़ने से बचें.
तुलसी की परिक्रमा
तुलसी की पूजा और जल देने के बाद पौधे की परिक्रमा जरूर करें. तुलसी में जल देने के बाद तीन बार परिक्रमा करनी चाहिए. परिक्रमा नहीं करने से माता लक्ष्मी के नाराज होने का भय होता है.
साफ सफाई
तुलसी के पौधे के आसपास हमेशा साफ सफाई रखें. पौधे के पास गंदगी से धन की देवी लक्ष्मी रुष्ट हो सकती हैं. बुद्ध पूर्णिमा के दिन घर में सात्विक भोजन बनाएं और मांस मदिरा से दूर रहें.
भगवान विष्णु को तुलसी चढ़ाएं
बुद्ध पूर्णिमा को भगवान विष्णु की पूजा में तुलसी के पत्ते जरूर चढ़ाएं. इसके साथ ही हाथ में तुलसी की माला लेकर मां लक्ष्मी के मंत्र – ऊं श्रीं ह्नीं क्लीं श्री सिद्ध लक्ष्म्यै नम: का पाठ करें.
सेहत टिप्स /शौर्यपथ /गर्मी के मौसम में हर कोई डाइट में दही को शामिल करने की सलाह देते हैं. दही की तासीर ठंडी होती है जो गर्मी से बचाने में मददगार है. दही पाचन, इम्यूनिटी, गट हेल्थ और कई फायदों के लिए जाना जाता है, लेकिन अधिक सेवन आपके लिए उतनी ही मुशीबत खड़ी कर सकते हैं. अगर आप इस हेल्दी डेयरी का ज्यादा सेवन करते हैं, तो कुछ दही के दुष्प्रभाव के बारे में जान लें. गर्मियों के मौसम में दही का सेवन सेहत के लिए फायदेमंद माना जाता है. लेकिन जरूरत से ज्यादा दही का सेवन सेहत के लिए नुकसानदायक भी हो सकता है. तो चलिए जानते हैं दही खाने के नुकसान.
दही खाने के नुकसान-
1. मोटापा-
दही में कैलोरी और फैट होता है जो वजन को बढ़ाने का काम कर सकते हैं. अगर आप वजन को घटाने के लिए डाइट पर हैं तो लो फैट दही का सेवन करें.
2. लैक्टोज इंटोलरेंस-
दही में लैक्टोज होता है, जो लैक्टोज इंटोलरेंस लोगों के लिए हानिकारक हो सकता है. इसलिए आप दही का सेवन करने से बचें.
3. किडनी-
दही में मौजूद कैल्शियम का हाई लेवल किडनी की समस्या को बढ़ा सकता है. इसलिए अगर आपको किडनी से जुड़ी समस्या है तो आप भूलकर भी दही का सेवन न करें.
4. मेमोरी-
दही का जरूरत से ज्यादा सेवन मस्तिष्क की कार्यप्रणाली पर असर डाल सकता है.
5. सर्दी-जुकाम-
दही की तासीर ठंडी होती है, जो अस्थमा रोगियों के लिए सर्दी-जुकाम जैसी परेशानी की वजह बन सकती है.
सेहत टिप्स /शौर्यपथ / कई डिटॉक्स ड्रिंक्स और जूस में, ऐश गार्ड जिसे पेठे के नाम से भी जाना जाता है इसका जूस सेहत के लिए फायदेमंद होता है. ऐश गार्ड पौधा कुकुर्बिटेसी परिवार से संबंधित है. ऐश गार्ड में प्रोटीन, विटामिन, मिनरल्स, फ्लेवोनोइड्स, कैरोटीन, वाष्पशील तेल जैसे कई आवश्यक पोषक तत्व होते हैं, जो शरीर को हेल्दी बनाने में मदद करते हैं. ऐश गार्ड की खासियत है कि इसमें 96% पानी पाया जाता है, जो इसे गर्मियों के लिए एक बेहतरीन फूड आइटम बनाता है. ऐश गार्ड जूस का सेवन करने से अनगिनत स्वास्थ्य लाभ होते हैं, जिनमें से कुछ इस प्रकार हैं:
ऐश गार्ड जूस के स्वास्थ्य लाभ
डायबिटीज कंट्रोल
ऐश गार्ड जूस में कैलोरी, कार्बोहाइड्रेट और फैट की मात्रा बहुत कम होती है, जो इसे डायबिटीज में सेवन करने के लिए एक बेहतरीन ऑप्शन बनाता है. ऐश गार्ड जूस पीने से टाइप 2 डायबिटीज के रोगियों में ब्लड शुगर के लेवल को कम करने में मदद मिल सकती है.
वजन कम करने में
फैट और कैलोरी में कम होने के वजह से ऐश गार्ड जूस का सेवन वजन को कम करने में मदद करता है. ऐश गार्ड में डाइटरी फाइबर और फैट कम करने वाले गुण वजन को कम करने में मदद करते हैं. यह सीरम कोलेस्ट्रॉल को कम करने और शरीर की चर्बी घटाने में मदद कर सकता है.
स्किन
कई लाभों के बीच, ऐश गार्ड जूस का सेवन स्किन के लिए भी बेहद फायदेमंद होता है. ऐश गार्ड का फल कई ब्यूटी क्रीमों में इस्तेमाल किया जाता है ताकि स्किन बेहतरीन हो सके. ऐश गार्ड जूस की अधिकतम पानी की मात्रा और कूलिंग गुण स्किन पर सूजन और लालिमा को कम करने में मदद करते हैं.
हाइड्रेशन
लगभग 96% पानी की मात्रा के साथ, ऐश गार्ड जूस शरीर को हाइड्रेशन और पोषक तत्वों के लाभ प्रदान करता है. हर दिन ऐश गार्ड जूस पीना शरीर में तरलता स्तर को बनाए रखने और शरीर को हाइड्रेटेड रखने में मदद कर सकता है.
डिटॉक्सिफिकेशन
ऐश गार्ड जूस का सेवन शरीर से टॉक्सिंस को बाहर निकालने में मदद करता है. ऐश गार्ड जूस प्राकृतिक मूत्रन के रूप में काम करता है और मूत्र के माध्यम से शरीर से बैक्टीरिया को निकालने को बढ़ावा देने में मदद करता है.
सेहत टिप्स /शौर्यपथ /आपने अंजीर का पानी, जीरे का पानी, अजवाइन का पानी पीने के बारे में सुना होगा, लेकिन क्या आपने किशमिश का पानी पीने के बारे में सुना है? किशमिश को रात भर पानी में भिगोकर और अगली सुबह उस पानी को छानकर अलग करना ही किशमिश का पानी कहलाता है, जो कई स्वास्थ्य लाभ प्रदान करता है. ये लाभ मुख्य रूप से किशमिश में मौजूद पोषक तत्वों और एंटीऑक्सीडेंट से होते हैं, जो पानी में मिक्स हो जाते हैं. यहां हम किशमिश के पानी के सेवन के कुछ फायदों के बारे में बता रहे हैं.
किशमिश का पानी पीने के गजब फायदे |
1. पाचन में सुधार
किशमिश डाइटरी फाइबर से भरपूर होती है, जो नियमित मल त्याग को बढ़ावा देकर और कब्ज को रोककर पाचन प्रक्रिया में सहायता करती है. पानी फाइबर को नरम करने में मदद करता है, जिससे शरीर के लिए इसे पचाना और अवशोषित करना आसान हो जाता है. किशमिश के पानी के नियमित सेवन से पाचन तंत्र हेल्दी रहता है, जिससे गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल डिसऑर्डर का खतरा कम हो जाता है.
2. डिटॉक्सिफिकेशन
किशमिश में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट और प्राकृतिक यौगिक हानिकारक टॉक्सिन्स को हटाकर लिवर को डिटॉक्सीफाई करने में मदद करते हैं. पानी से हाइड्रेशन किडनी फंक्शन में भी सहायता करता है. इस डिटॉक्सिफिकेशन प्रोसेस से एनर्जी लेवल में सुधार हो सकता है.
3. इम्यून सिस्टम को बढ़ावा देना
किशमिश में जरूरी विटामिन जैसे विटामिन सी और बी-कॉम्प्लेक्स विटामिन के साथ-साथ फेनोलिक यौगिक जैसे एंटीऑक्सिडेंट होते हैं, जो इम्यून सिस्टम को मजबूत करते हैं. बढ़ी हुई इम्यूनिटी शरीर को संक्रमणों से लड़ने में मदद करती है.
4. बेहतर हार्ट हेल्थ
किशमिश में पोटैशियम की मात्रा ज्यादा होती है, जो सोडियम लेवल को संतुलित करके ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने में मदद करता है. इनमें डाइटरी फाइबर और पॉलीफेनोल्स भी होते हैं जो कोलेस्ट्रॉल को कम करते हैं. नियमित सेवन से हाई ब्लड प्रेशर और हार्ट अटैक सहित हार्ट डिजीज का खतरा कम हो सकता है.
5. आयरन लेवल बढ़ना
किशमिश आयरन का अच्छा स्रोत है, जो रेड ब्लड सेल्स के प्रोडक्शन के लिए जरूरी है. पानी इस आयरन के बेहतर एब्जॉर्प्शन में मदद करता है. इससे एनीमिया को रोकने और एनर्जी लेवल को बढ़ाने में मदद मिल सकती है.
6. बोन हेल्थ
किशमिश में कैल्शियम और बोरोन होता है, जो हड्डियों के स्वास्थ्य और मजबूती के लिए जरूरी है. किशमिश को पानी में भिगोने पर ये मिनरल बेहतर अवशोषित होते हैं. रेगुलर सेवन से हड्डियों को मजबूत बनाए रखने और ऑस्टियोपोरोसिस को रोकने में मदद मिल सकती है.
7. स्किन हेल्थ
किशमिश में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट स्किन को फ्री रेडिकल्स से होने वाले नुकसान से बचाने में मदद करते हैं. इनमें विटामिन ए और ई भी होते हैं, जो त्वचा के स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होते हैं. इसकी वजह से स्किन ज्यादा चमकदार दिखाई दे सकती है और उम्र बढ़ने की प्रक्रिया धीमी हो सकती है.
सेहत टिप्स /शौर्यपथ /किडनी की पथरी जिसे किडनी स्टोन भी कहा जाता है, एक सामान्य मेडिकल कंडिशन है जो बहुत तकलीफदेह हो सकती है. कभी-कभी इसका पता बहुत देर से चलता है, जब स्टोन बड़ा हो चुका होता है. ऐसे में किडनी की पथरी का असहनीय दर्द पूरी दिनचर्या को खराब कर सकता है. किडनी की पथरी तब बनती है जब यूरिन में मिनरल और अन्य पदार्थ मिलकर क्रिस्टल के रूप में जम जाते हैं. यह समस्या किसी भी उम्र के लोगों को हो सकती है. कई बार किडनी की पथरी का ऑपरेशन करवाना पड़ जाता है, तो कुछ मामलों में इसे दवा खाकर भी ठीक किया जा सकता है. ये तो हो गया किडनी की पथरी का इलाज, लेकिन क्या आप किडनी की पथरी का कारण जानते हैं, कि आखिर ये समस्या किस वजह से होती है? यहां हम किडनी की पथरी होने के कुछ कारणों के बारे में बता रहे हैं, जिनसे आप बचाव कर सकते हैं या सुधार कर सकते हैं.
किडनी में पथरी बनने का कारण |
1. पानी की कमी
पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं पीने से किडनी में मिनरल और सॉल्ट की डेंसिटी बढ़ जाती है, जिससे पथरी बनने की संभावना बढ़ जाती है. दिन भर में कम से कम 8-10 गिलास पानी पीना चाहिए.
2. खानपान
डाइट में ज्यादा मात्रा में कैल्शियम, ऑक्सालेट का सेवन भी पथरी का कारण बन सकता है. जैसे कि पालक, चुकंदर, आलू, चाय, चॉकलेट और नट्स का ज्यादा मात्रा में सेवन.
3. वंशानुगत कारण
अगर आपके परिवार में किसी को किडनी की पथरी हो चुकी है, तो आपको भी इसके होने की संभावना ज्यादा मानी जाती है. यह वंशानुगत हो सकता है.
4. मोटापा
मोटापा और ज्यादा वजन होने से किडनी की पथरी बनने का जोखिम बढ़ जाता है. शरीर में चर्बी बढ़ने से यूरिन में पथरी बनाने वाले तत्वों की मात्रा बढ़ सकती है.
5. शारीरिक रूप से सक्रिय न रहना
फिजिकल एक्टिविटी की कमी भी किडनी की पथरी के निर्माण में योगदान कर सकती है. नियमित व्यायाम से शरीर में मिनरल्स और लवणों का संतुलन बना रहता है.
6. अन्य बीमारियां
कुछ स्वास्थ्य समस्याएँ जैसे हाइपरपैराथायरॉइडिज्म, किडनी की बीमारियां और गैस्ट्रोइंटेस्टिनल बीमारियां भी पथरी के जोखिम को बढ़ा सकती हैं.
7. कुछ दवाओं का सेवन
कुछ दवाइयों का लंबे समय तक सेवन करने से भी पथरी की समस्या हो सकती है. जैसे कि ड्यूरेटिक्स, कैल्शियम सप्लीमेंट्स और एंटी-एसिड दवाइयां.
8. पेशाब रोककर रखना
माना जाता है कि पेशाब को लंबे समय तक रोककर रखने से भी पथरी बनने की संभावना बढ़ सकती है, क्योंकि इससे यूरिन में खनिज और लवण का स्तर बढ़ जाता है.
9. शारीरिक और मानसिक तनाव
लंबे समय तक शारीरिक और मानसिक तनाव में रहने से भी शरीर में हार्मोनल असंतुलन हो सकता है, जिससे पथरी बनने की संभावना बढ़ सकती है.
10. विटामिन डी की अधिकता
विटामिन डी की ज्यादा मात्रा शरीर में कैल्शियम लेवल को बढ़ा सकती है, जिससे पथरी बनने की संभावना बढ़ सकती है.
सेहत टिप्स /शौर्यपथ / नींबू पानी सदियों से अपने स्वास्थ्य लाभों के लिए जाना जाता है. यह ताजगी देने वाला पेय आपके शरीर को हाइड्रेटेड रखने के साथ-साथ विटामिन सी का भी अच्छा स्रोत है, लेकिन अगर आप इसमें कुछ एक्स्ट्रा सामग्री मिलाएं, तो यह आपके वजन घटाने की प्रक्रिया में और भी ज्यादा मदद कर सकता है. आज हम बात करेंगे एक ऐसी चीज की, जिसे अगर आप नींबू पानी में मिलाकर रोजाना पिएं, तो यह आपकी पेट की चर्बी और पूरे शरीर की चर्बी को कम करने में मदद कर सकता है. बढ़ती चर्बी और वजन आजकल एक आम समस्या बन गई है. लोग अपने पेट के मोटापे और बॉडी फैट को घटाने के लिए कई तरह के उपाय करते हैं. अगर आप भी इसी समस्या से जूझ रहे हैं, तो नींबू पानी में एक खास चीज मिलाकर पीने से आपको बहुत फायदा हो सकता है. चलो जानते हैं, वह चीज क्या है और कैसे इसे नींबू पानी में मिलाकर पीने से आपकी चर्बी घट सकती है.
नींबू पानी में क्या मिलाकर पीना फायदेमंद है? |
नींबू - 1
गुनगुना पानी - 1 गिलास
शहद - 1 चम्मच
बनाने का तरीका:
सबसे पहले एक गिलास गुनगुना पानी लें.
इसमें एक नींबू का रस निचोड़ लें.
अब इसमें एक चम्मच शहद मिलाएं.
इस मिश्रण को अच्छे से मिलाएं और सुबह खाली पेट पिएं.
शहद और नींबू पानी के फायदे |
वजन घटाने में सहायक: शहद और नींबू पानी का सेवन वजन घटाने में बहुत प्रभावी माना जाता है. यह मिश्रण शरीर में जमा अतिरिक्त वसा को घटाने में मदद कर सकता है.
पाचन तंत्र को सुधारता है: यह पेय आपके पाचन तंत्र को सुधार सकता है और भोजन के पाचन को तेज कर सकता है.
डिटॉक्सिफिकेशन: नींबू पानी और शहद शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में मदद कर सकता है.
मेटाबॉलिज्म को बढ़ावा: यह पेय आपके मेटाबॉलिज्म को बढ़ावा दे सकता है, जिससे आपकी कैलोरी बर्न करने की क्षमता बढ़ती है.
इम्यून सिस्टम को मजबूत करता है: नींबू में विटामिन सी होता है, जो आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ावा दे सकता है.
सावधानियां:
शहद का उपयोग सीमित मात्रा में करें क्योंकि ज्यादा मात्रा में शहद का सेवन आपके स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव डाल सकता है. अगर आपको किसी भी प्रकार की एलर्जी है या किसी बीमारी का इलाज चल रहा है, तो इस पेय का सेवन करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह लें.
इस बात रखें ध्यान:
नींबू पानी में शहद मिलाकर पीने से आपके पेट की चर्बी और शरीर की चर्बी घटाने में मदद मिल सकती है. यह मिश्रण न केवल वजन घटाने में मददगार है, बल्कि आपकी सेहत को भी कई अन्य फायदे पहुंचाता है. इसलिए इसे अपने रूटीन में शामिल करें. साथ ही आपको इसके साथ एक हेल्दी लाइफस्टाइल और डाइट रूटीन भी फॉलो करना पड़ेगा. हेल्दी चीजें खाएं और रोजाना एक्सरसाइज करें.
ब्यूटी टिप्स /शौर्यपथ /आजकल धूल मिट्टी की वजह से हमारी स्किन भी डल हो जाती है. चेहरे की नेचुरल चमक कहीं खो जाती है. इसी को वापस पाने और कुदरती चमक पाने के लिए लोग संघर्ष करते हैं. न जाने लोग ग्लोइंग स्किन के लिए कितने ब्यूटी प्रोडक्ट्स को लगाते हैं, लेकिन रिजल्ट उतना नहीं मिल पाता है जैसे हमें चाहिए. हम सभी जानते हैं कि नेचुरल चीजें स्किन के लिए कितना कमाल कर सकती हैं. जब हम अपने सेल्फ केयर पर ध्यान देते हैं, तो न सिर्फ हमारी त्वचा पर इसका जबरदस्त असर देखने को मिलता है, बल्कि आत्मविश्वास को भी बढ़ावा मिलता है. हमारे किचन में ही कुछ चीजें हैं जिन्हें आजमाकर आप नेचुरल ग्लो पा सकते हैं और अपनी त्वचा से डार्क सर्कल, दाग-धब्बों को दूर कर सकता है. साथ ही साथ झुर्रियों को कम करने में मदद भी मददगार हो सकता है.
चेहरे को प्राकृतिक चमक देने के लिए लगाएं ये घरेलू चीजें |
चेहरे की देखभाल में घरेलू नुस्खे हमेशा से ही जरूरी रहे हैं. जब त्वचा की प्राकृतिक चमक बढ़ाने की बात आती है, तो हमारे किचन में मौजूद कुछ साधारण चीजें बड़े काम आ सकती हैं. उनमें से एक है बेसन और दही का मास्क, जिसमें एक खास चीज की चुटकी मिलाने से इसका प्रभाव और भी बढ़ जाता है. आइए जानते हैं इस खास नुस्खे के बारे में.
सामग्री:
1. बेसन 2 बड़े चम्मच
2. दही 2 बड़े चम्मच
3. हल्दी एक चुटकी
यंग दिखने के लिए लगाएं फेस पर ये चीजें:
1. बेसन: बेसन त्वचा के लिए एक प्राकृतिक एक्सफोलिएटर की तरह काम करता है. यह त्वचा से गंदगी और मृत कोशिकाओं को हटाकर उसे साफ और कोमल बनाता है.
2. दही: दही में मौजूद लैक्टिक एसिड त्वचा को नमी प्रदान करता है और उसे हाइड्रेटेड रखता है. यह त्वचा को मुलायम और चमकदार बनाता है.
3. हल्दी: हल्दी में एंटीसेप्टिक और एंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं, जो त्वचा को संक्रमण से बचाते हैं और उसे हेल्दी बनाते हैं. हल्दी त्वचा की रंगत को भी निखारने में मदद करती है.
नेचुरल फेस पैक बनाने का आसान तरीका:
1. एक कटोरी में 2 बड़े चम्मच बेसन लें.
2. इसमें 2 बड़े चम्मच दही मिलाएं.
3. अब इसमें एक चुटकी हल्दी डालें और सभी सामग्रियों को अच्छी तरह से मिलाकर एक स्मूद पेस्ट बना लें.
4. इस पेस्ट को अपने साफ चेहरे और गर्दन पर समान रूप से लगाएं.
5. इसे 15-20 मिनट तक सूखने दें.
6. सूखने के बाद हल्के गुनगुने पानी से चेहरे को धो लें और साफ तौलिए से थपथपाकर सुखा लें.
जानिए क्या लाभ मिलेगा:
ताजगी और चमक: यह मास्क त्वचा को तुरंत ताजगी और चमक प्रदान करता है.
मृत त्वचा कोशिकाओं को हटाना: बेसन की मदद से मृत त्वचा कोशिकाएं हटती हैं, जिससे त्वचा साफ और नई दिखती है.
स्किन इंफेक्शन से बचाव: हल्दी के एंटीसेप्टिक गुण स्किन को इंफेक्शन से बचाते हैं और उसे हेल्दी बनाते हैं.
नमी और पोषण: दही त्वचा को नमी और पोषण प्रदान करता है, जिससे त्वचा मुलायम और कोमल बनी रहती है.
इस घरेलू नुस्खे को हफ्ते में 2-3 बार इस्तेमाल करने से आप अपनी त्वचा की रंगत और बनावट में एक सकारात्मक बदलाव देख सकते हैं. ध्यान रहे कि किसी भी नई चीज का उपयोग करने से पहले अपनी त्वचा पर एक पैच टेस्ट जरूर करें, ताकि किसी भी प्रकार की एलर्जी से बचा जा सके.
व्रत त्यौहार /शौर्यपथ /सनातन धर्म में भगवान विष्णु को धरती का पालनहार कहा जाता है. हिंदू पंचांग में साल की सभी 24 एकादशियां भगवान विष्णु को समर्पित हैं. वैशाख माह में आने वाली एकादशी को मोहिनी एकादशी कहा जाता है. इस साल 20 मई, सोमवार को मोहिनी एकदाशी का व्रत और पूजा की जा रही है. मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु ने मोहिनी अवतार अपनाकर दानवों को मोहित कर लिया था और समुद्र मंथन से निकला अमृत उनसे लेकर देवताओं को दे दिया जिससे देवता अमर हो गए थे. कहा जाता है कि इसी दिन राहू और केतूका जन्म हुआ था. चलिए जानते हैं कि राहु केतु के जन्म का मोहिनी एकादशी से क्या संबंध है.
राहु केतु की कथा
ज्योतिषशास्त्र में राहु केतु को पापी छाया ग्रह कहा गया है. मान्यता है कि इनकी वजह से ही हर बार सूर्य और चंद्रमा को ग्रहण लगता है. राहु और केतु पहले अलग-अलग ग्रह नहीं थे. ये दोनों एक ही शरीर से जन्में राक्षस ग्रह हैं. जब समुद्र मंथन हो रहा था तब देवता और दानव समुद्र मंथन से निकले अमृत को पाने के लिए लड़ रहे थे. ऐसे में बाहुबल की वजह से अमृत कलश दानवों के पास चला गया था. तब देवताओं की प्रार्थना पर भगवान विष्णु ने मोहिनी अवतार लिया और दानवों को अपने रूप के मोह में बांध लिया. मोहिनी के मोह में दानव बेसुध हो गए और उन्होंने अमृत से भरा कलश भगवान विष्णु को दे दिया. भगवान विष्णु ने देवताओं को ये कलश दे दिया. देवता पंक्ति में बैठकर अमृत का पान कर रहे थे. ऐसे में एक राक्षस स्वरभानु भी भेष बदलकर इस पंक्ति में था और धोखा देकर उसने अमृत का पान कर लिया. लेकिन, उसी वक्त सूर्य और चंद्रमा ने उसे पहचान लिया और भगवान विष्णु को उसकी सच्चाई बता दी. भगवान विष्णु ने क्रोध में आकर स्वरभानु का सिर धड़ से अलग कर डाला. चूंकि स्वरभानु अमृत का पान कर चुका था इसलिए उसका वध नहीं हो पाया और उसका शरीर दो राक्षसों में बंट गया. उसका सिर राहु कहलाया और धड़ केतु कहलाया.
सूर्य और चंद्रमा से खास है दुश्मनी
चूंकि सूर्य और चंद्रमा ने ही स्वरभानु को देखकर उसकी सच्चाई भगवान विष्णु को बता दी थी, इसलिए राहु और केतु सूर्य और चंद्रमा से दुश्मनी रखते हैं. ये दोनों ग्रह समय-समय पर सूर्य और चंद्रमा के ग्रहण का कारण बन जाते हैं. सर्प की आकृति वाले राहु और केतु के चलते ही सूर्य और चंद्रमा पर ग्रहण लगता है. राहु और केतु अमृतपान के चलते मर नहीं सकते और ये हमेशा सूर्य और चंद्रमा को ग्रहण लगाते रहेंगे. राहु और केतु भी जातकों पर ज्योतिषीय असर डालते हैं. कहा जाता है कि जिसकी कुंडली में राहु और केतु मजबूत स्थिति में होते हैं, उनकी जिंदगी में परेशानियां कम होती हैं. वहीं जिनकी कुंडली में राहु केतु नीच स्थिति में होते हैं, उनकी जिंदगी में काफी परेशानियां होती हैं. राहु और केतु का दोष लगने पर व्यक्ति तनाव और अनिद्रा का शिकार हो जाता है. वो गलत फैसले करता है और उनका खामियाजा भुगतता है.
व्रत त्यौहार /शौर्यपथ /सनातन धर्म में भगवान विष्णु को समर्पित एकादशी का व्रत हर माह में 2 बार आता है. हिंदू पंचांग के अनुसार, साल में पड़ने वाली 24 एकादशियों को सभी तिथियों में महत्वपूर्ण कहा जाता है. वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मोहिनी एकादशी कहा जाता है. इस दिन भगवान विष्णु के मोहिनी अवतार की पूजा की जाती है और उनके निमित्त व्रत रखा जाता है. कहा जाता है कि जब समुद्र मंथन के समय अमृत कलश के लिए देवों और दानवों के बीच युद्ध चल रहा था तब भगवान विष्णु ने मोहिनी अवतार लेकर दानवों को मोहित कर लिया था और अमृत कलश उनसे लेकर देवताओं को दे दिया था. इसलिए मोहिनी एकादशी पर भगवान विष्णु के मोहिनी अवतार की पूजा की जाती है.जानिए इस बार मोहिनी एकादशी किस दिन पड़ रही है और इस दिन व्रत के साथ-साथ पूजा की विधि क्या है.
कब है मोहिनी एकादशी
हिंदू पंचांग के अनुसार, इस साल यानी 2024 में एकादशी तिथि का आरंभ 18 मई को सुबह 11 बजकर 22 मिनट पर हो रहा है. एकादशी तिथि का समापन 19 मई की दोपहर एक बजकर 50 मिनट पर हो जाएगा. उदया तिथि के लिहाज से देखा जाए तो इस साल मोहिनी एकादशी का व्रत और पूजा 19 मई यानी रविवार के दिन की जाएगी. मोहिनी एकादशी की पूजा के शुभ मुहूर्त की बात करें तो 19 मई को सुबह 7 बजकर 10 मिनट से दोपहर 12 बजकर 18 मिनट तक पूजा का शुभ समय है. व्रती और अन्य भक्त इस समय भगवान विष्णु की विधिवत पूजा कर सकते हैं. मोहिनी एकादशी का पारण 20 मई सुबह 5 बजकर 28 मिनट से 8 बजकर 12 मिनट तक किया जा सकता है.
मोहिनी एकादशी की पूजा विधि
मोहिनी एकादशी पर व्रती को सुबह जल्दी उठकर स्नान ध्यान करने के बाद एक चौकी पर भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करनी चाहिए. इसके पश्चात भगवान को स्नान करवाएं और उनको पीले वस्त्र पहनाएं. इसके बाद चंदन का तिलक लगाकर उनके सामने धूप और दीप प्रज्वलित करें. एकादशी के व्रत का संकल्प करते हुए तुलसी दल, नारियल, फल और मिठाई अर्पित करें. पंचामृत चढ़ाएं और भगवान की आरती करें. इसके पश्चात ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र और विष्णु सहस्रनाम का जाप करें. इसके बाद आप गरीबों को दान करें और भोजन करवाएं. कहा जाता है कि मोहिनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु की विधिवत पूजा के साथ-साथ दान करने से जातक को समस्त सांसारिक पापों से छुटकारा मिलता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है. इस दिन व्रत करने से एक हजार यज्ञों का फल मिलता है.
कक्षा 10वीं की छात्रा कुमारी पाली ने 95.6 प्रतिशत अंक के साथ प्रथम स्थान हासिल किया
बालोद / शौर्यपथ / केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड नई दिल्ली द्वारा आयोजित कक्षा 10वीं एवं 12वीं के परीक्षा परिणाम घोषित कर दिया गया है। जिसमें जिले के जवाहर नवोदय विद्यालय दुधली का परीक्षा परिणाम उत्कृष्ट रहा। प्राचार्य जवाहर नवोदय विद्यालय दुधली ने बताया कि सीबीएसई परीक्षा अंतर्गत कक्षा 10 वीं एवं 12वीं का परीक्षा परिणाम शत-प्रतिशत रहा। जिसमें कक्षा 10वीं की कुमारी पाली ने 95.6 प्रतिशत अंक के साथ प्रथम स्थान हासिल किया। इसी तरह कुमारी पूर्वी चंद्रकार 94.4 प्रतिशत अंक के साथ दूसरे स्थान पर एवं धीरज कुमार 94.2 प्रतिशत अंक के साथ तीसरे स्थान पर रहे। उन्होंने बताया कि विद्यालय में कक्षा 10वीं में 38 परीक्षार्थी परीक्षा में सम्मिलित हुए थे, जिसमें सभी 38 परीक्षार्थी उत्तीर्ण रहे। कक्षा 10वीं की परीक्षा परिणाम में 05 परीक्षार्थियों के 90 प्रतिशत से अधिक अंक तथा 22 परीक्षार्थियों ने 75 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त किए है। कुमारी पाली विज्ञान में 100 अंक में से पूरे 100 अंक अर्जित किए है। इसी तरह कक्षा 12वीं में विज्ञान संकाय के कुल 37 परीक्षार्थी परीक्षा में शामिल हुए। जिसमें सभी 37 परीक्षार्थी उत्तीर्ण रहे। कक्षा 12वीं में कुमारी गरिमा सारवा ने 88.6 प्रतिशत अंक अर्जित कर प्रथम स्थान पर, कुमारी पुष्पांजली 83.2 प्रतिशत अंक प्राप्त कर दूसरें स्थान पर तथा कुमारी रेणुका 82 प्रतिशत अंक अर्जित कर तीसरे स्थान पर रहीं। कक्षा 12वीं में 17 परीक्षार्थियों ने 75 प्रतिशत से अधिक अंक अर्जित करने में सफल हुए हैं।
व्रत त्यौहार /शौर्यपथ / वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को माता सीता की जयंती मनाई जाती है. इसे सीता नवमी या जानकी नवमी के नाम से जाना जाता है. इस दिन को माता सीता के धरती पर अवतरण की तिथि माना जाता है. इस वर्ष सीता नवमी या जानकी नवमी मई माह की 16 तारीख को मनाई जाएगी. आइए जानते हैं सीता नवमी की तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा की विधि.
कब है सीता नवमी |
पंचांग के अनुसार, इस वर्ष वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि 16 मई, गुरुवार को सुबह 6 बजकर 22 मिनट से शुरू होकर 17 मई, शुक्रवार को 8 बजकर 48 मिनट तक रहेगी. उदयातिथि के अनुसार, 16 मई को सीता नवमी या जानकी नवमी मनाई जाएगी. इस दिन भक्त व्रत रखकर माता सीता की विधि-विधान से पूजा करेंगे. सीता नवमी की पूजा के लिए 16 मई को सुबह 11 बजकर 4 मिनट से दोपहर 1 बजकर 43 मिनट तक शुभ मुहूर्त है. भक्त इस मुहूर्त में माता सीता की पूजा कर सकते हैं.
सीता नवमी की पूजा विधि
सीता नवमी को विधि-विधान से माता सीता की पूजा से भक्तों पर माता सीता की असीम कृपा होती है. सीता नवमी की पूजा के लिए व्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि कर तन मन से पवित्र होकर व्रत का संकल्प करना चाहिए. पूजा की चौकी पर लाल रंग का वस्त्र बिछाकर माता सीता का भगवान राम, लक्ष्मण और हनुमान जी के साथ चित्र स्थापित करें. राम दरबार के चित्र को गंगा जल से अभिषेक कराएं और कुमकुम रोली व अक्षत से तिलक करें. सभी देवी देवताओं को पीले फूलों की माला चढ़ाएं और देसी घी से दीये जलाएं. फल फूल, रोली अक्षत चढ़ाएं और मखाने की खीर से भोग लगाएं. सीता नवमी के दिन रामायण पाठ बहुत शुभ माना जाता है. इस दिन भजन कीर्तन का आयोजन करें और राम मंदिर जाकर प्रभु श्रीराम और माता जानकी के दर्शन करें.
सीता नवमी को राम नवमी की तरह ही पवित्र और शुभ माना जाता है. इस दिन विधि-विधान से प्रभु श्रीराम और माता सीता की पूजा करनी चाहिए. इससे वैवाहिक जीवन सुखमय होता है और महादान के बराबर पुण्य प्राप्त होता है.
सेहत टिप्स /शौर्यपथ / दुनियाभर में अधिकतर लोगों की सुबह की शुरुआत कॉफी के साथ होती है. सुबह की नींद भगाने से लेकर दिनभर की थकावट को दूर करने के लिए कॉफी पीने का चलन आम है. सेहत के प्रति अक्सर जागरूक लोग ब्लैक कॉफी पीना पसंद करते हैं. इसमें दूध चीनी का इस्तेमाल नहीं किया जाता. वैज्ञानिकों ने भी रिसर्च में पाया है कि ब्लैक कॉफी पाए जाने वाला कैफीन शरीर में डोपामाइन, सेरोटोनिन और नोराड्रीनलीन की मात्रा को बढ़ाता है. इसमें भरपूर एंटीऑक्सीडेंट्स के साथ मैंग्नीज, क्लोरोजेनिक एसिड, पॉलीफेनॉल्स, कैल्शियम, पौटेशियम, मैग्नीशियम ,विटामिन बी2, बी3 और बी4 की अच्छी मात्रा पाई जाती है, जोकि सेहत के लिए बेहद लाभकारी है. जानिए ब्लैक कॉफी के फायदे क्या-क्या हैं.
ब्लैक कॉफी पीने के फायदे |
कॉफी के बीज कॉफिया अरेबिका नाम के पेड़ में लगने वाले फल से मिलते हैं. इस फल से निकलने वाले बीजों को धूप में कुछ दिनों तक सुखाने के बाद भूना जाता है. इसके बाद इन बीजों को पीसकर कॉफी के पाउडर में तब्दील किया जाता है. कुछ लोग इसका सेवन सिर्फ गर्म पानी से ही करते हैं, जबकि इसमें लोग दूध और चीनी मिलाकर भी पीना पसंद करते हैं.
तनाव को करे दूर - तनाव आजकल लोगों में आम समस्या बन गई है. ऐसे में ब्लैक कॉफी का सेवन करने से तनाव कम होता है. दरअसल, कॉफी में प्रचुर मात्रा में कैफीन की मात्रा पाई जाती है, जिससे शरीर में खुशी के हार्मोन प्रोड्यूस होते हैं. इसके साथ ही थकान, तनाव और सुस्ती दूर होती है.
दिल को रखे स्वस्थ - रोजाना एक या दो कप कॉफी पीने से हार्ट को फायदा मिलता है. इसके सेवन से स्ट्रोक के साथ-साथ दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा टलता है.
वजन कम करने में मददगार - कॉफी में कैलोरी की मात्रा बेहद कम होती है जिससे तेजी से फैट कम होता है. कसरत करने से पहले इसका सेवन जरूर करें. इससे ऊर्जा मिलती है और आप ज्यादा देर तक कसरत कर पाते हैं.
लिवर को मिलेगा फायदा - कॉफी फैटी लिवर, हेपेटाइटिस और सिरोसिस जैसी बीमारियों से लड़ने में मदद करती है. ब्लैक कॉफी का रोजाना सेवन करने से इसमें पाए जाने वाले तत्व हानिकारक लीवर एंजाइम के लेवल को कम करते हैं.
डायबिटीज से मिलेगी राहत - ब्लैक कॉफी का सेवन करने से डायबिटीज की समस्या दूर हो सकती है. कॉफी पीने से शरीर में इंसुलिन की मात्रा में इजाफा होता है, जिससे डायबिटीज की समस्या को कम किया जा सकता है.
सेहत टिप्स /शौर्यपथ / मां के लिए बच्चे का स्वास्थ्य सर्वोपरि प्राथमिकता होती है. बच्चों को स्वस्थ रखने के लिए वह हर संभव प्रयास करती हैं. वे अपने बच्चों के लिए बेहद सावधानी बरतती हैं और उन्हें सभी पोषक तत्वों से भरपूर डाइट प्रदान करती हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक ऐसी चीज भी है जो एक मां अपने बच्चे को दिन में एक बार खिलाती है, तो उसका बच्चा हमेशा हेल्दी रहता है और उसका दिमाग भी तेज होता है? आज हम इस मदर्स डे पर आपको ऐसी एक चीज के बारे में बता रहे हैं जिसे हर मां अपने बच्चे को खिलाकर हेल्दी, तंदरुस्त और तेज बना सकती है.
मां को अपने बच्चे को क्या खिलाना चाहिए?
वह है खजूर. खजूर कई पोषक तत्वों और एनर्जी का अच्छा स्त्रोत है जो बच्चों के लिए बहुत लाभकारी होता है. यह उन्हें जरूरी पोषण प्रदान करता है जो उनकी ग्रोथ और स्वास्थ्य के लिए जरूरी है. खजूर में फाइबर, विटामिन और मिनरल्स पाये जाते हैं, जो बच्चों की मजबूती और स्वस्थता को बनाए रखने में मदद करते हैं. इसके अलावा खजूर में मौजूद एंटीऑक्सिडेंट्स बच्चों के मस्तिष्क को तेज करते हैं और उनकी सोचने की क्षमता को बढ़ावा देने में सहायक हो सकते हैं. इसलिए एक मां के लिए खजूर एक अच्छा विकल्प है जिसे वह अपने बच्चे को रोज दे सकती है, ताकि उनका बच्चा हमेशा स्वस्थ रहे.
दूध में मखाना भिगोकर खाना:
मखाना और दूध का संयोजन एक अच्छा कॉम्बो माना जाता है. ये बच्चों के स्वास्थ्य को अच्छा बनाए रखने में मदद कर सकता है. मखाना एक पोषक फल है जो कि प्रोटीन, कैल्शियम, मैग्नीशियम, आयरन, फाइबर और अन्य पोषक तत्वों से भरपूर होता है. दूध भी हाई प्रोटीन, कैल्शियम और विटामिन डी का स्त्रोत होता है. इन दोनों का संयोजन बच्चों के अच्छा पोषण मिलता है. मखाना में प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले ताकतवर एंटीऑक्सिडेंट्स होते हैं जो बच्चों को मजबूत बनाते हैं और उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते हैं. दूध में मौजूद कैल्शियम और मखाने की प्रोटीन बच्चों के शारीरिक विकास के लिए आवश्यक होते हैं, जैसे कि हड्डियों और मांसपेशियों की मजबूती के लिए.
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
