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June 01, 2026
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खाना खजाना /शौर्यपथ /आज हम आपके लिए छुहारा हलवा बनाने की रेसिपी लेकर आए हैं। ठंड के दिनों में यह हलवा खास फायदेमंद होता है। छुहारा में आयरन भी काफी मात्रा में होता है, जिससे यह खून की कमी से जूझ रहे लोगों के लिए भी अच्छा माना जाता है। यह बहुत स्‍वादिष्‍ट होता है।
छुहारा– 200 ग्राम (दूध में 6 घंटे भीगे हुए),
दूध– 1/2 लीटर,
शक्कर– 100 ग्राम,
देशी घी– 04 बड़े चम्मच,
नारियल– 02 बड़े चम्मच (कद्दूकस किया हुआ),
बादाम– 10-12 नग,
काजू– 10-12 नग,
किशमिश– 10-12 नग,
इलायची पाउडर– 01 छोटा चम्मच।
विधि :
छुहारा का हलवा बनाने के लिए सबसे पहले बादाम और काजू को कतर लें। किशमिश के डंठल निकाल दें। साथ ही चाकू की मदद से छुहारे के बीज निकाल दें। छुहारे के गूदे को मिक्सी में डालें और हल्का दरदरा (ज्यादा महीन नहीं) पीस लें।
अब एक फ्राई पैन में घी डाल कर उसे गर्म करें। घी गर्म होने पर आंच मीडियम कर दें और पैन में छुहारे का पेस्ट डाल कर उसे पन्द्रह-बीस मिनट तक भून लें। जब छुहारे का पेस्ट सुनहरा होने लगे, उसमें शक्कर और दूध डाल दें और धीमी आंच पर चलाते हुए पकाएं।
जब दूध पूरी तरह से सूख जाए और उसमें से घी अलग होने लगे, तो उसमें बादाम, काजू, किशमिश और इलायची पाउडर डाल दें और दो मिनट तक पकाने के बाद ढक दें।
आपका छुहारा का हलवा तैयार है। इसे ठंडा करके इस्‍तेमाल करें। वैसे अगर आप चाहें, तो इसे फ्रिज में रख कर 10 दिनों तक इस्तेमाल कर सकते हैं।

धर्म संसार /शौर्यपथ /पौष मास में कृष्ण पक्ष एकादशी को सफला एकादशी कहा जाता है। श्री हरि भगवान विष्णु को समर्पित इस पावन व्रत को लेकर मान्यता है कि इस व्रत के प्रभाव से समस्त मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती हैं। यह एकादशी कल्याण करने वाली है। यह व्रत अति मंगलकारी और पुण्यदायी है। एकादशी के दिन श्री हरि भगवान विष्‍णु की उपासना और व्रत रखने से घर-परिवार में सुख-शांति आती है।
सफला एकादशी के दिन सूर्यदेव को अर्घ्य दें। भगवान श्री हरि विष्णु की विधि-विधान से पूजा करें। फूल, फल, गंगाजल, पंचामृत व धूप-दीप से भगवान श्री हरि विष्णु की आरती करें। भगवान श्रीहरि की पूजा के समय सफेद चंदन का टीका माथे पर लगाएं। ऊं नमो भगवते वासुदेवाय का जाप करें। भगवान श्रीहरि विष्णु को इस दिन रेशम का पीला धागा या वस्त्र अर्पित करें। इससे सफलता के मार्ग खुल जाते हैं। पूजा के बाद इस धागे को अपने दाहिने हाथ में बांधें। इस व्रत में दीपदान व रात्रि जागरण का विशेष महत्त्व है। इस व्रत से सभी कार्यों में सफलता मिलती है, इसलिए इसका नाम सफला एकादशी है। सफला एकादशी व्रत में भगवान विष्णु के साथ मां एकादशी की पूजा का भी विधान है। मान्यता है कि जो मनुष्य सफला एकादशी का व्रत विधि-विधान से करता है, उसे समस्त तीर्थों का फल प्राप्त होता है। मोहमाया के प्रभाव से मुक्ति मिलती है। छल-कपट की भावना दूर हो जाती है। इस व्रत में जरूरतमंदों को दान करें। शाम को दीप दान अवश्य करें। रात में भगवान का संकीर्तन करते हुए जागरण करें।

धर्म संसार /शौर्यपथ /साल 2021 में कुल चार ग्रहण लगेंगे। जिसमें से दो सूर्य ग्रहण और दो चंद्र ग्रहण होंगे। इस साल का पहला चंद्र ग्रहण 26 मई को लगेगा। यह पूर्ण चंद्र ग्रहण होगा। भारत में इस चंद्र ग्रहण को उपछाया ग्रहण के तौर पर देखा जा सकेगा। साल का पहला चंद्र ग्रहण भारत में दिखेगा लेकिन इसे देश के कुछ हिस्सों में नहीं देखा जा सकेगा।
साल का दूसरा चंद्र ग्रहण 19 नवंबर को लगेगा। यह आंशिक चंद्र ग्रहण होगा। इसे भारत, अमेरिका, उत्तरी यूरोप, ऑस्ट्रेलिया और प्रशांत महासागर में देखा जा सकेगा। साल का दूसरा चंद्र ग्रहण भारत मे अरुणाचल और असम के कुछ हिस्सों में चंद्रोदय के समय नजर आएगा। ज्योतिष शास्त्र में चंद्र ग्रहण को एक अशुभ घटना माना जाता है। ग्रहण के दौरान लोग कई तरह की सावधानियां बरतते हैं। जानिए चंद्र ग्रहण के दौरान क्या करें और क्या नहीं-
ग्रहण काल में क्या नहीं करना चाहिए-
1. मान्यता है कि ग्रहण के दौरान तेल लगाना, जल पीना, बाल बनाना, कपड़े धोना और ताला खोलने जैसे कार्य नहीं करने चाहिए।
2. कहा जाता है कि ग्रहण काल में भोजन करने वाले मनुष्य जितने अन्न के दाने खाता है, उसे उतने सालों तक नरक में वास करना पड़ता है।
3. मान्यता है कि ग्रहण काल में सोने से व्यक्ति रोगी होता है।
4. चंद्र ग्रहण में तीन प्रहर का भोजन करना वर्जित माना जाता है।
5. ग्रहण के दिन पत्ते, तिनके, लकड़ी और फूल आदि नहीं तोड़ने चाहिए।
6. ग्रहण काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए।
चंद्र ग्रहण के दौरान क्या करें-
1. ग्रहण शुरू होने से पहले खुद को शुद्ध कर लें। ग्रहण शुरू होने से पहले स्नान आदि कर लेना शुभ माना जाता है।
2. ग्रहण काल में अपने इष्ट देव या देवी की पूजा अर्चना करना शुभ होता है।
3. चंद्र ग्रहण में दान करना बेहद शुभ माना जाता है। ग्रहण समाप्त होने के बाद घर में गंगा जल का छिड़काव करना चाहिए।
4. ग्रहण खत्म होने के बाद एक बार फिर स्नान करना चाहिए। कहते हैं कि ऐसा शुभ फलों की प्राप्ति होती है।
5. ग्रहण काल के दौरान खाने-पीने की चीजों में तुलसी का पत्ता डालना चाहिए।

सेहत /शौर्यपथ / आयुर्वेद में कुछ ऐसी चीजें बताई गई हैं जिनके नियमित सेवन से न सिर्फ विभिन्न रोगों से मुक्ति मिलती है बल्कि इससे त्वचा भी युवा बनी रहती है। इन आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों में से एक है आंवला। विटामिन-सी से भरपूर आंवला, हर मौसम में लाभदायक होता है। यह आंखों, बालों और त्वचा के लिए तो फायदेमंद है ही, साथ ही इसके और भी कई फायदे हैं, जो आपके शरीर को स्वस्थ बनाए रखने में मदद करते हैं। अक्सर आंवला खासकर आंवला जूस के सेवन को लेकर कई लोग दुविधा में रहते हैं कि इसका सेवन कब करना चाहिए।
कब और कितनी मात्रा में पीना चाहिए आंवला जूस
सुबह खाली पेट आंवला जूस केवल 10 मिलीग्राम ही लें।बढ़ाकर 20 मिलीग्राम कर सकते हैं।इससे ज्यादा आंवला जूस का सेवन सेहत के लिए हानिकारक हो सकता है।अलग-अलग समय पर इसे दो बार में भी ले सकते हैं।
आंवला और इसका जूस पीने के फायदे-
-आंखों के लिए आंवला अमृत समान है, यह आंखों की रोशनी को बढ़ाने में सहायक होता है। इसके लिए रोजाना एक चम्मच आंवला के पाउडर को शहद के साथ लेने से लाभ मिलता है और मोतियाबिंद की समस्या भी खत्म हो जाती है।
-बुखार से छुटकारा पाने के लिए आंवले के रस में छौंक लगाकर इसका सेवन करना चाहिए, इसके अलावा दांतों में दर्द और कैविटी होने पर आंवले के रस में थोड़ा सा कपूर मिला कर मसूड़ों पर लगाने से आराम मिलता है।
-शरीर में गर्मी बढ़ जाने पर आंवल सबसे बेहतर उपाय है। आंवले के रस का सेवन या आंवले को किसी भी रूप में खाने पर यह ठंडक प्रदान करता है। हिचकी तथा -उल्टी होने की पर आंवले के रस को मिश्री के साथ दिन में दो-तीन बार सेवन करने से काफी राहत मिलेगी।
-चेहरे के दाग-धब्बे हटाकर उसे खूबसूरत बनाने के लिए भी आंवला आपके लिए उपयोगी होता है। इसका पेस्ट बनाकर चेहरे पर लगाने से त्वचा साफ, चमकदार होती है और झुर्रियां भी कम हो जाती हैं।
इन चीजों के साथ सेवन करने के फायदे
-आवंला कूटकर पेस्ट के रूप में तैयार कर लें।दो चम्मच आंवला का गूदा और दो चम्मच शहद मिलाकर सुबह-शाम लें। जुकाम नहीं होगा, अगर है तो वह ठीक हो जाएगा।
-6-7 दिन तक खाली पेट एक चम्मच केवल आंवला जूस पिएं। इससे पेट के कीड़े मरेंगे।पेट साफ होगा।
-डायबिटीज़ की समस्या से जूझ रहे लोग भी आंवला जूस का सेवन कर सकते हैं।आंवला ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने में कारगर है।
-पेशाब में जलन हो तो खाली पेट आंवला और शहद मिलाकर पिएं। राहत मिलेगी।
-खांसी के लिए भी आंवला काफी फायदेमंद है।आंवले का मुरब्बा दूध के साथ लें। खांसी में आराम मिलेगा।
-सफेद बालों को काला करने में आंवला कारगर है। नारियल के तेल में दो से तीन साबुत आंवला रात में भिगोकर रखें। सुबह में इस तेल की मालिश करें।बाल काले हो जाएंगे और मजबूत भी होंगे।

सेहत /शौर्यपथ / आमतौर पर मूली के पत्तों को कई लोग फेंक देते हैं लेकिन आपको बता दें कि मूली के पत्तों में मूली से भी ज्यादा पोषण होता है। ऐसे में आपको मूली के पत्ते खाने के फायदे जान लेने चाहिए, जिससे कि आप मूली की तरह ही इसके पत्तों का सेवन कर सकें।
मूली के पत्तों में पोषक तत्व
मूली के पत्ते विटामिन ए, विटामिन बी, सी के साथ ही क्लोरीन, फास्फोरस, सोडियम, आयरन, मैग्नीशियम और अन्य पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं और पेट के लिए फायदेमंद होने के साथ ही मूत्र विकारों में भी बेहद लाभकारी होते हैं।
फायदे
-मूली के पत्ते विटामिन ए, विटामिन बी, सी के साथ ही क्लोरीन, फास्फोरस, सोडियम, आयरन, मैग्नीशियम और अन्य पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं जो आपके पेट के लिए काफी फायदेमंद होते हैं।
-मूली के पत्तों का प्रयोग आप सब्जी या पराठे बनाने में कर सकते हैं। इसका सेवन करने से शरीर की प्रतिरोधक क्षमता में इजाफा होता है और थकान महसूस नहीं होती।
-पाइल्स यानि बवासीर के रोगियों के लिए मूली एवं इसके पत्तों की सब्जी खाना बेहद फायदेमंद होता है। रोजाना इसके प्रयोग से आपकी समस्या समाप्त हो सकती है।
-इसमें सोडियम होता है और यह शरीर में नमक की कमी को पूरा करता है, इसलिए लो ब्लडप्रेशर के मरीजों के लिए भी यह बेहद फायदेमंद है। इसके अलावा इसमें मौजूद एंथेकाइनिन दिल के लिए फायदेमंद होता है।
-इसमें फाइबर भरपूर होता है इसलिए यह कब्ज से राहत देता है। वहीं इसके रस को पानी और मिश्री के साथ पीने पर पीलिया रोग में लाभ मिलता है। इतना ही नहीं यह बालों का झड़ना भी कम करता है।

खाना खजाना /शौर्यपथ /सर्दियों में गाजर का हलवा किसे अच्छा नहीं लगता लेकिन क्या आपने गाजर की खीर कभी ट्राई की है. आइए जानते हैं कैसे बनाएं गाजर की खीर-
सामग्री-
आधा किलो गाजर (कद्दूकस की हुई)
एक चम्मच चीनी
10 ग्राम किशमिश
कतरे हुए कप काजू
कतरे हुए 10 बादाम
2 हरी इलायची (पीसी हुई)
विधि-
आधा किलो गाजर को अच्छी तरह धुलें और छील लें। अब इन्हें कद्दूकस करें।
गैस पर भारी बेस वाली कड़ाही रखें और उसमें एक चम्मच देसी घी डालें। घी मेल्ट होने के बाद उसमें गाजर डालें और इसके ऊपर से चीनी डालकर इसे ढक दें। इस दौरान गैस धीमी रखें।
अब 1 से 2 मिनट बाद प्लेट हटाकर गाजर और चीनी को अच्छी तरह मिक्स करें और 2 से 5 मिनट के लिए पकाएं। इस बीच इसे स्पून की मदद से चलाते रहें।
अब इसमें दूध मिलाएं और दूध डालने के बाद इसे करीब 20 मिनट तक धीमी आंच पर पकाएं। बीच-बीच में 2 से 3 मिनट बाद इसे चलाते रहें।
अब इसमें पिसी हुई इलायची और किशमिश मिलाकर 2 मिनट के लिए पकाएं। इसके बाद इस पर काजू और बादाम या पिस्ता डालकर गर्मागर्म सर्व करें।

सेहत /शौर्यपथ / कब्ज एक छोटा-सा शब्द है लेकिन जिन लोगों को अक्सर कब्ज की समस्या रहती है, वो बेहतर तरीके से जानते हैं कि यह किस तरह आपकी लाइफ डिस्टर्ब करती है। पेट साफ न होने से शारीरिक परेशानियों के साथ कई स्किन प्रॉब्लम्स भी हो जाती हैं। ऐसे में आपको अपना ख्याल रखने के लिए अपनी कुछ आदतों में सुधार करना चाहिए। कुछ ऐसी आदतें होती हैं, जिसकी वजह से आपको कब्ज की परेशानी होती रहती है। कब्ज की बात करें, तो आम कब्ज से लेकर गंभीर तरह की कब्ज की बीमारी इसमें शामिल है. जैसे कभी-कभार होने वाला कब्ज, क्रॉनिक कॉन्स्टिपेशन (कब्ज बहुत ज्यादा बढ़ जाने पर), यात्रा या उम्र से संबंधित कब्ज। कब्ज में हमारी आंतें मल को छोड़ नहीं पातीं।
नींबू पानी
नींबू हमारे शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करता है। अगर कभी कब्ज हो जाए तो एक गिलास गर्म पानी में एक नींबू का रस और शहद मिलाएं और पी लें।
दूध और दही
कब्ज की समस्या को दूर करने के लिए पेट में अच्छे बैक्टीरिया का भी होना जरूरी है। सादे दही से आपको प्रोबायोटिक मिलेगा, इसलिए आप दिन में एक से दो कप दही जरूर खाएं। इसके अलावा यदि बहुत परेशान हैं तो एक गिलास दूध में एक से दो चम्मच घी मिलाकर रात को सोते समय पिएं, लाभ होगा।
आयुर्वेदिक दवा
सोने से पहले दो या तीन त्रिफला टैबलेट गर्म पानी के साथ लें। त्रिफला हरड़, बहेड़ा और आंवले से बना होता है। ये तीनों पेट के लिए लाभकारी हैं। त्रिफला रात में अपना काम शुरू कर देता है।
खाने में फाइबर
एक दिन में एक महिला को औसतन 25 ग्राम फाइबर की जरूरत होती है, वहीं एक पुरुष को 30 से 35 ग्राम फाइबर की आवश्यकता होती है। अपने पाचन तंत्र को दोबारा ट्रैक पर लाने के लिए आपको यह सुनिश्चित करना होगा कि आप हर दिन अपनी जरूरत के अनुसार फाइबर की खुराक ले रहे हैं।

बिलासपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ प्रदेश में ‘पढ़ई तुहार दुआर‘ कार्यक्रम के अंतर्गत कोरोनाकाल में बच्चों को ऑनलाइन या ऑफलाइन शिक्षा उपलब्ध करायी जा रही है। बिलासपुर जिले के विकासखण्ड कोटा की तहसील रतनपुर के जमुनाही तिलकडीह प्राथमिक शाला के कक्षा 5वीं के छात्र विमल ने स्टोरीविवर के वेबसाइट में 10 कहानियों का स्थानीय भाषा छत्तीसगढ़ी भाषा में अनुवाद कर एक नई शुरूआत की। कहते हैं, “पढ़ाई की कोई उम्र नहीं होती” यह अपने आप में नई मिसाल है।
कोरोना के कारण देश और प्रदेश में स्कूल बंद है, ऐसी स्थिति में बच्चों को शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार के स्कूल शिक्षा विभाग में ‘पढ़ई तुंहर दुआर‘ कार्यक्रम का संचालन किया जा रहा है। पढ़ई तुंहर दुआर कार्यक्रम के अंतर्गत बच्चों को शिक्षा से जोड़े रखने के लिए विभिन्न प्रकार के कारगर उपाय किए गए। इसका लाभ सभी विद्यार्थियों को मिल रहा है।
विमल की उम्र अभी 10 वर्ष है। उसने हाल ही में अपने बड़े पिता श्री बलदाऊ सिंह श्याम को लैपटॉप में काम करते देख प्रेरित हो स्वयं कहानी लिखने की ठानी। विमल ने पक्के इरादे के साथ स्टोरीविवर की वेबसाइट पर उपलब्ध कहानियों में 10 हिंदी भाषा की कहानी को स्थानीय छत्तीसगढ़ी भाषा मे अनुवाद किया। वर्तमान में छात्र मोबाइल सहित कम्प्यूटर लैपटॉप में काम करने में बिना किसी प्रशिक्षण के काफी जानकारी रखने लगा है। ऑनलाइन से सम्बंधित पढ़ई तुंहर दुआर के तहत चलने वाले ऑनलाइन क्लास में भी विमल नियमित रूप से शामिल होकर पढ़ाई करता है। विमल ने स्टोरीविवर सहित ऑग्मेंटेड रियलिटी वीडियो बनाने का भी काम कर रहा है। वह लगातार ऑनलाइन सहित ऑफलाइन क्लास का लाभ लेते हुए अपनी पढ़ाई को जारी रखा हुआ है।
ग्रामीण अंचल के छात्र विमल सिंह गोंड जो माता-पिता की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण अपने बड़े पिता बलदाऊ सिंह श्याम के पास रहकर अपनी पढ़ाई-लिखाई सतत रूप कर रहा है। छात्र के पिता छोटे कृषक है। आर्थिक स्थिति ठीक नही होने के कारण छात्र बड़े पिता बलदाऊ सिंह के पास रहकर पढ़ाई कर रहा है, बलदाऊ सिंह द्वारा भी पढ़ाई में कभी आर्थिक स्थिति कारण न बने इसका ध्यान रखते हुए विमल को आवश्यक सुविधा उपलब्ध कराते हैं। छात्र विमल इस कोरोनाकाल में अपने बड़े पिता के साथ रहकर सभी ऑनलाइन तकनीकी जानकारी भी रखने लगा है। ऑफलाइन क्लास के रूप में संचालित मोहल्ला क्लास में अपने साथ पढ़ने वाले बच्चों को लगातार क्लास में आने और पढ़ाई निरंतर जारी रखने के लिए प्रेरित करता है।

रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल की हाईस्कूल पूरक परीक्षा-2020 उत्तीर्ण विद्यार्थियों को 20 जनवरी तक कक्षा 11वीं में प्रवेश दिया जाएगा। स्कूल शिक्षा मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम के निर्देश पर लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा सभी संभागीय संयुक्त संचालक और जिला शिक्षा अधिकारियों को हाईस्कूल पूरक परीक्षा उत्तीर्ण विद्यार्थियों को 20 जनवरी तक कक्षा 11वीं में प्रवेश दिया जाना सुनिश्चित करने के आदेश जारी कर दिए है। संबंधित अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया गया है कि विशेष रूप से ध्यान रखा जाए कि कोई भी छात्र प्रवेश से वंचित न रहे।

खाना खजाना / शौर्यपथ /सर्दियों में अक्सर शाम को कुछ चटपटा खाने का मन करता है। ऐसे में मन में यह सवाल उठना लाजमी है कि ऐसा क्या खाया जाए जो हेल्दी होने के साथ-साथ स्वादिष्ट भी हो। तो आपके ऐसे ही एक सवाल का जवाब है मटर की कचौड़ी। यह रेसिपी खाने में जितनी टेस्टी है बनने में उतनी ही आसान भी है। तो आइए जान लेते हैं कैसे बनाई जाती है ये टेस्टी रेसिपी।
मटर की कचौड़ी बनाने के लिए सामग्री-
2 कप गेहूं का आटा या मैदा, 2 टीस्पून तेल, नमक स्वादानुसार, 1 कप हरी मटर, 2 टीस्पून तेल पिट्ठी भूनने के लिए, चुटकी भर हींग, 1/2 टीस्पून जीरा, 1 टीस्पून धनिया पाउडर , 1/2 टीस्पून सौंफ पाउडर, 1/2 टीस्पून लाल मिर्च पाउडर, 1 टीस्पून गरम मसाला, 1/4 टीस्पून अमचूर पाउडर, हरी मिर्च बारीक कटी हुई, 1 इंच अदरक, नमक स्वादानुसार, तेल तलने के लिए
मटर की कचौड़ी बनाने की विधि-
गूंथे हुए आटे को सेट होने के लिए 20 मिनट के लिए एक तरफ रख दें। पिट्ठी तैयार करने के लिए मटर के दानों को ग्राइंडर में दरदरा पीस लें। पैन में तेल डालकर गर्म करें। फिर उसमें हींग और जीरा डालें।
जीरा ब्राउन होने के बाद धनिया पाउडर, सौंफ, हरी मिर्च, अदरक डालकर हलका सा भूनें और मटर का पेस्ट डालें। फिर लाल मिर्च, गर्म मसाला, अमचूर, हरा धनिया और नमक डालकर मटर को 3-4 मिनट तक भूनें। अब पिट्ठी तैयार है।
नींबू के आकार का आटा लेकर लोई बनाएं। उसे हथेली पर रखकर थोड़ा दबाकर बीच में एक छोटी चम्मच पिट्ठी भरकर गोल करें। अब भरी हुई लोई को हथेली से दबाकर उसका आकार थोड़ा सा बढ़ा लें, इससे लोई में मटर की पिट्ठी एकसार हो जाती है। भरी हुई लोई को बेलन से बेल लें। इसी तरह बाकी कचौरियां भी तैयार कर लें। बेली हुई कचौरी को एक-एक करके गर्म तेल में डालें और पलट कर दोनों ओर से सेंकें।
तली हुई कचौरियां किसी प्लेट पर पेपर नैपकिन बिछाकर निकाल लें। इसी तरह सारी कचौरियां तल लें। अब कचौरियों को हरे धनिये की चटनी के साथ गर्मागर्म सर्व करें।

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