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प्रत्येक परिवार को मिला 100 दिन का रोजगार
धमतरी / शौर्यपथ / गांव का समृद्ध विकास एक कुशल शासक के कार्य को दर्शाता है। जब यह कार्य गांव के हित में हो तो निश्चित इसकी चर्चा चहूं ओर होती है। गांव का विकास, योजना से निर्मित परिसंपत्ति का संरक्षण, संवर्धन होने से विकास कार्यों के प्रति लोगों के सोच में परिवर्तन आने लगता है। सकारात्मक सोच का परिणाम शासन की महत्वाकांक्षी योजना को बिना आड़े आये आबाद गति से क्रियान्वित करती है।
ग्राम पंचायत गोजी विकासखंड कुरूद मुख्यालय से 17 किलोमीटर की दूरी और धमतरी जिला मुख्यालय से 42 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। ज्यादातर ग्रामीण कृषि पर निर्भर है। कृषि कार्य हेतु ट्रैक्टर, बैलगाड़ी एवं पशुपालकों के मवेशियों के आने-जाने के लिए बड़ी समस्या थी। बरसात कि दिनों में अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। विकास कार्यों में आ रही समस्याओं का समाधान महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना से पूर्ण हुआ। वर्ष 2019-20 में हीरा से गोसाईं खेत तक मिट्टी धरसा सड़क निर्माण कार्य राशि 6.93 लाख रूपये, वर्ष 2020-21 में बजरंगबली मंदिर से रोहित घर तक धरसा सड़क निर्माण कार्य राशि 5.94 लाख रूपये, मुख्य मार्ग से शमशान घाट तक धरसा मिट्टी सड़क निर्माण कार्य राशि 3.29 लाख रूपये, लक्ष्मण घर से राधाकृष्ण मंदिर धरसा मिट्टी सड़क निर्माण कार्य राशि 4.18 लाख रूपये, विश्वा यादव खेत से बिसे ब्यारा तक धरसा मिट्टी सड़क निर्माण कार्य राशि 4.61 लाख रूपये के कार्य कराये गये। धरसा सड़क निर्माण हेतु किसानों की लंबी मांग थी। अब किसानों की सारी समस्याएं दूर हुई और आवागमन का मार्ग प्रशस्त हुआ।
इसी तरह वर्ष 2019-20 में नया तालाब निर्माण कार्य राशि 9.97 लाख, रूपये, शमशान घाट तालाब सह घाट निर्माण कार्य राशि 9.66 लाख, वर्ष 2020-21 में रामसागर तालाब गहरीकरण सह पींिचंग निर्माण कार्य राशि 9.97 लाख रूपये, जुन्ना तालाब गहरीकरण सह पीचिंग निर्माण कार्य राशि 10.00 लाख रूपये, हीरा तालाब गहरीकरण सह पीचिंग निर्माण कार्य राशि 9.98 लाख रूपये जिला कार्यालय से स्वीकृति दी गई।
अब तक महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना से राशि 59.25 लाख रूपये के कार्य कराये जा चुके हैं। जाॅबकार्डधारी परिवारों की सक्रिय भागीदारी से पंचायत के कार्योंं को नया आयाम दिया गया। इस तरह 257 जाॅबकार्डधारी परिवार के कुल 450 श्रमिकों ने रोजगार नियोजित कर 27729 मानव दिवस अर्जित किया गया। तथा 197 नियोजित श्रमिकों को 100 दिवस का रोजगार दिया गया। कोरोना वायरस (कोविड-19) लाॅकडाउन के दौरान तत्काल उनके खाते में मजदूरी का भुगतान कराया गया।
जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने बताया कि-कोरोना वायरस संक्रमण के दौरान ग्रामीण श्रमिकों को रोजगार मुहैया कराकर जीविकोपार्जन हेतु आर्थिक समृद्धि का सुरक्षा दिया गया। संकट के समय यह राशि श्रमिकों के परिवार में संजीवनी की तरह काम आये। मनरेगा से श्रमिकों को आर्थिक समृद्धि का बढ़ावा देना योजना का मुख्य लक्ष्य है।
सुश्री कुंती देवांगन कार्यक्रम अधिकारी जनपद पंचायत कुरूद ने बताया कि-उच्चाधिकारियों के निर्देशानुसार प्रत्येक पंचायतों में कार्य स्वीकृत कराने के निर्देश दिये गये थे। पंचायत की सजगता से ग्रामीण श्रमिकों को मांग अनुसार रोजगार उपलब्ध कराया गया। लाॅकडाउन में मनरेगा कार्य से इन श्रमिकों को बड़ी राहत मिली।
सरपंच श्री थानेश्वर तारक ने बताया कि-ग्रामीण एवं श्रमिकों के समन्वय से महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना से विकास कार्यों की सहभागिता सुनिश्चित हुई। आवश्यकतानुसार मूलभूत के कार्य होने से ग्रामीण कृषकों को भी आवागमन के साधन से मुश्किल आसान हुई। पंचायत का सपना साकार हुआ। लोगों में शासन के प्रति विश्वास बढ़ा।
राष्ट्रीय स्तर पर संकटकाल में भी सृजन का किया झंडा बुलंद
भिलाई / शौर्यपथ / भिलाई इस्पात संयंत्र ने कोरोना संकटकाल में भी अपनी सृजनशीलता को नई उ?ान देने में कामयाबी हासिल की है क्वालिटी कंसेप्ट्स के नेशनल कन्वेंशन प्रतियोगिता में पार-एक्सीलेंस एवार्ड जीतने का एक नया रिकॉर्ड कायम किया है।
क्वालिटी सर्कल फोरम ऑफ इण्डिया (क्यूसीएफआई) द्वारा आयोजित नेशनल क्वालिटी कंसेप्ट्स कन्वेंशन-2020(एनसीक्यूसी-2020) के प्रतियोगिता परिणाम घोषित किए गए। इस क्वालिटी कंसेप्ट्स प्रतियोगिता में सेल-बीएसपी की 61 टीमों ने भाग लिया जो अब तक का सर्वश्रेष्ठ रिकॉर्ड है। संकटकाल में भी सभी 61टीमों ने पुरस्कार जीत कर राष्ट्रीय स्तर पर भिलाई के सृजन का झंडा बुलंद किया ।
36 पार-एक्सीलेंस एवार्ड जीतकर बनाया एक नया रिकॉर्ड
इस प्रतियोगिता में 61 टीमों ने अपने-अपने विभागों में किए गए सृजनशील कार्यों पर केस स्टडी लिखकर जमा किया। इन केस स्टडीज का मूल्यांकन विशेषज्ञ जजों के माध्यम से कराया गया। कोरोना महामारी को देखते हुए इस वर्ष क्यूसीएफआई ने प्रत्यक्ष प्रस्तुतियाँ पर रोक लगा दी थी। अत: इस वर्ष लिखित प्रस्तुत केस स्टडियों का मूल्यांकन और नॉलेज टेस्ट कर सीधे परिणाम की घोषणा की गई। सेल-बीएसपी की टीमों ने अपना परचम लहराते हुए 36 टीमों ने पार-एक्सीलेंस एवार्ड और 21 टीमों ने एक्सीलेंस एवार्ड 04 टीमों ने डिस्टिंग्विश एवार्ड प्राप्त कर भिलाई का नाम रोशन किया है। इस प्रकार सेल-बीएसपी की टीमों ने कुल 36 टीमों ने पार एक्सीलेंस एवार्ड जीतकर एक नया रिकॉर्ड कायम किया है।
विभिन्न क्वालिटी कंसेप्ट्स में की भागीदारी
बीएसपी की टीमों ने प्रतियोगिता के प्रत्येक वर्ग में भाग लिया। सभी वर्गों में पार एक्सीलेंस एवार्ड जीतकर अपने इनोवेशन की धमक दिखाई। विदित हो कि इन प्रतियोगिताओं में क्वालिटी सर्कल, 5-एस सिस्टम तथा लीन क्वालिटी सर्कल के तहत तीन वर्गों में आयोजित की जाती है। यह पहली बार हुआ है कि बिजनेस एक्सीलेंस विभाग (बीई विभाग) के मार्गदर्शन में सेल-बीएसपी की टीमों ने तीनों वर्गों में अपनी भागीदारी देकर अपनी उत्कृष्टता सिद्ध की है।
बीई विभाग का उत्कृष्ट योगदान
व्यावसायिक उत्कृष्टता विभाग द्वारा दिए गये मार्गदर्शन व प्रशिक्षण ने इस रिकार्ड तो? परफोर्मेंस में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। बीई विभाग के विभागाध्यक्ष व महाप्रबंधक श्री मनोज दुबे के नेतृत्व में सहायक महाप्रबंधक श्री प्रकाश कुमार साहू,उप प्रबंधक रवि कुमार तथा सुनील कुमार देशमुख ने बेहतरीन योगदान दिया।
पार-एक्सीलेंस एवार्ड विजेता टीमें
बीएसपी की कुल 61 टीमों ने अपने-अपने विभाग के लिए किए गए मॉडिफिकेशन, काईजन क्रियान्वयन और कार्यों के बेहतर पद्धति विकास में किए गए सृजनशील कार्यों को लिखित रूप में प्रस्तुत किया। जिसमें से 36 टीमों के रचनात्मक कार्यों को पार एक्सीलेंस एवार्ड से नवाजा गया। यह अब तक का सर्वाधिक पार एक्सीलेंस एवार्ड जीतने का एक नया रिकॉर्ड है। पार एक्सीलेंस एवार्ड प्राप्त टीमों में शामिल हैं-सृष्टि, क्रिएटिव, शौर्य, जागृति, चैतन्य, प्रयास, जागरूक होता इंसान, क्षितिज, विकास, प्रवाह, सौजन्य, धवल, उत्कर्ष, अभिनंदन, सुगम, निर्मल, आकार (सभी 5-एस टीमें)। इसी प्रकार लीन क्वालिटी सर्कल टीमों में शामिल हैं-नवोदय, प्रज्ञान, साहस, सेफ्टी प्रमोटर्स, संकल्प, समर्थ। इसी क्रम में क्वालिटी सर्कल वर्ग में पार एक्सीलेंस एवार्ड प्राप्त करने वाली टीमों में शामिल हैं-नवसृजन, शौर्य, पलाश, शार्दुल, अनवरत, टीएमटी मास्टर्स, आदर्श, पहल, प्रखर, अविरल, अभियान ,समर्पण,सजग ।
नेशनल कन्वेंशन में सर्वाधिक टीमें भेजने का नया रिकॉर्ड
इतिहास गवाह है कि सेल-बीएसपी ने अपने सृजनहार कार्मिकों के नवाचार कार्यों को सदैव ही प्रोत्साहित करता आ रहा है। कोरोना के इस संकटकाल में भी बीएसपी प्रबंधन ने रिकॉर्ड 61 टीमों को नेशनल कन्वेंशन में भेजकर क्वालिटी के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को पुन: सिद्ध किया है। इनोवेटिव कार्यों को बढावा देने के लिए बीएसपी प्रबंधन सदैव अग्रणी रहा है। कोरोना संकट में भी बीएसपी के सृजनहारों ने जहाँ अपनी क्रिएटिविटी को नई ऊँचाई दी वहीं बीएसपी प्रबंधन ने भी इस सृजनशील कार्मिकों को यथोचित मंच देकर इनका मनोबल बढाया है।
सेहत / शौर्यपथ /सर्दियों का मौसम अपने साथ सेहत से जुड़ी कुछ परेशानियां भी साथ लेकर आता है, जिसमें सर्दी खांसी आम है। बदलता मौसम स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतों को भी न्यौता देता है। अगर आप भी सूखी खांसी से परेशान
है, तो हम आपको इस लेख में कुछ ऐसे उपायों के बारे में बता रहें है जिन्हें अपनाकर आप इन सेहत समस्या से निजात पा सकते है। आइए जानते हैं....
तो आइए जानते हैं कि कैसे आप बदलते मौसम के साथ रख सकते हैं अपनी सेहत का ख्याल?
अदरक और नमक से आपको सूखी खांसी से निजात मिल सकती है। इसके लिए आप 1 अदरक लीजिए और इसमें थोड़ा-सा नमक लगाकर इसका सेवन करें। यह उपाय आपकी खांसी को भी ठीक करेगा, साथ ही आपके गले को भी साफ करेगा।
मुलेठी की चाय भी आपको सूखी खांसी से आराम दिला सकती है।
हल्दी वाला दूध सूखी खांसी को ठीक करने के लिए बहुत कारगर है। इसका सेवन आपको रात को सोने से पहले करना है।
गर्म पानी पीने से आपका मेटाबॉलिज्म रेट बढ़ता है, मगर इससे भी ज्यादा यह सूखी खांसी को खत्म करने में असरदार होता है। दिन में अगर आप 3 बार गर्म पानी पी लेंगे तो आपको खांसी में काफी राहत मिलेगी।
भाप आपको तुरंत और प्रभावी परिणाम भी दे सकती है। गर्म पानी की भाप एक सरल घरेलू उपाय है जिसे आप किसी भी समय फॉलो कर सकते हैं। यह कोल्ड और खराश से लड़ने में मददगार है।
सेहत /शौर्यपथ / चुकंदर का सेवन स्वास्थ्य के लिहाज से काफी फायदेमंद होता है। कुछ लोग इसका सेवन सलाद के रूप में करते है, तो कुछ जूस बनाकर पीना पसंद करते हैं। आज हम आपको चुकंदर के ऐसे फायदों के बारे में बता है जिसके सेवन से आप बीमारियों से कोसों दूर रहेंगे और सेहतमंद बने रहेंगे। आइए जानते हैं.....
1. चुकंदर का सेवन करने से एनीमिया, कब्ज, माहवारी की समस्या दूर होती है।
2. चुकंदर का सेवन शरीर में खून की मात्रा बढ़ाता है, इसलिए महिलाओं के लिए ये किसी वरदान से कम नहीं है।
3. चुकंदर का सेवन सलाद व जूस के रूप में करना काफी फायदेमंद होता है। इसमें आयरन, पोटेशियम, फास्फोरस, कैल्शियम, विटामिन डी और एंटीऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा में होते हैं।
4. आयुर्वेद में बताया गया है कि यह खून तो बढ़ाता ही है, साथ ही पेशाब संबंधी समस्याओं को भी दूर करता है।
5. चुकंदर में भरपूर मात्रा में फाइबर होता है जिस वजह से ये कब्ज और बवासीर की तकलीफ को दूर करने में सहायक होता है।
6. चुकंदर का सेवन शरीर से विषैले पदार्थों को बाहर निकाल देता है और इस कारण रक्त साफ हो जाता है।
7. इसे नियमित खाया जाए तो ये शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि करता है।
8. चुकंदर शरीर में कैल्शियम को बढ़ाता है, जिससे हड्डियां मजबूत होती हैं।
9. चुकंदर के नियमित सेवन से त्वचा में निखार आता है और स्किन ग्लोइंग बनती हैं।
धर्म संसार / शौर्यपथ / श्रीरामचरित मानस के रचयिता गोस्वामी तुलसीदास ने श्रीरामचरित मानस लिखने से पहले हनुमान चालीसा लिखी थी और फिर हनुमान की कृपा से ही वे श्रीरामचरित मानस लिख पाए। कहते हैं कि तुलसीदासजी ने ही बजरंग बाण भी लिखा था। आओ जानते हैं कि बजरंग बाण का पाठ क्यों करना चाहिए और क्या रखना चाहिए सावधानी।
कहते हैं कि गोस्वामी तुलसीदास पर काशी में किसी तांत्रिक ने मारण मंत्र का प्रयोग किया था। तब तुलसीदास जी के शरीर पर फोड़े निक आए थे। इसके बाद तुलसीदास जी ने बजरंग बाण का पाठ पढ़कर हनुमान जी से गुहार लगाई थी। बजरंग बाण के पाठ से एक दिन में सारे फोड़े ठीक हो गए थे। तभी से माजा जाता है कि यह पाठ शत्रुओं पर अचूक वार करता है।
1. क्यों करते हैं बजरंग बाण का पाठ? : बहुत से व्यक्ति अपने कार्य या व्यवहार से लोगों को रुष्ट कर देते हैं, इससे उनके शत्रु बढ़ जाते हैं। कुछ लोगों को स्पष्ट बोलने की आदत होती है जिसके कारण उनके गुप्त शत्रु भी होते हैं। यह भी हो सकता है कि आप सभी तरह से अच्छे हैं फिर भी आपकी तरक्की से लोग जलते हो और आपके विरुद्ध षड्यंत्र रचते हो। ऐसे समय में यदि आप सच्चे हैं तो बजरंग बाण का पाठ आपको बचाता है और शत्रुओं को दंड देता है।
2. सच्चे और पवित्र लोग ही करें इसका पाठ : बजरंग बाण से शत्रु को उसके किए की सजा मिल जाती है, लेकिन इसका पाठ एक जगह बैठकर अनुष्ठानपूर्वक 21 दिन तक करना चाहिए और हमेशा सच्चाई के मार्ग पर चलने का संकल्प लेना चाहिए, क्योंकि हनुमानजी सिर्फ सच्चे और पवित्र लोगों का ही साथ देते हैं। 21 दिन में तुरंत फल मिलता है। कभी किसी का बुरा करने की कामना के साथ बजरंग बाण का पाठ नहीं करना चाहिए। किसी भी अनैतिक कार्य की पूर्ति के लिए या फिर किसी से विवाद की स्थिति में विजय पाने के लिए बजरंग बाण का पाठ नहीं करना चाहिए। कर्म करना जीवन में बहुत आवश्यक होता है इसलिए बिना प्रयास के ही किसी कार्य में सफलता पाने के उद्देश्य से बजरंग बाण का पाठ न करें। धन, ऐश्वर्य या किसी भी भौतिक इच्छा की पूर्ति के लिए बजरंग बाण का पाठ नहीं करना चाहिए।
3. सावधानी : बजरंग बाण के बारे में कहा जाता है कि इसका प्रयोग हर कहीं, हर किसी को नहीं करना चाहिए। जब व्यक्ति घोर संकट में हो तब ही इसका प्रयोग करना चाहिये। प्रयोग करने के पूर्व इसे सिद्ध करना होता है। इसका प्रयोग करते वक्त सावधानी रखना चाहिए। किसी भी प्रकार की त्रुटि नहीं होना चाहिए। जितनी बार बजरंग बाण पाठ का संकल्प लें, उतनी बार रुद्राक्ष की माला से पाठ करें। बजरंग का बाण पाठ करते समय ध्यान रखें कि शब्दों का उच्चारण साफ और स्पष्ट होना चाहिए। अगर आप किसी विशेष मनोकामना की पूर्ति के लिए बजरंग बाण का पाठ कर रहे हैं तो कम से कम 41 दिनों तक यह पाठ नियमपूर्वक करें। आपको जितने दिन तक बजरंग बाण का पाठ करना हो उतने दिनों में ब्रह्मचर्य का पूर्णतया पालन करना जरूरी है। जितने दिन भी आपको बजरंग बाण का पाठ करना हो उतने दिनों तक किसी प्रकार का नशा या तामसिक चीजों का सेवन भूलकर भी नहीं करना चाहिए।
4. विधिवत रूप से करें पाठ : बजरंग बाण का पाठ करके के लिए हनुमानजी के चित्र या मूर्ति के समक्ष कुशासन (एक विशेष प्रकार की घास से बना आसन) पर बैठकर विधिवत उनकी पूजा अर्चना करने के बाद इसका पाठ करना चाहिए।
5. कब करें ये पाठ : बजरंग बाण का पाठ अक्सर शनिवार को ही किया जाता है, परंतु मंगलवार को भी इसका पाठ कर सकते हैं।
6. पाठ के पूर्व क्या करें : बजरंग बाण का पाठ करने के पूर्व संकल्प अवश्य लें कि आपका कार्य जब भी होगा, हनुमानजी के निमित्त नियमित कुछ भी करते रहेंगे। इसके अलावा रामजी की स्तुति पढ़ें और फिर विधिवत पूजा के बाद पाठ करें। पाठ पूर्ण हो जाने के बाद भगवान राम का स्मरण और कीर्तन करें।
7. घी का दीप जलाएं : पाठ के पूर्व घी का दीपक चलाएं जिसमें पांच बत्ती हो। इसी के सात गुग्गल की सुगंध भी फैलाएं।
8. अर्पित करें ये सामग्री : हनुमानजी को चमेली का तेल, गुड़, चना, जनेऊ, पान का बिड़ा आदि अर्पित करें। चूरमा, लड्डू और अन्य मौसमी फल भी अर्पित कर सकते हैं।
9. शनि, राहु-केतु से मिलती है मुक्ति : घटना-दुर्घटना को राहु-केतु और शनि अंजाम देते हैं। जैसे अचानक आग लग जाना, आपकी गाड़ी का एक्सिडेंट हो जाता या किसी मुसिबत का अचानक आ जाना। हनुमानजी आपको सभी तरह की घटना और दुर्घटना से बचा लेते हैं। इसके लिए आप सदा उनकी शरण में रहकर प्रतिदिन बजरंग बाण पाठ कर सकते हैं।
10. मंगल दोष से मुक्ति : यदि किसी की कुंडली में मांगलिक दोष है जिसके कारण विवाह नहीं हो पा रहा है या विवाह होने के बाद वैवाहिक जीवन में संकट पैदा हो रहा है तो उसे नियमित रूप से मंगलवार के दिन बजरंग बाण का पाठ करना चाहिए। अगर नियमपूर्वक निष्ठा के साथ बजरंग बाण का पाठ किया जाए, तो इससे मांगलिक दोष का निवारण जल्द हो सकता है।
यदि किसी कारणवश आप श्री बजरंग बाण का नित्य पाठ करने में असमर्थ हो तो प्रत्येक मंगलवार को यह पाठ अवश्य पढ़ना चाहिए। अपने किसी भी इष्ट कार्य की सिद्धि के लिए मंगल अथवा शनिवार का दिन चुन लें।
हनुमान जी का एक चित्र या मूर्ति जप करते समय सामने रख लें। ऊन अथवा कुशासन बैठने के लिए प्रयोग करें। इस पाठ को करने के लिए शुद्ध स्थान तथा शांत वातावरण आवश्यक है। अत: ऐसी जगह का चुनाव करके श्री बजरंग बाण का चमत्कारी पाठ पढ़ें। इस पाठ से जीवन दुर्भाग्य, दारिद्रय, भूत-प्रेत का प्रकोप और शारीरिक कष्ट सभी का नाश हो जाता है और जीवन में शुभता का संचारण होता है। यहां पढ़ें श्री बजरंग बाण का चमत्कारी पाठ-
बजरंग बाण ध्यान
श्रीराम
अतुलित बलधामं हेमशैलाभदेहं।
दनुज वन कृशानुं, ज्ञानिनामग्रगण्यम्।।
सकलगुणनिधानं वानराणामधीशं।
रघुपति प्रियभक्तं वातजातं नमामि।।
दोहा
निश्चय प्रेम प्रतीति ते, विनय करैं सनमान।
तेहि के कारज सकल शुभ, सिद्ध करैं हनुमान।।
चौपाई
जय हनुमन्त सन्त हितकारी। सुनि लीजै प्रभु अरज हमारी।।
जन के काज विलम्ब न कीजै। आतुर दौरि महा सुख दीजै।।
जैसे कूदि सिन्धु वहि पारा। सुरसा बदन पैठि विस्तारा।।
आगे जाय लंकिनी रोका। मारेहु लात गई सुर लोका।।
जाय विभीषण को सुख दीन्हा। सीता निरखि परम पद लीन्हा।।
बाग उजारि सिन्धु मंह बोरा। अति आतुर यम कातर तोरा।।
अक्षय कुमार को मारि संहारा। लूम लपेटि लंक को जारा।।
लाह समान लंक जरि गई। जै जै धुनि सुर पुर में भई।।
अब विलंब केहि कारण स्वामी। कृपा करहु प्रभु अन्तर्यामी।।
जय जय लक्ष्मण प्राण के दाता। आतुर होई दुख करहु निपाता।।
जै गिरधर जै जै सुख सागर। सुर समूह समरथ भट नागर।।
ॐ हनु-हनु-हनु हनुमंत हठीले। वैरहिं मारू बज्र सम कीलै।।
गदा बज्र तै बैरिहीं मारौ। महाराज निज दास उबारों।।
सुनि हंकार हुंकार दै धावो। बज्र गदा हनि विलम्ब न लावो।।
ॐ ह्रीं ह्रीं ह्रीं हनुमंत कपीसा। ॐ हुँ हुँ हुँ हनु अरि उर शीसा।।
सत्य होहु हरि सत्य पाय कै। राम दुत धरू मारू धाई कै।।
जै हनुमन्त अनन्त अगाधा। दुःख पावत जन केहि अपराधा।।
पूजा जप तप नेम अचारा। नहिं जानत है दास तुम्हारा।।
वन उपवन जल-थल गृह माहीं। तुम्हरे बल हम डरपत नाहीं।।
पाँय परौं कर जोरि मनावौं। अपने काज लागि गुण गावौं।।
जै अंजनी कुमार बलवन्ता। शंकर स्वयं वीर हनुमंता।।
बदन कराल दनुज कुल घालक। भूत पिशाच प्रेत उर शालक।।
भूत प्रेत पिशाच निशाचर। अग्नि बैताल वीर मारी मर।।
इन्हहिं मारू, तोंहि शमथ रामकी। राखु नाथ मर्याद नाम की।।
जनक सुता पति दास कहाओ। ताकी शपथ विलम्ब न लाओ।।
जय जय जय ध्वनि होत अकाशा। सुमिरत होत सुसह दुःख नाशा।।
उठु-उठु चल तोहि राम दुहाई। पांय परौं कर जोरि मनाई।।
ॐ चं चं चं चं चपल चलन्ता। ॐ हनु हनु हनु हनु हनु हनुमंता।।
ॐ हं हं हांक देत कपि चंचल। ॐ सं सं सहमि पराने खल दल।।
अपने जन को कस न उबारौ। सुमिरत होत आनन्द हमारौ।।
ताते विनती करौं पुकारी। हरहु सकल दुःख विपति हमारी।।
ऐसौ बल प्रभाव प्रभु तोरा। कस न हरहु दुःख संकट मोरा।।
हे बजरंग, बाण सम धावौ। मेटि सकल दुःख दरस दिखावौ।।
हे कपिराज काज कब ऐहौ। अवसर चूकि अन्त पछतैहौ।।
जन की लाज जात ऐहि बारा। धावहु हे कपि पवन कुमारा।।
जयति जयति जै जै हनुमाना। जयति जयति गुण ज्ञान निधाना।।
जयति जयति जै जै कपिराई। जयति जयति जै जै सुखदाई।।
जयति जयति जै राम पियारे। जयति जयति जै सिया दुलारे।।
जयति जयति मुद मंगलदाता। जयति जयति त्रिभुवन विख्याता।।
ऐहि प्रकार गावत गुण शेषा। पावत पार नहीं लवलेषा।।
राम रूप सर्वत्र समाना। देखत रहत सदा हर्षाना।।
विधि शारदा सहित दिनराती। गावत कपि के गुन बहु भांति।।
तुम सम नहीं जगत बलवाना। करि विचार देखउं विधि नाना।।
यह जिय जानि शरण तब आई। ताते विनय करौं चित लाई।।
सुनि कपि आरत वचन हमारे। मेटहु सकल दुःख भ्रम भारे।।
एहि प्रकार विनती कपि केरी। जो जन करै लहै सुख ढेरी।।
याके पढ़त वीर हनुमाना। धावत बाण तुल्य बनवाना।।
मेटत आए दुःख क्षण माहिं। दै दर्शन रघुपति ढिग जाहीं।।
पाठ करै बजरंग बाण की। हनुमत रक्षा करै प्राण की।।
डीठ, मूठ, टोनादिक नासै। परकृत यंत्र मंत्र नहीं त्रासे।।
भैरवादि सुर करै मिताई। आयुस मानि करै सेवकाई।।
प्रण कर पाठ करें मन लाई। अल्प-मृत्यु ग्रह दोष नसाई।।
आवृत ग्यारह प्रतिदिन जापै। ताकी छांह काल नहिं चापै।।
दै गूगुल की धूप हमेशा। करै पाठ तन मिटै कलेषा।।
यह बजरंग बाण जेहि मारे। ताहि कहौ फिर कौन उबारे।।
शत्रु समूह मिटै सब आपै। देखत ताहि सुरासुर कांपै।।
तेज प्रताप बुद्धि अधिकाई। रहै सदा कपिराज सहाई।।
दोहा
प्रेम प्रतीतिहिं कपि भजै। सदा धरैं उर ध्यान।।
तेहि के कारज तुरत ही, सिद्ध करैं हनुमान।।
रायपुर / शौर्यपथ / लोगों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने के लिए केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारापुस्तिका जारी की गयी है जिसमें समुदाय को स्वास्थ्य केंद्रों में जाकर स्वयं को बीमारियों और जोखिम से बचाने की सलाह दी गई है | इसमें संतुलित खानपान के साथ ही नियमित व्यायाम की भी बात की गयी है|
हाल के दिनों में कोविड 19 महामारी के दौरान लोगों के शारीरिक गतिविधियों में कमी आई है और संक्रमण के भय से लोगों का मानसिक स्वास्थ्य भी प्रभावित हुआ है|ऐसे में गैरसंचारी रोगों के प्रति और भी अधिक सजग होने की जरूरत पर भी बल दिया गया है| जीवनशैली ख़राब होने से गैरसंचारी रोगों के होने की संभावना भी बहुत अधिक हो जाती है| गैरसंचारी रोगों में मधुमेह और उच्च रक्तचाप सबसे गंभीर माने जाते हैं| इसको लेकर केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने 'मेरी सेहत मेरा दायित्व' नामक एक बुकलेट जारी कर इस संबंध में विस्तार से जानकारी दी है.
बेहतर जीवन शैली महत्वपूर्ण:
स्वास्थ्य विभाग ने कोविड संक्रमण काल के दौरान गैरसंचारी रोगों के प्रति लोगों में जागरूकता लाने के उद्देश्य से पुस्तिका जारी की गई है| पुस्तिका में कहा गया है गैरसंचारी रोगों की रोकथाम के लिए सही जीवनशैली और खानपान महत्वपूर्ण हैं| इन बीमारियों से बचाव के लिए आवश्यक सलाह देते हुए कहा गया है नियमित जांच से बीमारियों का सही समय पर इलाज संभव है और इन बीमारियो से होने वाले अन्य खतरों को कम किया जा सकता है| मंत्रालय द्वारा चार सवालों के जवाब हां में होने पर मधुमेह की जांच कराने की सलाह दी गयी है | परिवार में किसी को मधुमेह या उच्च रक्तचाप होने, वजन अधिक होने, 30 वर्ष या इससे अधिक आयु, तंबाकू व शराब का सेवन करने आदि के जवाब हां में हैं तो ऐसे लोगों को इसकी जांच करानी जरूरी हैसाथ ही आरामपरस्त जीवनशैली और असंतुलित खानपान के आदि लोगों को भी सर्तक रहने की हिदायत दी गयी है|
मधुमेह व उच्च रक्तचाप के लक्षणों की पहचान करें:
बार—बार पेशाब आना, बहुत अधिक प्यास लगना एवंअक्सर भूख लगना आदि लक्षणों को अनदेखा नहीं करते हुए ब्लड शुगर टेस्ट कराने की सलाह दी गयी है. यदि लगातार दो बार उपर का रक्तचाप(सिस्टोलिक) 140 मिमी और उससे अधिक आये और नीचे का रक्तचाप(डाईस्टोलिक) 90 मिमी या उससे अधिक आये तो यह उच्च रक्तचाप के संकेत होते हैं| उच्चरक्तचाप व मधुमेह की समस्या किसी भी व्यक्ति को हो सकती है मधुमेह और उच्च रक्तचाप पूरे शरीर को प्रभावित करते हैं| इससे दिल की बीमारियों, दिल के दौरे, लकवा, अंधेपन और किडनी की बीमारियों के खतरे बढ़ने की संभावना अधिक होती है|
सही व संतुलित खानपान का ख्याल रखें:
मंत्रालय द्वारा जारी बुकलेट में उच्च रक्तचाप कम करने के लिए वजन कम करने की सलाह दी गयी हैं और साथ ही नमक के कम इस्तेमाल और तनाव से दूर रहने की भी बताई गयी है| शराब, तंबाकू जैसे गुटखा व धूम्रपान आदि से दूर रहने और आहार में ताजे मौसमी फल व सब्जियों की मात्रा बढ़ाने के साथ शारीरिक व्यायाम करने की सलाह दी गयी है| मधुमेह एवं उच्च रक्तचाप से पीड़ित मरीज को भोजन में अंकुरित अनाज के अलाव दलिया और मिश्रित आटा खाने की हिदायत भी दी गयी है| साथ ही तेल मसालेदार भोजन व फास्ट फूड, चीनी वाली मिठाईयां व कोल्ड ड्रिंक आदि के सेवन से बचने के लिए कहा गया है|
जीवनशैली में शामिल करें नियमित व्यायाम:
मधुमेह व उच्च रक्तचाप से बचने के लिए खानपान के साथ जीवनशैली में व्यायाम को अवश्य शामिल करें. यदि कोई मधुमेह या रक्तचाप से पीड़ित हैं तो उन्हें भी अपने उम्र के अनुसार व्यायाम करना चाहिए. व्यायाम से ब्लड शुगर के स्तर में कमी होती है और मधुमेह का बेहतर नियंत्रण होता है| इंसुलिन का बेहतर नियंत्रण के साथ इसकी जरूरत में कमी होती है|
सेहत /शौर्यपथ / अगली बार जब आप केला खाएं तो उसका छिल्का फेंकें नहीं। संतरे और मौसमी के छिल्के को भी सहेजकर रखें। जी हां, जापान सहित दुनिया के विभन्नि देशों में हुए शोध में फल-सब्जी के छिल्के को डिप्रेशन से लेकर दिल की बीमारियों तक से बचाव में कारगर करार दिया गया है। त्वचा को मुलायम, दाग रहित और चमकदार बनाए रखने में भी छिल्कों की अहम भूमिका पाई गई है।
छिल्के में है दम
केला : डिप्रेशन, मोतियाबिंद
-ताइवान की चुंग शान मेडिकल यूनिवर्सिटी के शोध में केले के छिल्के में फील गुड हार्मोन सेरोटोनिन की मौजूदगी दर्ज की गई, जो बेचैनी-उदासी का भाव घटाता है
-इसमें ल्यूटिन नाम का एंटीऑक्सीडेंट भी पाया गया है, जो आंखों में मौजूद कोशिकाओं को अल्ट्रावायलेट किरणों से बचाकर मोतियाबिंद के खतरे में कमी लाता है
यूं करें इस्तेमाल : केले के छिल्के को दस मिनट तक साफ पानी में उबालें। पानी ठंडा होने के बाद इसे छानकर पी लें।
नाशपाती : पेट और लिवर रोग
-ब्रिटेन स्थित रॉयल सोसायटी ऑफ मेडिसिन के एक शोध के मुताबिक नाशपाती का छिल्का विटामिन-सी और फाइबर के अलावा ब्रोमलेन का बेहतरीन स्रोत
-चयापचय क्रिया दुरुस्त रखने के साथ ही पेट में मौजूद मृत ऊतकों के शरीर से बाहर निकलने की प्रक्रिया को बढ़ावा देता है यह एंजाइम, लिवर रोग रखता है दूर
यूं करें इस्तेमाल : नाशपाती को छिल्के सहित खाना पसंद नहीं करते हैं तो उसका जूस, शेक या सूप बनाकर पी सकते हैं।
लहसुन : हृदयरोग, स्ट्रोक
-द जर्नल ऑफ न्यूट्रिशन में छपे एक जापानी अध्ययन में लहसुन के छिल्के में फिनायलप्रॉपेनॉयड नाम के एंटीऑक्सीडेंट की मौजूदगी सामने आई है
-रक्तचाप के साथ ही लो-डेन्सिटी लाइपोप्रोटीन (एलडीएल) यानी बैड कोलेस्ट्रॉल के स्तर में कमी लाकर हृदयरोग और स्ट्रोक से बचाता है यह एंटीऑक्सीडेंट
यूं करें इस्तेमाल : रोज सुबह खाली पेट दो कली लहसुन चबाएं, वो भी बिना छिल्का उतारे। सब्जी-चटनी में भी छिल्के सहित इस्तेमाल करें।
संतरा-मौसमी : हृदयरोग, स्ट्रोक
-रॉयल सोसायटी ऑफ मेडिसिन के एक अन्य शोध से पता चला है कि संतरे-मौसमी जैसे खट्टे फलों के छिल्के में भारी मात्रा में सुपर-फ्लैवोनॉयड मौजूद होता है
-बैड कोलेस्ट्रॉल के स्तर में कमी लाता है यह एंटीऑक्सीडेंट, रक्त प्रवाह के दौरान धमनियों पर ज्यादा दबाव नहीं पड़ने देता, हृदयरोग-स्ट्रोक से महफूज रखता है
यूं करें इस्तेमाल : सब्जी-सूप में छिल्का कद्दूकस करके डाल सकते हैं। केक और मफिन में प्रयोग भी अच्छा विकल्प। जूस बनाकर पी सकते हैं।
कद्दू : कैंसर
-अमेरिका के एरिजोना कैंसर सेंटर के एक रिसर्च में कद्दू के छिल्के में मौजूद बीटा कैरोटीन फ्री-रैडिकल्स का खात्मा कर कैंसर से बचाव में मददगार मिला
-जिंक की मौजूदगी नाखून को मजबूत बनाने के अलावा अल्ट्रावायलेट किरणों से त्वचा कोशिकाओं की रक्षा करती है, प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में भी कारगर
-यूं करें इस्तेमाल : छिल्का मुलायम हो तो सब्जी के साथ पकाएं। और अगर कड़ा हो तो छीलकर धूप में सुखाएं। ओवन में भूनकर चिप्स के रूप में खा सकते हैं।
आलू : पाचन तंत्र से जुड़ी दिक्कतें
-जर्नल ऑफ मेडिकल प्लांट्स में छपे शोध की मानें तो एक बड़े आलू का छिल्का रोजाना जरूरी जिंक, आयरन, विटामिन-सी, पोटैशियम की खुराक पूरा करता है
-रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के साथ ही पाचन तंत्र दुरुस्त रखता है, त्वचा की रंगत में निखार लाने के साथ ही आंखों के किनारे पड़े काले धारे दूर करने में मददगार
यूं करें इस्तेमाल : आलू की सब्जी/भरता छिल्का सहित बनाएं। बारीक काटकर कुछ देर गर्म पानी-नमक के घोल में रखें। धूप में सुखाकर चिप्स बनाएं।
लाइफस्टाइल /शौर्यपथ / परिवार बढ़ाने की तैयारियों में जुटे हैं? अगर हां तो चुस्त अधोवस्त्र से तौबा कर लें। अमेरिकी शोधकर्ताओं ने यौन समस्याओं से जूझ रहे 656 पुरुषों पर अध्ययन के बाद यह चेतावनी दी है।
उनके मुताबिक पिता बनने की कोशिशों में जुटे पुरुषों को ढीले-ढाले अधोवस्त्र पहनने चाहिए। इससे शुक्राणुओं का उत्पादन ही नहीं, गुणवत्ता बढ़ाने में भी मदद मिलती है।
हार्वर्ड टीएच चान स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के शोधकर्ताओं ने संतानोत्पत्ति में दिक्कत महसूस कर रहे पुरुषों के खानपान, उम्र, शारीरिक सक्रियता, दिनचर्या, नींद की गुणवत्ता, सिगरेट-शराब की लत के अलावा पहनावे-ओढ़ावे का विश्लेषण किया।
इस दौरान चुस्त अधोवस्त्र के बजाय ढीले-ढाले शॉर्ट्स पहनने वाले पुरुषों में शुक्राणुओं की संख्या 17 फीसदी तक ज्यादा मिली। यही नहीं, इन शुक्राणुओं में अंडाणुओं तक पहुंचने और उन्हें निषेचित करने की क्षमता भी 33 फीसदी तक अधिक पाई गई।
मुख्य शोधकर्ता प्रोफेसर एलन पेसी के मुताबिक पुरुषों में शुक्राणुओं का उत्पादन यौन अंग के तापमान पर निर्भर करता है। इसके 34 डिग्री सेल्सियस से अधिक होने पर मस्तिष्क एफएसएच (फॉलिकल स्टिम्युलेटिंग हार्मोन) का स्त्राव घटा देता है।
एफएसएच यौन अंग को शुक्राणुओं के उत्पादन का निर्देश देने वाला हार्मोन है। चुस्त अधोवस्त्र पहनने वालों में इसकी मात्रा 14 फीसदी तक कम देखी गई है।
तीन महीने में होता है सुधार
-अध्ययन दल में शामिल डॉक्टर जॉर्ज शेवेरो ने कहा, चुस्त अधोवस्त्र पहनने वाले पुरुषों को ज्यादा परेशान होने की जरूरत नहीं। ढीले शॉर्ट्स अपनाने के तीन महीने के भीतर ही वे शुक्राणुओं की संख्या और गुणवत्ता में सुधार ला सकते हैं। अध्ययन के नतीजे ‘जर्नल ह्यूमन रिप्रोडक्शन’ के हालिया अंक में प्रकाशित किए गए हैं।
धर्म संसार / शौर्यपथ / संगम की रेती पर विश्व प्रसिद्ध माघ मेला 14 जनवरी से शुरू होगा। दुनिया के इस सबसे बड़े मेले की तैयारियां व्यापक स्तर पर शुरू हो गई हैं। कोरोना काल में तमाम चुनौतियों के बीच बस रहा माघ मेला एक नई आशा और उजास का किरण लेकर आ रहा है। क्योंकि इस बार माघ मेला के स्नान पर्वों पर गुरु बृहस्पति का दुर्लभ योग बन रहा है। 14 जनवरी को मकर संक्रांति से शुरू हो रहे माघ मेला के छह स्नान पर्व में चार स्नान पर्व गुरुवार को ही पड़ रहे हैं। ग्रहीय गोचर के अनुसार, गुरु बृहस्पति महामारी व अनिष्टकारी शक्तिओं को नष्ट करने में सक्षम हैं।
6 में चार स्नान पर्व गुरुवार को-
माघ मेला का पहला स्नान पर्व 14 जनवरी, गुरुवार मकर संक्रांति से शुरू होगा। इसमें 28 जनवरी को पौष पूर्णिमा, 11 फरवरी को मौनी अमावस्या और 11 मार्च को महाशिवरात्रि का स्नान पर्व गुरुवार को पड़ेगा। इस बीच 16 फरवरी को वसंत पंचमी मंगलवार और माघी पूर्णिमा 27 फरवरी, शनिवार को पड़ेगी।
गुरु पुण्य योग से बढ़ेगी पर्वों की शुभता-
ज्योतिषाचार्य अवध नारायण द्विवेदी के अनुसार, शास्त्रों में गुरुवार धर्म-कर्म, पौष्टिक कर्म, यज्ञ, विद्या, वस्त्र, यात्रा और औषधि को बल प्रदान करता है। मकर संक्रांति व मौनी अमावस्या दोनों स्नान पर्व पर गुरु पुण्ययोग व श्रवण नक्षत्र का योग है। श्रवण नक्षत्र के स्वामी विष्णु हैं।
महामारी को नियंत्रित करेंगे बृहस्पति-
ज्योतिषाचार्य डॉ. नित्य नाथ पाण्डेय के अनुसार, गुरु बृहस्पति चार प्रमुख स्नान पर्वों पर द्वादश माधव के सानिध्य में शुभता प्रदान करेंगे। साथ ही अपने प्रभाव से विश्व में व्याप्त कोरोना महामारी नियंत्रित करेंगे। ज्योतिषाचार्य उमेश शर्मा के अनुसार गुरु बृहस्पति सौम्य, शक्तिशाली और शुभकारक हैं।
संक्रांति पर पंचग्रही योग-
ज्योतिषाचार्य अवध नारायण द्विवेदी के अनुसार, संक्रांति के समय सूर्य सहित चंद्रमा, बुध, गुरु और शनि पांच ग्रही योग बन रहा है। संक्रांति का पुण्य काल दोपहर 1:50 से सूर्यास्त तक रहेगा।
धर्म संसार / शौर्यपथ / पौष मास कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को सफला एकादशी कहते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, जो व्यक्ति सफला एकादशी का व्रत रखता है, उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। सफला एकादशी का व्रत भगवान विष्णु जी के लिए रखा जाता है। एकादशी के दिन भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा की जाती है। हिंदू पंचांग के अनुसार, हर साल सफला एकादशी व्रत पौष माह कृष्ण पक्ष की एकादशी को रखा जाता है। इस साल सफला एकादशी 9 जनवरी 2021 को है।
सफला एकादशी 2021 शुभ मुहूर्त-
एकादशी तिथि प्रारम्भ - जनवरी 08, 2021 को रात 9:40 बजे
एकादशी तिथि समाप्त - जनवरी 09, 2021 को शाम 7:17 बजे तक।
सफला एकादशी 2021 व्रत विधि-
1. सफला एकादशी के दिन स्नान आदि करके सूर्यदेव को अर्घ्य दें।
2. इसके बाद व्रत-पूजन का संकल्प लें।
3. भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा करें।
4. भगवान को धूप, दीप, फल और पंचामृत आदि अर्पित करें।
5. नारियल, सुपारी, आंवला और लौंग आदि श्रीहरि को अर्पित करें।
6. अगले दिन द्वादशी पर व्रत खोलें।
7. गरीबों को दान कराएं और उन्हें दान-दक्षिणा दें।
सफला एकादशी व्रत कथा-
पद्म पुराण में वर्णित एक कथा के अनुसार, महिष्मान नाम का एक राजा था। इनका ज्येष्ठ पुत्र लुम्पक पाप कर्मों में लिप्त रहता था। इससे नाराज होकर राजा ने अपने पुत्र को देश से बाहर निकाल दिया। लुम्पक जंगल में रहने लगा।
पौष कृष्ण दशमी की रात में ठंड के कारण वह सो न सका। सुबह होते होते ठंड से लुम्पक बेहोश हो गया। आधा दिन गुजर जाने के बाद जब बेहोशी दूर हुई तब जंगल से फल इकट्ठा करने लगा। शाम में सूर्यास्त के बाद यह अपनी किस्मत को कोसते हुए भगवान को याद करने लगा। एकादशी की रात भी अपने दुखों पर विचार करते हुए लुम्पक सो न सका।
इस तरह अनजाने में ही लुम्पक से सफला एकादशी का व्रत पूरा हो गया। इस व्रत के प्रभाव से लुम्पक सुधर गया और इनके पिता ने अपना सारा राज्य लुम्पक को सौंप दिया और खुद तपस्या के लिए चले गए। काफी समय तक धर्म पूर्वक शासन करने के बाद लुम्पक भी तपस्या करने चला गया और मृत्यु के पश्चात विष्णु लोक में स्थान प्राप्त हुआ।
सेहत /शौर्यपथ / बदलते लाइफस्टाइल और खान-पान की खराब आदतों की वजह से आज हर दूसरा व्यक्ति मोटापे की समस्या से परेशान है। मोटापा कम करने के लिए लोग अपनी डाइट में बदलाव के साथ घंटों जिम में पसीना बहाने से भी परहेज नहीं करते। बावजूद इसके उनकी समस्या जस की तस बनी रहती है। ऐसे में क्या आप जानते हैं इसके पीछे आपके लाइफस्टाइल से जुड़ी कई गलतियां जिम्मेदार हो सकती हैं। आइए जानते हैं आखिर क्या हैं ये गलतियां।
कम कैलोरी का सेवन-
अक्सर लोग वजन कम करने के दौरान अपनी डाइट में से कैलोरी की मात्रा बिल्कुल खत्म कर देते हैं, ऐसा न करें। अगर आप अपना वजन कम करना चाहते हैं तो पर्याप्त मात्रा में कैलोरी का सेवन करें। कैलोरी की पर्याप्त मात्रा आपके शरीर के लिए जरूरी होती है। शोध के अनुसार कैलोरी का सेवन कम करते हुए जब व्यक्ति ज्यादा एक्सरसाइज करता है तो उसे शरीर में कमजोरी महसूस हो सकती है।
कम वसा वाला भोजन-
जो लोग वजन कम करने के लिए अपनी डाइट में से वसा की मात्रा खत्म कर देते हैं। उन्हें सेहत से जुड़े कई नकारात्मक प्रभाव झेलने पड़ सकते हैं। यही वजह है कि डाइट में वसा की कुछ मात्रा जरूर शामिल करनी चाहिए। इसके लिए आप अपनी डाइट में चीनी को शामिल कर सकते हैं जो पर्याप्त मात्रा में वसा की कमी को दूर करने में मदद कर सकता है।
भोजन का त्याग करना-
देखा जाता है कि लोग वजन कम करने के चक्कर में भोजन का त्याग करने लगते हैं। लेकिन ऐसा करने से आपके शरीर में पोषण की कमी हो सकती है, जिससे आपकी सेहत को नुकसान उठाना पड़ सकता है। सेहत से जुड़े कई शोध बताते हैं कि जो लोग आमतौर पर नाश्ता नहीं करते हैं उनके वजन पर कोई फर्क नहीं पड़ता है। रोजाना नाश्ता करने से आप लंबे समय तक ऊर्जावान बने रहने के साथ आसानी से अपना वजन भी कम कर सकते हैं।
अधिक व्यायाम करना-
वजन कम करने की इच्छा रखने वाले कई लोगों को यह लगता है कि अगर वह घंटों एक्सरसाइज करेंगे तो उनका वजन जल्द कम हो जाएगा। लेकिन ऐसा करने से आपके चयापचय पर बुरा असर पड़ सकता है। वजन कम करने की शुरुआत हमेशा साधारण व्यायाम के साथ होनी चाहिए, जिससे बिना चोट और अन्य स्वास्थ्य हानि के अपना वजन कम कर सकते हैं।
अनियमित जीवनशैली-
जो लोग वजन कम करने के दौरान अपनी डाइट पर तो कंट्रोल कर लेते हैं लेकिन शारीरिक गतिविधियों से पूरी तरह से दूर रहते हैं। आपकी यह आदत आपकी सेहत के लिए बड़ा खतरा बन सकती है। आपकी इस आदत की वजह से आप अपना वजन कम करने की जगह बढ़ा सकते हैं। वजन कम करने के लिए आपको डाइट के साथ अपनी जीवनशैली में भी कई जरूरी बदलाव करने चाहिए।
सेहत /शौर्यपथ / खाने-पीने का जैसा मजा सर्दियों में है, वैसा दूसरे मौसम में कहां! एक तरफ जहां फल-सब्जियों की भरमार होती है, वहीं दूसरी ओर लड्डू, पिन्नी, गुड़-मूंगफली, गजक, रेवड़ी जैसे मिठाई के तौर पर खाए जाने वाले खाद्य-पदार्थों की ढेरों वैराइटी मिलती हैं। सर्दी में अपने शरीर को गर्म रखने के चक्कर में हम कई बार बैलेंस डाइट को नजरअंदाज कर देते हैं और मोटापे और इससे जुड़ी समस्याओं की गिरफ्त में आ जाते हैं,ऐसेे ऐसे में स्वस्थ रहने के लिए डाइट का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। ठंड के मौसम में फलों का सेवन सबसे ज्यादा लाभदायक है।
सेब
सेब पेक्टिन फाइबर, विटामिन, मिनरल्स, फाइटोन्यूट्रिएंट्स और एंटी ऑक्सीडेंट जैसे तत्वों से भरा है, जो हमारे शरीर में एलडीएल कोलेस्ट्रॉल या संतृप्त वसा के स्तर को नियंत्रित करते हैं, हानिकारक मुक्त कणों (फ्री रेडिकल्स) के प्रभाव से बचाते हैं, संक्रमण फैलाने वाले एजेंटों को दूर रखते हैं और चयापचय क्षमता को बढ़ाते हैं। सेब शरीर में हीमोग्लोबिन और आयरन के स्तर को बढमता है और रक्त की कमी को दूर करता है।
अनार
अपने अनोखे खट्टे-मीठे स्वाद और गुणों के कारण अनार ‘एक अनार सौ बीमार‘ की उक्ति को चरितार्थ करता है। फाइटोकैमिकल्स, पॉली-फिनॉल, एंटीऑक्सीडेंट, फाइबर, आयरन, विटामिन से भरपूर अनार उच्च कोलेस्ट्रॉल, ब्लड प्रेशर, दिल के दौरे या फ्री रेडिकल्स से बचाव कर हृदय के स्वास्थ्य को बनाए रखने में मदद करता है। खून की कमी के रोगियों के लिए अनार का सेवन उपयोगी है।
अमरूद
सर्दियों में अमरूद को फलों का राजा कहा जाता है। इसमें मौजूद पौष्टिक तत्व शरीर को फिट, स्वस्थ रखने के साथ-साथ इम्यूनिटी बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यह हाइपोग्लीसेमिक ब्लडप्रेशर और कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने में फायदेमंद है। इसमें मौजूद पेक्टिन फाइबर पाचन बढ़ाने और भूख में सुधार करने में मदद करता है।
सिट्रस फल
सर्दियों में मिलने वाले संतरा, कीनू जैसे खट्टे जूसी साइट्रस फल अपनी दिनचर्या में जरूर शामिल करें। विटामिन सी, पेक्टिन फाइबर, लाइमोनीन, फाइटोकैमिकल्स से भरपूर ये फल जूस से भरपूर हैं। इनके नियमित सेवन से शरीर की प्रतिरोधक क्षमता में बढोतरी होती है, जिससे वायरल संक्रमण से होने वाले जुकाम-खांसी, फ्लू, वायरल जैसे रोगों से बचाव होता है।
अंगूर
अंगूर विटामिन, मिनरल्स, काबरेहाइड्रेट, ग्लूकोज जैसे पौष्टिक तत्वों और पोली-फिनॉल, एंटीऑक्सीडेंट, एंटी बैक्टीरियल, फाइटोन्यूट्रिएंट्स गुणों से लबरेज है। इसमें मौजूद शर्करा रक्त में आसानी से अवशोषित हो जाती है और थकान दूर कर शरीर को ऊर्जा प्रदान करती है। कोलेस्ट्रॉल कम करने में सक्षम अंगूर के सेवन से हृदय रोग का खतरा कम रहता है। यह रक्त विकारों को दूर कर क्लींजर का काम करते हैं।
लाइफस्टाइल /शौर्यपथ / आपने अक्सर हेल्थ एक्सपर्ट्स को सलाह देते हुए सुना होगा कि पूरे दिन में सिर्फ 30 मिनट की वॉकिंग आपके दिल को हेल्दी बनाए रखने के साथ मांसपेशियों में मजबूती ,दिल की बिमारी, टाइप 2 मधुमेह, ऑस्टियोपोरोसिस और कई तरह के कैंसर के खतरे को भी कम करने का काम करती है। पर क्या आप वाकई जानते हैं सेहतमंद बने रहने के लिए वॉकिंग करने का सही तरीका क्या है और किस उम्र के व्यक्ति को कैसे करनी चाहिए वॉकिंग। आइए जानते हैं।
कैसा हो वॉक का तरीका-
बच्चों से लेकर उम्र दराज व्यक्ति तक के खड़े होने से लेकर उनके वॉक करने तक के तरीके में कई बड़े बदलाव देखे जाते हैं। लेकिन क्या है इनका सही तरीका, आइए जानते हैं।
खड़े होने का तरीका-
सैर करते समय व्यक्ति को अपने खड़े होने की पोजीशन पर भी ध्यान देना चाहिए। झुककर खड़े होने से व्यक्ति की पीठ में तकलीफ बढ़ सकती है। खड़े होते समय कोशिश करें कि आप सीधे खड़े हों।
हाथों की पोजिशन-
वॉक करते समय अपने हाथों को खुला छोड़ दें। हाथ बांधकर चलने से आप वॉक का फायदा नहीं उठा सकेंगे। हाथ बांधकर चलने से आपके कंधों में परेशानी भी शुरू हो सकती है।
लक्ष्य तय करें -
हर उम्र के व्यक्ति को वॉक करते समय अपने लिए एक लक्ष्य जरुर तय करना चाहिए । रोजाना 25 से 30 मिनट की वॉक व्यक्ति को सेहतमंद बनाए रखती है।
किस उम्र में कितनी वॉक करना सही-
5 से 18 साल तक-
-5 साल से 18 साल के बीच उम्र वाले लड़कों को 16 हजार कदम चलना चाहिए। वहीं लड़कियां 13 हजार तक कदम चल सकती हैं।
-19 से 40 साल तक-
19 से 40 साल के बीच उम्र वाले पुरुष और महिलाएं एक दिन में कम से कम 13 हजार से ज्यादा कदम चलें।
40 साल से बड़े उम्र के व्यक्ति-
अगर बात 40 साल के बाद के लोगों की करें तो उनके लिए 12 हजार कदम आदर्श माने गए हैं।
50 साल के व्यक्ति-
अगर आपकी उम्र 50 साल से ज्यादा है तो रोजाना 9 हजार से 10 हजार तक कदम चलें।
60 साल से ज्यादा-
60 साल से अधिक उम्र के लोगों को स्वस्थ्य बने रहने के लिए रोजाना 7 हजार से 8 हजार कदम चलने चाहिए। लेकिन इस बात का भी ध्यान रखें कि आप सिर्फ उतना ही चलें जिससे आपको चलते समय थकान महसूस न हो।
खाना खजाना /शौर्यपथ / ठंड के मौसम तरह-तरह के लड्डू सिर्फ स्वाद के लिए ही नहीं बल्कि सेहत के लिए भी फायदेमंद हैं।आज हम आपको अजवाइन के लड्डू की रेसिपी बता रहे हैं, जो इम्युनिटी को मजबूत करने साथ उन महिलाओं के लिए बहुत फायदेमंद हैं, जो मां बनी हैं।डिलीवरी के बाद अजवाइन के लड्डू का सेवन बच्चे और मां दोनों के लिए बेहद लाभदायक है।
इन गुणों से भरपूर है अजवाइन के लड्डू
अजवाइन में आयरन, सोडियम, मैग्नीशियम, विटामिन ए और विटामिन सी पाया जाता है, जो हमारी त्वचा और शरीर दोनों के लिए फायदेमंद होता है। इसमें प्रचुर मात्रा में फाइबर भी होता है जो पाचन क्रिया को ठीक रखने में मदद करता है।
सामग्री :
अजवाइन के लड्डू बनाने के लिए 1 किलो अजवाइन पिसी हुई, डेढ़ किलो गेहूं के आटे, 250 ग्राम गोंद, 1 सूखा नारियल कटा हुआ, देसी चीनी या गुड़ और आवश्यकतानुसार देसी घी की जरूरत होती है।
अजवाइन के लड्डू ऐसे बनाएं :
गैस पर कढ़ाई रखें और उसे गर्म होने दें।
अब कढ़ाई में 1 बड़ा चम्मच घी डालें और धीमी आंच पर घी को गर्म होने दें।
इसके बाद घी में गोंद डालें और इसे अच्छी तरह से भूनने के बाद किसी खाली बर्तन में निकाल लें।
अब गर्म-गर्म ही गोंद को पीस लें।
दोबारा कढ़ाई को गर्म करके उसमें घी डालें।
अब आटा डाल दें और इसको तब तक धीमी आंच पर पकाएं जब तक कि उसमें से खुशबू न आने लगे।
फिर इसमें गोंद और पिसा हुआ नारियल डालें।
इसमें पिसी हुई अजवाइन डालकर आटे के साथ मिला दें।
ठंडा होने पर इसमें चीनी या गुड़ डाल दें
चीनी मिलाने से अजवाइन का तीखापन कम हो जाता है।
अब इस चूरमे से लड्डू बना लें।
अजवाइन के लड्डू खाने के फायदे
-अजवाइन महिलाओं को प्रसव के बाद होने वाली पीड़ा से राहत दिलाने का सबसे अच्छा उपाय है। इसमें एंटी-इंफ्लामेट्री गुण होते हैं जो प्रसव के बाद होने वाले दर्द को दूर करते हैं।
-अजवाइन मां और बच्चे दोनों की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती है।
-यह कफ और बलगम को भी ठीक करती है और सर्दी, जुकाम से बचाती है।
-अजवाइन का पानी नियमित रूप से पीने से शरीर से सारी गंदगी बाहर निकल जाती है। अजवाइन डिलीवरी के बाद शरीर को डिटॉक्सिफाई करने के गुण रखती है।
-इसमें कुछ ऐसे गुण होते हैं जो स्तनपान करवाने वाली महिलाओं के दूध को और पौष्टिक बनाते हैं।
-गर्भावस्था के बाद महिलाओं को हमेशा वजन बढ़ने की शिकायत होती है जिसे अजवाइन से कम किया जा सकता है।
-अक्सर प्रसव के बाद महिलाओं को पीठ और पैरों में दर्द की परेशानी होती है, अजवाइन खाने से इस दर्द में राहत मिलती है।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
