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खाना खजाना /शौर्यपथ / नाश्ते में पोहा खाना बेहद फायदेमंद है लेकिन अगर आप पोहे की कोई चटपटी रेसिपी ट्राई करना चाहते हैं, तो पोहा कटलेट ट्राई कर सकते हैं। आइए, जानते हैं रेसिपी-
सामग्री
पोहा- 2 कप
उबले आलू- 3
कद्दूकस किया पनीर- 1/4 कप
कद्दूकस किया गाजर- 1/4 कप
गरम मसाला पाउडर- 1/2 चम्मच
काली मिर्च पाउडर- 1/2 चम्मच
चाट मसाला पाउडर- 1 चम्मच
लाल मिर्च पाउडर- 1/2 चम्मच
बारीक कटा अदरक- 1 टुकड़ा
बारीक कटी मिर्च- 2
नीबू का रस- 1 चम्मच
मैदा- 2 चम्मच
धनिया पत्ती- 4 चम्मच
ब्रेड क्रम्ब्स- 1/2 कप
तेल-आवश्यकतानुसार
नमक- स्वादानुसार
विधि
पोहा को पानी से कुछ सेकेंड के लिए धो लें और 10 मिनट के लिए सूखने छोड़ दें। उबले आलू का छिलका छीलकर उसे अच्छी तरह से मैश कर लें। एक बरतन में मैश्ड आलू, गाजर, पनीर, नमक, काली मिर्च पाउडर, गरम मसाला पाउडर, चाट मसाला पाउडर, लाल मिर्च पाउडर, अदरक, धनिया पत्ती, हरी मिर्च और नीबू का रस डालें। मिश्रण को अच्छी तरह से मिलाएं। अब इस मिश्रण से कटलेट तैयार कर लें। एक बाउल में मैदा डालें और उसमें पानी मिलाकर पतला पेस्ट तैयार कर लें। इस पेस्ट में थोड़ा-सा नमक और काली मिर्च पाउडर भी डालें। हर कटलेट को पहले मैदा वाले इस पेस्ट में डुबोएं और उसके बाद ब्रेड क्रम्ब्स पर रोल करें। पैन गर्म करें और उसमें हल्का-सा तेल डालकर कटलेट को दोनों ओर से सुनहरा होने तक फ्राई करें। इसे धनिया-पुदीने की चटनी के साथ सर्व करें।
सेहत /शौर्यपथ / अखरोट का नाम सबसे पसंदीदा ड्राई फ्रूट्स में लिया जाता है। सेहत से जुड़े फायदों के साथ स्किन केयर के लिए भी अखरोट बेहद फायदेमंद है। आप अगर चेहरे पर नेचुरल ग्लो पाने के लिए महंगे प्रॉडक्ट्स का इस्तेमाल करते हैं, तो आप इन्हें छोड़कर अखरोट को स्किन केयर रूटीन में शामिल कर सकते हैं।आइए, जानते हैं अखरोट के फायदे-
फेसपैक बनाकर करें इस्तेमाल
एक चम्मच अखरोट का पाउडर, एक चम्मच ओलिव ऑयल, दो चम्मच गुलाब जल व आधा चम्मच शहद मिलाकर पेस्ट बना लें।
इस पैक को अपने चेहरे पर 15 मिनट के लिए लगाकर छोड़ दें।
फिर सूखने पर पानी से मुंह धो लें।
बेहतर परिणाम के लिए आप यह फेसपैक सप्ताह में दो से तीन बार लगा सकते हैं।
डार्क सर्कल के लिए
अखरोट का तेल आपकी आंखों के नीचे आई सूजन को दूर करता है और डार्क सर्कल कम करने में मदद करता है।
आप थोड़ा-सा अखरोट का तेल लें। तेल को गुनगुना करके इसे आंखों के नीचे काले घेरे वाले भाग पर लगाकर सो जाएं। फिर सुबह सामान्य तरीके से चेहरा धो लें। आप इस प्रक्रिया को रोज रात को तब तक दोहराएं, जब तक असर दिखना न शुरू हो जाए।
आंखों ने नीचे की सिलवटों को दूर करें
आप नींबू का रस, शहद, ओटमील और अखरोट का पाउडर एक साथ मिलाकर पेस्ट बना लें।
इस पेस्ट को आंखों के नीचे लगाएं और 15-20 मिनट के लिए छोड़ दें।
फिर पानी से धो लें।
इस प्रक्रिया को आप सप्ताह में तीन से चार बार दोहरा सकते हैं।
शौर्यपथ /मंचूरियन और चिली पौटेटो जैसी कई डिशेज बनाने में कॉर्न स्टार्च (कॉर्न फ्लोर) का इस्तेमाल किया जाता है।वहीं, इसका इस्तेमाल ग्रेवी को गाढ़ा करने के साथ पकौड़े को क्रिस्पी बनाने के लिए भी किया जाता है। कई लोगों को कॉर्न स्टाच और मक्के के आटे में कंफ्यूजन होती है, कॉर्न फ्लोर नाम होने की वजह से वे इसे मक्के का आटा समझ लेते हैं।ऐसे में इन दोनों में अंतर समझन बहुत जरूरी है।आज हम आपको बता रहे हैं कि आप कैसे आसान तरीके से कॉर्न फ्लोर को घर पर बना सकते हैं।आइए, जानते हैं इसका तरीका-
मक्के का आटा और कॉर्न स्टार्च में अंतर :
कुछ लोग मक्के के आटे को ही कॉर्न फ्लोर समझ लेते हैं।मक्के का आटा कॉर्नमील फ्लोर होता है जबकि कॉर्न फ्लोर मक्की का स्टार्च होता है, इसलिए इसे कॉर्न स्टार्च भी कहते हैं। कॉर्न फ्लोर बनाने के लिए पहले मक्के के दाने से उसका छिलका हटाया जाता है और फिर उसे पाउडर की तरह पीसकर तैयार किया जाता है जबकि मक्की का आटा मक्के के दानों को सुखाकर पीसकर तैयार हो जाता है। यह पीले या सफेद रंग का होता है।यह दरदरा या बारीक रूप में मिलता है जबकि कार्न फ्लोर सफेद या हल्के पीले रंग के पाउडर फार्म में मिलता है।
कॉर्न स्टार्च कैसे बनाएं :
सबसे पहले मक्के को थोड़ा पानी में डाल दें और उसे 5-6 घंटे के लिए छोड़ दें।
फिर उसे छान लें और उसमे थोड़ा सा पानी डालकर अच्छे से पीस लें.
फिर उसे किसी बर्तन में छान लें और उसे 10 मिनट के छोड़ दें।
उसके कचड़े को किसी और बर्तन में निकाल लें.
10 मिनट बाद उसे किसी पतले कपड़े से फिर छान लें.
फिर उस पानी को 15-20 मिनट के लिए छोड़ दें।
इसमें से कचरे को निकाल कर अलग रख दें।
फिर धीरे-धीरे करके पानी को गिरा दें।
फिर किसी सूखे कपड़े या टिश्यू पेपर से बचे हुए पानी को निकाल दें.
फिर इसे किसी प्लेट में निकाल लें और उसे सूखने के लिए डाल दें।
सूखने के बाद इसे मिक्सी जार में पीस लें।
हमारा कॉर्न फ्लॉर बनकर तैयार है।
इस कॉर्न फ्लोर को आप किसी शीशे के डिब्बे में रखकर तीन महीने तक इस्तेमाल कर सकते है।
खाना खजाना / शौर्यपथ /अक्सर ऐसा होता है कि ऑफिस या कॉलेज की भागदौड़ के बीच नाश्ता नहीं कर पाते, वहीं वर्किंग महिला या पुरुषों के पास भी इतना टाइम नहीं होता कि सुबह कम समय में हेल्दी नाश्ता तैयार कर सकें। ऐसे में हम आपको बता रहे हैं, झटपट बनने वाला सूजी से बना हेल्दी ब्रेकफास्ट रेसिपी-
सामग्री
-एक कप सूजी
-एक कप दही
-एक टमाटर बारीक कटा हुआ
-एक प्याज बारीक कटी हुई
-दो हरी मिर्च बारीक कटी हुई
-दो बड़ा चम्मच धनिया
-नमक स्वादनुसार
-तेल तलने के लिए
विधि
-सूजी उत्तपम बनाने के लिए सबसे पहले एक बर्तन में सूजी, दही और नमक डालकर अच्छे से मिक्स कर लें। बैटर गाढ़ा होने की वजह से थोड़ा-सा पानी भी मिलाएं और इसे इडली और डोसे के बैटर जैसा तैयार कर लें।
-बैटर में प्याज, टमाटर, गाजर, शिमला मिर्च, अदरक, हरी मिर्च, अदरक, धनिया पत्ती सभी थोड़ा-थोड़ा डालकर मिक्स कर लें और बाकी का बचाकर अलग रख लें। -मीडियम आंच में एक पैन में तेल गर्म करने के लिए रखें।
-तेल के गर्म होते ही पैन में बैटर डालें। एक मिनट बाद बाकी बची सब्जियां भी ऊपर से डाल दें और दो मिनट तक परांठे की तरह सेंक लें।
-आप इसे चटनी या कैचअप के साथ सर्व कर सकते हैं।
टिप्स /शौर्यपथ /हर व्यक्ति जीवन में तरक्की और नए अवसर चाहता है। जीवन में खुशियां और पैसा पाने के लिए लोग कठिन मेहनत भी करते हैं। लेकिन कई बार उन्हें उनकी मेहनत का फल नहीं मिलता है। सफलता के करीब आने के बाद भी असफल होना, नए अवसरों का न मिलना या फिर धन का नहीं टिकना यह वास्तु दोष के कारण भी हो सकता है। ऐसे में लोग वास्तु दोष के लिए कुछ खास तरह के उपाय करते हैं। जिनको अजमाने से जीवन में आर्थिक उन्नति के रास्ते खुल जाते हैं। जानिए चीनी शास्त्र फेंगशुई के इन खास उपायों के बारे में-
1. फेंगशुई शास्त्र में तीन टांगों वाले मेंढक को बेहद शुभ माना जाता है। कहा जाता है कि तीन टांगों वाले मेंढक जिसके मुंह में सिक्के लगे हों, उसे घर लाने से आर्थिक उन्नति होती है। इस दौरान एक बात का ध्यान रखना चाहिए कि मेंढक का मुंह घर के अंदर की ओर होना चाहिए और ना की बाहर। कहते हैं कि ऐसा करने से आपके कार्य धीरे-धीरे बनने लगते हैं।
2. तीन चीनी सिक्कों को फेंगशुई में आर्थिक संपन्नता का प्रतीक माना जाता है। कहते हैं कि इन सिक्कों को लाल डोरी में बांधकर अपने घर या दुकान के मेनगेट में बांधना शुभ होता है। कहते हैं कि ऐसा करने आर्थिक स्थिति में धीरे-धीरे सुधार होने लगता है।
3. तरक्की पाने के लिए और जीवन में खुशियों से भरने के लिए भी फेंगशुई शास्त्र में कई उपाय बताए गए हैं। कहा जाता है कि घर में सुनहरे रंग का लॉफिंग बुद्धा रखना शुभ होता है। फेंगशुई शास्त्र के अनुसार, उत्तर-पूर्व कोण में 30 डिग्री की ऊंचाई पर स्थापित करना चाहिए। लॉफिंग बुद्धा को भूलकर भी बेडरूम में नहीं रखना चाहिए। कहते हैं कि घर में लॉफिंग बुद्धा रखने से खुशहाली आती है और करियर में तरक्की मिलती है।
4. फेंगशुई के अनुसार, घर या ऑफिस में उत्तर दिशा की ओर कछुआ रखना शुभ माना जाता है। ध्यान रहे कि इसका मुंह हमेशा अंदर की ओर होना शुभ होता है। कहते हैं कि ऐसा करने से नौकरी और व्यापार संबंधी परेशानियां खत्म हो जाती हैं। इसके साथ ही शत्रुओं से भी मुक्ति मिलती है।
5. घर या ऑफिस में झाडू को हमेशा ऐसी जगह पर रखना चाहिए, जहां पर किसी दूसरे की नजर न पड़े। कहते हैं कि कहीं भी झाडू रख देने से समृद्धि में भी कमी आती है। इसलिए हमेशा झाड़ू को संभालकर रखना चाहिए।
शौर्यपथ/ मौसम और कृषि से जुड़ी कवि घाघ की कहावतें बहुत चर्चित हैं। माना जाता है कि कवि घाघ की ये कहावतें मौसम विज्ञान और कृषि पर पूरी तरह से आज भी खरी उतरती हैं। सन 1753 में जन्म कवि घाघ अकबर के राज दरबार के मौसम वैज्ञानिक थे। अभी पौष माह चल रहा है। जानिए कवि घाघ की मौसम एवं कृषि से जुड़ी ऐसी ही ज्योतिषीय भविष्यवाणियों को।
’शुक्रवार की बादरी, रही शनिश्चर छाय। कह घाघ सुन भड्डरी बिन बरसे ना जाय।।’ अर्थात शुक्रवार को आकाश में बादल हों और शनिवार तक बादल छाए रहे तो बिना बरसे नहीं जाते हैं। अर्थात बारिश होती है।
’पूस मास दशमी अधियारी। बदली घोर होय अधिकारी। सावन बदि दशमी के दिवसे। भरे मेघ चारों दिशि बरसे।।’ अर्थात पौष महीने की दशमी को बादल छाए रहे तो अगले वर्ष श्रावण कृष्ण दशमी को घनघोर वर्षा होती है।
’पानी बरसे आधे पूष, आधा गेहूं आधा फूस। अर्थात पौष मास में अमावस्या के आसपास बरसात हो तो अगले रबी के सीजन में गेहूं अधिक मात्रा में पैदा होते हैं।’ इस बार जबसे पौष मास लगा है वर्षा हो रही है। इसका अर्थ यह हुआ कि गेहूं की अगली फसल बहुत अच्छी होने वाली है।
’पूस उजेली सप्तमी, अष्टमी और नवमी जाज। मेघ होय तो जान लो अब शुभ होइहि काज।’ अर्थात पौष मास के शुक्ल पक्ष की भी सप्तमी, अष्टमी और नवमी को यदि आसमान में बादल छाए रहे तो आगे का समय बहुत अच्छा आने वाला है, धन-धान्य की कमी नहीं रहेगी। इस पौष माह में शुक्ल पक्ष की सप्तमी, अष्टमी और नवमी 20, 21 और 22 जनवरी को आएगी। अब देखना यह है कि इन तिथियों में आसमान में बादल रहेंगे या नहीं।
व्रत त्यौहार / शौर्यपथ /मकर संक्रांति को दक्षिण भारत में पोंगल के रूप में मनाया जाता है। यह किसानों का पर्व है। पोंगल दक्षिण भारत में मनाया जाने वाला प्रमुख पर्व है। पोंगल फसल की कटाई का उत्सव है। पोंगल का वास्तविक अर्थ होता है उबालना। इसका दूसरा अर्थ नया साल भी है। यह पर्व चार दिनों तक रहता है। प्रकृति को समर्पित यह त्योहार फसलों की कटाई के बाद आदि काल से मनाया जा रहा है।
इस त्योहार में पहले दिन वर्षा और अच्छी फसल के लिए भगवान इंद्रदेव की पूजा की जाती है। पोंगल की दूसरी पूजा सूर्य पूजा होती है। इसमें सूर्यदेव को चढ़ाए जाने वाले प्रसाद को सूर्य के प्रकाश में ही बनाया जाता है। तीसरे दिन भगवान शिव के बैल नंदी की पूजा की जाती है। कहते हैं शिव जी के प्रमुख गणों में से एक नंदी से एक बार कोई भूल हो गई, उस भूल के सुधार के लिए भगवान भोलेनाथ ने उन्हें बैल बनकर पृथ्वी पर मनुष्यों की सहायता करने को कहा। चौथा पोंगल कन्या पोंगल है जो काली मंदिर में धूमधाम से मनाया जाता। इसमें केवल महिलाएं ही भाग लेती हैं। इस त्योहार पर लोग भगवान से आगामी फसल के अच्छे होने की प्रार्थना करते हैं। इस त्योहार में वर्षा, धूप, सूर्य, इन्द्रदेव तथा मवेशियों की पूजा की जाती है। दक्षिण भारत में सूर्यदेव के उत्तरायण होने वाले दिन पोंगल से ही नववर्ष का आरंभ माना जाता है। इस त्योहार पर घर के बाहर रंगोली बनाई जाती है। नए वस्त्र और बर्तन खरीदे जाते हैं। बैलों और गायों के सींग रंगे जाते हैं। इस त्योहार पर गाय के दूध के उफान को बहुत महत्व दिया जाता है। नए बर्तनों में दूध उबाला जाता है। इस त्योहार पर विशेष तौर पर खीर बनाई जाती है। इस दिन मिठाई और व्यंजन तैयार किए जाते हैं। चावल, दूध, घी, शकर से भोजन तैयार कर भगवान सूर्यदेव को भोग लगाया जाता है। इस त्योहार पर भूखों को भोजन कराया जाता है और जरूरतमंदों को वस्त्र वितरण किए जाते हैं। गाय की पूजा की जाती है और पशुओं को सजा कर अच्छे पकवान खिलाए जाते हैं। यह भी मान्यता है कि इस दिन भगवान श्री कृष्ण ने लोगों को देवराज इंद्र के सम्मान में यह त्योहार मनाने की अनुमति दी। चार दिनों के इस त्योहार के अंतिम दिन कन्या पोंगल मनाया जाता है। इस दिन घर की साफ सफाई कर आम और नारियल के पत्तों से दरवाजे पर तोरण बनाया जाता है। महिलाएं इस दिन घर के मुख्य द्वार पर रंगोली बनाती हैं। इस दिन से ही तमिल महीना चिथिरई भी आरंभ होता है।
इस आलेख में दी गई जानकारियां धार्मिक आस्थाओं और लौकिक मान्यताओं पर आधारित हैं, जिसे मात्र सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर प्रस्तुत किया गया है।
शौर्यपथ / दुनिया के सबसे बड़े आध्यात्मिक माघ मेला का “मकर संक्रांति” स्नान पर्व पर श्रद्धालु कोरोना की गाइडलाइन के बीच गुरूवार को स्नान करेंगे। आधी अधूरी तैयारियों के बीच पहला स्नान पर्व मकर संक्रांति 14 जनवरी को होगा। अभी तक कहीं घाट नहीं बने तो कहीं टेंट ही नहीं लगे। जो टेंट लगे भी उसमें सारी सुविधाएं नहीं मिली हैं। अभी कई संतों को जमीन का आवंटन भी बाकी है। प्रयाग के तीर्थ पुरोहितों को जमीन का आवंटन भी नहीं हुआ है। ऐसे में माघ मेला के दौरान श्रद्धालुओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
कोरोना संक्रमण को देखते हुए मेला क्षेत्र के अन्दर सेनेटाइजशन की व्यवस्था अभी नजर नहीं आ रही है। मेला क्षेत्र में श्रद्धालु, साधु-संत बिना मास्क लगाए ही इधर-उधर भ्रमण करते देखे जा सकते हैं। मेला क्षेत्र में सामाजिक दूरी का भी घ्यान नहीं रहा जा रहा है। हालांकि मेला प्रशासन ने कल्पवास करने आने वाले श्रद्धालुओं से साथ में कोरोना टेस्ट निगेटिव रिपोर्ट साथ लाने का निर्देश पहले ही जारी कर दिया था।
मेला क्षेत्र का परेड ग्राउंड अभी पूरी तरह से खाली है। यहां पर दुकानें भी नहीं लगी हैं। दुकानों के लिए जमीन का आवंटन किया जाएगा। ऐसे में स्नान पर्व के दिन दुकाने सजना मुश्किल है। झूला और मीना बाजार भी अब तक नहीं लगा है। स्नान घाट के रूप में संगम नोज तो तैयार हो गया। हालांकि अन्य क्षेत्रों में जो घाट बनाए जा रहे हैं। गंगा नदी पर पांच पांटून पुल श्रद्धालुओं के आवागमन के लिए बना दिए गए,लेकिन सेक्टर चार और पांच में सड़कें पूरी तरह दुरुस्त नहीं हुई हैं।
जिलाधिकारी भानुचंद गोस्वामी ने मेला से संबधित अधिकारियों को स्नान पर्व से पहले आधे अधूरे काम को अतिरिक्त श्रमिक लगगाकर पूरा करने का निदेर्श दिया था। मेले में सभी काम को पूरा करने के लिए पांच जनवरी तक का समय दिया गया था ,जिसे बाद में बढ़ाकर 1० जनवरी तक किसी भी हाल में करने के निदेर्श दिये थे। बावजूद इसके अभी मेले में करीब 4० फीसदी काम बाकी पड़ा है।
धर्म संसार / शौर्यपथ / मकर संक्रांति का पर्व हर साल 14 जनवरी को मनाया जाता है। मकर संक्रांति को लेकर कई तरह की पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं। मकर संक्रांति की एक पौराणिक कथा के अनुसार, आज के दिन सूर्यदेव धनु राशि से निकल कर मकर राशि में प्रवेश करते हैं। मकर राशि का स्वामी शनि देव को माना जाता है। कहते हैं कि मकर राशि में प्रवेश कर सूर्य देव अपने पुत्र से मिलने जाते हैं।
पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार राजा सगर ने अश्वमेघ यज्ञ का अनुष्ठान किया और अपने अश्व को विश्व-विजय के लिये छोड़ दिया। इंद्र देव ने उस अश्व को छल से कपिल मुनि के आश्रम में बांध दिया। जब कपिल मुनि के आश्रम में राजासगर के साठ हजार पुत्र युद्ध के लिये पहुंचे तो कपिल मुनि ने श्राप देकर उन सबको भस्म कर दिया। राजकुमार अंशुमान, राजा सगर के पोते ने कपिल मुनि के आश्रम में जाकर विनती की और अपने बंधुओं के उद्धार का रास्ता पूछा। तब कपिल मुनि ने बाताया कि इनके उद्धार के लिये गंगा जी को धरती पर लाना होगा।
राजकुमार अंशुमान ने तय किया कि उनके वंश का कोई भी राजा चैन से नहीं रहेगा जब तक गंगा मां धरती पर नहीं आ जाती हैं। गंगा जी को धरती पर लाने के लिए राजकुमार अंशुमान ने कठिन तप किया और उसी में अपनी जान दे दी। भागीरथ राजा दिलीप के पुत्र और अंशुमान के पौत्र थे।
इसके बाद राजा भागीरथ ने घोर तपस्या करके गंगा जी को प्रसन्न किया और उन्हें धरती पर लाने के लिये मना लिया। इसके बाद भागीरथ ने भगवान शिव की तपस्या की जिससे महादेव गंगा जी को अपने जटा में रख कर, वहां से धीरे-धीरे गंगा के जल को धरती पर प्रवाहित कर सकें। भगवान शिव ने भागीरथ के कठिन तपस्या प्रसन्न होकर उन्हें इच्छित वर दिया। इसके बाद गंगा जी महादेव के जटा में समाहित होकर धरती के लिये प्रवाहित हुई। भागीरथ ने गंगा जी को रास्ता दिखाते हुए कपिल मुनि के आश्रम गये, जहां पर उनके पूर्वजों की राख उद्धार के लिये प्रतीक्षा कर रही थी।
कहते हैं कि गंगा जी के पावन जल से भागीरथ के पूर्वजों का उद्धार हुआ। उसके बाद गंगा जी सागर में मिल गया। कहा जाता है कि जिस दिन गंगा जी कपिल मुनि के आश्रम पहुंची उस दिन मकर संक्रांति का दिन था। कहते हैं कि इस कारण ही इस दिन श्रद्धालु गंगा स्नान करते हैं।
शौर्यपथ /माना जाता है कि व्यक्ति की पहचान में उसके कपड़े और जूते में महत्वपूर्ण कारक हैं, लेकिन कोई कितने भी अच्छे कपड़े पहन ले, अगर जूते ठीक नहीं है तो व्यक्ति को महत्व नहीं दिया जाता। ज्योतिष शास्त्र में मानव जीवन की धुरी हर वस्तु पर किसी ने किसी ग्रह को संबध रखती है। काल पुरुष सिद्धांत के अनुसार व्यक्ति की कुंडली का आठवां भाव पैरों के तलवों से संबंधित है और पैरों के जूते भी आठवें भाव को महत्व देते हैं। कुछ जूते दुर्भाग्य का सूचक होते हैं। इनको पहनने से व्यक्ति के जीवन में आर्थिक और कार्यक्षेत्र से संबंधित समस्याएं उत्पन्न हो जाती हैं। ऐसे जूतों के दोष के कारण कई काम बिगड़ जाते हैं। जानिए ज्योतिष की दृष्टि से जूतों का गणित।
-कभी भी उपहार में मिले हुए जूते नहीं पहनने चाहिए। इसे शनिदेव कार्य मे बाधाएं डालते हैं। जूते ना तो किसी से उपहार में लेने चाहिए और ना ही देने।
-चुराए हुए जूते कभी भी ना पहने। कई बार मंदिर और कीर्तन आदि स्थानों से जूते अथवा चप्पल की चोरी जाती हैं। चोरी करने वाले ध्यान रखें कि चोरी के जूते चप्पल पहनने से वह अपने स्वास्थ्य और धन का विनाश कर रहा है।
-उधड़े हुए अथवा फटे जूते पहनकर नौकरी ढूंढने अथवा महत्वपूर्ण कार्य के लिए न जाए, असफलता मिलेगी।
-ऑफिस या कार्यक्षेत्र में भूरे रंग के जूते पहनकर जाने से व्यक्ति के कार्यों में अक्सर बाधाएं उत्पन्न हो सकती हैं।
-चिकित्सा और लोहे से संबंधित व्यक्तियों को कभी भी सफेद जूते नहीं पहननी चाहिए।
-जल से संबंधित और आयुर्वेदिक कार्यों से जुड़े लोगों को नीले रंग के जूते नहीं पहनने चाहिए।
- कॉफी रंग के जूते बैंक कर्मचारियों और अध्ययन क्षेत्र से जुड़े हुए लोगों को नहीं पहनी चाहिए। इससे आपकी कार्यशैली में दिक्कतें बनी रहती हैं। आपके कार्य को संदेह की दृष्टि से देखा जाता है।
-अपने जूते अथवा चप्पल की पॉलिस और चमक सदैव बनी रहनी चाहिए। यह आपके व्यक्तित्व का प्रभाव दूसरे लोगों पर छोड़ती है।
- ज्योतिष और वास्तु में जूते-चप्पल (मृत चर्म) शनि राहु के कारक हैं। जब भी हम अपने बेडरूम में जूते रखते हैं तो पति-पत्नी के बीच का लगाव एवं सम्मान धीरे-धीरे कम होता जाता है।
- जो व्यक्ति बाहर से आकर अपने चप्पल, जूते, मोजे इधर-उधर फेंक देते हैं, उन्हें शत्रु बहुत परेशान करते हैं। कार्य में बाधा उत्पन्न होती हैं और उनकी कार्य योजना ठीक प्रकार से पूर्ण नहीं हो पाती।
- जूते पहनकर भोजन करने से शरीर में धीरे-धीरे नकारात्मकता आ जाती है और शरीर की पवित्रता भंग हो जाती है।
-घर में जूतों के लिए अलग स्थान रखें। कभी भी मंदिर अथवा रसोई में जूते चप्पल पहनकर न जाएं।
-रसोई में महिलाएं अक्सर काम करती हैं। रसोई के लिए अलग से प्लास्टिक चप्पल या कपड़े के जूते प्रयोग कर सकती हैं। ये जूते-चप्पल केवल रसोई में ही प्रयोग करें।
- भगवान को भोग लगाते समय अथवा खाना परोसने के समय जूते निकाल कर उचित स्थान पर रखें।
-वास्तु के अनुसार जूते-चप्पल निकालने के लिए शुभ स्थान दक्षिण, दक्षिण-पश्चिम ,उत्तर-पश्चिम अथवा पश्चिम दिशा ठीक मानी गई है। इन दिशा में उचित स्थान पर शू रैक बनाकर जूतों को उसमें ढक कर रखें। मुख्य द्वार पर या मुख्य द्वार के सामने शू रैक बनाना अच्छा नहीं होता है। जीने के कोने में बने शू रैकघर की उन्नति के लिए शुभ नहीं होते। हमें ऐसे स्थानों पर जूते-चप्पल रखने से बचना चाहिए।
सेहत / शौर्यपथ /कान में लगातार सीटी बजने की शिकायत को हल्के में न लें जनाब। यह शरीर में विटामिन-बी12 की कमी का संकेत हो सकती है। यूएस नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन में छपे एक हालिया अध्ययन में यह चेतावनी दी गई है।
शोधकर्ताओं के मुताबिक विटामिन-बी12 पानी में घुलनशील एक महत्वपूर्ण विटामिन है, जिसे ‘कोबालामिन’ के नाम से भी जाना जाता है। लाल रक्त कोशिकाओं के उत्पादन के अलावा डीएनए के निर्माण में इसकी अहम भूमिका होती है।
मस्तिष्क के सुचारू रूप से काम करने के लिए भी इसकी जरूरत पड़ती है। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ के अध्ययन में जिन 42.5 फीसदी प्रतिभागियों में ‘टिनिटस’ यानी कान में सीटी बजने या झनझनाहट की समस्या देखी गई, उनमें से सभी में विटामिन-बी12 की कमी भी नजर आई।
शौर्यपथ / मकर संक्राति को मनाने की सभी की अपनी परम्पराएं है। किसी के लिए तिल-गुड़ के बिना यह त्योहार अधूरा है, तो कहीं दाल-चावल और तिल दान किए जाते हैं। वहीं, इस दिन खिचड़ी बनानी शुभ मानी जाती है। इसके अलावा खिचड़ी दान भी करने की परम्परा है। ऐसे में क्या आप जानते हैं कि खिचड़ी क्यों मानी जाती है शुभ और सेहत से जुड़े फायदे-
खिचड़ी खाने का पौराणिक महत्व
मकर संक्रांति के दिन खिचड़ी खाने से सूर्यदेव प्रसन्न होते है। इस दिन खरीफ की फसलों चावल, चना, मूंगफली, गुड़, तिल उड़द इन चीजों से बनी सामग्री से भगवान सूर्य और शनि देव की पूजा की जाती है। मकर संक्रांति के दिन चावल और उड़द की दाल से खिचड़ी बनाकर भगवान सूर्य को भोग लगाया जाता है और इसे प्रसाद के रूप में लोग एक दूसरे के घर भेजते हैं।
-पाचन क्षमता कमजोर होने पर भी यह आहार आसानी से पच जाता है और पाचन क्रिया को दुरुस्त करता है, इसलिए बीमारी में मरीजों को इसे खिलाया जाता है, क्यों उस वक्त पाचन शक्ति कमजोर होती है।
-दाल, चावल, सब्जियों और मसालों से तैयार की गई खिचड़ी काफी स्वादिष्ट और पोषण से भरपूर होती है, जो शरीर को ऊर्जा और पोषण देती है। इसके माध्यम से एक साथ सभी पोषक तत्व प्राप्त किए जा सकते हैं।
-अक्सर कब्ज या अपच की स्थिति में खिचड़ी खाना फायदेमंद होता है और आरामदायक भी। इसे खाने के बाद पेट में अतिरिक्त भारीपन नहीं लगता और जल्दी पाचन भी हो जाता है।
-घी, दही, नींबू या अचार के साथ अलग-अलग फायदे भी देती है, जैसे घी डालकर खाने से शक्ति भी मिलती है और प्राकृतिक चिकनाई भी, दही के साथ यह कई गुना फायदेमंद होती है और नींबू से विटामिन सी के साथ अन्य फायदे देती है।
-कफ, फीवर, कमजोरी होने पर खिचड़ी खाने से शरीर को जरूरी पोषक तत्वों की प्राप्ति होती है और बॉडी जल्दी हील कर पाती है। खिचड़ी बॉडी को डिटॉक्स करने का काम भी करती है।
-अगर किसी को लूज मोशन की समस्या हो रही है तो ऐसे में छिलकेवाली मूंग दाल की खिचड़ी खानी चाहिए। यह खिचड़ी सूखी नहीं बल्कि कुछ अधिक लिक्विड वाली बनानी चाहिए। इससे लूज मोशन और पेट दर्द में तुरंत राहत मिलती है। साथ ही यह शरीर में कमजोरी भी नहीं आने देती है।
-आपका वजन तेजी से बढ़ रहा है या फिर पेट के आसपास चर्बी जमा हो रही है, तो दिन में एक बार खिचड़ी जरूर खाएं। इससे आपका वजन कंट्रोल रहने के साथ पेट की चर्बी भी घट जाएगी।
सेहत /शौर्यपथ /सर्दियों में कुछ चीजों का सेवन करना किसी जड़ी-बूटी के सेवन करने से कम नहीं है। हम आपको सर्दियों में गुड़ खाने के फायदे और इससे बनी चीजें खाने के फायदे बता चुके हैं। तिल हाई ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने में मददगार है. कई रिसर्च में यह बात सामने आई है कि तिल में पाया जाने वाला तेल हाई ब्लड प्रेशर को कम करता है और दिल पर ज्यादा भार नहीं पड़ने देता यानी दिल की बीमारी दूर करने में भी तिल मददगार है-
तिल में मौजूद पोषक तत्व
तिल में सेसमीन नाम का एन्टीऑक्सिडेंट पाया जाता है जो कैंसर कोशिकाओं को बढ़ने से रोकता है। अपनी इस खूबी की वजह से ही यह लंग कैंसर, पेट के कैंसर, ल्यूकेमिया, प्रोस्टेट कैंसर, ब्रेस्ट कैंसर होने की आशंका को कम करता है। इसके अलावा भी तिल के कई फायदे हैं।
तिल खाने के फायदे-
-शरीर में खून की मात्रा को सही बनाए रखने में भी मददगार है तिल।
-बाल और त्वचा को मजबूत और सेहतमंद रखने के लिए रोजाना तिल का सेवन बहुत ही लाभकारी माना जाता है।
-तिल में मौजूद प्रोटीन पूरे शरीर को भरपूर ताकत और एनर्जी से भर देता है. इससे मेटाबोलिज्म भी अच्छी तरह काम करता है।
-तिल में कुछ ऐसे तत्व और विटामिन पाए जाते हैं जो तनाव और डिप्रेशन को कम करने में सहायक होते हैं।
-तिल में कई तरह के लवण जैसे कैल्शिेयम, आयरन, मैग्नीशियम, जिंक और सेलेनियम होते हैं जो हृदय की मांसपेशियों को सक्रिय रूप से काम करने में मदद करते हैं।
-तिल में डाइट्री प्रोटीन और एमिनो एसिड होता है जो बच्चों की हड्डियों के विकास को बढ़ावा देता है। इसके अलावा यह मांस-पेशियों के लिए भी बहुत फायदेमंद है।
-तिल का तेल त्वचा के लिए बहुत ही फायदेमंद होता है। इसकी मदद से त्वचा को जरूरी पोषण मिलता है और इसमें नमी बरकरार रहती है।
कितनी मात्रा में खाना चाहिए तिल
तिल को ज्यादा नहीं खाना चाहिए क्योंकि यह गर्म होते हैं इसलिए आपको तिल का सेवन करने में सावधानी रखनी चाहिए। आपको रोजाना 50-70 ग्राम तक तिल का सेवन नहीं करना चाहिए। खासतौर पर महिलाओं और छोटे बच्चों को इससे भी कम मात्रा में तिल का सेवन करना चाहिए।
व्रत त्यौहार /शौर्यपथ / नाचने-गाने और खुशियां बांटने का त्योहार है लोहड़ी. यह त्योहार केवल हरियाणा, हिमाचल, दिल्ली व जम्मू -कश्मीरर तक ही सीमित नहीं रह गया है, बल्कि देश के कई और राज्यों में भी इसे मनाया जाता है वहीं, पंजाब में इस त्योकहार को लेकर अलग ही उत्सारह देखने को मिलता है। पंजाब में इस पर्व को नई फसलों से जोड़कर भी देखा जाता है। इस त्योयहार के समय गेहूं व सरसों की फसल अंतिम चरण में होती है। इस बार लोहड़ी 13 जनवरी को मनाई जाएगी। ऐसे में अगर आप अपने दोस्तों को लोहड़ी के बधाई संदेश भेजना चाहते हैं, तो नीचे लिखे मैसेज को भेज सकते हैं-
दस्तक दी, किसी ने कहा सपने लाया हूँ,
खुश रहो आप हमेशा, इतनी दुआ लाया हूँ
नाम है मेरा संदेश,
आपको हैप्पी लोहड़ी विश करने आया हूँ।
मूंगफली दी खुशबू ते गुड़ दी मिठास,
मक्की दी रोटी ते सरसों दा साग,
दिल दी खुंशी ते आपनों दा प्यार,
मुबारक होवे तुहानूं लोहड़ी दा ये त्योहार
फिर आ गई भांगड़े दी वारी,
लोहड़ी मनौन दी करो तियारी,
आग दे कोल सारे आओ,
सुंदरिए मुंदरिए जोर नाल गाओ।
इससे पहले कि लोहड़ी की शाम हो जाए,
मेरा संदेश औरों की तरह आम हो जाए,
और सभी मोबाइल नेटवर्क जाम हो जाएं,
आपको लोहड़ी की शुभकामनाएं।
मीठे गुड़ में मिल गया तिल,
उड़ी पतंग और खिल गया दिल,
आपके जीवन में हर दिन आए शुख-शांति।
wish you a very Happy Lohri
गन्ने दे रस तों चीनी दी बोरी,
फेर बनी उसतों मीठी-मीठी रेवड़ी,
रल मिल सारे खाइये तिल दे नाल,
ते मनाइये अस्सी खुशियां भरी लोहड़ी
पंजाबी भंगड़ा ते मक्खन-मलाई,
पंजाबी तड़का ते दाल-फ्राई,
तुहानू लोहड़ी दी लख-लख बधाई।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
