August 09, 2026
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    सम्पादकीय लेख / शौर्यपथ / भारत में राफेल जैसे लड़ाकू विमान का लंबे समय से चल रहा इंतजार खत्म हो गया। पांच विमानों की पहली खेप के भारत पहुंचते ही हमारी ताकत में जो इजाफा हुआ है, उससे निश्चित ही हमारी सेनाओं के मनोबल में वृद्धि हुई होगी। यह बात किसी से छिपी नहीं है कि हम रक्षा सौदों में दो दशक से ज्यादा ढिलाई की वजह से कोई भी लड़ाकू विमान खरीद नहीं पा रहे थे।
    जब 2016 में फ्रांस के साथ 36 राफेल के लिए सौदा हुआ, तब हमें भूलना नहीं चाहिए कि उसे लेकर किस तरह के विवाद हुए थे। राजनीतिक क्षेत्र में किस तरह से चर्चाएं हुई थीं। बहुत अप्रिय ढंग से आरोप-प्रत्यारोप लगे थे। संभव है, राजनीतिक विवाद न होते और रक्षा सौदों के प्रति हमारे प्रतिष्ठानों में पूरी निष्ठा व त्वरा होती, तो भारत को नए विमानों के लिए इतना लंबा इंतजार नहीं करना पड़ता।
    पिछली सदी में सुखोई विमान खरीदे गए थे, अब 23 साल बाद राफेल मिला है, तो भारत में इसके मानसिक-सामरिक महत्व को समझा जा सकता है। अव्वल तो भारतीय गगन में एक असुरक्षा का भाव आने लगा था, पुराने पड़ चुके मिग विमानों की दुखद स्थिति आए दिन रुलाने लगी थी। ऐसे विमानों को उड़ाने की जरूरत पड़ रही थी कि जिन्हें उड़ते ताबूत तक कह दिया जाता था। बेशक, अब राफेल के आने के बाद हम अपनी वायुसेना के और उज्ज्वल भविष्य की ओर देख सकेंगे। सुखोई-30 जैसे विमान अभी भी सेवारत हैं, लेकिन सैन्य जरूरतों को पूरा करने के लिए हमें राफेल या उससे भी विकसित 200 से ज्यादा विमानों की जरूरत है। और अभी तो पांच विमानों के साथ शुरुआत हुई है, अगले साल तक जब सभी 36 राफेल भारत आ जाएंगे, तो जाहिर है, देशवासियों को ज्यादा सुरक्षा का एहसास कराएंगे। राफेल का आना बड़ी खुशखबरी है, लेकिन हमें अपना पारंपरिक संयम भी नहीं खोना चाहिए। भारत ने हथियार या विमान कभी भी किसी पर हमले के लिए नहीं खरीदे हैं, हमारी एक-एक रक्षा खरीद अपने बचाव के लिए है। हमें किसी अन्य देश की जमीन नहीं चाहिए, हमें किसी पर हमला नहीं करना है, हमें केवल अपना बचाव करना है। हां, जो हमसे दुश्मनी पालना चाहते हैं, उन्हें पता होना चाहिए कि भारत ईंट का जवाब पत्थर से दे सकता है। साथ ही, इस रक्षा उपलब्धि के पक्ष या विपक्ष में किसी तरह की सियासत से बचना चाहिए।
    राफेल का आना हमारे लिए एक प्रेरणा भी है कि हम आगे के लिए और तैयार रहें। संसाधनों से भरे भारत में अब उस दौर का आगाज हो जाना चाहिए, जब हमें किसी भी देश से कोई रक्षा उपकरण खरीदने की जरूरत नहीं पड़े। अभी भारत स्वयं अगर बहुत सक्षम नहीं है, तो उसे दूसरे विकसित सहयोगी देशों के साथ मिलकर अपनी ही सीमा में रक्षा निर्माण उद्यम लगाना चाहिए। यह प्रयास शुरुआत में बहुत महंगा भले लगे, लेकिन दूरगामी रूप से भारत को इससे व्यापक मजबूती मिलेगी।
    रक्षा के मोर्चे पर कोई भी तैयारी जयघोष के साथ हो, यह जरूरी नहीं। ऐसी तैयारियों को चुपचाप अंजाम देकर परिणाम देश के सामने रख देना चाहिए। राफेल या सुखोई जैसे विमानों के नए संस्करणों पर भारत को काम करना चाहिए। हमें पुराने साथी देशों जैसे रूस को भी साथ रखना होगा। राफेल की रोशनी में उन तमाम रक्षा खरीद और निर्माण योजनाओं में तेजी आनी चाहिए, जिनसे अपना देश और मजबूत होगा।

    मेलबॉक्स / शौर्यपथ / कोरोना वायरस धीरे-धीरे पूरे देश में अपने पैर पसार चुका है। इससे राष्ट्र एकजुट होकर जरूर लड़ रहा है, लेकिन कई दूसरी समस्याएं भी अब पैदा होने लगी हैं। ऐसी ही एक समस्या है, घरेलू हिंसा। हालांकि, जब हम घरेलू हिंसा की बात करते हैं, तो हमारे सामने असहाय महिलाओं का दृश्य कौंध जाता है। लेकिन आज तस्वीर कुछ अलग है। इससे आज घर-परिवार के छोटे-बड़े सभी लोग प्रभावित हैं। अब इसके दायरे में बड़े-बुजुर्ग भी आ गए हैं। लंबे समय तक चले लॉकडाउन में घरेलू हिंसा के मामलों में चौंकाने वाली बढ़ोतरी हुई है। इसकी एक वजह बढ़ता मानसिक तनाव है, जिसके कारण घर में क्लेश बढ़ गया है। घरेलू हिंसा सदा से ही समाज के लिए अभिशाप रही है, लेकिन कोरोना काल में इसमें वृद्धि शर्मनाक है। इससे पार पाने के उपाय गंभीरता से किए जाने चाहिए।
    विकास सिंह बघेल , दिल्ली

    याद आएंगे वे दिन
    एनालॉग यानी एंटीना की सहायता से दूरदर्शन देखना अब संभव नहीं रहा। वर्षों से इसी तरह प्रसारित हो रहा दूरदर्शन का मुख्य चैनल अब अचानक बंद कर दिया गया है। इससे एक स्वर्णिम पल इतिहास बन गया। चूंकि अधिकतर लोगों के पास डिश होने की वजह से एंटीना का कम इस्तेमाल हो रहा था, इसलिए यह कदम उठाया गया है, लेकिन दूर-दराज और पहाड़ी इलाकों में अब भी साधारण एंटीना मुख्य विकल्प है। ऐसे में, एनालॉग सर्विस बंद करने की बजाय कुछ और उपाय निकाले जाने चाहिए थे। संभव हो, तो यह सेवा फिर से शुरू की जाए, ताकि एंटीना से भी लोग दूरदर्शन को देख सकें। दूरदर्शन की ताकत ही यही है कि इसकी पहुंच देश के हर घर में है, इसीलिए इसे सिर्फ डिश के माध्यम से प्रसारित किए जाने से न सिर्फ इसकी पहुंच कम होगी, बल्कि जनता की यह आवाज भी कमजोर पड़ जाएगी।
    विवेक भारद्वाज, विष्णु धाम, सहारनपुर

    रक्षा-सूत्र का बंधन
    राखी का त्योहार नजदीक है। यह पावन पर्व भाई और बहन के आपसी अटूट प्रेम को दर्शाता है, लेकिन आधुनिकता की चकाचौंध में यह त्योहार भी अपनी सार्थकता खोता दिख रहा है। दूसरे त्योहारों की तरह राखी में भी अब दिखावा ज्यादा होने लगा है। रक्षा-सूत्र का बंधन सिर्फ एक धागा नहीं, बल्कि भाई और बहन के अटूट स्नेह व विश्वास का भरोसेमंद बंधन है, जो आज के दौर में कई बार औपचारिकता का निबाह भर लगता है। दिक्कत यह है कि हमारा आपसी प्रेम-व्यवहार सिर्फ मोबाइल और ऑनलाइन संदेशों तक सीमित होता जा रहा है। एक शहर में रहकर भी हम इतने व्यस्त हो जाते हैं कि मिलने का वक्त भी कथित तौर पर नहीं निकाल पाते। इस बार हमें इस सोच से पार पाना चाहिए। आपसी स्नेह जागृत करते हुए हम रिश्तों में गुम हो चुकी मिठास को फिर से पा सकते हैं। इससे इस पावन पर्व की सार्थकता भी बनी रहेगी और रक्षा-सूत्र का मान भी बढ़ेगा।
    माधुरी शुक्ला
    सारनाथ, वाराणसी

    एप पर प्रतिबंध
    विश्व के सभी देशों को समझ लेना चाहिए कि भारत जितना नरम और शांतिप्रिय देश है, उतना ही सख्त भी है। चीन के अति-आत्मविश्वास को चूर-चूर करने के लिए हमारी सरकार ने एक और सराहनीय कदम उठाया है। जून माह में चीन के 59 एप पर पाबंदी लगाई गई थी और अब देश की संप्रभुता और सुरक्षा के लिहाज से उसके 47 अन्य एप पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। इन एप को प्रतिबंधित करके सरकार ने ‘आत्मनिर्भर भारत’ की उड़ान को और ऊंचाई दी है। कहने की आवश्यकता नहीं कि इस प्रतिबंध से भारतीय एप और नवाचार कंपनियों के लिए नए-नए मार्ग खुलेंगे, जिससे उन्हें वैश्विक स्तर पर अधिक से अधिक अपना कौशल दिखाने और कारोबार बढ़ाने का मौका मिलेगा।
    अमन जायसवाल, दिल्ली

     

    ओपिनियन / शौर्यपथ / अभी जनवरी में ही हुआवेई को दूरसंचार क्षेत्र में सीमित कामकाज की अनुमति दी गई थी, लेकिन अपने इस फैसले को अचानक से पलटते हुए ब्रिटेन ने चीन की इस कंपनी पर अब प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है। पाबंदी के तहत इस साल के अंत, यानी 31 दिसंबर से ब्रिटेन की मोबाइल-प्रदाता कंपनियां हुआवेई कंपनी से 5जी उपकरण नहीं खरीद सकेंगी, साथ ही ब्रिटिश दूरसंचार ऑपरेटर भी अपने यहां लगे सभी हुआवेई किट 2027 तक हटा लेंगे। ब्रिटेन के डिजिटल और संस्कृति मंत्री ओलिवर डाउडेन ने मई में अमेरिका द्वारा कंपनी पर लगाए गए प्रतिबंध को इसकी वजह बताया है। उनका कहना है कि चूंकि अमेरिकी पाबंदी से हुआवेई की आपूर्ति शृंखला को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है, इसलिए ब्रिटेन अब यह उम्मीद नहीं कर सकता कि कंपनी आने वाले दिनों में अपने 5जी उपकरणों की सुरक्षा की गारंटी दे सकेगी।
    ब्रिटेन के इस फैसले का अमेरिका ने तत्काल स्वागत किया है। अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने ब्रिटेन की सराहना करते हुए समान सोच रखने वाले अन्य देशों से भी बीजिंग के खिलाफ कार्रवाई करने का आह्वान किया है। दूसरी तरफ, बीजिंग ने ब्रिटेन के इस ‘आधारहीन प्रतिबंध’ का ‘कड़ा विरोध’ किया है और चेतावनी दी है कि अपनी कंपनियों के ‘जायज हितों की रक्षा के लिए चीन तमाम कदम’ उठाएगा, क्योंकि ‘किसी भी फैसले या कार्रवाई की कीमत जरूर चुकानी पड़ती है’। देखा जाए, तो ब्रिटेन की सरकार अपने फैसले की कीमत साफ-साफ समझ भी रही है, क्योंकि इस पाबंदी के बाद वहां 5जी के विस्तार में अब वक्त लगेगा। इस फैसले से उसे रणनीतिक नुकसान भी होगा, क्योंकि उससे चीन का साथ छूट सकता है। यह सब ऐसे वक्त में होगा, जब ब्रेग्जिट-बाद के दौर में अपने कारोबारी रिश्तों को बढ़ाने के लिए ब्रिटेन दुनिया की तमाम बड़ी ताकतों से रिश्ते मजबूत करना चाह रहा है।
    बहरहाल, ट्रंप प्रशासन द्वारा मई में हुआवेई पर नई पाबंदी लगाने के बाद से उसके सेमीकंडक्टर की वैश्विक आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिसके कारण ब्रिटेन में उसकी लागत बढ़ गई है। फिर, बोरिस जॉनसन सरकार को सुरक्षा समीक्षा के एक नए दौर के लिए भी जाना जाता है, जिसकी झलक राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के फैसले में दिखी और पाबंदी का यह कदम उठाया गया। ब्रिटेन-अमेरिका संबंध भी इस फैसले की एक वजह है, क्योंकि जनवरी में जब हुआवेई को ब्रिटेन में कारोबार की अनुमति दी गई थी, तब ट्रंप प्रशासन ने यह साफ कर दिया था कि लंदन के साथ वाशिंगटन के ‘विशेष रिश्ते’ की समीक्षा की जाएगी। इससे न सिर्फ दोनों देशों के बीच सुरक्षा और खुफिया सूचनाओं के आदान-प्रदान की डोर प्रभावित होती, बल्कि अमेरिका-ब्रिटेन में व्यापार समझौते को लेकर जारी बातचीत पर भी प्रतिकूल असर पड़ता। जाहिर है, ब्रिटेन का नया रुख ट्रंप प्रशासन के लिए एक बड़ी कूटनीतिक जीत है, क्योंकि अमेरिका-चीन विवाद पर तटस्थ रुख अपनाने वाले अन्य देशों को भी इसी तरह से मनाया जा सकता है।
    पिछले दो दशकों से ब्रिटेन में कारोबार कर रही हुआवेई के लिए यकीनन यह एक मुश्किल घड़ी है। इससे यूरोप में उसका कारोबार प्रभावित हो सकता है, जहां कुल वैश्विक बिक्री का करीब एक चौथाई उत्पाद वह बेचती है। फ्रांस ने भी सीमित अवधि के लिए लाइसेंस जारी करने की व्यवस्था करके हुआवेई-5जी उपकरणों के इस्तेमाल को सीमित करने का फैसला किया है। इसे भी कंपनी पर एक वास्तविक प्रतिबंध के रूप में देखा जा रहा है, हालांकि फ्रांस सरकार ने इसे सीधे-सीधे नहीं कुबूला है। जर्मनी भी हुआवेई पर अपनी निर्भरता कम कर रहा है, क्योंकि पूरे यूरोप में चीन के खिलाफ नकारात्मक माहौल बन गया है। वर्षों तक बीजिंग की जी-हुजूरी करने वाला यूरोपीय संघ भी अब उसके खिलाफ मुखर है। उसकी नाराजगी की वजह कोविड-19 के खिलाफ शुरुआत में बीजिंग द्वारा ढीला रवैया अपनाने से लेकर हांगकांग में नए राष्ट्रीय सुरक्षा कानून को लेकर यूरोप में चलाया गया भ्रामक अभियान है। अब चीन को एक ‘सार्वभौमिक दुश्मन’ के रूप में देखा जा रहा है, जो तमाम समझौतों, नियमों और संस्थानों के साथ-साथ मौजूदा वैश्विक व्यवस्था को चुनौती देने पर आमादा है।
    साफ है, जो लड़ाई अब तक वाशिंगटन अकेले लड़ता हुआ दिख रहा था, उसमें कई दूसरे राष्ट्र भी शामिल हो गए हैं। इससे युद्ध का मैदान पूरी तरह से बदल गया है। भारत की प्रतिक्रिया पर भी खूब नजर है। पिछले साल नई दिल्ली ने हुआवेई को 5जी ट्रायल में भाग लेने की अनुमति दी थी, जो कोविड-19 संक्रमण की वजह से संभव नहीं हो सका। मगर अब सीमा-विवाद और नई दिल्ली की चिंताओं के प्रति बीजिंग की बेरुखी के कारण भारत-चीन द्विपक्षीय रिश्तों का ताना-बाना पूरी तरह से बदल गया है। नई दिल्ली का सख्त रुख कायम है और संभावना यही है कि हुआवेई को शायद ही भारत में 5जी नेटवर्क लागू करने की प्रक्रिया में शामिल किया जाए। नई दिल्ली यह संकेत दे रही है कि महत्वपूर्ण निर्माण-परियोजनाओं में चीनी कंपनियों की भागीदारी को सीमित करने या रोकने का मतलब यदि आर्थिक और तकनीकी नुकसान है, तब भी भारत यह कीमत चुकाने को तैयार है। मगर बीजिंग पर भी इसका खूब असर होगा, क्योंकि वह एक ऐसे बाजार से हाथ धो लेगा, जहां आने वाले वर्षों में चीन के बाद सबसे अधिक 5जी उपभोक्ता होंगे। यूरोपीय बाजार से बाहर होने के बाद यह हुआवेई के लिए एक विनाशकारी झटका हो सकता है।
    साफ है, हुआवेई पर पाबंदी महज एक तकनीकी या आर्थिक मसला नहीं है, बल्कि कई देशों के लिए यह एक राजनीतिक फैसला है। कारोबारी और प्रौद्योगिकी रिश्ते को हथियार बनाने का चीन का फैसला ही अब उसके खिलाफ जाता दिख रहा है। कई मुल्क अब जैसे को तैसा की रणनीति आजमाने लगे हैं।
    (ये लेखक के अपने विचार हैं) हर्ष वी पंत, प्रोफेसर, किंग्स कॉलेज, लंदन,नई दिल्ली

     

    मुख्यमंत्री ने सपरिवार कौशल्या माता मंदिर में पूजा अर्चना कर प्रदेश की सुख समृद्धि की कामना की , छत्तीसगढ़ सरकार ने राम वन गमन पर्यटन परिपथ में प्रस्तावित 09 स्थलों के विकास के लिए बनाया है 137.45 करोड़ का कान्सेप्ट प्लान ,चंदखुरी मंदिर के सामने बायपास सड़क की स्वीकृति: राष्ट्रीयकृत बैंक की शाखा भी खुलेगी , पर्यटकों की सुविधा के लिए स्थलों में पेयजल, शौचालय, विद्युतीकरण, रेस्टोरेंट, पहुंच मार्ग बनाये जाएंगे , मुख्यमंत्री ने मंदिर परिसर में लगाया बेल का पौधा

       रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ में राजधानी रायपुर के समीप माता कौशल्या की जन्मभूमि चंदखुरी में शीघ्र ही भव्य मंदिर का निर्माण शुरू हो जाएगा। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आज धर्मपत्नी श्रीमती मुक्तेश्वरी बघेल और परिवार के सदस्यों के साथ चंदखुरी पहुंचकर वहां स्थित माता कौशल्या के प्राचीन मंदिर में पूजा-अर्चना की और प्रदेश की खुशहाली और समृद्धि की कामना की। उन्होंने मंदिर के सौन्दर्यीकरण और परिसर के विकास के लिए तैयार परियोजना की विस्तृत जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने कहा कि मंदिर के सौन्दर्यीकरण के दौरान मंदिर के मूलस्वरूप को यथावत रखते हुए यहां आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधाओं का विशेष रूप से ध्यान रखा जाए।


         उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ सरकार राम वन गमन पथ पर पडऩे वाले महत्वपूर्ण स्थलों को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित कर रही है। इसकी शुरूआत चंदखुरी स्थित माता कौशल्या के मंदिर के सौंदर्यीकरण कार्य के बीते 22 दिसम्बर को भूमि-पूजन के साथ कर दी गई है। भव्य मंदिर की निर्माण की कार्ययोजना में परिसर में विद्युतीकरण, तालाब का सौंदर्यीकरण, घाट निर्माण, पार्किंग, परिक्रमा पथ का विकास आदि कार्य शामिल किए गए हैं।
    मुख्यमंत्री बघेल ने कहा है कि छत्तीसगढ़ भगवान राम का ननिहाल है। यहां कण-कण में भगवान राम बसे हुए है। भगवान राम ने वनवास का बहुत सा समय यहां व्यतीत किए हैं। छत्तीसगढ़ सरकार भगवान राम के वन गमन मार्ग को पर्यटन परिपथ के रूप में विकसित कर रही है ताकि इन स्थलों को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति मिल सके। श्री बघेल ने कहा कि चंदखुरी में 15 करोड़ की लागत से सौन्दर्यीकरण का कार्य कराया जाएगा। उन्होंने इस अवसर पर यहां तालाब के बीच से होकर गुजरने वाले पुल की मजबूती के साथ ही यहां परिक्रमा पथ, सर्वसुविधायुक्त धर्मशाला और शौचालय बनाने कहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सौन्दर्यीकरण कार्य का भूमिपूजन हो गया है यहां अगस्त के तीसरे सप्ताह से निर्माण कार्य प्रारंभ हो जाएगा।


    मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर ग्रामीणों की मांग पर मंदिर के पास से बायपास सड़क की स्वीकृति प्रदान करते हुए आवश्यक कार्यवाही के निर्देश दिए। वहीं ग्राम वासियों की सहुलियत को देखते हुए चंदखुरी में राष्ट्रीयकृत बैंक की शाखा खोलने के निर्देश जिला अधिकारियों को दिए है। श्री बघेल ने इस अवसर पर मंदिर परिसर पर बेल और उनकी धर्मपत्नी ने महुआ का पौधा भी रोपा। इसके साथ ही परिसर में आवंला, पीपल, अमरूद और करंज आदि के पौधे भी लगाए गए। मुख्यमंत्री ने इन रौपे गए पौधों पर सेरीखेड़ी महिला समूह द्वारा बांस से बनाए जा रहे ट्री-गार्डो का लगवाया। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर ग्रामीणजनों से गौठान और गोधन न्याय योजना सहित गांव में उपलब्ध अन्य सुविधाओं की चर्चा की। इस अवसर पर नगरीय प्रशासन मंत्री डॉ. शिव कुमार डहरिया, जनपद पंचायत आरंग के अध्यक्ष खिलेश देवांगन, ग्राम पंचायत चंदखुरी की सरपंच श्रीमती मालती धीवर और कौशल्या माता समिति के अध्यक्ष देवेन्द्र वर्मा और ग्रामीणजन उपस्थित थे।

    अहिवारा / शौर्यपथ / अहिवारा नगर पालिका चुनाव के समय में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद के चुनाव मेेंं क्रॉस वोटिंग करने का आरोप लगा था और जांच में सही पाया गया। नगर कांग्रेस कमेटी अहिवारा के अध्यक्ष अनिल श्रीवास्तव ने छत्तीसगढ़ शासन के कैबिनेट मंत्री जगतगुरु गुरु रूद्रकुमार को चुनाव के बाद क्षेत्र में अध्यक्ष न बनने और उपाध्यक्ष न बनने पर समीक्षा की और जिन्होंने अंजाम दिया कैबिनेट मंत्री जगतगुरु रूद्र कुमार के द्वारा नगर कांग्रेस कमेटी अहिवारा के अध्यक्ष अनिल श्रीवास्तव ने अपने लेटर पैड में 3 पार्षदों के नाम लिखे गए वार्ड नंबर 8 हेमंत साहू, वार्ड नंबर 9 दुलारी भुवन साहू, वार्ड नंबर 10 स्टालिन समुएल इन सभी को निष्कासित करने के लिए मंत्री के समक्ष दस्तावेज पेश किए गए थे। उन्ही के अनुशंसा में जिला अध्यक्ष दुर्ग ग्रामीण निर्मल कोसरे के निर्देशानुसार वार्ड नंबर 10 पार्षद स्टालिन समुएल को निष्कासित पार्टी से 6 साल के लिए कर दिया गया है। आपको जानकारी हो 26 तारीख को स्टालिन जुआ के हाई प्रोफाइल में पकड़ा गए थे। यह जुआ और सट्टा कई सालों से संचालित करने में सम्मिलित थे। पकड़ आने के बाद इसमें आरोपित होने से कांग्रेस पार्टी की छवि धूमिल हुई। इस अनुशासनहीनता को देखते हुए जिला अध्यक्ष निर्मल कोसरे ने तत्परता दिखाते हुए आज इन्हें पार्टी से 6 साल के लिए निष्कासित कर दिए।

    सेहत / शौर्यपथ / डायबिटीज के मरीजों के लिए एक अच्छी खबर आई है। शोधकर्ताओं ने डायबिटीज को मात देने के लिए एक नई चिकित्सीय रणनीति विकसित की है। इससे न सिर्फ मरीजों में डायबिटीज को नियंत्रित किया जा सकेगा बल्कि उसे पनपने से भी रोका जा सकेगा।

    शोधकर्ताओं ने कहा, अग्नाशय की कोशिकाओं में विटामिन डी रिसेप्टर (वीडीआर) का स्तर संतुलित बनाए रखकर डायबिटीज को विकसित होने से रोका जा सकता है। साथ ही इस रोग के विकास के कारण होने वाली अग्नाशय कोशिकाओं की क्षति को भी रोका जा सकता है। बता दें कि अग्नाशय की कोशिकाएं इंसुलिन को संश्लेषित और स्रावित करती हैं।

    यह अध्ययन ऑटोनोमा डी बार्सिलोना यूनिवर्सिटी में साइबर्स एरिया ऑफ डायबिटीज एंड एसोसिएटेड मेटाबॉलिक डिजीज के शोधकर्ताओं द्वारा किया गया है। शोधकर्ताओं ने कहा, विटामिन डी की कमी से दोनों प्रकार के टाइप 1 और टाइप 2 डायबिटीज के पनपने का अधिक खतरा रहता है। विटामिन डी रिसेप्टर जीन में बदलाव होने से इस बीमारी का मजबूत संबंध है। हालांकि, डायबिटीज के विकास में इस विटामिन रिसेप्टर की विशिष्ट भागीदारी का कारण अब तक पता नहीं चला है।

    चूहों पर किया अध्ययन
    यह नया अध्ययन चूहों पर किया गया। इसमें उनके व्यवहार का विश्लेषण करके डायबिटीज के विकास में अग्नाशय कोशिकाओं की वीडीआर द्वारा निभाई गई भूमिका को समझने का प्रयास किया गया। शोधकर्ताओं ने टाइप 1 और टाइप 2 डायबिटीज से ग्रस्त चूहों के अग्नाशय में कम वीडीआर देखा। इसके साथ ही उन्होंने यह भी देखा कि डायबिटीज ग्रस्त चूहों की बी कोशिकाओं में वीडीआर का स्तर बढ़ाने से इस बीमारी की रोकथाम हुई।

    शोधकर्ताओं ने कहा कि वीडीआर के सही स्तर डायबिटीज के खतरे को कम कर सकता है। शोधकर्ता एलबा कैसलस ने कहा, इन परिणामों से पता चलता है कि डायबिटीज को विकसित होने से रोकने और बी कोशिकाओं को क्षति से बचाने के लिए वीडीआर के स्तर को संतुलित बनाए रखना आवश्यक हो सकता है।

     

    लाइफस्टाइल / शौर्यपथ / घरों में कैद रहने और लॉकडाउन में सीमित हुई जीवन की स्वतंत्रता ने अच्छी बौद्धिक क्षमता (आईक्यू) के बच्चों को भी बिगड़ैल बना दिया है। समय से काउंसिलिंग और माता-पिता ने ध्यान न दिया तो आने वाले समय में इनकी परेशानियां बढ़ सकती हैं।

    मनोवैज्ञानिकों की संस्था साइकोलॉजिकल टेस्टिंग एंड काउंसिलिंग सेंटर (पीटीसीसी) ने लॉकडाउन से अब तक आए ऐसे 200 मेधावियों के व्यवहार में हुए परिवर्तन का अध्ययन किया है जिनका आईक्यू 120 या इसके ऊपर था। इनमें केवल 10 फीसदी खुद अपनी समस्या लेकर आए थे जबकि 90 प्रतिशत मामलों में माता-पिता साथ लाए।

    तेजी से बढ़ रही विनाशकारी सोच-
    संस्था के निदेशक और सेवानिवृत्त मंडलीय मनोवैज्ञानिक डॉ. एल.के. सिंह के मुताबिक, उच्च बौद्धिक क्षमता वाले 60 फीसदी बच्चों की सोच डेस्ट्रक्टिव (हानिकारक, विनाशकारी) पाई गई। ये अपने माता-पिता का कहना ही नहीं मान रहे हैं। छोटी-छोटी बातों पर झगड़ा और मारपीट पर उतारू हो जाते हैं। दोपहर 12 बजे या बाद तक सोते रहते हैं। इनके पास से मोबाइल कोई नहीं हटा सकता। इसके बाद केवल नेट सर्फिंग करते हैं। गलत चीजें सीखते हैं।

    इस तरह संभव है सुधार-
    माता-पिता को चाहिए कि वह बच्चों के बीच ज्यादा से ज्यादा समय बिताएं। इनकी मनोरंजन में हिस्सेदारी बढ़ाएं। वीडियो गेम्स की जगह सीरियल देखने को कहें। इनका उत्साहवर्धन करते रहें। कोरोना से डराएं नहीं, बल्कि कहें कि जल्द खत्म हो जाएगा। दोस्तों के पास जाने की छूट दें। दोस्तों को आने से न रोकें। इन पर निगाह रखें। खुद रिश्तेदारों या परिचितों के यहां साथ लेकर जाएं। मौका मिलने पर मोबाइल की हिस्ट्री में झांकते रहें। यदि बच्चा अकेलेपन में जीना जा रहा है तो यह एक संकेत है। इसे भांपते ही मनोवैज्ञानिकों के पास ले जाएं और उसकी काउंसिलिंग कराएं।

    फैक्टस-
    - 200 बच्चों पर मनोवैज्ञानिक अध्ययन, आईक्यू लेवल 120 पार मिला।
    -20 फीसदी बच्चों में मानसिक तनाव ज्यादा पाया गया।
    -10 फीसदी ने इस दौरान अपने को और बेहतर बनाया।
    -10 फीसदी में सुधार की उम्मीद कम, अपने मन की ही करेंगे।

     

    धर्म संसार / शौर्यपथ /पेड़-पौधों में देवताओं का वास माना गया है। घर में पौधे रोपने से कई तरह के संकटों से मुक्ति मिलती है। वास्तु शास्त्र के अनुसार घर में लगाए गए पौधे भी हमारे जीवन पर प्रभाव डालते हैं। आइए जानते हैं कि किन पौधों को घर में लगाने से सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है।

    घर की छत पर गमले में तुलसी का पौधा लगाने से वास्तु दोष दूर हो जाते हैं। माना जाता है कि जिस स्थान पर तुलसी का पौधा होता है वहां भगवान विष्णु का वास होता है। घर में मनी प्लांट लगाना शुभ होता है। इसे रोपने से दांपत्य जीवन में मधुरता आती है। रसोई घर के अंदर गमलों में पुदीना, धनिया, पालक और हरी मिर्च के पौधे लगाए जा सकते हैं। हल्दी का पौधा लगाने से नकारात्मक ऊर्जा दूर रहती है। चंपा, चमेली, रात की रानी आदि को घर के बाहर लगाएं। घर में नकली पौधे नहीं लगाने चाहिए। घर की किसी दीवार पर पीपल उग आए तो उसे पूजा कर हटाते हुए गमले में लगा देना चाहिए। पीपल के पौधे की जड़ काटने की गलती न करें। पौधे की पूजा करने के बाद इसे गमले में लगाकर किसी मंदिर में रख आएं। घर में कांटेदार पौधा नहीं लगाना चाहिए। गुलाब जैसे पौधे लगाए जा सकते हैं लेकिन इसे छत पर रखें। केले का पौधा घर में लगाने से कई समस्याएं दूर होती हैं। घर के मुख्य द्वार पर केले के पौधे को न लगाएं। घर के पिछले हिस्से में लगाएं। केले के पौधे के आसपास साफ-सफाई रखें। केले के तने में लाल धागा बांधकर रखें। ऐसे पौधे जिनको काटने या छीलने पर सफेद द्रव्य निकलते हैं उनसे नकारात्मक ऊर्जा पैदा होती है। इस प्रकार के पौधे घर में नहीं लगाने चाहिए।

     

    धर्म संसार /शौर्यपथ / शास्त्रों में बताया गया है कि भक्ति-पूजा के लिए कोई समय निर्धारित नहीं है। यानी ईश्वर का स्मरण या उनकी पूजा अराधना जब चाहे की जा सकती है। हालांकि ऐसी मान्यता है कि भगवान की पूजा के लिए समय का ख्याल करना बेहद जरूरी होता है। खास तौर पर जब हम रात में भगवान की पूजा करते हैं, तो कुछ बातों का विशेष ख्याल रखना चाहिए। रात में पूजा के दौरान इन बातों का ध्यान रखने से पूजा फलदायी होती है। जानिए रात में की गई पूजा में किन बातों का रखना चाहिए ध्यान।

    शंख बजाना सही या गलत

    ऐसी मान्यता है कि रात में पूजा के समय शंख नहीं बजाना चाहिए। माना जाता है कि सूरज अस्त होने के बाद देवी-देवता सोने के लिए चले जाते हैं। ऐसे में सूर्यास्त के बाद शंख बजाने से निद्रा में बाधा आती है। इसलिए रात में पूजा के दौरान शंख बजाना अशुभ माना गया है। हालांकि दीवाली और जन्माष्टमी जैसी कुछ अवसरों पर शंख बजाना अशुभ नहीं माना गया है।

    न करें सूर्य भगवान की पूजा

    सूर्य भगवान को दिन का देवता माना जाता है। इसलिए रात्रि की पूजा में भगवान सूर्य की पूजा करना वर्जित माना गया है।


    तुलसी का प्रयोग

    ऐसी मान्यता है कि तुलसी के पत्ते के बिना पूजा अधूरी होती है। लेकिन रात में कभी भी तुलसी का पत्ता नहीं तोड़ना चाहिए। माना जाता है कि तुलसी माता नाराज हो जाती हैं। इसलिए सूर्यास्त से पहले ही तुलसी का पत्ता तोड़कर रख लेना चाहिए।


    दूर्वा का इस्तेमाल

    हिंदू पुराणों के मुताबिक, रात में वनस्पतियों को तोड़ना अशुभ होता है। लेकिन गणेश जी को दूर्वा प्रिय है। ऐसे में सूर्यास्त से पहले दूर्वा को तोड़कर रख लेना चाहिए।

     

    लाइफस्टाइल / शौर्यपथ / जीवन में सफलता हासिल करने के लिए व्यक्ति के भीतर मेहनत और लगन के साथ आत्मविश्वास का गुण भी मौजूद होना बेहद जरूरी होता है। आत्मविश्वास के बिना व्यक्ति का जीवन ऐसे फूल की तरह होता है जिसमें खुशबू नहीं होती है। दुनियाभर में मौजूद सभी सफल व्यक्तियों में आत्मविश्वास का यह गुण देखा जा सकता है। आइए जानते हैं सफलता पाने और आत्मविश्वास बढ़ाने के क्या हैं वो 5 सक्सेस मंत्र।

    नकारात्मक विचारों से रहें दूर-
    नकारात्मक विचार व्यक्ति को हमेशा आगे बढ़ने से रोकते हैं। जीवन में आगे बढ़ने के लिए हमेशा खुद पर विश्वास रखते हुए चुनौती भरे कामों को भी करने के लिए आगे बढ़ें। ऐसे लोग और विचार जो मन में किसी भी तरह की नेगेटिविटी को जन्म देते हैं उनसे दूर रहें।

    अपने हुनर को पहचानें-
    खुद पर विश्वास और अपने हुनर को पहचानते हुए जीवन में मिलने वाली हर चुनौती को स्वीकार करते हुए अपने लक्ष्य की तरफ आगे बढ़ते जाएं।

    कंफर्ट जोन से निकलें बाहर-
    अक्सर जब व्यक्ति को कोई नया काम सौंप दिया जाता है तो वो थोड़ा घबरा जाता है। लेकिन आप चुनौतियां स्वीकार करना सीखें और जीवन में आगे बढ़ें। जैसे ही आप कुछ नया करना शुरू करेंगे आपके अंदर आत्मविश्वास दिखने लगेगा।

    फैसले लेने में ज्यादा देर न करें-
    आज के समय में जब जिंदगी बेहद व्यस्त हो गई है तो लोगों को अच्छे अवसरों के लिए सोचने समझने के लिए मौके और समय बेहद कम मिलता है। इसलिए सफलता पाने के लिए जल्द से जल्द सही फैसले लेने की क्षमता को खुद के भीतर विकसित करें। जब आप गंभीर फैसले लेने लगेंगे तो वहीं से आप में आत्मविश्वास आना भी शुरू हो जाएगा।

    आत्मविश्वासी लोगों को बनाएं अपना साथी-
    अगर आपने ऐसे लोगों को अपना दोस्त बनाया हुआ है जिनमें आत्मविश्वासी नहीं हैं तो आप जीवन में कभी भी सफल नहीं हो सकते हैं। सफलता पाने के लिए ऐसे लोगों से मिलना शुरू करें जो आपको अपने कामों से प्रभावित करने वाले हों।

     

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