August 09, 2026
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    दुर्ग / शौर्यपथ / यूजीसी की नई गाइड लाइन ने नियमित छात्र-छात्राओं की नींद उड़ा दी है। वहीं स्वाध्यायी परीक्षार्थियों के उलझन का भी कोई निवारण नहीं हो पा रहा है। महाविद्यालयीन छात्र-छात्राओं के लिए कोरोना महामारी एक तरह से जी का जंजाल बन गई है। छात्र-छात्राएं परीक्षा को लेकर कश्मकश भरे दौर का सामना करने मजबूर हो गये है। कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच जान बचाने की कवायद के साथ छात्र-छात्राओं को अपनी परीक्षा को लेकर बनी असमंजस्य भरी स्थिति ने बेचैन कर डाला है। ऐसी परिस्थितियों का सामना न केवल महाविद्यालयीन नियमित बल्कि स्वाध्यायी परीक्षार्थियों को भी करना पड़ रहा है। खासकर यूजीसी की नई गाइड लाइन जारी होने के बाद राज्य सरकार के आदेश पर जनरलप्रमोशन पा चुके प्रथम व द्वितीय वर्ष के नियमित छात्र-छात्राओं की बेचैनी बढ़ सी गई है।
    कोरोना संक्रमण को देखते हुए महाविद्यालयीन परीक्षाएं आयोजित नहीं की जा सकी है। छात्र संगठनों की मांग पर राज्य सरकार ने प्रथम व द्वितीय वर्ष के छात्र-छात्राओं को बिना परीक्षा के लिए प्रमोशन दे दिया है। इस बीच यूजीसी ने आगामी सितंबर माह में महाविद्यालयीन परीक्षा आयोजित करने का निर्देश विश्व विद्यालयों को देकर जनरल प्रमोशन पा चुके प्रथम व द्वितीय वर्ष के छात्र-छात्राओं को उलझन में डाल दिया है।
    राज्य शासन ने अंतिम वर्ष के छात्र-छात्राओं को जनरल प्रमोशन दिए जाने की मांग पर फिलहाल कोई निर्णय नहीं लिया है। ऐसे में यूजीसी की नई गाइड लाइन के आधार पर सितंबर माह में अंतिम वर्ष के लिए परीक्षाएं आयोजित की जा सकती है। फिलहाल कोरोना संक्रमण को देखते हुए सभी महाविद्यालयों में ताला लटक रहा है और छात्र-छात्राओं की पढ़ाई ऑनलाइन हो रही है। लेकिन कोरोना संक्रमण के मामले जिस गति से बढ़ते चले जा रहे हैं उससे सितंबर में परीक्षा आयोजित किए जाने को लेकर भी संशय की स्थिति बनी हुई है। परीक्षाएं होगी भी या नहीं, इस पर कुहांसा बने रहने से छात्र-छात्राओं में बनी असमंजस्य की स्थिति का नकारात्मक असर उनके तैयारी पर होने की संभावना से इंकार नहीं किया जा रहा है।
    यहां पर यह बताना भी लाजिमी होगा कि महाविद्यालय की स्वाध्यायी परीक्षार्थियों को लेकर अब तक कोई गाइड लाइन जारी नहीं किया गया है। राज्य शासन के आदेश पर प्रथम व द्वितीय वर्ष के नियमित छात्र-छात्राओं को तो जनरल प्रमोशन दे दिया गया है। लेकिन इस स्तर की परीक्षा स्वाध्यायी परीक्षार्थी के रूप में देने की तैयारी में जुटे छात्र-छात्राओं के लिए कोई गाइड लाइन जारी नहीं किए जाने से उनकी दिन का चैन और रातों की नींद उड़ी हुई है।
    परीक्षा कराये जाने के यूजीसी के आदेश को जलाया एनएसयूआई ने
    एनएसयूआई प्रदेश अध्यक्ष आकाश शर्मा के आह्वान पर दुर्ग जि़ला अध्यक्ष आदित्य सिंह के निर्देश अनुसार यूजीसी द्वारा छात्रों की परीक्षा करवाये जाने के निर्देश पर पूर्व एसवीटीयू अध्यक्ष एवं प्रदेश सचिव एनएसयूआई आशीष यादव के नेतृत्व में स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय दुर्ग में यूजीसी के निर्देश की प्रति जलाकर विरोध प्रदर्शन किया गया। एनएसयूआई के आशीष यादव ने बताया कि देश भर में कोरोना संक्रमण थन नहीं रहा है और केंद्र सरकार के इशारे पर यूजीसी ने परीक्षा आयोजित करने के निर्देश दे दिए है जो कि के तानाशाही फरमान है। इस समय में परीक्षा आयोजित करना किसी भी तरह से संभव नहीं है और अगर ऐसा होता है तो छात्रों को कोरोना का भय बना रहेगा जिससे उनके रिज़ल्ट और स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ सकता है। इस वजह से एनएसयूआई प्रदेश भर में आज यूजीसी के तुग़लकी फरमान का विरोध कर प्रतियाँ जलाकर विरोध कर रही है और परीक्षाएं नहीं आयोजित कराने की मांग करती है। पूर्व में एनएसयूआई की मांग पर राज्य सरकार द्वारा इस महामारी संकट को देखते हुए प्रथम एवं द्वितीय वर्ष के छात्रों को जनरल प्रमोशन दे दिया गया है। अंतिम वर्ष के छात्रों को भी प्रमोशन देने की मांग यूजीसी और केंद्र सरकार से लगतार की जा रही है।
    दसवी और बारहवी के छात्र भी उलझन में
    ऐसा नहीं कि कोरोना के चलते सिर्फ महाविद्यालयीन छात्र-छात्राएं परेशान हैं, बल्कि दसवीं और बारहवीं की परीक्षा उत्तीर्ण करने वालों में भी बेचैनी का आलम है। इनकी उलझन आगे की पढ़ाई को लेकर है। दरअसल अभी तक पीईटी, पीएमटी और पीपीटी जैसी प्रवेश परीक्षाओं का आयोजन नहीं किया जा सका है। इन परीक्षाओं में प्राप्त रंैक के आधार पर प्रदेश के इंजीनियरिंग, मेडिकल व पॉलिटेक्निक कालेज में प्रवेश की पात्रता हासिल होती है। अखिल भातीय स्तर पर भी उच्च शिक्षा के विभिन्न संस्थानों में प्रवेश की पात्रता के लिए परीक्षाएं आयोजित होती है। लेकिन इस बार कोरोना के चलते कुछ परीक्षाओं के आयोजन में खलल पड़ा है। दसवीं-बारहवीं की छत्तीसगढ़ व केन्द्रीय बोर्ड के परिणाम घोषित हो चुके हैं। इसमें सफल छात्र-छात्राएं आगे की पढ़ाई को लेकर उलझन भरे दौर का सामना कर रहे हैं। यही स्थिति उनके पालकों की भी बनी हुई है।

         दुर्ग / शौर्यपथ / कुछ साल पहले तक कहा जा रहा था कि माइनिंग की टफ जॉब लड़कियों के बस की बात नहीं। इस मिथ्या को दरकिनार करते हुए छात्राओं के हक में बड़ा फैसला ले लिया गया है। माइनिंग इंजीनियरिंग में अब छात्राएं भी प्रवेश ले सकेंगी। प्रदेश के 2 सरकारी व 4 निजी इंजीनियरिंग कॉलेजों में माइनिंग की पढ़ाई अब छात्राएं भी कर सकेंगी, ऐसे ही पॉलीटेक्निक कॉलेजों में भी उन्हें प्रवेश मिलेगा। छत्तीसगढ़ माइनिंग की दृष्टि से अलग पहचान रखता है। खदानों के भीतर पहुंचकर इंजीनियरिंग करने से पहले तक लड़कियों को रोककर रखा गया था। उनको माइनिंग में नौकरी तो मिलती थी, लेकिन टेबल जॉब ही दिए जाते थे। अब लड़कियां खदानों से निकलने वाले प्राकृतिक संपदाओं में भी अपनी रूचि दिखाएंगी।
    अध्यादेश में सिर्फ लडक़ों के प्रवेश का था नियम
       पहले तक कोई भी छात्रा माइनिंग के लिए एप्लाई नहीं सकती थी। माइनिंग इंजीनियरिंग के लिए बनाए गए अध्यादेश में ही इनको जगह नहीं दी गई थी, लेकिन बाद में तकनीकी शिक्षा निदेशालय ने इसमें संशोधन कराया है। लड़कियों के लिए यह क्षेत्र सुरक्षित नहीं माना गया था। पिछले कुछ साल में देश व प्रदेश में कई खानें नई शुरू हुई हैं, जिनमें नौकरियों के लिए सिर्फ लडक़ों का एकाधिकार था, लेकिन इस साल से अब लड़कियां भी इसमें हाथ आजमाएंगी।
    ये हैं माइनिंग के टॉप रिक्रूटर्स
       अडानी माइनिंग , एरसेलर मित्तल , भारतीय उपक्रम कंपनिया, कोल इंडिया लिमिटेड, दामोदर वैली कॉर्पोरेशन, एस्सेल माइनिंग एंड इंडस्ट्रीज, हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड, एमएमटीसी लिमिटेड, यूरेनियम कॉपोर्रेशन ऑफ इंडिया, डीआडीओ,


    इंजीनियरिंग और पॉलीटेक्निक में माइनिंग के लिए छात्राएं भी पात्र होंगी। नियम में संसोधन हुए हैं। राज्य शासन ने इसकी मंजूरी दी है।
    एके गर्ग, ज्वाइंट डायरेक्टर, डीटीई


    माइनिंग में शानदार कॅरियर की संभावना है। प्रदेश प्राकृतिक संपदाओं से धनी है। ऐसे में माइनिंग इंजीनियरिंग में बड़े मौके मिलना तय है। युवाओं के लिए यह अच्छा विकल्प है।
    सोनल रूंगटा, डायरेक्टर, संतोष रूंगटा ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूट

    भिलाई / शौर्यपथ  / देश के टॉप इंजीनियरिंग कॉलेजों में बड़े शहरों की मोनोपली अब खत्म होती जा रही है। छोटे शहर के कॉलेज तेजी से अपना मुकाम बना रहे हैं। बखत साबित कर रहे हैं। इसी कड़ी में इंडिया टुडे ग्रुप ने एमडीआरए के साथ मिलकर 14 विषयों के 1302 कॉलेजों का सर्वे किया है। जिसमें कॉलेजों की खूबियां, फीस स्ट्रक्चर, इंफ्रास्ट्रक्चर, रिचर्स, बिजनेस इन्क्यूबेशन, प्लेसमेंट जैसे पहलूओं को बारीकी से परखने के बाद सभी की रैंकिंग तय की गई। खुशी की बात यह है कि प्रदेश के संतोष रूंगटा ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस को रैंकिंग में टॉप-100 कॉलेजों के बीच 21वां स्थान दिया गया है। यही नहीं वेस्टर्न रीजन में ग्रुप ने तीसरा और देश के सबसे तेज उभरते इंजीनियरिंग कॉलेजों की सूची में 6वां पायदान मिला है। रूंगटा ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के डायरेक्टर सोनल रूंगटा ने बताया कि एमडीआरए देश की एक प्रसिद्ध सर्वे एजेंसी है, जो सरकारी और गैर सरकारी विभागों के लिए सर्वे का कार्य करती है। बुधवार को सभी कॉलेजों की रैंकिंग जारी हुई तो छत्तीसगढ़ का मान एक बार फिर बढ़ गया। इस काबिलियत को तरजीह देते हुए इंडिया टुडे ग्रुप ने अपनी प्रसिद्ध मैग्जीन में संतोष रूंगटा ग्रुप को पहले पेज पर प्रमुखता से प्रकाशित किया है। बता दें कि बीते दो साल से इस रैंकिंग में संतोष रूंगटा ग्रुप बेहतरीन प्रदर्शन करता आ रहा है। इस कामयाबी पर संस्थान के चेयरमैन संतोष रूंगटा और डायरेक्टर टेक्निकल सौरभ रूंगटा से खुशी जाहिर की है। 
    एनआईआरएफ में पाया मुकाम 
    हाल ही में मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने भी देशभर के सभी तकनीकी व गैर तकनीकी कॉलेजों की रैंकिंग जारी की है, जिसमें संतोष रूंगटा कॉलेज ऑफ फार्मास्युटिकल साइंसेस एंड रिसर्च ने कीर्तिमान रचा। देश के टॉप-100 फार्मा कॉलेजों में अपनी जगह बनाई। छत्तीसगढ़ का यह इकलौता फार्मा कॉलेज रहा, जिसने देश में नाम कमाया। 
    इस तरह हुआ एमडीआरए सर्वे
    एमडीआरए ने यह सर्वे नवंबर 2019 से जून 2020 के बीच किया। कोविड महामारी के बीच जब तालीम हासिल करने के तरीके बदल रहे हैं, उस दौर में स्टूडेंट्स को सही संस्थान के चुनाव में मदद करने के लिए लिहाज से यह सर्वे किया गया। बीते साल के सर्वे में देश के 1206 कॉलेज शामिल हुए थे, जो इस साल बढकऱ 1302 हो गए। एमडीआरए ने सिर्फ इंजीनियरिंग कॉलेजों का ही सर्वे नहीं किया, बल्कि आट्र्स, साइंस, कॉमर्स, मेडिकल, डेंटल, बीबीए, बीसीए, सामाजिक कार्य और फैशन डिजाइनिंग को भी इस दायरे में रखा। 

    दुर्ग । शौर्यपथ । हिंदुओ के लिए सावन मास का विशिष्ट स्थान होता है । सावन मास में भोलेनाथ के दर्शन करने से कई पीड़ाएँ दूर होती है सुख शांति बनी रहती है । मानता है कि सावन मास में नाग नागिन प्रणय के दर्शन से भी लाभ मिलता है । सनातनी धर्म मे नाग नागिन का स्थान उत्तम रूप में माना जाता है । ऐसे ही सावन मास में भिलाई के सेक्टर 8 में नाग नागिन के जोड़े की प्रणय लीला का छोटा सा वीडियो एक मित्र ने भेजा । वीडियो भेजने वाले मित्र के अनुसार वीडियो हाल का ही लगता है हो सकता हो पुराना भी हो किन्तु प्रणय लीला के दृश्य वास्तविक है । जिसे देखने मात्र से रोमांच की अभिभूति होती है साथ ही धर्म के प्रति विश्वास जागृत होता है ।

    *दुर्ग पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी पहुंचे शहीद के ग्राम पाहन्दा, किया शहीद की माता और उनके बड़े भाई का सम्मान*

     

    दुर्ग । शौर्यपथ । पुलिस अधीक्षक महोदय दुर्ग प्रशांत ठाकुर के मार्गदर्शन में वीर शहीदों की सम्मान की परंपरा का निर्वहन करते हुए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ग्रामीण लखन पटले एवं पुलिस अनुविभागीय अधिकारी पाटन आकाश राव गिरेपुंजे आज थाना रानीतराई क्षेत्र में ग्राम पाहन्दा में निवासरत शहीद मनोज वर्मा के परिजनों से मुलाकात की। आज ही के दिन 12 जुलाई 2009 को राजनांदगांव के मानपुर में पुलिस नक्सली मुठभेड़ मे राजनांदगांव के तत्कालीन पुलिस अधीक्षक श्री विनोद चौबे समेत पुलिस विभाग के 29 वीर सपूत शहीद हुए थे। ग्राम पाहन्दा निवासी शहीद मनोज वर्मा उसी घटना में शहीद हुए थे।

      उनकी शहादत को अक्षुण्ण रखने आज शहीद के निज निवास ग्राम पाहन्दा जाकर उनकी माताजी और उनके बड़े भाई से सौजन्य भेंट की गई तथा उन्हें सम्मानित किया गया साथ ही ग्राम में निर्मित शहीद की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर उनकी शहादत को याद किया गया। थाना प्रभारी रानीतराई निरीक्षक सीताराम ध्रुव उप निरीक्षक दुर्गेश वर्मा समेत थाना रानीतराई का समस्त स्टाफ इस अवसर पर उपस्थित रहा

    गेजेट्स /शौर्यपथ / लॉकडाउन को दौरान कई लोग समय काटने के लिए अपने दोस्तों से बात-चीत करते रहते हैं और अगर आपको लगता है कि कुछ बातों को आप अपनें परिजन या भाई-बहनों से छिपाना चाहते हैं तो उसके लिए एक एप का इस्तेमाल कर सकते हैं, जो आपकी स्क्रीन पर लिखे टेक्स्ट को दूसरों को पढ़ने से रोकता है।

    गूगल प्लेस्टोर पर मौजूद MaskChat - Hides Whatsapp Chat एक शानदार एंड्रॉयड एप है जिसे यूजर की चैटिंग को प्राइवेट रखने के लिए बनाया गया है। जब आप अपने स्मार्टफोन पर प्राइवेट चैट करते हैं, तब यह एप आपके चैट के उपर की स्क्रीन को डिजिटल पर्दे से छिपा देता हैं। इससे आपके आसपास के झांकने वाले पड़ोसी से आपके मैसेज प्राइवेट रखने में मदद मिलती हैं।

    अन्य चैटिंग एप के लिए भी कारगर
    MaskChat - Hides Whatsapp Chat एप सिर्फ व्हाट्सएप तक ही सीमित नहीं है बल्कि इसका इस्तेमाल फेसबुक मैसेंजर, वीचैट,हाइक और स्नैपचेट के लिए भी किया जा सकता है। इसके साथ ही पासवर्ड टाइप करते समय या बैंक की इनफॉर्मेशन टाइप करते समय अपनी स्क्रीन को हाइड करने के लिए इसका इस्तेमाल कर सकते हैं।

    कैसे करें इस्तेमाल
    इस एप को डाउनलोड करने के बाद यूजर को स्क्रीन पर एक फ्लोटिंग मास्क चैट आइकॉन दिखाई देगा, जिस स्क्रीन को आप दूसरों से हाइड करना चाहते हैं, उस स्क्रीन पर इस आइकॉन को ऊपर से नीचे की ओर ड्रैग करें। अब एक डिजिटल पर्दा नीचे आ जाएगा, जो आपकी स्क्रीन को छिपा देगा और आप किसी भी शर्मिंदा पलों से बच सकते है जब आपके माता-पिता या बड़े आपके आसपास होते हैं।

    पर्दे की बढ़ा सकते हैं डार्कनेस
    इस एप में कंपनी की तरफ से दिए गए पर्दे की मोटाई औसतन होती है, जो आपको कम लग सकती है। इसके लिए आप पर्दे के दाईं ओर दिए गए तीन लाइन वाले विकल्प पर क्लिक कर सकते हैं। इससे स्क्रीन के बीच में तीन नए विकल्प आएंगे। उनमें से बीच वाले विकल्प की मदद से आप पर्दे की ब्राइटनेस को नियंत्रित कर सकते हैं। बंद करने के लिए क्रॉस आइकॉन पर क्लिक कर आप पर्दे को क्लोज कर सकते हैं, लेकिन फ्लोटिंग मास्केचैट आइकॉन को पीछे छोड़ देगा। गियर आइकॉन पर टैप कर आप थीम को बदल भी सकते हैं। थीम को सिलेक्ट करने के बाद उसके नीचें के Apply theme बटन पर टैप कर अप्लाई करें।

    धर्म संसार / शौर्यपथ / श्रावण गणेश चतुर्थी व्रत है। गणेश जी का व्रत करने वाले यह ध्यान रखें कि कृष्ण पक्ष में चतुर्थी रात में चंद्रोदय के समय रहनी चाहिए और शुक्लपक्ष में मध्याह्न में। इसमें उदया तिथि नहीं ली जाती है। हां, तृतीया के साथ चतुर्थी ले सकते हैं, लेकिन चतुर्थी के साथ पंचमी तिथि नहीं होनी चाहिए। समस्त देवी-देवताओं में प्रथम पूज्य गणेश जी की लीलाएं अत्यंत प्रसिद्ध हैं। उन्होंने ही माता-पिता को सर्वाधिक प्रतिष्ठा प्रदान की।

    दूर्वा गणेश जी को उसी तरह प्रिय है, जिस तरह से शिवजी को बेलपत्र और नारायण को तुलसी। गणेश विवेक हैं। विद्यावरिधि बुद्धिविधाता हैं। असल में जिसके पास विवेक होगा, उसी को सनातन धर्म के अनुसार आदिशक्ति दुर्गा, सूर्य, शिव और श्री हरि आदि पंचदेवों की अक्षुण्ण ऊर्जा प्राप्त होगी। गणेश हैं, तभी तो सृष्टि रची जा सकी। ब्रह्मा जी ने सृष्टि रचने से पहले उनकी पूजा की। विघ्न का डर तो रहा ही होगा, पर सकारात्मक ऊर्जा, विवेक संपन्नता की इच्छा भी रही होगी। इसलिए जहां गणेश हैं, वहीं समस्त देवी-देवता विराजमान हैं।

    कैसे करें गणेश चतुर्थी व्रत-
    लाल रंग के वस्त्र गणेश जी को पहनकर उन्हें बेलपत्र, अपामार्ग, शमीपत्र, दूर्वा अपर्ण करना चाहिए। धन की अच्छी स्थिति होने पर 21 लड्डू , 21 दूब, जामुन आदि के साथ फल, पंचमेवा, पान आदि तो होना ही चाहिए। 10 लड्डूओं का दान करना चाहिए। आरती आदि करके 'गणेश्वरगणाध्यक्ष गौरीपुत्र गजानन। व्रतं संपूर्णता यातु त्वत्प्रसादादिभानन।।' श्लोक का उच्चारण करते हुए प्रार्थना करें। गणेश चतुर्थी का व्रत करने वाले को उदय हुए चंद्रमा, श्री गणेश और चतुर्थी माता को गंध, अक्षत आदि के साथ अध्र्य अवश्य देना चाहिए। इसके बाद मीठा भोजन कर सकते हैं।

    गणेश चतुर्थी व्रत का महत्व-
    इस श्रावण कृष्ण चतुर्थी व्रत के बारे में कहा जाता है कि माता पार्वती जब शिव जी को पति के रूप में पाने के लिए तप कर रही थीं और शिवजी प्रस्न्न नहीं हो रहे थे, तब उन्होंने यह व्रत किया। व्रत करने के पश्चात उनका शिव से विवाह संपन्न हुआ। हनुमान ने सीता की खोज में जाने पर यह व्रत किया। रावण को जब राजा बलि ने पकड़ कर कैद कर लिया, तब रावण ने यह व्रत किया था। गौतम की पत्नी अहिल्या ने भी इस व्रत को किया था।

    गणेश चतुर्थी व्रत संकटों से बचाता है-
    यह व्रत कम से कम एक या तीन वर्ष करें। जिनका विवाह नहीं हो पा रहा है, उन्हें तो यह व्रत अवश्य करना चाहिए। शनि की साढे साती से पीड़ित राशियों-धनु, मकर, कुंभ और शनि की ढैया वाली राशियों -मिथुन और तुला वाले लोगों को भी यह व्रत संकटों से बचाता है।

     

    लाइफस्टाइल / शौर्यपथ / तपती गर्मी के बाद बारिश का मौसम तन और मन दोनों को सुकून देता है। लेकिन मानसून का मजा तब किरकिरा हो जाता है जब इस समय घरों में सीलन, फंगस और तरह-तरह के इंफेक्शन लोगों के लिए परेशानी का सबब बन जाते हैं। इस समय लोग वैसे ही कोरोना महामारी की वजह से बेहद डरे हुए हैं। ऐसे में खुद को सेहतमंद रखने के साथ अपने घर को भी संक्रमणमुक्त रखना बेहद जरूरी है। तो आइए जानते हैं आखिर कैसे बारिश के मौसम में अपने घर को सीलन और फंगस से रखें दूर।

    क्यों होती है घरों में सीलन-
    बरसात के मौसम में कीटाणु और सूक्ष्मजीव की संख्या तेजी से बढ़ने लगती है। इसका मुख्य कारण थर्मल इंसुलेशन न होना, साफ-सफाई की कमी, घर में धूप-हवा का ठीक से न आना सीलन और नमी पैदा करता है। जिससे फंगस की समस्या भी देखने को मिलती है।

    सेहत को नुकसान-
    घर में सीलन होने की वजह से अल्टरनारिया, एस्परजिलस, पेनिसिलियम और क्लोडोस्पोलियम जैसी फंगल प्रजातियां पनपने लगती हैं। जिससे व्यक्ति को दमा, एलर्जी, डर्मिटाइटिस और राइनाइटिस के संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।

    सीलन और फंगस से घर को ऐसे रखें दूर-
    -सीलन की समस्या मानसून में अक्सर ज्यादा देखने को मिलती है। ऐसे में बाथरूम, टॉयलेट, बंद पड़े कमरे में, जहां फंगस, सीलन और कीट आसानी से पनप सकते हैं कीटनाशक छिड़काव और फ्यूमिगेशन करवाकर कीट और मच्छर,मक्खियों से छुटकारा पा सकते हैं।
    -किचन और बाथरूम जहां पानी का इस्तेमाल अधिक होता है और धूप नहीं पहुंच पाती, ऐसी जगह को सूखा रखने की कोशिश करें।
    -हफ्ते में एक दिन किचन की किसी अच्छे कीटनाशक से सफाई करें।
    -नमी , सीलन वाले कमरे में न सोएं।
    -प्राकृतिक रूप से घर में धूप को आने दें। घर की खिड़कियों को कुछ देर के लिए जरूर खोलकर रखें।

    -सीलन से पहले ही खराब हो चुकी दीवारों को ठीक करने के लिए दरारों में वॉटरप्रूफ चूना भरें। ऐसा करने से दोबारा उस जगह सीलन नहीं आएगी।

    -लौंग का इस्तेमाल करके भी आप घर की सीलन से निजात पा सकते हैं। इसके लिए आप लौंग और दालचीनी को करीब आधा घंटा पानी में डालकर छोड़ दें। आधे घंटे बाद इस पानी को उबालकर इसे रूम प्रेशनर की तरह प्रयोग करें।

     

    खाना खजाना / शौर्यपथ / राजस्थान दुनियाभर में न सिर्फ अपनी रंग-बिरंगी संस्कृति बल्कि अपने तीखे-चटपटे खानपान के लिए भी काफी फेमस है। राजस्थान का भोजन तीखा और मसालेदार होने के बावजूद विदेशी लोगों में भी काफी पसंद किया जाता है। मानसून का महीना चल रहा है तो क्यों न ट्राई की जाए राजस्थान की ट्रेडिशनल रेसिपी राजस्थानी बंजारा गोश्त।

    राजस्थानी बंजारा गोश्त बनाने के लिए लगने वाली सामग्री-
    मटन, सरसों का तेल, प्याज, लहसुन का पेस्ट, अदरक का पेस्ट, देगी मिर्च पाउडर, धनिया पाउडर, हल्दी पाउडर, गाढ़ा दही, धनिया बीज पीसकर भुना हुआ, लौंग, साबुत काली मिर्च, सूखी लाल मिर्च, दालचीनी छड़ी, काला नमक

    राजस्थानी बंजारा गोश्त बनाने की वि​धि-
    1- सबसे पहले कड़ाही में सरसों का तेल गर्म कर लें। अब उसमें करी पत्ता, काली मिर्च, लौंग, दालचीनी और सूखी लाल मिर्च डालकर एक मिनट के लिए चलाएं।
    2- अब कड़ाही में कटा हुआ प्याज डालकर उसे अच्छी तरह पका लें।
    3-प्याज पकने के बाद अब इसमें अदरक और लहसुन का पेस्ट डालकर उसे भी 5 मिनट के लिए अच्छी तरह से पका लें।
    4- कड़ाही में अब देगी मिर्च पाउडर, धनिया पाउडर, हल्दी पाउडर और काला नमक डालकर उसे 5 मिनट तक अच्छी तरह पकाएं।
    5- मटन के टुकड़ों को अब इस मसाले में डालकर 10-15 मिनट के लिए ढक्कन से कवर करके अच्छी तरह पकने दें।
    6-अब मटन में दही मिलाकर इसे और 10 मिनट तक पकाएं, जब तक कि मांस पककर तैयार न हो जाए।
    7- अब मटन को हरी मिर्च और अदरक के साथ गार्निश करके सर्व करें।

     

    खाना खजाना / शौर्यपथ / मानसून में हल्की-हल्की बारिश के बीच आपके हाथों में गर्म मसाला चाय के साथ कुरकुरे प्याज के पकौड़े से भरी एक प्लेट रखी हो, तो वाकई किसी के भी मुंह में देखकर पानी आ जाए। प्याज के पकौड़े ज्यादातर हर भारतीय घर में पंसद और बनाए जाते हैं। यह एक पॉपुलर स्ट्रीट फूड है, जो अचानक घर आए मेहमानों के लिए या फिर मानसून का मजा लेने के लिए अक्सर घरों में बनाएं जाते हैं। लेकिन कई बार लोगों की यह शिकायत रहती है कि उनके पकौड़े क्रिस्पी नहीं बनते, तो देर किस बात की आज आपको बताते हैं कैसे बनाएं जाते हैं मार्केट स्टाइल में क्रिस्पी प्याज के पकौड़े।

    प्याज के पकौड़े के लिए सामग्री-
    -2 प्याज-
    -¼ बाउल- बेसन
    -1½ टी स्पून-लाल मिर्च का पाउडर
    -1 टेबिल स्पून-चावल का आटा
    -¾ कप-हरा धनिया
    -¼ टी स्पून-हींग
    -स्वादानुसार-नमक
    -½ कप-पानी
    -2 टेबिल स्पून- तेल तलने के लिए

    प्याज के पकौड़े बनाने की विधि-

    प्याज के पकौड़े बनाने बनाने के लिए सबसे पहले दो प्याज लेकर उनके ऊपर और नीचे का हिस्सा काट लें। अब प्याज को छीलकर उसका ऊपरी सख्त हिस्सा भी काट लें। अब प्याज को दो टुकड़ों में कांट कर आधा-आधा करके पतले और लंबे टुकड़ों में कांट लें।

    अब कटे प्याज को एक बाउल में निकालकर इसकी लेयर्स निकाल लें। इसी बाउल में अब बेसन लेकर इसमें लाल मिर्च पाउडर, चावल का आटा, हिंग, नमक और कटा हुआ हरा धनिया डालकर सभी चीजों को अच्छे से मिक्स कर लें। अब बाउल में थोड़ा-थोड़ा पानी डालकर इसका एक गाढ़ा घोल बना लें।

    अब एक पैन में तेल गर्म करें। गर्म तेल के दो चम्मच इस बेसन के घोल में डालकर अच्छे से मिक्स करें। तेल गर्म होने पर अपने हाथों की मदद से, एक एक कर पकौड़े बना कर तेल में डालते जाएं। पकौड़ों को 2 मिनट तक मध्यम आंच पर तलने के बाद उन्हें पलट दें। पकौड़ों को तब तक तले जब तक यह दोनों ओर से गोल्डन ब्राउन न हो जाए। पकौड़ों को तेल से निकालकर, गर्मा-गर्म सर्व करें।

     

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