
CONTECT NO. - 8962936808
EMAIL ID - shouryapath12@gmail.com
Address - SHOURYA NIWAS, SARSWATI GYAN MANDIR SCHOOL, SUBHASH NAGAR, KASARIDIH - DURG ( CHHATTISGARH )
LEGAL ADVISOR - DEEPAK KHOBRAGADE (ADVOCATE)
मेलबॉक्स / शौर्यपथ / आज की युवा पीढ़ी काफी ऊर्जावान है। वह न केवल सपने देखती है, बल्कि उनको पूरा करने का हौसला भी रखती है। मगर दुख की बात यह है कि वह बहुत जल्दी विफलताओं के आगे घुटने टेक देती है और अपना जीवन खत्म कर लेती है। नौजवानों को समझना चाहिए कि विफलता तो सफलता की पहली सीढ़ी है। जीवन रहेगा, तो उन्नति के अवसर भी मिलेंगे। जिस प्रकार चलते-चलते थकने पर हम विश्राम कर लेते हैं और फिर नई ऊर्जा के साथ चलना आरंभ करते हैं, उसी प्रकार असफलता भी इंसान के जीवन का विश्राम है, अंत नहीं। आज के महानायक ने भी लगातार अपनी ग्यारह फिल्मों की असफल वैतरणी को पार किया है। बस, हमें खुद पर विश्वास रखकर सब्र और धैर्य के साथ बुरे वक्त के गुजरने का इंतजार करना चाहिए। सामने आई मुश्किलों का हंसकर स्वागत करना ही जीवन है।
विभा गुप्ता, बेंगलुरु
रोकना होगा विस्तार
वैश्विक स्तर पर आज चीन जिस गति से विस्तार कर रहा है, उससे दुनिया परेशान है। भारत, ऑस्ट्रेलिया, वियतनाम, जापान, अमेरिका जैसे देश अब गंभीरता से उसकी नीतियों के विरुद्ध एकजुट हो रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय व्यापार में चीन ने जो दबदबा हासिल कर लिया है, वह अन्य देशों की संप्रभुता और निजता के लिए खतरा बनकर उभरा है। आज कई देशों के बाजार पर चीन का कब्जा है। चिंता की बात यह भी है कि कई देशों की अर्थव्यवस्था पूरी तरह से चीन पर निर्भर हो गई है। ऐसे में, चीन की चुनौतियों का मिलकर मुकाबला करना होगा। समय रहते अगर उसकी चाल पर लगाम नहीं लगाई गई, तो दुनिया गहरे संकट में फंस सकती है।
रोहित गुप्ता, मयूर विहार, दिल्ली
घरेलू कामगारों का दर्द
बेशक हम अनलॉक-2 में अब प्रवेश कर चुके हैं। रोज कमाने-खाने वाले लोगों की जिंदगी पटरी पर आने लगी है। ज्यादातर मजदूर अपने कामों पर लौट चुके हैं। मगर अब भी कुछ वर्ग ऐसे हैं, जिनकी मुसीबतें कम नहीं हुई हैं। जैसे, घरों में काम करने वाले कामगार। इन्हें अब भी लोग बुलाने से हिचक रहे हैं। लोगों में अब भी उनको लेकर डर पसरा हुआ है। इसलिए घरेलू कामगार काफी तंगी से जूझ रहे हैं। जहां वे पहले औसतन चार-पांच घरों में काम करके गुजारा कर लिया करते थे, आज उन्हें दोनों वक्त का खाना भी बमुश्किल नसीब हो पा रहा है। लोगों को सतर्कता और सावधानी बरतते हुए इन लोगों को भी काम पर बुला लेना चाहिए। कोरोना से बचना आवश्यक है, पर कोई जान-बूझकर यह बीमारी नहीं फैलाता।
अंकिता प्रकाश, रुड़की
अपनी-अपनी राजनीति
प्रधानमंत्री के संबोधन से अपेक्षा थी कि वह कोरोना के कारण आए संकट और सीमा पर बढ़ते तनाव से निपटने में सरकार के प्रयासों की जानकारियां साझा करेंगे, परंतु उनका पूरा भाषण पीएम गरीब कल्याण योजना नवंबर तक बढ़ाने और जन-धन खातों में नकदी जमा कराने तक सीमित रहा। दूसरी ओर, राहुल गांधी कह रहे हैं कि सरकार के पास धन की कोई कमी नहीं है, गरीबों को कमाने की जरूरत नहीं होगी, यदि उनके खाते में प्रतिमाह 7.5 हजार रुपये जमा कराए जाएं। मगर जहां-जहां कांग्रेस सत्ता में है, वहां भी राहुल ऐसी योजना शायद ही लागू करा पाए हैं। हालांकि इसमें यह सवाल शेष रह गया कि शेष 30 करोड़ राशनकार्ड विहीन लोगों और ईमानदार करदाताओं ने आखिर कौन सा गुनाह किया है कि उन्हें इस तरह के लाभों से वंचित कर दिया गया है? यदि सरकारों के पास पैसे हैं, तो आधारभूत ढांचे के निर्माण, राष्ट्र के सशक्तीकरण, विकास-कार्य आदि तेज गति से चलाए जाने चाहिए। क्या यह वक्त नीतियों को बदलने का नहीं है?
राधेश्याम ताम्बटकर, इंदौर, मध्य प्रदेश
ओपिनियन / शौर्यपथ / पूर्वी लद्दाख में भारत और चीन के सैनिकों में हुए ताजा संघर्ष और पहले के तनावों में अंतर यह है कि इस बार पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए), यानी चीन की फौज पूरी तैयारी के साथ आई है। पीएलए की कई डिवीजन नजदीकी इलाकों में तैनात हैं, साथ ही भारत-चीन सीमा क्षेत्रों में भी एक-दूसरे के करीब बड़ी संख्या में फौजी डटे हुए हैं। भारतीय सेना ने भी इलाके में और वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के आसपास समान तैयारी कर रखी है। जिस तरह से यहां सैनिकों का भारी जमावड़ा किया गया है और असलहा व तोप मंगवाए जाने की खबरें हैं, उसे देखकर स्पष्ट है कि पीएलए ने पूरी तैयारी और योजना के साथ इस खूनी संघर्ष को अंजाम दिया है। इसका मकसद चीनी सैनिकों का उस सीमा-रेखा की तरफ बढ़कर जमीन हथियाना है, जिसे वे वास्तविक नियंत्रण रेखा कहते हैं।
ऐसा करके चीन दरअसल, भारत के साथ किसी भी तरह की द्विपक्षीय बातचीत के बिना वास्तविक नियंत्रण रेखा का एकतरफा निर्धारण का प्रयास कर रहा है। इससे वह अपनी सीमा तय कर सकेगा और उस पर नियंत्रण की तरफ अपने कदम बढ़ाएगा। मगर भारतीय सेना ने चीनी सैनिकों को रोक दिया है और भारतीय क्षेत्र की अखंडता बनाए रखने के लिए मुस्तैद हो गई है। नतीजतन, इस संघर्ष से पीएलए को जो तमगा हासिल हुआ, वह यह कि सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति व स्थिरता बनाए रखने के लिए पिछले 25 वर्षों में मजबूत किए गए तमाम सिद्धांतों, मानदंडों व मानक-प्रक्रियाओं का उसने उल्लंघन कर दिया। उसने यह साबित कर दिया है कि खुद उसकी सरकार द्वारा हस्ताक्षरित समझौतों के प्रति उसका क्या नजरिया है?
कूटनीतिक रूप से भारत और बाकी दुनिया को चीन यह संकेत दे रहा है कि वह एशिया की सबसे बड़ी शक्ति है और अपनी मनमर्जी से कुछ भी कर सकता है, फिर चाहे वह दक्षिण चीन सागर में हो या भारत-चीन सीमा पर। वह चाहता है कि भारत यह समझे और स्वीकार करे कि चीन की समग्र राष्ट्रीय ताकत उससे कहीं अधिक है और नई दिल्ली को एशिया में उसकी सर्वोच्चता मान लेनी चाहिए, लिहाजा उसे पीछे हट जाना चाहिए। उसके मुताबिक, भारत को यह भी समझ लेना चाहिए कि 21वीं सदी एशिया की नहीं, बल्कि चीन की है।
मगर पूर्वी लद्दाख में भारतीय सैनिकों द्वारा की गई जवाबी कार्रवाई से चीन को यह संदेश साफ-साफ मिल गया है कि भारत उसके आधिपत्य को स्वीकार नहीं करता और उसकी उकसाने वाली कार्रवाइयों को बर्दाश्त नहीं करेगा। नई दिल्ली अपनी स्थिति से कतई समझौता नहीं करेगी। हमारे देश के बहादुर सैनिकों ने 15 जून की रात गलवान घाटी में ठीक यही किया। यहां पर हमें यह भी याद रखना चाहिए कि बाकी दुनिया साफ-साफ देख रही है। यहां पर चीन ने चुनौती दी है, जिसको भारत ने स्वीकार किया है।
फौज भेजने का सीधा संकेत है कि हम चीन का मुकाबला करने और भारत सहित अन्य राष्ट्रों पर धौंस जमाने के उसके आक्रामक तरीकों का विरोध करने के लिए तैयार हैं। भारत और चीन का रिश्ता अब पहले की तरह आगे नहीं बढ़ सकता। पुरानी लकीर अब व्यवहार में नहीं लाई जा सकती है। क्यों? अगर भारत सरकार को ऐसा ही करना होता, तो वह अपनी सैन्य कार्रवाई का खंडन कर रही होती। इसीलिए भारत को नीतिगत फैसलों के माध्यम से अपने सैन्य संदेश को मजबूत करने और दोहराने की जरूरत है, जो आगे चलकर इस राष्ट्रीय सहमति को स्पष्ट करेगा कि हमें चीन का बड़े भाई जैसा रवैया पसंद नहीं है। इसी वजह से भारत को ऐसे संकेत देने होंगे कि यदि सीमा पर शांति नहीं होती है, तो चीन के साथ सामरिक के अलावा अन्य रिश्ते भी नकारात्मक रूप से प्रभावित होंगे। इस संदेश को स्पष्ट तौर पर दिखाने के लिए हमें अपनी चीन-नीति का फिर से मूल्यांकन करना होगा।
इसी दिशा में हमारा पहला कदम था 59 चीनी एप पर पाबंदी। भारत ने तो सिर्फ शुरुआत की है। देश में 5-जी तकनीक के परीक्षण और उसे लागू करने की प्रक्रिया से चीन की कंपनियों को राष्ट्रीय सुरक्षा के आधार पर प्रतिबंधित करना नई दिल्ली की इस सोच को और मजबूत करेगा।
चीन की कार्रवाइयों का एक जवाब यह भी हो सकता है कि भारत अपने रिश्ते अमेरिका, जापान, फ्रांस, दक्षिण कोरिया और संभवत: इंडोनेशिया जैसे लोकतंत्रों के साथ मजबूत बनाए। भारत को ताइवान के साथ भी अब अपने संबंधों को विस्तार देना चाहिए। दिल्ली अपनी चीन-नीति संयत होकर तैयार करे। बिना सोचे-समझे प्रतिक्रिया जाहिर करने की कतई जरूरत नहीं है। अपने तमाम विकल्पों पर व्यापक विचार-विमर्श के बाद ही हमें आगे बढ़ना चाहिए। मगर हां, इसकी समय-सीमा तय होनी चाहिए। नई नीति इसी साल लागू हो जानी चाहिए।
विशेषकर आर्थिक क्षेत्र में भारत की नई चीन-नीति खुद को कुछ दर्द दिए बिना तैयार नहीं की जा सकती है। हालांकि, जब हमने यह तय कर लिया है कि चीन को सख्त संदेश देने की जरूरत है, तो हमें कष्ट सहने के लिए भी तैयार रहना होगा। भारतीय सैनिकों ने ऐसा ही सीमाओं पर किया है, और अब आम भारतीयों के लिए यह दिखाने का वक्त आ गया है कि वे भी ऐसा करने के लिए तैयार हैं। यह कष्ट कई रूपों में मिल सकता है- कुछ उत्पादों की उपभोक्ता कीमतें बढ़ सकती हैं, कुछ कंपनियों के मुनाफे घट सकते हैं, तो कुछ कारोबारियों के राजस्व में कमी आ सकती है। अगर हम खुद के मजबूत व एकजुट होने का संदेश देना चाहते हैं, जिसे चीन ने समझने में गलती की है, तो हमें इस तरह के दर्द सहने ही होंगे। भारत को अपना यह चरित्र पूरी मजबूती से चीन के सामने रखना ही होगा कि हम लकीर के फकीर नहीं हैं।
(ये लेखक के अपने विचार हैं)गौतम बम्बावाले, चीन में नियुक्त रहे भारतीय राजदूत
कोरोना के कहर से जूझ रहे ज्यादातर देश 'लॉकडाउनÓ से 'अनलॉकÓ की दिशा में तेजी से बढ़ रहे हैं। ब्रिटेन सहित तमाम मुल्कों में जुलाई से जिम तक खोलने की योजना है। हालांकि, तीन महीने की शारीरिक असक्रियता के बाद जिम जाकर कठिन व्यायाम करने पर लेने के देने पड़ सकते हैं। आपको मांसपेशियों में खिंचाव से लेकर कंधे, पीठ, कमर, कूल्हे, जांघ आदि में चोट की शिकायत हो सकती है। ब्रिटेन की जानी-मानी फिटनेस एक्सपर्ट मरियम अलरूबी ने इसी के मद्देनजर पांच ऐसे व्यायाम सुझाए हैं, जिनसे मांसपेशियों को खोलने और शरीर को लचीचा बनाने में मदद मिल सकती है। आइए इन पर नजर डालें-
1.कंधे-गर्दन में दर्द से ऐसे बचें
-एक डंडा हाथ में लेते हुए फर्श पर सीधे खड़े हो जाएं। अब डंडे को दोनों हाथों से पकड़ते हुए बाजुओं को कंधे की सीध में सामने की ओर ले जाएं। ध्यान रखें कि इस दौरान कोहनियां एकदम सीधी होनी चाहिए। धीरे-धीरे जितना हो सके, हाथ सिर के ऊपर ले जाएं और फिर वापस कंधे की सीध में ले आएं। इस प्रक्रिया को 15 से 20 बार दोहराएं। यह एक सेट हुआ। ऐसे कम से कम पांच सेट करें।
2.पीठ में खिंचाव का खतरा यूं घटाएं
-एक मोटी इलास्टिक की डोरी लें। उसे बंद दरवाजे के हैंडल में अपने कमर जितनी ऊंचाई पर फंसाएं। अब हैंडल से दो फीट की दूरी पर खड़े होकर डोरी के दोनों सिरों को हाथों में थाम लें और जितना हो सके पीछे की ओर खींचें। ध्यान रखें कि इस प्रक्रिया में आपके दोनों हाथ पेट के किनारे से सटे होने चाहिए, ताकि कंधे की भी एक्सरसाइज हो सके। इस प्रक्रिया को दस के सेट में दो से तीन बार दोहराएं।
3.कमर की मांसपेशियां लचीली बनाएं
-फर्श पर चटाई बिछाकर पीठ के बल लेट जाएं। अब दाएं पैर के घुटने को दोनों हाथों से पकड़ते हुए ऊपर उठाएं। इस दौरान दाएं पैर के पंजे बाएं पैर के ऊपर आ जाने चाहिए। इसके बाद घुटने को हाथों से सहारा देते हुए पैर दाईं और बाईं तरफ ले जाएं, ताकि जांघों की मांसपेशियों में हल्का खिंचाव महसूस हो। संभव हो तो घुटने को गोलाई में भी घुमाएं। दोनों पैरों से इस प्रक्रिया दस-दस के सेट में पांच बार दोहराएं।
4.कूल्हे में खिंचाव की शिकायत नहीं होगी
-दायां घुटना फर्श पर टिकाते हुए कुछ इस तरह बैठें कि शरीर का सारा भार बाएं पंजों पर आए। इस दौरान यह सुनिश्चित करें कि दाएं पैर का घुटना और बाएं पैर का पंजा एक सीध में हो। अब दायां हाथ ऊपर उठाएं और कमर के पास से बाईं ओर मुड़ें। 30 सेकेंड तक इसी अवस्था में रहें। ध्यान रखें कि इस प्रक्रिया में कंधे, कोहनी और रीढ़ की हड्डी बिल्कुल सीधी होनी चाहिए। अब वापस उसी मुद्रा में जाएं। दोनों घुटनों से इस प्रक्रिया को दो-दो बार करें।
5.जांघों की मांसपेशियां आसानी से खुलेंगी
-जमीन पर पीठ के बल लेट जाएं। अब दाएं पैर को ऊपर उठाएं और तलुए के किनारे एक तौलिया फंसाएं। तौलिये के सहारे पैरों को दस सेकेंड तक जितना हो सके, चेहरे की तरफ खींचने की कोशिश करें। इसके बाद पैर ऊपर रखते हुए तौलिये को पांच से सात सेकेंड के लिए थोड़ा ढीला छोड़ दें। दोनों पैरों पर पूरी प्रक्रिया को तीन से चार बार दोहराएं। इससे शारीरिक सक्रियता की कमी से स्थिर हुईं जांघों और कूल्हे की मांसपेशियां आसानी से खुल जाएंगी।
आधे से ज्यादा लोगों का वजन बढ़ा
-लॉकडाउन में 67त्न लोगों ने चॉकलेट-चिप्स ज्यादा खाने की बात मानी ।
-35त्न ने सामान्य दिनों से कहीं ज्यादा कोल्डड्रिंक पीने का खुलासा किया।
-55त्न लोगों ने कहा, शारीरिक सक्रियता घटने से उनका वजन काफी बढ़ गया।
-80त्न ने लॉकडाउन खुलने के बाद कसरत के जरिये मोटापा घटाने का वादा किया।
लाइफस्टाइल / शौर्यपथ / हर साल 1 जुलाई को देशभर में डॉक्टर्स डे बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। यह खास दिन डॉक्टर्स के योगदान को सम्मान देने के लिए मनाया जाता है। बता दें, 1 जुलाई को देश के महान चिकित्सक और पश्चिम बंगाल के दूसरे मुख्यमंत्री डॉक्टर बिधानचंद्र रॉय का जन्मदिन और पुण्यतिथि होती है। डॉक्टर बिधानचंद्र रॉय के साथ देश की सेवा में लगे समस्त चिकित्सकों को सम्मान देने के लिए हर साल 1 जुलाई को नेशनल डॉक्टर्स डे (राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस) मनाया जाता है। आज पूरा विश्व कोरोना महामारी की चपेट में है। ऐसे में जीवन रक्षा करने वाले डॉक्टरों ने लोगों को 'कोविड-19' नाम के इस दानव से बचे रहने के लिए कुछ महत्वपूर्ण सलाह दी हैं। आइए जानते हैं आखिर क्या हैं ये जरूरी सलाह।
राजीव गांधी कैंसर इंस्टीट्यूट एंड रिसर्च सेंटर (आरजीसीआईआरसी) के मेडिकल डायरेक्टर डॉ. सुधीर रावल की मानें तो पहले से किसी रोग से ग्रस्त व्यक्ति में कोरोना संक्रमण बढ़ने का खतरा काफी अधिक होता है। ऐसे में रोगी को इस बात की पूरी जानकारी होनी चाहिए कि किस परिस्थिति में उसे किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।
डॉक्टर की सलाह-
डॉ. सुधीर रावल का कहना है कि कोरोना काल एक ऐसा समय है, जिसके बारे में किसी को भी पहले से कोई अनुमान नहीं था। ऐसे में सतर्कता ही लोगों के लिए कोरोना से बचने के लिए सबसे बड़ा कवच है। मौजूदा हालात में कैंसर मरीजों का उदाहरण देते हुए डॉ. सुधीर कहते हैं कि कैंसर मरीजों का इम्यून कमजोर होता है। इसकी वजह से ऐसे लोगों का कोविड-19 संक्रमण की चपेट में आने का खतरा ज्यादा बना रहता है।
ऐसे में कोविड-19 से बचने के लिए न सिर्फ कैंसर रोगियों को बल्कि उन सभी लोगों को जो पहले से ही किसी न किसी रोग से पीड़ित हैं सोशल डिस्टेंसिंग के मानकों का सख्ती से पालन करना चाहिए।
- जहां तक संभव हो बाहर नहीं निकलना चाहिए।
-संतुलित आहार लेना चाहिए और सकारात्मक विचार रखना चाहिए।
-इलाज करा रहे मरीजों को लगातार अपने डॉक्टर्स के संपर्क में रहना चाहिए।
इम्यून कंप्रोमाइज्ड लोग रहें बेहद सतर्क-
डॉ. रावल ने कहा कि इस समय इम्यून कंप्रोमाइज लोगों को बहुत सतर्क रहने की जरूरत है। इम्यून सिस्टम का प्राथमिक काम संक्रमण से लड़ना होता है। ’इम्यून कंप्रोमाइज’ का अर्थ है ऐसा व्यक्ति जिसका इम्यून सिस्टम सामान्य स्वस्थ व्यक्ति की तुलना में कमजोर हो। ऐसे लोगों में कोविड-19 जैसे संक्रमणों की चपेट में आने की आशंका ज्यादा रहती है।
कैसे होता है इम्यून सिस्टम कमजोर-
कैंसर और डायबिटीज जैसी बीमारियां व्यक्ति के इम्यून को कमजोर करती हैं। इसी तरह बड़ी उम्र और धूम्रपान, ज्यादा शराब पीने, आलसी जीवन जीने और जंक फूड खाने वाली लाइफस्टाइल से भी इम्यून सिस्टम कमजोर होता है। कैंसर के मरीजों में कीमोथेरेपी जैसे इलाज के दौरान इम्यून ज्यादा कमजोर होने का खतरा रहता है। डॉ. रावल ने कहा कि हर डॉक्टर लोगों को ऐसी आदतों से बचने की सलाह देता है, जो सेहत पर भारी पड़ सकती है। इस डॉक्टर दिवस के मौके पर अगर हर व्यक्ति डॉक्टर की सलाह मानने का निश्चय कर ले तो कई गंभीर बीमारियों से बचाव संभव हो सकता है।
लाइफस्टाइल / शौर्यपथ / कोरोनावायरस ने न सिर्फ लोगों के जीने का तरीका बदल दिया है बल्कि शादी के तौर-तरीकों और रिवाजों में भी बदलाव कर दिया है। लॉकडाउन के बाद ब्रिटेन की सरकार ने शादी के लिए नए नियम लागू किए गए हैं। नए नियमों के अनुसार दूल्हा-दुल्हन को एक-दूसरे को अंगूठी पहनने से पहले और बाद में हाथ धोना पड़ेगा। वहीं, नए नियमों में लोगों से सामाजिक दूरी बनाए रखने का आग्रह किया गया। शनिवार से सामाजिक दूरी एक मीटर से ज्यादा होगी। नए नियमों में शादी के दौरान एक-दूसरे से कम संपर्क रखने और जल्द से जल्द समारोह को खत्म कर देने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार ने कहा है कि शादियों को सुरक्षित वातावरण में किया जाए।
पिता हाथ में हाथ डालकर बेटियों को नहीं ला सकेंगे-
नए नियमों के कारण पिता और ब्राइड्समेड दुल्हन के हाथ में हाथ डालकर उन्हें चर्च में नहीं ला सकेंगे। इसके अलावा परिवार के अन्य सदस्य भी दुल्हन या किसी अन्य को न तो गले लगा सकेंगे न चूम सकेंगे। ये गतिविधियां सिर्फ समारोह के कानूनी रिवाज के लिए ही की जा सकेगी। सरकार ने कहा है कि शादी समारोह में कम से कम लोग शामिल हों। समारोह में 30 से ज्यादा लोगों को शामिल होने की अनुमति नहीं होगी। इसमें दूल्हा-दुल्हन, गवाह, अधिकारी, मेहमान और फोटोग्राफर या सुरक्षा गार्ड जैसे कर्मचारी शामिल हैं। हालांकि, इसमें स्थान के कर्मचारी शामिल नहीं होंगे।
रिसेप्शन पार्टी नहीं कर सकेंगे-
नए निर्देशों के अनुसार शादी के बाद रिसेप्शन पार्टी का आयोजन नहीं किया जा सकेगा। छोटे समारोह आयोजित किए जा सकेंगे जिसमें दो घरों के समूह के अलावा बाहर से सिर्फ छह लोगों को आने की अनुमति होगी।
चर्च में गाने या चिल्लाने की अनुमति नहीं-
नए निर्देशों के अनुसार शादी के दौरान चर्च में गाने, चिल्लाने, चीखने या संगीत बजाने की अनुमति नहीं होगी। चिल्लाने या गाने से कोरोनावायरस के प्रसार का जोखिम बढ़ता है इसलिए इस पर पाबंदी लगाई गई है। अगर कोई एक व्यक्ति गाना चाहता है तो उसे फेश शील्ड पहनकर गाना पड़ेगा ताकि उसकी थूक से अन्य लोगों को खतरा न हो। सरकार ने गाना गाने की जगह रिकॉर्डिंग वाले गानों का इस्तेमाल करने को कहा है।
सामाजिक दूरी का पालन करें-
सभी मेहमानों को सामाजिक दूरी के नियमों का पालन करना होगा। इसके अलावा समारोह स्थल के बैठने की व्यवस्था में बदलाव करना होगा। इसके अलावा वेंटिलेशन में सुधार करना होगा और सभी को मास्क का इस्तेमाल करना होगा। मेहमानों से कहा गया है कि वे किसी दूसरे का सामान न छुएं।
अंगूठी पहनाने से पहले और बाद हाथ धोएं-
नए नियमों के अनुसार दूल्हा-दुल्हन को अंगूठी पहनाने से पहले और बाद में हाथ धोना पड़ेगा। यह ध्यान रखना होगा कि अंगूठी ज्यादा हाथों में न जाए। समारोह स्थल पर किसी तरह के पैर धोने या शरीर के अन्य अंगों को धोने का रिवाज करने की इजाजत नहीं होगी। इन रिवाजों को घर से ही पूरा करके आना पड़ेगा। वेन्यू मैनेजरों को नकद दान को हतोत्साहित करने और जहां संभव हो ऑनलाइन संसाधनों का उपयोग जारी रखने के लिए कहा गया है।
धर्म संसार / शौर्यपथ / आषाढ़ मास में शुक्ल पक्ष एकादशी को देवशयनी एकादशी कहा जाता है। इस तिथि को पद्मनाभा, विष्णुशयन भी कहा जाता है। देवशयन के साथ ही चातुर्मास भी प्रारंभ हो जाता है। देवशयनी एकादशी पर श्रीहरि भगवान विष्णु चार माह के लिए योगनिद्रा में चले जाते हैं। इसी समय से चातुर्मास का आरंभ हो जाता है। मान्यता है कि इस अवधि में श्रीहरि भगवान विष्णु, पाताल के राजा बलि के यहां चार मास निवास करते हैं। इस अवधि में भगवान शिव पृथ्वीलोक पर आते हैं और चार मास तक संसार की गतिविधियों का संचालन करते हैं। भगवान शिव गृहस्थ होते हुए भी संन्यासी हैं। अत: उनके राज में विवाह आदि कार्य वर्जित होते हैं।
देवशयनी एकादशी के बाद चार माह तक सूर्य, चंद्रमा और प्रकृति का तेजस तत्व कम हो जाता है। देवशयनी एकादशी से साधुओं का भ्रमण भी बंद हो जाता है। वह एक जगह रुककर प्रभु की साधना करते हैं। मान्यता है कि चातुर्मास के दौरान सभी धाम ब्रज में आ जाते हैं। इसलिए इस दौरान ब्रज की यात्रा शुभकारी मानी जाती है। देवशयन की अविधि में पत्तल पर भोजन करें। वाक-सिद्धि प्राप्त करने के लिए इस अवधि में मीठे पदार्थों का त्याग करें। आरोग्य की प्राप्ति के लिए इस अवधि में तली हुई वस्तुओं का त्याग करें। संतान की उन्नति के लिए देवशयन की अवधि में दूध एवं दूध से बनी वस्तुओं का त्याग करें। देवशयनी एकादशी का व्रत करने से सभी प्रकार के पापों का नाश होता है। मन शुद्ध होता है, सभी विकार दूर हो जाते हैं। दुर्घटनाओं के योग टल जाते हैं।
अब 5 महीने बाद होंगे मांगलिक कार्य
देवशयनी एकादशी के साथ बुधवार को भगवान श्री हरि विष्णु क्षीरसागर में शयन को चले जाएंगे और चार महीने तक खरमास रहेगा। इस दौरान मांगलिक कार्यों पर विराम लग जाएगा। 25 नवंबर को देव जागृत होने के साथ फिर से सहालग शुरू हो जाएंगे। ज्योतिषविदों के अनुसार इस बार नवंबर व दिसम्बर में कम ही सहालग हैं।
मंगलवार को आखिरी सहालग के चलते शादी समारोह हुए। अब 25 नवंबर से फिर से समारोह होंगे। ज्योतिषविद् विनोद त्रिपाठी बताते हैं कि आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को ही देशयनी एकादशी कहा जाता है। इस दिन से चतुर्मास की शुरुआत मानी जाती है। नवंबर में 25, 27 व 30 यानि तीन दिन ही साए हैं जबकि दिसंबर में 1, 6, 7, 9, 10 व 11 को शादी समारोह किए जा सकते हैं। वह कहते हैं कि 17 जनवरी को गुरु अस्त होगा, जो 15 फरवरी को उदय होगा। इससे दो दिन पहले 13 फरवरी को शुक्र डूब जाएगा। इसके बाद 18 अप्रैल से मांगलिक कार्य शुरू हो पाएंगे।
सम्पादकीय लेख / शौर्यपथ / कोरोना, बारिश और त्योहारों के समय गरीब वर्ग को अन्न से संबल देने का प्रयास सराहनीय और स्वागतयोग्य है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ताजा घोषणा मूल रूप से देश के दरिद्र नारायण की सुधि लेने की ऐसी कोशिश है, जिसकी उम्मीद पिछले एक महीने से बंधी हुई थी। सरकार ने जुलाई से नवंबर तक पूरे पांच महीने तक देश के करीब 80 करोड़ जरूरतमंदों को पांच-पांच किलो गेहूं या चावल और चना मुफ्त देने का जो फैसला किया है, उससे देश को एक मानवीय आधार मिलेगा। यह आधार पूरे गुजारे के लिए भले पर्याप्त न हो, लेकिन इससे अभावग्रस्त परिवारों का मनोबल बढे़गा। इस राहत के उपरांत वे अपने थोडे़ से प्रयास या रोजगार योजनाओं का लाभ उठाकर अपने दिन ठीक से गुजार सकेंगे। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के नवंबर तक विस्तार से अभावग्रस्त लोगों को अपने यथास्थान रहने की प्रेरणा भी मिलेगी। विशेष रूप से बिहार जैसे श्रमिक बहुल राज्य में छठ पूजा का बहुत महत्व है, जिसे प्रधानमंत्री ने भी जाहिर किया है। बड़ी संख्या में ऐसे कामगार होंगे, जो अब नवंबर में छठ पूजा के समापन के बाद ही यात्रा की योजना बनाएंगे। बेशक, देखने वाले इस घोषणा को चुनाव से जोड़कर भी देखेंगे, लेकिन वह भी इस योजना के व्यापक महत्व से इनकार नहीं कर पाएंगे। एक और अच्छी बात है कि इस योजना का श्रेय किसानों और ईमानदार करदाताओं को दिया गया है।
जब देश में कोरोना का संक्रमण बढ़ता जा रहा है, तब सरकार का लोक-कल्याणकारी स्वरूप सशक्त होना ही चाहिए। इस योजना के विस्तार पर अगर 90 हजार करोड़ रुपये से अधिक खर्च होंगे, तो कोई बात नहीं। इस देश में ऐसी क्षमता है कि वह गरीबों के साथ खड़ा हो सकता है। यदि कोरोना के समय अमेरिका की कुल जनसंख्या से तीन गुना अधिक लोगों को हमारी सरकारों ने मुफ्त अनाज दिया है, तो कोई आश्चर्य नहीं। बहरहाल, यह भी जरूरी है कि ऐसी उदार योजनाओं का लाभ पूरी ईमानदारी से जरूरतमंदों तक पहुंचे। निचले स्तर पर वितरण से जुड़े लोगों के लिए भी यह परीक्षा और दरिद्र नारायण की सच्ची सेवा का समय है। अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि किसी बहाने से किसी भी जरूरतमंद को योजनाओं के लाभ से वंचित न किया जाए।
प्रधानमंत्री के भाषण में एक और महत्वपूर्ण बात शामिल है, जो सबका ध्यान खींच रही है। ‘एक देश एक राशन कार्ड’ की घोषणा वैसे तो वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मई महीने के मध्य में ही कर दी थी और उन्होंने यह भी बता दिया था कि ऐसा मार्च 2021 में संभव हो जाएगा, लेकिन प्रधानमंत्री के बोलने से लोगों की उम्मीदें और बढ़ गई हैं। एक देश एक राशन कार्ड लंबे समय से इस देश की जरूरत रही है। सभी राज्य अगर इस व्यवस्था को मिलकर पहले ही साकार कर लेते, तो संभव है, कोरोना के समय लाखों की संख्या में लोगों को अपने घर न लौटना पड़ता। जो जहां है, वहीं रहता और वहीं उसे राशन कार्ड के तहत जरूरी सामान और अनाज उपलब्ध करा दिया जाता। अब समय आ गया है कि एक देश एक राशन कार्ड और मुफ्त अनाज जैसे बुनियादी इंतजामों को स्थानीय सियासत से परे रखकर मदद का स्थाई ढांचा विकसित किया जाए। ऐसी मदद की व्यवस्था जितनी उदार और व्यापक बनेगी, हमारा देश उतनी ही राहत और खुशी महसूस करेगा।
नजरिया /शौर्यपथ / इस साल दसवीं में बागपत की रिया जैन ने दसवीं की बोर्ड परीक्षा में पहला स्थान प्राप्त किया है। रिया ने 96.67 प्रतिशत अंक प्राप्त किए। बागपत की रहने वाली रिया श्रीराम एस एम इंटर कॉलेज की छात्रा है। इस परीक्षा में आठ लाख से अधिक विद्यार्थी बैठे थे। रिया के पिता भारत भूषण की आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी नहीं है। वह पटरी पर चुन्नियां बेचने का काम करते हैं। घर का गुजारा मुश्किल से चलता है। रिया की फीस देने को भी पैसे नहीं थे। तब स्कूल मैनेजमेंट ने रिया की फीस चुकाई। पिता अपनी बच्ची की सफलता से बहुत खुश हैं। उन्हें शहर के बड़े-बड़े अधिकारी फोन करके बधाई दे रहे हैं। वह कहते हैं कि उनकी बेटी के कारण ही यह सब हो सका। रिया की सफलता इस बात का प्रमाण है कि मेहनत से बड़ी से बड़ी सफलता हासिल की जा सकती है। पैसे की तंगी भी उसमें बाधा नहीं बनती। अगर कोई बाधा है, तो मदद के हाथ भी उठते हैं। जैसे, उसकी परेशानी जानकर स्कूल प्रबंधन आगे आया। रिया ने बताया कि वह हर रोज चौदह-पंद्रह घंटे पढ़ाई करती थी। मुश्किलों का हल उसने परिश्रम में ढूंढ़ा। परेशानी से हार न मानने का उसका फैसला अनुकरणीय है।
दूसरे स्थान पर बाराबंकी के अभिमन्यु वर्मा रहे, उन्हें 95.83 प्रतिशत अंक मिले। तीसरा स्थान भी बाराबंकी के योगेश प्रताप सिंह को मिला। छोटे शहरों के इन बच्चों की कहानियां अभूतपूर्व हैं। ऐसी ही एक बच्ची के पिता मजदूर हैं। लॉकडाउन के दौरान उनका काम भी छूट गया था, मगर उसने भी बहुत अच्छे अंक प्राप्त किए हैं।
बच्चे आफत में भी सफलता हासिल कर सकते हैं। गरीबी उन्हें आगे बढ़ने से नहीं रोक पाती। इससे मध्यवर्ग के उन माता-पिता को जरूर सबक लेना चाहिए, जिन्हें लगता है कि जब तक बच्चे किसी नामी-गिरामी स्कूल में नहीं पढ़ेंगे, तब तक वे कुछ कर ही नहीं सकते। इसके लिए उनकी गुंजाइश हो न हो, वे बड़े-बड़े स्कूलों की तरफ भागते हैं। कर्ज भी लेना पड़े, तो बच्चों की ऊंची फीस भरते हैं। दिल्ली में यह मारामारी बहुत दिखाई देती है। आज के दिन में, जब बहुत से लोगों की नौकरियां चली गई हैं, वे बातचीत में पहली चिंता यही प्रकट करते हैं कि अब बच्चों की हजारों की फीस और ऊपरी खर्चे कहां से देंगे? बच्चे को किसी सरकारी स्कूल में भेजना नहीं चाहते। समाज और जान-पहचान वालों में हंसी उड़ेगी, सो अलग। इसके अलावा माता-पिता सोचते हैं कि जिन कठिनाइयों का सामना उन्होंने अपने बचपन में किया था, वे अपने बच्चों को उनसे बचाएं। इसीलिए वे बच्चे की हर इच्छा पूरी करने की कोशिश करते हैं, जबकि अनेक विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों को मुश्किलों का सामना करना सिखाना चाहिए, क्योंकि माता-पिता उनकी मदद करने के लिए हमेशा नहीं रहेंगे। इस दुनिया का सामना उन्हें अपने दम पर ही करना होगा। यह भी कहा जाता है कि जिन बच्चों ने कभी कठिनाइयां नहीं देखीं, यदि उनके सामने अचानक मुश्किलें आएं, तो वे उनका सामना नहीं कर पाते हैं। वे उनसे दूर भागते हैं। कई बार अवसाद का शिकार हो जाते हैं। और आत्महत्या जैसे घातक कदम भी उठा लेते हैं।
रिया जैन के बारे में जानकर अपने पुराने नेता याद आते हैं। कितनों की कहानियां हमने पढ़ी हैं। गांधीजी अपनी पुस्तक सत्य के प्रयोग में अनेक परेशानियों का जिक्र करते हैं, पर कभी घुटने नहीं टेकते हैं। परेशानियों का सामना करने का हौसला उनमें हमेशा दिखाई देता है। किसी भी बड़ी हस्ती को बनाने में चुनौतियों का बड़ा हाथ होता है। इसी तरह से भूतपूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री का उदाहरण है। बताया जाता है कि नदी पार करके उन्हें स्कूल जाना पड़ता था। वह तैरकर नदी पार करते थे। जाहिर है, मल्लाह को देने के लिए पैसे नहीं रहे होंगे। जब वह प्रधानमंत्री बने, तब भी उनके पास बहुत मामूली कपड़े थे। उन्हें फटे कपड़े पहनने से भी परहेज नहीं था। उन्होंने पद के कारण अपने रहन-सहन और सादगी से कोई समझौता नहीं किया। इस तरह की कथाओं से हमारा इतिहास भरा पड़ा है। सादगी एक बड़ा जीवन मूल्य है। पंक्ति के अंतिम आदमी की चिंता ने भी इसे हमेशा बनाए रखा है। अपने बड़े नेताओं के संघर्ष और उनकी सफलता से भी तो बहुत कुछ सीखा जा सकता है।
सोहनलाल द्विवेदी की मशहूर पंक्तियां हैं, कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।
(ये लेखिका के अपने विचार हैं)क्षमा शर्मा, वरिष्ठ पत्रकार
मेलबॉक्स / शौर्यपथ / दुनिया भर में कोरोना वायरस का कहर जारी है। पूरी प्रबलता के साथ इससे बचने के उपाय भी ढूंढ़े जा रहे हैं, मगर अब तक सफलता हाथ नहीं लगी है। हालात की गंभीरता को देखते हुए भारत सरकार ने भी ठोस कदम उठाए हैं। यहां लॉकडाउन का विकल्प भी अपनाया गया। इस दौरान बेशक कई परेशानियां आईं, जैसे- विकास दर का गिरना, शैक्षणिक कार्यों में स्थिरता, मजदूरों और गरीब वर्गों पर भुखमरी की मार, मगर हम सब कहीं न कहीं सुरक्षित जरूर थे। हालांकि, जैसे-जैसे अनलॉक की प्रक्रिया शुरू हुई, लोगों ने समझा कि शायद वे अब कोरोना से बच गए हैं। जिस वक्त हमें सर्वाधिक सचेत रहने की जरूरत है, हम उसी समय लापरवाही कर रहे हैं। इस कारण से हमारे देश में कोरोना का संक्रमण तेजी से फैल रहा है। हमें यह समझना होगा कि सरकार तभी तक सहायक है, जब हम खुद सावधान हैं। चूंकि यह जंग लंबी चलेगी, इसलिए सबको मिलकर सावधानी से धैर्यपूर्वक इसका सामना करना होगा।
निशा कश्यप, औरंगाबाद, बिहार
यादों में नागार्जुन
पिछले दिनों ज्येष्ठ पूर्णिमा को हमने बाबा नागार्जुन का जन्मदिन मनाया। बाबा का जन्म दरभंगा के तरौनी गांव में हुआ था और अपनी अनोखी लेखनी से उन्होंने देश-दुनिया में नाम कमाया। वह घुमक्कड़ी के शौकीन और फक्कड़ स्वभाव के थे। देखा जाए, तो मनुष्य अनुभवों से ही सीखता है और सीखने की इस प्रक्रिया में यात्राएं अलग मुकाम रखती हैं। यही वजह है कि नागार्जुन की लेखनी में आम लोग थे, उनका दर्द था और उनकी उम्मीदें थीं। उन्होंने खुद एक बार कहा था कि जिसने जनजीवन को नजदीक से नहीं देखा, वह भला अच्छी रचनाएं कैसे कर सकता है? बहरहाल, जिस तरह की उनकी लेखनी सांप्रदायिक और फासीवादी ताकतों के खिलाफ रही, उसकी आज भी हमें जरूरत है। ऐसे कवि कभी नहीं मरते।
गौरव सक्सेना, करमगंज, इटावा
अच्छा फैसला
भारत सरकार ने चीन के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए उसके 59 एप प्रतिबंधित कर दिए। भारत की संप्रभुता और अखंडता के लिए यह एक सराहनीय कदम है। करोड़ों भारतीय इन एप से जुड़े थे, और उनके डाटा के गलत इस्तेमाल की आशंका बढ़ रही थी। टिक टॉक पर तो बच्चे और युवा वीडियो बनाने के इतने आदी हो गए थे कि ज्यादातर किशोरों का वक्त हमेशा मोबाइल पर ही बीतने लगा था। अब चूंकि चीन के प्रति लोगों की भावनाएं बदली हैं, इसलिए सरकार ने भी सुखद फैसला लिया है। ऐसा करके सरकार ने देश की जनता के विश्वास को और अधिक मजबूत किया है। स्वदेश प्रेम की भावना को दृढ़ करके हमें पूरी सकारात्मकता के साथ अपनी सरकार का साथ देना चाहिए।
हरीश कुमार शर्मा, दिल्ली
विकल्प तलाशना जरूरी
हमारी सरकार द्वारा चीनी एप को प्रतिबंधित किए जाने से कुछ तो प्रभाव पडे़गा ही। आखिर हमारे बाजार का उपयोग करके चीन हमारे विरुद्ध ही अपने संसाधनों का इस्तेमाल कर रहा था। कम कीमत और अधिक उत्पादन के कारण चीन की कंपनियां पूरी दुनिया में अपना दबदबा बनाती जा रही हैं। यह एक ऐसी आर्थिक शक्ति है, जिसका हाथ दूसरे देश भी नहीं छोड़ना चाहते। यही कारण है कि भारत के पड़ोसी देश भी चीन के पाले में जाते हुए दिख रहे हैं। पाकिस्तान के बाद अब नेपाल भी कहीं न कहीं भारत के खिलाफ जाने की सोचने लगा है। साफ है, हमें अब हर सीमा पर सावधान रहना होगा। ऐसे में, किसी भी वस्तु का बहिष्कार करने से पहले हमें उसका विकल्प तलाशना होगा। उसके अपने देश में उत्पादन पर ध्यान देना होगा। ऐसा करने पर ही बहिष्कार प्रभावी हो सकेगा। अन्यथा एक बहिष्कार से कोई खास प्रभाव नहीं पड़ेगा।
मोहम्मद आसिफ
जामिया नगर, दिल्ली
ओपिनियन / शौर्यपथ /केंद्र सरकार ने 59 स्मार्टफोन एप को प्रतिबंधित करके चीन के प्रति अपना सख्त रुख दिखाया है। अब तक भारत में भी यही सोच हावी थी कि दोनों देशों का कारोबारी रिश्ता जितना मजबूत होगा, उतनी ही राजनीतिक घनिष्ठता बढ़ेगी, जिससे दोनों मुल्कों का नैसर्गिक विकास होगा। कहा भी जा रहा था कि मौजूदा सदी एशिया की है, जिसमें चीन और भारत मिलकर तरक्की की एक नई इबारत लिख सकते हैं। मगर चीन की हरकतें बताती हैं कि वह इससे इत्तिफाक नहीं रखता। उसकी नजर में यह सदी ‘चीन-केंद्रित’ है, जिसमें भारत की कोई जगह नहीं है। पूर्वी लद्दाख के गलवान का खूनी संघर्ष उसकी इसी सोच का नतीजा था। मगर अब कई चीनी एप पर पाबंदी लगाकर भारत ने साफ कर दिया है कि भारतीय बाजार में चीन की कंपनियों का दखल और सीमा पर खूनी टकराव, दोनों साथ-साथ नहीं चल सकते।
सवाल यह है कि चीन को इससे कितना नुकसान और हमें कितना फायदा होगा? इसके आर्थिक नुकसान का आकलन फिलहाल संभव नहीं है, क्योंकि ज्यादातर एप मुफ्त होते हैं। मगर, उपभोक्ताओं की संख्या बढ़ने से एप पर आने वाले विज्ञापनों से डेवलपर्स (एप बनाने वाली कंपनी) को काफी फायदा मिलता है। चीन अपने यहां से यही लाभ उठाता रहा है। सेंसर टावर के आंकड़े बताते हैं कि 2019 में डाउनलोड किए गए नॉन-गेमिंग एप (खेल से जुड़े एप से अलग) में टिक टॉक सबसे ऊपर था, जबकि शीर्ष 10 एप में छह चीन के थे। चीन ने यह पैठ महज चार वर्षों में बनाई थी, क्योंकि इसी आंकडे़ के मुताबिक, 2015 में अपने यहां अमूमन अमेरिकी एप लोकप्रिय थे। यह देखते हुए कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा खुला बाजार है, केंद्र सरकार के फैसले से चीन को मिलने वाले फायदे में स्वाभाविक तौर पर कमी आ सकती है।
जाहिर है, यह आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ाया गया पहला ठोस कदम है। यह हमारे लिए अवसरों के कई दरवाजे खोल सकता है। संभव है कि आने वाले दिनों में चीन से आयात पर रोक लगे और फिर, उन उत्पादों का स्वेदशी निर्माण हो। दरअसल, चीन किसी भी देश के बाजार में इसलिए दबदबा बनाता रहा है, क्योंकि उसके उत्पाद सस्ते होते हैं। प्रतिस्पद्र्धा खुले बाजार की मांग है, पर चीन की कंपनियां अपने सरकार द्वारा मिलने वाले प्रोत्साहन की वजह से उत्पादों की कीमतें अपेक्षाकृत कम रखती हैं। चीन की सरकार अपनी कंपनियों को सब्सिडी देकर दूसरे देश के बाजारों में पैठ जमाने में मदद करती है, और यह सुविधा सरकारी ही नहीं, निजी कंपनियों को भी हासिल है। नतीजतन, चीनी कंपनियां अन्य देशों के बाजार पर कब्जा करने में सफल रही हैं। भारत में भी उनके बढ़ते दबदबे की वजह यही है। यहां मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक ही नहीं, इन्फ्रास्ट्रक्चर में भी चीन की कंपनियां ठेके हासिल कर रही हैं। ऐसे में, यदि भारतीय बाजार के दरवाजे उनके लिए बंद हो जाते हैं, तो उनकी आर्थिक सेहत को काफी चोट पहुंचेगी।
चीनी एप पर जासूसी के आरोप बेजा नहीं हैं। हमें यह तो नहीं पता कि अपने एप के माध्यम से चीन ने अब तक हमारी कितनी जानकारियां हासिल कर ली हैं, मगर वह किस तरह से हमारा डाटा इकट्ठा कर रहा है, इसे कैमस्कैनर नामक एक एप के उदाहरण से समझा जा सकता है। इस एप से हम जिस दस्तावेज को स्कैन करते हैं, वह भारत से बाहर चीनी कंपनी के सर्वर पर सेव हो जाता है। इसका अर्थ है कि कैमस्कैनर से स्कैन की गई कोई जानकारी गोपनीय नहीं रहती। संभवत: इन्हीं वजहों से साल 2017 में रक्षा मंत्रालय ने अपने अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए चीन से संचालित 42 एप के इस्तेमाल पर पाबंदी लगा दी थी। कहा तो यह भी जाता है कि चीन ने अपनी डिजिटल इंडस्ट्री अमेरिका से चोरी करके तैयार की है। चीन पर जासूसी करने का आरोप पिछले दिनों अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार रॉबर्ट सी ओब्रेन ने भी लगाया है। 26 जून को दिए गए अपने एक वक्तव्य में उन्होंने बताया है कि किस तरह चीन से आने वाले छात्र अमेरिकी विश्वविद्यालयों से गे्रजुएट करने के बाद अमेरिकी कंपनियों में काम हासिल करते हैं और यहां की तकनीक चुराकर चीन ले जाते हैं।
साफ है, केंद्र सरकार के ताजा फैसले से न सिर्फ हम अपने डाटा को सुरक्षित रखने में सफल हो सकेंगे, बल्कि भारतीय एप को भी इससे प्रोत्साहन मिलेगा। तमाम क्षेत्रों में चीन पर बढ़ी हमारी निर्भरता को कम करने की भी यह एक अच्छी शुरुआत है। हालांकि, हमारे स्टार्ट-अप में चीन का काफी निवेश है, इसलिए बायकॉट और पाबंदी के इतर हमारी कोशिश यह भी होनी चाहिए कि चीनी निवेशकों को हतोत्साहित करें। इसके लिए हमें आने वाले समय में बाजार या निवेश में अपनी हिस्सेदारी बढ़ानी होगी और चीन की हिस्सेदारी कम करनी होगी। पिछले पांच वर्षों में जिस तरह से हमारी साइबर दुनिया में चीन का दखल बढ़ा है, उसी तरह से अगले पांच साल में उसे कम करने का लक्ष्य हमें बनाना होगा।
जरूरत चीन का विकल्प खोजने की भी है। हरेक क्षेत्र में हमें उसका तोड़ निकालना होगा। चीन से यदि हम अपना आयात रोकते हैं, तो हमें उन उत्पादों को अपने यहां बनाना होगा या फिर दूसरे देशों से उनका आयात करना होगा। इलेक्ट्रॉनिक चीजों के आयात के लिहाज से दक्षिण कोरिया, ताइवान और जापान जैसे देश चीन का विकल्प बन सकते हैं।
चीन का दबदबा घटाना इसलिए भी जरूरी है, क्योंकि यह स्थानीय विकल्पों को खत्म कर देता है। जैसे, चीन की ज्यादातर इन्फ्रास्ट्रक्चर कंपनियां सरकारी हैं, इसलिए सरकारी प्रोत्साहन पाकर वे बहुत कम कीमतों में ढांचागत निर्माण करती हैं। इससे स्थानीय कंपनियों का काम सिमटने लगता है। यह परंपरा अब बंद हो जानी चाहिए। चीन को आर्थिक चोट पहुंचाने की शुरुआत करके भारत सरकार ने यह साफ कर दिया है कि सीमा पर तनाव का जवाब सिर्फ बंदूक नहीं है।
(ये लेखक के अपने विचार हैं)प्रांजल शर्मा, डिजिटल नीति विशेषज्ञ
दुर्ग / शौर्यपथ / आज सुबह 6:30 बजे प्रारंभ हुई तेज बारिश से शहर की निचली बस्तियों में तेजी से पानी भरने की सूचना जैसे ही मिली महापौर धीरज बाकलीवाल ने तत्काल निगम की टीम को लेकर अधिकारियों के साथ मौके का मुआयना किया जहां-जहां पानी भराव की स्थिति थी निकासी की व्यवस्था कराएं । इसके अंतर्गत सिंधी कालोनी,रायपुर नाका,पद्मनाभपुर,शंकर नगर क्षेत्र, गुरुद्वारा के पीछे अग्रेसन चौक के पास महात्मा गांधी मार्केट, मालवीय नगर,प्रेम नगर सिकोला बस्ती की नालियों, नाला की स्थिति का जायजा लिया ।
जिला कलेक्टर सर्वेश्वर नरेन्द्र भूरे ने निगम आयुक्त इंद्रजीत बर्मन के साथ बारिश से जलभराव वाली स्थलों का भ्रमण कर जायजा लिया । उन्होंने गिरधारी नाला शंकर नाला संतरा बाड़ी सदानी नगर आदि क्षेत्रों का भ्रमण कर पानी निकासी की व्यवस्था करने निगम के स्वास्थ्य विभाग के दल को निर्देश दिए । बारिश के पानी का प्रवाह तेज था और दबाव भी इसके चलते दुर्गा चौक शंकर नगर क्षेत्र में के कुछ गली और बस्तियों में नाला से नीचे जगह होने के कारण पानी का भराव वहां हो गया था । भ्रमण के दौरान जहां भी पानी भरने की समस्या आईइस संबंध में जिला कलेक्टर श्री भूरे के निर्देश पर आयुक्त श्री भ्रमण द्वारा आने वाले समय के लिए जलभराव ना हो इसकी कार्य योजना बनाने की बात बताई गई। शहर के नालियों और नाला का मेहता सफाई होने के कारण 2 घंटे लगातार बारिश होने के बावजूद कहीं पर भी अधिक देर तक घरों में पानी भरने की समस्या नहीं आई डेढ़ से 2 घंटे के अंदर पानी का बहाव से पूरा क्षेत्र खाली हो गया ।
महापौर बाकलीवाल ने बताया सुबह के समय जैसे ही बारिश चालू हुई उसके आधे घंटे के बाद से लगातार अनेक बस्तियों से मुझे सूचना मिली वे निगम की टीम को लेकर तत्काल मौके पर पहुंचे । उन्होंने निगम अधिकारियों ईई मोहनपुरी गोस्वमी,जितेंद्र समैया,आरके पालिया के साथ भ्रमण कर शहर के किसी भी नाली और नाला में जाम की स्थिति ना हो इसका ध्यान रखने निर्देश विभागीय अधिकारी को दिए। साथ ही जलभराव से बचाव का स्थायी समाधान हेतु विस्तृत कार्य योजना तैयार करने निर्देश दिये । उन्होंनें न्यू पुलिस लाइन नाले के पानी के प्रवाह को कम करने नाले में बने एनीकेट के वाल को बंद करवा कर तालाब में पानी को डायवर्ट करवाया ।
उन्होनें ,उरला,दीपक नगर,आदर्श नगर, मुक्त नगर, केलाबाड़ी, कसारीडीह के अलावा अन्य जगहों के मुख्य नालाओं व बस्तियो का भी भ्रमण किए। इस दौरान पूर्व महापौर आर. एन वर्मा पूर्व सभापति राजकुमार नारायणी पार्षद सतीश देवांगन विजेन्द्र भारद्वाज काशीराम कोसरे, आयुष शर्मा,अजय मिश्रा,हेमंत तिवारी एव अन्य मौजूद थे।
दुर्ग / शौर्यपथ / सहकारी बैंक के संचालक मंडल की अहम बैठक आज जिला सहकारी बैंक के मुख्यालय में हुई। यहां लोन प्रकरणों की स्वीकृति के संबंध में विस्तृत चर्चा की गई। बैठक में कलेक्टर ने कहा कि पशुपालन के लिए एवं ग्रामीण विकास के अन्य कार्य के लिए किसानों द्वारा कार्य करने की इच्छा जताई जाती है। बैंक इस ओर उन्हें प्रेरित करें। ऐसे मामलों में बैंक की गाइडलाइन के मुताबिक बैंक ऋण आवेदन स्वीकार करें और इन पर उचित निर्णय कर इस संबंध में आवश्यक कार्रवाई करें। बैठक में कलेक्टर ने कहा कि पशुधन को आगे लाने से खेती किसानी बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि किसानों की आय को बढ़ाना है तो पशुधन की ओर उन्हें प्रोत्साहित करना होगा।
पशुपालन के साथ मछलीपालन के लिए भी प्रोत्साहित करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि क्रेडिट उपलब्ध होने से किसान इन चीजों की ओर आगे बढ़ते हैं। हमें किसानों को प्रोत्साहित करना है और उनकी राह आसान करनी है। जिले में हम किसानों को प्रगतिशील उद्यमों को अपनाने की सलाह दे रहे हैं। इसके लिए बैंक की मदद भी आवश्यक होगी। इस तरह के मामलों में ऋण आसानी से मिलने से किसानों की राह आसान हो जाती है। बैठक में बैंक के सावधि जमा के ब्याज दरों से संबंधित एवं बैंक के अन्य मुद्दों पर भी चर्चा हुई।
भिलाई / शौर्यपथ / आचार्य नरेंद्र देव स्मृति जन अधिकार अभियान समिति रूआबांधा भिलाई ने एचएससीएल भिलाई के वर्तमान जनरल मैनेजर एसके सिन्हा पर भिलाई स्टील प्लांट के टेंडर में अनियमितता बरते जाने का आरोप लगाया है। समिति के संयोजक आर पी शर्मा ने इस संबंध में पीके गुप्ता अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक एनबीसीसी इंडिया लिमिटेड नई दिल्ली और राजेंद्र चौधरी प्रबंध निदेशक एचएससीएल को विस्तृत पत्र लिखकर शिकायत की है और दोनों टेंडर की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। आर पी शर्मा ने अपने पत्र में कहा है कि एनबीसीसी इंडिया लिमिटेड में विलय के बाद ऐसा लगा कि एचएससीएल का भविष्य उज्ज्वल होने वाला है, जिसमें कंपनी के ठेका मजदूर का भला हो सकता है। लेकिन यहां के मौजूदा मैनेजमेंट की कारगुजारियों से ऐसा प्रतीत होता ही नहीं है। यहां पदस्थ जनरल मैनेजर एसके सिन्हा अपने चाहने वाले लोगों का आर्थिक हित येनकेन प्रकारेण साधने में लगे हैं।
ऐसे ही दो मामले हैं, जिन पर एनबीसीसी मैनेजमेंट को तत्काल संज्ञान लेने की जरूरत है। उन्होंने बताया कि भिलाई इस्पात संयंत्र की यूनिवर्सल रेल मिल से जुड़ा टेंडर (एनआईटी नंबर 873) जानबूझ कर एचएससीएल ने अपने चहेते ठेकेदार के लिए न सिर्फ छोड़ा बल्कि गंभीर मामला यह है कि इसके लिए एचएससीएल के लेटरहेड, जीएम के सील व साइन को भी कथित तौर पर बेच दिया है। टेंडर छोडऩे की इस प्रवृत्ति से साफ जाहिर होता है कि भिलाई स्टील प्लांट के ठेका माफियाओं के साथ मिल कर यह आर्थिक हित साधने यह कृत्य किया गया है। इसमें कितना आर्थिक लेनदेन हुआ है, यह जांच का विषय है।
इसी तरह भिलाई स्टील प्लांट की रेल एंड स्ट्रक्चरल मिल से जुड़ा टेंडर (एनआईटी नंबर-745) टेंडर एचएससीएल ने लिया है। ऐसा प्रतीत होता है कि इस टेंडर में भी आर्थिक उपार्जन के लिए अपने ठेकेदार को ठेका दिलाने जीएम व्याकुल है। जबकि बीएसपी टेंडर लेने के बाद एचएससीएल को ओपन टेंडर करना है। उन्होंने कहा कि एचएससीएल में रजिस्टर्ड कांट्रेक्टर हैं, तो इनको ओपन टेंडर करना चाहिए लेकिन यहां भी अपने मनमाफिक चहेते ठेकेदार को देने की योजना बनाई जा रही है। अगर ऐसा होता है तो यह गंभीर रूप से भ्रष्टाचार की श्रेणी में आएगा।
आर पी शर्मा ने अपने पत्र में कहा है कि मौजूदा मैनेजमेंट को एचएससीएल और इस कंपनी में काम करने वाले लोगों की परवाह नहीं है, वो अपना आर्थिक उपार्जन करने की फिराक में लगे हुए हैं। उन्होंने मांग की है कि रेल एंड स्ट्रक्चरल मिल का टेंडर ओपन पद्धति से किया जाए और यूनिवर्सल रेल मिल का जो टेंडर छोड़ा गया है, उसे किस ठेकेदार को दिया गया है उसकी पूरी जांच हो। यह इसलिए आवश्यक है क्योंकि प्रधानमंत्री भ्रष्टाचार को लेकर जीरो टालरेंस की बात करते हैं और उनके अधीन यह सारी अनियमितताएं हो रही है। इसलिए इस पर एनबीसीसी मैनेजमेंट को सख्त कदम उठाने की जरूरत है।
सेहत / शौर्यपथ / कोरोना काल में लोग अपने शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए सारे जतन कर रहे हैं। आयुर्वेदिक जड़ी बूटियों का खूब इस्तेमाल कर रहे हैं। दालचीनी, तुलसी, गिलोय, काली मिर्च, सोंठ आद की खूब डिमांड है। पहले की तुलना में इस वक्त इनकी खपत बढ़ गई है।
डॉक्टरों के मुताबिक जिन लोगों के शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता अधिक है, वह कोरोना वायरस से बचे हैं। इसीलिए लोग अब अपने शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के लिए पूरी तरह जुटे हैं। आयुर्वेदिक दवाओं एवं जड़ी बूटियों का इस्तेमाल कर रहे हैं। आमतौर पर खाने में इस्तेमाल होने वाली दालचीनी एवं काली मिर्च का लोग जोशांदा या काढ़ा बनाकर भी पी रहे हैं। खाने में भी इसका खूब इस्तेमाल किया जा रहा है। बाजार में सोंठ की बिक्री भी बढ़ गई है। लोग इसका इस्तेमाल कई तरह से कर रहे हैं। तुलसी का उपयोग चाय या फिर काढ़ा में किया जा रहा है। गिलोय को भी लोग पानी में उबालकर पी रहे हैं। दुकानदार अहमद रशीद बताते हैं कि पहले इन सामग्रियों की बिक्री बहुत कम होती थी, लेकिन माहभर से इनकी डिमांड बढ़ गई। लोग अधिक मात्रा में आकर ले जा रहे हैं। डिमांड अधिक होने से कीमत भी बढ़ी हुई है। डॉक्टर भी इन सामग्रियों को रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में कारगर बता रहे हैं। घरों में चाय की जगह काढ़ा: कोरोना की वजह से कई घरों में देखने को मिल रहा है कि वहां सुबह-शाम चाय की जगह काढ़ा ही बनाया जा रहा है। बुजुर्ग से लेकर बच्चों तक सभी को इसे पीने के लिए दिया जा रहा है। मां-बाप बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए दूध में हल्दी भी डालकर दे रहे हैं।
दालचीनी, तुलसी, गिलोय, काली मिर्च, सोंठ के सेवन से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि होती है। इसके उपयोग से कोई नुकसान नहीं है। प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए आयुष मंत्रालय ने भी जड़ी बूटियों का फार्मूला भेजा है। इनमें उक्त सामग्रियां भी शामिल हैं। इन सब के साथ अगर लोग गुनगुने पानी का भी सेवन करें तो ज्यादा फायदेमंद होगा।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
