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ओपिनियन / शौर्यपथ / तीन महीने के देशव्यापी लॉकडाउन और अनलॉक-1 के दौरान केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा भ्रम पैदा करने वाले और विस्मयकारी आदेशों की जो बौछार की गई, वह सरकार और आम लोगों के बीच कोविड-19 से संबंधित संवाद का शुरुआती तरीका था। इन आदेशों में लोगों के दैनिक जीवन के हर पहलू को लेकर निर्देश जारी किए गए। मगर जैसे ही लॉकडाउन हटा और संक्रमण के मामले तेज होने लगे, उससे यह स्पष्ट हो गया कि ये ‘आदेश’ महामारी की रोकथाम के अपने लक्ष्य को नाममात्र हासिल कर पाए। ऐसे आदेशों ने एक ऐसी नीतिगत दृष्टि को बल दिया, जिससे कोविड-19 की रोकथाम में नियमों के अनुपालन में कड़ाई करने का विशेषाधिकार मिलता है।
बेशक, कोविड-19 को नियंत्रित करने के लिए राष्ट्र आपको ‘आदेश’ देगा, आपको अनुशासित करेगा (कई जगह लॉकडाउन डंडे के जोर पर लागू किया गया) और आपकी निगरानी करेगा (तकनीक का इस्तेमाल करते हुए)। मगर, विश्व स्तर पर सार्वजनिक भागीदारी एक महत्वपूर्ण घटक है, जो लोगों की सेहत को संवारने में मदद करती है। इसकी पुष्टि कोई भी सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ कर सकता है। पर इसके लिए जरूरी है कि नागरिकों और राष्ट्र के बीच विश्वास का रिश्ता कायम हो। भारत में कोविड-19 के खिलाफ जो रणनीति अपनाई जा रही है, उसमें इसी विश्वास की कमी है। ऐतिहासिक रूप से नौकरशाही का जो ढर्रा है, वह राष्ट्र और नागरिकों के रिश्ते में अविश्वास पैदा करता रहा है। कोविड-19 के खिलाफ जंग में यह अविश्वास तीन अलग-अलग रूपों में देखा गया है।
पहला है प्रशासनिक संवाद, जिसके माध्यम से अंतहीन आदेश कानूनन लागू किए गए। नृवंशविज्ञानियों की मानें, तो अविश्वास की यह संस्कृति उपनिवेशवादी शासन-व्यवस्था की देन है। देश में स्थानीय नौकरशाही पर अपने शोध में मैंने भी नौकरशाही के रोजमर्रा के कामकाज पर ‘सरकारी आदेश’ का गहरा नियंत्रण देखा है। आदेशों का अनुपालन प्राथमिक तरीका है, जिसके माध्यम से वरिष्ठ अपने अधीनस्थों की निगरानी करते हैं। आदेशों का पालन न करने पर अन्य आदेशों और दंड का भी प्रावधान किया गया है। कोविड-19 का सामना करते हुए नौकरशाही आदेश देने के अपने उसी परिचित तरीके पर निर्भर दिखी। यह जनता से संवाद का उनका आम तरीका बन गया है, फिर चाहे इससे लोगों में भ्रम और खौफ ही क्यों न पैदा हो।
दूसरा है, राहत प्रतिक्रिया। ऐतिहासिक रूप से, अविश्वास की वजह से नौकरशाहों और नागरिकों के बीच रोजाना अनगिनत आदेश जारी होते हैं। आज राशन कार्ड, मतदाता पहचान पत्र जैसे दस्तावेज यह निर्धारित करने की कुंजी बन गए हैं कि कोई नागरिक राहत-उपायों के लाभ का पात्र है या नहीं। और यह दायित्व नागरिकों पर ही होता है कि वे इन दस्तावेजों को पेश करें और अपनी पात्रता साबित करें। अनेक नागरिकों के पास ऐसे दस्तावेजों का न होना ऐसा महत्वपूर्ण कारक है, जिसके आधार पर लॉकडाउन की चरम स्थिति में भी प्रवासी श्रमिकों को खाद्यान्न उपलब्ध कराने में नौकरशाही खुद को असमर्थ बताती रही। ज्यादातर नागरिकों की मानें, तो राष्ट्र उनकी जरूरतों को पूरा करने में नाकाम रहा, इसने अविश्वास की खाई को और गहरा किया।
तीसरा, स्वास्थ्य प्रतिक्रिया। इस मोर्चे पर विश्वास की कमी एक और बड़ी चुनौती बन गई है। चूंकि महामारी के प्रसार को थामने और इलाज को लेकर तमाम तरह की उलझनें होती हैं, इसलिए सार्वजनिक स्वास्थ्य के मोर्चे पर जन-भागीदारी की जरूरत बढ़ जाती है। यह भागीदारी इसलिए भी अहम है, ताकि लक्षण का पता लगाकर जल्द ही जरूरतमंदों को इलाज की सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें। लंबे समय तक मानव व्यवहार में बदलाव (मास्क का इस्तेमाल और शारीरिक दूरी का पालन) को सुनिश्चित करने के लिए सहभागिता बहुत जरूरी है। स्वास्थ्य अर्थशास्त्री जिष्णु दास एक साक्षात्कार में कहते हैं कि कोविड-19 के खिलाफ सरकार व लोगों को एक साथ मिलकर काम करने की जरूरत है। कई संक्रामक रोगों के समय देश ऐसा करने में विफल रहा है। आज कोविड-19 हमारे सामने दोहरी चुनौती पेश कर रहा है।
पहली, इसमें कलंक व भय का दूर-दूर तक विस्तार हुआ है। मीडिया रोजाना बता रहा है कि समाज किस तरह कोविड-19 के मरीजों के साथ भेदभाव करता है। उनको लांछित किया जाता है। भारत की राजनीति ने इसे और बढ़ाने का काम किया है। तब्लीगी जमात की घटना में एक समुदाय विशेष को दोषी ठहराने से ऐसा माहौल बना, जिसमें रोगियों की देखभाल पर जोर देने की बजाय उन्हें कलंकित करने का चलन शुरू हो गया।
दूसरी, भारत का सार्वजनिक स्वास्थ्य तंत्र लंबे समय से यह विश्वास दिलाने में नाकाम रहा है कि नागरिकों को सस्ती व गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधा मुहैया कराने की क्षमता उसके पास है। विडंबना यह है कि अधिकतर भारतीयों का भरोसा अनौपचारिक निजी चिकित्सा क्षेत्र पर है। फिर भी, जब बात कोविड-19 की आती है, तो जांच से इलाज तक सरकार ही पूरी तरह जिम्मेदार दिखती है। यह जरूरी भी है। चूंकि संक्रामक रोगों में तमाम तरह के ऐसे बाहरी कारक होते हैं, जिनका बोझ गरीबों पर ही पड़ता है, इसीलिए इसमें सरकारी हस्तक्षेप अनिवार्य हो जाता है। मगर सरकार पर विश्वास की कमी के कारण बीमार लोग छिपने-बचने के प्रयास भी करते हैं, क्योंकि वे सरकारी अस्पतालों में इलाज नहीं कराना चाहते। यही वजह है कि दिल्ली जैसे शहर में महज इस फैसले ने तस्वीर बदल दी कि बिना लक्षण या कम लक्षण वाले मरीज घर में ही क्वारंटीन हो सकते हैं।
जाहिर है, सरकार इन तमाम चुनौतियों से बच नहीं सकती। जरूरी है कि सार्वजनिक स्वास्थ्य तंत्र पर लोगों के विश्वास को बढ़ाने की तरफ ध्यान दिया जाए। आदेशों के बार-बार प्रयोग, डाटा की कमी, केंद्र व राज्य स्तर पर निर्णय लेने में पारदर्शिता का अभाव आदि परस्पर विश्वास की राह की बड़ी बाधाएं हैं। इन्हें दूर करने की जरूरत है। समुदायों में विश्वसनीय रूप से पहुंच बनाने के लिए भी तंत्र को संजीदा प्रयास करने होंगे। धारावी में सरकार की यह कोशिश कारगर रही। मगर इन सफलताओं को भरोसे की कमी की व्यापकता के संदर्भ में भी देखने की जरूरत है। यदि इसे सरकार और सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ समझ लें, तो हम ऐसी टिकाऊ और समाजोन्मुखी दृष्टि को अपना सकेंगे, जिससे भारत कोविड-19 के खिलाफ कामयाब मुकाबला कर सकेगा।
(ये लेखिका के अपने विचार हैं)यामिनी अय्यर, अध्यक्ष और मुख्य कार्यकारी, सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च
शौर्यपथ स्वास्थ्य / कोलेस्ट्रोल अगर ज्यादा हो तो शरीर को नुक्सान पहुंचा सकता है इससे हार्ट अटैक जैसी जानलेवा बिमारी का भी सामना हो सकता है . आज के युग में स्वस्थ शरीर ही आपकी रक्षा कर सकता है आपको जीने की राह दिखा सकता है अगर आप स्वस्थ रहे तो सब अच्छा लगेगा अगर आप अस्वस्थ रहे तो सब बुरा . इस लिए जरुरी है कि अपनी दिनचर्या में ऐसे पदार्थ का सेवन करे जो आपके कोलेस्ट्रोल को नियंत्रित और शारीर की मानक के अनुसार संतुलित रखे और आप स्वस्थ रहे .
हमारे खान-पान का सीधा असर हमारे शरीर पर पड़ता है। दिल की बीमारियों का सीधा संबंध कोलेस्ट्रॉल से है। कोलेस्ट्रॉल शरीर के लिए जरूरी है लेकिन कलेस्ट्रॉल बढ़ जाने से हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। शरीर में गुड कोलेस्ट्रॉल और बैड कोलेस्ट्रॉल दोनों ही पाए जाते हैं। अपने खानपान में थोड़ा सा बदलाव करके आप शरीर में बैड कलेस्ट्रॉल की मात्रा को घटाकर गुड कलेस्ट्रॉल की मात्रा को बढ़ा सकते हैं। हम आज आपको बता रहे हैं कुछ ऐसी चीजों के बारे में जिनका सेवन करने से आपका बैड कलेस्ट्रॉल कम हो सकता है:
1. ऑलिव ऑयल
कलेस्ट्रॉल सबसे ज्यादा तेल की वजह से बढ़ता है। ऑलिव ऑयल के इस्तेमाल से सामान्य तेल की अपेक्षा 8 प्रतिशत तक कलेस्ट्रॉल कम किया जा सकता है।
2. ओट्स
ओट्स में फाइबर पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है और इसमें बीटा ग्लूकॉन भी होता है जो आंतों की सफाई करता है और कब्ज से राहत दिलाता है। नियमित तौर पर नाश्ते में ओट्स खाने से शरीर में कलेस्ट्रॉल को लगभग 6 प्रतिशत तक कम किया जा सकता है।
3. मछली
मछली में ओमेगा 3 फैटी ऐसिड पाया जाता है। स्वस्थ रहने के लिए सप्ताह में दो बार स्टीम्ड या ग्रिल्ड मछली खा सकते हैं।
4. अलसी
अलसी के बीज कलेस्ट्रॉल को कम करने में काफी मददगार होते हैं। बेहतर होगा कि आप साबुत बीज की जगह पर पिसे हुए बीज का सेवन करें।
5. ग्रीन टी
ग्रीन टी कलेस्ट्रॉल को कम करने में काफी सहायक होती है।
6. धनिया के बीज
धनिया की बीजों के पाउडर को एक कप पानी में उबालकर दिन में दो बार पीने से भी कलेस्ट्रॉल कम होता है।
7. प्याज
हाई कलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने में लाल प्याज काफी फायदेमंद होता है। एक चम्मच प्याज के रस में एक चम्मच शहद मिलाकर सेवन करें।
8. आंवला
एक चम्मच सूखे आंवला के पाउडर को एक गिलास गर्म पानी में मिलाकर सुबह-सुबह पीने से कलेस्ट्रॉल कम होता है।
9. सेब का सिरका
सेब का सिरका हमारे शरीर के टोटल कलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड के लेवल को कम करता है।
10. संतरे का जूस
हाई कलेस्ट्रॉल को प्राकृतिक रूप से कम करने के लिए नियमित तौर पर तीन कप संतरे के जूस पिएं।
11. नारियल का तेल
कलेस्ट्रॉल कम करने के लिए रोज खाने के साथ आर्गेनिक नारियल के तेल का एक से दो चम्मच इस्तेमाल करें। रिफाइंड या प्रोसेस्ड नारियल के तेल का इस्तेमाल न करें।
12. मूंगफली
रोज 50 ग्राम मूंगफली के दाने खाने से कलेस्ट्रॉल को कम किया जा सकता है।
13. अखरोट
सुबह उठकर 2-3 अखरोट नियमित तौर पर खाने से कलेस्ट्रॉल पर नियंत्रण पाया जा सकता है।
14. बादाम
4-5 बादाम रोज खाने से भी कलेस्ट्रॉल कम होता है। बेहतर होगा कि शाम को बादाम भिगो दें और सुबह उनका सेवन करें।
15. पिस्ता
रोज पिस्ता खाने से भी कलेस्ट्रॉल कम होता है।
16. रेड वाइन
सप्ताह में में 2 बार थोड़ी सी रेड ग्रेप वाइन पीकर भी आप कलेस्ट्रॉल को कम कर सकते हैं।
17. अंकुरित दालें
राजमा, चने, मूंग, सोयाबीन और उड़द इत्यादि को अंकुरित कर सलाद के तौर पर इस्तेमाल करें तो भी कलेस्ट्रॉल कम होगा।
18. डार्क चॉकलेट
डार्क चॉकलेट में पाए जाने वाले एंटी-ऑक्सीडेंट्स से रक्त नलिकाएं मजबूत बनती हैं। इसका सेवन करने से भी कलेस्ट्रॉल कम हो सकता है।
19. हरी पत्तेदार सब्जियां
हरी पत्तेदार सब्जियों में विटामिन ए,बी और सी के अलावा आयरन और कैल्शियम भी पाया जाता है। इनका सेवन करने से कलेस्ट्रॉल कम होता है।
20. लहसुन
लहसुन का नियमित सेवन करके भी बैड कलेस्ट्रॉल को कम किया जा सकता है।
21. चोकर वाली रोटी
बिना चोकर अलग किए गए आटे से बनाई गईं रोटी से भी आप अपना कलेस्ट्रॉल कम कर सकते हैं।
22. सोयाबीन
सोयाबीन से बनी चीजें जैसे सोया मिल्क, सोया दही, सोया टोफू, सोया चंक्स आदि चीजों को अपने खाने में शामिल करें। इससे आपका कलेस्ट्रॉल कम होगा।
23. सूर्यमुखी
सूर्यमुखी (सूरजमुखी) के तेल और बीज में अनसैचुरेटेड पॉली फैटी एसिड पाया जाता है जो कि कलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने में काफी लाभकारी है।
24. डेयरी उत्पाद
दूध, दही, छांछ आदि को अपनी डायट में शामिल करें। फैट-फ्री डेयरी प्रॉडक्ट्स का इस्तेमाल करें।
25. लाल मांस
लाल मांस में पॉलीसैचुरेटेड फैटी ऐसिड पाया जाता है, जो कि हानिकारक कलेस्ट्रोल के निर्माण को रोकता है।
यह सभी उत्पाद प्राकृतिक है किन्तु मानव शरीर में ऐसे कई खाद्य पदार्थ है जिससे कई इंसानों को एलर्जी होती है अतः इन सब का सेवन करने के पहले एक बार चिकित्सक से सलाह अवश्य ले और अपनी सेहत को चुस्त तंदरुस्त रखे ..
शौर्यपथ विचार / गाय का गोबर कई मायनों में हिन्दू धर्म के लिए अलग अलग महत्तव रखता है . घर के आँगन में गोबर की लिपाई , पूजा स्थल में गोबर से लिपना शुभ माना जाता है . गाय के गोबर से ईंधन का उपयोग प्रदुषण के लिए अन्य ईंधनो की अपेक्षा कम हानिकारक है , जमीन की उपजाऊ क्षमता की बढ़ोतरी गाय के गोबर से बने खाद से बढती है , गोबर गैस से ईंधन का निर्माण किया जा सकता है , गोबर से पेपर , गमले , अगरबत्ती आदि कई उपयोगी वस्तुओ का निर्माण किया जाता है जो स्वास्थ्य के लिए भी लाभप्रद है . ऐसे कई उपयोगी वस्तुओ के लिए गोबर एक महत्तवपूर्ण पदार्थ है .
ऐसी ही कई परिकल्पना को जमीनी स्तर पर लाने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार ने गोबर का क्रय करने की योजना शुरू की चूँकि ये योजना कांग्रेस नीत सरकार ने शुरू की तो इसे नीचा दिखाने की कसार विपक्ष भला कैसे भूल सकती है और गोधन न्याय योजना के शुरू होते ही शुरू हो गयी विपक्ष की अनगर्ल तथ्यहीन विरोध की वाणी किन्तु विपक्ष इस विरोध में ये भी भूल गए कि गोबर से निर्मित उत्पाद के लिए केंद्र सरकार ने पहले भी कई योजनाये बनाई और स्वरोजगार के लिए प्रोत्साहित भी किया साल २०१८ में केन्द्रीय मन्त्रिय गिरिराज ने 12 सितंबर को कुमारप्पा नेशनल हेंडमेड पेपर इंस्टीट्यूट में गोबर से बने पेपर कैरी बैग को लॉन्च किया था। छत्तीसगढ़ की भूपेश सरकार ने गोबर क्रय करने का निर्णय लेकर छोटे छोटे रोजगार के अवसर तो प्रदान किये साथ ही उन लोगो की नींद भी उड़ा दी जो खाद व उर्वरक के नाम पर प्रतिवर्ष करोडो का मुनाफा करते है किन्तु जमीन की उर्वरक शक्ति को खत्म करने में भी अपरोक्ष रूप से अपना योगदान देते है . सरकार के द्वारा गोबर कराया करने से कई तरह के उत्पाद तो तैयार होंगे ही जो पर्यावरण के लिए तो फायदेमंद रहेंगे ही वही जमीनों की पैदावार क्षमता को भी जैविक खाद के रूप में बढ़ाएंगे . प्रकृति को संतुलन रखने के लिए ऐसे कदम सराहनीय है जो भविष्य में रोजगार के अवसर तो प्रदान करेंगे ही . आत्मनिर्भरता के मोदी सरकार के प्रयासों पर भी पंख लगेंगे . खैर विपक्ष के तथ्यहीन विरोध को दरकिनार करते हुए प्रदेश सरकार ने गोधन न्याय योजना की शुरुवात तो कर ही दी है और सरकार इस गोधन ( गोबर ) का किस तरह उपयोग करती है ये भी धीरे धीरे स्पष्ट हो जायेगा .
आइये हम बताते है गोबर का उपयोग रोजगार के किस किस क्षेत्र में आमदनी बढाने के लिए किया जा सकता है जिस पर केंद्र सरकार भी गंभीर है सिवाय अंध भक्ति से लिप्त लोगो के ....
अगर आप गाय के गोबर से पैसा कमाना चाहते हैं तो केंद्र सरकार आपका सहयोग करने को तैयार है। कुमारप्पा नेशनल हैंडमेड पेपर इंस्टीट्यूट में गाय के गोबर से पेपर बनाने की विधि इजाद की गई है। इस विधि को अब 'प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम' के तहत आम लोगों तक पहुंचाने की तैयारी की जा रही है। मतलब अब आप भी इस प्लांट को लगाकर गोबर से पैसे बना सकते हैं। जयपुर स्थित कुमारप्पा नेशनल हैंडमेड पेपर इंस्टीट्यूट (केएनएचपीआई) के डायरेक्टर ए.के. गर्ग ने गांव कनेक्शन से बताया, ''गाय के गोबर से हैंडमेड पेपर तैयार किया जा रहा है। इस पेपर की क्वालिटी बहुत अच्छी है। इससे कैरी बैग भी तैयार किया जा रहा है। जैसा की प्लास्टिक बैग बैन हो रहे हैं, ऐसे में पेपर के कैरी बैग अच्छा विकल्प हैं।'
'' ए.के गर्ग इस प्लांट की लागत पर कहते हैं, ''ये तो क्वांटिटी (मात्रा) पर निर्भर करता है। 5 लाख से लेकर 25 लाख तक में प्लांट लगाए जा सकते हैं। चूंकि ये हैंडमेड पेपर हैं तो इससे हर प्लांट में कुछ लोगों को रोजगार भी मिलेगा। अगर 15 लाख में कोई प्लांट लगाता है तो इसमें 10 से 12 लोगों को रोजगार मिल सकता है।''
एमएसएमई मंत्रालय के तहत काम करने वाली हैंडमेड पेपर एंड फाइबर इंडस्ट्री के डायरेक्टर के.जे. भोसले ने बताया, ''गोबर से पेपर बनाने की विधि से रोजगार मिल सकेगा। इससे पेपर के अच्छे कैरी बैग बनने की जानकारी मिली है। जयपुर के केएनएचपीआई में तो इसकी शुरुआत भी हो गई है। जिसे भी ये प्लांट लगाना हो वो एक बार जयपुर में बन रहे पेपर के कैरी बैग को देख सकता है। इससे उसे प्रोत्साहन भी मिलेगा।'

केंद्रीय मंत्री ने किया था लॉन्च (२०१८)
इससे पहले केंद्रीय सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) मंत्री गिरिराज सिंह ने 12 सितंबर को कुमारप्पा नेशनल हेंडमेड पेपर इंस्टीट्यूट में गोबर से बने पेपर कैरी बैग को लॉन्च किया था। इस दौरान उन्होंने कहा, ''गाय के गोबर से बने उत्पाद गुणवत्ता में बेहतर हैं और किफायती भी हैं. देशभर में इन्हें पसंद किया जा रहा हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सोच का ही परिणाम हैं कि किसान गाय के गोबर से भी पैसा कमा सकेगा.'' केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने अधिकारियों को गोबर से कागज बनाने की यूनिट लगाने के प्रोजेक्ट की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) बनाकर मंत्रालय भेजने का निर्देश भी दिया थ। इसलिए अधिकारी प्रोजेक्ट को लैब से जमीन पर लाने के लिए जुटे हुए हैं।
पीएम मोदी भी गिना चुके हैं गोबर की उपयोगिता
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी पशुओं के अपशिष्ठ (यानि गोबर-गोमूत्र) से कमाई की बात करते रहे हैं। पीएम मोदी ने मन की बात में कहा था, ''गोबर भी किसानों की कमाई का जरिया हो सकता है। किसान गोबर की खाद अपने खेतों के लिए ही नहीं बल्कि उसे ज्यादा मात्रा में उत्पादन कर कारोबार भी कर सकते हैं। सरकार की गोबरधन स्कीम के जरिए वेस्ट को एनर्जी में बदलकर इसे आय का जरिया बनाया जा सकता है।'' सेन्ट्रल इन्स्टीट्यूट ऑफ एग्रीकल्चरल इंजीनियरिंग की एक रिपोर्ट के अनुसार देश भर में पशुओं से हर साल 100 मिलियन टन गोबर मिलता है जिसकी कीमत 5,000 करोड़ रुपए है। इस गोबर का ज्यादातर प्रयोग बायोगैस बनाने के अलावा कंडे और अन्य कार्यों में किया जाता है।
कमाई का जरिया बन रहा गोबर
गोबर से बन रहे गमले और अगरबत्ती गोबर से बना गमला इलाहाबाद जिले के कौड़िहार ब्लॉक के श्रींगवेरपुर में स्थित बायोवेद कृषि प्रौद्योगिकी एवं विज्ञान शोध संस्थान में गोबर से बने उत्पादों को बनाने का प्रशिक्षण दिया जाता है। यहां गोबर से गमले और अगरबत्ती जैसे कई उत्पाद बनाए जाते हैं। संस्थान के प्रबंध निदेशक डॉ. हिमांशू द्विवेदी बताते हैं, "हमारे यहां गोबर की लकड़ी भी बनाई जाती है, इसका हम प्रशिक्षण भी देते हैं। इसे गोकाष्ठ कहते हैं। इसमें लैकमड मिलाया गया है, इससे ये ज्यादा समय तक जलती है। गोकाष्ठ के साथ ही गोबर का गमला भी काफी लोकप्रिय हो रहा है।"
गोबर से बायो सीएनजी बनाने का प्लांट
गोबर से बायो सीएनजी भी बनाई जाने लगी है। ये वैसे ही काम करती है, जैसे हमारे घरों में काम आने वाली एलपीजी। लेकिन ये उससे काफी सस्ती पड़ती है और पर्यावरण की भी बचत होती है। बॉयो सीएनजी को गाय भैंस समेत दूसरे पशुओं के गोबर के अलावा सड़ी-गली सब्जियों और फलों से भी बना सकते हैं। ये प्लांट गोबर गैस की तर्ज पर ही काम करता है, लेकिन प्लांट से निकली गैस को बॉयो सीएनजी बनाने के लिए अलग से मशीनें लगाई जाती हैं, जिसमें थोड़ी लागत तो लगती है लेकिन ये आज के समय को देखते हुए बड़ा और कमाई देने वाला कारोबार है। उत्तर प्रदेश के कानपुर में रहने वाले विशाल अग्रवाल हाईटेक मशीनों से मदद से बॉयो सीएनजी बना रहे हैं, उनकी न सिर्फ सीएनजी हाथो हाथ बिक जाती है, बल्कि अपशिष्ट के तौर पर निकलने वाली स्लरी यानी बचा गोबर ताकतवर खाद का काम करता है। कानपुर से करीब 35 किमी. दूर ससरौल ब्लॅाक में लगभग पौने दो एकड़ में 5,000 घन मीटर का बायोगैस प्लांट लगा हुआ है।

गोबर से बना दिया 'वैदिक प्लास्टर'
हरियाणा के डॉ शिवदर्शन मलिक ने देसी गाय के गोबर से एक ऐसा 'वैदिक प्लास्टर' बनाया है जिसका प्रयोग करने से गांव के कच्चे घरों जैसा सुकून मिलेगा। वर्ष 2005 से वैदिक प्लास्टर की शुरुआत करने वाले शिवदर्शन मलिक का कहना है, "हमें नेचर के साथ रहकर नेचर को बचाना होगा, जबसे हमारे घरों से गोबर की लिपाई का काम खत्म हुआ तबसे बीमारियां बढ़नी शुरु हुईं। देसी गाय के गोबर में सबसे ज्यादा प्रोटीन होती है। जो घर की हवा को शुद्ध रखने का काम करता है, इसलिए वैदिक प्लास्टर में देसी गाय का गोबर लिया गया है।" शिवदर्शन बताते हैं, "हमारे देश में हर साल 100 मिलियन टन गोबर निकलता है। जिसका सही तरह से उपयोग न होने से ज्यादातर बर्बाद होता है। देसी गाय के गोबर में जिप्सम, ग्वारगम, चिकनी मिट्टी, नीबूं पाउडर आदि मिलाकर इसका वैदिक प्लास्टर बनाते हैं जो अग्निरोधक और उष्मा रोधी होता है। इससे सस्ते और इको फ्रेंडली मकान बनते हैं, इसकी मांग ऑनलाइन होती है। हिमाचल से लेकर कर्नाटक तक, गुजरात से पश्चिमी बंगाल तक वैदिक प्लास्टर से 300 से ज्यादा मकान बन चुके हैं।"

- 85 करोड़ 61 लाख रुपए के 435 विकास कार्यों के भूमिपूजन के साथ ही 16 करोड़ 90 लाख रुपए के 178 कार्यों का किया लोकार्पण,
-शानदार अधोसंरचना के साथ अत्याधुनिक सुविधाओं का आगाज
कम्युनिटी हाल के लोकार्पण के दौरान पाटन के नागरिकों के साथ किया संवाद भी
दुर्ग / शौर्यपथ / पाटन ब्लाक में हरेली तिहार के अवसर पर गोधन न्याय योजना की शुरूआत के साथ ही मुख्यमंत्री भूपेश बघेल 102 करोड़ रुपए के विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन भी किया। लगभग 85 करोड़ रुपए के 435 कार्यों के भूमिपूजन के साथ ही 16 करोड़ रुपए के 178 विकास कार्यों का लोकार्पण मुख्यमंत्री के हाथों हुआ। इन विकास कार्यों से पाटन ब्लाक के लोगों की अधोसंरचना संबंधी जरूरत तो पूरी होगी ही, अत्याधुनिक सुविधाओं वाले शहर के रूप में भी पाटन पूरी तरह तैयार होगा। इंडोर स्टेडियम, अत्याधुनिक कम्युनिटी हाल, स्वीमिंग पुल के साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में शुद्ध पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं के कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन हुआ। साथ ही मुख्यमंत्री के द्वारा ग्राम सिकोला में पथ वृक्षारोपण का लोकार्पण भी किया गया। इसमें 44 किलोमीटर सड़को में लगभग इतने ही पेड़ लगाए गए। इस मौके पर जिले के सभी ब्लाकों में 10 ग्राम पंचायत इस तरह 30 ग्राम पंचायतों में गोधन न्याय योजना का भी शुभारंभ हुआ। 31 जुलाई तक सभी 216 गौठानों में यह योजना आरंभ हो जाएगी। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने पाटन के कम्युनिटी हाल के लोकार्पण के दौरान पाटन के नागरिकों के साथ संवाद भी किया।
पाटन नगर को सामुदायिक भवन जीर्णोद्धार की सौगात- प्रमुख लोकार्पण कार्यों में पाटन में वार्ड क्रमांक 15 में 34 लाख रुपए की लागत से निर्मित डाॅ. खूबचंद बघेल सामुदायिक भवन जीर्णोद्धार कार्य के साथ ही इसी वार्ड में 24 लाख रुपए की लागत से निर्मित गौठान, विभिन्न वार्डों में 32 लाख रुपए से डामरीकरण कार्य, नगर के विभिन्न विकास वार्डों में 73 लाख रुपए के विकास कार्य शामिल है। इस प्रकार नगर पंचायत पाटन में विभिन्न विकास कार्यों के लिए एक करोड़ 65 लाख रुपए की राशि से निर्मित संरचनाओं का लोकार्पण किया गया।
4 नलजल आवर्धन योजनाओं का शुभारंभ- कुल एक करोड़ 83 लाख रुपए की राशि से निर्मित 4 नलजल आवर्धन योजनाओं का लोकार्पण भी इस अवसर पर किया गया। यह योजनाएं पतोरा, ढौर, भानसुली और खुड़मुड़ा में आरंभ हो जाएंगी। इनकी शुरूआत से इन चार गांवों के लोगों की पेयजल की समस्या पूरी तरह हल हो जाएगी।
सोलर एनर्जी के कार्य भी होंगे लोकार्पित- पाटन में दो करोड़ रुपए की लागत से निर्मित सोलर पावर प्लांट के माध्यम से स्ट्रीट लाइट स्थापना कार्य का लोकार्पण भी किया गया। इसी प्रकार 170 सोलर ड्यूल पंप के माध्यम से पेयजल व्यवस्था के कार्यों का लोकार्पण भी हुआ। इसकी लागत 7 करोड़ 41 लाख रुपए है। इस प्रकार 9 करोड़ 41 लाख रुपए की लागत के 178 कार्यों का लोकार्पण सोलर एनर्जी से संबंधित कार्यों का हुआ।
29 ऐसे कार्य जिनसे गुलजार होगा पाटन- नकटा तालाब का गहरीकरण एवं सौंदर्यीकरण कार्यों का भूमिपूजन भी इस अवसर पर हुआ। पांच करोड़ 97 लाख रुपए की लागत से इस तालाब के जीर्णोद्धार का कार्य होगा। तालाब से शहर की खूबसूरती भी बढ़ेगी और गहराई होने से वाटर लेवल भी बढ़ेगा। इसी तरह से 2 करोड़ 95 लाख रुपए की लागत से हनुमान तालाब का गहरीकरण भी होगा। स्पोर्ट्स फैसिलिटी बढ़ाने के लिए वार्ड क्रमांक 5 में मल्टी परपस इंडोर स्पोर्ट्स हाल का भूमिपूजन हुआ। साढ़े चार करोड़ रुपए की लागत से इसी वार्ड में स्वीमिंग पुल निर्माण कार्य भी होगा। 21 लाख 55 हजार रुपए की लागत से प्रेस क्लब के भवन का भूमिपूजन और 20 लाख रुपए की लागत से बनने वाले कृषक सदन का भूमिपूजन भी इस अवसर पर किया गया। इसके साथ ही नगर के विकास एवं बुनियादी संरचनाओं से संबंधित अनेक कार्यों का भूमिपूजन भी मुख्यमंत्री ने किया। इस प्रकार 40 करोड़ 72 लाख रुपए के 29 अधोसंरचनाओं से संबंधित कार्यों का भूमिपूजन मुख्यमंत्री ने किया।
जनपद पंचायत संसाधन केंद्र का भी भूमिपूजन- इस मौके पर जनपद पंचायत संसाधन केंद्र का भूमिपूजन भी मुख्यमंत्री ने किया। इसका निर्माण 1 करोड़ 26 लाख रुपए की राशि से कराया जाएगा। इसके साथ ही झीट, मर्रा और सांतरा में भी धान संग्रहण केंद्र का भूमिपूजन भी हुआ।
19 जलआवर्धन योजनाओं का भी भूमिपूजन- मुख्यमंत्री द्वारा पाटन ब्लाक के 19 गांवों में 4 करोड़ 84 लाख रुपए की लागत से 19 योजनाओं का भूमिपूजन किया गया। इनमें से मुड़पार, तर्रीघाट, सिपकोन्हा, केसरा, छाटा, परसाही, उफरा, सोनपुर, बोरेन्दा, गुढ़ियारी, मगरघटा, सिकोला, अचानकपुर, चुनकट्टा, अमलेश्वर, गोडपेण्ड्री, नवागांव, तेलीगुण्डरा और फेकारी में नलजल आवर्धन योजनाओं का भूमिपूजन किया।
26 करोड़ रुपए की लागत से नहरों के जीर्णोद्धार का कार्य- मुख्यमंत्री द्वारा इस अवसर पर 6 करोड़ रुपए की लागत में बेलौदी जलाशय तथा नहरों का जीर्णोद्धार कार्य, 4 करोड़ 33 लाख रुपए की लागत से कौही उदवहन सिंचाई योजना का आधुनिकीकरण एवं नहरों की लाइनिंग, 3 करोड़ 31 लाख रुपए की लागत से गुजरा व्यपवर्तन नहर का मरम्मत कार्य शामिल है। इसके साथ ही मगरघटा, कापसी, सांकरा माइनर का जीर्णोद्धार , सेलूद तथा तर्रा के निरीक्षण गृह का जीर्णोद्धार कार्य भी शामिल है।
हितग्राहियों को वितरण कार्यक्रम- इस अवसर पर 217 स्वसहायता समूहों को 78 लाख रुपए की राशि सक्षम योजना अंतर्गत प्रदाय की गई। इसके साथ ही मुख्यमंत्री सुपोषण मिशन के द्वितीय चरण की शुरूआत भी की गई। छत्तीसगढ़ महिला कोष अंतर्गत चेक का वितरण भी किया गया। कृषि विभाग द्वारा स्प्रिंकलर एवं मिनीकीट वितरण भी इस अवसर पर किया गया। इसके साथ ही श्रम विभाग की योजनाओं के हितग्राहियों को भी योजनाओं का लाभ दिया गया।
लगभग चौवालीस किमी सड़कों पर चौवालीस हजार पौधे लगाने के मातृछाया पथ वृक्षारोपण कार्यक्रम में ग्राम सिकोला में लोकार्पण अवसर पर मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने कहा प्रकृति को सहेज कर विकास की ओर सतत बढ़ा रहे कदम
दुर्ग । शौर्यपथ । हम ऐसी योजनाओं पर कार्य कर रहे हैं जिनके माध्यम से प्रकृति के संरक्षण के साथ ही लोगों के आर्थिक बेहतरी का रास्ता भी खुलता है। मातृछाया पथ वृक्षारोपण के लोकार्पण मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल के अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा। इस मौके पर उन्होंने बेल और कृष्ण वट पौधे को रोपा। मुख्यमंत्री ने कहा कि दुर्ग जिले में वन होम, वन ट्री अभियान चलाया गया था। इसमें भी लोगों ने बहुत उत्साह से हिस्सा लेकर अपने घरों में पौधे लगाए। प्रकृति को सहेजने लोग इतने उत्साह से आगे आते हैं तो इस दिशा में अच्छा कार्य करने का हमारा उत्साह दोगुना हो जाता है।
उल्लेखनीय है कि इस योजना अंतर्गत 44 किमी रास्तों में चौवालीस हजार पौधे प्रमुख सड़कों पर रोपे गए हैं। इसमें खूबसूरत बात यह है कि इनमें केवल एक तरह के पौधे नहीं है जो आम तौर पर सड़क किनारे वृक्षारोपण में किये जाते हैं और पूरे माहौल में एकरसता सी आ जाती है। इसमें सत्रह प्रजाति के पौधे लगाए जा रहे हैं। इनमें बरगद और पीपल जैसे विशाल पेड़ों के पौधे रोपे गए हैं जो दीर्घजीवी होते हैं और ढेर सारा आक्सीजन भी देते हैं और भारतीय परंपरा में जिनका विशेष महत्व है। इसके साथ ही आम, जामुन और इमली जैसे पेड़ों के पौधे लगाए गए हैं। यह फलदार पौधे छायादार और पथिकों के लिए भी उपयोगी होंगे। अर्जुन जैसा मेडिसिनल प्लांट भी लगाया गया है और हर्रा, बहेड़ा तथा आंवला जैसे मेडिसिनल प्लांट भी लगाए गए हैं।
उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के निर्देश पर जिले में बड़े पैमाने पर पौधरोपण का कार्य किया जा रहा है। मातृछाया पथ वृक्षारोपण के लिए व्यापक स्तर पर पौधरोपण किए गए हैं। पौधरोपण के साथ ही इन्हें सहेजने की भी पूरी व्यवस्था की जा रही है। इस अवसर पर मातृछाया पथ लोकार्पण स्थल पर भी अतिथियों ने पौधे रोपे। इस मौके पर मुख्य सचिव आरपी मंडल, पीसीसीएफ राकेश चतुर्वेदी, अपर मुख्य सचिव सुब्रत साहू , कृषि उत्पादन आयुक्त श्रीमती एम गीता, प्रमुख सचिव वन मनोज पिंगुवा,मुख्यमंत्री के सचिव सिद्धार्थ कोमल परदेशी, आईजी विवेकानंद सिन्हा, अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक वी श्रीनिवास राव, वन संरक्षक श्रीमती शालिनी रैना, संचालक कृषि नीलेश क्षीरसागर, कलेक्टर डॉ. सर्वेश्वर नरेंद्र भुरे, एसपी प्रशांत ठाकुर, डीएफओ केआर बढ़ाई, जिला पंचायत सीईओ सच्चिदानंद आलोक सहित अन्य अधिकारी मौजूद थे।
इस मौके पर विधायक भिलाई देवेंद्र यादव, खनिज विकास निगम के चेयरमैन गिरीश देवांगन, पूर्व विधायक प्रदीप चौबे, जिला पंचायत उपाध्यक्ष अशोक साहू एवं जनप्रतिनिधिगण मौजूद थे।
*पिछले साल खारून के किनारे लगाए गए थे पौधे-*
पिछले साल वन विभाग द्वारा खारून नदी के किनारे पौधे लगाए गए थे। नदी के कटाव को रोकने, तटबंध को मजबूत करने के लिए ऐसे पौधों का प्लांटेशन किया गया था जो मिट्टी की पकड़ को मजबूत करते हैं। नदी तट में प्लांटेशन से नदियों में पानी का स्तर भी बढ़ता है क्योंकि मिट्टी अधिक जल संरक्षण कर रखती है। यह ऐसा काम है जिसके दीर्घकालीन अच्छे नतीजे निकलते हैं।
*ऐसा निवेश जो भविष्य के लिए बेहद उपयोगी-*
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की सरकार द्वारा ऐसी योजनाओं पर काम हो रहा है जो इस पीढ़ी को ही नहीं, अगली कई पीढ़ियों के लिए उपयोगी साबित होंगे। मिट्टी की ऊर्वरता को बढ़ावा देने के लिए उन्होंने गोधन न्याय योजना आरंभ की जिससे गोबर खरीद कर कंपोस्ट खाद के माध्यम से जैविक खेती की दिशा में बड़ा काम होगा। व्यापक पौधरोपण के माध्यम से मिट्टी का संरक्षण तो होगा ही। भूमिगत जल का स्तर भी बढ़ेगा।
*इन रास्तों में हुआ पौधरोपण-*
मड़ियापार से हिर्री, अमलेश्वर से झीट, पाटन सिकोला तुलसी मार्ग, भिलाई 3 से तर्रा, खुड़मुड़ी-झीट-मोतीपुर, पाटन-रानीतराई-जामगांव आर, सेलूद जामगांव आर, गाड़ाडीह से फुण्डा, बोरसी से उतई, मोतीपुर-जामगांव-लोहरसी, खर्रा से बरबसपुर, पाटन-मोतीपुर मुख्य मार्ग से सिपकोन्हा, बीजाभाठ से सुरपा, पाटन-मोतीपुर मुख्य मार्ग से ठकुराइनटोला, फुण्डा नहर से अरसनारा, सिकोला से सोनपुर, गुढ़ियारी से कानाकोट, दुर्ग-राजनांदगांव महमरा मुख्य मार्ग, रवेली से राखी और मानिकचैरी से गोड़पेण्ड्री।
दुर्ग / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आज पाटन में नवीन आदर्श थाना भवन का लोकार्पण किया। इस अवसर पर उन्होंने रोजनामचा पंजी में थाना भवन शुभारंभ होने उल्लेख करते हुए अपना अभिमत सहित हस्ताक्षर किया। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर थाना परिसर में पौधरोपण भी किया। उन्होंने थाना में पदस्थ स्टॉफ के साथ परिचर्चा कर ईमानदारी पूर्वक कर्तव्य निर्वहन करने को कहा। साथ ही समानता पूर्वक बिना पक्षपात के पीड़ित व्यक्ति को न्याय दिलाने में अपना योगदान देने को कहा। उन्होंने कहा कि जो कोई भी व्यक्ति अपनी किसी समस्या को लेकर थाना आता है उसे त्वरित न्याय मिले इस दिशा में कार्य कर समाज को एक संदेश दिया जाए। आम जनता के मन में पुलिस के प्रति विश्वास जागे इस बात को सदैव स्मरण करते हुए कार्य करें। *महिला रक्षा टीम को 100 नग स्कूटी समर्पित-* मुख्यमंत्री बघेल ने आज पाटन में महिला रक्षा टीम के लिए 100 नग पेट्रोलिंग स्कूटी को महिला पुलिस बल को समर्पित किया। उन्होंने महिला रक्षा टीम को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह पेट्रोलिंग हेतु जिले के विभिन्न थानों में भेजी जाएगी। जिससे महिला रक्षा टीम में शामिल महिला पुलिस बल गश्त करने सहित लोगों की मदद के लिए उपयोग करेगी।
भिलाई / शौर्यपथ / भिलाई इस्पात संयंत्र के सहयोग से नंदिनी में संचालित डीएव्ही इस्पात पब्लिक स्कूल के बच्चों ने सीबीएसई कक्षा-10वीं के परीक्षा परिणाम में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। सीबीएसई द्वारा आयोजित दसवीं की परीक्षा-2020 में डीएव्ही इस्पात पब्लिक स्कूल, नंदिनी अहिवारा के छात्र छात्राओं ने अपनी परंपरा को कायम रखते हुए उत्साहजनक परिणाम दिया। कक्षा दसवी में कुल 56 विद्यार्थियों ने परीक्षा में शिरकत की। इनमें 9 विद्यार्थियों ने 90 प्रतिशत से अधिक अंक एवं 12 विद्यार्थियों ने 80 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त कर विद्यालय का सम्मान बढ़ाया। इसमें शाला के डॉली वर्मा 96.2 प्रतिशत, संघ मित्रा गौड़ा 96 प्रतिशत, सुनयना साहू 94.2, रावी सोनी 94 प्रतिशत, उपासना यादव 93.6 प्रतिशत, मोहम्मद आरिश खान 93.2 प्रतिशत, क्षितिज शुक्ला 92.6, हर्षवीर बारले 91.8 प्रतिशत, समीक्षा खरब 91.2 प्रतिशत अंक हासिल कर विद्यालय का नाम रोशन किया। शाला में विषयवार अधिकतम प्राप्तांकों में डॉली वर्मा संस्कृत-100, मनन बाफना गणित-100 एवं अन्य विद्यार्थियों ने विषयवार विज्ञान-98, अंग्रेजी-97, हिंदी-91, सामाजिक विज्ञान-98 अधिकतम अंक प्राप्त किये।
इस शानदार सफलता पर विद्यालय प्रबंधन समिति के अध्यक्ष एवं महाप्रबंधक, भिलाई इस्पात संयंत्र, नंदिनी माईंस, वी बी सिंह ने एवं विद्यालय के प्रबंधक एवं क्षेत्रीय निदेशक-छत्तीसगढ़ प्रक्षेत्र श्री प्रशांतकुमार ने विद्यालय के परीक्षा परिणाम की प्रशंसा करते हुए समस्त विद्यालय परिवार को बधाई दी एवं सभी छात्र-छात्राओं के उज्जवल भविष्य की कामना की। साथ ही समस्त शाला परिवार व शाला समिति के सभी पदाधिकारियों ने बच्चों की सफलता पर हर्ष व्यक्त कर शुभकामनाएँ दी।
दुर्ग / शौर्यपथ / मकान की बुकिंग कराने के बाद निर्माण कार्य में विलंब होने से मकान की लागत में अत्यधिक वृद्धि हुई, जिसके कारण ग्राहक ने मकान की बुकिंग कैंसिल करवाई, जिसके बाद नियमानुसार जमा राशि पर ब्याज दिया जाना था परंतु छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड ने कम ब्याज का भुगतान किया और बकाया ब्याज की मांग करने पर कोई कार्यवाही नहीं की। इसे सेवा में निम्नता ठहराते हुए जिला उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष लवकेश प्रताप सिंह बघेल, सदस्य राजेन्द्र पाध्ये व लता चंद्राकर ने छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल पर 1 लाख 54 हजार रुपये हर्जाना लगाया।
ग्राहक की शिकायत
बालोद शासकीय आदर्श उच्चतर माध्यमिक शाला में उप प्राचार्य राजेश्वर राव कृदत्त ने बालोद के ग्राम सिवनी स्थित अटल विहार योजना अंतर्गत विकसित की जाने वाली छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड की आवासीय कॉलोनी में एमआईजी 1 श्रेणी के मकान हेतु दिनांक 28 फरवरी 2013 को 3 लाख 38 हजार रुपये भुगतान कर बुकिंग कराई थी परंतु हाउसिंग बोर्ड ने परिवादी की बुकिंग को एमआईजी 2 श्रेणी में बदल दिया, फिर भी परिवादी ने इसकी सहमति दे दी और बैंक से ऋण लेकर 13 अगस्त 2015 को 11 लाख 71 हजार रुपये भुगतान किया इसके बाद हाउसिंग बोर्ड द्वारा 2017 तक भवन का निर्माण कार्य पूरा नहीं किया गया और जनवरी 2018 में हाउसिंग बोर्ड ने 11 लाख 74 हजार रुपये का मांग पत्र परिवादी को देते हुए रकम भुगतान करने को कहा। मकान की कीमत में 40 प्रतिशत से अधिक बढ़ोतरी होने के कारण परिवादी ने हाउसिंग बोर्ड के भवन आवंटन संबंधी नियम व शर्तों के तहत अपनी जमा रकम 1509500 को 7.50 प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर से वापस मांगा, तब हाउसिंग बोर्ड ने परिवादी को दिनांक 27अक्टूबर 2018 को 1813656 रुपये चेक द्वारा वापस किया। चेक लेने के बाद हिसाब किताब करने पर परिवादी को ज्ञात हुआ कि हाउसिंग बोर्ड ने परिवादी को ब्याज के रूप में कम राशि प्रदान की है, जिस पर परिवादी ने लिखित आवेदन द्वारा बकाया ब्याज की मांग की तो अनावेदकगण ने परिवादी को उसके बकाया ब्याज की राशि वापस नहीं की ना ही कोई जवाब दिया।
छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल का जवाब
छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड ने प्रकरण में उपस्थित होकर कहा कि भवन का अंतिम मूल्य निर्धारण करने के लिए हाउसिंग बोर्ड पूर्ण रूप से स्वच्छंद है। परिवादी ने स्वेच्छा से पूर्ण रकम ब्याज सहित वापस पाने हेतु निवेदन किया जिस पर कार्रवाई करते हुए उसे पूर्ण संतुष्टि में रकम वापस की जा चुकी है।
फोरम का फैसला
प्रकरण में प्रस्तुत दस्तावेजों एवं प्रमाणों के आधार पर जिला उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष लवकेश प्रताप सिंह बघेल, सदस्य राजेन्द्र पाध्ये व लता चंद्राकर ने उपभोक्ता के प्रति छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड द्वारा सेवा में निम्नता का कृत्य किया जाना प्रमाणित पाया। फोरम ने विचारण के दौरान यह पाया कि हाउसिंग बोर्ड ने जमा बुकिंग रकम लौटते समय परिवादी द्वारा दी गई संतुष्टि अथवा सहमति संबंधी कोई दस्तावेज अथवा प्रमाण प्रकरण में प्रस्तुत नहीं किया और ना ही ब्याज की गणना संबंधी ऐसा कोई प्रपत्र या दस्तावेज प्रस्तुत किया है जिसमें परिवादी ने संतुष्टि स्वरूप अपने हस्ताक्षर किए हो। हाउसिंग बोर्ड ने ब्याज गणना संबंधी कार्यवाही में परिवादी की सहमति अथवा संतुष्टि उसके हस्ताक्षर द्वारा प्राप्त करना आवश्यक नहीं समझा और एकपक्षीय रूप से ब्याज की गणना करते हुए राशि का भुगतान किया। फोरम ने यह प्रमाणित पाया कि हाउसिंग बोर्ड ने परिवादी को मकान बुकिंग की जमा राशि पर 127929 रुपये कम ब्याज दिया है।
हर्जाना राशि
जिला उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष लवकेश प्रताप सिंह बघेल, सदस्य राजेन्द्र पाध्ये व लता चंद्राकर ने संयुक्त रूप से फैसला सुनाते हुए छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल के दुर्ग प्रक्षेत्र के संपदा अधिकारी, धमतरी प्रक्षेत्र के संपदा अधिकारी एवं रायपुर के मुख्य संपदा अधिकारी पर 1 लाख 54 हजार रुपये हर्जाना लगाया, जिसके तहत कम भुगतान किए गए ब्याज की राशि रुपए 127939, मानसिक पीड़ा की क्षतिपूर्ति स्वरूप 25000 रुपये तथा वाद व्यय के रुप में 1000 रुपये देना होगा।
दुर्ग / शौर्यपथ / यूजीसी की नई गाइड लाइन ने नियमित छात्र-छात्राओं की नींद उड़ा दी है। वहीं स्वाध्यायी परीक्षार्थियों के उलझन का भी कोई निवारण नहीं हो पा रहा है। महाविद्यालयीन छात्र-छात्राओं के लिए कोरोना महामारी एक तरह से जी का जंजाल बन गई है। छात्र-छात्राएं परीक्षा को लेकर कश्मकश भरे दौर का सामना करने मजबूर हो गये है। कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच जान बचाने की कवायद के साथ छात्र-छात्राओं को अपनी परीक्षा को लेकर बनी असमंजस्य भरी स्थिति ने बेचैन कर डाला है। ऐसी परिस्थितियों का सामना न केवल महाविद्यालयीन नियमित बल्कि स्वाध्यायी परीक्षार्थियों को भी करना पड़ रहा है। खासकर यूजीसी की नई गाइड लाइन जारी होने के बाद राज्य सरकार के आदेश पर जनरलप्रमोशन पा चुके प्रथम व द्वितीय वर्ष के नियमित छात्र-छात्राओं की बेचैनी बढ़ सी गई है।
कोरोना संक्रमण को देखते हुए महाविद्यालयीन परीक्षाएं आयोजित नहीं की जा सकी है। छात्र संगठनों की मांग पर राज्य सरकार ने प्रथम व द्वितीय वर्ष के छात्र-छात्राओं को बिना परीक्षा के लिए प्रमोशन दे दिया है। इस बीच यूजीसी ने आगामी सितंबर माह में महाविद्यालयीन परीक्षा आयोजित करने का निर्देश विश्व विद्यालयों को देकर जनरल प्रमोशन पा चुके प्रथम व द्वितीय वर्ष के छात्र-छात्राओं को उलझन में डाल दिया है।
राज्य शासन ने अंतिम वर्ष के छात्र-छात्राओं को जनरल प्रमोशन दिए जाने की मांग पर फिलहाल कोई निर्णय नहीं लिया है। ऐसे में यूजीसी की नई गाइड लाइन के आधार पर सितंबर माह में अंतिम वर्ष के लिए परीक्षाएं आयोजित की जा सकती है। फिलहाल कोरोना संक्रमण को देखते हुए सभी महाविद्यालयों में ताला लटक रहा है और छात्र-छात्राओं की पढ़ाई ऑनलाइन हो रही है। लेकिन कोरोना संक्रमण के मामले जिस गति से बढ़ते चले जा रहे हैं उससे सितंबर में परीक्षा आयोजित किए जाने को लेकर भी संशय की स्थिति बनी हुई है। परीक्षाएं होगी भी या नहीं, इस पर कुहांसा बने रहने से छात्र-छात्राओं में बनी असमंजस्य की स्थिति का नकारात्मक असर उनके तैयारी पर होने की संभावना से इंकार नहीं किया जा रहा है।
यहां पर यह बताना भी लाजिमी होगा कि महाविद्यालय की स्वाध्यायी परीक्षार्थियों को लेकर अब तक कोई गाइड लाइन जारी नहीं किया गया है। राज्य शासन के आदेश पर प्रथम व द्वितीय वर्ष के नियमित छात्र-छात्राओं को तो जनरल प्रमोशन दे दिया गया है। लेकिन इस स्तर की परीक्षा स्वाध्यायी परीक्षार्थी के रूप में देने की तैयारी में जुटे छात्र-छात्राओं के लिए कोई गाइड लाइन जारी नहीं किए जाने से उनकी दिन का चैन और रातों की नींद उड़ी हुई है।
परीक्षा कराये जाने के यूजीसी के आदेश को जलाया एनएसयूआई ने
एनएसयूआई प्रदेश अध्यक्ष आकाश शर्मा के आह्वान पर दुर्ग जि़ला अध्यक्ष आदित्य सिंह के निर्देश अनुसार यूजीसी द्वारा छात्रों की परीक्षा करवाये जाने के निर्देश पर पूर्व एसवीटीयू अध्यक्ष एवं प्रदेश सचिव एनएसयूआई आशीष यादव के नेतृत्व में स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय दुर्ग में यूजीसी के निर्देश की प्रति जलाकर विरोध प्रदर्शन किया गया। एनएसयूआई के आशीष यादव ने बताया कि देश भर में कोरोना संक्रमण थन नहीं रहा है और केंद्र सरकार के इशारे पर यूजीसी ने परीक्षा आयोजित करने के निर्देश दे दिए है जो कि के तानाशाही फरमान है। इस समय में परीक्षा आयोजित करना किसी भी तरह से संभव नहीं है और अगर ऐसा होता है तो छात्रों को कोरोना का भय बना रहेगा जिससे उनके रिज़ल्ट और स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ सकता है। इस वजह से एनएसयूआई प्रदेश भर में आज यूजीसी के तुग़लकी फरमान का विरोध कर प्रतियाँ जलाकर विरोध कर रही है और परीक्षाएं नहीं आयोजित कराने की मांग करती है। पूर्व में एनएसयूआई की मांग पर राज्य सरकार द्वारा इस महामारी संकट को देखते हुए प्रथम एवं द्वितीय वर्ष के छात्रों को जनरल प्रमोशन दे दिया गया है। अंतिम वर्ष के छात्रों को भी प्रमोशन देने की मांग यूजीसी और केंद्र सरकार से लगतार की जा रही है।
दसवी और बारहवी के छात्र भी उलझन में
ऐसा नहीं कि कोरोना के चलते सिर्फ महाविद्यालयीन छात्र-छात्राएं परेशान हैं, बल्कि दसवीं और बारहवीं की परीक्षा उत्तीर्ण करने वालों में भी बेचैनी का आलम है। इनकी उलझन आगे की पढ़ाई को लेकर है। दरअसल अभी तक पीईटी, पीएमटी और पीपीटी जैसी प्रवेश परीक्षाओं का आयोजन नहीं किया जा सका है। इन परीक्षाओं में प्राप्त रंैक के आधार पर प्रदेश के इंजीनियरिंग, मेडिकल व पॉलिटेक्निक कालेज में प्रवेश की पात्रता हासिल होती है। अखिल भातीय स्तर पर भी उच्च शिक्षा के विभिन्न संस्थानों में प्रवेश की पात्रता के लिए परीक्षाएं आयोजित होती है। लेकिन इस बार कोरोना के चलते कुछ परीक्षाओं के आयोजन में खलल पड़ा है। दसवीं-बारहवीं की छत्तीसगढ़ व केन्द्रीय बोर्ड के परिणाम घोषित हो चुके हैं। इसमें सफल छात्र-छात्राएं आगे की पढ़ाई को लेकर उलझन भरे दौर का सामना कर रहे हैं। यही स्थिति उनके पालकों की भी बनी हुई है।
दुर्ग / शौर्यपथ / कुछ साल पहले तक कहा जा रहा था कि माइनिंग की टफ जॉब लड़कियों के बस की बात नहीं। इस मिथ्या को दरकिनार करते हुए छात्राओं के हक में बड़ा फैसला ले लिया गया है। माइनिंग इंजीनियरिंग में अब छात्राएं भी प्रवेश ले सकेंगी। प्रदेश के 2 सरकारी व 4 निजी इंजीनियरिंग कॉलेजों में माइनिंग की पढ़ाई अब छात्राएं भी कर सकेंगी, ऐसे ही पॉलीटेक्निक कॉलेजों में भी उन्हें प्रवेश मिलेगा। छत्तीसगढ़ माइनिंग की दृष्टि से अलग पहचान रखता है। खदानों के भीतर पहुंचकर इंजीनियरिंग करने से पहले तक लड़कियों को रोककर रखा गया था। उनको माइनिंग में नौकरी तो मिलती थी, लेकिन टेबल जॉब ही दिए जाते थे। अब लड़कियां खदानों से निकलने वाले प्राकृतिक संपदाओं में भी अपनी रूचि दिखाएंगी।
अध्यादेश में सिर्फ लडक़ों के प्रवेश का था नियम
पहले तक कोई भी छात्रा माइनिंग के लिए एप्लाई नहीं सकती थी। माइनिंग इंजीनियरिंग के लिए बनाए गए अध्यादेश में ही इनको जगह नहीं दी गई थी, लेकिन बाद में तकनीकी शिक्षा निदेशालय ने इसमें संशोधन कराया है। लड़कियों के लिए यह क्षेत्र सुरक्षित नहीं माना गया था। पिछले कुछ साल में देश व प्रदेश में कई खानें नई शुरू हुई हैं, जिनमें नौकरियों के लिए सिर्फ लडक़ों का एकाधिकार था, लेकिन इस साल से अब लड़कियां भी इसमें हाथ आजमाएंगी।
ये हैं माइनिंग के टॉप रिक्रूटर्स
अडानी माइनिंग , एरसेलर मित्तल , भारतीय उपक्रम कंपनिया, कोल इंडिया लिमिटेड, दामोदर वैली कॉर्पोरेशन, एस्सेल माइनिंग एंड इंडस्ट्रीज, हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड, एमएमटीसी लिमिटेड, यूरेनियम कॉपोर्रेशन ऑफ इंडिया, डीआडीओ,
इंजीनियरिंग और पॉलीटेक्निक में माइनिंग के लिए छात्राएं भी पात्र होंगी। नियम में संसोधन हुए हैं। राज्य शासन ने इसकी मंजूरी दी है।
एके गर्ग, ज्वाइंट डायरेक्टर, डीटीई
माइनिंग में शानदार कॅरियर की संभावना है। प्रदेश प्राकृतिक संपदाओं से धनी है। ऐसे में माइनिंग इंजीनियरिंग में बड़े मौके मिलना तय है। युवाओं के लिए यह अच्छा विकल्प है।
सोनल रूंगटा, डायरेक्टर, संतोष रूंगटा ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूट
दुर्ग । शौर्यपथ । हिंदुओ के लिए सावन मास का विशिष्ट स्थान होता है । सावन मास में भोलेनाथ के दर्शन करने से कई पीड़ाएँ दूर होती है सुख शांति बनी रहती है । मानता है कि सावन मास में नाग नागिन प्रणय के दर्शन से भी लाभ मिलता है । सनातनी धर्म मे नाग नागिन का स्थान उत्तम रूप में माना जाता है । ऐसे ही सावन मास में भिलाई के सेक्टर 8 में नाग नागिन के जोड़े की प्रणय लीला का छोटा सा वीडियो एक मित्र ने भेजा । वीडियो भेजने वाले मित्र के अनुसार वीडियो हाल का ही लगता है हो सकता हो पुराना भी हो किन्तु प्रणय लीला के दृश्य वास्तविक है । जिसे देखने मात्र से रोमांच की अभिभूति होती है साथ ही धर्म के प्रति विश्वास जागृत होता है ।
*दुर्ग पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी पहुंचे शहीद के ग्राम पाहन्दा, किया शहीद की माता और उनके बड़े भाई का सम्मान*
दुर्ग । शौर्यपथ । पुलिस अधीक्षक महोदय दुर्ग प्रशांत ठाकुर के मार्गदर्शन में वीर शहीदों की सम्मान की परंपरा का निर्वहन करते हुए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ग्रामीण लखन पटले एवं पुलिस अनुविभागीय अधिकारी पाटन आकाश राव गिरेपुंजे आज थाना रानीतराई क्षेत्र में ग्राम पाहन्दा में निवासरत शहीद मनोज वर्मा के परिजनों से मुलाकात की। आज ही के दिन 12 जुलाई 2009 को राजनांदगांव के मानपुर में पुलिस नक्सली मुठभेड़ मे राजनांदगांव के तत्कालीन पुलिस अधीक्षक श्री विनोद चौबे समेत पुलिस विभाग के 29 वीर सपूत शहीद हुए थे। ग्राम पाहन्दा निवासी शहीद मनोज वर्मा उसी घटना में शहीद हुए थे।
उनकी शहादत को अक्षुण्ण रखने आज शहीद के निज निवास ग्राम पाहन्दा जाकर उनकी माताजी और उनके बड़े भाई से सौजन्य भेंट की गई तथा उन्हें सम्मानित किया गया साथ ही ग्राम में निर्मित शहीद की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर उनकी शहादत को याद किया गया। थाना प्रभारी रानीतराई निरीक्षक सीताराम ध्रुव उप निरीक्षक दुर्गेश वर्मा समेत थाना रानीतराई का समस्त स्टाफ इस अवसर पर उपस्थित रहा
गेजेट्स /शौर्यपथ / लॉकडाउन को दौरान कई लोग समय काटने के लिए अपने दोस्तों से बात-चीत करते रहते हैं और अगर आपको लगता है कि कुछ बातों को आप अपनें परिजन या भाई-बहनों से छिपाना चाहते हैं तो उसके लिए एक एप का इस्तेमाल कर सकते हैं, जो आपकी स्क्रीन पर लिखे टेक्स्ट को दूसरों को पढ़ने से रोकता है।
गूगल प्लेस्टोर पर मौजूद MaskChat - Hides Whatsapp Chat एक शानदार एंड्रॉयड एप है जिसे यूजर की चैटिंग को प्राइवेट रखने के लिए बनाया गया है। जब आप अपने स्मार्टफोन पर प्राइवेट चैट करते हैं, तब यह एप आपके चैट के उपर की स्क्रीन को डिजिटल पर्दे से छिपा देता हैं। इससे आपके आसपास के झांकने वाले पड़ोसी से आपके मैसेज प्राइवेट रखने में मदद मिलती हैं।
अन्य चैटिंग एप के लिए भी कारगर
MaskChat - Hides Whatsapp Chat एप सिर्फ व्हाट्सएप तक ही सीमित नहीं है बल्कि इसका इस्तेमाल फेसबुक मैसेंजर, वीचैट,हाइक और स्नैपचेट के लिए भी किया जा सकता है। इसके साथ ही पासवर्ड टाइप करते समय या बैंक की इनफॉर्मेशन टाइप करते समय अपनी स्क्रीन को हाइड करने के लिए इसका इस्तेमाल कर सकते हैं।
कैसे करें इस्तेमाल
इस एप को डाउनलोड करने के बाद यूजर को स्क्रीन पर एक फ्लोटिंग मास्क चैट आइकॉन दिखाई देगा, जिस स्क्रीन को आप दूसरों से हाइड करना चाहते हैं, उस स्क्रीन पर इस आइकॉन को ऊपर से नीचे की ओर ड्रैग करें। अब एक डिजिटल पर्दा नीचे आ जाएगा, जो आपकी स्क्रीन को छिपा देगा और आप किसी भी शर्मिंदा पलों से बच सकते है जब आपके माता-पिता या बड़े आपके आसपास होते हैं।
पर्दे की बढ़ा सकते हैं डार्कनेस
इस एप में कंपनी की तरफ से दिए गए पर्दे की मोटाई औसतन होती है, जो आपको कम लग सकती है। इसके लिए आप पर्दे के दाईं ओर दिए गए तीन लाइन वाले विकल्प पर क्लिक कर सकते हैं। इससे स्क्रीन के बीच में तीन नए विकल्प आएंगे। उनमें से बीच वाले विकल्प की मदद से आप पर्दे की ब्राइटनेस को नियंत्रित कर सकते हैं। बंद करने के लिए क्रॉस आइकॉन पर क्लिक कर आप पर्दे को क्लोज कर सकते हैं, लेकिन फ्लोटिंग मास्केचैट आइकॉन को पीछे छोड़ देगा। गियर आइकॉन पर टैप कर आप थीम को बदल भी सकते हैं। थीम को सिलेक्ट करने के बाद उसके नीचें के Apply theme बटन पर टैप कर अप्लाई करें।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
