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सेहत / शौर्यपथ / कोरोना काल में उच्च रक्तचाप (हाइपरटेंशन) और तनाव के मामले बढ़े जरूर हैं, पर इसका घरेलू समाधान भी है। ताजा शोध से पता चला है कि काले तिल के नियमित सेवन से हाइपरटेंशन को काबू में रखा जा सकता है। थाईलैंड के महिडोल विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने उच्च रक्तचाप पर अपने शोध के बाद यह दावा किया है।
अध्ययन में पाया गया कि चार सप्ताह तक काले तिल के सेवन से रक्तचाप में छह प्रतिशत तक की कमी आई है। शोधकर्ताओं ने पाया कि तिल में मौजूद मैग्निशियम,उच्च पॉलीसेचुरेटेड फैटी एसिड,फाइटोस्टेरॉल और लिगनान समेत अन्य तत्व रक्तचाप को दुरुस्त रखने में मददगार हैं।
भोजन में मैग्निशियम की कम मात्रा रहने से रक्तचाप बढ़ने का खतरा बढ़ जाता है। क्लीनिकल ट्रॉयल में भी पाया गया कि मैग्निशियम लेने से रक्तचाप घटाने में मदद मिलती है।
इसके पहले ऑस्ट्रेलिया के मेंजिस हेल्थ इंस्टीट्यूट क्वींसलैंड एंड स्कूल ऑफ मेडीसिन ने भी अपने अध्ययन में पाया था कि काले तिल का सेवन रक्तचाप को कम रखने में सहायक है।
काला तिल खनिजों का खजाना:
काला तिल मैगनीज, मैग्निशियम, कॉपर, कैल्शियम, आयरन, फॉस्फोरस और जिंक जैसे खनिज तत्वों का स्रोत है। इसके अलावा इसमें विटामिन बी-1 और पाचन को सुगम बनाने वाले फाइबर भी पाए जाते हैं।
शारीरिक सक्रियता जरूरी:
शोधकर्ताओं ने रक्तचाप घटाने के लिए शरीरिक रूप से ज्यादा सक्रिय रहने, स्मोकिंग से दूर रहने तथा कॉफी-चाय और कोला जैसे पेय से दूर रहने की सलाह दी है। गौरतलब है कि हाइपरटेंशन का हृदय की बीमारियों और असामयिक मौत से सीधा संबंध है।
क्या है रक्तचाप:
रक्तचाप का अभिप्राय इस बात से है कि अपकी धमनियों पर रक्त कितना दबाव डालता है। यदि किसी का रक्तचाप 120/80 एमएम एचजी मापा गया, तो इसमें पहला नंबर यानी 120 उस दबाव को दर्शाता है जो हृदय द्वारा रक्त को पंप करते समय उत्पन्न होता है। इसे सिस्टोलिक रक्तचाप भी कहते हैं। दूसर नंबर यानी 80 उस दबाव को दर्शाता है जब हृदय शिथिल होकर खून को अपने अंदर भरता है, इसे डायस्टोलिक रक्तचाप कहते हैं।
दुर्ग / शौर्यपथ / कलेक्टर डॉ. सर्वेश्वर नरेंद्र भूरे ने आज मानसून को लेकर सतर्कता की तैयारियों को लेकर बैठक ली। उन्होंने कहा कि इस बार काफी बारिश होने की संभावना है। इस बात की पूरी आशंका है कि नालों में उफान आए। इसलिए प्रशासनिक अमला पूरी तरह मुस्तैद रहे। एक बार माकड्रिल कर ले कि किस प्रकार आपदा की स्थिति में लोगों को सुरक्षित जगहों तक पहुंचाया जाएगा। उनके खाने पीने और जीवनरक्षक दवाओं के इंतजाम किस तरह होगा, यह माकड्रिल के दौरान देख लें। उन्होंने सभी एसडीएम से पूछा कि किन जगहों पर बाढ़ की आशंका होती है। पिछले साल के बारे में भी उन्होंने जानकारी ली। उन्होंने कहा कि राजस्व अमला, निगम अमले और फूड विभाग के साथ इस संबंध में आवश्यक व्यवस्था सुनिश्चित कर लें।
उन्होंने कहा कि भवनों का चिन्हांकन कर इनकी जानकारी दी जाए। साथ ही उन्होंने सीएमएचओ से पूछा कि स्नेक बाइट आदि की आशंका मानसून के दौरान होती है। इसके लिए एंटी वेनम है या नहीं। सीएमएचओ ने बताया कि इसका पर्याप्त स्टाक अभी है। उन्होंने कहा कि बारिश के दौरान संक्रामक रोग भी फैलते हैं। ऐसे क्षेत्रों में क्लोरिनिकरण का काम भी सतत रूप से हो, इस संबंध में उन्होंने पीएचई के अधिकारियों को निर्देशित किया।
होमगार्ड के अधिकारियों को उन्होंने गोताखोरों के बारे में पूछा। पिछले साल कहां जरूरत पड़ी थी इस बारे में जानकारी भी ली। अधिकारियों ने बताया कि पिछले बार पाटन में एक व्यक्ति सिकोला में फंसा था। कलेक्टर ने कहा कि इस बार बारिश काफी ज्यादा होने की उम्मीद है। इसके साथ ही पहले ही जलस्रोत में पानी पर्याप्त है। ऐसी स्थिति में इस बात की आशंका है कि बाढ़ का खतरा बना रहे। ऐसे में कंट्रोल रूम में अधिकारी सक्रिय रूप से नजर रखें। इसकी नियमित रिपोर्ट जिला मुख्यालय में देते रहें। उन्होंने रेन गेज के बारे में जानकारी ली।
उन्होंने अधिकारियों से कहा कि रेन गेज पर नजर रखें। यह न केवल बारिश की स्थिति बताता है अपितु इससे बीमा प्रकरणों का संबंध भी होता है। कलेक्टर ने मानसून के दौरान सभी ब्लाकों में बिजली की स्थिति के बारे में भी पूछा। उन्होंने कहा कि कहीं भी लोड शेडिंग की स्थिति नहीं होनी चाहिए। यदि ऐसी स्थिति तकनीकी कारणों से उत्पन्न हो तो इसे त्वरित रूप से ठीक कर लें। धमधा क्षेत्र में बिजली जाने की समस्या पर उन्होंने विद्युत विभाग के अधिकारियों से इस संबंध में त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए।
दुर्ग / शौर्यपथ / दुर्ग NSUI के तत्वधान में आज हेमचंद यादव दुर्ग विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति महोदया जी से मिल करके कोरोनो महामारी समाजिक दुष्प्रभाव के कारण महाविद्यालयो में नए सत्र से नए सिलेबस पाठ्य पुस्तकें से आगे की पढ़ाई संचालित कराए जाने की संभावना को देखते हुए दुर्ग जिला कार्यकारिणी अध्यक्ष सोनू साहू के निर्देशानुसार शहर अध्यक्ष हितेश सिन्हा के नेतृत्व में #NSUI ने सिलेबस में बदलाव होने से छात्र-छात्राओं को भविष्य में विभिन्न तरह के परेशानियों से सामना करना पड़ेगा जिसे देखते हुए कुलपति मैडम को ज्ञापन सौपा और अगली कक्षा के लिए नए पाठ्यक्रम लागू नही किया जाए साथ ही सभी कक्षाओं के पाठ्यक्रम सिलेबस को पूर्व की भांति यथावत रखे जाने की मांग किए
रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री बघेल ने इंस्टीट्यूट आफ चार्टर्ड एकाउंटेंटस ऑफ इंडिया से जुड़े देशभर के सीए से ग्राम पंचायतों और नगरीय प्रशासन के काम काज में कसावट और वित्तीय प्रबंधन को मजबूत बनाने के लिए सहयोग का आव्हान किया है। उन्होंने कहा है कि छत्तीसगढ़ में बहुत सी वनोपज हैं जिनकी पैदावार देश के अन्य हिस्सों में नहीं होती है। वर्तमान में इन वनोपजों के संग्रहण के बाद इनका प्रसंस्करण छतीसगढ़ के बाहर होता है। यदि इंस्टीट्यूट आफ चार्टर्ड एकाउंटेंटस ऑफ इंडिया इनके प्रसंकरण के लिए निवेश छत्तीसगढ़ में लाने की पहल करते हैं तो इससे प्रदेश के उत्पादकों और संग्राहकों को लाभ मिलेगा और इनका निर्यात अन्य हिस्सों में करने से वहां की आवश्यकता की पूर्ति भी होगी। मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने आज अपने निवास कार्यालय से इंस्टीट्यूट आफ चार्टर्ड एकाउंटेंटस ऑफ इंडिया द्वारा ‘रिसर्जेट छत्तीसगढ़‘ विषय पर आयोजित वेबिनार में देशभर के चार्टर्ड एकाउंटेंट्स को सम्बोधित किया। उन्होंने सभी को आगामी एक जुलाई को सीए दिवस की अग्रिम शुभकामनाएं दी।
मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर आईसीएआई की रायपुर शाखा को नया रायपुर में छत्तीसगढ़ के विद्यार्थियों के लिए सीए की कोचिंग इंस्टीट्यूट और कार्यालय भवन के लिए जमीन उपलब्ध कराने की घोषणा की। उन्होंने इस अवसर पर वेबीनार की ई-स्मारिका का विमोचन भी किया।
मुख्यमंत्री बघेल ने आईसीएआई द्वारा छत्तीसगढ़ के एक हजार उद्यमियों को निर्यात के लिए तैयार करने में सहयोग के प्रस्ताव का स्वागत करते हुए इसके लिए सहमति प्रदान की। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ के हर गांव में गौठान और चारागाह विकसित किए जा रहे हैं। इनमें एक एकड भूमि महिला स्व सहायता समूहों की आर्थिक और व्यावसायिक गतिविधियों के लिए आरक्षित की गई है। आईसीएआई उद्योगपतियों और महिला समूहों से टाईअप कर वहां अपनी आवश्यकतानुसार निर्धारित गुणवत्ता की सामग्रियां तैयार कराकर उन्हें अपने ब्रांड में बेच सकते हैं। इस काम के लिए महिला समूहों को लाभांश का हिस्सा देकर उन्हें आमदनी का जरिया उपलब्ध कराने में मदद कर सकते हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में औद्योगिक और व्यावसायिक गतिविधियों के लिए अनुकूल वातावरण है। यहां कुशल और अकुशल श्रमिक, भूमि, जल और विद्युत उपलब्ध है। राज्य सरकार की नई औद्योगिक नीति की विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि कोलकता, सूरत और मुम्बई के बाद रायपुर में बड़ा जेम्स एण्ड ज्वेलरी पार्क बनाया जा रहा है। उन्होंने इस अवसर पर सुराजी गांव योजना, राजीव गांधी किसान न्याय योजना, गोधन न्याय योजना, लघुवनोपज संग्रहण, मनरेगा सहित कोविड नियंत्रण तथा लॉकडाउन में कृषि और उद्योगो तथा व्यापारिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करने के लिए किए गए प्रयासों की जानकारी दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले साल हमारा यह अनुभव रहा है कि किसान, वनवासियों की जेब में पैसा डालने से छत्तीसगढ़ वैश्विक मंदी से अछूता रहा है। इस साल भी हमने राजीव गांधी किसान न्याय योजना के तहत किसानों को 5750 करोड़ रूपए की राशि दे रहे है। इसी प्रकार सर्वाधिक कीमत में तेन्दूपत्ता की खरीदी कर रहे है। इसके साथ ही राज्य में 31 लघुवनोपजों की खरीदी समर्थन मूल्य पर की जा रही है। इसका असर बाजार में देखने को मिला। छत्तीसगढ़ में 3 हजार ट्रेक्टर बिके, कंपनियां मांग के अनुसार ट्रेक्टर की आपूर्ति नही कर पा रहीं है। आईसीएआई के राष्ट्रीय अघ्यक्ष श्री अतुल गुप्ता ने कहा कि उनका संगठन राज्य सरकार को हर सहयोग देने के लिए तैयार है। उन्होंने नगरीय निकार्यों में नए रेवेन्यू जनरेट करने में सहयोग करने, पंचायतों के मेनेजमेंट, स्नातक के बाद छात्रों को सीए के मार्गदर्शन में तीन साल गहन प्रशिक्षण जैसे कार्य संचालित करने में राज्य सरकार के साथ सहयोग का प्रस्ताव दिया।
इस वेबीनार में देशभर के चार्टर्ड अकाउंटेंट्स शामिल हुए। उद्योग विभाग के प्रमुख सचिव मनोज कुमार पिंगुआ और लघु वनोपज संघ के एमडी संजय शुक्ला, आईसीएआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष अतुल गुप्ता और पब्लिक व गवर्नमेंट फाइनेंसियल मैनेजमेंट कमेटी के अध्यक्ष धीरज खंडेलवाल सहित अनेक पदाधिकारी इस कार्यक्रम में जुड़े। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स की रायपुर शाखा के अध्यक्ष सीए किशोर बरड़िया और सचिव रवि ग्वालानी मुख्यमंत्री निवास में उपस्थित थे। वेबिनार में छत्तीसगढ़ चेम्बर्स ऑफ कामर्स, कैट और उरला इंडस्ट्रिज एसोसिएशन के पदाधिकारी भी जुड़े।
दुर्ग / शौर्यपथ / विद्या श्री परिवार के नाम से शहर में पहचाने जाने वाले विद्या श्री ट्रेवेल्स के संचालक सेक्टर 8 भिलाई निवासी संदीप जैन अपने छोटे भाई श्रीकांत जैन के परिवार द्वारा कुछ दिन पहले किये नेत्रदान की घोषणा से इतने प्रभावित हुए कि आज अपनी पत्नी साक्षी जैन के जन्मदिन पर उनके पुरे परिवार ने नेत्रदान करने का निर्णय लिया व,इसके लिए उन्होंने अपने घर पर संस्था के सदस्यों को आमंत्रित कर संदीप जैन,साक्षी जैन उनके पुत्र देवेश जैन व मानस जैन द्वारा नेत्रदान का घोषणा पत्र नवदृष्टि फाउंडेशन के अनिल बल्लेवार,राज आढ़तिया व सत्येंद्र जैन को सौंपा,
इस अवसर पर संदीप कि मौसी 73 वर्षीय कि श्रीमती तारा जैन ने अपने पुत्र राजेश कुमार जैन के साथ देहदान कि वसीयत अनिल बल्लेवार,राज आढ़तिया व सत्येंद्र जैन को सौंपी, संदीप ने बताया उनके छोटे भाई के नेत्रदान कि घोषणा पर जो सम्मान संस्था द्वारा किया गया व उनके परिवार के निर्णय कि सराहना पुरे समाज द्वारा कि गयी जिससे वह बहुत प्रभावित हुए और परिवार से चर्चा कर निर्णय लिया,
संस्था के संस्थापक सदस्य अनिल बल्लेवार ने श्रीमती तारा जैन के देहदान को साहसिक बताया व उनसे बात कर उनके ज़ज़्बे कि तारीफ कि व कहा इस उम्र में समाज के प्रति ऐसी सोच होना प्रशंसनीय है,ऐसे लोगों से प्रेरणा लें तो समाज में नई ऊर्जा आएगी,श्री बल्लेवार ने बताया तारा जैन के पति बीएसपी के कोक ओवन के एजीएम के पद पर पदस्थ थे उनकी मृत्यु के बाद तारा जैन अपने पुत्र राजेश के साथ अपने पद्मनाभपुर स्थित निवास पर रहती हैं,
राज आढ़तिया ने जानकारी दी मेडिकल कि पढ़ाई कर रहे छात्रों हेतु कैडेवर(मृत मानव शरीर) कि बहुत कमी है अतः हमारी संस्था का प्रयास है कैडेवर कि कमी जल्द से जल्द दूर हो ताकि छात्र सही रिसर्च कर सकें, नव दृष्टि फाउंडेशन के अनिल बल्लेवार, कुलवंत भाटिया,राज आढ़तिया, सत्येंद्र जैन,प्रवीण तिवारी ,मुकेश आढ़तिया , हरमन दुलई, प्रभु दयाल उजाला, प्रमोद बाघ, रितेश जैन, जितेंद्र हासवानी, गोपी रंजन दास, धर्मेंद्र शाह, पियूष मालवीय, मुकेश राठी, संतोष राजपुरोहित, किरण भंडारी, चेतन जैन, चन्दन मिश्रा, यतीन्द्र चावड़ा, नत्थू अग्रवाल, खुर्शीद अहमद, आकाश मसीह, अनुराग तैलंग, वीरेंद्र पाली, अभय माहेश्वरी , प्रफुल्ल जोशी, संजीव श्रीवास्तव, विवेक साहू , शैलेश कारिया, हरपाल सिंह, मनीष जोशी, प्रसाद राव, दीपक बंसल ने जैन परिवार के देहदान व नेत्रदान के निर्णय प्रशंसा की व परिवार को शुभकामनाएं दी।
लाइफस्टाइल / शौर्यपथ / मनीला के एक आर्किटेक्ट फर्म ने तैरने वाले घरों का एक ऐसा डिजाइन पेश किया है जो समुद्र के तल में एंकर से बंधे रहेंगे और समुद्र की लहरों के साथ गोते खाएंगे। डाडा डिजाइन नामक कंपनी ने कहा करेंट्स फॉर करेंट्स नामक यह आवास परियोजना कठोर प्राकृतिक आपदाओं की स्थिति का मुकाबला कर सकती है। वे कहते हैं कि यह अस्थायी घर दूर-दराज के क्षेत्रों में विश्वसनीय बिजली के बुनियादी ढांचे की कमी को भी दूर कर सकते हैं।
हर घर को समुद्र के तल में एंकर की मदद से बांधा जाएगा। इसमें सौर और लहरों से बिजली बनाने के लिए तकनीक लगाई जाएगी। इन्हें प्लास्टिक एंकर से बांधा जाएगा। कंपनी ने कहा, तटों पर रहने वाले समुदायों के पास जमीन और संसाधनों की कमी होती है। इसके अलावा समुद्र की लहरों और तूफानों के कारण भी उन्हें काफी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।
वे सबसे अस्थिर परिस्थितियों में रहने के लिए मजबूर हैं, इसलिए उन्हें सुरक्षित और स्थायी आश्रयों की सख्त जरूरत है। ऐसे में यह घर उनकी समस्याओं का समाधान बनेगा। ये घर समुद्र में आने वाले परिवर्तनों के अनुसार खुद को ढालते रहेंगे।
दक्षिण पूर्वी एशिया में काफी प्राकृतिक आपदाएं आती रहती हैं। फिलिपींस, इंडोनेशिया, वियतनाम सबसे संवेदनशील इलाकों में शुमार है। यहां समुद्री तूफानों से लोगों को काफी नुकसान पहुंचता है।
लाइफस्टाइल / शौर्यपथ / कटहल खाने के शौकीन लोगो को अब स्वाद के लिए ही नहीं बल्कि सेहतमंद बने रहने के लिए भी कटहल खाने का बहाना मिल गया है। खासकर उन लोगों को जो मधुमेह रोगी है और दवा खाने के बाद भी अपनी डायबिटीज कंट्रोल नहीं कर पा रहे हैं। हाल ही में अमेरिकन डायबिटीज एसोसिएशन के वार्षिक सम्मेलन में शनिवार को शिकागो में एक वीडियो लिंक के माध्यम से एक अध्ययन की रिपोर्ट प्रस्तुत की गई। जिसमें बताया गया कि कटहल का पाउडर प्लाज्मा में ग्लूकोज के स्तर को नीचे ले आता है।
दरअसल, टाइप 2 डायबिटिज से ग्रस्त 40 लोगों पर एक शोध किया गया। इस शोध में 24 पुरुष और 16 महिलाएं शामिल थीं। उनकी औसत आयु 40 से 90 वर्ष थी। अध्ययन के दौरान, प्रतिभागियों को हरे कटहल के आटे का सेवन करने के लिए कहा गया। बेसलाइन पर उनका स्तऑर HbA1c 7.23 ± 0.47 फीसदी था। 12-सप्ताह के अध्ययन के अंत में उनका एचबीए 1 सी 6.98 ± 0.48 प्रतिशत था। जोसेफ ने बताया कि “उपवास और पोस्टपैंडियल प्लाज्मा ग्लूकोज लेवल में भी समान सुधार देखा गया।”
डोसा, इडली और ब्रेड में भी मिला सकते हैं ये आटा-
अध्ययन में पाया गया कि जब इस आटे को स्थानीय भोजन में मिलाकर इस्तेमाल किया गया तो परिणाम कमाल के थे। इस शोध में प्रतिदिन 30 ग्राम कटहल का आटा मधुमेह रोगियों के भोजन में शामिल किया गया। जिसकी वजह से रक्त शर्करा के स्तर में महत्वपूर्ण कमी देखी गई। कटहल के पाउडर को इडली, डोसा के आटे के मिश्रण में मिलाया जा सकता है और आटा ब्रेड बनाने में भी शामिल किया जा सकता है।
कैसे कर सकते हैं कटहल के आटे का सेवन-
मणिपाल ग्लोबल के बोर्ड के अध्यक्ष मोहनदास पई ने कहा कि वह पिछले दो साल से रोजाना रात के खाने के बाद अपने नाश्ते में दलिया और ग्रीन टी में एक चम्मच कटहल पाउडर ले रहे थे। “यह निश्चित रूप से मेरे रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित करने में मददगार साबित हुआ।
लाइफस्टाइल / शौर्यपथ / जिंदगी की भागदौड़ में कई बार लोग इतने व्यस्त हो जाते हैं कि उन्हें खुद यह महसूस होने लगता है कि वो सिर्फ एक मशीन बनकर रह गए हैं। रोजाना की तरह ऑफिस से घर, घर से ऑफिस करते-करते वो खुद के लिए ही क्वालिटी टाइम निकालना भूल जाते हैं। जिसकी वजह से तनाव, डिप्रेशन जैसी समस्याएं व्यक्ति को घेरने लगती हैं और वो अपसेंड माइंड रहने लगता है। अगर आपको भी खुद से यही शिकायत है तो जानें उन 5 उपायों के बारे में जो आपको हमेशा माइंडफुल रहने में करेंगे मदद।
1-जागरूक रहें-
जागरुक रहने पर व्यक्ति न सिर्फ हर पल को एन्जॉय करता है बल्कि उसे हर घटना उसके अनुक्रम में भी याद रहती है। तो हर बार जब आपका मन इधर-उधर भटकने लगे, तो उसे वापस काम पर ले आएं।
2-प्रोडक्टिविटी-
जब भी आपको लगे कि आपका शरीर थक रहा है, तो अपने काम को थोड़ा ब्रेक दें, जिससे शरीर को फिर से तरोताजा होने का मौका मिलेगा। इससे आप ज्यादा प्रोडक्टिविटी दे पाएंगे।
3-आभार करें व्यक्त-
कई शोध में यह कहा गया है कि आभार व्यक्त करने और महसूस करवाने का हमारे स्वास्थ्य और भावनाओं पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।अपनी जिंदगी में मौजूद हर वह चीज आपके लिए खास है, जो आपको दूसरों से अलग बनाती है। इन छोटी-छोटी चीजों के प्रति ग्रेटफुल होना आपको संतोष का अहसास करवाता है।
4-नए लक्ष्य करें तय-
अपने लक्ष्यों की अलाइनमेंट करने के लिए शांत दिमाग से खुद अपने लक्ष्यों पर फोकस करें। ऐसा करने से आपके लिए क्या सही है, क्या गलत है और क्या कम जरूरी है। इसका फैसला करके आप खुद की राह को ज्यादा बेहतर बना पाएंगे।
5-मेडिटेट करें-
मेडिटेशन माइंडफुल होने की कुंजी है। शुरूआत गहरी सांस लेने और छोड़ने से करें। आप जितनी प्रैक्टिस करेंगी, यह आपके लिए उतना ज्यादा फायदेमंद होगा।
धर्म संसार / शौर्यपथ / चार धाम विकास परिषद के उपाध्यक्ष आचार्य शिव प्रसाद ममगाईं ने एक जुलाई से चार धाम यात्रा राज्य के भीतर के लोगों के लिए शुरू करने की मांग की। सीएम त्रिवेंद्र रावत से मिल कर उन्होंने पहले चार मैदानी जिलों को छोड़ कर पहाड़ी जिलों से यात्रा शुरू कराने की मांग की।
सीएम से मुलाकात के दौरान आचार्य ममगाईं ने कहा कि राज्य के पर्वतीय जिले जहां कोरेाना संक्रमण अधिक नहीं है और उन जिलों की स्थिति ठीक है। वहां के लोगों को चार धामों में दर्शन करने की अनुमति दी जाए। ताकि राज्य के भीतर लोगों को चार धाम यात्रा का लाभ मिल सके। अभी देहरादून, हरिद्वार, यूएसनगर, नैनीताल के लोगों को छोड़ कर बाकि जिलों को मंजूरी दी जाए। उन्होंने बताया कि सीएम ने सभी पक्षों से बात कर जल्द कोई ठोस फैसला लेने का आश्वासन दिया है।
अभी चार धाम यात्रा एक जुलाई से शुरू किए जाने का कोई फैसला नहीं लिया गया। अभी सभी जिलाधिकारियों से रिपोर्ट मांगी है। सभी पक्षों से बात कर ही शासन स्तर से कोई फैसला लिया जाएगा। - रविनाथ रमन, सीईओ उत्तराखंड चार धाम श्राइन बोर्ड
नजरिया / शौर्यपथ / बादलों के तूफान के रूप में इकट्ठा होने से आकाशीय बिजली बनने की शुरुआत होती है। बर्फ के छोटे-छोटे टुकड़े और बेहद ठंडे पानी की बूंदें आपस में टकराते हैं और इनके बीच विपरीत ध्रुवों के विद्युत कणों का प्रवाह होता है। वैसे तो, धन और ऋण एक-दूसरे को चुंबक की तरह अपनी ओर आकर्षित करते हैं, किंतु वायु के अच्छा संवाहक न होने के कारण विद्युत आवेश में बाधाएं आती हैं। अत: बादल की ऋणावेशित निचली सतह को छूने के प्रयास करती धनावेशित तरंगें भूमि पर गिर जाती हैं। चूंकि धरती विद्युत की सुचालक है। यह बादलों के बीच की परत की तुलना में अपेक्षाकृत धनात्मक रूप से चार्ज होती है। तभी इस तरह पैदा हुई बिजली का कुछ प्रवाह धरती की ओर हो जाता है। भारत में हर साल करीब 2,000 लोग इस तरह बिजली गिरने से मारे जाते हैं। मवेशियों और मकान आदि का भी नुकसान होता है।
गुरुवार को बिहार और उत्तर प्रदेश के अनेक हिस्सों में बिजली गिरी और करीब 125 लोग मारे गए। यह एक असामान्य घटना है। अमेरिका में हर साल बिजली गिरने से औसतन 30 और ब्रिटेन में तीन लोगों की मृत्यु होती है, जबकि भारत में यह आंकड़ा बहुत अधिक है। इसका मूल कारण यह है कि हमारे यहां आकाशीय बिजली गिरने के पूर्वानुमान व चेतावनी की व्यवस्था विकसित नहीं हो पाई है। आंकडे़ गवाह हैं कि हमारे यहां बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड और छत्तीसगढ़ में बिजली गिरने की घटनाएं ज्यादा होती हैं, और आमतौर पर दिन में ही लोग इसके शिकार बनते हैं। यदि तेज बरसात हो रही हो और बिजली कड़क रही हो, तो ऐसे में पानी भरे खेत के बीच में, किसी पेड़ के नीचे, और पहाड़ी स्थान पर जाने से बचना चाहिए। मोबाइल का इस्तेमाल भी खतरनाक होता है।
हमें यह समझना होगा कि इस तरह बहुत बडे़ इलाके में एक साथ घातक बिजली गिरने का असली कारण धरती का लगातार बदल रहा तापमान है। पहले आषाढ़ महीने में बहुत भारी बारिश नहीं होती थी, लेकिन अब बहुत थोड़े समय में जोरदार बारिश का होना और सावन-भादों का सूखा रह जाना, जलवायु परिवर्तन का त्रासद नतीजा है। एक बात और। बिजली गिरना जलवायु परिवर्तन का दुष्परिणाम तो है ही, इसके अधिक गिरने से जलवायु परिवर्तन की प्रक्रिया को भी गति मिलती है। सनद रहे, बिजली गिरने के दौरान नाइट्रोजन ऑक्साइड का उत्सर्जन होता है और यह एक घातक ग्रीन हाउस गैस है। हालांकि, अभी बिजली गिरने और जलवायु परिवर्तन पर उसके प्रभाव को लेकर शोध कम हुए हैं, पर कई शोध इस बात को स्थापित करते हैं कि जलवायु परिवर्तन ने बिजली गिरने के खतरे को बढ़ाया है। इस दिशा में गहराई से काम करने के लिए ग्लोबल क्लाइमेट ऑब्जर्विंग सिस्टम के वैज्ञानिकों ने विश्व मौसम विज्ञान संगठन के साथ मिलकर एक विशेष शोध दल का गठन किया है। पर जलवायु परिवर्तन के बारे में हुए अध्ययनों से पता चला है कि यदि जलवायु में अधिक गरमाहट हुई, तो गरजदार तूफान कम, तेज आंधियां ज्यादा आएंगी और हर एक डिग्री ग्लोबल वार्मिंग के चलते धरती तक बिजली की मार की मात्रा 10 फीसदी तक बढ़ सकती है।
कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी, बर्कले के वैज्ञानिकों ने वायुमंडल को प्रभावित करने वाले अवयवों और बिजली गिरने के बीच के संबंध पर एक शोध मई 2018 में प्रारंभ किया था। उनका आकलन था कि आकाशीय बिजली के लिए दो प्रमुख अवयवों की आवश्यकता होती है : तीनों अवस्थाओं (तरल, ठोस व गैस) में पानी और बर्फ बनाने से रोकने वाले घने बादल। वैज्ञानिकों ने 11 जलवायु मॉडल पर प्रयोग किए और पाया कि भविष्य में ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन में गिरावट आने से रही, अत: आकाशीय बिजली गिरने की घटनाएं बढ़ेंगी।
एक और गौर करने की बात यह है कि अभी जिन इलाकों में बिजली गिरी है, उनमें से बड़ा हिस्सा धान की खेती का है और जहां धान के लिए पानी को एकत्र किया जाता है, वहां से ग्रीन हाउस गैस जैसे मीथेन का उत्सर्जन अधिक होता है। मौसम जितना अधिक गरम होगा, ग्रीन हाउस गैसें जितनी उत्सर्जित होंगी, उतनी ही अधिक बिजली ताकत के साथ धरती पर गिरेगी। साफ है, ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन पर नियंत्रण व जलवायु परिवर्तन पर काबू न पाया गया, तो समुद्री चक्रवातों, बिजली गिरने, बादल फटने जैसी भयावह त्रासदियां बढ़ती ही जाएंगी।
(ये लेखक के अपने विचार हैं)पंकज चतुर्वेदी, वरिष्ठ पत्रकार
मेलबॉक्स / शौर्यपथ / आज जब कोरोना से निपटने में सरकार की नाकामी पर चर्चा होनी चाहिए, डीजल के लगातार बढ़ते दाम के बीच पहली बार इसकी कीमत पेट््रोल से पार जाने पर चिंता जताई जानी चाहिए, चीन की सेना के सीमा पार करने के खिलाफ सरकार की रणनीति पर बहस होनी चाहिए, तब 1975 के आपातकाल को तूल देना अफसोसनाक है। सबको मालूम है कि जनता ने इंदिरा गांधी को इसका सबक 1977 के आम चुनाव में सीखा दिया था। आज लोकतंत्र के काले अध्याय के रूप में इतिहास के अनैतिक फैसलों पर शोक मनाने से बेहतर है कि मौजूदा भारतीय लोकतंत्र पर मंडराते संकट के बादल का अंदाजा लगाया जाए। ‘द इकोनॉमिस्ट इंटेलिजेंस यूनिट’ द्वारा जारी 2019 के डेमोक्रेसी इंडेक्स में भारत 160 देशों की सूची में 51वें स्थान पर एक त्रुटिपूर्ण लोकतंत्र के रूप में मौजूद है। इसलिए बेहतर होगा कि इतिहास के दुर्भाग्यपूर्ण फैसलों को पीछे छोड़कर आज की लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत बनाया जाए।
अंकित कुमार मिश्रा, पटसा, समस्तीपुर
काल बनी बारिश
मानसून आते ही भारतीय किसान खुशी से झूम उठते हैं, क्योंकि यह वक्त खेतों की मेड़ बांधकर पानी को इकट्ठा करके धान रोपने का होता है। मगर इस बार 25 जून को यही मानसूनी बारिश बिहार और उत्तर प्रदेश में लोगों पर काल बनकर बरसी। इसमें बिजली गिरने से बिहार में लगभग 85 और उत्तर प्रदेश में करीब 25 लोगों की मौत हो गई। पर यह भी सच है कि प्राकृतिक आपदा रोकी नहीं जा सकती, सिर्फ सावधानी ही इसका बचाव है। इसलिए किसानों को कृषि-धर्म निभाने से पहले चैनलों या रेडियो पर जारी अलर्ट पर ध्यान देना चाहिए। मूसलाधार बारिश के समय विशेष सावधानी जरूरी है, क्योंकि हमारे अन्नदाताओं की जान बहुत कीमती है।
आनंद पाण्डेय, पंजियार टोली, रोसड़ा
अविश्वास बढ़ाता चीन
चीन की कथनी और करनी एक-दूसरे के विपरीत हैं। ‘हिंदी-चीनी भाई-भाई’ का नारा लगाने वाला चीन 1962 में हमारी पीठ में छुरा घोंप चुका है। भारत के साथ ताजा घटनाक्रम में चीन ने अविश्वास और धोखेबाजी की वही पुरानी तरकीब अपनाई। इस बार बातचीत के बहाने उसने हमें धोखा दिया। जाहिर है, चीन पर अब कतई विश्वास नहीं किया जा सकता। वह इसलिए भी अविश्वास के लायक है, क्योंकि वहां लोकतंत्र नहीं है। वह भारत को अपने लिए बड़ी चुनौती मानता है, इसीलिए आर्थिक, राजनीतिक एवं सैन्य, तीनों स्तरों पर वह हमें घेरना चाहता है। मगर भारत भी अब बचाव की बजाय आक्रामक मुद्रा अपनाने को तैयार है। अब हम पलटकर उसे बखूबी जवाब दे सकते हैं। कोरोना महामारी के दौरान विश्व भी यह जान चुका है कि चीन मानवता का कितना बड़ा दुश्मन है और अपने हितों के लिए वह कितना नीचे गिर सकता है। भारत को अब इसी के मुताबिक अपनी रणनीति बनानी चाहिए।
उपेंद्र कुमार राय, पटना
खाली जेब पर बोझ
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम अपेक्षाकृत कम हैं, लेकिन हमारे देश में पेट्रोल-डीजल के दामों में लगातार इजाफा हो रहा है। दिल्ली जैसे महानगर में तो डीजल की कीमत पेट्रोल से ज्यादा हो गई। आखिर तेल के दाम इस कदर क्यों बढ़ रहे हैं, जबकि कच्चे तेल के दामों में गिरावट है? क्या इसका यह मतलब निकाला जाए कि सरकार सुस्त पड़ी अर्थव्यवस्था में जान फूंकने के लिए ऐसा कर रही है? फिर भी, अभी इसकी कीमतों पर लगाम नहीं लगाई गई, तो आम जनता को बडे़ संकटों का सामना करना पडे़गा। उनकी मुश्किलें इसलिए भी बढ़ेंगी, क्योंकि कोरोना की वजह से उनकी जेबें पहले से ही खाली हैं। उम्मीद है, सरकार लोगों की मुश्किलों को समझेगी और जल्द ही कीमतों में कमी करेगी।
शुभम पांडेय गगन
ओपिनियन / शौर्यपथ / प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए 26 जून को ‘आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश रोजगार अभियान’ का शुभारंभ कर दिया। वास्तव में, यह देश में कोरोना काल में रोजगार के लिए शुरू किया गया सबसे बड़ा अभियान है, जिस पर अपने राज्य लौटे मजदूरों के साथ ही देश की भी नजरें टिकी हैं। इसके तहत देश की सबसे ज्यादा आबादी वाले राज्य में करीब सवा करोड़ लोगों को विभिन्न परियोजनाओं के तहत रोजगार नसीब होगा।
वस्तुत: उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा शुरू किए गए ‘आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश रोजगार अभियान’ का मुख्य लक्ष्य प्रदेश में वापस आए प्रवासी कामगारों को उनके ही क्षेत्र में हुनर व रुचि के आधार पर रोजगार प्रदान करने, स्थानीय स्तर पर उद्यमिता को बढ़ावा देने व रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के लिए औद्योगिक संगठनों और अन्य संस्थानों को साथ जोड़ना है। जब लोग भी रोजगार के लिए सरकार की ओर देख रहे हैं, तब यह एक सराहनीय कदम है। देश के विभिन्न राज्यों में भी रोजगार निर्माण के लिए ऐसे विशेष अभियानों की जरूरत दिखाई दे रही है। उत्तर प्रदेश के इस अभियान से अन्य राज्यों को भी यथोचित प्रेरणा मिलेगी।
आज निजी क्षेत्र में रोजगार बढ़ाने के प्रयासों के साथ ही सरकारी स्तर पर ऐसी पहल बहुत जरूरी है। विशेष अभियानों के अलावा सरकारी विभागों में रिक्त पदों पर तत्परता के साथ नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू करने पर भी ध्यान देना होगा। सरकार ने विगत 14 मार्च को संसद में बताया है कि रेलवे, रक्षा, डाक सहित अन्य सरकारी विभागों में करीब 4.76 लाख भर्तियां की जानी हैं। इनमें से यूपीएससी, एसएससी और रेलवे भर्ती बोर्ड के जरिए 1.34 लाख और रक्षा विभाग में 3.4 लाख खाली पदों को भरा जाना है। केंद्र सरकार के अलावा राज्यों सरकारों के भी लाखों पद रिक्त हैं। सरकार के स्तर पर रिक्त पदों को भरने के लिए भी विशेष अभियान चलाने की जरूरत है। विशेष रोजगार अभियान को कुछ बहुत जरूरतमंद जिलों में चलाने के साथ ही मनरेगा में भी कोई कमी नहीं होनी चाहिए। काम मांगने वाले लोगों को रोजगार देकर समाज को व्यापक संकट से बचाया जा सकता है। ज्यादा लोगों को रोजगार देने से अर्थव्यवस्था को भी सीधे फायदा होगा। इससे मांग और आपूर्ति बढ़ेगी, विकास दर में तेजी आएगी।
यह साफ दिखाई दे रहा है कि कोविड-19 और लॉकडाउन की वजह से देश के असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले श्रमिकों और कर्मचारियों के सामने रोजगार संकट ज्यादा बढ़ा है। इस दौर में देश में बेरोजगारी की चुनौती कितनी तेजी से बढ़ी है, इसका अनुमान प्राइवेट थिंक टैंक ‘सेंटर फॉर मॉनिर्टंरग इंडियन इकोनॉमी’ द्वारा प्रकाशित रिपोर्ट से लगाया जा सकता है। इसके मुताबिक, भारत में जनवरी 2020 में बेरोजगारी दर 7.2 प्रतिशत थी, यह फरवरी में 7.8 प्रतिशत और मार्च में 8.7 प्रतिशत हो गई। यह अप्रैल 2020 में 23.52 फीसदी तथा मई 2020 में 23.48 फीसदी हो गई। यद्यपि लॉकडाउन समाप्त होने के साथ-साथ बेरोजगारी दर में कमी बताई जा रही है, लेकिन यह पर्याप्त नहीं है।
युवाओं को अपना मनोबल और व्यवस्था में विश्वास बनाए रखना चाहिए। चुनौतियां बढ़ी हैं, पर स्थिति ऐसी बुरी भी नहीं है कि जिससे उबरना मुश्किल हो। अच्छा रोजगार चाह रहे लोगों को किसी न किसी चीज में विशेषज्ञता या कार्य कुशलता के लिए प्रयास जरूर करना होगा। विभिन्न वैश्विक रिपोर्टों में तथ्य उभरकर सामने आ रहा है कि चालू वित्त वर्ष 2020-21 में भारत की विकास दर में जोरदार गिरावट होगी, लेकिन आगामी वित्त वर्ष 2021-22 में देश की विकास दर में तेजी दिखाई देगी। भारत में रोजगार की संभावनाएं भी बढ़ेंगी। ऐसे में, दुनिया के मानव संसाधन शोध संगठनों का कहना है कि कोविड-19 की चुनौतियों से भारतीय अर्थव्यवस्था दुनिया की दूसरी अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में कहीं शीघ्रतापूर्वक बाहर निकलेगी और रोजगार के मौके बढ़ेंगे। पिछले दिनों न्यूयॉर्क के मैनपॉवर ग्रुप द्वारा प्रकाशित 44 देशों के रोजगार के वैश्विक सर्वेक्षण के मुताबिक, कोविड-19 के बीच रोजगार के मामले में सकारात्मक परिवेश दिखाने वाले दुनिया के चार शीर्ष देशों में भारत भी शामिल है। भारत के अलावा केवल जापान, चीन और ताइवान में रोजगार को लेकर सकारात्मक परिदृश्य पाया गया है। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि लॉकडाउन खत्म होने के बाद और कोरोना काल के बीच भारत में जुलाई से सितंबर 2020 की तिमाही में पांच सेक्टरों- खदान, निर्माण, वित्त, बीमा और रियल एस्टेट में नौकरियों के नए रास्ते खुलेंगे।
प्रमुख मानव संसाधन कंपनी टीमलीज की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, देश के चार महानगरों, दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और कोलकाता को छोड़कर मेट्रो के रूप में उभरते शहरों- बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे, अहमदाबाद, चंडीगढ़, कोच्चि, कोयंबटूर, आदि में रोजगार बढें़गे। इन शहरों में हेल्थ, फार्मा, ई-कॉमर्स, एफएमसीजी, कृषि, एग्रो-केमिकल्स, ऑटो-मोबाइल्स और इनसे जुड़ी सेवाओं, बीपीओ सेवाएं, निर्माण तथा रिएल एस्टेट व ऊर्जा क्षेत्र में रोजगार के मौके तेजी से बढ़ेंगे। इसमें कोई दो मत नहीं है कि आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत दिए गए आर्थिक पैकेज से देश के उद्योग-कारोबार क्षेत्र को जो लाभ मिलेगा, उससे रोजगार के मौके बढ़ेंगे।
युवाओं को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि कोविड-19 के बाद आने वाले वर्षों में दुनिया के कई देशों में अर्थव्यवस्थाओं को संभालने के लिए प्रशिक्षित युवा हाथों की कमी होने वाली है। मानव संसाधन परामर्श संगठन कार्न फेरी की रिपोर्ट में कहा गया है कि जहां दुनिया में 2030 तक कुशल श्रम बल का संकट होगा, वहीं भारत के पास 24.5 करोड़ अतिरिक्त कुशल श्रम बल होगा। साल 2030 तक दुनिया के 19 विकसित व कई विकासशील देशों में 8.52 करोड़ कुशल श्रम शक्ति की कमी हो जाएगी। ऐसे में,भारत इकलौता देश होगा, जिसके पास 2030 तक जरूरत से ज्यादा कुशल श्रम बल होगा। भारत दुनिया के तमाम देशों में कुशल श्रम बल को भेजकर फायदा उठा सकेगा।
निजी क्षेत्र में रोजगार की संभावनाओं का भविष्य उज्ज्वल है, लेकिन इससे सरकारों की जिम्मेदारी कम नहीं हो जाती। सरकारों को अपनी रोजगार योजनाओं को चाक-चौबंद तरीके से चलाकर समाज में राहत का भाव बनाए रखना होगा।
(ये लेखक के अपने विचार हैं)जयंतीलाल भंडारी, अर्थशास्त्री
जीवन सैली /शौर्यपथ / लहरों से डर कर नौका पार नहीं होती।
कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती॥
नन्ही चींटी जब दाना लेकर चलती है।
चढ़ती दीवारों पर सौ बार फिसलती है॥
मन का साहस रगों में हिम्मत भरता है।
चढ़ कर गिरना, गिर कर चढ़ना न अखरता है॥
मेहनत उसकी बेकार हर बार नहीं होती।
कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती॥
हिन्दी के प्रख्यात कवि हरिवंश राय बच्चन की कविता की ये पंक्तियां "कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती" इसे आज भी हम जीवन में बहुत कुछ सीख सकते हैँ। परीक्षा के रूप में आई जीवन की पहली सीढ़ी पर मिली असफल हमें डरा नहीं सकती। कई बार देख गया कि 10वीं, 12वीं जैसी छोटी क्लासेस की परीक्षाओं में भी असफल होने या मन मुताबिक परिणाम न आने पर कई छात्र निराश हो जाते हैं। उन्हें लगने लगता है कि अब वह कुछ नहीं कर पाएंगे लेकिन ऐसे वक्त यदि हरिवंश राय बच्चन इस कविता जैसा पढ़ लें और अपने जीवन में अपनाने की कोशिया करें तो शायद आप अपने को पहले से और ज्यादा सशक्त महसूस करेंगे।
इसलिए देर क्या, छोटी सी प्रेरणा के साथ फिर शुरू करें बड़े लक्ष्य का एक मजबूत प्रयास।
पैरेंट्स की भी जिम्मेदारी: बोर्ड रिजल्ट किसी प्रतियोगी परीक्षा में आपकी लाड़ली/लाड़ले को आकांक्षा के अनुरूप परिणाम नहीं मिलता तो आपकी भी जिम्मेदारी है कि उसे गलतियों से सबक लेकर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करें न कि उसकी हमेशा कमियां निकालते रहें। ध्यान रखें कि बच्चों को ऐसा कुछ न कहें जिनसे उनका मनोबल टूटे।
शौर्यपथ / पहली जुलाई से सनातन धर्मावलंबियों के शादी-ब्याह के शुभ मुहूर्त पर चातुर्मास के चलते चार महीने का ब्रेक लग जायेगा। पहली जुलाई को हरिशयन एकादशी है। मान्यता है कि इस एकादशी से प्रभु श्री हरि शयन को चले जाते हैं। इसके साथ ही चातुर्मास शुरू हो जाता है।
चातुर्मास में सनातन धर्मावलंबियों के शादी ब्याह के शुभ मुहूर्त नहीं बनते हैं। हालांकि बनारसी पंचांगों में हरिशयन एकादशी से पहले 26 से 30 जून तक शादी-ब्याह के पांच शुभ मुहूर्त बचे हैं। दूसरी ओर मिथिला पंचागों के हिसाब से शादी-ब्याह के शुभ मुहूर्त 17 जून को ही समाप्त हो गये हैं। बनारसी पंचांग के हिसाब से चातुर्मास के बाद 25 नवंबर से शादी-ब्याह के शुभ मुहूर्त शुरू होंगे। वहीं मिथिला पंचांगों के मुताबिक 1 दिसंबर से शुभ विवाह के मुहूर्त शुरू होंगे।
वैदिक ज्योतिषी धीरेंद्र कुमार तिवारी ने महावीर और हृषीकेश पंचांगों के हिसाब से बताया कि आषाढ़ शुक्ल पक्ष में 30 जून दशमी तिथि तक ही शादी-ब्याह के शुभ मुहूर्त हैं। आषाढ़ शुक्ल एकादशी यानी बुधवार एक जुलाई को हरिशयन और चातुर्मास शुरू हो जाएगा। हरिशयनी एकादशी के बाद अगला विवाह विवाह मुहूर्त 25 नवंबर से शुरू हो रहा है। हरि प्रबोधिनी एकादशी भी 25 नवंबर को है। इसी दिन से अगले विवाह मुहूर्त शुरू हो रहे हैं।
मिथिला पंचांग में इस वर्ष अब केवल छह शुभ मुहूर्त
ज्योतिषाचार्य डा.राजनाथ झा ने मिथिला पंचांगों के हवाले से बताया कि इस वर्ष अब केवल छह शुभ मुहूर्त बचे हैं। मिथिला पंचांगों में चातुर्मास के समाप्त होने के बाद नवंबर माह में एक भी शुभ विवाह मुहूर्त नहीं हैं। हालांकि 25 नवंबर कोही चातुर्मास समाप्त हो जाता है। जबकि दिसंबर माह में केवल छह शुभ विवाह के मुहूर्त हैं 14 दिसंबर तक।
इस वर्ष अब 17 शुभ मुहूर्त
ज्योतिषाचार्य पीके युग ने बनारसी पंचांगों के हवाले से बताया कि इस वर्ष शादी ब्याह के अब 17 शुभ मुहूर्त ही बचे हैं। इसमें जून में पांच,नवंबर में दो और दिसंबर में 10 शुभ विवाह मुहूर्त हैं। इस वर्ष चातुर्मास समाप्त होने के बाद 25 नवंबर से 14 दिसंबर तक केवल 12 शुभ विवाह मुहूर्त हैं।
जून में शुभ विवाह के मुहूर्त
(महावीर और ऋषिकेश पंचांग, बनारस के अनुसार)
शुक्रवार 26 जून, शनिवार 27 जून,रविवार 28 जून
सोमवार 29 जून, मंगलवार 30 जून.
नवंबर में विवाह मुहूर्त
(बनारसी पंचांगों के अनुसार)
25 नवंबर, 30 नवंबर
दिसंबर में विवाह मुहूर्त (बनारसी पंचांग)
1, 2 , 6 ,7 , 8 ,9 ,10 ,11,13 ,14
मिथिला पंचांग के अनुसार ,शुभ विवाह मुहूर्त:
दिसंबर में :2, 6, 7, 10, 11, 14
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
