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सेहत / शौर्यपथ /सुबह उठते ही कुछ ऐसे काम है जिन्हें यदि आपने कर लिया तो आपका दिन अच्छा व्यतित होना सुनिश्चित हो जाता है। आइए,जानते हैं ऐसे ही 5 कामों के बारे में जिन्हें करके आपको अपने दिन की शुरूवात करनी चाहिए -
आइए जानें,ऐसे ही 5 तरीके जिनके साथ करें दिन की शुरुआत...
1. सुबह उठते ही सबसे पहले आधा लीटर ठंडा पानी पिएं। खाली पेट ठंडा पानी पीने से मेटाबॉलिज्म यानी कि पाचन दुरूस्त रहने में मदद मिलती है।
2. खाली पेट छह से दस बादाम और अखरोट खाएं, इससे कुछ इंजाइम्स बनते हैं जो मेटाबॉलिज्म बढ़ाने में सहायक होते हैं।
3. हमेशा थोड़ा भारी ब्रेकफास्ट करें, इससे आपको दोपहर के खाने तक ऊर्जा की कमी महसूस नहीं होगी। आपका ब्रेकफास्ट ऐसा हो जो कार्बोहाइड्रेट और प्रोटीन से भरपूर हो।
4. बादाम और अखरोट ऊर्जा के भंडार हैं। यदि आप रोजाना बादाम आरे अखरोट नहीं खा पाते हैं तो दिन भर थोड़ी-थोड़ी मूंगफली भी खा सकते हैं।
5. सुबह उठ कर चाहे 10 मीनिट ही सही लेकिन मेडिटेशन जरूर करें। इससे आपके विचार संतुलित हो जाएंगे और दिमाग शांत रहेगा।
सेहत / शौर्यपथ /अगर आपकी मम्मी या सासू मां मधुमेह से ग्रस्त हैं और हर बार की तरह इस बार भी करवा चौथ का व्रत रखने की जिद पर अड़ी हैं, तो आपको रखना होगा उनका खास ख्याल।
डायबिटीज यानी मधुमेह एक जीवनशैली से जुड़ी बीमारी है, जिसमें खून में शुगर का स्तर प्रभावित होता है। इसके पीछे इन्सुलिन कम बनने या इंसुलिन का शरीर द्वारा इस्तेमाल न हो पाना दोषी होता है। डायबिटीज के यूं तो कई कारण हैं, लेकिन खराब और अस्वस्थ जीवनशैली सबसे प्रमुख कारण है। अगर आप व्यायाम नहीं करतीं हैं या मोटापे से ग्रस्त हैं तो आपका डायबिटीज का जोखिम बढ़ जाता है।
डायबिटीज सिर्फ एक लाइलाज बीमारी ही नहीं है, बल्कि अन्य बीमारियों की गंभीरता को भी बढ़ा देती है। एक डायबिटीज के मरीज को बहुत सावधानी बरतनी होती है। जैसे दिन में हर दो से तीन घण्टे पर छोटी मील लेना, व्यायाम करना, नियमित रूप से ब्लड शुगर लेवल जांचना और चिंता मुक्त रहना। आहार के लिए भी बहुत परहेज किया जाता है। साथ ही ग्लूकोज के सीधे सेवन से बचा जाता है।
ऐसे में चिंता यह है कि एक डायबिटीज का मरीज दिन भर उपवास कैसे रख सकता है! करवा चौथ का व्रत सोलह से अठारह घण्टे का उपवास होता है जिसमें कई संस्कृतियों में पानी भी नही पिया जाता।
दिन भर का उपवास यूं तो शरीर को डिटॉक्स करने के लिए अच्छा उपाय है, लेकिन डायबिटीज में ऐसा नहीं है। मधुमेह से ग्रस्त व्यक्ति को शुगर लेवल नियंत्रित करने के लिए थोड़ी-थोड़ी देर पर मील्स लेनी जरूरी होती हैं। तो ऐसे में मधुमेह से ग्रस्त आपकी मम्मी या सासू मां करवा चौथ का व्रत कैसे रखेंगी?
घबराने की जरूरत नहीं है, आप उनके स्वास्थ्य से समझौता किये बिना ही उनकी आस्था में उनका साथ दे सकती हैं। हम आपको बता रहे हैं वे तरीके जिनसे वे व्रत भी रख सकेंगी और उनकी सेहत को भी नुकसान नहीं पहुंचेगा।
व्रत से पहले खाएं ये कुछ खास चीजें
सूर्योदय के साथ ही करवा चौथ के व्रत की शुरुआत होती है, और चंद्रमा निकलने के बाद ही व्रत खोला जाता है। व्रत शुरू करने से पहले सभी महिलाएं भोजन करती हैं, जिसे सरगी कहते हैं। पारम्परिक रूप से सास अपनी बहू के लिए सरगी बनाती है, जिसमें मिठाई, सेवईं, मेवे और फल इत्यादि होते हैं।
लेकिन अगर आप डायिबिटिक हैं तो आपकी सरगी बिल्कुल अलग होगी। अपनी सरगी में प्रोटीन और कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट शामिल करें। प्रोटीन पचने में समय लेता है, जिससे आपके शरीर को लम्बे समय तक ऊर्जा मिलती रहेगी और हाइपोग्लाइसीमिया की स्थिति नहीं आएगी। हाइपोग्लाइसीमिया का अर्थ है खून में ग्लूकोज की कमी।
आप सुबह सरगी के रूप में दही, दूध, ओट्स, जौं या बाजरे की रोटी और ड्राई फ्रूट्स लें। अगर आपकी शुगर नियंत्रित रहती है तो आप फल भी ले सकती हैं।
व्रत तोड़ने के लिए
व्रत तोड़ने के लिए भी पारंपरिक व्यंजनों से दूरी बनाए रखें। तले, भुने और मसालेदार खाने से आपके शरीर मे एकदम से कार्बोहाइड्रेट बढ़ेगा जिससे हाइपरग्लाइसीमिया की समस्या हो जाएगी। व्रत तोड़ने के लिए ताजा फलों का जूस पियें। उसके बाद फाइबर युक्त भोजन थोड़ा-थोड़ा कर के, 15 से 20 मिनट के गैप पर खाएं।
ट्रान्स फैट और सिंपल कार्बोहाइड्रेट्स से दूर ही रहें।
इन बातों का रखें ख्याल-
अगर आपकी डायबिटिक मां या सास जिनकी उम्र 50 वर्ष से अधिक है, वह व्रत रखती हैं, तो उन्हें निर्जला व्रत न रखने दें। दिन में पानी, नारियल पानी, जूस और चाय इत्यादि देती रहें। याद रखें, किसी भी पूजा या व्रत में सबसे महत्वपूर्ण मन की पवित्रता और श्रद्धा होती है।
अगर आपकी शुगर अक्सर लो हो जाती है तो दिन में दूध, चाय, जूस इत्यादि ले लें।
व्रत से एक दो दिन पहले से ही डाइट कम कर लें ताकि शरीर कम ग्लूकोज के लिए तैयार हो जाये।
चक्कर आएं, बहुत कमजोरी महसूस हो तो दूध या नींबू पानी ले लें।
अपनी सेहत का ख्याल रखें क्योंकि स्वास्थ्य ही सबसे बड़ा धन है।
धर्म संसार /शौर्यपथ / कोरोना काल में करवा चौथ का पावन पर्व आज बुधवार को मनाया जाएगा। अखंड सुहाग के निमित्त महिलाएं निर्जला व्रत रखेंगी। चंद्रोदय के बाद विधिपूर्वक पूजन करके अर्घ्य देंगी। परंपरा के अनुसार पति को चलनी से निहारने के बाद व्रत का पारण करेंगी।
हर सुहागिन के लिए प्रेम का प्रतीक करवा चौथ खासा मायने रखता है। लेकिन इस बार कोरोना कालखंड ने पर्व के प्रति आस्था, उल्लास को सीमित कर दिया है। इस का प्रभाव पारंपरिक पूजन, श्रृंगार, आभूषमों और कपड़ों पर दिख रहा है। संक्रमण का भय, सोशल डिस्टेंसिंग का अनुपालन और कोरोना के प्रसार ने पर्व की रौनक कम कर दी है। लेकिन महिलाएं परंपरा के अनुसार पूजन अर्चन करके कोरोना से अपने सुहाग की रक्षा की कामना करेंगी।
पैर छूकर आशीर्वाद से परहेज
व्रत औऱ पूजन में महिलाएं पहले गले मिलकर और पैर छूकर आशीर्वाद प्राप्त करती थी, लेकिन अब सोशल डिस्टेंसिंग के कारण पैर छूने से परहेज करेंगी। पति की ओर से दिए जाने वाले उपहार में इस बार डिजाइनर मास्क औऱ सेनिटाइजर दिए जाएंगे। करवा चौथ में पूजा के प्रसाद भी बाजार से ना मंगाकर घर पर ही शुद्ध प्रसाद बना लें।
यूट्यूबर पर सुनेंगी कथाएं: इस बार महिलाएं सामूहिक पूजा में शामिल न होकर यूटयूब, लाइव वीडियो कॉल में कथाएं सुनेंगी। कोरोना संक्रमण से बचने के लिए इस तरह की सावधानी रखना बहुत जरूरी है।
करवा चौथ पूजा मुहूर्त
पूजा समय शाम - शाम 6:04 से रात 7:19
उपवास समय सुबह - शाम 6:40 से रात 8:52
चौथ तिथि - सुबह 3:24 से 5 नवंबर सुबह 5:14 तक
चंद्रमा का उदय - 4 नवंबर रात 8.16 से 8:52 तक
इस व्रत में पूरे दिन निर्जला रहा जाता है। व्रत में पूरा श्रृंगार किया जाता है। महिलाएं दोपहर में या शाम को कथा सुनती हैं। कथा के लिए पटरे पर चौकी में जलभरकर रख लें। थाली में रोली, गेंहू, चावल, मिट्टी का करवा, मिठाई, बायना का सामान आदि रखते हैं। प्रथम पूज्य गणेश जी की पूजा से व्रत की शुरुआत की जाती है। गणेश जी विघ्नहर्ता हैं इसलिए हर पूजा में सबसे पहले गणेश जी की पूजा की जाती है। इस बात का ध्यान रखें कि सभी करवों में रौली से सतियां बना लें। अंदर पानी और ऊपर ढ़क्कन में चावल या गेहूं भरें। कथा के लिए पटरे पर चौकी में जलभरकर रख लें। थाली में रोली, गेंहू, चावल, मिट्टी का करवा, मिठाई, बायना का सामान आदि रखते हैं। प्रथम पूज्य गणेश जी की पूजा से व्रत की शुरुआत की जाती है। गणेश जी विघ्नहर्ता हैं इसलिए हर पूजा में सबसे पहले गणेश जी की पूजा की जाती है। इसके बाद शिव परिवार का पूजन कर कथा सुननी चाहिए। करवे बदलकर बायना सास के पैर छूकर दे दें। रात में चंद्रमा के दर्शन करें। चंद्रमा को छलनी से देखना चाहिए। इसके बाद पति को छलनी से देख पैर छूकर व्रत पानी पीना चाहिए।
धर्म संसार / शौर्यपथ / नवंबर माह ज्योतिष के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस महीने कई ग्रहों की चाल बदल रही है। जिनमें से एक गुरु बृहस्पति देव भी शनि की राशि मकर में गोचर करेंगे। गुरु दिवाली बाद मकर राशि में 20 नवंबर (शुक्रवार) को प्रवेश करेंगे। बृहस्पति देव को देवताओं का गुरु और सुख-सुविधाओं, संपत्ति और धन का कारक माना जाता है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, गुरु ग्रह के राशि परिवर्तन से कुछ राशियों पर सकारात्मक तो कुछ राशियों को नाकारात्मक प्रभाव देखने को मिलेंगे। जानिए इस राशि परिवर्तन से किन राशियों को होगा लाभ-
1. मेष राशि- गुरु के राशि परिवर्तन से मेष राशि के जातकों को सकारात्मक प्रभाव देखने को मिलेगा। माना जा रहा है कि रोजी-रोजगार में तरक्की के योग बनेंगे और वैवाहिक जीवन में खुशहाली बढ़ेगी। छात्रों को भी खुशखबरी मिल सकती है।
2. मिथुन राशि- माना जा रहा है कि इस राशि परिवर्तन के दौरान इस राशि के जातकों के अटके हुए कार्यों में तेजी आएगी। व्यापार में भी शुभ परिणाम मिल सकते हैं। बेरोजगार युवाओं को रोजगार के भी अवसर प्राप्त हो सकते हैं।
3. कन्या राशि- कन्या राशि के जातकों के लिए गुरु का राशि परिवर्तन खुशखबरी लेकर आ सकता है। माना जा रहा है कि इस गोचर के दौरान जातकों को नए अवसर प्राप्त होंगे और घर-वाहन का भी सपना पूरा हो सकता है। रुठा मित्र भी जिंदगी में वापस आ सकता है।
4. तुला राशि- तुला राशि के जातकों को इस गोचर के दौरान शुभ फल की प्राप्ति हो सकती है। पारिवारिक सुख में बढ़ोत्तरी के साथ संतान के विवाह की समस्या खत्म हो सकती है। घर में नए मेहमान के आगमन का शुभ समाचार मिल सकता है।
5. कुंभ राशि- इस राशि के जातकों के लिए यह राशि परिवर्तन धन लाभ के योग बना सकता है। पुराने निवेश में लाभ होने के साथ ही व्यापार में भी धन लाभ हो सकता है। जमीन में निवेश के लिए भी यह समय उत्तम है।
6. मकर राशि- गुरु के राशि परिवर्तन से इस राशि के जातकों के धार्मिक यात्रा पर जाने के योग बनेंगे। शिक्षा के जुड़े क्षेत्र में नई पहचान बन सकती है।
भिलाई / शौर्यपथ / कब्ज़ा एक ऐसा शब्द जो आदमी की हैसियत देख कर प्रशासन की कार्यवाही निर्भर कर्ता है . अगर कब्जाधारी इंसान म्वार्ग हो तो निगम या तो जुर्माना वसूल कर्ता है और अतिक्रमण हटाने की ताकीद कर्ता है या फिर निगम का तोडू दस्ता पूरी फौज के साथ आकर अवैध कब्ज़े को हटा देता है क्योकि ऐसे कब्जाधारी कमजोर व माध्यम वर्ग के होते है जिस पर निगम प्रशासन की सख्ती कार्य करती है किन्तु अगर कब्जाधारी रसूखदार हो या धनवान हो तो कब्ज़ा करने में आसानी और कार्यवाही में लेटलतीफी आम बात हो जाति है . जी हाँ ऐसा ही कुछ मामला भिलाई निगम के आकाश गंगा क्षेत्र का है जहां के निगम काम्प्लेक्स में कई दुकानदारों द्वारा आम जनता की सुविधा के लिए बने बरामदे को कब्ज़ा कर कच्चा / पक्का निर्माण कर दिया गया और भिलाई निगम के अधिकारी सिर्फ देखते है और मौन रहते है क्योकि कब्जाधारी के रसूख के आगे शासन के सारे नियम एक कोने में रखे रह जाते है .
मामला है आकाश गंगा भिलाई के निगम काम्प्लेक्स का जहाँ निगम प्रशासन द्वारा निर्मित काम्प्लेक्स के डी ब्लाक में पारस ज्वेलर्स के नाम से संस्थान संचालित हो रहा है . यह संस्थान साल डो साल पहले ही बना है किन्तु भवन किस नियम के तहत बना है ये भवन अनुज्ञा अधिकारी भिलाई निगम को भी पता नहीं भवन अनुज्ञा अधिकारी के अनुसार किसी भी व्यवसायिक भवन के निर्माण के लिए भवन अनुज्ञा भिलाई निगम के मुख्य कार्यालय से प्रदान की जाति है किन्तु डो साल पहले बने पारस ज्वेलर्स का कोई रिकार्ड ऑनलाइन सिस्टम में उपलब्ध नहीं है जबकि 2017 से भवन अनुज्ञा ऑनलाइन पद्दति से हो रही है . भवन अनुज्ञा अधिकारी के अनुसार ऑफ लाइन में निरिक्षण करने पर ही ज्ञात होगा की निर्माण किस नियमके तहत हुई है .
निगम के अधिकारियो ने यह भी बताया की दूकान की साइज़ अनुमानत: 80 वर्गफीट है किन्तु निर्माण को देखने से ही साफ़ प्रतीत होता है की निर्माण कम से कम 200 वर्गफीट पर किया गया है और आम जनता के लिए निर्मित पब्लिक स्पेस बरामदे पर भी अवैध कब्ज़ा कर निर्माण को अंजाम दिया गया है .
इस बारे में जब जोन आयुक्त सुनील अग्रहरी से चर्चा र्की गयी तो उनके अनुसार इस बात की जानकारी नहीं कि किस नियम के तहत निर्माण हुआ है किन्तु मामले की जाँच कर उचित कार्यवाही की जाएगी और अगर अवैध रूप से निर्माण हुआ है तो निश्चित ही नियमानुसार कार्यवाही की जाएगी .
अब देखना यह है की जिस तरह गरीबो के अतिक्रमण पर निगम प्रशासन कार्यवाही में तत्परता दिखाती है वैसी ही तत्परता पारसा ज्वेलर्स के मामले पर भिलाई निगम प्रशासन और जोन 1 कार्यालय दिखाएगी या नहीं ?
रायपुर/ शौर्यपथ /

मुख्यमंत्री बघेल ने प्रसिद्ध साहित्यकार, भाषाविद् और छत्तीसगढ़ राज्य-गीत के रचयिता डॉ. नरेन्द्र देव वर्मा को उनकी जयंती पर उन्हें नमन किया है। 4 नवम्बर को डॉ. नरेन्द्र देव वर्मा की जयंती है। मुख्यमंत्री ने डॉ. नरेन्द्र देव वर्मा को याद करते हुए कहा है कि डॉ. वर्मा बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे। उन्होंने कवि, चिंतक, उपन्यासकार, नाटककार, सम्पादक और मंच संचालक जैसी कई भूमिकाओं में अपनी अमिट छाप छोड़ी है। अंग्रेजी में भी उन्होंने अपनी रचनाएं लिखीं। अपनी ओजपूर्ण वाणी और अकाट्य तर्कों से वे किसी को भी पलभर में प्रभावित करने की क्षमता रखते थे। युवा उत्सव के समारोह में उन्होंने अपने विचारों से तत्कालीन प्रधानमंत्री पं. जवाहरलाल नेहरू को भी गहराई तक प्रभावित किया था। ’अरपा-पइरी के धार, महानदी हे अपार......’ के रूप में उन्होंने अमर रचना दी है, जिसमें छत्तीसगढ़ महतारी का वैभव एक बारगी साकार हो उठा है। यह गीत डॉ. नरेन्द्र देव वर्मा की पहचान और छत्तीसगढ़ का मान बन गया है। उनकी कलम से निकला यह गीत राज्य गीत के रूप में आज बस्तर से लेकर सरगुजा तक छत्तीसगढ़वासियों की आत्मा का गान बन चुका है। छत्तीसगढ़ की ऐसी वंदना उनका सच्चा सपूत ही कर सकता है।
मुख्यमंत्री बघेल ने कहा कि डॉ.नरेंद्र देव वर्मा ने जो भी लिखा, वह लोगों की अंतरआत्मा में उतर गया। उनकी रचनाओं में छत्तीसगढ़ के जनजीवन तथा संस्कृति का सजीव चित्रण मिलता है। उनके हिंदी उपन्यास ‘सुबह की तलाश‘ जब छत्तीसगढ़ी में अनुवाद के बाद ‘‘सोनहा बिहान‘‘ के रूप में लोगों के बीच रंगमंच के माध्यम से पहुंचा, तब इसने आम लोगों में सुनहरी सुबह के साकार होने की आशा जगा दी। सही अर्थों में वे छत्तीसगढ़ के सोनहा बिहान के स्वप्नदृष्टा थे। उन्होंने ‘‘छत्तीसगढ़ी भाषा व साहित्य का उद्विकास‘‘ विषय पर शोध किया और पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने छत्तीसगढ़ी गीत संग्रह ‘अपूर्वा’, हिंदी उपन्यास ‘सुबह की तलाश’ जैसे कई ग्रंथों की रचना की। उनका लिखा ‘मोला गुरु बनई लेते छत्तीसगढ़ी प्रहसन’ अत्यंत लोकप्रिय हुआ। डॉ. वर्मा ने छत्तीसगढ़ी भाषा-अस्मिता को बनाए रखने और यहां की संस्कृति को विशिष्ट पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। श्री बघेल ने कहा कि छत्तीसगढ़ी भाषा के लिए उनका यह अमूल्य योगदान हमेशा याद किया जाता रहेगा।
रायपुर / शौर्यपथ /राज्यपाल सुश्री अनुसुईया उइके ने आज शाम रायपुर के बूढ़ा तालाब-स्वामी विवेकानंद सरोवर का भ्रमण किया। उन्होंने बूढ़ा तालाब में नौका विहार भी किया। इस अवसर पर परिसर में रंगबिरंगी रोशनी की गई और आतिशबाजी भी की गई। राज्यपाल ने कहा कि ऐतिहासिक बूढ़ा तालाब रायपुर ही नहीं पूरे छत्तीसगढ़ का गौरव है। इस अल्प अवधि में सौंदर्यीकरण करने के पश्चात एक सुंदर स्वरूप में शहरवासियों के लिए प्रस्तुत किया गया। इसके लिए मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल, महापौर श्री एजाज ढेबर तथा नगर निगम आयुक्त श्री सौरभ कुमार बधाई के पात्र हैं। रायपुर शहर के अंदर शहरवासियों के लिए पर्यटन तथा सहपरिवार समय व्यतीत करने के लिए एक सुंदर जगह है। अभी तक छत्तीसगढ़वासी छत्तीसगढ़ से बाहर दूसरे राज्यों में पर्यटन के लिए जाते थे। मगर अब शासन के प्रयासों के फलस्वरूप छत्तीसगढ़ में ही कई सुंदर पर्यटन स्थल विकसित हो रहे हैं। इससे हमारे प्रदेश के ही नहीं दूसरे प्रदेश के लोग भी पर्यटन के लिए आएंगे और निश्चित ही प्रदेश की राजधानी रायपुर देश में प्रथम स्थान पर सबसे खुबसूरत शहर के रूप में जाना जाएगा। राज्यपाल ने महापौर एवं जिला प्रशासन को ऐतिहासिक बूढ़ेश्वर मंदिर को विकसित करने के निर्देश दिए। इस अवसर पर वरिष्ठ विधायक सत्यनारायण शर्मा, विधायक कुलदीप जुनेजा, सभापति प्रमोद दुबे, रायपुर नगर निगम के पार्षदगण तथा कलेक्टर एस. भारतीदासन और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय यादव सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
रायपुर / शौर्यपथ /आगामी ठंड के मौसम में कोरोना संक्रमण की संभावना बढ़ेगी, ऐसा सभी विशेषज्ञ बार-बार कह रहे हैं। दिल्ली में यह टंªेड सामने आने ही लगा है। इस वक्त सभी को सावधानी रखना और कोविड प्रोटोकाल का पालन करना बहुत जरूरी है।
स्वास्थ्य विभाग ने फिर अपील की है कि किसी को भी सर्दी,खांसी,बुखार ,थकान आदि लक्षण दिखें तो तुरंत चिकित्सक को दिखाकर कोरोना जांच करवाएं। जल्द जांच कराने और इलाज शुरू होने से रिकवरी की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। वर्तमान में प्रदेश में कुल 1018 शासकीय केन्द्रो (स्वास्थ्य केन्द्रो, सामुदायिक भवनो तथा मोबाइल टीम) में कोविड -19 की एंटीजेन जांच की जा रही हैं। इसके अतिरिक्त 489 शासकीय केन्द्रो में ट्रू नाट तथा 592 शासकीय केन्द्रो में आर टी पी सी आर जांच हेतु सेंपल भी लिए जा रहे हैं ।
मुंंबई / शौर्यपथ / महाराष्ट्र के बीजेपी के एक विधायक ने मेगास्टार अमिताभ बच्चन और टीवी शो 'कौन बनेगा करोड़पति-12 ' के निर्माताओं के खिलाफ कथित तौर पर हिंदू भावनाओं को आहत करने को लेकर कार्रवाई के लिए पुलिस से संपर्क किया है. राज्य के लातूर जिले के औसा के विधायक अभिमन्यु पवार ने लातूर एसपी निखिल पिंगले को दी शिकायत में कहा कि अभिताभ बच्चन और सोनी इंटरटेनमेंट टेलीविजन पर शुक्रवार के 'कर्मवीर स्पेशल' एपिसोड में पूछे गए एक सवाल को लेकर कार्रवाई की जानी चाहिए. उन्होंने अपनी दो पेज की शिकायत में लिखा, 'यह हिंदुओं के अपमान और सद्भाव के साथ रह रहे हिंदुओं और बौद्धों के बीच कलह पैदा करने का प्रयास है.'
एपिसोड में सामाजिक कार्यकर्ता वेजवाडा विल्सन और एक्टर अनूप सोनी हॉट सीट पर थे. अमिताभ ने 6.40 लाख रुपये का यह सवाल पूछा था-25 दिसंबर 1927 को डॉ. बीआर अंबेडकर और उनके अनुयायियों ने किस ग्रंथ की प्रतियां जलाई थीं (A) विष्णु पुराण (B) भगवद् गीता(C) ऋगवेद और(D) मनुस्मृति. पवार की शिकायत के अनुसार, इसके बाद अमिताभ ने कहा था, 'वर्ष 1927 में डॉ. अंबेडकर ने हिंदू ग्रंथ मनुस्मृति की जातिगत भेदभाव और छुआछूत को न्यायोचित ठहराने के लिए आलोचना की थी और इसकी कॉपियां जलाई थी. पवार ने अपनी शिकायत में कहा, 'चारों विकल्प हिंदू धर्म से संबंधित थे और यह स्पष्ट है कि इस सवाल का उद्देश्य हिंदुओं की भावनाओं को ठेस पहुंचाना था.'
केबीसी एपिसोड के इस प्रश्न पर सोशल मीडिया पर भी शो पर वामपंथी विचारधारा चलाने का आरोप लगाया था जबकि कुछ अन्य ने इसे हिंदू भावनाओं के खिलाफ माना था.
नई दिल्ली / शौर्यपथ / नई दिल्ली अमेरिका में तीन नवंबर को रहे राष्ट्रपति चुनाव पर भारत समेत दुनिया भर की निगाहें हैं. क्या रिपब्लिकन प्रत्याशी डोनाल्ड ट्रंप दोबारा जीत हासिल करेंगे या डेमोक्रेट प्रत्याशी जो बाइडेन बाजी पलट देंगे. इसको लेकर इंटरनेट, टीवी चैनलों से लेकर सोशल मीडिया तक दिलचस्पी चरम पर है. आइए जानते हैं अमेरिकी चुनाव को सरल शब्दों में...
ट्रंप और बाइडेन के बीच मुकाबला
इस बार मुकाबला 74 साल के डोनाल्ड ट्रंप और 78 साल के जो बाइडेन में है. बराक ओबामा के आठ साल के शासन में उप राष्ट्रपति रहे बाइडेन ने कमला हैरिस को उप राष्ट्रपति नामित किया है. जबकि ट्रंप ने फिर माइक पेंस को नामित किया है. कमला हैरिस भारतीय मूल की हैं और चेन्नई से उनका नाता है.
दो दलों के बीच सीधी जंग
अमेरिकी राजनीति में डेमोक्रेट और रिपब्लिकन की दो दलीय व्यवस्था ही हावी है. चुनाव में निर्दलीय और छोटी पार्टियों के प्रत्याशी भी कभी कभार खड़े होते हैं, लेकिन कभी बड़ी चुनौती नहीं बन पाए. इस बार मशहूर मॉडल किम करदाशियां के पति कान्ये वेस्ट निर्दलीय प्रत्याशी हैं.
रिपब्लिकन के मुद्दे- हथियार, चर्च के अधिकारों के समर्थक, गर्भपात,अप्रवासियों पर कड़ा रुख, कम टैक्स के पैरोकार
डेमोक्रेट के मुद्दे- पर्यावरण, वैश्विक संगठनों के पक्षधर, महिला, मजदूरों और अप्रवासियों के अधिकारों के समर्थक
मतदान इस वक्त शुरू होगा
अमेरिकी समयानुसार वोटिंग मंगलवार सुबह 6 बजे और भारतीय समयानुसार बुधवार दोपहर 3.30 बजे शुरू होगी. भारतीय समयानुसार अमेरिकी चुनाव में मतदान गुरुवार सुबह 6.30 बजे पूरा होगा.
मतगणना रात से शुरू होगी
अमेरिका में मतगणना (US Counting of votes) हर राज्य में चुनाव प्रक्रिया पूरी होते ही मंगलवार रात (भारत में बुधवार को) ही शुरू हो जाएगी. पोस्टल बैलेट के कारण राज्यों में मतगणना कई हफ्तों तक खिंच सकती है.
दस करोड़ वोटर डाल चुके मत
अमेरिकी चुनाव में 23.9 करोड़ मतदाता हैं, लेकिन 3 नवंबर को मतदान के पहले ही करीब 10 करोड़ लोग पोस्टल बैलेट या अर्ली वोटिंग के जरिये वोट दे चुके हैं.
बहुमत का जादुई आंकड़ा
भारत में लोकसभा की 543 सीटों में से 272 का बहुमत का आंकड़ा होता है. उसी तरह अमेरिका में बहुमत के लिए किसी भी उम्मीदवार को 269 निर्वाचक वोटों का जादुई आंकड़ा पार करना होता है. उसे कम से कम 270 वोट मिलना जरूरी है.
निर्वाचक वोट को ऐसे समझिए
अमेरिका में जनता सीधे राष्ट्रपति नहीं चुनती. राष्ट्रपति का फैसला निर्वाचक वोटों से होता है. पूरे देश में 538 इलेक्टोरल कॉलेज हैं. हर राज्य के अपने इलेक्टोरल कॉलेज तय हैं, जैसे कैलीफोर्निया में 55. कैलीफोर्निया में जिस प्रत्याशी को सबसे ज्यादा वोट मिलेंगे. उसे ये पूरे 55 निर्वाचक वोट मिल जाएंगे.
कैलीफोर्निया में सबसे ज्यादा वोट
अमेरिकी प्रांत कैलीफोर्निया में सर्वाधिक 55, न्यूयॉर्क में 29, टेक्सास में 38 और फ्लोरिडा में 29 निर्वाचक वोट हैं. कैलीफोर्निया और न्यूयॉर्क डेमोक्रेटों के गढ़ रहे हैं, जबकि टेक्सास रिपब्लिकन का.
नतीजों में हो सकती है देरी
पोस्टल बैलेट यानी डाक से भेजे गए मतपत्रों को खोलने, उनमें गलतियां देखने और छांटने में लंबा वक्त लग सकता है. ऐसे में स्पष्ट नतीजे आने में एक-दो हफ्ते लग सकते हैं.
राज्य अलग-अलग नतीजे जारी करेंगे
अमेरिका में 50 प्रांत हैं. भारत में एक साथ नतीजों के ऐलान से उलट अमेरिकी राज्यों में मतदान, पोस्टल बैलेट की गिनती और मतगणना के अलग-अलग नियम हैं. कुछ राज्यों ने पोस्टल बैलेट डाल चुके लोगों को भी इसे रद्द कराने और चुनाव वाले दिन 3 नवंबर को वोट करने का विकल्प दिया है. ऐसे चुनाव प्रक्रिया और जटिल हो गई है.
ये राज्य होंगे निर्णायक
अमेरिका में फ्लोरिडा, विस्कोंसिन, मिशिगन, नार्थ कैरोलिना, पेनसिल्वेनिया और ओहायो के नतीजों को निर्णायक माना जा रहा है. फ्लोरिडा जैसे राज्य में 22 दिन पहले ही वोटों की गिनती शुरू हो गई, लेकिन विस्कोंसन में 24 पहले भी ऐसा नहीं हो सकेगा. बुश और अलगोर के चुनाव में फ्लोरिडा निर्णायक साबित हुआ था.
नए राष्ट्रपति के लिए करीब दो माह का वक्त
अमेरिकी में सब कुछ तय होता है. नवंबर में पहले सोमवार के बाद पड़ने वाले मंगलवार (इस बार 3 नवंबर) को ही चुनाव होता है. राष्ट्रपति 20 जनवरी को शपथ लेते हैं. ऐसे में नतीजे देरी से आए या अदालती विवाद हुआ तो दिक्कत नहीं होगी.
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
