August 12, 2026
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    शौर्यपथ

    शौर्यपथ

    दुर्ग / शौर्यपथ / लोक निर्माण मंत्री ताम्रध्वज साहू ने आज जिला पंचायत दुर्ग के सभाकक्ष में विभागीय कार्यों की समीक्षा की। मंत्री साहू ने कहा कि विभाग द्वारा निर्माण कार्यों की गुणवत्ता के संबंध में विशेष मानिटरिंग की जा रही है। किसी भी तरह से गुणवत्ता में कमी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि क्षेत्र के निवासी काफी अपेक्षा से मिलते हैं और अपने मांग रखते हैं, जो क्षेत्रों के विकास के लिए काफी महत्वपूर्ण होते हैं। इन मांगों और प्रस्तावों का परीक्षण कर बजट प्रस्ताव में शामिल किया जा रहा है।
    मंत्री ने कहा कि विधानसभा क्षेत्र के भ्रमण के दौरान जनता से अनेक माँगे रखी जाती है जिसे कार्य की उपयोगिता के आधार पर कराया जा रहा है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि बुनियादी सुविधाओं के मामले में हमेंशा सजग रहें। राज्य शासन की नरवा, गरूवा, घुरूवा, बाड़ी योजना सबसे अहम है यह ग्रामीण क्षेत्रों में विकास की धुरी साबित होगी। अधिकारी यह सुनिश्चित करें कि गौठान में हर संभव सुविधा उपलब्ध हो। गौठान आजीविकामूलक गतिविधियों का केंद्र बने। गोधन न्याय योजना का लाभ लोगों को मिल सके। अभी धान खरीदी का सीजन आएगा। यह देख लें कि किसानों को धान खरीदी केंद्रों में हर तरह की सुविधा मिले। उन्होंने कहा कि इसके लिए पर्याप्त तैयारियां कर लें ताकि किसानों को असुविधा न हो।
    मंत्री साहू ने कहा कि नागरिक सुविधाओं के विस्तार के लिए विभाग प्रस्ताव तैयार कर रहा है। इस संबंध में जनप्रतिनिधियों से भी राय ली गई है। सभी के सहयोग से आम जनता की बुनियादी सुविधाओं वाले कार्यों पर काम हो रहा है। उन्होंने कहा कि नागरिक सुविधाओं को अविलंब प्रदान करने शासन लोक सेवा गारंटी योजना के क्रियान्वयन पर पुख्ता नजर रखे हुए है। यह कोशिश करें कि जल्द से जल्द लोगों को सुविधाएं प्रदान की जा सकें। त्वरित गति से काम होने से प्रशासन की छवि निरंतर बेहतर होती है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य की दिशा में विशेष रूप से कार्य करने मोबाइल वैन आरंभ किये गए हैं। शिक्षा को बढ़ावा देने स्वामी आत्मानंद इंग्लिश मीडियम स्कूल आरंभ किये गए हैं। यह सारे नवाचार शासन द्वारा किये जा रहे हैं। इनके उचित क्रियान्वयन पर विशेष रूप से नजर रखनी है। बैठक में जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती शालिनी यादव, जनपद पंचायत अध्यक्ष देवेंद्र देशमुख सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।

    रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ में ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन और शमनक्रियाओं के लिए मापन, रिपोर्टिंग और सत्यापन प्रणाली पर राजधानी रायपुर में शनिवार को बहु-स्तरीय शासन-विधि राष्ट्रीय वर्चुअल वार्ता का आयोजन किया गया। यह इस विषय पर प्रथम वर्चुअल आयोजन है। बहुस्तरीय वार्ता का आयोजन आई.सी.एल.ई.आई. (लोकल गवर्नमेंट फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट) एवं क्लाइमेट ग्रुप, इंग्लैंड के तत्वावधान में किया गया।
    उल्लेखनीय है कि क्लाइमेट फुटप्रिंट प्रोजेक्ट अंतर्गत लोकल गवर्नमेंट फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट और क्लाइमेट ग्रुप, राज्य और क्षेत्रीय सरकारों को ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन पर नजर रखने तथा ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करने के प्रयासों के लिए तकनीकी सहायता प्रदान करता है। क्षेत्रीय ग्रीनहाउस गैस इनवेंटरी से स्थानीय नीति निर्माताओं को उत्सर्जन के स्रोत व उत्सर्जन कम करने की रणनीतियों को समझने तथा निर्धारण के लिए लोकल गवर्नमेंट फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट एवं क्लाइमेट ग्रुप इसमें तकनीकी परामर्श प्रदान कर रहा है। क्लाइमेट फुटप्रिंट परियोजना के तहत पर्नामबुको (ब्राजील), छत्तीसगढ़ और पश्चिम बंगाल (भारत), बाजा कैलिफोर्निया, जलिस्को और युकाटन (मेक्सिको) और क्वाजुलु-नटाल (दक्षिण अफ्रीका) को प्रत्यक्ष सहायता और प्रशिक्षण प्रदान करती है।
    बहुस्तरीय संवाद के प्रथम सत्र में एकीकृत मॉनीटरिंग, रिपोर्टिंग तथा वेरीफिकेशन पर परिचर्चा हुई। केन्द्रीय सरकार में पी.सी.सी.एफ एवं हेड ऑफ फॉरेस्ट फोर्स तथा महानिदेशक श्री मुदित कुमार सिंह ने अपने उद्बोधन बताया कि राज्य के परिप्रेक्ष्य में पर्यावरण संरक्षण और समग्र विकास के लिए राज्य शासन द्वारा नीतियों तथा क्रियान्वयित कार्यक्रमों नरवा-गरवा-घुरवा-बाड़ी कार्यक्रम के बारे में विस्तृत चर्चा की तथा राज्य में सौर ऊर्जा गठबंधन की भी व्याख्या की। उन्होंने बताया कि नरवा-गरूवा-घुरवा-बाड़ी योजना को विश्व स्तर पर भी मान्यता मिली है। उन्होंने एम.आर.वी सिस्टम के लिए नीति और कानूनी फ्रेम की आवश्यकता के अलावा उत्पन्न डाटा के सत्यापन के लिए आधारभूत डाटा मानकों की आवश्यकता पर भी बल दिया।
    वैज्ञानिकों एवं नेटकॉम, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के राष्ट्रीय परियोजना निदेशक डॉ. जे.आर. भट्ट, छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं प्रोद्योगिकी परिषद एवं रीजनल साइंस सेंटर की सुश्री लौरा गामरा, अधिकारी जलवायु डेटा, बॉन सेंटर, जर्मनी, अभिषेक कौशिक, क्षेत्र संयोजक, वैश्विक पर्यावरण अनुसंधान केंद्र, टेरी, सेसरकोर्रेनो, जलवायु डेटा के प्रमुख, आईसीएलईआई विश्वसचिवालय, एमनीकुमार, उप महासचिव, आईसीएलईआई (दक्षिण एशिया) एवं श्रीनिवास कृष्णस्वामी, संस्थापक ट्रस्टी और सीईओ, वसुधा फाउंडेशन ने वर्चुअल वार्ता में हिस्सा लिया।

    नई दिल्ली / शौर्यपथ /सुप्रीम कोर्ट ने बाबरी विध्वंस मामले में फैसला सुनाने वाले जज को सेवानिवृत्ति के बाद भी सुरक्षा मुहैया कराने की याचिका खारिज कर दी है. जज एसके यादव ने सुरक्षा जारी रखने के लिए स्वयं शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया था, हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इससे इनकार कर दिया.
    जज एसके यादव ने बाबरी विध्वंस मामले में बीजेपी नेताओं समेत सभी आरोपियों को बरी करने का फैसला सुनाया था. इस मामले में एलके आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती समेत कई बड़े नेता आरोपी थे. अदालत ने कहा कि सेवानिवृत्ति के बाद लगातार सुरक्षा मुहैया नहीं कराई जा सकती. लखनऊ स्पेशल कोर्ट के जज एसके यादव ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल कर सुरक्षा का मांग की थी. जज यादव ने अपने आखिरी मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए अपनी निजी सुरक्षा जारी रखने के लिए कहा है.
    ट्रायल के दौरान दी गई थी सुरक्षा
    इससे पहले ट्रायल के दौरान जज ने सुप्रीम कोर्ट से सुरक्षा मुहैया करने की मांग की थी, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया था. अदालत ने यूपी सरकार को सुरक्षा देने के निर्देश दिए थे. हालांकि फैसला आने और रिटायर होने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने जज को सुरक्षा जारी रखने से इनकार कर दिया है. गौरतलब है कि बाबरी विध्वंस मामले में यह फैसला घटना के करीब 28 साल बाद 30 सितंबर 2020 को आया था.
    28 साल बाद 30 सितंबर को आया था फैसला
    बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले का ट्रायल करने वाले स्पेशल जज एस के यादव पिछले साल 30 सितंबर को ही रिटायर होने वाले थे, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उनका कार्यकाल फैसला आगे बढ़ाया था. सुप्रीम कोर्ट ने अप्रैल 2017 में दो साल के भीतर मुकदमा निपटा कर फैसला सुनाने का आदेश दिया था. इसके बाद तीन बार समय बढ़ाया और अंतिम तिथि 30 सितंबर 2020 तय की थी. घटना की पहली FIR नंबर 197 उसी दिन 6 दिसंबर 1992 को श्रीराम जन्मभूमि सदर फैजाबाद पुलिस थाने के थानाध्यक्ष प्रियंबदा नाथ शुक्ल ने दर्ज कराई थी. दूसरी FIR नंबर 198 राम जन्मभूमि पुलिस चौकी के प्रभारी गंगा प्रसाद तिवारी की थी.

    नई दिल्ली / शौर्यपथ / दक्षिण दिल्ली के मालवीय नगर में लोकप्रिय भोजनालय'बाबा का ढाबा' के मालिक कांता प्रसाद ने इंस्टाग्राम इनफ्लुएंसर व यूट्यूबर गौरव वासन के खिलाफ डोनेशन के पैसों की हेराफेरी की शिकायत दर्ज कराई है. बाबा का ढाबा के मालिक कांता प्रसाद ने इस पूरे मामले पर उन्होंने गौरव पर आरोप लगाया कि दान की राशि अपने और अपनी पत्नी के नाम पर मंगवा ली. बता दें कि गौरव ने ही सबसे पहले 'बाबा का ढाबा' का वीडियो सोशल मीडिया शेयर किया था.
    कांता प्रसाद का आरोप है कि गौरव ने उनके और उनकी पत्नी की मदद के नाम पर आए पैसों में हेरफेर की है. ढाबा वाले बाबा ने आरोप लगाया कि गौरव ने डोनेशन के पैसे अपने, अपनी पत्नी और भाई के नाम पर मंगाया था. मुझे सिर्फ 2,33,677 रुपये का चेक दिया गया. हमने बैंक में चेक लगा दिया है.
    कांता प्रसाद ने अपने आरोप में कहा कि गौरव ने किसी को बताया था कि हमारे खाते में 20 लाख रुपये हैं, वहां से यह बात लीक हुई है. गौरव को कैसे पता था कि मेरे खाते में कितने पैसे हैं? सारे पैसे उनके ही खाते में आए हैं. उन्होंने हमें बताया था कि सिर्फ 2 लाख रुपये आए थे. मेरे नाम पर आई मदद को उन्होंने खुद रख लिया. गौरव ने कहा था कि बाबा अपना खाता नंबर किसी को मत देना.
    ब्लॉगर गौरव वासन ने एनडीटीवी से बातचीत में अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को खारिज किया और सिलसिलेवार तरीके से आरोपों का जवाब दिया.गौरव ने बताया, '8 अक्टूबर को जो 75 हज़ार कैश आया वो बाबा के बैंक खाते में जमा किया. बैंक ने उसी दिन हमें बताया कि बाबा के खाते में 20-25 लाख रुपए आ गए हैं, इसलिए बैंक खाता सीज कर दिया गया है.'
    उन्होंने कहा, 'मेरे खाते में बाबा के नाम से 3 लाख से ज़्यादा पैसा आया. सारा पैसा बाबा को चेक, NEFT के माध्यम से दिया गया.'
    वहीं, गौरव वासन ने अपने यूट्यूब चैनल पर दावा किया है कि उन्होंने कोई बेईमानी नहीं की है, और अपनी बात को साबित करने के लिए वह जल्द ही एक वीडियो के रूप में बैंक का वेरिफाइड स्टेटमेंट अपलोड करेंगे.
    हाल ही में 'Baba Ka Dhaba' का एक वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर साझा किए जाने के बाद वह फेमस हो गए थे. वह वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ था, जिसमें उन्होंने लॉकडाउन के दौरान दुकान न चल पाने से आर्थिक तंगी को लेकर अपनी व्यथा बताई थी.

    शौर्यपथ / फोन या कंप्यूटर पर हिंदी भाषा में टाइप करने के लिए ऑनलाइन दुनिया में कई एप्लीकेशन और सॉफ्टवेयर मौजूद हैं। कई लोग हिंदी में टाइप करने के लिए बड़े साइज के एप डाउनलोड कर लेते हैं जो काफी अधिक मात्रा में फोन की इंटरनल मेमोरी का इस्तेमाल करते हैं। हालांकि कंप्यूटर और फोन में पहले से ही हिंदी कीबोर्ड का फीचर इनबिल्ट है। बस इसे सेटिंग्स में जाकर ऑन करने की जरूरत होती है।
    स्मार्टफोन में पाएं हिंदी कीबोर्ड
    गूगल के एंड्रॉयड ऑपरेटिंग सिस्टम पर चलने वाले अधिकतर फोन में गूगल कीबोर्ड पहले ही इंस्टॉल रहता है और इसी कीबोर्ड में हिंदी कीबोर्ड भी इनबिल्ट होता है। इस एप में इसके अलावा भी विश्व की कई भाषाएं शामिल हैं। इसके बावजूद कई यूजर हिंदी टाइपिंग के लिए अलग-अलग एप्लीकेशन को फोन में इंस्टॉल करते हैं।
    ऐसे एक्टिवेट करें फोन में हिंदी टाइपिंग
    इसके लिए सबसे पहले जिस फोन में हिंदी टाइपिंग करना चाहते हैं उसमें कोई मैसेज खोलें। इसके बाद जो टाइपिंग का विकल्प दिया गया है जिसमें कीबोर्ड के ऊपर या नीचे की तरफ एक 'ग्लोब' का आकन दिया होगा, उस पर क्लिक कर दें। इस पर क्लिक करते ही फोन स्क्रीन पर हिंदी समेत कई विकल्प आ जाएंगे, उनमें हिंदी का चुनाव करें। ऐसा करने के बाद यूजर हिंदी टाइपिंग का लुत्फ उठा सकते हैं। हिंदी से दोबारा अंग्रेजी करने के लिए इसी प्रक्रिया का पालन कर सकते हैं।
    ग्लोब का आइकन न आने पर
    जीबोर्ड बदलने के लिए अगर फोन में ग्लोब का आइकन नहीं आ रहा है तो सेटिंग में जाएं उसमें मौजूद ‘लैंग्वेज एंड इनपुट’ के विकल्प पर क्लिक करें। इसमें आपको कीबोर्ड और इनपुट मेथेड के नीचे ‘डिफॉल्ट’ लिखा दिखाई देगा। ‘डिफॉल्ट’ में उस एप का नाम आएगा जो आपके फोन में वर्तमान समय में काम कर रहा है। हिंदी कीबोर्ड का फीचर एक्टिवेट करने के लिए याद रहे कि डिफॉल्ट में गूगल कीबोर्ड सेट हो। डिफॉल्ट के नीचे गूगल कीबोर्ड दिखाई देगा। उस विकल्प के दाईं ओर टच करने पर एक नई डिस्प्ले खुलेगी जिसके ऊपर गूगल कीबोर्ड सेटिंग लिखा मिलेगा। इसके बाद ‘लैंग्वेज’ वाले बॉक्स पर क्लिक करते ही एक बॉक्स खुलेगा। पहले बॉक्स में ‘मार्क’ लगा हुआ दिखाई देगा, मगर उस बॉक्स से मार्क हटा दें। ऐसा करने से आपकी डिस्प्ले पर विश्व की अधिकतर भाषाओं का विकल्प दिखने लगेगा। हिंदी कीबोर्ड को चालू करने के लिए नीचे की तरफ जाने पर हिंदी का विकल्प दिखेगा, उसके दाईं ओर दिए गए बॉक्स पर क्लिक करें। इसके साथ ही अंग्रेजी (भारत) वाले बॉक्स पर क्लिक रहने दें ताकि आप हिंदी और अंग्रेजी टाइपिंग का इस्तेमाल कर सकें। इसके बाद फोन के कीबोर्ड में हिंदी और अंग्रेजी दोनों विकल्प आ जाएंगे।
    विंडोज 7 में ऐसे चालू करें हिंदी टाइपिंग
    विंडोज में हिंदी कीबोर्ड को ऑन करने के लिए यूजर को पहले कंप्यूटर या लैपटॉप के ‘कंप्यूटर पैनल’ में जाना होगा। कंप्यूटर पैनल में जाने के लिए डिस्प्ले में बाईं ओर स्टार्ट का विकल्प पर क्लिक करें। इससे जो नया मेन्यू बार खुलेगा उसमें काली पट्टी के अंदर ‘कंप्यूटर पैनल’ का विकल्प मिलेगा। कंप्यूटर पैनल खुलने के बाद यूजर को Region and Language के विकल्प पर जाना होगा। यहां आपको ऊपर वाली पट्टी में चार नए बार दिखाई देंगे। पहले बार पर फॉर्मेट, दूसरे पर लोकेशन, तीसरे पर कीबोर्ड और चौथे पर लैंग्वेंज एंड एडमिनस्ट्रेटव का विकल्प है। हिंदी कीबोर्ड पाने के लिए तीसरे नंबर के विकल्प ‘कीबोर्ड’ पर क्लिक करें। इसके बाद चेंज कीबोर्ड पर क्लिक करें। इसके बाद एक और स्क्रीन बार खुलेगा जिसमें ‘जनरल’ पर क्लिक करना होगा। यहां जाने के बाद हिंदी (इंडिया) के विकल्प पर जाएं। इसमें आपके ‘देवनागरी- इनक्रिप्ट’ और ‘हिंदी ट्रेडिशनल’ के बॉक्स दिखाई देंगे। इनमें से किसी भी एक का चयन करें और ‘एप्लाई’पर क्लिक कर दें। इससे कंप्यूटर में हिंदी कीबोर्ड का फीचर आ जाएगा। इसके लिए अलग फॉन्ट की जरूरत नहीं होगी। मंगल फॉन्ट माइक्रोसॉफ्ट की सभी विंडोज में डिफॉल्ट होता है।
    आसान है कीबोर्ड को हिंदी-अंग्रेजी में बदलना
    माइक्रोसॉफ्ट के इस इनबिल्ट कीबोर्ड का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसे बड़ी ही आसानी से हिंदी और अंग्रेजी में बदला जा सकता है। इसके लिए आपको बस Shift+Alt बटन को एक साथ दबाना होता है। उदाहरण के तौर पर अगर आप हिंदी टाइपिंग कर रहे हैं तो Shift+Alt को दबाकर कीबोर्ड को अंग्रेजी में बदल सकते हैं। वहीं अगर आप अंग्रेजी में टाइपिंग कर रहे हैं तो Shift+Alt को दबाने से हिंदी में टाइपिंग शुरू कर कर सकते हैं।

    खाना खजाना /शौर्यपथ / ब्रेड स्प्रिंग रोल यह ऐसी रेसिपी है, जिसे आप 10 मिनट के अंदर तैयार कर सकते हैं। अगर घर पर अचानक मेहमान आ जाएं या फिर बर्थ डे पार्टी हो, आप इसे स्नैक्स के तौर पर आसानी से घर पर ही बना सकते हैं। आइए, जानते हैं आसान रेसिपी
    सामग्री
    1 कप पत्ता गोभी
    1 कप गाजर
    1 कप शिमला मिर्च
    2-3 लहसुन कटे हुए
    ½ चम्मच लहसुन का पेस्ट
    1 कप प्याज
    6 ब्रेड पीस
    नमक स्वादानुसार
    तेल आवश्यकतानुसार (फ्राई करने के लिए)
    1 चम्मच सोया सॉस
    विधि
    सारी सब्जियों को बारीक काट लें। एक कड़ाही में तेल गर्म करें और उसमें लहसुन का पेस्ट डालकर भून लें। फिर सभी सब्जियां डालकर अच्छी तरह से मिक्स कर लें। अब मसाला और सोया सॉस डालकर मिक्स कर लें। 2-3 मिनट के लिए अच्छी तरह से पका लें। अब इस मिश्रण को अलग बर्तन में निकाल लें। ब्रेड स्लाइस लें और उसके किनारे काट दें। अब ब्रेड को बेल दें। बेलने के बाद सब्जी इसमें सब्जी का मिश्रण भरें, फिर बांध कर इसके किनारों पर पानी लगाकर रख दें। इससे यह तलते समय खुलेगी नहीं। अब इन्हें तवे पर सेंक लें या फिर डीप फ्राई भी कर सकते हैं। ब्रेड स्प्रिंग रोल तैयार हैं। इन्हें सॉस या हरी चटनी के साथ गर्मागर्म सर्व करें।

    सेहत / शौर्यपथ / सोचिए! आप किसी पार्टी में गए हैं। वहां आपकी पसंद की कई तरह की डिश रखी हुई हैं लेकिन आप इन पकवानों को खाने से घबरा रहे हैं। इसकी वजह है कि खाना खाने के कुछ देर बाद ही आपको टॉयलेट की तरफ भागने की समस्या है। कल्पना से अलग यह सच्चाई उन लोगों के लिए बहुत ही भयावह है, जो इस समस्या से गुजर रहे हैं। यह समस्या तब और भी गंभीर हो जाती है, जब खाना खाते ही शौचालय जाने से वजन घटने लगता है। कई बार शौच जाने से बचने के लिए व्यक्ति अपनी डाइट में कटौती तक कर लेता है। ऐसे में कुछ ऐसे उपाय हैं, जिससे आप इस समस्या से छुटकारा पा सकते हैं। आइए, पहले जान लेते हैं कि आखिर क्या है यह समस्या-
    गैस्ट्रो-कॉलिक रिफलक्स की समस्या
    खाना खाने के तुरंत बाद पॉटी लगने की समस्या को गैस्ट्रो-कॉलिक रिफलक्स कहते हैं। देखा गया है कि ये समस्या उन लोगों को ज्यादा आती है, जो शुरुआत में लंबे समय तक शौच को रोककर रखते हैं।
    इन उपायों को आजमाएं
    खाना अच्छी तरह चबाकर खाएं।
    फाइबर वाले आहारों का करें सेवन।
    3-4 बार में थोड़ा-थोड़ा भोजन करें।
    आहार में शामिल करें ये चीजें
    इस समस्याह से बचने के लिए फाइबर युक्त खाद्य पदार्थों को अपने आहार में शामिल करें। फाइबर से भरपूर खाद्य पर्दा‍थों में नाशपाती, सेब, मटर, ब्रोकोली, साबुत अनाज, सेम और दालें शामिल है। साथ ही आहार में दही, कच्चे सलाद, अदरक, अनानास, अमरूद, अजमोद आदि को शामिल करें। इसके अलावा केले, आम, पालक, टमाटर, नट्स, और शतावरी आदि आहारों में पोटैशियम की मात्रा ज्यादा होती है, इसलिए ये आहार भी फायदेमंद हैं।

    सेहत / शौर्यपथ / गुड़ का इस्तेमाल सर्दियों में सबसे ज्यादा किया जाता है। चीनी की जगह गुड़ का इस्तेमाल करने से खांसी-जुकाम से बचाव होने के साथ रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। सेहत के लिए गुड़ बहुत गुणकारी होता है, यह बात हम सभी जानते हैं लेकिन क्या आप जानते हैं कि गुड़ का इस्तेमाल त्वचा को निखारने और कई परेशानियों में भी कारगर है। आइए, जानतेे हैं गुड़ के फायदे-
    इन गुणों से भरा है गुड़
    गुड में विटामिन -A और विटामिन -B, सुक्रोज, ग्लूकोज, आयरन, कैल्शियम, फास्फोरस, पोटेशियम, जस्ता, मैग्नेशियम तत्व पाए जाते हैं। फास्फोरस की मात्रा अधिक रहती है। गुड़ में कई तरह के आवश्यक मिनरल्स और विटामिन होते है। जो त्वचा के लिए प्राकृतिक क्लींजर का काम करते है। ये शरीर को अंदर से साफ रखते है, जो त्वचा के ग्लो करने के लिए बहुत आवश्यक होता है शरीर के तापमान को नियंत्रित रखने में गुड़ सहायक होता है। गुनगुने पानी या फिर चाय में शक्कर की जगह गुड़ पीना चाहिए, इससे सेहत और सुंदरता दोनों बनी रहती हैं।
    झाइयों और दाग-धब्बों
    इस पैक को बनाने के लिए 1 चम्मच गुड़ पाउडर लें और उसमें 1 चम्मच टमाटर का रस, नींबू का रस और हल्दी की एक चुटकी मिक्स कर लें। इसे अपने चेहरे पर लगाएं और लगभग 15 मिनट तक रहने दें। बाद में इसे सामान्य पानी से धो लें।
    झुर्रियों लिए उपाय
    1 चम्मच पिसे हुए गुड़ में 1 टीस्पून ब्लैमक टी, 1 टीस्पून अंगूर का रस, एक चुटकी हल्दी समेत थोड़ा सा गुलाबजल मिक्स करें। इस मिश्रण को अपने चेहरे पर लगाकर 20 मिनट के लिए छोड़ दें। फिर इसे सामान्य पानी से धो लें।
    गुड़ खाने के फायदे
    एसिडिटी से छुटकारा
    आपको गैस या एसिडिटी है, तो गुड़ खाने से फायदा मिलेगा। वहीं, गुड़, सेंधा नमक और काला नमक मिलाकर खाने से खट्टी डकारों से छुटकारा मिल जाता है।
    खून की कमी दूर करता है
    गुड़ आयरन का बहुत बड़ा स्रोत है। अगर आपका हिमोग्लोबिन कम है, तो रोजाना गुड़ खाने से तुरंत लाभ मिलने लगेगा। गुड़ खाने से शरीर में लाल रक्त़ कोशिकाओं की मात्रा बढ़ जाती है।
    कंट्रोल रहेगा ब्लड प्रेशर
    गुड़ ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने का काम भी करता है। खासतौर पर हाई ब्लड प्रेशर से परेशान लोगों को रोजाना गुड़ खाने की सलाह दी जाती है।
    हड्डियां रहेंगी मजबूत
    गुड़ में भरपूर मात्रा में कैल्शियम और फास्फोरस पाया जाता है। यह दोनों तत्व हड्डियों को मजबूती देने में बेहद मददगार हैं। गुड़ के साथ अदरक खाने से जोड़ों के दर्द से छुटकारा मिलता है।
    शरीर बनेगा मजबूत और एक्टिव
    गुड़ शरीर को मजबूत और एक्टिव बनाए रखता है। शारीरिक कमजोरी दूर करने के लिए दूध के साथ गुड़ का सेवन करने से ताकत आती है और शरीर ऊर्जावान बना रहता है। अगर आपको दूध नहीं पसंद है, तो एक कप पानी में पांच ग्राम गुड़, थोड़ा सा नींबू का रस और काला नमक मिलाकर सेवन करने से आपको थकान महसूस नहीं होगी।
    सर्दी-जुकाम में कारगर
    गुड़ सर्दी-जुकाम भगाने में काफी असरदार है। काली मिर्च और अदरक के साथ गुड़ खाने से सर्दी-जुकाम में आराम मिलता है। खांसी से बचने के लिए चीनी के बजाए गुड़ खाना चाहिए। गुड़ को अदरक के साथ गर्म कर खाने से गले की खराश और जलन में राहत मिलती है।

    लाइफस्टाइल / शौर्यपथ / उत्तर प्रदेश के पयार्वरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री दारा सिंह चौहान ने आज दुधवा एवं पीलीभीत टाईगर रिजर्व पर्यटकों के लिए खोल दिया गया है।
     चौहान ने आज यहां वन विभाग के मुख्यालय पर दुधवा नेशनल पार्क एवं पीलीभीत टाईगर रिजर्व के वर्ष 2०2०-21 के पर्यटन सत्र के ऑनलाइन शुभारम्भ किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि वन मैन-वन जॉब की तर्ज पर दुधवा नेशनल पार्क एवं पीलीभीत टाइगर रिजर्व में ज्यादा से ज्यादा स्थानीय लोगों को रोजगार दिया जाए। स्थानीय लोगों को ड्राईवर, गाइड आदि पदों पर रखने से वे जंगल के प्रति समर्पित भाव से काम करेंगे।
    उन्होंने कहा कि दुधवा नेशनल पार्क और पीलीभीत टाइगर रिजर्व में पूर्व में पर्यटन सत्र 15 नवम्बर से आरम्भ हुआ करता था, लेकिन कतिपय स्रोतों से यह अनुरोध प्राप्त होने पर कि जिस प्रकार अन्य प्रदेशों में टाइगर रिजर्व 15 अक्टूबर से खोल दिये जाते है, उसी प्रकार उत्तर प्रदेश के टाइगर रिजवोर् को भी खोला जाये। विभाग के इतिहास में यह पहली बार हुआ है कि दुधवा नेशनल पार्क और पीलीभीत टाईगर रिजर्व 15 दिन पहले खोल दिये गए हैं। उन्होंने कहा कि सबसे खास बात यह रही कि सैलानियों के स्वागत के लिए शेरनी ने आज चार बच्चों को जन्म भी दिया है, यह बड़े हर्ष का विषय है। इससे पहले दुधवा में पिछले साल का विश्व रिकार्ड है कि शेरनी ने एक साथ पांच बच्चों को जन्म दिया था।
    वन मंत्री ने अधिकारियों को यह निदेर्श दिये कि पर्यटन के लिए विकसित संसाधनों के अतिरिक्त स्थानीय निवासियों को सैलानियों के होम-स्टे के लिए संसाधन विकसित कराकर जोड़ने का प्रयास किया जाये। उन्होंने कहा कि सैलानियों के लिए उपलब्ध पर्यटन सुविधा के आधार पर प्रतिदिन भ्रमण किये जाने वाले सैलानियों की संख्या निर्धारित की जाये तथा सैलानियों की उत्सुकता के लिए उनके भ्रमण के दौरान एक से दो मिनट का संक्षिप्त वीडियों क्लिप तैयार कराकर उनके अनुभवों एवं सुुझावों को भविष्य में उन्हें उपलब्ध करायी जाने वाली सुविधाओं के लिए आधार बनाया जाए।
    श्री चैहान ने कहा कि विश्व में काजीरंगा के बाद दुधवा नेशनल पार्क में गैंडा पाया जाता है और विभाग से यह अपेक्षा करता हूं कि आने वाले समय में काफी स्कीम लाई जाए, जिससे सैलानियों को और सुविधाएं प्राप्त हो सकेें। उनहोंने कहा पूरे विश्व में उत्तर प्रदेश को ख्याति मिले इसके लिए विभागीय कमीर् पूरी निष्ठा के साथ मिलकर काम करें । टाइगर रिजर्व के आस-पास थारू हट बनाया जाए, जिससे टाइगर रिजर्व को हेरिटेज लुक मिल सके।
    पयार्वरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के प्रमुख सचिव सुधीर गर्ग ने ऑनलाइन उद्घाटन के मौके पर कहा कि 15 दिन पहले दुधवा नेशनल पार्क और पीलीभीत टाइगर रिजर्व को खोलना गर्व की बात है। साथ ही विभागीय अधिकारी/कर्मचारी बधाई के पात्र हैं। उन्होंने कहा कि एक दिन में अधिकतम कितने सैलानी जा सकते हैं इसका निधार्रण अधिकारी कर लें, क्योंकि जब तक सैलानी व्यवस्थाओं से संतुष्ट नहीं दिखेंगे तबतक हम अपनी कार्ययोजना को सफल नहीं मान सकते हैं।इस अवसर पर प्रधान मुख्य वन संरक्षक, वन्यजीव सुनील पाण्डेय, प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं विभागाध्यक्ष डा० राजीव गर्ग, प्रबन्ध निदेशक, वन निगम, अजय कुमार और मुकेश कुमार सहित विभागीय अधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद रहे।

    वास्तुशास्त्र /शौर्यपथ / वास्तु पुरुष के 32 पदों में से यह कड़ी पश्चिम दिशा के 17 से 24 पदों तक पर आधारित है। इसमें हम आपको बताएंगे पश्चिम दिशा में किस जगह दरवाजा होने पर क्या नुकसान और फायदा हो सकता है। ज्योतिषचार्य पं.शिवकुमार शर्मा के अनुसार वास्तु की दृष्टि से यह बेहद महत्वपूर्ण है।
    डब्ल्यू-1-यह पश्चिम दिशा का प्रथम पद है और पितृ कहलाता है। ऐसे पद पर दरवाजा होने पर घर से गरीबी नहीं जाती। घर के सदस्यों की आयु कम हो सकती है। रोग पीड़ा एवं अनावश्यक खर्चे बने रहते हैं। विशेष रुप से गृहस्वामी के लिए यह स्थान द्वार के लिए अशुभ होता है।
    डब्ल्यू-2-पश्चिम दिशा का दूसरा पद द्वारिका कहलाता है। यह स्थान भी दरवाजे के लिए शुभ नहीं होता है। जिनके घर का द्वार इस पद पर होता है उस घर के निवासियों में अपव्यय की प्रवृत्ति होती है। नौकरी और व्यापार में अस्थिरता चलती है। कभी-कभी भयंकर धोखा हो जाता है और कर्जा बढ जाता है।
    डब्ल्यू-3-पश्चिम दिशा का तीसरा पद सुग्रीव कहलाता है। यह पद पश्चिम दिशा का सबसे शुभ पद है। इस पद पर दरवाजा होने पर घर में खुशियों की बहार आ जाती है। व्यापार, फैक्ट्री, दुकान आदि के लिए द्वार बनाने के लिए बहुत ही शुभ स्थान है। यहां पर दरवाजा होना घर की विकास के द्वार खोल देता है। यदि कंपनी अथवा फैक्ट्री या दुकान का दरवाजा हो तो शीघ्र ही कई ब्रांच खुल जाती हैं।
    डब्ल्यू-4-पश्चिम दिशा का चौथा पद पुष्यदंत कहलाता है। इस पद पर घर का द्वार बहुत शुभ रहता है। इस पद पर द्वार होने से घर में संतुलित आय होती है। इस घर की संतान वृद्धि को प्राप्त होते हैं और उन्नति करते हैं। घर में सुख, शांति, एकता का निवास होता है। ऐसे घर के लोग मर्यादित जीवन जीते हैं।
    डब्ल्यू-5- पश्चिम दिशा का पांचवा पद वरुण कहलाता है। पश्चिम दिशा का यह पद द्वार के लिए बहुत शुभ होता है। जिसके घर का द्वार इस पद पर होता है, वहां के लोग बहुत ही महत्वकांक्षी होते हैं। वे हर कार्य में निपुणता प्राप्त कर लेते हैं और धन वृद्धि व प्रतिष्ठा वृद्धि निरंतर बनी रहती है। इसी पद पर द्वार वाले व्यक्ति दूसरों की सहायता करने में देर नहीं करते।
    डब्ल्यू-6-पश्चिम दिशा का छठा पद असुर कहलाता है। यहां द्वार बनाना परिवार के लिए शुभ नहीं होता है। ऐसे घरों में तनाव और निराशा का भाव जल्दी आता है। आर्थिक हानियां निरंतर चलती रहती हैं। कई घरों में तो ऐसी स्थिति वाले द्वारों के घरों के सदस्य डिप्रेशन में पाए गए हैं। धन संबंधी कार्यों में सफलता कम मिलती है। धन के मामले में कोई न कोई अभाव बना रहता है।
    डब्ल्यू-7- पश्चिम दिशा का सातवां पद सौख्य कहलाता है। इस पद पर द्वार होना भी शुभ नहीं होता है। हमेशा निराशाजनक वातावरण रहता है। ऐसे घरों के व्यक्ति स्वार्थी हो जाते हैं। गृह स्वामी को निरंतर घर से बाहर रहना पड़ता है। कई घरों में वहां के सदस्यों के मन में नकारात्मक विचार घर कर लेते हैं। इससे वहां की प्रगति प्रभावित होती है।
    डब्ल्यू-8-पश्चिम दिशा का आठवां एवं अंतिम पद पापयक्ष्मा कहलाता है। जिन व्यक्तियों के घर के द्वार इस दिशा में होते हैं उस घर के लोग स्वार्थी होते हैं। घर के महिला सदस्य अपने स्वास्थ्य को लेकर चिंतित रहती हैं। पुरुष वर्ग को अधिकतर बाहर रहना पड़ता है। कई लोग तो विदेशों में भी फंस जाते हैं। अर्थात यह स्थान द्वार के लिए उपयुक्त नहीं है। घर में अनावश्यक आवागमन बना रहता है। इससे घर में अपव्यय अधिक होता रहता है।

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