August 24, 2026
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    भारत

    भारत (1085)

    नई दिल्ली । देशभर में बांधों की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने तथा उभरती चुनौतियों से निपटने के लिए बांध सुरक्षा पर राष्ट्रीय समिति (एनसीडीएस) की 12वीं बैठक नई दिल्ली स्थित डॉ. अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित हुई। केंद्रीय जल आयोग के अध्यक्ष की अध्यक्षता में हुई इस महत्वपूर्ण बैठक में केंद्र और राज्यों के वरिष्ठ अधिकारियों, बांध सुरक्षा विशेषज्ञों तथा राज्य बांध सुरक्षा संगठनों के प्रमुखों ने भाग लिया।

    बैठक में बांध सुरक्षा अधिनियम-2021 के प्रभावी क्रियान्वयन की समीक्षा करते हुए नियमों की अधिसूचना, तकनीकी दिशानिर्देशों के प्रकाशन और बांध सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेजों की तैयारी में हुई प्रगति पर संतोष व्यक्त किया गया। साथ ही आपातकालीन कार्य योजनाओं (ईएपी), व्यापक सुरक्षा मूल्यांकन, संचालन एवं रखरखाव (ओ एंड एम) मैनुअल तथा जोखिम आकलन अध्ययनों को निर्धारित समयसीमा में पूरा करने पर विशेष जोर दिया गया।

    नए खतरों से निपटने के लिए बनेंगे विशेष नियम

    समिति ने जल संरचनाओं के सामने उभर रहे नए खतरों को देखते हुए महत्वपूर्ण बांधों की निगरानी और सुरक्षा के लिए नए नियम तैयार करने, सुरक्षा जांच चेकलिस्ट में संशोधन करने तथा बांध निर्माण और संशोधन परियोजनाओं की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) में बांध सुरक्षा अध्याय को अंतिम रूप देने का निर्णय लिया।

    इसके अलावा जांच, डिजाइन, निर्माण और गुणवत्ता नियंत्रण से जुड़ी एजेंसियों के मान्यता मानकों को तय करने, बांध विफलता रिपोर्टिंग प्रणाली विकसित करने और विशेषज्ञों के पैनल के गठन पर भी सहमति बनी। समिति ने जोखिम वर्गीकरण, खतरा मूल्यांकन, उपकरण स्थापना, आपातकालीन कार्य योजना और जलाशय संचालन के लिए तकनीकी दिशानिर्देश तैयार करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम उठाए।

    आईआईटी और एनआईटी संस्थानों के सहयोग से बढ़ेगी विशेषज्ञता

    बैठक में बांध सुरक्षा क्षेत्र में विशेषज्ञ मानव संसाधन विकसित करने के लिए आईआईटी रुड़की और आईआईएससी बेंगलुरु द्वारा संचालित पोस्ट ग्रेजुएट कार्यक्रमों में इंजीनियरों की नियमित भागीदारी सुनिश्चित करने का निर्णय लिया गया। साथ ही एनआईटी सूरत, एनआईटी कालीकट, एनआईटी नागपुर, एनआईटी गुवाहाटी और एनआईटी शिलांग को भी प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण कार्यक्रमों से जोड़ने की संभावनाओं पर चर्चा हुई।

    गाद जमाव और बांध विफलताओं पर विशेष चर्चा

    समिति ने जलाशयों में बढ़ती गाद (सिल्टेशन) की समस्या पर चिंता व्यक्त करते हुए इसके समाधान के लिए नए नियामकीय प्रावधानों की आवश्यकता पर विचार किया। बैठक में हाल के वर्षों में हुई कुछ प्रमुख बांध विफलताओं और तकनीकी चुनौतियों पर भी विस्तृत प्रस्तुतिकरण दिए गए।

    इनमें छत्तीसगढ़ के लुटी टैंक और राजाडेरा बांध, सिक्किम के तीस्ता स्टेज-III बांध, पंजाब के माधोपुर बैराज तथा राजस्थान के बीसलपुर बांध में चल रही ड्रेजिंग गतिविधियों से जुड़े तकनीकी अनुभव साझा किए गए।

    दिसंबर 2026 तक सुरक्षा ऑडिट और जोखिम मूल्यांकन पूरा करने का लक्ष्य

    बैठक के समापन पर अध्यक्ष ने सभी राज्यों से आह्वान किया कि वे दिसंबर 2026 तक निर्धारित बांधों की व्यापक सुरक्षा जांच, आपातकालीन कार्य योजनाओं की तैयारी और जोखिम मूल्यांकन अध्ययन जैसे सभी अनिवार्य कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करें, ताकि देश के बांधों की सुरक्षा और आपदा प्रबंधन क्षमता को और मजबूत बनाया जा सके।

    16 जुलाई को केंद्र सरकार ने ऊर्जा, कृषि और बुनियादी ढांचे से जुड़े कई अहम फैसले लिए। ईंधन निर्यात कर में बदलाव, यूरिया उत्पादन बढ़ाने की नई नीति और झारखंड-ओडिशा में रेल नेटवर्क विस्तार को मंजूरी दी गई।

    नई दिल्ली । केंद्र सरकार ने गुरुवार को देश की ऊर्जा सुरक्षा, कृषि आत्मनिर्भरता और बुनियादी ढांचे को मजबूती देने की दिशा में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए। इन फैसलों का उद्देश्य ईंधन निर्यात व्यवस्था को संतुलित करना, उर्वरक उत्पादन बढ़ाना और रेल संपर्क का विस्तार करना है।

    सरकार ने पेट्रोल, डीजल और विमानन ईंधन (ATF) के निर्यात पर लगने वाले विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (विंडफॉल टैक्स) में संशोधन किया है। इस कदम का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय बाजार की परिस्थितियों और घरेलू आवश्यकताओं के अनुरूप कर व्यवस्था को संतुलित बनाए रखना है।

    कृषि क्षेत्र को बड़ी राहत देते हुए केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ‘राष्ट्रीय यूरिया निवेश नीति’ को मंजूरी दी। इस नीति के माध्यम से देश में घरेलू यूरिया उत्पादन बढ़ाने, आयात पर निर्भरता कम करने और किसानों को समय पर उर्वरक उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया जाएगा।

    इसी क्रम में बुनियादी ढांचे के विकास को गति देते हुए झारखंड और ओडिशा में लगभग ₹397 करोड़ लागत की दो नई रेल परियोजनाओं को भी मंजूरी दी गई। इन परियोजनाओं से दोनों राज्यों में रेल संपर्क बेहतर होगा, माल परिवहन को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलने की उम्मीद है।

    16 जुलाई को सर्वोच्च न्यायालय ने नागरिकता, मध्यस्थता और लंबित मामलों के त्वरित निपटारे से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर सुनवाई करते हुए निष्पक्ष न्यायिक प्रक्रिया और समयबद्ध न्याय पर जोर दिया।

    नई दिल्ली / शौर्यपथ / सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को नागरिकता निर्धारण, वाणिज्यिक मध्यस्थता (Arbitration) और वर्षों से लंबित मामलों के शीघ्र निपटारे से जुड़े महत्वपूर्ण मामलों पर सुनवाई हुई। अदालत ने कई अहम कानूनी सिद्धांतों को स्पष्ट करते हुए न्यायिक प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता को सर्वोच्च प्राथमिकता बताया।

    नागरिकता से जुड़े एक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि फॉरेनर्स एक्ट, 1946 की धारा 9 के तहत भारतीय नागरिकता साबित करने का दायित्व संबंधित व्यक्ति पर होता है। हालांकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति को विदेशी घोषित करने जैसा गंभीर निर्णय बिना उचित जांच, पर्याप्त सुनवाई और निष्पक्ष प्रक्रिया अपनाए नहीं किया जा सकता। ट्रिब्यूनल को एकतरफा (एक्स-पार्टी) कार्रवाई से बचते हुए प्रत्येक मामले में तर्कसंगत और न्यायसंगत प्रक्रिया का पालन करना होगा।

    मध्यस्थता (Arbitration) से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में सुप्रीम कोर्ट ने गुवाहाटी हाईकोर्ट के उस आदेश को निरस्त कर दिया, जिसमें गैर-हस्ताक्षरकर्ता कंपनियों के विरुद्ध मध्यस्थता कार्यवाही पर रोक लगाई गई थी। अदालत ने स्पष्ट किया कि मध्यस्थता न्यायाधिकरण (Tribunal) के क्षेत्राधिकार से संबंधित आदेशों को सीधे संविधान के अनुच्छेद 227 के तहत चुनौती नहीं दी जा सकती। ऐसे मामलों में अंतिम मध्यस्थता निर्णय आने के बाद ही उपयुक्त कानूनी उपाय अपनाए जा सकते हैं।

    इसके अलावा, सर्वोच्च न्यायालय ने वर्षों से लंबित लगभग 800 पुराने सिविल और आपराधिक मामलों के शीघ्र निपटारे की दिशा में भी महत्वपूर्ण पहल की। इन मामलों की सुनवाई के लिए विशेष रोस्टर और विशेष पीठों (Special Benches) के गठन की प्रक्रिया पर चर्चा हुई, ताकि लंबित मामलों का तेजी से निस्तारण सुनिश्चित किया जा सके।

    नई दिल्ली / शौर्यपथ / केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री Shivraj Singh Chouhan ने नई दिल्ली के पूसा परिसर में आयोजित “पर्यावरण संरक्षण संकल्प कार्यक्रम एवं वृक्ष मित्र संवाद” में पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन बनाने का आह्वान किया। कार्यक्रम में देशभर के लगभग 17 हजार वृक्ष मित्रों ने भाग लिया।

    श्री चौहान ने प्रत्येक नागरिक से वर्ष में कम से कम एक पेड़ लगाने और पांच नए लोगों को वृक्षारोपण अभियान से जोड़ने का संकल्प लेने की अपील की। उन्होंने जन्मदिन, विवाह वर्षगांठ और अन्य पारिवारिक अवसरों को “वृक्ष पर्व” के रूप में मनाने का सुझाव दिया।

    उन्होंने राष्ट्रीय से ग्राम स्तर तक “वृक्ष मित्र परिवार” का संगठित नेटवर्क बनाने, पंचायतों और नगर निकायों में स्थायी वृक्षारोपण स्थल चिन्हित करने तथा 12 अगस्त की हरियाली अमावस्या पर देशव्यापी वृक्षारोपण अभियान चलाने की घोषणा की।

    केंद्रीय मंत्री ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल पौधे लगाने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उनकी सुरक्षा और देखभाल भी सुनिश्चित की जानी चाहिए। उन्होंने जल संरक्षण, मिट्टी की उर्वरता, संतुलित खेती, ऊर्जा बचत और प्लास्टिक मुक्त जीवनशैली को भविष्य की कृषि और पर्यावरण सुरक्षा के लिए आवश्यक बताया।

    कार्यक्रम में पर्यावरणविद् अनिल जोशी और डॉ. अनूप हजेला ने भी जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए व्यवहार में बदलाव, ऊर्जा संरक्षण तथा “एक पेड़ लगाओ, एक पेड़ पालो” का संदेश दिया।

    नई दिल्ली / एजेंसी / 

    भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता 2026 के तहत महाराष्ट्र के नागपुर में आयोजित ब्रिक्स परिवहन मंत्रियों की तीसरी बैठक का सफल समापन हुआ। बैठक में सदस्य देशों ने सर्वसम्मति से मंत्रिस्तरीय घोषणा (Ministerial Declaration) को अपनाया, जिसमें परिवहन क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए साझा रोडमैप तय किया गया।

    घोषणापत्र में सतत विमानन ईंधन (SAF), परिवहन के विकार्बनीकरण, शहरी गतिशीलता केंद्रों, लॉजिस्टिक्स एवं आपूर्ति श्रृंखला सहयोग, बुनियादी ढांचे में चक्रीयता तथा ब्रिक्स रेलवे अनुसंधान नेटवर्क जैसे प्रमुख विषयों पर सहयोग की रूपरेखा शामिल है।

    केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री Nitin Gadkari ने बैठक की सफलता के लिए सभी सदस्य देशों और प्रतिनिधिमंडलों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि साझा सहमति और सहयोग की भावना से तैयार यह घोषणा ब्रिक्स देशों के बीच परिवहन क्षेत्र में साझेदारी को और मजबूत करेगी।

    9-10 जुलाई को वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक और 11 जुलाई को मंत्रिस्तरीय बैठक के साथ संपन्न हुए इस चार दिवसीय आयोजन में परिवहन मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी और तकनीकी विशेषज्ञ शामिल हुए। बैठक ने सदस्य देशों के बीच आपसी समझ, संपर्क और संस्थागत सहयोग को नई मजबूती प्रदान की।

    नई दिल्ली / शौर्यपथ / 

    लोकसभा अध्यक्ष Om Birla ने महाराष्ट्र के नासिक में अशोका हेल्थ सिटी का उद्घाटन करते हुए कहा कि गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचनी चाहिए। उन्होंने स्वास्थ्य सेवा, चिकित्सा अनुसंधान और नवाचार को मजबूत करने के लिए सरकार और निजी क्षेत्र के संयुक्त प्रयासों पर जोर दिया।

    श्री बिरला ने कहा कि केंद्र सरकार मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर, मेडिकल कॉलेजों में सीट वृद्धि और आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं के माध्यम से स्वास्थ्य व्यवस्था को सुदृढ़ कर रही है। उन्होंने चिकित्सा संस्थानों से नई और उभरती बीमारियों की चुनौतियों से निपटने के लिए अनुसंधान एवं नवाचार को बढ़ावा देने का आह्वान किया।

    उन्होंने कहा कि अशोका हेल्थ सिटी मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, कैंसर उपचार, सुपर-स्पेशियलिटी सेवाओं तथा चिकित्सा अनुसंधान का महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है। साथ ही चिकित्सा शिक्षा को जनसेवा से जोड़ते हुए डॉक्टरों और मेडिकल छात्रों को ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों में सेवाएं देने के लिए प्रेरित करने की आवश्यकता बताई।

    लोकसभा अध्यक्ष ने विश्वास जताया कि अशोका हेल्थ सिटी उत्तर महाराष्ट्र क्षेत्र में किफायती, गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने और चिकित्सा अनुसंधान को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

    गुजरात / शौर्यपथ / 

    गांधीनगर लोकसभा क्षेत्र में मियावाकी पद्धति से मात्र एक घंटे में 3.61 लाख से अधिक पौधारोपण कर गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया गया। इस उपलब्धि पर केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री Amit Shah ने अहमदाबाद म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन, 25 हजार से अधिक वॉलंटियर्स और क्षेत्रवासियों को बधाई दी।

    श्री शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री Narendra Modi के नेतृत्व में चल रहा ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान पर्यावरण संरक्षण को जन-आंदोलन का रूप दे रहा है। गांधीनगर में सार्वजनिक वृक्षारोपण अभियान के तहत अब तक 1.26 करोड़ से अधिक पौधे लगाए जा चुके हैं, जिनमें 404 सार्वजनिक स्थलों पर 1.15 करोड़ से अधिक तथा निजी परिसरों में 11 लाख से अधिक पौधे शामिल हैं।

    उन्होंने कहा कि ऑक्सीजन पार्कों के निर्माण, तालाबों के पुनर्जीवन और व्यापक वृक्षारोपण जैसे प्रयासों से गांधीनगर पर्यावरण संरक्षण और हरित विकास का राष्ट्रीय मॉडल बनकर उभरा है। साथ ही नागरिकों से पौधे लगाने के साथ उनकी देखभाल और संरक्षण का भी संकल्प लेने का आह्वान किया।

    बस्तर में 12 वर्षों के जमीनी अनुभव और 7 वर्षों के ऐतिहासिक नेतृत्व का मिलेगा देश को लाभ, आतंकवाद और नक्सलवाद के खिलाफ राष्ट्रीय स्तर पर निभाएंगे अहम भूमिका 

    रायपुर। छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक और ऐतिहासिक अभियान का नेतृत्व करने वाले 2003 बैच के छत्तीसगढ़ कैडर के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी पी. सुंदरराज (Sundarraj P.) को केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) में इंस्पेक्टर जनरल (IG) के पद पर नियुक्त किया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने जून 2026 में उनकी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति को मंजूरी देते हुए आदेश जारी किए थे।

    पी. सुंदरराज का नाम बस्तर में नक्सल विरोधी अभियानों की सफलता का पर्याय माना जाता है। उन्होंने लगभग 12 वर्षों तक बस्तर संभाग में अपनी सेवाएं दीं और लगातार 7 वर्षों तक बस्तर रेंज के आईजी के रूप में कार्य करते हुए दक्षिण छत्तीसगढ़ के सात सर्वाधिक संवेदनशील जिलों में सुरक्षा अभियानों का प्रभावी नेतृत्व किया।

    उनके नेतृत्व में सुरक्षा बलों ने घने जंगलों और दुर्गम इलाकों में नए सुरक्षा कैंप स्थापित किए, जिससे नक्सलियों के सुरक्षित ठिकाने लगातार कमजोर होते गए। कई बड़े माओवादी कमांडर मारे गए, जबकि सैकड़ों नक्सलियों ने हिंसा का रास्ता छोड़कर आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में वापसी की। उनकी रणनीति ने बस्तर में सुरक्षा व्यवस्था को नई मजबूती प्रदान की और नक्सल विरोधी अभियानों को नई दिशा दी।

    गृह मंत्रालय ने उनके उत्कृष्ट ट्रैक रिकॉर्ड, रणनीतिक सोच और जमीनी अनुभव को देखते हुए उन्हें देश की प्रमुख आतंकवाद रोधी जांच एजेंसी एनआईए में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी है। एनआईए आतंकवाद, उग्रवाद, अलगाववाद और नक्सलवाद से जुड़े गंभीर मामलों की जांच करने वाली देश की सर्वोच्च केंद्रीय एजेंसी है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि बस्तर के चुनौतीपूर्ण हालात में वर्षों तक काम करने का उनका अनुभव अब राष्ट्रीय स्तर पर आतंकवाद और आंतरिक सुरक्षा से जुड़े मामलों की जांच और रणनीति निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देगा।

    46 वर्षीय पी. सुंदरराज मूल रूप से तमिलनाडु के कोयंबटूर के निवासी हैं। उन्होंने बी.एससी. (कृषि विज्ञान) की पढ़ाई के बाद संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा उत्तीर्ण कर भारतीय पुलिस सेवा में प्रवेश किया। उत्कृष्ट सेवाओं के लिए उन्हें पुलिस वीरता पदक (Police Medal for Gallantry) तथा सराहनीय सेवा पदक सहित कई प्रतिष्ठित सम्मानों से सम्मानित किया जा चुका है।

    पी. सुंदरराज की यह नियुक्ति न केवल छत्तीसगढ़ पुलिस के लिए गौरव का विषय है, बल्कि यह इस बात का भी प्रमाण है कि बस्तर में उनके नेतृत्व में किए गए प्रभावी नक्सल विरोधी अभियानों को राष्ट्रीय स्तर पर भी उच्च सम्मान और मान्यता मिली है।

    कांग्रेस नेता ने कथित चोरी की तुलना महमूद गजनवी के हमलों से की; ट्रस्ट और भाजपा की ओर से आरोपों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार

    नई दिल्ली/अयोध्या।
    राम मंदिर के चढ़ावे में कथित अनियमितताओं को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर गंभीर आरोप लगाते हुए मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

    प्रेस वार्ता के दौरान पवन खेड़ा ने दावा किया कि इतिहास में महमूद गजनवी ने 27 वर्षों में 17 बार मंदिरों पर हमले किए थे, जबकि राम मंदिर में कथित रूप से 42–45 दिनों के भीतर 70 बार चढ़ावा चोरी होने की बात सामने आई है। उन्होंने इस तुलना के जरिए मामले की गंभीरता को रेखांकित किया।

    खेड़ा ने कहा कि धार्मिक शास्त्रों के अनुसार 'देव द्रव्य' (भगवान की संपत्ति) की चोरी अक्षम्य मानी जाती है। उनका आरोप है कि मामले में केवल निचले स्तर के लोगों पर कार्रवाई कर वास्तविक जिम्मेदारों को बचाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि इस कथित अनियमितता के पीछे "असल जिम्मेदार" कौन हैं और उनकी भूमिका की जांच क्यों नहीं हो रही।

    कांग्रेस नेता ने पूरे मामले की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच की मांग करते हुए कहा कि यदि वित्तीय अनियमितताएं हुई हैं तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए।

    इस बीच, राम मंदिर के चढ़ावा प्रबंधन और ट्रस्ट से जुड़ी खबरों के बाद राजनीतिक बहस और तेज हो गई है। हालांकि, पवन खेड़ा के आरोप उनके राजनीतिक बयान हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और मामले में जांच एवं कानूनी प्रक्रिया जारी है। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट, भाजपा या आरएसएस की ओर से इन आरोपों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया उपलब्ध होने पर उसे भी समान प्रमुखता से शामिल किया जाएगा ।

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