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April 29, 2026
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  नई दिल्ली / एजेंसी / पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर सियासी और कानूनी हलचल तेज हो गई है। सोमवार को इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में दूसरी बार मेंशनिंग की गई, लेकिन अदालत ने फिलहाल सुनवाई से इनकार कर दिया।

तृणमूल कांग्रेस की राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता मेनका गुरुस्वामी ने मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष मामला उठाते हुए दावा किया कि मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार पश्चिम बंगाल में 5 से 7 लाख नए मतदाताओं के नाम फॉर्म-6 के जरिए जोड़े गए हैं। उन्होंने इसे गंभीर मामला बताते हुए सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप की मांग की।

हालांकि, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल मेंशनिंग के आधार पर इस तरह के मामले में सुनवाई संभव नहीं है। पीठ ने कहा कि पहले इस संबंध में विधिवत याचिका दाखिल की जाए, उसके बाद ही मामले पर विचार किया जाएगा। CJI सूर्यकांत ने साफ शब्दों में कहा कि बिना औपचारिक याचिका के अदालत इस पर सुनवाई नहीं कर सकती।

क्या है मामला?
फॉर्म-6 का उपयोग नए मतदाताओं को वोटर लिस्ट में शामिल करने के लिए किया जाता है। ऐसे में बड़ी संख्या में नाम जोड़े जाने के दावे ने राजनीतिक विवाद को जन्म दिया है। विपक्ष इसे चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता से जोड़कर देख रहा है, जबकि आधिकारिक स्तर पर इस संबंध में अभी विस्तृत स्पष्टीकरण सामने आना बाकी है।

आगे क्या?
अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या इस मुद्दे पर औपचारिक याचिका दाखिल की जाती है और सुप्रीम कोर्ट इसमें हस्तक्षेप करता है या नहीं। फिलहाल अदालत के रुख से साफ है कि प्रक्रिया के तहत ही इस मामले को आगे बढ़ाया जाएगा।

  कोलकाता / एजेंसी / पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से ठीक पहले बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। पॉलिटिकल कंसल्टेंसी फर्म इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी (I-PAC) ने राज्य में अपने सभी ऑपरेशन 20 दिनों के लिए रोक दिए हैं। इस फैसले की पुष्टि कंपनी के एक इंटरनल मेल से हुई है, जिसमें “कुछ कानूनी मुद्दों” का हवाला दिया गया है।

इंटरनल मेल में क्या कहा गया?
I-PAC की HR टीम द्वारा रविवार रात भेजे गए ईमेल में कहा गया है कि मैनेजमेंट ने पश्चिम बंगाल में सभी गतिविधियों को तत्काल प्रभाव से स्थगित करने का निर्णय लिया है। कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया कि वह कानूनी प्रक्रिया में सहयोग कर रही है और उम्मीद जताई है कि “न्याय अपना रास्ता खुद बनाएगा।”

कर्मचारियों को 20 दिन की छुट्टी का निर्देश
सूत्रों के मुताबिक, कर्मचारियों और टीम के सदस्यों को 20 दिनों की छुट्टी लेने के लिए कहा गया है। कंपनी ने संकेत दिया है कि 11 मई के आसपास स्थिति की समीक्षा कर आगे की रणनीति तय की जाएगी। यह इंटरनल मेल सोशल मीडिया पर भी वायरल हो रहा है, जिसकी प्रामाणिकता को कंपनी के अंदरूनी सूत्रों ने सही बताया है।

TMC के चुनाव अभियान पर पड़ सकता है असर
गौरतलब है कि I-PAC, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) के चुनावी अभियान का प्रमुख रणनीतिक साझेदार रहा है। ऐसे में मतदान (23 और 29 अप्रैल) से ठीक पहले ऑपरेशन रोकना TMC के प्रचार अभियान पर असर डाल सकता है और इसे राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।

ममता बनर्जी का बयान भी चर्चा में
इस घटनाक्रम से एक दिन पहले ही ममता बनर्जी ने चुनावी सभा में I-PAC का समर्थन करते हुए कहा था कि अगर कंपनी के कर्मचारियों पर किसी तरह का दबाव बनाया गया या उनकी नौकरी पर असर पड़ा, तो उनकी सरकार उन्हें रोजगार देने के लिए तैयार है। उन्होंने इसे “साजिश” करार देते हुए विरोधियों पर निशाना साधा था।

चुनावी माहौल में बढ़ी सियासी हलचल
I-PAC के इस फैसले ने बंगाल की चुनावी राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। जहां एक ओर विपक्ष इसे TMC की चुनावी मशीनरी पर असर के रूप में देख सकता है, वहीं TMC इसे कानूनी प्रक्रिया से जुड़ा अस्थायी कदम बताकर नुकसान को सीमित करने की कोशिश कर सकती है। आने वाले दिनों में इसका वास्तविक प्रभाव चुनावी नतीजों पर कितना पड़ता है, यह देखना अहम होगा।

   पटना / एजेंसी / बिहार की राजधानी पटना सोमवार को भगवा रंग और “नारी शक्ति” के नारों से गूंज उठी, जब बीजेपी और एनडीए के घटक दलों ने कारगिल चौक पर ‘जन आक्रोश महिला सम्मेलन’ का आयोजन किया। इस बड़े राजनीतिक प्रदर्शन में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी सहित एनडीए के कई वरिष्ठ नेताओं और महिला नेत्रियों ने भाग लेकर महिला आरक्षण के मुद्दे पर विपक्ष को घेरा।

भीड़ और दावों की राजनीति
बीजेपी ने दावा किया कि इस सम्मेलन में पूरे बिहार से करीब 50 हजार महिलाएं शामिल हुईं, जिन्होंने पटना की सड़कों पर मार्च कर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। समर्थकों ने महिला आरक्षण के समर्थन में विशेष टी-शर्ट पहन रखी थी। हालांकि, इतनी बड़ी संख्या के दावे की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है—जो अक्सर ऐसे राजनीतिक आयोजनों में देखा जाता है।

सीएम सम्राट चौधरी का हमला
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अपने संबोधन में विपक्षी नेताओं—राहुल गांधी, लालू यादव और एम.के. स्टालिन—पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि वे “परिवारवाद की राजनीति” करते हैं, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का लक्ष्य “हर सामान्य महिला को सदन तक पहुंचाना” है।
उन्होंने कहा कि यदि 33% आरक्षण पहले लागू हो गया होता, तो बिहार विधानसभा में 122 महिलाएं नेतृत्व कर रही होतीं।

सुरक्षा के मुद्दे पर उन्होंने कड़ा संदेश देते हुए कहा, “बहनों के साथ अन्याय करने वालों को पाताल से भी खोजकर सजा दी जाएगी,” और राज्य में कानून-व्यवस्था को मजबूत बताने की कोशिश की।

विपक्ष पर आरोप, महिलाओं को संदेश
बीजेपी विधायक श्रेयसी सिंह ने विपक्ष को महिला आरक्षण में बाधा डालने का जिम्मेदार ठहराया। उनका कहना था कि विपक्ष नहीं चाहता कि साधारण पृष्ठभूमि की महिलाएं संसद और विधानसभा तक पहुंचें।
प्रदेश उपाध्यक्ष अमृता भूषण ने भी महिलाओं से अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहने की अपील की।

NDA की एकजुटता का प्रदर्शन
इस कार्यक्रम में जेडीयू, हम (HUM) और एलजेपी (रामविलास) की महिला नेताओं की मौजूदगी ने बिहार में एनडीए की एकजुटता का संकेत दिया। सभी दलों ने एक सुर में ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ का समर्थन करते हुए विपक्ष के रुख को “महिला विरोधी” बताया।

चुनावी संदर्भ और आगे की रणनीति
राजनीतिक तौर पर यह सम्मेलन आगामी चुनावों से पहले माहौल बनाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। ‘जीविका’ समूहों और स्थानीय निकायों में 50% आरक्षण के बाद अब केंद्र के 33% महिला आरक्षण को NDA बड़े मुद्दे के तौर पर आगे बढ़ा रहा है।
कुल मिलाकर, यह आयोजन सिर्फ एक विरोध प्रदर्शन नहीं, बल्कि बिहार की राजनीति में महिला मतदाताओं को साधने की रणनीतिक कवायद भी माना जा रहा है।

  नई दिल्ली / एजेंसी / ईरान-अमेरिका के बीच सीजफायर के बावजूद होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर तनाव कम नहीं हुआ है। इस बीच भारतीय जहाजों की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई है। सोमवार को आयोजित अंतर-मंत्रालयी प्रेस वार्ता में सरकार ने स्थिति पर विस्तृत जानकारी देते हुए कहा कि 28 फरवरी से शुरू हुए तनाव के 52 दिनों में अब तक 10 भारतीय जहाज होर्मुज पार कर चुके हैं, जबकि 14 जहाज अभी भी वहां फंसे हुए हैं।

‘देश गरिमा’ सुरक्षित, 22 अप्रैल को मुंबई पहुंचने की उम्मीद
भारतीय ध्वज वाला क्रूड ऑयल टैंकर ‘देश गरिमा’ 18 अप्रैल को होर्मुज पार कर चुका है। इस जहाज में 97,422 मीट्रिक टन कच्चा तेल लदा है और इसमें 31 भारतीय नाविक सवार हैं। इसके 22 अप्रैल को मुंबई पहुंचने की संभावना जताई गई है।

भारतीय जहाजों पर फायरिंग: चेतावनी के तौर पर चली गोलियां
18 अप्रैल को दो भारतीय कार्गो जहाजों पर हुई फायरिंग को लेकर अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह फायरिंग ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) द्वारा चेतावनी के रूप में की गई थी, ताकि जहाज रुक जाएं। इस घटना को भारत सरकार ने गंभीरता से लिया है।

कम्युनिकेशन गैप बना वजह, बड़ा नुकसान टला
सरकारी अधिकारियों के मुताबिक, यह घटना ईरान सरकार और IRGC की स्थानीय यूनिट के बीच संचार की कमी के कारण हुई। फायरिंग में जहाजों को कोई बड़ा नुकसान नहीं पहुंचा, हालांकि कुछ शीशे टूटने की जानकारी सामने आई है।

राजनयिक स्तर पर सक्रिय भारत
भारत इस पूरे मामले को बेहद संवेदनशीलता से संभाल रहा है। एक ओर जहां 14 भारतीय जहाज अब भी होर्मुज के पास खड़े हैं, वहीं ईरान में बड़ी संख्या में भारतीय नागरिकों की मौजूदगी को देखते हुए सरकार राजनयिक स्तर पर लगातार संपर्क में है।

सुरक्षा और सप्लाई चेन दोनों पर नजर
होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक तेल आपूर्ति का अहम मार्ग है। ऐसे में यहां बढ़ता तनाव न केवल भारतीय जहाजों की सुरक्षा, बल्कि ऊर्जा आपूर्ति और व्यापारिक गतिविधियों के लिए भी चुनौती बना हुआ है। भारत सरकार ने संकेत दिए हैं कि स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और जरूरत पड़ने पर त्वरित कदम उठाए जाएंगे।

    नई दिल्ली / नोएडा में 13 अप्रैल को मजदूरों के वेतन वृद्धि सहित अन्य मांगों को लेकर हुए उग्र विरोध-प्रदर्शन के बाद अब प्रशासन एक्शन मोड में नजर आ रहा है। हिंसा के कथित मास्टरमाइंड की गिरफ्तारी के साथ ही पुलिस विभाग में बड़े स्तर पर फेरबदल किया गया है।

पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने कड़ी कार्रवाई करते हुए सेंट्रल नोएडा जोन की डीसीपी शैव्या गोयल और एसीपी उमेश कुमार को उनके पदों से हटा दिया है। इसके अलावा अन्य संबंधित पुलिसकर्मियों पर भी कार्रवाई की गई है, जिससे साफ संकेत मिलता है कि कानून-व्यवस्था में किसी भी तरह की चूक को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

शैलेंद्र सिंह को सौंपी गई अतिरिक्त जिम्मेदारी
नए आदेश के तहत डीसीपी ट्रैफिक शैलेंद्र कुमार सिंह को सेंट्रल नोएडा जोन का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। वे अब ट्रैफिक प्रबंधन के साथ-साथ क्षेत्र की कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी भी संभालेंगे। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है।

गौरतलब है कि 2021 बैच की आईपीएस अधिकारी शैव्या गोयल को महज 1 अप्रैल 2026 को ही सेंट्रल नोएडा और साइबर सुरक्षा की जिम्मेदारी दी गई थी, लेकिन सिर्फ 19 दिनों के भीतर ही उनका तबादला कर दिया गया। इससे पहले वे साइबर और नारकोटिक्स जैसे महत्वपूर्ण विभागों में कार्य कर चुकी हैं।

प्रशासनिक जरूरत या जवाबदेही का संदेश?
पुलिस सूत्रों का कहना है कि यह फेरबदल प्रशासनिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए किया गया है, लेकिन घटनाक्रम के समय और तेजी को देखते हुए इसे जवाबदेही तय करने की कार्रवाई के रूप में भी देखा जा रहा है।

दोनों अधिकारियों ने अपनी नई जिम्मेदारियों का कार्यभार संभाल लिया है, वहीं प्रशासन अब पूरे मामले में आगे की जांच और शांति व्यवस्था बनाए रखने पर फोकस कर रहा है।

यह सम्मान निरंतर सुधार की दिशा में किए जा रहे प्रयासों का परिणाम: स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल

रायपुर /
भारत सरकार के राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण द्वारा दिनांक 17 एवं 18 अप्रैल 2026 को पुणे (महाराष्ट्र) में आयोजित चिंतन शिविर में देश के सभी राज्यों को योजना के बेहतर क्रियान्वयन हेतु आमंत्रित किया गया। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ राज्य को योजना के प्रभावी संचालन, सुदृढ़ प्रशासनिक व्यवस्था तथा पारदर्शी क्लेम प्रबंधन प्रणाली के उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए राष्ट्रीय स्तर पर दो प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया गया।

छत्तीसगढ़ को Best Performing Large State के रूप में निम्नलिखित श्रेणियों में चयनित किया गया—

1. हाई ट्रिगर एफिकेसी

इस श्रेणी में राज्य ने संदिग्ध क्लेम की पहचान एवं उनके प्रभावी विश्लेषण में उल्लेखनीय दक्षता प्रदर्शित की है। उन्नत आईटी आधारित मॉनिटरिंग प्रणाली तथा सुदृढ़ ऑडिट व्यवस्था के माध्यम से अनियमितताओं की समयबद्ध पहचान सुनिश्चित की गई है।

2. टाइमली प्रोसेसिंग ऑफ सस्पेसियस क्लेम्स

इस श्रेणी में राज्य ने संदिग्ध दावों के त्वरित निपटान में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। निर्धारित समय-सीमा के भीतर क्लेम की जांच, निर्णय एवं निष्पादन सुनिश्चित कर पारदर्शिता एवं जवाबदेही को मजबूत किया गया है।

राज्य में क्लेम ऑडिट तंत्र को सशक्त बनाने, ट्रिगर-आधारित निगरानी प्रणाली को प्रभावी रूप से लागू करने तथा अस्पतालों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करने के कारण संदिग्ध प्रकरणों के निराकरण में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है। इसके परिणामस्वरूप क्लेम प्रोसेसिंग की गुणवत्ता में वृद्धि हुई है तथा अनावश्यक विलंब में कमी आई है, जिससे योजना के लाभार्थियों को समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हो रही हैं।

स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल ने प्रदेश के राज्य को मिली इस महत्वपूर्ण उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि “यह सम्मान छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य तंत्र की प्रतिबद्धता, पारदर्शिता और निरंतर सुधार की दिशा में किए जा रहे प्रयासों का परिणाम है। आयुष्मान भारत योजना के माध्यम से हम प्रदेश के अंतिम व्यक्ति तक गुणवत्तापूर्ण और निःशुल्क स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के लिए संकल्पित हैं। यह पुरस्कार हमारे स्वास्थ्यकर्मियों, प्रशासनिक टीम और सहयोगी संस्थानों के सामूहिक प्रयास का प्रतिफल है। हम भविष्य में भी इसी तरह उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए जनसेवा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते रहेंगे।”

नई दिल्ली। शौर्यपथ । 

छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले स्थित एक पावर प्लांट में हुई दुर्घटना पर गहरा शोक व्यक्त किया गया है। इस हादसे में कई लोगों की मृत्यु होने तथा कुछ लोगों के घायल होने की सूचना है।

प्रधानमंत्री Narendra Modi ने इस दुखद घटना पर संवेदना व्यक्त करते हुए शोक संतप्त परिवारों के प्रति अपनी गहरी सहानुभूति प्रकट की है। उन्होंने घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की है।

प्रधानमंत्री ने घोषणा की है कि इस दुर्घटना में मृतक प्रत्येक व्यक्ति के निकटतम परिजन को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (PMNRF) से 2 लाख रुपये की अनुग्रह राशि प्रदान की जाएगी। इसके अतिरिक्त, घायलों को 50,000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी।

राज्य सरकार एवं स्थानीय प्रशासन द्वारा राहत एवं बचाव कार्य युद्ध स्तर पर जारी है। प्रभावितों को हर संभव सहायता प्रदान की जा रही है तथा घायलों का समुचित उपचार सुनिश्चित किया जा रहा है।

गुवाहाटी। असम की राजनीति में जिस मुकाबले को अब तक एकतरफा बताया जा रहा था, जमीनी हकीकत उससे कहीं अधिक जटिल और रोचक नजर आ रही है। सूत्रों के अनुसार, सेंट्रल गुवाहाटी सीट पर चुनावी लड़ाई अब बेहद नजदीकी होती दिख रही है, जिससे राजनीतिक समीकरणों में हलचल तेज हो गई है।

बताया जा रहा है कि 26 वर्षीय उम्मीदवार कुंकी चौधरी को चुनौती देने के लिए HBS चार बार सेंट्रल गुवाहाटी में रोड शो और रैलियां कर चुके हैं। लगातार हो रही इन गतिविधियों से साफ संकेत मिल रहे हैं कि मुकाबला आसान नहीं, बल्कि पूरी ताकत के साथ लड़ा जा रहा है।

इधर, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गौरव गोगोई की सभाओं में उमड़ रही भीड़ भी चर्चा का विषय बनी हुई है। स्थानीय स्तर पर यह दावा किया जा रहा है कि रैलियों में अच्छी-खासी उपस्थिति देखी जा रही है, हालांकि इसे राष्ट्रीय मीडिया में अपेक्षित कवरेज नहीं मिल पा रही है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर तृणमूल कांग्रेस (TMC) और झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) जैसे दल कांग्रेस के साथ मिलकर चुनाव लड़ते, तो विपक्षी गठबंधन की स्थिति और मजबूत हो सकती थी। कुछ आकलनों में यह भी कहा जा रहा है कि ऐसी स्थिति में सीटों का आंकड़ा 100 के पार जा सकता था।

वहीं, असम की सामाजिक संरचना भी इस चुनाव में निर्णायक भूमिका निभा सकती है। चर्चा है कि आदिवासी (लगभग 12%), ताई अहोम (8%) और मुस्लिम (35%)—इन तीन प्रमुख वर्गों का वोट बैंक यदि एकजुट होता है, तो कुल मिलाकर करीब 55% समर्थन किसी एक पक्ष को निर्णायक बढ़त दिला सकता है।

इसके अलावा, गोगोई समाज के तीन प्रमुख चेहरे—गौरव गोगोई, अखिल गोगोई और लुरिनज्योति गोगोई—का एक साथ आना भी सियासी समीकरणों को प्रभावित कर सकता है।

हालांकि, ये सभी दावे और आकलन फिलहाल सूत्रों और राजनीतिक चर्चाओं पर आधारित हैं। वास्तविक तस्वीर मतदान और परिणामों के बाद ही स्पष्ट होगी। फिलहाल इतना तय है कि असम में मुकाबला अब दिलचस्प मोड़ ले चुका है, जहां हर रणनीति और गठबंधन का असर सीधे नतीजों पर पड़ सकता है।

जयपुर। राजस्थान पुलिस के एक और काबिल अधिकारी अब देश की बाहरी सीमाओं की सुरक्षा में अहम भूमिका निभाते नजर आएंगे। केंद्र सरकार ने राजस्थान कैडर के 2012 बैच के आईपीएस अधिकारी आदर्श सिद्धू को डेपुटेशन पर सीमा सुरक्षा बल (BSF) में उप महानिरीक्षक (DIG) के पद पर नियुक्त किया है।

गौरतलब है कि इससे पहले 5 मार्च 2026 को आईपीएस जय यादव की नियुक्ति के बाद अब आदर्श सिद्धू को भी यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है, जिससे राजस्थान पुलिस की कार्यकुशलता और विश्वसनीयता एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित हुई है।

आदर्श सिद्धू उन चुनिंदा अधिकारियों में शुमार किए जाते हैं जिनकी छवि बेदाग और निर्विवाद रही है। वे कभी विवादों में नहीं रहे, लेकिन अपनी कठोर पुलिसिंग, प्रभावी कैंपेन और प्रशासनिक शैली को लेकर हमेशा चर्चा में रहे हैं।

अपने अब तक के कार्यकाल में सिद्धू ने राजस्थान के चूरू, भीलवाड़ा, टोंक और पाली जैसे महत्वपूर्ण जिलों में पुलिस अधीक्षक (SP) के रूप में जिम्मेदारी संभाली है। हर जिले में उनकी कार्यशैली और अपराध नियंत्रण को लेकर उनकी अलग पहचान बनी।

अब BSF में DIG के रूप में उनकी तैनाती को न केवल उनके करियर का अहम पड़ाव माना जा रहा है, बल्कि यह भी संकेत है कि देश की सीमाओं की सुरक्षा में अब एक और अनुभवी और सख्त अधिकारी की एंट्री हो चुकी है।

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