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फ्लैशबैक 2025: न्याय, राजनीति और मैदान-ए-जंग में भारत का बुलंद परचम
शौर्यपथ विशेष
वर्ष 2025 भारत के इतिहास में एक ऐसे कालखंड के रूप में दर्ज किया जाएगा, जहाँ देश ने एक तरफ अंतरिक्ष और खेल के मैदान में नई ऊंचाइयों को छुआ, तो दूसरी ओर जटिल भू-राजनीतिक और न्यायिक चुनौतियों का दृढ़ता से सामना किया। यह वर्ष 'विकसित भारतÓ के संकल्प की ओर बढ़ते कदमों का गवाह बना।
1. खेल और राष्ट्रीय गौरव: स्वर्णिम क्षण
भारतीय खेल इतिहास में 2025 का साल महिलाओं के नाम रहा। भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने दक्षिण अफ्रीका को हराकर अपना पहला icc वनडे विश्व कप जीतकर इतिहास रच दिया। वहीं, पुरुष टीम ने भी ढ्ढष्टष्ट चैंपियंस ट्रॉफी जीतकर क्रिकेट जगत में भारत का दबदबा कायम रखा।
2. न्यायपालिका और संवैधानिक घटनाक्रम
न्याय के क्षेत्र में यह वर्ष बड़े बदलावों का रहा। न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने भारत के 53वें मुख्य न्यायाधीश (cji) के रूप में कार्यभार संभाला। इसी दौरान न्यायपालिका की शुचिता तब और बढ़ गई जब सुप्रीम कोर्ट ने कुलदीप सिंह सेंगर की जमानत पर रोक लगा दी, जिससे यह संदेश गया कि जघन्य अपराधों में कानून की पकड़ ढीली नहीं होगी।
3. चुनाव सुधार और राजनीतिक हलचल
निर्वाचन आयोग (eci) ने चुनावी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया का आरंभ किया, ताकि मतदाता सूची से विसंगतियों को दूर किया जा सके।
बिहार विधानसभा चुनाव 2025: साल के अंत में हुए बिहार चुनाव इस वर्ष की सबसे बड़ी राजनीतिक घटना रही। नवंबर 2025 में घोषित परिणामों में भाजपा नीत NDA ने 202 सीटों के साथ प्रचंड बहुमत हासिल किया। नीतीश कुमार ने रिकॉर्ड 10 वीं बार मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली, जबकि भाजपा पहली बार राज्य में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी।
RSS का शताब्दी वषर्: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने अपने 100 वर्ष पूरे किए, जो सामाजिक और सांस्कृतिक विमर्श का केंद्र बना रहा।
दिल्ली चुनाव: दिल्ली विधानसभा चुनावों के परिणामों ने देश की राजनीतिक दिशा में एक नया मोड़ दिया।
4. रक्षा, सुरक्षा और अंतरिक्ष में बढ़ता कद
ऑपरेशन सिंदूर: भारत ने सीमा पार आतंकी शिविरों पर 'सटीक हमलोंÓ(Precision Strikes) के जरिए अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा की प्रतिबद्धता दोहराई।
गगनयान और ISS: भारत के शुभांशु शुक्ला ने इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पहुंचकर अंतरिक्ष विज्ञान में भारत का परचम लहराया।
5. वैश्विक कूटनीति और चुनौतियां
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश यात्राओं ने भारत के सामरिक हितों को मजबूत किया, लेकिन वैश्विक पटल पर चुनौतियां भी कम नहीं रहीं:
अमेरिका के टैरिफ: अमेरिका द्वारा आयात शुल्क (ञ्जड्डह्म्द्बद्घद्घह्य) बढ़ाए जाने के फैसले ने वैश्विक व्यापार और भारतीय निर्यातकों के सामने नई चुनौतियां पेश कीं।
बांग्लादेश संकट: पड़ोसी देश बांग्लादेश में बढ़ते जनांदोलनों और अस्थिरता ने भारत की विदेश नीति और क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए चिंताएं बढ़ाईं।
6. बुनियादी ढांचा और आर्थिक सुधार
भारत ने नवीकरणीय ऊर्जा में 253 त्रङ्ख की क्षमता हासिल की और सेमीकंडक्टर हब बनने की दिशा में बड़ी प्रगति की। प्रयागराज के महाकुंभ ने जहाँ भारत की सांस्कृतिक विरासत का प्रदर्शन किया, वहीं बुनियादी ढांचे के विस्तार ने अर्थव्यवस्था को गति दी।
7. चुनौतियां और प्राकृतिक आपदाएं
सफलता के बीच 2025 ने कुछ गहरे जख्म भी दिए। एयर इंडिया विमान दुर्घटना और चक्रवात 'मोंथाÓ जैसी प्राकृतिक आपदाओं ने देश को झकझोर दिया, लेकिन आपदा प्रबंधन के त्वरित कार्यों ने राहत प्रदान की।
संक्षेप में, साल 2025 भारत के लिए केवल एक कैलेंडर वर्ष नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ता एक मजबूत कदम रहा। चाहे वह महिला आरक्षण की तैयारी हो, डिजिटल हेल्थ मिशन की सफलता हो, या अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की मुखर आवाज़; 2025 ने सिद्ध किया कि भारत हर परिस्थिति में अपनी प्रगति का मार्ग प्रशस्त करने में सक्षम है।
कर्नाटक निकाय चुनाव: बैलेट पर कांग्रेस की करारी हार, भाजपा का क्लीन स्वीप!
कर्नाटक। शौर्यपथ । कर्नाटक में शहरी स्थानीय निकाय चुनावों में सत्ताधारी कांग्रेस को बड़ा झटका लगा, जहां भाजपा ने चार टाउन पंचायतों—बजपे, किन्निगोली, मानकी और बसेट्टीहल्ली—में सभी वार्ड जीत लिए। बैलेट पेपर से हुए इन चुनावों को भाजपा ने कांग्रेस सरकार के कुप्रबंधन के खिलाफ जनादेश बताया।
प्रमुख परिणाम
बजपे (दक्षिण कन्नड़): भाजपा ने 11 सीटें जीतीं, कांग्रेस को 4 मिलीं।
दो अन्य टाउन पंचायतें: भाजपा ने पूर्ण कंट्रोल हासिल किया, जहां कांग्रेस पहले दो पर काबिज थी।
उपचुनाव: दोद्दाबल्लापुर और तुर्विहाला में भाजपा की जीत।
भाजपा का दावा
राज्य अध्यक्ष बीवाई विजयेंद्र येदियुरप्पा ने इसे कांग्रेस की नाकामियों का सबूत ठहराया, जबकि बीएल संतोष ने पूरे देश में भाजपा की लगातार जीतों का जिक्र किया। भटकल जैसे क्षेत्रों में भी कांग्रेस को शिकस्त मिली, जहां उनका मंत्री विधायक है।
राजनीतिक प्रभाव
ये नतीजे सिद्धरामैया सरकार के लिए चेतावनी हैं, खासकर आंतरिक कलह के बीच। BBMP जैसे बड़े चुनाव लंबित हैं, जो आगे की चुनौतियां बढ़ा सकते हैं।
नई दिल्ली / शौर्यपथ
केंद्रीय ग्रामीण विकास तथा कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ग्रामीण रोजगार, ग्राम पंचायत के अधिकार और मजदूरों की सुरक्षा को लेकर विपक्ष द्वारा फैलाए जा रहे “भ्रम” को पूरी तरह तथ्यहीन और भ्रामक बताया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लाई गई विकसित भारत–जी राम जी योजना ने न सिर्फ मजदूरों के अधिकारों को मजबूत किया है, बल्कि ग्रामीण भारत को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और सशक्त शासन-व्यवस्था उपलब्ध कराई है।
शिवराज सिंह ने तीखे शब्दों में कहा कि कांग्रेस के शासन में मनरेगा भ्रष्टाचार के “दलदल” में फंसी रहती थी, जबकि मोदी सरकार ने पारदर्शिता और जवाबदेही की नई मिसाल स्थापित की है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस न नीयत रखती थी, न नीति; वही कांग्रेस आज राजनीतिक लाभ के लिए “घड़ियाली आंसू” बहा रही है।
केंद्रीय मंत्री ने साफ किया कि सरकार ने रोजगार सुरक्षा को कम नहीं, बल्कि और मजबूत किया है। नए अधिनियम में ग्रामीण परिवारों को 100 की जगह 125 दिनों की वैधानिक रोजगार-गारंटी दी गई है। मांग के आधार पर काम उपलब्ध कराना अब सरकार की कानूनी जिम्मेदारी होगी। समय पर काम नहीं मिलने पर अनिवार्य बेरोज़गारी भत्ता, और मजदूरी में देरी पर विलंबित भुगतान (एक्स्ट्रा पेमेंट) का स्पष्ट प्रावधान किया गया है।
ग्राम पंचायत और ग्राम सभा के अधिकारों पर उठाए जा रहे सवालों को भी उन्होंने खारिज किया। मंत्री के अनुसार, नए प्रावधानों में ग्राम सभा, पंचायत और स्थानीय समुदाय की भूमिका और अधिक निर्णायक बनाई गई है। कार्यों की पहचान, प्राथमिकता, गुणवत्ता निगरानी, खर्च और भुगतान की सोशल ऑडिट—सब कुछ गांव स्तर पर ही सुनिश्चित किया जाएगा ताकि “ऊपर से थोपे गए निर्णयों” की गुंजाइश समाप्त हो सके।
उन्होंने बताया कि महिलाओं, स्वयं सहायता समूहों और ग्रामीण समुदाय की भागीदारी को योजना में विशेष प्राथमिकता दी गई है। शिकायत निवारण प्रणाली को मजबूत किया गया है और डिजिटल निगरानी के माध्यम से पारदर्शिता को नई गति दी गई है।
मजदूरों के अधिकारों पर बोलते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि सरकार का उद्देश्य मजदूरों को “खैरात” नहीं, बल्कि सम्मानजनक अधिकार, सुरक्षित कार्य-परिस्थितियाँ और समयबद्ध पारदर्शी भुगतान सुनिश्चित करना है। ग्रामीण सम्पत्तियों और आजीविका आधारित कार्यों से गांवों की स्थायी प्रगति इस योजना का मुख्य आधार है।
गांधीजी के नाम और विचार हटाने के विपक्षी आरोपों पर उन्होंने कहा कि यह आरोप राजनीतिक भ्रम फैलाने का प्रयास है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नया अधिनियम गांधीजी के ग्राम स्वराज, आत्मनिर्भरता, श्रम के सम्मान और जनभागीदारी जैसे मूल सिद्धांतों पर आधारित है। यह गांवों को सशक्त, मजदूरों को सम्मानित और विकास को स्थायी बनाने का निर्णायक कदम है।
शिवराज सिंह चौहान ने कहा, “विपक्ष भले भ्रम फैलाए, लेकिन सरकार की प्रतिबद्धता स्पष्ट है—मजदूरों का सशक्तीकरण और ग्रामीण भारत का सर्वांगीण विकास।”
नई दिल्ली। शौर्यपथ ।
चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) अनिल चौहान ने कहा कि भारत को न केवल कम समय के तीव्र युद्ध बल्कि लंबे समय तक चलने वाले संघर्षों के लिए भी तैयार रहना चाहिए। उन्होंने यह टिप्पणी मुंबई स्थित आईआईटी बॉम्बे में आयोजित एक कार्यक्रम में भारत के समक्ष मौजूद सुरक्षा चुनौतियों पर चर्चा करते हुए की।
सीडीएस ने बिना नाम लिए पाकिस्तान और चीन की ओर संकेत करते हुए कहा कि भारत को अपनी रणनीतिक तैयारी ऐसे माहौल में करनी होगी, जहां उसके दोनों प्रमुख प्रतिद्वंद्वी परमाणु हथियार संपन्न हैं। उनके अनुसार, "हमारे दोनों दुश्मन—एक परमाणु हथियार वाला देश, दूसरा परमाणु हथियार संपन्न देश—इसलिए हमें इस स्तर के अवरोध का उल्लंघन नहीं होने देना चाहिए।"
चौहान ने कहा कि भारत को आतंकवाद और सीमापार हमलों से निपटने के लिए कम अवधि के तीव्र संघर्षों के लिए सक्षम रहना होगा, जैसा कि ऑपरेशन सिंदूर जैसे अभियानों में देखा गया। साथ ही, लंबे समय तक चलने वाले जमीनी विवादों की परिस्थितियों के लिए भी तैयारी जरूरी है। उन्होंने कहा, "हमारा जमीनी विवाद है, और ऐसी स्थितियों में दीर्घकालिक संघर्ष की आशंका बनी रहती है। हालांकि, हमें इससे दूर रहने की कोशिश भी करनी चाहिए।"
चौहान के संकेत क्रमश: आतंकवाद-विरोधी त्वरित अभियानों और रूस-यूक्रेन जैसे लंबे संघर्षों की ओर माने जा रहे हैं, जिनसे भारत को अपनी रक्षा नीति और तैयारी का स्तर निर्धारित करना होगा।
नई दिल्ली / शौर्यपथ / / बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ बढ़ती हिंसा को लेकर भारत के कई शहरों में मंगलवार को विरोध प्रदर्शन हुए। हाल ही में मैमनसिंह में एक हिंदू युवक दीपू चंद्र दास को भीड़ द्वारा पीट-पीटकर मार डालने और शव को आग के हवाले किए जाने की घटना के बाद दोनों देशों के बीच राजनयिक तनाव गहरा गया है।
हिंसा के विरोध में भारत में बांग्लादेशी दूतावासों और वाणिज्य दूतावासों के पास बड़ी संख्या में लोग एकत्र हुए। बढ़ते तनाव को देखते हुए भारतीय मिशनों की सुरक्षा बढ़ा दी गई और कांसुलर सेवाएं अस्थायी रूप से निलंबित कर दी गईं। इसी क्रम में भारत ने बांग्लादेश के उच्चायुक्त रियाज हामिदुल्लाह को तलब किया। इससे पहले बांग्लादेश सरकार ने भारतीय उच्चायुक्त प्रणय वर्मा को अपने मिशनों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताने के लिए बुलाया था। हिंसा की श्रृंखला राजनीतिक कार्यकर्ता शरीफ उस्मान हादी की हत्या के बाद शुरू हुई, जिसके बाद बांग्लादेश में भी तनाव फैल गया। धार्मिक अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर उठी चिंताओं ने भारत में आक्रोश को और बढ़ाया।
कोलकाता में बंगीय हिंदू जागरण सहित कई संगठनों ने बांग्लादेश के डिप्टी हाई कमीशन के पास प्रदर्शन करते हुए दीपू चंद्र दास की हत्या की कड़ी निंदा की। प्रदर्शनकारियों द्वारा ज्ञापन सौंपने की तैयारी के बीच भारी भीड़ जमा हो गई, जिस पर पुलिस ने स्थिति नियंत्रण से बाहर होने की आशंका में लाठीचार्ज किया।
नई दिल्ली: दिल्ली-एनसीआर में ठंड, घने कोहरे और गंभीर प्रदूषण ने स्थिति बेहद चिंताजनक बना दी है। कई इलाकों में सोमवार सुबह AQI 400 के पार दर्ज हुआ—बवाना 408, नरेला 418, आनंद विहार 404 और अक्षरधाम 438 तक पहुंच गया। राजधानी के ऊपर जहरीली स्मॉग की मोटी परत छाई रही, जबकि AIIMS क्षेत्र में AQI 363 रिकॉर्ड किया गया।
हालात बिगड़ने पर CAQM ने GRAP स्टेज-IV के तहत सभी कड़े प्रतिबंध लागू कर दिए हैं। प्रशासन ने दिल्ली में 50% कर्मचारियों को वर्क-फ्रॉम-होम का आदेश दिया है और कक्षा 5 तक के स्कूल ऑनलाइन संचालित हो रहे हैं।
नोएडा व गाज़ियाबाद में भी वायु गुणवत्ता बेहद खराब बनी हुई है—नोएडा सेक्टर-1 में AQI 381 और वसुंधरा में 394 दर्ज हुआ।
मौसम विभाग के अनुसार 23 व 24 दिसंबर को कोहरे में कमी की उम्मीद नहीं है। अधिकतम तापमान 19–22°C और न्यूनतम 9–10°C के आसपास रहेगा। ठंडी हवाओं की कमी और उच्च आर्द्रता के चलते फिलहाल राहत की संभावना नहीं है।
नई दिल्ली: बांग्लादेश में हिंदू युवक दीपू चंद्र दास की हत्या के विरोध में वीएचपी और बजरंग दल के संभावित प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली में बांग्लादेश उच्चायोग के बाहर सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। पुलिस और अर्धसैनिक बलों को तैनात कर क्षेत्र को हाई अलर्ट पर रखा गया है।
इससे पहले बांग्लादेशी मीडिया ने दावा किया था कि दिल्ली में हुए एक प्रदर्शन के दौरान उच्चायोग की सुरक्षा भेदने की कोशिश की गई, हालांकि भारत ने इन दावों को भ्रामक बताया है।
उधर, बांग्लादेश में हिंसा का दौर जारी है। खुलना में छात्र आंदोलन से जुड़े नेता मोतालेब सिकदर की गोली मारकर हत्या कर दी गई, जो कुछ दिन पहले युवा नेता शरीफ उस्मान हादी की हत्या के बाद हुई दूसरी बड़ी वारदात है। मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस ने इन मामलों में त्वरित कार्रवाई के आदेश दिए हैं।
मयमनसिंह में हिंदू युवक की हत्या के मामले में बांग्लादेश पुलिस ने दस लोगों को हिरासत में लिया है, जिसके बाद पूरे देश में तनाव व्याप्त है।
भारत में भी इसका प्रभाव दिखा—जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ में कई हिंदू संगठनों और भाजपा ने विरोध प्रदर्शन करते हुए बंद का आह्वान किया, जिसके चलते बाजार और प्रतिष्ठान बंद रहे।
यह घटनाक्रम अगस्त में शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद बांग्लादेश में बढ़ रही अल्पसंख्यक विरोधी घटनाओं को और उजागर करता है।
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने विलुप्ति की कगार पर खड़े ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (गोडावण) की सुरक्षा के लिए ऐतिहासिक आदेश देते हुए राजस्थान और गुजरात के 14,753 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में बड़े सोलर पार्क, पवन ऊर्जा परियोजनाओं और हाईटेंशन ओवरहेड बिजली लाइनों पर रोक लगा दी है। जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस अतुल एस. चंदुरकर की पीठ ने कहा—“गोडावण राजस्थान की आत्मा है, और ऊर्जा कंपनियां इस रेगिस्तान की मालिक नहीं, बल्कि मेहमान हैं।”
अदालत ने विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों को स्वीकार करते हुए राजस्थान में 14,013 किमी² और गुजरात में 740 किमी² क्षेत्र को संशोधित प्राथमिक संरक्षण क्षेत्र घोषित किया। इन इलाकों में इन-सीटू और एक्स-सीटू संरक्षण उपायों को तुरंत लागू करने तथा प्रजाति की निगरानी शुरू करने के निर्देश दिए गए।
जैसलमेर-बाड़मेर सबसे अधिक प्रभावित होंगे, क्योंकि ये जिले बड़े सौर और पवन ऊर्जा केंद्र बन चुके हैं। कोर्ट ने 33 केवी से 400 केवी तक की मौजूदा बिजली लाइनों को भूमिगत करने या स्थानांतरित करने का आदेश दिया है, क्योंकि गोडावण की मौतों का सबसे बड़ा कारण बिजली तारों से टकराव है। लगभग 250 किमी बिजली लाइनों को दो वर्षों में भूमिगत करना होगा। अब संवेदनशील क्षेत्रों में ट्रांसमिशन लाइनें केवल निर्धारित पावर कॉरिडोर से ही गुजरेंगी।
पीठ ने बिश्नोई समुदाय और ‘गोडावण मैन’ स्व. राधेश्याम बिश्नोई को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि राजस्थान में सिर्फ 150–175 गोडावण ही बचे हैं, जो मुख्य रूप से जैसलमेर के डेजर्ट नेशनल पार्क में पाए जाते हैं। IUCN पहले ही इसे अति संकटग्रस्त श्रेणी में रख चुका है।
सुप्रीम कोर्ट ने CSR फंड को भी संरक्षण कार्यों में लगाने का निर्देश दिया, साथ ही यह स्पष्ट कर दिया कि प्राकृतिक आवास की सुरक्षा में कोई ढिलाई स्वीकार नहीं होगी।
नई दिल्ली। एजेंसी
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने रविवार को एक महत्वपूर्ण वक्तव्य देते हुए साफ कहा कि संघ को राजनीतिक संगठन या भाजपा से जोड़कर समझना मूलभूत भूल है। कोलकाता में आयोजित ‘आरएसएस 100 व्याख्यान माला’ को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि आरएसएस का नजरिया न तो राजनीतिक है और न ही किसी दल विशेष से संचालित।
“संघ को संकीर्ण नजरिए से न देखें”
भागवत ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति आरएसएस को सिर्फ भाजपा या किसी अन्य संगठन के संदर्भ में समझने की कोशिश करता है, तो वह संघ की वास्तविकता से भटक जाता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि तुलना, पूर्वाग्रह और दूसरे स्रोतों की जानकारी पर आधारित धारणाएँ केवल गलतफहमी पैदा करती हैं।
उन्होंने कहा—
“संघ का कोई राजनीतिक एजेंडा नहीं।आरएसएस को केवल भाजपा से जोड़कर देखना बहुत बड़ी गलती है।संघ को सेवा संगठन भर मानना भी अधूरा दृष्टिकोण है।
हिंदू समाज की भलाई, ‘सज्जन’ निर्माण ही मूल ध्येय
एक अन्य कार्यक्रम में भागवत ने दोहराया कि आरएसएस का उद्देश्य हिंदू समाज की भलाई, सुरक्षा और नैतिक रूप से सुदृढ़ व्यक्तियों (‘सज्जनों’) का निर्माण है। उनका कहना था कि समाज में ऐसे मूल्यनिष्ठ, सेवाभावी और राष्ट्रहित प्रेरित लोग ही देश के गौरव और विकास को गति देते हैं।
“विश्वगुरु बनने की दिशा में देश आगे बढ़ रहा”
भागवत ने विश्वास जताया कि भारत पुनः विश्वगुरु बनेगा, और इसके लिए समाज को तैयार करना संघ का दायित्व है। उन्होंने कहा कि आरएसएस किसी को अपना दुश्मन नहीं मानता, लेकिन संगठन के बढ़ते प्रभाव से “कुछ लोगों के संकीर्ण स्वार्थ अवश्य प्रभावित होते हैं।”
“मनगढ़ंत कहानियों पर नहीं, तथ्यों पर करें राय आधारित”
उन्होंने अपील की कि लोग संघ के बारे में राय बनाएं तो वह तथ्यों पर आधारित हो, न कि अफवाहों, गढ़ी गई कहानियों या पूर्वधारणाओं पर। आरएसएस प्रमुख भागवत का यह वक्तव्य ऐसे समय में आया है जब देश में राजनीति, विचारधारा और संघ-भाजपा संबंधों पर लगातार चर्चाएँ तेज रहती हैं। उनका यह संदेश राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
