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March 10, 2026
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भारत

भारत (964)

 

संगम स्नान स्थगित कर प्रयागराज से प्रस्थान, बोले— “पीड़ा के क्षणों में जल भी शांति नहीं दे सकता”

प्रयागराज।
महाराष्ट्र में हुए दर्दनाक विमान हादसे में उपमुख्यमंत्री समेत पाँच लोगों के असामयिक निधन की अत्यंत दुखद घटना ने पूरे देश को शोकाकुल कर दिया है। इस राष्ट्रीय त्रासदी के बाद ज्योतिषपीठाधीश्वर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने एक भावनात्मक और महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए कहा है कि वे अब विशेष परिस्थिति में ही प्रयागराज छोड़ेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस विषय पर वे अब कोई और चर्चा नहीं करना चाहते

मंगलवार की रात प्रशासन की ओर से ब्रह्मचारी के माध्यम से तथा शंकराचार्य के मुख्य कार्याधिकारी चंद्रप्रकाश उपाध्याय द्वारा एक पत्र एवं प्रस्ताव भेजा गया। इसमें पूर्ण सम्मान के साथ पालकी द्वारा संगम ले जाकर अधिकारियों की उपस्थिति में स्नान कराने का आमंत्रण दिया गया था। माना जा रहा है कि उमा भारती के बयान के पश्चात सरकार और प्रशासन दोनों ने पहल करते हुए यह आमंत्रण भेजा।

हालाँकि, शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने गहरे शोक और संवेदना के भाव में संगम स्नान से विरत रहने का निर्णय लिया। उन्होंने कहा—

“संगम की लहरों में स्नान केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि अंतरात्मा की संस्कृति और आत्मिक चेतना का मार्ग है।
लेकिन आज मन इतना व्यथित है कि हम बिना स्नान किए ही इस पावन स्थल से विदा ले रहे हैं।
जब हृदय में क्षोभ और पीड़ा हो, तब जल की शीतलता भी मन को शांति नहीं दे सकती।”

उन्होंने आगे कहा कि न्याय की परीक्षा कभी समाप्त नहीं होती

“आज हम यहाँ से जा रहे हैं, लेकिन अपने पीछे सत्य की गूंज और कई प्रश्न छोड़कर जा रहे हैं।
ये प्रश्न न केवल प्रयागराज की हवा में रहेंगे, बल्कि पूरे विश्व के वायुमंडल में विद्यमान रहेंगे और अपने उत्तर की प्रतीक्षा करेंगे।”

शंकराचार्य का यह निर्णय केवल एक व्यक्तिगत आस्था का विषय नहीं, बल्कि राष्ट्रीय शोक के प्रति संवेदनशीलता, नैतिक चेतना और आत्मिक उत्तरदायित्व का प्रतीक माना जा रहा है। उनके शब्दों और मौन में वह पीड़ा झलकती है, जो आज पूरे देश के हृदय में समाई हुई है।

 

नई दिल्ली /गणतंत्र दिवस के अवसर पर कर्तव्य पथ पर छत्तीसगढ़ की झांकी में शामिल कलाकारों को राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात का गौरव प्राप्त हुआ। राष्ट्रपति से स्नेहपूर्ण मुलाकात के दौरान कलाकार भावविभोर और अभिभूत नजर आए।

राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने छत्तीसगढ़ की झांकी की प्रशंसा करते हुए कहा कि झांकी के माध्यम से देश की समृद्ध जनजातीय परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत का प्रभावशाली प्रदर्शन हुआ है। उन्होंने कलाकारों के समर्पण, मेहनत और जीवंत प्रस्तुति की सराहना करते हुए छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया भी कहा।

छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले से आए जनजातीय कलाकारों ने गणतंत्र दिवस परेड के दौरान छत्तीसगढ़ की झांकी के साथ पारंपरिक मंदार नृत्य की मनोहारी प्रस्तुति दी थी, जिसने कर्तव्य पथ पर मौजूद दर्शकों के साथ-साथ देश-दुनिया का ध्यान आकर्षित किया।

कलाकारों ने राष्ट्रपति से मुलाकात को अपने जीवन का अविस्मरणीय क्षण बताते हुए कहा कि यह सम्मान उन्हें अपनी कला, संस्कृति और परंपराओं को और अधिक निष्ठा के साथ आगे बढ़ाने की नई प्रेरणा देगा।

राष्ट्रपति से मुलाकात करने वालों में टीम लीडर तेज बहादुर भुवाल के नेतृत्व में नारायणपुर जिले के ग्राम नयनार से आए 13 सदस्यीय दल में जेनू राम सलाम, लच्छू राम, जैतू राम सलाम, राजीम सलाम, दिनेश करंगा, जयनाथ सलाम, मानसिंग करंगा, चन्द्रशेखर पोटाई, धनश्याम सलाम, जगनाथ सलाम, सुरेश सलाम तथा घोड़लापारा, ग्राम नयनार निवासी दिलीप गोटा शामिल रहे।

उल्लेखनीय है कि बस्तर अंचल की इस पारंपरिक कला टोली ने अपनी लोक-संस्कृति और नृत्य शैली से राष्ट्रीय मंच पर छत्तीसगढ़ की विशिष्ट पहचान को सशक्त रूप से प्रस्तुत किया।

देश के पहले जनजातीय डिजिटल संग्रहालय की भव्य झांकी बनी आकर्षण का केंद्र

नई दिल्ली /77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर कर्तव्य पथ पर प्रस्तुत छत्तीसगढ़ की झांकी ने देश-दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा। “स्वतंत्रता का मंत्र – वंदे मातरम्” थीम पर आधारित यह झांकी जनजातीय वीर नायकों को समर्पित देश के पहले डिजिटल संग्रहालय की गौरवगाथा को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करती नजर आई।

राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु, प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी सहित केंद्रीय मंत्रियों और विशिष्ट अतिथियों ने झांकी को उत्सुकता के साथ देखा और तालियां बजाकर सराहना की। दर्शक दीर्घा में मौजूद लाखों लोगों ने भी तालियों की गड़गड़ाहट के साथ छत्तीसगढ़ की झांकी का स्वागत किया। झांकी के समक्ष छत्तीसगढ़ के कलाकारों द्वारा प्रस्तुत पारंपरिक लोक नृत्य ने माहौल को और भी जीवंत बना दिया।

झांकी में नवा रायपुर अटल नगर में स्थापित देश के पहले जनजातीय डिजिटल संग्रहालय की झलक दिखाई गई, जहां छत्तीसगढ़ सहित देश के 14 प्रमुख जनजातीय स्वतंत्रता आंदोलनों को आधुनिक डिजिटल तकनीकों के माध्यम से संरक्षित किया गया है। इस ऐतिहासिक संग्रहालय का उद्घाटन प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने छत्तीसगढ़ राज्य गठन की रजत जयंती के अवसर पर किया था।

झांकी के अग्र भाग में वर्ष 1910 के ऐतिहासिक भूमकाल विद्रोह के नायक वीर गुंडाधुर को दर्शाया गया। धुर्वा समाज के इस महान योद्धा ने अन्यायपूर्ण अंग्रेजी शासन के विरुद्ध जनजातीय समाज को संगठित किया। विद्रोह के प्रतीक के रूप में आम की टहनियां और सूखी मिर्च को विशेष रूप से प्रदर्शित किया गया। विद्रोह की तीव्रता का अनुमान इसी से लगाया जा सकता है कि अंग्रेजों को नागपुर से सेना बुलानी पड़ी, फिर भी वे वीर गुंडाधुर को पकड़ने में असफल रहे।

झांकी के पृष्ठ भाग में छत्तीसगढ़ के प्रथम शहीद वीर नारायण सिंह को घोड़े पर सवार, हाथ में तलवार लिए दर्शाया गया। उन्होंने अकाल के समय गरीबों और वंचितों के अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष किया और 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में अग्रणी भूमिका निभाई।
पूरी झांकी जनजातीय समाज के अदम्य साहस, बलिदान और देशभक्ति की भावना को सशक्त रूप में अभिव्यक्त करती रही और गणतंत्र दिवस परेड में छत्तीसगढ़ की गौरवपूर्ण पहचान को राष्ट्रीय मंच पर स्थापित किया।

नई दिल्ली | विशेष रिपोर्ट
कर्नल सोफिया कुरैशी के खिलाफ की गई आपत्तिजनक टिप्पणी के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 19 जनवरी 2026 को सुनवाई के दौरान मध्य प्रदेश सरकार को सख्त शब्दों में कटघरे में खड़ा कर दिया। मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने साफ कर दिया कि कानून चुप्पी की इजाजत नहीं देता—अब सरकार को फैसला लेना ही होगा।
दो सप्ताह का अल्टीमेटम
सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार को दो सप्ताह के भीतर यह तय करने का निर्देश दिया है कि मंत्री कुंवर विजय शाह के खिलाफ अभियोजन (मुकदमा चलाने) की मंजूरी दी जाएगी या नहीं। कोर्ट ने कहा कि यह कोई वैकल्पिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि कानूनी दायित्व है।
“पांच महीने से चुप्पी क्यों?”
कोर्ट ने सरकार की देरी पर तीखी नाराजगी जताते हुए याद दिलाया कि विशेष जांच टीम (SIT) ने 19 अगस्त 2025 को ही अपनी जांच रिपोर्ट सौंप दी थी। इसके बावजूद सरकार द्वारा अब तक कोई निर्णय न लेना न्यायिक प्रक्रिया के साथ खिलवाड़ है। पीठ की टिप्पणी थी—
“कानून आप पर निर्णय लेने की जिम्मेदारी डालता है, और आपको फैसला लेना ही होगा।”
माफी पर सख्त रुख
मंत्री विजय शाह द्वारा दी गई माफी को सुप्रीम कोर्ट ने “मगरमच्छ के आँसू” बताते हुए सिरे से खारिज कर दिया। अदालत ने स्पष्ट कहा कि अब माफी मांगने का समय निकल चुका है, और ऐसी टिप्पणियों को केवल औपचारिक खेद से ढका नहीं जा सकता।
जांच का दायरा बढ़ा
सुप्रीम कोर्ट ने SIT को यह भी निर्देश दिया कि जांच के दौरान सामने आई अन्य आपत्तिजनक टिप्पणियों की अलग से जांच कर रिपोर्ट दाखिल की जाए। यानी मामला अब केवल एक बयान तक सीमित नहीं रहेगा।
मामले की पृष्ठभूमि
यह विवाद वर्ष 2025 में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान सामने आया, जब एक सार्वजनिक सभा में मंत्री कुंवर विजय शाह ने सेना की ओर से मीडिया ब्रीफिंग कर रहीं कर्नल सोफिया कुरैशी के लिए “आतंकवादियों की बहन” जैसे अपमानजनक शब्दों का प्रयोग किया।
इस पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए FIR दर्ज करने के आदेश दिए थे। बाद में यह मामला सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसफर कर दिया गया।
व्यापक संदेश
इस पूरे घटनाक्रम में सुप्रीम कोर्ट का रुख बेहद स्पष्ट है—
सेना की गरिमा, महिला अधिकारियों का सम्मान और संवैधानिक मर्यादा किसी भी सूरत में राजनीतिक बयानबाज़ी की भेंट नहीं चढ़ाई जा सकती।
अब निगाहें इस पर टिकी हैं कि मध्य प्रदेश सरकार दो सप्ताह के भीतर कानून के अनुरूप साहसिक फैसला लेती है या फिर न्यायपालिका को एक बार फिर हस्तक्षेप करना पड़ता है।

 

   नई दिल्ली / भाजपा मुख्यालय में आज एक ऐतिहासिक समारोह हुआ, जहां 45 वर्षीय नितिन नबीन ने राष्ट्रीय अध्यक्ष पद का जिम्मा संभाला। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस अवसर पर कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा, "नितिन नबीन मेरे बॉस हैं। संगठन के मामलों में वे मेरा ष्टक्र (चरित्र रिपोर्ट) लिखेंगे और मैं उनके मार्गदर्शन में कार्य करूंगा।" यह बयान भाजपा के आंतरिक लोकतंत्र और युवा नेतृत्व को मजबूत करने की प्रतिबद्धता का प्रतीक बन गया।
समारोह में पीएम मोदी ने नितिन नबीन को "मिलेनियल" नेता करार दिया, जो आधुनिक तकनीक और बदलती अर्थव्यवस्था का प्रतिनिधित्व करते हैं। नबीन भाजपा के 12वें और अब तक के सबसे युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। उनका निर्विरोध चयन हुआ, जिसमें उनके पक्ष में 37 नामांकन सेट दाखिल किए गए। यह चयन पार्टी की एकजुटता को दर्शाता है।

पीएम मोदी के संबोधन की प्रमुख बातें
हृष्ठ्र में तालमेल : नबीन की जिम्मेदारी केवल भाजपा तक सीमित नहीं, बल्कि हृष्ठ्र सहयोगियों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करना है।
विकसित भारत का संकल्प : अगले 25 वर्षों को निर्णायक बताते हुए पीएम ने विश्वास जताया कि नबीन के नेतृत्व में पार्टी 'विकसित भारतÓ लक्ष्य हासिल करेगी।
परिवारवाद पर प्रहार : राजनीति में परिवारवाद को अभिशाप बताते हुए मोदी ने कहा, "मैं 1 लाख ऐसे युवाओं को लाना चाहता हूं, जिनके परिवार का कोई राजनीतिक इतिहास न हो।"

नितिन नबीन का राजनीतिक सफर
बिहार से भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने वाले पहले नेता नितिन नबीन पटना की बांकीपुर विधानसभा सीट से लगातार पांच बार (2006, 2010, 2015, 2020, 2025) विधायक चुने गए हैं। संगठन में उनका लंबा अनुभव रहा- वे छत्तीसगढ़ भाजपा के प्रभारी, भारतीय जनता युवा मोर्चा (क्चछ्वङ्घरू) के राष्ट्रीय महासचिव और बिहार सरकार में पथ निर्माण व नगर विकास मंत्री रह चुके हैं। जेपी नड्डा की जगह लेते हुए वे पार्टी को नई ऊर्जा प्रदान करने को तैयार हैं।

कार्यक्रम में गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, निवर्तमान अध्यक्ष जेपी नड्डा के अलावा भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्री जैसे योगी आदित्यनाथ, भूपेंद्र पटेल और हिमंत बिस्वा सरमा उपस्थित रहे। भाजपा सूत्रों के अनुसार, यह नियुक्ति 2029 लोकसभा चुनावों की तैयारी का हिस्सा है, जिसमें युवा-केंद्रित रणनीति पर जोर दिया जाएगा।

इस समाचार को और आकर्षक बनाने के लिए क्या कोई विशेष कोण या अतिरिक्त विवरण जोडऩा चाहेंगे, जैसे बिहार-छत्तीसगढ़ फोकस या तुलनात्मक विश्लेषण?

नई दिल्ली /

भारतीय जनता पार्टी को अपना नया राष्ट्रीय अध्यक्ष मिल गया है। पार्टी के वरिष्ठ नेता और बिहार इकाई के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष नितिन नबीन को निर्विरोध रूप से बीजेपी का नया राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना गया है। वह कल, 20 जनवरी को सुबह 11:30 बजे पार्टी मुख्यालय में औपचारिक रूप से पदभार संभालेंगे।
इस ऐतिहासिक समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सहित पार्टी के शीर्ष नेता उपस्थित रहेंगे। नितिन नबीन का चयन पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक के दौरान हुआ, जो बीजेपी की आंतरिक लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूत करने का प्रतीक है।

निर्विरोध चुनाव की पूरी प्रक्रिया
पार्टी के राष्ट्रीय चुनाव अधिकारी डॉ. के. लक्ष्मण ने प्रेस बयान जारी कर पूरी प्रक्रिया का विवरण दिया। उन्होंने बताया कि चुनाव तब शुरू हुआ जब 36 प्रदेश इकाइयों में से 30 प्रदेश अध्यक्षों का चुनाव पूरा हो चुका था, जो संविधान की 50त्न अनिवार्य शर्त से कहीं अधिक था।
- 16 जनवरी 2026:चुनाव कार्यक्रम की घोषणा और मतदाता सूची प्रकाशन।
- 19 जनवरी 2026 (आज):दोपहर 2 से 4 बजे के बीच नामांकन प्रक्रिया।
- नामांकन विवरण:नितिन नबीन के समर्थन में 37 नामांकन सेट दाखिल, सभी जांच में वैध पाए गए।
डॉ. लक्ष्मण ने कहा, "यह निर्विरोध चुनाव पार्टी की एकजुटता और मजबूत नेतृत्व की पुष्टि करता है।"

नितिन नबीन का राजनीतिक सफर
नितिन नबीन (जन्म: 1985, बिहार) बीजेपी के उभरते युवा चेहरों में शुमार हैं। वे बिहार प्रदेश अध्यक्ष (2023-2025) रह चुके हैं और पार्टी की युवा मोर्चा से अपनी राजनीतिक यात्रा शुरू की। नबीन को संगठन विस्तार और ग्रामीण स्तर पर पार्टी को मजबूत करने के लिए जाना जाता है। उनके नेतृत्व में बिहार में बीजेपी ने 2025 विधानसभा चुनावों में उल्लेखनीय सफलता हासिल की। विशेषज्ञों का मानना है कि उनका चयन पार्टी को युवा और क्षेत्रीय नेतृत्व प्रदान करेगा, खासकर आगामी लोकसभा चुनावों के मद्देनजर।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, नितिन नबीन जेपी नड्डा के उत्तराधिकारी के रूप में चुने गए हैं, जिन्होंने अपना इस्तीफ ा दिसंबर 2025 में सौंपा था। यह बदलाव बीजेपी की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जो पूर्वोत्तर और हिंदी पट्टी में मजबूती पर केंद्रित है।

नई दिल्ली /

भारतीय जनता पार्टी को अपना नया राष्ट्रीय अध्यक्ष मिल गया है। पार्टी के वरिष्ठ नेता और बिहार इकाई के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष नितिन नबीन को निर्विरोध रूप से बीजेपी का नया राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना गया है। वह कल, 20 जनवरी को सुबह 11:30 बजे पार्टी मुख्यालय में औपचारिक रूप से पदभार संभालेंगे।
इस ऐतिहासिक समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सहित पार्टी के शीर्ष नेता उपस्थित रहेंगे। नितिन नबीन का चयन पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक के दौरान हुआ, जो बीजेपी की आंतरिक लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूत करने का प्रतीक है।

निर्विरोध चुनाव की पूरी प्रक्रिया
पार्टी के राष्ट्रीय चुनाव अधिकारी डॉ. के. लक्ष्मण ने प्रेस बयान जारी कर पूरी प्रक्रिया का विवरण दिया। उन्होंने बताया कि चुनाव तब शुरू हुआ जब 36 प्रदेश इकाइयों में से 30 प्रदेश अध्यक्षों का चुनाव पूरा हो चुका था, जो संविधान की 50त्न अनिवार्य शर्त से कहीं अधिक था।
- 16 जनवरी 2026:चुनाव कार्यक्रम की घोषणा और मतदाता सूची प्रकाशन।
- 19 जनवरी 2026 (आज):दोपहर 2 से 4 बजे के बीच नामांकन प्रक्रिया।
- नामांकन विवरण:नितिन नबीन के समर्थन में 37 नामांकन सेट दाखिल, सभी जांच में वैध पाए गए।
डॉ. लक्ष्मण ने कहा, "यह निर्विरोध चुनाव पार्टी की एकजुटता और मजबूत नेतृत्व की पुष्टि करता है।"

नितिन नबीन का राजनीतिक सफर
नितिन नबीन (जन्म: 1985, बिहार) बीजेपी के उभरते युवा चेहरों में शुमार हैं। वे बिहार प्रदेश अध्यक्ष (2023-2025) रह चुके हैं और पार्टी की युवा मोर्चा से अपनी राजनीतिक यात्रा शुरू की। नबीन को संगठन विस्तार और ग्रामीण स्तर पर पार्टी को मजबूत करने के लिए जाना जाता है। उनके नेतृत्व में बिहार में बीजेपी ने 2025 विधानसभा चुनावों में उल्लेखनीय सफलता हासिल की। विशेषज्ञों का मानना है कि उनका चयन पार्टी को युवा और क्षेत्रीय नेतृत्व प्रदान करेगा, खासकर आगामी लोकसभा चुनावों के मद्देनजर।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, नितिन नबीन जेपी नड्डा के उत्तराधिकारी के रूप में चुने गए हैं, जिन्होंने अपना इस्तीफ ा दिसंबर 2025 में सौंपा था। यह बदलाव बीजेपी की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जो पूर्वोत्तर और हिंदी पट्टी में मजबूती पर केंद्रित है।

प्रयागराज। उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में माघ मेले के दौरान कथित दुर्व्यवहार के बाद ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद धरने पर बैठ गए हैं और लगातार प्रशासन व सरकार पर तीखे आरोप लगा रहे हैं। उन्होंने ऐलान किया है कि वे 10 मार्च को साधुओं के साथ दिल्ली जाएंगे। शंकराचार्य ने कहा कि गंगा किसी सरकार की नहीं, बल्कि हर सनातनी की मां है, और गंगा में स्नान के लिए किसी अनुमति की आवश्यकता नहीं होनी चाहिए।

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि संगम में स्नान के लिए जब वे अपने शिविर से निकले तो उन्हें रोका गया और उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया। उन्होंने कहा कि प्रशासन ने उनके लोगों को उनसे अलग कर दिया, अलग-अलग जगहों पर घुमाया और अंततः जहां उन्हें छोड़ दिया गया, वहीं वे अब धरने पर बैठे हैं। स्नान की अनुमति के सवाल पर उन्होंने कहा कि क्या गंगा किसी कंपनी के नाम पर पंजीकृत है, जो उसे किसी की पैतृक संपत्ति बना दिया गया है। सूचना देने के सवाल पर उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रशासन को तीन दिन पहले ही जानकारी दे दी गई थी।

शंकराचार्य ने आगे कहा कि शंकराचार्य शास्त्रों और धर्म के अनुसार बोलते हैं, इसलिए जब उनकी बातें समाज में प्रभाव डालने लगती हैं तो उनकी उपेक्षा या अपमान किया जाता है। उन्होंने सरकार और राजनीतिक दलों पर आरोप लगाया कि गोहत्या के जरिए पैसा कमाया जा रहा है, और उन्हें डर है कि अगर गोहत्या बंद हो गई तो उनका चंदा बंद हो जाएगा। इसी वजह से, उनके अनुसार, उन पर दबाव बनाया जा रहा है कि वे मेला छोड़ दें, ताकि सच्चाई और गोरक्षा की आवाज दबाई जा सके।

वादा 2022 का, अब 2027 में रफ्तार—भारत-जापान बुलेट ट्रेन 12 साल बाद पटरी पर दौड़ने की तैयारी

नई दिल्ली/अहमदाबाद।

भारत की पहली बुलेट ट्रेन—मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर (MAHSR)—एक बार फिर समयरेखा के कारण चर्चा में है। जिस परियोजना को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज़ादी की 75वीं वर्षगांठ यानी 15 अगस्त 2022 तक शुरू करने का लक्ष्य रखा था, वह अब संशोधित कार्यक्रम के अनुसार 15 अगस्त 2027 को आंशिक रूप से शुरू होने की ओर बढ़ रही है। यानी, वादे और वास्तविक शुरुआत के बीच करीब पाँच साल का अंतर।

समझौता और शिलान्यास

भारत और जापान के बीच इस महत्वाकांक्षी परियोजना का आधिकारिक समझौता 12 दिसंबर 2015 को नई दिल्ली में हुआ था। इस ऐतिहासिक डील पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान के तत्कालीन प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने हस्ताक्षर किए।

इसके बाद 14 सितंबर 2017 को अहमदाबाद में दोनों प्रधानमंत्रियों ने परियोजना की आधारशिला रखी।

परियोजना का स्वरूप

लंबाई: 508 किलोमीटर (मुंबई–अहमदाबाद)

तकनीक: जापान की विश्वप्रसिद्ध शिंकानसेन (Shinkansen)

लागत (अनुमानित): ₹98,000 करोड़

वित्तपोषण: जापान की JICA द्वारा 81% राशि (करीब ₹79,000 करोड़) 0.1% की बेहद कम ब्याज दर पर ऋण

नोडल एजेंसी: नेशनल हाई-स्पीड रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड (NHSRCL)

समयसीमा में देरी क्यों?

परियोजना की रफ्तार पर सबसे बड़ा असर भूमि अधिग्रहण में देरी, विशेषकर महाराष्ट्र खंड, और कोविड-19 महामारी का पड़ा। इन्हीं कारणों से पहले दिसंबर 2023 की आधिकारिक डेडलाइन भी आगे बढ़ानी पड़ी।

वर्तमान स्थिति (जनवरी 2026)

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के अनुसार, देशवासी 15 अगस्त 2027 को भारत की पहली बुलेट ट्रेन का टिकट खरीद सकेंगे।

अब तक की प्रगति इस प्रकार है:

भौतिक प्रगति: 55.63%

वित्तीय प्रगति: करीब 70% (लगभग ₹85,801 करोड़ खर्च)

वायडक्ट (एलिवेटेड पुल): 332 किमी से अधिक तैयार

पिलर निर्माण: 415 किमी से अधिक पूरा

ट्रैक बेड: 292 ट्रैक किमी (146 रूट किमी) तैयार

स्टेशन: गुजरात के सभी 8 स्टेशन एडवांस स्टेज में

महाराष्ट्र सुरंग: 21 किमी लंबी भूमिगत सुरंग पर काम जारी; 5 किमी खुदाई पूरी, पालघर में पहले पहाड़ी सुरंग का ‘ब्रेकथ्रू’

चरणबद्ध संचालन का प्लान

अगस्त 2027: सूरत–बिलिमोरा (या वापी) के बीच लगभग 100 किमी खंड शुरू

दिसंबर 2029: पूरा 508 किमी कॉरिडोर चालू करने का लक्ष्य

मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन भारत-जापान रणनीतिक साझेदारी का प्रतीक है, लेकिन समयसीमा के मोर्चे पर यह परियोजना लगातार सवालों में रही है। 2017 में किया गया 2022 का वादा अब 2027 में पूरा होने जा रहा है। सरकार का दावा है कि इस बार तय तारीख बदलेगी नहीं—अब देखना यह है कि क्या बुलेट ट्रेन वाकई 15 अगस्त 2027 को भारत की पटरी पर अपनी रफ्तार दिखा पाती है या नहीं।

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