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March 10, 2026
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भारत

भारत (964)

नई दिल्ली/ 
शाकुंभरी पीठाधीश्वर आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज (आशुतोष महाराज) द्वारा ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ लगाए गए गंभीर आरोपों ने धार्मिक जगत के साथ-साथ राजनीतिक और कानूनी हलकों में भी तीखी बहस छेड़ दी है। मामला सीधे नाबालिगों के कथित यौन शोषण जैसे अत्यंत संवेदनशील आरोपों से जुड़ा है, जिस पर न्यायिक प्रक्रिया सक्रिय हो चुकी है।

क्या हैं आरोप और कोर्ट का रुख
आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज ने प्रयागराज की स्पेशल POCSO कोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया कि शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के शिविरों तथा वाराणसी स्थित विद्यामठ में नाबालिगों के साथ यौन उत्पीड़न की घटनाएं होती रही हैं। याचिका के साथ प्रस्तुत कथित साक्ष्यों और दो नाबालिगों के बयानों के आधार पर अदालत ने 21 फरवरी 2026 को शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्य मुकुंदानंद गिरी के विरुद्ध FIR दर्ज करने का आदेश दिया।

कानूनी स्पष्टता: यह आदेश जांच शुरू करने से संबंधित है; दोष-निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।

अन्य आरोप: पद, संपत्ति और फंडिंग
यौन शोषण के आरोपों के साथ-साथ आशुतोष महाराज ने शंकराचार्य पर ‘फर्जी शंकराचार्य’, अवैध संपत्ति और विदेशी फंडिंग से जुड़े आरोप भी लगाए हैं। इन दावों पर भी अलग-अलग स्तर पर जांच की मांग की गई है।

पलटवार: आरोपकर्ता की साख पर सवाल
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और उनके समर्थकों ने आरोपों को निराधार बताते हुए आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े किए हैं। उनके अनुसार आशुतोष महाराज उत्तर प्रदेश के शामली (कांधला थाना) में हिस्ट्रीशीटर के रूप में दर्ज बताए जाते हैं। समर्थकों का दावा है कि उन पर करीब 21 आपराधिक मामले दर्ज रहे हैं, जिनमें जबरन उगाही, धोखाधड़ी और गंभीर धाराएं शामिल बताई जाती हैं।
गैंगरेप के पुराने आरोप का उल्लेख भी किया जा रहा है, जिस पर आशुतोष महाराज ने पहले ही सफाई देते हुए इसे राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया था और मेडिकल जांच का हवाला दिया था।
महत्वपूर्ण: ये सभी दावे/आरोप हैं; अंतिम सत्य का निर्धारण केवल अदालतें ही करेंगी।

पहले भी विवादों में रहे हैं आशुतोष महाराज
सतनामी समाज विवाद (नवंबर 2025): बिलासपुर में कथित अपमानजनक टिप्पणी के मामले में उनकी गिरफ्तारी हुई थी, जिसने सामाजिक तनाव को जन्म दिया।
राजनीतिक संबंध: वे श्री कृष्ण जन्मभूमि मुक्ति निर्माण ट्रस्ट के अध्यक्ष हैं। उन पर राम मंदिर विरोधी दलों से नजदीकी जैसे आरोप भी लगते रहे हैं, जिनसे उनका सार्वजनिक प्रोफाइल विवादास्पद बना रहा है।
धार्मिक पृष्ठभूमि: आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज, जगद्गुरु रामभद्राचार्य के शिष्य बताए जाते हैं—इस कारण यह विवाद केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि धार्मिक प्रतिष्ठानों की साख से भी जुड़ गया है।

व्यापक असर: आस्था बनाम जवाबदेही
यह प्रकरण भारत में धार्मिक संस्थाओं की पारदर्शिता, नैतिक जवाबदेही और कानून के समान अनुप्रयोग पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। एक ओर नाबालिगों की सुरक्षा सर्वोपरि है, वहीं दूसरी ओर न्यायिक निष्पक्षता और निर्दोषता की धारणा भी उतनी ही आवश्यक है।
अब निगाहें पुलिस जांच, साक्ष्यों की पड़ताल और अदालती सुनवाई पर टिकी हैं। सच चाहे जो हो, यह मामला तय करेगा कि आस्था के बड़े मंचों पर बैठे लोगों के लिए कानून की कसौटी कितनी कठोर और समान रूप से लागू होती है।
यह विवाद आरोपों और प्रत्यारोपों से आगे बढ़कर सत्य की न्यायिक खोज का विषय है। अंतिम फैसला अदालत का होगा—और वही तय करेगा कि यह प्रकरण आस्था पर कलंक है या आरोपों का राजनीतिक-व्यक्तिगत तानाबाना। तब तक, जिम्मेदार पत्रकारिता का धर्म है कि तथ्यों को दावे के रूप में, संतुलन और संवेदनशीलता के साथ प्रस्तुत किया जाए।

नई दिल्ली/ 
शाकुंभरी पीठाधीश्वर आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज (आशुतोष महाराज) द्वारा ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ लगाए गए गंभीर आरोपों ने धार्मिक जगत के साथ-साथ राजनीतिक और कानूनी हलकों में भी तीखी बहस छेड़ दी है। मामला सीधे नाबालिगों के कथित यौन शोषण जैसे अत्यंत संवेदनशील आरोपों से जुड़ा है, जिस पर न्यायिक प्रक्रिया सक्रिय हो चुकी है।

क्या हैं आरोप और कोर्ट का रुख
आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज ने प्रयागराज की स्पेशल POCSO कोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया कि शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के शिविरों तथा वाराणसी स्थित विद्यामठ में नाबालिगों के साथ यौन उत्पीड़न की घटनाएं होती रही हैं। याचिका के साथ प्रस्तुत कथित साक्ष्यों और दो नाबालिगों के बयानों के आधार पर अदालत ने 21 फरवरी 2026 को शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्य मुकुंदानंद गिरी के विरुद्ध FIR दर्ज करने का आदेश दिया।

कानूनी स्पष्टता: यह आदेश जांच शुरू करने से संबंधित है; दोष-निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।

अन्य आरोप: पद, संपत्ति और फंडिंग
यौन शोषण के आरोपों के साथ-साथ आशुतोष महाराज ने शंकराचार्य पर ‘फर्जी शंकराचार्य’, अवैध संपत्ति और विदेशी फंडिंग से जुड़े आरोप भी लगाए हैं। इन दावों पर भी अलग-अलग स्तर पर जांच की मांग की गई है।

पलटवार: आरोपकर्ता की साख पर सवाल
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और उनके समर्थकों ने आरोपों को निराधार बताते हुए आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े किए हैं। उनके अनुसार आशुतोष महाराज उत्तर प्रदेश के शामली (कांधला थाना) में हिस्ट्रीशीटर के रूप में दर्ज बताए जाते हैं। समर्थकों का दावा है कि उन पर करीब 21 आपराधिक मामले दर्ज रहे हैं, जिनमें जबरन उगाही, धोखाधड़ी और गंभीर धाराएं शामिल बताई जाती हैं।
गैंगरेप के पुराने आरोप का उल्लेख भी किया जा रहा है, जिस पर आशुतोष महाराज ने पहले ही सफाई देते हुए इसे राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया था और मेडिकल जांच का हवाला दिया था।
महत्वपूर्ण: ये सभी दावे/आरोप हैं; अंतिम सत्य का निर्धारण केवल अदालतें ही करेंगी।

पहले भी विवादों में रहे हैं आशुतोष महाराज
सतनामी समाज विवाद (नवंबर 2025): बिलासपुर में कथित अपमानजनक टिप्पणी के मामले में उनकी गिरफ्तारी हुई थी, जिसने सामाजिक तनाव को जन्म दिया।
राजनीतिक संबंध: वे श्री कृष्ण जन्मभूमि मुक्ति निर्माण ट्रस्ट के अध्यक्ष हैं। उन पर राम मंदिर विरोधी दलों से नजदीकी जैसे आरोप भी लगते रहे हैं, जिनसे उनका सार्वजनिक प्रोफाइल विवादास्पद बना रहा है।
धार्मिक पृष्ठभूमि: आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज, जगद्गुरु रामभद्राचार्य के शिष्य बताए जाते हैं—इस कारण यह विवाद केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि धार्मिक प्रतिष्ठानों की साख से भी जुड़ गया है।

व्यापक असर: आस्था बनाम जवाबदेही
यह प्रकरण भारत में धार्मिक संस्थाओं की पारदर्शिता, नैतिक जवाबदेही और कानून के समान अनुप्रयोग पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। एक ओर नाबालिगों की सुरक्षा सर्वोपरि है, वहीं दूसरी ओर न्यायिक निष्पक्षता और निर्दोषता की धारणा भी उतनी ही आवश्यक है।
अब निगाहें पुलिस जांच, साक्ष्यों की पड़ताल और अदालती सुनवाई पर टिकी हैं। सच चाहे जो हो, यह मामला तय करेगा कि आस्था के बड़े मंचों पर बैठे लोगों के लिए कानून की कसौटी कितनी कठोर और समान रूप से लागू होती है।
यह विवाद आरोपों और प्रत्यारोपों से आगे बढ़कर सत्य की न्यायिक खोज का विषय है। अंतिम फैसला अदालत का होगा—और वही तय करेगा कि यह प्रकरण आस्था पर कलंक है या आरोपों का राजनीतिक-व्यक्तिगत तानाबाना। तब तक, जिम्मेदार पत्रकारिता का धर्म है कि तथ्यों को दावे के रूप में, संतुलन और संवेदनशीलता के साथ प्रस्तुत किया जाए।

नई दिल्ली।
फरवरी 2026 में दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 ने भारत को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के वैश्विक विमर्श के केंद्र में ला खड़ा किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस ऐतिहासिक समिट में एआई को लेकर भारत का स्पष्ट, नैतिक और मानव-केंद्रित विज़न दुनिया के सामने रखा। 22 फरवरी को अपने ‘मन की बात’ कार्यक्रम में भी उन्होंने समिट की उपलब्धियों और इसके वैश्विक प्रभाव का उल्लेख किया।

‘MANAV’ विज़न: एआई गवर्नेंस का भारतीय मॉडल

प्रधानमंत्री मोदी ने एआई गवर्नेंस के लिए MANAV फ्रेमवर्क प्रस्तुत किया, जो तकनीक को मानवता से जोड़ने का भारतीय दृष्टिकोण है—

M – Moral (नैतिक मूल्य)
A – Accountable (जवाबदेही)
N – National Sovereignty (राष्ट्रीय संप्रभुता)
A – Accessible (सभी के लिए सुलभ)
V – Valid (वैध और सुरक्षित)

पीएम ने स्पष्ट किया कि एआई केवल एल्गोरिद्म और डेटा तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि मानव गरिमा, सुरक्षा और सामाजिक न्याय की वाहक बने।

एआई का लोकतंत्रीकरण: ‘ग्लोबल कॉमन गुड’ की अवधारणा
प्रधानमंत्री ने एआई को ‘Global Common Good’ के रूप में विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि तकनीक का लाभ कुछ चुनिंदा विकसित देशों तक सीमित न रहे, बल्कि ग्लोबल साउथ सहित पूरी दुनिया तक पहुंचे। भारत का अनुभव बताता है कि कम लागत, बड़े पैमाने और जनहित के साथ तकनीक कैसे परिवर्तन ला सकती है।

दैनिक जीवन में एआई: भारत के व्यावहारिक उदाहरण
पीएम मोदी ने भारत में एआई के वास्तविक उपयोगों को रेखांकित किया—अमूल के एआई असिस्टेंट द्वारा पशुओं के इलाज और डेयरी संचालन में 24x7 सहायता। किसानों को चौबीसों घंटे मार्गदर्शन देने वाले एआई समाधान। प्राचीन ग्रंथों, पांडुलिपियों और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में एआई की भूमिका, जिससे इतिहास और ज्ञान अगली पीढ़ी तक सुरक्षित पहुंच सके।

समावेशी तकनीक की मिसाल
समिट के दौरान प्रधानमंत्री के भाषण का एआई-पावर्ड रियल-टाइम साइन लैंग्वेज अनुवाद किया गया। यह कदम दिव्यांगजनों के प्रति भारत की तकनीक-आधारित समावेशी सोच का सशक्त उदाहरण बना और वैश्विक मंच पर सराहा गया।

नैतिक और सुरक्षित एआई के लिए तीन वैश्विक सुझाव
प्रधानमंत्री मोदी ने एआई के सुरक्षित और जिम्मेदार उपयोग के लिए तीन अहम सुझाव दिए—
विश्वसनीय वैश्विक डेटा फ्रेमवर्क
पारदर्शी ‘ग्लास बॉक्स’ सुरक्षा नियम
एआई में मानवीय मूल्यों का अनिवार्य समावेश
नई दिल्ली डिक्लेरेशन: वैश्विक सहमति की ऐतिहासिक पहल
समिट के अंतिम दिन 21 फरवरी 2026 को 88 देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने ‘नई दिल्ली डिक्लेरेशन’ को अपनाया। इसके प्रमुख बिंदु रहे—एआई का लोकतंत्रीकरण और समान वैश्विक पहुंच।मानव-केंद्रित एआई, जो मानवीय गरिमा और अधिकारों की रक्षा करे।एआई इम्पैक्ट एक्सपो: नवाचार का भव्य प्रदर्शन .
समिट के साथ आयोजित एआई इम्पैक्ट एक्सपो (70,000 वर्ग मीटर) में भारत की तकनीकी क्षमता का प्रभावशाली प्रदर्शन हुआ .अमूल का एआई समाधान, जिसने वैश्विक नेताओं का ध्यान खींचा।सांस्कृतिक विरासत के डिजिटलीकरण की पहल।जिओ द्वारा विकसित किफायती स्मार्ट ग्लासेस जैसे हार्डवेयर, जो भारतीय जरूरतों के अनुरूप हैं।

भारत का तकनीकी आत्मविश्वास
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत के पास दुनिया की सबसे बड़ी युवा आबादी और मजबूत तकनीकी इकोसिस्टम है। इंडिया एआई मिशन के तहत एआई इंफ्रास्ट्रक्चर, डेटा लैब और स्किल डेवलपमेंट के लिए 10,300 करोड़ रुपये का प्रावधान।
मंत्र: “डिज़ाइन इन इंडिया, डेवलप फॉर द वर्ल्ड”, जिससे भारत एआई के क्षेत्र में केवल उपभोक्ता नहीं, बल्कि वैश्विक नियम-निर्धारक (Rule-maker) बने।

राजनीतिक संदेश
मेरठ में एक जनसभा के दौरान प्रधानमंत्री ने समिट के दौरान हुए विरोध प्रदर्शनों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि कुछ राजनीतिक दल भारत की वैश्विक सफलता को स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं और देश की छवि धूमिल करने का प्रयास कर रहे हैं।
इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 केवल एक तकनीकी सम्मेलन नहीं, बल्कि भारत के बढ़ते वैश्विक नेतृत्व और नैतिक दृष्टि का प्रतीक बनकर उभरा। MANAV विज़न और नई दिल्ली डिक्लेरेशन के माध्यम से भारत ने यह स्पष्ट कर दिया कि भविष्य की एआई मानवता के साथ, मानवता के लिए और मानवता के नेतृत्व में विकसित होगी—यही भारत का संदेश है, और यही देश का बढ़ता हुआ डिजिटल गौरव।

**एआई नहीं, एरोगेंस ऑफ इग्नोरेंस!

गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने ‘मेड इन इंडिया’ को बनाया ‘मेड इन इल्यूजन’**

नई दिल्ली | विशेष रिपोर्ट

जिस मंच से भारत को विश्व को यह संदेश देना था कि वह अब एआई का उपभोक्ता नहीं, निर्माता बन चुका है, उसी मंच को गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने एक ऐसे कृत्य से शर्मसार कर दिया, जिसे भ्रम, अज्ञान और अकादमिक लापरवाही का संयुक्त प्रदर्शन कहना गलत नहीं होगा।

इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026, भारत मंडपम—जहाँ नीति, नवाचार और राष्ट्रीय गौरव का संगम होना था—वहाँ गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने चीनी रोबोट को भारतीय आत्मनिर्भरता का प्रतीक बताकर पेश कर दिया


जब ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ बना ‘सेंटर ऑफ एक्सक्यूज़’

जिस रोबोटिक डॉग को मंच से ‘ओरियन’ कहकर स्वदेशी नवाचार बताया गया, वह असल में चीन की यूनिट्री कंपनी का ‘Unitree Go2’ मॉडल निकला—जो न तो गुप्त है, न दुर्लभ, और न ही शोध का चमत्कार।
विडंबना यह रही कि 2–3 लाख रुपये में ऑनलाइन उपलब्ध इस उत्पाद को यूनिवर्सिटी के प्रतिनिधियों ने कैम्पस में विकसित शोध का नाम दे दिया।


वीडियो ने किया वह काम, जो विवेक नहीं कर सका

यदि सोशल मीडिया पर प्रोफेसर का दावा करता हुआ वीडियो वायरल न हुआ होता, तो शायद यह ‘स्वदेशी झूठ’ सरकारी मंच पर यूँ ही तालियाँ बटोरता रहता।
विडंबना यह है कि जिस विश्वविद्यालय से ज्ञान और सत्यनिष्ठा की अपेक्षा होती है, वहीं से गलत जानकारी आत्मविश्वास के साथ परोसी गई


सरकारी मंच, निजी लापरवाही

सरकार ने स्पष्ट कहा—दूसरे देश की तकनीक को अपनी बताने की अनुमति नहीं दी जा सकती
पर सवाल यह है कि—

  • क्या गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने एक बार भी तकनीकी सत्यापन की ज़रूरत समझी?

  • क्या ‘आत्मनिर्भर भारत’ सिर्फ़ स्टॉल सजाने का नारा बनकर रह गया?


माफी नहीं, जिम्मेदारी चाहिए

घटना के बाद आई माफी और सफाई यह बताने के लिए पर्याप्त है कि—

“प्रतिनिधि को जानकारी नहीं थी, उत्साह में गलत कहा गया।”

लेकिन यह वही उत्साह है, जिसने—

  • राष्ट्रीय मंच की विश्वसनीयता को ठेस पहुँचाई

  • और भारत के एआई प्रयासों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर असहज स्थिति में डाल दिया


गलगोटिया इफेक्ट: मेहनत दूसरों की, श्रेय हमारा?

यह घटना केवल एक विश्वविद्यालय की भूल नहीं, बल्कि उस मानसिकता का उदाहरण है, जहाँ
खरीदी गई मशीन को ‘खोज’ और
ब्रांडिंग को ‘ब्रेकथ्रू’
समझ लिया गया।


एआई समिट में गलगोटिया यूनिवर्सिटी की मौजूदगी नवाचार की नहीं, बल्कि नासमझी की पहचान बन गई।
यदि भारत को सच में एआई महाशक्ति बनना है, तो उसे ऐसे ‘स्वदेशी दिखावे’ से नहीं, बल्कि ईमानदार शोध से आगे बढ़ना होगा।

नई दिल्ली / एजेंसी /
राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने आज (16 फरवरी, 2026) नई दिल्ली में संस्कृति मंत्रालय द्वारा आयोजित अलचिकि लिपि के शताब्दी महोत्सव का उद्घाटन किया।
इस अवसर पर राष्ट्रपति ने कहा कि संताल समुदाय की अपनी भाषा, साहित्य और संस्कृति है। हालांकि, अपनी लिपि के अभाव में संताली भाषा को प्रारंभ में रोमन, देवनागरी, उड़िया और बंगाली लिपियों में लिखा जाता था। नेपाल, भूटान और मॉरीशस में रहने वाले संताल समुदाय के लोग भी वहाँ प्रचलित लिपियों का उपयोग करते थे। ये लिपियां संताली भाषा के मूल शब्दों का सही उच्चारण सही तरीके से नहीं कर पा रही थीं. साल 1925 में पंडित रघुनाथ मुर्मु ने अलचिकि लिपि का आविष्कार किया। तब से यह संताली भाषा के लिए उपयोग में लाई जा रही है। आज यह लिपि विश्वभर में संताल पहचान का सशक्त प्रतीक बन चुकी है और समुदाय में एकता स्थापित करने का प्रभावी माध्यम भी है।
राष्ट्रपति ने कहा कि अलचिकि की शताब्दी समारोह इस लिपि के व्यापक प्रचार-प्रसार का संकल्प लेने का अवसर होना चाहिए। बच्चों को हिंदी, अंग्रेजी, उड़िया, बंगाली या किसी अन्य भाषा में शिक्षा मिल सकती है, लेकिन उन्हें अपनी मातृभाषा संताली भी अलचिकि लिपि में सीखनी चाहिए।

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राष्ट्रपति ने खुशी जाहिर की कि अनेक लेखक अपने साहित्यिक कार्यों से संताली साहित्य को समृद्ध कर रहे हैं। उन्होंने लेखकों को अपने लेखन के माध्यम से समाज में जागरूकता फैलाने की सलाह दी।

https://static.pib.gov.in/WriteReadData/userfiles/image/PRpic416022026D4MF.JPG

राष्ट्रपति ने कहा कि भारत अनेक भाषाओं का उपवन है। भाषा और साहित्य समुदायों के भीतर एकता को बनाए रखने वाले सूत्र हैं। साहित्य के आदान-प्रदान से भाषाएं समृद्ध होती हैं। संताली साहित्य को अन्य भाषाओं के विद्यार्थियों तक अनुवाद और लेखन के माध्यम से पहुंचाने तथा अन्य भाषाओं के साहित्य को संताली में उपलब्ध कराने के प्रयास किए जाने चाहिए।
इस अवसर पर राष्ट्रपति ने अलचिकि लिपि के 100 वर्ष पूरे होने पर स्मारक सिक्का और डाक टिकट जारी किया। साथ ही, संताल समुदाय के 10 विशिष्ट व्यक्तियों को संताली लोगों के बीच अलचिकि लिपि के व्यापक उपयोग को बढ़ावा देने के लिए सम्मानित किया।

14 मिलियन से अधिक डाउनलोड, 10 लाख लोगों ने घर बैठे अपडेट किया मोबाइल नंबर

नई दिल्ली /
भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) द्वारा विकसित नया आधार ऐप देश में डिजिटल पहचान प्रबंधन का एक सशक्त और भरोसेमंद माध्यम बनकर उभरा है। आम नागरिकों के बीच इसे जबरदस्त स्वीकार्यता मिल रही है, जो सुरक्षित, सरल और गोपनीयता-केंद्रित डिजिटल सेवाओं के प्रति बढ़ते विश्वास को दर्शाती है।
यूआईडीएआई के इस नेक्स्ट-जेनरेशन मोबाइल ऐप को अब तक 14 मिलियन (1.4 करोड़) से अधिक बार डाउनलोड किया जा चुका है। 28 जनवरी 2026 को राष्ट्र को समर्पित किए जाने के बाद से यह ऐप औसतन प्रतिदिन एक लाख से अधिक डाउनलोड दर्ज कर रहा है।

घर बैठे आधार सेवाएं, लाखों नागरिकों को राहत
आधार ऐप ने नागरिकों के लिए कई महत्वपूर्ण सेवाओं को पूरी तरह डिजिटल और सुलभ बना दिया है।
अब तक—
10 लाख से अधिक लोगों ने ऐप के माध्यम से अपना मोबाइल नंबर अपडेट किया
3.57 लाख आधार धारकों ने बायोमेट्रिक लॉक/अनलॉक की सुविधा का उपयोग किया
लगभग 8 लाख लोगों ने ई-आधार डाउनलोड किया
यह आंकड़े दर्शाते हैं कि आधार से जुड़ी सेवाएं अब बिना कतार और बिना कार्यालय गए, घर बैठे संभव हो रही हैं।

गोपनीयता और सुरक्षा पर विशेष जोर
यह ऐप डेटा मिनिमाइजेशन, कंसेंट कंट्रोल और सेलेक्टिव डेटा शेयरिंग जैसी आधुनिक अवधारणाओं को बढ़ावा देता है। फेस वेरिफिकेशन के माध्यम से पहचान सत्यापन, सिंगल क्लिक में बायोमेट्रिक प्रबंधन और ऑथेंटिकेशन हिस्ट्री देखने जैसी सुविधाएं इसे और अधिक सुरक्षित बनाती हैं।

QR आधारित वेरिफिकेशन से आसान हुआ दैनिक जीवन
आधार ऐप के जरिए अब—
होटल चेक-इन
अस्पतालों में भर्ती
कार्यक्रमों में प्रवेश
आयु सत्यापन
गिग वर्कर्स एवं सर्विस पार्टनर्स का सत्यापन
जैसे कार्य ऑफलाइन QR कोड वेरिफिकेशन के माध्यम से आसानी से किए जा सकते हैं। इसके लिए UIDAI एक मजबूत ऑफलाइन वेरिफिकेशन इकोसिस्टम भी विकसित कर रहा है, जिससे संस्थाएं पंजीकरण कर इस सुविधा का लाभ उठा सकें।

“वन फैमिली – वन ऐप” की अवधारणा
यह आधार ऐप एक ही मोबाइल डिवाइस पर पांच आधार प्रोफाइल प्रबंधित करने की सुविधा देता है, जिससे पूरे परिवार के लिए एक ही ऐप पर्याप्त हो जाता है। पता अपडेट के साथ-साथ अब पंजीकृत मोबाइल नंबर अपडेट की सुविधा भी इसमें शामिल है। भविष्य में और भी सेवाओं को जोड़ने की योजना है।

डिजिटल भारत की दिशा में मजबूत कदम
आधार ऐप की यह व्यापक स्वीकार्यता सेवा वितरण में सुधार, बेहतर यूजर एक्सपीरियंस और मजबूत डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की दिशा में UIDAI की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। नियमित अपडेट, उन्नत सुरक्षा फीचर्स और सरल इंटरफेस के कारण यह ऐप सभी आयु वर्ग और क्षेत्रों में तेजी से लोकप्रिय हो रहा है।
आधार ऐप आज केवल एक एप्लिकेशन नहीं, बल्कि सुरक्षित और भरोसेमंद डिजिटल पहचान का नया चेहरा बन चुका है।

नई दिल्ली /
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज नई दिल्ली के भारत मंडपम में इंडिया एआई इम्पैक्ट एक्सपो 2026 का उद्घाटन किया।
श्री मोदी ने कहा कि नवोन्मेषकों, शोधकर्ताओं और प्रौद्योगिकी उत्साही लोगों के बीच उपस्थित होना आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, भारतीय प्रतिभा और नवाचार की असाधारण क्षमता को दर्शाता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि एआई के क्षेत्र में भारत की प्रगति न केवल देश के लिए बदलावकारी समाधान तैयार करेगी, बल्कि वैश्विक विकास में भी योगदान देगी।
एक्स पर अपनी पोस्ट में श्री मोदी ने कहा, “भारत मंडपम में इंडिया एआई इम्पैक्ट एक्सपो 2026 का उद्घाटन किया। यहां नवोन्मेषकों, शोधकर्ताओं और तकनीक प्रेमियों के बीच रहकर एआई, भारतीय प्रतिभा और नवाचार की असाधारण क्षमता की झलक मिलती है। हम मिलकर ऐसे समाधान तैयार करेंगे जो केवल भारत के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे विश्व के लिए होंगे!”

नई दिल्ली / एजेंसी /
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के ‘सहकार से समृद्धि’ विज़न को आगे बढ़ाने की दिशा में 17 फरवरी 2026 को गुजरात के गांधीनगर स्थित महात्मा मंदिर में राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के सहकारिता मंत्रियों की उच्चस्तरीय मंथन बैठक आयोजित की जाएगी। बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह करेंगे। इसका उद्देश्य सहकारी क्षेत्र को अधिक सशक्त, पारदर्शी और सदस्य-केंद्रित बनाना है।
बैठक में सभी राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के सहकारिता मंत्री तथा सचिव स्तर के वरिष्ठ अधिकारी भाग लेंगे। इस दौरान सहकारिता मंत्रालय की प्रमुख पहलों की समीक्षा, राज्यों के अनुभवों का आदान-प्रदान और भविष्य की साझा कार्ययोजना पर चर्चा होगी।
मंथन बैठक का प्रमुख फोकस ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करने पर रहेगा। इसके तहत 2 लाख नई बहुउद्देशीय प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों (PACS), डेयरी एवं मत्स्य सहकारी समितियों की स्थापना की प्रगति पर विचार किया जाएगा। साथ ही विश्व की सबसे बड़ी अनाज भंडारण योजना के अंतर्गत आधुनिक गोदामों के विस्तार से किसानों को बेहतर भंडारण और बाज़ार तक सीधी पहुंच देने पर चर्चा होगी।
बैठक में नेशनल कोऑपरेटिव एक्सपोर्ट लिमिटेड (NCEL), नेशनल कोऑपरेटिव ऑर्गेनिक लिमिटेड (NCOL) और भारतीय बीज सहकारी समिति लिमिटेड (BBSSL) जैसी राष्ट्रीय सहकारी संस्थाओं में राज्यों की भागीदारी पर भी विमर्श होगा, जिससे निर्यात, जैविक खेती और बीज आपूर्ति के क्षेत्र में सहकारिता की भूमिका सुदृढ़ हो सके।
इसके अलावा सहकारिता कानूनों में सुधार, 97वें संविधान संशोधन के अनुरूप मॉडल अधिनियम को अपनाने, सहकारी गन्ना मिलों की आर्थिक स्थिति सुधारने, डेयरी क्षेत्र में सस्टेनेबिलिटी, सहकारी बैंकों की मजबूती, सदस्यता विस्तार, डिजिटलीकरण, मानव संसाधन विकास और प्रशिक्षण जैसे विषयों पर भी चर्चा की जाएगी।
यह मंथन बैठक केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर सहकारिता को ग्रामीण समृद्धि, रोजगार और आत्मनिर्भरता का सशक्त माध्यम बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।

20 से अधिक राष्ट्राध्यक्ष, 60 मंत्री और 500 वैश्विक एआई अग्रणी नई दिल्ली में एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के लिए एकत्रित हुए

नई दिल्ली / 
राजधानी नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में आज से इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 का भव्य शुभारंभ हो गया। यह शिखर सम्मेलन इसलिए ऐतिहासिक माना जा रहा है क्योंकि पहली बार कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) पर इस स्तर का वैश्विक सम्मेलन ग्लोबल साउथ में आयोजित किया जा रहा है। सम्मेलन का उद्देश्य समावेशी विकास, मजबूत सार्वजनिक प्रणालियों और सतत प्रगति के लिए एआई की भूमिका को वैश्विक दृष्टिकोण से परिभाषित करना है।
16 से 20 फरवरी 2026 तक चलने वाले इस पांच दिवसीय शिखर सम्मेलन में 20 से अधिक राष्ट्राध्यक्ष और सरकार प्रमुख, 60 से अधिक मंत्री एवं उपमंत्री, तथा 100 से अधिक सरकारी प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। इसके साथ ही, विश्वभर से 500 से अधिक सीईओ, तकनीकी विशेषज्ञ, शिक्षाविद, शोधकर्ता, स्टार्टअप संस्थापक और परोपकारी संगठनों के प्रतिनिधि इस मंच पर एकत्रित हुए हैं।
19 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी शिखर सम्मेलन का उद्घाटन भाषण देंगे। उनका संबोधन वैश्विक सहयोग को सशक्त करने और जिम्मेदार, सुरक्षित एवं समावेशी एआई के लिए भारत के दृष्टिकोण को दिशा देने वाला होगा।
शिखर सम्मेलन का एक प्रमुख आकर्षण तीन वैश्विक प्रभाव चुनौतियाँ — एआई फॉर ऑल, एआई बाय हर और युवाआई हैं। इन पहलों के तहत दुनिया भर से 60 से अधिक देशों के 4,650 से ज्यादा आवेदन प्राप्त हुए, जो एआई नवाचार में भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका को दर्शाता है। बहुस्तरीय मूल्यांकन के बाद 70 शीर्ष टीमों को फाइनलिस्ट के रूप में चुना गया है, जो 16 और 17 फरवरी को भारत मंडपम एवं सुषमा स्वराज भवन में अपने समाधान प्रस्तुत करेंगी।
18 फरवरी को आईआईटी हैदराबाद के सहयोग से आयोजित एआई एवं इसके प्रभाव पर अनुसंधान संगोष्ठी शिखर सम्मेलन का प्रमुख अकादमिक मंच होगा। इसमें एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका से प्राप्त लगभग 250 शोध प्रस्तुतियों पर चर्चा की जाएगी। इस अवसर पर एस्टोनिया के राष्ट्रपति अलार कारिस, केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव तथा राज्य मंत्री जितिन प्रसाद की उपस्थिति प्रस्तावित है।
इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 जन, ग्रह और प्रगति के तीन मूल स्तंभों पर आधारित है और सात विषयगत कार्य समूहों के माध्यम से आर्थिक विकास, सामाजिक सशक्तिकरण, सुरक्षित एवं विश्वसनीय एआई, मानव पूंजी और वैश्विक सहयोग जैसे विषयों पर परिणाम-उन्मुख सिफारिशें प्रस्तुत करेगा। यह शिखर सम्मेलन भारत को वैश्विक एआई सहयोग का प्रमुख केंद्र बनाने और जिम्मेदार नवाचार को जनहित से जोड़ने की दिशा में एक निर्णायक पहल के रूप में देखा जा रहा है।

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