August 12, 2026
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    PANKAJ CHANDRAKAR

    PANKAJ CHANDRAKAR

    बिजनौर /शौर्यपथ/

    बिजनौर जिले के एक गांव मे मंगलवार देर रात एक वृद्ध महिला और उसके 75 वर्षीय नौकर हत्या कर दी गई. दोनों के शव अलग-अलग चारपाई पर मिले हैं. एक वरिष्ठ अधिकारी ने बुधवार को यह जानकारी दी. पुलिस अधीक्षक धर्मवीर सिंह ने बताया कि हल्दौर थाना के अंतर्गत बिलाई गांव में चन्द्रकला (65) और उसके नौकर अमर सिंह के शव मंगलवार देर रात घर के बरामदे में चारपाइयो पर पड़े मिले.

    उन्होंने बताया कि प्रथम दृष्टया लगता है कि गला दबाकर हत्या की गई है, लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने पर ही स्थिति स्पष्ट होगी. सिंह ने बताया कि ग्रामीणों के मुताबिक चन्द्रकला के पति कल्याण सिंह की मौत 14 वर्ष पहले हो गई थी और उनकी कोई संतान नहीं थी।गांव का ही अमर सिंह लगभग 35-40 साल से नौकर के तौर पर उनके घर पर रहता था.

    ग्रामीणों के मुताबिक चन्द्रकला के हिस्से में करीब आठ बीघा जमीन है. सिंह ने बताया कि चन्द्रकला की बहन ने पुलिस को तहरीर देकर आरोप लगाया है कि उनकी बहन की जमीन पर जेठ के बेटों मनोज और लवकुश की नजर थी. उन्होंने दोनों पर हत्या करने की आशंका जताई है. साथ ही उन्होंने बताया कि तहरीर के आधार पर पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर मामले की जांच के लिए तीन टीमें गठित कर दी है.

    रायपुर /शौर्यपथ/

    महिलाओं को मनरेगा कार्यों से जोड़ने के साथ ही स्वरोजगार में भी कर रहीं मदद

    छत्तीसगढ़ में मनरेगा कार्यों में ‘आधी आबादी’ यानि महिलाओं की भूमिका लगातार बढ़ रही है। मनरेगा में अकुशल श्रमिक के रूप में काम करने वालों में करीब 51 प्रतिशत महिलाएं हैं। कार्यस्थल पर काम की नाप-जोख और श्रमिकों के प्रबंधन का काम देखने वाले मेटों में महिला मेटों की भागीदारी 59 प्रतिशत है। मेट के रूप में गांव की महिलाएं कार्यस्थलों पर बदली हुई भूमिका में नजर आ रही हैं। पहले केवल मजदूरी करने तक सीमित रहने वाली महिलाएं अब मेट के तौर पर श्रमिकों के प्रबंधन के साथ ही कार्यस्थल पर गोदी खोदने के लिए चूने से मार्किंग, मजदूरों द्वारा किए गए कार्य को मापकर उसे माप-पुस्तिका में दर्ज करने और श्रमिकों के जॉब-कार्ड को अद्यतन करने जैसे महत्वपूर्ण मैदानी काम कर रही हैं। मनरेगा में वे अर्द्धकुशल श्रमिक के रूप में सेवाएं देती हैं और इसी के अनुरूप उन्हें भुगतान भी प्राप्त होता है।

    महिलाओं को मनरेगा कार्यों से जोड़ने के साथ ही स्वरोजगार में भी कर रहीं मदद

    स्वसहायता समूह की महिलाएं बन रही मनरेगा मेट

    मनरेगा में महिला मेट की नियुक्ति के बाद से कार्यस्थलों में महिलाओं की हिस्सेदारी बढ़ी है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत गठित स्वसहायता समूहों की सक्रिय महिलाओं को मनरेगा में मेट के रूप में नियुक्ति में प्राथमिकता दी जा रही है। प्रदेश में स्वसहायता समूहों की 9646 महिलाएँ मनरेगा मेट के तौर पर अपनी सेवाएं दे रही हैं। गांवों में पहले से ही स्वावलंबन की अलख जगा रही ये महिलाएं बांकी महिलाओं को भी न केवल मनरेगा में रोजगार दिला रही हैं, बल्कि स्वसहायता समूहों के माध्यम से स्वरोजगार शुरू करने में भी सहायता कर रही हैं। उन्हें रोजगारमूलक गतिविधियों से जोड़कर आय के स्थाई साधन तैयार कर रही हैं। महिला मेट कार्यस्थलों में महिलाओं की परेशानियों के निदान का भी विशेष ध्यान रखती हैं। उनकी निगरानी में कार्य करने का मौका पाकर महिलाएं मनरेगा कार्यों से ज्यादा संख्या में जुड़ रही हैं।

    प्रदेश में अभी 46,942 महिला मेट काम कर रहीं

    मनरेगा के प्रभावी क्रियान्वयन और शिक्षित ग्रामीण महिलाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए महिला मेटों की संख्या लगातार बढ़ाई जा रही है। प्रदेश में मनरेगा के अंतर्गत कार्यरत कुल मेटों में से 59 प्रतिशत महिलाएं हैं। प्रदेश में अभी 46 हजार 942 महिला मेट काम कर रही हैं, जबकि पुरूष मेटों की संख्या 32 हजार 927 है। राज्य के 28 जिलों में से 25 जिलों में महिला मेटों की संख्या 50 प्रतिशत से अधिक है। महिला मेटों की भागीदारी बलौदाबाजार-भाटापारा जिले में 82 प्रतिशत, बिलासपुर में 79 प्रतिशत, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही में 77 प्रतिशत, कोरबा में 72 प्रतिशत, बलरामपुर-रामानुजगंज में 70 प्रतिशत, कोरिया एवं महासमुंद में 67-67 प्रतिशत, रायगढ़ में 63 प्रतिशत, रायपुर में 61 प्रतिशत और मुंगेली में 60 प्रतिशत है। सरगुजा और बीजापुर में कार्यरत कुल मेटों में से 59-59 प्रतिशत महिलाएं हैं। राजनांदगांव में 58 प्रतिशत, बस्तर, जांजगीर-चाम्पा, सूरजपुर और बालोद में 57-57 प्रतिशत, बेमेतरा और कांकेर में 56-56 प्रतिशत, दुर्ग में 53 प्रतिशत, धमतरी और जशपुर में 52 प्रतिशत, कोण्डागांव, गरियाबंद व नारायणपुर में 51 प्रतिशत, सुकमा में 47 प्रतिशत, कबीरधाम में 44 प्रतिशत तथा दंतेवाड़ा में 41 प्रतिशत मेट महिलाएं हैं।

    50 प्रतिशत से अधिक रोजगार सृजन महिलाओं द्वारा ही

    चालू वित्तीय वर्ष 2021-22 में मनरेगा के अंतर्गत रोजगार प्राप्त श्रमिकों में महिला श्रमिकों की हिस्सेदारी करीब 51 प्रतिशत है। इस साल अब तक 52 लाख 47 हजार श्रमिकों को रोजगार उपलब्ध कराया गया है, जिनमें 26 लाख 64 हजार महिला श्रमिक हैं। इस वर्ष फरवरी माह तक सृजित कुल 14 करोड़ 21 लाख 53 हजार 765 मानव दिवस में से 7 करोड़ 18 लाख 71 हजार मानव दिवस रोजगार इन महिलाओं द्वारा सृजित हैं, जो कि कुल सृजित मानव दिवस का 51 प्रतिशत है। पिछले वित्तीय वर्ष 2020-21 में भी मनरेगा के तहत रोजगार प्राप्त श्रमिकों में महिलाओं की भागीदारी 50 प्रतिशत से अधिक थी। इस दौरान आधे से अधिक मानव दिवस रोजगार का सृजन महिलाओं द्वारा ही किया गया था।

    रायपुर /शौर्यपथ/

    स्कूली शिक्षा के दौरान ही मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग दी जाए

    छत्तीसगढ़ पुलिस और यूनिसेफ के संयुक्त तत्वाधान में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर लैंगिक समानता एवं महिला सशक्तिकरण विषय पर दो दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ आज राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. किरणमयी नायक, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक हिमांशु गुप्ता एवं यूनिसेफ के छत्तीसगढ़ प्रमुख जोव जकारियाह के मुख्य आतिथ्य में स्थानीय होटल के सभागार में किया गया।

    स्कूली शिक्षा के दौरान ही मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग दी जाए

    इस अवसर पर छत्तीसगढ़ पुलिस द्वारा पिछले एक वर्ष से महिला और बच्चों की सुरक्षा एवं संरक्षण विषय पर संचालित जागरुकता कार्यक्रम के अन्तर्गत वर्षभर चलाये गए अभिव्यक्ति अभियान को संकलित करते हुये एक डोजियर का विमोचन अतिथियों द्वारा किया गया।

    कार्यक्रम की मुख्य अतिथि डॉ.किरणमयी नायक ने अपने सम्बोधन में कहा कि सभी लोगों को लैंगिक भेदभाव को दूर करने की शुरूआत अपने घरों से ही प्रारंभ करने की आवश्यकता है, ताकि बच्चों को कभी लैंगिक भेदभाव महसूस न हो। उन्होंने कहा कि महिला दिवस केवल महिलाओं के लिये नहीं है, महिला को सशक्त एवं जागरूक करने के लिए पुरूषों की भागीदारी आवश्यक है। उन्होंने यह भी कहा कि लड़कियों को स्कूली शिक्षा के दौरान मार्शल आर्ट ट्रेनिंग दी जानी चाहिये, ताकि आगे चलकर वे अपनी सुरक्षा स्वयं कर सके। उन्होंने आशा व्यक्त किया कि कार्यशाला के दौरान महिलाओं की सुरक्षा एवं सशक्तिकरण के लिए और अच्छे सुझाव प्राप्त होंगे।

    अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक  हिमांशु गुप्ता ने अपने सम्बोधन में कहा कि अभिव्यक्ति कार्यक्रम का आयोजन हमें एक नई दिशा प्रदान करेगी, जिससे समाज में महिलाएं और अधिक मजबूत होगी। यूनिसेफ के राज्य प्रमुख  जकारियाह ने महिलाओं को सशक्त एवं जागरूक करने हेतु विभिन्न उपायों पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम में पूर्व महानिदेशक  आर.के.विज ने भी अपने विचार व्यक्त किए। उप पुलिस महानिरीक्षक  हिमानी खन्ना द्वारा पूरे वर्षभर चलाए गए अभिव्यक्ति कार्यक्रम की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि छत्तीसगढ़ राज्य में 3.5 लाख से अधिक महिलाओं और बच्चों को जागरूक करने में सफलता प्राप्त हुई है। साथ ही छत्तीसगढ़ पुलिस द्वारा प्रारंभ किए गए अभिव्यक्ति महिला सुरक्षा एप में 10 हजार से अधिक महिलाएं एवं युवतियों ने इसका लाभ प्राप्त किया है। अभिव्यक्ति कार्यक्रम की आगामी रूपरेखा तैयार करने के लिए देश एवं प्रदेश भर के प्रतिष्ठित ख्याती प्राप्त विशेषज्ञों को विशेष रूप से इस कार्यशाला में आमंत्रित किया गया है। कार्यशाला में अपने विचार रखने के लिए बुद्धिजीवी वर्ग, महिलाओं, युवतियों एवं कॉलेज एवं स्कूलों के प्रोफेसर्स, शिक्षक तथा गैर सरकारी संस्थाओं के प्रतिनिधियों को भी आमंत्रित किया गया है।

    कार्यक्रम का संचालन सहायक पुलिस महानिरीक्षक डॉ.संगीता पिटर्स ने किया। इस कार्यक्रम में सहायक पुलिस महानिरीक्षक  मिलेना कुर्रे, पूजा अग्रवाल तथा सभी जिलों से आए राजपत्रित पुलिस अधिकारियों ने भाग लिया। इस अवसर पर पुलिस विभाग के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।

    रायपुर /शौर्यपथ/

    परम्परागत संसाधनों का मोल समझ रही नयी पीढ़ी

    धान का कटोरा कहे जाने वाले छत्तीसगढ़ में ढेकी से चावल निकालने की परम्परा रही है। पहले गांव के हर घर में ढेकी होती थी। ढेकी का कुटा हुआ चावल बहुत स्वादिष्ट और पौष्टिक होता है, इसलिए महानगरों में आज भी ढेकी चावल की अच्छी खासी मांग है। इसे देखते हुए दंतेवाड़ा जिले में ढेकी से महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की अभिनव पहल की गई है।

    संसाधनों का मोल समझ रही नयी पीढ़ी

    राज्य सरकार द्वारा ग्राम पंचायत कटेकल्याण में ढेकी चावल निर्माण इकाई का 2022 में शुभारंभ किया गया है। इसमें महिला स्व-सहायता समूहो की 15 दीदीयां काम कर रही हैं। यहा ढेकी में उपयोग किए जा रहे धान पास के ही गावों से लाए जाते है, जिससे लगभग 100 से भी अधिक महिलाएं अप्रत्यक्ष रूप से लाभान्वित हो रही हैं। इसके अलावा 90 से भी अधिक ढेकी बनकर तैयार हैं, जिससे और भी लोगों को रोजगार मिलेगा। ढेकी राईस को डैनेक्स यानी दंतेवाड़ा नेक्सट के ब्रांड के साथ बाजार में उतारा जा रहा है, जो कि दन्तेवाड़ा जिले का अपना ब्राण्ड है।
    दन्तेवाड़ा में किसान खेती में जैविक खाद का उपयोग कर रहे हैं। उनके द्वारा खेतों में रासायनिक खाद एवं दवाइयों का प्रयोग नहीं करने से उत्पादित चावल पूरी तरह स्वास्थप्रद और केमिकल फ्री होते हैं। ढेकी चावल तैयार करने के लिए जैविक रूप से उत्पादित देशज प्रजातियों का उपयोग किया जाता है। कुटाई के बाद चावल की सफाई और पैंकिंग का कार्य भी महिलाओं को दिया गया है।

    उल्लेखनीय है कि ढेकी एक पुरानी शैली की चावल मिल है। यह कठोर लकड़ी की बनी होती है। जिसे एक ओर पैर से दबाया जाता है और दूसरी ओर लोहे की एक मूसल लगी होती है। मूसल से ओखलीनुमा लकड़ी पर भरे गए धान की कुटाई होती है। जब धान में भार के कारण बल पड़ता है तो सुनहरी भूसी चावल से अलग हो जाती है।

    रायपुर /शौर्यपथ/

    महिलाएं तैयार कर रहीं हर्बल गुलाल

    रंगों के पर्व होली में खुशियां बिखरने गुलाल का विशेष महत्व है। बाजार में जो गुलाल उपलब्ध होते हैं, उनमें रसायनों की मिलावट के कारण त्वचा पर दुष्प्रभाव पड़ता है। इसे देखते हुए छत्तीसगढ़ में कई महिला स्व-सहायता समूह केमिकल रहित हर्बल गुलाल तैयार कर रही हैं। सुकमा जिले में भी महिलाओं ने इस साल हर्बल गुलाल से होली खुशनुमा बनाने की तैयारी कर ली है। पंचायत के माध्यम से ग्राम नागारास के कोट्टीगुड़ा के मुस्कान समूह की दीदीयों को हर्बल गुलाल बनाने का प्रशिक्षण दिया गया है। इससे जिलेवासियों को रसायन रहित रंग उपलब्ध होने के साथ महिलाओं के लिए आय का नया रास्ता खुला है।

    समूह कीे दीदीयों ने बताया कि वे पहले रोजगार की तलाश में दूसरे राज्य जाती थीं। पंचायत विभाग की मदद से पहली बार घर पर रहकर वे हर्बल गुलाल बना रही हैं। उन्होंने गुलाल बनाने के लिए मक्के का आटा और प्राकृतिक खाने वाले रंगों का इस्तेमाल किया है। गुलाल में खुशबु के लिए वे सुगंधित बॉडी पाउडर और बादाम के तेल का उपयोग करती हैं। उनके द्वारा निर्मित गुलाल से स्वास्थ्य पर कोई दुष्प्रभाव नहीं पड़ता। इसे बड़ों के साथ साथ बच्चे भी निश्चिन्त होकर प्रयोग में ला सकते है। इस गुलाल से जलन और त्वचा पर खुजली की परेशानी भी नहीं होती। उन्होंने बताया कि पहली बार होने के कारण कम मात्रा में गुलाल बना रहें है, मांग बढ़ने के अनुसार उत्पादन में भी वृद्धि करेंगे।

    ग्रामीण आजिविका मिशन के जिला कार्यक्रम समन्वयक श्री महेन्द्र चौहान ने बताया कि मुस्कान समूह को पंखुड़ी संस्था के माध्यम से गुलाल बनाने से लेकर विक्रय तक का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। वेे लाल, हरा, पीला, नीला और गुलाबी रंगों के 2 क्विंटल गुलाल बना रहीं हैं। गुलाल को स्थानीय बाजार के साथ ही शबरी मार्ट में मात्र 30 रुपए में विक्रय किया जाएगा।

    रायपुर /शौर्यपथ/

    प्रदेश की दो टीकाकरण कर्मी हुईं सम्मानित

    कोविड-19 टीकाकरण के अंतर्गत प्रदेश में सर्वाधिक टीके लगाने वाली दो महिला टीकाकरण कर्मियों को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा सम्मानित किया गया है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री मनसुख मंडाविया ने आज अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर नई दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में कबीरधाम की टीकाकरण कर्मी पिंकी खरे और रायगढ़ की प्रमिला देवांगन को स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया।

    प्रदेश की दो टीकाकरण कर्मी हुईं सम्मानित

    कबीरधाम जिले के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पोड़ी की टीकाकरण कर्मी पिंकी खरे ने कोरोना टीकाकरण अभियान के दौरान 425 सत्रों में अकेले 70 हजार 333 टीके लगाए हैं। वहीं रायगढ़ के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र किरोड़ीमल नगर की प्रमिला देवांगन ने 402 सत्रों में अकेले 45 हजार 463 टीके लगाए हैं। कोविन एप्लीकेशन में दर्ज टीकाकरण डॉटा के मूल्यांकन के आधार पर केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा प्रदेश की इन दोनों टीकाकरण कर्मियों का चयन किया गया है।

    रायपुर /शौर्यपथ/

    नगरीय प्रशासन, विकास एवं श्रम मंत्री डॉ. शिव कुमार डहरिया ने आज आरंग विकासखण्ड के अंतर्गत ग्राम पंचायत कुहेरा में मुख्यमंत्री सुगम सड़क योजना अंतर्गत मुख्य सड़क से शासकीय प्राथमिक शाला एवं पंचायत भवन तक सड़क निर्माण का भूमिपूजन किया। यह सड़क 17 लाख 31 हजार रूपए की लागत से बनाई जाएगी। इस सड़क निर्माण के लिए मंत्री डॉ. डहरिया ने अनुशंसा की। ग्राम कुहेरा में सड़क के भूमिपूजन के अवसर पर कोमल साहू, माखन कुर्रे, शुभांषु साहू सहित क्षेत्र के विभिन्न पंचायतों के प्रतिनिधि एवं ग्रामवासी मौजूद थे। ग्रामवासियों ने सड़क निर्माण कार्य प्रारंभ होने पर मंत्री डॉ. शिवकुमार डहरिया के प्रति आभार व्यक्त करते हुए खुशी जाहिर की है।

    वरकला /शौर्यपथ/

    वरकला के दलवापुरम में एक मकान में आग लगने से एक शिशु सहित पांच लोगों की जलकर मौत हो गई. पुलिस ने बताया कि ऐसा प्रतीत होता है कि आग दुर्घटनावश लग गई थी. इलेक्ट्रिक और फोरेंसिक विशेषज्ञों की रिपोर्ट मिलने के बाद ही आग लगने के उचित कारण का पता चल पाएगा. दो मंजिला मकान के अलग-अलग कमरों में शव बरामद हुए हैं. परिवार के एक अन्य सदस्य को नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, उसकी हालत गंभीर है. स्थानीय लोगों के अनुसार, तड़के उन्होंने घर के सामने से आग की लपटें और धुआं निकलता देखा. उन्होंने परिवारवालों को आवाजें दीं, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला.

    मौके पर पहुंचे दमकल कर्मी घर के पीछे का दरवाजा खोलकर अंदर गए. रेंज महानिदेशक आर निशांतिनी ने घर का निरीक्षण किया. उन्होंने बताया कि भूतल और ऊपर के कमरे पूरी तरह जलकर खाक हो गए है.

    उन्होंने पत्रकारों से कहा, ‘‘ प्रथम दृष्टया, कुछ भी संदिग्ध नहीं मिला है. इलेक्ट्रिक और फोरेंसिक विशेषज्ञ मौके पर पहुंचे हैं और उनकी अंतिम रिपोर्ट मिलने के बाद ही हम कुछ कह पाएंगे. सीसीटीवी कैमरे के फुटेज के अनुसार, आग देर रात करीब सवा बजे लगी थी. स्थानीय लोगों ने बताया कि कार खड़ी करने के स्थान से आग और धुंआ निकलता दिखा था.'
    दमकल विभाग के सूत्रों ने बताया कि शॉर्ट सर्किट आग लगने का कारण हो सकता है, जबकि वातानुकूलित कमरे, उचित वेंटिलेशन की कमी और ‘जिप्सम' से बनी छत के कारण आग अधिक फैल गई. ऐसा हो सकता है कि परिवार के सदस्यों की मौत दम घुटने से हुई हो. शवों को पोस्टमार्टम के लिए तिरुवनंतपुरम मेडिकल कॉलेज भेजा गया है और मामले की जांच जारी है.

    रायपुर /शौर्यपथ/

    विधानसभा अध्यक्ष डॉ. चरण दास महंत की अध्यक्षता में आज यहां विधानसभा के मुख्य समिति कक्ष में कार्यमंत्रणा समिति की बैठक आयोजित की गई।
    कार्य मन्त्रणा समिति की बैठक

    मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक, संसदीय कार्य मंत्री रविन्द्र चौबे सहित समिति के सदस्यगण बैठक में उपस्थित थे।

     

    रायपुर /शौर्यपथ/

    अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर प्रदेश की महिलाओं को दी बड़ी सौगात

    मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर प्रदेश की महिलाओं को बड़ी सौगात दी है। उन्होंने आज राजधानी रायपुर के बीटीआई ग्राउंड में आयोजित राज्य स्तरीय महिला सम्मेलन में सुरक्षित मातृत्व के लिए पांच हितग्राहियों को 05-05 हजार रूपए के चेक प्रदान कर कौशल्या मातृत्व योजना का शुभारंभ किया। इस योजना के तहत द्वितीय पुत्री के जन्म पर महिला हितग्राहियों को एक मुश्त 5 हजार रुपए की सहायता राशि दिए जाने का प्रावधान है। योजना से बच्चियों के लालन-पोषण और शिक्षा में मदद मिलेगी।

    अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर प्रदेश की महिलाओं को दी बड़ी सौगात

    मुख्यमंत्री बघेल ने प्रदेश की सभी बहन-बेटियों और माताओं को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की बधाई और शुभकामनाएं देते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ की संस्कृति में हमेशा महिलाओं का ऊंचा स्थान रहा है। यहां समाज में महिलाओं की स्थिति बेहतर होने के बावजूद आर्थिक भागीदारी के मामले में वें पुरूषों से पीछे रह गई थी। छत्तीसगढ़ में माता-बहनों ने योग्यता, क्षमता और आगे बढ़ने के जज्बें की कमी नहीं है। हमने संकल्प के साथ महिलाओं को अधिकार और न्याय दिलाने का जो काम किया है वह सब के सामने है। महिलाओं की यह ताकत महिला मड़ई में देखी जा सकती है। आज महिलाएं गौठानों में गोबर से वर्मी कम्पोस्ट सहित विभिन्न सामग्रियां तैयार कर रही है। बड़े उद्योगपतियों के समान अब छत्तीसगढ़ की महिलाएं गोबर से पेंट, बिजली भी तैयार करेंगी। बिजली उत्पादन के साथ बिजली बेचने का काम कर महिलाएं पैसे भी कमाएंगी। छत्तीसगढ़ में रूरल इंडस्ट्रियल पार्क के रूप में गौठान विकसित हो रहे है, जिसमें सभी बहन-बेटियों को काम दिया जा रहा है। बघेल ने कहा कि राज्य सरकार ने तीजा-पोरा के अवसर पर स्व-सहायता समूहों का 13 करोड़ रूपए का ऋण भी माफ कर दिया है और महिलाकोष से उनकी लोन लेने की सीमा दोगुनी कर दी है।

    अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर प्रदेश की महिलाओं को दी बड़ी सौगात

    मुख्यमंत्री बघेल ने राज्य स्तरीय महिला सम्मेलन में आंगनबाड़ी सेवाओं में उत्कृष्ट कार्य करने वाली आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, छत्तीसगढ़ महिला कोष योजनाओं से लाभ लेकर महिलाओं को आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनाने वाले स्व-सहायता समूहों को सम्मानित किया। इसी प्रकार उन्होंने सखी वन स्टॉप सेंटर और नवा बिहान योजना के तहत महिला संरक्षण की दिशा में उत्कृष्ट कार्य करने वाली अधिकारियों को भी सम्मानित किया। उन्होंने इस मौके पर कन्या विवाह योजना कॉफी टेबल बुक, सखी वन स्टॉप सेंटर टेलीफोन डायरेक्ट्री और महिला सशक्तीकरण से संबंधित योजनाओं के ब्रोशर का भी विमोचन किया।

    अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर प्रदेश की महिलाओं को दी बड़ी सौगात

    मुख्यमंत्री श्री बघेल ने अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर बीटीआई ग्राउंड में आयोजित चार दिवसीय राज्य स्तरीय महिला मड़ई में प्रदेशभर से आई महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा तैयार उत्पादों की प्रदर्शनी के स्टालों का भी अवलोकन किया। बस्तर के महिला समूहों के स्टॉल से मुख्यमंत्री ने बेलमेटल से निर्मित कला कृति खरीदी और तुरही बजा कर महिलाओं के उत्साह को दोगुना कर दिया।

    कार्यक्रम में महिला बाल विकास मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा शुरू की गई कौशल्या मातृत्व योजना बेटियों की पढ़ाई-लिखाई की व्यवस्था के साथ उनके पोषण में सहायक साबित होगी। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में महिला समूहों के माध्यम से बड़ी संख्या में महिलाएं आगे आ रही हैं। आज महिला समूहों के माध्यम से छत्तीसगढ़ का नाम देश-विदेश में हो रहा है। इन समूहों को अपने समानों के प्रदर्शन के साथ बिक्री का अवसर महिला मड़ई में दिया गया है। इससेे अनुभवों का आदान-प्रदान होने के साथ उनके उत्पादों के लिए बेहतर बाजार मिलेगा। उन्होंने प्रदेश में नशा-मुक्ति के लिए महिलाओं का आहवान करते हुए उन्हें बेहतर समाज के निर्माण और परम्पराओं के संरक्षण के लिए प्रेरित किया।
    इस अवसर पर नगरीय प्रशासन मंत्री डॉ. शिव कुमार डहरिया, राज्यसभा सांसद छाया वर्मा, छत्तीसगढ़ बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष श्रीमती तेजकुंवर नेताम, विधायकगण अनिता योगेन्द्र शर्मा, शकुंतला साहू, संगीता सिन्हा, लक्ष्मी ध्रुव, जिला पंचायत रायपुर की अध्यक्ष डोमेश्वरी साहू सहित नगरीय एवं पंचायती राज संस्थाओं के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में महिलाएं उपस्थित थीं।

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