August 12, 2026
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    PANKAJ CHANDRAKAR

    PANKAJ CHANDRAKAR

    क्रिकेट /शौर्यपथ/

    ऑस्ट्रेलिया के महान स्पिनर शेन वॉर्न के असामयिक निधन पर समूचा क्रिकेट जगह गमगीन है और दुनिया भर से ट्विटर पर मौजूदा और पूर्व खिलाड़ियों ने उन्हें सोशल मीडिया पर श्रृद्धांजलि दी है.

    सचिन तेंदुलकर: स्तब्ध. तुम्हारी कमी खलेगी वॉर्नी. मैदान से भीतर या बाहर तुम्हारे साथ कोई पल उबाऊ नहीं होता था. मैदान के भीतर हमारी प्रतिद्वंद्विता और बाहर हंसी मजाक को हमेशा याद करूंगा. भारत के लिये तुम्हारे मन में खास जगह थी और भारतीयों के मन में तुम्हारे लिये. बहुत जल्दी चले गए.

    विराट कोहली: जीवन कितना अप्रत्याशित और अस्थिर है. एक ऐसे महान खिलाड़ी जिन्हें मैं मैदान से बाहर भी जानता था, उनके जाने पर विश्वास नहीं कर पा रहा हूं. क्रिकेट की गेंद को टर्न कराने वाले सबसे महान खिलाड़ी #जीओएटी (ग्रेटेस्ट आफ आल टाइम)

    युवराज सिंह: विश्व क्रिकेट के लिये दुखद दिन. पहले रॉडनी मार्श और अब शेन वॉर्न. दिल टूट गया है. वॉर्न के साथ खेलने की सुखद यादें हैं. वह स्पिन के जादूगर थे और क्रिकेट के लीजैंड. समय से पहले चले गए. उनकी कमी बहुत खलेगी. उनके परिवार को मेरी संवेदनायें.

    वी वी एस लक्ष्मण: बिल्कुल अविश्वसनीय. मेरे पास शब्द नहीं है. लीजैंड और महानतम खिलाड़ियों में से एक. इतनी जल्दी चले गए. उनके परिवार और दोस्तों को संवेदना.

    गौतम गंभीर: कुदरती प्रतिभा के साथ उनके जैसे तेवर बिरलों में ही होते हैं. शेन वॉर्न ने गेंदबाजी को जादू जैसा बना दिया. आरआईपी.

    हरभजन सिंह: विश्वास नहीं होता कि शेन वॉर्न नहीं रहे. ईश्वर आपकी आत्मा को शांति दे मेरे हीरो. इस पर विश्वास करने का मन नहीं करता. पूरी तरह से टूट चुका हूं.
    केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी: काश यह खबर सच नहीं हो. एक लीजैंड और महान क्रिकेटर. यादों के लिये, खेल के लिये धन्यवाद शेन वॉर्न. आरआईपी.

    वीरेंद्र सहवाग: स्पिन को ‘कूल ' बनाने वाले दुनिया के महानतम स्पिनरों में से एक शेन वॉर्न नहीं रहे. जीवन बहुत नाजुक है लेकिन इस पर भरोसा करना मुश्किल है. उनके परिवार, दोस्तों और प्रशंसकों को मेरी संवेदनायें.

    इरफान पठान: शेन वॉर्न दर्शकों के पसंदीदा थे. स्पिन के जादूगर. ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट के लीजैंड. आईपीएल जीतने वाले पहले कप्तान. उनकी कमी खलेगी.

    ब्रेंडन मैकुलम: नहीं नहीं. दिल टूट गया है. अभी से ‘द किंग' की कमी खलने लगी.

    एडम गिलक्रिस्ट: (टूटे हुए दिन की इमोजी, कोई शब्द नहीं)

    भारतीय हाकी खिलाड़ी पी आर श्रीजेश: हमारे बचपन को खास बनाने वाला नहीं रहा. आरआईपी लीजैंड.

    भारतीय फुटबॉल कप्तान सुनील छेत्री: शेन वॉर्न के निधन की खबर से स्तब्ध हूं. उनके खेल को देखकर और प्रेरणा लेकर बड़े हुए. अपूरणीय क्षति.

    शोएब अख्तर: इस कमी से उबरने में काफी समय लगेगा. महान शेन वॉर्न अब हमारे बीच नहीं रहे.

    बाबर आजम: इस पर विश्वास करना मुश्किल है. क्रिकेट जगत के लिये अपूरणीय क्षति. अपनी जादुई लेग स्पिन से उन्होंने पीढियों को प्रेरित किया. आपकी कमी हमेशा खलेगी शेन वॉर्न. उनके परिवार,दोस्तों और प्रशंसकों को मेरी संवेदनायें.

    शिल्पा शेट्टी (अभिनेत्री और राजस्थान रॉयल्स की पूर्व सह मालिक): लीजैंड हमेशा जीवित रहते हैं.

    शाहिद अफरीदी: क्रिकेट ने लेग स्पिन गेंदबाजी की यूनिवर्सिटी को खो दिया. अपने कैरियर की शुरूआत से मैं उनकी गेंदबाजी का कायल था और उनके खिलाफ खेलना हमेशा खास रहा. उनके परिवार को मेरी संवेदनायें.

     

    रायपुर /शौर्यपथ/

    मुख्यमंत्री भूपेश बघेल उत्तर प्रदेश के पांच दिवसीय प्रवास के बाद आज शाम 5:30 हेलीकॉप्टर द्वारा पुलिस लाईन हेलीपेड रायपुर लौटेंगे। बघेल इसके पहले उत्तरप्रदेश के सोनभद्र जिले से हेलीकॉप्टर द्वारा शाम 4.30 बजे छत्तीसगढ़ के जिला मुख्यालय बलरामपुर पहुंचेंगे और वहां से रायपुर आएंगे

    इंस्पायरिंग /शौर्यपथ/

    आमतौर पर लोग सक्सेस को एक सीधी रेखा समझते हैं। लेकिन असल में ये यहां-वहां भटकती है और जैसे-तैसे आप उसे हासिल करते हैं। सभी का अपना सफर है, सभी के पास कहने के लिए एक कहानी है। सब के अपने चैलेंज होते हैं। मैं कभी खुद को किसी से कम खुशकिस्मत नहीं समझता। इसका मतलब यह नहीं है कि मैं उनके किए को कम आंक रहा हूं। मैं सोचता हूं वो वहां हैं क्योंकि उन्होंने कड़ी मेहनत की है, अच्छे फैसले लिए हैं।

    कई बार अवसरों का इंतजार बहुत लंबा हो जाता है। सही मौके के इंतजार में खुद को झोंकते रहना पड़ता है। अपनी स्किल्स को निखारते रहना पड़ता है। जब तक सफल नहीं होते, तब तक हर पल का उपयोग आपको करना है। एक बार आप सफल हो गए तो आपको फुरसत नहीं मिलने वाली। आप अपने काम में ऐसे व्यस्त होंगे कि इस ओर ध्यान ही नहीं जाएगा। फिर आपको अपनी स्किल्स पर काम करने के लिए बेहद कम समय मिलेगा।सफल होते ही आप देख पाते हैं कि आपके इर्द-गिर्द लोग किस तरह का काम कर रहे हैं, क्या अच्छा कर रहे हैं। आप उनकी सराहना करना सीखते हैं। जीवन में विनम्र होना बेहद जरूरी है। खुद को गंभीरता से न लेना अहम है। आप एंजॉय करें, ये महत्वपूर्ण है। आपको अपने काम में मजा आना चाहिए। अगर मजा आता रहेगा तो सफलता-असफलता से कोई फर्क नहीं पड़ने वाला, आप अच्छा काम करते रहेंगे।मैं मानता हूं कि अच्छी बातें आपके साथ तभी होंगी जब आप उनके लिए तैयार होंगे। मैं मानता हूं अगर सफलता मेरे जीवन में पहले आई होती तो मैं वो इंसान कभी नहीं होता, जो आज हूं। मुझे मेरा यह रूप पसंद है, जो आज है।

    सफलता के उदाहरण अगर आपके आस-पास हैं तो उन्हें गौर से देखिए। अपने सफर को आप आसान बना लेंगे। जब मैं फिल्मी दुनिया में आया तो मेरे पास कोई उदाहरण नहीं था। मैं खुद की क्षमताओं को जानते हुए भी मन मुताबिक कर नहीं पाता था, क्योंकि कैसे करना है, ये बताने वाला नहीं था।कई बार आपको अपने सपने असंभव भी लगेंगे, लेकिन सपने सच हो सकते हैं। जब आप खूब मेहनत करते हैं, एक लंबा सफर तय करते हैं, तो एक अलग ही इंसान बन जाते हैं। मैं लंबे सफर में ही भरोसा रखता हूं क्योंकि इससे मुझे ज्यादा सीखने का मौका मिल जाता है।(ये बातें विभिन्न सोशल मीडिया मंचों से)

    कोई और नहीं, आप ही खुद को खु़श रख सकते हैं

    - आप कहां पैदा हुए, कैसे बड़े हुए मायने नहीं रखता... मायने रखता है आप किस मिट्टी के बने हैं।

    - आपको खुद के बारे में अच्छा महसूस करने के लिए इस धरती पर किसी और इंसान की जरूरत नहीं, खुद से खुश रहना सीखिए।

    - जमाना आपको किसी और के जैसा बनाने की कोशिश करेगा, लेकिन आपको खुद को बचाए रखना है।

    - जब हम अपनी असुरक्षाओं को छोड़ आस्था के साथ आगे बढ़ते हैं तब असली सफर शुरू होता है।

    रायपुर /शौर्यपथ/

    छत्तीसगढ़ होटल मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट के 31 विद्यार्थियों का प्लेसमेंट पांच सितारा होटलों में हुआ है। वर्षों से बंद रहने के बाद मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की विशेष पहल पर पिछले वर्ष इंस्टीट्यूट को दोबारा प्रारम्भ किया गया है। एक ही वर्ष में इस इंस्टीट्यूट ने सफलता के नए सोपान तय किये हैं।

    इंस्टीट्यूट में बीएससी होटल मैनेजमेंट और डिप्लोमा होटल मैनेजमेंट सहित कुल 116 विद्यार्थी पढ़ाई कर रहे हैं। इंस्टीट्यूट की सफलता इसी बात से आंकी जा सकती है कि पांच सितारा होटल मैरिएट ने 12 एवं होटल सयाजी ने 19 इस प्रकार कुल 31 विद्यार्थियों को नौकरी का प्रस्ताव दिया है। इंस्टीट्यूट की प्राचार्या रेखा शुक्ला ने बताया कि इंस्टीट्यूट की बातचीत अन्य अनेक होटलों के साथ चल रही है। इन होटलों ने भी इंस्टीट्यूट के विद्यार्थियों नौकरी देने की पेशकश की है। मेफेयर होटल लगातार इंस्टीट्यूट के विद्यार्थियों को अपने होटल में इंटर्नशिप के लिए बुलाता रहता है।

    छत्तीसगढ़ का होटल मैनेजमेंट युवाओं को रोजगार के नए अवसर उप्लब्ध कराने में नित नई सफलताएं अर्जित कर रहा है।

    रायपुर /शौर्यपथ/

    सुपोषण अभियान को मिली बड़ी सफलता

    छत्तीसगढ़ में चलाए जा रहे मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान को बड़ी सफलता मिल रही है। प्रदेश में महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा वर्ष 2016 से 2022 तक आयोजित वजन त्यौहार के आंकड़ों के अनुसार कुपोषण की दर में लगातार कमी आई है। इसके चलते बच्चों कुपोषण की दर 30.13 प्रतिशत से घटकर अब मात्र 19.86 प्रतिशत रह गई है। राज्य में कुपोषण दर में लगभग 10.27 प्रतिशत की कमी एक उल्लेखनीय उपलब्धि है। छत्तीसगढ़ में 2 अक्टूबर 2019 से शुरू हुए मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान के चलते एक लाख 70 हजार बच्चे कुपोषण मुक्त हुए हैं।

    उल्लेखनीय है कि महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा वजन त्यौहार के द्वारा अवधि विशेष में सभी बच्चों का वजन लिया जाकर पोषण स्तर ज्ञात किया जाता है। विभाग द्वारा जुलाई 2021 में लगभग 22 लाख बच्चों का 10 दिन के भीतर वजन लिया गया और कुपोषण के परिणाम निकाले गये। राज्य शासन द्वारा वजन त्यौहार के आंकड़ों का सत्यापन बाह्य एजेंसियों द्वारा भी कराए जाने की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है।

    राष्ट्रीय सर्वे एजेंसी नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-5 के आंकड़ों के अनुसार भी छत्तीसगढ़ में कुपोषण की दर में कमी आई है। कुपोषण का राष्ट्रीय औसत 32.1 प्रतिशत् है, जबकि छत्तीसगढ़ में कुपोषण 31.3 प्रतिशत् है। इस प्रकार छत्तीसगढ़ में कुपोषण राष्ट्रीय औसत से भी कम है। गौरतलब है कि राष्ट्रीय सर्वे एजेंसी नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-4 वर्ष 2015-16 के अनुसार छत्तीसगढ़ में कुपोषण की दर 37.7 प्रतिशत थी, जबकि उस समय राष्ट्रीय औसत दर 35.8 प्रतिशत थी। एनएफएचएस-5 के सर्वे रिपोर्ट में छत्तीसगढ़ राज्य में कुपोषण की दर में 6.4 प्रतिशत गिरावट आई है और यह दर मात्र 31.3 रह गई है। राष्ट्रीय सर्वे एजेंसी नेशनल फैमिली हेल्थ के रिपोर्ट से यह बात स्पष्ट रूप से सामने आई है कि छत्तीसगढ़ राज्य में बच्चों के पोषण स्तर पर ध्यान देने के बेहद सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं, जिसके चलते राज्य में कुपोषण दर 30.13 प्रतिशत से घटकर अब मात्र 19.86 प्रतिशत रह गई है।

    ज्ञातव्य है कि एनएफएचएस-5 के अनुसार छत्तीसगढ़ में बच्चों में कुपोषण का स्तर गुजरात, मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल, असम, कर्नाटक, झारखण्ड, बिहार आदि राज्यों से कम है

    रायपुर /शौर्यपथ/

    चंपाबाई ने 6 महीने में ही कमाए 89 हजार रूपए, बकरियों की संख्या 4 से बढ़कर 26 हुई

    बकरी पालन के लिए मनरेगा से पक्का शेड बनने के बाद चंपाबाई अब व्यवस्थित ढंग से अपने व्यवसाय को आगे बढ़ा पा रही है। शेड बनने से पहले उसके पास केवल चार बकरी थी। मनरेगा के माध्यम से घर में बकरी शेड बनने के बाद उसके बकरी पालन के व्यवसाय ने जोर पकड़ा और कमाई बढ़ने लगी। अब उसके पास 26 बकरे-बकरियां हो गए हैं। बकरी पालन से उसने छह महीने में ही 89 हजार रूपए कमाए हैं।

    महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम

    रायगढ़ जिले के बटाऊपाली (ब) की चम्पाबाई बकरी पालन से अपने परिवार की आर्थिक हालात सुधार रही है। उसके इस काम में घर में मनरेगा से निर्मित बकरी पालन शेड ने बड़ी भूमिका निभाई है। चंपाबाई की लगन, मेहनत और मनरेगा के सहयोग से उसका व्यवसाय तेजी से फल-फूल रहा है और अच्छी आमदनी हो रही है। सारंगढ़ विकासखंड के बटाऊपाली (ब) ग्राम पंचायत की मां गंगा स्वसहायता समूह की सदस्य चंपाबाई के परिवार के पास करीब पांच एकड़ जमीन है। इसमें से केवल तीन एकड़ में ही खेती-बाड़ी हो पाती है। खेती के बाद के समय में मजदूरी कर परिवार गुजर-बसर करता है। चंपाबाई ने घर की आमदनी बढ़ाने के लिए बकरी पालन का काम शुरू किया। लेकिन कच्चा और टूटा-फूटा कोठा के कारण इसमें बहुत कठिनाई हो रही थी। वह इसे व्यवस्थित ढंग से आगे नहीं बढ़ा पा रही थी। अपनी परेशानी को उसने समूह की बैठक में रखा। समूह की सलाह पर उसने मनरेगा के तहत अपनी निजी भूमि पर पक्का कोठा के निर्माण के लिए ग्राम पंचायत को आवेदन दिया।

    मनरेगा के अंतर्गत वर्ष 2020-21 में बतौर हितग्राही चम्पाबाई की निजी जमीन पर 61 हजार रूपए की लागत के बकरी शेड निर्माण (कोठा) के लिए प्रशासकीय स्वीकृति मिली। लगातार 15 दिनों के काम के बाद दिसम्बर-2020 में उसका कोठा बनकर तैयार हो गया। इस काम में उसके और गांव के एक अन्य परिवार को 34 मानव दिवसों का सीधा रोजगार भी प्राप्त हुआ, जिसके लिए करीब साढ़े छह हजार रूपए का मजदूरी भुगतान किया गया। शेड बनने के बाद चंपाबाई को बकरी पालन के लिए पर्याप्त जगह मिली और उसका धंधा जोर पकड़ने लगा।

    पक्का बकरी शेड निर्माण के पहले चम्पाबाई के पास केवल चार बकरी थी। शेड बनने के बाद उसने चार और बकरियां खरीदीं। इन बकरियों से जन्मे मेमनों के बाद उसके पास कुल 26 बकरे-बकरियाँ हो गए हैं। इनमें से 15 बकरे-बकरियों को बेचकर उसने छह महीनों में 89 हजार रूपए कमाए हैं। वह बकरी को पांच हजार रूपए और बकरा को सात हजार रूपए की दर से बेचती है। बकरी पालन से कम समय में हुए इस लाभ से चंपाबाई खुश है। इससे उसकी माली हालत तो सुधरी ही, घर के लिए उसने नई टी.वी., पंखा और आलमारी भी खरीदी है।

    चंपाबाई बकरी पालन के अपने इस धंधे को और आगे बढ़ाना चाहती है। वह कहती है कि अगर उसे बकरी पालन के लिए मनरेगा से शेड नहीं मिलता, तो वह अपना काम आगे नहीं बढ़ा पाती। अब वह गांव के दूसरे लोगों को भी बकरी पालन को व्यवसाय के रूप में अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर रही है।

     

    राजनंदगांव /शौर्यपथ/

    जिले के प्रचीन स्कूलों में एक स्टेट हाई स्कूल अब अपग्रेड होकर आधुनिकीकरण का रूप लेगी। स्कूल के भव्यता के साथ वहां की सभी सुविधाओं को बढ़ाया जाएगा। पुराने स्कूल भवन का जीर्णोद्धार और निर्माण के साथ बेहतर से बेहतर सुविधा प्रदान कर आदर्श स्कूल के रूप में तब्दील किया जाएगा। स्कूल के जीर्णोद्धार के साथ स्कूल के मूल स्वरूप, नाम, विषय, माध्यम और स्कूल के सीट की संख्या में कोई बदलाव नहीं होगा। स्कूल में पढऩे वाले विद्यार्थियों को सभी सुविधाओं का लाभ मिलेगा। राजनांदगांव शहर के प्राचीन महंत राजा बलराम दास बहुउद्देशीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय (स्टेट हाईस्कूल) का आधुनिकीकरण के साथ नए स्वरूप में संचालन किया जाएगा। स्कूल हिन्दी माध्यम ही रहेगा तथा पूर्ववत हिन्दी माध्यम की तरह ही संचालित होगा।

    जिला शिक्षा अधिकारी आरएल ठाकुर ने बताया कि स्कूल का संचालन पूर्व की भांति ही किया जाएगा। स्कूल का स्वरूप को भव्यता देने, निर्माण कार्य और आधुनिक सुविधा उपलब्ध कराया जाएगा। स्टेट स्कूल की यादों को बरकरार और सहजने की दिशा में कार्य किए जा रहे हैं। स्टेट स्कूल के जीर्णोद्धार में स्कूल का न ही मूल स्वरूप बदला जाएगा। न ही स्कूल का नाम बदला जाएगा और न ही विषय तथा स्कूल की सीट संख्या में कोई बदलाव होगा।

    स्टेट स्कूल को मिलेगी आधुनिक सुविधाएं-

    महंत राजा बलराम दास बहुउद्देशीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय (स्टेट हाईस्कूल) के भवन को जीर्णोद्धार और निर्माण के साथ-साथ बेहतर सुविधाएं प्रदान करने की दिशा में कार्य किया जाएगा। स्कूल में विद्यार्थियों को आकर्षक कक्षा, कम्प्यूटर कक्ष, लाईब्रेरी, आधुनिक लैब, खेल मैदान, उद्यान, स्कूल का प्रवेश द्वार, मेस और डायनिंग हॉल, प्राचार्य और शिक्षकों के लिए स्टॉफ रूम, टायलेट ब्लॉक जैसी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध होगी।

     

    खाना खजाना /शौर्यपथ/

    लौकी एक ऐसी सब्जी है जिसे सेहत के लिए तो फायदेमंद माना जाता है लेकिन, बहुत कम लोग ही इसे खाना पसंद करते हैं खासतौर पर बच्चे. तो अगर आपके घर में भी लौकी को ज्यादा पसंद नहीं किया जाता तो आप इन रेसिपीज को ट्राई कर सकते हैं. लौकी, जिसे घीया के नाम से भी जाना जाता है. लौकी की सबसे अच्छी बात ये है कि ये बेहद आसानी से मार्केट में मिल जाती है. लौकी का पौधा एक लता होती है जिसपर लौकियां लगती हैं. लौकी में कई गुण होते हैं जो शरीर को कई लाभ पहुंचाने में मदद कर सकते हैं. लौकी शरीर में विटामिन बी, विटामिन सी, आयरन और सोडियम की कमी को पूरा करने में मदद कर सकती है. आमतौर पर लौकी 2 प्रकार की होती है. गोलाकार और बेलनाकार. वैसे तो आप लौकी को जूस के रूप में भी डाइट का हिस्सा बना सकते हैं. लेकिन सेहत के साथ स्वाद को भी बरकरार रखना है तो इन रेसिपीज को करें ट्राई.

    स्वाद और सेहत का परफेक्ट कॉम्बो हैं लौकी से बनी ये रेसिपीज़ लौकी एक ऐसी सब्जी है जिसे सेहत के लिए तो फायदेमंद माना जाता है लेकिन, बहुत कम लोग ही इसे खाना पसंद करते हैं खासतौर पर बच्चे. तो अगर आपके घर में भी लौकी को ज्यादा पसंद नहीं किया जाता तो आप इन रेसिपीज को ट्राई कर सकते हैं.
    भारतीय व्यंजनों में लौकी का खूब इस्तेमाल किया जाता है.लौकी सेहत के लिए बहुत गुणकारी मानी जाती है.दही और लौकी दोनों की तासीर ठंडी होती है.लौकी से कई तरह की रेसिपीज बनाई जा सकती हैं.

    लौकी एक ऐसी सब्जी है जिसे सेहत के लिए तो फायदेमंद माना जाता है लेकिन, बहुत कम लोग ही इसे खाना पसंद करते हैं खासतौर पर बच्चे. तो अगर आपके घर में भी लौकी को ज्यादा पसंद नहीं किया जाता तो आप इन रेसिपीज को ट्राई कर सकते हैं. लौकी, जिसे घीया के नाम से भी जाना जाता है. लौकी की सबसे अच्छी बात ये है कि ये बेहद आसानी से मार्केट में मिल जाती है. लौकी का पौधा एक लता होती है जिसपर लौकियां लगती हैं. लौकी में कई गुण होते हैं जो शरीर को कई लाभ पहुंचाने में मदद कर सकते हैं. लौकी शरीर में विटामिन बी, विटामिन सी, आयरन और सोडियम की कमी को पूरा करने में मदद कर सकती है. आमतौर पर लौकी 2 प्रकार की होती है. गोलाकार और बेलनाकार. वैसे तो आप लौकी को जूस के रूप में भी डाइट का हिस्सा बना सकते हैं. लेकिन सेहत के साथ स्वाद को भी बरकरार रखना है तो इन रेसिपीज को करें ट्राई.

    लौकी खाना नहीं है पसंद को इन रेसिपीज को जरूरी करें ट्राईः1. स्टफ्ड लौकी-

    स्टफ्ड लौकी एक बहुत ही स्वादिष्ट रेसिपी है, जिसे एक बार खाने के बाद आप दोबारा जरूरी खाना पसंद करेंगे. इसे बनाना बहुत ही आसान है. लौकी को मसाले डालकर मैरीनेट किया जाता है. इसमें पनीर भरकर ओवन में बेक किया जाता है. जो स्वाद के साथ सेहत के लिए भी अच्छी मानी जाती है

    2. लौकी का हलवा-

    अगर आप मीठा खाने के शौकीन है तो आप लौकी के हलवे का सेवन कर सकते हैं. और सबसे अच्छी बात ये कि इसे व्रत के दौरान भी खाया जा सकता है. इसे दूध, घी, शुगर और पिस्ता से बनाया जाता है.

    3. लौकी का रायता-

    गर्मियों के मौसम में लौकी के रायते का सेवन सेहत के लिए काफी अच्छा माना जाता है. क्योंकि दही और लौकी दोनों की तासीर ठंडी होती है, जो पेट को सही रखने में मदद कर सकते हैं. इसे प्लेन दही में लौकी, काला नमक और भुना जीरा डालकर बनाया जाता है.

    4. भूनी लौकी-

    भूनी लौकी की सब्जी एक टेस्टी रेसिपी है. जिसे बहुत ही कम समय में बनाया जा सकता है. इसे प्याज़, हरी बीन्स, हर्ब, अदरक-लहसुन, नींबू का रस और कढ़ी पत्ते के साथ बनाया जाता है. आप इसे लंच और डिनर में बना सकते हैं.

    मनोरंजन /शौर्यपथ/

    आलिया भट्ट की फिल्म गंगूबाई काठियावाड़ी ने हर तरफ धमाल मचा कर रख दिया है. फिल्म को रिलीज हुए एक हफ्ते का वक्त हो चला है और इतने कम समय में ही फिल्म ने ताबड़तोड़ कमाई कर ली है. संजय लीला भंसाली की यह फिल्म और इसमें आलिया भट्ट की एक्टिंग लोगों को खूब पसंद आ रही है. बता दें, गंगूबाई काठियावाड़ी हुसैन जैदी की किताब मुंबई के माफिया क्वींस की जीवनी पर आधारित है. फिल्म में आलिया भट्ट के अलावा अजय देवगन, पार्थ समथान, शांतनु माहेश्वरी और सीमा पाहवा मुख्य रोल में नजर आ रहे हैं.

    बड़े पर्दे पर आपने रील लाइफ की गंगूबाई को देखा और पसंद भी किया, लेकिन आज की इस पोस्ट में हम आपको गंगा जगजीवनदास काठियावाड़ उर्फ गंगूबाई की रियल फोटो दिखाने जा रहे हैं. जी हां, गंगूबाई असल लाइफ में बहुत खूबसूरत थीं. उनकी खूबसूरती देखने के बाद लोग आलिया की खूबसूरती को फीका मान रहे हैं. सोशल मीडिया पर गंगूबाई की एक फोटो सामने आई है, जिसमें वे काफी खूबसूरत दिख रही हैं. इस तस्वीर के सामने आने के बाद लोगों ने इस पर अपनी प्रतिक्रियाएं देनी शुरू कर दी है.

    बॉलीवुड स्टोरी नाम के पेज से इस फोटो को शेयर किया गया है. आप देख सकते हैं कि इस तस्वीर में गंगूबाई कितनी खूबसूरत दिख रही हैं. आलिया ने हूबहू उन्हें कॉपी किया है. माथे पर लाल बिंदी और गाल पर काला निशान रियल लाइफ गंगूबाई के चेहरे पर देखा जा सकता है. गौरतलब है कि फिल्म में गंगूबाई बनीं आलिया भट्ट को हीरोइन बनने का सपना दिखा कर बेच दिया जाता है. इसके बाद अपनी नई जिंदगी में आने वाले चैलेंजेज को वह एक्सेप्ट करती हैं और 4000 औरतों और बच्चों के लिए लड़ाई लड़ती हैं.

    धर्म संसार /शौर्यपथ/

    सनातन धर्म में पूजा के नियमों का विशेष महत्व बताया गया है. वास्तु शास्त्र में पूजा घर को लेकर कई जानाकारियां दी गई हैं, जो आपके लिए कारगर साबित हो सकती है.माना जाता है कि जिनका पालन कर आप घर में सुख-समृद्धि और शांति का वातावरण व्याप्त कर सकते हैं.

    हर घर का एक छोटा सा मंदिर उसे खास और पवित्र बनाता है, जो परिवार में आस्था को जागृत करता है. सनातन धर्म में पूजा के नियमों का विशेष महत्व बताया गया है. माना जाता है कि जिनका पालन कर आप घर में सुख-समृद्धि और शांति का वातावरण व्याप्त कर सकते हैं. पूजा के नियमों की अनदेखी करने से पूजा पूर्ण नहीं होती, जो अधूरी मानी जाती है. कुछ लोग घर में छोटा तो कुछ बड़ा मंदिर बनवाते हैं, लेकिन कई बार घर में मंदिर बनवाने पर जाने अनजाने हम कुछ गलतियां कर बैठते हैं, जिससे सुख-शांति की जगह घर में दरिद्रता फैल सकती है, इसलिए घर में पूजा का मंदिर बनवाते समय वास्तु शास्त्र की मदद ली जा सकती है.

    वास्तु शास्त्र में पूजा घर को लेकर कई जानाकारियां दी गई हैं, जो आपके लिए कारगर साबित हो सकती है. आइए जानते हैं वास्तु के हिसाब से घर के मंदिर में क्या रखें और क्या नहीं.
    जानिए मंदिर में क्या रखें और क्या नहीं

    मान्यता है कि घर के पूजा घर में गौरी गणेश के तीन मूर्तियां नहीं रखनी चाहिए. कहा जाता है कि तीन मूर्तियां रखने से घर में अशांति का वातावरण रहता है. ये भी कहा जाता है कि घर में हमेशा भगवान गणेश जी की एक या फिर दो मूर्तियां ही रखना चाहिए.

    घर के मंदिर में शंख रखना अच्छा माना जाता है, लेकिन सिर्फ एक ही शंख रखना शुभ माना जाता है. ख्याल रखें कि मंदिर में कभी भी एक से अधिक शंख ना रखें. कहा जाता है कि अगर एक से अधिक शंख आपके घर के मंदिर में रखें हैं, तो एक ही रखें बाकि को किसी पवित्र नदी में बहा देना चाहिए या फिर मंदिर में दे देना चाहिए.

    अक्सर लोग घर के मंदिर में अपने प्रिय देवी-देवती की प्रतिमा स्थापित कर के विधि-विधान से प्रभु की आराधना करते हैं. ज्ञात हो कि घर के मंदिर में प्रतिमाओं की प्राण प्रतिष्ठा नहीं होती, इसलिए ध्यान रखें कि कभी भी घर के मंदिर में बड़ी प्रतिमा नहीं रखना चाहिए.

    कई लोग भगवान भोलेनाथ के परम भक्त होते हैं. वे घर के मंदिर में शिवलिंग का पूजा-पाठ कर भोलेनाथ को प्रसन्न करने में लीन हो जाते हैं, लेकिन ख्याल रखें कि घर के मंदिर में रखा शिवलिंग कभी भी अंगूठे के आकार से बढ़ा नहीं होना चाहिए.

    कहा जाता है कि घर के मंदिर में कभी भी खंडित मूर्तियां नहीं रखना चाहिए और ना ही उनकी पूजा करनी चाहिए. कहते हैं कि ऐसा करने से घर में नकारात्मक ऊर्जा फैलती है, जिससे घर में अशांति का माहौल व्याप्त हो जाता है.

    माना जाता है कि आरती के समय दीपक में कम से कम इतना घी जरूर डालें, जो पूरी आरती होने तक चले. कई बार कम घी की वजह से दीया बीच आरती में बुझ सकता है, जिसे अशुभ माना जाता है. कहते है कि ऐसा होने पर पूजा अधूरी मानी जाती है.

    पूजा घर में भगवान को हमेशा ताजे फूल ही चढ़ाने चाहिए. इसके अलावा जमीन पर गिरे फूलों को कभी भी भगवान को अर्पित नहीं करना चाहिए.
    मान्यता है कि तुलसी के पत्ते 11 दिनों तक बासे नहीं होते, इसलिए तुलसी के पत्तों पर जल छिड़कर उन्हें प्रभु को चढ़ाया जा सकता है.

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