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बस्तर / शौर्यपथ / तिलक पांडे चेयरमैन कंट्रोल कमिशन भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी राज्य परिषद छत्तीसगढ़ ने 26 दिसम्बर 2024 को नगरीय निकाय एवं त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों में पिछड़ा वर्ग के आरक्षण में कमी करने को अनुचित बताते हुए प्रेस विज्ञप्ति जारी करके कहा है कि बस्तर संभाग सर्व पिछडा वर्ग समाज द्वारा नगरीय निकायों में पिछड़ा वर्ग के आरक्षण में कमी किए जाने के मुद्दे को लेकर 30 दिसम्बर 2024 को बस्तर बंद व चक्काजाम किये जाने के फैसले को सही ठहराया है। आगे बताया कि सन् 1990 में जब भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी व अन्य वामपंथी दलों के सहयोग से चल रही वी.पी.सिंह की संयुक्त मोर्चा की सरकार द्वारा पिछड़े वर्ग के लोगों को नौकरियों में 27 प्रतिषत आरक्षण दिए जाने का प्रावधान किया गया था। तब भारतीय जनता पार्टी द्वारा पिछड़े वर्ग को दिए जा रहे आरक्षण के विरोध में देश भर में आंदोलन चलाया गया था, जिसके परिणामस्वरूप पिछड़ा वर्ग के लोगों को आज तक आरक्षण का लाभ नहीं मिल पाया है। वर्तमान में छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकार द्वारा मौजूदा राज्य सरकार द्वारा पिछड़े वर्ग में आने वाली जातियों के लोगों की संख्या मालूम कराने एक कमेटी बनायी गई थी।
इस कमेटी की भ्रामक जानकारियों को आधार मानकर राज्य सरकार द्वारा आनन फानन में पिछड़ा वर्ग के लोगों को नगर पालिका, नगर निगम व नगर पंचायत में मिलने वाले आरक्षण में कटौती की गई है, जिससे पिछड़ा वर्ग समाज के समस्त सामाजिकजन आंदोलित हो चुके हैं, जिसका नतीजा यह हुआ कि इस रिपोर्ट को लागू कर देने से पिछड़ा वर्ग के आरक्षण में कमी कर दिया गया। कमी कर देने से बस्तर में विरोध शुरू हो गया है और यह विरोध स्वाभाविक है, होना चाहिए। बस्तर के कई पालिकाओं व नगर पंचायतों में एक भी वार्ड पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित नहीं है। यह सीधा-सीधा पिछड़ा वर्ग के साथ अन्याय व जुल्म है।
’भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी’ 30 दिसम्बर 2024 के ’चक्का जाम बस्तर बंद’ का पुरा समर्थन करता है और भारतीय जनता पार्टी की सरकार से मांग करता है कि अपने लिए गए निर्णय पर पुनर्विचार करें तथा भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी छत्तीसगढ़, राज्य एवं केंद्र की सरकार को यह चेतावनी भी देता है कि वे पिछड़ा वर्ग समाज की भावनाओं के साथ बार-बार खिलवाड़ ना करें।
जगदलपुर, शौर्यपथ। जिला रोजगार एवं स्वरोजगार मार्गदर्शन केन्द्र आड़ावाल जगदलपुर में 31 दिसम्बर दिन मंगलवार को प्रातः 11 बजे से सांयकाल 04 बजे तक प्लेसमेंट कैम्प का आयोजन किया गया है। जिसमें एक निजी नियोजक के कुल 23 पदों एकाउंटेंट, सुपरवाइजर, वेल्डर, मोटर मेकेनिक एवं सेल्स मैनेजर हेतु योग्य अभ्यर्थियों का किया जाएगा। पदों के लिए आवश्यक शैक्षणिक योग्यता क्रमशः बीकॉम या एमकॉम, स्नात्तक, आईटीआई डिप्लोमा तथा स्नात्तक अथवा एमबीए होना चाहिए। इच्छुक आवेदक निर्धारित स्थल पर समयावधि में अपनी समस्त शैक्षणिक दस्तावेजों की मूल प्रतियां, एक सेट छायाप्रतियां, एक पासपोर्ट साईज फोटोग्राफ सहित उपस्थित होकर प्लेसमेंट कैम्प में शामिल हो सकते हैं। यह आयोजन पूर्णतः निःशुल्क है।
जगदलपुर / शौर्यपथ / केन्द्र सरकार की सहकार से समृद्धि अभियान के तहत छत्तीसगढ़ में सहकारिता आंदोलन को मजबूत किया जा रहा है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में सहकारी समितियों में नई सुविधाएं बढ़ाने के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए डेयरी, मत्स्य पालन के क्षेत्र में नई सहकारी समितियों के गठन को बढ़ावा दिया जा रहा है। वन एवं सहकारिता मंत्री केदार कश्यप ने आज जगदलपुर में राज्य में गठित 300 से अधिक नवगठित बहुउद्देशीय पैक्स, डेयरी व मत्स्य सहकारी समितियों का शुभारम्भ किया। गौरतलब है कि भारत के गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के द्वारा नईदिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में देशभर के नवगठित 10 हजार से अधिक बहुउद्देशीय पैक्स, डेयरी एवं मत्स्य समितियों के शुभारंभ अवसर पर वन एवं सहकारिता मंत्री वर्चुअल रूप से जुड़े।
वन एवं सहकारिता मंत्री केदार कश्यप ने कार्यक्रम में सुशासन दिवस पर देश के पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी को नमन करते हुए कहा कि अभी प्रदेश में कार्यरत 2058 पैक्स तथा लैम्प्स द्वारा प्रदेश के कृषकों को कृषि ऋण तथा खाद-बीज एवं विभिन्न तरह की सेवाएं प्रदान की जा रही है। इन्हें और अधिक सक्षम बनाया जा रहा है। राज्य में 500 नये बहुउद्देशीय पैक्स के गठन की कार्यवाही प्रक्रियाधीन है। उन्होंने कहा कि राज्य में दुग्ध उत्पादक कृषकों की आय में वृद्धि के लिए एनडीडीबी के साथ राज्य दुग्ध संघ तथा राज्य सरकार के साथ त्रिपक्षीय एमओयू किया गया है। राज्य में 57 से अधिक नवीन दुग्ध समितियों का पंजीयन कर लिया गया है। राज्य के 113 वन-धन समितियों को भी प्राथमिक बहुउद्देशीय लघु वनोपज सहकारी समिति के रूप में पंजीकृत किया गया है। 169 नवीन मत्स्य समितियों का गठन किया गया है।
सहकारिता मंत्री कश्यप ने कहा कि पिछले एक वर्ष में सहकारी बैंकों की 16 नवीन शाखाएं प्रारंभ किए गए हैं। पैक्स समितियों में 2058 माईक्रो एटीएम उपलब्ध कराया गया है। प्रदेश के 2014 पैक्स समितियों को कॉमन सर्विस सेन्टर की सुविधा, 25 पैक्स समितियों में प्रधानमंत्री जनऔषधि केन्द्र प्रारंभ किया गया है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी बैंक तथा 06 जिला सहकारी केन्द्रीय बैंकों में 300 से अधिक पदों पर भर्ती की कार्यवाही पूर्ण कर ली गई है और अभ्यर्थियों को नियक्ति पत्र प्रदान किया गया है। राज्य के 2058 पैक्स में प्रधानमंत्री किसान संमृद्धि केन्द्र स्थापित किया गया है, पूर्ण रूप से विकसित होने के उपरान्त इन केन्द्रों में कृषकों को मिटटी परीक्षण, मौसम पूर्वानुमान तथा कृषि तकनीक संबंधी जानकारियां प्राप्त हो सकेंगी। वहीं अन्न भण्डारण योजनांतर्गत 200 मेट्रिक टन क्षमता के 725 नवीन गोदामों का निर्माण किया जा रहा है, जिसमें से 625 गोदामों का निर्माण पूर्ण हो चुके हैं।
कार्यक्रम को सांसद बस्तर महेश कश्यप ने भी सम्बोधित किया। इस मौके पर बस्तर अंचल के 10 नवीन सहकारी समितियों को पंजीयन प्रमाण पत्र, 25 किसानों को रुपे किसान क्रेडिट कार्ड तथा दुग्ध उत्पादक सहकारी समिति बड़े कापसी को माइक्रो एटीएम प्रदान किया गया। साथ ही प्रदेश के पहले ई-पैक्स समिति ओरछा सहित माइक्रो एटीएम से सर्वाधिक ट्रांजेक्शन करने वाले सहकारी समितियों मद्देड़, केशरपाल एवं नारायणपुर सहित लोक सेवा केन्द्र के बेहतर संचालन के लिए पैक्स समितियों माड़पाल, कांकेर, केरलापाल एवं बांसकोट को प्रशस्ति पत्र प्रदान किया गया।
जगदलपुर, शौर्यपथ। परिस्थितियां चाहे कितनी भी विपरीत हो पर यदि सपनों को परवान देने की ताकत है और मजबूत इरादे हैं, तो हौसले कभी नहीं टूटते और इसकी एक बानगी देखने को मिली बस्तर ओलंपिक में, जहां पर नक्सल हिंसा में दिव्यांग हुए खिलाड़ियों ने अपने मजबूत इरादे के साथ उत्कृष्ट खेल प्रतिभा का प्रदर्शन किया। ऐसे ही नक्सली हिंसा को छोड़ मुख्य धारा में आएं आत्मसमर्पित आरक्षक बने सुकमा जिले के अंतर्गत दोरनापाल के गांव पालेमपाठ निवासी पुनेम सन्ना ने भी व्हील चेयर में दौड़ लगाई। उन्होंने बताया कि वह करीब 22 साल की उम्र में सन् 2000 में नक्सलियों के सम्पर्क में आया। मुझे बताया गया कि सशस्त्र विद्रोह से ही हमारे जीवन में बदलाव आएगा, मुझे तो खाना मिल जाता था पर मेरे घर वाले भूखे ही रहते थे और वे मुश्किल से जीवन-यापन करते थे। ये सब देखकर मैं छत्तीसगढ़ सरकार की समर्पण नीति से प्रभावित होकर 2012 में समर्पण कर मुख्य धारा में आया। मुख्य धारा में आने के बाद सन 2013 मुझे डीआरजी में आरक्षक के रूप में नियुक्त किया गया। मुझे और मेरे परिवार को इसकी कीमत भी चुकानी पड़ी। नक्सलियों ने मेरे बड़े भाई जोगा सन्ना को भी मौत के घाट उतार दिया। अगस्त 2013 में गस्ती के दौरान अचानक नक्सलियों ने अंधाधुंध फायरिंग सहित बम ब्लास्ट हुई। मेरे साथी जवान शहीद हुए और मेरा बायां पैर बुरी तरह से प्रभावित हो गया। जिससे मैं अब चलने में असमर्थ हूं। परन्तु मेरे इरादे नहीं टूटे है और आज इस बस्तर ओलम्पिक में दौड़ रहा हूं। मेरे परिवार में अभी पत्नी पूनम नंदे और 3 बच्चे हैं। परिवार में 2 लड़का और एक लड़की हैं जिसमें एक लड़का चैथी और लड़की पहली कक्षा में पढ़ रही है। सबसे छोटी बच्ची 2 साल की हुई है अभी आंगनबाड़ी जा रही है।
*बस्तर ओलंपिक के रंग में डूबा पूरा बस्तर, उमड़ पड़ा पूरा शहर*
बस्तर ओलम्पिक के समापन समारोह में पूरा बस्तर उमड़ पड़ा एक तरफ मांझी-चालकी, सिरहा, गुनिया, विभिन्न आदिवासी समाज के प्रमुख, राजनीतिक हस्तियां, साहित्यकार, शामिल हुए। वहीं दूसरी ओर खेल खिलाड़ी एवं नक्सल हिंसा से प्रभावित तथा नक्सली हिंसा को छोड़ मुख्यधारा में आएं समर्पित माओवादी ने बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया।
जगदलपुर, शौर्यपथ। बस्तर ओलंपिक 2024 के समापन सत्र में आया हूं और आज बस्तर बदल रहा है, लेकिन आपको विश्वास दिलाता हूं कि मैं 2026 के बस्तर ओलंपिक के उद्घाटन समारोह में आऊंगा और कहूंगा कि बस्तर बदल चुका है। बस्तर ओलंपिक केवल 1 लाख 65 लोगों की खेल प्रतिस्पर्धा तक सीमित नहीं है बल्कि यह समूचे बस्तर के उम्मीदों की पहचान बनने वाला है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को बस्तर ओलंपिक 2024 के समापन सत्र में मार्च 2026 तक नक्सल उन्मूलन के संकल्प को दोहराते हुए यह बातें कही।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने समापन सत्र के दौरान नुवा बाट के व्हीलचेयर रेस, रिले रेस, रस्साकसी सहित अन्य प्रतिस्पर्धाओं का फाइनल मुकाबला देखा। साथ ही बस्तर अंचल के प्रसिद्ध नृत्य, नुक्कड़ नाटक और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी देखी। कार्यक्रम में गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री विष्णु साय सहित अतिथियों ने बस्तर ओलंपिक 2024 के विजेताओं यूथ आइकॉन को प्रशस्ति पत्र और मेडल देकर सम्मानित किया। इस दौरान बस्तर ओलंपिक 2024 के विधिवत घोषणा की गई और ध्वज मुख्य अतिथि को सौपा गया।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि बस्तर ओलंपिक नक्सलवाद के कॉफिन में अंतिम कील ठोकने का काम करेगा। बस्तर ओलंपिक लाखों आदिवासी युवाओं को गलत रास्ते में जाने से रोकेगा और उन्हें भारत निर्माण से जोड़ेगा। श्री शाह ने कहा कि बस्तर ओलंपिक क्षेत्र में शांति सुरक्षा और विकास की नई नींव डालने वाला है। बस्तर बदल रहा है, से बस्तर बदल गया, के यात्रा की शुरुआत इस ओलंपिक ने की है। केंद्रीय मंत्री श्री शाह ने कहा कि दुनिया में जब भी भारत को किसी स्पर्धा में मेडल मिलता है तो उसमें से आधे मेडल हमारे आदिवासी बच्चें लेकर आते हैं। उन्होंने कहा कि खेलों की और विकास की जो आज शुरुआत हुई है, वह आने वाले दिनों में बस्तर के आदिवासी बच्चों के लिए विश्व भर के क्षितिज खोलेगा। श्री शाह ने नक्सलवाद को छोड़कर मुख्य धारा से जुड़ने वाले सभी खिलाड़ियों को शुभकामनाएं दी।
*गत एक साल में छत्तीसगढ़ सरकार ने लिखी बस्तर के विकास की नई इबारत*
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि नक्सली हिंसा से प्रभावित दिव्यांगों की जो आज व्हीलचेयर रेस हुई है, यह बस्तर के विकास की रेस है। उन्होंने कहा कि एक दौर था जब बस्तर में मूलभूत सुविधाएं तक नसीब नहीं थी, लेकिन पिछले 1 साल में छत्तीसगढ़ सरकार ने बस्तर के विकास की नई इबारत लिखी है और बस्तर के गांव-गांव तक शासकीय योजनाओं का लाभ लोगों को मिल रहा है। केंद्रीय मंत्री श्री शाह ने कहा कि डबल इंजन की सरकार में नक्सलियों के खिलाफ अभियान में तेजी आई और पिछले 1 साल में नक्सल मोर्चे पर बड़ी सफलता हासिल हुई है।
केंद्रीय गृह मंत्री श्री शाह ने कहा कि आज मैने नुवा बाट दस्ते की प्रतिभा को देखा और मेरा मन संवेदना से भर गया। ये नुवा बाट खिलाड़ियों का दस्ता देश के लिए उम्मीद की नई किरण है। उन्होंने बस्तर के युवाओं से कहा कि हार मानने वाला कभी नहीं जीतता बल्कि जीतता वो है जो कभी हार नहीं मानता। मुझे पूरा विश्वास है कि 2026 के ओलंपिक में जब बस्तर की कोई बेटी मेडल लेकर आएगी तो देश को उस पर गर्व होगा और हम इसी संकल्प के साथ आगे बढ़ रहे हैं। केंद्रीय मंत्री श्री शाह ने आदिवासी क्षेत्रों के लिए केंद्र सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने एकलव्य स्कूल, आदिवासी आदर्श ग्राम योजना, प्रधानमंत्री पीवीटीजी डेवलपमेंट मिशन, जनजाति उन्नत ग्राम योजना सहित अन्य योजनाओं से जुड़ी जानकारी साझा की।
*नक्सलवाद का समाधान केवल पुलिस कार्रवाई से नहीं, बल्कि शिक्षा, खेल और रोजगार के सकारात्मक अवसर प्रदान करना*
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बस्तर ओलंपिक में भाग लेकर प्रतिभागियों को ऐतिहासिक सफलता के लिए बधाई देते हुए कहा कि बस्तर ओलंपिक का यह आयोजन केवल खेल नहीं है, बल्कि बस्तर की संस्कृति, उत्साह और प्रतिभा का उत्सव है। यह आयोजन एक संदेश देता है कि बस्तर का असली चेहरा इसकी सांस्कृतिक विरासत और प्राकृतिक सुंदरता है न कि माओवादी हिंसा। मुझे यह कहते हुए गर्व की अनुभूति हो रही है कि बस्तर ओलम्पिक के माध्यम से हमने इस अंचल के युवाओं की ऊर्जा को खेल के माध्यम से एक सकारात्मक दिशा देने में सफल रहे हैं। इस आयोजन के माध्यम से हमने युवाओं को शासन-प्रशासन से जोड़कर विकास के कार्यों में सहभागी बनने की ओर उन्मुख किया है। ओलंपिक में शामिल खिलाड़ियोें ने आज यह संदेश दिया कि बस्तर में बदलाव की बयार चल पड़ी है। नक्सलवाद का समाधान केवल पुलिस कार्रवाई से नहीं, बल्कि शिक्षा, खेल और रोजगार के सकारात्मक अवसर प्रदान करने से होगा और बस्तर ओलंपिक इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। इस आयोजन के माध्यम से हमने न केवल बस्तर के युवाओं की छुपी प्रतिभा को देखा, बल्कि उन आत्मसमर्पित भाइयों और बहनों की प्रतिभा को भी देखा, जिन्होंने हिंसा की माओवादी विचारधारा को छोड़कर मुख्यधारा में वापसी की है। आज चेहरों पर जो मुस्कान है, वह एक खुशहाल और शांतिपूर्ण बस्तर का प्रतीक है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि माओवाद के माँद कहे जाने वाले इलाकों में हमने नये कैंप स्थापित किये। यहां नक्सलियों को ललकारा और उन्हें धूल चटाई। पिछले एक साल में माओवाद के खिलाफ हमारी लड़ाई में बड़ी सफलता मिली है। इस दौरान 200 से अधिक माओवादियों को ढेर किया गया है, 900 से ज्यादा माओवादी गिरफ्तार हुए तथा 812 माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया है यह बड़ी उपलब्धि है। जवानों का बढ़ा हुआ हौसला और आत्मविश्वास देखकर मैंने भी अपने भीतर नयी ऊर्जा का महसूस की है। हमारी डबल इंजन की सरकार ने नियद नेल्लानार योजना’ के माध्यम से बस्तर के अंदरूनी गांव तक लोकतंत्र और विकास की किरणों को पहुंचाने में सफल हुए है। नियद नेल्लानार योजना के माध्यम से हम सड़क, पुल-पुलिया, स्कूल, अस्पताल, आंगनवाड़ी, पेयजल, बिजली, मोबाइल टॉवर जैसी अधोसंरचनाएं अंदरूनी गांवों तक पहुंचा रहे हैं। वर्षों से बंद पड़े स्कूलों को फिर से शुरू किया गया है। आत्मसमर्पित नक्सलियों के पुनर्वास की भी बेहतर व्यवस्था और विशेष प्रावधान सरकार द्वारा किए गए हैं। प्रदेश के आत्मसमर्पित नक्सलियों और नक्सल प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और उन्हें एक सुरक्षित जीवन प्रदान करने के उद्देश्य से भारत सरकार ने 15,000 पक्के प्रधानमंत्री आवास बनाए जाएंगे। नगरनार स्टील प्लांट और रायपुर- विशाखापट्टनम आर्थिक गलियारे से बस्तर अंचल के विकास को नई गति मिलेगी। पूरे अंचल में वाणिज्य और व्यापार को बढ़ावा मिलेगा, इससे युवाओं के लिए बड़ी संख्या में रोजगार के नये मौके भी सृजित होंगे। श्री साय ने कहा कि पर्यटन के क्षेत्र में भी बस्तर ने हाल ही में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। कांगेर घाटी में स्थित गांव धुड़मारास को संयुक्त राष्ट्र विश्व पर्यटन संगठन के अपने अपग्रेड प्रोग्राम फॉर बेस्ट टूरिज्म विलेज के अंतर्गत पर्यटन के विकास के लिए चुना गया है। उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि बस्तर के माओवादी हिंसा से प्रभावित लोगों ने केंद्रीय गृह मंत्री से राजधानी मुलाकात की थी। अब बस्तर का दर्द दिल्ली तक पहुंच पाया है। हम बस्तर को संवारने और युवा ऊर्जा को सकारात्मक दिशा देने का काम हमारी सरकार कर रही है। उन्होंने बस्तर ओलम्पिक के सफल आयोजन के लिए बस्तर वासियों को शुभकामनाएं दी। कार्यक्रम को खेल मंत्री श्री टंकराम वर्मा ने भी संबोधित किया।
बस्तर ओलंपिक की सबसे खास बात ये रही कि इसमें 300 से अधिक नुवा बाट (आत्म समर्पित माओवादी) बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया इसके साथ ही 18 से अधिक माओवादी हिंसा में प्रभावित दिव्यांग खिलाड़ी भी शामिल हुए। संभाग स्तरीय बस्तर ओलंपिक में मुख्य रूप से फुटबॉल, वॉलीबॉल, कराटे, वेटलिफ्टिंग, बैडमिंटन, कबड्डी, आर्चरी, एथलेटिक्स, रस्साकसी, हॉकी और रिलेरेस शामिल है। इस मौके पर केबिनट मंत्री केदार कश्यप, लोकसभा सांसद बस्तर महेश कश्यप, उपाध्यक्ष बस्तर क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण एवं विधायक कोंडागांव सुश्री लता उसेंडी, विधायक जगदलपुर श्री किरण देव, केशकाल नीलकंठ टेकाम, चित्रकोट विनायक गोयल, कांकेर आशाराम नेताम, जिला पंचायत अध्यक्ष बस्तर श्रीमती वेदवती कश्यप, छत्तीसगढ़ राज्य युवा आयोग अध्यक्ष विश्व विजय सिंह तोमर, महापौर नगर निगम जगदलपुर श्रीमती सफिरा साहू सहित अन्य जनप्रतिनिधि और केन्द्र शासन एवं राज्य शासन के वरिष्ठ अधिकारी तथा हजारों की संख्या में खेलप्रेमी गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
जगदलपुर, शौर्यपथ। बस्तर ओलंपिक 2024 के समापन सत्र में आया हूं और आज बस्तर बदल रहा है, लेकिन आपको विश्वास दिलाता हूं कि मैं 2026 के बस्तर ओलंपिक के उद्घाटन समारोह में आऊंगा और कहूंगा कि बस्तर बदल चुका है। बस्तर ओलंपिक केवल 1 लाख 65 लोगों की खेल प्रतिस्पर्धा तक सीमित नहीं है बल्कि यह समूचे बस्तर के उम्मीदों की पहचान बनने वाला है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को बस्तर ओलंपिक 2024 के समापन सत्र में मार्च 2026 तक नक्सल उन्मूलन के संकल्प को दोहराते हुए यह बातें कही।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने समापन सत्र के दौरान नुवा बाट के व्हीलचेयर रेस, रिले रेस, रस्साकसी सहित अन्य प्रतिस्पर्धाओं का फाइनल मुकाबला देखा। साथ ही बस्तर अंचल के प्रसिद्ध नृत्य, नुक्कड़ नाटक और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी देखी। कार्यक्रम में गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री विष्णु साय सहित अतिथियों ने बस्तर ओलंपिक 2024 के विजेताओं यूथ आइकॉन को प्रशस्ति पत्र और मेडल देकर सम्मानित किया। इस दौरान बस्तर ओलंपिक 2024 के विधिवत घोषणा की गई और ध्वज मुख्य अतिथि को सौपा गया।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि बस्तर ओलंपिक नक्सलवाद के कॉफिन में अंतिम कील ठोकने का काम करेगा। बस्तर ओलंपिक लाखों आदिवासी युवाओं को गलत रास्ते में जाने से रोकेगा और उन्हें भारत निर्माण से जोड़ेगा। श्री शाह ने कहा कि बस्तर ओलंपिक क्षेत्र में शांति सुरक्षा और विकास की नई नींव डालने वाला है। बस्तर बदल रहा है, से बस्तर बदल गया, के यात्रा की शुरुआत इस ओलंपिक ने की है। केंद्रीय मंत्री श्री शाह ने कहा कि दुनिया में जब भी भारत को किसी स्पर्धा में मेडल मिलता है तो उसमें से आधे मेडल हमारे आदिवासी बच्चें लेकर आते हैं। उन्होंने कहा कि खेलों की और विकास की जो आज शुरुआत हुई है, वह आने वाले दिनों में बस्तर के आदिवासी बच्चों के लिए विश्व भर के क्षितिज खोलेगा। श्री शाह ने नक्सलवाद को छोड़कर मुख्य धारा से जुड़ने वाले सभी खिलाड़ियों को शुभकामनाएं दी।
*गत एक साल में छत्तीसगढ़ सरकार ने लिखी बस्तर के विकास की नई इबारत*
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि नक्सली हिंसा से प्रभावित दिव्यांगों की जो आज व्हीलचेयर रेस हुई है, यह बस्तर के विकास की रेस है। उन्होंने कहा कि एक दौर था जब बस्तर में मूलभूत सुविधाएं तक नसीब नहीं थी, लेकिन पिछले 1 साल में छत्तीसगढ़ सरकार ने बस्तर के विकास की नई इबारत लिखी है और बस्तर के गांव-गांव तक शासकीय योजनाओं का लाभ लोगों को मिल रहा है। केंद्रीय मंत्री श्री शाह ने कहा कि डबल इंजन की सरकार में नक्सलियों के खिलाफ अभियान में तेजी आई और पिछले 1 साल में नक्सल मोर्चे पर बड़ी सफलता हासिल हुई है।
केंद्रीय गृह मंत्री श्री शाह ने कहा कि आज मैने नुवा बाट दस्ते की प्रतिभा को देखा और मेरा मन संवेदना से भर गया। ये नुवा बाट खिलाड़ियों का दस्ता देश के लिए उम्मीद की नई किरण है। उन्होंने बस्तर के युवाओं से कहा कि हार मानने वाला कभी नहीं जीतता बल्कि जीतता वो है जो कभी हार नहीं मानता। मुझे पूरा विश्वास है कि 2026 के ओलंपिक में जब बस्तर की कोई बेटी मेडल लेकर आएगी तो देश को उस पर गर्व होगा और हम इसी संकल्प के साथ आगे बढ़ रहे हैं। केंद्रीय मंत्री श्री शाह ने आदिवासी क्षेत्रों के लिए केंद्र सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने एकलव्य स्कूल, आदिवासी आदर्श ग्राम योजना, प्रधानमंत्री पीवीटीजी डेवलपमेंट मिशन, जनजाति उन्नत ग्राम योजना सहित अन्य योजनाओं से जुड़ी जानकारी साझा की।
*नक्सलवाद का समाधान केवल पुलिस कार्रवाई से नहीं, बल्कि शिक्षा, खेल और रोजगार के सकारात्मक अवसर प्रदान करना*
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बस्तर ओलंपिक में भाग लेकर प्रतिभागियों को ऐतिहासिक सफलता के लिए बधाई देते हुए कहा कि बस्तर ओलंपिक का यह आयोजन केवल खेल नहीं है, बल्कि बस्तर की संस्कृति, उत्साह और प्रतिभा का उत्सव है। यह आयोजन एक संदेश देता है कि बस्तर का असली चेहरा इसकी सांस्कृतिक विरासत और प्राकृतिक सुंदरता है न कि माओवादी हिंसा। मुझे यह कहते हुए गर्व की अनुभूति हो रही है कि बस्तर ओलम्पिक के माध्यम से हमने इस अंचल के युवाओं की ऊर्जा को खेल के माध्यम से एक सकारात्मक दिशा देने में सफल रहे हैं। इस आयोजन के माध्यम से हमने युवाओं को शासन-प्रशासन से जोड़कर विकास के कार्यों में सहभागी बनने की ओर उन्मुख किया है। ओलंपिक में शामिल खिलाड़ियोें ने आज यह संदेश दिया कि बस्तर में बदलाव की बयार चल पड़ी है। नक्सलवाद का समाधान केवल पुलिस कार्रवाई से नहीं, बल्कि शिक्षा, खेल और रोजगार के सकारात्मक अवसर प्रदान करने से होगा और बस्तर ओलंपिक इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। इस आयोजन के माध्यम से हमने न केवल बस्तर के युवाओं की छुपी प्रतिभा को देखा, बल्कि उन आत्मसमर्पित भाइयों और बहनों की प्रतिभा को भी देखा, जिन्होंने हिंसा की माओवादी विचारधारा को छोड़कर मुख्यधारा में वापसी की है। आज चेहरों पर जो मुस्कान है, वह एक खुशहाल और शांतिपूर्ण बस्तर का प्रतीक है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि माओवाद के माँद कहे जाने वाले इलाकों में हमने नये कैंप स्थापित किये। यहां नक्सलियों को ललकारा और उन्हें धूल चटाई। पिछले एक साल में माओवाद के खिलाफ हमारी लड़ाई में बड़ी सफलता मिली है। इस दौरान 200 से अधिक माओवादियों को ढेर किया गया है, 900 से ज्यादा माओवादी गिरफ्तार हुए तथा 812 माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया है यह बड़ी उपलब्धि है। जवानों का बढ़ा हुआ हौसला और आत्मविश्वास देखकर मैंने भी अपने भीतर नयी ऊर्जा का महसूस की है। हमारी डबल इंजन की सरकार ने नियद नेल्लानार योजना’ के माध्यम से बस्तर के अंदरूनी गांव तक लोकतंत्र और विकास की किरणों को पहुंचाने में सफल हुए है। नियद नेल्लानार योजना के माध्यम से हम सड़क, पुल-पुलिया, स्कूल, अस्पताल, आंगनवाड़ी, पेयजल, बिजली, मोबाइल टॉवर जैसी अधोसंरचनाएं अंदरूनी गांवों तक पहुंचा रहे हैं। वर्षों से बंद पड़े स्कूलों को फिर से शुरू किया गया है। आत्मसमर्पित नक्सलियों के पुनर्वास की भी बेहतर व्यवस्था और विशेष प्रावधान सरकार द्वारा किए गए हैं। प्रदेश के आत्मसमर्पित नक्सलियों और नक्सल प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और उन्हें एक सुरक्षित जीवन प्रदान करने के उद्देश्य से भारत सरकार ने 15,000 पक्के प्रधानमंत्री आवास बनाए जाएंगे। नगरनार स्टील प्लांट और रायपुर- विशाखापट्टनम आर्थिक गलियारे से बस्तर अंचल के विकास को नई गति मिलेगी। पूरे अंचल में वाणिज्य और व्यापार को बढ़ावा मिलेगा, इससे युवाओं के लिए बड़ी संख्या में रोजगार के नये मौके भी सृजित होंगे। श्री साय ने कहा कि पर्यटन के क्षेत्र में भी बस्तर ने हाल ही में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। कांगेर घाटी में स्थित गांव धुड़मारास को संयुक्त राष्ट्र विश्व पर्यटन संगठन के अपने अपग्रेड प्रोग्राम फॉर बेस्ट टूरिज्म विलेज के अंतर्गत पर्यटन के विकास के लिए चुना गया है। उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि बस्तर के माओवादी हिंसा से प्रभावित लोगों ने केंद्रीय गृह मंत्री से राजधानी मुलाकात की थी। अब बस्तर का दर्द दिल्ली तक पहुंच पाया है। हम बस्तर को संवारने और युवा ऊर्जा को सकारात्मक दिशा देने का काम हमारी सरकार कर रही है। उन्होंने बस्तर ओलम्पिक के सफल आयोजन के लिए बस्तर वासियों को शुभकामनाएं दी। कार्यक्रम को खेल मंत्री श्री टंकराम वर्मा ने भी संबोधित किया।
बस्तर ओलंपिक की सबसे खास बात ये रही कि इसमें 300 से अधिक नुवा बाट (आत्म समर्पित माओवादी) बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया इसके साथ ही 18 से अधिक माओवादी हिंसा में प्रभावित दिव्यांग खिलाड़ी भी शामिल हुए। संभाग स्तरीय बस्तर ओलंपिक में मुख्य रूप से फुटबॉल, वॉलीबॉल, कराटे, वेटलिफ्टिंग, बैडमिंटन, कबड्डी, आर्चरी, एथलेटिक्स, रस्साकसी, हॉकी और रिलेरेस शामिल है। इस मौके पर केबिनट मंत्री केदार कश्यप, लोकसभा सांसद बस्तर महेश कश्यप, उपाध्यक्ष बस्तर क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण एवं विधायक कोंडागांव सुश्री लता उसेंडी, विधायक जगदलपुर श्री किरण देव, केशकाल नीलकंठ टेकाम, चित्रकोट विनायक गोयल, कांकेर आशाराम नेताम, जिला पंचायत अध्यक्ष बस्तर श्रीमती वेदवती कश्यप, छत्तीसगढ़ राज्य युवा आयोग अध्यक्ष विश्व विजय सिंह तोमर, महापौर नगर निगम जगदलपुर श्रीमती सफिरा साहू सहित अन्य जनप्रतिनिधि और केन्द्र शासन एवं राज्य शासन के वरिष्ठ अधिकारी तथा हजारों की संख्या में खेलप्रेमी गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
नरेश देवांगन कि खास रिपोर्ट
जगदलपुर, शौर्यपथ। बस्तर जिले के शहरी क्षेत्र सहित ग्रामीण क्षेत्रों में अमानक और मिस ब्रांडेड खाद्य सामाग्री बेची जा रही है। पैक बंद कई ऐसे उत्पाद हैं जिस पर न तो कंपनी का नाम है और न ही एक्सपायरी डेट लिखी हुई है। बिना नियम कानून के गली गूंचों से लेकर हाइवे तक पर बेची जा रही खाद्य सामाग्री जो की जानलेवा साबित हो सकती है। जबकि खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग के मैदानी अमले द्वारा कोई कार्रवाई नहीं किए जाने से यह सामग्री धड़ल्ले से बिक रही है। ताज़ा मामला ग्राम आड़ावाल का है जहा होटलों सहित किराना स्टोर मे विभाग की लापरवाही से दही पनीर लस्सी पर बिना उत्पाद थिति बिना एक्सपायरी के सामान बिक रही है, विभाग की लापरवाही की वजह से संचालक बिना किसी डर के खाने पिने का सामान धड़ल्ले बेच रहे है। जो कि जानलेवा साबित हो सकते हैं। वही आस पास के दुकानों मे बिना बैच नंबर का सामान कम लागत में मुनाफे का धंधा दुकानों पर बिक रहा बिना बैच नंबर और एक्सपायरी का सामान कम लागत में मुनाफे का धंधा है। इस कारण दुकानदार नमकीन के पैकेट कंपनी या फेरी वालों से खरीददे है जिससे दुकानदार को कम लागत में ही दोगुना मुनाफा हो जाता है। मुनाफा की लालच मे लोगों की सेहत से भी खिलवाड़ किया जा रहा है। जबकि विभाग के जानकारों का कहना है की खाद्य एवं औषधि विभाग के मानक के अनुरूप इन पर बैच नंबर, मैन्युफेक्चिरिंग डेट और एक्सपायरी के साथ प्राइस लिखना आवश्यक होता है। लेकिन प्रशासन द्वारा भी इन कारोबारियों की सुध नहीं ली जा रही जिससे उनके हौसले बुलंद हैं।
रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देशानुसार आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग द्वारा बस्तर एवं सरगुजा प्राधिकरण के अंतर्गत आने वाले जिलों में विकास एवं निर्माण कार्याें के लिए कुल 22 करोड़ 31 लाख 77 हजार की स्वीकृति जारी की गई है। जारी आदेश के अनुसार बस्तर विकास प्राधिकरण हेतु 11 करोड़ 79 लाख 67 हजार रूपए तथा सरगुजा विकास प्राधिकरण हेतु 10 करोड़ 52 लाख 10 हजार स्वीकृत किए गए हैं।
उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय बस्तर विकास प्राधिकरण और सरगुजा विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष हैं। बस्तर विकास प्राधिकरण अंतर्गत आने वाले छह जिलों कोंडागाव के लिए 5.34 करोड़, बस्तर के लिए 3.20 करोड़, कांकेर के लिए 1.83 करोड़, बीजापुर के लिए 51 लाख, नारायणपुर के लिए 24 लाख एवं सुकमा के लिए 67.50 लाख रुपए जारी किए गए है। इसी प्रकार सरगुजा विकास प्राधिकरण अंतर्गत आने वाले छह जिलों बलरामपुर के लिए 2.25 करोड़, सूरजपुर के लिए 1.73 करोड़, मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर हेतु 1.89 करोड़, जशपुर के लिए 1.66 करोड़, सरगुजा के लिए 1.99 करोड़ एवं कोरिया के लिए 1.01 करोड़ रुपए की राशि जारी की गई है। इस राशि का उपयोग क्षेत्र विशेष के विकास कार्याें के लिए किया जाएगा। इस राशि से प्राधिकरण क्षेत्र में सी.सी.रोड़ निर्माण, पुल-पुलिया निर्माण, नाली निर्माण, पेयजल सुविधाओं का विस्तार, नलकूप खनन एवं हैंण्डपम्प की स्थापना, हाट-बाजार में शौचालय निर्माण, तालाब में पचरी निर्माण, सामुदायिक भवन निर्माण, सांस्कृतिक भवन निर्माण एवं रंगमंच, कला मंच निर्माण, चबूतरा निर्माण, मुक्तिधाम शेड निर्माण, शाला भवन, छात्रावास भवन, आश्रम में अतिरिक्त कक्ष निर्माण, पेयजल व्यवस्था, शौचालय का निर्माण, कन्या शालााओं में बाउण्ड्रीवाल निर्माण स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए स्वास्थ्य केन्द्रों में अतिरिक्त कक्ष निर्माण, मरीजों के परिजनों के लिए सराय निर्माण, अस्पताल में पेयजल व्यवस्था आदि कार्य किए जाएंगे।
जगदलपुर, शौर्यपथ। कलेक्टर हरिस एस द्वारा जन-सुरक्षा एवं सुविधा की दुष्टिकोण से मोटरयान अधिनियम 1988 की धारा 115 एवं सहपठित छत्तीसगढ़ मोटरयान नियम 1994 के नियम 215 में पदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए महाराणा चौक(रायपुर नाका) से शहर के अंदर एवं माड़िन चैक से शहर की ओर आने-जाने वाले सड़क पर भारी मालयान वाहनों का चालन प्रातः 6 बजे से रात्रि 10 बजे तक प्रतिबंधित करने के आदेश जारी किए हैं। प्रतिबंधित समय में भारी मालयान वाहनों का संचालन आड़ावाल, कुरंदी, मारेंगा वायपास होकर किया जाएगा। आदेश का उल्लंघन की दशा में सक्षम अधिकारी द्वारा कार्यवाही की जाएगी। जगदलपुर शहर के विकास एवं विस्तार के फलस्वरूप भीड़-भाड़ होने से दुर्घटना होने की संभावना बनी रहती है। नवम्बर माह में आयोजित जिला सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में निर्णय लिया गया है कि शहर के अंदर भारी मालयानों (वाहनों) के संचालन पर प्रतिबंध लगाया जाए। साथ ही अति आवश्यक वस्तुओं तथा पीडीएस चांवल, दुग्ध, दवाईयां, नगर निगम के वाहन एवं शासकीय वाहन प्रतिबंध से मुक्त रहेंगे।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
