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नरेश देवांगन कि खास रिपोर्ट
जगदलपुर, शौर्यपथ। बस्तर जिले के शहरी क्षेत्र सहित ग्रामीण क्षेत्रों में अमानक और मिस ब्रांडेड खाद्य सामाग्री बेची जा रही है। पैक बंद कई ऐसे उत्पाद हैं जिस पर न तो कंपनी का नाम है और न ही एक्सपायरी डेट लिखी हुई है। बिना नियम कानून के गली गूंचों से लेकर हाइवे तक पर बेची जा रही खाद्य सामाग्री जो की जानलेवा साबित हो सकती है। जबकि खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग के मैदानी अमले द्वारा कोई कार्रवाई नहीं किए जाने से यह सामग्री धड़ल्ले से बिक रही है। ताज़ा मामला ग्राम आड़ावाल का है जहा होटलों सहित किराना स्टोर मे विभाग की लापरवाही से दही पनीर लस्सी पर बिना उत्पाद थिति बिना एक्सपायरी के सामान बिक रही है, विभाग की लापरवाही की वजह से संचालक बिना किसी डर के खाने पिने का सामान धड़ल्ले बेच रहे है। जो कि जानलेवा साबित हो सकते हैं। वही आस पास के दुकानों मे बिना बैच नंबर का सामान कम लागत में मुनाफे का धंधा दुकानों पर बिक रहा बिना बैच नंबर और एक्सपायरी का सामान कम लागत में मुनाफे का धंधा है। इस कारण दुकानदार नमकीन के पैकेट कंपनी या फेरी वालों से खरीददे है जिससे दुकानदार को कम लागत में ही दोगुना मुनाफा हो जाता है। मुनाफा की लालच मे लोगों की सेहत से भी खिलवाड़ किया जा रहा है। जबकि विभाग के जानकारों का कहना है की खाद्य एवं औषधि विभाग के मानक के अनुरूप इन पर बैच नंबर, मैन्युफेक्चिरिंग डेट और एक्सपायरी के साथ प्राइस लिखना आवश्यक होता है। लेकिन प्रशासन द्वारा भी इन कारोबारियों की सुध नहीं ली जा रही जिससे उनके हौसले बुलंद हैं।
रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देशानुसार आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग द्वारा बस्तर एवं सरगुजा प्राधिकरण के अंतर्गत आने वाले जिलों में विकास एवं निर्माण कार्याें के लिए कुल 22 करोड़ 31 लाख 77 हजार की स्वीकृति जारी की गई है। जारी आदेश के अनुसार बस्तर विकास प्राधिकरण हेतु 11 करोड़ 79 लाख 67 हजार रूपए तथा सरगुजा विकास प्राधिकरण हेतु 10 करोड़ 52 लाख 10 हजार स्वीकृत किए गए हैं।
उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय बस्तर विकास प्राधिकरण और सरगुजा विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष हैं। बस्तर विकास प्राधिकरण अंतर्गत आने वाले छह जिलों कोंडागाव के लिए 5.34 करोड़, बस्तर के लिए 3.20 करोड़, कांकेर के लिए 1.83 करोड़, बीजापुर के लिए 51 लाख, नारायणपुर के लिए 24 लाख एवं सुकमा के लिए 67.50 लाख रुपए जारी किए गए है। इसी प्रकार सरगुजा विकास प्राधिकरण अंतर्गत आने वाले छह जिलों बलरामपुर के लिए 2.25 करोड़, सूरजपुर के लिए 1.73 करोड़, मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर हेतु 1.89 करोड़, जशपुर के लिए 1.66 करोड़, सरगुजा के लिए 1.99 करोड़ एवं कोरिया के लिए 1.01 करोड़ रुपए की राशि जारी की गई है। इस राशि का उपयोग क्षेत्र विशेष के विकास कार्याें के लिए किया जाएगा। इस राशि से प्राधिकरण क्षेत्र में सी.सी.रोड़ निर्माण, पुल-पुलिया निर्माण, नाली निर्माण, पेयजल सुविधाओं का विस्तार, नलकूप खनन एवं हैंण्डपम्प की स्थापना, हाट-बाजार में शौचालय निर्माण, तालाब में पचरी निर्माण, सामुदायिक भवन निर्माण, सांस्कृतिक भवन निर्माण एवं रंगमंच, कला मंच निर्माण, चबूतरा निर्माण, मुक्तिधाम शेड निर्माण, शाला भवन, छात्रावास भवन, आश्रम में अतिरिक्त कक्ष निर्माण, पेयजल व्यवस्था, शौचालय का निर्माण, कन्या शालााओं में बाउण्ड्रीवाल निर्माण स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए स्वास्थ्य केन्द्रों में अतिरिक्त कक्ष निर्माण, मरीजों के परिजनों के लिए सराय निर्माण, अस्पताल में पेयजल व्यवस्था आदि कार्य किए जाएंगे।
जगदलपुर, शौर्यपथ। कलेक्टर हरिस एस द्वारा जन-सुरक्षा एवं सुविधा की दुष्टिकोण से मोटरयान अधिनियम 1988 की धारा 115 एवं सहपठित छत्तीसगढ़ मोटरयान नियम 1994 के नियम 215 में पदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए महाराणा चौक(रायपुर नाका) से शहर के अंदर एवं माड़िन चैक से शहर की ओर आने-जाने वाले सड़क पर भारी मालयान वाहनों का चालन प्रातः 6 बजे से रात्रि 10 बजे तक प्रतिबंधित करने के आदेश जारी किए हैं। प्रतिबंधित समय में भारी मालयान वाहनों का संचालन आड़ावाल, कुरंदी, मारेंगा वायपास होकर किया जाएगा। आदेश का उल्लंघन की दशा में सक्षम अधिकारी द्वारा कार्यवाही की जाएगी। जगदलपुर शहर के विकास एवं विस्तार के फलस्वरूप भीड़-भाड़ होने से दुर्घटना होने की संभावना बनी रहती है। नवम्बर माह में आयोजित जिला सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में निर्णय लिया गया है कि शहर के अंदर भारी मालयानों (वाहनों) के संचालन पर प्रतिबंध लगाया जाए। साथ ही अति आवश्यक वस्तुओं तथा पीडीएस चांवल, दुग्ध, दवाईयां, नगर निगम के वाहन एवं शासकीय वाहन प्रतिबंध से मुक्त रहेंगे।
अजय चंद्राकर
जगदलपुर/शौर्यपथ /छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में स्थित धुड़मारस गांव को संयुक्त राष्ट्र विश्व पर्यटन संगठन ( यूएनडब्ल्यूटीओ ) द्वारा सर्वश्रेष्ठ पर्यटन गांवों में से एक के रूप में चुने जाने के बाद अब अंतरराष्ट्रीय मान्यता मिल गई है।
कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान के भीतर स्थित धुड़मारस इस प्रतिष्ठित कार्यक्रम के लिए विश्व भर के 60 देशों से चुने गए 20 गांवों में से एक है, जो अपनी स्थायी पर्यटन क्षमताओं को प्रदर्शित करता है।
यूएनडब्ल्यूटीओ का उन्नयन कार्यक्रम धुड़मारस को अपनी पर्यटन सुविधाओं को मजबूत करने, अपनी सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित करने और ग्रामीणों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने में सहायता प्रदान करेगा।
इस मान्यता से अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों में वृद्धि होने की संभावना है, खासकर 27 सितंबर को भारत के पर्यटन मंत्रालय द्वारा धुड़मारस और चित्रकोट गांवों को मिले सर्वश्रेष्ठ पर्यटन गांव पुरस्कार के बाद।
घने जंगलों और कांगेर नदी से घिरा धुड़मारस इको-टूरिज्म के लिए आदर्श परिस्थितियाँ प्रस्तुत करता है । बस्तर समुदाय का स्वागत करने वाला स्वभाव गाँव के पर्यटकों के आकर्षण में महत्वपूर्ण योगदान देता है। निवासी होमस्टे की सुविधाएँ प्रदान करते हैं, जबकि स्थानीय युवा क्षेत्र के माध्यम से आगंतुकों का मार्गदर्शन करते हैं।
छत्तीसगढ़ प्रशासन क्षेत्रीय सम्पर्क बढ़ाने और स्थानीय शिल्प को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ावा देने की प्रक्रिया में है।
वन और पर्यटन विभागों ने धुड़मारस को इको-पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करके आत्मनिर्भर भारत के लिए अवसर पैदा किए हैं, जहां नियमित रूप से नई गतिविधियां शुरू की जा रही हैं। कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान के भीतर नागलसर और नेतानार गांवों में, स्थानीय युवा इको-टूरिज्म डेवलपमेंट कमेटी के माध्यम से शबरी और कांगेर नदियों पर कयाकिंग और बांस राफ्टिंग की पेशकश करते हैं। यह उद्यम समुदाय के लिए स्थिर आय प्रदान करता है, जिसमें लाभ को प्रतीक्षा क्षेत्रों और शौचालयों जैसी पर्यटक सुविधाओं में फिर से निवेश किया जाता है।
पर्यटन और वन विभाग ने कथित तौर पर 40 धुरवा जनजाति परिवारों के युवाओं को कयाकिंग, बांस राफ्टिंग और ट्रैकिंग जैसी गतिविधियों में प्रशिक्षित किया है। होमस्टे पर्यटकों को उनके रीति-रिवाजों, शिल्प और त्योहारों सहित पारंपरिक आदिवासी जीवन का अनुभव करने का मौका देते हैं। धुड़मारस को अन्य गांवों के लिए एक आदर्श के रूप में स्थापित करते हुए, राज्य सरकार इन पहलों को नागलसर और नेतानार तक विस्तारित कर रही है।
यहां के धुर्वा समुदाय के युवा और होमस्टे संचालक मानसिंह बघेल ने कहा, "होमस्टे से कई लोगों को रोजगार मिला है और कुछ युवा आगंतुकों को खाना पकाने, कैंपिंग, ट्रैकिंग और पक्षी देखने के लिए ले जा रहे हैं।"
बांस की बेड़ियाँ, बांस के कूड़ेदान, मिट्टी के घर और पत्तों की थालियों जैसे स्थानीय संसाधनों का उपयोग प्रकृति को संरक्षित करते हुए टिकाऊ पर्यटन को बढ़ावा देता है। बेंगलुरु से आई एक पर्यटक विद्या ने बताया, "धुरवा समुदाय के साथ समय बिताना एक अद्भुत अनुभव रहा। मुझे एक स्थानीय होमस्टे में ठहराया गया, जहां मैंने मित्रवत लोगों के साथ स्थानीय व्यंजनों का आनंद लिया।" धुड़मारस का कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान, जो धुर्वा और मारिया जनजातियों का निवास स्थान है, से निकटता के कारण यहां आने वाले पर्यटकों को स्थानीय रीति-रिवाजों और आतिथ्य का अनुभव करने का अवसर मिलता है।
पर्यटन ने धुड़मारस गांव के लोगों के जीवन को कई तरह से बदल दिया है, नक्सल आंदोलन के विकल्प प्रदान किए हैं और पलायन की समस्याओं को हल किया है।
स्वयं सहायता समूह की सदस्य मंगलदेवी बघेल ने कहा, "पहले हमें गांव में रोजगार नहीं मिल रहा था, जिसके कारण हमें दूसरी जगह पलायन करना पड़ता था। अब हम स्थानीय स्तर पर काम करके एक अच्छी जिंदगी जी रहे हैं।" कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान के निदेशक चूड़ामणि सिंह ने शौर्य पथ को बताया कि उद्यान से सटे गांव में 40 घर हैं, जिनमें से प्रत्येक परिवार का एक सदस्य बांस राफ्टिंग और कयाकिंग में भाग लेता है, जो पर्यटकों को आकर्षित करता है।
गांव में एक इको विलेज डेवलपमेंट कमेटी है, जिसके सदस्य रोलिंग फंड के तहत वन विभाग द्वारा दिए गए ऋण लेते हैं ताकि कयाकिंग और राफ्टिंग के लिए उपकरण खरीद सकें, और अपने पर्यटन लाभ से ऋण चुकाते हैं। सिंह ने बताया कि वे हर महीने 3-4 लाख रुपये कमाते हैं, जिसमें से 50% कमाई गांव के विकास पर खर्च की जाती है और बाकी सदस्यों में बराबर बांटी जाती है। उन्होंने बताया कि राफ्टिंग और कयाकिंग गतिविधियां कांगेर धारा नदी पर आयोजित की जाती हैं, जो पार्क के बफर जोन से होकर बहती है।
"धुड़मारस, धुर्वा जनजाति के स्वामित्व वाला एक आदिवासी गांव है, जो एक इको-टूरिज्म गंतव्य है, जिसमें धुर्वाडेरा होमस्टे की सुविधा है, जहां मेहमान पारंपरिक मिट्टी और बांस के घरों और आदिवासी व्यंजनों का अनुभव करते हैं।
इको-डेवलपमेंट कमेटी 40 गांव के प्रत्येक घर से एक, 35 लोगों को इको-टूरिज्म गतिविधियों में शामिल करती है, जो द्वितीयक आजीविका प्रदान करती है। बांस राफ्टिंग, कयाकिंग और ट्रैकिंग जैसी साहसिक गतिविधियों से आय होती है, जिसका कुछ हिस्सा समुदाय के साथ साझा किया जाता है।
आदिवासी व्यंजन बेचने वाले खाद्य स्टॉल और साल के पत्तों की थाली बनाने जैसी पहलों से अतिरिक्त रोजगार पैदा होता है। 'देखो बस्तर' जैसे कार्यक्रम पर्यटन को बढ़ावा देते हैं, स्थानीय व्यवसायों का समर्थन करते हैं और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करते हैं," निदेशक ने कहा। इस इकोटूरिज्म गांव की आबादी 215 है। वार्षिक पर्यटक प्रवाह के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, घरेलू पर्यटकों की संख्या 8,737 दर्ज की गई, जबकि अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों की संख्या 16 थी।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने पर्यटन और वन विभाग, बस्तर प्रशासन और कांगेर वैली नेशनल पार्क के अधिकारियों की प्रशंसा की। उन्होंने पारंपरिक ज्ञान और संसाधनों को संरक्षित करने में स्थानीय लोगों के प्रयासों की सराहना की ।
रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज दंतेवाड़ा में बस्तर की आराध्य देवी मां दंतेश्वरी की पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। इस दौरान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या देवी साय और परिवार के अन्य सदस्य उपस्थित थे। इस अवसर पर विधायक चैतराम अटामी, राज्य महिला आयोग की सदस्य श्रीमती ओजस्वी मण्डावी तथा अन्य जनप्रतिनिधियों सहित मुख्यमंत्री के सचिव राहुल भगत, कमिश्नर बस्तर डोमन सिंह सहित अन्य अधिकारीगण भी उपस्थित थे।
रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज "एक पेड़ मां के नाम" अभियान के तहत सीआरपीएफ बस्तरिया बटालियन 241 वाहिनी के परिसर में नीम का पौधा रोपा। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि यह अभियान पर्यावरण संरक्षण की दिशा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का अनूठा प्रयास है, जिसमें सभी लोग स्वस्फूर्त अपनी भागीदारी दे रहे हैं। श्री साय ने सभी से एक पौधा लगाने और उसकी देखभाल करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि पौधरोपण से हम न केवल पर्यावरण को सुरक्षित करते हैं, बल्कि भावी पीढ़ियों को स्वच्छ हवा और स्वस्थ वातावरण का उपहार देते हैं।
उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री साय बस्तर विकास प्राधिकरण की बैठक के बाद अचानक सीआरपीएफ बस्तरिया बटालियन के कैंप पहुंचे थे। वृक्षारोपण के दौरान सीआरपीएफ बस्तरिया बटालियन के सुरक्षा बल के जवान उपस्थित थे।
जगदलपुर/ शौर्यपथ/
नरेश देवांगन
आदिवासी विकास विभाग के तहत जिले में संचालित आश्रमों एवं छात्रावासों के अधीक्षकों की बैठक जिले के कलेक्टर समय समय पे लेकर उपलब्ध सुविधाओं तथा आधारभूत संसाधनों की समीक्षा करते रहते है । जहा आश्रम एवं छात्रावासों में निवासरत बच्चों को बेहतर वातावरण देने तथा परिसरों में आवश्यक सुविधाओं व सुरक्षात्मक उपाय सुनिश्चित करने हेतु हरसंभव प्रयास करने के निर्देश दिए जाते है । साथ ही यह भी कहा जाता है कि इसमें किसी प्रकार की कोताही अथवा लापरवाही किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सात ही अधीक्षकों को बिना अनुमति के छात्रावास नहीं छोड़ने, प्रतिदिन भोजन की गुणवत्ता परखने, बच्चों का नियमित स्वास्थ्य परीक्षण कराने व सुरक्षा व्यवस्था की मॉनिटरिंग करने के भी सख्त निर्देश दिए गए है । बावजूद इसके भी सुकमा जिले के कोंटा ब्लॉक के बालक आश्रम पेदाकुरती के अधीक्षक उच्चधिकारी के निर्देशों का पालन करते नहीं दिख रहे है। अधीक्षक के द्वारा प्रतिदिन भोजन की गुणवत्ता पे ध्यान नहीं दिया जा रहा है और ना ही बच्चों का नियमित स्वास्थ्य परीक्षण करवाया जाता है बच्चों कि माने तो मेनू चार्ट के हिसाब से भोजन नहीं दिया जा रहा है। आश्रम में रखे बच्चों के लिए दवाईयों में कई दवाई एक्सपायर हो चुकी है। बच्चों से पूछने से बताया कि जब भी कोई बच्चा बीमार होता है तो दवाई अधीक्षक के द्वारा इसी डब्बे से निकाल के देते है जबकि डब्बे में रखी दवाई Chloroquine phosphate tablets EXP. 10/24 है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि अधीक्षक दवाई को देने से पहले उसकी अंतिम तिथि कि जाँच नहीं करते? क्यों एक्सपायर हो चुकी दवाई को रख बच्चों को दिया जा रहा है? एक्सपायर हुई दवाई को खाने से होने वाली नुकसान का भरपाई कौन करेगा? क्यूंकि जानकारों का कहना है कि एक्सपायर हो चुकी दवाओं में बैक्टीरिया के बढ़ने का जोखिम होता है और कम शक्तिशाली एंटीबायोटिक्स संक्रमण का इलाज करने में विफल हो सकते हैं, जिससे अधिक गंभीर बीमारियाँ और एंटीबायोटिक प्रतिरोध हो सकता है। एक बार समाप्ति तिथि बीत जाने के बाद इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि दवा सुरक्षित और प्रभावी होगी।
जबकि जिम्मेदारों के द्वारा समय समय पे आश्रम / छात्रावास कि निरिक्षण करने कि बात भी कही जाती है। जिम्मेदार अगर अपनी जिम्मेदारी पूरी ईमानदारी से निभा रहे है तो इतनी बड़ी लापरवाही कैसे हो रही है ?
जगदलपुर / शौर्यपथ / शहर के आमागुड़ा चौक में मंगलवार की शाम को एक तेज रफ्तार ट्रक ने बाइक सवार दंपति को अपने चपेट में ले लिया, इस हादसे में जहाँ पति पत्नी की मौके पर ही मौत हो गई, वही बच्चे ने उपचार के दौरान दम तोड़ दिया, घटना के बाद पुलिस शव को पीएम के लिए मेकाज भिजवा दिया गया है।
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार जगदलपुर की रहने वाली अनिता ने कुछ वर्ष पहले ओड़िसा निवासी गुरुबंधु से शादी की थी, जिसके बाद इनका 8 साल का बच्चा त्रिनाथ भी था, मंगलवार को दंपति बाइक में जगदलपुर में रहने वाले रिश्तेदार के घर नयामुण्डा आये हुए थे, जिसके बाद पूरी फैमिली हाइवे में स्थित बस्तर हाट घूमने के लिए गए हुए थे, चुकी सभी आगे पीछे आ रहे थे, कुछ लोग ऑटो में आये, तो कुछ लोग लिफ्ट लेकर आमागुड़ा चौक में आकर अपने बाकी के रिश्तेदारों का इंतजार कर रहे थे, दंपति जैसे ही आमागुड़ा चौक के पास पहुँच कर जगदलपुर की ओर मुड़ रहे थे कि आमागुड़ा चौक के पास बस्तर की ओर से आ रही एक तेज रफ्तार ट्रक ने बाइक सवार दंपति को अपने चपेट में ले लिया, इस हादसे में जहाँ पति पत्नी की मौके पर ही मौत हो गई, वही बच्चे को गंभीर हालत में अस्पताल भिजवाया गया, घटना के तत्काल बाद कोतवाली पुलिस से लेकर यातायात विभाग के आला अधिकारी मौके पर आ पहुँचे, वही घटना के तत्काल बाद मौके पर लोगों की भीड़ लग गई, पुलिस ने शवों को सड़क किनारे रख कर उसे पीएम के लिए अस्पताल भिजवाया, वही घायल बच्चे को उपचार के लिए अस्पताल भिजवाया गया, जहाँ उपचार के दौरान उसकी भी मौत हो गई।
जगदलपुर, शौर्यपथ। बस्तर लोकसभा क्षेत्र से सांसद महेश कश्यप ने लोक आस्था के प्रतीक चार दिवसीय महापर्व छठ के अवसर पर समस्त प्रदेशवासियों व क्षेत्रवासियों को बधाई एवं शुभकामनाएं दी है। इसी के साथ ही भगवान भास्कर से राज्य व क्षेत्र की प्रगति, सुख, समृद्धि, शांति और सौहार्द्र के लिये प्रार्थना भी की है।
सांसद श्री कश्यप ने कहा कि छठ पूजा का पर्व सूर्य देवता की उपासना और प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करने का महान अवसर है। सांसद ने कहा कि यह पर्व प्रकृति और मानव के बीच के प्रेम को भी दर्शाता है। उन्होंने कहा कि सूर्य देवता की आराधना करने से हम जीवन के हर पहलू में सकारात्मकता और नई ऊर्जा का अनुभव करते हैं। वहीं श्री कश्यप ने आगे कहा कि छठ पूजा का महत्व सिर्फ धार्मिक आस्था में नहीं, बल्कि हमारे समाज की संस्कृति, एकता और सौहार्द में भी निहित है। यह पर्व हमें एकजुट करता है और हमें अपने कर्तव्यों और जिम्मेदारियों को सही तरीके से निभाने की प्रेरणा देता है। भगवान भास्कर एवं छठी मइया सबकी मनोकामना पूर्ण करें इसकी भी मुख्यमंत्री ने कामना की है।
*नहाय खाय से प्रारंभ हुआ छठ महापर्व*: छठ पूजा के पहले दिन व्रती अपना व्रत तोड़ने से पहले भगवान सूर्य की पूजा करने के लिए जल्दी उठते हैं. इस दिन से चार दिवसीय उपवास की अवधि शुरू होती है. सभी स्नान करने के बाद नए कपड़े पहनते हैं, व्रत रखते हैं और सूर्य देव के लिए प्रसाद के रूप में चना दाल और कद्दू चावल तैयार करते हैं।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
