August 14, 2026
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    बस्तर

    बस्तर (1117)

    पार्षद व पार्षद का चचेरा भाई की पता साजी जारी

    कोंडागांव /शौर्यपथ/

    हिमालया हेल्थ केयर कंपनी का सुपरवाईजर प्रार्थी पंकज सेवलानी ने दिनांक 09.06.22 को थाना कोण्डागांव आकर रिपोर्ट दर्ज कराया कि वो सीएमएचओ आफिस में मेडिकल उपकरण सप्लाई हेतु कंपनी का टेंडर डालने कोण्डागांव आया था दिनांक 08.06.22 को पोस्ट ऑफिस गया था वहां शुभम संचेती व शीतला पारा वार्ड के पार्षद अंकुश जैन के साथ आया और प्रार्थी पंकज सेवलानी को पोस्ट ऑफिस से जबरदस्ती कार में बैठाकर सीएमएचओ ऑफिस कोण्डागांव ले गये।
    सीएमएचओ ऑफिस कोण्डागांव जाकर आरोपी शुभम आवक जावक टेबल में प्रार्थी के टेंडर वाले डाक का लिफाफा उठाकर अपने पास रख लिया और प्रार्थी से डाक वापसी संबधी दस्तावेज को छीन लिया। बाद आरोपी शुभम एवं उसके साथियों ने प्रार्थी को गाली गलौच करते हुए जबरदस्ती कार में बैठाकर ले गये और कोण्डागांव के आसपास घुमाने लगे। कुछ देर बाद आरोपियो ने प्रार्थी को मोटर सायकल में आरोपी मानकू बघेल के साथ भेज दिया जो प्रार्थी पंकज सेवलानी को टेंडर के टाइ्र्रम 03.00 बजे खत्म होने के बाद प्रार्थी पंकज सेवलानी को हाईवे में छोड़ दिए।

    इस तरह टेंडर फार्म एवं डिमांड ड्राफट लूटने एवं प्रार्थी के अपहरण की रिर्पोट पर दिनांक 10.06.22 को आरोपियो के विरूद्व थाना कोण्डागांव में अपराध क्रमांक 222/22, धारा 294,506,365,392,409,120बी भादवि. का अपराध कायम कर विवेचना में लिया गया। टेंडर प्रक्रिया के दौरान लूट एवं अपहरण की घटना को गंभिरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक कोण्डागांव श्री दिव्यांग पटेल (भा.पु.से.) के आदेश से तत्काल एडिशनल एसपी श्री राहुल देव शर्मा व एसडीओपी श्री निमितेश िंसह के नेतृत्व में आरोपियो की गिरफतारी हेतु अलग अलग टीम गठित कर लगातार आरोपियो की पता साजी की जा रही थ्ी जो दिनांक 12.06.22 को आरोपी मानकू बघेल पिता मोहन लाल, उम्र 35 वर्ष निवासी डीएनके कॉलोनी कोण्डागांव को गिरफतार किया गया है, गिरफतार आरोपी मानकू से पूछताछ की जा रही है एवं अन्य आरोपियो की पता तलाश व विवेचना जारी है। संपूर्ण कार्यवाही में थाना प्रभारी कोण्डागांव निरीक्षक भीम सेन यादव, उप निरीक्षक रवि पाण्डेय, मुकेश शर्मा, कैलाश केशरवानी, आनंद सोनी, नमिता टेकाम, प्रधान आरक्षक लूमन भंडारी, ऋतु राज सिंह, हेमु साहू, नरेन्द्र देहारी, रामचंद्र मरकाम, आरक्षक तोमेष ठाकुर की सराहनीय भूमिका रही।

       कोंडागांव / शौर्यपथ /

    शासकीय आदर्श आवासीय कन्या महाविद्यालय कोण्डागांव के प्राचार्य डॉ सी आर पटेल जी के निर्देशानुसार एवं वनस्पतिशास्त्र विभागाध्यक्ष महेन्दर सिंह के नेतृत्व में महाविद्यालय के समस्त स्टाफ को कोंडागांव के सरगी पाल में स्थित आमचो सरगी प्रकृति हर्र में पर्यावरण पखवाड़ा के तहत दिनांक 8 जून 2022 को एक दिवसीय भ्रमण कराया गया। जिसमें विभिन्न प्रकार के औषधीय पौधों के साथ साथ विशेष रुप से साल वृक्ष के महत्व एवं  संरक्षण  की जानकारी दी गई  । महेन्दर सिंह ने कहा कि शासन की महत्वाकांक्षी योजनाएं नरवा, गरवा, घुरवा, बारी एवं वन्य संरक्षण जैसी अनेक योजनाएं संचालित की जा रही हैं जिसके लिए विभिन्न पौधों का संरक्षण अति आवश्यक है । प्राणीशास्त्र विभागाध्यक्ष सुश्री शारदा मरकाम का कहना है कि वन संरक्षण से ही वन्य जीवों का संरक्षण संभव है इसी को ध्यान में रखते हुए समय-समय पर इस तरह के आयोजन किए जाने चाहिए । इस भ्रमण में महाविद्यालय के समस्त सहायक प्राध्यापक गण जिनमें  सुनील देव जोशी, सुश्री सरिता तारम,  उमेश नेताम, सुश्री अनिक्षा अंचल एवं डॉ. अरुण कुमार दिवाकर एवं साथ ही साथ वन विभाग के सदस्यों का विशेष सहयोग रहा ।

    टेंडर प्रक्रिया जारी थी कायार्लय में फरार युवक एक अन्य ठेकेदार का अपरहण कर हुआ फरार

    दीपक वैष्णव की रिपोर्ट

    कोण्डागांव । शौर्यपथ । स्थानीय सीएमएचओ कायार्लय से अपहरण व सरकारी दस्तावेज लेकर एक युवक के फरार होने का मामला सामने आया है। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक सीएमएचओ कायार्लय में एक टेंडर की प्रक्रिया चल के लिए आवेदन आदि जमा करने की प्रक्रिया चल रही थी। इसी बीच एक युवक आया कायार्लय में एक शाखा में रखे कुछ फाईलों के साथ ही टेंडर भरने आए एक अन्य ठेकेदार को अपने साथ लेकर देखते ही देखते नौ-दो ग्यारह हो गया। जिसकी सूचना पुलिस को मिलने पर मौके पर पहुंची पुलिस ने शुक्रवार को देरशाम तक सीएमएचओ कायार्लय में दस्तावेज व विडियो फुटेज छानते रहे। वही पुलिस के बड़े अधिकारी भी इस मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी युवक सुभम संचेती निवासी कोंडागांव की खोजबीन में लगे हुए है। बातया जा रहा है कि, एक अन्य टेंडर भरने आए जिस ठेकेदार का अपरहण कर युवक फरार हुआ था वह मिल चुका है, लेकिन आरोपी युवक की पतासाजी में पुलिस की टीम जुटी हुई है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक युवक पर लूट व अपहरण का मामला दर्ज किया गया है। शायद जिले में यह अपने तरह का पहला मामला होगा, जिसमें दिनदाहाड़े इस तरह की घटना को अंजाम दिया गया है। अब देखना होगा कि, आरोपी युवक पुलिस के हत्थे कब चढ़ पाता है। तो वही कोतवाली पुलिस इस मामले में कुछ भी खुलासा करने से फिलहाॅल बचती नजर आई।

    कोण्डागांव / शौर्यपथ /

    नगरपालिका के द्वारा लाखों की लागत से बनवाए जा रहे घड़ी चैक का निमार्ण इन दिनों ठंडे बस्ते में जाता दिख रहा है। जबकि पखवाड़ेभर पहले सीएम के दौरे के दौरान इसका निमार्ण कार्य दिनरात एककर चल रहा था। बावजूद इसके घड़ी चैक का निमार्ण अधूरा रह गया और शुभारंभ सीएम के द्वारा नहीं हो पाया, जबकि नगर में यह चर्चा का विषय रहा कि, इसका लोकापर्ण अब सीएम ही करेगें। दिनरात की मेहनत के बाद भी काम अधूरा रह गया, तो वही इस दौरान निमार्ण कार्य की गुणवक्ता को लेकर भी लोगों के अपने-अपने विचार रहे। दरअसल कांक्रीट से निमार्ण कार्य होने के बाद भी इसमें क्यूरींग नहीं की जा रही थी, जिसे यहॉ से गुजरने वाला हर नागरिक ने देखा तो है। लेकिन अब देखना होगा कि, लाखों की लागत और बीन क्यूरिंग के बनने वाले इस घड़ी की स्थिति आने वाले दिनों में कैसी होती है। जानकारी के मुताबिक इसके निमार्ण के लिए नगर पालिका के अघोसंरचना मद से 15 व डीएमएफटी से 46 लाख की स्वीकृति दी गई है। जिसमें घड़ी चैराहे के आसपास फुलवारी भी किया जाना भी शामिल है।

    ऐसे में कैसे लिखी जाएगी गौरवगाथा-

    एक ओर तो हम नगर को शिल्पसिटी के नाम भी पुकारते है, लेकिन हमारे ही नगर में निमार्ण हो रहे चैक-चैराहों सहित अन्य सावर्जनिक स्थलों पर शिल्पकला देखने को ही नहीं मिल रही। जबकि यहॉ से बने विभिन्न शिल्पकला कृति देश-विदेशों में रखे जा रहे है। ऐसा ही कुछ हाल बाधा तालाब परिसर में भी देखने को मिल रहा है, जहॉ लाखो खर्च करने के बाद भी एक भी स्थानीय कलाकृति नजर नहीं आ रही और ऐसा ही कुछ घड़ी चैक पर भी फिलहॉल देखने को मिल रहा है।

    0- कुछ आयटम बाहार से आ रहे है, जिसके चलते काम थोड़ा प्रभावित हुआ है। लेकिन कुछ ही दिनों में लोगों को घंड़ी चैक की खूबसूरती देखने को मिल जाएगी।

    (संजय मारकंडेर्, इंजी. नपा)

    दंतेवाड़ा /शौर्यपथ/

    दंतेवाड़ा का नाम सुनकर लोगों के ज़हन में नक्सलवाद, आर्थिक सामाजिक, पिछड़ापन, घने जंगल दुर्गम पहाड़ी एवं नदी-नालों में बसे गांव आ जाते हैं। परंतु प्रकृति ने इन्ही घनी जंगलों की गोद में महुआ का पेड़ वरदान स्वरूप दिया है। महुआ विशेष रूप से जिले के ग्रामीण जीवन का सांस्कृतिक एवं आर्थिक आधार है। यह न केवल दैनिक जीवन में भोजन और पेय के लिए उपयोग किया जाता है, बल्कि इसे बेचकर आर्थिक आय भी प्राप्त किया जाता है। जंगलों से बीनकर घरों में रखा हुआ महुआ एक संपत्ति के समान होता है, जिसे कभी भी नगदी में बदला जा सकता है। वर्षों से ग्रामीण महुआ संग्रहित कर कम दामों में व्यापारियों को बेच देते है

    व्यापार कर कमाएं 1 लाख 35 हजार रुपए

    प्रशासन की पहल से आदिवासी महिलाओं के जीवन मे आ रहा बदलाव
    व्यापार कर कमाएं 1 लाख 35 हजार रुपए

    अब शासन की योजनाओं एवं जिला प्रशासन की पहल से जिले महिलाओं का जन-जीवन बदल रहा है। जिला प्रशासन के सहयोग एवं मार्गदर्शन में क्षेत्र की किशोरी एवं महिलाएं नए-नए सफल प्रयोग कर रोजगार सृजन करने का काम कर रहें है। ऐसा ही नया और बेहतर कार्य दंतेवाड़ा वन परिक्षेत्र केन्द्रीय काष्ठागार दंतेवाड़ा के प्रसंस्करण केन्द्र व प्रशिक्षण केन्द्र में महुआ के स्वादिष्ट- हलवा, चंक्स, जैम, जेली, कुकीज, बनाकर व्यापार कर रही है। वर्तमान में 30 महिलाएं कार्य कर रही हैं जिनके द्वारा व्यापार कर 1,35,000 रुपए का लाभ कमा चुकी है।


    महिलाओं को मिल रहा महुआ उत्पाद बनाने का प्रशिक्षण

    महिलाओं को मिल रहा महुआ उत्पाद बनाने का प्रशिक्षण

    बाजार में ’महुआ’ के हलवा, चंक्स, जैम, जेली, कुकीज के ज्यादा मांग एवं स्वास्थ्य वर्धक ( कैलोरी, प्रोटीन, फैट, शुगर, आयरन एव विटामिन सी ) होने के कारण जिला प्रशासन द्वारा डी०एम०एफ० फण्ड से ’महुआ’ से खाद्य पदार्थों के हेतु प्रसंस्करण केन्द्र व प्रशिक्षण केन्द्र की स्थापना की गई है। इन इकाइयों के अधिक उत्पादन के लिए मशीनों की सुविधा दी गई है। वन विभाग के द्वारा इन महिलाओं को प्रशिक्षित कर महुआ को प्रसंस्करण कर इनके पाँच उत्पादों (हलवा, चंक्स, जेम, जेली एवं लड्डू, कुकीज) बना रहे है।
    कुपोषण को हराने में मददगार सिद्ध हो रहा महुवा से बना उत्पाद
    वर्तमान में प्रतिदिन प्रति उत्पाद 20 कि०ग्रा० हैं. इस तरह प्रतिदिन 100 किग्रा तक उत्पादों का निर्माण किया जा रहा है। इन उत्पादों के पैकेजिंग मटेरियल प्रारंभिक स्तर देश के विभिन्न शहरों ( मुंबई, हैदराबाद, रायपुर ) से मंगाए जा रहे है। इकाई को ISO 22000 तथा FSSAI सर्टिफिकेशन की प्राप्ति हो चुकी है, एवं इन सारे उत्पादों का लैब जाँच NABl Accreditateda प्रयोगशालाओं से कराई जा चुकी है, जांच में अच्छे परिणाम प्राप्त हुए है। इन योजना का लाभ लेकर महिलाएं ग्रामीण अंचल से साफ महुवा खरीद कर, उनके उत्पाद को बाजार में बेचकर अपना व्यवसाय कर रही है। जिला प्रशासन के सहयोग से इन उत्पाद को एनएमडीसी, सीआरपीएफ कैंटीन, आंगनबाड़ी केंद्रों एवं मुख्यमंत्री सुपोषण योजना में विक्रय किया जा रहा है। इससे महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त होकर आत्मनिर्भर बन रही हैं। एवं जिले के कुपोषण दर में कमी में महुवा से बने उत्पाद मील का पत्थर साबित हो रही है।

    कोण्डागांव / शौर्यपथ /

    कहते हैं कि मनुष्य की आंखें भगवान के द्वारा मनुष्यों को दिये गये सबसे अनमोल उपहारों में से एक है। आंखों से ही हम इस दुनिया का अनुभव कर पाते हैं परंतु कुछ लोग को जन्म से या किसी दुर्घटनावश अपनी आंखों से इस दुनिया को देखने में असक्षम हो जाते हैं। ऐसे में उनकी जिंदगीयों में दोबारा रौशनी लाने नेत्रदान अभियान चलाया जाता है। इन अभियानों से प्रेरित होकर बड़ेराजपुर विकासखण्ड के ग्राम सलना निवासी शोभाराम पटेल ने भी कुछ वर्षों पहले नेत्रदान का संकल्प लेते हुए अपने परिवारजनों को अपने निर्णय के संबंध में बताया था।
    शोभाराम की 29 मई को निधन होने पर परिवार की सूचना पर नेत्रदान संग्रहण केन्द्र कोण्डागांव द्वारा दल गठित कर त्वरित कार्यवाही करते हुए रात्रि 11.00 बजे सलना के दानीपारा स्थित उनके निवास पहुंचे। जहां नेत्र सहायक अधिकारी अनिल बैध, सीएचसी विश्रामपुरी के डॉ. दुर्गा दास, डीपीएम कमल गिलहर, पीएचसी चिपावण्ड के अशोक कश्यप, पीएचसी सलना के महावीर मरकाम सहित स्टॉफ नर्स नंदा शील एवं आरती महानंद द्वारा नेत्रदान हेतु आवश्यक कार्यवाही की गई। जिसके पश्चात् संग्रहित नेत्र को रात्रि 11.30 बजे ही पं0 जवाहर लाल नेहरू मेमोरियल मेडिकल कॉलेज रायपुर स्थित नेत्र बैंक में भेज दिया गया। जहां से नेत्रहीनों को नया जीवन देने हेतु आंखों को लगाया जायेगा।
    इसके संबंध में नेत्र सहायक अधिकारी के पद पर जिला बस्तर में कार्यरत् पुत्र दयानंद पटेल ने बताया कि नेत्रदान अभियान के संबंध में मेरे पिता द्वारा मुझसे जानकारी पाकर जीवित रहते हुए नेत्रदान की घोषणा की थी। उनकी इच्छा का सम्मान करते हुए पिता का वृद्धावस्था के कारण निधन होने पर नेत्रदान संग्रहण केन्द्र कोण्डागांव को सूचना दी गई थी। जिसपर नेत्रदान दल द्वारा रात को ही घर पहुंच नेत्रदान हेतु कॉर्निया को संग्रहित कर लिया गया था। इसके आगे दयानंद ने कहा कि उनके पिता ने अपने जाने के बाद भी अंधेरी जिंदगीयों में रौशनी भर कर उन्हें नया जीवन देने का कार्य किया है। जिसपर उन्हें गर्व है। उन्होंने अन्य लोगों को भी नेत्रदान करने की अपील की।
    इसके संबंध में नेत्र सहायक अधिकारी एवं सहायक नोडल अधिकारी अनिल बैध ने बताया कि कोण्डागांव में नेत्रदान संग्रहण केन्द्र स्थापित किया गया है। जिसके पश्चात् यह पहला अवसर था जब सीएचएचओ डॉ0 टीआर कुंवर, सिविल सर्जन डॉ0 संजय बसाख एवं नेत्र विशेषज्ञ डॉ कल्पना मीणा, अंधत्व निवारण नोडल डॉ0 हरेन्द्र बघेल के मार्गदर्शन में जिला अस्पताल द्वारा नेत्रदान की प्रक्रिया को सफलतापूर्वक अंजाम देते हुए राज्य के एकमात्र शासकीय नेत्र बैंक रायपुर भेजा जा सका है। नेत्रदान को महादान की उपाधि दी जाती है क्योंकि इससे दूसरों को जीने की उम्मीद प्राप्त होती है। उन्होंने लोगों को नेत्रदान के प्रति प्रेरित करते हुए बताया कि व्यक्ति की मृत्यु उपरांत 06 घण्टे तक आंखों को दान किया जा सकता है। नेत्रदान में केवल 10 से 15 मिनट का वक्त लगता है एवं इससे शरीर को किसी प्रकार की हानि नही होती न ही किसी सामाजिक मान्यता को प्रभाव पड़ता है। बल्कि एक व्यक्ति के नेत्रदान से दो लोगों की जिंदगी को रौशनी एवं उनके परिवारों को खुशियां प्राप्त होती है।

    उत्तर बस्तर कांकेर / शौर्यपथ /

    प्रदेश के मुख्यमंत्री  भूपेश बघेल ने बस्तर संभाग में भेट-मुलाकात के दौरान 03 जून को कांकेर जिले के भानुप्रतापपुर पहुंचे थे। समाज प्रमुखों से भेंट-मुलाकात के दौरान तुडग़े निवासी मोतिराम मैतिल ने मुख्यमंत्री से भेंट किया और अपनी समस्या बताया। मुख्यमंत्री श्री बघेल ने कलेक्टर  चन्दन कुमार को मोतिराम की समस्या को निराकरण कराने के लिए निर्देशित किया। कलेक्टर श्री चन्दन कुमार द्वारा समाज कल्याण विभाग के उप संचालक को मोतिराम की समस्या का निराकरण कराने के लिए निर्देश दिया गया।

    निर्देशन के परिपालन में त्वरित कार्यवाही करते हुए समाज कल्याण विभाग के कर्मचारियों ने ग्राम तुडग़े पहुंचकर मोतिराम को फिजिकल रिफरल रिहैबिलिटेशन सेंटर माना रायपुर कृत्रिम अंग पैर का नाप दिलाने के लिए अपने साथ ले गये तथा कृत्रिम अंग लगाने के लिए उनके पैर का नाप ली गई, तत्पश्चात उनके गांव में उन्हें वापस उनके घर पहुंचा दिया गया है। एक माह पश्चात कृत्रिम पैर तैयार हो जायेगा तब उन्हें पुन: रायपुर ले जाकर उनके पैर कृत्रिम अंग लगवाया जायेगा।

    दंतेवाड़ा/शौर्यपथ/

    दंतेवाड़ा में भी छत्तीसगढ़ सरकार की जनहितैषी नीतियों तथा यहां की कला और संस्कृति के संरक्षण व संवर्धन का ही सार्थक परिणाम है कि लोगों में आज उत्साह दिखायी दे रहा है। खेती-किसानी से लेकर परंपरागत व्यवसाय को बल मिला है। आधुनिकता के इस दौर में विलुप्त होती टेराकोटा कला को फिर से छत्तीसगढ़ में जीवंत हो उठी है। कुम्हारी के परम्परागत व्यवसाय से दूर हो रहे कुम्हार फिर से अपने हुनर को तराशने और अपने पुरखों के व्यवसाय को आगे बढ़ाने में जुट गए है। मुख्यमंत्री की मंशा के अनुरूप माटी कला बोर्ड ने कुम्हारों को विभिन्न प्रकार की सहायता देकर उन्हें उनके परम्परागत व्यवसाय से जोडऩे में जुटा हैं।

    कुम्हाररास निवासी जम्मू धर नाग का कहना है कि शुरुआत दौर में ये सिर्फ मटका बनाने का कार्य करते थे।पहले इन्हें बहुत सारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था हांडी निर्माण से उतना आय नही मिल पाता था जिससे घर की आजीविका चल बनाने लगे। जिसे जम्मू धर ने तैयार उत्पाद की बिक्री अपने राज्य के साथ अन्य राज्यों में भी बिक्री करने लगे। उन्होंने बताया कि आज से 3 साल पहले कुछ भी नहीं था लेकिन अब अच्छी आमदनी प्राप्त होने से अपने बच्चों की शिक्षा दिला रहे है। आर्थिक स्थिति सुधरते ही बाइक खरीदी। और इन 3 सालों में इन्हें 5-7 लाख की आमदनी हुई जिससे अब वे बेहतर जिंदगी जी रहे है। माटी कला केन्द्र बनने से जिले के कुम्हारों के द्वारा परंपरागत तरीके से मिट्टी के बर्तन एवं अन्य सजावटी सामान अपने घरों पर बनाते थे। माटी कला केन्द्र बनने से उक्त ग्रामीणों को मशीनों के द्वारा नई तकनीक एवं कुशल कारीगरों के द्वारा प्रशिक्षण देकर बेहतर सामान बनाने से जीवन स्तर में सुधार आ रहा है। उक्त बर्तन को विक्रय के लिए भी बाजार उपलब्ध कराने हेतु जिला प्रशासन के देखरेख में सहयोग प्रदान किया जायेगा। इस केन्द्र से लगभग 100 से अधिक परिवारों को रोजगार का सीधा अवसर मिलेगा तथा अपनी कलाओं का प्रदर्शन कर अधिक लाभ अर्जित कर सकेंगें।

    उत्तर बस्तर कांकेर /शौर्यपथ /

    इंद्रावती नदी मे डूबने, मधुमक्खी और सर्प काटने से मृत्यु होने के प्रकरण में कलेक्टर चन्दन कुमार द्वारा राजस्व पुस्तक परिपत्र खण्ड 6-4 में दिये गये प्रदत्त अधिकारों का प्रयोग करते हुए मृतक के आश्रित के लिए चार-चार लाख रूपये के मान से बारह लाख रूपये की सहायता राशि स्वीकृत किया गया है।

    कांकेर तहसील के ग्राम किरगोली निवासी 47 वर्षीय ललिता पूर्राम की चित्रकोट जल प्रपात इंद्रावती नदी में डूबने से मृत्यु होने के प्रकरण में उनके निकटतम वारिस दिलीप के लिए चार लाख रूपये, सरोना तहसील के ग्राम बुदेली निवासी 88 वर्षीय केजऊ राम टेकाम को मधुमक्खी काटने से मृत्यु होने के प्रकरण में उनके निकटतम वारिस ललित, जैतराम, उर्मिला और अजनो के लिए चार लाख रूपये तथा नरहरपुर तहसील के ग्राम अमोड़ा निवासी 54 वर्षीय रमेसिंह कुंजाम को सर्प काटने से मृत्यु होने के प्रकरण में उनकी पत्नी  सामबाई के लिए चार लाख रूपये की आर्थिक सहायता राशि स्वीकृत किया गया है। स्वीकृत सहायता राशि का भुगतान संबधित क्षेत्र के तहसीलदार द्वारा हितग्राही के बैंक खाते में डायरेक्ट बैंक ट्रांसफर के माध्यम से किया जायेगा।

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